Papankusha Ekadashi 2025

Papankusha Ekadashi 2025 Date And Time: कब मनाई जाएगी इस साल पापांकुशा एकादशी? नोट कर लें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Papankusha Ekadashi 2025 Date: पापांकुशा एकादशी, जिसे पुण्य व्रत या शरीर एकादशी भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में विशेष स्थान रखती है। यह एकादशी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन भक्त अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। पापांकुशा एकादशी का

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Shradh or pitra paksha

Shradh or pitra paksha:श्राद्ध के अंतिम दिन क्या करें और क्या ना करें…

Shradh or pitra paksha: हर साल पितृ पक्ष के दौरान, लोग अपने स्वर्गवासी पितरों की आत्मा की शांति और उनकी तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं, ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकें. ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने पूर्वजों की संपत्ति का उपभोग तो करते हैं, लेकिन उनका श्राद्ध तर्पण नहीं करते, उन्हें

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Maa Kushmanda

Maa Kushmanda: मंत्र, प्रार्थना, स्तुति, ध्यान, स्तोत्र, कवच और आरती

Maa Kushmanda को शक्ति का एक रूप माना जाता है और उन्हें इस ब्रह्मांड को बनाने वाली के रूप में जाना जाता है। वह थी जिन्होंने अंधेरे को दूर किया और तीन दिव्य देवी और अन्य देवताओं को भी बनाया। कल्प (कल्पपंथ) के अंत के बाद, पराशक्ति ने देवी कुष्मांडा का रूप धारण किया और ब्रह्मांड

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Maa Kushmanda

Maa Kushmanda Worship Mantra:नवरात्रि का चौथा दिन: पढ़ें मां कूष्मांडा की पूजन विधि, श्लोक, मंत्र एवं भोग

Maa Kushmanda:हर साल चैत्र नवरात्रि के नौ पावन दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखते हैं. इन दिनों में मां भवानी के विभिन्न रूपों की आराधना करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन की तमाम बाधाएँ और परेशानियाँ दूर होती हैं. नवरात्रि का चौथा दिन विशेष रूप से मां दुर्गा के

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Brahmakrita Ganapativandana:ब्रह्माकृता गणपतिवन्दना

Brahmakrita Ganapativandana:ब्रह्माकृता गणपतिवन्दना (शिवरहस्यान्तर्गते ईशाख्ये) ब्रह्मोवाच । देवीसुतं करधृताङ्कुशपाशदीप्तं विघ्नाद्रिनाशकवरोदरनागबन्धम् । शुण्डाधृतोरुवरमोदकविघ्नसङ्घ- सन्नोदकं प्रणमताद्य गणाधिनाथम् ॥ २५॥ जगत्त्रयेऽपि सर्वत्र त्वं हि विश्वगणेश्वरः । सम्पूज्यः सर्वकार्येषु निर्विघ्नार्थं गजानन ॥ २६॥ त्वामादौ सर्वकार्येषु पूजयन्तु सुरासुराः । अनभ्यर्चयतां विघ्नं भवत्येव पदे पदे ॥ २७॥ ॥ इति शिवरहस्यान्तर्गते ब्रह्माकृता गणपतिवन्दना सम्पूर्णा ॥ – ॥ श्रीशिवरहस्यम् । ईशाख्यः द्वादशमांशः ।

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Ayudha Puja

Ayudha Puja 2025 Date: आयुध पूजा 2025: तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्त – अपनी रोज़मर्रा की चीज़ों का करें सम्मान

Ayudha Puja 2025 Date And Time: आयुध पूजा, जिसे शस्त्र पूजा या अस्त्र पूजा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो हमारे दैनिक जीवन और पेशेवर कार्यों में उपयोग होने वाले उपकरणों, औजारों और हथियारों का सम्मान करता है। यह आभार व्यक्त करने का एक सुंदर तरीका

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Dussehra 2025

Dussehra 2025 Date And Time: दशहरा 2025: कब है विजयादशमी? जानें तिथि, रावण दहन और शस्त्र पूजन का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व !

