Vividh Dev Stotrani: श्री विविध देव स्तोत्राणि

श्री विविध देव स्तोत्राणि हिंदी पाठ: Vividh Dev Stotrani in Hindi ।। श्री गणपति स्तोत्रम् ।। Vividh Dev Stotrani जेतुं यस्त्रिपुरं हरेण हरिणा व्याजाद्वलिं बध्नता स्त्रष्टुं वारिभवोद्भवेन भुवनं शेषेण धर्तुं धराम् ।पार्वत्या महिषासुरप्रमथने सिद्धाधिपै: सिद्धये ध्यात: पञ्चशरेण विश्वजितये पायात्स नागानन: ।। 1 ।। विघ्नध्वान्तनिवारणैकतरणिर्विघ्नाटवीहव्यवाड् विघ्नव्यालकुलाभिमानगरुडो विघ्नेभपञ्चानन: ।विघ्नोत्तुंगगिरिप्रभेदनपविर्विघ्नाम्बुधेर्वाडवो विघ्नाघौघघनप्रचण्डपवनो विघ्नेश्वर: पातु न: ।। 2 ।। खर्वं स्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरं प्रस्यन्दन्मदगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगंडस्थलम् ।दन्ताघातविदारितारिरुधिरै: सिन्दूरशोभाकरं वन्दे शैलसुतासुतं गणपतिं सिद्धिप्रदं कामदम् ।। 3 ।। Vividh Dev Stotrani गजाननाय महसे प्रत्यूहतिमिरच्छिदे ।अपारकरुणापूरतरंगितदृशे नम: ।। 4 ।। अगजाननपद्मार्कं गजाननमहर्निशम् ।अनेकदन्तं भक्तानामेकदंतमुपास्महे ।। 5 ।। श्वेतांग श्वेतवस्त्रं सितकुसुमगणै: पूजितं श्वेतगन्धै: क्षीराब्धौ रत्नदीपै: सुरनरतिलकं रत्नसिंहासनस्थम् ।दोर्भि: पाशांगकुशाब्जाभयवरमनसं चन्द्रमौलिं त्रिनेत्रं ध्यायेच्छान्त्यर्थमीशं गणपतिममलं श्रीसमेतं प्रसन्नम् ।। 6 ।। आवाहये तं गणराजदेवं रक्तोत्पलाभासमशेषवन्द्यम् ।विघ्नान्तकं विघ्नहरं गणेशं भजामि रौद्रं सहितं च सिद्धया ।। 7 ।। यं ब्रह्म वेदान्तविदो वदन्ति परं प्रधानं पुरुषं तथान्ये ।विश्वोद्गते: कारणमीश्वरं वा तस्मै नमो विघ्नविनाशनाय ।। 8 ।। विघ्नेश वीर्याणि विचित्रकाणि वंदीजनैर्मागधकै: स्मृतानि ।श्रुत्वा समुत्तिष्ठ गजानन त्वं ब्राह्मो जगन्मंगलकं कुरुष्व ।। 9 ।। गणेश हेरम्ब गजाननेति महोदर स्वानुभवप्रकाशिन् ।वरिष्ठ सिद्धिप्रिय बुद्धिनाथ वदन्त एवं त्यजत प्रभीती: ।। 10 ।। अनेकविघ्नान्तक वक्रतुंड स्वसंज्ञवासिंश्च चतुर्भुजेति ।कवीश देवान्तकनाशकारिन् वदन्त एवं त्यजत प्रभीती: ।। 11 ।। अनन्तचिद्रूपमयं गणेशं ह्राभेदभेदादिविहीनमाद्यम् ।ह्रदि प्रकाशस्य धरं स्वधीस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 12 ।। विश्वादिभूतं ह्रदि योगिनां वै प्रत्यक्षरूपेण विभान्तमेकम् ।सदा निरलाम्बसमाधिगम्यं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 13 ।। Vividh Dev Stotrani यदीयवीर्येण समर्थभूता माया तया संरचितं च विश्वम् ।नागात्मकं ह्रात्मतया प्रतीतं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 14 ।। सर्वान्तरे संस्थितमेकगूढं यदाज्ञया सर्वमिदं विभाति ।अनन्तरूपं ह्रदि बोधकं वै तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 15 ।। यं योगिनी योगबलेन साध्यं कुर्वन्ति तं क: स्तवनेन नौति ।अत: प्रणामेन सुसिद्धिदोऽस्तु तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 16 ।। देवेन्द्रमौलिमन्दारमकरन्दकणारूणा: ।विघ्नान् हरन्तु हेरम्बचरणाम्बुजरेणव: ।। 17 ।। एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम् ।विघ्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम् ।। 18 ।। यदक्षरं पदं भ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत् ।तत्सर्वं क्षम्यतां देव प्रसीद परमेश्वर ।। 19 ।। ।। इति श्री विविध देव स्तोत्राणि सम्पूर्णम् ।।

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Vishwavasu Gandharv Stotra: श्री विश्वावसु गन्धर्व स्तोत्र

