Sawan Shivratri

Sawan Shivratri 2025 कब है, सावन मासिक शिवरात्रि जानें व्रत की तिथि और महत्व

Sawan Shivratri 2025: सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ अवसर है. यह दिन विशेष व्रत, पूजा और भक्ति से जुड़ा होता है, जो मनोकामनाओं की पूर्ति और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक माना जाता है. जानें इस बार शिवरात्रि की तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्त. Sawan Shivratri 2025:सावन मासिक शिवरात्रि 2025: तिथि और समय निशीथ काल में पूजा का महत्व Sawan Shivratri 2025 पूजा का शुभ समय (निशीथ काल): रात 12:07 से 12:48 बजे तक इसी समय शिवलिंग पर जलाभिषेक, पंचामृत, बेलपत्र, भस्म, धतूरा आदि चढ़ाकर पूजन करने से विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है. यह काल शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. इस बार बन रहे हैं विशेष योग कामिका एकादशी 2025: कब और कैसे करें व्रत का पारण, जानें सही समय और महत्व सावन शिवरात्रि व्रत के लाभ 23 जुलाई 2025: पंचांग अनुसार प्रमुख समय Sawan Shivratri 2025 सावन मासिक शिवरात्रि केवल एक व्रत नहीं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक साधना और शिव कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर है. इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत, जप, दान और पूजन करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शुभता और आत्मिक शांति का संचार होता है.

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Vrat Katha

Kamika Ekadashi 2025 Vrat Katha: कामिका एकादशी व्रत कथा

Kamika Ekadashi 2025 Vrat Katha : कामिका एकादशी का व्रत हर वर्ष सावन मास की एकादशी तिथि को रखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त श्रद्धा पूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. चूंकि एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन का विशेष महत्व होता है. आइए जानते हैं कामिका एकादशी व्रत 2025 के नियम क्या हैं. कामिका एकादशी व्रत कथा (Kamika Ekadshi Vrat Katha) कुंती पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण से कहा कि आपने देवशयनी एकादशी और चातुर्मास के महत्व के बारे में बता दिया है। Vrat Katha अब कृपया श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी के बारे में बताएं। श्रीकृष्ण ने कहा कि हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की कथा एक समय स्वयं ब्रह्माजी भी देवर्षि नारद से कह चुके है, अतः मैं भी तुमसे वहीं कहता हूं। नारदजी ने ब्रह्माजी से श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की इच्छा जताई थी। उस एकादशी का नाम, विधि और माहात्म्य जानना चाहा। ब्रह्मा ने कहा- “हे नारद! श्रावण मास की Vrat Katha कृष्ण एकादशी का नाम कामिका एकादशी है। इस एकादशी व्रत को सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस तिथि पर शंख, चक्र एवं गदाधारी श्रीविष्णुजी का पूजन होता है। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो। गंगा, काशी, नैमिशारण्य और पुष्कर में स्नान करने से जो फल मिलता है, वह फल विष्णु भगवान के पूजन से भी मिलता है। सूर्य व चंद्र ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र और काशी में स्नान करने से, भूमि दान करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में आने के समय गोदावरी और गंडकी नदी में स्नान से भी जो फल प्राप्त नहीं होता, वह प्रभु भक्ति और पूजन से प्राप्त होता है। पाप से भयभीत मनुष्यों को Vrat Katha कामिका एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। एकादशी व्रत से बढ़कर पापों के नाशों का कोई उपाय नहीं है। स्वयं प्रभु ने कहा है कि कामिका व्रत से कोई भी जीव कुयोनि में जन्म नहीं लेता। जो इस एकादशी पर श्रद्धा-भक्ति से भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पण करते हैं, वे इस समस्त पापों से दूर रहते हैं। हे नारद! मैं स्वयं श्री हरी की प्रिय तुलसी को सदैव नमस्कार करता हूं। तुलसी के दर्शन मात्र से ही मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और इसके स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है।” व्रत के पीछे क्या है कथा: एक कथा के अनुसार प्राचीन काल में किसी गांव में एक ठाकुर जी थे। क्रोधी ठाकुर का एक ब्राह्मण से झगडा़ हो गया और क्रोध में आकर ठाकुर से ब्राह्मण का खून हो जाता है। अत: अपने अपराध की क्षमा याचना हेतु ब्राह्मण की क्रिया उसने करनी चाही, परंतु पंडितों ने उसे क्रिया में शामिल होने से मना कर दिया और वह ब्रह्म हत्या का दोषी बन गया। Vrat Katha परिणामस्वरूप ब्राह्मणों ने भोजन करने से इंकार कर दिया। तब उन्होंने एक मुनि से निवेदन किया कि- हे भगवान, मेरा पाप कैसे दूर हो सकता है, इस पर मुनि ने उसे कामिका एकादशी व्रत करने की प्रेरणा दी। ठाकुर ने वैसा ही किया जैसा मुनि ने उसे करने को कहा था। जब रात्रि में भगवान की मूर्ति के पास वह शयन कर रहा था, तभी उसे स्वप्न में प्रभु दर्शन देते हैं और उसके पापों को दूर करके उसे क्षमा दान देते हैं। कामिका एकादशी Vrat Katha की रात्रि को दीपदान तथा जागरण के फल का माहात्म्य चित्रगुप्त भी नहीं कह सकते। जो इस एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पितर स्वर्गलोक में अमृतपान करते हैं तथा जो घी या तेल का दीपक जलाते हैं, वे सौ करोड़ दीपकों से प्रकाशित होकर सूर्य लोक को जाते हैं। ब्रह्माजी कहते हैं कि हे नारद! ब्रह्महत्या तथा भ्रूण हत्या आदि पापों को नष्ट करने वाली इस कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य को यत्न के साथ करना चाहिए। कामिका एकादशी के व्रत का माहात्म्य श्रद्धा से सुनने और पढ़ने वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है।

