Dream Meaning:सपने में खुद को महाकुंभ में स्रान करते देखने का क्या होता है मतलब? जानें

Dream Meaning: सपने में महाकुंभ में खुद को स्नान करते देखने का अर्थ क्या होता है, इसके बारे में आज हम आपको अपने इस लेख में जानकारी देंगे। Dream Meaning: महाकुंभ का मेला 13 जनवरी से धर्म नगरी प्रयागराज में शुरू हो चुका है। 26 जनवरी को महाकुंभ मेले का समापन होगा। महाकुंभ को लेकर पूरी दुनिया में इस दौरान चर्चाएं हैं और इसकी विशालता को देखकर हर कोई हैरान है। Dream Meaning ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि अगर आप कभी सपने में खुद को महाकुंभ में स्नान करते देखते हैं, तो इसका क्या अर्थ होता है। ये सपना शुभ होता है या अशुभ आइए विस्तार से जानते हैं।  Dream Meaning:सपने में महाकुंभ में डुबकी लगाने का मतलब महाकुंभ का मेला वर्षों के बाद लगता है। ये हिंदू धर्म के पवित्र पर्वों में से एक है। ऐसे में अगर आप कभी सपने में खुद को महाकुंभ में नहाते देख लेते हैं तो इसे बेहद शुभ संकेत माना जाता है। स्वप्नशास्त्र में पवित्र नदियों में नहाना बेहद शुभ माना जाता है। Dream Meaning वहीं अगर आप महाकुंभ Dream Meaning में खुद को नहाते देख लें तो समझ जाइए आपका आध्यात्मिक उत्थान होने वाला है। आप जीवन में उन्नति के पथ पर अग्रसर हो सकते हैं और कई अच्छे अनुभव आपको प्राप्त हो सकते हैं। इसके साथ ही महाकुंभ में खुद को नहाते देखना इस बात का भी संकेत है कि आपका मन पवित्रता की ओर बढ़ रहा है।  शांति और तनाव मुक्ति का संकेत अगर आप सपने में महाकुंभ में नहाते खुद को देखते हैं तो ये सपना आपकी मानसिक शांति को भी दर्शाता है।  इसका अर्थ यह भी है कि आप जीवन में जिन बातों को लेकर तनावग्रस्त थे उनका हल आपको मिल सकता है। कई तरह के अच्छे अनुभव भी आपको ऐसा सपना आने के बाद हो सकते हैं।  महाकुंभ के मेले को देखना  सपने में अगर आप देखें कि आप महाकुंभ में शामिल हुए हैं, यानि आपने डुबकी नहीं लगाई लेकिन आप किसी घाट पर खड़े हैं, तो ये सपना बदलाव का संकेत देता है। इसका अर्थ होता है कि, आप जीवन में जिस मार्ग पर चल रहे हैं उससे कुछ अलग करने की आपकी इच्छा है। हालांकि यह सपना सकारात्मक बदलाव की ओर ही इशारा करता है।  सपने में परिवार के साथ खुद को महाकुंभ में देखना  अगर आप सपने में सपरिवार खुद को महाकुंभ में डुबकी लगाते देखते हैं, तो समझ जाइए पारिवारिक जीवन में सुख-समृद्धि आपको प्राप्त होने वाली है। आपको परिवार के किसी व्यक्ति से शुभ समाचार भी मिल सकता है। इसके साथ ही यह सपना दर्शाता है कि आपके जीवन में परिवार से जुड़ी समस्याओं का अंत जल्द ही हो सकता है।  (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर क्या करें और क्या न करें, मिलेगा महादेव का आशीर्वाद

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे फाल्गुन माह में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं जीवन में सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जिसका पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। Maha Shivratri 2025 Puja: महाशिवरात्रि इस साल 26 फरवरी को है। महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था और इस दिन दो भी महादेव की उपासना करता है, Mahashivratri 2025:उसे दोगुना फल प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिर जाकर भगवान शिव को फल-फूल अर्पित करते हैं और शिवलिंग पर दूध व जल अर्पित करते हैं। महाशिवरात्रि के दिन देशभर के सभी शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। इस दिन पूजा की भी खास विधि होती है। हालांकि, पूजा करते समय आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखने की भी जरूरत है। वरना भगवान शिव आपसे नाराज हो सकते हैं। Mahashivratri 2025 तो आज की इस खबर में हम आपको उन चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपको करनी है। साथ ही वह चीजें भी बता रहे हैं, जो आपको नहीं करनी है। आइए जानते हैं। Mahashivratri 2025:महाशिवरात्रि व्रत के नियम अगर आप  महाशिवरात्रि का व्रत रख रहे हैं, तो इस दिन दोपहर में सोने से बचें। महाशिवरात्रि के दिन भूलकर भी शिवलिंग पर चढ़ा भोग ग्रहण न करें। यदि महाशिवरात्रि पर उपवास किया है तो अन्न का सेवन न करें। आप फलाहार खा सकते है। महाशिवरात्रि में कुछ भक्त निर्जला उपवास रखते हैं, ऐसे में आप पूरा दिन जल की एक बूंद भी ग्रहण न करें। महाशिवरात्रि के दिन शिव जी का जलाभिषेक जरूर करें। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। महाशिवरात्रि पर पूरा दिन भगवान शिव का ध्यान करें। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। महाशिवरात्रि के व्रत में साबुत अनाज और सफेद नमक का उपयोग न करें। इस दिन घर में भूलकर भी मांस मदिरा न लाएं। महाशिवरात्रि के व्रत में आप साबूदाना खिचड़ी, सिंघाड़े का हलवा, कुट्टू  का सेवन करें। इस दिन मन को शांत रखें और किसी से भी लड़ाई झगड़ा न करें। महाशिवरात्रि पर शाम को भोलेनाथ की पूजा अवश्य करें। महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये काम काले-नीले रंग के कपड़े पहनने से बचें महाशिवरात्रि के दिन आपको काले और नीले कपड़े पहनने से बचना चाहिए। Mahashivratri 2025 इस दिन लाल-पीले या हरे रंग के कपड़े शुभ माने जाते हैं। इसलिए सुबह-सुबह नहाकर आप इसी रंग के कपड़े पहनकर पूजा करें। Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की पूजा से मोक्ष की होगी प्राप्ति, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत विधि Maha Shivratri:2025 में महाशिवरात्रि कब है? नोट कर लें डेट और पूजा-विधि Mahashivratri 2025:मेष राशि वाले आज करें इस मंत्र का जाप, वैवाहिक जीवन में आएगी खुशहाली, जानें 12 राशियों के लिए शिव मंत्र महाशिवरात्रि व्रत कथा अन्न का सेवन न करेंMahashivratri 2025:महाशिवरात्रि के दिन आपको व्रत रखना चाहिए। Mahashivratri 2025 इस दिन कई लोग खाली पेट ही भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं और बाद में फलाहार करते हैं। ऐसे में कोशिश करें कि इस दिन आप अन्न की जगह दूध या फलों का सेवन कर और सूर्य के अस्त होने के बाद कुछ भी खाने से बचें। देर तक न सोएं महाशिवरात्रि के दिन सुबह उठकर ही पूजा करना ही शुभ होता है। Mahashivratri 2025 इस दिन देर तक सोने से बचना चाहिए। अगर आपमें सामर्थ है तो आप रात में जाग भी सकते हैं। इससे काफी शुभ फल मिलता है। किसी से झगड़ा न करेंइस दिन आपको किसी से भी झगड़ा करने से बचना चाहिए। साथ ही मुंह से अपशब्द भी नहीं निकालने चाहिए। यही नहीं, इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। साथ ही घर में कलेश आदि नहीं होना चाहिए। क्या करना चाहिए भगवान का करें अभिषेकमहाशिवरात्रि के दिन महादेव का रुद्राभिषेक या अभिषेक जरूर करना चाहिए। यही नहीं, आप ओम नमः शिवाय बोलते हुए भी इस काम को अच्छी तरह कर सकते हैं। चाह प्रहर की पूजा करेंअगर संभव हो तो आप महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा कर सकते हैं। यह विशेष फलदायी मानी जाती है। इसके साथ महामृत्युंजय मंत्र का जप करना भी शुभ होता है। घर में कर सकते हैं शिवलिंग की स्थापनायह दिन शिवलिंग की स्थापना के लिए काफी शुभ माना जाता है। अगर आप घर में शिवलिंग लाकर पूजा करना चाहते हैं तो यह फलदायी होगा। बेलपत्र के नीचे करें स्नानअगर संभव हो तो इस दिन बेलपत्र के पेड़ के नीचे स्नान करना बहुत ही फलदायक होता है। शिवपुराण की मानें तो बेल वृक्ष के नीचे स्नान करने से कई जन्मों के पाप कट जाते हैं। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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Falgun Amavasya 2025 Date and Shubh Muhurat:फरवरी में फाल्गुन अमावस्या कब है? जानें डेट व स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