Vishwavasu Gandharv Stotra: विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र (श्री विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र): विवाह के लिए ज्योतिष शास्त्र का एक नियम है, सप्तम भाव की दशा और नवम भाव की अंतर्दशा मंगलकारी होती है। गुरु गोचर या नवम भाव में केंद्र में हो और सप्तम भाव के स्वामी का लग्न हो। अतः यदि इनमें से कोई भी ग्रह शत्रु राशि, शत्रु राशि या नीच राशि में हो तो इन स्तोत्रों का जाप करें। Vishwavasu Gandharv Stotra यदि किसी व्यक्ति का विवाह किसी कारणवश नहीं हो पा रहा है Vishwavasu Gandharv Stotra तो उसे शीघ्र ही कुछ विशेष उपाय करने चाहिए। Vishwavasu Gandharv Stotra: विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र शास्त्रों के अनुसार, इन उपायों को करने से न केवल विवाह होता है, बल्कि सुंदर और सुयोग्य पत्नी भी प्राप्त होती है। यदि किसी अविवाहित युवक का किसी कारणवश विवाह नहीं हो पा रहा है, Vishwavasu Gandharv Stotra तो उसे प्रतिदिन प्रातः स्नानादि के पश्चात एकांत स्थान पर बैठकर मां दुर्गा का ध्यान करते हुए घी का दीपक जलाकर पंचपदी के विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र का 108 बार पाठ करना चाहिए। Vishwavasu Gandharv Stotra जगतजननी माता दुर्गा की कृपा से शीघ्र ही योग्य पत्नी की प्राप्ति होती है। गंधर्व-राज विश्वावसु (विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र Vishwavasu Gandharv Stotra) की उपासना मुख्यतः ‘वशीकरण’ एवं ‘विवाह’ के लिए की जाती है। स्त्रीत्व प्राप्ति एवं विवाह के लिए इनका प्रयोग अचूक है। शास्त्रों के अनुसार, गंधर्व या विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र विश्वावसु को जल की यह सात आहुति देने से, उपर्युक्त स्तोत्र का जप करने से एक माह के भीतर ही आभूषणों से सुसज्जित श्रेष्ठ पत्नी की प्राप्ति होती है। Vishwavasu Gandharv Stotra: यदि किसी अविवाहित व्यक्ति के विवाह में बार-बार बाधा आ रही हो, तो प्रतिदिन स्नान के पश्चात ‘विश्वावसु’ गंधर्व को जल की सात आहुति दें और निम्नलिखित स्तोत्र का मन ही मन 108 बार जप करें। ध्यान रहे कि इसे गुप्त रखें। इस क्रिया की जानकारी परिवार के अलावा किसी को न हो। Vishwavasu Gandharv Stotra संध्या के समय भी एक माला का मानसिक जप करना चाहिए। Vishwavasu Gandharv Stotra विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र के पाठ से एक माह में ही सुंदर, सुशील और योग्य कन्या से विवाह तय हो सकता है। विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र के लाभ: Vishwavasu Gandharv Stotra अविवाहित जातकों को शीघ्र वर की प्राप्ति हो सकती है।वर-वधू न केवल सुंदर होगा, बल्कि सुसंस्कारी भी होगा।वर-वधू जीवन में सौभाग्य लाएगा। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: Vishwavasu Gandharv Stotra: जिन व्यक्तियों का विवाह लंबे समय से नहीं हो रहा है या विवाह में बाधाएँ आ रही हैं, Vishwavasu Gandharv Stotra उन्हें विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए। श्री विश्वावसु गन्धर्व स्तोत्र हिंदी पाठ:Vishwavasu Gandharv Stotra in Hindi Vishwavasu Gandharv Stotra: प्रणाम-मन्त्रः- ॐ श्रीगणेशाय नमः ।। ॐ श्रीगणेशाय नमः ।। ॐ श्रीगणेशाय नमः ।। ॐ श्रीसप्त-श्रृंग-निवासिन्यै नमः ।। ॐ श्रीसप्त-श्रृंग-निवासिन्यै नमः ।। ॐ श्रीसप्त-श्रृंग-निवासिन्यै नमः ।। ॐ श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राजाय कन्याभिः परिवारिताय नमः ।। ॐ श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राजाय कन्याभिः परिवारिताय नमः ।। ॐ श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राजाय कन्याभिः परिवारिताय नमः ।। ।। पूर्व-पीठिका ।। ॐ नमस्कृत्य महा-देवं, सर्वज्ञं परमेश्वरम् ।। ।। श्री पार्वत्युवाच ।। भगवन् देव-देवेश, शंकर परमेश्वर ।कथ्यतां मे परं स्तोत्रं, कवचं कामिनां प्रियम् ।। जप-मात्रेण यद्वश्यं, कामिनी-कुल-भृत्यवत् ।कन्यादि-वश्यमाप्नोति, विवाहाभीष्ट-सिद्धिदम् ।। भग-दुःखैर्न बाध्येत, सर्वैश्वर्यमवाप्नुयात् ।। ।। श्रीईश्वरोवाच ।। अधुना श्रुणु देवशि ! कवचं सर्व-सिद्धिदं ।विश्वावसुश्च गन्धर्वो, भक्तानां भग-भाग्यदः ।। कवचं तस्य परमं, कन्यार्थिणां विवाहदं ।जपेद् वश्यं जगत् सर्वं, स्त्री-वश्यदं क्षणात् ।। भग-दुःखं न तं याति, भोगे रोग-भयं नहि ।लिंगोत्कृष्ट-बल-प्राप्तिर्वीर्य-वृद्धि-करं परम् ।। महदैश्वर्यमवाप्नोति, भग-भाग्यादि-सम्पदाम् ।नूतन-सुभगं भुक्तवा, विश्वावसु-प्रसादतः ।। विनियोगः सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़कर जल भूमि पर छोड़ दे । ॐ अस्यं श्री विश्वावसु-गन्धर्व-राज-कवच-स्तोत्र-मन्त्रस्य विश्व-सम्मोहन वाम-देव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राज-देवता, ऐं क्लीं बीजं, क्लीं श्रीं शक्तिः, सौः हंसः ब्लूं ग्लौं कीलकं, श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राज-प्रसादात् भग-भाग्यादि-सिद्धि-पूर्वक-यथोक्त॒पल-प्राप्त्यर्थे जपे विनियोगः ।। ऋष्यादि-न्यास: विश्व-सम्मोहन वाम-देव ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राज-देवतायै नमः हृदि, ऐं क्लीं बीजाय नमः गुह्ये, क्लीं श्रीं शक्तये नमः पादयो, सौः हंसः ब्लूं ग्लौं कीलकाय नमः नाभौ, श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राज-प्रसादात् भग-भाग्यादि-सिद्धि-पूर्वक-यथोक्त॒पल-प्राप्त्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ।। षडङ्ग-न्यास-कर-न्यास-अंग-न्यास ॐ क्लीं ऐं क्लीं अंगुष्ठाभ्यां नमः हृदयाय नमःॐ क्लीं श्रीं गन्धर्व-राजाय क्लीं तर्जनीभ्यां नमः शिरसे स्वाहाॐ क्लीं कन्या-दान-रतोद्यमाय क्लीं मध्यमाभ्यां नमः शिखायै वषट्ॐ क्लीं धृत-कह्लार-मालाय क्लीं अनामिकाभ्यां नमः कवचाय हुम्ॐ क्लीं भक्तानां भग-भाग्यादि-वर-प्रदानाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः नेत्र-त्रयाय वौषट्ॐ क्लीं सौः हंसः ब्लूं ग्लौं क्लीं करतल-कर-पृष्ठाभ्यां नमः अस्त्राय फट् मन्त्रः- ॐ क्लीं विश्वावसु-गन्धर्व-राजाय नमः ॐ ऐं क्लीं सौः हंसः सोहं ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं सौः ब्लूं ग्लौं क्लीं विश्वावसु-गन्धर्व-राजाय कन्याभिः परिवारिताय कन्या-दान-रतोद्यमाय धृत-कह्लार-मालाय भक्तानां भग-भाग्यादि-वर-प्रदानाय सालंकारां सु-रुपां दिव्य-कन्या-रत्नं मे देहि-देहि, मद्-विवाहाभीष्टं कुरु-कुरु, सर्व-स्त्री वशमानय, मे लिंगोत्कृष्ट-बलं प्रदापय, मत्स्तोकं विवर्धय-विवर्धय, भग-लिंग-रोगान् अपहर, मे भग-भाग्यादि-महदैश्वर्यं देहि-देहि, प्रसन्नो मे वरदो भव, ऐं क्लीं सौः हंसः सोहं ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं सौं ब्लूं ग्लौं क्लीं नमः स्वाहा ।। (200 अक्षर, 12 बार जपें) गायत्री मन्त्रः- ॐ क्लीं गन्धर्व-राजाय विद्महे कन्याभिः परिवारिताय धीमहि तन्नो विश्वावसु प्रचोदयात् क्लीं ।। (10 बार जपें) ध्यान:- क्लीं कन्याभिः परिवारितं, सु-विलसत् कह्लार-माला-धृतन्,स्तुष्टयाभरण-विभूषितं, सु-नयनं कन्या-प्रदानोद्यमम् । भक्तानन्द-करं सुरेश्वर-प्रियं मुथुनासने संस्थितम्,स्रातुं मे मदनारविन्द-सुमदं विश्वावसुं मे गुरुम् क्लीं ।। ।। कवच मूल पाठ ।। क्लीं कन्याभिः परिवारितं, सु-विलसत् माला-धृतन्-स्तुष्टयाभरण-विभूषितं, सु-नयनं कन्या-प्रदानोद्यमम् । भक्तानन्द-करं सुरेश्वर-प्रियं मिथुनासने संस्थितं,त्रातुं मे मदनारविन्द-सुमदं विश्वावसुं मे गुरुम् क्लीं ।। 1 ।। क्लीं विश्वावसु शिरः पातु, ललाटे कन्यकाऽधिपः ।नेत्रौ मे खेचरो रक्षेद्, मुखे विद्या-धरं न्यसेत् क्लीं ।। 2 ।। क्लीं नासिकां मे सुगन्धांगो, कपोलौ कामिनी-प्रियः ।हनुं हंसाननः पातु, कटौ सिंह-कटि-प्रियः क्लीं ।। 3 ।। क्लीं स्कन्धौ महा-बलो रक्षेद्, बाहू मे पद्मिनी-प्रियः ।करौ कामाग्रजो रक्षेत्, कराग्रे कुच-मर्दनः क्लीं ।। 4 ।। क्लीं हृदि कामेश्वरो रक्षेत्, स्तनौ सर्व-स्त्री-काम-जित् ।कुक्षौ द्वौ रक्षेद् गन्धर्व, ओष्ठाग्रे मघवार्चितः क्लीं ।। 5 ।। क्लीं अमृताहार-सन्तुष्टो, उदरं मे नुदं न्यसेत् ।नाभिं मे सततं पातु, रम्भाद्यप्सरसः प्रियः क्लीं ।। 6 ।। क्लीं कटिं काम-प्रियो रक्षेद्, गुदं मे गन्धर्व-नायकः ।लिंग-मूले महा-लिंगी, लिंगाग्रे भग-भाग्य-वान् क्लीं ।। 7 ।। क्लीं रेतः रेताचलः पातु, लिंगोत्कृष्ट-बल-प्रदः ।दीर्घ-लिंगी च मे लिंगं, भोग-काले विवर्धय क्लीं ।। 8 ।। क्लीं लिंग-मध्ये च मे पातु, स्थूल-लिंगी च वीर्यवान् ।सदोत्तिष्ठञ्च मे लिंगो, भग-लिंगार्चन-प्रियः क्लीं ।। 9 ।। क्लीं वृषणं सततं पातु, भगास्ये वृषण-स्थितः ।वृषणे मे बलं रक्षेद्, बाला-जंघाधः स्थितः क्लीं ।। 10 ।। क्लीं जंघ-मध्ये च मे पातु, रम्भादि-जघन-स्थितः ।जानू मे रक्ष कन्दर्पो, कन्याभिः परिवारितः क्लीं ।। 11 ।। क्लीं जानू-मध्ये च मे रक्षेन्नारी-जानु-शिरः-स्थितः ।पादौ मे शिविकारुढ़ः, कन्यकादि-प्रपूजितः क्लीं ।। 12 ।। क्लीं आपाद-मस्तकं पातु, धृत-कह्लार-मालिका ।भार्यां मे सततं पातु, सर्व-स्त्रीणां सु-भोगदः क्लीं ।। 13 ।। क्लीं पुत्रान् कामेश्वरो पातु, कन्याः

