भक्ति क्या है

भक्ति में बहुत शक्ति होती है। भक्ति का तात्पर्य है-स्वयं के अंतस को ईश्वर के साथ जोड़ देना। जुडऩे की प्रवृत्ति ही भक्ति है। दुनियादारी के रिश्तों में जुट जाना भक्ति नहीं है। भक्ति का मतलब है पूर्ण समर्पण। सरल शब्दों में हम कहते हैं कि हमारी आत्मा परमात्मा की डोर से बंध गई। ईश्वर

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सफला एकादशी व्रत कथा,पूजन विधि

हिंदू पंचांग के अंतर्गत प्रत्येक माह की 11वीं तीथि को एकादशी कहा जाता है। एकादशी को भगवान विष्णु को समर्पित तिथि माना जाता है। एक महीने में दो पक्ष होने के कारण दो एकादशी होती हैं, एक शुक्ल पक्ष मे तथा दूसरी कृष्ण पक्ष मे। इस प्रकार वर्ष मे कम से कम 24 एकादशी हो सकती हैं,

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क्या आप भी हैं कर्ज के बोझ से परेशान! इन उपायों को जरूर अपनाएं

कहा जाता है जितनी चादर हो उतने ही पैर फैलाने चाहिए, पर क्या आपको लगता है आज के इस महंगाई के दौर में ऐसा संभव है. कहीं न कहीं ज्यादातर लोग कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं. उन्हें किसी न किसी वजह से कर्ज या लोन लेना ही पड़ता है और वे इसे चुकाने

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करियर में इंस्टेंट ग्रोथ के लिए वास्तु के इन नियमों का रोजाना करें पालन

पिछले साल से, लॉकडाउन ने लगभग हर व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी असर डाला है, लेकिन एक चीज जिसने इस पूरे साल हम सभी को अत्यधिक तनाव में रखा है, वो है हमारा करियर. प्रत्येक प्रश्न का सही उत्तर वास्तु द्वारा किया गया सर्वोत्तम कार्य है. वास्तु के अनुसार, कुछ ऐसे टिप्स और ट्रिक्स

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महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् – अयि गिरिनन्दिनि (Mahishasura Mardini Stotram – Aigiri Nandini)

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुतेगिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥ सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरतेत्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरतेदनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥ अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरतेशिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि

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दुर्गा सप्तशती सिद्ध सम्पुट मंत्र (Durga Saptashati Siddha Samput Mantra)

सामूहिक कल्याण के लिये मंत्र –देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्यानिश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्‍‌र्या ।तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यांभक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ॥ विश्‍व के अशुभ तथा भय का विनाश करने के लिये मंत्र –यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तोब्रह्मा हरश्‍च न हि वक्तुमलं बलं च ।सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनायनाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु ॥ ❀ विश्‍व की रक्षा के लिये मंत्र –या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीःपापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः ।श्रद्धा

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संकट मोचन हनुमानाष्टक (Sankatmochan Hanuman Ashtak)

श्री हनुमंत लाल की पूजा आराधना में हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और संकटमोचन अष्टक का पाठ बहुत ही प्रमुख माने जाते हैं। संकट मोचन हनुमान अष्टक का नियमित पाठ करने से भक्तों पर आये गंभीर संकट का भी निवारण हो जाता है। ॥ हनुमानाष्टक ॥बाल समय रवि भक्षी लियो तब,तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।ताहि सों त्रास भयो जग को,यह संकट

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दत्तात्रेय स्तोत्रम् (Dattatreya Strotam)

॥ श्री दत्तात्रेय स्तोत्रम् ॥जटाधरं पाण्डुराङ्गं शूलहस्तं कृपानिधिम् ।सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ॥ विनियोग –अस्य श्रीदत्तात्रेयस्तोत्रमन्त्रस्य भगवान् नारदऋषिः ।अनुष्टुप् छन्दः । श्रीदत्तपरमात्मा देवता ।श्रीदत्तप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ॥ स्तोत्रम् –जगदुत्पत्तिकर्त्रे च स्थितिसंहार हेतवे ।भवपाशविमुक्ताय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥ १॥ जराजन्मविनाशाय देहशुद्धिकराय च ।दिगम्बरदयामूर्ते दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥ २॥ कर्पूरकान्तिदेहाय ब्रह्ममूर्तिधराय च ।वेदशास्त्रपरिज्ञाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥ ३॥ र्हस्वदीर्घकृशस्थूल-नामगोत्र-विवर्जित ।पञ्चभूतैकदीप्ताय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते

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अन्नपूर्णा स्तोत्रम् (Annapoorna Stotram)

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरीनिर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी ।प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥१॥ नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरीमुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी ।काश्मीरागरुवासिताङ्गरुचिरे काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥२॥ योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थनिष्ठाकरीचन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी ।सर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥३॥ कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमा शङ्करीकौमारी निगमार्थगोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरी ।मोक्षद्वारकपाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥४॥ दृश्यादृश्यविभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरीलीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी ।श्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥५॥ उर्वीसर्वजनेश्वरी भगवती मातान्नपूर्णेश्वरीवेणीनीलसमानकुन्तलहरी नित्यान्नदानेश्वरी ।सर्वानन्दकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां

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“वेदो में बताया है, कि मन की शक्ति अपार है। लोग उस से लाभ लेना नहीं जानते।”

“वेदो में बताया है, कि मन की शक्ति अपार है। लोग उस से लाभ लेना नहीं जानते।” आपने बहुत से वीडियोस में देखा होगा, कि “उस विकलांग व्यक्ति के हाथ नहीं हैं, अथवा पांव नहीं हैं, अथवा आंखें नहीं हैं, अथवा और कोई अंग स्वस्थ नहीं है। फिर भी वह बहुत विशेष योग्यताएं रखता है।

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आप के नाम में छुपा है राम का नाम

आप के नाम में छुपा है राम का नाम अदभुत गणितज्ञ “श्री.तुलसीदासजी से एक भक्त ने पूछा कि महाराज आप श्रीराम के इतने गुणगान करते हैं , क्या कभी खुद श्रीराम ने आपको दर्शन दिए हैं ?..तुलसीदास बोले :- ” हां “भक्त :- महाराज क्या आप मुझे भी दर्शन करा देंगे ???तुलसीदास :- ” हां

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क्यों लिया देवी माँ ने भ्रामरी देवी और शाकंभरी माता का अवतार?

देवताओं की सहायता के लिए देवी ने अनेक अवतार लिए। भ्रामरी देवी का अवतार लेकर देवी ने अरुण नामक दैत्य से देवताओं की रक्षा की। इसकी कथा इस प्रकार है- पूर्व समय की बात है। अरुण नामक दैत्य ने कठोर नियमों का पालन कर भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या की। तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव

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