Falgun Amavasya 2025 Shubh Muhurat: हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या पर शुभ मुहूर्त में स्नान-दान करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इससे भगवान विष्णु व पितृदेव के प्रसन्न होने की भी मान्यता है। सनातन धर्म में फाल्गुन महीने में पड़ने वाली अमावस्या को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya 2025) के पर्व को होली से पहले मनाया जाता है। इस तिथि पर पवित्र नदी में स्नान ध्यान और दान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन कामों को करने से व्यक्ति को पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। फाल्गुन अमावस्या 2024 डेट और शुभ मुहूर्त (Falgun Amavasya 2025 Date and Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 27 फरवरी को सुबह 08 बजकर 54 मिनट से होगी और इसके अगले दिन यानी 28 फरवरी को सुबह 06 बजकर 14 मिनट पर तिथि का समापन होगा। ऐसे में फाल्गुन अमावस्या का पर्व 27 फरवरी को मनाया जाएगा। फाल्गुन अमावस्या पर बन रहे शुभ योग: फाल्गुन अमावस्या पर शिव व साध्य योग का शुभ संयोग बन रहे हैं। Falgun Amavasya 2025 शिव योग रात 11 बजकर 41 मिनट तक रहेगा और इसके बाद साध्य योग प्रारंभ होगा। ज्योतिष शास्त्र में शिव व साध्य योग अत्यंत शुभ माने गए हैं। मान्यता है कि ये शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ होते हैं और इस अवधि में किए गए कार्यों के शुभ फल प्राप्त होते हैं। फाल्गुन अमावस्या पर राहुकाल का समय: फाल्गुन अमावस्या पर राहुकाल दोपहर 2 बजे से दोपहर 03 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ माना गया है। इस दौरान शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। Falgun Amavasya 2025:फाल्गुन अमावस्या पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त- 05:08 ए एम से 05:58 ए एम अभिजित मुहूर्त- 12:11 पी एम से 12:57 पी एम विजय मुहूर्त- 02:29 पी एम से 03:15 पी एम गोधूलि मुहूर्त- 06:17 पी एम से 06:42 पी एम Falgun Amavasya 2025:शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 05 बजकर 09 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 07 मिनट से शाम 06 बजकर 42 मिनट तकनिशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 08 मिनट से 12 फरवरी रात 12 बजकर 58 मिनट तकअभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक सूर्योदय और सूर्यास्त का समय सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 48 मिनट परसूर्यास्त – शाम 06 बजकर 20 मिनट परचंद्रोदय – कोई नहींचन्द्रास्त – शाम 05 बजकर 42 मिनट पर फाल्गुन अमावस्या पूजा विधि (Falgun Amavasya Puja Vidhi) फाल्गुन अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। इस दौरान सच्चे मन से पितरों की मोक्ष प्राप्ति की कामना करें। दीपक जलाकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें। फल और मिठाई का भोग लगाएं। विष्णु जी के मंत्रों का जप करें। इसके बाद जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। मंदिर या फिर गरीब लोगों में श्रद्धा अनुसार अन्न, धन और कपड़े का दान करें। धार्मिक मान्यत है कि फाल्गुन अमावस्या के दिन दान करने से व्यक्ति को जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं होती है। फाल्गुन अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध करने का विशेष महत्व है।

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Daridrta Naashak Stotra | दरिद्रता नाशक स्तोत्र

