Shri Bhagwati Devi Stotram : श्री भगवती देवी स्तोत्रम्: देवी भगवती ममतामयी हैं। वे सदैव अपने भक्तों पर करुणा बरसाती हैं। जिस प्रकार एक माँ का अपने पुत्रों के प्रति सदैव स्नेह रहता है, उसी प्रकार देवी भी उन धर्मात्मा लोगों को आशीर्वाद देती हैं जो उनकी शरण में आते हैं।
श्री भगवती स्तोत्र, देवी शक्ति—अर्थात् देवी भगवती या दुर्गा—की स्तुति करने वाला एक पवित्र ग्रंथ है। देवी भगवती, देवी दुर्गा का ही एक रूप हैं। श्री भगवती स्तोत्र की रचना महर्षि व्यास जी ने की है। इसका वर्णन ‘दुर्गा सप्तशती’ में मिलता है; यह अत्यंत प्रभावशाली और परम कल्याणकारी स्तोत्र है। जो व्यक्ति संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में असमर्थ हैं, यदि वे केवल श्री भगवती स्तोत्र का ही पाठ कर लें, तो उन्हें भी संपूर्ण दुर्गा सप्तशती के पाठ के समान ही फल प्राप्त होता है।
यदि आप समस्त बाधाओं से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय, ऋण-मुक्ति, करियर में सफलता, उत्तम शिक्षा, तथा शारीरिक एवं मानसिक सुख की प्राप्ति चाहते हैं, Shri Bhagwati Devi Stotram तो इस स्तोत्र का पाठ अवश्य करें। यह अध्याय ‘श्री दुर्गा सप्तशती’ का ही एक अंग है। Shri Bhagwati Devi Stotram यदि आपके पास समय का अभाव है, तो केवल इस स्तोत्र का पाठ करके भी आप संपूर्ण दुर्गा सप्तशती के पाठ के समान ही पुण्य अर्जित कर सकते हैं। जब किसी प्रश्न का उत्तर न मिल रहा हो अथवा कोई समस्या हल न हो रही हो, तब इस स्तोत्र का पाठ करें।
देवी भगवती आपकी रक्षा करेंगी। जिन लोगों को सदैव धन का अभाव रहता है, Shri Bhagwati Devi Stotram जिन्हें निरंतर आर्थिक हानि उठानी पड़ती है, अथवा जिनका धन अनावश्यक कार्यों में व्यय होता रहता है, उन्हें देवी भगवती के इस स्तोत्र के पाठ से विशेष लाभ प्राप्त होता है। इसके पाठ से धन-प्राप्ति के नवीन मार्ग खुल जाते हैं और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
शत्रुओं से मुक्ति पाने और मुकदमों में विजय प्राप्त करने के लिए श्री भगवती स्तोत्र एक चमत्कार की तरह कार्य करता है। Shri Bhagwati Devi Stotram यदि नवरात्रि के अतिरिक्त अन्य दिनों में भी इसका नियमित पाठ किया जाए, तो शत्रु जीवन में कभी बाधा उत्पन्न नहीं कर पाते। Shri Bhagwati Devi Stotram इसके प्रभाव से न्यायालयीन मुकदमों में भी विजय प्राप्त होती है।
यदि कोई व्यक्ति ऋण के बोझ तले दबा हो, अथवा उसे अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी ऋण (कर्ज) लेना पड़ता हो, तो इस स्तोत्र का नियमित पाठ उसे ऋण-मुक्त कर देता है। वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए भी श्री भगवती स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, यह स्तोत्र आकर्षण-शक्ति को बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होता है।
श्री भगवती स्तोत्र के लाभ:
इसके पाठ से धन-प्राप्ति के नवीन मार्ग खुल जाते हैं और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
शत्रुओं से मुक्ति पाने और मुकदमों में विजय प्राप्त करने के लिए श्री भगवती स्तोत्र एक चमत्कार की तरह कार्य करता है। Shri Bhagwati Devi Stotram धन कमाने के नए रास्ते खुल जाते हैं और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए:
जो लोग कर्ज़ में डूबे हुए हैं, उन्हें नियमित रूप से ‘श्री भगवती स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए।
श्री भगवती देवी स्तोत्रम् हिंदी पाठ: Shri Bhagwati Devi Stotram in Hindi
जय भगवति देवी नमो वरदे,
जय पापविनाशिनी बहुफलदे ।
जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे,
प्रणमामि तु देवी नरार्तिहरे ।। 1 ।।
जय चन्द्रदिवाकरनेत्रधरे,
जय पावकभूषितवक्त्रवरे ।
जय भैरवदेहनिलीन हरे,
जय अंधकदैत्यविशोषकरे ।। 2 ।।
जय महिषविमर्दिनि शूलकरे,
जय लोकसमस्तकपापहरे ।
जय भगवति देवी नमो वरदे,
जय पापविनाशिनी बहुफलदे ।। 3 ।।
जय षण्मुखसायुधईशनुते,
जय सागरगामिनि शम्भुनुते ।
जय दुःखदरिद्रविनाशकरे,
जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे ।। 4 ।।
जय भगवति देवी नमो वरदे,
जय पापविनाशिनी बहुफलदे ।
जय देवि समस्तशरीरधरे,
जय नाकविदर्शिनि दुःखहरे ।। 5 ।।
जय व्याधिविनाशिनि मोक्षकरे,
जय वांछितदायिनि सिद्धिवरे ।
जय भगवति देवी नमो वरदे,
जय पापविनाशिनी बहुफलदे ।। 6 ।।
एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं य: पठेन्नियत: शुचि: ।
ग्रहे वा शुद्धभावेन प्रीता भगवती सदा ।। 7 ।।
।। इति श्री भगवती देवी स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ।।
Shri Bhagwati Devi Stotram : श्री भगवती देवी स्तोत्रम्….
Shri Bhagwati Devi Stotram : श्री भगवती देवी स्तोत्रम्: देवी भगवती ममतामयी हैं। वे सदैव अपने भक्तों पर करुणा बरसाती…
Shri Bhagwati Devi Stotram : श्री भगवती देवी स्तोत्रम्
Shri Bhagwati Devi Stotram : श्री भगवती देवी स्तोत्रम्: देवी भगवती ममतामयी हैं। वे सदैव अपने भक्तों पर करुणा बरसाती…
Shri Prahlad Kritam-Ganesha Stotram : श्री प्रहलाद कृत गणेश स्तोत्र…..
श्रीप्रहलाद कृत गणेश स्तोत्र हिंदी पाठ : Shri Prahlad Kritam-Ganesha Stotram in Hindi॥ श्री गणेशाय नमः ॥अधुना शृणु देवस्य साधनं योगदं…




KARMASU