700 साल पुरानी है भूतनाथ मंदिर, मनोवांछित फल और भक्तों की मुरादे होती है पूरी

शिव भक्त शैलजा ने बताया कि उनकी बचपन से ही भगवान शिव पर गहरी आस्था रही है। उनकी शादी के काफी साल तक उनके घर औलाद पैदा नहीं हो रही थी और डॉक्टरों ने भी उन्हें बच्चा न होने की बात कही थी। उसके बाद 4 साल पहले भूतनाथ मंदिर में दर्शन के लिए आई थी तो वहां के पुजारी ने उन्हें आर्शिवाद देते हुए कहा कि अगली बार तू अपने बच्चे के साथ ही मंदिर में आओगी। 4 साल पहले उनका घर नन्हे बच्चे की किलकारी से गूंजा और वे अपने बच्चे के साथ लगातार मंदिर में शिवरात्री के अवसार पर दर्शन करने आई है। कुल्लू जिला में महा शिवरात्री के अवसर पर भगवान शिव के मंदिरों में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। सोमवार को कुल्लू के बिजली महादेव मंदिर, भूतनाथ मंदिर, शिव मंदिर बजौरा, पिरड़ू थान मंदिर व ढालपूर स्थ्ति देवता वीरनाथ मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सोमवार सुबह 4 बजे से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के लिए कतार में लगना शुरू हुए। स्थानीय निवासी अमित सूद ने बताया कि भूतनाथ मंदिर प्राचीन मंदिर है और ऐसी मान्यता है कि यहां पर पूजा अर्चना करने सभी की भक्तो कीं मनोकामना पूरी होती है। इस मंदिर में लोग हर दिन पूजा-अर्चना करते हैं और इसमें भगवान भोले नाथ के दर्शन होते हैं। यहां पर पूजा अर्चना करने से मनचाहा फल मिलता है। सपने में कमल देखना का मतलब क्या होता है राज मशान घाट का नाम कई वर्ष पहले पद्मावती मशान घाट नाम था वही स्थानीय लोगों की माने तो भूतनाथ मन्दिर के पास पहले कोई सड़क नही था और पूरे इलाक़े में चारो तरफ पानी ही पानी हुआ करता था और एक व्यक्ति प्रल्हाद नामक व्यक्ति रहता था जो जिसको सम्पति बहुत था और एक दिन उसकी बेटी पदमावति की पानी मे डूबने से मौत हो गई जिसके बाद उसको इसी घाट अंतिम संस्कार किया गया और कुछ दिन के बाद पद्मावती ने अपने पिता को स्वपन दिया और कहा कि आपके पास बहुत धन सम्पति है क्या करेंगे और इस इलाके मे पानी रहता है जिससे लोगो को परेशानी होती है आप यहाँ पर एक घाट का निर्माण कर दीजिए । जिसके बाद पिता प्रल्हाद ने यहां पर पद्मावती श्मशान घाट का निर्माण कराया था। कई वर्षों पहले भूतनाथ मन्दिर की रहस्यमय कहानी है कि यहां राज मशान घाट नाम पड़ने के बाद यहां पर रात में करीब 12 बजे रात में एक रहसम्य तरीके का आवाज घुंगरू ओर पायल की आवाज सुनाई पड़ती थी जो पूर्वजो का कहना है कि या रात में भूत प्रेत आकर अपना आवाज लोगो को सुनाते थे लेकिन किसी भी भक्त को परेशान नही किया करता था और लोगों ने बताया कि बाबा भूतनाथ मन्दिर में जो भी भक्त अपनी मन्नते लेकर आते है उनकी मनोकामना पूर्ण होती है भूतनाथ मंदिर में अपनी मन्नते लेकर आते है कई इलाके भक्त भागलपुर साहेबगंज स्थित टीलाकोठी स्थित भूतनाथ मन्दिर में रोजाना पूजा पाठ के लिए भी श्रद्धालुओं की आनाजाना लगा रहता है खास कर सावन माह के सोमवारी और शिवरात्री में मन्दिर में दूरदराज से भक्त आते है और अपनी मन्नते बाबा भूतनाथ के समक्ष रखते औऱ उनकी मनोकामना पूर्ण होती है । वहीं मंदिर के बारे में स्थानीय राहुल पचेरीवाला का कहना है कि बाबा भूतनाथ की महिमा निराली है। उनके यहां से कोई खाली हाथ नहीं लौटता है।भागलपुर जिले के साहेबगंज-चंपानगर रोड स्थित अति प्राचीन श्मशान घाट के किनारे इस शिवमंदिर का प्राचीन इतिहास 700 वर्ष पुराना है।इस मंदिर में मनोवांछित फल की कामना के लिए दूर दराज से श्रद्धालु बाबा के शरण में आते हैं।

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सपने में कपड़े खरीदना का मतलब क्या होता है

