Mayureshwar Stotra

Shri Mayureshwar Stotra : श्री मयूरेश्वर स्तोत्र…..

Shri Mayureshwar Stotraश्री मयूरेश्वर स्तोत्र: श्री मयूरेश्वर स्तोत्र संस्कृत भाषा में रचित है। इस स्तोत्र की रचना स्वयं भगवान ब्रह्मा ने की है। यह भगवान गणेश की स्तुति है। ‘मयूरेश’ भगवान गणेश का ही एक नाम है। श्री मयूरेश्वर स्तोत्र का पाठ करने से साधक को ‘भुक्ति’ (सांसारिक सुख) और ‘मुक्ति’ (मोक्ष) दोनों की प्राप्ति होती है। यह सभी प्रकार की विपत्तियों और कठिनाइयों का नाश करता है। यह साधक की समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करता है।

यह मानसिक और शारीरिक, दोनों प्रकार के रोगों और व्याधियों को दूर करता है। श्री मयूरेश्वर स्तोत्र अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली है। Mayureshwar Stotra भगवान गणपति ही एकमात्र ऐसे समर्थ देवता हैं जो सभी विघ्नों का नाश करते हैं और समस्त कार्यों को सिद्ध करते हैं।

यदि किसी भी पूजा-पाठ या अनुष्ठान में उन्हें साक्षी (गवाह) बनाया जाए, तो वह पूजा या अनुष्ठान निश्चित रूप से सफल होता है। यद्यपि भगवान गणपति के अनेक स्तोत्र प्रचलित हैं, तथापि ‘श्री मयूरेश्वर स्तोत्र’ का महत्व सर्वोपरि माना जाता है। यह स्तोत्र अपने आप में पूर्ण और स्वयंसिद्ध है, अतः इसका पाठ करने से पूर्ण सफलता की प्राप्ति होती है। गृह-क्लेश निवारण, बच्चों के रोगों से मुक्ति, सुख-शांति, उन्नति और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने हेतु इसका पाठ अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस स्तोत्र का पाठ कोई भी पुरुष अथवा स्त्री कर सकता है।

यदि आप प्रतिदिन अपने जीवन में इस स्तोत्र का पाठ करते हैं और भगवान गणपति की आराधना करते हैं, तो वे आपके जीवन में किसी भी प्रकार का विघ्न नहीं आने देंगे। Mayureshwar Stotra सभी प्रकार के रोगों और चिंताओं से मुक्ति पाने के लिए, सुखी पारिवारिक जीवन के लिए, बच्चों के रोगों के निवारण के लिए, पूर्ण शांति के लिए तथा प्रत्येक क्षेत्र में पूर्ण सफलता और उन्नति प्राप्त करने के लिए इस स्तोत्र को सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

संसार के समस्त साधक इस बात को स्वीकार करते हैं कि किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न करने हेतु, सर्वप्रथम भगवान गणपति का ध्यान अथवा उनकी पूजा करना अनिवार्य है। Mayureshwar Stotra केवल मनुष्य ही नहीं, अपितु स्वयं देवताओं ने भी सर्वप्रथम भगवान गणपति की पूजा को ही स्वीकार किया है।

स्वयं भगवान शिव ने भी यह कहा है कि किसी भी कार्य की सफलता के लिए ‘गणपति साधना’ ही सर्वप्रथम आवश्यक है। इस स्तोत्र का पाठ कोई भी व्यक्ति कर सकता है, चाहे वह किसी भी लिंग या आयु का हो। Mayureshwar Stotra भगवान शिव के पुत्र, गणेश जी को ‘शीघ्र फलदायी’ देवता माना जाता है। Mayureshwar Stotra इस स्तोत्र का पाठ किसी भी ‘चतुर्थी’ तिथि पर करना लाभकारी होता है, परंतु ‘अंगारक चतुर्थी’ के दिन इसका पाठ करने से प्राप्त होने वाला पुण्य-फल कई गुना बढ़ जाता है। राजा इंद्र, मयूरेश के गणेश की मधुरता से प्रसन्न हुए; उन्होंने सभी बाधाओं को पार कर लिया था।

श्री मयूरेश्वर स्तोत्र के लाभ:

श्री मयूरेश्वर स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है, यह आपके जीवन से सभी बुराइयों को दूर रखता है, और आपको स्वस्थ, धनवान तथा समृद्ध बनाता है।

इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए:

जो व्यक्ति कोई नया कार्य (प्रोजेक्ट) शुरू करना चाहता है Mayureshwar Stotra और उसमें सफलता प्राप्त करना चाहता है, उसे श्री मयूरेश्वर स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए।

।। श्रीगणेशाय नम: ।।

ब्रहोवाच –

पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुदा ।
मायाविनं दुर्विभाव्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 1 ।।

परातत्परं चिदानन्दं निर्विकारं हृदि स्थितम् ।
गुणातीतं गुणमयं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 2 ।।

सृजन्तं पालयन्तं च संहरन्तं निजेच्छया ।
सर्वविघ्नहरं देवं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 3 ।।

नानादैत्यनिहन्तारं नानारूपाणि बिभ्रतम् ।
नानायुधधरं भक्त्या मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 4 ।।

इन्द्रादिदेवतावृन्दैरभिष्टुतमहर्निशम् ।
सदसद्व्यक्तमव्यक्तं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 5 ।।

सर्वशक्तिमयं देवं सर्वरूपधरं विभुम् ।
सर्वविद्याप्रवक्तारं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 6 ।।

पार्वतीनदनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम् ।
भक्तानन्दकरं नित्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 7 ।।

मुनिध्येयं मुनिनुतं मुनिकामप्रपूरकम् ।
समष्टिव्यष्टिरूपं त्वां मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 8 ।।

सर्वाज्ञाननिहान्तारं सर्वज्ञानकरं शुचिम् ।
सत्यज्ञानमयं सत्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 9 ।।

अनेककोटिब्रह्माण्डनायकं जगदीश्वरम् ।
अनन्तविभवं विष्णुं मयूरेशं नमाम्यहम् ।। 10 ।।

इदं ब्रह्मकरं स्तोत्रं सर्वपापप्रणाशनम् ।
सर्वकामप्रदं नृणां सर्वोपद्रवनाशनम् ।। 11 ।।

कारागृहगतानां च मोचनं दिनसप्तकात् ।
आधिव्याधिहरं चैव भुक्तिमुक्तिप्रदं शुभम् ।। 12 ।।

।। इति श्री मयूरेश्वर स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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