Brahmshakti Stotra:ब्रह्मशक्ति स्तोत्र

Brahmshakti Stotra:ब्रह्मशक्ति स्तोत्र: आधुनिक समाज के आकलन के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि आज हमारे समाज में 100 में से 40 जोड़े ऐसे हैं जो किसी न किसी तरह से वैचारिक मतभेद या किसी तीसरे पक्ष के कारण अपने ही पारिवारिक जीवन में अनेक विषमताओं का शिकार हो रहे हैं, जिसके कारण हर पल घुटन और अनिश्चितता के कारण अपना शारीरिक और मानसिक संतुलन खो रहे हैं। और इसका परिणाम यह होता है कि इन सब कारणों से पारिवारिक सामाजिक और आर्थिक स्तर में गिरावट आती जा रही है, कुछ समय बाद लोगों को एहसास होता है कि उन्होंने गलत कदम उठा लिया है, लेकिन जब तक समझ में आता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। यह एक भूल है जिसे नष्ट नहीं किया जा सकता। इस स्तोत्र को पढ़ने या सुनने से प्रेम के वियोग में कष्ट नहीं होता और पत्नी से वियोग नहीं होता। ब्रह्मशक्ति स्तोत्र ब्रह्मा की देवों द्वारा रचित प्रार्थना है Brahmshakti Stotra जो स्कंद पुराण में आने वाले सूक्तों के संग्रह में आती है। ब्रह्मशक्ति स्तोत्र का वर्णन स्कंद पुराण में दिया गया है। ब्रह्मशक्ति स्तोत्र देवताओं द्वारा रचित है। ब्रह्म सूत्र भगवान ब्रह्मा जी को समर्पित है। भगवान ब्रह्मा जी की पूजा में ब्रह्म स्तोत्र का प्रयोग किया जाता है। छोटे-मोटे वैचारिक मतभेदों को अपने रिश्ते पर इतना हावी न होने दें कि वे आपके रिश्ते को ही खा जाएं और एक बात हमेशा ध्यान रखें कि अवैध संबंधों की उम्र और विश्वसनीयता बहुत कम होती है चाहे वह महिला हो या पुरुष। Brahmshakti Stotra अगर आप आज अपने साथी को भूलने के लिए आकर्षित हो गए हैं, तो इस बात की क्या गारंटी है कि वह कल किसी और से दूर नहीं भागेगा। लेकिन फिर भी अगर आप पीड़ित हैं तो वैदिक पद्धति से ब्रह्मशक्ति स्तोत्र का पाठ करें, जिससे आपको बाधा से मुक्ति मिलेगी। ब्रह्मशक्ति स्तोत्र के लाभ: पारिवारिक कलह, बीमारी या अकाल मृत्यु आदि के संबंध में इसका पाठ करना चाहिए। प्रेम संबंधों में बाधाएं आने पर भी इसके पाठ से लाभ होगा। विभिन्न उपचारों के साथ अपने इष्ट देव या भगवती गौरी की पूजा करके उद्धृत स्तोत्र पढ़ें। Brahmshakti Stotra प्राप्ति के लिए व्यय, समर्पण आवश्यक है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: जिस व्यक्ति ने किसी कारणवश अपने प्रियतम को खो दिया हो और विवाहेतर संबंध बना लिया हो, Brahmshakti Stotra उसे नियमित रूप से ब्रह्मशक्ति स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। ब्रह्मशक्ति स्तोत्र हिंदी पाठBrahmshakti Stotra in Hindi ब्राह्मि ब्रह्म-स्वरूपे त्वं, मां प्रसीद सनातनि ।परमात्म-स्वरूपे च, परमानन्द-रूपिणि ।। ॐ प्रकृत्यै नमो भद्रे, मां प्रसीद भवार्णवे ।सर्व-मंगल-रूपे च, प्रसीद सर्व-मंगले ।। विजये शिवदे देवि ! मां प्रसीद जय-प्रदे ।वेद-वेदांग-रूपे च, वेद-मातः ! प्रसीद मे ।। शोकघ्ने ज्ञान-रूपे च, प्रसीद भक्त वत्सले ।सर्व-सम्पत्-प्रदे माये, प्रसीद जगदम्बिके ।। लक्ष्मीर्नारायण-क्रोडे, स्रष्टुर्वक्षसि भारती ।मम क्रोडे महा-माया, विष्णु-माये प्रसीद मे ।। काल-रूपे कार्य-रूपे, प्रसीद दीन-वत्सले ।कृष्णस्य राधिके भद्रे, प्रसीद कृष्ण पूजिते ।। समस्त-कामिनीरूपे, कलांशेन प्रसीद मे ।सर्व-सम्पत्-स्वरूपे त्वं, प्रसीद सम्पदां प्रदे ।। यशस्विभिः पूजिते त्वं, प्रसीद यशसां निधेः ।चराचर-स्वरूपे च, प्रसीद मम मा चिरम् ।। मम योग-प्रदे देवि ! प्रसीद सिद्ध-योगिनि ।सर्व-सिद्धि-स्वरूपे च, प्रसीद सिद्धि-दायिनि ।। अधुना रक्ष मामीशे, प्रदग्धं विरहाग्निना ।स्वात्म-दर्शन-पुण्येन, क्रीणीहि परमेश्वरि ।। ।। फल-श्रुति ।। एतत् पठेच्छृणुयाच्चन, वियोग-ज्वरो भवेत् ।न भवेत् कामिनीभेदस्तस्य जन्मनि जन्मनि ।। ।। इति ब्रह्मशक्ति स्तोत्र संपूर्णम्‌ ।।

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गोपाल मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