सपने में दुकान से कपड़ा खरीदना दि आपने भी अपने सपने में कोई चीज खरीदी है तो उस वस्तु को अवश्य देखें क्योंकि यह वस्तु बता सकती है कि आने वाले समय में आपके जीवन में क्या-क्या हो सकता है। जैसे हम बात कर रहे हैं सपने में दुकान से कपड़ा खरीदने की तो आपको बता दें यदि ऐसा सपना कोई व्यक्ति देखता है तो आने वाली जीवन में जल्द ही वह किसी व्यक्ति की मदद लेगा या हो सकता है कोई व्यक्ति उसकी मदद करें जिसके कारण आप को काफी अच्छा लगेगा। इसलिए ऐसे सपने आने के बाद आप को डरने की कोई भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह सपने आपके जीवन में कुछ अच्छे लोगों को लाएंगे जो आपकी सहायता करेंगे और यदि बात करें महिलाओं के लिए इस सपने के अर्थ की तो आपको बता दें। उनके लिए भी यह बिल्कुल एक समान अर्थ लेकर आता है यानी आने वाली जीवन में वह भी किसी से मदद प्राप्त करेंगी। सपने में कपड़े धोना सपने में कपड़े धोना एक साकारात्मक सपना है सपने में कपड़े धोने का मतलब है की आपको किसी यात्रा पर जाना पड़ सकता है और यह यात्रा आपके लिए बहुत ही फलदाई सिद्ध होगी आपके भविष्य का रोड मैप तैयार हो रहा है जिसने आप उन्नति करेंगे आपकी यह यात्रा बहुत ही सुखदायक भी होगी। सपने में कपड़े बेचना सपने में कपड़े बेचना एक अच्छा सपना नहीं माना गया है सपने में कपड़े बेचने का मतलब है की आपको जल्द ही धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है आपको आर्थिक तंगी हो सकती है अगर आपने कहीं निवेश किया है तो उस पैसे के डूबने की संभावना है आपको कोई अपना ही धोखा दे सकता है। सपने में भगवान शिव का आना, देता है ये खास संकेत सपने में पुराने कपड़े देखना सपने में पुराने कपड़े देखना, सपने में कपड़े खरीदना एक अच्छा सपना है सपने में पुराने कपड़े देखना या सपने में पुराने कपड़े पहेनना का मतलब है की आपके जीवन में सकरात्मक बदलाव होगें और आप उन बदलाव के कारण उन्नति करेंगे आपको धन लाभ भी हो सकता है। सपने में गंदे कपड़े देखना सपने में गंदे कपड़े देखना एक नकारात्मक सपना है सपने में गंदे कपड़े देखने का मतलब है की आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल होने वाली है आपको कोई समाज में अपमानित करवा सकता है आपको कोई भी कदम या वचन बहुत ही सोच समझ कर देना चाहिए। सपने में रंग बिरंगे कपड़े देखना सपने में रंग बिरंगे कपड़े देखना एक सकारात्मक सपना है सपने में रंग बिरंगे कपड़े देखने का मतलब है की आपकी शादी हो सकती है अगर आप किसी मित्र की तलाश में हैं तो वह तलाश भी जल्द ही पूरी होगी आपको अपना जीवन साथी जल्द ही मिलेगा यह सपना प्रेम और विवाह को दर्शाता है। सपने में नदी पर कपड़े धोना सपने में नदी में कपड़े धोना एक अशुभ सपना है सपने में नदी के पास कपड़े धोने का मतलब है की आपकी बदनामी हो सकती है आपके ऊपर कोई इल्जाम लग सकता है और जिसके कारण आपकी सामाजिक बदनामी हो सकती है। सपने में कपड़े दान देना सपने में कपड़े दान करना एक अच्छा सपना है सपने में कपड़े दान करने या सपने में किसी को कपड़े देने का मतलब है की आपको जीवन में बहुत सफलता मिलने वाली है आप बहुत ही सही राह पर हैं आपको बस मेहनत करती जानी है। सपने में खुद को लाल कपड़े में देखना सपने में खुद को लाल कपड़े में देखना एक अच्छा सपना है सपने में खुद को लाल कपड़े में देखना प्रेम संबंध को दर्शाता है आपको जिसकी तलाश थी वो अब आपके साथ होगा या होगी आपका प्रेम आपको जल्द ही मिल जायेगा। सपने में खुद को काले कपड़े में देखना सपने में खुद को काले कपड़े पहनें हुए देखना एक अशुभ सपना है सपने में खुद को काले कपड़ों में देखने का मतलब है की आपके परिवार या रिश्तेदारी में किसी की मृत्यु होने वाली है आपके घर के सारे काम बिगड़ने लगेंगे आपके घर में कलह मच सकती है आपको अपनें ईष्ट देवी या देवता की आराधना करनी चाहिए। सपने में सफेद कपड़े पहेनना सपने में खुद को सफेद कपड़े में देखना एक शुभ सपना है सपने में खुद को सफेद कपड़े पहने हुए देखने का मतलब है की आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी आप कोई ऐसा काम करेंगे जिसके कारण आपके मान सम्मान में वृद्धि होगी। सपने में पीले कपड़े पहनना सपने में पीले कपड़े देखना शुभ सपना है सपने में पीले कपड़े पहनना या देखना आपको धन लाभ दर्शाता है आपको अचानक से धन लाभ हो सकता है यह समय बहुत अच्छा है कहीं भी निवेश करने के लिए। सपने में कपड़े फट जाना सपने में कपड़े फट जाना एक अच्छा सपना नहीं है सपने में कपड़े फटने का मतलब है की आपको नुकसान हो सकता है आपकी छवि समाज में खराब करने की कोशिश की जाएगी और आपके विरोधी सफल भी होगें आपको सावधान रहने की जरूरत है। सपने में कपड़े प्रेस करना सपने में कपड़े प्रेस करना एक चेतावनी का संकेत है सपने में कपड़े प्रेस करने का मतलब है की आपको अपने काम में या सोच में बदलाव लाने की जरूरत है अगर आप खुद में परिवर्तन नहीं लाएंगे तो आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। आशा करता हूँ दोस्तों की आपको यह आर्टिकल सपने में कपड़े खरीदना का मतलब क्या होता है अच्छा लगा होगा अगर आपको यह आर्टिकल का मतलब क्या होता है अच्छा लगा है तो प्लीज आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। सपने में अलमारी में कपड़े देखना सपनों की दुनिया बिल्कुल ही अलग दुनिया है यदि आप सपने में कपड़े की दुकान देखते हैं तो ऐसे सपने आपके जीवन में एक बिल्कुल ही भिन्न अर्थ लेकर आते हैं। लेकिन यदि आप अलमारी में कपड़े देख रहे हैं तो यह एक बिल्कुल अलग सपना है और ऐसे सपने वह व्यक्ति देखते हैं जिन्हें नए नए कपड़े पहनना बहुत पसंद होता है तो यदि आपने यह सपना देखा है। तो आपको बता दें ऐसे सपने शुभ सपने होते हैं जो बताते हैं कि

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सपने में कमल देखना का मतलब क्या होता है

