Govardhan Puja

Govardhan Puja 2025 Niyam: गोवर्धन पूजा के दिन क्या करें और क्या नहीं? जानें शुभ मुहूर्त और अन्नकूट के नियम

Govardhan Puja 2025: गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट पूजा भी कहते हैं, यह पर्व दीपावली के ठीक अगले दिन बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह शुभ दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण द्वारा ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाने की महान लीला का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूजा-पाठ करने से जीवन में शुभता का आगमन होता है। इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि गोवर्धन पूजा 2025 कब मनाई जाएगी, शुभ मुहूर्त क्या है, और इस दिन आपको किन नियमों का पालन करना चाहिए। गोवर्धन पूजा 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त (Govardhan Puja 2025 Muhurat) हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। विवरण समय/तिथि गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2025) 22 अक्टूबर 2025 प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे प्रतिपदा तिथि का समापन 22 अक्टूबर शाम 8:16 बजे गोवर्धन पूजा मुहूर्त (Govardhan Puja Muhurat) सुबह 06 बजकर 26 मिनट से 08 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। (कुछ स्रोतों के अनुसार: सुबह 6:30 बजे से 8:47 बजे तक) Govardhan Puja 2025 Niyam: गोवर्धन पूजा के दिन क्या करें और क्या नहीं…… गोवर्धन पूजा के दिन क्या करें? (Govardhan Puja 2025 Par Kya Karen?) धर्म शास्त्रों में गोवर्धन पूजा के दिन कुछ विशेष अनुष्ठान करने का महत्व बताया गया है। इन कार्यों को करने से भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 1. गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ: घर के आंगन या मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनानी चाहिए। 2. श्रीकृष्ण की स्थापना: इस आकृति के मध्य में भगवान कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। 3. अन्नकूट और छप्पन भोग: इस दिन 56 भोग या अन्नकूट तैयार करना चाहिए। 4. भोग अर्पित करें: इस भोग को भगवान श्रीकृष्ण तथा गोवर्धन महाराज को श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। 5. खास भोग सामग्री: अन्नकूट में कढ़ी-चावल, बाजरा, और माखन-मिश्री को ज़रूर शामिल करना चाहिए। 6. गौ पूजा का महत्व: इस दिन गाय की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसे में, गाय को स्नान कराकर, तिलक लगाएं और फूल-माला पहनाएं। 7. हरा चारा खिलाएँ: गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए। 8. सात्विक भोजन: इस दिन सात्विक भोजन ही करना चाहिए। 9. सात बार परिक्रमा: गोवर्धन पर्वत की बनाई गई आकृति की सात बार परिक्रमा करें। 10. मंत्र जाप: परिक्रमा करते समय वैदिक मंत्रों का जाप करना चाहिए। 11. वास्तविक परिक्रमा: यदि संभव हो पाए, तो गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा भी करनी चाहिए। 12. मंदिर दर्शन: इस दिन भगवान कृष्ण के मंदिर में दर्शन के लिए ज़रूर जाएं। 13. शुभ वस्त्र: शुभ कार्यों में लाल, पीला, नारंगी जैसे रंग के कपड़े पहनना चाहिए। गोवर्धन पूजा के दिन क्या नहीं करें? (Govardhan Puja 2025 Par Kya Na Karen?) पूजा-अर्चना के साथ-साथ, गोवर्धन पूजा के दिन कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। 1. तुलसी के पत्ते न तोड़ें: गोवर्धन पूजा के दिन और इससे पहले आने वाली अमावस्या को तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। 2. तामसिक भोजन से बचें: इस दिन घर में मांस, मदिरा या अन्य तामसिक भोजन नहीं बनाना चाहिए। साथ ही, ऐसे भोजन का सेवन करना भी वर्जित है। 3. वस्त्रों का ध्यान: पूजा के समय काले या नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। 4. द्वार बंद न रखें: इस दिन घर का मुख्य द्वार या खिड़की लंबे समय तक बंद नहीं रखनी चाहिए। 5. पेड़-पौधे न काटें: इस दिन किसी भी पेड़-पौधे को नहीं काटना चाहिए, क्योंकि यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। इन चीजों के बिना अधूरा है छठ व्रत, जानें पूजा सामग्री और सही नियम

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Sapne Mein Prasad Dekhna: सपने में प्रसाद देखना क्या है बूंदी, पंचामृत और बांटने का गहरा रहस्य ?

Sapne Mein Prasad Pana: रात्रि में हम जो सपने देखते हैं, उन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। अक्सर हम इन्हें सामान्य समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हमारे देखे गए सपनों का एक दूसरा अर्थ भी निकलता है। कई बार ये सपने भविष्य में हमारे साथ घटने वाली घटनाओं की तरफ़ संकेत होते हैं। यदि हम इन संकेतों को समझ लें, तो हम भविष्य की किसी विपदा से बच सकते हैं या आने वाली अच्छी घटनाओं की जानकारी ले सकते हैं। आज के इस लेख में हम बात करेंगे यदि आपने सपने में प्रसाद (Prasad) देखा है, या खुद को मंदिर में Prasad प्रसाद चढ़ाते/बांटते हुए देखा है, तो इन सपनों का क्या अर्थ हो सकता है और ये आपके भविष्य को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं। Sapne Mein Prasad Dekhna: सपने में प्रसाद देखना: सकारात्मकता और उन्नति का प्रतीक……… अधिकांश स्वप्न विश्लेषणकर्ताओं ने सपने में प्रसाद को देखना सकारात्मकता का प्रतीक माना है। ऐसा कहा जाता है कि सपने में प्रसाद देखना आपकी उन्नति (प्रगति) का संकेत है। 1. सपने में बूंदी का प्रसाद देखना: हनुमान जी का सीधा संदेश यदि आपने सपने में बूंदी का प्रसाद देखा है, तो यह एक विशेष संदेश देता है। बूंदी का महत्व: बूंदी का प्रसाद संकट मोचन हनुमान जी का परम प्रिय प्रसाद है। मंगलवार और शनिवार के दिन बजरंग बली को बेसन के लड्डू या बूंदी का प्रसाद ही चढ़ाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि बूंदी का भोग लगाने से पवनसुत हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। क्या है सपने का अर्थ? सपने में बूंदी का Prasad प्रसाद दिखाई देना यह बताता है कि पवन पुत्र हनुमान जी आपको याद दिलाना चाहते हैं कि आपने उन्हें विस्मृत (भूल) कर दिया है। वे आपको याद दिला रहे हैं कि अब आप उनके मंदिर नहीं आते और न ही बूंदी का (Prasad) प्रसाद चढ़ाते हैं। हनुमान जी यह संदेश देना चाहते हैं कि भक्त और भगवान का संबंध उनकी तरफ से आज भी कायम है, लेकिन शायद आप उस मधुर संबंध को भूल गए हैं। सपने में मां लक्ष्मी और गणेश जी का दीदार: जानिए ये 7 शुभ संकेत जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत यह स्वप्न उन लोगों को भी दिखाई दे सकता है जिन्होंने बजरंग बली से कोई मनौती मांगी हो और मनोरथ पूरा होने के बाद वे प्रसाद चढ़ाना भूल गए हों। सपने में बूंदी का प्रसाद देखने पर क्या करें? यदि आपने यह सपना देखा है, तो आपको निम्नलिखित कार्य करने चाहिए: 1. मंगलवार या शनिवार को अपने क्षेत्र के हनुमान मंदिर जाएँ। 2. वहाँ श्रद्धा पूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करें। 3. बजरंग बली को मीठी बूंदी का भोग लगाएँ। 4. मंदिर में आए हुए अन्य भक्तों और गरीबों में बूंदी का प्रसाद बाँटें। 5. कुछ प्रसाद अपने परिवार के लिए लेकर घर आ जाएँ। ऐसा करने पर आप पर पुनः हनुमान जी की कृपा होगी और आपके जीवन में सब ‘मीठा-मीठा’ होने लगेगा। 2. सपने में प्रसाद खाते हुए देखना: बड़ा लाभ और ईश्वर का आशीर्वाद सपने में खुद को प्रसाद खाते हुए देखना बहुत ही अच्छा सपना माना जाता है। लाभ के संकेत: इसका अर्थ है कि आपको भविष्य में कोई बड़ा लाभ होने वाला है, और वह भी बहुत कम मेहनत में। यदि आप किसी नए कार्य में लगे हुए हैं, तो उसमें भी आपको काफी लाभ प्राप्त होगा। संपत्ति और निवेश: यदि आपने कोई भूखंड या संपत्ति खरीदी है और उसे वापस बेचने की सोच रहे हैं, तो आपको उसके तीन से चार गुना पैसे वापस मिलने वाले हैं। ईश्वरीय कृपा: यह सपना संकेत करता है कि ईश्वर की कृपा दृष्टि आप पर बनी हुई है। आप जो भी कार्य हाथ में ले रहे हैं, उसमें बड़ों और ईश्वर का आशीर्वाद आपके साथ बना हुआ है, इसलिए आपको निश्चिंत रहना चाहिए। Prasad आपको अपनी मेहनत का फल निश्चित रूप से बहुत जल्द मिलने वाला है। 3. सपने में पंचामृत देखना: सकारात्मक ऊर्जा और शुभता पंचामृत को बहुत ही ज्यादा पवित्र समझा जाता है, जिसका प्रयोग भगवान के अभिषेक में किया जाता है। पंचामृत में दही, दूध, घी, शक्कर आदि का प्रयोग किया जाता है। यदि आपने सपने में पंचामृत देखा है, तो यह बहुत ही शुभ सपना है। यह भविष्य में आपके साथ अच्छी घटनाओं के होने की तरफ इशारा करता है। यह संकेत देता है कि आप में एक सकारात्मक ऊर्जा बनी रहने वाली है। 4. सपने में प्रसाद बांटते हुए देखना: धार्मिक जिम्मेदारी और पुण्य का लाभ यदि आप सपने में खुद को Prasad प्रसाद बांटते हुए देखते हैं, तो इसका अर्थ है कि बहुत जल्द आपको कोई धार्मिक कार्य करने का लाभ प्राप्त होने वाला है। या फिर आपको कोई जिम्मेदारी भरा कार्य सौंपा जाने वाला है, Prasad जिसे आप बखूबी निभाने वाले हैं। 5. सपने में प्रसाद चढ़ाना: मनोरथ की पूर्ति और धार्मिक यात्रा यदि आप सपने में खुद को प्रसाद चढ़ाते हुए देखते हैं, तो यह एक बहुत ही शुभ सपना है। यह सपना इशारा करता है कि आपको बहुत जल्द कोई धार्मिक यात्रा करने का लाभ प्राप्त हो सकता है। या फिर आप अपने परिवार के साथ किसी मंदिर या गुरुद्वारे आदि में कोई चढ़ावा चढ़ा सकते हैं। यह इस बात का भी संकेत है कि काफी समय से जिस वस्तु की आप कामना कर रहे थे, जिस लक्ष्य की प्राप्ति की आप इच्छा कर रहे थे, वह आपको मिलने वाली है। इसकी खुशी आप भगवान के मंदिर में Prasad प्रसाद चढ़ाकर जाहिर करने वाले हैं।