गोपाल मंदिर में राधा-कृष्ण की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं। इस मंदिर को 190 साल पुराना बताया जाता है। गोपाल मंदिर:भारत के मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में बड़ा बाजार चौक के बीच मंदिर स्थित है। मंदिर में राधा-कृष्ण की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं। इस मंदिर को 190 साल पुराना बताया जाता है। गोपाल मंदिर परिसर में आश्रय स्थल पत्थरों, लकड़ी और लोहे से बने हैं। बीते सालों में मूल मंदिर को छोड़कर आसपास का पूरा हिस्सा काफी जर्जर हो गया था, जिसके बाद ऐतिहासिक मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किया गया है। Gopal Mandir:मंदिर का इतिहास गोपाल मंदिर का निर्माण 1832 में महाराजा यशवंतराव होलकर की पत्नी कृष्णाबाई होलकर ने कराया था। वे भगवान कृष्ण की परम भक्त थीं। गोपाल मंदिर में राधा-कृष्ण की मूर्तियों के अलावा भगवान वरुण, वाराह अवतार, पद्मावती लक्ष्मी देवी की मूर्तियां भी हैं। उस समय इस मंदिर का निर्माण 80 हजार रुपये में हुआ था। मंदिर परिसर करीब सवा एकड़ में है। खास बात यह कि पूरा मंदिर पत्थरों और लकड़ियों से बना है। यहां मंदिर के अलावा आश्रय स्थल पत्थरों, लकड़ी और लोहे से बने हैं। Gopal Mandir:मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि मंदिर में दर्शन पूजन से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं व भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है। गोपाल मंदिर में अत्यंत सौभाग्यशाली ही प्रवेश कर पाता है। मंदिर में प्रार्थना करने का सबसे अच्छा समय वसंत पंचमी के दिन होता है। मंदिर की छत और दीवारों के प्लास्टर और जुड़ाई के लिए ईट का चूरा, चूना, मैथी दाना, उड़द की दाल, गुड़ जैसे मटेरियल इस्तेमाल किया गया है। Gopal Mandir:मंदिर की वास्तुकला गोपाल मंदिर का मुख्य आकर्षण इसकी आकर्षक वास्तुकला है। मंदिर एक संगमरमर सर्पिल की संरचना है, जो प्राचीन मराठा शैली की वास्तुकला में बनवाया गया है। इसमें एक बड़ा केन्द्रीय हाल है, जिसमें अस्तर की छत वाले विशाल खम्बे बने हुए हैं। सभी स्तम्भ को डिजाइन किया गया है। विशाल कांच के झूमर जब जल उठते हैं तो मंदिर की वास्तुकला प्रणाली सभी की आंखों को चकाचौंध कर देती है। मंदिर में भगवान कृष्ण की प्रतिमा गर्भगृह में विराजित है, जो चांदी से निर्मित दरवाजों के साथ संगमरमर की आकर्षक वेदी पर विराजित की गई है। मंदिर का जीर्णोद्धार 2022 में हुआ। होल्कर काल में मंदिर के आश्रय स्थल, परिसर की दीवारों में सीमेंट उपयोग नहीं किया गया था। मंदिर के जीर्णोद्धार में हेरिटेज के सारे नॉर्म्स का पालन किया गया। छत और दीवारों के प्लास्टर और जुड़ाई के लिए सुर्खी (ईट का चूरा), चूना, मैथी दाना, उड़द की दाल, गुड़ आदि मटेरियल यूज किया गया। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 09:00 PM शृंगार आरती 07:00 AM – 08:00 AM राज भोग 11:00 AM – 12:00 PM शयन आरती का समय Invalid date – 12:09 PM मंगला आरती 05:00 AM – 06:00 AM बाल भोग 09:00 AM – 10:00 AM संध्या आरती का समय 07:30 PM – 08:30 PM मंदिर का प्रसाद गोपाल मंदिर में कान्हा जी को मिश्री,माखन और पंचमेवे के लड्‌डू का भोग चढ़ाया जाता है। इसके अलावा भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पेड़े, पंजीरी का भोग लगाते हैं।

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रणजीत हनुमान मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

हनुमान जी को समर्पित यह मंदिर बहुत ही चमत्कारिक है। रणजीत हनुमान मंदिर:मध्य प्रदेश के स्वच्छ शहर इंदौर के फूटी कोठी रोड पर रणजीत हनुमान मंदिर स्थित है। हनुमान जी को समर्पित यह मंदिर बहुत ही चमत्कारिक है। प्रतिदिन इस मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है। परन्तु प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहाँ पर विशेष आरती होती है। जिस कारण बहुत भीड़ देखने को मिलती है। आपने हनुमान जी की कई तरह की प्रतिमाये देखीं होगी परन्तु रणजीत हनुमान जी की इस प्रतिमा को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि वे किसी युद्ध में जाने की तैयारी में हैं। RANJEET HANUMAN MANDIR:का इतिहास रणजीत हनुमान मंदिर के इतिहास से जुड़ी कोई सटीक जानकारी नहीं है। इस मंदिर के इतिहास से जुड़ी मान्यता है कि इंदौर शहर के पहलवान अल्हड़सिंह भारद्वाज, हनुमान जी के अनन्य भक्त थे। उन्होंने सन् 1907 में गुमाश्ता नगर में वीरान जंगलों में भगवान हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित किया और एक छोटा सा अखाडा बनाया। समय के साथ साथ इस स्थान पर कई चमत्कार होने लगे। तब से यह मंदिर “रणजीत हनुमान मंदिर” के नाम से जाना जाने लगा। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति अपने रण अर्थात अपने कार्य क्षेत्र में ख्याति पाना चाहते है वह रणजीत हनुमान के दर्शन करने आते है। रणजीत हनुमान मंदिर में सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इतना ही नहीं इस मंदिर में नेता, अभिनेता भी अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में कई राजा युद्ध लड़ने से पूर्व जीत का आशीर्वाद लेने हेतु आते थे। परन्तु कोई भी ऐसा भक्त आज तक नहीं आया जिसने बोला हो कि उसकी हार हुयी है। मंदिर की वास्तुकला रणजीत हनुमान मंदिर का 130 साल पुराना है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है। मंदिर में प्रवेश करने से आप भक्तिमय हो जायेंगे। हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन मुख्य द्वार से ही होने लगते है। मंदिर के अंदर हनुमान जी की भव्य प्रतिमा है। वह ढाल और तलवार के साथ विराजित है। हनुमान जी के चरणों में अहिरावण है। मंदिर में शिव जी, राम सीता और दुर्गा देवी की प्रतिमाएं भी विराजित है। इसके अलावा मंदिर के समीप ही कई देवी देवताओं के छोटे छोटे मंदिर भी बनाये गए हैं। भगवान शनि के साथ साथ नव गृह के दर्शन भी आपको इस मंदिर में करने को मिलेंगे। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 02:00 PM सायंकाल आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 10:00 PM शनिवार और रविवार आरती का समय 08:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद रणजीत हनुमान मंदिर में भगवान को चना चिरौंजी, मिठाई, पेड़ा, लड्डू आदि का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूलों की माला भी अर्पित की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा से नारियल भी चढ़ाते है।

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2025 mein sita navami kab hai Hindi:सीता नवमी पर इस नियम से करें भगवान राम की पूजा, कुंडली से दूर होगा अशुभ ग्रहों का प्रभाव

