पावन धाम मंदिर:हरिद्वार, उत्तराखंड, भारत

पावन धाम मंदिर को ‘कांच का मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है। पावन धाम मंदिर:चारों तरफ पहाड़ों से घिरे उत्तराखंड राज्य में हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। प्रदेश का हरिद्वार जिला पूरे विश्व में धार्मिक व आस्था की दृष्टि से प्रसिद्ध है। यहां की गंगा आरती व कुंभ मेले में भाग लेने दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं। हरिद्वार में कई ऐसे मंदिर हैं, जोकि आस्था का केंद्र माने जाते हैं, इन्हीं में से एक है पावन धाम मंदिर। यह कांच का मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर का मुख्य आकर्षण बिंदु है इसे बनाने में प्रयोग किया गया कांच। मंदिर की दीवारों पर शीशे से सुंदर चित्रण व कलाकृतियां बनाई गई हैं। सप्त सरोवर रोड पर भगीरथी नगर में स्थित यह मंदिर बेहद खूबसूरत व लोकप्रिय है। हरिद्वार आने वाले भक्त इस मंदिर में दर्शन करना नहीं भूलते, क्योंकि यहां जाए बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। मंदिर का इतिहास इस मंदिर की स्थापना साल 1970 में स्वामी वेदांत जी महाराज द्वारा की गई थी। पावन धाम एक गैर लाभकारी संस्था है, यानी इस मंदिर का उद्देश्य समाज कल्याण है। वेदांत जी महाराज ने दूसरों की मदद की सोच रखते हुए ही इस मंदिर की नींव रखी थी। यह मंदिर न सिर्फ मनुष्यों की सेवा बल्कि जानवरों की भी मदद करने के लिए जाना जाता है। संत सेवा, गौ सेवा, जरूरतमंद को मुफ्त भोजन आदि पावन धाम मंदिर की मुख्य गतिविधियों में शामिल है। आज भी यह संस्था सक्रिय रूप से सेवा भाव से कार्य कर रही है। वेदांत जी महाराज मोगा के स्कूलों के साथ ऋषिकेष मेंं स्थित प्रतिष्ठित संस्थान गीता भवन के भी संस्थापक हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन अत्यंत करुणा के साथ दूसरों की सेवा व मदद में ही समर्पित कर दिया। मंदिर का महत्व माना जाता है कि पावन धाम मंदिर में दर्शन मात्र से ही सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस मंदिर में दर्शन न करने पर हरिद्वार आने वाले भक्तों की यात्रा पूरी नहीं मानी जाती। भक्तों का मानना है कि इस पावन धाम में मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इस मंदिर में आपको महाभारत और रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों के चित्र दीवारों पर मिल लगे जाएंगे। मंदिर की वास्तुकला कांच से बना यह मंदिर बाहर से देखने में भले ही आम इमारतों जैसा प्रतीत हो लेकिन अंदर से यह किसी के भी मन को मंत्रमुग्ध कर देता है। इसकी स्थापत्य कला बेहद आकर्षक व अनोखी है। इस मंदिर की वास्तुकला जैसी सुंदरता देश के अन्य किसी हिंदू मंदिरों में देखने को नहीं मिलती। मंदिर में प्रवेश करते ही दाएं व बाएं तरफ देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। जबकि सामने कांच से बना मुख्य मंदिर का प्रवेश द्वार है। यह देखने में काफी आकर्षक लगता है। मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण, भगवान शंकर-पार्वती, गणेशजी व अन्य देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की प्रतिमाओं के दर्शन होते हैं। कांच से बनी दीवारों में प्रतिमाओं का दर्पण अद्भुत लगता है। मंदिर परिसर की दीवारों पर कांच से महाभारत व रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का चित्रण किया गया है। यही नहीं मंदिर की छत पर भी छोटे-छोटे व रंग-बिरंगे कांचों का प्रयोग कर सुंदर कलाकृतियां बनाई गई हैं। पावन धाम मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 06:00 PM मंदिर का प्रसाद मंदिर में लईया, मीठा दाना का प्रसाद चढ़ाया जाता है। इसके अलावा भक्त अपनी श्रृद्धा अनुसार मंदिर में पैसे दान कर सकते हैं।

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Secrets of Mahadev:क्या आप जानते हैं शिव से जुड़े ये 7 गुप्त रहस्य ?

