Kawad Yatra 2025 Start Date: साल 2025 में कब निकलेगी कांवड़ यात्रा, जानिए यहां महत्व और नियम

Kawad Yatra 2025: श्रावण माह में कांवड यात्रा भी निकलती है, जिसमें हरिद्वार से जल लाकर सावन शिवरात्रि के शुभ अवसर पर भक्त महादेव का अभिषेक करते हैं. Sawan month 2025 : पंचांग के अनुसार, साल 2025 में सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई को रात 2 बजकर 6 मिनट से हो रही है और इसका समापन 9 अगस्त को होगा। इस बार सावन पूरे 30 दिनों का रहेगा। चूंकि सावन के पहले दिन से ही कांवड़ यात्रा आरंभ हो जाती है, इसलिए कांवड़ यात्रा 2025 की शुरुआत भी 11 जुलाई से मानी जाएगी। कांवड़ यात्रा सावन शिवरात्रि तक चलती है, जो इस बार अगस्त की शुरुआत में पड़ेगी। इस दौरान श्रद्धालु गंगा जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। माना जाता है कि इस यात्रा से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2025 – When will Kawad Yatra 2025 start पंचांग के अनुसार, Kawad Yatra 2025 सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 11 जुलाई देर रात 02 बजकर 06 मिनट से होगी और समापन अगले दिन यानी 12 जुलाई को देर रात 02 बजकर 08 मिनट पर समापन होगा. ऐसे में सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई से होगी. वहीं, इस माह का समापन 09 अगस्त को होगा. ऐसे में कांवड यात्रा की शुरूआत 11 जुलाई से शूरू हो जाएगी और सावन शिवरात्रि के दिन समाप्त. Kanwar Yatra 2025 Importance: सावन की सबसे बड़ी विशेषता Kawad Yatra 2025 कांवड़ यात्रा है, जिसमें भक्त हरिद्वार, गौमुख या गंगोत्री जैसे तीर्थस्थलों से गंगा जल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। यह यात्रा शिवरात्रि तक चलती है और विशेषकर सावन शिवरात्रि के दिन जल चढ़ाने का अत्यंत पुण्यफल माना जाता है। कहा जाता है कि कांवड़ यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी। Kawad Yatra 2025 आज यह यात्रा आस्था, श्रद्धा और निष्ठा का प्रतीक बन चुकी है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। Sawan Shivratri Kab Hai:सावन शिवरात्रि कब है? Kawad Yatra 2025 साल 2025 में सावन माह की शिवरात्रि 23 जुलाई को मनाई जाएगी। यह पर्व हर साल सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 23 जुलाई को सुबह 4 बजकर 39 मिनट से होगी और इसका समापन 24 जुलाई की रात 2 बजकर 28 मिनट पर होगा। इसलिए शिव भक्त 23 जुलाई को सावन शिवरात्रि का व्रत रखेंगे और दिनभर व्रत-पूजन कर रात को भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। यह दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने और मनोकामनाएं पूर्ण कराने के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसीलिए 23 जुलाई से कांवड़ यात्रा आरम्भ होगी।  कांवड़ यात्रा के प्रकार :Types of Kanwar Yatra कांवड़ यात्रा चार अलग-अलग प्रकारों में की जाती है, जो भक्तों की आस्था, सामर्थ्य और नियमों के अनुसार होती है।  कांवड़ यात्रा के नियम:rules of kanwar yatra

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Vindhayavasini Stotra:श्री विंध्यवासिनी स्तोत्र

Vindhayavasini Stotra:विंध्यवासिनी स्तोत्र (श्री विंध्यवासिनी स्तोत्र): माता विंध्यवासिनी स्वरूप भी देवी वत्सल की भक्त हैं और कहा जाता है कि यदि कोई भक्त थोड़ी सी भी श्रद्धा से माता की पूजा करता है, तो माता उसे मुक्ति और मोक्ष प्रदान करती हैं। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला में उनका निवास – माता की निरंतर उपस्थिति ने विंध्य पर्वत को जाग्रत शक्तिपीठ की श्रेणी में ला खड़ा किया है और विश्व समुदाय में अतुलनीय सम्मान दिलाया है। माता विंध्यवासिनी Vindhayavasini Stotra स्वरूप भी देवी वत्सल की भक्त हैं और कहा जाता है कि यदि कोई भक्त थोड़ी सी भी श्रद्धा से माता की पूजा करता है, तो माता उसे मुक्ति और मोक्ष प्रदान करती हैं। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला में उनका निवास – माता की निरंतर उपस्थिति ने विंध्य पर्वत को जाग्रत शक्तिपीठ की श्रेणी में ला खड़ा किया है और विश्व समुदाय में अतुलनीय सम्मान दिलाया है। पुराणों में विंध्य क्षेत्र का महत्व संस्कार के रूप में वर्णित किया गया है। विंध्याचल की पर्वत शृंखलाओं में गंगा की पावन धारा की कल-कल ध्वनियाँ प्रकृति की अनुपम छटा बिखेरती हैं। विंध्याचल पर्वत न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा स्थल है, बल्कि संस्कृति का अद्भुत अध्याय भी है। इसकी माटी में पुराणों की अनेक पौराणिक मान्यताएँ तथा अतीत के अनेक अध्याय समाए हुए हैं। श्रीमद्भगवती महापुराण (महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित) के श्रीकृष्ण-जीवन प्रकरण में अवतार (देवकी के आठवें जन्म से उद्धृत) के संबंध में कहा गया है। यदि थोड़ा विचार करें तो एक माँ की करुण दृष्टि, यदि पाषाण समूह को इस श्रेणी में खड़ा कर दे, तो पूर्ण श्रद्धा से पूजन करने पर माँ उसे क्या नहीं देगी? प्रयाग और काशी के मध्य (मिर्जापुर नगर के अंतर्गत) विंध्याचल नामक तीर्थ है, जहाँ माँ Vindhayavasini Stotra विंध्यवासिनी रूप में निवास करती हैं। श्रीगंगा के तट पर स्थित इस महातीर्थ शास्त्र को सभी शक्तिपीठों में प्रधान बताया गया है। यह महातीर्थ भारत के 51 शक्तिपीठों में प्रथम एवं अंतिम शक्तिपीठ है जो गंगा नदी के तट पर स्थित है। Vindhayavasini Stotra विंध्येश्वरी की महिमा जगत में अपार है। इस स्तोत्र को पढ़ने से देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। व्यक्ति को धन, आरोग्य, सुख, समृद्धि, सौभाग्य एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए व्यक्ति को प्रातःकाल विंध्यवासिनी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। विंध्यवासिनी स्तोत्र के लाभजो कोई भी व्यक्ति श्रद्धा एवं विश्वास के साथ 9 दिनों तक नियमित रूप से विंध्यवासिनी स्तोत्र का जाप करता है, उसे जीवन में सफलता मिलती है। विंध्यवासिनी स्तोत्र से धन, सुख, समृद्धि, वैभव, शक्ति एवं सौभाग्य में वृद्धि होती है। किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ:जो व्यक्ति बाधा रहित जीवन चाहते हैं, उन्हें प्रातःकाल नियमित रूप से विंध्यवासिनी स्तोत्र का जाप करना चाहिए। श्री विंध्यवासिनी स्तोत्र:Vindhayavasini Stotra निशुम्भ-शुम्भ-मर्दिनीं, प्रचण्ड-मुण्ड-खण्डिनीम् ।वने-रणे प्रकाशिनीं, भजामि विन्ध्य-वासिनीम् ।। 1 ।। त्रिशूल-मुण्ड-धारिणीं, धरा-विघात-हारिणीम् ।गृहे गृहे निवासिनीं, भजामि विन्ध्य-वासिनीम ।। 2 ।। दरिद्र-दु:ख-हारिणीं, सतां विभूति-कारिणीम् ।वियोग-शोक-हारिणीं, भजामि विन्ध्य-वासिनीम् ।। 3 ।। लसत-सुलोल-लोचनां, लतां सदा-वर-प्रदाम् ।कपाल-शूल-धारिणीं, भजामि विन्ध्य-वासिनीम् ।। 4 ।। करे मुदा गदा-धरां, शिवां शिव-प्रदायिनीम् ।वरा-वरा-ननां शुभां, भजामि विन्ध्य-वासिनीम् ।। 5 ।। ऋषीन्द्र-जामिन-प्रदां, त्रिधास्य-रूप-धारिणिम् ।जले स्थले निवासिनीं, भजामि विन्ध्य-वासिनीम् ।। 6 ।। विशिष्ट-सृष्टि-कारिणीं, विशाल-रूप-धारिणीम् ।महोदरां विशालिनीं, भजामि विन्ध्य-वासिनीम् ।। 7 ।। प्रन्दरादि-सेवितां, मुरादि-वंश-खण्डिनीम् ।विशुद्ध-बुद्धि-कारिणीं, भजामि विन्ध्य-वासिनीम् ।। 8 ।। ।। इति श्री विंध्यवासिनी स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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Vinayak Stotra:श्री विनायक स्तोत्र

