Unknown Faces In Dream:सपने में किसी अजनबी को देखना देता है कुछ संकेत

 Unknown Faces In Dream:स्वप्न शास्त्र के अनुसार व्यक्ति के सपने उन्हें भविष्य में घटने वाली घटनाओं को लेकर पहले से हीसचेत करते हैं. जानें अगर सपने में आपको अनजान चेहरे दिखाई देते हैं, तो इसका क्या अर्थ होता  है. अगर आप सपने में किसी ऐसे व्यक्ति को देखते हैं जिससे पहले कभी न मिले हों, तो ये सपना आपके जीवन के लिए कुछ विशेष संकेत दे सकता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानें।  Unknown Faces In Dream Meaning: स्वप्न शास्त्र में बहुत से ऐसे सपनों का जिक्र किया है, जो भविष्य में घटने वाली घटनाओं को लेकर सचेत करते हैं. बंद आंख से देखे गए सपने शुभ और अशुभ दोनों ही हो सकते हैं. लेकिन आंख खुलते ही सपनों का अस्तित्व खत्म हो जाते हैं. कुछ सपने में कई तरह के संकेत देते हैं. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि अगर आपको सपने में कोई अनजान व्यक्ति या चेहरा दिखाई देता है, तो इसका असल जिंदगी में क्या अर्थ होता है.  सपने में अजनबी का दरवाजा खटखटाना यदि आपको कोई ऐसा सपना दिखे तो ये आपके जल्द ही जीवन में किसी बड़े परिवर्तन का संकेत दे सकता है। ऐसा संभव है कि सपने में अजनबी के माध्यम से आपकी परिस्थितियां बदलाव के संकेत दे रही हों। अगर कोई इस तरह दरवाजा खटखटाए कि आप चौंककर उठ जाएं तो समझें भविष्य में कोई अशुभ घटना हो सकती है और आपके भीतर किसी बात को लेकर डर है जो ऐसे सपने का कारण है। ऐसी परिस्थिति में आप डर को दूर करने की कोशिश करें और अपनी सोच को सकारात्मक रखें। सपने में अजनबी का घर में घुसना यदि आप सपने में देखते हैं कि कोई अजनबी आपके घर में घुस आया है और आप उसका सामना नहीं कर पा रहे हैं तो इसका मतलब है कि आपकी कोई अनमोल वस्तु या संपत्ति चोरी हो सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि आपकी कोई पसंद की वस्तु गुम जाए और वापस न मिले। यदि आप सपने में किसी अजनबी को पैसे दे रहे हैं तो ये भविष्य में आपके लिएधन हानि के संकेतहो सकते हैं। Unknown Faces In Dream:किसी अजनबी पुरुष को देखना यदि आप एक महिला हैं और आपको सपने में कोई अजनबी पुरुष दिखे तो ये आपकी मनः स्थिति को दिखाता है। हो सकता है कि आप असल जिंदगी में किसी नए व्यक्ति के संपर्क में आए हों जो आपके आने वाले जीवन में एक ख़ास जगह बनाए। ये सपना इस बात का भी संकेत है कि आपको एक अच्छे जीवनसाथी की तलाश है जो जल्द पूरी हो सकती है। सपने में अनजान का पीछा करना  अगर आपको सपने में कोई अपरिचित व्यक्ति पीछा करते दिखाई देता है, तो इसका अर्थ डर से है. इसका मतलब है कि आप किसी बात को लेकर परेशान हैं. ऐसा कोई मामला है, जिसे आप सुलझा नहीं पा रहे हैं.  Unknown Faces In Dream इसलिए अगर आपको लाइफ में ऐसा सपना दिखाई देता है, तो आपको जीवन के हर पहलू पर नजर दौड़ानी होगी और समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करें.  सपने में अनजान मृत शख्स का आना  स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आपके सपने में कोई अनजान शख्य को मृत् अवस्था में दिखाई देता है, तो समझ लें कि आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या हो सकती है. Unknown Faces In Dream ऐसे में आपको सेहत को लेकर बहुत सतर्कता बरतनी होगी.  अनजान लोगों से बात करना  Unknown Faces In Dream:स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आप किसी अनजान लोगों से सपने में बात करते हुए खुद को देख रहे हैं तो असल जीवन में आप अलग-थलग हो सकते हैं. Unknown Faces In Dream इसका अर्थ है आपका समाजित दायरा सीमित हो सकता है. दोस्त कम हो सकते हैं. इतना ही नहीं, ये सपना इस बातकी ओर भी इशारा करता है, तो आप अपनी बात को व्यक्त कर पाने में परेशानी का सामना कर रहे हैं. ऐसे में ऐसा सपना आने का बाद आप लोगों को अपने कम्यूनिकेशन स्किल को सुधराना चाहिए.   Unknown Faces In Dream:किसी अनजान व्यक्ति से गिफ्ट लेना अगर सपने में आपको कोई अनजान व्यक्ति सपने में आपको उपहार देते दिखाई देता है, तो खुश हो जाएं. इसका अर्थ है, आपको अचानक से धन लाभ हो सकता है या फिर जल्द कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है.   (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Dream Science: सपने में उड़ती देखी है तितली, तो जानें जीवन में क्या होगा इसका असर, क्या कहते हैं स्वप्न शास्त्र?

