Devkrit Laxmi Stotra | देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र

Devkrit Laxmi Stotra:देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र: महात्मा पुष्कर ने परशुराम को बताया कि भगवान इंद्र, देवी लक्ष्मी को राज्यलक्ष्मी के रूप में हमेशा के लिए इंद्रलोक में बनाए रखना चाहते हैं। इंद्र ने देवी महालक्ष्मी की उनके अंश से स्तुति की, जिससे उनका राज्य सुरक्षित हो गया और देवों और दानवों के बीच युद्ध में उनके शत्रुओं को परास्त कर दिया गया। जो लोग देवी लक्ष्मी के इस महास्तोत्र को पढ़ते और सुनते हैं, उन्हें समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है और इसलिए महात्मा पुष्कर ने परशुराम को सलाह दी कि वे देवी लक्ष्मी के स्तोत्र को यथासंभव बार-बार और प्रत्येक सप्ताह शुक्रवार को अवश्य पढ़ें। समृद्धि और समृद्धि प्राप्त करने के लिए यह देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र बहुत शक्तिशाली पाठ है। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करता है, वह एक महीने में भगवान कुबेर बन जाता है। भगवान इस शक्तिशाली स्तोत्र से देवी Devkrit Laxmi Stotra महालक्ष्मी की स्तुति करते हैं। कोई भी साधक देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का प्रतिदिन 21 बार जाप कर सकता है। दीपावली के पावन अवसर पर देवी लक्ष्मी की पूजा की जा सकती है तथा इस देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का 108 बार जाप करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, Devkrit Laxmi Stotra देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का जाप करना सबसे शक्तिशाली उपाय है। सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए आपको प्रातः स्नान करने के पश्चात देवी लक्ष्मी की मूर्ति अथवा चित्र के समक्ष देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का जाप करना चाहिए। इसके प्रभाव को अधिकतम करने के लिए आपको सबसे पहले स्तोत्र का अर्थ हिंदी में समझना चाहिए। इस स्तोत्र की पूजा प्रतिदिन सभी धनवानों को धन-धान्य की प्राप्ति कराने के लिए करनी चाहिए। Devkrit Laxmi Stotra महालक्ष्मी की कृपा से हमें वैभव, सौभाग्य, स्वास्थ्य, ऐश्वर्य, शील, विद्या, विनय, ओज, गम्भीरी तथा कांति की प्राप्ति होती है। आश्चर्यजनक रूप से असीमित सम्पत्ति प्रदान करने वाला महालक्ष्मी कृपा प्रार्थना सूत्र है, जिसमें श्री महालक्ष्मी की बहुत ही सुन्दर पूजा की गई है। Devkrit Laxmi Stotra:देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र के लाभ देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का नियमित जाप करने से मन को शांति मिलती है और आपके जीवन से सभी बुराइयाँ दूर रहती हैं और आप स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनते हैं।देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र श्री लक्ष्मी देवी जी को समर्पित है। देवी लक्ष्मी स्तोत्र का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को सफलता मिलती है; उसे अपने जीवन में किसी भी मामले में धन के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता है। Devkrit Laxmi Stotra:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ धनहीन जीवन जी रहे व्यक्ति को वैदिक पद्धति के अनुसार इस देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। Devkrit Laxmi Stotra | देवकृत लक्ष्मी स्तोत्र क्षमस्व भगवंत्यव क्षमाशीले परात्परे | शुद्धसत्त्वस्वरूपे च कोपादिपरिवर्जिते |1| उपमे सर्वसाध्वीनां देवीनां देवपूजिते | त्वया विना जगत्सर्वं मृततुल्यं च निष्फलम् |2| सर्वसंपत्स्वरूपा त्वं सर्वेषां सर्वरूपिणी | रासेश्वर्यधि देवी त्वं त्वत्कलाः सर्वयोषितः |3| कैलासे पार्वती त्वं च क्षीरोदे सिन्धुकन्यका | स्वर्गे च स्वर्गलक्ष्मीस्त्वं मर्त्यलक्ष्मीश्च भूतले |4| वैकुंठे च महालक्ष्मीर्देवदेवी सरस्वती | गंगा च तुलसी त्वं च सावित्री ब्रह्मालोकतः |5| कृष्णप्राणाधिदेवी त्वं गोलोके राधिका स्वयम् | रासे रासेश्वरी त्वं च वृंदावन वने- वने |6| कृष्णा प्रिया त्वं भांडीरे चंद्रा चंदनकानने | विरजा चंपकवने शतशृंगे च सुंदरी |7| पद्मावती पद्मवने मालती मालतीवने | कुंददंती कुंदवने सुशीला केतकीवने |8| कदंबमाला त्वं देवी कदंबकाननेऽपि च | राजलक्ष्मी राजगेहे गृहलक्ष्मीगृहे गृहे |9| इत्युक्त्वा देवताः सर्वा मुनयो मनवस्तथा | रूरूदुर्नम्रवदनाः शुष्ककंठोष्ठ तालुकाः |10| इति लक्ष्मीस्तवं पुण्यं सर्वदेवैः कृतं शुभम् | यः पठेत्प्रातरूत्थाय स वै सर्वै लभेद् ध्रुवम् |11| अभार्यो लभते भार्यां विनीतां सुसुतां सतीम् | सुशीलां सुंदरीं रम्यामतिसुप्रियवादिनीम् |12| पुत्रपौत्रवतीं शुद्धां कुलजां कोमलां वराम् | अपुत्रो लभते पुत्रं वैष्णवं चिरजीविनम् |13 परमैश्वर्ययुक्तं च विद्यावंतं यशस्विनम् | भ्रष्टराज्यो लभेद्राज्यं भ्रष्टश्रीर्लभते श्रियम् |14| हतबंधुर्लभेद्बंधुं धनभ्रष्टो धनं लभेत् | कीर्तिहीनो लभेत्कीर्तिं प्रतिष्ठां च लभेद् ध्रुवम् |15| सर्वमंगलदं स्तोत्रं शोकसंतापनाशनम् | हर्षानंदकरं शश्वद्धर्म मोक्षसुहृत्प्रदम् |16| || इति श्रीदेवकृत लक्ष्मीस्तोत्रं संपूर्णम् ||

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Durgashtotar Stotra | दुर्गाष्टोतर स्तोत्र