Vinayak Stotra:विनायक स्तोत्र भगवान विनायक को सभी देवी-देवताओं में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। उन्हें कई उपाधियाँ और विशेषण दिए गए हैं। उन्हें आरंभ के देवता और बाधाओं को दूर करने वाले के रूप में भी जाना जाता है। कई धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष अवसरों पर उनकी पूजा की जाती है, खासकर किसी वाहन को खरीदने या किसी उद्यम को शुरू करने जैसे कामों की शुरुआत में। उन्हें चार भुजाओं और हाथी के सिर वाले एक घड़े के रूप में दर्शाया गया है, जो एक चूहे पर सवार हैं। Vinayak Stotra:विनायक स्तोत्र भगवान विनायक की पूजा करने का एक बहुत ही शक्तिशाली तरीका है, भगवान विनायक की पूजा आपकी सभी समस्याओं को हल करने का एक बहुत अच्छा उपाय है। यह सभी के लिए बहुत मददगार है और आप विनायक स्तोत्र की मदद से अपनी सभी समस्याओं को हल कर सकते हैं और इस उपाय की मदद से आप सभी को खुश कर सकते हैं। यह सभी के लिए बेहद फायदेमंद है और आप इस उपाय की मदद से अपनी सभी समस्याओं को हल कर सकते हैं। Vinayak Stotra ke labh:विनायक स्तोत्र के लाभ भगवान विनायक को ब्रह्मा, विष्णु और शिव से जुड़ा हुआ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि सभी देवों की प्रेरणा भगवान विनायक से ही हुई है। Vinayak Stotra भगवान विनायक की कृपा से व्यक्ति का जीवन स्वस्थ और खुशहाल बनता है। ऐसा व्यक्ति सभी कष्टों पर विजय पाने में सक्षम होता है। भगवान विनायक के पास अपार ज्ञान है और वे सभी कष्टों को दूर करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए भगवान विनायक की पूजा की जाती है। शास्त्रों में भगवान विनायक की आराधना करने के कई तरीके बताए गए हैं। विनायक स्तोत्र Vinayak Stotra का प्रयोग नारद पुराण में किया गया है और यह भगवान विनायक के सबसे प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। जैसा कि मैंने पहले ही बताया कि इससे सभी तरह की परेशानियां दूर होती हैं। विनायक स्तोत्र का प्रतिदिन जाप करने से व्यक्ति सभी तरह की बाधाओं से मुक्त हो जाता है और सभी दुखों का नाश होता है। भगवान विनायक के भिन्न-भिन्न नामों का उच्चारण करना चाहिए, जैसे वक्रतुंड, एकदंत, कृष्ण पिंगाक्ष, गजवक्र, लंबोदर, चतु विकट, विघ्न हर्ता मंगल कर्ता, धूम्रवर्ण, भालचंद्र, विनायक, गणपति आदि। इन बारह नामों का पूजन दिन के प्रत्येक तीन काल में करना चाहिए। Vinayak Stotra इससे मनुष्य को हर प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है, सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है। यह बहुत ही शक्तिशाली उपाय है। किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ जो व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहता है उसे बेहतर परिणाम के लिए इस विनायक स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। श्री विनायक स्तोत्रम्:Vinayak Stotra मूषिकवाहनमोदकहस्तचामरकर्णविलम्बितसूत्र ।वामनरूपमहेश्वरपुत्रविघ्नविनायकपादनमस्ते ॥ देवदेवसुतंदेवंजगद्विघ्नविनायकम् ।हस्तिरूपंमहाकायंसूर्यकोटिसमप्रभम् ॥ 1 ॥ वामनंजटिलंकान्तंह्रस्वग्रीवंमहोदरम् ।धूम्रसिन्दूरयुद्गण्डंविकटंप्रकटोत्कटम् ॥ 2 ॥ एकदन्तंप्रलम्बोष्ठंनागयज्ञोपवीतिनम् ।त्र्यक्षंगजमुखंकृष्णंसुकृतंरक्तवाससम् ॥ 3 ॥ दन्तपाणिंचवरदंब्रह्मण्यंब्रह्मचारिणम् ।पुण्यंगणपतिंदिव्यंविघ्नराजंनमाम्यहम् ॥ 4 ॥ देवंगणपतिंनाथंविश्वस्याग्रेतुगामिनम् ।देवानामधिकंश्रेष्ठंनायकंसुविनायकम् ॥ 5 ॥ नमामिभगवंदेवंअद्भुतंगणनायकम् ।वक्रतुण्डप्रचण्डायउग्रतुण्डायतेनमः ॥ 6 ॥ चण्डायगुरुचण्डायचण्डचण्डायतेनमः ।मत्तोन्मत्तप्रमत्तायनित्यमत्तायतेनमः ॥ 7 ॥ उमासुतंनमस्यामिगङ्गापुत्रायतेनमः ।ओङ्कारायवषट्कारस्वाहाकारायतेनमः ॥ 8 ॥ मन्त्रमूर्तेमहायोगिन्जातवेदेनमोनमः ।परशुपाशकहस्तायगजहस्तायतेनमः ॥ 9 ॥ मेघायमेघवर्णायमेघेश्वरनमोनमः ।घोरायघोररूपायघोरघोरायतेनमः ॥ 10 ॥ पुराणपूर्वपूज्यायपुरुषायनमोनमः ।मदोत्कटनमस्तेऽस्तुनमस्तेचण्डविक्रम ॥ 11 ॥ विनायकनमस्तेऽस्तुनमस्तेभक्तवत्सल ।भक्तप्रियायशान्तायमहातेजस्विनेनमः ॥ 12 ॥ यज्ञाययज्ञहोत्रेचयज्ञेशायनमोनमः ।नमस्तेशुक्लभस्माङ्गशुक्लमालाधरायच ॥ 13 ॥ मदक्लिन्नकपोलायगणाधिपतयेनमः ।रक्तपुष्पप्रियायचरक्तचन्दनभूषित ॥ 14 ॥ अग्निहोत्रायशान्तायअपराजय्यतेनमः ।आखुवाहनदेवेशएकदन्तायतेनमः॥ 15 ॥ शूर्पकर्णायशूरायदीर्घदन्तायतेनमः ।विघ्नंहरतुदेवेशशिवपुत्रोविनायकः ॥ 16 ॥ ॥ इति श्री विनायक स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Birds In Your Dreams:सपने में दिखें ये पक्षी तो समझिए सौभाग्य दस्तक दे चुका है ?