सपने में कमल देखना, कमल पुष्प के बारे में। कमल का फूल भारत का राष्ट्रीय पुष्प है यह दो रंगों में पाया जाता है सफेद कमल और गुलाबी कमल कमल के पौधे को कमलिनी, नलिनी, पद्मिनी के नाम से भी जाना जाता है कमल के पुष्प हमेशा कीचड़ में ही खिलते हैं माता सरस्वती और ब्रह्मदेव को आपने कमल पर विराजमान देखा ही होगा। तो आइए जानते हैं सपने में कमल देखना क्या फल देता है दोस्तों सपने में कमल का फूल देखना बहुत ही शुभ फल देता है सपने में कमल का फूल बहुत ही कम लोगों को दिखाई देता है क्योंकि सपने में कमल देखना व्यक्ति को परम शक्तिशाली बना देता है। क्योंकि कमल पर माता सरस्वती जो विद्या की देवी है विराजमान रहती है और ब्रह्मदेव जो वेदों के ज्ञाता है और इस संसार के रचना करता है वह स्वयं कमल पर विराजमान रहते हैं और अगर आपने सपने में कमल का पुष्प देख लिया है तो आपको समझ लेना चाहिए कि आप पर माता सरस्वती और ब्रह्म देव की कृपा बनी हुई है। साथ ही जो व्यक्ति सपने में कमल का फूल देख लेता है उस व्यक्ति के जीवन में अनेक प्रकार की खुशियां दौड़ती हुई चली आती है सफलता के इतने मार्ग खुल जाते हैं कि कुछ पता ही नहीं चलता कि व्यक्ति तुरंत कैसे कहां पहुंच जाता है। अगर कोई गरीब व्यक्ति सपने में कमल का फूल देख लेता है तो उसे समझ लेना चाहिए कि वह कमल के फूल की भांति कीचड़ में उगा जरूर है लेकिन वह कमल की ही भांति इन कीचड़ से ऊपर उठकर संसार में प्रकाशित होगा। सपने में धतूरे का फूल या फल देखने का क्या मतलब  सपने में कमल का फूल देखने वाला व्यक्ति इस संसार से ढेर सारा धन कमाकर ऐसो आराम की जिंदगी जीता है बशर्ते उसे मेहनत करते रहना होगा ऐसा नहीं है कि बिना मेहनत के आपको कोई चीज मिल जाए लेकिन अगर आप थोड़ी सी भी मेहनत करेंगे तो आपको निश्चित रूप से उसका परिणाम देखने को मिल जाएगा। सपने में कमल का फूल देखना अपने सपने में एक साफ और साफ पानी में एक सफेद कमल को खिलते हुए देखना यह दर्शाता है कि आपकी उम्मीदें खाली नहीं हैं और आप जो चाहते हैं उसे हासिल करेंगे। सपने में कमल देखना पवित्रता और शर्म, छिपने, अच्छे कामों में खर्च होने वाले धन का संकेत देता है। समुद्र से यात्रा करने वाले व्यक्ति के लिए सपने में कमल देखना यह दर्शाता है कि उसका जहाज डूब जाएगा या डूब जाएगा। इस फूल को देखना कभी-कभी रंग से रंग में बदलना, हर वातावरण के अनुकूल होना या उदासी और दुख का संकेत देता है। अपने सपने में कमल के फूल इकट्ठा करना और एक गुच्छा बनाना इस बात का संकेत है कि कठिन चीजें समाप्त हो जाएंगी और सफलता करीब आ रही है। सपने में झील पर कमल देखने का मतलब है स्वास्थ्य, सौंदर्य, शक्ति, प्रेम और खुशी। सपने में कहीं कमल लगा हुआ देखना यह दर्शाता है कि पत्नी या दासी से लाभ होगा या सपने देखने वाले को संतान होगी। सपने में टूटा हुआ कमल देखना दुख और शोक है। यदि कोई महिला सपने में देखती है कि वह कमल तोड़कर अपने पति को दे देती है, तो वह अपने पति को तलाक दे देगी। सपने में कमल की जड़ देखना बुरे स्वभाव वाले सेवक का संकेत देता है। यह देखने के लिए कि आपके सपने में कमल आपको घेरे हुए है, यह दर्शाता है कि आप सभी प्रकार के रंगों में पड़ेंगे या बीमार हो जाएंगे, परेशानी होने पर महान वीरता दिखाएंगे, और दुखी होंगे। सपने में कमल इकट्ठा करना इस बात का संकेत है कि आप किसी कठिन कार्य के अंत में सफलता प्राप्त करेंगे। सपने में बिच्छू देखना क्या होता है? सपने में सांप का दिखना होता है शुभ या अशुभ, जानें 

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सपने में धतूरे का फूल या फल देखने का क्या मतलब 

सपने में धतूरे को देखना दोस्तों आपने देखा होगा कि दिन भर जो भी आपके सामने चल रहा होता है वह कभी ना कभी सपने में आपके सामने आ ही जाता है लेकिन कई बार हम सपने में कुछ ऐसी चीजें देखते हैं | इनके बारे में हम सोच भी नहीं रहे होते और हम उनका अर्थ पता करने की कोशिश करते हैं इन सपनों का इशारा हमारे भविष्य की ओर होता है हमारी नींद में आने वाले सपने कभी भी व्यर्थ नहीं होते हैं सपने में बिच्छू देखना क्या होता है? सपने में धतूरे का फूल या फल देखने का क्या मतलब होता है यदि आप सपने में देखते हैं कि आप भगवान शंकर को धतूरा का फल चढ़ा रहे हैं तो यह एक शुभ संकेत हो सकता है,धतूरा को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है की जो चीजे मनुष्य द्वारा त्याग दी जाती है उसे भगवान शंकर अपना प्रिय बनाते है ऐसे में सपने में आप भगवान शंकर को धतूरा का फल चढ़ा रहे हैं, जरूर आपको जीवन में कुछ अच्छी चीजे हो सकती है। सपने में धतूरे का फल देखना धतूरे का फल नुकीला कांटेदार होता है अतः अगर आप सपने में धतूरे का फल देखते हैं तो ये आपके लिए काफी कष्टकारी हो सकता है परंतु यदि आप यह देखते हैं कि आप धतूरे के फल को भगवान शिव को अर्पण कर रहे हैं तो यह बहुत ही शुभ सपना माना जाता है, यह माना जाता है कि भगवान शिव की कृपा आप पर बनी हुई है और वह चाहते हैं कि आप उनकी पूजा करें

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सपने में बिच्छू देखना क्या होता है?

सपने में बिच्छू देखने से कैसा फल मिलता है दोस्तों सपनों की दुनिया बहुत अजीब होती है, कब किसको कौन सा सपना आ जाए इसके बारे में किसी को पता नहीं होता है। जब भी सोते हैं तो हमारा मन वश में रहता है, सोते समय मन इधर-उधर भटकता रहता है जब मन भटकता है तब हम लोगों को सपने आते हैं। ज्यादातर लोगों का मानना होता है कि सपने अधूरे होते हैं लेकिन ऐसा नहीं होता है, बहुत बार ऐसा होता है कि सपने पूरे भी होते हैं। कभी-कभी देखे गए सपने शीघ्र ही पूर्ण हो जाते हैं लेकिन कभी-कभी सपने पूरे होने में समय लगता है। ज्योतिष के अनुसार सभी सपनों का कोई न कोई अर्थ जरूर होता है, सपने भविष्य में होने वाली घटनाओं के प्रति हमें आगाह करते हैं और हमें भविष्य के प्रति सचेत करते हैं।  दोस्तों आज हम जानने वाले हैं कि सपने में बिच्छू देखने से किस प्रकार के फल की प्राप्ति होती है, आपने सपने में बिच्छू को जरूर देखा होगा तो आपके मन में भी यह सवाल उठता होगा कि आखिर इस स्वप्न का क्या अर्थ होता है, आज हम इसी के बारे में बात करने जा रहे हैं तो बने रहिए हमारे साथ बिना किसी देरी के शुरू करते हैं।  सपने में बहुत सारे बिच्छू देखना यदि आप सपने में बहुत सारे बिच्छुओ को देखते हैं तो ऐसा स्वप्न आपके लिए शुभ फल देने वाला सपना होता है, इसका अर्थ है आपको जीवन में कई सारे लाभ मिलने वाले हैं यदि आप कहीं पर नौकरी करते हैं तो वहाँ पर आपके मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होने वाली है जिसके कारण आपको आने वाले समय में प्रसन्नता और आनंद मिलने वाला है।  सपने में बिच्छू देखना अगर आप सपने में बिच्छू देखते हैं तो आपको खुश होना चाहिए क्योंकि ऐसा सपना आपके लिए शुभ माना जाता है। स्वप्नशात्र के अनुसार बिच्छू जितना जहरीला होगा आपके लिए सपने में बिच्छू देखना उतना ही अच्छा है। सपने में बिच्छू देखने का मतलब है कि आप पर कोई बड़ी जिम्मेदारी आ सकती है, अगर कोई बेरोजगार व्यक्ति ऐसा सपना देखता है तो उसे भविष्य में अच्छी नौकरी की प्राप्ति होगी। सपने में सफेद बिच्छू देखना सपने में सफेद बिच्छू देखना एक अशुभ सपना माना जाता है, इस सपने का मतलब है कि आप किसी मुसीबत में फंसने वाले हैं। ऐसी संभावना है कि निकट भविष्य में कोई आपको झूठे मामले में फंसाएगा। यदि आप सपने में सफेद बिच्छू को काटते हुए देखते हैं तो यह सपना शुभ होता है, यह धन और लाभ का प्रतिनिधित्व करता है। सपने में काला बिच्छू देखने का मतलब यदि आप सपने में काला बिच्छू देखते हैं तो इसका मतलब है कि यह एक शुभ संकेत की और इशारा करता है। सपने में काला बिच्छू देखने का मतलब है कि आपको कहीं से धन की प्राप्ति होगी, या कोई शुभ समाचार मिलेगा। सपने में सांप दिखने का होता है ये मतलब, जानें इसके शुभ-अशुभ संकेत सपने में पीला बिच्छू देखना सपने में पीला बिच्छू देखना इस प्रकार के सपने का मतलब है कि भविष्य में आपका व्यवसाय कई गुना बढ़ जाएगा, ऐसा सपना देखने का मतलब है कि आप अपनी कार्यशैली में इतने निपुण होंगे कि आपका बॉस आपको नियंत्रित करने में प्रसन्न होगा। सपने में बिच्छू मारना सपने में बिच्छू को मारना भी एक बहुत अच्छा सपना माना जाता है, इस प्रकार का सपना इस बात का संकेत देता है कि आप जल्द ही अपने दुश्मन पर जीत हासिल करेंगे, इस बार आपके जीवन में प्रगति होगी। इस समय यदि आप अपना काम सफलतापूर्वक कर सकते हैं तो इस तरह से बिच्छू को मारना एक बहुत ही अच्छा सपना है।