Durgashtotar Stotra दुर्गाष्टोतर स्तोत्र: दुर्गाष्टोतर स्तोत्र माता श्री दुर्गा को समर्पित है। इसमें श्री माँ दुर्गा के 108 नामों का वर्णन किया गया है। दुर्गाष्टोतर स्तोत्र के नियमित पाठ से व्यक्ति के सभी दुख दूर हो जाते हैं। यह जीवन में आने वाली समस्याओं या परेशानियों से मुक्ति के लिए माँ दुर्गा से की जाने वाली प्रार्थना है। दुर्गाष्टोतर स्तोत्र श्री दुर्गा सप्तशती के आह्वान मंत्रों में से एक है। इसमें भगवान शिव माता पार्वती को दुर्गा माता के 108 नाम बताते हैं, जिनके माध्यम से दुर्गा या सती को प्रसन्न किया जा सकता है। जो लोग प्रतिदिन दुर्गा स्तोत्र के इन 108 नामों का पाठ करते हैं, उन्हें दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं लगता। उन्हें धन, विलासिता, संतान और वंश, हाथी, चार चीजें – धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष जैसे लाभ मिलते हैं और अंत में उन्हें हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। इसलिए हाथ जोड़कर और विनम्र भाव से हम देवी के शुभ दुर्गाष्टोत्र स्तोत्र का जाप करते हैं Durgashtotar Stotra जैसा कि मार्कंडेय पुराण में पाए जाने वाले 700 श्लोकों के चंडी पाठ (जिसे दुर्गा सप्तशती के नाम से भी जाना जाता है) में लिखा है। Durgashtotar Stotra:दुर्गाष्टोत्र स्तोत्र के लाभ दुर्गा का नियमित जाप मन को शांति देता है और आपके जीवन से सभी बुराइयों को दूर रखता है और आपको स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनाता है। दुर्गाष्टोत्र स्तोत्र Durgashtotar Stotra का उपयोग करने से सभी उपयोगकर्ताओं को ढेर सारा पैसा, ढेर सारी संपत्ति, तंदुरुस्ती और अच्छा स्वास्थ्य, चीजों को याद रखने के लिए बेहतरीन याददाश्त, चीजों के बारे में ढेर सारा ज्ञान, अपने जीवन में सफलता से भरपूर, अपने जीवन में आने वाली सभी बाधाओं पर विजय, बहुत अच्छा पारिवारिक जीवन और कई अन्य चीजें मिलेंगी। Durgashtotar Stotra दुर्गाष्टोत्र स्तोत्र का जाप करने से न केवल उनके जीवन की सभी परेशानियाँ दूर हो जाएँगी बल्कि उनके जीवन से सभी भय, दुख और कमी भी दूर हो जाएगी जैसे कपड़े धोने के बाद धूल पानी में मिल जाती है। यह जीवन में दुर्गाष्टोत्र Durgashtotar Stotra स्तोत्र का महत्व है, जिसे नकारा नहीं जा सकता। दुर्गाष्टोतर स्तोत्र के कई लाभ हैं जैसे कि अगर कोई व्यक्ति धन की कमी से जूझ रहा है तो उसे अपने जीवन में बहुत कुछ मिल सकता है, अगर कोई व्यक्ति व्यापार में नुकसान से जूझ रहा है तो वह अपने व्यापार में हुए नुकसान की भरपाई कर सकता है, अगर कोई व्यक्ति कई बीमारियों से पीड़ित है Durgashtotar Stotra और दुनिया के सबसे प्रसिद्ध डॉक्टर की मदद लेने के बाद भी उसे लाभ नहीं मिल रहा है तो वह दुर्गाष्टोतर स्तोत्र की मदद से न केवल बीमारी से उबर सकता है बल्कि अपना जीवन भी बीमारियों से पहले की तरह व्यतीत कर सकता है और भी बहुत कुछ। Durgashtotar Stotra:इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए जिन व्यक्तियों को बिना किसी कारण के जीवन में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें वैदिक नियमों के अनुसार दुर्गाष्टोतर स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। दुर्गाष्टोतर स्तोत्र | Durgashtotar Stotra ईश्वर उवाच शतनाम प्रवक्ष्यामि शृणुष्व कमलानने । यस्य प्रसादमात्रेण दुर्गा प्रीता भवेत् सती ॥ 1॥ ॐ सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी । आर्या दुर्गा जया चाद्या त्रिनेत्रा शूलधारिणी ॥ 2॥ पिनाकधारिणी चित्रा चण्डघण्टा महातपाः । मनो बुद्धिरहंकारा चित्तरूपा चिता चितिः ॥ 3॥ सर्वमन्त्रमयी सत्ता सत्यानन्द स्वरूपिणी । अनन्ता भाविनी भाव्या भव्याभव्या सदागतिः ॥ 4॥ शाम्भवी देवमाता च चिन्ता रत्नप्रिया सदा । सर्वविद्या दक्षकन्या दक्षयज्ञविनाशिनी ॥ 5॥ अपर्णानेकवर्णा च पाटला पाटलावती । पट्टाम्बर परीधाना कलमञ्जीररञ्जिनी ॥ 6॥ अमेयविक्रमा क्रुरा सुन्दरी सुरसुन्दरी । वनदुर्गा च मातङ्गी मतङ्गमुनिपूजिता ॥ 7॥ ब्राह्मी माहेश्वरी चैन्द्री कौमारी वैष्णवी तथा । चामुण्डा चैव वाराही लक्ष्मीश्च पुरुषाकृतिः ॥ 8॥ विमलोत्कर्षिणी ज्ञाना क्रिया नित्या च बुद्धिदा । बहुला बहुलप्रेमा सर्ववाहन वाहना ॥ 9॥ निशुम्भशुम्भहननी महिषासुरमर्दिनी । मधुकैटभहन्त्री च चण्डमुण्डविनाशिनी ॥ 10॥ सर्वासुरविनाशा च सर्वदानवघातिनी । सर्वशास्त्रमयी सत्या सर्वास्त्रधारिणी तथा ॥ 11॥ अनेकशस्त्रहस्ता च अनेकास्त्रस्य धारिणी । कुमारी चैककन्या च कैशोरी युवती यतिः ॥ 12॥ अप्रौढा चैव प्रौढा च वृद्धमाता बलप्रदा । महोदरी मुक्तकेशी घोररूपा महाबला ॥ 13॥ अग्निज्वाला रौद्रमुखी कालरात्रिस्तपस्विनी । नारायणी भद्रकाली विष्णुमाया जलोदरी ॥ 14॥ शिवदूती कराली च अनन्ता परमेश्वरी । कात्यायनी च सावित्री प्रत्यक्षा ब्रह्मवादिनी ॥ 15॥ य इदं प्रपठेन्नित्यं दुर्गानामशताष्टकम् । नासाध्यं विद्यते देवि त्रिषु लोकेषु पार्वति ॥ 16॥ धनं धान्यं सुतं जायां हयं हस्तिनमेव च । चतुर्वर्गं तथा चान्ते लभेन्मुक्तिं च शाश्वतीम् ॥ 17॥ कुमारीं पूजयित्वा तु ध्यात्वा देवीं सुरेश्वरीम् । पूजयेत् परया भक्त्या पठेन्नामशताष्टकम् ॥ 18॥ तस्य सिद्धिर्भवेद् देवि सर्वैः सुरवरैरपि । राजानो दासतां यान्ति राज्यश्रियमवाप्नुयात् ॥ 19॥ गोरोचनालक्तककुङ्कुमेव सिन्धूरकर्पूरमधुत्रयेण । विलिख्य यन्त्रं विधिना विधिज्ञो भवेत् सदा धारयते पुरारिः ॥ 20॥ भौमावास्यानिशामग्रे चन्द्रे शतभिषां गते । विलिख्य प्रपठेत् स्तोत्रं स भवेत् संपदां पदम् ॥ 21॥

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Sapne Me Accident Dekhna: सपने में एक्‍सीडेंट में खुद की मौत देखना इस बात का है संकेत, हो जाएं सावधान