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Lakshmanakritam Ramanatha Stotram: लक्ष्मणकृतं रामनाथस्तोत्रम्

Lakshmanakritam Ramanatha Stotram: लक्ष्मणकृतं रामनाथस्तोत्रम् लक्ष्मण उवाच ।नमस्ते रामनाथाय त्रिपुरघ्नाय शम्भवे ।पार्वतीजीवितेशाय गणेशस्कन्दसूनवे ॥ १३॥ नमस्ते सूर्यचद्राग्निलोचनाय कपर्दिने ।नमः शिवाय सोमाय मार्कण्डेयभयच्छिदे ॥ १४॥ नमः सर्वप्रपञ्चस्य सृष्टिस्थित्यन्तहेतवे ।नम उग्राय भीमाय महादेवाय साक्षिणे ॥ १५॥ सर्वज्ञाय वरेण्याय वरदाय वराय ते ।श्रीकण्ठाय नमस्तुभ्यं पञ्चपातकभेदिने ॥ १६॥ नमस्तेऽस्तु परानन्दसत्यविज्ञानरूपिणे ।नमस्ते भवरोगघ्न स्नायूनां पतये नमः ॥ १७॥ पतये तस्कराणां ते वनानां पतये नमः ।गणानां पतये तुभ्यं विश्वरूपाय साक्षिणे ॥ १८॥ कर्मणा प्रेरितः शम्भो जनिष्ये यत्र यत्र तु ।तत्र तत्र पदद्वन्द्वे भवतो भक्तिरस्तु मे ॥ १९॥ असन्मार्गे रतिर्मा भूद्भवतः कृपया मम ।वैदिकाचारमार्गे च रतिः स्याद्भवते नमः ॥ १.४९.२०॥ इति श्रीस्कन्दपुराणे ब्रह्मखण्डे सेतुखण्डे एकोनपञ्चाशत्तमाध्यायान्तर्गतं लक्ष्मणकृतं रामनाथस्तोत्रं समाप्तम् । स्कन्दपुराण । ब्रह्मखण्ड । सेतुल्खण्ड । अध्याय ४९/१३-२०॥

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Shri Lakshminrisimhastavana Stotram:श्रीलक्ष्मीनृसिंहस्तवनस्तोत्रम्

Shri Lakshminrisimhastavana Stotram:श्रीलक्ष्मीनृसिंहस्तवनस्तोत्रम् श्रीगणेशाय नमः । श्रीलक्ष्मीनृसिंहाय नमः ।अथ ध्यानम् ।लक्ष्मीशोभितवामभागममलं सिंहासने सुन्दरंसव्ये चक्रधरं च निर्भयकरं वामेन चापं वरम् ।सर्पाधीशकृतान्तपत्रममलं Lakshminrisimhastavana श्रीवत्सवक्षःस्थलंवन्दे देवमुनीन्द्रवन्दितपदं लक्ष्मीनृसिंहं विभुम् ॥ १॥ नमोऽस्तु लीलामयविग्रहाय स्वरूपदृष्ट्या हतसद्भ्रमाय ।नमः परानन्दपरालयाय स्वभावसम्पत्तिमहोदयाय ॥ २॥ नमो गुणानां पतये महिम्ने विकारधाम्नेऽखिलकारणाय ।नमो जगद्भासयते गरिम्णे सते चिदात्माकृतये गुणाय ॥ ३॥ त्वमादिरस्यासि निदानमध्यं विश्वाकृतिस्त्वं प्रलयो विभुस्त्वम् ।त्वं सर्वयोनिस्त्वं सर्वयोनिस्त्वं सर्वशोऽसि त्वं सर्वशश्च ॥ ४॥ नमः पुरस्तादथ पार्श्वयोस्ते पश्चान्नमो ते बहिरीश्वराय ।पूर्णाद्वितीयाय नमः पराय अणीयसेऽनन्तचिदे परस्मै ॥ ५॥ वह्नेः स्फुल्लिङ्गा इव वारिभझ सिन्धोरिवौघा इव वासनानाम् ।भवन्ति तिष्ठन्ति वियन्ति यत्र ब्रह्माण्डसङ्घास्तमजं प्रपद्ये ॥ ६॥ यदीक्षया जनिरस्या प्रमेयो विभुर्नृसिंहो वरदो ममास्तु ।येनाहमस्मिन् विविधेऽत्रसर्गे सम्प्रेरितः कालविनष्टदृष्टिः ॥ ७॥ यस्यादेशात् सर्गकर्मप्रवृत्तो भूत्वाप्यहं कालसम्मूढचेताः ।स पुण्यवाचा ममसृष्टीमेतामलङ्करोतु प्रभविष्णुरीशः ॥ ८॥ इहैष लोके ह्यसमीक्ष्य बद्धो मायागुणैः कामयते तु कामान् ।यच्छन्नमुष्मै य इहाप्रमेयो हरन्त्यनन्तो निमिषं प्रसीद ॥ ९॥ नमो नियन्त्रे नियमालयाय नमो जगन्मोहतमोरुणाय ।नमो नृसिंहाय विलासधाम्ने नमः शिवायामितविक्रमाय ॥ १०॥ नमो मनोदूरचराय वाचां वाचामनिर्देश्य पदाय भूम्ने ।नमः स्वभासाखिलभासकाय प्रमाणमात्रे जगदीश्वराय ॥ ११॥ इति पद्मपुराणे श्रीनृसिंहस्तवनं सम्पूर्णम् । ॐ तत्सत् ।