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Sawan upay: सावन में कहां जलाएं दीया? जानिए 5 शुभ स्थान और उनका महत्व

Sawan upay: सावन के दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक के जीवन में मंगल का आगमन होता है। साथ ही घर में सुख समृद्धि एवं खुशहाली होती है। सावन महीने में दान करने से व्यक्ति को जीवन में अक्षय फल मिलता है। सावन सोमवार पर दो राशि ( Sawan upay ) के जातकों को लाभ मिलने वाला है। Sawan upay: वैदिक पंचांग के अनुसार, 14 जुलाई को सावन माह का पहला सोमवार है। सावन सोमवार के दिन देवों के देव महादेव की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाता है। इस शुभ अवसर पर साधक गंगा स्नान कर देवों के देव महादेव का गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं। भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में आने वाली बलाएं भी टल जाती हैं। Sawan mah me shiv ji ko khush karne ke upay : श्रावण मास जिसे “सावन” भी कहा जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का पांचवा माह होता है. यह मास धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. आपको बता दें कि श्रावण मास भगवान शिव Sawan upay का प्रिय माह है. इस महीने में विशेष रूप से सोमवार का व्रत रखकर शिवजी की विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है सावन माह में भोलेनाथ की आराधना करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस माह में आप पूजा पाठ के अलावा कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है… कैसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न: Sawan upay सावन के पवित्र महीने में रोजाना सुबह और प्रदोष काल में शिवलिंग के पास दीपक जलाने से जीवन के अंधकार दूर होते हैं जो आपको शांति प्रदान करता है. आप इस माह में तुलसी और शमी के पौधे के पास दीपक जलाते हैं तो घर में सकारात्मकता आती है. इससे दुख-दरिद्र दूर होता है. इस माह में पीपल के पेड़ के नीचे भी दीपक जलाने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसे देव वृक्ष कहा गया है. मान्यता है इस पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश निवास करते हैं. Sawan upay आप प्रदोष काल में पीपल के वृक्ष के नीचे दीया जलाते हैं तो त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.  सावन माह में घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में लक्ष्मी जी का वास होता है. इसके अलावा सावन में स्नान के बाद नाग देवता का ध्यान करते हुए सुनसान स्थान में और घर के बाहर एक दीपक जरूर जलाएं. सावन के महीने में रोजाना पूजा घर में एक दीपक उत्तर मुंह करके भगवान शिव को अर्पित करने से कैलाश पर्वत पर विराजमान भगवान शिव का ध्यान करें. 

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Fast Rules Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं ?

Fast Rules Kamika Ekadashi 2025: कामिका एकादशी का व्रत बहुत ही खास माना जाता है। एकादशी व्रत हर महीने में दो बार आता है। इस बार यह व्रत 21 जुलाई 2025 को रखा जाएगा। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन (Kamika Ekadashi 2025) उपवास करने के साथ भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। Fast Rules Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का व्रत हर साल सावन महीने में एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21, जुलाई 2025 को पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। एकादशी का व्रत विष्णु जी को बहुत ज्यादा प्रिय है, तो चलिए कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2025 2025 Fast Rules) के नियम को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं। Fast Rules Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का व्रत हर साल सावन महीने में एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21, जुलाई 2025 को पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। एकादशी का व्रत विष्णु जी को बहुत ज्यादा प्रिय है, तो चलिए कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2025 2025 Fast Rules) के नियम को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं। Fast Rules Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं ? कामिका एकादशी में क्या खाएं? (Kamika Ekadashi 2025 Me Kya Khayein?) Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी पर जो साधक उपवास रख रहे हैं, वे दूध, दही, फल, शरबत, साबुदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, मिर्च सेंधा नमक, राजगीर का आटा आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही व्रती भगवान विष्णु की पूजा के बाद ही कुछ सेवन करें। वहीं, भोग को तैयार करते इसके समय सफाई का अच्छी तरह से ध्यान रखें। कामिका एकादशी में क्या न खाएं? (Kamika Ekadashi 2025 Me Kya Nahin Khayein?) अगर आप कामिका एकादशी पर व्रत कर रहे हैं, तो अपने खाने का पूरा ध्यान दें, क्योंकि यह व्रत को सफल और असफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाता है। बता दें, व्रती को एकादशी व्रत के दिन भोजन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा इस तिथि पर तामसिक भोजन जैस- मांस-मदिरा प्याज, लहसुन, मसाले, तेल आदि से भी परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही इस व्रत (Kamika Ekadashi 2025 Significance) पर चावल और नमक का सेवन गलती से भी नहीं करना चाहिए। ऐसे में अगर आप इस व्रत का पालन कर रहे हैं, तो इन सभी बातों का जरूर ध्यान रखें। भोग चढ़ाने का मंत्र (Kamika Ekadashi 2025 Bhog Mantra) कामिका एकादशी Fast Rules Kamika Ekadashi पर नारायण को भोग लगाते समय इस मंत्र ”त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।” का भावपूर्ण जप करें। ऐसा करने से भगवान प्रसाद स्वीकार कर लेते हैं। इसके साथ ही मनचाहा फल प्रदान करते हैं।