Dream Science: रात को सोते समय आपको कुछ न कुछ सपना जरूर आया होगा. कई लोगों को सुबह के समय वो सपना याद रहता है, तो बहुत से लोग सपने को भूल जाते हैं. स्वप्न शास्त्र की माने, तो सोते समय देखे गए हर सपनों का कुछ न कुछ अर्थ जरूर होता है, जिन्हें समय रहते पहचान कर व्यक्ति होने वाली किसी अनहोनी से खुद को बचा सकता है. Dream Science:ज्योतिष शास्त्र में सपनों को भी महत्व दिया जाता है। हर इंसान सोते समय कभी न कभी सपने देखता ही है। इसको लेकर विज्ञान की अपनी अलग अवधारणा है लेकिन, Dream Science शास्त्र में हर सपने का खास अर्थ और अलग संकेत बताया गया है। शास्त्रों में हर सपने का अलग मतलब समझाया गया है। कुछ सपने अशुभ होते हैं तो कुछ सपनों को देखना अच्छा माना जाता है। खुद को उड़ता हुआ देखना स्वप्न में यदि आप स्वयं को उड़ता हुआ देखते हैं तो यह शुभ माना जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इसका अर्थ है कि आप जल्द ही तरक्की करने वाले हैं। सपने में उड़ना स्वतंत्रता और मुक्ति का प्रतीक है। यह आपके जागने वाले जीवन में सीमाओं या बाधाओं से मुक्त होने की इच्छा का प्रतिनिधित्व कर सकता है। आकाश में उड़ना माना जाता है कि आप किसी यात्रा पर जा सकते हैं, जहां आपको ,सफलता मिल सकती है। उड़ना व्यापार में तरक्की का भी संकेत समझा जाता है। अगर आप उड़ते हुए गिरते हैं तो इसका नाकारात्मक प्रभाव माना जाता है कि, आपके काम में अड़चन आ सकती है। सपने पर वैज्ञानिकों की अवधारणा सपने आने के वैज्ञानिकों, मनोविज्ञानियों की कई अवधारणाएं और अलग-अलग तर्क है। सामान्य तौर पर सपने को वैज्ञानिक दिमाग की उपजी कल्पना मानते हैं Dream Science:डरावने सपने Dream Science:सपने अच्छा महसूस कराने के साथ-साथ ये डरावने भी होते हैं। Dream Science वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि आदमी जागते हुए किसी कठिन समस्या से गुजरा रहा है, चाहे वह करियर हो, नई नौकरी हो, ब्रेकअप हो या किसी प्रियजन की मृत्यु हो, तो यह रात में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। यह भी बुरे सपने का कारण हो सकता है। शुभ होता है तितली को देखना… अगर आपने सपने में किसी विवाहित महिला के घर या आंगन में तितली को उड़ता देखा है, तो यह आपके लिए बहुत ही शुभ माना जाता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार आपको जल्द ही धन की प्राप्ति हो सकती है. आपको अपने व्यवसाय में लाभ होगा साथ ही आपके कारोबार में तरक्की होगी. अगर आपने सपने में बड़ी तितली को देखा है, तो यह संकेत देता है कि आपके सपने जल्द ही पूरे होने वाले हैं साथ ही आपका लक्ष्य पूरा होगा.  खुद को पहचाने  स्वप्न शास्त्रों की जानकारी के मुताबिक अगर आप सपने में तितली से भाग रहे हैं, Dream Science तो इसका अर्थ होता है कि आपके अंदर बहुत सी नकारात्मक चीजों ने वास किया हुआ है. बता दें कि ऐसा करने वाला व्यक्ति  अनैतिक और बुरा व्यक्ति है जो भगवान से दूर है सपने में देखी है तितली… ऐसे ही अगर आपने सपने में तितली (Butterfly) को देखा है, तो इसका आपके जीवन पर कुछ न कुछ असर पड़ता है. आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि सपने में तितली को देखने का क्या मतलब होता है. इसका आपके जीवन में अच्छा प्रभाव पड़ेगा या फिर आपके साथ बुरा होगा. आइए बिना किसी देरी किए जानते हैं स्वप्न शास्त्र के अनुसार इसका क्या मतलब होता है. डिस्क्लेमर  सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. KARMASU.IN इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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Falgun Chaturthi 2025:फाल्गुन माह में कब है विनायक चतुर्थी? नोट करें शुभ मुहूर्त

Falgun Chaturthi 2025:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सभी देवताओं में गणेश जी का स्थान सर्वोपरि है। गणेश जी को सभी परेशानियों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश की नियमित पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। Falgun Chaturthi 2025 Puja Vidhi Kese kare :विनायक चतुर्थी पूजा विधि कैसे करें: Falgun Chaturthi 2025 मान्यता के अनुसार चतुर्थी तिथि की पूजा दोपहर के समय करनी चाहिए। Falgun Chaturthi 2025 क्योंकि शाम के समय चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से झूठा कलंक लगता है। मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने विनायक चतुर्थी की रात को चंद्रमा देखा था, जिसके बाद उन्हें स्यामंतक मणि चोरी करने के लिए झूठा कलंक लगाया गया था। इस दिन प्रात:काल स्नान कर व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर पूजा प्रारंभ करें। भगवान गणेश को पीले फूलों की माला अर्पित करने के बाद धूप-दीप, नैवेद्य, अक्षत और उनकी प्यारी दूर्वा घास अर्पित करें। इसके बाद मिठाई या मोदक का भोग लगाएं। अंत में व्रत कथा पढ़कर गणेश जी की आरती करें। मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को सिंदूर बहुत प्रिय होता है इसलिए Falgun Chaturthi 2025 विनायक चतुर्थी के दिन पूजा के समय गणेश जी को लाल रंग के सिंदूर का तिलक लगाएं। सिंदूर चढ़ाते समय निम्न मंत्र का जाप करें-सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् ।शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ॥ विनायक चतुर्थी 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Vinayak Chaturthi 2025 Date and Shubh Muhurat) पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह (Vinayak Chaturthi Phalgun 2025 Shubh Muhurat) के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का प्रारंभ 02 मार्च को रात 09 बजकर 01 मिनट पर हो रहा है। वहीं, तिथि का समापन अगले दिन यानी 03 मार्च को शाम 06 बजकर 02 मिनट पर हो रहा है। ऐसे में विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi Kab hai) 03 मार्च को मनाई जाएगी। ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा (Lord Ganesh Puja Vidhi) Falgun Chaturthi 2025:चतुर्थी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें। इसके बाद स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। अब दीपक जलाकर पूजा की शुरुआत करें। सच्चे मन से भगवान गणेश की आरती करें। मोदक और फल समेत प्रिय चीजों का भोग लगाएं। इस दौरान भोग मंत्र का जप करें। आखिरी में लोगों में प्रसाद बाटें।

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नवग्रह मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत

यहां शनिदेव की प्रतिमा के साथ ढय्या शनि की भी प्रतिमा स्थापित है नवग्रह मंदिर भारत के मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है। क्षिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर स्थित नवग्रह मंदिर नौ ग्रहों को समर्पित है। शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या के दिन यहां बड़ी भारी भीड़ लगती है। हाल के वर्षों में इस मंदिर का धार्मिक महत्व बहुत बढ़ गया है। यहां पर मुख्य शनिदेव की प्रतिमा के साथ-साथ ढय्या शनि की भी प्रतिमा भी स्थापित है। बताया जाता है कि विक्रम संवत का इतिहास भी इस मंदिर से जुड़ा हुआ है। मंदिर का इतिहास नवग्रह मंदिर के बारे में बताया जाता है कि लगभग दो हजार साल पहले इस मंदिर की स्थापना राजा विक्रमादित्य ने की थी। कहा जाता है कि विक्रमादित्य ने इस को मंदिर के बनाने के बाद ही विक्रम संवत की शुरुआत की थी। करीब 2075 साल पुराना यह देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां शनि महाराज की पूजा शिव स्वरूप में होती है। मंदिर की स्थापना महाराजा विक्रमादित्य ने की थी, उन्होंने ही विक्रम संवत (हिंदू पंचांग) शुरू किया था। अभी विक्रम संवत 2075 चल रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि यहां साढ़ेसाती और ढय्या की शांति के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाया जाता है। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि नवग्रह मंदिर में जो भक्त सच्चे मन से शनिदेव की पूजा करता है, शनिदेव उसके सभी दुख दूर कर देते हैं।यह मंदिर नौ ग्रहों अर्थात् सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, राहु, केतु और शनि को समर्पित है। शनि अमावस्या के दिन यहां 5 क्विंटल से अधिक तेल शनिदेव पर चढ़ता है। बाद में इस तेल को निलाम किया जाता है। मंदिर की वास्तुकला नवग्रह मंदिर की वास्तुकला बहुत ही सुंदर है। मंदिर के सामने भव्य प्रवेश द्वार है। नवग्रह मंदिर के चारों तरफ उकेरे गए शिल्प नयनाभिराम हैं। नवग्रह मंदिर कई स्तंभों पर बना है। सभी स्तंभों पर देवी देवताओं को प्रदर्शित किया गया है। नवग्रह मंदिर में मुख्य शनिदेव की प्रतिमा के साथ-साथ ढय्या शनि की भी प्रतिमा भी स्थापित है। नवग्रह मंदिर में हर ग्रह का अपना गर्भ गृह है। नवग्रह की पूजा के लिए मंदिर में विशाल परिसर है, जहां श्रद्धालु ग्रहों की शांति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 07:00 PM मंदिर का प्रसाद नवग्रह मंदिर में गुड और तिल का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु शनिदेव पर सरसों का तेल भी चढ़ाते हैं।

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Dwadash Panjarika Stotra | द्वादश पञ्जरिका स्तोत्र

Dwadash Panjarika Stotra:द्वादश पंजरिका स्तोत्र: द्वादश पंजरिका स्तोत्र जगद्गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित है। द्वादश पंजरिका स्तोत्र आदि शंकराचार्य की रचनाओं में से एक है। इसमें वेदांत का सार है और मनुष्य को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि मैं इस जीवन में क्यों हूं? मैं धन, परिवार क्यों इकट्ठा कर रहा हूं, लेकिन शांति नहीं है? सत्य क्या है? जीवन का उद्देश्य क्या है? इस प्रकार जागृत व्यक्ति ईश्वरीय तत्व की ओर वापस जाने के आंतरिक मार्ग पर चल पड़ता है। इस स्तोत्र की पृष्ठभूमि जांचने लायक है, काशी में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने एक बहुत बूढ़े व्यक्ति को पाणिनि द्वारा संस्कृत के नियमों का अध्ययन करते देखा। शंकर को उस बूढ़े व्यक्ति की दुर्दशा देखकर दया आ गई, जो अपने वर्षों को केवल बौद्धिक उपलब्धि में व्यतीत कर रहा था, जबकि उसे प्रार्थना करना और अपने मन को नियंत्रित करने के लिए समय निकालना बेहतर था। शंकर समझ गए कि दुनिया का अधिकांश हिस्सा भी केवल बौद्धिक, इंद्रिय सुखों में लगा हुआ है, न कि ईश्वरीय चिंतन में। यह देखकर, वह स्तोत्र के श्लोकों से फूट पड़ा। बारह स्तोत्रों का यह सेट शायद हमारे ग्रंथ का सबसे लोकप्रिय कार्य है, जिसे पारंपरिक रूप से भगवान को नैवेद्य अर्पित करते समय पढ़ा जाता है। यह प्राचीन भक्ति, असाधारण आध्यात्मिक ज्ञान और काव्य प्रतिभा का एक शानदार संश्लेषण है, जिसकी कल्पना केवल एक असाधारण बुद्धि ही कर सकती थी। भक्ति के साथ गाए जाने पर यह कानों और मन के लिए एक दावत है। स्तोत्र मूल रूप से भगवान हरि और उनके विभिन्न रूपों की स्तुति करता है, जबकि पाठ दर्शन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को शामिल करता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण को समर्पित है; ऐसा माना जाता है कि भगवान को भोजन अर्पित करते समय हमें द्वादश पंजरिका स्तोत्र का पाठ करना चाहिए, जिसका अर्थ है कि हम भगवान से हमारे प्रसाद को स्वीकार करने का अनुरोध कर रहे हैं। जैसे ही हम घर पर भोजन बनाते हैं, सबसे पहले हमें भगवान को नैवेद्य के रूप में भोजन अर्पित करना चाहिए और हमारी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भगवान को धन्यवाद देना चाहिए, फिर हमें उस भोजन को खाना चाहिए। Dwadash Panjarika Stotra:द्वादश पंजरिका स्तोत्र के लाभ Dwadash Panjarika Stotra:द्वादश पंजरिका स्तोत्र केवल शांतिपूर्ण सुचारू जीवन और धन के लिए भगवान से प्रार्थना करना है। द्वादश पंजारिका स्तोत्र मनुष्य की मानसिक शक्ति को भी बढ़ाता है और उसकी मनोकामना को पूर्ण करता है। द्वादश पंजारिका स्तोत्र का पाठ करने से भगवान से संपर्क स्थापित होता है जिससे साधक को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Dwadash Panjarika Stotra:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ जिन व्यक्तियों को जीवन में आर्थिक या मानसिक रूप से तनाव रहता है उन्हें द्वादश पंजारिका स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए। द्वादश पञ्जरिका स्तोत्र | Dwadash Panjarika Stotra मूढ़ जहीहि धनागमतृष्णां कुरु सद्बुद्धिं मनसि वितृष्णाम् । यल्लभसे निजकर्मोपात्तं वित्तं तेन विनोदय चित्तम् ।।1।। भज गोविन्दं भज गोविन्दं गोविन्दं भज मूढ़मते ।। (ध्रुवपदम्) अर्थमनर्थं भावय नित्यं नास्ति तत: सुखलेश: सत्यम् । पुत्रादपि धनभाजां भीति: सर्वत्रैषा विहिता नीति: । भज. ।।2।। का ते कांता कस्ते पुत्र: संसारोऽयमतीव विचित्र: । कस्य त्वं क: कुत आयातस्तत्त्वं चिन्तय यदिदं भ्रात: । भज. ।।3।। मा कुरु धनजनयौवनगर्वं हरति निमेषात्काल: सर्वम् । मायामयमिदमखिलं हित्वा ब्रह्मपदं त्वं प्रविश विदित्वा । भज. ।।4।। कामं क्रोधं लोभं मोहं त्यक्त्वात्मानं भावय कोऽहम् । आत्मज्ञानविहीना मूढास्ते पच्यन्ते नरकनिगूढ़ा: । भज. ।।5।। सुरमन्दिरतरुमूलनिवास: शय्या भूतलमजिनं वास: । सर्वपरिग्रहभोगत्याग: कस्य सुखं न करोति विराग: । भज. ।।6।। शत्रौ मित्रे पुत्रे बन्धौ मा कुरु यत्नं विग्रहसंधौ । भव समचित्त: सर्वत्र त्वं वाञ्छस्यचिराद्यदि विष्णुत्वम् । भज. ।।7।। त्वयि मयि चान्यत्रैको विष्णुव्र्यर्थं कुप्यसि सर्वसहिष्णु: । सर्वस्मिन्नपि पश्यात्मानं सर्वत्रोत्स्रज भेदाज्ञानम् । भज. ।।8।। प्राणायामं प्रत्याहारं नित्यानित्यविवेकविचारम् । जाप्यसमेतसमाधिविधानं कुर्ववधानं महदवधानम् । भज. ।।9।। नलिनीदलगतसलिलं तरलं तद्वज्जीवितमतिशय चपलम् । विद्धि व्याध्यभिमानग्रस्तं लोकं शोकहतं च समस्तम् । भज. ।।10।। का तेऽष्टादशदेशे चिंता वातुल तव किं नास्ति नियन्ता । यस्त्वां हस्ते सुदृढ़निबद्धं बोधयति प्रभवादिविरुद्धम् । भज. ।।11।। गुरुचरणाम्बुजनिर्भरभक्त: संसारादचिराद्भव मुक्त: । सेंद्रियमानसनियमादेवं द्रक्ष्यसि निजह्रदयस्थं देवम् । भज. ।।12।। द्वादशपंजरिकामय एष: शिष्याणां कथितो ह्रुपदेश: । येषां चित्ते नैव विवेकस्ते पच्यन्ते नरकमनेकम् । भज. ।।13।।