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सपने में सांप दिखने का होता है ये मतलब, जानें इसके शुभ-अशुभ संकेत

नींद में सांप से जुड़े सपने कई लोग देखते हैं. इसके अलग-अलग अर्थ होते हैं. स्वप्न शास्त्र में सांप से जुड़े सपने के शुभ-अशुभ संकेत के बारे में बताया गया है. नींद में हर व्यक्ति सपने देखता है. लेकिन सपने अकारण नहीं होते बल्कि हर सपने का अलग-अलग अर्थ होता है. स्वप्न शास्त्र में कुछ सपनों को शुभ तो कुछ को अशुभ माना जाता है. कई सपने ऐसे भी होते हैं जो भविष्य में होनी वाली घटनाओं के संकेत माने जाते हैं. नींद में हम कई तरह के सपने देखते हैं. लेकिन अलर सपने में सांप दिखाई दे तो इसका क्या मतलब होता है. क्या ऐसा सपना शुभ होता है या इसे अशुभ माना जाता है. आइये जानते हैं. भगवान राम के बारे में सुने-अनसुने 10 किस्से क्यों आते है सांप के सपने कभी-कभी ऐसा होता है कि हमें बार-बार सांप के सपने दिखाई देते हैं. ज्योतिष शास्त्र की माने तो जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष होता है या राहु-केतु की दशा चल रही होती है तो ऐसे लोगों को सांप के सपने अधिक आते हैं. वहीं स्वप्न शास्त्र के अनुसार सांप के सपने भविष्य में होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं के संकेत देते हैं. फन उठाता हुआ सांप देखना यदि किसी व्यक्ति को सावन के महीने में सपने में फन उठाता हुआ सांप दिखाई दे तो इस तरह का सपना काफी शुभ माना जाता है। इस तरह के सपने का अर्थ है कि आपको जल्द ही कोई बड़ा धन लाभ हो सकता है। साथ संपत्ति लाभ मिलने की भी संभावना होती है। पीले रंग का सांप देखना सावन के महीने में यदि आपको सपने में पीले रंग का सांप दिखाई देता है तो इसका अर्थ है कि आपको नौकरी या फिर व्यापार में किसी दूसरे शहर जाना पड़ सकता है। हरे रंग का सांप देखना सावन के महीने में अगर किसी व्यक्ति को सपने में हरे रंग का सांप दिखाई देता है तो इसका अर्थ है कि आपको अपने जीवन में अच्छे अवसर प्राप्त होने वाले हैं। सावन में इस तरह का सपना काफी शुभ माना जाता है। सफेद रंग का सांप देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में सफेद रंग का सांप देखना भी काफी शुभ माना जाता है। सफेद रंग का सांप देखना इस बात की ओर संकेत करता है कि आपको जल्द ही खूब धन लाभ होने वाला है। नौकरी और व्यापार में भी आपको काफी लाभ हो सकता है। सांप को पकड़ते देखना कई बार व्यक्ति सपने में खुद को सांप पकड़ते हुए देखता है। इस तरह का सपना आने पर अक्सर हम घबरा जाते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार इस तरह का सपना आना काफी शुभ माना जाता है। इस सपने का अर्थ है कि आपको आने वाले समय में धन प्राप्ति हो सकती है। साथ ही आपको जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलने वाली है।

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भगवान राम के बारे में सुने-अनसुने 10 किस्से

