Sawan 2026

Sawan 2026 Start Date : सावन शिव भक्तों के लिए असीम कृपा का महापर्व की सही तिथि, 4 सोमवार व्रत, मंगला गौरी और अचूक पूजा विधि….

Sawan 2026 Mein Kab Se Suru Ho Raha Hai : सनातन धर्म और हमारी अत्यंत प्राचीन भारतीय संस्कृति में भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा, पवित्र और अद्भुत उत्सव श्रावण मास यानी सावन का महीना होता है। जब झुलसा देने वाली भयंकर गर्मी के बाद मानसून अपनी चरम सीमा पर पहुँचता है और प्रकृति चारों ओर से हरियाली की एक सुंदर व ताजी चादर ओढ़ लेती है, तब हिंदू वैदिक पंचांग का यह पांचवां और सबसे अधिक पुण्यकारी महीना शुरू होता है। इस पावन महीने में चारों दिशाओं के शिवालयों में केवल ‘हर हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे ही गूंजते हैं। जो भी सच्चे शिव भक्त पूरे वर्ष भर इस अलौकिक समय का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, उनके लिए Sawan 2026 का यह पावन अवसर एक नई जाग्रत आध्यात्मिक ऊर्जा, मानसिक सुख-शांति और भगवान भोलेनाथ का असीम आशीर्वाद लेकर आ रहा है। Sawan 2026 यह महीना न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि इंसान की आत्मिक शुद्धि और कर्मों के सुधार के लिए भी अत्यंत फलदायी और चमत्कारी माना जाता है। तिथियां और पंचांग की एकदम सटीक गणना (कब से शुरू होगा सावन 2026 ) : Precise calculation of dates and the almanac (when Sawan 2026 begins)….. हिंदू धर्म में किसी भी बड़े व्रत, अनुष्ठान या त्योहार की शुरुआत हमेशा पंचांग की एकदम सटीक और शास्त्रोक्त गणनाओं के आधार पर ही की जाती है। यदि हम गहराई से बात करें कि इस वर्ष सावन का यह जाग्रत महीना कब से शुरू हो रहा है, तो वैदिक ज्योतिष और उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार श्रावण मास की प्रतिपदा तिथि 29 जुलाई की रात में ही लग जाएगी। लेकिन हमारे सनातन धर्म के अत्यंत कड़े और प्रामाणिक नियमों के अनुसार, सूर्योदय के समय जो तिथि मौजूद होती है (जिसे उदया तिथि कहा जाता है), उसी को सर्वमान्य और पूर्ण रूप से शुभ माना जाता है। इसी प्राचीन उदया तिथि की परंपरा का कड़ाई से पालन करते हुए, Sawan 2026 की आधिकारिक, विधिवत और शुभ शुरुआत 30 जुलाई (गुरुवार) से होगी। करीब एक महीने तक चलने वाले भक्ति और साधना के इस विशाल उत्सव का विधिवत समापन हमेशा श्रावण पूर्णिमा के शुभ दिन पर होता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार Sawan 2026 का पूर्ण समापन 28 अगस्त (शुक्रवार) को होगा। Sawan 2026 आपको यह जानकर भी बेहद खुशी होगी कि इसी अंतिम दिन (श्रावण पूर्णिमा को) भाई-बहन के पवित्र और अटूट प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक, रक्षाबंधन का पावन पर्व भी पूरे भारतवर्ष में अपार हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया जाएगा। सावन के सोमवार व्रतों का विशेष महत्व और अचूक तिथियां : The Special Significance and Auspicious Dates of the Sawan Monday Fasts…. सावन का पूरा का पूरा महीना ही भगवान शिव को पूरी तरह से समर्पित होता है, लेकिन इस महीने में पड़ने वाले हर एक सोमवार का अपना एक अलग, बहुत ही गहरा और रहस्यमयी आध्यात्मिक महत्व होता है। शिव पुराण और अन्य प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सोमवार का दिन भगवान शिव को सबसे अधिक प्रिय है। Sawan 2026 मान्यता है कि इस विशेष दिन व्रत रखने, सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और शिवलिंग पर शुद्ध गंगाजल, गाय का कच्चा दूध, ताजे बेलपत्र, भांग, चंदन और धतूरा अत्यंत आदरपूर्वक अर्पित करने से इंसान की हर मनोकामना बहुत ही शीघ्र पूरी हो जाती है। यदि आप भी शिव जी की असीम कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए इस पावन Sawan 2026 में व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि इस साल शिव भक्ति के लिए कुल 4 विशेष सावन सोमवार व्रत पड़ेंगे। इन व्रतों की एकदम सटीक तिथियां इस प्रकार हैं: पहला सावन सोमवार व्रत: 3 अगस्त दूसरा सावन सोमवार व्रत: 10 अगस्त तीसरा सावन सोमवार व्रत: 17 अगस्त चौथा और अंतिम सावन सोमवार व्रत: 24 अगस्त इन चारों पावन दिनों में देश के सभी छोटे-बड़े, प्राचीन और सिद्ध शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भारी और उत्साहपूर्ण भीड़ देखने को मिलेगी, जो अपनी सच्ची निष्ठा और श्रद्धा से महादेव का पवित्र जलाभिषेक करेंगे। सुहागिन महिलाओं और कन्याओं के लिए 4 मंगला गौरी व्रत : 4 Mangala Gauri Vrats for married women and young girls. सावन का महीना केवल भगवान शिव की पूजा और आराधना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की देवी माता पार्वती के प्रति अपनी अटूट आस्था और समर्पण प्रकट करने का भी सबसे श्रेष्ठ समय है। सावन के हर मंगलवार को माता पार्वती (मां गौरी) की एक विशेष और भव्य पूजा की जाती है, जिसे शास्त्रों में ‘मंगला गौरी व्रत’ के नाम से जाना जाता है। विशेष रूप से Sawan 2026 में पड़ने वाले ये मंगलवार के व्रत विवाहित महिलाओं के लिए किसी जाग्रत ईश्वरीय वरदान से कम नहीं हैं। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उनके उत्तम स्वास्थ्य, करियर में सफलता और अपने वैवाहिक जीवन में अगाध प्रेम व सुख-शांति बनाए रखने के लिए यह व्रत पूरे नियम और निष्ठा से रखती हैं। वहीं दूसरी ओर, अविवाहित कन्याएं भविष्य में एक अत्यंत योग्य, संस्कारी और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त करने की गहरी इच्छा से इस व्रत का कठोरता से पालन करती हैं। इस वर्ष Sawan 2026 में कुल 4 मंगला गौरी व्रत अत्यंत शुभ योगों में रखे जाएंगे, जिनकी पक्की तारीखें इस प्रकार हैं: पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त कांवड़ यात्रा का अलौकिक, भव्य और भक्तिमय माहौल : The ethereal, magnificent, and devotional atmosphere of the Kanwar Yatra. सावन के महीने और कांवड़ यात्रा का रिश्ता बिल्कुल एक शरीर और उसकी आत्मा जैसा है। सावन का पावन महीना शुरू होते ही देश के विभिन्न राजमार्गों और मार्गों पर केसरिया रंग के पवित्र वस्त्र धारण किए हुए शिवभक्तों (कांवड़ियों) की लंबी और विशाल कतारें दिखाई देने लगती हैं। लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, उत्तराखंड की पहाड़ियों में स्थित गंगोत्री, बिहार के सुल्तानगंज और अन्य प्रमुख पवित्र तीर्थ स्थलों से शुद्ध गंगाजल भरकर पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की अत्यंत कठिन यात्रा करते हुए अपने-अपने शिव मंदिरों तक पहुँचते हैं। आगामी Sawan 2026 के इस अत्यंत पवित्र महीने में

Sawan 2026 Start Date : सावन शिव भक्तों के लिए असीम कृपा का महापर्व की सही तिथि, 4 सोमवार व्रत, मंगला गौरी और अचूक पूजा विधि…. Read More »

Suktam Stotra

Sarpa Suktam Stotra : सर्प सूक्त स्तोत्र…..

सर्प सूक्त स्तोत्र हिंदी पाठ : Sarpa Suktam Stotra in Hindi ब्रह्मलोकुषु ये सर्पा: शेषनाग पुरोगमा: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: वासुकि प्रमुखादय: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। कद्रवेयाश्च ये सर्पा: मातृभक्ति Suktam Stotra परायणा ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। इंद्रलोकेषु ये सर्पा: तक्षका प्रमुखादय: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। सत्यलोकेषु ये सर्पा: वासुकिना च रक्षिता ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। मलये चैव ये सर्पा: कर्कोटक प्रमुखादय: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। पृथिव्यांचैव ये सर्पा: ये साकेत वासिता ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। सर्वग्रामेषु ये सर्पा: वसंतिषु Suktam Stotra संच्छिता ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। ग्रामे वा यदिवारण्ये ये सर्पा प्रचरन्ति च ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। समुद्रतीरे ये सर्पा ये सर्पा जलवासिन: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। रसातलेषु या सर्पा: अनन्तादि महाबला: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। ।। इति सर्प सूक्त स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

Sarpa Suktam Stotra : सर्प सूक्त स्तोत्र….. Read More »

Rahasya Stotra

Saraswati Rahasya Stotra : श्री सरस्वती रहस्य स्तोत्रम्…….