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Kamika Ekadashi 2025 Date: कामिका एकादशी 2025 जानें 20 या 21 जुलाई में कब है व्रत, शुभ मुहूर्त और विशेष योग

Kamika Ekadashi 2025: देवों के देव महादेव को सावन का महीना प्रिय है। सावन सोमवार के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही सावन सोमवार का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से अविवाहित जातकों की शादी जल्द हो जाती है। इस महीने में कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi 2025 Date) और पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। Kamika Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को बहुत शुभ और फलदायक माना जाता है। कामिका एकादशी  सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। सावन के माह में कामिका एकादशी का व्रत 21 जुलाई को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है। तो आइए जानते हैं कामिका एकादशी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में Kamika Ekadashi 2025 Date:कब मनाई जाती है कामिका एकादशी? हर साल सावन माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन कामिका एकादशी मनाई जाती है। इस दिन लक्ष्मी नारायण जी की पूजा एवं भक्ति की जाती है। सनातन शास्त्रों में व्रत की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। साधक मनचाही मुराद पाने के लिए कामिका एकादशी का व्रत रखते हैं। Kamika Ekadashi Shubh Muhurat कामिका एकादशी शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 20 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट पर होगी और इसका समापन 21 जुलाई को सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत 21 जुलाई को रखा जाएगा। कामिका एकादशी पारण समय कामदा एकादशी का पारण 22 जुलाई को किया जाएगा। साधक 22 जुलाई को सुबह 05 बजकर 37 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 05 मिनट के मध्य कर सकते हैं। इस दौरान भक्ति भाव से पूजा कर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद अन्न और धन का दान कर व्रत खोलें। कामिका एकादशी शुभ योग (Kamika Ekadashi 2025 Shubh Yoga) सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर वृद्धि और ध्रुव योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा की जाएगी। साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाएगा। भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। Kamika Ekadashi Puja Vidhi कामिका एकादशी पूजा विधि कामिका एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।फिर घर के मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें और व्रत का संकल्प लें।उसके बाद एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर विष्णु जी की मूर्ति स्थापित करें।अब भगवान विष्णु को चंदन, फूल, तुलसी पत्र, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें और पंचामृत का भोग लगाएं।इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों और नामों का जाप करें।अंत में श्री हरि के समक्ष घी का दीपक जलाएं और आरती करें। 

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kunwari kanya sawan ka vrat kaise rakhein: कुंवारी कन्याएं ना करें ये गलतियां, जानें सही पूजा विधि

sawan ka vrat kaise rakhein : सावन शुरू होने वाला है और ऐसे में अगर कोई पहली बार सोमवार व्रत रखने वाला है तो उसे कई तरह के कन्फ्यूजन भी होंगे। यहां जानें आखिर कुंवारी कन्याएं किस तरह से व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न कर सकती हैं? Sawan Somvar Vrat 2025 Puja Vidhi, Niyam and Samagri: ऐसा माना जाता है कि सावन में की गई पूजा से भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि सावन सोमवार व्रत का नियम क्या है, कौन-कौन सी सामग्री पूजा के लिए आवश्यक होती है और पूजा की सही विधि क्या है… sawan somvar vrat easy shiva puja vidhi for unmarried girl: भगवान शिव और शिवभक्तों के लिए सावन का महीना सबसे प्रिय होता है। वहीं महिलाएं सावन के हर सोमवार का व्रत रखती हैं। कहते हैं कि सच्चे मन और सारे विधि-विधान से जिस किसी ने भी सावन भर पूजा की उसकी नैय्या खुद भगवान शिव ही लगाते हैं। बता दें कि हिंदू ग्रंथों में सावन के सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। sawan ka vrat मान्यता तो ये भी है कि जब कोई कुंवारी कन्या सावन के सोमवार का व्रत रखने के साथ-साथ भगवान शिव को सच्चे मन से पूजती है तो उसे मनचाहा वर मिल जाता है। ऐसे में हर साल सावन के सोमवार का व्रत कई कुंवारी कन्याएं रखती हैं। वैसे इस व्रत को लेकर कोई कठोर नियम तो नहीं है, sawan ka vrat लेकिन कुछ बातों का ध्यान रख लिया जाए तो इस व्रत का पूरा-पूरा फल प्राप्त किया जा सकता है। तो चलिए जान लेते हैं कि कोई कुंवारी कन्या सावन सोमवार का व्रत कैसे रखें। साथ ही जानेंगे उन गलतियों के बारे में जो लोग अक्सर जाने-अनजाने कर दिया करते हैं। कुंवारी कन्याएं ऐसे करें भगवान शिव की पूजा:This is how unmarried girls sawan ka vrat should worship Lord Shiva अगर कोई कुंवारी कन्या पहली बार सावन का व्रत रख रही है और भगवान शिव की पूजा करने वाली है तो उसके लिए कुछ नियम है जो उन्हें हर सोमवार को पूरे करने हैं। सबसे पहले सुबह उठकर घर साफ कर लें। ये काम एक दिन पहले भी कर सकते हैं। sawan ka vrat इसके बाद पानी में कुछ बूंद गंगाजल डालकर नहा लें। पीले रंग के कपड़े पहनकर भगवान शिव की पूजा करें और शिवलिंग का जलाभिषेक करें। आप पंचामृत से भी शिवलिंग का अभिषेक कर सकती हैं। शिवलिंग पर फूल, बेलपत्र और धतूरा चढाएं। इसके बाद ॐ नमः शिवाय का जाप कर लें। कुंवारी कन्याएं ना करें ये काम:Unmarried girls should not do this work कुंवारी कन्याएं कभी भी भगवान शिव को हल्दी ना लगाएं। कई लोग पंचामृत में तुलसी की पत्तियां भी डाल देते हैं। कुंवारी कन्याएं इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग पर तुलसी बिल्कुल भी नहीं चढ़ानी होती है। sawan ka vrat सोमवार के व्रत के दिन आटा, बेसन, सत्तू और मैदे से बनी किसी भी चीज का सेवन नहीं करना है। इस दिन प्याज और लहसुन के सेवन से भी बचना है। सोमवार के दिन किसी भी तरह के अन्न का सेवन नहीं करना है। सोमवार व्रत में करें ये काम:Do this work during Monday fast sawan ka vrat सावन सोमवार के व्रत में सेंधा नमक ही खाएं। आप साबूदाना खिचड़ी के साथ-साथ दूध और दूध से बनी चीजें खा सकती हैं। इसके अलावा सीजनल फलों का सेवन किया जा सकता है। sawan ka vrat अगर आप नॉन वेजिटेरियन हैं sawan ka vrat तो इस बात का पूरा ध्यान रखना है कि सावन में पूरे महीने नॉनवेज नहीं खाना है। सावन के सोमवार व्रत की तिथियां (Sawan Somvar 2025 Dates) सावन सोमवार व्रत की आवश्यक सामग्री (Sawan Somvar Puja Samagri List) सावन सोमवार की पूजा विधि (Sawan Somvar Vrat Puja Vidhi) सावन सोमवार व्रत नियम (Sawan Somvar Vrat Rules You Must Follow) सोमवार व्रत का महत्व (Somvar Vrat Katha Mahatv) sawan ka vrat पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर व्रत और तपस्या की थी। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रेरणा से उन्होंने सोमवार का व्रत रखा, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। sawan ka vrat तभी से सोमवार व्रत को विशेष रूप से सौभाग्य प्राप्ति और वैवाहिक सुख के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। sawan ka vrat मान्यता है कि इस व्रत को पूरे नियमों और भक्ति भाव से करने पर जीवन की कठिनाइयों का अंत होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही, भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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Sawan 2025 Vrat: सावन सोमवार व्रत: कुंवारी कन्याएं ना करें ये गलतियां, जानें सही पूजा विधि