Daridrta Naashak Stotra:दरिद्रता नाशक स्तोत्र: दरिद्रता नाशक स्तोत्र महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित है। संकट बहुत अधिक हो तो शिव मंदिर में या शिव प्रतिमा के सामने प्रतिदिन तीन बार इसका पाठ करने से विशेष लाभ होगा। क्लेशग्रस्त व्यक्ति यदि स्वयं पाठ करे तो उसे उत्तम फल की प्राप्ति होती है, किन्तु यदि कोई स्वजन, पत्नी या माता-पिता आदि कोई व्यक्ति इसका पाठ करें तो अधिक लाभ होता है। यह स्तोत्र भगवान शिव जी को समर्पित है! नियमित रूप से इसका पाठ करने से पूर्व तीन बार विशेष रूप से भगवान शिव को दी जाने वाली दरिद्रता का नाश करने वाले स्तोत्र का जाप करना चाहिए। दरिद्रता नाशक स्तोत्र ऋषि वशिष्ठ द्वारा रचित है। दरिद्रता नाशक का अर्थ है दरिद्रता का नाश। दरिद्रता केवल शारीरिक ही नहीं मानसिक भी होती है। आज के कलिकाल में अधिकांश मनुष्य मानसिक दरिद्रता, नकारात्मक भावनाओं-काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, स्वार्थ, ईर्ष्या, भय आदि से ग्रसित हैं। भगवान शिव की पूजा मनुष्य को भौतिक सुख-समृद्धि के साथ ज्ञान प्रदान कर मन से समृद्ध बनाती है, अर्थात स्वस्थ मन प्रदान करती है, क्योंकि भगवान शिव के सिर पर चंद्रमा है और चंद्रमा मन का कारक है। इसलिए प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा के बाद या जब भी समय मिले, एक बार दारिद्रय नाशक स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए, क्योंकि ‘स्वस्थ मन ही स्वस्थ शरीर है।’ यह सभी सुखों के नाश और दुखों के निवारण का आधार है। यदि संकट बहुत अधिक हो तो शिव मंदिर में या शिव की प्रतिमा के समक्ष प्रतिदिन तीन बार इसका पाठ करने से विशेष लाभ होगा। क्लेशग्रस्त व्यक्ति यदि स्वयं पाठ करे तो उसे उत्तम फल की प्राप्ति होती है, परंतु इसके स्थान पर कोई व्यक्ति जैसे कि कोई परिजन या पत्नी या माता-पिता पाठ करें तो अधिक लाभ होता है। Daridrta Naashak Stotra:दरिद्र नाशक स्तोत्र के लाभ Daridrta Naashak Stotra:प्रतिदिन भगवान शिव के ‘दरिद्र नाशक स्तोत्र’ से अभिषेक करने से व्यक्ति को स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है तथा दरिद्रता से मुक्ति मिलती है। जीवन के हर क्षेत्र में सफलता पाने के लिए आप दरिद्र नाशक स्तोत्र का पाठ कर सफल हो सकते हैं। जीवन में ऊंचाइयों को छूने के लिए ये उपाय/सुझाव आपके लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। ऋषि वशिष्ठ द्वारा रचित दरिद्र नाशक स्तोत्र समस्त रोगों को दूर करने वाला, शीघ्र ही समस्त सम्पत्तियों को देने वाला तथा पितृवंशीय परम्परा को बढ़ाने वाला है। जो व्यक्ति तीनों कालों में दरिद्र नाशक स्तोत्र का पाठ करता है, उसे निश्चित रूप से स्वर्ग की प्राप्ति होती है। किसे करना चाहिए Daridrta Naashak Stotra:इस स्तोत्र का पाठ Daridrta Naashak Stotra:दरिद्रता से ग्रस्त तथा आय में कमी वाले व्यक्ति को परिस्थितियों में सुधार के लिए नियमित रूप से दरिद्र नाशक स्तोत्र का जाप करना चाहिए। दरिद्रता नाशक स्तोत्र | Daridrta Naashak Stotra जय देव जगन्नाथ, जय शंकर शाश्वत। जय सर्व-सुराध्यक्ष, जय सर्व-सुरार्चित।। जय सर्व-गुणातीत, जय सर्व-वर-प्रद। जय नित्य-निराधार, जय विश्वम्भराव्यय।। जय विश्वैक-वेद्येश, जय नागेन्द्र-भूषण। जय गौरी-पते शम्भो, जय चन्द्रार्ध-शेखर।। जय कोट्यर्क-संकाश, जयानन्त-गुणाश्रय। जय रुद्र-विरुपाक्ष, जय चिन्त्य-निरञ्जन।। जय नाथ कृपा-सिन्धो, जय भक्तार्त्ति-भञ्जन। जय दुस्तर-संसार-सागरोत्तारण-प्रभो।। प्रसीद मे महा-भाग, संसारार्त्तस्य खिद्यतः। सर्व-पाप-भयं हृत्वा, रक्ष मां परमेश्वर।। महा-दारिद्रय-मग्नस्य, महा-पाप-हृतस्य च। महा-शोक-विनष्टस्य, महा-रोगातुरस्य च।। ऋणभार-परीत्तस्य, दह्यमानस्य कर्मभिः। ग्रहैः प्रपीड्यमानस्य, प्रसीद मम शंकर।। फलश्रुति दारिद्रयः प्रार्थयेदेवं, पूजान्ते गिरिजा-पतिम्। अर्थाढ्यो वापि राजा वा, प्रार्थयेद् देवमीश्वरम्।। दीर्घमायुः सदाऽऽरोग्यं, कोष-वृद्धिर्बलोन्नतिः। ममास्तु नित्यमानन्दः, प्रसादात् तव शंकर।। शत्रवः संक्षयं यान्तु, प्रसीदन्तु मम गुहाः। नश्यन्तु दस्यवः राष्ट्रे, जनाः सन्तुं निरापदाः।। दुर्भिक्षमरि-सन्तापाः, शमं यान्तु मही-तले। सर्व-शस्य समृद्धिनां, भूयात् सुख-मया दिशः।।

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Dattatreya Stotra | दत्तात्रेय स्तोत्र

Dattatreya Stotra:दत्तात्रेय स्तोत्र: भगवान दत्तात्रेय भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अवतार हैं। वे अनुसूया और महर्षि अत्रि के पुत्र थे। दत्तात्रेय के नाम को दो शब्दों में विभाजित किया जा सकता है, दत्त (साधन) और अत्रि (ऋषि अत्रि)। भगवान दत्तात्रेय को पर्यावरण शिक्षा का शिक्षक माना जाता है। भगवान दत्तात्रेय को हिंदू त्रय ब्रह्मा, विष्णु और शिव का एक रूप माना जाता है। दत्तात्रेय शब्द का शाब्दिक अर्थ दत्त (दिया हुआ) और अत्रेय (ऋषि अत्रि का पुत्र) है, जो ऋषि अत्रि के पुत्र के रूप में खुद को समर्पित करने वाले का सुझाव देता है। भगवान दत्तात्रेय का जन्म पवित्र दंपत्ति अनुसूया और अत्रि से हुआ था। Dattatreya Stotra उन्हें तीन सिरों के साथ दर्शाया गया है जो हिंदू देवताओं के त्रय ब्रह्मा, विष्णु और शिव की एकता को दर्शाता है। दत्तात्रेय सभी देवताओं, पैगंबरों, संतों और योगियों का व्यक्तित्व हैं। वे सभी गुरुओं के गुरु हैं। दत्तात्रेय स्तोत्र हिंदू देवता दत्ता को समर्पित है, जो हिंदू देवताओं ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संयुक्त अवतार हैं। इस मंत्र का जाप करके दत्तात्रेय की प्रार्थना करने से सभी शत्रुओं का नाश होगा, पापों से मुक्ति मिलेगी और महान ज्ञान की प्राप्ति होगी। Dattatreya Stotra:दत्तात्रेय स्तोत्र के लाभ Dattatreya Stotra:हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार दत्तात्रेय स्तोत्र का पाठ करने से मन को शांति मिलती है। दत्तात्रेय के मंत्रों के साथ-साथ उनके दत्तात्रेय स्तोत्र का निरंतर पाठ करने से मानव जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं, तथा मनुष्य में देशभक्ति कम होती है Dattatreya Stotra और वह दिन-प्रतिदिन उन्नति करता है। हर समय आपके आसपास परम गुरु का सुरक्षा कवच – परिवार में सामंजस्य – मन की शांति और चिंताओं और क्लेशों से मुक्ति – बच्चों का कल्याण – बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार – शक्तिशाली वाणी और आत्मविश्वास – ‘पितृशप’ या मृत पूर्वजों द्वारा दिए गए श्राप का निवारण। Dattatreya Stotra:इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है: दत्तात्रेय स्तोत्र बहुत सरल है। इसका जाप कोई भी कर सकता है। इसमें कोई प्रतिबंध नहीं है कि इसे महिलाएं या कोई और कर सकता है या नहीं। वास्तव में, दत्तात्रेय का दिव्य रूप सर्वोच्च वास्तविकता का साक्षात् रूप है और इसलिए धर्म से परे है। इसलिए, किसी भी धर्म के लोग दत्तात्रेय के नाम का जाप कर सकते हैं और उन्हें गुरुओं के गुरु के रूप में पूज सकते हैं। दत्तात्रेय भगवान का एक अत्यंत सौम्य रूप है जो आसानी से प्रसन्न होने वाले और बहुत दयालु हैं। इसलिए, वे ईमानदारी से की गई छोटी-छोटी भक्ति देखकर अत्यधिक प्रसन्न होंगे। दत्तात्रेय स्तोत्र | Dattatreya Stotra भगवान दत्तात्रेय आदि गुरु है, नाथ परम्परा के ये आदि गुरु है, यह स्तोत्र साधक को हर समय कवचित रखता है, जिससे साधक अनेक प्रकार की तामसिक शक्तियों से सुरक्षित रहता है, ग्रह बाधा,तंत्र बाधा,कार्य सिद्धि,सुरक्षा के लिए ये स्तोत्र रामबाण है,“स्मरण मात्रेण संसिध्येत दत्तात्रेय जगद्गुरुं” दत्तात्रेयाष्टचक्रबीज स्तोत्रम् दिगंबरं भस्मसुगन्धलेपनं चक्रं त्रिशूलं डमरुं गदां च । पद्मासनस्थं ऋषिदेववन्दितं दत्तात्रेयध्यानमभीष्टसिद्धिदम् ॥ 1॥ मूलाधारे वारिजपद्मे सचतुष्के वंशंषंसं वर्णविशालैः सुविशालैः । रक्तं वर्णं श्रीभगवतं गणनाथं दत्तात्रेयं श्रीगुरूमूर्तिं प्रणतोऽस्मि ॥ 2॥ स्वाधिष्ठाने षट्दलपद्मे तनुलिंगे बालान्तैस्तद्वर्णविशालैः सुविशालैः । पीतं वर्णं वाक्पतिरूपं द्रुहिणं तं दत्तात्रेयं श्रीगुरूमूर्तिं प्रणतोऽस्मि ॥ 3॥ नाभौ पद्मे पत्रदशांके डफवर्णे लक्ष्मीकान्तं गरूढारूढं मणिपूरे । नीलवर्णं निर्गुणरूपं निगमाक्षं दत्तात्रेयं श्रीगुरूमूर्तिं प्रणतोऽस्मि ॥ 4॥ हृत्पद्मांते द्वादशपत्रे कठवर्णे अनाहतांते वृषभारूढं शिवरूपम् । सर्गस्थित्यंतां कुर्वाणं धवलांगं दत्तात्रेयं श्रीगुरूमूर्तिं प्रणतोऽस्मि ॥5 ॥ कंठस्थाने चक्रविशुद्धे कमलान्ते चंद्राकारे षोडशपत्रे स्वरवर्णे मायाधीशं जीवशिवं तं भगवंतं दत्तात्रेयं श्रीगुरूमूर्तिं प्रणतोऽस्मि ॥ 6॥ आज्ञाचक्रे भृकुटिस्थाने द्विदलान्ते हं क्षं बीजं ज्ञानसमुद्रं गुरूमूर्तिं विद्युत्वर्णं ज्ञानमयं तं निटिलाक्षं दत्तात्रेयं श्रीगुरूमूर्तिं प्रणतोऽस्मि ॥ 7॥ मूर्ध्निस्थाने वारिजपद्मे शशिबीजं शुभ्रं वर्णं पत्रसहस्रे ललनाख्ये हं बीजाख्यं वर्णसहस्रं तूर्यांतं दत्तात्रेयं श्रीगुरूमूर्तिं प्रणतोऽस्मि ॥ 8॥ ब्रह्मानन्दं ब्रह्ममुकुन्दं भगवन्तं ब्रह्मज्ञानं ज्ञानमयं तं स्वयमेव परमात्मानं ब्रह्ममुनीद्रं भसिताङ्गं दत्तात्रेयं श्रीगुरूमूर्तिं प्रणतोऽस्मि ॥ 9॥