श्री सरस्वती रहस्य स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Saraswati Rahasya Stotra in Hindi नीहारहारघनसारसुधाकराभांकल्याणदां कनकचम्पकदामभूषाम् ।उत्तुङ्गपीनकुचकुंभमनोहराङ्गीं वाणींनमामि मनसा वचसा विभूत्यै ॥ १ ॥ या वेदान्तार्थतत्त्वैकस्वरूपा परमेश्वरी ।नामरूपात्मना व्यक्ता सा मां पातु सरस्वती ॥ २ ॥ या साङ्गोपाङ्गवेदेषु Rahasya Stotra चतुर्ष्वेकैव गीयते ।अद्वैता ब्रह्मणः शक्तिः सा मां पातु सरस्वती ॥ ३ ॥ या वर्णपदवाक्यार्थस्वरूपेणैव वर्तते ।अनादिनिधनानन्ता सा मां पातु सरस्वती ॥ ४ ॥ अध्यात्ममधिदैवं च देवानां सम्यगीश्वरी ।प्रत्यगास्ते वदन्ती या सा मां Rahasya Stotra पातु सरस्वती ॥ ५ ॥ अन्तर्याम्यात्मना विश्वं त्रैलोक्यं Rahasya Stotra या नियच्छति ।रुद्रादित्यादिरूपस्था सा मां पातु सरस्वती ॥ ६ ॥ या प्रत्यग्दृष्टिभिर्जीवैर्व्यजमानानुभूयते ।व्यापिनी ज्ञप्तिरूपैका सा मां पातु सरस्वती ॥ ७ ॥ नामजात्यादिभिर्भेदैरष्टधा या विकल्पिता ।निर्विकल्पात्मना व्यक्ता सा मां पातु सरस्वती ॥ ८ ॥ व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम् ।सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती ॥ ९ ॥ यां विदित्वाखिलं बन्धं निर्मथ्याखिलवर्त्मना ।योगी याति परं स्थानं सा मां पातु सरस्वती ॥ १० ॥ नामरूपात्मकं सर्वं यस्यामावेश्य तां पुनः ।ध्यायन्ति ब्रह्मरूपैका सा मां पातु सरस्वती ॥ ११ ॥ चतुर्मुखमुखाम्भोजवनहंसवधूर्मम ।मानसे रमतां नित्यं सर्वशुक्ला सरस्वती ॥ १२ ॥ नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि ।त्वामहं प्रार्थये नित्यं  विद्यादानं च देहि मे ॥ १३ ॥ अक्षसूत्राङ्कुशधरा पाशपुस्तकधारिणी ।मुक्ताहारसमायुक्ता वाचि तिष्ठतु मे सदा ॥ १४ ॥ कम्बुकण्ठी सुताम्रोष्ठी सर्वाभरणभूषिता ।महासरस्वती देवी जिह्वाग्रे सन्निवेश्यताम् ॥ १५ ॥ या श्रद्धा धारणा मेधा वाग्देवी विधिवल्लभा ।भक्तजिह्वाग्रसदना शमादिगुणदायिनी ॥ १६ ॥ नमामि यामिनीनाथलेखालंकृतकुन्तलां ।भवानीं भवसन्तापनिर्वापणसुधानदीम् ॥ १७ ॥ यः कवित्वं निरातन्कं भुक्तिमुक्ती च वाञ्छति ।सोऽभ्यर्च्यैनां दशश्लोक्या नित्यं स्तौति सरस्वतीम् ॥ १८ ॥ तस्यैवं स्तुवतो नित्यं समभ्यर्च्य सरस्वतीं ।भक्तिश्रद्धाभियुक्तस्य षण्मासात्प्रत्ययो भवेत् ॥ १९ ॥ ततः प्रवर्तते वाणी स्वेच्छया ललिताक्षरा ।गद्यपद्यात्मकैः शब्दैरप्रमेयैर्विवक्षितैः ॥अश्रुतो बुध्यते ग्रन्थः प्रायः सारस्वतः कविः ॥ २० ॥ ॥ इति श्री सरस्वती रहस्य……..

Saraswati Rahasya Stotra : श्री सरस्वती रहस्य स्तोत्रम्……. Read More »

एकादशी

July 2026 Vrat Tyohar : जुलाई में पड़ेंगे देवशयनी एकादशी, सावन से लेकर गुप्त नवरात्रि, देखें पूरी व्रत-त्योहार की लिस्ट…..

July 2026 Vrat Tyohar : नमस्कार दोस्तों! हिंदू पंचांग के अनुसार, जुलाई 2026 का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास होने वाला है। इस महीने आषाढ़ और श्रावण (सावन) मास का दिव्य संयोग बन रहा है। देवशयनी एकादशी, जगन्नाथ रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा, और महादेव का प्रिय सावन महीना इसी महीने में शुरू हो रहा है। त्योहारों की इस शुभ कड़ी में, यदि आप किसी भी व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, या सटीक पंचांग देखना चाहते हैं, तो आज ही अपने फोन में Karmasu App डाउनलोड करें। कर्मसु ऐप के जरिए आप घर बैठे आसान और शुद्ध तरीके से हमारे अनुभवी ‘कर्मसु आचार्यों’ द्वारा पूजा भी बुक करवा सकते हैं। आइए विस्तार से देखते हैं जुलाई 2026 के सभी प्रमुख व्रत और त्योहारों की पूरी लिस्ट: 1. योगिनी एकादशी (10 – 11 जुलाई 2026) आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस बार स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय के हिसाब से व्रत 10 जुलाई और 11 जुलाई को रखा जाएगा। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की सच्चे मन से आराधना करने से सभी पाप नष्ट होते हैं। 2. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि (15 जुलाई – 23 जुलाई 2026) मां दुर्गा की गुप्त आराधना, तंत्र-मंत्र और दस महाविद्या की साधना के लिए गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व है। इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई (बुधवार) से शुरू होकर 23 जुलाई (गुरुवार) तक चलेगी। (गुप्त नवरात्रि में विशेष ‘दुर्गा सप्तशती पाठ’ या हवन करवाने के लिए आज ही Karmasu App चेक करें)। 3. श्री जगन्नाथ रथ यात्रा (16 जुलाई 2026) ओडिशा के पुरी के साथ-साथ देशभर में भगवान जगन्नाथ की विशाल रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकाली जाती है। इस साल यह आध्यात्मिक महापर्व 16 जुलाई को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। 4. देवशयनी एकादशी और चातुर्मास (25 जुलाई 2026) हिंदू धर्म में देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इस दिन से भगवान विष्णु आगामी 4 महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ हो जाएगा और शादी-विवाह जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। 5. गुरु पूर्णिमा और व्यास पूजा (29 जुलाई 2026) अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, भक्ति और आभार व्यक्त करने का पावन दिन, गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाया जाएगा। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं क्योंकि इस दिन चारों वेदों के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। 6. श्रावण (सावन) मास 2026 (30 जुलाई से आरंभ) महादेव के भक्तों का सबसे प्रिय महीना ‘सावन’ 30 जुलाई 2026, गुरुवार से शुरू हो रहा है। इस बार सावन में कुल 4 सोमवार पड़ेंगे: जुलाई 2026 के अन्य प्रमुख व्रत और त्योहार (संक्षिप्त सूची): अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आसान बनाएं – Karmasu App डाउनलोड करें! 📲 आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर हम पूजा के शुभ मुहूर्त या व्रत कथा भूल जाते हैं। लेकिन अब Karmasu App आपके धार्मिक जीवन को पूरी तरह से व्यवस्थित करेगा! Karmasu App पर आपको क्या-क्या मिलता है? तो देर किस बात की? अभी Google Play Store या Apple App Store पर जाएं और Karmasu App डाउनलोड करें। “कर्मसु (Karmasu) – अध्यात्म और शांति का अपना ठिकाना!”

July 2026 Vrat Tyohar : जुलाई में पड़ेंगे देवशयनी एकादशी, सावन से लेकर गुप्त नवरात्रि, देखें पूरी व्रत-त्योहार की लिस्ट….. Read More »

Gita Stotra

Saptashloki Gita Stotra : सप्तश्लोकी गीता स्तोत्र…..