2025 mein sita navami kab hai Hindi:सीता नवमी का पर्व हर साल भक्ति भाव के साथ है। यह तिथि माता सीता के जन्म का प्रतीक है। माना जाता है कि ये वही पावन दिन जब देवी सीता का धरती पर अवतरण हुआ था। पंचांग के आधार पर यह पर्व हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है तो आइए इस दिन (Sita Navami 2025) से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं। Sita Navami 2025: सीता नवमी को माता सीता के जन्म दिवस के रुप में मनाया जाता है, 2025 mein sita navami kab hai Hindi इसीलिए इस दिन को सीता जयंती के नाम से जानते हैं. इस दिन पर माताएं और स्त्रियां व्रत करती हैं.  इस दिन को जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है. सीता जयंती वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनायी जाती है. 2025 mein sita navami kab hai Hindi इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पतियों की दीर्घायु की कामना करती हैं. हिंदू धर्मग्रन्थों के अनुसार, माता सीता का जन्म मंगलवार के दिन पुष्य नक्षत्र में हुआ था. वहीं प्रभु श्री राम का जन्म  चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था. हिंदू पंचांग के अनुसार सीता जयंती राम नवमी के एक माह के बाद आती है. 2025 mein sita navami kab hai Hindi:सीता नवमी 2025 तिथि:Sita Navami 2025 date नवमी तिथि 05 मई 2025 को सुबह 7.35 मिनट पर शुरू होगी नवमी तिथि 06 मई को सुबह 08.38 मिनट पर समाप्त होगी. सीता नवमी सोमवार, 5 मई 2025, सोमवार को मनाई जाएगी. सीता नवमी के दिन महिलाएं और स्त्रियां अपने सुखी दापंत्य जीवन के लिए व्रत करती हैं ताकि जीवन में सुख-समृद्धि का वास हो. इस दिन माता सीता को 16 श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें. सीता नवमी के दिन माता सीता को खीर का भोग लगाएं, और कन्याओं को प्रसाद दें. साथ ही  “ॐ पतिव्रताय नमः” मंत्र का जाप करें. सीता चालीसा का पाठ करें.  माता सीता को लाल चुनरी या लाल वस्त्र अर्पित करें यह उपाय विवाह संबंधी परेशानी दूर करता है.  श्री राम और माता सीता की पूजा करें, माता सीता को चुनरी और श्रृंगार का सामान अर्पित करें, और जानकी स्तोत्र का पाठ करें.  विवाह में आ रही बाधा को दूर करने के लिए प्रभु श्रीराम और माता लक्ष्मी की पूजा करें, हल्दी की गांठें अर्पित करें, और सीता नवमी के दिन व्रत रखें.  माता सीता को भूमिजा कहा जाता है इसलिए भूमि पूजन का विशेष महत्व है. भूमि माता और सीता माता की स्तुति करें. पूजा विधि ( Ram Ji Ki Puja Vidhi) सीता नवमी व्रत के लाभ (Sita Navami 2025 Fast Benefits) सीता नवमी डेट और टाइम (Sita Navami 2025 Date And Time) वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 5 मई को सुबह 7 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी। वहीं तिथि का समापन अगले दिन यानी 6 मई को सुबह 8 बजकर 38 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए इस साल सीता नवमी का व्रत 5 मई को रखा जाएगा। सीता नवमी पूजा समय (Sita Navami 2025 Puja Time) सीता नवमी पूजा मंत्र (Sita Navami 2025 Puja Mantra)

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Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana:सपने में शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाने का अर्थ

Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana:सपने में शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाने का अर्थ एक गहन और बहुआयामी विषय है, जो हिंदू धर्म, संस्कृति, आध्यात्मिकता, और स्वप्न शास्त्र के विभिन्न पहलुओं से जुड़ा है। यह विषय धार्मिक, मनोवैज्ञानिक, और प्रतीकात्मक दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है। मैं इस लेख को व्यापक, संरचित, और सूचनात्मक बनाऊंगा, जिसमें सभी प्रासंगिक पहलुओं को शामिल किया जाएगा। इस लेख में मैं सपनों के महत्व, शिवलिंग और धतूरे के प्रतीकात्मक अर्थ, स्वप्न शास्त्र, हिंदू धर्म में शिव भक्ति, और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण को कवर करूंगा… Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana:सपनों का महत्व और स्वप्न शास्त्र सपने मानव जीवन का एक रहस्यमय हिस्सा हैं, जिन्हें विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों में अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा जाता है। हिंदू धर्म में सपने केवल मन की कल्पनाएं नहीं माने जाते, बल्कि वे अवचेतन मन, आध्यात्मिक संदेश, और कभी-कभी दैवीय संकेतों का माध्यम भी हो सकते हैं। स्वप्न शास्त्र, जो भारतीय ज्योतिष और दर्शन का एक हिस्सा है, सपनों के प्रतीकों और उनके अर्थों की व्याख्या करता है। सपने में शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाना एक विशिष्ट और शक्तिशाली प्रतीक है, क्योंकि यह भगवान शिव, जो हिंदू धर्म में संहारक और सृजनकर्ता दोनों हैं, के साथ जुड़ा है। धतूरा, एक विषैला पौधा, शिव पूजा में विशेष महत्व रखता है। Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana इस सपने का अर्थ समझने के लिए हमें शिवलिंग, धतूरा, और सपनों के प्रतीकात्मक महत्व को गहराई से समझना होगा। शिवलिंग का प्रतीकात्मक और धार्मिक महत्व What is Shivalinga:शिवलिंग क्या है? शिवलिंग हिंदू धर्म में भगवान शिव का प्रतीक है। यह एक अमूर्त रूप है, जो शिव की अनंत शक्ति, सृजन, और संहार को दर्शाता है। लिंग शब्द संस्कृत में “प्रतीक” या “चिह्न” का अर्थ रखता है, और शिवलिंग को शिव की रचनात्मक और विनाशकारी शक्तियों का संयोजन माना जाता है। आध्यात्मिक महत्व: शिवलिंग को ब्रह्मांड का केंद्र माना जाता है, जो जीवन और मृत्यु के चक्र को दर्शाता है। यह ध्यान और भक्ति का केंद्र बिंदु है। प्रतीकात्मक अर्थ: शिवलिंग को पुरुष और स्त्री ऊर्जा (शिव और शक्ति) के मिलन के रूप में भी देखा जाता है। Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana यह यिन-यांग की तरह संतुलन का प्रतीक है। सपने में शिवलिंग: सपने में शिवलिंग का दिखना आमतौर पर आध्यात्मिक उन्नति, शांति, और दैवीय आशीर्वाद का संकेत माना जाता है। यह जीवन में एक नई शुरुआत या परिवर्तन का प्रतीक हो सकता है। Importance of worshiping Shivalinga:शिवलिंग की पूजा का महत्व हिंदू धर्म में शिवलिंग की पूजा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह भक्तों को शिव की कृपा प्राप्त करने और जीवन के दुखों से मुक्ति पाने का माध्यम प्रदान करती है। शिवलिंग पर विभिन्न वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं, Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana जैसे बेलपत्र, दूध, जल, और धतूरा, जिनमें से प्रत्येक का अपना प्रतीकात्मक और धार्मिक महत्व है। शिवलिंग पर चढ़ाई: शिवलिंग पर कुछ भी चढ़ाने का अर्थ है अपनी भक्ति, समर्पण, और इच्छाओं को शिव के चरणों में अर्पित करना। सपने में पूजा: सपने में शिवलिंग पर कुछ चढ़ाना (जैसे धतूरा) भक्त की आंतरिक इच्छा, भय, या आध्यात्मिक खोज को दर्शा सकता है। द्वितीय खंड: धतूरे का महत्व और प्रतीकात्मक अर्थ What is Datura:धतूरा क्या है? धतूरा (वैज्ञानिक नाम: Datura) एक जहरीला पौधा है, जो अपने सफेद या बैंगनी फूलों और कांटेदार फलों के लिए जाना जाता है। यह पौधा हिंदू धर्म में भगवान शिव से गहराई से जुड़ा है और उनकी पूजा में विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। धार्मिक महत्व: धतूरा शिव को प्रिय है। ऐसा माना जाता है कि धतूरा चढ़ाने से शिव प्रसन्न होते हैं Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana और भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। प्रतीकात्मक अर्थ: धतूरा विष और अमृत दोनों का प्रतीक है। Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana यह जीवन के दोहरे पहलुओं—सृजन और विनाश—को दर्शाता है। यह अज्ञानता और माया को नष्ट करने की शक्ति का भी प्रतीक है। औषधीय और आध्यात्मिक उपयोग: आयुर्वेद में धतूरे का उपयोग सावधानी के साथ औषधि के रूप में किया जाता है। आध्यात्मिक रूप से, यह ध्यान और तंत्र साधना में उपयोग होता है। धतूरा और शिव का संबंध:Relationship between Datura and Shiva हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को अपने कंठ में धारण किया था, जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया (नीलकंठ)। धतूरा, जो स्वयं विषैला है, Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana शिव की इस विष को सहन करने की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाना: धतूरा चढ़ाना भक्त की ओर से अपनी नकारात्मक प्रवृत्तियों, जैसे क्रोध, लोभ, और अहंकार, को शिव के चरणों में समर्पित करने का प्रतीक है। सपने में धतूरा: सपने में धतूरा देखना या चढ़ाना जीवन में किसी विषैली स्थिति, भावना, या आदत से मुक्ति की इच्छा को दर्शा सकता है। स्वप्न शास्त्र और सपनों की व्याख्या What is dream science?:स्वप्न शास्त्र क्या है? स्वप्न शास्त्र भारतीय ज्योतिष और दर्शन का एक हिस्सा है, Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana जो सपनों के प्रतीकों और उनके अर्थों की व्याख्या करता है। यह मानता है कि सपने अवचेतन मन, पूर्वजन्म, और दैवीय संदेशों का प्रतिबिंब हो सकते हैं। Types of dreams:सपनों के प्रकार सामान्य सपने: दैनिक जीवन की घटनाओं और चिंताओं का प्रतिबिंब। आध्यात्मिक सपने: दैवीय संदेश या आध्यात्मिक मार्गदर्शन। पूर्वसूचक सपने: भविष्य की घटनाओं का संकेत। सपनों का समय: स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सुबह के समय (ब्रह्म मुहूर्त) देखे गए सपने अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं। Meaning of offering Dhatura on Shivling in dream:सपने में शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाने का अर्थ सपने में शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाना एक शक्तिशाली प्रतीक है, जिसके कई संभावित अर्थ हो सकते हैं। Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana ये अर्थ व्यक्ति की मानसिक स्थिति, आध्यात्मिक स्तर, और जीवन की परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। आध्यात्मिक उन्नति: यह सपना आध्यात्मिक जागृति या शिव भक्ति की ओर बढ़ने का संकेत हो सकता है। धतूरा चढ़ाना आपकी नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागने और शुद्धिकरण की इच्छा को दर्शाता है। विषैली भावनाओं से मुक्ति: धतूरा विष का प्रतीक है। Sapne Me Shivling Pe Datura Chadana इसे चढ़ाना आपके जीवन में किसी नकारात्मक भावना, जैसे क्रोध, ईर्ष्या, या भय, से मुक्ति