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Garud Puran:गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा को यमदूत 24 घंटे के लिए ले जाते हैं ! जानिए किसे मिलता है स्वर्ग और नर्क

Garud Puran:हिन्दू धर्म में गरुड़ पुराण को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें भगवान विष्णु ने अपने वाहन गरुड़ देव से वार्ता के दौरान कुछ ऐसी बातें बताई थीं जिन्हें मनुष्य के लिए जानना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। Garun Puran:प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में मृत्यु एक अटल सत्य है. इन संसार में आये प्रत्येक व्यक्ति को एक दिन इस शरीर का त्याग करके ईश्वर की शरण में जाना होता है. जीवन में उसके द्वारा किये गये कर्मों के आधार पर उसकी गति निश्चित है. यमदूत उसे स्वर्ग या नर्क में भेजने से पहले उसके द्वारा किये गये कर्मों को दिखाते हैं. उसके पश्चात् उसको नर्क या स्वर्ग में भेजा जाता है. इन कर्मों के आधार पर ही गरुण पुराण में लिखा गया है कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद में उसकी आत्मा का क्या होता है. आइये विस्तार से समझते हैं. शरीर त्यागने के बाद कहां जाती है आत्मा:गरूड़ पुराण जो मरने के पश्चात आत्मा के साथ होने वाले व्यवहार की व्याख्या करता है उसके अनुसार जब आत्मा शरीर छोड़ती है तो उसे दो यमदूत लेने आते हैं. Garud Puran मानव अपने जीवन में जो कर्म करता है Garud Puran यमदूत उसे उसके अनुसार अपने साथ ले जाते हैं. अगर मरने वाला सज्जन है, पुण्यात्मा है तो उसके प्राण निकलने में कोई पीड़ा नहीं होती है लेकिन अगर वो दुराचारी या पापी हो तो उसे पीड़ा सहनी पड़ती है. गरूड़ पुराण में यह उल्लेख भी मिलता है कि मृत्यु के बाद आत्मा को यमदूत केवल 24 घंटों के लिए ही ले जाते हैं Garud Puran और इन 24 घंटों के दौरान आत्मा दिखाया जाता है कि उसने कितने पाप और कितने पुण्य किए हैं. इसके बाद आत्मा को फिर उसी घर में छोड़ दिया जाता है जहां उसने शरीर का त्याग किया था. इसके बाद 13 दिन के उत्तर कार्यों तक वह वहीं रहता है. 13 दिन बाद वह फिर यमलोक की यात्रा करता है. Garud Puran:आत्मा को मिलते हैं तीन मार्ग  पुराणों के अनुसार जब भी कोई मनुष्य मरता है और आत्मा शरीर को त्याग कर यात्रा प्रारंभ करती है तो इस दौरान उसे तीन प्रकार के मार्ग मिलते हैं. उस आत्मा को किस मार्ग पर चलाया जाएगा यह केवल उसके कर्मों पर निर्भर करता है. Garud Puran ये तीन मार्ग हैं अर्चि मार्ग, धूम मार्ग और उत्पत्ति-विनाश मार्ग. अर्चि मार्ग ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा के लिए होता है, वहीं धूममार्ग पितृलोक की यात्रा पर ले जाता है और उत्पत्ति-विनाश मार्ग नर्क की यात्रा के लिए है.. गरुड़ पुराण से जानिए मृत्यु के उपरांत क्या-क्या होता है (Garuda Purana in Hindi) गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जब एक आत्मा शरीर त्यागती है, तब सबसे पहले वह यमलोक जाती है। वहां यमदूत 24 घंटे के लिए आत्मा को रखते हैं और व्यक्ति के कर्मों को दिखाया जाता है। 24 घंटे पूर्ण होने के बाद आत्मा को पुनः अपने परिजनों के पास 13 दिनों के लिए भेज दिया जाता है, जहां उनका सम्पूर्ण जीवन बीता था। 13 दिन बाद आत्मा अंतिम बार यमलोक की तरफ प्रस्थान करती है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि 13 दिन बाद यमलोक के मार्ग में आत्मा को तीन मार्ग- स्वर्ग लोक, नर्क लोक और पितृ लोक मिलते हैं। कर्मों के आधार पर व्यक्ति को आत्मा को इन तीनों में से किसी एक लोक में स्थान मिलता है। Garud Puran अपने जीवन काल में यदि व्यक्ति धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर चलता है Garud Puran तो उसे देवलोक की प्राप्ति होती है। जो अपने जीवन काल में कुकर्म करता है और भक्ति से दूर रहता है उसे नर्कलोक में स्थान मिलता है।

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Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की पूजा से मोक्ष की होगी प्राप्ति, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत विधि