Saptashloki Gita Stotra : संकटनाशन गणेश स्तोत्र: संकटनाशन गणेश स्तोत्र बहुत ही मददगार और फायदेमंद है। इसके पाठ से आप अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं, मुश्किल समय से बाहर निकल सकते हैं और अपनी ज़िंदगी को अपनी पसंद के अनुसार खुशहाल बना सकते हैं। यह भगवान गणेश के सबसे असरदार स्तोत्रों में से एक है। यह हर तरह की परेशानियों को दूर करता है। Gita Stotra रोज़ाना इस स्तोत्र का पाठ करने से इंसान सभी तरह की मुश्किलों से आज़ाद हो जाता है। भगवान गणेश सभी परेशानियों को हल करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और संतोष लाते हैं। किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। प्राचीन पूजा-पद्धति में भगवान गणेश का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। वेदों और पुराणों में भगवान गणेश की पूजा के कई फायदों के बारे में बताया गया है। यह भगवान गणेश के सबसे असरदार स्तोत्रों में से एक है। Gita Stotra यह हर तरह की परेशानियों को दूर करता है। Gita Stotra रोज़ाना इस संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करने से इंसान सभी तरह की मुश्किलों से आज़ाद हो जाता है। भगवान गणेश सभी परेशानियों को हल करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और संतोष लाते हैं। किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। प्राचीन पूजा-पद्धति में भगवान गणेश का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। वेदों और पुराणों में भगवान गणेश की पूजा के कई फायदों के बारे में बताया गया है। Gita Stotra सुबह-सुबह भगवान गणेश को दूर्वा (एक प्रकार की घास) चढ़ाने से इंसान सभी बाधाओं को पार कर सकता है। घर के मुख्य दरवाज़े पर भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति लगाना फायदेमंद होता है। Gita Stotra भगवान गणेश को दूर्वा और मोतीचूर के लड्डू चढ़ाने चाहिए। इससे समृद्धि आती है और इंसान कभी गरीब नहीं रहता। संकटनाशन गणेश स्तोत्र के फायदे: भगवान गणेश का संबंध ब्रह्मा, विष्णु और शिव से माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि बाकी सभी देवताओं की उत्पत्ति भगवान गणेश से ही हुई है। भगवान गणेश की कृपा से व्यक्ति का जीवन स्वस्थ और खुशहाल बनता है। ऐसा व्यक्ति सभी मुश्किलों पर जीत हासिल करने में सक्षम होता है। भगवान गणेश अपार ज्ञान के स्वामी हैं और सभी कष्टों को दूर करते हैं। हिंदू धर्म में, किसी भी काम को पूरा करने के लिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है। शास्त्रों में भगवान गणेश की पूजा के कई तरीके बताए गए हैं। इन्हीं में से एक तरीका है ‘संकटनाशन गणेश स्तोत्र’ का पाठ करना। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, सिंदूर, घी, दीपक और मोदक ज़रूर अर्पित करने चाहिए। किसे करना चाहिए इस स्तोत्र का पाठ: जो व्यक्ति जीवन में सफलता पाना चाहता है, उसे बेहतर नतीजों के लिए इस ‘संकटनाशन गणेश स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए। सप्तश्लोकी गीता स्तोत्र हिंदी पाठ : Saptashloki Gita Stotra in Hindi ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् ।य: प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ।। 1 ।। स्थाने ऋषीकेश तव प्रकीत्र्याजगत्प्रह्र्ष्यत्यनुरज्यते च ।रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वेनमस्यन्ति च सिद्धसंघा: ।। 2 ।। सर्वत: प्राणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम् ।सर्वत:श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति ।। 3 ।। कविं पुराणमनुशासितारमणोरणीयांसमनुस्मरेद्य: ।सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूपमादित्यवर्णं तमस: परस्तात् ।। 4 ।। ऊर्ध्वमूलमध: शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम् ।छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् ।। 5 ।। सर्वस्यचाहं ह्रदि सन्निविष्टोमत्त: स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च ।वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्योवेदान्तक्रद्वेदविदेव चाहम् ।। 6 ।। मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायण: ।। 7 ।। ।। इति सप्तश्लोकी गीता स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

Saptashloki Gita Stotra : सप्तश्लोकी गीता स्तोत्र….. Read More »

Ganesh Stotra

Sankatnashan Ganesh Stotra : संकट नाशन गणेश स्तोत्र…..

Sankatnashan Ganesh Stotra : संकट नाशन गणेश स्तोत्र: संकट नाशन गणेश स्तोत्र एक बहुत ही मददगार और फायदेमंद स्तोत्र है। इसके पाठ से आप अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं, मुश्किल समय से बाहर निकल सकते हैं और अपनी ज़िंदगी को अपनी पसंद के अनुसार खुशहाल बना सकते हैं। यह भगवान गणेश के सबसे प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। यह सभी तरह की परेशानियों को दूर करता है। रोज़ाना संकट नाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करने से इंसान हर तरह की मुश्किलों से आज़ाद हो जाता है। भगवान गणेश सभी परेशानियों को हल करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और संतोष लाते हैं। Ganesh Stotra किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। प्राचीन पूजा-पद्धति में भगवान गणेश का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। वेदों और पुराणों में भगवान गणेश की पूजा के कई फायदों के बारे में बताया गया है। सुबह-सुबह भगवान गणेश को दूर्वा (एक प्रकार की घास) चढ़ाने से इंसान सभी बाधाओं को पार कर सकता है। Ganesh Stotra घर के मुख्य दरवाज़े पर भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति लगाना फायदेमंद होता है। भगवान गणेश को दूर्वा और मोतीचूर के लड्डू चढ़ाने चाहिए। इससे समृद्धि आती है और इंसान कभी गरीब नहीं रहता। संकट नाशन गणेश स्तोत्र के फायदे: भगवान गणेश का संबंध ब्रह्मा, विष्णु और शिव से माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि बाकी सभी देवताओं की उत्पत्ति भगवान गणेश से ही हुई है। भगवान गणेश की कृपा से व्यक्ति का जीवन स्वस्थ और खुशहाल बनता है। ऐसा व्यक्ति सभी मुश्किलों पर जीत हासिल करने में सक्षम होता है। भगवान गणेश अपार ज्ञान के स्वामी हैं और सभी कष्टों को दूर करते हैं। हिंदू धर्म में, किसी भी काम को पूरा करने के लिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है। Ganesh Stotra शास्त्रों में भगवान गणेश की पूजा के कई तरीके बताए गए हैं। इन्हीं में से एक तरीका यह स्तोत्र है। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, सिंदूर, घी, दीपक और मोदक ज़रूर अर्पित करने चाहिए। यह स्तोत्र किसे पढ़ना चाहिए: जो व्यक्ति जीवन में सफलता पाना चाहता है, Ganesh Stotra उसे बेहतर नतीजों के लिए ‘संकट नाशन गणेश स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए। संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी पाठ : Sankatnashan Ganesh Stotra in Hindi नारद उवाच – प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायु:कामार्थसिद्धये ।। 1 ।। प्रथमं वक्रतुंडं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ।। 2 ।। लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च ।सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाऽष्टमम् ।। 3 ।। नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ।। 4 ।। द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर: ।न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं परम् ।। 5 ।। विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ।। 6 ।। जपेदगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ।। 7 ।। अष्टानां ब्राम्हणानां च लिखित्वा य: समर्पयेत ।तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ।। 8 ।। ।। इति संकट नाशन गणेश…….

Sankatnashan Ganesh Stotra : संकट नाशन गणेश स्तोत्र….. Read More »

Ganesh Stotra

Sankat Nashan Ganesh Stotra : संकट नाशन गणेश स्तोत्र….

Sankat Nashan Ganesh Stotra : संकट नाशन गणेश स्तोत्र: संकट नाशन गणेश स्तोत्र एक बहुत ही मददगार और फायदेमंद स्तोत्र है। इसके पाठ से आप अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं, मुश्किल समय से बाहर निकल सकते हैं और अपनी ज़िंदगी को अपनी पसंद के अनुसार खुशहाल बना सकते हैं। यह भगवान गणेश के सबसे प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। यह सभी तरह की परेशानियों को दूर करता है। रोज़ाना संकट नाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करने से इंसान हर तरह की मुश्किलों से आज़ाद हो जाता है। भगवान गणेश सभी परेशानियों को हल करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और संतोष लाते हैं। किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। प्राचीन पूजा-पद्धति में भगवान गणेश का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। Ganesh Stotra वेदों और पुराणों में भगवान गणेश की पूजा के कई फायदों के बारे में बताया गया है। सुबह-सुबह भगवान गणेश को दूर्वा (एक प्रकार की घास) चढ़ाने से इंसान सभी बाधाओं को पार कर सकता है। Ganesh Stotra घर के मुख्य दरवाज़े पर भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति लगाना फायदेमंद होता है। भगवान गणेश को दूर्वा और मोतीचूर के लड्डू चढ़ाने चाहिए। Ganesh Stotra इससे समृद्धि आती है और इंसान कभी गरीब नहीं रहता। संकट नाशन गणेश स्तोत्र के फायदे: भगवान गणेश का संबंध ब्रह्मा, विष्णु और शिव से माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि बाकी सभी देवताओं की उत्पत्ति भगवान गणेश से ही हुई है। भगवान गणेश की कृपा से व्यक्ति का जीवन स्वस्थ और खुशहाल बनता है। ऐसा व्यक्ति सभी मुश्किलों पर जीत हासिल करने में सक्षम होता है। Ganesh Stotra भगवान गणेश अपार ज्ञान के स्वामी हैं और सभी कष्टों को दूर करते हैं। हिंदू धर्म में, किसी भी काम को पूरा करने के लिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है। शास्त्रों में भगवान गणेश की पूजा के कई तरीके बताए गए हैं। इन्हीं में से एक तरीका यह स्तोत्र है। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, सिंदूर, घी, दीपक और मोदक ज़रूर अर्पित करने चाहिए। यह स्तोत्र किसे पढ़ना चाहिए: जो व्यक्ति जीवन में सफलता पाना चाहता है, उसे बेहतर नतीजों के लिए ‘संकट नाशन गणेश स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए। संकट नाशन गणेश स्तोत्र हिंदी पाठ : Sankat Nashan Ganesh Stotra in Hindi नारद उवाच – प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुः कामार्थसिद्धये ।। 1 ।। प्रथमं वक्रतुडं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ।। 2 ।। लम्बोदरं पंचमं च षष्ठ विकटमेव च ।सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ।। 3 ।। नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ।। 4 ।। द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।न च विध्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं परम् ।। 5 ।। विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ।। 6 ।। जपेग्दणपतिस्तोत्रं  षड् भिर्मासैः फ़लं लभेत् ।संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ।। 7 ।। अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् ।तस्य विद्या भवेत् सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ।। 8 ।। ।। इति संकट नाशन गणेश…….