Secrets of Mahadev:शिव पुराण में भगवान शिव को देवों का देव अर्थात महादेव कहा गया है। भगवान शिव को सृष्टि का संहारक भी कहा जाता है लेकिन संहारक का अर्थ यहां केवल सृष्टि के अंत से नहीं है बल्कि सृजन की प्रक्रिया से है। जब-जब पाप धरती पर हावी हो जाता है और मनुष्यता का अंत होने लग जाता है, तो धरा को नवजीवन की आवश्यता होती है, ऐसे में धरती के सृजन के लिए भगवान शिव संहारक की भूमिका निभाते हुए सृष्टि का संहार करते हैं। Secrets of Mahadev:इसके बाद ब्रह्मा धरा का सृजन करते हैं और फिर भगवान विष्णु जगत के पालनहार की भूमिका निभाते हैं। बात करें, भगवान शिव के जीवन की,तो महादेव के बारे में कहा जाता है कि शिव समस्त मोह-माया से दूर रहकर भी संसार से प्रेम करते हैं। कुछ पौराणिक कहानियों में महादेव को निर्मोही भी कहा गया है। आइए, जानते हैं भगवान शिव के जीवन के 7 अद्भुत रहस्य, जो आपको कलियुग के कई सवालों के जवाब देकर आपको जीवन को समझने में मदद करेंगे। इन रहस्यों में जीवन के ऐसे उत्तर छुपे हैं, जो जीवन के प्रति आपको एक उम्मीद भी देंगे। Secrets of Mahadev:शिव से जुड़े ये 7 गुप्त रहस्य? 1. Shiv Ji Ki Kitni Wife Thi:कितनी थीं शिव की पत्नियां? यह रहस्य की बात है कि भगवान शंकर का विवाह सर्वप्रथम प्रजापति दक्ष की पुत्री सती से हुआ फिर जब वे यज्ञकुंड में कूदकर भस्म हो गईं, तब उन्होंने दूसरा जन्म लिया और हिमवान की पुत्री पार्वती कहलाईं। कहते हैं कि गंगा, काली और उमा भी शिव की पत्नियां थीं। 2. कितने हैं शिव के पुत्र:How many sons does Shiva have? भगवान शिव ने पार्वती से विवाह करने के बाद कार्तिकेय नाम का एक पुत्र प्राप्त किया। Secrets of Mahadev गणेश तो माता पार्वती के उबटन से बने थे। सुकेश नामक एक अनाथ बालक को उन्होंने पाला था। जलंधर शिव के तेज से उत्पन्न हुआ था। अय्यप्पा शिव और मोहिनी के संयोग से जन्मे थे। भूमा उनके ललाट के पसीने की बूंद से जन्मे थे। अंधक और खुजा नामक 2 पुत्र और थे जिसके बारे में ज्यादा उल्लेख नहीं मिलता है। 3. शिव के कितने शिष्य:How many disciples does Shiva have? शिव के प्रमुख 7 शिष्य हैं जिन्हें प्रारंभिक सप्तऋषि माना गया है। इन ऋषियों ने ही शिव के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया जिसके चलते भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। शिव के शिष्य हैं- बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज इसके अलावा 8वें गौरशिरस मुनि भी थे। Secrets of Mahadev शिव के शिष्यों में वशिष्ठ और अगस्त्य मुनि का नाम भी लिया जाता है। 4. क्या शिव ही बुद्ध थे Was Shiva the Buddha? बौद्ध साहित्य के मर्मज्ञ अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान प्रोफेसर उपासक का मानना है कि शंकर ने ही बुद्ध के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने पालि ग्रंथों में वर्णित 27 बुद्धों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें बुद्ध के 3 नाम अतिप्राचीन हैं- तणंकर, शणंकर और मेघंकर। 5. क्या शिव और शंकर एक ही हैं Are Shiv and Shankar the same? कुछ पुराणों के अनुसार भगवान शंकर को शिव इसलिए कहते हैं कि वे निराकार शिव के समान हैं। निराकार शिव को शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के 2 नाम बताते हैं। असल में दोनों की प्रतिमाएं अलग-अलग आकृति की हैं। शंकर को हमेशा तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। कई जगह तो शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए दिखाया गया है। अत: शिव और शंकर 2 अलग-अलग सत्ताएं हैं। माना जाता है कि महेश (नंदी) और महाकाल, भगवान शंकर के द्वारपाल हैं। रुद्र देवता शंकर की पंचायत के सदस्य हैं। 6. हर काल में शिव:Shiva in every era भगवान शिव ने हर काल में लोगों को दर्शन दिए हैं। Secrets of Mahadev वे सतयुग में समुद्र मंथन के समय भी थे और त्रेता में राम के समय भी। द्वापर युग की महाभारत काल में भी शिव थे और कलिकाल में विक्रमादित्य के काल में भी शिव के दर्शन होने का उल्लेख मिलता है। भविष्य पुराण के अनुसार राजा हर्षवर्धन को भगवान शिव ने मरुभूमि पर दर्शन दिए थे। 7. वनवासी और आदिवासियों के देवता:God of forest dwellers and tribals? भारत की असुर, दानव, राक्षस, गंधर्व, यक्ष, आदिवासी और सभी वनवासियों के आराध्य देव शिव ही हैं। Secrets of Mahadev शैव धर्म भारत के आदिवासियों का धर्म है। सभी दसनामी, शाक्त, सिद्ध, दिगंबर, नाथ, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव धर्म से जुड़े हुए हैं। चंद्रवंशी, सूर्यवंशी, अग्निवंशी और नागवंशी भी शिव की ही परंपरा से ही माने जाते हैं।

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Temple in Dream:सपने में तीर्थ यात्रा या मंदिर दिखना शुभ या अशुभ, यहां जानें इसका मतलब

Temple in Dream:नींद में दिखाई देने वाले हर सपने का अपना अलग महत्व होता है। स्वप्न शास्त्र के मुताबिक इन सपनों के शुभ या अशुभ संकेत होते हैं। अक्सर लोगों को सपने में मंदिर या तीर्थ स्थान नजर आते हैं। जानते हैं इस तरह के सपने का मतलब- Swapna Shastra:नींद में सोया व्यक्ति अक्सर सपनों की दुनिया में खो जाता है। सोते समय सपने देखना एक सामान्य प्रक्रिया है। वैसे तो नींद में हम कई तरह के सपने देखते हैं, जिन्हें हम अक्सर सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन स्वप्न शास्त्र की मानें तो नींद में दिखाई देने वाले हर सपने का अपना एक अलग मतलब और महत्व होता है। स्वप्न शास्त्र के मुताबिक कई बार सपने में दिखने वाली चीजें व्यक्ति के भविष्य में घटने वाली घटनाओं का संकेत देती हैं। ये संकेत शुभ या अशुभ कुछ भी हो सकते हैं। व्यक्ति अपने सपने में कई तरह की चीजें देखता है। लेकिन अगर सपने में कोई तीर्थ यात्रा, भगवान के दर्शन या मंदिर नजर आए, तो यह सपना काफी शुभ माना जाता है। लेकिन इन सभी चीजों के सपने में आने का अपना अलग मतलब होता है। तो चलिए जानते हैं तीर्थ यात्रा, भगवान के दर्शन या मंदिर का क्या संकेत देता है। Dream Interpretation: सपनों पे इंसान का कोई वश नहीं होता. सपने में पहाड़- नदी, भाग दौड़, मौत या कई और तरह के ख्वाब भी आते होंगे. इसी सिलसिले में आपके साथ भी अक्सर ऐसा हुआ होगा कि Temple in Dream सपने में मंदिर, तीर्थ यात्रा या पूजा पाठ दिखाई पड़ता हो. सपने में मंदिर के दिखने का सीधा मतलब आध्यात्मिकता धार्मिक विश्वासों और दैवीय मार्गदर्शन से है. हर सपने की कोई न कोई वजह होती है. स्वप्नशास्त्र के अनुसार सपने में मंदिर के दिखने का अर्थ किसी संकेत को दर्शाता है. अगर आपके सपने में भी अलग अलग तरह के मंदिर दिखाई दे रहे हैं तो आइए जानते हैं उनके पीछे की वजह- शांत मंदिरा का दिखाई देना Temple in Dream Temple in Dream लोग मंदिर में तन-मन की शांति के लिए जाते हैं. सपने में यदि आपको कोई ऐसी मंदिर दिखाई दे जहां बहुत शांति है तो समझ जाएं कि ये एक संकेत है जो इस बात की ओर इशारा करता है कि आप अपनी जिन्दगी में वाकई परेशान हैं और और आपको विश्राम और शांति की दरकार है. इस तरहा का सपना इस बात की ओर भी संकेत करता है कि भविष्य में आपके रूके हुए काम बन सकते हैं. सपने में सफेद मंदिर का दिखना:Seeing white temple in dream स्वप्न शास्त्र के मुताबिक अगर सपने में किसी व्यक्ति को सफेद रंग का मंदिर नजर आता है, तो उसे बेहद भाग्यशाली माना जाता है। इस सपने का मतलब यह है कि भविष्य में जल्द ही आर्थिक लाभ मिलने वाला है। Temple in Dream वहीं, सपने में भगवान गणेश की मूर्ति दिखाई देना भी शुभ संकेत माना जाता है। सपने में तैरता हुआ मंदिर देखना:Seeing a floating temple in a dream यदि आप भविष्य में कोई ऐसा सपना देखते हैं जहां आपको तैरता हुआ मंदिर दिखाई देता है तो ये अशुभ संकेत है. इसका मतलब है भविष्य में आपका कोई काम बनते बनते बिगड़ने वाला है. यदि आपको ऐसा सपना बार-बार आता है तो आप अपने भविष्य के लिए ईश्वर की प्रार्थना करें. सपने में कोई ऐसा मंदिर देखना जहां आप जाना चाहते हैं:Seeing a temple in your dream that you want to visit सपने में यदि आपको कोई ऐसा मंदिर दिखाई दे जहां आप काफी समय से जाना चाहते हैं मगर किसी कारण वश नहीं जा पा रहे हैं तो इसका मतलब कि उस मंदिर से आपका बुलावा आने वाला है और इसके साथ ही जल्द ही आपकी कोई ऐसी कामना भी पूर्ण हो सकती है जिसकी चाहत आपको लंबे समय से है.  सपने में मंदिर का घंटा देखना:Seeing temple bell in dream Temple in Dream सपने में मंदिर का घंटा देखना या घंटा बजाते हुए देखने का अर्थ है कि आपकी अरदास भगवान तक पहुंच गई है और जल्द ही आपकी मनोकामना पूरी होने वाली है बस आपको धैर्य और आस्था मन में बनाए रखना है.  सपने में भोलेनाथ का मंदिर देखना:Sapne Mein Bholenath Ka Mandir Dekhna ऐसा अक्सर होता होगा कि सपने में शिव के किसी धाम का आपको स्वप्न आया हो. इसका ये अर्थ है कि शिव आपकी भक्ति और आस्था से प्रसन्न हुए हैं और जल्द ही वो आपकी मुराद पूरी करने वाले हैं. ऐसा सपना आने पर आपको नजदीकी शिव मंदिर जाकर जल चढ़ाना चाहिए.  सपने में मंदिर में प्रसाद ग्रहण करना:Receiving prasad in temple in dream ऐसा सपना इस बात की ओर इशारा करता है Temple in Dream कि आपके आपके सुकर्मों का प्रसाद मिलने वाला है और ईश्वर आपके ऊपर मेहरबान है. आपकी मनोकामना को भगवान ने पूरा करने का सोची है. ऐसे सपने आस्था और विश्वास की ओर इंगित करते है.  सपने में तीर्थ यात्रा दिखना:Seeing a pilgrimage in a dream स्वप्न शास्त्र के जानकार के मुताबिक सपने में तीर्थ स्थान देखना बेहद शुभ माना जाता है। इस सपने का मतलब यह होता है कि आपको भगवान की कृपा मिलने वाली है। साथ ही आपको सपने में जिस तीर्थ यात्रा का स्थान दिखाई देता है, वहां के देवी-देवता का आपको आर्शीवाद मिलता है। इतना ही नहीं ऐसा स्वप्न देखने पर आपको जल्द ही कोई शुभ मिल सकते हैं।