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Diwali Par Kya Kare Hindi: दीपावली पर क्या करें, सुबह से लेकर रात तक की 25 जरूरी बातें

Diwali:अभी कार्तिक मास चल रहा है और इस महीने में धनतेरस, दीपावली, देवउठनी एकादशी और देव दीपावली जैसे व्रत-पर्व मनाए जाते हैं। दीपावली पर घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना से देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस साल दीपोत्सव 5 नहीं, 6 दिनों का है, क्योंकि कार्तिक मास की अमावस्या 20-21 अक्टूबर को दो दिन है। 20 तारीख की शाम को कार्तिक अमावस्या रहेगी, इसलिए इसी दिन दीपावली मनाई जाएगी। दीपोत्सव के दिनों में पूजा-पाठ के साथ ही परंपरागत 5 शुभ काम जरूर करना चाहिए। Diwali इन कामों की वजह से घर में सकारात्मकता और पवित्रता बनी रहती है। त्योहारों के दिनों में घर का वातावरण प्रसन्नता देने वाला और सुखद बना रहेगा। जानिए दीपावली पर कौन-कौन शुभ काम कर सकते हैं… ब्रह्म पुराण के अनुसार दिवाली Diwali पर अर्धरात्रि के समय महालक्ष्मीजी सद्ग्रहस्थों के घरों में विचरण करती हैं। इस दिन घर-बाहर को साफ-सुथरा कर सजाया-संवारा जाता है। दीपावली Diwali मनाने से श्री लक्ष्मीजी प्रसन्न होकर स्थायी रूप से सद्गृहस्थ के घर निवास करती हैं। दीपावली धनतेरस, नरक चतुर्दशी तथा महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाईदूज-इन 5 पर्वों का मिलन है। मंगल पर्व दीपावली के दिन सुबह से लेकर रात तक क्या करें कि महालक्ष्मी का घर में स्थायी निवास हो जाए.. आइए जानें विस्तार से…. Diwali Par Kya Kare Hindi:दीपावली के पूजन की संपूर्ण विधियां दी गई हैं। फिर भी संक्षेप में 25 बिंदुओं से जानें कि क्या करें इस दिन ….  1. प्रातः स्नानादि से निवृत्त हो स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 2 . अब निम्न संकल्प से दिनभर उपवास रहें-  मम सर्वापच्छांतिपूर्वकदीर्घायुष्यबलपुष्टिनैरुज्यादि-सकलशुभफल प्राप्त्यर्थं गजतुरगरथराज्यैश्वर्यादिसकलसम्पदामुत्तरोत्तराभिवृद्ध्‌यर्थं इंद्रकुबेरसहितश्रीलक्ष्मीपूजनं करिष्ये।  3.दिन में पकवान बनाएं या घर सजाएं। बड़ों का आशीर्वाद लें।  4 . सायंकाल पुनः स्नान करें। 5 . लक्ष्मीजी के स्वागत की तैयारी में घर की सफाई करके दीवार को चूने अथवा गेरू से पोतकर लक्ष्मीजी का चित्र बनाएं। (लक्ष्मीजी का चित्र भी लगाया जा सकता है।) 6 . भोजन में स्वादिष्ट व्यंजन, कदली फल, पापड़ तथा अनेक प्रकार की मिठाइयां बनाएं। 7 .लक्ष्मीजी के चित्र के सामने एक चौकी रखकर उस पर मौली बांधें। 8. इस पर गणेशजी की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें। 9 . फिर गणेशजी को तिलक कर पूजा करें। 10. अब चौकी पर छः चौमुखे व 26 छोटे दीपक रखें। 11.इनमें तेल-बत्ती डालकर जलाएं। 12. फिर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, अबीर, गुलाल, धूप आदि से विधिवत पूजन करें। 13. पूजा के बाद एक-एक दीपक घर के कोनों में जलाकर रखें। 14. एक छोटा तथा एक चौमुखा दीपक रखकर निम्न मंत्र से लक्ष्मीजी का पूजन करें-  दिवाली की संपूर्ण पूजा विधि मंत्र सहित, ऐसे करें दिवाली पर लक्ष्मी पूजन नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरेः प्रिया। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्वदर्चनात॥  साथ ही निम्न मंत्र से इंद्र का ध्यान करें-  ऐरावतसमारूढो वज्रहस्तो महाबलः। शतयज्ञाधिपो देवस्तमा इंद्राय ते नमः॥ पश्चात निम्न मंत्र से कुबेर का ध्यान करें-  धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च। भवंतु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादिसम्पदः॥ 15. इस पूजन के पश्चात तिजोरी में गणेशजी तथा लक्ष्मीजी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजा करें। 16. तत्पश्चात इच्छानुसार घर की बहू-बेटियों को रुपए दें। 17. लक्ष्मी पूजन रात के बारह बजे करने का विशेष महत्व है। 18. इसके लिए एक पाट पर लाल कपड़ा Diwali बिछाकर उस पर एक जोड़ी लक्ष्मी तथा गणेशजी की मूर्ति रखें। 19. समीप ही एक सौ रुपए, सवा सेर चावल, गुड़, चार केले, मूली, हरी ग्वार की फली तथा पांच लड्डू रखकर लक्ष्मी-गणेश का पूजन करें। 20 उन्हें लड्डुओं से भोग लगाएं। 21. दीपकों का काजल सभी स्त्री-पुरुष आंखों में लगाएं। 22. फिर रात्रि जागरण कर गोपाल सहस्रनाम पाठ करें।  23. व्यावसायिक प्रतिष्ठान, गद्दी की भी विधिपूर्वक पूजा करें। 24. रात को बारह बजे दीपावली पूजन के उपरान्त चूने या गेरू में रुई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल तथा छाज (सूप) पर तिलक करें। 25. दूसरे दिन प्रातःकाल चार बजे उठकर पुराने छाज में कूड़ा रखकर Diwali उसे दूर फेंकने के लिए ले जाते समय कहें ‘लक्ष्मी-लक्ष्मी आओ, दरिद्र-दरिद्र जाओ’।

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Diwali 2025 Subh Muhurat: दीवाली से पहले मिल रहे हैं ये शुभ संकेत, समझिए मां लक्ष्मी आने वाली हैं आपके घर