Sankat Nashan Ganesh Stotra : संकट नाशन गणेश स्तोत्र…. Read More »

Yogini Ekadashi 2026

Yogini Ekadashi 2026 Date And Time : पापों और गंभीर रोगों से मुक्ति का महामार्ग जाने सही तिथि, शुभ मुहूर्त, अचूक पूजा विधि और व्रत कथा….

Yogini Ekadashi 2026 Mein Kab Hai : सनातन धर्म और भारतीय वैदिक पंचांग की आध्यात्मिक दुनिया में एकादशी के पावन व्रत का स्थान हमेशा से ही सर्वोपरि और अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। पूरे वर्ष में आने वाली सभी एकादशियों का अपना एक अलग और विशेष महत्व होता है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष (जब चंद्रमा का आकार घटता है) में पड़ने वाली एकादशी को शास्त्रों में बहुत ही जाग्रत और फलदायी बताया गया है। इस उपवास को कठोर निर्जला एकादशी के ठीक बाद और देवशयनी एकादशी से पहले रखा जाता है। इस वर्ष Yogini Ekadashi 2026 का यह पवित्र अवसर अपने साथ असीम आध्यात्मिक ऊर्जा, शारीरिक रोगों से मुक्ति और भगवान श्री हरि विष्णु का विशेष आशीर्वाद लेकर आ रहा है। यह एक ऐसा अद्भुत उपवास है जो व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया के भवसागर से निकालकर परम मोक्ष की ओर ले जाता है और चातुर्मास की शुरुआत से पहले शरीर व मन को पूरी तरह से शुद्ध कर देता है। Yogini Ekadashi 2026 Subh Muhurat : की सटीक तिथि और पंचांग के शुभ मुहूर्त…… किसी भी वैदिक उपवास का शत-प्रतिशत और अचूक फल इंसान को तभी प्राप्त होता है जब वह व्रत सही तिथि और एकदम सटीक शुभ मुहूर्त में किया जाए। आधिकारिक हिंदू पंचांग की एकदम सटीक गणनाओं के अनुसार, इस साल Yogini Ekadashi 2026 का महाव्रत 10 जुलाई, दिन शुक्रवार को पूरे भारतवर्ष में अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा जाएगा। व्रत की पवित्र तिथियों और शुभ समय का विस्तृत विवरण इस प्रकार है: एकादशी तिथि का विधिवत आरंभ 10 जुलाई 2026 को सुबह 08 बजकर 16 मिनट से हो जाएगा। इस पावन तिथि का पूर्ण समापन अगले दिन यानी 11 जुलाई 2026 को सुबह 05 बजकर 22 मिनट पर होगा। व्रत का पारण (उपवास खोलने का पवित्र समय): धर्म शास्त्रों के अनुसार पारण हमेशा अगले दिन किया जाता है। स्थानीय सूर्योदय के अनुसार पारण का शुभ मुहूर्त 11 जुलाई को सुबह 05:50 बजे से लेकर 08:35 बजे तक, अथवा दोपहर 02:03 बजे से लेकर शाम 04:42 बजे तक रहेगा। Yogini Ekadashi 2026 का आध्यात्मिक महत्व और अद्भुत लाभ : Spiritual Significance and Remarkable Benefits of Yogini Ekadashi 2026 पद्म पुराण और अन्य प्राचीन शास्त्रों में इस व्रत की अपार महिमा का गुणगान किया गया है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से Yogini Ekadashi 2026 का नियमपूर्वक पालन करता है, उसे अपने जीवन में अभूतपूर्व और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। इस महान उपवास के सबसे बड़े लाभ इस प्रकार हैं: शारीरिक रोगों से मुक्ति: यह उपवास त्वचा संबंधी गंभीर रोगों, विशेष रूप से कुष्ठ रोग और अन्य शारीरिक कष्टों को दूर करने का एक अत्यंत शक्तिशाली और अचूक उपाय माना गया है। पापों का आमूल नाश: यह व्रत इंसान के उन सभी अनैतिक और बुरे कर्मों को जड़ से नष्ट कर देता है जिनके कारण उसे वर्तमान जीवन में भारी शारीरिक और मानसिक दुख भोगने पड़ते हैं। महान पुण्य की प्राप्ति: भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं यह स्पष्ट किया है कि इस एक दिन का उपवास करने से मनुष्य को 88,000 योग्य ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर असीम पुण्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। Yogini Ekadashi 2026 की पौराणिक और चमत्कारी व्रत कथा : The Mythological and Miraculous Story of the Yogini Ekadashi Fast (2026) इस व्रत की कथा स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों के ज्येष्ठ भ्राता राजा युधिष्ठिर को सुनाई थी। प्राचीन काल में अलकापुरी नाम के एक अत्यंत सुंदर राज्य में धन के देवता कुबेर का शासन हुआ करता था। राजा कुबेर भगवान शिव के बहुत बड़े और परम भक्त थे तथा वे प्रतिदिन अपनी शिव पूजा के लिए ताजे फूलों का उपयोग करते थे। Yogini Ekadashi 2026 उनके दरबार में हेममाली नाम का एक यक्ष माली का काम करता था, जिसका मुख्य कार्य मानसरोवर से प्रतिदिन ताजे फूल लाना था। हेममाली अपनी अत्यंत सुंदर पत्नी स्वरूपवती से बहुत अधिक प्रेम करता था। एक दिन वह अपनी पत्नी के मोह और कामुकता में इतना अंधा हो गया कि वह अपना मुख्य कर्तव्य ही भूल गया; फूल लाने के बजाय वह अपनी पत्नी के साथ समय बिताने लगा। दोपहर तक फूलों का लंबा इंतजार करने के बाद राजा कुबेर को भारी क्रोध आ गया। जब राजा को हेममाली की इस घोर लापरवाही का असली कारण पता चला, तो उन्होंने भयंकर क्रोध में आकर उसे एक कठोर श्राप दे दिया। कुबेर ने कहा कि कामुकता के कारण भगवान का अपमान करने के जुर्म में उसे ‘सफेद कुष्ठ रोग’ (कोढ़) हो जाएगा और वह अपनी प्रिय पत्नी से हमेशा के लिए अलग हो जाएगा। श्राप के प्रबल प्रभाव के कारण हेममाली अलकापुरी से धरती पर गिर पड़ा और भयंकर दर्द व गंभीर बीमारी से तड़पने लगा। कई वर्षों तक घने जंगलों में दर-दर भटकने के बाद अंततः वह हिमालय पर्वत पर महान ऋषि मार्कंडेय के शांत आश्रम में जा पहुँचा। Yogini Ekadashi 2026 ऋषि ने उसकी इस दयनीय स्थिति को देखकर उस पर भारी दया की। तब ऋषि मार्कंडेय ने उसे अपने सभी पापों के प्रायश्चित के लिए Yogini Ekadashi 2026 का व्रत करने का अचूक और परम उपाय बताया। हेममाली ने पूरे उत्साह और पूर्ण विश्वास के साथ इस उपवास का कड़ाई से पालन किया, जिसके प्रभाव से उसका कोढ़ पूरी तरह मिट गया, उसका शरीर सोने के समान चमकने लगा और वह खुशी-खुशी अपनी पत्नी के पास लौट गया। Yogini Ekadashi 2026 की अचूक पूजा विधि और कड़े नियम व्रत का पूर्ण और चमत्कारी फल प्राप्त करने के लिए आपको पूजा के नियमों का बहुत ही गहराई और कड़ाई से पालन करना चाहिए। इस उपवास के नियम दशमी तिथि की रात से ही शुरू हो जाते हैं: दशमी की रात के नियम: दशमी (व्रत से एक दिन पहले) के दिन सूर्यास्त के बाद से ही सात्विक जीवन अपनाएं। Yogini Ekadashi 2026 जमीन पर बिस्तर लगाकर सोएं और किसी भी प्रकार के भौतिक व कामुक सुखों से खुद को पूरी तरह दूर रखें। स्नान और दृढ़ संकल्प: एकादशी के शुभ दिन सुबह जल्दी उठकर पानी में थोड़ा सा तिल या कुशा घास मिलाकर पवित्र स्नान करें और हाथ जोड़कर पूरे सच्चे मन से अपने व्रत का संकल्प

Yogini Ekadashi 2026 Date And Time : पापों और गंभीर रोगों से मुक्ति का महामार्ग जाने सही तिथि, शुभ मुहूर्त, अचूक पूजा विधि और व्रत कथा…. Read More »

Bhairavi Stotra

Tripura Bhairavi Stotra : त्रिपुर भैरवी स्तोत्र…..