Birds In Your Dreams:हर कोई सपने देखता है. इन्हीं सपनों के माध्यम से प्रकृति हमें कुछ संकेत देती है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार हर सपना कुछ कहता है और शुभ-अशुभ के संकेत देता है. ऐसा ही एक शुभ संकेत है, सपने में खास पक्षियों का दिखना. चलिए जानते हैं वो कौन से पक्षी हैं और हमें क्या संकेत देते हैं. हिन्दू धर्म के अनुसार, सपने मानव जीवन में खासी अहमियत रखते हैं. रात को दिखने वाले सपने हमारे जीवन से जुड़ा कोई न कोई संकेत जरूर देते हैं. स्वप्न शास्त्र में इन सपनों के संकेतों का विस्तार से वर्णन किया गया है. सपनों में नजर आने वाली चीजें या बातें हमारे जीवन में घटित होने वाले शुभ और अशुभ का संकेत देती हैं. स्वप्न शास्त्र से हम सपने में दिखने वाले चीजों का मतलब पता लगा सकते हैं. Seeing these three birds in your dreams is very auspicious indicate good days are coming जो हमें सपनों में नजर आता है, Birds In Your Dreams उसका कुछ न कुछ मतलब जरूर होता है. ये सपने भविष्य में क्या होने वाला है इसका इशारा देते हैं, आज हम बात करेंगे. ऐसे पक्षियों की जो अगर आप दिख जायें तो समझ लीजिए आ गए आपके अच्छे दिन सपने देखकर हमको सुखद एहसास होता है। साथ ही कुछ Birds In Your Dreams सपने देखकर हमको भय होने लगता है। वहीं आपको बता दें कि जो सपने हम सुबह के समय देखते हैं वो सच होते हैं। लेकिन स्वप्न शास्त्र अनुसार जो सपने आपने देखा है तो उसका फल जरूरी नहीं है कि आने वाले समय में वैसा ही मिले। वहीं यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि सपने में अगर आप कुछ ऐसे पक्षी और पशुओं के बारे में जिनको देखना शुभ होता है। आइए जानते हैं सपने में मोर देखना:seeing peacock in dream स्वप्न शास्त्र अनुसार यदि Birds In Your Dreams सपने में आप मोर देखते हैं तो यह एक बेहद शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में जीवन में सुख-संपन्नता आने वाली है और कोई बड़ी उपलब्धि आपको हासिल होने वाली है। यदि आपने मोर पर शनि देव को बैठे हुए देखा है तो यह अत्यंत ही शुभ संकेत। इसका मतलब आने वाले दिनों में आपको कोई शुभ सूचना मिल सकती है। साथ ही कोई जरूरी कार्य बन सकता है। सपने में नीलकंठ देखना: Seeing Neelkanth in dream नीलकंठ पक्षी को सपने में देखना शुभ माना जाता है। Birds In Your Dreams वहीं कुंवारे लोगों द्वारा सपने में नीलकंठ पक्षी को देखना अत्यंत ही शुभ संकेत होता है। यह इस बात का संकेत है कि आपको जल्द ही आपका लाइफ पार्टनर मिल सकता है। साथ ही अगर आप अकेले हैं तो आपके जीवन में कोई आ सकता है। हंस को सपने में देखना: seeing swan in dream स्वप्न शास्त्र मुताबिक सपने में हंस को देखना बेहद शुभ फलदायी होता है। इसका मतलब है कि आपको आने वाले दिनों में आकस्मिक धनलाभ हो सकता है। साथ ही आप किसी धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। वहीं आपका कोई जरूरी कार्य बन सकता है।  सपने में शेर का दिखना :Seeing a lion in a dream अगर सपने में आपको शेर दिखाई देता है तो यह एक शुभ संकेत है।  Birds In Your Dreams इसका मतलब आपके रुके हुए कार्य पूरे होने वाले हैं, अगर कोर्ट कचहरी का चक्कर हो तो शेर दिखना मुकदमे में जीत मिलने का संकेत है। साथ ही आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। सपने में गाय का दिखना: Seeing a cow in a dream स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने गाय का दिखना अच्छा संकेत माना जाता है। Birds In Your Dreams इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में आपको कार्यों में सफलता मिलेगी। साथ ही धन- दौलत की प्राप्ति हो सकती है। वहीं करियर और कारोबार में तरक्की मिलेगी।  सपने में तोता दिखना: seeing a parrot in a dream स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, अगर सपने में तोता दिखे तो समझो आपके अच्छे दिन आने वाले हैं, यानी तोता देखना बहुत ही शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि तोता देखना धन लाभ का संकेत होता है. वहीं अगर आपको सपने में तोते का जोड़ा दिखा है तो मतलब आपके वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ने वाला है. तोता दिखना घर में खुशहाली और सुख-समृद्धि आने का संकेत भी होता है. सपने में उल्लू दिखना : seeing an owl in a dream अगर सपनों में उल्लू नजर आये तो ये घर में माता लक्ष्मी के आने का संकेत है. उल्लू दिखने पर समझ लिजिए आर्थिक समस्याएं खत्म होने वाली हैं. वहीं उल्लू दिखना व्यापार, नौकरी में तरक्की का भी संकेत होता है.