Sawan 2025 Vrat: सावन शुरू होने वाला है और ऐसे में अगर कोई पहली बार सोमवार व्रत रखने वाला है तो उसे कई तरह के कन्फ्यूजन भी होंगे। यहां जानें आखिर कुंवारी कन्याएं किस तरह से व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न कर सकती हैं? Sawan Somvar Vrat: भगवान शिव और शिवभक्तों के लिए सावन का महीना सबसे प्रिय होता है। वहीं महिलाएं सावन के हर सोमवार का व्रत रखती हैं। कहते हैं कि सच्चे मन और सारे विधि-विधान से जिस किसी ने भी सावन भर पूजा की उसकी नैय्या खुद भगवान शिव ही लगाते हैं। बता दें कि हिंदू ग्रंथों में सावन के सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। Sawan 2025 Vrat मान्यता तो ये भी है कि जब कोई कुंवारी कन्या सावन के सोमवार का व्रत रखने के साथ-साथ भगवान शिव को सच्चे मन से पूजती है तो उसे मनचाहा वर मिल जाता है। ऐसे में हर साल सावन के सोमवार का व्रत कई कुंवारी कन्याएं रखती हैं। वैसे इस व्रत को लेकर कोई कठोर नियम तो नहीं है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रख लिया जाए तो इस व्रत का पूरा-पूरा फल प्राप्त किया जा सकता है। Sawan 2025 Vrat तो चलिए जान लेते हैं कि कोई कुंवारी कन्या सावन सोमवार का व्रत कैसे रखें। साथ ही जानेंगे उन गलतियों के बारे में जो लोग अक्सर जाने-अनजाने कर दिया करते हैं। Sawan 2025 Vrat:कुंवारी कन्याएं ऐसे करें भगवान शिव की पूजा अगर कोई कुंवारी कन्या पहली बार सावन का व्रत रख रही है और भगवान शिव की पूजा करने वाली है तो उसके लिए कुछ नियम है जो उन्हें हर सोमवार को पूरे करने हैं। सबसे पहले सुबह उठकर घर साफ कर लें। ये काम एक दिन पहले भी कर सकते हैं। इसके बाद पानी में कुछ बूंद गंगाजल डालकर नहा लें। पीले रंग के कपड़े पहनकर भगवान शिव की पूजा करें और शिवलिंग का जलाभिषेक करें। आप पंचामृत से भी शिवलिंग का अभिषेक कर सकती हैं। शिवलिंग पर फूल, बेलपत्र और धतूरा चढाएं। इसके बाद ॐ नमः शिवाय का जाप कर लें। कुंवारी कन्याएं ना करें ये काम :Unmarried girls should not do this work कुंवारी कन्याएं कभी भी भगवान शिव को हल्दी ना लगाएं। कई लोग पंचामृत में तुलसी की पत्तियां भी डाल देते हैं। कुंवारी कन्याएं इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग पर तुलसी बिल्कुल भी नहीं चढ़ानी होती है। सोमवार के व्रत के दिन आटा, बेसन, सत्तू और मैदे से बनी किसी भी चीज का सेवन नहीं करना है। Sawan 2025 Vrat इस दिन प्याज और लहसुन के सेवन से भी बचना है। सोमवार के दिन किसी भी तरह के अन्न का सेवन नहीं करना है। सोमवार व्रत में करें ये काम: Do this work during Monday fast सावन सोमवार के व्रत में सेंधा नमक ही खाएं। आप साबूदाना खिचड़ी के साथ-साथ दूध और दूध से बनी चीजें खा सकती हैं। इसके अलावा सीजनल फलों का सेवन किया जा सकता है। अगर आप नॉन वेजिटेरियन हैं तो इस बात का पूरा ध्यान रखना है कि सावन में पूरे महीने नॉनवेज नहीं खाना है। डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

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Sawan 2025: सावन शुरू होने से पहले घर में लाएं ये शुभ चीजें, भोलेनाथ की बरसेगी कृपा

Sawan 2025 Vishesh Upay: कुछ ही दिनों में सावन महीने की शुरूआत होने वाली है, ऐसे में इन चीजों को घर लाने से और इनकी विधिवत पूजा करने से आपके सब कष्ट दूर हो जाएंगे. ज्योतिष शास्त्र में सावन Sawan 2025 में करने वाले कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन उपायों को करने से आपकी हर परेशानी दूर हो सकती है. अगर आप आर्थिक तंगी से छुटकारा पाना चाहते हैं और भोलेनाथ की कृपा पाना चाहते हैं, तो सावन शुरू होने से पहले कुछ शुभ चीजें घर ले आएं. हिन्दू धर्म में सावन का माह सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है. कहते हैं कि यह माह देवाधिदेव भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. शास्त्रों के मुताबिक, इस माह में भगवान शिव अपने परिवार के साथ पृथ्वी का विचरण करने के लिए आते हैं. यही वजह है कि इस पूरे महीने भगवान शिव से जुड़ी तमाम कष्टप्रद यात्राएं होती हैं. साथ ही लोग पूरे माह मंदिर में शिवलिंग पर जल अर्पित कर भोलेनाथ का नाम स्मरण करते हैं. ज्योतिष शास्त्र में सावन के महीने में करने वाले कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं. धार्मिक मान्यता है कि इन उपायों को करने से व्यक्ति के जीवन की हर परेशानी दूर हो जाती है. अगर आप आर्थिक तंगी व रोगों के साथ कई दुखों से निजात पाना चाहते हैं, तो उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार सावन शुरू होने से पहले कुछ शुभ चीजें घर ले आएं. जानिए किन वस्तुओं को घर लाना शुभ  भगवान शिव अपने भक्तों और गणों से अगाध स्नेह करते हैं. इसलिए अगर आप भोलेनाथ को प्रसन्न करना चाहते हैं तो उनकी पूजा से पहले उनके प्रिय गण यानी नंदी की पूजा करें. इसके लिए आप सावन शुरू होने से पहले नंदी की प्रतिमा घर ले आएं और उसे मंदिर में स्थापित करें. फिर पूरे सावन माह नंदी महाराज और भोलेनाथ की पूजा करें. इससे आप पर भगवान शिव की कृपा लगातार बरसती रहेगी. Sawan 2025 Vishesh Upay:घर ले आएं ये चीजें? महामृत्युंजय यंत्र:- अगर आप अपने घर से वास्तु दोष से दूर करना चाहते हैं, तो सावन आने से पहले अपने घर में महामृत्युंजय यंत्र जरूर ले आएं. आप चाहें तो सावन सोमवार के दिन भी महामृत्युंजय यंत्र लेकर आ सकते हैं. फिर विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा कर घर में महामृत्युंजय यंत्र स्थापित करनी चाहिए. Sawan 2025 मान्यता है कि इससे हर परेशानी दूर हो सकती है. चांदी के नंदी:- अगर आप पैसों की तंगी से निजात पाना चाहते हैं, तो सावन शुरू होने से पहले अपने घर में चांदी से निर्मित नंदी ले आएं. सोमवार के दिन नंदी को घर में लाकर स्थापित करें. Sawan 2025 धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की सवारी नंदी को घर में स्थापित करने से हर परेशानी दूर हो जाती है. आप चाहे तो नंदी को घर की तिजोरी में भी रख सकते हैं. पारद शिवलिंग:- अगर आप भोलेनाथ की कृपा पाना चाहते हैं, तो सावन से पहले अपने घर में पारद शिवलिंग ले आएं. आप सावन के महीने में किसी दिन अपने घर पर पारद शिवलिंग लाकर स्थापित कर सकते हैं. Sawan 2025 फिर इसका गंगाजल या कच्चे दूध से भगवान शिव का अभिषेक करें. ऐसा करने से शिव जी की कृपा बरसती है और घर में सुख, समृद्धि के साथ खुशहाली आती है. डमरू:- अगर आप जीवन में किसी भी परेशानी से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सावन के महीने में डमरू घर लें आएं. Sawan 2025 इसके बाद विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा के समय डमरू बजाना चाहिए. पूजा के बाद मंदिर में ही डमरू को रखें. मान्यता है कि इस उपाय को करने से वास्तु दोष दूर होता है. (Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Sankashti Chaturthi 2025: बप्पा को प्रसन्न करने की सबसे असरदार पूजा विधि, जानिए मंत्र और भोग