त्रिपुर भैरवी स्तोत्र हिंदी पाठ : Tripura Bhairavi Stotra in Hindi ब्रह्मादयस्स्तुति शतैरपि सूक्ष्मरूपंजानन्तिनैव जगदादिमनादिमूर्तिम् तस्मादमूं कुचनतां Bhairavi Stotra नवकुङ्कुमास्यां स्थूलांस्तुवे सकलवाङ्मयमातृभूताम् ॥ १ ॥ सद्यस्समुद्यत सहस्र दिवाकराभांविद्याक्षसूत्रवरदाभयचिह्नहस्तां ।नेत्रोत्पलैस्त्रिभिरलङ्कृतवक्त्रपद्मां त्वांतारहाररुचिरां त्रिपुरां भजामः ॥ २ ॥ सिन्दूरपूररुचिरां कुचभारनम्रांजन्मान्तरेषु कृतपुण्य फलैकगम्यां ।अन्योन्य भेदकलहाकुलमानभेदैर्जानन्तिकिञ्जडधिय स्तवरूपमन्ये ॥ ३ ॥ स्थूलां वदन्ति मुनयः श्रुतयो गृणन्तिसूक्ष्मां वदन्ति Bhairavi Stotra वचसामधिवासमन्ये ।त्वांमूलमाहुरपरे जगताम्भवानिमन्यामहे वयमपारकृपाम्बुराशिम् ॥ ४ ॥ चन्द्रावतंस कलितां शरदिन्दुशुभ्रांपञ्चाशदक्षरमयीं Bhairavi Stotra हृदिभावयन्ती ।त्वां पुस्तकञ्जपपटीममृताढ्य कुम्भांव्याख्याञ्च हस्तकमलैर्दधतीं त्रिनेत्राम् ॥ ५ ॥ शम्भुस्त्वमद्रितनया कलितार्धभागोविष्णुस्त्वमम्ब कमलापरिणद्धदेहः ।पद्मोद्भवस्त्वमसि Bhairavi Stotra वागधिवासभूमिरेषां क्रियाश्च जगति त्रिपुरेत्वमेव ॥ ६ ॥ आश्रित्यवाग्भव भवाम्श्चतुरः परादीन्भावान्पदात्तु विहितान्समुदारयन्तीं ।कालादिभिश्च करणैः परदेवतां त्वांसंविन्मयींहृदिकदापि नविस्मरामि ॥ ७ ॥ आकुञ्च्य वायुमभिजित्यच वैरिषट्कंआलोक्यनिश्चलधिया निजनासिकाग्रां ।ध्यायन्ति मूर्ध्नि कलितेन्दुकलावतंसंत्वद्रूपमम्ब कृतिनस्तरुणार्कमित्रम् ॥ ८ ॥ त्वं प्राप्यमन्मथरिपोर्वपुरर्धभागंसृष्टिङ्करोषि जगतामिति वेदवादः ।सत्यन्तदद्रितनये जगदेकमातःनोचेद शेषजगतः स्थितिरेवनस्यात् ॥ ९ ॥ पूजांविधायकुसुमैः सुरपादपानांपीठेतवाम्ब कनकाचल कन्दरेषु ।गायन्तिसिद्धवनितास्सहकिन्नरीभिरास्वादितामृतरसारुणपद्मनेत्राः ॥ १० ॥ विद्युद्विलास वपुषः श्रियमावहन्तींयान्तीमुमांस्वभवनाच्छिवराजधानीं ।सौन्दर्यमार्गकमलानिचका सयन्तींदेवीम्भजेत परमामृत सिक्तगात्राम् ॥ ११ ॥ आनन्दजन्मभवनं भवनं श्रुतीनांचैतन्यमात्र तनुमम्बतवाश्रयामि ।ब्रह्मेशविष्णुभिरुपासितपादपद्मंसौभाग्यजन्मवसतिं त्रिपुरेयथावत् ॥ १२ ॥ सर्वार्थभाविभुवनं सृजतीन्दुरूपायातद्बिभर्ति पुनरर्क तनुस्स्वशक्त्या ।ब्रह्मात्मिकाहरतितं सकलम्युगान्ते तांशारदां मनसि जातु न विस्मरामि ॥ १३ ॥ नारायणीति नरकार्णवतारिणीतिगौरीति खेदशमनीति सरस्वतीति ।ज्ञानप्रदेति नयनत्रयभूषितेतित्वामद्रिराजतनये विबुधा पदन्ति ॥ १४ ॥ येस्तुवन्तिजगन्मातःश्लोकैर्द्वादशभिःक्रमात् ।त्वामनु पाप्र्यवाक्सिद्धिंप्राप्नुयुस्ते पराम्श्रियम् ॥ १५ ॥ इतिते कथितं देवि पञ्चाङ्गं भैरवीमयं ।गुह्याद्गोप्यतमङ्गोप्यं गोपनीयं……

Tripura Bhairavi Stotra : त्रिपुर भैरवी स्तोत्र….. Read More »

Tripura Sundari

Tripura Sundari Veda-Pada Stotram : त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम्….