Sapne Me Accident Dekhna:सपने में किसी कार का एक्‍सीडेंट देखना यकीनन बेहद डरावना होता है और ऐसा सपना देखने के बाद संभव है कि आप कई दिनों तक चैन की नींद न सो पाएं। लेकिन क्‍या आपको ऐसे किसी सपने का अर्थ पता है? स्‍वप्‍नशास्‍त्र में ऐसे सपनों का अर्थ बताया गया है। आइए जानते हैं सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े सपने और उनका क्‍या होता है अर्थ। Sapne Me Accident Dekhna:रात की नींद में कई बार ऐसे डरावने सपने आते हैं जो कि कई दिन तक हमारे दिलोदिमाग पर गहरा असर डालते हैं। इन्‍हीं में से एक है सपने में सड़क दुर्घटना देखना। आज हम ऐसे ही डरावने सपने और उनके अर्थ के बारे में आपको बता रहे हैं। आइए जानते हैं सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े सपनों का अर्थ। Car Accident Dreams: सपना देखना एक स्वभाविक क्रिया है और आमतौर पर हर इंसान सपने देखता है। वहीं कुछ सपने देखकर व्यक्ति को हर का एहसास होता है। तो कुछ सपने देखकर व्यक्ति सुखद अनुभव करता है। Sapne Me Accident Dekhna स्वप्न शास्त्र अनुसार जो सपने सुबह के समय देखे जाते हैं, वो सच होते हैं। लेकिन आपको बता दें कि ये जरूरी नहीं कि जो सपना आपने देखा हो उसका असल जिंदगी में भी यही मतलब हो। ऐसे में यहां हम बात करने जा रहे हैं सपने मेंं अगर आप कार एक्सीडेंट या कोई दुर्घटना देखें तो इसका क्या मतलब होता है। आइए जानते हैं… Sapne Me Accident Dekhna:कार एक्‍सीडेंट में किसी को मरते देखना स्वप्न शास्त्र अनुसार कार एक्सीडेंट में किसी को मरते देखना शुभ नहीं माना जाता है। मतलब अगर आपने ऐसा सपना देखा है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। मतलब आपको ऊपर कोई संकट या विपदा आ सकती है। Sapne Me Accident Dekhna साथ ही आपको वाहन सावधनी से चलाना चाहिए।  Sapne Me Accident Dekhna:दुर्घटना में खुद को मरते देखना सपने में आप खुद को दुर्घटना में मरते हुए देखते हैं तो यह एक अशुभ संकेत है। इसका मतलब कि आपको कार्यस्थल पर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही आपका स्वास्थ्य खराब हो सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में आपको सावधान रहना चाहिए।  किसी दूसरे की कार का एक्‍सीडेंट देखना स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने में किसी दूसरे की कार का एक्सीडेंट या दुर्घटनाग्रस्त देखते हैं तो यह एक अशुभ संकेत है। इसका अर्थ है कि आपकी वजह से दूसरे लोग परेशानी में फंस सकते हैं। साथ ही आपको धनहानि हो सकती है या कोई अशुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है।  सपने में खुद का कार एक्सीडेंट देखना  सपने में अगर आफ खुद का कार एक्सीडेंट देखते हैं तो यह एक अशुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में आपकी सेहत खराब हो सकती है। साथ ही धन की हानि हो सकती है। इसलिए आपको हेल्थ चेकअप करवाते रहना चाहिए। साथ ही लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।  सपने में ट्रेन एक्सीडेंट अगर आप सपने में किसी ट्रेन का एक्सीडेंट देखते हैं तो इसका मतलब होता है कि आपको भारी आर्थिक नुकसान होने वाला है। इसलिए आपको नए निवेश से बचना चाहिए। साथ ही किसी को कुछ दिन तक धन भी उधार नहीं देखना चाहिए।

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Kalashtami 2025: कालाष्टमी के दिन लगाएं इन विशेष चीजों का भोग, प्रसन्न होंगे बाबा काल भैरव, मनोकामनाएं होंगी पूरी!

Kalashtami 2025: 20 फरवरी को कालाष्टमी व्रत रखा जाएगा. इस दिन काल भैरव का व्रत और पूजन करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. साथ ही भय व शत्रुओं से मुक्ति मिलती है. Kalashtami Puja Upay Niyam and Importance: कालाष्टमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. यह दिन भगवान भैरव को समर्पित है, जो भगवान शिव के उग्र रूप माने जाते हैं. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से सभी प्रकार के भय और संकट दूर होते हैं. मान्यता है कि भगवान भैरव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें नकारात्मक शक्तियों से बचाते हैं. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. जो लोग सच्चे मन से भगवान भैरव की पूजा करते हैं, उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 20 फरवरी दिन गुरुवार को सुबह 03 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 21 फरवरी दिन शुक्रवार को सुबह 01 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार कालाष्टमी की पूजा 20 फरवरी को करना शुभ रहेगा. इस दिन मनाई जाएगी कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 20 फरवरी को सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर शुरु होगी और 21 फरवरी को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में कालाष्टमी का व्रत 20 फरवरी के दिन रखा जाएगा और इसी दिन कालाष्टमी व्रत रखा जाएगा. भगवान काल भैरव को लगाए ये भोग कालाष्टमी के दिन बाबा काल भैरव को गुलगुले, जलेबी या हलवे का भोग लगाना चाहिए. यह उन्हें बेहद प्रिय माने जाते हैं. भगवान काल भैरव को कालाष्टमी के दिन मदिरा का भोग लगाने का भी महत्व है, इसलिए इस दिन आप इन्हें मदिरा का भोग लगा सकते हैं. मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव को इस दिन पूजा के समय पान, सुपारी, लौंग सहित मुखवास आदि चढ़ाना भी अच्छा माना जाता है. एक बात का ध्यान अवश्य रखें कि जब भी आप कालाष्टमी की पूजा करके उन्हें भोग लगाएं. उसके बाद गरीबों को भोजन अवश्य कराएं. इससे आपको अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा. Kalashtami 2025 Ki Puja Vidhi:कालाष्टमी की पूजा विधि कालाष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. भगवान भैरव की प्रतिमा को एक चौकी पर स्थापित करें. भगवान भैरव को धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें. कालाष्टमी की व्रत कथा सुनें. दिन भर व्रत रखें और भगवान भैरव का ध्यान करें. शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करें. व्रत पारण के लिए सबसे पहले भगवान भैरव को मोदक का भोग लगाएं. इसके बाद आप फल, मिठाई और अन्य सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं. इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है. Kalashtami 2025:काल भैरव को अर्पित करें ये चीजें Kalashtami 2025:कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा का विशेष महत्व है. Kalashtami 2025 इस दिन काल भैरव को कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से मनोकामनाएं जल्द पूरी होती हैं. यहां कुछ चीजें बताई गई हैं जिन्हें आप कालाष्टमी के दिन काल भैरव को अर्पित कर सकते हैं. काला तिल: कालाष्टमी के दिन काल भैरव को काले तिल अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है. इससे पितृ दोष शांत होता है और राहु-केतु के दोष भी दूर होते हैं. उड़द की दाल: उड़द की दाल से बनी चीजें जैसे कि पकौड़े, बड़े आदि काल भैरव को अर्पित करने से शनि के दोष शांत होते हैं. सरसों का तेल: कालाष्टमी के दिन काल भैरव को सरसों का तेल अर्पित करना चाहिए. इससे रोगों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है. भैरव अष्टमी: इस दिन काल भैरव को आठ प्रकार के फल अर्पित करने से अष्टलक्ष्मी की प्राप्ति होती है. काले वस्त्र: काल भैरव को काले वस्त्र अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुरक्षा मिलती है. पंच मेवा: काल भैरव को पंच मेवा अर्पित करने से धन और समृद्धि में वृद्धि होती है. मदिरा: कुछ लोग कालाष्टमी के दिन काल भैरव को मदिरा भी अर्पित करते हैं. कुत्ते को भोजन: कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को भोजन कराना बहुत शुभ माना जाता है. इससे Kalashtami 2025 काल भैरव प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कालाष्टमी Kalashtami 2025 के दिन काल भैरव को ये चीजें अर्पित करने से आपके जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. Kalashtami 2025:कालाष्टमी का महत्व ऐसी मान्यता है कि Kalashtami 2025 कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से जीवन में समृद्धि और सफलता आती है. भगवान भैरव को धन और ऐश्वर्य का देवता भी माना जाता है. कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है. यह दिन बुरी शक्तियों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए बहुत शुभ माना जाता है. भगवान भैरव की पूजा करने से आध्यात्मिक विकास होता है. यह दिन आत्मा को शुद्ध करने और मोक्ष की प्राप्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.