Gajanan Sankashti Chaturthi 2025 Date In Sawan: सनातन धर्म में सावन माह महादेव के लिए समर्पित है. इस माह में वैसे तो महादेव की पूजा होती है लेकिन संकष्टी चतुर्थी के व्रत का संकल्प भी भक्त करते हैं. यह व्रत करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. Gajanan Sankashti Chaturthi 2025 Kab Hai: इस साल 11 जुलाई से सावन माह शुरू हो रहा है जो महादेव को समर्पित है. भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना इस माह में पूरे भक्ति भाव से की जाती है. सावन सोमवार पर व्रत रखने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. वैसे तो पूरा सावन ही एक पर्व की तरह है लेकिन इस महीने में कई प्रमुख व्रत-त्योहार भी पड़ते हैं. गजानन संकष्टी चतुर्थी पर्व कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है और यह पर्व भगवान गणेश की भक्ति के लिए समर्पित है. आय और सौभाग्य में वृद्धि के लिए भक्त इस व्रत का संकल्प करते हैं.  गजानन संकष्टी चतुर्थी 2025 डेट: Gajanan Sankashti Chaturthi 2025 date Sankashti Chaturthi:गजानन संकष्टी चतुर्थी पर्व हर साल सावन माह के कृष्ण चतुर्थी तिथि पर मनाई जाती है. वैदिक पंचांग की मानें तो सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 14 जुलाई को देर रात 01 बजकर 02 मिनट पर हो रही है और तिथि का समापन 14 जुलाई को देर रात को 11 बजकर 59 मिनट पर हो रहा है. उदया तिथि में 14 जुलाई को गजानन संकष्टी चतुर्थी पर्व मनाई जाएगी. गजानन संकष्टी चतुर्थी 2025 के दिन शुभ योग:Gajanan Sankashti Chaturthi 2025 Subh yog ज्योतिष अनुसार आयुष्मान और सौभाग्य योग गजानन संकष्टी चतुर्थी पर बन रहा है. शाम 04 बजकर 14 मिनट तक आयुष्मान योग होगा और फिर सौभाग्य योग का संयोग बनेगा. इस योग में भगवान गणेश की पूजा अर्चना करना अति शुभ होगा. घर में सुख और सौभाग्य बढ़ेगा और जीवन के सभी दुखों का नाश होगा और संकट दूर हो होगा.  गजानन संकष्टी चतुर्थी 2025 के दिन शुभ योग: Gajanan Sankashti Chaturthi 2025 Subh yog ज्योतिष अनुसार आयुष्मान और सौभाग्य योग गजानन संकष्टी चतुर्थी पर बन रहा है. शाम 04 बजकर 14 मिनट तक आयुष्मान योग होगा और फिर सौभाग्य योग का संयोग बनेगा. इस योग में भगवान गणेश की पूजा अर्चना करना अति शुभ होगा. घर में सुख और सौभाग्य बढ़ेगा और जीवन के सभी दुखों का नाश होगा और संकट दूर हो होगा.  गजानन संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि (Vikata Sankashti Chaturthi 2025 Puja Vidhi) भोग ( गजानन संकष्टी चतुर्थी 2025 Bhog) पूजन मंत्र (गजानन संकष्टी चतुर्थी 2025) संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ ( गजानन संकष्टी चतुर्थी 2025 Vrat Benefits)

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Shukra Gochar July: सावन 2025 में इन राशियों की किस्मत चमकेगी! मिथुन राशि में शुक्र गोचर लाएगा खुशियों की बारिश