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Tulsi Puja on Ekadashi:एकादशी व्रत और तुलसी पूजन का अद्भुत फल – जानिए कारण और लाभ

Tulsi Puja on Ekadashi: धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दिन उनकी पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है. तुलसी को भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है, इसलिए एकादशी पर तुलसी पूजा से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है. Tulsi Puja on Ekadashi:एकादशी व्रत और तुलसी पूजन हिंदू धर्म में एकादशी (ekadashi) तिथि को सभी तिथियों में शुभ और महत्वपूर्ण माना गया है. एकादशी तिथि भगवान विष्णु (lord vishnu) को समर्पित है और साल की सभी एकादशी तिथियों पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किए जाते हैं. एकादशी के दिन तुलसी (tulsi) की पूजा को भी काफी शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि तुलसी के पौधे में (tulsi plant) साक्षात मां लक्ष्मी (maa laxmi) निवास करती हैं. Tulsi Puja on Ekadashi: इस दिन तुलसी के पौधे की पूजा के साथ साथ इसके नीचे दीपक जलाने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. आपको बता दें कि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है और तुलसी की पूजा पर भगवान विष्णु प्रसन्न हो जाते हैं. चलिए जानते हैं कि एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पौधे की पूजा कैसे करनी चाहिए और इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना क्यों निषेध कहा गया है. तुलसी पूजन का महत्व तुलसी माता, भगवान विष्णु की परम प्रिय हैं। Tulsi Puja on Ekadashi शास्त्रों में तुलसी को देवी स्वरूप माना गया है। तुलसी का पूजन करने से व्यक्ति के घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। कारण लाभ भगवान विष्णु को प्रिय है तुलसी (Tulsi plant puja is important for lord vishnu) Tulsi Puja on Ekadashi: तुलसी को वृंदा भी कहा जाता है. वृंदा पिछले जन्म में असुर जालंधर की पत्नी थीं और भगवान विष्णु की पूजा किया करती थीं. एक युद्ध के दौरान भगवान विष्णु को जालंधर का वध करने के लिए धोखे से वृंदा का पतिव्रत धर्म भंग करना पड़ा और इससे क्रोधित होकर वृंदा ने भगवान विष्णु को पत्थर में बदल जाने का श्राप दिया. भगवान विष्णु शालिग्राम पत्थर में बदल गए. इसके बाद वृंदा ने आत्मदाह किया और उसकी राख से तुलसी के पौधे का जन्म हुआ. तब मां लक्ष्मी तुलसी के पौधे में विराजमान हो गई और शालिग्राम और तुलसी के पौधे का विवाह हुआ. चूंकि तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का निवास कहा गया है इसलिए Tulsi Puja on Ekadashi एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ साथ तुलसी के पौधे की पूजा से भी शुभ फल प्राप्त होते हैं. हर साल देवउठनी एकादशी के अगले दिन भक्त तुलसी के पौधे का भगवान विष्णु के विग्रह शालिग्राम से विवाह करवाते हैं जिसे बहुत ही पावन और शुभ कहा जाता है. एकादशी तिथि का व्रत करने और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने के साथ साथ इस दिन तुलसी के पौधे की पूजा भी बहुत ही शुभ मानी जाती है. इस दिन तुलसी के पौधे को लेकर कुछ खास नियम अपनाने चाहिए. एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को जल नहीं देना चाहिए. कहा जाता है कि तुलसी में विराजित मां लक्ष्मी इस दिन निर्जला व्रत करती हैं. ऐसे में अगर आप तुलसी के पौधे को जल देते हैं तो मां लक्ष्मी का व्रत खंडित हो सकता है. ऐसे में मां लक्ष्मी क्रोधित हो सकती हैं. इसलिए एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पौधे को जल नहीं देना चाहिए. एकादशी के दिन तुलसी के पौधे से पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. Tulsi Puja on Ekadashi अगर आपको भगवान विष्णु की पूजा के लिए तुलसी दल चाहिए तो जमीन पर गिरे तुलसी दल इस्तेमाल कर सकते हैं. आप चाहें तो एक दिन पहले तुलसी के पौधे से पत्ते तोड़कर रख सकते हैं. इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, ऐसा करने पर जातक के परिवार को शारीरिक और मानसिक परेशानियां हो सकती हैं. एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते यानी तुलसी दल भगवान विष्णु की पूजा में अर्पित करने चाहिए. इससे भगवान विष्णु विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं और जातक को सुख समृद्धि का वरदान देते हैं.  एकादशी के दिन पंचामृत बनाते वक्त भी तुलसी के पत्ते उसमें जरूर डालने चाहिए. एकादशी के दिन तुलसी के नीचे दीपक जलाना चाहिए. ऐसा करना शास्त्रों में बहुत ही शुभ कहा गया है. Tulsi Puja on Ekadashi एकादशी के दिन सायंकाल के समय भगवान विष्णु की पूजा के बाद तुलसी के नीचे घी का दीपक जलाने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. इस दिन तुलसी को लाल चुनरी पहनाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. Tulsi Puja on Ekadashi एकादशी के दिन तुलसी की मंजरियां भगवान विष्णु को चढ़ानी चाहिए. आप किसी भी दिन इन मंजरियों को तुलसी के पौधे से ले सकते हैं. इनको धोकर भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें. इससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु जातक को और उसके परिवार को सुख समृद्धि और शांति का वरदान देते हैं. एकादशी व्रत का महत्व एकादशी, हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को आती है। Tulsi Puja on Ekadashi यह दिन भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। पुराणों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और वह मोक्ष की ओर बढ़ता है। कारण लाभ

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Yogini Ekadashi 2025:योगिनी एकादशी: जीवन के सारे पाप होंगे नष्ट, बस करें यह काम !

Yogini Ekadashi Vrat Niyam:योगिनी एकादशी पर भक्त उपवास रखकर विष्णु भगवान की आराधना करेंगे। योगिनी एकादशी पर कुछ कामों को करना अशुभ माना जाता है, जो प्रभु की नाराजगी का कारण भी बन सकता है। Yogini Ekadashi:हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. यह दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए विशेष माना गया है. आप योगिनी एकादशी पर एक आसान उपाय अपनाकर जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति पा सकते हैं. Yogini Ekadashi 2025 mein Kab Hai:हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. यह दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए विशेष माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, योगिनी एकादशी व्रत रखने से कई बीमारियों से राहत मिलती है और जाने-अनजाने में किए गए पापों से भी मुक्ति मिलती है. धर्म शास्त्रों में योगिनी एकादशी को रोगों को दूर करने वाली सबसे शुभ तिथि बताया गया है. आप योगिनी एकादशी पर एक आसान उपाय अपनाकर जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति पा सकते हैं. Yogini Ekadashi 2025 Kab Hai:योगिनी एकादशी 2025 कब है? साल 2025 में योगिनी एकादशी का व्रत 21 जून, दिन शनिवार को रखा जाएगा. आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून की सुबह 7:18 बजे से शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 22 जून की सुबह 4:27 बजे होगा. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर 21 जून को ही योगिनी एकादशी का व्रत रखना सर्वश्रेष्ठ रहेगा. योगिनी एकादशी पर सभी पापों से मुक्ति पाने का उपाय:Remedy to get freedom from all sins on Yogini Ekadashi योगिनी एकादशी के शुभ अवसर पर भगवान विष्णु के साथ ही तुलसी माता की पूजा का भी अत्यंत महत्व माना गया है. योगिनी एकादशी के दिन की सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. फिर भगवान विष्णु और तुलसी माता की विधिवत पूजा करें. इसके बाद तुलसी को जल अर्पित करें और तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं. आप चाहें तो अगरबत्ती भी जला सकते हैं. अब “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें. इसके अलावा, तुलसी माता की सात बार परिक्रमा करें. अगर आप योगिनी एकादशी पर यह उपाय आजमाते हैं, तो भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे और आपके जाने-अनजाने में किए गए पापों से आपको मुक्ति प्रदान करेंगे. इस दिन विष्णु भगवान को अर्पित करने वाले भोग में तुलसी के पत्ते जरूर रखें. धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं. अगर आप चाहें तो योगिनी एकादशी पर तुलसी की माला का से तुलसी माता के मंत्र जाप कर सकते हैं. वहीं, अगर आपके घर में तुलसी का पौधा नहीं है, तो एकादशी के दिन पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. What not to do on Yogini Ekadashi:योगिनी एकादशी पर क्या न करें? डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Raksha Bandhan 2025 Date: रक्षाबंधन कब है? जानें डेट व राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