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Dwadash Jyotirling Stotra | द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र

Dwadash Jyotirling Stotra:शिव द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र भगवान शिव की पूजा करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक शक्तिशाली भक्ति भजन है। ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के तेज चिन्ह को दर्शाता है। भारत में बारह पवित्र ज्योतिर्लिंग मंदिर हैं। शिव द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र भगवान शिव के उन बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों की पूजा करने के लिए पढ़ा जाता है। यह ज्योतिर्लिंग स्तोत्र एक संस्कृत काव्य है। इस स्तोत्र में भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र हिंदू धर्म के अनुयायियों और शिव भक्तों द्वारा पढ़ा जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार नियमित रूप से स्तोत्र का जाप करना भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने का सबसे शक्तिशाली तरीका है। इस स्तोत्र के जाप से व्यक्ति को शिव और सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। Dwadash Jyotirling Stotra जो व्यक्ति इस स्तोत्र का नियमित जाप करता है, उसे हमेशा महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए आपको सुबह जल्दी स्नान करने के बाद भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर के सामने इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। आपको सबसे पहले द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का अर्थ हिंदी में समझना चाहिए ताकि इसका प्रभाव अधिकतम हो सके। Dwadash Jyotirling Stotra:द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के लाभ द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है और आपके जीवन से सभी बुराइयां दूर रहती हैं और आप स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनते हैं।जो भी व्यक्ति प्रतिदिन इस स्तोत्र का जाप करता है, उसे बारह ज्योतिर्लिंग के दर्शन के समान फल की प्राप्ति होती है। यह एकमात्र ऐसा स्तोत्र है, जिसका जाप करने से व्यक्ति को भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ-साथ अन्य सभी देवी-देवताओं की भी कृपा प्राप्त होती है।यदि कोई व्यक्ति इस दिव्य ज्योतिर्मय शिव लिंग के शब्दों का भक्तिपूर्वक पाठ करता है, तो उसे उनके दर्शन का फल प्राप्त होता है।इस ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के रचयिता श्री शंकराचार्य हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र भगवान शिव को समर्पित है। यह स्तोत्र एक ऐसा काव्य है, जिसमें भगवान शिव जी के बारह ज्योतिर्लिंगों के बारे में बताया गया है। ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का नियमित जाप करने से भगवान शिव की कृपा के साथ-साथ अन्य सभी देवी-देवताओं की भी कृपा प्राप्त होती है। Dwadash Jyotirling Stotra:इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए जिन व्यक्तियों को पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जीवन में नियमित असफलता का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। द्वादश ज्योतिर्लिग स्तोत्र | Dwadash Jyotirling Stotra सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्‌।उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम्‌ ॥1॥ परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्‌।सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥2॥ वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।हिमालये तु केदारं ध्रुष्णेशं च शिवालये ॥3॥ एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति ॥4॥ ॥ इति द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति संपूर्णम्‌ ॥

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Dwadash Jyotirling | द्वादश ज्योतिर्लिंग