Shukra Gochar: वर्तमान समय में सुखों के कारक शुक्र देव वृषभ राशि में विराजमान हैं। इस राशि में शुक्र देव 25 जुलाई तक रहेंगे। इसके अगले दिन शुक्र देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में गोचर करेंगे। शुक्र देव (Shukra Gochar 2025) के राशि परिवर्तन से कई राशि के जातकों को लाभ मिलेगा। वैदिक पंचांग गणना अनुसार, शुक्रवार 11 जुलाई से सावन महीना प्रारंभ हो रहा है। यह महीना कई राशि के जातकों के लिए मंगलकारी रहने वाला है। शुक्र देव की कृपा से सावन महीने में इन राशियों को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी। Shukra Gochar साथ ही आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। आइए, इन राशियों के बारे में जानते हैं- Shukra Gochar July: शुक्र ग्रह को वैदिक ज्योतिष में प्रेम, सौंदर्य, भौतिक सुख-सुविधा और सौहार्द्र का कारक माना जाता है। 26 जुलाई 2025 को शुक्र मिथुन राशि में गोचर करेंगे। आइये जानते हैं सभी राशियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा (Shukra Rashi Parivartan Mithun Rashi) । Shukra Rashi Parivartan Mithun Rashi In Sawan: पंचांग के अनुसार शुक्र अभी वृषभ राशि में गोचर कर रहे हैं। वो 26 जुलाई 2025 को सुबह 09.02 बजे मिथुन राशि में गोचर करेंगे। इससे सभी राशि के लोगों के संवाद, लचीलेपन, प्रेम संबंधों, सामाजिक जुड़ाव, सौंदर्य और रचनात्मकता में नवीनता आदि का प्रभावित करेगा (Shukra Gochar July 2025 Horoscope)। शुक्र यहां 20 अगस्त 2025 तक भ्रमण करेंगे और बुधवार देर रात 1.25 बजे यानी बृहस्पतिवार सुबह कर्क राशि में गोचर करेंगे। आइये जानते हैं मिथुन राशि में शुक्र गोचर का किन राशियों को लाभ होगा। Shukra Gochar July: शुक्र गोचर इन 12 राशियों पर शुभ अशुभ असर डालेगा मेष राशि शुक्र गोचर 2025 से मेष राशि के लोगों की संवाद कला में निखार आएगा। Shukra Gochar इससे मेष राशि वालों को नई बातें सीखने का मौका मिलेगा। बातचीत में मिठास आएगी, रिश्ते बेहतर होंगे। लेकिन रिश्तों पर जल्दबाजी में फैसला न लें। साथ ही आर्थिक मिलेगा। यदि आप लेखन, वाणी या पब्लिक स्पीकिंग से जुड़ा काम करते हैं तो लाभ हो सकता है। बुद्धिमत्ता और तर्क शक्ति का प्रयोग कर करियर में नई ऊंचाई छू सकते हैं। उपाय: शुक्र के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए शुक्रवार के दिन सफेद कपड़े पहनें और ॐ शुक्राय नमः मंत्र का जाप करें। वृषभ राशि शुक्र राशि परिवर्तन जुलाई 2025 में रिश्तों को संतुलित करने और पारिवारिक जुड़ाव को मजबूत करने का संकेत दे रहा है। इस समय बातचीत में विनम्रता आएगी। साथ ही आर्थिक स्थिरता का मौका मिल सकता है। टीमवर्क और समझदारी भरा व्यवहार प्रोफेशन में आगे बढ़ाएगा। Shukra Gochar परिवार में सुख-शांति बनी रहे, इसके लिए प्रयास करें। कई पुराने मुद्दे हल हो सकते हैं और घर का माहौल शांतिपूर्ण हो सकता है। उपाय: शुक्रवार को किसी जरूरतमंद को दान करें और दूध जैसी सफेद चीजों का सेवन करें। मिथुन राशि शुक्र मिथुन राशि में गोचर कर रहे हैं, इससे ये राशि सबसे अधिक प्रभावित होगी। यह समय रचनात्मकता और आत्म-प्रकाशन के नए रास्ते खोलेगा। किसी क्रिएटिव प्रोजेक्ट, मीडिया, आर्ट या नेटवर्किंग से जुड़े हैं तो लाभ मिलेगा। Shukra Gochar शुक्र गोचर मिथुन राशि वालों को आर्थिक लाभ पहुंचाएगा। पर्सनॉलिटी आकर्षक बनेगी। नए लोगों से संपर्क बढ़ेगा, पुराने रिश्तों को मजबूत करेगा। साफ बात करें ताकि गलतफहमी न हो। उपाय: नियमित ध्यान करें और व्यवहार में विनम्रता रखें। कर्क राशि शुक्र गोचर जुलाई 2025 के प्रभाव से लंबी अवधि की योजनाओं में निवेश या कोई नया ज्ञान अर्जित करने में लाभ दिलाएगा। Shukra Gochar अगर आप किसी शैक्षणिक या रिसर्च से जुड़े क्षेत्र में हैं तो यह समय अच्छा है। अपने गुरु, मेंटर्स और घर के बुजुर्गों से रिश्ते मजबूत करने का प्रयास करें। इससे निजी और प्रोफेशनल फैसलों में मदद मिलेगी। उपाय: हर रोज शाम को चंद्रमा को सफेद फूल अर्पित करें और ॐ चंद्राय नमः मंत्र का जाप करें। सिंह राशि शुक्र का मिथुन राशि में गोचर 2025 जीवन में बदलाव और आत्म-विकास के नए अवसर लाएगा। Shukra Gochar इस अवधि में छुपे या अप्रत्याशित स्रोतों से धन लाभ हो सकता है। नए रास्तों और परिवर्तन को खुले दिल से स्वीकार करें। इससे आर्थिक रूप से लाभ हो सकता है। रिश्तों में धैर्य और खुलकर बात करना जरूरी रहेगा। वर्चस्व या अहंकार को हावी न होने दें। रिश्ते मजबूत करने के लिए सामने वालों की भावनाओं को समझें। उपाय: रोज शाम देसी घी का दीपक जलाएं और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। कन्या राशि शुक्र गोचर 2025 से धन लाभ के मौके मिल सकते हैं, लेकिन निवेश में जोखिम न लें। व्यावहारिक सोच और सूझ-बूझ से काम लेंगे तो आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। नेटवर्किंग से भविष्य में अच्छे फल मिलेंगे। पार्टनरशिप में सामंजस्य बनाएं, दूसरों की बातों को भी अहमियत दें। उपाय: जरूरतमंदों को हरी सब्जी दान करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। तुला राशि तुला राशि वालों के लिए मिथुन राशि में शुक्र गोचर 2025 पार्टनरशिप और रिश्तों में खुशियां लाएगा। Shukra Gochar इससे आर्थिक लाभ मिल सकता है। यह समय शादी या व्यापारिक साझेदारी के लिए बहुत अनुकूल है। लेकिन रिश्तों में सामंजस्य बनाए रखने पर जोर दें। उपाय: शुक्रवार के दिन गाय को रोटी या हरा चारा खिलाएं और श्री सूक्त का पाठ करें। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों के लिए मिथुन राशि में शुक्र गोचर करियर में तरक्की के नए मौके लाएगा। प्रमोशन या नई नौकरी के योग बन सकते हैं। लेकिन तनाव को संभालना आवश्यक है, क्योंकि कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। गलतफहमी से बचने के लिए बातचीत में थोड़ा संयम रखें। उपाय: शुक्रवार के दिन पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएं। धनु राशि मिथुन राशि में शुक्र का राशि परिवर्तन जुलाई 2025 आपके लिए समझ बढ़ाने वाला है। Shukra Gochar हालांकि कुछ रिश्तों में उलझनें आ सकती हैं। इन चुनौतियों को संभालने की कोशिश करनी होगी। नए विचारों को अपनाने के लिए खुद को तैयार रखें। बदलाव को स्वीकार करें और दूसरों को भी समझें। इससे रिश्ते बेहतर होंगे। उपाय: पीले पुखराज रत्न धारण करें। मकर राशि शुक्र गोचर Shukra Gochar जुलाई 2025 मकर राशि वालों के लिए आर्थिक रूप से थोड़ी चुनौतियां ला सकता है। लेकिन धैर्य से काम लेने पर अच्छे नतीजे मिलेंगे। जल्दीबाजी में कोई फैसला न लें, इससे रिश्ता मजबूत होगा। आध्यात्मिकता की ओर

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Sapne Mein Nadi Dekhna: सपने में नदी देखना क्या संकेत देता है? जानिए इसका गहरा अर्थ