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श्री वेणी माधव मंदिर प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत

श्री वेणी माधव मंदिर:वेणी माधव मंदिर की गिनती प्रयागराज के सबसे पुराने मंदिरों में की जाती है। श्री वेणी माधव मंदिर:जैसे काशी को भगवान भोलेनाथ की नगरी कहा जाता है, ठीक वैसे ही प्रयागराज को भगवान विष्णु की नगरी कहा जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित वेणी माधव मंदिर प्रयागराज के दारागंज में निराला मार्ग पर स्थित है। वेणी माधव मंदिर लोकप्रिय रूप से वाणी माधव मंदिर के रूप में जाना जाता है और प्रयागराज के प्रयाग में 12 माधव मंदिरों में से एक है। वेणी माधव मंदिर में भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा अर्चना की जाती है। श्री वेणी माधव मंदिर:मंदिर का इतिहास वेणी माधव मंदिर 171 साल पुराना है। इतिहासकारों की माने तो इसका निर्माण श्रीमंत दौलत राव सिंधिया की पत्नी बैजा बाई साहब ने वर्ष 1835 में करवाया था। वेणी माधव मंदिर की गिनती प्रयागराज के सबसे पुराने मंदिरों में की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार बंगाल के प्रसिद्ध वैष्णवों के संत- चैतन्य महाप्रभु जी ने लंबे समय तक वेणी माधव मंदिर में तपस्या की थी। पद्म पुराण के अनुसार, यह प्रसिद्ध बंगाली गुरु प्रयाग के मुख्य देवता है। वह भगवान महा विष्णु और देवी लक्ष्मी के उत्साही भक्तों में से एक थे। वेणी माधव मंदिर प्रवेश द्वार के बायीं ओर लगे शिलालेख में उल्लेख है कि मंदिर का प्रबंधन सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट, ग्वालियर के पास है। श्री वेणी माधव मंदिर:मंदिर का महत्व वेणी माधव मंदिर के बारे में कहा जाता है कि सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रयाग में प्रथम यज्ञ किया था। पुराणों के अनुसार प्रयाग में सभी तीर्थों का उद्गम है। इस पावन नगरी के निर्माता भगवान श्री विष्णु स्वयं है और वह यहां भगवान श्री वेणी माधव मंदिर के रूप में विराजमान है। संगम स्नान के बाद भगवान श्री वेणी माधव जी के दर्शन करने से ही पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है। ऐसी मान्यता पुराणों एवं रामचरितमानस में वर्णित है। इस प्राचीनतम मंदिर के प्रांगण में चैतन्य महाप्रभु जी वेणी माधव जी के दर्शन करने हेतु संकीर्तन एवं नृत्य किया करते थे। श्री वेणी माधव मंदिर:मंदिर की वास्तुकला वेणी माधव मंदिर की वास्तुकला बहुत सुंदर है, जो विशिष्ट मराठी वास्तुकला की एक झलक देता है। मंदिर के ‘शिखर’ पर नक्काशी की गई है और इसके उच्चतम बिंदु को पीतल की संरचना से सजाया गया है जो सूरज की रोशनी में चमकता है। शिखर पर सिंधिया राजवंश का प्रतीक चिन्ह (दो नागों से घिरे सूर्य की भव्य आकृति) भी उकेरा गया है। श्री कृष्ण भगवान जी की मूर्ति यहां पर श्याम रंग की है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है। मंदिर के मुख्य द्वार पर काले रंग का बड़ा गेट लगा है। पत्थर की सीढ़ियां गर्भगृह तक ले जाती हैं जहां श्री वेणी, माधव और गरुण की मूर्तियां हैं। मूर्तियों के पास बैजा बाई की संगमरमर की मूर्ति भी रखी हुई है। प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर स्वर्गीय माधव राव सिंधिया की दो तस्वीरें हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सांयकाल आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM शाम में मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 10:00 PM मंदिर का प्रसाद वेणी माधव मंदिर में वेणी माधव जी को लड्डू का प्रसाद चढ़ाया जाता है। श्रद्धालु वेणी माधव जी को ड्राई फ्रूट्स, फल और पेड़े का भी भोग लगाते हैं।

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बाँके बिहारी मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर की गिनती प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में की जाती है। उत्तर प्रदेश मथुरा जिले के वृंदावन में बिहारीपुरा में बाँके बिहारी मंदिर है। इस मंदिर की गिनती भी प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में की जाती है। बाँके बिहारी भगवान् श्री कृष्ण का ही एक रूप है। जो बहुत ही अद्भुत है। बाँके बिहारी मंदिर विश्व में प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त इस मंदिर के दर्शन करते है उनका जीवन सफल हो जाता है। मंदिर का इतिहास इस मंदिर के इतिहास के पीछे भी एक कहानी है। बाँके बिहारी मंदिर की कहानी कुछ इस प्रकार है। बाँके बिहारी मंदिर का निर्माण 1864 में स्वामी हरिदास ने करवाया था। स्वामी हरिदास भगवान कृष्ण और राधा जी के परम भक्त थे। उनके भक्ति और समर्पण के आगे भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को निधिवन में साक्षात् प्रकट होना पड़ा। इस दिव्य जोड़े की सुंदरता और आकर्षण का तेज इतना था की एक साधारण मनुष्य इसे सहन नहीं कर सकता था। इसलिए स्वामी हरिदास ने भगवान को सहज रूप में प्रकट होने का अनुरोध किया। उनका अनुरोध स्वीकार कर भगवान बांके बिहारी जी और राधारानी एकीकृत होकर एक काली आकर्षक मूर्ति में विलीन हो गए। इस प्रतिमा की आज भी पूजा होती है। स्वामी हरिदास जी के अनुयायियों ने 1921 में बाके बिहारी मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। बाँके बिहारी मंदिर वृंदावन:मंदिर का महत्व इस मंदिर की ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त बाके बिहारी जी के दर्शन करता है वह उन्ही का हो कर रह जाता है। जो भी व्यक्ति बांके बिहारी की मूर्ति की एक झलक लेता है वह सब सुध बुध भूलकर उन्ही में रम जाता है। बांके बिहारी जी की पूजा करने से सभी संकटों का नाश होता है। बांके का अर्थ है तीन कोणों पर मुड़ा हुआ, यह एक तरह से बांसुरी बजाते भगवान कृष्ण की एक मुद्रा ही है। बांसुरी बजाने के समय भगवान श्री कृष्ण का दाहिना घुटना बाएं घुटने के समीप मुड़ा हुआ रहता था और दायां हाथ बांसुरी को थामने हेतु मुड़ा रहता था। इस कारण श्री कृष्ण का सिर भी हल्का सा एक तरफ झुका रहता था। उनके द्वारा इस तरह किये जाने के कारण उनका नाम बांके बिहारी पड़ा। बाँके बिहारी मंदिर वृंदावन:मंदिर की वास्तुकला बांके बिहारी मंदिर की वास्तुकला राजस्थानी वास्तुकला से प्रेरित है। इस मंदिर के मेहराब और स्तम्भ बहुत ही अट्रेक्टिव है। बांके बिहारी जी की काले पत्थर से निर्मित प्रतिमा बहुत ही आकर्षक है। इसे देखकर सभी मंत्र मुग्ध हो जाते है। इस प्रतिमा में राधा और कृष्ण का एकी कारण है। मंदिर का समय गर्मियों में बांके बिहारी मंदिर खुलने का समय 07:45 AM – 12:00 PM राजभोग आरती का समय 11:55 AM – 12:00 PM शयन आरती का समय 09:25 PM – 09:30 PM सर्दियों में बांके बिहारी मंदिर शाम को खुलने का समय 04:30 PM – 08:30 PM राज भोग का समय 11:00 AM – 11:30 AM गर्मियीं में बांके बिहारी मंदिर शाम को खुलने का समय 05:30 PM – 09:30 PM सर्दियों में बांके बिहारी मंदिर खुलने का समय 08:45 AM – 01:00 PM मंदिर का प्रसाद बांके बिहारी मंदिर में भगवान को माखन- मिश्री, चंदन, गुलाब जल और केसर का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूल भी चढ़ाये जाते है।