दीवाली (Diwali 2025) हिंदुओं के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या पर मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक अमावस्या पर ही प्रभु श्री रामचंद्र, सीता माता व लक्ष्मण जी के संग वनवास से अयोध्या वापस लौटे थे। Diwali 2025 इस दिन लोग अपने घरों को दीयों और रोशनी से जगमग करते हैं और शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है। इस वर्ष दीवाली का त्योहार 20 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। Diwali 2025 आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका दीवाली से पहले दिखना काफी शुभ माना जाता है और ये चीजें आपको लक्ष्मी जी के आगमन का संकेत देती हैं। Diwali 2025 Subh Muhurat: दीवाली से पहले मिल रहे हैं ये शुभ संकेत…. 1. धन की देवी के प्रसन्न होने के भौतिक संकेत: Physical signs of the goddess of wealth being pleased दीवाली से पहले घर की साफ-सफाई भी जरूर की जाती है, क्योंकि माना जाता है Diwali 2025 कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। सफाई के दौरान या आपके आसपास कुछ चीजें दिखना अत्यंत शुभ माना जाता है: मोर पंख (Mor Pankh): अगर आपको दीवाली की सफाई करते समय घर में मोर पंख मिलता है, तो इसे एक शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है। इसका अर्थ यह माना जाता है कि घर के सदस्यों पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा बरसने वाली है। पशु-पक्षियों का आगमन: यदि दीपावली से पहले आपके घर या उसके आसपास उल्लू, छिपकली, छछूंदर या काली चींटी आती है, तो इसे भी धन की देवी के प्रसन्न होने के संकेत के रूप में देखा जाता है। गाय माता: अगर आपके द्वार पर रोजाना सुबह गाय माता आती है, तो इसे भी एक शुभ संकेत माना जाता है। ऐसे में आपको गाय को रोटी जरूर खिलानी चाहिए, जिससे मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे। 2. स्वप्न शास्त्र में शुभ संकेत:Auspicious signs in dream science स्वप्न शास्त्र (Swapn Shastra) में यह माना गया है कि अगर दीवाली के अवसर से पहले आपको कुछ विशेष चीजें सपने में दिखाई दें, तो यह भी मां लक्ष्मी की कृपा का संकेत होता है: शुभ दर्शन: $ \text{ॐ} $, शंख या देवी-देवताओं के दर्शन होना एक अच्छा संकेत माना जाता है। मंदिर प्रवेश: इसके साथ ही, अगर आपको मंदिर दिखाई देता है या आप खुद को मंदिर में प्रवेश करते हुए देखते हैं, तो इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। फल: इन सपनों का अर्थ यह है कि आपको जल्द ही मां लक्ष्मी की कृपा मिलने वाली है और Diwali 2025 आपकी धन संबंधी समस्याएं दूर हो सकती हैं। दिवाली की संपूर्ण पूजा विधि मंत्र सहित, ऐसे करें दिवाली पर लक्ष्मी पूजन 3. दिवाली की सुबह करें ये महत्वपूर्ण कार्य (स्कंदपुराण के अनुसार): Do these important tasks on the morning of Diwali (according to Skandpuran) दिवाली की रात्रि को क्या किया जाता है, यह तो सबको पता है, पर सुबह में क्या किया जाता है, यह जानना भी महत्वपूर्ण है ताकि आपका पूरा दिन शुभ रहे। स्नान और पितरों को प्रणाम: स्कंदपुराण के हवाले से बताया है Diwali 2025 कि कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन सुबह-सुबह स्नान करें और देवी-देवताओं की पूजा करने के साथ-साथ अपने पितरों को भी प्रणाम करना चाहिए। सुबह की शुरुआत इस तरह से होनी चाहिए, तब आपका पूरा दिन शुभ रहता है। दान-दक्षिणा: श्रद्धालुओं को इस दिन उनके पितरों के नाम से दान-दक्षिणा भी करनी चाहिए। पार्वण श्राद्ध और व्रत: स्कंदपुराण के अनुसार, दूध, दही, घी आदि से पार्वण श्राद्ध करना आपके लिए शुभ होगा। बहुत सारे लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। शिवलिंग पर विशेष अर्पित: इस दिन भगवान शिव का भी अभिषेक किया जाता है। Diwali 2025 यदि आप आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं तो सुबह में शिवलिंग पर कच्चे चावल को चढ़ा सकते हैं। वहीं, अगर आप गेहूं अर्पित करेंगे तो संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। सुबह में इन सभी पूजा विधियों से गुजरने के बाद, आपको शाम को प्रदोष काल में धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। 20 अक्टूबर को दीवाली का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 8 मिनट से रात्रि के 8 बजकर 18 मिनट तक है।

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Kamala Ashtakam:कमलाष्टकम्

Kamala Ashtakam:कमलाष्टकम् न्यङ्कावरातिभयशङ्काकुले धृतदृगङ्कायतिः प्रणमतां शङ्काकलङ्कयुतपङ्कायताश्मशितटङ्कायितस्वचरिता ।त्वं कालदेशपदशङ्कातिपातिपतिसङ्काश वैभवयुता शं काममातरनिशं कामनीयमिह सङ्काशयाशु कृपया ॥ १॥ आचान्तरङ्गदलिमोचान्तरङ्गरुचिवाचां तरङ्गगतिभिः काचाटनाय कटुवाचाटभावयुतनीचाटनं न कलये ।वाचामगोचरसदाचारसूरिजनताचातुरीविवृतये प्राचां गतिं कुशलवाचां जगज्जननि याचामि देवि भवतीम् ॥ २॥ चेटीकृतामरवधूटीकराग्रधृतपेटीपुटार्घ्यसुमनो- वीटीदलक्रमुकपाटीरपङ्कनवशाटीकृताङ्गरचना ।खेटीकमानशतकोटीकराब्जजजटाटीरवन्दितपदा या टीकतेऽब्जवनमाटीकतां हृदयवाटीमतीव कमला ॥ ३॥ स्वान्तान्तरालकृतकान्तागमान्तशतशान्तान्तराघनिकराः शान्तार्थकान्तवकृतान्ता भजन्ति हृदि दान्ता दुरन्ततपसा ।यां तानतापभवतान्तातिभीतजगतां तापनोदनपटुं मां तारयत्वशुभकान्तारतोऽद्य हरिकान्ताकटाक्षलहरी ॥ ४॥ यां भावुका मनसि सम्भावयन्ति भवसम्भावनापहृतये त्वं भासि लक्ष्मि सततं भाव्ययद्भवनसम्भावनादिविधये ।जम्भारिसम्पदुपलम्भादिकारणमहं भाव्यमङ्घ्रियुगलं सम्भावये श्रुतिषु सम्भाषितं वचसि सम्भाष्य तस्य तव च ॥ ५॥ दूरावधूतमधुधारागिरोच्चकुचभारानताङ्गलतिका- साराङ्गलिप्तघनसारार्द्रकुङ्कुमरसा राजहंसगमना ।वैराकरस्मरविकारापसंसरणवाराशिमग्रमनसः श्रीराविरस्तु धुरि ताराय मे गुरुभिरारधिता भगवती ॥ ६॥ श्रीवासधूपकनदावासदीपरुचिरावासभूपरिसरा श्रीवासदेशलसदावापकाशरदभावाभकेशनिकरा ।श्रीवासुदेवरमणी वामदेवविधिदेवाधिपावनपरा श्रीवासवस्तुनरदेवाहतस्तुतिसभावा मुदेऽस्तु सुतराम् ॥ ७॥ भाषादिदेवकुलयोषामणिस्तवनघोषाञ्चितस्वसविधा दोषाकुले जगति पोषाकुला सपदि शेषाहि शायिदयिता ।दोषालयस्य मम दोषानपोह्य गतदोषाभिनन्द्यमहिमा शेषाशनाहिरिपुशेषादिसम्पद विशेषां ददातु विभवान् ॥ ८॥ इति श्रीकमलाष्टकं सम्पूर्णम् ।स्तोत्रसमुच्चयः २ (८४)

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ShrIaShTalakShmImahAmantram:श्रीअष्टलक्ष्मीमहामन्त्रम्

