Dussehra 2023: इस साल दशहरा कब है? रावण दहन और शस्त्र पूजा का मुहूर्त क्या है? जान लें इसका महत्व

2023 mein kab hai dussehra: दशहरा का त्योहार हर साल शारदीय नवरात्रि की दशमी​ ति​थि यानि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. दशहरा को विजयादशमी भी कहते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम ने रावण का वध किया था, उसके उपलक्ष्य में दशहरा मनाते हैं. हर साल इस दिन रावण और कुंभकर्ण के पुतले का दहन होता है. वहीं मां दुर्गा ने महिषासुर का वध नवरात्रि की दशमी​ ति​थि को किया था, इ​सलिए हर साल इस तिथि को विजयादशमी का उत्सव मनाते हैं. दशहरा के दिन शस्त्र पूजा भी करते हैं.  दशहरा 2023 तिथि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 23 अक्टूबर के दिन शाम को 5:44 मिनट से शुरू होगी और 24 अक्टूबर को दोपहर 3:14 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार दशहरा 24 अक्टूबर 2023 को मनाया जाएगा. दशहरा 2023 शस्त्र पूजा का शुभ समय दशहरा के दिन शस्त्र पूजा विजय मुहूर्त में करने का विधान है. इस आधार पर 24 अक्टूबर को दशहरा पर शस्त्र पूजा का शुभ समय दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से दोपहर 02 बजकर 43 मिनट तक है. इस दिन आपको शस्त्र पूजा के लिए 45 मिनट का समय मिलेगा. दशहरा 2023 रावण दहन का मुहूर्त हर साल दशहरा के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाता है. इस साल 24 अक्टूबर को दशहरा पर रावण दहन का मुहूर्त सूर्यास्त से लेकर ढाई घंटे तक होगा. रावण का दहन प्रदोष काल में करने का विधान है. प्रदोष काल सूर्यास्त से लेकर ढाई घंटे तक माना जाता है. दशहरा पर सूर्यास्त शाम 05:43 बजे होगा. 2 शुभ योग में है दशहरा 2023इस साल दशहरा पर रवि योग और वृद्धि योग बने हैं. रवि योग सुबह 06 बजकर 27 मिनट से दोपहर 03 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. उसके बाद शाम 06 बजकर 38 मिनट से 25 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 28 मिनट तक रवि योग रहेगा. दशहरा पर वृद्धि योग दोपहर 03 बजकर 40 मिनट से प्रारंभ होगा और पूरी रात रहेगा. दशहरा पर दुर्गा विसर्जनशारदीय नवरात्रि के समय में पश्चिम बंगाल, बिहार समेत देश के कई हिस्सों में दुर्गा पूजा की धूम रहती है. लोग मां दुर्गा की मूर्तियां स्थापित करके पूजा करते हैं. दशहरा यानि विजयादशमी वाले दिन मां दुर्गा का विसर्जन किया जाता है. उस दिन मां दुर्गा पृथ्वी लोक से विदा होकर अपने ससुराल जाती हैं.