Raksha Bandhan 2025 Date: रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है. यह सनातन धर्म का बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है. इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बाधकर उसकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती है- इस दिन बहनें अुपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र या राखी बांधती हैं और बदले में भाई बहन को उम्रभर रक्षा का वचन देते हैं। रक्षाबंधन के दिन भद्राकाल में राखी बांधने की मनाही होती है लेकिन इस साल भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी। Raksha Bandhan Kab Hai: हिंदू धर्म में हर साल रक्षाबंधन या राखी का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट स्नेह व प्यार का प्रतीक है। इस दिन बहनें अुपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र या राखी बांधती हैं और बदले में भाई बहन को उम्रभर रक्षा का वचन देते हैं। रक्षाबंधन के दिन भद्राकाल में राखी बांधने की मनाही होती है लेकिन इस साल भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी। जानें रक्षाबंधन 2025 कब है और राखी बांधने का मुहूर्त- हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है. रक्षाबंधन प्राचीन हिंदू त्योहार है.यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और अटूट बंधन का प्रतीक है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र और उज्जवल भविष्य की कामना करती है. Raksha Bandhan 2025 Date इसके अलावा वह भाई से पूरे जीवन उनकी रक्षा करने का वचन मांगती हैं और भाई भी अपनी बहन की पूरा जीवन सुख-दुख में साथ देने का वादा करते हैं. साथ ही इस दिन भाई अपनी बहन को वचन के साथ-साथ कोई वस्तु या फिर पैसा उपहार स्वरूप भेंट करते हैं. किस समय बांधे राखी- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का सबसे शुभ समय अपराह्न काल होता है, जिसे दोपहर का समय माना गया है। अगर कोई अपराह्न काल के दौरान राखी बांधने में असमर्थ है, तो वे प्रदोष काल के दौरान भी बांध सकते हैं। लेकिन भद्रा समय के दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए। Raksha bandhan 2025 date time tithi shubh muhurt and vidhi know in hindi Raksha Bandhan 2025 Date:रक्षाबंधन कब है? वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 8 अगस्त को देर रात 2 बजकर 12 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन अगले दिन 9 अगस्त को रात 1 बजकर 24 मिनट होगी. उदया तिथि के अनुसार, रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा. भाई को रक्षा सूत्र बांधने का शुभ मुहूर्त पंचांग के हिसाब से रक्षाबंधन के दिन भाई को Raksha Bandhan 2025 Date रक्षा सूत्र बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक रहेगा. जिसकी कुल समय अवधि 7 घंटे 37 मिनट की हैं. राखी बांधने का शुभ मुहूर्त- वैदिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 08 अगस्त 2025 को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर प्रारंभ होगी और 09 अगस्त 2025 को दोपहर 01 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 47 मिनट से दोपहर 01 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। राखी बांधने की शुभ अवधि 07 घंटे 37 मिनट की है। राखी बांधने की विधि- सबसे पहले एक थाली लें और उसमें रोली, अक्षत, राखी,मिठाई व दीपक आदि रखें। अब दीपक जलाएं और भाई की आरती उतारें। भाई का तिलक करें और कलाई पर राखी बांधे बांधें। अंत में मिठाई खिलाएं। Raksha Bandhan 2025 Date भाई राखी बंधवाने के बाद बहनों व घर के अन्य बड़े सदस्यों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं। Disclaimer:इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Ganga And River Dream: धनवान होने का संकेत देते हैं ये सपने, गंगा नदी दिखे तो समझिए…

Ganga And River Dream: सपने में गंगा नदी देखना बेहद शुभ माना जाता है। ये सपना इस बात का संकेत है कि आप जल्द ही अमीर बनने वाले हैं। जानिए और कौन से सपने धन के आगमन का देते हैं संकेत। Lucky Dreams (Dream Interpretation सपनों की दुनिया बड़ी अनोखी और खास होती है। शायद ही कोई ऐसा इंसान हो जिसे सोते समय सपना न आता हो। कुछ सपने हमें खुश कर देते दें तो कुछ चिंता में डाल देते हैं। Ganga And River Dream स्वप्न शास्त्र की मानें तो हर सपने का कोई न कोई मतलब जरूर होता है। सपने हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं से अवगत कराते हैं। यहां आप जानेंगे कुछ ऐसे सपनों के बारे में जिन्हें देखने का मतलब है कि आप जल्द ही धनवान होने वाले हैं। जानिए सपने में गंगा नदी (Sapne Me Ganga Nadi Dekhna), बरगद का पेड़, चूहा और भगवान गणेश की मूर्ति (Sapne Me Ganesh Bhagwan Dekhna) देखने का क्या है मतलब। सपने में गंगा नदी देखना (Sapne Me Ganga Nadi Dekhna) Ganga And River Dream सपने में गंगा नदी देखना बेहद शुभ माना जाता है। ये सपना इस बात का संकेत देता है कि आप जल्द ही मालामाल होने वाले हैं। इस सपना का अर्थ ये भी है कि आपकी कोई अधूरी इच्छा पूरी होने वाली है। सपने में हनुमान चालीसा पढ़ना (Sapne Me Hanuman Chalisa Padhna) सपने में खुद को हनुमान चालीसा पढ़ते देखने का मतलब है कि आपकी कई परेशानियां समाप्त होने वाली है। ये सपना धन के आगमन का भी संकेत देता है। इस सपने का एक अर्थ ये भी है कि आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले हैं। सपने में चूहा देखना (Sapne Me Chuha Dekhna) सपने में चूहा देखना बेहद शुभ माना जाता है। ये सपना अचानक धन प्राप्त होने का संकेत देता है। अगर आप सपने में चूहा देखते हैं तो इसका मतलब है कि आप अमीर बनने वाले हैं। सपने में बरगद का पेड़ देखना (Sapne Me Bargad Ka Ped Ddekhna) सपने में बरगद का पेड़ देखना शुभ माना जाता है। इस सपने को देखने का मतलब है कि आप मालामाल होने वाले हैं। ये सपना आपकी परेशानियों के अंत होने का भी संकेत देता है। अगर आप बरगद के पेड़ की परिक्रमा लगाते हुए देखते हैं तो इसका मतलब है कि आपके जीवन में खुशहाली बनी रहेगी। सपने में गणेश जी की मूर्ति देखना (Sapne Me Ganesh Ji Ki Murti Dekhna) सपने में भगवान गणेश की प्रतिमा देखने का मतलब है कि आपको कोई शुभ समाचार प्राप्त होने वाला है। Ganga And River Dream ये सपना आपकी आर्थिक परेशानियां दूर होने का भी संकेत देता है। Ganga And River Dream:सपने में गंगा स्नान करने के संभावित अर्थ पापों से मुक्ति और आत्मशुद्धि – यदि आपने Ganga And River Dream सपने में गंगा स्नान किया है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके जीवन की नकारात्मकता समाप्त हो रही है और आप आत्मशुद्धि की ओर बढ़ रहे हैं।  सकारात्मक बदलाव और नई शुरुआत – यह सपना बताता है कि आपके जीवन में कोई शुभ घटना होने वाली है या आपको किसी बड़ी समस्या से राहत मिलेगी। धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति – गंगा स्नान का सपना आपके बढ़ते आध्यात्मिक झुकाव और ईश्वर की कृपा प्राप्ति का प्रतीक हो सकता है।  बीमारी और परेशानियों से छुटकारा – यदि कोई बीमार व्यक्ति यह सपना देखता है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि जल्द ही उसका स्वास्थ्य बेहतर होगा।  मोक्ष और शांति की प्राप्ति – गंगा को मोक्षदायिनी माना जाता है, इसलिए यह सपना मानसिक शांति, दुखों से मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक हो सकता है। अगर यह सपना आए तो क्या करें? Ganga And River Dream सपने में गंगा स्नान करना शुभ माना जाता है। यह जीवन में अच्छे बदलाव, पवित्रता और मानसिक शांति का प्रतीक है। यह सपना आपको आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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Sawan Shivratri 2025 Date:सावन में कब रखा जाएगा मासिक शिवरात्रि का व्रत? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