Mahashivratri 2025:महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पावन पर्व है, जो हर वर्ष फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से सांसारिक कष्टों से. Mahashivratri 2025 : फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पावन पर्व प्रतिवर्ष मनाया जाता है. इस दिन का भगवान भोलेनाथ के भक्तों को बेसब्री से इंतजार रहता है. Mahashivratri 2025 इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा व्रत आदि करने से समस्त प्रकार के सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है. साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है. भगवान भोलेनाथ का इस दिन जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. आइये विस्तार से जानते हैं शुभ मुहूर्त और व्रत की विधि. महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त : इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी बुधवार के दिन मनाया जाएगा. फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की तिथि का शुभारंभ 26 फरवरी को सुबह 11:00 बजे से शुरू होकर 27 फरवरी प्रातः 8:54 तक रहेगा. महाशिवरात्रि पर निश्चित कल में पूजा करने का फल अधिक माना जाता है. निश्चित कल में रात्रि 12:09 से 12:59 तक महादेव का रुद्राभिषेक करने के लिए यह समय सर्वोत्तम माना गया है. यह समय में तंत्र-मंत्र की सिद्धि एवं साधना आज के लिए अत्यंत शुभ होता है. महाशिवरात्रि व्रत विधि : भगवान शिव की पूजा-वंदना करने के लिए प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (मासिक शिवरात्रि) को व्रत रखा जाता है. लेकिन सबसे बड़ी शिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी होती है. इसे महाशिवरात्रि भी कहा जाता है. वर्ष 2025 में महाशिवरात्रि का व्रत 14 फरवरी को रखा जाएगा. गरुड़ पुराण के अनुसार शिवरात्रि से एक दिन पूर्व त्रयोदशी तिथि में शिव जी की पूजा करनी चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके उपरांत चतुर्दशी तिथि को निराहार रहना चाहिए. महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को जल चढ़ाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराकर “ऊं नमो नम: शिवाय” मंत्र से पूजा करनी चाहिए. इसके बाद रात्रि के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए और अगले दिन प्रात: काल ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए. गरुड़ पुराण के अनुसार इस दिन भगवान शिव को बिल्व पत्र अर्पित करना चाहिए. भगवान शिव को बिल्व पत्र बेहद प्रिय हैं. शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव को रुद्राक्ष, बिल्व पत्र, भांग, शिवलिंग और काशी अतिप्रिय हैं. Shiv Chalisa:शिव चालीसा शिव आरती – ॐ जय शिव ओंकारा (Shiv Aarti – Om Jai Shiv Omkara) Mahashivratri 2025:मेष राशि वाले आज करें इस मंत्र का जाप, वैवाहिक जीवन में आएगी खुशहाली, जानें 12 राशियों के लिए शिव मंत्र Mahashivratri 2025:पूजा विधि Mahashivratri 2025 भगवान शिव को प्रिय वस्तुएं Mahashivratri 2025:महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को विशेष रूप से कुछ चीजें अर्पित की जाती हैं, जिनमें मुख्य रूप से बिल्व पत्र, रुद्राक्ष, भांग, और काशी शामिल हैं। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के उपासकों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है और उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। महाशिवरात्रि का व्रत और पूजा न केवल भक्तों के लिए एक धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि यह उनकी मानसिक शांति और जीवन की दिशा को सही करने में भी मदद करता है।

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Marrige in Dream:10 सपने जो देते हैं वैवाहिक जीवन के शुभ-अशुभ संकेत

Marrige in Dream:हर युवा जानना चाहता है कि उसका जीवनसाथी कौन होगा, कैसा होगा ? जिसे दिल चाहता है क्या वह उसका साथी बनेगा? हमारे सपने हमें संकेत दे‍ते हैं कि हमारी शादी जिससे होगी वह कैसा होगा और शादी जल्दी होगी या देर से… आइए जानें सपनों के संकेत-  Sapne Mein Shadi Dekhna:सपने आमतौर पर हर व्यक्ति देखता है। साथ ही कुछ सपने देखकर व्यक्ति हर जाता है तो कुछ सपने देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। वहीं स्वप्न शास्त्र ये जरूरी नहीं कि जो सपना आपने देखा हो उसका असल जिंदगी में भी वो ही मतलब हो। वहीं सपने हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में जानकारी देते हैं। यहां हम बात करने जा रहे हैं Marrige in Dream कि अगर सपने में आप खुद की शादी या बारात देखें तो इसका क्या मतलब होता है। आइए जानते हैं… Marrige in Dream:सपने में विवाह की तैयारी देखना Marrige in Dream:स्वप्न शास्त्र अनुसार अगर आपको विवाह की तैयारी के सपने आते हैं तो यह शुभ संकेत नहीं माना जाता है। वहीं इसका मतलब है कि आपको आने वाले दिनों में मानसिक तनाव हो सकता है। Marrige in Dream साथ ही आपको करियर और व्यापार में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही आपको अशुभ सूचना मिल सकती है। 1: सपने में स्वयं को हीरा अथवा हीरे से जड़ा आभूषण उपहार में मिलना शुभ नहीं होता हैं भविष्य में उसका दाम्पत्य जीवन सुखमय नहीं रहेगा। 2:  स्वप्न में स्वयं खुश होकर नाचना देखे, तो उसका शीघ्र ही विवाह हो जाता है और उसका दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है। 3:  स्वप्न में कढ़े हुए वस्त्र देखने पर सुन्दर एवं सुशील पत्नी प्राप्ति होती है। 4:  स्वप्न में सोने के आभूषण उपहार स्वरुप प्राप्त हों, तो उसका विवाह किसी धनी व्यक्ति से होता है। 5:  स्वप्न में मेले में घूमना शुभ होता है। योग्य जीवनसाथी मिलता है। 6:  स्वप्न में कोई स्त्री पुरुष किसी की शव-यात्रा देखे, तो उनका दाम्पत्य जीवन कलह-पूर्ण व्यतीत होता है । 7:  स्वप्न में किसी सुरंग में से गुजरने पर दाम्पत्य सुख में बाधाएं उत्पन्न होती है। 8:  पुरुष स्वप्न में अपनी दाढ़ी बनाता है अथवा किसी दूसरे से बनवाता है, तो उसके दाम्पत्य जीवन की समस्त कठिनाइयां समाप्त हो जाती है। 9:  स्वप्न में इन्द्रधनुष देखना शुभ होता है। जीवन में विवाह संबंधी अभिलाषाएं पूर्ण होती है। यह शीघ्र शादी का भी संकेत है। लहराते मोरपंख भी जल्दी शादी की सूचना देते हैं।  10: स्वप्न में किसी पुजारी, पादरी अथवा मौलवी को देखने पर स्वयं जनित कारणों से दाम्पत्य जीवन में विघटन की स्थितियां उत्पन्न होने लगती है।

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Tulsi Stotra | तुलसी स्तोत्र