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प्रेम मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

55 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में बने प्रेम मंदिर पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है। प्रेम मंदिर भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा जिले के समीप वृंदावन में स्थित है। जगद्गुरु श्री कृपालु महाराज जी की संस्था जगद्गुरु कृपालु परिषत द्वारा भगवान श्री कृष्ण और राधा के इस भव्य मन्दिर का निर्माण करवाया गया है। 54 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में बना प्रेम मंदिर पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है। प्रेम मंदिर में राधा-कृष्ण की भव्य मूर्ति की स्थापना के साथ सीता-राम जी प्रतिमा की स्थापित की गई है। प्रेम मंदिर में देश के लोगों के अलावा विदेशों से भी कई लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। होली और दीवाली पर तो यहां का नजारा और भव्य हो जाता है। मंदिर का इतिहास जगद्गुरु श्री कृपालु महाराज जी ने प्रेम मंदिर की नींव जनवरी 2001 में रखी थी। मंदिर पूरे एक हजार मजदूरों द्वारा 11 सालों में बनकर तैयार किया गया। इसका उद्घाटन समारोह 15 फरवरो 2012 को किया गया था। फिर 17 फरवरी को इसे भक्तों के लिए खोल दिया गया था। मंदिर संगमरमर के पत्थरों से बना है, जो कि इटली से मंगवाए गए थे। इसको बनाने में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 1,000 शिल्पकारों को लगाया गया था। मंदिर की सतरंगी रोशनी भी भक्तों को बेहद आकर्षित करती है। मंदिर का महत्व प्रेम मंदिर की एक खासियत ये भी है कि आपको ये दिन में एकदम सफेद दिखाई देगा और शाम के समय रोशनी के बीच मंदिर का रंग कुछ अलग ही नजर दिखाई देता है। प्रेम मंदिर एक आध्यात्मिक मंदिर है। इसमें रखी राधा कृष्ण की मूर्ति के दर्शन मात्र से भक्तों को अत्यंत शुकून और शांति मिलती है। प्रेम मंदिर राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का प्रतीक है। इसमें भगवान कृष्ण की लीलाएं जैसे की गोवर्धन लीला, कालिया नाग लीला, झूलन लीला जैसी अनेक लीलाओं की झांकियां सजाई गई है। मंदिर की वास्तुकला प्रेम मंदिर के निर्माण में इटालियन संगमरमर का उपयोग किया गया है। दो मंजिला सफेद रंग के प्रेम मंदिर को एक ऊंचे चबूतरे पर बनाया गया है, जो 128 फीट चौड़ा और 125 फीट ऊंचा और 190 फीट लंबा है। मंदिर में सत्संग के लिए एक विशाल भवन का निर्माण किया गया है, जिसमें एक साथ 25000 हजार लोग बैठ सकते हैं। प्रेम मंदिर की दीवारें 3.25 फीट मोटी हैं और इटालियन संगमरमर से बनी हैं। इस मंदिर के द्वार चारों दिशाओं में खुलते है। विशाल शिखर, स्वर्ण कलश और ध्वज का वजन सहने के लिए गर्भगृह की दीवारें 8 फीट मोटी हैं। प्रेम मंदिर में 94 कलामंडित स्तम्भ हैं, जो मंदिर की खूबसूरती में चार-चांद लगा रहे हैं। मंदिर के गर्भगृह के बाहर और अन्दर प्राचीन भारतीय वास्तुशिल्प की उत्कृष्ट पच्चीकारी और नक्काशी की गयी है। संगमरमर की शिलाओं पर राधा गोविन्द गीत सरल भाषा में लिखे गये हैं। मंदिर परिसर में गोवर्धन पर्वत की सजीव झाँकी बनायी गयी है। प्रेम मंदिर खुलने का समय 05:30 AM – 12:00 PM सुबह भोग का समय 06:30 AM – 07:00 AM सुबह भोग का समय 11:30 AM – 12:00 PM शाम दर्शन और आरती का समय 04:30 PM – 05:30 PM शाम परिक्रमा का समय 07:00 PM – 08:00 PM सुबह की आरती और परिक्रमा का समय 05:30 AM – 06:30 AM सुबह दर्शन और आरती का समय 08:30 AM – 11:30 AM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:30 PM – 08:30 PM शाम भोग का समय 05:30 PM – 06:00 PM शाम की आरती का समय 08:10 PM – 08:30 PM मंदिर का प्रसाद प्रेम मंदिर में फूलों के साथ माखन, मिश्री, पेड़ा और बर्फी का भोग लगाया जाता है। श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 50 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

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Lucky Dream For Money: सपने में दिखें ये चीजें, तो समझ लें कि जल्द होने वाले हैं मालामाल, भाग्य का मिलेगा पूरा साथ

Lucky Dream For Money:स्वप्न शास्त्र के अनुसार, व्यक्त को सोते समय विभिन्न तरह के सपने आते हैं। जिसका कोई न कोई कनेक्शन आपके भविष्य से होता है। ऐसे ही जानिए सपने में कौन सी चीजें देता है धन लाभ का संकेत। Lucky Dream For Money धनवान बनने का सपना आप भी देखते हैं तो खुली आंखों की बजाय नींद में इन सपनों को देखने की चाहत कीजिए। स्वप्नशास्त्र के अनुसार इन सपनों का संबंध आपके जीवन की खुशी से है। इन सपनों के दिखने से व्यक्ति को जल्दी धन लाभ और उन्नति मिलती है। आप भी दुआ कीजिए आपको भी ऐसे सपने आज रात दिखे। Lucky Dream For Money:सपने जो बताते हैं मिलने वाला खूब पैसा सपने देखना एक सामान्य क्रिया मानी जाती है लेकिन स्वप्नशास्त्र के अनुसार, यह महज कोई संयोग नहीं होता है बल्कि सपने आपके जीवन में होने वाली घटनाओं के बारे में पहले ही जानकारी दे देते हैं। प्राचीन काल में राजा-महाराजा अपने शासनकाल में तो स्वपन विशेषज्ञों को दरबार में रखते थे, ताकि वह सपनों के रहस्यों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। हर सपने का कोई न कोई मतलब जरूर होता है या फिर ये कहें कि आने वाले भविष्य की जानकारी देते हैं। Lucky Dream For Money कुछ सपने तो ऐसे होते हैं, जो आपकी किस्मत तक को चमका जाते हैं। स्वप्नशास्त्र में बताया गया है कि कुछ सपने देखने से अच्छे धन की प्राप्ति होती है और करियर में भी ग्रोथ होती है। आइए जानते हैं इन सपनों के बारे में… खुद को अंगूठी पहनते हुए देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर आप खुद को सपने में अंगूठी पहनते हुए देखते हैं, तो इसका मतलब है कि जल्द ही आपको धन लाभ हो सकता है। Sapne me cow dekhna:सपने में गाय का दूध लेते हुए देखना सपने में कोई व्यक्ति गाय का दूध ले रहा है, Lucky Dream For Money तो ये इस बात की ओर इशारा करता है कि आपको जल्द ही धन की प्राप्ति हो सकती है और घर में खुशहाली आ सकती है। Sapne me Safed Ghoda dekhna:सपने में सफेद घोड़े को देखना अगर सपने में किसी सफेद घोड़े को देखते हैं, तो इसका मतलब भी धन लाभ माना जाता है। सपने में नेवला को देखना:Sapne me nevla Dekhna सपने में नेवला को देखना भी शुभ माना जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर कोई सपने में नेवला देखता है, तो  उसे भविष्य में धन लाभ के साथ हीरे जवाहरात मिल सकता है। सपने में आम का बगीचा देखना अगर आपने सपने में आम का बगीचा देखा है, Lucky Dream For Money तो इसका मतलब है कि जल्द ही आपको धन लाभ हो सकता है। इसके साथ ही कई कार्यों में सफलता हासिल हो सकती है। सपने में सारस को देखना सपने में सारस पक्षी को देखना भी शुभ संकेत माना जाता है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में धन लाभ हो सकता है। खुद को चढ़ते हुए देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में खुद को पेड़ या पहाड़ में चढ़ते हुए देखते हैं, तो उसका मतलब है कि आप भविष्य में ऊंचाइयों को छूने वाले हैं। इसके साथ ही अपार धन संपदा की प्राप्ति हो सकती है।