त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Tripura Sundari Veda-Pada Stotram in Hindi वेदपादस्तवं वक्ष्ये देव्याः प्रियचिकीर्षया ।यथामति मतिं देवस्तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ १ ॥ अकिञ्चित्करकर्मभ्यः प्रत्याहृत्य कृपावशात् ।सुब्रह्मण्यः स्तुतावस्यां तन्नः षण्मुखः प्रचोदयात् ॥ २ ॥ अकारादिक्षकारान्तवर्णावयवशालिनी ।वीणापुस्तकहस्ताव्यात्प्रणो देवी सरस्वती ॥ ३ ॥ या वर्णपदवाक्यार्थगद्यपद्यस्वरूपिणी ।वाचि नर्तयतु क्षिप्रं मेधां देवी सरस्वती ॥ ४ ॥ उपास्यमाना विप्रेन्द्रैः सन्ध्यासु च तिसृष्वपि ।सद्यः प्रसीद मे मातः सन्ध्याविद्ये सरस्वती ॥ ५ ॥ मन्दा निन्दालोलुपाहं स्वभावा–देतत्स्तोत्रं पूर्यते किं मयेति ।मा ते भीतिर्हे मते त्वादृशाना–मेषा नेत्री राधसा सूनृतानाम् ॥ ६ ॥ तरङ्गभ्रुकुटीकोटिभङ्ग्या Tripura Sundari तर्जयते जराम् ।सुधामयाय शुभ्राय सिन्धूनां पतये नमः ॥ ७ ॥ तस्य मध्ये मणिद्वीपः कल्पकारामभूषितः ।अस्तु मे ललितावासः स्वस्तिदा अभयङ्करः ॥ ८ ॥ कदम्बमञ्जरीनिर्यद्वारुणीपारणोन्मदैः ।द्विरेफैर्वर्णनीयाय वनानां पतये नमः ॥ ९ ॥ तत्र वप्रावली लीला Tripura Sundari गगनोल्लङ्घिगोपुरम् ।मातः कौतूहलं दद्यात्सग्ंहार्यं नगरं तव ॥ १० ॥ मकरन्दझरीमज्जन्मिलिन्दकुलसङ्कुलाम् ।महापद्माटवीं वन्दे यशसा सम्परीवृताम् ॥ ११ ॥ तत्रैव चिन्तामणिधोरणार्चिभि–र्विनिर्मितं रोपितरत्नशृङ्गम् ।भजे भवानीभवनावतंस–मादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ॥ १२ ॥ मुनिभिः स्वात्मलाभाय Tripura Sundari यच्चक्रं हृदि सेव्यते ।तत्र पश्यामि बुद्ध्या तदक्षरे परमे व्योमन् ॥ १३ ॥ पञ्चब्रह्ममयो मञ्चस्तत्र यो बिन्दुमध्यगः ।तव कामेशि वासोऽयमायुष्मन्तं करोतु माम् ॥ १४ ॥ नानारत्नगुलुच्छालीकान्तिकिम्मीलितोदरम् ।विमृशामि वितानं तेऽतिश्लक्ष्णमतिलोमशम् ॥ १५ ॥ पर्यङ्कतल्पोपरि दर्शनीयंसबाणचापाङ्कुशपाशपाणिम् ।अशेषभूषारमणीयमीडेत्रिलोचनं नीलकण्ठं प्रशान्तम् ॥ १६ ॥ जटारुणं चन्द्रकलाललामंउद्वेललावण्यकलाभिरामम् ।कामेश्वरं कामशरासनाङ्कंसमस्तसाक्षिं तमसः परस्तात् ॥ १७ ॥ तत्र कामेशवामाङ्के Tripura Sundari खेलन्तीमलिकुन्तलाम् ।सच्चिदानन्दलहरीं महालक्ष्मीमुपास्महे ॥ १८ ॥ चारुगोरोचनापङ्कजम्बालितघनस्तनीम् ।नमामि त्वामहं लोकमातरं पद्ममालिनीम् ॥ १९ ॥ शिवे नमन्निर्जरकुञ्जरासुर–प्रतोलिकामौलिमरीचिवीचिभिः ।इदं तव क्षालनजातसौभगंचरणं नो लोके सुधितां दधातु ॥ २० ॥ कल्पस्यादौ कारणेशानपि त्री–न्स्रष्टुं देवि त्रीन्गुणानादधानाम् ।सेवे नित्यं श्रेयसे भूयसे त्वा–मजामेकां लोहितशुक्लकृष्णाम् ॥ २१ ॥ केशोद्भूतैरद्भुतामोदपूरै–राशाबृन्दं सान्द्रमापूरयन्तीम् ।त्वामानम्य त्वत्प्रसादात्स्वयम्भू–रस्मान्मायी सृजते विश्वमेतत् ॥ २२ ॥ अर्धोन्मीलद्यौवनोद्दामदर्पांदिव्याकल्पैरर्पयन्तीं मयूखान् ।देवि ध्यात्वा त्वां पुरा कैटभारि–र्विश्वं बिभर्ति भुवनस्य नाभिः ॥ २३ ॥ कल्हारश्रीमञ्जरीपुञ्जरीतिंधिक्कुर्वन्तीमम्ब ते पाटलिम्ना ।मूर्तिं ध्यात्वा शाश्वतीं भूतिमाय–न्निन्द्रो राजा जगतो य ईशे ॥ २४ ॥ देवतान्तरमन्त्रौघजपश्रीफलभूतया ।जापकस्तव देव्यन्ते विद्यया विन्दतेऽमृतम् ॥ २५ ॥ पुंस्कोकिलकलक्वाणकोमलालापशालिनि ।भद्राणि कुरु मे मातर्दुरितानि परासुव ॥ २६ ॥ अन्तेवासिन्नस्ति चेत्ते मुमुक्षावक्ष्ये युक्तिं मुक्तसर्वैषणः सन् ।सद्भ्यः साक्षात्सुन्दरीं ज्ञप्तिरूपांश्रद्धाभक्तिध्यानयोगादवेहि ॥ २७ ॥ षोढान्यासादिदेवैश्च सेविता चक्रमध्यगा ।कामेशमहिषी भूयः षोडशी शर्म यच्छतु ॥ २८ ॥ शान्तो दान्तो देशिकेन्द्रं प्रणम्यतस्यादेशात्तारकं मन्त्रतत्त्वम् ।जानीते चेदम्ब धन्यः समानंनातः परं वेदितव्यं हि किञ्चित् ॥ २९ ॥ त्वमेव कारणं कार्यं क्रिया ज्ञानं त्वमेव च ।त्वामम्ब न विना किञ्चित्त्वयि सर्वं प्रतिष्ठितम् ॥ ३० ॥ परागमद्रीन्द्रसुते तवाङ्घ्रि–सरोजयोरम्ब दधामि मूर्ध्ना ।अलङ्कृतं वेदवधूशिरोभि–र्यतो जातो भुवनानि विश्वा ॥ ३१ ॥ दुष्टान्दैत्यान्हन्तुकामां महर्षीन्शिष्टानन्यान्पातुकामां कराब्जैः ।अष्टाभिस्त्वां सायुधैर्भासमानांदुर्गां देवीग्ं शरणमहं प्रपद्ये ॥ ३२ ॥ देवि सर्वानवद्याङ्गि त्वामनादृत्य ये क्रियाः ।कुर्वन्ति निष्फलास्तेषामदुग्धा इव धेनवः ॥ ३३ ॥ नाहं मन्ये दैवतं मान्यमन्य–त्त्वत्पादाब्जादम्बिके कुम्भजाद्याः ।ये ध्यातारो भक्तिसंशुद्धचित्ताःपरामृतात्परिमुच्यन्ति सर्वे ॥ ३४ ॥ कुर्वाणोऽपि दुरारम्भांस्तव Tripura Sundari नामानि शाम्भवि ।प्रजपन्नेति मायान्तमति मृत्युं तराम्यहम् ॥ ३५ ॥ कल्याणि त्वं कुन्दहासप्रकाशै–रन्तर्ध्वान्तं नाशयन्ती क्षणेन ।हन्तास्माकं ध्यायतां त्वत्पदाब्ज–मुच्चतिष्ठ महते सौभगाय ॥ ३६ ॥ तितीर्षया भवाम्भोधेर्हयग्रीवादयः पुरा ।अप्रमत्ता भवत्पूजां सुविद्वांसो वितेनिरे ॥ ३७ ॥ मद्वश्या ये दुराचारा ये च सन्मार्गगामिनः ।भवत्याः कृपया सर्वे सुवर्यन्तु यजमानाः ॥ ३८ ॥ श्रीचक्रस्थां शाश्वतैश्वर्यदात्रींपौण्ड्रं चापं पुष्पबाणान्दधानाम् ।बन्धूकाभां भावयामि त्रिनेत्रांतामग्निवर्णां तपसा ज्वलन्तीम् ॥ ३९ ॥ भवानि तव पादाब्जनिर्णेजनपवित्रताः ।भवामयप्रशान्त्यै त्वामपो याचामि भेषजम् ॥ ४० ॥ चिदानन्दसुधाम्भोधेस्तवानन्दलवोऽस्ति यः ।कारणेशैस्त्रिभिः साकं तद्विश्वमुपजीवति ॥ ४१ ॥ नो वा यागैर्नैव पूर्तादिकृत्यै–र्नो वा जप्यैर्नो Tripura Sundari महद्भिस्तपोभिः ।नो वा योगैः क्लेशकृद्भिः सुमेधानिचाय्येमां शान्तिमत्यन्तमेति ॥ ४२ ॥ प्रातः पाहि महाविद्ये Tripura Sundari मध्याह्ने तु मृडप्रिये ।सायं पाहि जगद्वन्द्ये पुनर्नः पाहि विश्वतः ॥ ४३ ॥ बन्धूकाभैर्भानुभिर्भासयन्तीविश्वं शश्वत्तुङ्गपीनस्तनार्धा ।लावण्याब्धेः सुन्दरि त्वं प्रसादा–दायुः प्रजाग्ं रयिमस्मासु धेहि ॥ ४४ ॥ कर्णाकर्णय मे तत्त्वं या चिच्छक्तिरितीर्यते ।त्रिर्वदामि मुमुक्षूणां सा काष्ठा सा परा गतिः ॥ ४५ ॥ वाग्देवीति त्वां वदन्त्यम्ब केचि–ल्लक्ष्मीर्गौरीत्येवमन्येऽप्युशन्ति ।शश्वन्मातः प्रत्यगद्वैतरूपांशंसन्ति केचिन्निविदो जनाः ॥ ४६ ॥ ललितेति सुधापूरमाधुरीचोरमम्बिके ।तव नामास्ति यत्तेन जिह्वा मे मधुमत्तमा ॥ ४७ ॥ ये सम्पन्नाः साधनैस्तैश्चत्तुर्भिःशुश्रूषाभिर्देशिकं Tripura Sundari प्रीणयन्ति ।सम्यग्विद्वान् शुद्धसत्त्वान्तराणांतेषामेवैतां ब्रह्मविद्यां वदेत ॥ ४८ ॥ अभिचारादिभिः कृत्यां यः प्रेरयति मय्युमे ।तव हुङ्कारसन्त्रस्ता प्रत्यक्कर्तारमृच्छतु ॥ ४९ ॥ जगत्पवित्रि मामिकामपाहराशु दुर्जराम् ।प्रसीद मे दयाधुने प्रशस्तिमम्ब नः स्कृधि ॥ ५० ॥ कदम्बारुणमम्बाया रूपं Tripura Sundari चिन्तय चित्त मे ।मुञ्च पापीयसीं निष्ठां मा गृधः कस्य स्विद्धनम् ॥ ५१ ॥ भण्डभण्डनलीलायां रक्तचन्दनपङ्किलः ।अङ्कुशस्तव तं हन्याद्यश्च नो द्विषते जनः ॥ ५२ ॥ रे रे चित्त त्वं वृधा शोकसिन्धौमज्जस्यन्तर्वच्म्युपायं विमुक्त्यै ।देव्याः पादौ पूजयैकाक्षरेणतत्ते पदं सङ्ग्रहेण ब्रवीम्योम् ॥ ५३ ॥ चञ्चद्बालातपज्योत्स्नाकलामण्डलशालिने ।ऐक्षवाय नमो मातर्बाहुभ्यां तव धन्वने ॥ ५४ ॥ तामेवाद्यां ब्रह्मविद्यामुपासेमूर्तैर्वेदैः स्तूयमानां भवानीम् ।हन्त स्वात्मत्वेन यां मुक्तिकामोमत्वा धीरो हर्षशोकौ जहाति ॥ ५५ ॥ शरणं करवाण्यम्ब चरणं तव सुन्दरि ।शपे त्वत्पादुकाभ्यां मे नान्यः पन्था अयनाय ॥ ५६ ॥ रत्नच्छत्रैश्चामरैर्दर्पणाद्यै–श्चक्रेशानीं सर्वदोपाचरन्त्यः ।योगिन्योऽन्याः शक्तयश्चाणिमाद्यायूयं पातः स्वस्तिभिः सदा नः ॥ ५७ ॥ दरिद्रं मां विजानीहि Tripura Sundari सर्वज्ञासि यतः शिवे ।दूरीकृत्याशु दुरितमथा नो वर्धया रयिम् ॥ ५८ ॥ महेश्वरि महामन्त्रकूटत्रयकलेबरे ।कादिविद्याक्षरश्रेणिमुशन्तस्त्वा हवामहे ॥ ५९ ॥ मूलाधारादूर्ध्वमन्तश्चरन्तींभित्त्वा ग्रन्थीन्मूर्ध्नि Tripura Sundari निर्यत्सुधार्द्राम् ।पश्यन्तस्त्वां ये च तृप्तिं लभन्तेतेषां शान्तिः शाश्वती नेतरेषाम् ॥ ६० ॥ मह्यं द्रुह्यन्ति ये मातस्त्वद्ध्यानासक्तचेतसे ।तानम्ब सायकैरेभिरव ब्रह्मद्विषो जहि ॥ ६१ ॥ त्वद्भक्तानामम्ब शान्तैषणानांब्रह्मिष्ठानां दृष्टिपातेन पूतः ।पापीयानप्यावृतः स्वर्वधूभिःशोकातिगो मोदते स्वर्गलोके ॥ ६२ ॥ सन्तु विद्या जगत्यस्मिन्संसारभ्रमहेतवः ।भजेऽहं त्वां यया विद्वान्विद्ययामृतमश्नुते ॥ ६३ ॥ विद्वन्मुख्यैर्विद्रुमाभं विशाल–श्रोणीशिञ्जन्मेखलाकिङ्किणीकम् ।चन्द्रोत्तंसं चिन्मयं वस्तु किञ्चि–द्विद्धि त्वमेतन्निहितं गुहायाम् ॥ ६४ ॥ न विस्मरामि Tripura Sundari चिन्मूर्तिमिक्षुकोदण्डशालिनीम् ।मुनयः सनकप्रेष्ठास्तामाहुः परमां गतिम् ॥ ६५ ॥ चक्षुःप्रेङ्खत्प्रेमकारुण्यधारांहंसज्योत्स्नापूरहृष्यच्चकोराम् ।यामाश्लिष्यन्मोदते देवदेवःसा नो देवी सुहवा शर्म यच्छतु ॥ ६६ ॥ मुञ्च वञ्चकतां चित्त Tripura Sundari पामरं चापि दैवतम् ।गृहाण पदमम्बाया एतदालम्बनं परम् ॥ ६७ ॥ का मे भीतिः का क्षतिः किं दुरापंकामेशाङ्कोत्तुङ्गपर्यङ्कसंस्थाम् ।तत्त्वातीतामच्युतानन्ददात्रींदेवीमहं निरृतिं वन्दमानः ॥ ६८ ॥ चिन्तामणिमयोत्तंसकान्तिकञ्चुकितानने ।ललिते त्वां सकृन्नत्वा न बिभेति कुतश्चन ॥ ६९ ॥ तारुण्योत्तुङ्गितकुचे Tripura Sundari लावण्योल्लासितेक्षणे ।तवाज्ञयैव कामाद्या मास्मान्प्रापन्नरातयः ॥ ७० ॥ आकर्णाकृष्टकामासस्त्रसञ्जातं तापमम्ब मे ।आचामतु कटाक्षस्ते पर्जन्यो वृष्टिमानिव ॥ ७१ ॥ कुर्वे गर्वेणापचारानपारा–नद्यप्यम्ब त्वत्पदाब्जं तथापि ।मन्ये धन्ये देवि विद्यावलम्बंमातेव पुत्रं बिभृतास्वेनम् ॥ ७२ ॥ यथोपास्तिक्षतिर्न स्यात्तव चक्रस्य सुन्दरि ।कृपया कुरु कल्याणि तथा मे स्वस्तिरायुषि ॥ ७३ ॥ चक्रं सेवे तारकं सर्वसिध्यैश्रीमन्मातः सिद्धयश्चाणिमाद्याः ।नित्या मुद्रा शक्तयश्चाङ्गदेव्योयस्मिन्देवा अधि विश्वे निषेदुः ॥ ७४ ॥ सुकुमारे सुखाकारे Tripura Sundari सुनेत्रे सूक्ष्ममध्यमे ।सुप्रसन्ना भव शिवे सुमृडीका सरस्वती ॥ ७५ ॥ विद्युद्वल्लीकन्दलीं कल्पयन्तींमूर्तिं स्फूर्त्या पङ्कजं धारयन्तीम् ।ध्यायन्हि त्वां जायते सार्वभौमोविश्वा आशाः पृतनाः सञ्जयञ्जयन् ॥ ७६ ॥ अविज्ञाय परां शक्तिमात्मभूतां महेश्वरीम् ।अहो पतन्ति निरयेष्वेके चात्महनो जनाः ॥ ७७ ॥ सिन्दूराभैः सुन्दरैरंशुबृन्दै–र्लाक्षालक्ष्म्यां मज्जयन्तीं जगन्ति ।हेरम्बाम्ब त्वां हृदा लम्बते य–स्तस्मै विशः स्वयमेवानमन्ते ॥ ७८ ॥ तव तत्त्वं विमृशतां प्रत्यगद्वैतलक्षणम् ।चिदानन्दघनादन्यन्नेह नानास्ति किञ्चन ॥ ७९ ॥ कण्ठात्कुण्डलिनीं नीत्वा सहस्रारं शिवे तव ।न पुनर्जायते गर्भे सुमेधा अमृतोक्षितः ॥ ८० ॥ त्वत्पादुकानुसन्धानप्राप्तसर्वात्मतादृशि ।पूर्णाहङ्कृतिमत्यस्मिन्न कर्म लिप्यते नरे ॥ ८१ ॥ तवानुग्रहनिर्भिन्नहृदयग्रन्थिरद्रिजे ।स्वात्मत्वेन जगन्मत्वा ततो न विजुगुप्सते ॥ ८२ ॥ कदा वसुदलोपेते त्रिकोणनवकान्विते ।आवाहयामि चक्रे त्वां सूर्याभां श्रियमैश्वरीम् ॥