Dwadash Jyotirling द्वादश ज्योतिर्लिंग: द्वादश ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की पूजा करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक शक्तिशाली भक्ति स्तोत्र है। ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के तेज चिन्ह को दर्शाता है। भारत में बारह पवित्र ज्योतिर्लिंग मंदिर हैं। शिव द्वादश ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के उन बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों की पूजा करने के लिए जप या जप किया जाता है। यह ज्योतिर्लिंग एक संस्कृत काव्य है। इस ज्योतिर्लिंग में भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग का वर्णन किया गया है। द्वादश ज्योतिर्लिंग का पाठ हिंदू धर्म के अनुयायियों और शिव भक्तों द्वारा किया जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार इस ज्योतिर्लिंग का नियमित जाप करना भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने का सबसे शक्तिशाली तरीका है। इस ज्योतिर्लिंग के जाप से व्यक्ति को शिव और सभी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Dwadash Jyotirling जो व्यक्ति नियमित रूप से इस स्तोत्र का जाप करता है, उसे महालक्ष्मी का आशीर्वाद हमेशा मिलता है। सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए आपको सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव की मूर्ति या चित्र के सामने ज्योतिर्लिंग का पाठ करना चाहिए। इसके प्रभाव को अधिकतम करने के लिए आपको सबसे पहले ज्योतिर्लिंग का हिंदी में अर्थ समझना चाहिए। Dwadash Jyotirling Ke labh द्वादश ज्योतिर्लिंग के लाभ इस ज्योतिर्लिंग का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है और आपके जीवन से सभी बुराइयाँ दूर रहती हैं और आप स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनते हैं।जो भी व्यक्ति प्रतिदिन इस द्वादश ज्योतिर्लिंग का जाप करता है, उसे बारह ज्योतिर्लिंग के दर्शन के समान फल मिलता है। यह एकमात्र ऐसा स्तोत्र है, जिसके जाप से व्यक्ति को भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ-साथ अन्य सभी देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त होती है।यदि कोई व्यक्ति इस दिव्य ज्योतिर्मय शिव लिंग के शब्दों का भक्तिपूर्वक पाठ करता है, तो उसे इनके दर्शन का फल प्राप्त होता है।इस ज्योतिर्लिंग के रचयिता श्री शंकराचार्य हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंग भगवान शिव को समर्पित है। यह एक ऐसा काव्य है, Dwadash Jyotirling जिसमें भगवान शिव जी के बारह ज्योतिर्लिंगों के बारे में बताया गया है। इस स्तोत्र का नियमित जाप करने से भगवान शिव की कृपा तो प्राप्त होती ही है, साथ ही अन्य सभी देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त होती है। किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ: Dwadash Jyotirling जिन व्यक्तियों को लगातार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां रहती हैं, जीवन में लगातार असफलता का सामना करना पड़ता है, उन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग का पाठ अवश्य करना चाहिए। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् | Dwadash Jyotirling Stotra सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् ।भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ॥1॥ श्रीशैलशृङ्गे विबुधातिसङ्गे तुलाद्रितुङ्गेऽपि मुदा वसन्तम् ।तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेकं नमामि संसारसमुद्रसेतुम् ॥2॥ अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम् ।अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम् ॥3॥ कावेरिकानर्मदयोः पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय ।सदैवमान्धातृपुरे वसन्तमोङ्कारमीशं शिवमेकमीडे ॥4॥ पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसन्तं गिरिजासमेतम् ।सुरासुराराधितपादपद्मं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि ॥5॥ याम्ये सदङ्गे नगरेऽतिरम्ये विभूषिताङ्गं विविधैश्च भोगैः ।सद्भक्तिमुक्तिप्रदमीशमेकं श्रीनागनाथं शरणं प्रपद्ये ॥6॥ महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः ।सुरासुरैर्यक्ष महोरगाढ्यैः केदारमीशं शिवमेकमीडे ॥7॥ सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तं गोदावरितीरपवित्रदेशे ।यद्धर्शनात्पातकमाशु नाशं प्रयाति तं त्र्यम्बकमीशमीडे ॥8॥ सुताम्रपर्णीजलराशियोगे निबध्य सेतुं विशिखैरसंख्यैः ।श्रीरामचन्द्रेण समर्पितं तं रामेश्वराख्यं नियतं नमामि ॥9॥ यं डाकिनिशाकिनिकासमाजे निषेव्यमाणं पिशिताशनैश्च ।सदैव भीमादिपदप्रसिद्दं तं शङ्करं भक्तहितं नमामि ॥10॥ सानन्दमानन्दवने वसन्तमानन्दकन्दं हतपापवृन्दम् ।वाराणसीनाथमनाथनाथं श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये ॥11॥ इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम् ।वन्दे महोदारतरस्वभावं घृष्णेश्वराख्यं शरणम् प्रपद्ये ॥12॥ ज्योतिर्मयद्वादशलिङ्गकानां शिवात्मनां प्रोक्तमिदं क्रमेण ।स्तोत्रं पठित्वा मनुजोऽतिभक्त्या फलं तदालोक्य निजं भजेच्च ॥13॥ ॥ इति द्वादश ज्योतिर्लिङ्गस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

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Dream Astrology:क्या आपको भी आता है ऊंचाई से गिरने का सपना, जानें इसका मतलब

Dream Astrology:सोते समय आप में से ज्यादातर लोग सपने जरूर देखते हैं। अगर आपको भी कभी ऊंचाई से गिरने का सपना आता है तो आपको इसके फल के बारे में जान लेना चाहिए।  सपने देखना एक आम बात है हम सब नींद में अक्सर सपने देखते हैं। स्वप्न शास्त्र की मानें तो इन सपनों के भी अपने अलग मायने होते हैं। सपने कई तरह के होते हैं और कुछ सपने हमारे भूतकाल और वर्तमान में चल रही घटनाओं की और इशारा करते हैं, वहीं कुछ ऐसे सपने भी होते हैं जो हमें आगे आने वाले समय के लिए सचेत करते हैं। सपने में कई बार हम खुद को किसी ऐसी गतिविधि में लिप्त देखते हैं जिसका कुछ न कुछ मतलब जरूर होता है। हम सपने में कभी- कभी अपने आप को गिरते हुए देखते हैं। हमें ऐसा लगता है कि हम किसी ऊंचाई वाली जगह से सच में गिरने वाले हैं। कई लोग सपने में किसी ऊंची बिल्डिंग या पहाड़ी से खुद को गिरते हुए देखते हैं। Dream Astrology दरअसल ऐसे सपने के पीछे हो सकता है कि भविष्य में आपको किसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। Dream Astrology:सपने में ऊंचाई से गिरने का मतलब जिस सपने में आप खुद को ऊंचाई से गिरते हुए देखते हैं तो Dream Astrology आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आने की संभावना हो सकती है। ऐसे किसी भी सपने का अर्थ है कि आपको निकट भविष्य में किसी बड़ी विपत्ति का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे सपने से आर्थिक हानि के साथ स्वास्थ्य की भी क्षति हो सकती है इसलिए इस सपने को अच्छा नहीं माना जाता। सपने में छत से गिरने का मतलब स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि कोई व्यक्ति खुद को सपने में खुद को छत से गिरते हुए देखता है तो इसका मतलब हो सकता है कि आने वाले समय में उस व्यक्ति को शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे जोड़ो के दर्द या एड़ियों में तकलीफ़ हो सकती है। इसलिए ऐसे सपने को भी शुभ नहीं माना गया। ये सपना आए तो हो जाएं सावधान स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सपने में खुद को फिसल कर गिरते हुए देखते हैं तो, इस सपने को शुभ नहीं माना जाता।  इसका अर्थ हो सकता है कि आपको निकट भविष्य में अपने किसी परिचित या रिश्तेदार से धोखा मिल सकता है। Dream Astrology इसलिए सचेत रहने की आवश्यकता है। आसमान से नीचे गिरते हुए देखना आसमान से नीचे गिरते हुए सपने देखने से यह संकेत मिल सकता है कि आप हाल ही में थक गए हैं साथ ही यह इस बात का भी संकेत है कि भविष्य में आप किसी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। सामान्यतः इस तरह का सपना मानसिक और शारीरिक थकावट या उप-स्वास्थ्य की स्थिति के कारण बनता है। ऐसा कोई भी सपना आने पर आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपकी नींद पूरी हो और मानसिक तनाव न रहे। इसके अलावा आप सपने में (सपने में सांप दिखना शुभ या अशुभ)आसमान से कितनी तेजी से गिरे हैं, इसका भी अलग संकेत हो सकता है जैसे आसमान से तेजी से गिरने का सपना इस ओर इशारा करता है कि आप अपने जीवन में जल्द ही कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करेंगे। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि आप अपने आप जोर से गिरते हुए देखते हैं Dream Astrology लेकिन इस दौरान तुरंत ही आपकी नींद खुल जाए और आप जाग जाएं तो ऐसा सपना दर्शाता है कि आप सतर्क हैं और अपने आस-पास के लोगों पर जल्दी भरोसा नहीं करते है। अगर आपको भी ऐसे कोई सपने आते हैं तो इसके फल को जानकार आप अपने भविष्य की योजनाएं बना सकते हैं। Dream Astrology अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ जुड़ी रहें।