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Markandeya Maha Mrityunjaya Stotram:श्री मार्कंडेय कृत महामृत्युंजय स्तोत्र

Markandeya Maha Mrityunjaya Stotram in Hindi:श्री मार्कंडेय कृत महामृत्युंजय स्तोत्र हिंदी पाठ Markandeya Maha Mrityunjaya Stotram “ऊँ अस्य श्रीसदाशिवस्तोत्रमन्त्रस्य मार्कण्डेय ऋषि:,श्रीसदाशिवो देवता गौरी शक्ति: मम समस्तमृत्युशान्त्यर्थे जपे विनियोग: ।” Markandeya Maha Mrityunjaya Stotram:मृत्युंजय स्तोत्र रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृंगनिकेतनंशिण्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम् ।क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवन्दितंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम: ।। 1 ।। पंचपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजव्दयशोभितंभाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम् ।भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम: ।। 2 ।। मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयमनोहरंपंकजनासनपद्मलोचनपूजिताड़् घ्रिसरोरुहम् ।देवसिद्धतरंगिणीकरसिक्तशीतजटाधरंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम: ।। 3 ।। कुण्डलीकृतकुण्डलीश्वरककुण्डलं वृषवाहनंनारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम् ।अन्धकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम: ।। 4 ।। यक्षराजसखं भगक्षिहरं भुजंगविभूषणंशैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेवरम् ।क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम: ।। 5 ।। भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणंदक्षयज्ञविनाशिनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम् ।भुक्तिमुक्तिफलप्रदं निखिलाघसंघनिबर्हणंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम: ।। 6 ।। भक्तवत्सलमर्चतां निधिमक्षयं हरिदम्बरंसर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनूपमम् ।भूमिवारिनभोहुताशनसोमपालितस्वाकृतिंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम: ।। 7 ।। विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परंसंहरन्तमथ प्रपंचमशेषलोकनिवासिनम् ।क्रीडयन्तमहर्निशं गणनाथयूथसमावृतंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम: ।। 8 ।। रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकण्ठमुमापतिम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति ।। 9 ।। कालकण्ठं कलामूर्तिं कालाग्निं कालनाशनम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति ।। 10 ।। नीलकण्ठं विरुपाक्षं निर्मलं निरुपद्रवम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति ।। 11 ।। वामदेवं महादेवं लोकनाथं जगद्गुरुम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति ।। 12 ।। देवदेवं जगन्नाथं देवेशमृषभध्वजम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति ।। 13 ।। अनन्तमव्ययं शान्तमक्षमालाधारं हरम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति ।। 14 ।। आनन्दं परमं नित्यं कैवल्यपदकारणम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति ।। 15 ।। स्वर्गापवर्गदातारं सृष्टिस्थित्यन्तकारिणम् ।नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति ।। 16 ।। ।। इति श्री मार्कंडेय कृत महामृत्युंजय स्तोत्र संपूर्णम् ।।

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Maruti Stotra:श्री मारुति स्तोत्र