Sapne Mein Nadi Dekhna: स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में नदी देखने के कई शुभ और अशुभ संकेत बताए गए हैं। आइए जानते हैं नदी से जुड़े इन सपनों का क्या मतलब है… व्यक्ति जब गहरी नींद में होता है तो वह सपने देखता है। व्यक्ति सपने में न जाने से कहां से कहां पहुंच जाता है, पर जब उठता है तो खुद को बेड पर ही पाता है। हालांकि देखे हुए सपने का कोई न कोई मतलब जरूर निकलता है। ऐसे में यदि आपको सपने में पानी से जुड़ी चीजें दिखती हैं तो उनका क्या मतलब होता है? तो चलिए जानते हैं कि इन सपनों का क्या अर्थ होता है और साथ ही जानेंगे कि ये सपने शुभ होते हैं या फिर अशुभ। Dream Interpretation: व्यक्ति जब गहरी नींद में होता है तो वह सपने देखता है। व्यक्ति सपने में न जाने से कहां से कहां पहुंच जाता है, पर जब उठता है तो खुद को बेड पर ही पाता है। हालांकि देखे हुए सपने का कोई न कोई मतलब जरूर निकलता है। ऐसे में यदि आपको सपने में पानी से जुड़ी चीजें दिखती हैं तो उनका क्या मतलब होता है? तो चलिए जानते हैं कि इन सपनों का क्या अर्थ होता है और साथ ही जानेंगे कि ये सपने शुभ होते हैं या फिर अशुभ। Sapne Mein Nadi Dekhna: सपने में नदी देखना क्या संकेत देता है 1. नदी का बहता हुआ पानी देखना: watching the flowing water of the river स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि कोई व्यक्ति Nadi Dekhna सपने में नदी का बहता हुआ पानी देखता है तो यह एक शुभ संकेत माना जाता है। इस सपने का अर्थ है कि आपके जीवन में कोई बड़ा परिवर्तन होने वाला है जो कि एक शुभ परिणाम देगा। 2. सपने में नदी के किनारे खड़े रहना: Standing on the bank of a river in a dream: यदि कोई व्यक्ति सपने में स्वयं नदी किनारे खड़े होकर बहते हुए पानी को देखता है, तो यह सपना इस बात की ओर इशारा करता है कि आपके मन में कोई दबी हुई इच्छा जल्द ही पूर्ण होने वाली है और आपकी किस्मत खुलने वाली है। 3. नदी के तेज बहाव में बहते हुए देखना: Seeing a river flowing fast सपने शास्त्र के अनुसार इस तरह का सपना शुभ नहीं माना जाता है। Nadi Dekhna यह सपना इस बात की ओर इशारा करता है कि निकट भविष्य में आपके जीवन में कुछ समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। 4. किसी को नदी में डूबते हुए देखना: seeing someone drowning in a river यदि कोई व्यक्ति सपने में किसी दूसरे व्यक्ति को डूबते हुए देता है तो वह इस बात को सपने का अर्थ है कि आप अपने कार्य को ठीक तरह से नहीं कर पा रहे हैं, Nadi Dekhna इसलिए संभल जाएं अन्यथा आपको आपको परेशानी हो सकती है। 5. सपने में समुद्र देखने का अर्थ:Meaning of seeing sea in dream Nadi Dekhna: सपने में यदि आप समुद्र देखते हैं तो ये सपना आपके लिए अशुभ होता है। जब भी ऐसे सपने देखें तो भविष्य के प्रति सतर्क हो जाएं। स्वप्न शास्त्र की मानें तो ऐसा सपना देखना भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना के होने की आशंका होती है। इसके साथ ही धन हानि भी हो सकती है। इसके अलावा यदि आप समुद्र में खुद को खड़ा हुआ देखते हैं तो इसका अर्थ है कि आपसे कोई ऐसी गलती हुई है जिसे सुधारने की जरूरत है। 6. सपने में तालाब देखने का अर्थ:Meaning of seeing pond in dream सपने में यदि आप तालाब देखते हैं तो स्वप्न शास्त्र में इसे भी शुभ माना गया है। Nadi Dekhna सपने में तालाब को देखना शुभ होता है। यदि तालाब का पानी साफ दिखता है तो ये शुभ होता है। यदि आप ने तालाब में या किसी भी जगह पर गंदा पानी देखा है तो ये अशुभ होता है।

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Shivling Puja Vidhi: भोलेनाथ नहीं सुन रहे आपकी पुकार, तो इस दिशा में खड़े होकर चढ़ाएं शिवलिंग पर जल, जल्द होगी हर इच्छा पूरी

Shivling Puja Vidhi: शिवलिंग पर जल चढ़ाने की भी एक निर्धारित दिशा होती है। यदि जल अर्पित करते समय सही दिशा का ध्यान न रखा जाए, तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। आइए जानते हैं शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए कौन-सी दिशा उपयुक्त मानी जाती है? Shivling Puja Vidhi: भगवान शिव की पूजा में विधि-विधान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि यदि शिवलिंग पर विधिपूर्वक जल चढ़ाया जाए, तो भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने की भी एक निर्धारित दिशा होती है? यदि जल अर्पित करते समय सही दिशा का ध्यान न रखा जाए, तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। इसलिए यह जानना आवश्यक है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए कौन-सी दिशा उपयुक्त मानी जाती है। Somwar upay: सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है. इस दिन अधिकतर लोग शिव मंदिर जाते हैं और शिव जी पूजा कर उन्हें जल अर्पित करते हैं. शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग पर श्रृद्धाभाव से जल चढ़ाने मात्र से भगवान प्रसन्न हो जाते हैं Shivling Puja Vidhi और उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही दिशा क्या होती है? अगर नहीं तो जान लें कि भोलेनाथ पर जल चढ़ाते समय दिशा का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. क्योंकि अगर आप गलत दिशा में खड़े होकर जल अर्पित करते हैं तो इससे आपको पूजा का फल नहीं मिल पाता है. दरअसल, शिवलिंग पर जल चढ़ाने के कुछ नियम होते हैं. Shivling Puja Vidhi जिसमें सही दिशा भी बहुत मायने रखती है. ऐसे में आइए पंडित रमाकांत मिश्रा के अनुसार जानते हैं कि सोमवार के दिन जब भी शिव मंदिर जाएं तो शिवलिंग पर जल किस दिशा में खड़े होकर चढ़ायें. शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही दिशा: Shivling Puja Vidhi धार्मिक शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय हमेशा दक्षिण दिशा में खड़े होकर जल चढ़ाना चाहिए। Shivling Puja Vidhi ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। इसके विपरीत पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करना वर्जित माना गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह शिवलिंग का प्रमुख प्रवेश द्वार होता है और इस दिशा में खड़े होकर जल चढ़ाने से पूजा का प्रभाव कम हो सकता है। साथ ही जब दक्षिण दिशा में खड़े होकर जल चढ़ाएं, तो यह सुनिश्चित करें कि जल प्रवाह उत्तर दिशा की ओर जाए, इसे शुभ और फलदायी माना जाता है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने के महत्वपूर्ण नियम: Important rules for offering water to Shivalinga शिवलिंग पर कभी भी अशुद्ध, बासी या गंदा जल नहीं चढ़ाना चाहिए। यह अशुभ माना जाता है। जल चढ़ाने के लिए तांबे, पीतल या चांदी के लोटे का प्रयोग करना श्रेष्ठ माना जाता है। अभिषेक करते समय सीधे खड़े रहने की बजाय झुककर या बैठकर जल अर्पित करना चाहिए, इससे श्रद्धा और विनम्रता प्रकट होती है। शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय यह ध्यान दें कि जल या दूध की धारा अत्यधिक मोटी न हो, बल्कि धीमी और पतली रहे। जल अर्पण करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है, इससे पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इस दिशा में खड़े होकर चढ़ाएं जल: Stand in this direction and offer water Shivling Puja Vidhi शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर हमेशा दक्षिण दिशा में खड़े होकर जल चढ़ाना चाहिए. इसके आपको बता दें कि जल कभी भी पूर्व दिशा की तरफ मुख करके जल नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि इस दिशा में शिव जी का मुख्य प्रवेश द्वार होता है. इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि जब आप दक्षिण दिशा में खड़े होकर जल अर्पित कर रहे हैं तो आपका जल उत्तर दिशा की तरफ जाए. यह उत्तम माना जाता है.

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