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मनुआभान टेकरी मंदिर:भोपाल, मध्य प्रदेश, भारत

यह भोपाल की सबसे ऊंची जगह लालघाटी में स्थित है। इसी टेकरी पर बना है खूबसूरत जैन श्वेतांबर मंदिर। मनुआभान टेकरी मंदिर:मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में सबसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक है मनुआभान की टेकरी, जिसका नाम अब महावीर गिरी हो चुका है। यह भोपाल की सबसे ऊंची जगह लालघाटी में स्थित है। इसी टेकरी पर बना है खूबसूरत जैन श्वेतांबर मंदिर। श्वेतांबर जैन समाज इसे अपना तीर्थस्थल मानता है। मनुआभान टेकरी समुद्र तल से 1300 फीट ऊंची है। यहां से भोपाल की शान कहे जाने वाले बड़ा तालाब व पूरे शहर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। टेकरी पर लगे रोपवे का रोमांच उठाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। मंदिर से सूर्योदय व सूर्यास्त देखना भी काफी आकर्षक लगता है। मनुआभान टेकरी पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। मनुआभान टेकरी मंदिर का इतिहास मनुआभान राजा भोज का दरबारी था। वह कई प्रकार के हाव-भाव व वेश बदलकर राजा का मनोरंजन करता था। कुछ समय बाद वह यह सब छोड़कर भगवत सिद्धि में लीन हो गया, जिसके बाद उसे मन्तुगाचार्य कहने लगे। उसी के नाम पर इस टेकरी का नाम पड़ा, जो अपभ्रंश होकर मनुआभान टेकरी के नाम से जानी जाने लगी। कहा जाता है कि यह टेकरी ओसवाल राजवंश की साधना स्थली भी है। श्वेतांबर जैन मंदिर का इतिहास करीब 150 साल पुराना है। कहा जाता है कि नवाब कुदसिया बेगम ने मनुआभान टेकरी पर उत्खनन का काम कराया था, जिसमें तीर्थंकर महावीर की प्रतिमा मिली। इस प्रतीमा को भोपाल शहर के चौक के श्वेताम्बर मंदिर में स्थापित कर दिया गया। जबकि टेकरी पर स्थित मंदिर में प्रतिमा के पदचिन्ह व 7 गुफाएं हैं, जिनमें संत रहते हैं। मनुआभान टेकरी मंदिर का महत्व इस मंदिर को लेकर मान्यताएं है की यहाँ कुछ भी खाकर नहीं जाया जाता। भक्तों को खाली पेट जाना होता है। इस मंदिर में भक्तों को काला वस्त्र, लुंगी, हाफ पैंट या गाउन पहनकर प्रवेश करने की मनाही होती है। मनुआभान टेकरी मंदिर में चमड़े का कोई भी सामान ले जाना वर्जित है। इस मंदिर के अंदर फोटो खींचना व कैमरा ले जाना भी मना है। मनुआभान टेकरी मंदिर की वास्तुकला जैन श्वेतांबर मंदिर को काफी खूबसूरत राजस्थानी शैली में बनाया गया है। मंदिर के खंभों पर शानदार नक्काशी देखने को मिलती है। मुख्य द्वारा को काफी सुंदर तरीके से सजाया गया है। द्वार के ऊपर स्वास्तिक का चिन्ह व एक प्रतिमा सुशोभित है। मंदिर में मुख्य रूप से संगमरमर से बनी महावीर स्वामी जी की प्रतिमा के दर्शन होते हैं। इसके अलावा मंदिर में भगवान गौतम स्वामी जी, पद्मावती देवी, भगवान आदिनाथ जी, भगवान शांतिनाथ जी व सिंदूर से सुशोभित श्रीमणिभद्रवीर जी की प्रतिमा स्थापित है। प्राचीन मंदिर में एक शिलाखंड भी है, जिसपर हिंदी व उर्दू में मंदिर का इतिहास लिखा हुआ है। मंदिर के सिंह द्वार पर पत्थरों पर नक्काशी की हुई एक पुरानी पांडुलिपि है। मनुआभान टेकरी मंदिर का समय सुबह मन्दिर खुलने का समय 07:00 AM – 12:30 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 07:30 PM मंदिर का प्रसाद जैन श्वेतांबर मंदिर में प्रसाद चढ़ाने व बांटने की कोई परंपरा नहीं है।