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Kamika Ekadashi 2025: Online Puja Booking, Vrat Date, and Significance (Live Puja for NRIs)

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एकादशी

कामिका एकादशी 2025: कब और कैसे करें व्रत का पारण, जानें सही समय और महत्व

कामिका एकादशी 2025 कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय और व्रत का महत्व परिचय:हिंदू धर्म में व्रत का अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और आत्मशुद्धि, मोक्ष प्राप्ति, तथा पापों के नाश का माध्यम माना जाता है। सावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली विशेष रूप से पुण्यदायी मानी गई है। 📅 कामिका एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त: 📝 नोट: व्रत का पारण द्वादशी तिथि में हरि वासर समाप्त होने के बाद करना अनिवार्य है। 🌟 कामिका एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व: 🕉️ कामिका एकादशी व्रत और पूजा विधि: 🔹 प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।🔹 भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं।🔹 घी का दीपक जलाएं और तुलसी दल अर्पित करें।🔹 “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें।🔹 विष्णु सहस्रनाम और व्रत कथा का पाठ करें।🔹 फल, मेवा और सात्विक भोग अर्पित करें।🔹 शाम को भजन-कीर्तन और आरती करें।🔹 पूर्ण उपवास रखें या फलाहार लें। 🍚 कामिका एकादशी व्रत पारण विधि (22 जुलाई 2025): ✅ प्रातः काल स्नान करें✅ भगवान विष्णु की पूजा करें✅ सात्विक भोग अर्पित करें✅ ब्राह्मण को भोजन, वस्त्र और दक्षिणा दान दें✅ स्वयं सात्विक भोजन (जैसे खिचड़ी, फल, दूध आदि) ग्रहण करें 🚫 हरि वासर (द्वादशी का प्रथम चौथाई भाग) के दौरान पारण वर्जित है। 📖 कामिका एकादशी व्रत कथा (संक्षिप्त): पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक क्रोधी व्यक्ति ने गलती से एक ब्राह्मण की हत्या कर दी। पश्चाताप के बाद, एक ऋषि ने उसे कामिका व्रत करने की सलाह दी। उसने श्रद्धा से व्रत रखा और भगवान विष्णु की कृपा से अपने पापों से मुक्त हो गया। 👉 यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चे मन से किया गया व्रत हर पाप का नाश कर सकता है। ✅ कामिका एकादशी पर करें ये कार्य: ❌ कामिका एकादशी पर न करें ये कार्य: ✨ निष्कर्ष: कामिका 2025 का व्रत 21 जुलाई को रखा जाएगा और पारण 22 जुलाई की सुबह किया जाएगा। यह व्रत पापों से मुक्ति, मोक्ष की प्राप्ति और जीवन में सुख-समृद्धि लाने का सशक्त साधन है। इस पर भगवान विष्णु की भक्ति में लीन होकर व्रत व पूजा करें और अपना जीवन आध्यात्मिक ऊँचाइयों की ओर अग्रसर करें। 🕉️ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

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Sawan Bael Patra: सावन में बेलपत्र चढ़ाने का महत्व और नियम