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Digbandhan Raksha Stotra | दिग्बन्धन रक्षा स्तोत्र

Digbandhan Raksha Stotra:दिग्बंधन रक्षा स्तोत्र: दिग्बंधन रक्षा स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करने वाले व्यक्ति के चारों ओर एक अदृश्य दीवार बन जाती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। शास्त्रों में उल्लेख किया गया है कि इस मंत्र का 6 महीने तक प्रतिदिन पाठ करने से सबसे शक्तिशाली काला जादू या बुरी ऊर्जा भी दूर हो जाती है। 6 महीने पूरे होने के बाद, इसे प्रतिदिन 32 बार पढ़ना चाहिए ताकि व्यक्ति पूरी तरह से सुरक्षित रहे। स्तोत्र का पूरा और जल्दी लाभ पाने के लिए, इसे पूरी आस्था और भक्ति के साथ पढ़ना चाहिए। इसे अधिमानतः सुबह के समय पढ़ना चाहिए लेकिन अगर आपके पास सुबह ज्यादा समय नहीं है तो आप इसे दिन के किसी भी समय कर सकते हैं। यह स्तोत्र बहुत शक्तिशाली स्तोत्र है जो भय, भय, सिज़ोफ्रेनिया, गंभीर मानसिक अवसाद, दुश्मनों से डर, सभी मनोवैज्ञानिक समस्याओं, भूत और बुरी आत्माओं, काले जादू और तांत्रिक गतिविधियों के खिलाफ बहुत प्रभावी है। स्तोत्र का पाठ करने से साधक अपने शत्रु की जिह्वा या अन्य किसी भी प्रकार की शक्ति को रोक सकता है। Digbandhan Raksha Stotra साधक का शत्रु कभी भी अपने कार्य में सफल नहीं हो सकता, शत्रु का समूल नाश हो जाता है। दिग्बंधन रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से साधक आरोग्य, धन-धान्य आदि प्राप्त करते हैं। यह रुद्रयामल तंत्र नामक एक प्राचीन दुर्लभ ग्रंथ से लिया गया है। ऐसा साधक जो इस महास्तोत्र का पाठ करता है, वह हर ओर से सुरक्षित हो जाता है। कोई भी उसके मार्ग में बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता। साधक के सभी विरोधी मूर्ति बन जाते हैं। इस दिग्बंधन रक्षा स्तोत्र में भाग्य के गुण देखे जा सकते हैं। यह एक अद्वितीय तांत्रिक अभिव्यक्ति है जो आम लोगों के भीतर भय, भ्रम और चिंता पैदा करती है। Digbandhan Raksha Stotra ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा ने इसकी कल्पना की थी और इसे मुनियों को सिखाया था। मुनियों ने इसे नारद को सिखाया जो दिग्बंधन रक्षा स्तोत्र बन गए। Digbandhan Raksha Stotra:दिग्बंधन रक्षा स्तोत्र के लाभ दिग्बंधन रक्षा स्तोत्र का जाप करने से शत्रुओं के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है।जादू-टोने, काले जादू से प्रभावित व्यक्ति पर विजय मिलती है।मनोवैज्ञानिक समस्याएं दूर होती हैं।शत्रुओं का नाश होता है।व्यक्ति दुष्टों से सुरक्षित रहता है। Digbandhan Raksha Stotra:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ अल्जाइमर से पीड़ित, मनोवैज्ञानिक समस्याओं का सामना कर रहे और जादू-टोने, काले जादू के प्रभाव में आए व्यक्तियों को नियमित रूप से दिग्बंधन रक्षा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। दिग्बन्धन रक्षा स्तोत्र | Digbandhan Raksha Stotra आत्म रक्षार्थ तथा यज्ञ रक्षार्थ निम्न मन्त्र से जल, सरसों या पीले चावलों को(अपने चारों ओर) छोड़ें – मूल मन्त्र: ॐ पूर्वे रक्षतु वाराहः आग्नेयां गरुड़ध्वजः । दक्षिणे पदमनाभस्तु नैऋत्यां मधुसूदनः ॥ पश्चिमे चैव गोविन्दो वायव्यां तु जनार्दनः । उत्तरे श्री पति रक्षे देशान्यां हि महेश्वरः ॥ ऊर्ध्व रक्षतु धातावो ह्यधोऽनन्तश्च रक्षतु । अनुक्तमपि यम् स्थानं रक्षतु ॥ अनुक्तमपियत् स्थानं रक्षत्वीशो ममाद्रिधृक् । अपसर्पन्तु ये भूताः ये भूताः भुवि संस्थिताः ॥ ये भूताः विघ्नकर्तारस्ते गच्छन्तु शिवाज्ञया । अपक्रमंतु भूतानि पिशाचाः सर्वतोदिशम् । सर्वेषाम् विरोधेन यज्ञकर्म समारम्भे ॥

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Daridraya Dahana Shiv Stotra | दारिद्रय दहन शिव स्तोत्र

Daridraya Dahana Shiv Stotra:दारिद्रय दहन शिव स्तोत्र: त्रिलोक में प्रत्येक व्यक्ति भगवान शिव का भक्त है। वे त्रिदेवों में अद्वितीय हैं, संसार से अज्ञेय हैं। उन्हें स्वयं सर्प की मृत्यु से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन संसार का सर्वोत्तम सुख और वैभव उनकी मुट्ठी में है। हाथ में त्रिशूल लिए वे संसार की तीन महान बाधाओं – क्रोध, मोह और लोभ पर अंकुश लगाते हैं। संसार की समस्त संपत्ति उनके चरणों में पलती है। जो व्यक्ति घोर आर्थिक संकट से जूझ रहा हो, कर्ज में डूबा हो, व्यापार का काम बार-बार उलझता हो, दरिद्रता और शोषण से ग्रस्त हो तो उसे शिव की आराधना करनी चाहिए। यह दारिद्रय दहन शिव स्तोत्र महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित है। दारिद्रय दहन का अर्थ है दरिद्रता का नाश। दरिद्रता केवल शारीरिक ही नहीं, मानसिक भी होती है। आज की कालिका में अधिकांश मनुष्य मानसिक दरिद्रता से ग्रसित है- नकारात्मक भावनाएं- काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, स्वार्थ, ईर्ष्या, भय आदि। भगवान शिव की पूजा मनुष्य को भौतिक सुख-समृद्धि के साथ ज्ञान प्रदान कर मन से समृद्ध बनाती है, अर्थात स्वस्थ मन प्रदान करती है, क्योंकि भगवान शिव के सिर पर चंद्रमा है और चंद्रमा मन का कारक है। इसलिए व्यक्ति को प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा के बाद या जब भी समय मिले, एक बार ‘बरीधा शास्त्र’ का पाठ अवश्य करना चाहिए क्योंकि ‘स्वस्थ मन ही स्वस्थ’ है। यह सभी सुखों और दुखों के नाश का आधार है। Daridraya Dahana Shiv Stotra:दारिद्रय दहन शिव स्तोत्र लाभ यह स्तोत्र दरिद्रता के दहन का स्त्रोत है। जो व्यक्ति नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करता है, भगवान शिव की पूजा करता है, उसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और दरिद्रता का नाश होता है तथा धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है। ऋषि वशिष्ठ द्वारा रचित यह स्तोत्र समस्त रोगों को दूर करने वाला, शीघ्र ही समस्त सम्पत्तियों को देने वाला तथा पितृवंशीय परम्परा को बढ़ाने वाला है। जो व्यक्ति तीनों कालों में इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे अवश्य ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है। हमें प्रतिदिन श्रद्धा, भक्ति और एकाग्रता के साथ दारिद्रय दहन शिव स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से दारिद्रय दहन शिव स्तोत्र हमारी दरिद्रता को दूर करता है तथा हमें धन, सम्पत्ति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। हमारे सभी रोग दूर होते हैं तथा हमें उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। Daridraya Dahana Shiv Stotra:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ गरीबी का सामना कर रहे, शून्यता की भावना रखने वाले व्यक्तियों को नियमित रूप से दारिद्रय दहन शिव स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र | Daridraya Dahana Shiv Stotra विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कणामृताय शशिशेखरधारणाय | कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय || 1|| गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय | गंगाधराय गजराजविमर्दनाय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय || 2|| भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय | ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय || 3|| चर्मम्बराय शवभस्मविलेपनाय भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय | मंझीरपादयुगलाय जटाधराय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय || 4|| पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय | आनन्दभूमिवरदाय तमोमयाय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय || 5|| भानुप्रियाय भवसागरतारणाय कालान्तकाय कमलासनपूजिताय | नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय || 6|| रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय | पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय || 7|| मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय | मातङ्गचर्मवसनाय महेश्वराय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय || 8|| वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणं | सर्वसंपत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम् | त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात् || 9|| || इति श्रीवसिष्ठविरचितं दारिद्र्यदहनशिवस्तोत्रं सम्पूर्णम् ||