Dussehra 2025 Date: दशहरा, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। हर साल अश्विन माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार, हमें भगवान राम की रावण पर विजय

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lalitAhRidaya stotraM

ShrI lalitAhRidaya stotraM: श्रीललिताहृदयस्तोत्रम्

shrI lalitAhRidaya stotraM: श्रीललिताहृदयस्तोत्रम् अथश्रीललिताहृदयस्तोत्रम् ॥ श्रीललिताम्बिकायै नमः ।देव्युवाच ।देवदेव महादेव सच्चिदानन्दविग्रहा ।सुन्दर्याहृदयं स्तोत्रं परं कौतूहलं विभो ॥ १॥ ईश्वरौवाच । साधु साधुत्वया प्राज्ञे लोकानुग्रहकारकम् ।रहस्यमपिवक्ष्यामि सावधानमनाःश‍ृणु ॥ २॥ श्रीविद्यां जगतां धात्रीं सर्ग्गस्थितिलयेश्वरीम् ।नमामिललितां नित्यां भक्तानामिष्टदायिनीम् ॥ ३॥ बिन्दुत्रिकोणसम्युक्तं वसुकोणसमन्वितम् ।दशकोणद्वयोपेतं चतुर्द्दश समन्वितम् ॥ ४॥ दलाष्टकेसरोपेतं दलषोडशकान्वितम् ।वृत्तत्रययान्वितम्भूमिसदनत्रयभूषितम् ॥ ५॥ नमामि ललिताचक्रं भक्तानामिष्टदायकम् ।अमृताम्भोनिधिन्तत्र रत्नद्वीपं

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Shri Lalita Kavacha:श्रीललिताकवचम्

Shri Lalita Kavacha:श्रीललिताकवचम् । नारदपुराणान्तर्गते । सनत्कुमार उवाच-अथ ते कवचं देव्या वक्ष्ये नवरतात्मकम् ।येन देवासुरनरजयी स्यात्साधकः सदा ॥ १॥ सर्वतः सर्वदाऽऽत्मानं ललिता पातु सर्वगा ।कामेशी पुरतः पातु भगमाली त्वनन्तरम् ॥ २॥ दिशं पातु तथा दक्षपार्श्वं मे पातु सर्वदा ।नित्यक्लिन्नाथ भेरुण्डा दिशं मे पातु कौणपीम् ॥ ३॥ तथैव पश्चिमं भागं रक्षताद्वह्निवासिनी ।महावज्रेश्वरी नित्या वायव्ये मां सदावतु

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Lalitadevi Kavacham: ललितादेवीकवचम्

Lalitadevi Kavacham: ललितादेवीकवचम् अथ ते कवचं देव्या वक्ष्ये नवरतात्मकम् ।येन देवासुरनरजयी स्यात्साधकः सदा ॥ ८९-२३॥ सर्वतः सर्वदाऽऽत्मानं ललिता पातु सर्वगा ।कामेशी पुरतः पातु भगमाली त्वनन्तरम् ॥ ८९-२४॥ दिशं पातु तथा दक्षपार्श्वं मे पातु सर्वदा ।नित्यक्लिन्नाथ भेरुण्डा दिशं मे पातु कौणपीम् ॥ ८९-२५॥ तथैव पश्चिमं भागं रक्षताद्वह्निवासिनी ।महावज्रेश्वरी नित्या वायव्ये मां सदावतु ॥ ८९-२६॥ वामपार्श्वं सदा

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Maa Chandraghanta

Maa Chandraghanta:मां चंद्रघंटा का मंत्र, प्रार्थना, स्तुति, ध्यान, स्तोत्र, कवच और आरती

Maa Chandraghanta देवी पार्वती का विवाहित रूप हैं। भगवान शिव से विवाह के बाद देवी महागौरी ने अपने माथे को आधा चंद्र से सजाना शुरू किया और जिसके कारण देवी पार्वती को देवी चंद्रघंटा के नाम से जाना जाने लगा। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है

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Maa Chandraghanta

Navratri 3rd day Maa Chandraghanta puja vidhi aarti: नवरात्रि के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, नोट कर लें पूजन विधि और आरती

Maa Chandraghanta puja vidhi: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है और इसका तीसरा दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप, मां चंद्रघंटा को समर्पित है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और ममतामयी है, जो अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और शांति प्रदान करता है। इस बार द्वितीया और

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