Maruti Stotra:मारुति स्तोत्र (श्री मारुति स्तोत्र): 17वीं शताब्दी के महान संत समर्थ रामदास स्वामी ने मारुति स्तोत्र की रचना की है। यहाँ, समर्थ रामदास स्वामी मारुति (हनुमान) का वर्णन करते हैं और इस स्तोत्र के विभिन्न छंदों में उनकी स्तुति करते हैं। मारुति स्तोत्र या हनुमान स्तोत्र का अर्थ:- मारुति स्तोत्र या हनुमान स्तोत्र भगवान हनुमान की स्तुति करने वाला भजन है। मारुति शक्ति के देवता हैं, समर्थ रामदास का मुख्य लक्ष्य स्वस्थ समाज का विकास करना था, उन्होंने “भीमरूपी स्तोत्र” की भी रचना की जो मारुति स्तोत्र का प्राथमिक भाग था। समर्थ रामदास ने मारुति की सभी जादुई शक्तियों का वर्णन किया है। पहले 13 छंद मारुति का वर्णन करते हैं, और बाद के 4 फलश्रुति हैं (या इस स्तोत्र का पाठ करने से क्या गुण / लाभ प्राप्त होते हैं)। जो कोई इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके सभी संकट, कठिनाइयाँ और चिंताएँ श्री हनुमान की कृपा से दूर हो जाती हैं। वे अपने सभी शत्रुओं और सभी बुरी चीज़ों से मुक्त हो जाते हैं। Maruti Stotra स्तोत्र में कहा गया है कि 1100 बार जाप करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह स्तोत्र हनुमान जी की कृपा पाने का सबसे सफल और सिद्ध मंत्र है। Maruti Stotra:इस स्तोत्र के जाप से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्त को भय और भय से मुक्त कर स्वस्थ होने का आशीर्वाद देते हैं। यह एक सिद्ध मंत्र है। मारुति स्तोत्र का जाप करने वाला भक्त हमेशा हनुमान जी के पास रहता है। हनुमान जी हमेशा अपने भक्त की रक्षा करते हैं। हनुमान जी शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार हैं। ऐसा माना जाता है कि वे अमर हैं। वे अपने सूक्ष्म रूप में इस सूक्ष्म रूप में भी सजग रहते हैं। उनकी कृपा प्राप्त करना काफी आसान है। अपने मन में हमेशा हनुमान जी के प्रति दृढ़ विश्वास और श्रद्धा रखें। Maruti Stotra वे हमेशा अपने भक्तों पर अपनी दृष्टि रखते हैं। बजरंगबली हनुमान जी की कृपा से भक्त के मन से हर तरह का भय नष्ट हो जाता है। भक्त के अंदर आत्मविश्वास जागृत होता है। हनुमान जी का भक्त कभी किसी संकट या कठिन परिस्थिति से नहीं डरता। हनुमान की कृपा से वह सभी संकटों का सामना पूरे विश्वास और आत्मविश्वास के साथ करता है। Maruti Stotra Ke labh:मारुति स्तोत्र के लाभ Maruti Stotra:जीवन से सभी बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए हमें इस स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करना चाहिए।मारुति की जादुई शक्तियाँ प्राप्त करने के लिए हमें इसका प्रतिदिन जाप करना चाहिए, हालाँकि यह मंगलवार और शनिवार को अधिक प्रभाव डालता है।भगवान हनुमान हमेशा अपने भक्तों की मदद करते हैं जब भी उन्हें ज़रूरत होती है। किसको करना चाहिए यह स्तोत्र: जिन लोगों को हर मामले और हर क्षेत्र में बाधाएँ आ रही हैं, उन्हें नियमित रूप से मारुति स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। श्री मारुति स्तोत्र हिंदी पाठ:Maruti Stotra in Hindi श्री मारुति स्तोत्र वाहन दुर्घटना से बचाव व सभी प्रकार की समस्याओं और बाधाओं से मुक्ती पाने का अचूक उपाय है। ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकालानलप्रभाप्रज्वलनाय । प्रतापवज्रदेहाय । अंजनीगर्भसंभूताय । प्रकटविक्रमवीरदैत्यदानवयक्षरक्षोगणग्रहबंधनाय । भूतग्रहबंधनाय । प्रेतग्रहबंधनाय । पिशाचग्रहबंधनाय । शाकिनीडाकिनीग्रहबंधनाय । काकिनीकामिनीग्रहबंधनाय । ब्रह्मग्रहबंधनाय । ब्रह्मराक्षसग्रहबंधनाय । चोरग्रहबंधनाय । मारीग्रहबंधनाय । एहि एहि । आगच्छ आगच्छ । आवेशय आवेशय । मम हृदये प्रवेशय प्रवेशय । स्फुर स्फुर । प्रस्फुर प्रस्फुर। सत्यं कथय । व्याघ्रमुखबंधन सर्पमुखबंधन राजमुखबंधन नारीमुखबंधन सभामुखबंधन शत्रुमुखबंधन सर्वमुखबंधन लंकाप्रासादभंजन । अमुकं मे वशमानय । क्लीं क्लीं क्लीं ह्रुीं श्रीं श्रीं राजानं वशमानय । श्रीं हृीं क्लीं स्त्रिय आकर्षय आकर्षय शत्रुन्मर्दय मर्दय मारय मारय चूर्णय चूर्णय खे खे श्रीरामचंद्राज्ञया मम कार्यसिद्धिं कुरु कुरु ॐ हृां हृीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् स्वाहा विचित्रवीर हनुमत् मम सर्वशत्रून् भस्मीकुरु कुरु । हन हन हुं फट् स्वाहा ॥ एकादशशतवारं जपित्वा सर्वशत्रून् वशमानयति नान्यथा इति ॥ ॥ इति श्री मारुति स्तोत्र संपूर्णम् ॥

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Maa Bhuvaneshwari Stotram:माँ भुवनेश्वरी स्तोत्र

Maa Bhuvaneshwari Stotram:माँ भुवनेश्वरी स्तोत्र अष्टसिद्धिरालक्ष्मी अरुणाबहुरुपिणि त्रिशूल भुक्कुरादेवी पाशाकुशविदारिणी ॥ १ ॥ खड्गखेटधरादेवी घण्टनि चक्रधारिणीषोडशी त्रिपुरादेवी त्रिरेखा परमेश्वरी ॥ २ ॥ कौमारी पिंगलाचैव वारीनी जगामोहिनीदुर्गदेवी त्रिगंधाच नमस्ते शिवनायक ॥ ३ ॥ एवंचाष्टशतनामंच श्लाके त्रिनयभावितंभक्तये पठेन्नित्यं दारिद्रयं नास्ति निश्चितं ॥ ४ ॥ एकः काले पठेन्नित्यं धनधान्य समाकुलंद्विकालेयः पठेन्नित्यं सर्व शत्रुविनाशानं ॥ ५ ॥ त्रिकालेयः पठेन्नित्यं सर्व रोग हरम परंचतुःकाले पठेन्नित्यं प्रसन्नं भुवनेश्वरी ॥ ६ ॥ इति श्री रुद्रयावले ईश्वरपार्वति संवादे ॥ इति माँ भुवनेश्वरी स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Kanwar Yatra 2025:कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा,इस बार कितने पड़ेंगे सावन में सोमवार