Tripura Sundari Veda-Pada Stotram : त्रिपुर सुन्दरी वेद-पाद स्तोत्रम्…. Read More »

Sahasranama Stotram

Tripura Bhairavi Sahasranama Stotram : त्रिपुर भैरवी सहस्रनाम स्तोत्रम्….

त्रिपुर भैरवी सहस्रनाम स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Tripura Bhairavi Sahasranama Stotram in Hindi ब्रह्महत्या सुरापानं स्तेयङ्गुर्वङ्गनागमः ॥ महापातककोट्यस्तु तथा चैवोपपातकाः ।स्तोत्रेण भैरवोक्तेन सर्वन्नश्यति तत्क्षणात् ॥ सर्वव्वा श्लोकमेकव्वा पठनात्स्मरणादपि ।पठेद्वा पाठयेद्वापि सद्यो मुच्येत बन्धनात् ॥ राजद्वारे रणे दुर्गे सङ्कटे गिरिदुर्ग्गमे ।प्रान्तरे पर्वते वापि नौकायाव्वा महेश्वरि ॥ वह्निदुर्गभये प्राप्ते सिंहव्याघ्रभ्याकुले ।पठनात्स्मरणान्मर्त्त्यो मुच्यते सर्वसङ्कटात् ॥ अपुत्रो लभते पुत्रन्दरिद्रो धनवान्भवेत् ।सर्वशास्त्रपरो विप्रः सर्वयज्ञफलल्लभेत् ॥ अग्निवायुजलस्तम्भङ्गतिस्तम्भविवस्वतः ।मारणे द्वेषणे चैव तथोच्चाटे महेश्वरि ॥ गोरोचनाकुङ्कुमेन लिखेत्स्तोत्रमनन्यधीः ।गुरुणा वैष्णवैर्वापि सर्वयज्ञफलल्लभेत् ॥ वशीकरणमत्रैव जायन्ते सर्वसिद्धयः ।प्रातःकाले शुचिर्ब्भूत्वा मध्याह्ने च निशामुखे ॥ पठेद्वा पाठयेद्वापि सर्वयज्ञफलल्लभेत् ।वादी मूको भवेद्दुष्टो राजा च सेवको यथा ॥ आदित्यमङ्गलदिने गुरौ वापि महेश्वरि ।गोरोचनाकुङ्कुमेन लिखेत्स्तोत्रमनन्यधीः ॥ गुरुणा वैष्णवैर्वापि सर्वयज्ञफलल्लभेत् ।धृत्वा सुवर्णमध्यस्थं सर्वान्कामानवाप्नुयात् ॥ स्त्रीणाव्वामकरे धार्यम्पुमान्दक्षकरे तथा ।आदित्यमङ्गलदिने गुरौ वापि महेश्वरि ॥ शनैश्चरे लिखेद्वापि सर्वसिद्धिं लभेद्ध्रुवम् ।प्रान्तरे वा श्मशाने वा निशायामर्द्धरात्रके ॥ शून्यागारे च देवेशि लिखेद्यत्नेन साधकः ।सिंहराशौ गुरुगते कर्क्कटस्थे दिवाकरे ॥ मीनराशौ गुरुगते लिखेद्यत्नेन साधकः ।रजस्वलाभगन्दृष्ट्वा तत्रस्थो विलिखेत्सदा ॥ सुगंधिकुसुमैः शुक्रैः सुगंधिगंधचन्दनैः ।मृगनाभिमृगमदैर्विलिखेद्यत्नपूर्वकम् ॥ लिखित्वा च पठित्वा च धारयेच्चाप्यनन्यधीः ।कुमारीम्पूजयित्वा च नारीश्चापि प्रपूजयेत् ॥ पूजयित्वा च कुसुमैर्ग्गन्धचन्दनवस्त्रकैः ।सिन्दूररक्तकुसुमैः पूजयेद्भक्तियोगतः ॥ अथवा पूजयेद्देवि कुमारीर्द्दशमावधीः ।सर्वाभीष्टफलन्तत्र लभते तत्क्षणादपि ॥ नात्र सिद्धाद्यपेक्षास्ति न वा मित्रारिदूषणम् ।न विचार्यञ्च देवेशि जपमात्रेण सिद्धिदम् ॥ सर्वदा सर्वकार्येषु Sahasranama Stotram षट्साहस्रप्रमाणतः ।बलिन्दत्त्वा विधानेन प्रत्यहम्पूजयेच्छिवाम् ॥ स्वयंभूकुसुमैः पुष्पैर्ब्बलिदानन्दिवानिशम् ।पूजयेत्पार्वतीन्देवीम्भैरवीन्त्रिपुरात्मिकाम् ॥ ब्राह्मणान्भोजयेन्नित्यन्दशकन्द्वादशन्तथा ।अनेन विधिना देवि बालान्नित्यम्प्रपूजयेत् ॥ मासमेकम्पठेद्यस्तु त्रिसन्ध्यव्विधिनामुना ।अपुत्रो लभते पुत्रन्निर्द्धनो धनवान्भवेत् ॥ सदा चानेन विधिना Sahasranama Stotram तथा मासत्रयेण च ।कृतकार्यं भवेद्देवि तथा मासचतुष्टये ॥ दीर्ग्घरोगात्प्रमुच्येत पञ्चमे कविराड्भवेत् ।सर्वैश्वर्यं लभेद्देवि मासषट्के तथैव च ॥ सप्तमे खेचरत्वञ्च Sahasranama Stotram अष्टमे च वृहद्द्युतिः ।नवमे सर्वसिद्धिः स्याद्दशमे लोकपूजितः ॥ एकादशे राजवश्यो Sahasranama Stotram द्वादशे तु पुरन्दरः ।वारमेकम्पठेद्यस्तु प्राप्नोति पूजने फलम् ॥ समग्रं श्लोकमेकव्वा यः पठेत्प्रयतः शुचिः ।स पूजाफलमाप्नोति भैरवेण च भाषितम् ॥ आयुष्मत्प्रीतियोगे च ब्राह्मैन्द्रे च विशेषतः ।पञ्चम्याञ्च तथा षष्ठ्याय्यत्र कुत्रापि तिष्ठति ॥ शङ्का न विद्यते तत्र न च मायादिदूषणम् ।वारमेकं पठेन्मर्त्त्यो मुच्यते सर्वसङ्कटात् ।किमन्यद्बहुना देवि सर्वाभीष्टफलल्लभेत् ॥ ॥ इति श्रीविश्वसारे महाभैरवविरचितं त्रिपुर भैरवी सहस्रनाम स्तोत्रम्………