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Vijaya Ekadashi 2025:एकादशी के दिन नहीं किया जाता इस सफेद चीज का सेवन,आज ही जान लें व्रत नियम

Vijaya Ekadashi Do’s And Don’ts: विजया एकादशी को विजय प्राप्त करने वाली एकादशी भी कहा जाता है. यहां जानिए इस साल विजया एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा और इस दिन खानपान से जुड़ी किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है.  Vijaya Ekadashi 2025: हर माह में आने वाली एकादशी तिथि को विष्णुजी की कृपा पाने व्रत और पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विष्णुजी की पूजा-अर्चना करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है और साधक को जीवन के समस्त दुखों से छुटकारा मिलता है। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को Vijaya Ekadashi 2025 विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत और विष्णुजी की पूजा करने से साधक को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है, लेकिन विजया एकादशी व्रत में कुछ कार्यों की मनाही भी होती है। मान्यता है कि ऐसा करने से श्रीहरि विष्णुजी नाराज हो सकते हैं। इसलिए एकादशी व्रत के नियमों का खास ध्यान रखना चाहिए। Vijaya Ekadashi 2025 आइए जानते हैं कि विजया एकादशी व्रत के दिन किन कार्यों को करने से बचना चाहिए? एकादशी पर क्या नहीं खाना चाहिए | What Not To Eat On Ekadashi  विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु को नाराज ना करने की कोशिश की जाती है. इस दिन व्रत रखकर क्या खाया जा रहा है इसका खास ध्यान रखा जाता है. कुछ व्रतों में चावल का सेवन किया जाता है लेकिन एकादशी के व्रत में चावल का सेवन नहीं किया जाता है. चावल (Rice) के अलावा कोई और अन्न या फिर नमक का सेवन नहीं करना चाहिए. लहसुन, मसूर की दाल और प्याज के सेवन से भी बचना चाहिए. माना जाता है कि इन चीजों के सेवन से भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं.  एकादशी पर किन चीजों का सेवन करना चाहिए  एकादशी के व्रत में कुट्टू के आटे की रोटी या पूड़ियां बनाकर खाई जा सकती हैं. इस दिन आलू और साबूदाने का सेवन किया जा सकता है. साबूदाने के खीर या खिचड़ी बनाई जा सकती है. दही, दूध और फलों को खाना भी एकादशी पर अच्छा माना जाता है. Vijaya Ekadashi 2025 Per Ase Kare Puja विजया एकादशी पर ऐसे करें पूजा  Vijaya Ekadashi 2025 विजया एकादशी पर सुबह उठकर स्नान किया जाता है. इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना बेहद शुभ माना जाता है. सुबह ही व्रत का प्रण लिया जाता है. Vijaya Ekadashi 2025 पूजा करने के लिए भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करके उनके समक्ष धूप, दीप, पुष्प, फूल, तुलसी और भोग आदि अर्पित किया जाता है. व्रत की कथा पढ़ी जाती है, आरती की जाती है और पूजा का समापन होता है.  Vijaya Ekadashi 2025 Ke na kare ye Kaam:विजया एकादशी के न करें ये काम विजया एकादशी के दिन चावल का सेवन न करें। मान्यता है कि इससे विष्णुजी रुष्ट हो सकते हैं। श्रीहरि विष्णुजी को तुलसी का पत्तियां अति प्रिय है। विष्णुजी के भोग में तुलसी के पत्तों को शामिल करना बेहद जरूरी माना जाता है। कहते हैं कि इसके बिना विष्णुजी भोग को ग्रहण नहीं करते हैं, लेकिन एकादशी तिथि में तुलसी के पत्ते को नहीं तोड़ना चाहिए। पूजा में इस्तेमाल करने के लिए तुलसी के पत्तों को एक दिन पहले तोड़कर रख लें। विजया एकादशी के दिन व्रती के साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी सात्विक भोजन करना चाहिए। घर के प्रत्येक सदस्य को मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि इससे विष्णुजी नाराज हो सकते हैं। सनातन धर्म में शुभ कार्यों में काले रंग के वस्त्रों को धारण करने की मनाही होती है। Vijaya Ekadashi 2025 एकादशी व्रत में भी साधक को काले रंग का वस्त्र नहीं पहनना चाहिए। इस दिन विष्णुजी की पूजा-अर्चना के दौरान पीले रंग के वस्त्र पहन सकते हैं। विजया एकादशी के दिन क्रोध से बचें। अपने से बड़े-बुजुर्गों को अपमानित न करें। अपशब्दों का इस्तेमाल करने से बचें। मन में नकारात्मक विचार न लाएं। एकादशी व्रत में ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना चाहिए। इस दिन घर की साफ-सफाई का भी खास ख्याल रखें। घर के किसी भी हिस्से को गंदा न रखें और शाम को तुलसी के पौधे के समक्ष घी का दीपक जलाएं। एकादशी व्रत में किसी भी तरह से झूठ न बोलें। हिंसा से बचें। अपने मन,कर्म और वचन से किसी को परेशान न करें। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Devya Aratrikam:देव्या अरात्रिकम् 