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Hanuman ji :हनुमानजी के 108 नाम, लेकिन जानिए 11 खास नामों का रहस्य

हनुमानजी के कई नाम है और हर नाम के पीछे कुछ ना कुछ रहस्य है। हनुमानजी के लगभग 108 नाम बताए जाते हैं। वैसे प्रमुख रूप से हनुमानजी के 12 नाम बताए जाते हैं। बलशालियों में सर्वश्रेष्ठ है हनुमानजी। कलिकाल में उन्हीं की भक्ति से भक्त का उद्धार होता है। जो जपे हनुमानजी का नाम संकट कटे मिटे सब पीड़ा और पूर्ण हो उसके सारे काम। तो आओ जानते हैं कि हनुमानजी के नामों का रहस्य। 1. मारुति : हनुमानजी का बचपना का यही नाम है। यह उनका असली नाम भी माना जाता है।  2. अंजनी पुत्र : हनुमान की माता का नाम अंजना था। इसीलिए उन्हें अंजनी पुत्र या आंजनेय भी कहा जाता है। 3. केसरीनंदन : हनुमानजी के पिता का नाम केसरी था इसीलिए उन्हें केसरीनंदन भी कहा जाता है। 4. हनुमान : जब बालपन में मारुति ने सूर्य को अपने मुंह में भर लिया था तो इंद्र ने क्रोधित होकर बाल हनुमान पर अपने वज्र से वार किया। वह वज्र जाकर मारुति की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगा। इससे उनकी ठोड़ी टूट गई इसीलिए उन्हें हनुमान कहा जाने लगा। 5. पवन पुत्र : उन्हें वायु देवता का पुत्र भी माना जाता है, इसीलिए इनका नाम पवन पुत्र हुआ। उस काल में वायु को मारुत भी कहा जाता था। मारुत अर्थात वायु, इसलिए उन्हें मारुति नंदन भी कहा जाता है। वैसे उनमें पवन के वेग के समान उड़ने की शक्ति होने के कारण भी यह नाम दिया गया। 6. शंकरसुवन : हनुमाजी को शंकर सुवन अर्थात उनका पुत्र भी माना जाता है क्योंकि वे रुद्रावतार थे। 7. बजरंगबली : वज्र को धारण करने वाले और वज्र के समान कठोर अर्थात बलवान शरीर होने के कारण उन्हें वज्रांगबली कहा जाने लगा। अर्थात वज्र के समान अंग वाले बलशाली। लेकिन यह शब्द ब्रज और अवधि के संपर्क में आकर बजरंगबली हो गया। बोलचाल की भाषा में बना बजरंगबली भी सुंदर शब्द है। जीवन के हर कष्ट को दूर करेंगे हनुमान जी के ये powerful मंत्र 8. कपिश्रेष्ठ : हनुमानजी का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। रामायणादि ग्रंथों में हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के साथ ‘वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम’ आदि विशेषण प्रयुक्त किए गए। उनकी पुच्छ, लांगूल, बाल्धी और लाम से लंकादहन इसका प्रमाण है कि वे वानर थे। रामायण में वाल्मीकिजी ने जहां उन्हें विशिष्ट पंडित, राजनीति में धुरंधर और वीर-शिरोमणि प्रकट किया है, वहीं उनको लोमश ओर पुच्छधारी भी शतश: प्रमाणों में व्यक्त किया है। अत: सिद्ध होता है कि वे जाति से वानर थे। 9. वानर यूथपति : हनुमानजी को वानर यूथपति भी कहा जाता था। वानर सेना में हर झूंड का एक सेनापति होता था जिसे यूथपति कहा जाता था। अंगद, दधिमुख, मैन्द- द्विविद, नल, नील और केसरी आदि कई यूथपति थे। 10.रामदूत : प्रभु श्रीराम का हर काम करने वाले दूत। 11. पंचमुखी हनुमान : पातल लोक में अहिरावण का वध करने जब वे गए तो वहां पांच दीपक उन्हें पांच जगह पर पांच दिशाओं में मिले जिसे अहिरावण ने मां भवानी के लिए जलाए थे। इन पांचों दीपक को एक साथ बुझाने पर अहिरावन का वध हो जाएगा इसी कारण हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धरा। उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख। इस रूप को धरकर उन्होंने वे पांचों दीप बुझाए तथा अहिरावण का वध कर राम,लक्ष्मण को उस से मुक्त किया। मरियल नामक दानव को मारने के लिए भी यह रूप धरा था। यहां पढ़ें हनुमानजी के 12 चमत्कारिक नाम हनुमान जी के 108 नाम 1.