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हरसिद्धि माता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

इसे शहर का सबसे पुरातन मंदिर माना जाता है। हरसिद्धि माता मंदिर, भारत के मध्य प्रदेश राज्य के इंदौर शहर में स्थित है। इसे शहर का सबसे पुरातन मंदिर माना जाता है। हरसिद्धि माता मंदिर के दाई और एक पुराना सा खंडहर भी बना है जिसे रुक्मणी देवी का मंदिर कहा जाता है जो पुरातत्व विभाग के देख-रेख में संचालित होता है। हरसिद्धि माता मंदिर में मुंडन संस्कार से लेकर शादी समारोह का आयोजन भी होता है। मंदिर के पुजारी के अनुसार वर्ष में दो बार चैत्र नवरात्रि की दशमी और अश्विन मास की दशमी को मां का विशेष श्रृंगार किया जाता है। भक्तगण इस दिन मां के दर्शन सिंहवाहिनी के रूप में करते हैं। Harsiddhi Mata Temple:हरसिद्धि माता मंदिर का इतिहास हरसिद्धि माता मंदिर का निर्माण देवी अहिल्याबाई होलकर ने 21 मार्च 1766 को कराया था। तब यहाँ उनके पुत्र श्रीमंत मालेरावजी का शासन था। मंदिर में स्थापित देवी की दिव्य मूर्ति पूर्वाभिमुखी महिषासुर मर्दिनी मुद्रा में है। मंदिर परिसर में बाद में निर्मित शंकरजी व हनुमान जी के मंदिर भी हैं। मंदिर के सामने कभी एक पक्की बाव़ड़ी हुआ करती थी। माँ की मूर्ति इसी बाव़ड़ी से मिली थी। मंदिर का महत्व लोगों की मान्यता है कि यहाँ पूजा करने से शरीर पर निकलने वाले दाने, जिन्हें स्थानीय बोलचाल में (माता) कहते हैं, नहीं निकलते। देवी हरसिद्धि के नेत्र अलग से लगाए हैं। प्रतिमा के जो नेत्र हैं वह थोड़े छोटे हैं। कई वर्षों से उन्हें मीनाकार (मछली के आकार की) नेत्र लगाए जा रहे हैं। यह नेत्र नाथद्वारा से आते हैं। चांदी पर मीना लगाकर इन नेत्रों को तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि इन नेत्रों को लगाने के लिए किसी भी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। नेत्रों को लगाने के लिए मधुमक्खी के छत्ते से निर्मित मेंढ लगाया जाता है। मंदिर की वास्तुकला हरसिद्धि माता मंदिर मराठा शैली में बना है। मंदिर में देवी हरसिद्धि, देवी महालक्ष्मी और देवी सिद्धिदात्री विराजमान है। देवियों की प्रतिमाएं भी काफी विशेष है। दिर का निर्माण वास्तु के अनुरूप किया गया है।सूर्योदय के समय सूर्य की किरणें मूर्ति पर पड़ती हैं। परिसर में अष्ट भैरव स्थापित है। मंदिर में हरसिद्धि देवी का महिषासुर मर्दिनी के रूप में है। चारभुजाधारी देवी के दाए हाथों में से एक में तलवार और दूसरे में त्रिशुल है जबकि बाए हाथों में से एक में घंटी और दूसरे में नरमुंड है। हरसिद्धि देवी की संगमरमर की यह प्रतिमा करीब चार फीट की है। इसी प्रकार मंदिर में विराजित महालक्ष्मी की प्रतिमा भी कुछ खास है। हरसिद्धि माता मंदिर में महालक्ष्मी की प्रतिमा काले पाषाण की है। यह प्रतिमा करीब ढ़ाई फीट की है। देवी के एक हाथ में अमृत तो दूसरे हाथ में पद्मपुष्प (कमल) है। जबकि तीसरी प्रतिमा सिद्धिदात्री की है, जो बिलकुल देवी हरसिद्धि के रुप से मिलती जुलती है। सिद्धिदात्रि की यह प्रतिमा संगमरमर की है। चारभुजाधारी इस प्रतिमा के दाए हाथों में से एक में खट्ग और त्रिशुल है, जबकि बाए हाथों में से एक में ढाल और दूसरे में मुंड है। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 05:30 AM – 09:00 PM श्रृंगार आरती 08:30 AM – 09:15 AM सुबह की आरती 05:30 AM – 06:00 AM सायंकाल आरती 07:30 PM – 08:15 PM मंदिर का प्रसाद हरसिद्धि माता मंदिर में मां को फल, लड्डू, ड्राई फ्रूट्स और पेड़े का भोग चढ़ाते है। कुछ श्रद्धालु माता को अपनी श्रद्धा के अनुसार पूड़ी-सब्जी का भोग भी लगाते हैं।

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Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay: भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए बुधवार के दिन करें ये आसान उपाय

Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay:भगवान गणेश प्रथम पूजनीय देव हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा- अर्चना की जाती है। बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से भगवान गणेश…. Budhwar ke totke:हिन्दू धर्म में हर एक दिन किसी न किसी देवी या देवता का माना जाता है. जैसे सोमवार भगवान शिव के लिए, तो मंगलवार हनुमानजी के लिए वैसे ही बुधवार भगवान गणेशजी के लिए माना जाता है. कहा जाता है, बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा करने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं Budhwar Upay: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को प्रथम देव माना गया है Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay यानि की कोई भी शुभ कार्य हो या मांगलिक कार्य या प्रतिदिन होने वाली सामान्य पूजा , सभी तरह की पूजा में सबसे पहले गणेश जी की ही पूजा की जाती है,उसके बाद ही अन्य देवताओं का पूजन किया जाता है. बुधवार का दिन भगवान गणेश जी का दिन माना जाता है. मान्यता है कि बुधवार के दिन विधिविधान के साथ Ganesh ji का पूजन करने से गणेश जी सभी कष्टों से मुक्ति प्रदान करते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं ,साथ ही अगर किसी शुभ कार्य में रुकावट आ रही है तो वो रुकावट भी गणेश जी की कृपा से शीघ्र दूर हो जाती है. आइए जानते हैं बुधवार के दिन किस तरह गणेश जी का पूजन करने से बिगड़े काम बनते हैं और मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं. Solutions to remove obstacles and problems in work:कार्य में बाधा और परेशानी दूर करने के लिए उपाय अगर जीवन में कई तरह की बाधाएं आ रहीं हों या परेशानियां साथ न छोड़ रहीं हों इससे निजात पाने के Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay लिए प्रत्येक बुधवार के दिन गाय को हरी ताजी घास खिलाएं. इससे जीवन में आ रही परेशानियां दूर होंगी और घर में सुख- शांति का वास होगा. Remedies for Mercury being weak:बुध ग्रह कमजोर हो तो इसके लिए उपाय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार के दिन हरे रंग के कपड़े पहनना मंगलकारी माना जाता है और अगर आपकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है तो इसके लिए हमेशा अपने पास हरे रंग का रूमाल रखें. Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay और बुधवार के दिन हरी मूंग की दाल और हरे वस्त्रों का दान किसी जरूरतमंद को दें, इससे आपकी कुंडली में बुध मजबूत होगा. Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay:मनोकामना पूर्ति के लिए उपाय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर आपके मन में कोई मनोकामना है तो उसकी पूर्ति के लिए प्रत्येक बुधवार के दिन गणेश जी के मंदिर जाएं और बार बार उनके सामने मनोकामना की पूर्ति के लिए अनुरोध करें,ऐसा तबतक करें जब तक की आपकी मनोकामना पूरी नहीं हो जाती. Remedies for happiness and peace at home:घर में सुख शांति के लिए उपाय दूर्वा भगवान गणेश को बहुत ज्यादा प्रिय मानी जाती है Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay इसलिए प्रत्येक बुधवार को 21 दूर्वा गणेश जी को अर्पित करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है. ऐसा करने से घर में सुख एवं शांति का वास होता है. Remedies to remove mental disturbance:मन की अशांति दूर करने के लिए उपाय अगर मन अशांत रहता हो तो मन की शांति के लिए प्रत्येक बुधवार के दिन गणेश जी को शमी के पत्ते अर्पित करें ,Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay ऐसा करने से मानसिक कष्ट दूर होते हैं. Tips for success in work:कार्य में सफलता के लिए उपाय बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा के समय गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाएं इसके बाद अपने और परिवार के लोगो को भी तिलक लगाएं. माना जाता है कि ऐसा करने से सभी कार्य पूर्ण होते हैं. keep modak in prasad:प्रसाद में मोदक रखें गणेश जी को मोदक अति प्रिय हैं इसलिए उनकी पूजा में खासकर बुधवार के दिन प्रसाद में मोदक का भोग गणेशजी को लगाए ,इससे गणेश भगवान प्रसन्न होते हैं. Offer Durva to Lord Ganesha:भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें भगवान गणेश को दूर्वा घास अति प्रिय होती है। भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए उन्हें दूर्वा घास जरूर अर्पित करें। जो भक्त भगवान गणेश को दूर्वा घास अर्पित करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay आप रोजाना भी भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित कर सकते हैं। अगर आपके कार्यों में बार- बार विघ्न आ जाता है तो भगवान गणेश को दूर्वा जरूर अर्पित करें। ऐसा करने से आपके कार्यों के विघ्न दूर हो जाएंगे। Apply vermillion to Lord Ganesha:भगवान गणेश को सिंदूर लगाएं भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए उन्हें सिंदूर भी लगाएं। Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay सिंदूर लगाने से गणपित भगवान प्रसन्न होते हैं। भगवान गणेश को सिंदूर लगाने के बाद अपने माथे में भी सिंदूर लगा लें। भगवान गणेश को सिंदूर लगाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। आप रोजाना भी भगवान गणेश को सिंदूर लगा सकते हैं।

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Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna:सपने में नंदी बैल को देखना शुभ या अशुभ? जानिए क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna:रात में सोते हुए समय सपने देखना हर व्यक्ति के लिए आम बात है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में नंदी बैल दिखाई देना बहुत शुभ माना गया है. यह सपना घर में सुख-शांति आने का संकेत देता है. आइए जानते हैं, इस सपने के संकेतों के बारे में…  Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna:दोस्तों हम जब रात को सोते है तो गहरी नींद के बाद हमे जो दिखाई देता है वो है सपना। सपने में हम कुछ न कुछ देखते है कभी हमे अच्छा सपना आता है तो कभी बुरा जिसे देखके हम सोच में पड जाते है आखिर ऐसे सपने का मतलब क्या होता है। अगर अच्छा सपना होता है तो हम खुश हो जाते है और बुरा होता है तो डर लगता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने हमे आने वाले भविष्य में क्या होने वाला है उसकी और इशारा करता है। सपना अगर देवी देवता का हो तो हमे कोई न कोई संकेत देने के लिए सपने में आते है। Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna:सपने में नंदी देखने का मतलब स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर सपने में नंदी बैल देखा है Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna तो इसका मतलब ये है आपके जीवन में नए काम की शुरुआत होगी. इसके बाद आपका जीवन सुखमय हो जाएगा. आपको शिव और पार्वती की पूजा अवश्य करनी चाहिए ताकि आपको इस सपने का पूरा लाभ मिल सके और आप भी एक सुखमय जीवन का लाभ ले सकें. Nandi indicates happiness and prosperity:सुख-समृद्धि का संकेत देता है नंदी स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर सपने में आपको नंदी बैल दिखाई देता है तो इसका एक खास मतलब होता है. इस सपने को शुभ माना गया है. यह सपना शांति, समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक है. अगर आप सपने में भगवान शिव नंदी पर सवार हैं Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna तो इसका मतलब है कि आपको सफलता, तरक्की और मान-सम्मान मिलने वाला है.  Meaning of Nandi bull in a pregnant woman’s dream:गर्भवती स्त्री के सपने में नंदी बैल आने का मतलब  स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर किसी गर्भवती स्त्री को सपने में नंदी दिखाई देते है तो इसे काफी शुभ माना जाता है. Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna इसका मतलब है कि आपको भाग्यशाली संतान की प्राप्ति होगी. इस तरह के सपने धन वृद्धि के संकेत भी देते हैं. Killing a white bull in a dream:सपने में सफेद बैल का मारना स्वप्न शास्त्र के अनुसार, एक सफेद बैल के मारने का सपना देखना कोई असामान्य घटना नहीं है. Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna यह छिपी हुई आक्रामकता, अनसुलझे क्रोध या खुद को अभिव्यक्त करने की दबी हुई इच्छा का प्रतिनिधित्व कर सकता है.  सपने में नंदी बैल की पूजा करना (Sapne Me Nandi Bail Ki Puja Karna) सपने में नंदी बैल की पूजा करना ऐसा सपना आना इंसान के जीवन में शुभ दिनों की शरुआत का संकेत देता है। इस सपने का मतलब है की जिस इंसान के पास नौकरी नहीं है कोई काम नहीं है तो जल्द ही आपको बड़ी जगह पर काम मिल जायेगा। Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna अगर व्यक्ति सच्चे मन से काम करेगा तो उसकी तरक्की भी हो सकती जिससे परिवार की स्थिति में सुधार आ सकता है। श्रावण मास में सपने में नंदी बैल की पूजा करने से सारे दुःख दूर हो जाते है नंदी महादेव का भक्त है तो दोनों का आशीर्वाद आप को मिलता है। नंदी हमेशा महादेव के साथ रहता है महादेव की आज्ञा का पालन करता है। Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna अगर आप नंदी से सच्चे मन से कुछ मांगते है तो जल्द ही आपकी मनोकामना पूर्ण हो जाएगी। सपने में नंदी बैल को कैलाश पर्वत पर देखना (Sapne Me Nandi Bail Ko Kailash Parvat Par Dekhna) सपने में नंदी बैल को कैलाश पर्वत पर देखना इसका मतलब है की इस व्यक्ति को जल्द ही उच्चाईया हासिल होगी। आप को जल्द ही कोई ऐसा कार्य करने को मिलेगा जिससे आप सबकी नजर में अच्छे इंसान बन जायेंगे। Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna लोगो की भलाई का कार्य करने से लोग आपका मान-सम्मान करेंगे और आपकी इज़्ज़त करेंगे। इंसान को हमेशा ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे सबका भला हो। सपने में कैलाश पर्वत देखना भी शुभ सपना होता है कैलाश पर्वत जितनी उच्चाईया हासिल कर सकते है। इंसान अगर मन लगाकर कोई भी कार्य करेगा तो उसमे में वो तेजी से आगे बढ़ जायेगा। ऐसा सपना देखने से हर परेशानी दूर हो जाएगी। Seeing Mahadev riding Nandi in the dream:सपने में महादेव को नंदी की सवारी करते देखना स्वप्न शाश्त्र के अनुसार सपने में महादेव को नंदी की सवारी करते देखना इसका मतलब है की इंसान के जीवन में अगर विवाह को लेकर कोई परेशानी हो रही है आप को अच्छी खबर मिलने वाली है। यह सपना देखने इंसान का विवाह का योग जल्द ही मिल जाता है और उनकी परेशानी दूर हो जाती है। महादेव को नंदी के साथ देखना आपके जीवन में शुभ संकेत प्रदान करता है। सपने में नंदी बैल को गुस्से में देखना (Sapne Me Nandi Bail Ko Gusse Me Dekhna) सपने में नंदी बैल को गुस्से में देखना ऐसा सपना आना स्वप्न शास्त्र के अनुसार अशुभ माना जाता है। जिस व्यक्ति ने सपने में नंदी बैल को गुस्से में देखा है उसे आने वाले दिनों में मुसीबतो का सामना करना पड़ सकता है। Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna अगर इंसान ने कोई गलती की है तो भविष्य में कठिन समय आने का संकेत मिलता है जिससे परेशानी हो सकती है। इसलिए आपको नंदी बैल की पूजा करके उनसे क्षमा मांग लेनी चाहिए जिससे उसे कम परेशानी का सामना करना पड़े। अगर आपका मन सच्चा है तो वो आपको क्षमा कर देंगे और आपकी परेशानी जल्द दूर हो जाएगी। सपने में काला नंदी बैल देखना (Sapne Me Kala Nandi Bail Dekhna) सपने में काला नंदी देखना इसका मतलब है की आने वाले दिनों में व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में उन्नति होगी तथा आपके जो भी कार्य अधूरे रह गए है वो पुरे होने का संकेत है। Sapne Me Nandi Bail Ko Dekhna इस सपने से व्यक्ति के जीवन में और उनके घर परिवार में खुशिया आएगी जिससे उनका मान सम्मान