Sawan Bael Patra: भोलेनाथ की पूजा में बेलपत्र का महत्व हर अनुष्ठान में है क्योंकि इसके बिना शिवजी की पूजा पूरी नहीं होती। मान्यता है कि बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाने से महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है जैसे कि बेलपत्र की तीनों पत्तियों पर चंदन लगाना और सूखे पत्ते नहीं चढ़ाना। Sawan Right Way Of Offering Bael Patra: सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय है. इस महीने में कई ऐसी चीजें हैं, जो भगवान शिव को जरूर अर्पण करनी चाहिए. मान्यता है कि इससे प्रभु बेहद खुश होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं जरूर पूरी करते हैं. इसके साथ ही घर में सुख-समृद्धि की भी बढ़ोतरी होती है. वहीं, सावन के महीने में बेलपत्र का भी खास महत्व होता है, क्योंकि बेलपत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है. बेलपत्र दूर करता है सारी परेशानियां:Belpatra removes all the troubles शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि अगर सावन के महीने में, विशेषकर सोमवार के दिन, एक भी शुद्ध और पवित्र बेलपत्र विधि-विधान के साथ Sawan Bael Patra भगवान शिव के शिवलिंग पर अर्पण कर दिया जाए, तो भक्त के जीवन में रोग, दोष, कष्ट, दुख और काल सब खत्म हो जाता है. लेकिन बेलपत्र चढ़ाने के भी कुछ खास नियम होते हैं. क्या हैं वे नियम? जानते हैं…… Sawan Bael Patra: बेलपत्र की तीनों पत्तियों पर लगाएं चंदन बेल पत्र की पत्तियां त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। यह भगवान शिव के त्रिशूल का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। यह त्रिगुण यानी सत्व, रजस और तमस का भी प्रतीक हैं। ये तीन अवस्थाओं वात, पित्त और कफ प्रकृति को भी दर्शाती हैं।  इसीलिए शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला बेलपत्र हमेशा तीन पत्ती वाला होना चाहिए। टूटी हुई, कटी-फटी और खंडित बेलपत्र को शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए। पूर्ण और अक्षत बेलपत्र ही भगवान शिव को प्रिय है। इसे चढ़ाते समय तीनों पत्तियों पर चंदन जरूर लगाएं।  सूखे पत्ते न चढ़ाएं : Do not offer dry leaves हमेशा ताजा और स्वच्छ बेलपत्र ही भोलेनाथ को चढ़ाना चाहिए। सूखा या मुरझाया Sawan Bael Patra बेलपत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। यदि ताजा बेलपत्र नहीं मिले, तो शिवलिंग पर चढ़ाए गए बेलपत्र को उठा लें। इसके बाद उसे धोकर फिर से शिव पूजन में प्रयोग कर सकते हैं।  दरअसल, विधान है कि बेलपत्र कभी निर्माल्य नहीं होता है। शास्त्रों के अनुसार, बेलपत्र को 6 महीने तक बासी नहीं माना जाता है। बशर्ते वह सूखा न हो और मुरझा न गया हो।  क्या हैं बेलपत्र चढ़ाने के खास नियम ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि बेलपत्र चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ बहुत खुश होते हैं. लेकिन Sawan Bael Patra बेलपत्र नियमपूर्वक चढ़ाना चाहिए, जो इस प्रकार हैं. कटा-फटा न हो बेलपत्र बेलपत्र हमेशा साफ-सुथरा ही भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए. कटा-फटा या मुरझाया हुआ बेलपत्र भूलकर भी नहीं चढ़ाना चाहिए. तीन दलों का हो भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर हमेशा तीन दलों वाला ही Sawan Bael Patra बेलपत्र चढ़ाना चाहिए. तीन दल वाला बेलपत्र त्रिदेव का प्रतीक हैं- ब्रह्मा, विष्णु और महेश. वहीं, अगर पांच दलों वाला बेलपत्र मिल जाए तो वह बहुत शुभ होता है. बेलपत्र की डंडी जलहरी की तरफ रखें लोग जैसे-तैसे शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पण कर देते हैं. इससे आपकी पूजा व्यर्थ हो सकती है. शिवलिंग पर बेलपत्र हमेशा नियमपूर्वक अर्पण करें, जैसे बेलपत्र की जो डंडी होती है, वह जलहरी की तरफ रहनी चाहिए और जो पत्ता होता है यानी चिकना भाग, वह शिवलिंग के मस्तक पर होना चाहिए. राम नाम लिखा होना चाहिए भगवान भोलेनाथ को राम नाम बेहद प्रिय है. अगर आप बेलपत्र पर राम नाम लिखकर शिवलिंग पर अर्पण करते हैं, तो दोगुना फल मिलता है और आपकी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं. इन नियमों का ध्यान रखकर बेलपत्र चढ़ाने से भक्त की सारी समस्याएं खत्म होने की मान्यता है.