भीमसेन सहायकृते 2. कपीश्वराय 3. महाकायाय 4. कपिसेनानायक 5. कुमार ब्रह्मचारिणे 6. महाबलपराक्रमी 7. रामदूताय 8. वानराय 9. केसरी सुताय 10. शोक निवारणाय 11. अंजनागर्भसंभूताय 12. विभीषणप्रियाय 13. वज्रकायाय 14. रामभक्ताय 15. लंकापुरीविदाहक 16. सुग्रीव सचिवाय 17. पिंगलाक्षाय 18. हरिमर्कटमर्कटाय 19. रामकथालोलाय 20. सीतान्वेणकर्त्ता 21. वज्रनखाय 22. रुद्रवीर्य 23. वायु पुत्र 24. रामभक्त 25. वानरेश्वर 26. ब्रह्मचारी 27. आंजनेय 28. महावीर 29. हनुमत 30. मारुतात्मज 31. तत्वज्ञानप्रदाता 32. सीता मुद्राप्रदाता 33. अशोकवह्रिकक्षेत्रे 34. सर्वमायाविभंजन 35. सर्वबन्धविमोत्र 36. रक्षाविध्वंसकारी 37. परविद्यापरिहारी 38. परमशौर्यविनाशय 39. परमंत्र निराकर्त्रे 40. परयंत्र प्रभेदकाय 41. सर्वग्रह निवासिने 42. सर्वदु:खहराय 43. सर्वलोकचारिणे 44. मनोजवय 45. पारिजातमूलस्थाय 46. सर्वमूत्ररूपवते 47. सर्वतंत्ररूपिणे 48. सर्वयंत्रात्मकाय 49. सर्वरोगहराय 50. प्रभवे 51. सर्वविद्यासम्पत 52. भविष्य चतुरानन 53. रत्नकुण्डल पाहक 54. चंचलद्वाल 55. गंधर्वविद्यात्त्वज्ञ 56. कारागृहविमोक्त्री 57. सर्वबंधमोचकाय 58. सागरोत्तारकाय 59. प्रज्ञाय 60. प्रतापवते 61. बालार्कसदृशनाय 62. दशग्रीवकुलान्तक 63. लक्ष्मण प्राणदाता 64. महाद्युतये 65. चिरंजीवने 66. दैत्यविघातक 67. अक्षहन्त्रे 68. कालनाभाय 69. कांचनाभाय 70. पंचवक्त्राय 71. महातपसी 72. लंकिनीभंजन 73. श्रीमते 74. सिंहिकाप्राणहर्ता 75. लोकपूज्याय 76. धीराय 77. शूराय 78. दैत्यकुलान्तक 79. सुरारर्चित 80. महातेजस 81. रामचूड़ामणिप्रदाय 82. कामरूपिणे 83. मैनाकपूजिताय 84. मार्तण्डमण्डलाय 85. विनितेन्द्रिय 86. रामसुग्रीव सन्धात्रे 87. महारावण मर्दनाय 88. स्फटिकाभाय 89. वागधीक्षाय 90. नवव्याकृतपंडित 91. चतुर्बाहवे 92. दीनबन्धवे 93. महात्मने 94. भक्तवत्सलाय 95.अपराजित 96. शुचये 97. वाग्मिने 98. दृढ़व्रताय 99. कालनेमि प्रमथनाय 100. दान्ताय 101. शान्ताय 102. प्रसनात्मने 103. शतकण्ठमदापहते 104. योगिने 105. अनघ 106. अकाय 107. तत्त्वगम्य 108. लंकारि

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Hanuman ji:हनुमानजी बंदर या वानर थे या कुछ और, क्या आज भी मिलते हैं ऐसे लोग

भगवान राम को 14 वर्ष का जब वनवास हुआ तो वनवास के दौरान उन्होंने देश के सभी वन में रहने वाले लोगों को संगठित करने और शिक्षित करने का कार्य किया। भगवान राम की सेना में आदिवासी, भील, वानर, भालू, गिद्ध सभी थे। उल्लेखनीय है कि ओरांव आदिवासी से संबद्ध लोगों द्वारा बोली जाने वाली कुरुख भाषा में ‘टिग्गा’ एक गोत्र है जिसका अर्थ वानर होता है। कंवार आदिवासियों में एक गोत्र है जिसे हनुमान कहा जाता है। इसी प्रकार, गिद्ध कई अनुसूचित जनजातियों में एक गोत्र है। भगवान राम जी एवं उनके परम भक्त महाबलशाली हनुमान जी के बारे में पूर्ण जानकारी वाल्मीकि रामायण एवं तुलसीकृत रामचरित्रमानस में ही मिल सकती है। वाल्मीकि रामायण में तो भगवान राम के अलावा सबसे अधिक सबसे अधिक गुणी और बलवान श्री हनुमान जी को ही बताया गया है। जिन्होंने बड़े-बड़े कार्यों को बहुत ही सरलता से पलभर में समपन्न किया है। शास्त्रों के अनुसार जानें क्या हनुमान जी वास्तव में बंदर थे या नहीं? प्राचीन काल की जातियां बहुत प्राचीनकाल में लोग हिमालय के आसपास ही रहते थे। वेद और महाभारत पढ़ने पर हमें पता चलता है कि आदिकाल में प्रमुख रूप से ये जातियां थीं- देव, दैत्य, दानव, राक्षस, यक्ष, गंधर्व, भल्ल, वसु, अप्सराएं, पिशाच, सिद्ध, मरुदगण, किन्नर, चारण, भाट, किरात, रीछ, नाग, विद्‍याधर, मानव, वानर आदि। मानवों से अलग थे वानर वानर का शाब्दिक अर्थ होता है ‘वन में रहने वाला नर।’ लेकिन मानव से अलग। क्योंकि वन में ऐसे भी नर रहते थे जिनको पूछ निकली हुई थी। शोधकर्ता कहते हैं कि आज से 9 लाख वर्ष पूर्व एक ऐसी विलक्षण वानर जाति भारतवर्ष में विद्यमान थी, जो आज से 15 से 12 हजार वर्ष पूर्व लुप्त होने लगी थी और अंतत: लुप्त हो गई। इस जाति का नाम कपि था। हनुमान का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। Hanuman Jayanti : यहां हुआ था हनुमान जी का जन्‍म, आज भी मौजूद हैं ये स्‍थान वर्तमान में कहां हैं वानर दरअसल, आज से 9 लाख वर्ष पूर्व मानवों की एक ऐसी जाति थी, जो मुख और पूंछ से वानर समान नजर आती थी, लेकिन उस जाति की बुद्धिमत्ता और शक्ति मानवों से कहीं ज्यादा थी। अब वह जाति भारत में तो दुर्भाग्यवश विनष्ट हो गई, परंतु बाली द्वीप में अब भी पुच्छधारी जंगली मनुष्यों का अस्तित्व विद्यमान है जिनकी पूछ प्राय: 6 इंच के लगभग अवशिष्ट रह गई है। ये सभी पुरातत्ववेत्ता अनुसंधायक एकमत से स्वीकार करते हैं कि पुराकालीन बहुत से प्राणियों की नस्ल अब सर्वथा समाप्त हो चुकी है। क्या सचमुच वानर थे हनुमानजी  रामायणादि ग्रंथों में लिखे हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के साथ ‘वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम’ आदि विशेषण पढ़कर उनके बंदर प्रजाति का होने का उदाहरण देते हैं। वे यह भी कहते हैं कि उनकी पुच्छ, लांगूल, बाल्धी और लाम से लंकादहन का प्रत्यक्ष चमत्कार इसका प्रमाण है। यह भी कि उनकी सभी जगह सपुच्छ प्रतिमाएं देखकर उनके पशु या बंदर जैसा होना सिद्ध होता है। रामायण में वाल्मीकिजी ने जहां उन्हें विशिष्ट पंडित, राजनीति में धुरंधर और वीर-शिरोमणि प्रकट किया है, वहीं उनको लोमश ओर पुच्छधारी भी शतश: प्रमाणों में व्यक्त किया है। हनुमानजी जब मानव नहीं थे तो फिर वे मानवों की किसी भी जाति से संबंध नहीं रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि वर्तमान में उनकी जाति के लोग लुप्त हो गए हैं। अब जहां तक सवाल आदिवासी शब्द का है तो यह समझना जरूर है कि आदिवासी मानव भी होते हैं और वानर भी। आदि का अर्थ प्रारंभिक मानव या वानरों के समूह। वानर साम्राज्य भारत में वानरों के साम्राज्य की राजधानी किष्किंधा थी। सुग्रीव और बालि इस सम्राज्य के राजा थे। यहां पंपासरोवर नामक एक स्थान है जिसका रामायण में जिक्र मिलता है। ‘पंपासरोवर’ अथवा ‘पंपासर’ होस्पेट तालुका, मैसूर का एक पौराणिक स्थान है। हंपी के निकट बसे हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायणकालीन किष्किंधा माना जाता है। तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मुख्य मार्ग से कुछ हटकर बाईं ओर पश्चिम दिशा में, पंपासरोवर स्थित है। हनुमानजी की माता का नाम अंजना और पिता का नाम केसरी है, जो वानर जाति के थे। केसरीजी को कपिराज कहा जाता था, क्योंकि वे कपि क्षेत्र के राजा थे। सेंट्रल अमेरिका के मोस्कुइटीए (Mosquitia) में शोधकर्ता चार्ल्स लिन्द्बेर्ग ने एक ऐसी जगह की खोज की है जिसका नाम उन्होंने ला स्यूदाद ब्लैंका (La Ciudad Blanca) दिया है जिसका स्पेनिश में मतलब व्हाइट सिटी (The White City) होता है, जहां के स्थानीय लोग बंदरों की मूर्तियों की पूजा करते हैं। चार्ल्स का मानना है कि यह वही खो चुकी जगह है जहां कभी हनुमान का साम्राज्य हुआ करता था। आदिम जातियों पर शोध पृथ्वी पर आदिम दौर