ShrIaShTalakShmImahAmantram:श्रीअष्टलक्ष्मीमहामन्त्रम् (ऋषिः – छन्दः – देवता – ध्यान सहितम्)श्रीलक्ष्मीनारायणःअस्य श्रीरमानाथमहामन्त्रस्य –नारायण ऋषिः – विराट् छन्दः – लक्ष्मीनारायणो देवता –अं बीजं – उं शक्तिः – मं कीलकं –अस्य श्रीलक्ष्मीनारायणप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ॐ नं तर्जनीभ्यां नमःॐ रं मध्यमाभ्यां नमः ॐ यं अनामिकाभ्यां नमःॐ णं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ यं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमःॐ हृदयाय नमः ॐ नं शिरसे स्वाहाॐ रं शिखायै वषट् ॐ यं कवचाय हुंॐ णं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ यं अस्त्राय फट्ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम्श्रीवत्सवक्षसं विष्णुं चक्रशङ्खसमन्वितम् ।वामोरुविलसल्लक्ष्म्याऽऽलिङ्गितं पीतवाससम् ॥ सुस्थिरं दक्षिणं पादं वामपादं तु कुञ्जितम् ।दक्षिणं हस्तमभयं वामं चालिङ्गितश्रियम् ॥ शिखिपीताम्बरधरं हेमयज्ञोपवीतिनम् ।एवं ध्यायेद्रमानाथं पश्चात्पूजां समाचरेत् ॥ मूलमन्त्रम् – ॐ नमो नारायणाय ।श्री आदिलक्ष्मीःअस्य श्री आदिलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –भार्गव ऋषिः – अनुष्टुबादि नाना छन्दांसि – श्री आदिलक्ष्मीर्देवता –श्रीं बीजं – ह्रीं शक्तिः – ऐं कीलकं –श्रीमदादि महालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ श्रीं अङ्गुष्ठाभ्यां नम ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमःॐ ऐं मध्यमाभ्यां नम ॐ श्रीं अनामिकाभ्यां नमःॐ ह्रीं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ ऐं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमःॐ श्रीं हृदयाय नमः ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहाॐ ऐं शिखायै वषट् ॐ श्रीं कवचाय हुंॐ स्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ स्रः अस्त्राय फट्ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम्द्विभुजां च द्विनेत्रां च साभयां वरदान्विताम् ।पुष्पमालाधरां देवीं अम्बुजासनसंस्थिताम् ॥ पुष्पतोरणसम्युक्तां प्रभामण्डलमण्डिताम् ।सर्वलक्षणसम्युक्तां सर्वाभरणभूषिताम् ॥ पीताम्बरधरां देवीं मकुटीचारुबन्धनाम् ।सौन्दर्यनिलयां शक्तिं आदिलक्ष्मीमहं भजे ॥ मूलमन्त्रं – ॐ श्रीं आदिलक्ष्म्यै नमः । श्रीसन्तानलक्ष्मीअस्य श्रीसन्तानलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –भृगु ऋषिः – निचृत् छन्दः – श्रीसन्तानलक्ष्मीः देवता –श्रीं बीजं – ह्रीं शक्तिः – क्लीं कीलकं –अस्य श्रीसन्तानलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ स्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ॐ स्रीं तर्जनीभ्यां नमःॐ स्रूं मध्यमाभ्यां नमः ॐ स्रैं अनामिकाभ्यां नमःॐ स्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ स्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमःॐ स्रां हृदयाय नमः ॐ स्रीं शिरसे स्वाहाॐ स्रूं शिखायै वषट् ॐ स्रैं कवचाय हुंॐ स्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ स्रः अस्त्राय पट्ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम्जटामकुटसम्युक्तां स्थिरासन्समन्विताम् ।अभयं कटकञ्चैव पूर्णकुम्भं करद्वये ॥ कञ्चुकं सन्नवीतञ्च मौक्तिकञ्चापि धारिणीम् ।दीपचामरहस्ताभिः सेवितां पार्श्वयोर्द्वयोः ॥ बालसेनानिसङ्काशां करुणापूरिताननाम् ।महाराज्ञीं च सन्तानलक्ष्मीमिष्टार्थसिद्धये ॥ मूलमन्त्रम् – ॐ श्रीं सन्तानलक्ष्म्यै नमः । श्रीगजलक्ष्मीःअस्य श्रीगजलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –शुक्र ऋषिः – अनुष्टुप् छन्दः – गजलक्ष्मीः देवता –कं बीजं – मं शक्तिः – लं कीलकं –श्रीगजलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ क्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ क्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ क्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ क्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ क्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ क्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ॐ क्रां हृदयाय नमः ।ॐ क्रीं शिरसे स्वाहा ।ॐ क्रूं शिखायै वषट् ।ॐ क्रैं कवचाय हुं ।ॐ क्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।ॐ क्रः अस्त्राय पट् ।ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम् ।चतुर्भुजां महालक्ष्मीं गजयुग्मसुपूजिताम् ।पद्मपत्राभनयनां वराभयकरोज्ज्वलाम् ॥ ऊर्ध्वं करद्वये चाब्जं दधतीं शुक्लवस्त्रकम् ।पद्मासने सुखासीनां गजलक्ष्मीमहं भजे ॥ मूलमन्त्रं – ॐ श्रीं गजलक्ष्म्यै नमः । श्रीधनलक्ष्मीःअस्य श्रीधनलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –परब्रह्म ऋषिः – अनुष्टुप्छन्दः – श्रीधनलक्ष्मीः देवता –लं बीजं – धं शक्तिः – मं कीलकं –श्रीधनलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ त्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ॐ त्रीं तर्जनीभ्यां नमःॐ त्रूं मध्यमाभ्यां नमः ॐ त्रैं अनामिकाभ्यां नमःॐ त्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ त्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमःॐ त्रां हृदयाय नमः ॐ त्रीं शिरसे स्वाहाॐ त्रूं शिखायै वषट् ॐ त्रैं कवचाय हुंॐ त्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ त्रः अस्त्राय फट्ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम्किरीटमुकुटोपेतां स्वर्णवर्णसमन्विताम् ।सर्वाभरणसम्युक्तां सुखासनसमन्विताम् ॥ परिपूर्णञ्च कुम्भञ्च दक्षिणेन करेण तु ।चक्रं बाणञ्च ताम्बूलं तदा वामकरेण तु ॥ शङ्खं पद्मञ्च चापञ्च कुण्डिकामपि धारिणीम् ।सकञ्चुकस्तनीं ध्यायेत् धनलक्ष्मीं मनोहराम् ॥ मूलमन्त्रम् – ॐ श्रीं धनलक्ष्म्यै नमः । श्रीधान्यलक्ष्मीःअस्य श्रीधान्यलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –परब्रह्म ऋषिः – अनुष्टुप्छन्दः – श्री धान्यलक्ष्मीः देवता –धं बीजं – लं शक्तिः – मं कीलकं –श्रीधान्यलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ द्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ द्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ द्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ द्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ द्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ द्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ॐ द्रां हृदयाय नमः ।ॐ द्रीं शिरसे स्वाहा ।ॐ द्रूं शिखायै वषट् ।ॐ द्रैं कवचाय हुं ।ॐ द्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।ॐ द्रः अस्त्राय फट् ।ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम् ।वरदाभयसम्युक्तां किरीटमकुटोज्ज्वलाम् ।अम्बुजञ्चेक्षुशालिञ्च कदम्बफलद्रोणिकाम् ॥ पङ्कजञ्चाष्टहस्तेषु दधानां शुक्लरूपिणीम् ।कृपामूर्तिं जटाजूटां सुखासनसमन्विताम् ॥ सर्वालङ्कारसम्युक्तां सर्वाभरणभूषिताम् ।मदमत्तां मनोहारिरूपां धान्यश्रियं भजे ॥ मूलमन्त्रम् – ॐ श्रीं धान्यलक्ष्म्यै नमः । श्रीविजयलक्ष्मीः ।अस्य श्रीविजयलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –नारद ऋषिः – नाना छन्दांसि – श्रीविजयलक्ष्मीः देवता –लं बीजं – क्षं शक्तिः – यं कीलकं –सर्वकार्यसिद्धिद्वारा श्रीविजयलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ व्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ व्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ व्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ व्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ व्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ व्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ॐ व्रां हृदयाय नमः ।ॐ व्रीं शिरसे स्वाहा ।ॐ व्रूं शिखायै वषट् ।ॐ व्रैं कवचाय हुं ।ॐ व्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।ॐ व्रः अस्त्राय फट् ।ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम् ।अष्टबाहुयुतां देवीं सिम्हासनवरस्थिताम् ।सखासनां सुकेशीञ्च किरीटमुकुटोज्ज्वलाम् ॥ श्यामाङ्गीं कोमलाकारां सर्वाभरणभूषिताम् ।खड्गं पाशं तदा चक्रमभयं सव्यहस्तके ॥ खेटकञ्चाङ्कुशं शङ्खं वरदं वामहस्तके ।राजरूपधरां शक्तिं प्रभासौन्दर्यशोभिताम् ॥ हंसारूढां स्मरेद्देवीं विजयां विजयप्रदे ॥ मूल्मन्त्रं – ॐ श्रीं विजयलक्ष्म्यै नमः । श्रीधैर्य(वीर)लक्ष्मीःअस्य श्रीवीरलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –नारद ऋषिः – त्रिष्टुप्छन्दः – श्रीवीरलक्ष्मीः देवता –लं बीजं – रं शक्तिः – लं कीलकं –आरोग्यभाग्यसिद्धिद्वारा श्रीवीरलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ व्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ व्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ व्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ व्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ व्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ व्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ॐ व्रां हृदयाय नमः ।ॐ व्रीं शिरसे स्वाहा ।ॐ व्रूं शिखायै वषट् ।ॐ व्रैं कवचाय हुं ।ॐ व्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।ॐ व्रः अस्त्राय फट् ।ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम् ।अष्टबाहुयुतां लक्ष्मीं सिम्हासनवरस्थिताम् ।तप्तकाञ्चनसङ्काशां किरीटमकुटोज्ज्वलाम् ॥ स्वर्णकञ्चुकसंयुक्तां सन्नवीततरां शुभाम् ।अभयं वरदं चैव भुजयोः सव्यवामयोः ॥ चक्रं शूलञ्च बाणञ्च शङ्खं चापं कपालकम् ।दधतीं धैर्यलक्ष्मीं च नवतालात्मिकां भजे ॥ मूलमन्त्रम् – ॐ श्रीं वीरलक्ष्म्यै नमः । श्री ऐश्वर्य(महा)लक्ष्मीःअस्य श्रीमहालक्ष्मीमहामन्त्रस्य –ब्रह्मा ऋषिः – जगती छन्दः – श्रीमहालक्ष्मीः देवता –ह्रां बीजं – ह्रीं शक्तिः – ह्रूं कीलकं –श्रीमहालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ क्ष्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ क्ष्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ क्ष्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ क्ष्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ क्ष्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ क्ष्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ॐ क्ष्रां हृदयाय नमः ।ॐ क्ष्रीं शिरसे स्वाहा ।ॐ क्ष्रूं शिखायै वषट् ।ॐ क्ष्रैं कवचाय हुं ।ॐ क्ष्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।ॐ क्ष्रः अस्त्राय फट् ।ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम् ।चतुर्भुजां द्विनेत्राञ्च वराभयकरान्विताम् ।अब्जद्वयकराम्भोजां अम्बुजासनसंस्थिताम् ॥ ससुवर्णघटोराभ्यां प्लाव्यमानां महाश्रियम् ।सर्वाभरणशोभाढ्यां शुभ्रवस्त्रोत्तरीयकाम् ॥ चामरग्रहनारीभिः सेवितां पार्श्वयोर्द्वयोः ।आपादलम्बिवसनां करण्डमकुटां भजे ॥ मूलमन्त्रम् – अं श्रीं श्रीमहालक्ष्म्यै नमः ॥ इति श्रीअष्टलक्ष्मीमहामन्त्रं सम्पूर्णम् ।