Devya Aratrikam (देव्या अरात्रिकम्) प्रवरातीरनिवासिनि निगमप्रतिपाद्येपारावारविहारिणि नारायणि हृद्ये।प्रपञ्चसारे जगदाधारे श्रीविद्येप्रपन्नपालननिरते मुनिवृन्दाराध्ये॥जय देवि जय देवि जय मोहनरूपे।मामिह जननि समुद्धर पतितं भवकूपे॥१॥ pravarātīranivāsini nigamapratipādyepārāvāravihāriṇi nārāyaṇi hṛdye।prapañcasāre jagadādhāre śrīvidyeprapannapālananirate munivṛndārādhye॥jaya devi jaya devi jaya mohanarūpe।māmiha janani samuddhara patitaṃ bhavakūpe॥1॥ हे प्रवरानदीतीरवासिनी, वेदों से प्रतिपादित, क्षीरसागरविहारिणी, नारायणप्रिया, मनोहारिणी, संसार की सार और आधाररूपिणी, लक्ष्मी और विद्यास्वरूपिणी, शरणागत की रक्षा में तत्पर, मुनिगणों से आराधित हे देवि! तुम्हारी जय हो! जय हो! हे मनोहर रूपवाली! तुम्हारी जय हो! हे मातः! इस संसारकूप में पड़े हुए मेरा उद्धार करो॥१॥ ध्रुवपदम्॥ दिव्यसुधाकरवदने कुन्दोज्ज्वलरदनेपदनखनिर्जितमदने मधुकैटभकदने।विकसितपङ्कजनयने पन्नगपतिशयनेखगपतिवहने गहने सङ्कटवनदहने॥जय देवि जय देवि जय मोहनरूपे।मामिह जननि समुद्धर पतितं भवकूपे॥२॥ dhruvapadam॥ divyasudhākaravadane kundojjvalaradanepadanakhanirjitamadane madhukaiṭabhakadane।vikasitapaṅkajanayane pannagapatiśayanekhagapativahane gahane saṅkaṭavanadahane॥jaya devi jaya devi jaya mohanarūpe।māmiha janani samuddhara patitaṃ bhavakūpe॥2॥ पूर्णचन्द्र के समान दिव्य मुखवाली, कुन्दपुष्प के-से स्वच्छ दाँतों वाली, अपने पैरों की नख-ज्योति से मदन को पराजित करने वाली, मधुकैटभ का संहार करने वाली, प्रफुल्लित कमल-समान नेत्रोंवाली, Devya Aratrikam शेषशायिनी, गरुडवाहिनी, दुराराध्या, संकट वन को भस्म करने वाली (हे देवि! तुम्हारी जय हो! जय हो! हे मातः! इस संसारकूपमें पड़े हुए मेरा उद्धार करो) ॥ २॥ मञ्जीराङ्कितचरणे मणिमुक्ताभरणेकञ्चुकिवस्त्रावरणे वक्त्राम्बुजधरणे।शक्रामयभयहरणे भूसुरसुखकरणेकरुणां कुरु मे शरणे गजनक्रोद्धरणे॥जय देवि जय देवि जय मोहनरूपे।मामिह जननि समुद्धर पतितं भवकूपे॥३॥ mañjīrāṅkitacaraṇe maṇimuktābharaṇekañcukivastrāvaraṇe vaktrāmbujadharaṇe।śakrāmayabhayaharaṇe bhūsurasukhakaraṇekaruṇāṃ kuru me śaraṇe gajanakroddharaṇe॥jaya devi jaya devi jaya mohanarūpe।māmiha janani samuddhara patitaṃ bhavakūpe॥3॥ चरणों में नूपुर धारण करने वाली, मणि और मोतियों के आभूषण धारण करने वाली, चोली और वस्त्रों से सुसज्जित, कमलमुखी, इन्द्र के विघ्न बाधाओं को दूर करने वाली, ब्राह्मणों के लिये आनन्ददायिनी, Devya Aratrikam गज और ग्राह का उद्धार करने वाली हे देवि! Devya Aratrikam मुझ शरणागतपर कृपा करो। (हे देवि! तुम्हारी जय हो! जय हो! जय हो! हे मातः ! इस संसार कूप में पड़े हुए मेरा उद्धार करो) ॥३॥ छित्त्वा राहुग्रीवां पासि त्वं विबुधान्ददासि मृत्युमनिष्टं पीयूषं विबुधान्।विहरसि दानवऋद्वान् समरे संसिद्धान्मध्वमुनीश्वरवरदे पालय संसिद्धान्॥जय देवि जय देवि जय मोहनरूपे।मामिह जननि समुद्धर पतितं भवकूपे॥४॥ chittvā rāhugrīvāṃ pāsi tvaṃ vibudhāndadāsi mṛtyumaniṣṭaṃ pīyūṣaṃ vibudhān।viharasi dānavaṛdvān samare saṃsiddhānmadhvamunīśvaravarade pālaya saṃsiddhān॥jaya devi jaya devi jaya mohanarūpe।māmiha janani samuddhara patitaṃ bhavakūpe॥4॥ तुम राहु की ग्रीवा काटकर देवों की रक्षा करती हो, असुरों को उनकी इच्छा के विपरीत मृत्यु और देवताओं को अमृत देती हो, युद्धकुशल और वीर दैत्यों से रण-क्रीडा कराने वाली हो। Devya Aratrikam हे मध्वमुनीश्वर को वर देने वाली! भक्तों का पालन करो। (हे देवि! तुम्हारी जय हो! जय हो! जय हो! हे मातः! इस संसार कूप में पड़े हुए मेरा उद्धार करो) ॥ ४॥ इति देव्या आरात्रिकं समाप्तम्।