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वैष्णो धाम मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

माता का यह मंदिर कटरा के वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर ही बना हुआ है। इंदौर मध्यप्रदेश में ऐसे भी मंदिर है जो धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्त्व रखते है। उनमे से एक है माँ वैष्णो धाम मंदिर। यह मंदिर गुरु नानक कॉलोनी लालबाग में है। जो लोग इंदौर घूमने आते है वह इस मंदिर के दर्शन करने जरूर जाते है। माता का यह मंदिर कटरा के वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर ही बना हुआ है। इस मंदिर के दर्शन करने से ऐसा लगता है मानों कटरा में स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर के साक्षात् दर्शन हो रहे हों। वैष्णो धाम मंदिर का इतिहास Vaishno Dham Temple:एक बार श्रीमती सुरिंदर कौर ग्रोवर के सपने में माँ वैष्णो माता प्रकट हुईं और उन्होंने इंदौर शहर में भव्य मंदिर निर्माण की इच्छा प्रकट की और उन्हें आशीर्वाद दिया। श्रीमती सुरिंदर कौर ग्रोवर ने माता की इच्छा अनुसार सन 2009 में मंदिर निर्माण करवाया। “वैष्णव धाम” को पूर्ण होने में चार साल का समय लगा। गुफाओं के निर्माण में सात महीनों का समय लगा। 2 अखंड ज्योति मंदिर के गर्भगृह में सदैव जलती रहती है। वैष्णो धाम मंदिर का महत्व पहाड़ियों पर गुफाओं से होते हुए मां वैष्णोदेवी के दर्शन करने से मन को असीम शांति मिलती है। गुफाओं में अंदर मां वैष्णो के दर्शन से पहले रिद्धि-सिद्धि के साथ भगवान श्री गणेश के दर्शन होते हैं। गुफाओं में जाते समय झरने, पक्षियों का कोलाहल मन को आनंदित कर देता है। गुफाओं से होते हुए शिवधाम पहुंचते हैं जहां भगवान शिव के साथ विराजमान संपूर्ण शिव परिवार के भव्य दर्शन होते हैं। माता की प्रतिमा के समीप ही परम भक्त हनुमान जी के दर्शन होते हैं। माता की तीनों पिण्डियों को कटरा से लाया गया है। साथ ही अखंड ज्योति भी कटरा से लायी गयी है। जो आज भी जल रही है। वैष्णो धाम मंदिर की वास्तुकला मंदिर की वास्तुकला हूबहू माता वैष्णो देवी के मंदिर से मिलती जुलती है। मंदिर में कई गुफाएं है। जिसमे में गुजरते हुए आप माता के दर्शन कर सकते हैं। यह गुफा भव्य और सुन्दर बनाई गई है। जिसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। गुफा के रास्ते में आकर्षक जलप्रपात भी बने हुए हैं। जो मंदिर की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। मंदिर में महाकाली, महालक्ष्मी और महा सरस्वती पिंड स्वरुप में विराजित है। मंदिर में माता के साथ साथ अन्य देवता गणेश जी, भगवान शिव, हनुमान जी, कालभैरव और साईं बाबा भी विराजित हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 12:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 10:00 PM मंदिर का प्रसाद वैष्णो धाम मंदिर लड्डू, पेड़ा, चना- चिरौंजी आदि का भोग लगाया जाता है। साथ ही माता को चुनरी भी चढ़ाई जाती है।

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नवग्रह शनि मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