Sawan Shivratri 2025 Date : हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना सावन महादेव की भक्ति के लिए बहुत खास माना गया है। शिव भक्तों को इस महीने का विशेष इंतजार रहता है। इस महीने में आने वाले सोमवार बहुत शुभ माने गए हैं। इनके अलावा भी सावन में शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कईं खास व्रत किए जाते है मासिक शिवरात्रि भी इनमें से एक है। वैसे तो मासिक शिवरात्रि का व्रत हर महीने आता है लेकिन इन सभी में सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व है। जानें साल 2025 में कब है सावन शिवरात्रि व्रत… Sawan Masik Shivratri 2025 Date And Time: सनातन संस्कृति में सावन माह को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। यह महीना विशेष रूप से भगवान शिव की उपासना के लिए समर्पित होता है। इस दौरान लोग व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और मंत्र जाप करते हैं और भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं। Sawan Shivratri 2025 Date सावन में आने वाली मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे शिवभक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा विशेष रूप से करने से जीवन में सुख-शांति, वैवाहिक जीवन में खुशहाल रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल सावन में मासिक शिवरात्रि का व्रत किस दिन रखा जाएगा। Sawan Shivratri 2025: सावन मास में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। इस महीने में आने वाला शिवरात्रि व्रत भी बहुत खास होता है क्योंकि साल में सिर्फ एक बार ही सावन शिवरात्रि का संयोग बनता है।  कब से शुरू होगा सावन 2025? (Sawan 2025 Start Date) उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, साल 2025 में सावन मास 11 जुलाई से शुरू होगा, जो 9 अगस्त तक रहेगा यानी इस बार सावन मास पूरे 30 दिन का रहेगा। इस सावन में 4 सोमवार का संयोग बन रहा है। पहला सावन सोमवार 14 जुलाई, दूसरा 21 जुलाई, तीसरा 28 जुलाई और चौथा 4 अगस्त को रहेगा। ये सभी सोमवार शिवजी की पूजा के लिए बहुत शुभ फल देने वाला रहेंगे। कब है सावन शिवरात्रि 2025? (Sawan Shivratri 2025 Date) मासिक शिवरात्रि का व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। Sawan Shivratri 2025 Date इस बार सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 23 जुलाई, बुधवार को सुबह 04:39 से देर रात 02: 28 तक रहेगी। चूंकि चतुर्दशी तिथि का सूर्योदय 23 जुलाई को होगा, इसलिए इसी दिन ये सावन शिवरात्रि का व्रत किया जाएगा। मासिक शिवरात्रि में रात्रि पूजन का महत्व है। सावन शिवरात्रि 2025 पूजा मुहूर्त (Sawan Shivratri Shubh Muhurat) पूजा का शुभ मुहूर्त Puja ka Subh Muhurat Sawan Shivratri 2025 Date सावन शिवरात्रि की रात्रि में भगवान शिव की पूजा का विशेष मुहूर्त 24 जुलाई की रात 12:07 बजे से 12:48 बजे तक का है। इस दौरान कुल 41 मिनट की अवधि को शिव पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस समय रात्रि जागरण, शिव नाम का जाप, और बेलपत्र, दूध, गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करना विशेष फलदायक होता है। पारण का समय Sawan Shivratri 2025 Date सावन शिवरात्रि व्रत का पारण 24 जुलाई को किया जाएगा। इस दिन पारण का समय सुबह 05:38 बजे का है। इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में सामंजस्य और प्रेम बना रहता है। साथ ही यह दिन जीवन के कष्टों को दूर करने, रोगों से मुक्ति और सौभाग्य प्राप्ति के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। धार्मिक महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन मास की शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और देवी पार्वती का पुनः मिलन हुआ था। इस दिन विधिवत व्रत और पूजन करने से शिवजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।  Disclaimerइस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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First Sawan Somwar 2025:सावन का पहला सोमवार कब है? जानिए व्रत की तारीखें और भगवान शिव की कृपा पाने का सही समय