में चार मानव प्रजातियों का अस्तित्व था। तब तक आधुनिक इंसान का पता नहीं चला था। यूरोप में मिले इन अवशेषों को निएंडरथल कहते हैं, जबकि एशिया में रह रहे आदिम इंसानों को डेनिसोवांस कहते थे। एक प्रजाति इंडोनेशिया में मिले आदिम इंसानों की भी है, जिसे हॉबिट कहते हैं। इनके अलावा एक रहस्यमय चौथा समूह भी था, जो यूरोप और एशिया में रहते थे। यह समूह डेनिसोवांस का संकर समूह माना जाता था। अब चीन में नए जीवाश्म मिलने से शोध की दिशा बदल गई है। इस जीवाश्म का पता पहली बार 1976 में शूजियाओ के गुफाओं में मिला। इसमें कुछ खोपड़ियों के टुकड़े और चार लोगों के नौ दांतों के जीवाश्म मिले थे। इसका पूरा विवरण अमेरिकी फिज़िकल एंथ्रापोलॉजी जर्नल में छपा है। यह विचित्र किस्म का जीवाश्म है, जो अब तक मालूम मानव प्रजाति के जीवाश्म से मेल नहीं खाता। मुमकिन है कि ये जीवाश्म किन्हीं दो मालूम प्रजातियों के बीच रूपांतरण काल का हो सकता है। हालांकि इतना साफ है कि ये जीवाश्म किसी आधुनिक मानव प्रजाति के दांतों से मेल नहीं खाते। मगर कुछ गुण निश्चित ही आदिम प्रजाति के इंसानों से मिलते हैं। कुछ अंश निएंडरथल से मेल खाते हैं। इसके डीएनए की जांच से पता चला कि निएंडरथल और आधुनिक मानवों से अलग हैं लेकिन इसमें दोनों की खूबियां शामिल हैं। इस बात का सबूत है कि प्राचीनकाल में दो भिन्न-भिन्न प्रजातियों के मेल से विचित्र किस्म के

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hanuman ji:आधुनिक दुनिया में हनुमान चालीसा का क्या महत्व है?

🕉️हनुमानजी का प्रताप चारों युगों में रहा है और आगे भी रहेगा, क्योंकि वे अजर-अमर हैं। उन्हें अमरत्व का वरदान मिला हुआ है। वे जब तक चाहें शरीर में रहकर इस धरती पर मौजूद रह सकते हैं। सिर्फ इस बात के लिए ही हनुमान चालीसा का आधुनिक दुनिया में महत्व नहीं बढ़ जाता है बल्कि इसलिए कि पूरे ब्रह्मांड में हनुमानजी ही एकतात्र ऐसे देवता हैं जिनकी भक्ति से हर तरह के संकट तुरंत ही हल हो जाते हैं और यह एक चमत्कारिक सत्य है। हनुमान चालीसा को महान कवि तुलसीदास जी ने लिखा था हनुमान चालीसा से पहले भी हनुमानजी पर कई चालीसा लिखी गई और कई स्तुतियां भी लिखी गई थीं लेकिन हनुमान चालीसा का महत्व इसीलिए आधुनिक युग में है क्योंकि यह पढ़ने और समझने बहुत ही सरल है और यह भी कि इस चालीसा में हनुमानजी के संपूर्ण चरित्र का वर्णन हो जाता है जिससे उनकी भक्ति करने में आसानी होती है। Hanuman Chalisa:श्री हनुमान चालीसा हनुमानजी की भक्ति के लिए आप कुछ भी पढ़ें लेकिन हनुमान चालीसा सच में ही अपने आप में एक संपूर्ण रामचरि‍त मानस की तरह है। हनुमान चालीसा लिखने वाले तुलसीदासजी राम के बहुत बड़े भक्त थे। उनके इसी विश्वास के कारण औरेंगजेब ने उन्हे बंदी बना लिया था। कहते हैं कि वहीं बैठकर उन्होंने हनुमान चालीसा लिखा था। अंत में ऐसे कुछ हुआ कि औरंगजेब को उन्हें छोड़ना पड़ा था।  इसमें 40 छंद होते हैं जिसके कारण इसको चालीसा कहा जाता है। यदि कोई भी इसका पाठ करता है तो उसे चालीसा पाठ बोला जाता है। आधुनिक युग की भागमभाग में हनुमान चालीसा ही एक ऐसा पाठ है जिसे तुरंत ही आसानी से पढ़ा जा सकता है, लेकिन उसके लिए हनुमानजी की भक्ति होना जरूरी है। हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा का बड़ा ही महत्व है। इस चालीसा को पढ़ते रहने से व्यक्ति के मन में साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम का संचार होता है। इसके कारण ही वह संसार पर विजय प्राप्त कर लेता है।  इसके एक एक छंद का बहुत महत्व है जैसे- 1.