1. वनवास के समय भगवान राम 27 साल के थे।2. लव और कुश राम तथा सीता के दो जुड़वां बेटे थे।3. राम-रावण युद्ध के समय इंद्र देवता ने भगवान श्री राम के लिए दिव्य रथ भेजा था।4. भगवान श्री राम ने पृथ्वी पर 10 हजार से भी अधिक वर्षों तक राज किया।5. भगवान राम का जन्म चैत्र नवमी में हुआ था जिसको भारतवर्ष में रामनवमी के रूप में मनाया जाता है।6. भगवान राम ने रावण को मारने के बाद रावण के ही छोटे भाई विभीषण को लंका का राजा बना दिया था।7. गौतम ऋषि ने अपनी पत्नी अहिल्या को पत्थर बनने का श्राप दिया था और इस श्राप से भगवान राम ने ही उन्हें मुक्ति दिलाई थी।8. अरण्य नाम के एक राजा ने रावण को श्राप दिया था कि मेरे वंश से उत्पन्न युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा और भगवान राम इन्ही के वंश में जन्मे थे।9. माता सीता को रावण की कैद से आजाद कराने के लिए रास्ते में पड़े समुद्र को पार करने के लिए भगवान राम ने एकादशी का व्रत किया था।10. वनवास वापसी के बाद भगवान राम के अयोध्या वापसी की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाए थे तब से दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। 1. रामायण में कुल श्लोक  रामायण महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखी गयी थी जिसमे कुल 7 कांड लिखे गए है। इन 7 कांडो में 500 उपखण्ड तथा कुल 24000 श्लोक है। रामायण में भगवान विष्णु के राम अवतार के जन्म से लेकर उनके वापस नारायण रूप में लौटने तक की कहानी लिखी गयी थी।  2. राम की बहन रामायण के सभी पत्रों से अलग एक ऐसा पात्र भी था जिसका जिक्र किसी ने शायद ही किया हो। और वह पात्र है राजा दशरथ की एक पूरी जोकि राम की बड़ी बहन थी। उनका नाम शांता था और उनको राम की माता कौशल्या ने ही जन्म दिया था। शांता अपने चारो भाइयो से उम्र में काफी बड़ी थी।  3.  गायत्री मंत्र  रामायण ग्रन्थ में लिखे गए 24 हजार श्लोक में हर 1000 श्लोक का पहला अक्षर को लिखा जाये तो यह गायत्री मन्त्र बन जाता है।  4. सीता स्वयंवर का वर्णन  महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित ‘रामायण’ में सीता स्वयंवर का कोई भी वर्णन नहीं मिलता है।  महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित ‘रामायण’ के अनुसार भगवान  श्री राम व लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिला पहुंचे, तब विश्वामित्र ने ही राजा जनक से श्रीराम को वह शिवधनुष दिखाने के लिए कहा और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। इससे प्रभावित होकर जनक ने देवी सीता का विवाह श्री राम से करने का विचार किया।  अमर सुहाग और अमर पीहर बुधवार व्रत कथा 5. पिनाक धनुष  रामायण में सीता  स्वयंवर में जिस धनुष को उठाने की शर्त रखी गयी थी वह महादेव द्वारा निर्मित पिनाक धनुष था। पिनाक धनुष का निर्माण भगवान शिव ने स्वयं किया था ।भगवान शिव ने इसी पिनाक धनुष से ताड़कासुर नामक असुर के तीनों पुत्रों को उनके पुरों सहित एक ही बाण से नष्ट कर दिया था। भगवान शिव ने इस धनुष को देवताओं का काल समाप्त होने पर देव रात को सौंप दिया था। देवराज राजा जनक के पूर्वज थे।  6. हनुमान जी के गुरु   यह माना जाता है की शबरी जिसने श्री राम को अपने झूठे बेर खिलाये थे उनके गुरु मतंग मुनि जी हनुमान जी के भी गुरु थे। ऋषि मतंग जी ने शबरी को पहले ही बता दिया था की एक दिन श्रीराम अपनी पत्नी को ढूंढ़ते हुए उनके आश्रम में आएंगे और आगे क्या होगा यह भी उन्होंने शबरी को पहले ही बता दिया था।  7. रामायण में सभी अवतार  रामायण में विष्णु श्री राम का अवतार लेकर आये थे तथा देवी लक्ष्मी सीता बनकर आई थी। वही उनके इस अवतार का साथ देने के लिए शेषनाग लक्षमण जी का अवतार लेकर आये थे। भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र भरत का अवतार लेकर आया था तथा शंख शैल शत्रुघन अवतार थे।  8. दंडकारण्य वन  श्री राम लक्षमण और माता सीता ने 14 वर्ष का वनवास का अधिकतर समय  जिस स्थान पर बिताया था वह वन दंडकारण्य नाम से जाना जाता है। यह वन बहुत बड़ा है जोकि 35600 वर्गमील में फैला हुआ है।  9. एकादशी का व्रत  जब श्री राम सुग्रीव की सेना को लेकर समुन्द्र तट पर पहुंचे तो अथाह समुन्द्र उनके सामने था। प्रश्न यह था की उसे पार करके लंका तक इतनी बड़ी सेना कैसे लेकर पहुंचा जाए। इसके लिए श्री राम ने समंदर से रास्ता मांगने के लिए समुन्द्र की  आराधना की और एकादशी का का व्रत किया था। 10. श्री राम की आयु  यह माना गया है की विवाह के समय श्री राम की आयु लगभग 16 वर्ष की थी।

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अमर सुहाग और अमर पीहर बुधवार व्रत कथा 