First Sawan Somwar 2025: यदि आप भी भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं तो सावन सोमवार का व्रत जरूर रखें। मान्यता है कि भोलेनाथ की भक्ति से जीवन का हर कष्ट दूर होता है और सुख-समृद्धि मिलती है। Sawan 2025:हिंदू धर्म में भगवान शिव को सृष्टि के संहारक और कल्याणकारी देव के रूप में पूजा जाता है। शिवभक्तों के लिए श्रावण मास अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। यह महीना पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित होता है और माना जाता है कि इस दौरान शिवजी पृथ्वी पर निवास करते हैं। ऐसे में भक्तों की प्रार्थनाओं का प्रभाव भी शीघ्र दिखाई देता है। सोमवार भगवान शिव का वार है और सावन शिव का महीना, इसलिए इस महीने के सोमवार विशेष रूप से पूजनीय माने जाते हैं। इन सोमवारों को सावन सोमवारी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु शिवजी का व्रत रखते हैं, उपवास करते हैं, शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित करते हैं और शिव चालीसा, रुद्राष्टक या महामृत्युंजय जाप का पाठ करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं साल 2025 में सावन का महीना कब से शुरू हो रहा है और सावन का पहला सोमवार व्रत किस दिन रखा जाएगा।  Kab Se Suru Ho Raha Hai Sawan 2025;कब से शुरू हो रहा है सावन 2025 ? Sawan Somwar 2025 इस साल 2025 में सावन मास की शुरुआत 11 जुलाई 2025, शुक्रवार से हो रही है। द्रिक पंचांग के अनुसार यह महीना विशेष रूप से शुभ रहेगा क्योंकि इस बार सावन के दौरान किसी भी तिथि का क्षय (लोप) नहीं हो रहा है। इसका मतलब है कि भक्तों को पूरे 30 दिनों तक भगवान शिव की पूजा और उपासना का अवसर मिलेगा। सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाना, रुद्राभिषेक करना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना और सोमवार के दिन व्रत रखना विशेष फलदायी माना जाता है। Sawan Month 2025 start date and End date: कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें व्रत तिथि, पूजन विधि… First Sawan Somwar 2025:सावन का पहला सोमवार कब है? Sawan Somwar 2025 सावन के पहले सोमवार को प्रथम श्रावणी सोमवार कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। शिव भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करते हैं। 2025 में सावन का पहला सोमवार 14 जुलाई 2025 को पड़ेगा। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होती है और भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। सावन सोमवार की तिथियां:Sawan Monday dates पहला सोमवार- 14 जुलाई 2025दूसरा सोमवार- 21 जुलाई 2025तीसरा सोमवार- 28 जुलाई 2025चौथा सोमवार- 4 अगस्त 2025 पहले सावन सोमवार पर शुभ मुहूर्त:Auspicious time on first Monday of Sawan ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:16 से 5:04 बजे तकअभिजित मुहूर्त- दोपहर 11:59 बजे से 12:55 बजे तकअमृत काल- रात 11:21 बजे से 12:55 बजे तक, जुलाई 15पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय- दोपहर 11:38 बजे से 12:32 बजे तक ऐसी मान्यता है कि जो भक्त पूरे सावन मास के सभी Sawan Somwar 2025 सोमवारों का व्रत नहीं कर सकते, वे कम से कम पहले और अंतिम सोमवार का व्रत अवश्य करें। यह भी उतना ही पुण्यदायी होता है और शिव कृपा प्राप्त होती है। कब शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2025?:When will Kanwar Yatra 2025 start? Sawan Somwar 2025 सावन महीने में शिव भक्तों द्वारा की जाने वाली कांवड़ यात्रा का भी खास महत्व है। इस यात्रा में भक्त पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा नदी से जल भरकर पैदल यात्रा करते हैं और उसे अपने नजदीकी या प्रसिद्ध शिव मंदिरों में अर्पित करते हैं। Sawan Somwar 2025 इस साल कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी 11 जुलाई 2025 से ही हो रही है। सावन का महत्व:Importance of Sawan सावन मास को शिवभक्ति का महीना माना जाता है। मान्यता है कि इसी महीने में समुद्र मंथन हुआ था और भगवान शिव ने विषपान कर संसार की रक्षा की थी। तभी से इस माह में शिव की विशेष पूजा की जाती है। खासकर सोमवार का व्रत अविवाहित लड़कियों द्वारा अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

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Vindhyvasini Stotra:श्री विंध्यवासिनी स्तोत्र

Vindhyvasini Stotra:विंध्यवासिनी स्तोत्र (श्री विंध्यवासिनी स्तोत्र): माता विंध्यवासिनी स्तोत्र स्वरूप भी देवी वत्सल की भक्त हैं और कहा जाता है कि यदि कोई भक्त थोड़ी सी भी श्रद्धा से माता की पूजा करता है, तो माता उसे मुक्ति और मोक्ष प्रदान करती हैं। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला में उनका निवास – माता की निरंतर उपस्थिति ने विंध्य पर्वत को जाग्रत शक्तिपीठ की श्रेणी में ला खड़ा किया है और विश्व समुदाय में अतुलनीय सम्मान दिलाया है। माता विंध्यवासिनी स्तोत्र स्वरूप भी देवी वत्सल की भक्त हैं और कहा जाता है कि यदि कोई भक्त थोड़ी सी भी श्रद्धा से माता की पूजा करता है, तो माता उसे मुक्ति और मोक्ष प्रदान करती हैं। Vindhyvasini Stotra विंध्याचल पर्वत श्रृंखला में उनका निवास – माता की निरंतर उपस्थिति ने विंध्य पर्वत को जाग्रत शक्तिपीठ की श्रेणी में ला खड़ा किया है और विश्व समुदाय में अतुलनीय सम्मान दिलाया है। पुराणों में विंध्य क्षेत्र का महत्व संस्कार के रूप में वर्णित किया गया है। विंध्याचल की पर्वत शृंखलाओं में गंगा की पावन धारा की कल-कल ध्वनियाँ प्रकृति की अनुपम छटा बिखेरती हैं। विंध्याचल पर्वत न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा स्थल है, बल्कि संस्कृति का अद्भुत अध्याय भी है। इसकी माटी में पुराणों की अनेक पौराणिक मान्यताएँ तथा अतीत के अनेक अध्याय समाए हुए हैं। Vindhyvasini Stotra श्रीमद्भगवती महापुराण (महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित) के श्रीकृष्ण-जीवन प्रकरण में अवतार (देवकी के आठवें जन्म से उद्धृत) के संबंध में कहा गया है। यदि थोड़ा विचार करें तो एक माँ की करुण दृष्टि, यदि पाषाण समूह को इस श्रेणी में खड़ा कर दे, तो पूर्ण श्रद्धा से पूजन करने पर माँ उसे क्या नहीं देगी? प्रयाग और काशी के मध्य (मिर्जापुर नगर के अंतर्गत) विंध्याचल नामक तीर्थ है, Vindhyvasini Stotra जहाँ माँ विंध्यवासिनी रूप में निवास करती हैं। श्रीगंगा के तट पर स्थित इस महातीर्थ शास्त्र को सभी शक्तिपीठों में प्रधान बताया गया है। यह महातीर्थ भारत के 51 शक्तिपीठों में प्रथम एवं अंतिम शक्तिपीठ है जो गंगा नदी के तट पर स्थित है। विंध्येश्वरी की महिमा जगत में अपार है। विंध्यवासिनी स्तोत्र का पाठ करने से देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। व्यक्ति को धन, आरोग्य, सुख, समृद्धि, सौभाग्य एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए व्यक्ति को प्रातःकाल विंध्यवासिनी स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। Benefits of Vindhyavasini Stotra:विंध्यवासिनी स्तोत्र के लाभ जो कोई भी व्यक्ति श्रद्धा एवं विश्वास के साथ 9 दिनों तक नियमित रूप से Vindhyvasini Stotra विंध्यवासिनी स्तोत्र का जाप करता है, उसे जीवन में सफलता मिलती है। धन, सुख, समृद्धि, वैभव, शक्ति एवं सौभाग्य में वृद्धि होती है। Who should recite this hymn:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ जो व्यक्ति बाधा रहित जीवन चाहते हैं, उन्हें प्रातःकाल विंध्यवासिनी स्तोत्र का नियमित जाप करना चाहिए। श्री विंध्यवासिनी स्तोत्र हिंदी पाठ:Vindhyvasini Stotra in Hindi निशुम्भ शुम्भ गर्जनी, प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी ।बनेरणे प्रकाशिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ त्रिशूल मुण्ड धारिणी, धरा विघात हारिणी ।गृहे-गृहे निवासिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ दरिद्र दुःख हारिणी, सदा विभूति कारिणी ।वियोग शोक हारिणी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ लसत्सुलोल लोचनं, लतासनं वरप्रदं ।कपाल-शूल धारिणी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ कराब्जदानदाधरां, शिवाशिवां प्रदायिनी ।वरा-वराननां शुभां, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ कपीन्द्न जामिनीप्रदां, त्रिधा स्वरूप धारिणी ।जले-थले निवासिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ विशिष्ट शिष्ट कारिणी, विशाल रूप धारिणी ।महोदरे विलासिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ पुंरदरादि सेवितां, पुरादिवंशखण्डितम्‌ ।विशुद्ध बुद्धिकारिणीं, भजामि विन्ध्यवासिनीं ॥ ।। इति श्री विंध्यवासिनी स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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Vasudevkrit Krishna Stotra:भगवान वासुदेव द्वारा रचित श्रीकृष्ण स्तोत्र,दुर्लभ और चमत्कारी स्तोत्र