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Sawan Food: सावन व्रत में क्या खाएं, क्या न खाएं ? पूरी सूची देखें

Sawan Food: सावन के महीने की शुरुआत हो चुकी है. इस पूरे माह भोलेनाथ की भक्ति की जाती है. लेकिन सावन के महीने में कुछ चीजों को खाने की मनाही होती है. Sawan Somvar Vrat: सावन सोमवार व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है, खासकर खान-पान से जुड़ी बातों का। इस दिन कुछ चीजों का सेवन वर्जित माना गया है, जिनका पालन न करने से व्रत का फल अधूरा रह सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि सावन सोमवार व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं… सावन का महीना भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे पावन अवसर माना जाता है। Sawan Food इस माह में भोलेनाथ के साथ-साथ माता पार्वती की उपासना की जाती है। विशेष रूप से सावन सोमवार का व्रत बेहद कल्याणकारी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत रखने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। हालांकि, इस व्रत को करते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। अगर इन नियमों का पालन न किया जाए, तो इससे व्रत का पूर्ण फल नहीं मिल पाता है। ऐसे में आइए जानते हैं सोमवार व्रत के दौरान किन चीजों का सेवन वर्जित माना गया है और किन चीजों का सेवन करना चाहिए। Sawan Food सावन सोमवार व्रत में क्या खाना चाहिए- (What should be eaten during the Sawan Monday fast) 1. सात्विक भोजन- Sawan Food सावन सोमवार व्रत के दौरान फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा जैसी चीजें खानी चाहिए. यह भगवान शिव को भी अर्पित की जाती हैं. इसी के साथ यह शरीर को एनर्जी भी देती है. 2. फल और मेवे-  ताजे फल जैसे केला, सेब, अंगूर और सूखे मेवे जैसे बादाम, अखरोट आदि व्रत में खाए जाते है.  4. बेलपत्र- शिव जी की पूजा में बेलपत्र को खासतौर पर चढ़ाया जाता है. आप इसे प्रसाद के तौर पर खा भी सकते हैं.  सावन सोमवार व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए- (What should not be eaten during the Sawan Monday fast) 1. प्याज-लहसुन (Onion Garlic) सावन के महीने में आपको प्याज और लहसुन खाने से परहेज करना चाहिए. यह तामसिक भोजन माने जाते हैं इसलिए व्रत के दौरान इन्हें नहीं खाया जाता है. इसी के साथ दही, छाछ, कढ़ी जैसी ठंडी चीजों के सेवन से भी परहेज करना चाहिए. 2. मांस-मछली और अंडा (Meat and Egg) व्रत और पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन से परहेज करना चाहिए. पूरे एक महीने तक मांसाहारी भोजन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए और शुद्ध और सात्विक भोजन और करना चाहिए. 3. नमक (Salt) Sawan Food सावन सोमवार व्रत में सादे नमक का उपयोग नहीं किया जाता है. केवल सेंधा नमक ही खाया जाता है क्योंकि इस नमक को ही शुद्ध माना जाता है. 4. शराब- (Alcohol) सावन के दिनों और सोमवार व्रत शराब का सेवन नहीं करना चाहिए. इसका सेवन इन दिनों वर्जित माना जाता है.

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Masik Shivratri 2025: मासिक शिवरात्रि के दिन जरूर करें ये उपाय, बिना रुकावट पूरा होगा हर काम

Masik Shivratri 2025: मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और विधिपूर्वक शिव पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। May Masik Shivratri 2025 Upay: हर माह आने वाली शिवरात्रि का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अति शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना के साथ-साथ अन्न, वस्त्र और अन्य जरूरतमंद चीजों का दान करते हैं। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और विधिपूर्वक शिव पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। Masik Shivratri puja Mein Jarur kare ye kaam: पूजा में जरूर करें ये काम मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित करें। इसके साथ ही इस भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र का जाप 11 बार रुद्राक्ष की माला से करें। ऐसा करने से शिव जी कृपा आपके ऊपर बनी रहती है। नहीं सातएगी धन की कमी अगर आप धन संबंधी परेशानियां झेल रहे हैं, तो इसके लिए मासिक शिवरात्रि के दिन आपको शिवलिंग पर गन्ने का रस जरूर अर्पित करें। ऐसा करने से आपको अपनी स्थिति में काफी लाभ देखने को मिल सकता है। Masik Shivratri साथ ही धन लाभ के योग भी बनने लगते हैं। नहीं पड़ेगा ग्रहों का अशुभ प्रभाव मासिक शिवरात्रि के दिन आप पूजा के दौरान शिवलिंग का शहद से अभिषेक कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे जातक को अशुभ ग्रहों के प्रभाव में मुक्ति मिल सकती है। Masik Shivratri वहीं शहद का संबंध गुरु ग्रह से माना गया है, ऐसे में मासिक शिवरात्रि पर शिवलिंग का शहद से अभिषेक करने से कुंडली में देवगुरु बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है। शिव जी के मंत्र 1. ॐ नमः शिवाय 2. ॐ नमो भगवते रूद्राय 3. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात 4. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् 5. कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् । सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