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Chhath Puja 2025 Vrat Niyam:इन चीजों के बिना अधूरा है छठ व्रत, जानें पूजा सामग्री और सही नियम

Chhath Puja: छठ व्रत, सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है. यह व्रत चार दिनों तक चलता है और इसमें कुछ विशेष सामग्रियों का उपयोग किया जाता है. आइए छठ व्रत की पूजा सामग्री और सही नियमों के बारे में जानते हैं. Kab Hai Chhath Puja 2025: छठ व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है. छठ व्रत सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है. इस व्रत को करने से संतान की लंबी आयु, परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. Chhath Puja छठी मैया को संतान सुख देने वाली देवी माना जाता है, इसलिए खासकर महिलाएं यह व्रत पूरी श्रद्धा से करती हैं. छठ पूजा सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है. इसे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने से भगवान सूर्य और छठी मईया की कृपा प्राप्त होती है. Chhath Puja 2025 Vrat Niyam:इन चीजों के बिना अधूरा है छठ व्रत…. छठ पूजा के लिए पूजा सामग्री:puja material for chhath puja बांस की टोकरी और सूप: छठ पूजा में बांस की टोकरी और सूप का विशेष महत्व है. Chhath Puja छठ पूजा में ठेकुआ एक प्रमुख प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है, जो गेंहू के आटे, गुड़ और घी से तैयार किया जाता है. इसके अतिरिक्त, अन्य फल, मिठाईयां और पकवान भी प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं. गन्ना छठ पूजा के दौरान शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसके साथ ही, सेब, अनार, संतरा, बेल, शरीफा और नींबू जैसे फलों को भी चढ़ाया जाता है. छठ पूजा Chhath Puja के अवसर पर लाल और पीले रंग के वस्त्र धारण करना बहुत ही शुभ माना जाता है. Chhath Puja छठ पूजा में मिट्टी के दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है. इसके अतिरिक्त, गंगाजल का उपयोग स्नान, प्रसाद और अर्घ्य के लिए किया जाता है. सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए तांबे या कांसे का लोटा उपयोग किया जाता है. इसके अलावा पूजा में चावल, आटा, जल, शहद, चंदन, सिंदूर, धूपबत्ती, कुमकुम, कपूर, दूध, तेल, बाती, नारियल, सिंघाड़ा, सुथनी, शकरकंदी, मूली, बैंगन, केले, गेहूं आदि शामिल किए जाते हैं. प्रसाद की सामग्री:Ingredients of Prasad चम्मच, लड्डू, हल्दी, नाशपाती पत्ते लगे हुए ईख, दूध, तेल और बाती नारियल, शरीफा, दूध से बनी मिठाइयाँ बड़ा नींबू, सिंघाड़ा, सुथनी, शकरकंदी, मूली, बैंगन, केले, गेहूं छठ व्रत के नियम:rules of chhath fast छठ पूजा में स्वच्छता का विशेष महत्व है. पूजा की सभी सामग्री और स्थान स्वच्छ होने चाहिए. Chhath Puja छठ पूजा के दौरान सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए. लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए. छठ पूजा के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना उचित माना जाता है. छठ पूजा पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करनी चाहिए. छठ पूजा के सभी नियमों का पालन करना चाहिए. छठ पूजा का महत्व:Importance of Chhath Puja मान्यता है कि छठ सूर्य देव और Chhath Puja छठी मैया की पूजा के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व है, जो शारीरिक और मानसिक शुद्धता का प्रतीक है. यह व्रत जीवन में संयम, शुद्धता, और आत्म-नियंत्रण की भावना को जागृत करता है. 36 घंटे के इस व्रत के बाद व्यक्ति को संतान सुख, समृद्धि और जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं. यह उपवास मानसिक शांति, शारीरिक स्वच्छता और भगवान सूर्य से आशीर्वाद पाने के लिए किया जाता है. इस व्रत को करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. छठ पर इन नियमों का रखें ध्यान: Keep these rules in mind on Chhath छठ पूजा के दौरान सफाई का विशेष ध्यान रखें।  व्रत के सभी नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए, जिससे पूजा सही विधि से पूरी हो सके।  पूजा के दौरान घर के सभी सदस्य सात्विक भोजन ग्रहण करें।  नहाय-खाय के दिन से लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक लहसुन और प्याज का सेवन न करें।  व्रती को प्रसाद स्वयं बनाएं, यदि आप प्रसाद नहीं बना पा रहे हैं तो किसी न किसी रूप में मदद जरूर करें।  प्रसाद बनाते समय स्वच्छता और शुद्धता का ध्यान रखें।  इस बात का विशेष ध्यान रखें कि छठ पूजा से जुड़े सभी प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाए जाएं।  पूजा के कपड़ों में सुई का उपयोग न करें।  पूजा में बांस से बनी सूप और टोकरी का ही इस्तेमाल करें।   व्रती पूरी पूजा के दौरान जमीन पर चटाई बिछाकर ही सोए।

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Chhath Puja 2025 Date And Time: छठ पूजा नहाय-खाए से उषा अर्घ्य तक, जानें 4 दिनों के शुभ मुहूर्त और महत्व