बहुत सालो पहले गणेश पूरी नाम का गाँव था.  उस गाँव में विनायक और बिंदु नाम के भाई बहन रहा करते थे. वे दोनों एक दुसरे से बहुत प्यार करते थे और हमेशा एक दुसरे का खयाल रखते थे. बिंदु का एक नित्य नियम था. वह हर रोज सुबह घर के सारे काम पुरे करने के बाद. अपने भाई विनायक का मुंह देखकर ही खाना खाती थी. कुछ सालो बाद विनायक ने अपनी बहन का विवाह पड़ोसी गाँव के ही एक व्यापारी रचाया. उसके ससुराल वाले काफी भले लोग थे. शादी के बाद भी बिंदु ने अपना नित्य नियम कायम रखा था. वह हर सुबह सुसराल के घर का काम जल्दी-जल्दी खत्म करके के अपने मायके भाई का मुंह देखने जाती थी. ससुराल से मायके तक बिंदु जिस रास्ते से जाती थी, वह रास्ता खेतों से होकर गुजरता था. वहां पर घनी झाड़ियों के बीच एक खेजड़ी के पेड़ के निचे गणेश भगवान की छोटीसी सुंदर मूर्ति रखी होती थी. बिंदु हर रोज आते वक्त उस मूर्ति के सामने हाथ जोडकर बोलती थी. हे गणेश जी मेरे जैसा अमर सुहाग और मेरे जैसा अमर पीहर (मायका) सबको दीजिए. इतना कहकर जब वह मायके जाने के लिए निकलती. तब घनी झाड़ियों के कांटे उसके पैरों में चुभा करते. एक दिन रोज की तरह बिंदु मायके पहुंची और भाई का मुंह देखकर उसके पास बैठ गई. उसी समय उसकी भाभी की नजर बिंदु के पैरो पर गई. भाभी ने पूछा की आपके पैरो में क्या हुआ है?  वह सुनकर बिंदु ने जवाब दिया की आते वक्त खेतों की घनी झाड़ियों के गिरे हुए कांटे मेरे पांव में चुभ गए है. उसके बाद जब बिंदु वापस अपने ससुराल लौट गई. तब भाभी ने अपने पति विनायक से कहा की आपकी बहन के पैरो में कांटे चुभ गए है. कल फिरसे ना चुभे इसलिए आज ही आप रास्ता साफ करवा दीजिये. वह सुनते ही विनायक ने उसी वक्त कुल्हाड़ी उठाई और खेतो की घनी झाड़ियाँ काटकर रास्ता साफ कर दी. लेकिन झाड़ियाँ काटते वक्त उसके हातो एक गलती हो गई. और झाड़ियों के साथ-साथ वह खेजड़ी के पेड़ वाली सुंदर गणेश मूर्ति भी वहा से हटा दी गई. इसी बात पर भगवान गणेश जी बहुत नाराज हो गए और भाई विनायक के प्राण हर लिए. अगली सुबह जब अंतिम संस्कार हेतु गाँव के लोग विनायक को ले जा रहे थे. तब उसकी पत्नी ने रोते हुए कहा. रुकिए इनकी बहन आनेवाली है उसका नियम है की वह अपने भाई का मुंह देखे बिना नहीं रह सकती. फिर लोग बोलने लगे आज देख लेगी लेकिन कल क्या करेगी? दूसरी तरफ बिंदु रोज की तरह अपने भाई से मिलने ससुराल से आ रही थी. रास्ते में आते वक्त उसे रास्ता साफ सुथरा दिखाई दिया. लेकिन उसका ध्यान जब रोज की तरह बिंदायक जी के स्थान पर गया. तब उसने देखा की गणेश मूर्ति अपने स्थान पर नहीं है.  फिर उसने तुरंत ही उस मूर्ति को ढूंडकर उसके नियमित स्थान पर स्थापित कर दिया. और हाथ जोड कर बोली हे गणेश भगवान मेरे जैसा अमर सुहाग और मेरे जैसा अमर पीहर (मायका) सबको दीजिए. इतना कहकर आगे बढी. अपने भक्त की बात सुनकर गणेश भगवान सोचने लगे. अगर मैंने इसका कहना नहीं सुना तो मुझे कौन मानेगा?  कौन पुजेगा मुझे? तब गणेश जी ने बिंदु को आवाज दी और बोले सुनो बेटी जाते-जाते इस खेजड़ी की सात पत्तियां लेकर जा. क्या है कल्कि अवतार, अगर वो आ गया तो सबकुछ बर्बाद हो जाएगा और उसे कच्चे दूध में घोलकर अपने भाई के उपर छींटा मार देना,  वह उठकर बैठ जाएगा. वह आवाज सुनकर बिंदु इधर-उधर देखने लगी. पर उसे आस-पास कोई भी नहीं दिखाई दिया. फिर उसने सोचा ठीक है. जैसा सुना वैसा कर देती हूँ. और वह खेजड़ी की ७ पत्तियां तोडकर अपने भाई के घर ले गई. मायके पहुंचते ही उसने देखा की भाई के घर गाँव के लोग इकट्ठा हुए है. भाभीजी रो रही है और सामने भाई का शव (लाश) रखा है.  फिर बिंदु ने तुरंत ही सुनी हुई उस आवाज के हिसाब से खेजड़ी की सात पत्तियां कच्चे दूध में घोलकर भाई पर छींटे मार दिए. भाई के उठते ही वह अपनी बहन से बोला मुझे बहुत ही गहरी नींद आ गई थी. वह सुनकर बिंदु बोली इस तरह की नींद किसी दुश्मन को भी नसीब ना हो. बाद में उसने अपने भाई को पूरी कहानी बताई. तभी भाई विनायक ने भगवान बिंदायक से क्षमा मांग ली. तो यह थी मान्यता अनुसार बुधवार को सुनी जानेवाली गणेश जी की कथा. हे गणेश भगवान इस कहानी को पढने वाले और सुनने वाले को हमेशा खुश रखना. कहानी अधूरी हो तो इसे पूरी करना और हमसे कोई गलती हो गई हो तो क्षमा करना. अमर सुहाग की कहानी अमर सुहाग एक ब्राह्मण ब्राह्मणी थे उनके पांच बेटिया थी | पांचो बेटिया विधिविधान से देवाधिदेव महादेव व माँ पार्वती का विधिपूर्वक पूजन कर अमर सुहाग की कथा सुनती थी |पूजा के समय चोरो बेटिया दीपक जलाती तो पूजा पूर्ण होने तक जलता रहता | परन्तु पांचवी बेटी का दीपक कहानी सुनने से पहले ही बड़ा हो जाता | यह देखकर पांचवी बेटी को चिंता होने लगी | सभी बहनों का दीपक तो जलता हैं | मेरा दीपक बड़ा क्यों हो जाता हैं | एक दिन पांचवी बेटी ने घर जाकर माँ को सारी बात बताई तब माँ ने कहा बेटा इसमें चिंता की कोई बात नहीं हैं | कल से तू दीपक में घी अधिक डालना | बेटी ऐसा करने लगी | कुछ समय पश्चात ब्राह्मण ने पांचों बेटियों का विवाह कर दिया | चारों बेटियों के घर में अन्न धन के भंडार भरे थे परन्तु पांचवी बेटी की आर्थिक स्थति थौड़ी कमजोर थी | उसका पति जंगल से लकड़ी काट कर लाकर घर चलाता था | परन्तु पांचवी बेटी संतोषी व बहुत समझदार थी | कभी किसी से शिकायत नहीं करती थी | विवाह के बाद भी महादेव माँ पार्वती का पूजन करती थी | एक दिन उसका पति कम लकडिया लेकर आया तो उसने पूछा क्या हुआ आज लकड़ी कम लाये हो तो पति ने कहा आज मेरी तबियत खराब हैं मुझे बुखार हैं

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क्या है कल्कि अवतार, अगर वो आ गया तो सबकुछ बर्बाद हो जाएगा

श्रीहरि का ‘कल्कि अवतार’ होना बाकी है. मान्यता है कि कल्कि अवतार के बाद कलियुग खत्म हो जाएगा. यह अवतार कब होगा, कैसा होगा इनका स्वरूप ? भगवान विष्णु को जग का पालनहार कहा गया है. पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा गया है कि जब-जब पृथ्वी पर कोई संकट आता है, तब-तब भगवान विष्णु अवतार लेकर उस संकट को दूर करते रहे हैं. वामन अवतार, नृसिंह अवतार, मत्स्य अवतार, रामावतार, कृष्ण अवतार ये सभी इस बात का सबूत है. हिंदू शास्त्रों में भगवान विष्णु के अवतारों का उल्लेख किया गया है. ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु का कल्कि अवतार अंतिम अवतार होगा, जो वे कलयुग में लेंगे और यह अवतार लेना अभी बाकी है. जब कलयुग अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि के रूप में कलयुग में अपना अंतिम अवतार लेंगे और इसके बाद धर्म की स्थापना करेंगे. आइए जानते हैं कि कहां मिलता है कल्कि अवतार का वर्णन, क्या है इसका महत्व? धर्म ग्रंथों के अनुसार जब अधर्म ने पैर पसारना शुरू किए तब भगवान विष्णु ने अवतार लेकर पुन: धर्म को स्थापित किया. शास्त्रों में भगवान विष्णु के 24 अवतारों का वर्णन है, जिसमें से श्रीहरि का ‘कल्कि अवतार’ होना बाकी है. कल्कि अवतार को भगवान विष्णु का भविष्य का 10वां अवतार माना जाता है. मान्यता है कि कल्कि अवतार के बाद कलियुग खत्म हो जाएगा. यह अवतार कब होगा, कैसा होगा इनका स्वरूप ? आइए जानते कल्कि अवतार की महत्वपूर्ण जानकारी. क्या है कल्कि अवतार ?  पुराणों के अनुसार कलियुग के अंत में भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतार लेंगे. सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार अर्धम को खत्म करने और सतयुग के पुनरुत्थान ये अवतार होगा. कल्कि अवतार लेकर श्रीहरि धरती से पापियों का नाश करेंगे और फिर धर्म की पताका लहराएगी. शिव जी ने क्यों किया था विष का पान? जानें नीलकंठ कहलाने की पौराणिक कथा कब होगा कल्कि अवतार धर्म ग्रंथों के अनुसार कलियुग का प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व से हुआ था. श्रीकृष्ण के पृथ्वी लोक से विदा लेते ही कलयुग का प्रथम चरण शुरू हो गया. पुराणों के अनुसार पृथ्वी पर कलयुग का इतिहास 4 लाख 32 हजार वर्षों का होगा. अभी कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है. इसका मतलब 3102+2023= 5125 साल कलियुग के बित चुके हैं और 426875 साल अभी बचे हैं. कल्कि अवतार की उत्पत्ति कलियुग के अंत में होगी. श्रीमद्भागवत पुराण के 12वें स्कंद के 24वें श्लोक में बताया गया है कि जब गुरु, सूर्य और चंद्रमा एक साथ पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे तब भगवान कल्कि अवतरित होंगे. कलियुग की समाप्ति और सतयुग के संधि काल में ये अवतरित होंगे. पुराणों में श्रीहरि के दसवें अवतार की जो तिथि बताई गई है उसके अनुसार भगवान सावन महीने के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को जन्म लेंगे. कहां होगा कल्कि अवतार ? कल्कि पुराण के अनुसार भगवान विष्णु का कल्कि अवतार संभल गांव में होगा. मान्यता है कि उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद के पास स्थित संभल गांव में भगवान विष्णु का 10वां कल्कि अवतार होना है. कैसा होगा कल्कि अवतार का स्वरूप ?  ‘अग्नि पुराण’ के सौलहवें अध्याय में कल्कि अवतार का चित्रण तीर-कमान धारण किए हुए एक घुड़सवार के रूप में किया हैं. कल्कि भगवान देवदत्त नाम के एक सफेद घोड़े पर बैठ कर आएंगे और पापियों का विनाश करेंगे. यह अवतार 64 कलाओं से युक्त होगा. इनके गुरु चिरंजीवी भगवान परशुराम होंगे जिनके इनके निर्देश पर कल्कि भगवान शिव की तपस्या करेंगे और दिव्यशक्तियों को प्राप्त कर अधर्म का अंत करेंगे. 300 साल से ही होती चली आ रही है पूजाज्योतिष शास्त्र के अनुसार लगभग 300 साल से ही कल्कि भगवान की पूजा-अर्चना होती चली आ रही है. पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम के समान ही कल्कि भगवान के तीन और भाई होंगे, जिनका नाम सुमंत, प्राज्ञ व कवि होंगे. इन्हीं भाइयों के साथ मिलकर भगवान विष्णु धर्म की स्थापना करेंगे.  