Kanwar Yatra 2025:सावन( Kab Se Hai Sawan 2025) का महीना देवों के देव महादेव को समर्पित है। इस माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है और इस माह में कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2025) की शुरुआत होती है। इस दौरान हरिद्वार में बेहद खास रौनक देखने को मिलती है। हिंदू कैलेंडर का पांचवा सावन (Sawan 2025) होता है, जिसे श्रावण माह के नाम से भी जाना जाता है। इस माह में महादेव के संग मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही कांवड़ यात्रा की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कांवड़ यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी। तभी से कांवड़ यात्रा की परंपरा जारी है। इस पावन यात्रा में अधिक संख्या में शिव भक्त शामिल होते हैं। हरिद्वार से जल लाकर सावन शिवरात्रि के शुभ अवसर पर महादेव का अभिषेक करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा। साल 2025 में कितने सोमवार – How many Mondays in the year 2025 इस बार सावन में 4 सोमवार पड़ेंगे.  Sawan somvar list 2025 : सावन का महीना शिव भक्तों के लिए बहुत खास होता है. Kanwar Yatra 2025 इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करना शुभफलदायी माना जाता है. सोमवार का उपवास करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है. Kanwar Yatra 2025 साथ ही कुंआरी लड़कियों को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है. ऐसे में आइए जानते हैं कब से सावन का महीना शुरू हो रहा है और इस बार कितने सोमवार (sawan somavar vrat 2025) पड़ रहे हैं.  सावन सोमवार व्रत 2025 तारीख – Sawan somvar calendar 2025 सावन का पहला सोमवार व्रत 14 जुलाई को सावन का दूसरा सोमवार व्रत 21 जुलाई को सावन का तीसरा सोमवार व्रत 28 जुलाई को सावन का चौथा सोमवार व्रत 04 अगस्त को  कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2025 (Kawad Yatra 2025 Start Date) इस बार 11 जुलाई से सावन माह की शुरुआत हो रही है। Kanwar Yatra 2025 ऐसे में इसी दिन से कांवड़ यात्रा की शुरुआत होगी और सावन शिवरात्रि के दिन कांवड़ यात्रा का जल चढ़ेगा। सावन शिवरात्रि 2025 डेट (Sawan Shivratri 2025) Kanwar Yatra 2025 हर महीन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 23 जुलाई को सुबह 04 बजकर 39 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 24 जुलाई को देर रात 02 बजकर 28 मिनट से होगी। ऐसे में सावन शिवरात्रि का पर्व 23 जुलाई को मनाया जाएगा। सावन के महीने में क्या करें – What to do in the month of Sawan सावन के महीने में क्या न करें – What not to do in the month of Savan Sawan Month 2025 start date and End date: कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें व्रत तिथि, पूजन विधि… शिव मंत्र (Shiv Mantra) 1. सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।उज्जयिन्यां महाकालं ओम्कारम् अमलेश्वरम्॥परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।।2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

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Sapne Mein Deepak:जलता देखना जानिए क्या कहता है ज्योतिष,क्या हैं इसके संकेत

Sapne Mein Deepak:सपनों को भविष्य की घटनाओं का सूचक माना जाता है. सपने में जलता हुआ दीपक देखना अच्छा माना जाता है. यह सपना बताता है कि आपके अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं. Deepak Dreams Meaning: स्वप्नशास्त्र के अनुसार हर सपना हमें भविष्य की घटनाओं का संकेत देता है. हर सपने के अलग-अलग मायने होते हैं. कई बार कुछ सपने ऐसे होते हैं जो सुबह उठते ही भूल जाते हैं लेकिन कई सपने ऐसे होते हैं जो हमें याद रह जाते हैं.  सपने में जलता दीपक देखने का भी एक खास मतलब होता है. यह सपना लाभ और सम्मान का संकेत देता है. आइए जानते हैं कि सपने में जलता दिया देखने के क्या मायने होते हैं. सपने में जलता दिया देखने का मतलब:Meaning of seeing a burning lamp in a dream सपनों में जलता दीपक देखना Sapne mein Diya Dekhne Ka Matlab Sapne Mein Deepak:स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में यदि किसी व्यक्ति को जलता हुआ दीपक दिखाई देता है तो यह उसके लिए शुभ संकेत हो सकता है. जलता हुआ दीपक देखने का अर्थ है कि आने वाले भविष्य में आप के मान-सम्मान, प्रतिष्ठा में वृद्धि होने वाली है. इसके अलावा समाज में आपके परिवार का रुतबा बढ़ सकता है. जलते हुए दीपक को सपने में देखना राजयोग बनने के संकेत भी हैं. जलता हुआ दीपक आपके पद प्राप्ति के योग भी बनाता है. जिस प्रकार एक जलता हुआ दीपक अंधेरे को दूर भगा कर रोशनी फैलाता है, उसी प्रकार यह संकेत करता है कि आपके जीवन से असफलता दूर जाने वाली है और जल्द ही आपकी सफलता के मार्ग खुलने वाले हैं. सपने में अखंड ज्योत जलते देखना Sapne mein Akhand Jyoti Jalte Dekhne स्वप्न शास्त्र में बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने सपने में जलती हुई अखंड ज्योत को देखता है तो यह संकेत है Sapne Mein Deepak कि वह व्यक्ति दीर्घायु वाला है और उसे आने वाले भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी. सपनों में बुझा दीपक देखना Sapne mein bhuja deepak dekhna जिस प्रकार सपने में जलता हुआ दीपक देखना शुभ संकेत होता है, Sapne Mein Deepak उसी प्रकार यदि सपने में बुझा हुआ दीपक दिखाई देता है तो यह एक अशुभ सपना माना गया है. स्वप्न शास्त्र मानता है कि यह संकेत दे रहा है कि आपकी इच्छा शक्ति कमजोर हो रही है. यदि आप किसी काम को करने में मेहनत करते हैं तो उस काम में आपकी मेहनत के अनुसार फल प्राप्त नहीं होगा. सपने में बुझा हुआ दीपक आपको संकेत देता है कि आप जिस भी क्षेत्र में कार्य करेंगे, Sapne Mein Deepak वहां आपको असफलता ही हाथ लगने वाली है. इसके अलावा यह आपको स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों के बारे में भी संकेत करता है. सपने में जलता दिया देखने का मतलब अन्य संकेत:Meaning of seeing a burning lamp in dream Other signs Sapne Mein Deepak स्वप्न शास्त्र में हर सपनों की व्याख्या की गई है. इसके अनुसार जलते दीपक का सपना देखना बहुत शुभ माना जाता है. Sapne Mein Deepak जलता हुआ दीपक संकेत देता है कि आने वाले भविष्य में आप के मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होने वाली है.  जलता दीपक बताता है कि समाज में आपका रुतबा बढ़ सकता है. यह सपना राजयोग बनने के भी संकेत देता है. जलते दीपक का सपना बताता है कि जल्द ही आपको नौकरी में तरक्की भी मिल सकती है. जलता हुआ दीपक अंधेरे को दूर करता है और रोशनी फैलाता है. Sapne Mein Deepak इस तरह का सपना देखना इस बात का संकेत देता है कि आपके जीवन से जल्द ही असफलता दूर खत्म होने वाली है और आपके सफलता के मार्ग खुलने वाले हैं. स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आपने सपने में जलती हुई अखंड ज्योत देखी है तो यह आपके दीर्घायु होने का संकेत देता है. अगर आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं तो आपको जल्द ही उससे मुक्ति मिल सकती है.  जिस तरह सपने में जलता हुआ दीपक देखना शुभ माना जाता है, उसी तरह सपने में बुझा हुआ दीपक दिखाई देखना बहुत अशुभ सपना माना गया है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार बुझा हुआ दीपक बताता कि आपको किसी काम में असफलता मिलने वाली है. सपने में बुझा हुआ दीपक दिखे तो आपको सावधान हो जाना चाहिए. ये सपना बताता है कि आपको जल्द ही स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानियां घेर सकती हैं.