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Shiva Mantra: शिव के 5 दिव्य मंत्रों का करें नियमित जाप, जीवन में आएगा सुख-शांति

Shiv Mantra: भोलेनाथ अपने अनुयायियों पर अपनी कृपा बरसाते हैं, जिससे वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं. महादेव को अत्यधिक दयालु माना जाता है, इसलिए वे केवल एक लोटा जल से ही संतुष्ट हो जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र में महादेव के कुछ अद्भुत मंत्रों का उल्लेख किया गया है. यदि इन मंत्रों का जाप नियमों के अनुसार किया जाए, तो जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है. आइए, शिवजी के चमत्कारिक मंत्रों के बारे में जानते हैं. Shiva Mantra: शिव के 5 दिव्य मंत्रों का करें नियमित जाप होगी आरोग्य की प्राप्ति 1. ॐ नमः शिवाय Shiva Mantra: यह मंत्र जीतना सरल है उतना प्रभावशाली भी माना गया है। यदि कोई साधक रोजाना इस मंत्र का जाप करता है तो उसे आरोग्य की प्राप्ति हो सकती है। दूर होगा अकाल मृत्यु का भय 2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ Shiva Mantra: यह शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र है। माना जाता है कि रोजाना इस मंत्र का जप करने से व्यक्ति की अकाल मृत्यु का भय टाला जा सकता है। साथ ही व्यक्ति की आयु भी लंबी होती है और हर प्रकार के भय से भी मुक्ति मिलती है। इस मंत्र से होगी इच्छा पूरी 3. ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः यह शिव जी का रूद्र मंत्र है। माना जाता है कि प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की हर इच्छा पूरी हो सकती है। आर्थिक स्थिति होगी मजबूत 4. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ यह शिव जी का बहुत ही प्रभावशाली मंत्र है। यदि कोई साधक रोजाना शिव जी का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप करता है तो उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। भय होगा दूर 5. ऊं पषुप्ताय नमः यह भी शिव जी का एक प्रभावशाली मंत्र है। पूजा के दौरान रोजाना इस शिव मंत्र का जाप करने से साधक को महादेव की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है।

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What Not To Eat On Ekadashi: एकादशी व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? जान लें नियम नहीं तो हो जाएगा सब व्यर्थ

What Not To Eat On Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बड़ा महत्व है। शास्त्रों के अनुसार हर माह दो एकादशी आती हैं, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल कृष्ण पक्ष में। सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए। इन दिनों कुछ चीजों को सेवन निषेध माना गया है। आइए जानें… What Not To Eat On Ekadashi: एकादशी व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं एकादशी के दिन धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा करने से जातक के लाइफ में सभी प्रकार की सुख-सुविधाएं आती है। इस व्रत के समय जातक को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए, जो बेहद अनिवार्य होते हैं। कहा जाता है कि यदि इन नियमों का पालन हो तो व्रत खंडित माना जाता है What Not To Eat On Ekadashi और जातक को लाभ की जगह हानि हो सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि एकादशी के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? What cannot be eaten during Ekadashi : एकादशी के दौरान क्या नहीं खा सकते? What Not To Eat On Ekadashi: हिंदू धर्म ग्रंथों के मुताबिक, एकादशी के दिन जातक और उसके परिवार को चावल बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए। साथ ही व्रत के दौरान किसी प्रकार अन्न और सादा नमक से जातक को परेहज करना चाहिए। इसके अलावा, किसी भी परिस्थिति में जातक को तामसिक भोजन जैसे- प्याज, लहसुन और मसूर की दाल का सेवन भी नहीं करना चाहिए। What can you eat during Ekadashi :एकादशी के दौरान क्या खा सकते? जातक व्रत के दौरान संपूर्ण फल प्राप्ति के लिए नियमों के मुताबिक, शकरकंद, कुट्टू के आटे की रोटी, दूध, दही और फल खा सकते हैं। इसके अलावा, भगवान को भोग लगाया गया पंचामृत भी ग्रहण कर सकते हैं। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Kamika Ekadashi Vrat Katha: कामिका एकादशी व्रत कथा