Tulsi Stotra:तुलसी स्तोत्र: यह तुलसी स्तोत्र संस्कृत में है और यह ब्रह्मा और पुराण से है। तारकासुर एक बहुत क्रूर राक्षस था और उसने देवताओं को पराजित किया था। उसे भगवान ब्रह्मा ने वरदान दिया था। वरदान के अनुसार तारकासुर अमर हो गया था क्योंकि उसे युद्ध में देवताओं, मनुष्यों या देवी-देवताओं से कोई भय और मृत्यु नहीं थी। इसलिए उसका पराभव और मृत्यु असंभव थी। इस प्रकार देवता, मनुष्य और त्रिलोक के सभी लोग राक्षस तारकासुर से बहुत डरते थे। इसलिए उसे हराने का काम भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को सौंपा गया। भगवान शिव ने कार्तिकेय को तुलसी स्तोत्र दिया था। इस तुलसी स्तोत्र के कारण कार्तिकस्वामी ने राक्षस तारकासुर को युद्ध में पराजित किया और उसका वध किया। कार्तिकेय संन्यासी थे इसलिए उन्हें तारकासुर को हराने के लिए चुना गया था। यह तुलसी स्तोत्र बहुत पवित्र है। Tulsi Stotra इस स्तोत्र का प्रतिदिन सुबह पाठ करने से हमें कई लाभ मिलते हैं। यह हमारे लिए अमृत है। जो गरीब हैं वे धनवान बन जाते हैं। जो लोग पुत्र चाहते हैं, उन्हें पुत्र की प्राप्ति होती है। जो लोग बीमारी से पीड़ित हैं, वे ठीक हो जाते हैं और स्वस्थ हो जाते हैं। जो महिलाएं बांझ हैं, उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। हमारी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। Tulsi Stotra इस प्रकार हमें देवी तुलसी और भगवान गोपाल कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्री तुलसी स्तोत्र पवित्र तुलसी के पत्ते को संबोधित है जिसे तुलसी के पौधे के रूप में भी जाना जाता है। तुलसी के पौधे को भगवान विष्णु की पत्नी का अवतार माना जाता है। Tulsi Stotra ऐसा माना जाता है कि अगर भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते चढ़ाए जाएं, तो वे भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। तुलसी स्तोत्र ऋषि पुंडरीका द्वारा लिखा गया था जो तमिलनाडु के थिरुकदलमलाई में रहते थे। हिंदू धर्म में तुलसी को देवी के रूप में पूजा जाता है और कभी-कभी उन्हें विष्णु की पत्नी माना जाता है, कभी-कभी उन्हें विष्णुप्रिया, “विष्णु की प्रिय” के रूप में भी जाना जाता है। भारत में लोग तुलसी को धार्मिक पौधे के रूप में उगाते हैं और उसकी पूजा करते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार तुलसी स्तोत्र का नियमित जाप देवी तुलसी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने का सबसे शक्तिशाली तरीका है। Tulsi Stotra Ke Labh तुलसी स्तोत्र के लाभ: तुलसी स्तोत्र का नियमित जाप करने से मन को शांति मिलती है और आपके जीवन से सभी बुराइयां दूर रहती हैं तथा आप स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनते हैं। Tulsi Stotra:इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: जो जोड़े संतान प्राप्ति चाहते हैं, जिन लोगों के विवाह में समस्या आ रही है, उन्हें इस तुलसी स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। श्री तुलसी स्तोत्र | Tulsi Stotra जगद्धात्रि नमस्तुभ्यं विष्णोश्च प्रियवल्लभे । यतो ब्रह्मादयो देवाः सृष्टिस्थित्यन्तकारिणः ॥१॥ नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे । नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके ॥२॥ तुलसी पातु मां नित्यं सर्वापद्भ्योऽपि सर्वदा । कीर्तितापि स्मृता वापि पवित्रयति मानवम् ॥३॥ नमामि शिरसा देवीं तुलसीं विलसत्तनुम् । यां दृष्ट्वा पापिनो मर्त्या मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषात् ॥४॥ तुलस्या रक्षितं सर्वं जगदेतच्चराचरम् । या विनिहन्ति पापानि दृष्ट्वा वा पापिभिर्नरैः ॥५॥ नमस्तुलस्यतितरां यस्यै बद्ध्वाञ्जलिं कलौ । कलयन्ति सुखं सर्वं स्त्रियो वैश्यास्तथाऽपरे ॥६॥ तुलस्या नापरं किञ्चिद् दैवतं जगतीतले । यथा पवित्रितो लोको विष्णुसङ्गेन वैष्णवः ॥७॥ तुलस्याः पल्लवं विष्णोः शिरस्यारोपितं कलौ । आरोपयति सर्वाणि श्रेयांसि वरमस्तके ॥८॥ तुलस्यां सकला देवा वसन्ति सततं यतः । अतस्तामर्चयेल्लोके सर्वान् देवान् समर्चयन् ॥९॥ नमस्तुलसि सर्वज्ञे पुरुषोत्तमवल्लभे । पाहि मां सर्वपापेभ्यः सर्वसम्पत्प्रदायिके ॥१०॥ इति स्तोत्रं पुरा गीतं पुण्डरीकेण धीमता । विष्णुमर्चयता नित्यं शोभनैस्तुलसीदलैः ॥११॥ तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी । धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनःप्रिया ॥२॥ लक्ष्मीप्रियसखी देवी द्यौर्भूमिरचला चला । षोडशैतानि नामानि तुलस्याः कीर्तयन्नरः ॥१३॥ लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत् । तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पद्मिनी श्रीर्हरिप्रिया ॥१४॥ तुलसि श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे । नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये ॥१५॥

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Tantrotkilan Stotra | तंत्रोत्कीलन स्तोत्र