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चंडी देवी मंदिर:हरिद्वार, उत्तराखंड, भारत

चंडी देवी का यह मंदिर सिद्ध पीठ के रूप में जाना जाता है। चंडी देवी मंदिर उत्तराखंड राज्य के पवित्र शहर हरिद्वार में चंडी देवी मंदिर स्थित है। हिन्दुओं का यह प्रसिद्ध मंदिर हिमालय के सबसे दक्षिणी पर्वत श्रृंखला शिवालिक पहाड़ियों के पूर्वी भाग वाले शिखर पर नील पर्वत पर स्थित है। हरिद्वार के अंदर स्थित पांच तीर्थों में इस धार्मिक मंदिर का भी स्थान है। चंडी देवी का यह मंदिर सिद्ध पीठ के रूप में जाना जाता है। देवी चंडी को समर्पित इस मंदिर के दर्शन के लिए देश के हर कोने से लोग अपनी कामना लेकर माता के दरबार में आते है। विशेष अवसरों पर मंदिर में भारी भीड़ भी देखने को मिलती है। चंडी देवी मंदिर का इतिहास चंडी देवी मंदिर के इतिहास को लेकर कई किद्वन्तियाँ हैं। जिसमे कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कश्मीर के राजा सुच्चत सिंह ने सन 1929 में करवाया था। इसके अलावा दूसरी किद्वंती के अनुसार मंदिर में जो मूर्तियां स्थापित है वह आठवीं सदी की मानी जाती है। चंडी देवी का यह मंदिर सिद्ध पीठ के रूप में जाना जाता है। जिन्हे आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित करवाया गया था। वह हिन्दू धर्म के पूजनीय संतों में से एक थे। इस मंदिर से जुडी एक और पौराणिक कथा है जिसके अनुसार कुछ समय पहले देवता इंद्र के राज्य पर शुंभ और निशुंभ नामक राक्षसों ने कब्जा कर लिया था। सभी देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया था। देवताओं अपनी इस समस्या को लेकर माता पार्वती के पास पहुंचे। तब माता ने चंडी के रूप को धारण किया और राक्षसों के समक्ष प्रकट हुईं। जब शुंभ ने उस असाधारण महिला की सुंदरता को देखा वो मोहित हो गया और माता चंडी से विवाह करने की इच्छा जताई। जब माता ने इनकार किया तो शुंभ ने अपने राक्षस चंद और मुंड को उन्हें मारने के लिए भेजा। परन्तु माता ने उनका वध कर दिया। इसके बाद शुंभ और निशुंभ दोनों ने माता को मरने का प्रयास किया लेकिन यह दोनों भी माता ने हाथों मारे गया। इसके बाद माता ने नील पर्वत के ऊपर थोड़ी देर विश्राम किया। ऐसा माना जाता है कि माता के इसी स्थान पर चंडी देवी का मंदिर बनाया गया। इस पर्वत श्रृंखला में स्थित 2 चोटियों को शुंभ और निशुंभ कहते है। मंदिर का महत्व चंडी देवी मंदिर के लिए माना जाता है कि इस मंदिर में सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस कारण यहाँ पर भक्तों का ताँता लगा रहता है। चंडी देवी मंदिर में माता पार्वती के उग्र रूप की पूजा अर्चना की जाती है। इनका यह रूप माँ काली से समान है। कुम्भ मेले के समय श्रद्धालु माता के दर्शन करने जरूर आते है। हरिद्वार में तीन सिद्ध पीठ मंदिर स्थापित है जिसमे से एक पीठ माँ चंडी देवी को समर्पित है। दूसरा पीठ माँ मनसा देवी को समर्पित है और तीसरा माता माया देवी को समर्पित है। मंदिर की वास्तुकला चंडीदेवी मंदिर ऊँचाई पर स्थित होने के कारण मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां है। यदि आप रोप वे से जाते है तो भी आपको जो की लगभग 350 चढ़ना होगा। मंदिर तक पहुंचते समय चारों तरफ जंगल का नजारा बहुत ही मनमोहक रहता है। मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में है। मंदिर के समीप हनुमानजी की माँ अंजना माता का मंदिर भी स्थित है। जो भक्त चंडी देवी मंदिर में आते है वह इस मंदिर में भी दर्शन के लिए जरूर जाते हैं। चंडी देवी मंदिर का समय चंडी देवी मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद चंडी देवी मंदिर में सूखा मेवा, चना चिरौंजी का भोग लगाया जाता है। साथ ही चुनरी चढ़ाई जाती है। माता को फूल भी अर्पित किये जाते है

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Nirjala Ekadashi 2025 Date:कब है निर्जला एकादशी,व्रत के दिन नहीं करें ये काम, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त

Nirjala Ekadashi 2025 Muhurat :निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि निर्जला एकादशी पर विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के पापों का नाश हो जाता है। Nirjala Ekadashi 2025 Muhurat, निर्जला एकादशी 2025 हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि निर्जला एकादशी पर विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के पापों का नाश हो जाता है। हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि विशेष महत्व रखती है। इस साल जून के पहले हफ्ते में निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसलिए आइए जानते हैं निर्जला एकादशी की सही डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत पारण का समय- कब है निर्जला एकादशी When is Nirjala Ekadashi ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 06 जून 2025 को 02:15 ए एम बजे होगी, जिसका समापन 07 जून 2025 को 04:47 ए एम तक होगा। लेकिन उदया तिथि के चलते निर्जला एकादशी का व्रत शुक्रवार, 6 जून के दिन रखा जाएगा। गृहस्थ लोग 6 जून के दिन यह व्रत रखेंगे वहीं, वैष्णव संप्रदाय के लोग 7 जून के दिन यह व्रत रखेंगे। निर्जला एकादशी क्या है? What is Nirjala Ekadashi ? निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। ‘निर्जला’ का अर्थ है ‘बिना जल के’, अर्थात इस व्रत में भक्त न तो भोजन करते हैं और न ही पानी ग्रहण करते हैं। ये व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से साल की सभी 24 एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। ये व्रत आत्म-अनुशासन, भक्ति और तप का प्रतीक है, जो भक्तों को मोक्ष, समृद्धि और पापों से मुक्ति दिलाता है। निर्जला एकादशी का महत्व Importance of Nirjala Ekadashi निर्जला एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है। ये व्रत न केवल भक्तों के शारीरिक और मानसिक शुद्धिकरण में मदद करता है, बल्कि ये भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का भी सशक्त माध्यम है। निर्जला एकादशी की कथा:Story of Nirjala Ekadashi निर्जला एकादशी की कथा महाभारत के पांडव भाई भीम से जुड़ी है, इसलिए इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भीम भोजन के अत्यधिक शौकीन थे और सभी एकादशियों का व्रत रखने में असमर्थ थे, जबकि उनके भाई और द्रौपदी नियमित रूप से एकादशी व्रत रखते थे। भीम को चिंता थी कि वे भगवान विष्णु का अपमान कर रहे हैं। तब उन्होंने ऋषि वेदव्यास से मार्गदर्शन मांगा। वेदव्यास ने उन्हें सलाह दी कि वे ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला व्रत रखें, जिसका पुण्य सभी एकादशियों के बराबर है। भीम ने इस व्रत को पूर्ण भक्ति के साथ रखा और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त की। तभी से ये व्रत भीमसेनी एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। निर्जला एकादशी पूजा-विधि:Nirjala Ekadashi puja method पूजा प्रक्रिया Nirjala Ekadashi Puja Process व्रत के नियम और सावधानियां Rules and precautions for Nirjala Ekadashi fast क्या करें What to do क्या न करें what not to do