Chhath Puja 2025: कार्तिक माह का सबसे बड़ा और लोक आस्था का महापर्व ‘छठ पूजा’ (Chhath Puja 2025) इस वर्ष 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2025 तक मनाया जाएगा. यह चार दिवसीय पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है. मान्यता है कि छठी मैया (जो ब्रह्मा जी की मानस पुत्री या प्रकृति का छठा अंश मानी जाती हैं) की पूजा करने से परिवार की रक्षा, स्वास्थ्य, सफलता और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है. यह कठिन व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. Chhath Puja 2025 इस दौरान व्रती लगातार 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं, जिसमें वे पानी तक ग्रहण नहीं करते. आइए जानते हैं Chhath Puja 2025 छठ पूजा 2025 के चार दिनों का विस्तृत शेड्यूल, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि: छठ पूजा 2025 का 4 दिवसीय संपूर्ण शेड्यूल छठ पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर सप्तमी तिथि तक चलता है. 1. प्रथम दिन: नहाय-खाए (Nahaye Khaye 2025) तिथि: शनिवार, 25 अक्टूबर 2025 सूर्योदय: सुबह 6 बजकर 28 मिनट (दिल्ली में) सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 42 मिनट (दिल्ली में) यह Chhath Puja 2025 छठ पूजा का पहला दिन है. इस दिन व्रती घर, नदी या तालाब में स्नान करते हैं और घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है. व्रती इस दिन सिर्फ एक बार ही भोजन ग्रहण करते हैं और तला हुआ खाना पूर्ण रूप से वर्जित होता है. यह खाना कांसे या मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है. 2. दूसरा दिन: खरना और लोहंडा (Kharna 2025) तिथि: रविवार, 26 अक्टूबर 2025 सूर्योदय: सुबह 6 बजकर 29 मिनट सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 41 मिनट (दिल्ली में) खरना छठ पूजा का दूसरा दिन होता है. इस दिन व्रती दिन भर बिना जल और अन्न के उपवास रखते हैं. शाम को सूर्यास्त के समय, चावल, गुड़ और गन्ने के रस का प्रयोग कर खीर बनाई जाती है. Chhath Puja 2025 इस खीर और पूड़ी का प्रसाद ग्रहण करने के बाद, व्रती अगले 36 घंटों के लिए निर्जला व्रत (पानी की एक बूँद भी ग्रहण न करना) धारण कर लेते हैं. 3. तीसरा दिन: षष्ठी – संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya 2025) तिथि: सोमवार, 27 अक्टूबर 2025 सूर्योदय: सुबह 6 बजकर 30 मिनट सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 40 मिनट (दिल्ली में) यह Chhath Puja 2025 छठ पूजा का मुख्य दिन है. इस दिन व्रती नदी या तालाब के घाटों पर इकट्ठा होते हैं. शाम को, डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. पूजा के लिए बांस की टोकरी (दउरा) में ठेकुआ, कचवनिया (चावल के लड्डू), फल, नारियल और गन्ना जैसे पारंपरिक प्रसाद सजाए जाते हैं. इस पर्व में पवित्रता (शुचिता) का खास ध्यान रखा जाता है. 4. चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण (Usha Arghya 2025) तिथि: मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025 सूर्योदय: सुबह 6 बजकर 30 मिनट (दिल्ली में) सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 39 मिनट यह छठ पूजा का अंतिम दिन है. व्रती सूर्योदय से पहले घाट पर पहुँचते हैं और उगते हुए सूर्य को दूसरा और अंतिम अर्घ्य देते हैं. Chhath Puja 2025 सांध्य अर्घ्य में अर्पित पकवानों को नए पकवानों से बदल दिया जाता है, हालांकि फल (कन्द, मूल, फलादि) वही रहते हैं. अर्घ्य और पूजा-अर्चना समाप्त होने के बाद, प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है. छठ पूजा का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इसका गहरा वैज्ञानिक महत्व भी है। 1. विषहरण (Detoxification): 36 घंटे के लंबे निर्जला उपवास से शरीर का पूर्ण विषहरण (detoxification) होता है, जिससे मन और शरीर पर सकारात्मक जैव-रासायनिक परिवर्तन होते हैं. 2. सौर ऊर्जा का अवशोषण: छठ पूजा में सूर्यास्त और सूर्योदय के समय अर्घ्य देने की परंपरा है क्योंकि इस समय मनुष्य सुरक्षित रूप से सौर-ऊर्जा को प्राप्त कर सकते हैं. Chhath Puja 2025 प्राचीन काल में ऋषि-मुनि भी भोजन और पानी के बजाय सीधे सूर्य से जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा अवशोषित करने के लिए इसी तरह की प्रक्रिया का उपयोग करते थे. 3. प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार: सूर्य के प्रकाश का सुरक्षित विकिरण फंगल और जीवाणु संक्रमण को ठीक करता है, रक्त प्रवाह में अवशोषित ऊर्जा श्वेत रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells) के कार्य में सुधार करती है, और हार्मोन के स्राव को संतुलित करती है.

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Lakshmanakritam

Shri Sita Lakshmi Stotram: श्रीसीतालक्ष्मीस्तोत्रम्

Shri Sita Lakshmi Stotram: श्रीसीतालक्ष्मीस्तोत्रम् ॐ श्रीरामजयम् ।ॐ सद्गुरुश्रीत्यागराजस्वामिने नमो नमः । ॐ भूमिपुत्र्यै च विद्महे । रामपत्न्यै च धीमहि ।तन्नः सीता प्रचोदयात् ॥ सीता श्रीरामसज्जाया सानन्दवाक्स्वरूपिणी ।सा सम्पूर्णसुमाङ्गल्या ज्वलदग्निशुचिस्फुरा ॥ १॥ (१) मदम्बा श्रीमहालक्ष्मीर्मच्चित्तविलसत्प्रभा ।क्षमागुण्यातिसान्त्वा मा सहजस्थितसद्गुणा ॥ २॥ क्षपानाथप्रभारूपा चन्द्रार्कमुखमण्डला ।सानसीविग्रहाभासा चारुसारप्रभासिनी ॥ ३॥ पदकोकनदात्नाभा पदाम्बुजसुलक्षणा । (२)पदपावित्र्यलक्षण्या पदाश्रितसुरक्षणा ॥ ४॥ कराम्भोजाभयादात्री स्मिताम्भोरुहलोचनी ।करुणामयवीक्षण्या नयनाब्जविमोचनी ॥ ५॥ सौन्दर्यदेवता सीता क्ष्मापुत्री जनकात्मजा ।शिवचापलघूद्धारा कोमला शक्तिशालिनी ॥ ६॥ श्रीरामतन्मया सीता रामपत्नी लसच्छविः ।कल्याणरामसाराध्या सीता भव्यसुरूपिणी ॥ ७॥ वैदेही मृदुसद्वाणी ऐहिकापरपूरणी ।रामप्रेष्ठा महाराज्ञी पूर्णसद्भक्तिकारिणी ॥ ८॥ रामनामसुधापाना नामसारप्रमोदिता ।नामसद्ध्यानसँल्लीना दहराकाशदर्शना ॥ ९॥ श्रीरामपूर्णसच्चित्ता श्रीरामानन्यचिन्तना ।श्रीरामकीर्तिसम्मूला रामेण सह चारिणी ॥ १०॥ रामावतारसम्पूर्णा रामायणसुबीजता । (३)श्रीरामाभिन्नदिव्याभा साक्षात् ब्रह्मस्वरूपिणी ॥ ११॥ सुस्वराजितमाधुर्या सङ्गीतमृदुलस्वरा ।श्रीत्यागब्रह्मसङ्गीता गुरुस्वामिसुकीर्तिता ॥ १२॥ त्यागराजगुरुस्वामिशिष्यापुष्पासुसंस्तुता ।बालालापस्तुतिप्रीता पुत्रीपुष्पाबहुप्रिया ॥ १३॥ मयेति कीर्तिते मातर्मच्चित्तं परिपूरय ।चित्तप्रसादनं मातः कुरु मे भक्तिवर्धनम् ॥ १४॥ मङ्गलं रामसत्यै च सीतालक्ष्म्यै सुमङ्गलम् ।मङ्गलं मम मात्रे च महालक्ष्म्यै सुमङ्गलम् ॥ १५॥ सीतास्तोत्रं सुसम्पूर्णं सीतानुग्रहकारकम् ।सीतानुग्रहसम्भावं सर्वमङ्गलदायकम् ॥ १६॥ इति सद्गुरुश्रीत्यागराजस्वामिनः शिष्यया भक्तया पुष्पया कृतंश्रीसीतालक्ष्मीस्तोत्रं गुरौ समर्पितम् ।ॐ शुभमस्तु ।

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Lakshmihayagriva PrabodhikastutiH:लक्ष्मीहयग्रीवप्राबोधिकस्तुतिः