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शिव जी ने क्यों किया था विष का पान? जानें नीलकंठ कहलाने की पौराणिक कथा

सावन माह सभी महीनों में सबसे पवित्र माना जाता है. इस माह को भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है. शिव जी को नीलकंठ भी कहा जाता है. जानते हैं इससे जुड़ी पौराणिक कथा. सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है. इस महीने में पूरी श्रद्धा के साथ शंकर भगवान की पूजा- अर्चना की जाती है. हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए भगवान शिव को कई नामों से जाना जाता है. देवों के देव महादेव को कई नामों से जाना जाता है. इनमें से कुछ नाम हैं- भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र और नीलकंठ. शंकर भगवान को नीलकंठ क्यों कहा जाता है, इसके पीछे एक पौराणिक कथा है. पुराणों के अनुसार देवताओं और राक्षसों के बीच एक बार अमृत के लिए समुद्र मंथन हुआ था. यह मंथन क्षीरसागर में हुआ. इस मंथन में से लक्ष्मी, शंख, कौस्तुभमणि, ऐरावत, पारिजात, उच्चैःश्रवा, कामधेनु, कालकूट, रम्भा नामक अप्सरा, वारुणी मदिरा, चन्द्रमा, धन्वन्तरि, अमृत और कल्पवृक्ष ये 14 रत्न निकले थे. समुद्र मंथन में से निकली इन बहुमूल्य वस्तुओं को देवताओं और दानवों ने आपस में बराबर बांट लिया लेकिन इसमें से एक ऐसी चीज भी निकली जिसे कोई भी लेने को तैयार नहीं था. यह था समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष. सावन में क्यों होती है शिव पूजा, कैसे पड़ा इस महीने का नाम; जानिए शिव पूजा से जुड़ी परंपराएं और कथाएं कैसे शुरू हुआ श्रावण मास? स्वयंभू शिवशंकर को हम कई नामों से जानते हैं। इन्हें महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र समेत कई नामों से जाना जाता है। वहीं, शिव जी को नीलकंठ भी कहा जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भोलेनाथ का नाम नीलकंठ कैसे पड़ा। इसे लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है। इस लेख में हम आपको इसी पौराणिक कथा के बारे में बता रहे हैं जिसमें वर्णित है कि आखिर भगवान शिव को नीलकंठ क्यों कहा जाता है। यह विष इतना ज्यादा खतरनाक था कि अगर इसकी एक बूंद भी संसाकर पर गिर जाती तो वह संसार को खत्म करने की शक्ति रखता था। देवता और राक्षस यह जानकर डर गए। वो इसका हल नहीं निकाल पा रहे थे। ऐसे में देवगण और राक्षस सभी शिवजी के पास पहुंच गए। शिवजी ने सभी की बात सुनी और एक हल निकाला। उन्होंने कहा कि वो पूरा विष खुद पी जाएंगे। इतने में ही शिवजी ने वो घड़ा उठाया जिसमें विष था और देखते ही देखते पूरा विष स्वयं पी गए। लेकिन यह विष उन्होंने अपने गले से नीचे नहीं उतारा। उन्होंने इसे गले में ही रखा। इससे उनका गला नीला पड़ गया और यही कारण था कि उनका नाम नीलकंठ पड़ गया। जिस समय शिवजी ने विष पिया उस समय विष की कुछ बूंदे जमीन पर गिर गईं जिसके चलते बिच्छू, सांप आदि जीवों और कुछ वनस्पतियों ने उसे ग्रहण कर लिया। इसी के चलते ये जीव विषैले हो गए। 

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सावन में क्यों होती है शिव पूजा, कैसे पड़ा इस महीने का नाम; जानिए शिव पूजा से जुड़ी परंपराएं और कथाएं