Ekadashi Vrat Katha Kamika Ekadashi Vrat Katha: कुंतीपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवन, आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी तथा चातुर्मास्य माहात्म्य मैंने भली प्रकार से सुना। अब कृपा करके श्रावण कृष्ण एकादशी का क्या नाम है, सो बताइए। श्रीकृष्ण भगवान कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की कथा एक समय स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद से कही थी, वही मैं तुमसे कहता हूँ। नारदजी ने ब्रह्माजी से पूछा था कि हे पितामह! श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की मेरी इच्छा है, उसका क्या नाम है? क्या विधि है और उसका माहात्म्य क्या है, सो कृपा करके कहिए। नारदजी के ये वचन सुनकर ब्रह्माजी ने कहा- हे नारद! लोकों के हित के लिए तुमने बहुत सुंदर प्रश्न किया है। श्रावण मास की कृष्ण एकादशी का नाम कामिका है। Ekadashi Vrat Katha उसके सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन शंख, चक्र, गदाधारी विष्णु भगवान का पूजन होता है, जिनके नाम श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव, मधुसूदन हैं। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो। जो फल गंगा, काशी, नैमिषारण्य और पुष्कर स्नान से मिलता है, वह विष्णु भगवान के पूजन से मिलता है। जो फल सूर्य व चंद्र ग्रहण पर कुरुक्षेत्र और काशी में स्नान करने से, समुद्र, वन सहित पृथ्वी दान करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में गोदावरी और गंडकी नदी में स्नान से भी प्राप्त नहीं होता वह भगवान विष्णु के पूजन से मिलता है। जो मनुष्य श्रावण में भगवान का पूजन करते हैं, उनसे देवता, गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं। अत: पापों से डरने वाले मनुष्यों को कामिका एकादशी का व्रत और विष्णु भगवान का पूजन अवश्यमेव करना चाहिए। Ekadashi Vrat Katha पापरूपी कीचड़ में फँसे हुए और संसाररूपी समुद्र में डूबे मनुष्यों के लिए इस एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु का पूजन अत्यंत आवश्यक है। इससे बढ़कर पापों के नाशों का कोई उपाय नहीं है। हे नारद! स्वयं भगवान ने यही कहा है कि कामिका व्रत से जीव कुयोनि को प्राप्त नहीं होता। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन भक्तिपूर्वक तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पण करते हैं, वे इस संसार के समस्त पापों से दूर रहते हैं। विष्णु भगवान रत्न, मोती, मणि तथा आभूषण आदि से इतने प्रसन्न नहीं होते जितने तुलसी दल से। Ekadashi Vrat Katha तुलसी दल पूजन का फल चार भार चाँदी और एक भार स्वर्ण के दान के बराबर होता है। हे नारद! मैं स्वयं भगवान की अतिप्रिय तुलसी को सदैव नमस्कार करता हूँ। तुलसी के पौधे को सींचने से मनुष्य की सब यातनाएँ नष्ट हो जाती हैं। दर्शन मात्र से सब पाप नष्ट हो जाते हैं और स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है। कामिका एकादशी की रात्रि को दीपदान तथा जागरण के फल का माहात्म्य चित्रगुप्त भी नहीं कह सकते। जो इस एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पितर स्वर्गलोक में अमृतपान करते हैं Ekadashi Vrat Katha तथा जो घी या तेल का दीपक जलाते हैं, वे सौ करोड़ दीपकों से प्रकाशित होकर सूर्य लोक को जाते हैं। ब्रह्माजी कहते हैं कि हे नारद! ब्रह्महत्या तथा भ्रूण हत्या आदि पापों को नष्ट करने वाली इस कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य को यत्न के साथ करना चाहिए। कामिका एकादशी के व्रत का माहात्म्य श्रद्धा से सुनने और पढ़ने वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है।

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Kamika Ekadashi 2025 Daan: कामिका एकादशी पर इन चीजों का दान करेगा धन और सुख में वृद्धि