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Sapne Me Chudiya Dekhna:सपने में चूड़ियां देखना शुभ या अशुभ? जानिए असली मतलब !

Sapne me Chudiya Dekhna कैसा माना जाता है यह सवाल आपके मन में अवश्य ही आ रहा होगा क्योंकि अगर आपने भी इस तरीके का कोई सपना देखा है तो आपके मन में की तरह-तरह के सवाल आ रहे होंगे जिससे आप भी परेशान होंगे तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आपको अपने सपने से परेशान होने की कोई भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि हर एक सपना का कोई ना कोई अर्थ होता है और हो सकता है कि आपके द्वारा देखा गया सपना शुभ हो।  अगर आपने भी अपने सपने में चूड़ियां देखी है Sapne Me Chudiya Dekhna तो जरूर से आपके मन में भी यह सवाल आ रहा होगा की आपके ऐसा सपना क्यों देखा और इस सपने का क्या अर्थ होगा तो अब आपको इन सब सवालों से परेशान होने की आवश्यकता नही है।  Sapne Me Chudiya Dekhna:सपने में चूड़ियां देखना शुभ या अशुभ Sapne me Chudi Tutna ( सपने में चूड़ी टूटने का मतलब क्या होता है? ) अगर आपने अपने सपने में चूड़ियां देखी है तब तो यह सपना शुभ है लेकिन अगर आपने अपने सपने में चूड़ी टूटते हुए देखी है तो आप भी सोच रहे होंगे की चूड़ी टूटने का मतलब क्या होता है? Sapne Me Chudiya Dekhna तो आपको बता दे की इसके अर्थ होता है की आने वाले समय में आपको मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है और आपको और आपके परिवार में नकारात्मक ऊर्जा बनेगी जिससे आपको सावधान रहना चाहिए। सपने में कांच की चूड़ियां देखना Sapne mein kanch ki chudiyan dekhna सपने में कांच की चूड़ियां देखना : सपने में कांच की चूड़ियां देखना बहुत ही शुभ होता है। कुंवारी लड़की के द्वारा और शादीशुदा लड़की के द्वारा देखी गई सपने में कांच की चूड़ियां सुहाग की निशानी मानी जाती है। कुंवारी लड़की सपने में कांच की चूड़ियां देखी है तब इसका मतलब होता है कि जल्द ही उसकी शादी होने वाली है और उसकी कोई अच्छा पार्टनर मिलने वाला है। यदि शादीशुदा महिला सपने में कांच की चूड़ियां देखी है तब इसका मतलब होता है Sapne Me Chudiya Dekhna कि उसे महिला के जीवनसाथी के साथ प्रेम संबंध और ज्यादा गहरी होने वाले हैं और उसका पार्टनर उसे भविष्य में बहुत ज्यादा प्यार करेगा । सपने में चूड़ी खरीदने का मतलब Sapne mein chudi kharidne ka matlab सपने में चूड़ी खरीदने का मतलब : सपने में चूड़ी देखने वाला सपना प्रेम संबंधों की और इशारा और संकेत करता है । कुंवारी लड़की यदि सपने में चूड़ी खरीदने का सपना देखते हैं तब यह सपना बताता है कि जल्द ही कुछ लड़की की सफाई होने वाली है और उसको अच्छा जीवनसाथी मिलने वाला है । यदि कोई शादीशुदा महिला सपने में चूड़ी खरीदने का सपना देखते हैं तब यह सपना बताता है Sapne Me Chudiya Dekhna कि उसे महिला के संबंध पार्टनर के साथ अच्छे रहने वाले हैं । सपने में हरे रंग की चूड़ियां देखना Sapne mein hare rang ki chudiyan dekhna सपने में हरे रंग की चूड़ियां देखना : इस सपने का मतलब होता है कि भविष्य में आपके पार्टनर के साथ संबंध बहुत ही अच्छे रहने वाले हैं और आपका पार्टनर आपसे बहुत ही अधिक प्यार और प्रेम करेगा। सपने में हरे रंग की चूड़ियां देखना इस बात की ओर संकेत करता है कि आपके और आपके पार्टनर के बीच रिश्ता अच्छा रहने वाला है और दोनों की सोच भी सकारात्मक रहेगी । सपने में हरी चूड़ी देखने का मतलब Sapne mein Hari chudi dekhne ka matlab Sapne Me Chudiya Dekhna सपने में हरी चूड़ी देखना प्यार में बढ़ोतरी की ओर संकेत करता है। जिस भी महिला को सपने में हरी चूड़ी दिखाई देती है उसे महिला को उसके पार्टनर से भरपूर प्यार मिलता है और सहयोग भी मिलता है । सपने में हरी चूड़ी दिखाई देने का मतलब होता है कि उसे महिला को पति से इज्जत मान सम्मान और प्यार मिलेगा । सपने में हरी चूड़ी देखने का मतलब बहुत ही सौभाग्य की बात होती है। ऐसा सपना उन्हीं खास लोगों को आता है। जिनकी किस्मत चमकने वाली होती है। सपने में हरी चूड़ी देखने वाले व्यक्ति को जल्दी बहुत फायदा होने वाला है, हो सकता है। Sapne Me Chudiya Dekhna उसके व्यापार में उसे कोई बहुत बड़ी डील मिलने वाली हो या इस सपने का मतलब यह भी होता है, कि आपको कहीं से धन की प्राप्ति होने वाली है। अगर कुंवारी लड़कियां विवाहित महिला सपने में हरी चूड़ी देखते है। इसका मतलब उन्हें बहुत ही अच्छा पति मिलने वाला है या उनके पति उनसे बहुत प्रेम करता है। तभी उनको यह सपना आता है। सपने में चूड़ी पहनना कैसा होता है sapne mein chudi pahnana kaisa hota hai सपने में चूड़ी पहनना बहुत ही शुभ होता है। सपने में चूड़ी पहनने का मतलब होता है कि जल्द ही आप मांगलिक होने वाले हैं। इस सपने का अर्थ और मतलब होता है कि जल्द ही आपकी सगाई और शादी होने वाली है Sapne Me Chudiya Dekhna और आपको अच्छा रिश्ता मिलाने वाला है। सपने में चूड़ी पहनना इस बात की और संकेत करता है कि आपकी सगाई का रिश्ता आ सकता है या फिर आपकी शादी का शुगुन आ सकता है। सपने में हरी चूड़ी पहनना sapne mein Hari chudi pahnana सपने में हरी चूड़ी पहनना अच्छा सपना माना जाता है। इसका मतलब यह होता है, कि जो महिला सपने में हरी चूड़ी देख पहनने का सपना देखता है इसका मतलब यह होता है, कि उसमें लड़की किस्मत बदलने वाली है। वह बहुत ही भाग्यशाली लेना है, Sapne Me Chudiya Dekhna क्योंकि किसी विवाहित महिला के लिए सपने में हरी चूड़ियां पहनने का मतलब पति पत्नी के बीच प्रेम का बढना होता है। इसके अलावा अगर कुंवारी लड़की भी सपने में हरी चूड़ियां पहनने का सपना देखती है, तो यह बहुत ही भाग्यशाली सपना होता है। सपने में लाल रंग की चूड़ियां देखना sapne mein Lal rang ki chudiyan dekhna सपने में लाल रंग की चूड़ियां देखना : लाल रंग की चूड़ियां सुहाग का प्रतीक होती है। Sapne Me Chudiya Dekhna कुंवारी लड़की को सपने में लाल रंग की चूड़ियां दिखाई