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Das Mahavidya Stotra | दस महाविद्या स्तोत्र

Das Mahavidya Stotra:दस महाविद्या स्तोत्र, 10 महाविद्या स्तोत्रम (दस महाविद्या स्तोत्र): पारलौकिक ज्ञान की दस वस्तुओं को दस महाविद्या के रूप में जाना जाता है। इनमें से प्रत्येक वस्तु को हिंदू पूजा की परंपरा में एक महिला देवता या देवी के रूप में दर्शाया गया है। सच में, ये देवी केवल समय, जीवन और ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के चक्र का प्रतिनिधित्व करती हैं जो हमारे जीवन और ब्रह्मांड में घटती-बढ़ती रहती हैं। इन दस ऊर्जाओं में सभी ज्ञान, सभी क्षमताएँ – भूत, वर्तमान और भविष्य समाहित हैं। इन शक्तिशाली देवी या प्रकृति की शक्तियों में से प्रत्येक के ब्रह्मांडीय चित्रमय निरूपण को यंत्र या रहस्यमय डिज़ाइन कहा जाता है। Das Mahavidya Stotra प्रत्येक अपनी शक्ति (बल) में अद्वितीय है और उन लोगों को अपनी अंतर्निहित शक्ति प्रदान करने में सक्षम है जो ध्यान करते हैं और प्रतिनिधि डिज़ाइनों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। दस देवियों या उनकी ज्यामितीय आकृतियों पर ध्यान करने से, ऐसा कहा जाता है कि प्रत्येक देवी अपनी ऊर्जा के अनुसार अपने उपहारों के साथ उपासक को आशीर्वाद देती है। इस देवी का ध्यान करने से आप सहज रूप से समय के अर्थ और इस तथ्य का अनुभव करेंगे कि समय ही सभी का भक्षक है। समय ही वह माध्यम है जिसके भीतर सभी चीजें जन्म लेती हैं और मरती हैं। इसलिए 10 महाविद्या स्तोत्रम साधक को निर्भयता, समय और मृत्यु पर विजय और अमरता प्रदान करता है। जो लोग इस यंत्र की पूजा करना चुनते हैं, वे दुनिया से अलग हो जाते हैं Das Mahavidya Stotra और इसलिए उन्हें इसकी शक्ति से जुड़ने का प्रयास करने से पहले पारंपरिक अर्थों में अपनी जिम्मेदारियों पर विचार करने की आवश्यकता होती है। तंत्र में, देवी-शक्ति की पूजा को विद्या कहा जाता है। सैकड़ों तांत्रिक साधनाओं में से, दस प्रमुख देवियों की पूजा को दस महाविद्या कहा जाता है। देवी के इन प्रमुख रूपों का वर्णन तोडाल तंत्र में किया गया है। Das Mahavidya Stotra वे हैं काली, तारा, महा त्रिपुर सुंदरी (या षोडशी-श्री विद्या), भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला। शक्ति के ये दस पहलू संपूर्ण सृष्टि का प्रतीक हैं। Das Mahavidya Stotra:दास महाविद्या स्तोत्र के लाभ: वैदिक विधि से दस महाविद्या स्तोत्र के कई “स्तर” हैं। जैसे कि दस महाविद्या स्तोत्र के पाठ Das Mahavidya Stotra के साथ यंत्र की सरल पूजा, उपचारात्मक ज्योतिषीय उपाय के रूप में, इस तंत्र से जुड़ी विभिन्न सिद्धियाँ प्राप्त करने और आध्यात्मिक मोक्ष के लिए सभी तांत्रिक अनुष्ठानों के साथ विस्तृत पूजा।आपकी सभी भौतिकवादी इच्छाएँ पूरी होंगी।आप मोक्ष प्राप्त करेंगे।आपको देवी पार्वती का आशीर्वाद मिलेगा।भक्त बीमारियों से सुरक्षित रहेगा और मौजूदा बीमारियों से राहत मिलेगी।दास महाविद्या स्तोत्र से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा।10 महाविद्या स्तोत्रम, आपको धन, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होगी।यदि आप दस महाविद्या स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो आप अधिक साहसी बनेंगे। Das Mahavidya Stotra:किसको यह स्तोत्र पढ़ना चाहिए: जो लोग धन, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें वैदिक नियम के अनुसार नियमित रूप से दस महाविद्या स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। Das Mahavidya Stotra | दस महाविद्या स्तोत्र नमस्ते चण्डिके । चण्डि । चण्ड-मुण्ड-विनाशिनि । नमस्ते कालिके । काल-महा-भय-विनाशिनी । ।।1।। शिवे । रक्ष जगद्धात्रि । प्रसीद हरि-वल्लभे । प्रणमामि जगद्धात्रीं, जगत्-पालन-कारिणीम् ।।2।। जगत्-क्षोभ-करीं विद्यां, जगत्-सृष्टि-विधायिनीम् । करालां विकटा घोरां, मुण्ड-माला-विभूषिताम् ।।3।। हरार्चितां हराराध्यां, नमामि हर-वल्लभाम् । गौरीं गुरु-प्रियां गौर-वर्णालंकार-भूषिताम् ।।4।। हरि-प्रियां महा-मायां, नमामि ब्रह्म-पूजिताम् । सिद्धां सिद्धेश्वरीं सिद्ध-विद्या-धर-गणैर्युताम् ।।5।। मन्त्र-सिद्धि-प्रदां योनि-सिद्धिदां लिंग-शोभिताम् । प्रणमामि महा-मायां, दुर्गा दुर्गति-नाशिनीम् ।।6।। उग्रामुग्रमयीमुग्र-तारामुग्र – गणैर्युताम् । नीलां नील-घन-श्यामां, नमामि नील-सुन्दरीम् ।।7।। श्यामांगीं श्याम-घटिकां, श्याम-वर्ण-विभूषिताम् । प्रणामामि जगद्धात्रीं, गौरीं सर्वार्थ-साधिनीम् ।।8।। विश्वेश्वरीं महा-घोरां, विकटां घोर-नादिनीम् । आद्यामाद्य-गुरोराद्यामाद्यानाथ-प्रपूजिताम् ।।9।। श्रीदुर्गां धनदामन्न-पूर्णां पद्मां सुरेश्वरीम् । प्रणमामि जगद्धात्रीं, चन्द्र-शेखर-वल्लभाम् ।।10।। त्रिपुरा-सुन्दरीं बालामबला-गण-भूषिताम् । शिवदूतीं शिवाराध्यां, शिव-ध्येयां सनातनीम् ।।11।। सुन्दरीं तारिणीं सर्व-शिवा-गण-विभूषिताम् । नारायणीं विष्णु-पूज्यां, ब्रह्म-विष्णु-हर-प्रियाम् ।।12।। सर्व-सिद्धि-प्रदां नित्यामनित्य-गण-वर्जिताम् । सगुणां निर्गुणां ध्येयामर्चितां सर्व-सिद्धिदाम् ।।13।। विद्यां सिद्धि-प्रदां विद्यां, महा-विद्या-महेश्वरीम् । महेश-भक्तां माहेशीं, महा-काल-प्रपूजिताम् ।।14।। प्रणमामि जगद्धात्रीं, शुम्भासुर-विमर्दिनीम् । रक्त-प्रियां रक्त-वर्णां, रक्त-वीज-विमर्दिनीम् ।।15।। भैरवीं भुवना-देवीं, लोल-जिह्वां सुरेश्वरीम् । चतुर्भुजां दश-भुजामष्टा-दश-भुजां शुभाम् ।।16।। त्रिपुरेशीं विश्व-नाथ-प्रियां विश्वेश्वरीं शिवाम् । अट्टहासामट्टहास-प्रियां धूम्र-विनाशिनीम् ।।17।।  कमलां छिन्न-मस्तां च, मातंगीं सुर-सुन्दरीम् । षोडशीं विजयां भीमां, धूम्रां च बगलामुखीम् ।।18।। सर्व-सिद्धि-प्रदां सर्व-विद्या-मन्त्र-विशोधिनीम् । प्रणमामि जगत्तारां, सारं मन्त्र-सिद्धये ।।19।। ।।फल-श्रुति।। इत्येवं व वरारोहे, स्तोत्रं सिद्धि-करं प्रियम् । पठित्वा मोक्षमाप्नोति, सत्यं वै गिरि-नन्दिनि ।।1।। कुज-वारे चतुर्दश्याममायां जीव-वासरे । शुक्रे निशि-गते स्तोत्रं, पठित्वा मोक्षमाप्नुयात् ।।2।। त्रिपक्षे मन्त्र-सिद्धिः स्यात्, स्तोत्र-पाठाद्धि शंकरी । चतुर्दश्यां निशा-भागे, शनि-भौम-दिने तथा ।।3।। निशा-मुखे पठेत् स्तोत्रं, मन्त्र-सिद्धिमवाप्नुयात् । केवलं स्तोत्र-पाठाद्धि, मन्त्र-सिद्धिरनुत्तमा । जागर्ति सततं चण्डी-स्तोत्र-पाठाद्-भुजंगिनी ।।4।। श्रीमुण्ड-माला-तन्त्रे एकादश-पटले महा-विद्या-स्तोत्रम्।।