Kamika Ekadashi: एकादशी हिन्दू धार्मिक मान्यताओं में बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह दिन पूरी तरह से इस जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को (Kamika Ekadashi) कामिका एकादशी कहा जाता है। श्रावण मास में श्री हरि की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दीन-हीन, असहाय लोगों को दान देने तथा भगवान नारायण की उपासना करने से उपासक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सावन महीने की पहली एकादशी यानी कामिका एकादशी का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन साधक कठिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान के साथ पूजा करते है। वहीं, इस दिन दान और पुण्य का महत्व है। व्रत के साथ-साथ इस दिन (Kamika Ekadashi 2025 Importance) कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है, तो आइए उन वस्तुओं के बारे में जानते हैं, जो इस प्रकार हैं। कामिका एकादशी पर जरूर करें ये विशेष दान (Kamika Ekadashi 2025 Daan List) दान के नियम Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का महत्व  कहा जाता है कि कामिका एकादशी के दिन व्रत रखने और दीन-हीन, असहाय लोगों को दान देने से व्यक्ति सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। चातुर्मास में पड़ने वाली कामिका एकादशी का अपना अलग ही महत्व है। मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्रदान करती है। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। 

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Sawan Somwar Vrat Katha In Hindi: इस कथा के बिना अधूरी है सावन सोमवार की पूजा, जरूर करें इसका पाठ