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इस्कॉन मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस्कॉन की स्थापना भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने 1966 में न्यूयॉर्क में की थी। इस्कॉन मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा शहर के वृंदावन में स्थित एक हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम को समर्पित है। इस्कॉन मंदिर का पूरा नाम इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) है। इस संस्था की स्थापना भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने 1966 में न्यूयॉर्क में की थी। स्वामी प्रभुपाद जी ने ही वृंदावन में इस मंदिर बनाने का सपना देखा और उसे पूरा भी किया। मंदिर को कृष्ण बलराम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर का इतिहास इस्कॉन मंदिर:स्वामी प्रभुपाद भारत में कई जगहों पर इस्कॉन मंदिर बनवाना चाहते थे। 1975 में उन्होंने वृंदावन में यह मंदिर बनवाया था। ये भारत में इस्कॉन द्वारा निर्मित पहला मंदिर था। राम नवमी के मंदिर शुभ अवसर पर उन्होंने मंदिर का उद्घाटन किया और कृष्ण-बलराम, राधा-श्यामासुंदर, ललिता देवी, विशाखा देवी और गौरा-नितई के दिव्य देवताओं की स्थापना की। मंदिर उसी स्थान पर बना है जहां श्री कृष्ण और श्री बलराम ने अपना बचपन बिताया था। इस्कॉन मंदिर:का महत्व इस्कॉन मंदिर दुनिया भर के कृष्ण भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, क्योंकि यह शक्ति और भक्ति का प्रतीक है। मंदिर वृन्दावन में आकर भक्त श्री कृष्ण की भक्ति में डूब जाते हैं और अपने सारे कष्टों को भूल जाते हैं। मंदिर में पूजा की उच्च गुणवत्ता का पालन किया जाता है और कुछ प्रक्रियाओं को नित्य रूप से किया जाता है, जिसमें से कुछ हैं – 6 प्रकार की आरतियाँ, 6 प्रकार के भोग और इष्टदेव को चढ़ावा, पुजारियों द्वारा धार्मिक विधि-विधान के साथ इष्टदेवों की अनुशासित पूजा। मंदिर के जरिए इस्कॉन के अनुयायियों ने विश्व में गीता, हिंदू धर्म और संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया और प्रक्रिया सतत जारी है। इस्कॉन मंदिर की वास्तुकला मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित है और इस मंदिर की बनावट वृंदावन की प्रभावशाली मंदिरों में से एक है। ये जटिल नक्काशीदार दीवारों और गुंबदों, घुमावदार सीढ़ियों और मेहराबों के साथ विशेष कारीगरी का एक उदाहरण है। मंदिर परिसर में तीन मंदिर हैं; एक भगवान कृष्ण और उनके भाई भगवान बलराम को समर्पित, दूसरा श्री गौर – निताई (श्री चैतन्य महाप्रभु और नित्यानंद) को समर्पित और तीसरा श्री श्यामसुंदर (भगवान कृष्ण और राधा रानी) को समर्पित। मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर के केंद्रीय स्लैब में बाईं ओर नित्यानंद के साथ चैतन्य महाप्रभु और भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद और इस्कॉन मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत उनके आध्यात्मिक गुरु भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर की मूर्तियां लगी हुई हैं। जैसे ही आप मंदिर के दरवाजे में प्रवेश करते हैं, काले और सफेद संगमरमर के चारखानेदार प्रांगण आपका ध्यान आकर्षित करते हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 04:00 AM – 12:45 PM श्रृंगार आरती का समय 07:15 AM – 07:25 AM भागवत कथा का समय 08:00 AM – 08:30 AM राज भोग आरती का समय 12:00 PM – 12:30 PM उत्थापन आरती का समय 04:00 PM – 04:30 PM शयन आरती का समय 08:00 PM – 08:15 PM मंगला आरती का समय 04:30 AM – 05:00 AM गुरु पूजा का समय 07:25 AM – 08:00 AM पुष्प आरती का समय 08:30 AM – 09:30 AM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 08:15 PM संध्या आरती का समय 06:30 PM – 07:00 PM मंदिर का प्रसाद इस्कॉन मंदिर में फूलों के साथ माखन, मिश्री, पेड़ा और बर्फी का भोग लगाया जाता है।

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चिंतामन गणेश मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत

चिंतामन गणेश मंदिर:यहाँ गणेशजी 3 रूपों में विराजमान हैं चिंतामन गणेश मंदिर भारत के मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम जवास्या में भगवान गणेश जी का यह प्राचीनतम मंदिर बना हुआ है। चिंतामन गणेश मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते ही हमें गौरीसुत गणेश की तीन प्रतिमाएं दिखाई देती हैं। यहां पार्वतीनंदन तीन रूपों में विराजमान हैं। पहला चिंतामन, दूसरा इच्छामन और तीसरा सिद्धिविनायक। चिंतामन गणेश मंदिर में चैत्र माह के हर बुधवार को मेला लगता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चिंतामन गणेश माता सीता द्वारा स्थापित षट् विनायकों में से एक हैं। मंदिर का इतिहास चिंतामन गणेश मंदिर में चिंतामन गणेश जी की स्थापना भगवान श्री राम व माता सीता ने वनवास के दौरान की थी। इच्छामन और सिद्धिविनायक गणेश जी की स्थापना लक्ष्मण जी और सीता माता ने की थी। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त चैत्र माह के बुधवार के दिन चिंतामण गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना करते है। भगवान गणेश उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। साथ ही उसे सभी प्रकार की चिंताओं से मुक्त भी कर देते हैं। मंदिर में स्थित चिंतामन गणेश भक्तों को चिंता से मुक्ति, सिद्धिविनायक स्वरूप सिद्धि प्रदान करते हैं और इच्छामन गणेश इच्छा की पूर्ति करते हैं। मंदिर का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ के किसान चैत्र माह में रबी की फसल पकने के बाद सबसे पहले भगवान चिंतामन गणेश को अपनी फसल अर्पित करते हैं। उसके बाद ही बाजार मे बेचने जाते हैं। ऐसा करने से भगवान चिंतामन गणेश किसानों के कार्य में आने वाली हर बाधा को समाप्त कर देते हैं। इस मंदिर में श्रद्धालु यहां मन्नत का धागा भी बांधते हैं और उल्टा स्वस्तिक भी बनाते हैं। मंदिर की वास्तुकला चिंतामन गणेश मंदिर 9वीं शताब्दी से 13वीं के मध्य यानी परमारकालीन का माना जाता है। इस मंदिर के शिखर पर गुंबदों के साथ सिंह भी विराजमान है। इस मंदिर का निर्माण विक्रम संवत् 155 में महाराजा विक्रमादित्य द्वारा श्रीयंत्र के अनुरूप करवाया गया था। उसके बाद इसका जीर्णोद्धार पेशवाकाल में कराया गया। वहीं वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार अहिल्याबाई होलकर के शासनकाल में हुआ। मंदिर में स्थापित श्रीगणेश जी की मूर्ति खड़ी हुई है।जो जमीन के अंदर आधी धंसी है, जिसकी वजह से आधी मूर्ति के दर्शन होते हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 09:30 PM भोग आरती आरती का समय 12:00 PM – 12:30 PM चौथी आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM पहली आरती का समय 08:00 AM – 09:00 AM तीसरी आरती का समय 04:00 PM – 04:30 PM पांचवीं आरती का समय 09:00 PM – 09:30 PM मंदिर का प्रसाद चिंतामन गणेश मंदिर में भक्त शुद्ध घी और मेवे से बने लड्‌डू का भोग लगाते हैं। गणेशजी के इस मंदिर में भक्तों द्वारा मन्नत के लिए दूध, दही, चावल और नारियल में से किसी एक वस्तु को चढ़ाया जाता है। मकर संक्रांति पर महिलाएं इस दिन व्रत के बाद चिंतामन गणेश को तिल के बने व्‍यंजनों का भोग लगाती हैं।

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