Tantrotkilan Stotra:तंत्रोत्कीलन स्तोत्र: मानव जीवन का गहन विश्लेषण करने पर पता चलता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन के प्रत्येक क्षण में भय और बाधाओं से सदैव आशंकित रहता है। विस्तृत जांच से पता चलता है कि उसकी सभी शक्तियां एक जटिल बंधन में बंधी हुई हैं। शक्तियों की इस गांठ-अवरोध का संभावित कारण या तो कुछ स्वार्थी लोगों द्वारा किया गया दुर्भावनापूर्ण कार्य हो सकता है या व्यक्ति की स्वयं की कोई संभावित गलती हो सकती है। तंत्रोत्कीलन स्तोत्र जीवन में भय का वातावरण उत्पन्न करता है। जीवन का आनंद प्राप्त करने के लिए इस भय को नष्ट करना होगा। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में भय और बाधाओं को मिटाने के लिए अनेक उपाय करता है। एक कांटा दूसरे कांटे से ही निकाला जा सकता है। इसी प्रकार श्रेष्ठ तंत्र साधनाएं ही जीवन की बाधाओं-समस्याओं को दूर कर सकती हैं। जीवन में कुछ Tantrotkilan Stotra असामान्य घटित हो रहा है या नहीं, यह जानने के लिए अपने स्वयं के जीवन का विश्लेषण करना आवश्यक है। सामान्य समस्याओं का समाधान सामान्य प्रक्रियाओं से किया जा सकता है। हालांकि असामान्य-असामान्य समस्याओं का समाधान विशेष तंत्र साधनाओं से ही संभव है और इसके लिए उच्चस्तरीय तांत्रिक साधना करने की आवश्यकता होती है। गुरुदेव के मार्गदर्शन के अनुसार इसे सिद्ध करने का सर्वोत्तम तरीका है “तंत्र उत्कीलन त्रिपुर साधना”। त्रिपुर भैरवी दस महाविद्याओं में अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रखर शक्ति हैं। वे जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता का आशीर्वाद देती हैं और सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करती हैं। उनकी तंत्र शक्ति के माध्यम से साधक अपनी शक्तियों और क्षमता को बढ़ा सकता है। माता भगवती त्रिपुर भैरवी के भौतिक स्वरूप की आभा में हजारों उगते सूर्यों की चमक है। वे लाल रंग के रेशमी वस्त्रों से सुशोभित हैं। उनके गले में कपाल की माला लटक रही है और दोनों स्तन रक्त से सने हुए हैं। वे अपने हाथों में जप-माला, पुस्तक, अभय-आशीर्वाद मुद्रा और वर-वर मुद्रा धारण करती हैं। उनके माथे पर चंद्रमा शानदार ढंग से चमक रहा है। उनकी तीन आंखें रक्त कमल के समान चमक रही हैं। आप अपने सिर पर रत्नजड़ित मुकुट और चेहरे पर प्रेम भरी मुस्कान धारण करती हैं। कृपया मेरी भक्ति स्वीकार करें। Tantrotkilan Stotra:तंत्रोत्कीलन स्तोत्र के लाभ जब किसी व्यक्ति या परिवार के विरुद्ध कोई दुर्भावनापूर्ण काला जादू किया जाता है, तो उस परिवार को भयंकर विपत्तियों का सामना करना पड़ता है। तांत्रिक बाधाओं के माध्यम से उनकी प्रगति अवरुद्ध हो जाती है। ऐसी स्थितियों के दौरान तंत्र साधना की सिद्धि इन भयानक स्थितियों को खत्म करती है और संभावित क्षमताओं को बढ़ाती है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए जिन व्यक्तियों को जीवन के हर चरण में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें तंत्रोत्कीलन स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। तंत्रोत्कीलन स्तोत्र | Tantrotkilan Stotra ।। पार्वत्युवाच ।। देवेश परमानन्द, भक्तानाम भयं प्रद ! आगमाः निगमाश्चैव, बीजं बीजोदयस्तथा ।।1।। समुदायेन बीजानां, मन्त्रो मंत्रस्य संहिता । ऋषिच्छन्दादिकं भेदो, वैदिकं यामलादिकम् ।।2।। धर्मोऽधर्मस्तथा ज्ञानं, विज्ञानं च विकल्पन । निर्विकल्प-विभागेन, तथा षट्-कर्म-सिद्धये ।।3।। भुक्ति-मुक्ति-प्रकारश्च, सर्वं प्राप्तं प्रसादतः । कीलनं सर्व-मन्त्राणां, शंसयद् हृदये वचः ।।4।। इति श्रुत्वा शिवा-नाथः, पार्वत्या वचनं शुभम् । उवाच परया प्रीत्या, मन्त्रोत्कीलनकं शिवां ।।5।। ।। शिव उचाव ।। वरानने ! हि सर्वस्य, व्यक्ताव्यक्तस्य वस्तुनः । साक्षी-भूय त्वमेवासि, जगतस्तु मनोस्तथा ।।6।। त्वया पृष्टं वरारोहे ! तद्वक्ष्याम्युत्कीलनम् । उद्दीपनं हि मंत्रस्य, सर्वस्योत्कीलनम भवेत् ।।7।। पूरा तव मया भद्रे ! समाकर्षण-वश्यजा । मन्त्राणां कीलिता-सिद्धिः, सर्वे ते सप्त-कोटयः ।।8।। तदानुग्रह-प्रीतस्त्वात्, सिद्धिस्तेषां फलप्रदा । येनोपायेन भवति, तं स्तोत्रं कथाम्यहम ।।9।। श्रृणु भद्रेऽत्र सततमावाम्यामखिलं जगत् । तस्य सिद्धिर्भवेत्तिष्ठे, माया येषां प्रभावकम् ।।10।। अन्नं पानं हि सौभाग्यं, दत्तं तुभ्यं मया शिवे ! संजीवनं च मन्त्राणां, तथा दत्तुं पुनर्धुवम ।।11।। यस्य स्मरण-मात्रेण, पाठेन जपतोऽपि वा ! अकीला अखिला मन्त्राः, सत्यं सत्यं न संशयः ।।12।। विनियोगः सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़कर जल भूमि पर छोड़ दे। ॐ अस्य सर्व-यन्त्र-मन्त्र-तन्त्राणामुत्कीलन-मन्त्र-स्तोत्रस्य मूल-प्रकृतिः ऋषिः, जगतीच्छन्द, निरञ्जनो देवता, क्लीं वीजं, ह्रीं शक्तिः, ह्रः सौं कीलकं, सप्त-कोटि-मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र-कीलकानां सञ्जीवन-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः ॐ मूल-प्रकृतिः ऋषये नमः शिरसि, ॐ जगतीच्छन्दसे नमः मुखे, ॐ निरञ्जनो देवतायै नमः हृदि, ॐ क्लीं वीजाय नमः गुह्ये, ॐ ह्रीं शक्तये नमः पादयो, ॐ ह्रः सौं कीलकाय नमः नाभौ, ॐ सप्त-कोटि-मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र-कीलकानां सञ्जीवन-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः सर्वांगे। षडङ्ग-न्यास: कर-न्यास: ॐ ह्रां अंगुष्ठाभ्यां नमः हृदयाय नमः ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः शिरसे स्वाहा ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः शिखायै वषट् ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः कवचाय हुम् ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः नेत्र-त्रयाय वौषट् ॐ ह्रः करतल-कर-पृष्ठाभ्यां नमः अस्त्राय फट् ध्यानः ॐ ब्रह्म-स्वरुपममलं च निरञ्जनं तं, ज्योतिः-प्रकाशमनिशं महतो महान्तम् । कारुण्य-रुपमति-बोध-करं प्रसन्नं, दिव्यं स्मरामि सततं मनु-जीवनाय ।। एवं ध्यात्वा स्मरेन्नित्यं, तस्य सिद्धिरस्तु सर्वदा । वाञ्छितं फलमाप्नोति, मन्त्र-संजीवनं ध्रुवम् ।। मन्त्रः- ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं सर्व-मन्त्र-यन्त्र-तन्त्रादीनामुत्कीलनं कुरु-कुरु स्वाहा । ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं षट्-पञ्चाक्षराणामुत्कीलय उत्कीलय स्वाहा । ॐ जूं सर्व-मन्त्र-यन्त्र-तन्त्राणां सञ्जीवनं कुरु-कुरु स्वाहा ।ॐ ह्रीं जूं, अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं लृं ॡं एं ऐं ओं औं अं अः, कं खं गं घं ङं, चं छं जं झं ञं, टं ठं डं ढं णं, तं थं दं धं नं, पं फं बं भं मं, यं रं लं वं, शं षं सं हं ळं क्षं । मात्राऽक्षराणां सर्व उत्कीलनं कुरु-कुरु स्वाहा । ॐ सोऽहं हंसोऽहं ॐ सोऽहं हंसोऽहं ॐ सोऽहं हंसोऽहं ॐ सोऽहं हंसोऽहं ॐ सोऽहं हंसोऽहं ॐ सोऽहं हंसोऽहं ॐ सोऽहं हंसोऽहं ॐ सोऽहं हंसोऽहं ॐ सोऽहं हंसोऽहं ॐ सोऽहं हंसोऽहं ॐ सोऽहं हंसोऽहं ॐ जूं सोहं हंसः ॐ ॐ ॐ जूं सोहं हंसः ॐ ॐ ॐ जूं सोहं हंसः ॐ ॐ ॐ जूं सोहं हंसः ॐ ॐ ॐ जूं सोहं हंसः ॐ ॐ ॐ जूं सोहं हंसः ॐ ॐ ॐ जूं सोहं हंसः ॐ ॐ ॐ जूं सोहं हंसः ॐ ॐ ॐ जूं सोहं हंसः ॐ ॐ ॐ जूं सोहं हंसः ॐ ॐ ॐ जूं सोहं हंसः ॐ ॐ हं जूं हं सं गं हं जूं हं सं गं हं जूं हं सं गं हं जूं हं सं गं हं जूं हं सं गं हं जूं हं सं गं हं जूं हं सं गं हं जूं हं सं गं हं जूं हं सं गं हं जूं हं सं गं हं जूं हं सं गं सोऽहं हंसो यं सोऽहं हंसो यं सोऽहं हंसो यं सोऽहं हंसो यं सोऽहं हंसो यं सोऽहं हंसो यं सोऽहं