Sawan Somwar Vrat Katha: हिंदू धर्म की पवित्र परंपराओं में सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत केवल एक नियम नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मिक जुड़ाव की गहराई से जुड़ा एक दिव्य साधन है। यह व्रत न केवल मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग है, बल्कि भगवान शिव के चरणों में समर्पण का प्रतीक भी है। सावन (Sawan Somwar Vrat Katha) का महीना बेहद पावन होता है। इस महीने के प्रत्येक सोमवार पर भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत रखा जाता है। साथ ही सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत रखा जाता है। इस व्रत की महिमा का वर्णन शास्त्रों में निहित है। भगवान शिव की पूजा से हर मनोकामना पूरी होती है। Sawan Somvar Vrat Katha in Hindi: सावन सोमवार Somwar Vrat Katha के व्रत में कथा का पाठ करने का महत्‍व श‍िव पुराण में बहुत खास माना गया है। मान्‍यता है कि जो लोग सावन सोमवार का व्रत करते हैं उनको विधि विधान से पूजा करने के बाद व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। भगवान शिव का सबसे पहले दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है और फिर विधि विधान से पूजा करने के बाद सावन सोमवार के व्रत की कथा का पाठ करने से आपका व्रत संपूर्ण माना जाता है और पूजा का शुभ फल प्राप्‍त होता है। तो पढ़ें सावन सोमवार की व्रत कथा विस्‍तार से। Sawan Somwar Vrat Katha: सावन सोमवार की व्रत कथा मृत्युलोक में भ्रमण करने की इच्‍छा करके एक समय श्री भूतनाथ भगवान भोलेनाथ माता पार्वती के साथ मृत्युलोक में पधारे। भ्रमण करते-करते दोनों विदर्भ देशांतर्गत अमरावती नाम की अति रमणीक नगरी में पहुंचे। अमरावती नगरी स्‍वर्ग के सदृश सभी प्रकार के सुखों से परिपूर्ण थी। उसमें वहां के महाराज द्वारा बनवाया हुआ अति रमणीक शिवजी का मंदिर भी था। भगवान शंकर भगवती पार्वती के साथ इस मन्दिर में निवास करने लगे। Somwar Vrat Katha एक समय माता पार्वतीजी भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न देखकर बोली, हे महाराज आज तो हम दोनों चौंसर खेलेंगे। शिवजी ने प्राण प्रिया की बात को मान लिया और चौंसर खेलने लगे। उसी समय मन्दिर का पुजारी ब्राह्मण मन्दिर में पूजा करने आया। माता पार्वती ने पुजारी से प्रश्‍न किया पुजारी जी, बताओ इस बाजी में हम दोनों में से किसी जीत होगी? ब्राह्मण बिना विचारे जल्‍दी से बोल उठा कि महादेव जी की जीत होगी। थोड़ी देर में बाजी समाप्‍त हो गई और पार्वतीजी जीत हुई। Somwar Vrat Katha पार्वतीजी को बहुत गुस्सा आया और ब्राह्मण को झूठ बोलने के अपराध के कारण श्राप देने चलीं। भोलेनाथ ने पार्वती को बहुत समझाया लेकिन उन्होंने ब्राह्मण को कोढ़ी होने का शाप दे दिया। कुछ समय बाद पार्वती जी के श्रापवश पुजारी के शरीर में कोढ़ पैदा हो गया। वह बहुत अधिक दुखी रहने लगा। पूजारी को कष्ट भोगते हुए जब बहुत दिन गुजर गए तब एक दिन देवलोक की अप्‍सराएं शिवजी की पूजा करने के लिए उस मंदिर में पधारीं। Somwar Vrat Katha पुजारी के कोड़ के कष्ट को देखकर उन्हें बड़ी दया आई। उन्‍होंने उससे रोगी होने का कारण पूछा। पुजारी ने निसंकोच सारी बातें बता दीं। वे अप्‍सराएं बोलीं हे पुजारी, अब तुम अधिक दुःखी मत होना। सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत भक्तिभाव से करो। पुजारी ने अप्‍सराओं से व्रत की विधि पूछी। अप्‍सराओं ने बताया, सोमवार को भक्ति भाव से व्रत करो। साफ वस्‍त्र पहनो। संध्या व उपासना के बाद आधा सेर गेहूं का आटा लो और उसके तीन भाग कर लो। घी, गुड़, दीप, नैवेद्य, पूंगीफल, बेलपत्र, जनेऊ जोड़ा, चंदन, अक्षत पुष्‍पादि से प्रदोषकाल में भगवान शिव की पूजा करो। उसके बाद तीन भागों में से एक भाग शिवजी को अर्पण करो, बाकी दो शिवजी का प्रसाद समझकर उपस्थित लोगों में बांट दो और आप भी प्रसाद समझकर खाओ। इस विधि से सोलह सोमवार व्रत रखो। Somwar Vrat Katha सत्रहवें सोमवार को पाच-सेर पवित्र गेहूं के आटे की बाटी बनाओ, उसमें घी और गुड़ मिलाकर चूरमा बनाओ। भगवान भोलेनाथ को भोग लगाकर उपस्थित भक्तों में बांट दो। इसके बाद कुट्‌म्ब सहित प्रसाद लो तो शिवजी की कृपा से उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। “ऐसा कहकर अप्सराएं स्वर्ग को चली गईं। ब्राहाण ने यथाविधि षोड्श सोमवार व्रत किया तथा भगवान शिव की कृपा से रोग से मुक्ति पाकर आनन्द से रहने लगा। कुछ दिन बाद शिवजी और पार्वतीजी उस मन्दिर में पुनः पधारे। ब्राह्मण को निरोग देखकर पार्वती जी ने ब्राह्मण से रोग से मुक्त होने का उपाय पूछा। ब्राह्मण ने सोलह सोमवार व्रत कथा सुनाई। पार्वतीजी बहुत प्रसन्‍न हुईं। ब्राह्मण से व्रत विधि पूछकर स्‍वयं भी व्रत करने के लिए तैयार हो गई। व्रत करने के बाद उनकी मनोकामना पूरी हुई हुई और उनके रूठे बेटे स्वामी कार्तिकेय स्वय माता के आज्ञाकारी हुए। कार्तिकेय जी को अपना यह विचार परिवर्तन का रहस्य जानने की इच्छा हुई। वे माता से बोले हे माता। आपने ऐसा कौन सा उपाय किया जिससे मेरा मम आपकी ओर आकर्षित हो गया?” पार्वती जी ने वही षोड्श सोमवार व्रत कथा की कथा उनको सुना दी। कार्तिकय जी कहा इस व्रत को में भी करूंगा, क्योंकि मेरा प्रिय मित्र ब्राह्मण बहुत दुःखी दिल से परदेश गया है। मेरी इसमे मिलने की बहुत इच्छा है। कार्तिकेय जी ने भी इस व्रत को किया और उनका प्यारा मित्र मिल गया। मित्र ने इस आकस्मिक मिलन का भेद पूछा तो कार्तिकेय जी बोले हे मित्र। हमने तुम्हारे मिलने की इच्छा करके सोलह सोमवार का व्रत किया था। अब तो ब्राह्मण मित्र को अपने विवाह की बड़ी चिन्ता हुई। Somwar Vrat Katha उसने कार्तिकेय जी से व्रत की विधि पूछी और यथाविधि व्रत किया। व्रत के प्रभाव से जब वह किसी कार्य से विदेश गया तो वहां के राजा की लड़की का स्वयंवर था। राजा ने प्रण किया था कि जिस राजकुमार के गले में सब प्रकार से श्रृङ्गारित हथिनी माला डालेगी, मैं उसी के साथ अपनी प्यारी बेटी का विवाह कर दूंगा। शिवजी की कृपा से वह ब्राह्मण भी उस स्वयंवर को देखने की इच्छा से राज्यसभा में एक ओर जाकर बैठ गया। Somwar Vrat Katha नियत समय पर हथिनी आई और उसने जयमाला उस ब्राह्मण

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