इसे शिव का महीना माना जाता है और पूरे महीने शिव आराधना की जाती है। जिसमें रूद्राभिषेक के बाद बिल्वपत्र और भस्म चढ़ाने समेत कई परंपराए शामिल हैं, लेकिन ऐसा क्यों है? क्यों शिवजी को सावन का महीना पसंद है और इस महीने का नाम सावन कैसे पड़ा ? आइए समझते हैं शिव पूजा की परंपराएं और कथाओं से ? सावन, दक्षिणायन में आता है। जिसके देवता शिव हैं, इसीलिए इन दिनों उन्हीं की आराधना शुभ फलदायक होती है। सावन के दौरान बारिश का मौसम होता है। पुराणों के मुताबिक शिवजी को चढ़ने वाले फूल-पत्ते बारिश में ही आते हैं इसलिए सावन में शिव पूजा की परंपरा बनी। स्कंद पुराण में भगवान शिव ने सनत्कुमार को सावन महीने के बारे में बताया कि मुझे श्रावण बहुत प्रिय है। इस महीने की हर तिथि व्रत और हर दिन पर्व होता है, इसलिए इस महीने नियम-संयम से रहते हुए पूजा करने से शक्ति और पुण्य बढ़ते हैं। भगवान शिव को क्यों प्रिय है सावन का महीना?कहा जाता हैं सावन भगवान शिव का अति प्रिय महीना होता हैं. इसके पीछे की मान्यता यह हैं कि दक्ष पुत्री माता सती ने अपने जीवन को त्याग कर कई वर्षों तक श्रापित जीवन जीया. उसके बाद उन्होंने हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया. पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए पूरे सावन महीने में कठोरतप किया जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की. अपनी भार्या से पुन: मिलाप के कारण भगवान शिव को श्रावण का यह महीना अत्यंत प्रिय हैं. यही कारण है कि इस महीने कुमारी कन्या अच्छे वर के लिए शिव जी से प्रार्थना करती हैं.मान्यता हैं कि सावन के महीने में भगवान शिव ने धरती पर आकार अपने ससुराल में विचरण किया था जहां अभिषेक कर उनका स्वागत हुआ था इसलिए इस माह में अभिषेक का महत्व बताया गया हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसारधार्मिक मान्यतानुसार सावन मास में ही समुद्र मंथन हुआ था जिसमे निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया जिस कारण उन्हें नीलकंठ का नाम मिला और इस प्रकार उन्होंने से सृष्टि को इस विष से बचाया. इसके बाद सभी देवताओं ने उन पर जल डाला था इसी कारण शिव अभिषेक में जल का विशेष स्थान हैं.वर्षा ऋतु के चौमासा में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस वक्त पूरी सृष्टि भगवान शिव के अधीन हो जाती हैं. अत: चौमासा में भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु मनुष्य जाति कई प्रकार के धार्मिक कार्य, दान, उपवास करती हैं. कामदेव को भस्म किया –शिव को कामांतक भी कहते हैं। इसके पीछे कथा है। तारकासुर ने ब्रह्माजी से दो वरदान पाए थे। पहला, तीनों लोकों में उसके समान ताकतवर कोई न हो और दूसरा, शिवपुत्र ही उसे मार सके। तारकासुर जानता था कि देवी सती के देहांत के बाद शिव समाधि में जा चुके हैं, जिससे शिवपुत्र होना असंभव था। वरदान पाकर तारकासुर ने तीनों लोकों को जीत लिया। उसके अत्याचार से परेशान होकर देवता ब्रह्माजी के पास गए। उन्होंने देवताओं को वरदान के बारे में बताते हुए कहा कि केवल शिवपुत्र ही तारकासुर को मार सकता है, लेकिन शिवजी गहरी समाधि में हैं। हिमवान की पुत्री पार्वती शिव से विवाह के लिए तप कर रही हैं, लेकिन वे पार्वती की तरफ देखना भी नहीं चाहते, अगर महादेव पार्वती से विवाह कर पुत्र उत्पन्न करें, तभी इस दैत्य का वध संभव है। तब इंद्र ने कामदेव से कहा कि वे जाकर शिवजी के मन में देवी पार्वती के प्रति अनुराग जगाएं। कामदेव ने पुष्पबाण ध्यानमग्न शिवजी पर चला दिया। अचानक इस विघ्न से शिवजी बेहद गुस्सा हुए और उन्होंने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया । इस पर कामदेव की पत्नी रति ने शिवजी से प्रार्थना की कि वे उसके पति का जीवन वापस लौटा दें। शिव ने शांत होकर कहा, कामदेव की देह नष्ट हुई है, लेकिन उसकी आंतरिक शक्ति नहीं। “काम’ अब देह रहित होकर हर प्राणी के हृदय में रहेगा। वह कृष्णावतार के समय कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्म लेगा। तुम फिर उसकी पत्नी बनोगी। उस समय रति ने मायावती के रूप में जन्म लिया था।

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शनि देव को करना है प्रसन्न तो शनिवार के दिन करें इन मंत्रों का जाप, शनि होंगे शांत

शनि के प्रकोप और बुरी दृष्टि से हर व्यक्ति बचना चाहता है. ज्योतिष में एक तरफ जहां शनि ग्रह को क्रूर ग्रह के रूप में देखा जाता है, तो वहीं शनि देव न्यायप्रधान देवता भी कहलाते हैं. क्योंकि वे अपने भक्तों को उनके कर्मों के अनुसार ही शुभ और अशुभ फल देते हैं. जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहे इसके लिए शनिवार के दिन शनि देव की पूजा जरूर करनी चाहिए. कहा जाता है कि जिन भक्तों को शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है वह रंग से भी राजा बन जाता है और उसके जीवन के सारे कष्ट व दुख दूर हो जाते हैं. शनि देव को प्रसन्न रखने के लिए कुछ विशेष मंत्रों के बारे में बताया गया है. इन मंत्रों का जाप शनिवार के दिन करने से कुंडली में शनि ग्रह शांत होते हैं और शनि की साढ़े साती व ढैया का प्रभाव कम होता है. साथ ही जो भक्त श्रद्धाभाव से इन मंत्रों का जाप करते हैं. शनि देव उन पर कृपा बरसाते हैं. घर में है शिवलिंग तो कैसे करें पूजा, जानें सही विधि और नियम प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है। इसी तरह शनिवार का दिन न्याय के देव शनिदेव को समर्पित होता है। इस दिन शनि देव की पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि शनि देव जिन पर प्रसन्न होते हैं, उनके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और जिनसे वे रुष्ट हो जाएं उनके जीवन में कोई काम सफल नहीं होते हैं। आचार्य पिंटू शास्त्री बताते हैं कि शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। मान्यता है कि मनुष्य के शुभ-अशुभ कर्मों का फल शनि देव प्रदान करते हैं। बुरे कर्म करने वालों को शनिदेव के क्रोध का सामना करना पड़ता है। वहीं, जो लोग परोपकारी होते हैं, शनि की कृपा से उनके जीवन से हर कष्ट का अंत हो जाता है। नौकरी और व्यापार पर चल रहे संकट भी दूर होते हैं। ऐसे में अगर आप भी शनि देव को खुश करना चाहते हैं तो हर शनि वार के दिन आपको कुछ खास मंत्र और उपाय करने चाहिए। 1. सेहत के लिए शनि मंत्र ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिहा। कंकटी कलही चाउथ तुरंगी महिषी अजा।। शनैर्नामानि पत्नीनामेतानि संजपन् पुमान्। दुःखानि नाश्येन्नित्यं सौभाग्यमेधते सुखमं।। 2. तांत्रिक शनि मंत्र ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। 3. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।। 4. शनि महामंत्र ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥ 5. शनि दोष निवारण मंत्र ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम। उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात।। 6. शनि का पौराणिक मंत्र ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।। 7. शनि का वैदिक मंत्र ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः। 8. शनि गायत्री मंत्र ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्। ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः।

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