भगवान् परशुराम ने क्यों किया था महाबली सहस्त्रबाहु का वध

एक बार सहस्त्रबाहु अर्जुन अपनी सेना के साथ जंगल में ब्रह्मण के लिए गए होते है। उसी जंगल में परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि का आश्रम भी रहता है । सहस्त्रबाहु अर्जुन जंगल में विश्राम करने लिए लिए जमदग्नि के आश्रम देख अपनी सेनाओ के साथ आश्रम की और चल देते है । आश्रम पहुंचने

भगवान् परशुराम ने क्यों किया था महाबली सहस्त्रबाहु का वध Read More »

 महाभारत के सबसे शक्तिशाली अस्त्र सुदर्शन चक्र से जुडी कुछ रोचक कथा

के अनुसार ऐसा अस्त्र है जो विरोधी के हर वार को विफल कर देता था ऐसा अस्त्र जो अभेद और अपना कार्य  को  पूरा करने के बाद ही वापस आता था । आखिर महाभारत के बाद सुदर्शन का क्या हुआ और अब सुदर्शन चक्र कहां है और भगवान विषणु जी को यह अस्त्त्र कैसे प्राप्त

 महाभारत के सबसे शक्तिशाली अस्त्र सुदर्शन चक्र से जुडी कुछ रोचक कथा Read More »

शीतला अष्टमी को क्यों किया जाता है बासी भोजन, जानें पौराणिक कथा

चैत्र मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन माता शीतला की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि शीतला अष्टमी पर माता शीतला की पूजा करने से चेचक और नेत्रों से संबंधित विकारों से मुक्ति प्राप्त होती है। शीतला अष्टमी पर लोग अपने

शीतला अष्टमी को क्यों किया जाता है बासी भोजन, जानें पौराणिक कथा Read More »

शीतला सप्तमी व्रत कथा

शीतला सप्तमी का त्योहार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। वहीं कुछ जगह पर ये व्रत अष्टमी तिथि पर भी मनाया जाता है। मुख्य रूप से ये त्योहार उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के क्षेत्रों में मनाया जाता है। शीतला माता को प्रसन्न करने के

शीतला सप्तमी व्रत कथा Read More »

सबसे बड़ा पुण्य

एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था, हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था. वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख, ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था . यहाँ तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवत-भजन, उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था. एक सुबह राजा

सबसे बड़ा पुण्य Read More »

हनुमान जी की मां से हुई भूल, बन गई अप्सरा से वानरी 

एक बार देवराज इंद्र की सभा स्वर्ग में लगी हुई थी। इसमें दुर्वासा ऋषि भी भाग ले रहे थे। जिस समय सभा में विचार-विमर्श चल रहा था उसी समय सभा के मध्य ही ‘पुंजिकस्थली’ नामक इंद्रलोक की अप्सरा बार-बार इधर से उधर आ-जा रही थी। सभा के मध्य पुंजिकस्थली का यह  एक बार देवराज इंद्र

हनुमान जी की मां से हुई भूल, बन गई अप्सरा से वानरी  Read More »

कब है रंग पंचमी? जानिए, शुभ मुहूर्त, महत्व और उपाय

चैत्र मास की पंचमी तिथि को रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा से होली का त्योहार आरंभ होता है जो कि रंगपंचमी तक मनाया जाता है। रंगपंचमी को श्रीपंचमी और देवपंचमी भी कहा जाना जाता है। इस दिन देवी-देवता भी रंगोत्सव मनाते हैं। रंगपंचमी का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है।

कब है रंग पंचमी? जानिए, शुभ मुहूर्त, महत्व और उपाय Read More »

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्रोदय समय

फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस बार फाल्गुन मास की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 9 फरवरी दिन गुरुवार को रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन विधि-विधान से गौरी पुत्र श्री गणेश की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्रोदय समय Read More »

इस कथा से करें होलिका माता की पूजा, होगी मनोकामनाएं पूरी

किसी भी पर्व पर पूजा-पाठ के साथ ही कथा का भी विशेष महत्‍व होता है। होलिका दहन के समय भी कथा करने का विधान है। मान्‍यता है इस दिन होलिका दहन की कथा करके पूजा होलिका दहन पर पढ़ें ये पौराणिक कथा होलिका दहन के मौके पर असुर राज हिरण्‍यकश्‍यप की कथा पढ़ी जाती है।

इस कथा से करें होलिका माता की पूजा, होगी मनोकामनाएं पूरी Read More »

होलिका दहन होलिका दहन क्यों मनाया जाता है, जानिए प्रहलाद, होलिका हिरण्यकश्यप, पौराणिक कथा और नरसिंह मंत्र

होली हिंदू समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। होली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, होलिका दहन। इसे फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसके अगले दिन रंग-गुलाल से होली खेली जाती है। इसे धुलेंडी, धुलंडी और धूलि भी कहा जाता है। होलिका दहन क्यों मनाया जाता है: होली हिंदू समुदाय के

होलिका दहन होलिका दहन क्यों मनाया जाता है, जानिए प्रहलाद, होलिका हिरण्यकश्यप, पौराणिक कथा और नरसिंह मंत्र Read More »

भक्त प्रहलाद का संपूर्ण जीवन परिचय: जन्म, कथा, यातनाएं, राज्याभिषेक व मृत्यु

प्रह्लाद ने दैत्य कुल में जन्म लिया था जिसके माता-पिता दैत्य जाति से थे। दैत्य कुल में जन्म लेने के पश्चात भी वह भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहता था जिस कारण आज तक उसका नाम भगवान विष्णु के सबसे बड़े भक्तों के रूप में लिया जाता है। आज हम भक्त प्रह्लाद के जन्म

भक्त प्रहलाद का संपूर्ण जीवन परिचय: जन्म, कथा, यातनाएं, राज्याभिषेक व मृत्यु Read More »

हिरण्यकश्यप के बारे में संपूर्ण जानकारी: पूर्व जन्म से लेकर अगले जन्म तक

हिरण्यकश्यप सतयुग में जन्मा एक दैत्य राजा था जो अति-पराक्रमी तथा शक्तिशाली था। उसका जन्म महर्षि कश्यप के कुल में हुआ था। साथ ही उसको भगवान ब्रह्मा से विचित्र वरदान मिला था। भगवान ब्रह्मा से मिले इसी वरदान के कारण स्वयं नारायण को मृत्यु लोक में अपना अवतार लेकर उसका वध करना पड़ा था। हिरण्यकश्यप

हिरण्यकश्यप के बारे में संपूर्ण जानकारी: पूर्व जन्म से लेकर अगले जन्म तक Read More »

App Download