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Shani Dashrath Stotra | शनि दशरथ स्तोत्र

Shani Dashrath Stotra:शनि दशरथ स्तोत्र: जब किसी जातक की कुंडली में शनि ग्रह गोचर में या शनि के गोचर में तथा शनि ग्रह की खराब स्थिति में बुरा प्रभाव दे रहा हो, तो शनि दशरथ स्तोत्र का प्रतिदिन जाप करने, प्रतिदिन पाठ करने से शनि अपना बुरा प्रभाव छोड़कर अच्छे परिणाम देने लगते हैं। जो लोग शनि ग्रह की महादशा, शनि साढ़ेसाती, शनि ढैय्या या शनि से पीड़ित हैं, Shani Dashrath Stotra उन्हें दशरथ कृत शनि स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए। इस पाठ को नियमित करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं तथा जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं और जीवन को सुखमय बनाते हैं। सम्राट दशरथ ही एकमात्र व्यक्ति थे, जिन्होंने भगवान शनिश्वर को द्वंद्वयुद्ध के लिए बुलाया था, क्योंकि उन्हें अपने देश से सूखा और दरिद्रता लेकर जाना था। भगवान शनिश्वर ने दशरथ के गुणों की प्रशंसा की और उन्हें उत्तर दिया कि मैं अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं हो सकता, लेकिन मैं आपके साहस से प्रसन्न हूं। महान ऋषि ऋष्यश्रृंग आपकी सहायता कर सकते हैं। स्कंद पुराण में कथा है कि काशी कुल में शनि ने अपने पिता भगवान सूर्य से प्रार्थना की थी कि मैं ऐसा पद पाना चाहता हूं जो अब तक किसी को नहीं मिला, मेरा पटल आपके पटल से सात गुना बड़ा है और मेरी गति का सामना कोई नहीं कर सकता, चाहे वह देवता, असुर, राक्षस, क्या नहीं। यह सुनकर सूर्य देव प्रसन्न हुए और कहा कि इसके लिए उन्हें काशी जाकर भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए। शनि ने अपने पिता की इच्छानुसार वैसा ही किया और शिव ने प्रसन्न होकर शनि को ग्रह स्थान देकर नए ग्रह मंडल में स्थापित कर दिया। जो लोग शनि ग्रह से पीड़ित हैं या उनकी कुंडली में शनि, साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है तो उन्हें Shani Dashrath Stotra शनि दशरथ स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए। शनि दशरथ स्तोत्र के नियमित पाठ से शनि प्रसन्न होते हैं और जीवन को सुखमय बनाते हैं। जिन लोगों को संस्कृत पढ़ने में परेशानी होती है, उनके लिए यह स्त्रोत है। ऐसा कहा जाता है कि Shani Dashrath Stotra राजा दशरथ के शासनकाल में जब शनि रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने वाले थे, तब राजा दशरथ ने शनि की पूजा की और उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर शनि ने राजा दशरथ के शासनकाल में रोहिणी में प्रवेश नहीं किया। इसलिए शनि दशरथ स्तोत्र को शनि संबंधी परेशानियों के लिए एक बेहतरीन उपाय माना जाता है। Shani Dashrath Stotra:शनि दशरथ स्तोत्र के लाभ: शनि दशरथ स्तोत्र उन लोगों के लिए बहुत मददगार है जो साढ़ेसाती, शनि ढैया या कंटक शनि के प्रभाव में हैं और यहां तक ​​कि उन लोगों के लिए भी जिनकी कुंडली में शनि अशुभ है या शनि की दशा चल रही है। Shani Dashrath Stotra:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र: शनि के बुरे प्रभाव में रहने वाले व्यक्ति को नियमित रूप से शनि दशरथ स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। Shani Dashrath Stotra | शनि दशरथ स्तोत्र नित्य इस स्तोत्र के पाठ मात्र से शनि ग्रह कितना भी अशुभ हो, निश्चित रूप से शांत हो कर शुभ परिणाम प्रदान करता ही है। नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च। नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।1।। नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च । नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।2।। नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:। नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।3।। नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम: । नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।4।। नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते। सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च ।।5।। अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते । नमो मन्दगते तुभ्यं निरिाणाय नमोऽस्तुते ।।6।। तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च । नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम: ।।7।। ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे । तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ।।8।। देवासुरमनुष्याश्च सिद्घविद्याधरोरगा: । त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।9।। प्रसाद कुरु मे देव वाराहोऽहमुपागत । एवं स्तुतस्तद सौरिग्र्रहराजो महाबल: ।।10।।

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