Lakshmihayagriva PrabodhikastutiH:लक्ष्मीहयग्रीवप्राबोधिकस्तुतिः ज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम् ।आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवमुपास्महे ॥ विशुद्धविज्ञानघनस्वरूपं विज्ञानविश्राणनबद्धदीक्षम् ।दयानिधिं देहभृतां शरण्यं देवं हयग्रीवमहं प्रपद्ये ॥ १॥ प्राची सन्ध्या काचिदन्तर्निशायाः प्रज्ञादृष्टेरञ्जनश्रीरपूर्वा ।वक्त्री वेदान्भातु मे वाजिवक्त्रा वागीशाख्या वासुदेवस्य मूर्तिः ॥ २॥ कौसल्या सुप्रजा राम पूर्वा सन्ध्या प्रवर्तते ।उत्तिष्ठ नरशार्दूल कर्तव्यं दैवमान्हिकम् ॥ ३॥ वीर सौम्य विबुध्यस्व कौसल्यानन्दवर्धन ।जगद्धिसर्वं स्वपिति त्वयि सुप्ते नरोत्तम ॥ ४॥ यामिन्यपैति यदुनायक मुञ्च निद्रा- मुन्मेषपृच्छति नवोन्मिषितेन विश्वम् ।जातस्स्वयं खलु जगद्धितमेव कर्तुं धर्मप्रवर्तनधिया धरणीतलेऽस्मिन् ॥ ५॥ सुखाय सुप्रातमिदं तवास्तु जगत्पते जागृहि नन्दसूनो ।अम्भोजमन्तश्शयमञ्जुतारारोलम्बमुन्मीलतु लोचनं ते ॥ ६॥ करुणावरुणालयाम्बुजश्रीस्फुरणाहङ्कृतिहारिलोचनश्रीः ।चरणाब्जनतार्तिभारहारिंस्तव भूयातुरगास्य सुप्रभातम् ॥ १॥ पुरःप्रबुद्धाम्बुधिराजकन्यामुखाब्जनिश्वासमिवानुकुर्वन् ।मरुत्सुगन्धिः प्रतिवाति मन्दं हयाननस्तात्तव सुप्रभातम् ॥ २॥ त्वद्दीप्तया प्रविमलया जितः किलासावाहोस्वित्तव दयितामुखाम्बुजेन ।पाश्चात्ये पतति पयोनिधौ सुधांशुर्भूयात्ते सपदि हयास्य सुप्रभातम् ॥ ३॥ वरदानकृतिन् स्मरदार्ततरद्विरदाघहृतिस्फुरदादरण ।इति सन्मतयो यतयः प्रवदन्त्यधुना मधुनाशन जागृहि भोः ॥ ४॥ समर्चने ते कृतकौतुकेन सजीकृतं शोणमणीन्द्रपीठम् ।हंसेन किं सान्ध्यमहो विभाति हयास्य भूयात्तव सुप्रभातम् ॥ ५॥ हरिर्हरिर्हरिरिति मञ्जुभाषितं द्विजावलेस्सपदि निशम्य कौतुकात् ।द्विजव्रजोऽप्यनुवदतीव कूजितैर्हयाननानघगुण जागृहि प्रभो ॥ ६॥ प्राचीं वधू सपदि मित्रकरग्रहार्थं सन्ध्यावधूस्स्वरुचिकुङ्कुमपङ्कसान्दैः ।प्रालेयमङ्गलजलैरभिषिञ्चतीव श्रीमन् हयास्य भवतात्तव सुप्रभातम् ॥ ७॥ कुमुदवनं विमुच्य नवपङ्कजषण्डमिमाः ।सपदि समाश्रयन्ति मुदिता भ्रमरावलयः ॥ भुवि निखिलोऽपि चाश्रयति सश्रियमेव जनो ।हयवदनाद्य जागृहि हरे करुणैकनिधे ॥ ८॥ फुल्लत्पङ्कजरत्नपात्रनिवहानासाद्य हृद्यश्रियःसौगन्ध्याढ्यमरन्ददिव्यसलिलैरापूरितानादरात् ।हंसास्त्वामिव पूजयन्ति विरुतव्याजात्पठन्तो मनून्सुस्नातास्सरसीषु वाहमुख ते सुप्रातरस्तु प्रभो ॥ ९॥ उच्चलन्मधुकरौघमञ्जुलं पद्ममुल्लसति पूजनाय ते ।धूपपात्रमिव हंससज्जितं सुप्रभातमिह ते हयानन ॥ १०॥ इन्दीवराणामिव कान्तिरद्य मन्दीभवन्ती व्यपयातु निद्रा ।फुल्लत्विदं पद्ममिवाक्षियुग्मं हयास्य ते सम्प्रति सुप्रभातम् ॥ ११॥ एते, वेत्रहतित्रुटत्पटुमहाकोटीरकोटीमणि-श्रेणीभिस्तव मन्दिरस्य ददतो द्वाराय नीराजनम् ।काक्षन्ति प्रतिबोधकालमिह ते सर्वेऽपि लोकाधिपाःतानेतान्करुणावलोकनलवैर्धन्यान्विधेहि प्रभो ॥ १२॥ अक्षीणे मयि तिष्ठ किं विहरसे सङ्क्षीयमाणे मुहु-र्बिम्बेऽस्मिन्निति देवदेव नितरां त्वत्प्रार्थनायागतम् ।चान्द्रम्बिम्बमिदं वदन्ति हि परं मोदार्पणं दर्पणंदृष्टिं न्यस्य कृपानिधेऽत्र भगवन्प्राबोधिकीं श्रीपते ॥ १३॥ निद्राशेषकषायितैस्सुललितैरुद्यद्दयाप्यायितै-र्दिव्यापाङ्गझरैस्त्वदर्चनकृते द्वार्यत्र बद्धाञ्जलीन् ।आचार्यान्निगमान्तदेशिकमुखानाधत्स्व सुस्नापितान् ।सुप्रातं तुरगास्य तेऽस्तु करुणासिन्धो दिनं श्रीपते ॥ १४॥ इदं कुम्भद्वन्द्वं घुसृणमसृणस्मेरसलिलम्प्रतीहारे लक्ष्मीस्तनयुगमनोहारि लसति ।इयं गौस्सद्वत्सा परिजनसमूहोऽपि निभृतोदिनं सुप्रातं ते भवतु करुणाब्धे हयमुख ॥ १५॥ रविमण्डलीमिदानीमुदयमहीभृत्तवाभिषेकार्थम् ।कनककलशीमिव वहत्यस्तु हयग्रीव सुप्रभातं ते ॥ १६॥ अनुचित इव सेवने त्वदीये प्रमदभरादिह पञ्चमं विहाय ।विदधति किल वैणिकाश्च गान हयवदनाद्य तवास्तु सुप्रभातम् ॥ १७॥ पिकनिकरमदविधूननगानमनोहरमुदारसुकुमारम् ।धन्यं कन्याद्वन्द्वं त्वां नीराजयति जागृहि हयास्य ॥ १८॥ काहलडिण्डिममण्डलमर्दलपणवाद्यहृद्यवाद्यानाम् ।संस्पर्ध एव निनदा जृम्भन्ते तुरगवदन बुध्यस्व ॥ १९॥ तव तनुरुचिसाधर्म्यात्संहृष्टे नर्तनं किलातनुतः ।द्वारभुवि चामरे द्वे हयवदन तवास्तु सुप्रभातमिह ॥ २०॥ त्वत्पादाम्भोजयुग्मं परिचरितुमना मूर्ध्नि बद्धाञ्जलिस्सन्श्रीकृष्णब्रह्मतन्त्राग्रिमपदकलिजित्संयमी त्वां स्तवीति ।त्वत्सेवायै समुद्यन्निरवधिकमहानन्दथुस्तिष्ठतीहश्रीमान्कृष्णावनीन्द्रो हयवदन तव श्रीश सुप्रातरस्तु ॥ २१॥ जयजय नित्यसूक्तिललनामणिमौलिमणेजयजय भक्तसंहतिभवाब्धिमहातरणे ।जयजय वेदमौलिगुरुभाग्यदयाजलधेजयजय वाजिवक्त्र परकालयतीन्द्रनिधे ॥ २२॥ इति श्रीकृष्णब्रह्मतन्त्रपरकालयतीन्द्रकृतिषुश्रीहयग्रीवप्राबोधिकस्तुतिस्समाप्ता ॥

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