Vasudevkrit Krishna Stotra:वासुदेवकृत कृष्ण स्तोत्र: हम हर वर्ष श्रावण कृष्ण अष्टमी को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं। इस वर्ष हम इसे 9 अगस्त 2012, गुरुवार को मना रहे हैं। हम इस दिन को जन्माष्टमी या गोकुल अष्टमी भी कहते हैं। इस दिन बहुत से लोग व्रत रखते हैं। फिर अगले दिन वे अपना सामान्य भोजन करते हैं। इसे पारणे या गोपाल-काला कहते हैं। Vasudevkrit Krishna Stotra वासुदेव और देवकी भगवान श्री कृष्ण के पिता और माता थे। पूर्व जन्मों में वासुदेव कश्यप ऋषि थे और देवकी अदिति थीं। भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया था और उन्हें आश्वासन दिया था कि वे उनके घर में जन्म लेंगे और वे उनके पिता और माता होंगे। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए भगवान श्री कृष्ण अपने दिव्य रूप में उनके सामने प्रकट हुए। Vasudevkrit Krishna Stotra तब वासुदेव ने अपने द्वारा बनाए गए स्तोत्र में भगवान श्री कृष्ण की स्तुति की और उनसे बालक का रूप धारण करने और उन्हें बालक के सभी कार्यों का आनंद लेने देने के लिए कहा। तब भगवान श्री कृष्ण ने देवकी की गोद में एक बालक का रूप धारण किया। वासुदेव ने कहा कि भगवान सर्वत्र हैं, वे बहुत बड़े भी हैं और बहुत छोटे भी, उन्हें कोई देख नहीं सकता, वे निर्गुण भी हैं Vasudevkrit Krishna Stotra और सगुण भी, अनेक गुणों से युक्त हैं, वे जीवन के प्रत्येक रूप में विद्यमान हैं और प्राचीन काल से ही विद्यमान हैं, उनका न तो कोई आदि है और न ही कोई अंत। पांच मुख वाले भगवान शिव उनकी स्तुति, उनका वर्णन करने में असमर्थ हैं। छह मुख वाले स्कंद भी आपकी स्तुति करने में असमर्थ हैं। Vasudevkrit Krishna Stotra शेषनाग आपकी स्तुति नहीं कर सके। देवी सरस्वती भी आपकी स्तुति नहीं कर सकीं। सभी गुरुओं और सभी योगियों के गुरु भगवान गणेश भी आपके गुणों का वर्णन या स्तुति करने में असमर्थ हैं। वेदों के रचयिता भगवान ब्रह्मा भी आपकी स्तुति करने में असमर्थ हैं। श्रुतियां भी उचित शब्दों से आपकी स्तुति नहीं कर सकतीं। ऐसे में ऋषि, देवता और विद्वान लोग आपकी स्तुति कैसे कर सकते हैं? अंत में वासुदेव भगवान श्री कृष्ण से अपना दिव्य रूप छोड़कर बालक रूप धारण करने के लिए कह रहे हैं। Vasudevkrit Krishna Stotra जो व्यक्ति दिन में तीन बार (संध्या समय) इस वासुदेवकृत कृष्ण स्तोत्र का पाठ करता है, वह अपने जीवन के सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है। भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद पुत्र के रूप में प्राप्त होता है जो भगवान श्री कृष्ण का भक्त बन जाता है। वासुदेवकृत कृष्ण स्तोत्र के लाभ इस वासुदेवकृत कृष्ण स्तोत्र का पाठ करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होगा जो जीवन को सुखी और समृद्ध बनाएगा। किसको यह स्तोत्र पढ़ना चाहिए जो लोग अपने सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद अपने जीवन में सफल नहीं हो पाते हैं, उन्हें वैदिक पद्धति के अनुसार इस वासुदेवकृत कृष्ण स्तोत्र का जाप करना चाहिए। श्री वासुदेवकृतं कृष्ण स्तोत्र:Vasudevkrit Krishna Stotra । श्री गणेशाय नमः । वसुदेव उवाच – त्वामतीन्द्रियमव्यक्तमक्षरं निर्गुणं विभुम् ।ध्यानासाध्यं च सर्वेषां परमात्मानमीश्वरम् ॥ १ ॥ स्वेच्छामयं सर्वरूपं स्वेच्छारूपधरं परम् ।निर्लिप्तं परमं ब्रह्म बीजरूपं सनातनम् ॥ २ ॥ स्थूलात्स्थूलतरं प्राप्तमतिसूक्ष्ममदर्शनम् ।स्थितं सर्वशरीरेषु साक्षिरूपमदृश्यकम् ॥ ३ ॥ शरीरवन्तं सगुणमशरीरं गुणोत्करं ।प्रकृतिं प्रकृतीशं च प्राकृतं प्रकृतेः परम् ॥ ४ ॥ सर्वेशं सर्वरूपं च सर्वान्तकरमव्ययम् ।सर्वाधारं निराधारं निर्व्यूहं स्तौमि किं विभुम् ॥ ५ ॥ अनन्तः स्तवनेऽशक्तोऽशक्ता देवी सरस्वती ।यं वा स्तोतुमशक्तश्च पञ्चवक्त्रः षडाननः ॥ ६ ॥ चतुर्मुखो वेदकर्ता यं स्तोतुमक्षमः सदा ।गणेशो न समर्थश्च योगीन्द्राणां गुरोर्गुरुः ॥ ७ ॥ ऋषयो देवताश्चैव मुनीन्द्रमनुमानवाः ।स्वप्ने तेषामदृश्यं च त्वामेवं किं स्तुवन्ति ते ॥ ८ ॥ श्रुतयः स्तवनेऽशक्ताः किं स्तुवन्ति विपश्चितः ।विहायैवं शरीरं च बालो भवितुमर्हसि ॥ ९ ॥ वसुदेवकृतं स्तोत्रं त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।भक्तिं दास्यमवाप्नोति श्रीकृष्णचरणाम्बुजे ॥ १० ॥ विशिष्टं पुत्रं लभते हरिदासं गुणान्वितम् ।सङ्कटं निस्तरेत्तूर्णं शत्रुभीतेः प्रमुच्यते ॥ ११ ॥ ॥ इति श्री वासुदेवकृतं कृष्ण स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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