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Tantra Shanti Stotra | तन्त्र शान्ति स्तोत्र

तन्त्र शान्ति स्तोत्र (Tantra Shanti Stotra): समस्त प्रकार के तंत्र दोषों को दूर करने का मंत्र… इस विघ्न-विनाशक तन्त्र शान्ति मंत्र के पाठ मात्र से भयानक से भयानक तान्त्रिक प्रयोग नष्ट हो जाता है! Tantra Shanti Stotra:तन्त्र शान्ति स्तोत्र पाठ कैसे करे? किसी भी शुक्रवार Tantra Shanti Stotra शाम के समय 5 से 9 के बीच या फिर किसी भी रविवार को सुबह 7 से 11 बजे के बीच लाल ऊनि आसन पर बैठ कर या खड़े होकर इस तन्त्र शान्ति मंत्र को 3 बार बोल कर 21 पढना चाहियें.. इसके पाठ मात्र से ही.. सभी विघ्न और तंत्र दोष नष्ट होकर घर की शान्ति हो जाती है। घर, दुकान और ऑफिस पर ऐसा प्रयोग दुबारा न हो.. रक्षा रहे इसके लिए… घर, दुकान ऑफिस की चौकट पर.. सिद्ध फेत्कारिणी गुटिका लाल कपडें में बांधकर किसी भी मंगलवार लगा दे। तन्त्र शान्ति स्तोत्र | Tantra Shanti Stotra नश्यन्तु प्रेतकुष्माण्डा नश्यन्तु दूष का नराः ।साधकानां शिवाः सन्तु आम्नायपरिपातिनाम् || 1 || जयन्ति मातरः सर्वा जयन्ति योगिनीगणाः ।जयन्ति सिद्धडाकिन्यो जयन्ति गुरुपङ्क्तयः ॥ 2 ॥ जयन्ति साधकाः सर्वे विशुद्धाः साधकाश्च ये ।जयन्ति पूज समयाचारसम्पन्ना का नराः ॥ 3 ॥ नन्दन्तु चाणिमासिद्धाः नन्दन्तु कुलपालकाः ।देवताः सर्वे तृप्यन्तु इन्द्राद्या वास्तुदेवताः ॥ 4 ॥ चचन्द्रसूर्यादयो देवास्तृप्यन्तु भक्तितत: ।मम नक्षत्राणि ग्रहा योगा करणा राशयश्च ये ।। 5 ।। सर्वे ते सुखिनो यान्तु सर्पा नश्यन्तु पक्षिणः ।पशवस्तुरगाचैव पर्वताः कन्दरा गुहाः ॥ 6 ॥ ऋषयो ब्राह्मणाः सर्वे शान्ति कुर्वन्तु सर्वदा ।स्तुता मे विदिताः सन्तु सिद्धास्तिष्ठन्तु पूजकाः ॥ 7॥ ये ये पापधियस्सुदूषणरता मन्निन्दकाः पूजने ।वेदाचारविमर्दनेष्टहृदया भ्रष्टष्य ये साधकाः ॥ दृष्टवा चक्रमपूर्वमन्दहृदया ये कोलिका दूषकास्ते ।ते यान्तु विनाशमत्र समय श्री भैरवस्याज्ञया ।। 8 ।। द्वेष्टारः साधकानां सदैवाम्नायदूषकाः ।डाकिनीनां मुखे यान्तु तृप्तास्तत्पिशितैः स्तुताः ।। 9 ।। ये वा शक्तिपरायणा: शिवपरा ये वैष्णवाः साधवः ।सर्वस्मादखिले सुराधिपमजं सेव्यं सुरेः सन्ततम् ॥ 10 ॥ शक्तिं विष्णुधिया शिवं च सुधिया श्री कृष्णबुद्धया च ये ।सेवन्ते त्रिपुरं त्वभेदमतयो गच्छन्तु मोक्षन्तु ते ॥ 11 ॥ शत्रवो नाशमायान्तु मम निन्दाकरच ये ।द्वेष्टारः साधकानां च ते नश्यन्तु शिवाज्ञया ॥ 12 ॥ ततः परं पठेत स्तोत्रमानन्दस्तोत्रमुत्तमम् ॥॥ इति शान्ति स्तोत्रम् ॥

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Vijaya Ekadashi 2025: विजया एकादशी पर शिववास योग समेत बन रहे हैं ये 3 अद्भुत संयोग, सभी मुरादें होंगी पूरी

Vijaya Ekadashi 2025 Shubh Muhurat : फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली विजया एकादशी को विशेष रूप से शुभ माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने भी लंका विजय से पहले यह व्रत रखा था। इस वर्ष विजया एकादशी कब है और इसकी पूजा विधि क्या है, आइए जानते हैं। Vijaya Ekadashi 2025 : हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी का पर्व मनाया जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्रीराम ने भी लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए इस व्रत का पालन किया था। विजया एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त | Vijaya Ekadashi 2025 date and auspicious time वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 23 फरवरी को दोपहर 01 बजकर 55 मिनट पर होगा। वहीं, तिथि का समापन अगले दिन यानी 24 फरवरी को दोपहर 01 बजकर 44 मिनट पर होगा। इस प्रकार विजया एकादशी 24 फरवरी को मनाई जाएगी।   विजया एकादशी पर बन रहे शुभ योग | Auspicious yoga is being formed on Vijaya Ekadashi ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 11 मिनट से 06 बजकर 01 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 40 मिनट तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 09 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक Vijaya Ekadashi 2025 puja or vrat ki vidhi पूजा और व्रत की विधि प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थल को साफ कर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। भगवान विष्णु को वस्त्र, चंदन, धूप, दीप, पुष्प, तुलसी दल और मिष्ठान अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। मां लक्ष्मी की पूजा भी विधिपूर्वक करें। दिनभर व्रत रखें और केवल फलाहार करें। अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करें। Vishnu Chalisa:विष्णु चालीसा श्री विष्णुसहस्रनाम Sri Vishnu sahasranaam satrotam विष्णुस्तुतिः vishnustutih Vijaya Ekadashi 2025 ke din Pramukh Muhurat विजया एकादशी के दिन प्रमुख मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:11 से 06:01 बजे तक विजय मुहूर्त: दोपहर 02:29 से 03:15 बजे तक गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:15 से 06:40 बजे तक निशिता मुहूर्त: रात्रि 12:09 से 12:59 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:57 बजे तक अमृतकाल: दोपहर 02:07 से 03:44 बजे तक Vijaya Ekadashi 2025 Vrat ka Mahetwa विजया एकादशी व्रत का महत्व हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है, बल्कि भौतिक सुख-समृद्धि भी प्रदान करता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस व्रत को करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो भी व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा और भक्ति से करता है, उसे जीवन में सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Vijaya Ekadashi 2025 ke din En chijo ka dhan kare विजया एकादशी पर करें इन चीजों का दान सनातन धर्म में हल्दी का प्रयोग शुभ और मांगलिक कामों में किया जाता है। यदि आप किसी ग्रह दोष का सामना कर रहे हैं, तो विजया एकादशी के दिन पूजा करने के बाद हल्दी का दान करें। मान्यता है कि हल्दी का दान करने से ग्रह दोष दूर होता है और मनचाहा करियर मिलता है। इसके अलावा अन्न और धन का दान करना जीवन के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि विजया एकादशी के दिन अन्न और धन का दान करने से जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं होती।  

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