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Satyanarayan Vrat 2025 Dates:साल 2025 में कब-कब रखा जाएगा सत्यनारायण व्रत? जानें इस व्रत का महत्व और पूजा विधि

Satyanarayan Vrat Date 2025: सत्यनारायण भगवान का व्रत पूर्णिमा के दिन रखा जाता है। जनवरी से दिसंबर तक सत्यनारायण व्रत की तिथियां। साथ में जानेंगे कैसें करें सत्यनारायण पूजा (Satyanarayan puja) Satyanarayan Vrat 2025: भगवान सत्यनारायण श्री हरी विष्णु का ही रूप हैं। सत्यनारयण भगवान की पूजा कभी भी और किसी भी दिन कर सकते हैं। लेकिन पूर्णिमा के दिन सत्यनारयण भगवान का पूजन करना अति शुभ माना जाता है। लक्ष्मीपति श्री हरी विष्णु का यह रूप सत्य का अवतार माना गया है। भक्त इस दिन उपवास करते हैं और प्रातः काल व संध्याकाल में Satyanarayan Vrat सत्यनारयण भगवान की पूजा करते हैं। सत्यनारायण भगवान का पूजन करने से भगवान उनके समस्त कष्ट हर लेते हैं और उनको आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यहाँ जानेगे साल 2025 में सत्यनारयण भगवान पूजा की समस्त तिथियों के बारे में।  सत्यनारायण की कथा क्यों की जाती है, जानिए व्रत पूजा, महत्व और मंत्र पूर्णिमा व्रत कब है? | Purnima Vrat Puja Muhurat? सत्यनारायण व्रत कब है? – मंगलवार, 10 जून 2025 | ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा पूर्णिमा प्रारंभ – 10 जून 2025 11:35 AMपूर्णिमा समाप्त – 11 जून 2025 1:13 PMपूर्णिमा चन्द्रोदय – 6:45 PM Satyanarayan Vrat 2025 Dates:साल 2025 में श्री सत्यनारायण पूजा की डेट 13 जनवरी 2025, सोमवार (पौष, शुक्ल पूर्णिमा) 12 फरवरी 2025, बुधवार (माघ, शुक्ल पूर्णिमा) 13 मार्च 2025, बृहस्पतिवार (फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा) 12 अप्रैल 2025, शनिवार (चैत्र, शुक्ल पूर्णिमा) 12 मई 2025, सोमवार (वैशाख, शुक्ल पूर्णिमा) 10 जून 2025, मंगलवार (ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा) 10 जुलाई 2025, बृहस्पतिवार (आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा) 09 अगस्त 2025, शनिवार (श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा) 07 सितम्बर 2025, रविवार (भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा) 06 अक्टूबर 2025, सोमवार (आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा) 05 नवम्बर 2025, बुधवार (कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा) 04 दिसम्बर 2025, बृहस्पतिवार (मार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा) सत्यनारायण पूजा और व्रत का महत्व Importance of Satyanarayan Puja and fasting सत्यनारायण पूजा और व्रत का महत्व वैदिक ज्योतिष के अनुसार सत्यनारायण व्रत रखने से Satyanarayan Vrat भगवान विष्णु को स्वास्थ्य, समृद्धि, धन और वैभव की प्राप्ति होती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि इस दिन व्रत करने और पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ सत्यनारायण कथा का पाठ करने से सभी संकट दूर हो जाते हैं। सत्यनारायण व्रत की पूजा विधि Satyanarayan Puja Vidhi Satyanarayan Vrat शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है Satyanarayan Vrat ऐसा माना जाता है। पूजा सुबह के साथ-साथ शाम को भी की जा सकती है और शाम को सत्यनारायण पूजा करना अधिक उपयुक्त माना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।इसके बाद सत्यनारायण की मूर्ति को स्थापित करें और उसके चारों ओर केले के पत्ते बांध दें।पंचामृतम (दूध, शहद, घी/मक्खन, दही और चीनी का मिश्रण) का उपयोग देवता को साफ करने के लिए किया जाता है, Satyanarayan Vrat आमतौर पर शालिग्राम, जो महा विष्णु का दिव्य पत्थर है।चौकी पर जल से भरा कलश रखें और देसी घी का दीपक जलाएं।अब सत्यनारायण की पूजा और कथा करें।भुने हुए आटे में शक्कर मिलाकर भगवान को अर्पित करें।प्रसाद में तुलसी जरूर डालें।पूजा के बाद प्रसाद बांटें। पूजा एक आरती के साथ समाप्त होती है, जिसमें भगवान की छवि या देवता के चारों ओर कपूर से जलाई गई एक छोटी सी आग की परिक्रमा होती है। आरती के बाद व्रतियों को पंचामृत और प्रसाद ग्रहण करना होता है। Satyanarayan Vrat व्रती पंचामृत से व्रत तोड़ने के बाद प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।

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