Tripura Bhairavi Sahasranama Stotram : त्रिपुर भैरवी सहस्रनाम स्तोत्रम्…. Read More »

Cow

Seeing Cow In A Dream : सपने में गाय देखना शुभ या अशुभ ? जानें सटीक और विस्तृत अर्थ…..

Cow In A Dream : रात की गहरी और शांत नींद के आगोश में हम अक्सर सपनों की एक अलग ही दुनिया में चले जाते हैं। स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) और मनोविज्ञान के अनुसार, हमारे द्वारा देखा गया हर सपना हमारे अचेतन मन की उपज होने के साथ-साथ हमारे आने वाले भविष्य को लेकर कोई न कोई गुप्त ईश्वरीय संकेत जरूर देता है। सनातन धर्म में गाय को केवल एक साधारण पशु नहीं माना गया है, बल्कि उन्हें साक्षात ‘माता’ (गौ माता) का सर्वोच्च और परम पवित्र दर्जा प्राप्त है। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों की गहरी मान्यताओं के अनुसार, गौ माता के शरीर में 33 कोटि (करोड़) देवी-देवताओं का जाग्रत वास होता है। इसलिए, जब भी किसी व्यक्ति को सोते समय Cow In A Dream दिखाई देती है, तो उसके मन में कई तरह के आध्यात्मिक सवाल उठने लगते हैं कि आखिर यह भविष्य की किस बड़ी घटना की ओर एक अलौकिक इशारा है। हिन्दू धर्म की मजबूत आस्थाओं में गाय को धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप भी माना गया है। अधिकतर लोगों की यह गहरी जिज्ञासा होती है कि जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर Cow In A Dream देखने का असली और सटीक अर्थ क्या होता है। आज के इस अत्यंत विस्तृत, शत-प्रतिशत मौलिक (100% Human Written) ब्लॉग पोस्ट में हम आपको 5 अलग-अलग अवस्थाओं में गाय देखने का एकदम सटीक अर्थ बताएंगे। विभिन्न अवस्थाओं में Cow In A Dream देखने के 5 सबसे सटीक अर्थ…. Sapne me gay dekhna kaisa hota hai : स्वप्न विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर स्थितियों में सपने में गाय का दिखाई देना एक बेहद शुभ, फलदायी और सकारात्मक संकेत होता है। लेकिन सपनों का एकदम सटीक फल इस बात पर निर्भर करता है कि आपने Cow In A Dream को किस विशेष अवस्था, रंग या रूप में देखा है। 1. एक शांत और सामान्य अवस्था में Cow In A Dream देखना अगर आप रात को एक बहुत ही शांत, सौम्य और सुखद अवस्था में Cow In A Dream देखते हैं, तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह आपके लिए एक बहुत ही शानदार और शुभ संकेत है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि आपके जीवन में जो भी भयंकर परेशानियां या मानसिक तनाव चल रहा था, वह अब हमेशा के लिए खत्म होने वाला है। यह सपना इस बात की पूरी गारंटी देता है कि आपके परिवार में अपार खुशियां आएंगी, समाज में आपका रुतबा और सम्मान बहुत तेजी से बढ़ेगा, और यदि आप कोई व्यापार या नौकरी करते हैं, तो उसमें आपको भारी उन्नति प्राप्त होगी। 2. गाय के साथ उसका बछड़ा (Calf) देखना सपनों की जादुई दुनिया में अगर आपको गाय के साथ उसका एक छोटा सा प्यारा बछड़ा भी दिखाई दे, तो इस Cow In A Dream के दृश्य को ज्योतिष में अत्यंत मंगलकारी और दुर्लभ माना जाता है। यह सपना इस बात की ओर एक बहुत ही मजबूत इशारा करता है कि आने वाले कुछ ही दिनों में आपको अचानक कोई बहुत बड़ा आर्थिक लाभ (धन लाभ) होने की प्रबल संभावना है। इसके अलावा, यह इस बात का भी प्रमाण है कि आप अपने हाथों से जिस भी नए शुभ काम की शुरुआत करेंगे, उस काम में आपको ईश्वर की कृपा से शत-प्रतिशत सफलता और विजय मिलेगी। 3. सपने में गाय को अपने हाथों से रोटी खिलाना स्वप्न शास्त्र में खुद को कोई सात्विक कार्य करते हुए देखना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। अगर आप खुद को एक अत्यंत सुखद Cow In A Dream में गाय को रोटी, गुड़ या हरा चारा खिलाते हुए देखते हैं, तो यह आपके लिए साक्षात एक ईश्वरीय वरदान के समान है। स्वप्न शास्त्र के जाने-माने जानकारों के अनुसार, यह सपना सीधे तौर पर आपकी आयु (दीर्घायु) में वृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की ओर इशारा कर रहा है। यदि आपका खुद का या आपके परिवार के किसी भी सदस्य का स्वास्थ्य काफी लंबे समय से खराब चल रहा है, तो जल्द ही उस गंभीर बीमारी से आपको छुटकारा मिलने वाला है। 4. एक साथ कई गायों का झुंड (Herd of Cows) देखना क्या आपने कभी अपनी नींद में बहुत सारी गायों को एक ही जगह पर एक साथ देखा है? सपने में गाय का एक विशाल झुंड देखना (Herd of Cow In A Dream) यह साफ तौर पर दर्शाता है कि बहुत ही जल्द आपके पास चारों दिशाओं से छप्पर फाड़ कर पैसा आने वाला है। जो लोग व्यापार, प्रॉपर्टी या किसी बड़े कारोबार से जुड़े हैं, उनके लिए यह सपना किसी बड़ी लॉटरी के लगने जैसा है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यह सपना आपको जल्द ही अपार धनवान बनने और जीवन में बेतहाशा तरक्की करने की तरफ स्पष्ट संकेत करता है। 5. मृत (मरी हुई) गाय को देखना: एक बहुत बड़ी चेतावनी जैसा कि हमने पहले बताया, सपनों की दुनिया में हर संकेत शुभ नहीं होता; कुछ सपने हमें आने वाले खतरे के प्रति आगाह भी करते हैं। अगर दुर्भाग्यवश आपको कभी मरी हुई या घायल अवस्था में Cow In A Dream दिखाई दे, तो आपको तुरंत सतर्क हो जाने की बहुत सख्त जरूरत है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, मरे हुए पशु या मरी हुई गाय को सपने में देखना बेहद अशुभ और एक घोर नकारात्मक संकेत माना जाता है। इस तरह की डरावनी Cow In A Dream का सीधा सा मतलब है कि निकट भविष्य में आपको कोई बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है, या फिर आपके जीवन में कोई बहुत बड़ी परेशानी और संकट अचानक दस्तक दे सकता है। सपनों के सच होने का समय और कुछ अचूक उपाय हमारे प्राचीन भारतीय शास्त्रों और वेदों में इस बात का भी बहुत ही गहराई से वर्णन किया गया है कि रात के किस प्रहर में देखे गए सपने सच होते हैं। अगर आपने ब्रह्म मुहूर्त (यानी सुबह 3 बजे से लेकर 5 बजे के बीच) के अत्यंत पवित्र समय में Cow In A Dream देखी है, तो इसके शत-प्रतिशत सच होने की संभावना बहुत अधिक होती है। सुबह-सुबह इस तरह का शुभ सपना देखने का मतलब है कि ईश्वरीय शक्तियां खुद आपको यह अलौकिक संदेश दे रही हैं कि आपकी सोई

Seeing Cow In A Dream : सपने में गाय देखना शुभ या अशुभ ? जानें सटीक और विस्तृत अर्थ….. Read More »