नवग्रह शनि मंदिर में शनि देव सौम्य और प्रसन्ना मुद्रा में विराजमान है। नवग्रह शनि मंदिर शनि देव का नाम सुनते ही आम जन के मन में सबसे पहले डर बैठ जाता है। लेकिन शनि को एक न्याय प्रिय देवता माना गया है। शनि जातक को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। बुरे कुकर्म करने वालों को शनि दंडित करते हैं। अच्छे कर्म करने वालों पर शनि अपनी कृपा बरसाते हैं। नवग्रह शनि मंदिर में शनि देव सौम्य और प्रसन्ना मुद्रा में विराजमान है। सोने-चांदी के आभूषणों से शनि देव को सुसज्जित किया जाता है। जैसे राजाधिराज होते है वैसे ही उनका पूजन-अर्चन किया जाता है। शनि देव के इस स्वरूप को देख भक्तों को भय नहीं लगता है बल्कि भक्तों को प्रेम की अनुभूति होती है। शनि देव के दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है। माना जाता है कि मंदिर में पहुंचकर नवग्रह की आराधना करने से कुंडली दोष, शनि दोष, राहु की दशा, साढ़ेसाती, ढैय्या और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग नवग्रह शनि मंदिर में पहुंचकर शनिदेव और नवग्रह की की विशेष आराधना एक साथ करते हैं और अपने ग्रहों को शांत करते हैं। नवग्रह शनि मंदिर का इतिहास Navagraha Shani Temple:नवग्रह शनि मंदिर करीब 450 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहं भगवान की प्रतिमा स्वयंभू है। यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान शनिदेव का 16 श्रृंगार किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि शनि देव का नाम सुनकर लोगों के मन में भगवान की काले पाषण की प्रतिमा उत्पन्न होती है। वहीं भारत के मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित नवग्रह शनि मंदिर इसी भक्ति का उदाहरण हैं जिससे लोगों की भारी आस्था जुड़ी हुई है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग इस मंदिर में पहुंचकर नवग्रह की पूजा करते हैं। मंदिर का महत्व शनिदेव की प्रतिमा के साथ इस मंदिर में होने वाली पूजा विधि भी अनोखी है। यहां तेल से नहीं बल्कि दूध और जल से शनिदेव के प्रसन्न होने की मान्यता है। मंदिर में शनि देव को फूलों और शाही पोशाकों से सजाया जाता है। शनिदेव के शृंगार में करीब छह घंटों का समय लगता है। इस शनि मंदिर में आरती से ठीक पहले शहनाई बजाई जाती है, जो आरती पूरी होने तक लगातार बजती रहती है। नवग्रह शनि मंदिर में श्रद्धालु स्नान के बाद पनोती के रूप में अपने जूते चप्पल वही छोड़कर चले जाते है। मंदिर की वास्तुकला नवग्रह शनि मंदिर के निर्माण में मराठा और आधुनिक वास्तुकला की झलक देखने को मिलती है। मंदिर को मजबूत स्तंभों पर बनाया गया है। नवग्रह शनि मंदिर में विशाल परिसर बना है जहां भक्त आकर नवग्रहों की शांति के लिए पूजा अर्चना करते हैं। मंदिर के गर्भ गृह में शनि देव की प्रसन्न मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। मंदिर में एक प्रवेश द्वार है। नवग्रह शनि मंदिर में नवग्रहों की प्रतिमाओं के साथ शिव जी और हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:30 AM – 12:00 PM सायंकाल आरती का समय Invalid date – 08:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 10:00 PM मंदिर का प्रसाद नवग्रह शनि मंदिर में शनि देव को फल, फूल, तेल, तिल और गुड चढ़ाया जाता है। साथ ही शनि देव का दूध का भी भोग चढ़ाया जाता है।

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Mata Lakshmi Ko Prasann Karne Ke Mantra:मां लक्ष्‍मी को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का करें जाप, सुख और सौभाग्य में होगी वृद्धि

Mata Lakshmi Ko Prasann Karne Ke Mantra:मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है. इसलिए लक्ष्मी जी की पूजा करने से आर्थिक संकट दूर होता है और धन का लाभ होता है. लक्ष्मी की पूजा करने के साथ मंत्रों का उच्चारण करने से धन लाभ होने के साथ ही सुख-समृद्धि का वास होता है. कई बार कड़ी मेहनत के बाद भी पैसों की बरकत नहीं होती है, जिस कारण जीवन में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है. लिहाजा मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है, Mata Lakshmi Ko Prasann Karne Ke Mantra इसलिए लक्ष्मी जी की पूजा करने से आर्थिक संकट दूर होता है और धन का लाभ होता है. शुक्रवार को धन की देवी मां लक्ष्मी का दिन माना जाता है. इस दिन लक्ष्मी की पूजा करने के साथ मंत्रों का उच्चारण करने से धन लाभ होने के साथ ही सुख-समृद्धि का वास होता है. Mata Lakshmi Ko Prasann Karne Ke Mantra आइये जानते हैं मां लक्ष्मी के प्रभावी मंत्र (Maa Laxmi Mantra). Mata Lakshmi Ko Prasann Karne Ke Mantra:मां लक्ष्मी के प्रभावी मंत्र Chanting mantra according to zodiac sign:राशि अनुसार मंत्र जप मेष राशि के जातक मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने हेतु ‘ॐ सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जप करें। वृषभ राशि के जातक मनचाहा वरदान पाने के लिए ‘ॐ भैरव्यै नमः’ मंत्र का जप करें। मिथुन राशि के जातक कारोबार में सफलता के लिए ‘ॐ त्रिपुरायै नमः’ मंत्र का जप करें। कर्क राशि के जातक तनाव से मुक्ति पाने के लिए ‘ॐ नादिन्यै नमः’ मंत्र का जप करें। सिंह राशि के जातक करियर में सफल होने के लिए ‘ॐ हंसायै नमः’ मंत्र का जप करें। कन्या राशि के जातक बिजनेस में दोगुना लाभ के लिए ‘ॐ महाकाल्यै नमः’ मंत्र का जप करें। तुला राशि के जातक Mata Lakshmi Ko Prasann Karne Ke Mantra सौभाग्य में वृद्धि पाने के लिए ‘ॐ काल्यै नमः’ मंत्र का जप करें। वृश्चिक राशि के जातक आर्थिक तंगी दूर करने हेतु ‘ॐ कामदायै नमः’ मंत्र का जप करें। Mata Lakshmi Ko Prasann Karne Ke Mantra धनु राशि के जातक मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए ‘ॐ देव्यै नमः’ मंत्र का जप करें। मकर राशि के जातक शनि बाधा दूर करने के लिए ‘ॐ दाक्षायण्यै नमः’ मंत्र का जप करें। कुंभ राशि के जातक निवेश में लाभ कमाने के लिए ‘ॐ देवमात्रे नमः’ मंत्र का जप करें। मीन राशि के जातक शुक्रवार के दिन पूजा के समय ‘ॐ परायै नमः’ मंत्र का जप करें। Mantras of Goddess Lakshmi:मां लक्ष्मी के मंत्र 1. या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी। या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥ या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी। सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥ 2. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ । 3. ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ।। 4. ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ ।। ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥ 5. ॐ ह्रीं क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी नृसिंहाय नमः । ॐ क्लीन क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी देव्यै नमः ।। 6. ॐ ह्री श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा । 7. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्री ॐ। 8. ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥ 9. ऊँ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम ।। 10. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम: Lakshmi Narayan Namah:लक्ष्मी नारायण नम:सुखी दांपत्य के लिए मां देवी लक्ष्मी के इस मंत्र का जाप करना चाहिए. या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥ Mata Lakshmi Ko Prasann Karne Ke Mantra सभी संकटों से मुक्ति के लिए इस मंत्र का जाप करना शुभ होता है. Mata Lakshmi Ko Prasann Karne Ke Mantra इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है.

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