बच्चे का पढ़ाई में मन ना लगे तो उसको इस छंद का पाठ करना चाहिए- बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार। 2.मन में अकारण भय हो तो निम्न पंक्ति पढ़ना चाहिए- भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे। 3.किसी भी कार्य को सिद्ध करना हो तो यह पंक्ति पढ़ें- भीम रूप धरि असुर सँहारे, रामचन्द्र के काज सँवारे। 4.बहुत समय से यदि बीमार हैं तो यह पंक्ति पढ़ें- नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरन्तर हनुमत बीरा। 5.प्राणों पर यदि संकट आ गया हो तो यह पंक्ति पढ़ें- संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा। या संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै 6.यदि आप बुरी संगत में पड़े हैं और यह संत छुट नहीं रही है तो यह पढ़ें- महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी 7.यदि आप किसी भी प्रकार के बंधन में हैं तो- जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बन्दि महा सुख होई। 8.किसी भी प्रकार का डर है तो यह पढ़ें- सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना। 9.आपके मन में किसी भी प्रकार की मनोकामना है तो पढ़ें- और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै।

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Hanuman Chalisa:श्री हनुमान चालीसा

दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।  बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।  चौपाई : जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।। हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै। संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।। विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना।। जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।। आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा। और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।। चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।। अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।  दोहा : पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।। Hanuman ji:आधुनिक दुनिया में हनुमान चालीसा का क्या महत्व है?

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Lalita Panchami 2023 Date: कब है ललिता पंचमी? जानें देवी ललिता की पूजा करने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Lalita Panchami 2023 Kab hai: ललिता पंचमी का व्रत हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पंचमी तिथि को रखा जाता है. इस दिन पूरे मन से व्रत रखने और पूजा करने से देवी ललिता अपने भक्तों को रोग दोष से मुक्त होने का आशीर्वाद देती हैं. शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन जब माता स्कन्दमाता की पूजा अर्चना की जाती है तब माता सती के देवी ललिता स्वरूप की भी पूजा की जाती है. इस पर्व को देश के अलग अलग राज्यों में मनाया जाता है लेकिन इसे गुजरात और महाराष्ट्र में मनाने की परंपरा अधिक है. आइए जानते हैं ललिता पंचमी के दिन पूजा का मुहूर्त क्या होने वाला है और इसका महत्व क्या है.  Lalita Panchami 2023: शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन ललिता पंचमी मनाई जाती है। दस महाविद्याओं में से एक माता ललिता है। उन्हें देवी ललिता के अलावा राजराजेश्वरी, षोडशी, लीलावती, लीलामती, और महा त्रिपुर सुंदरी भी कहते हैं। दस महाविद्याओं में वह सबसे महत्वपूर्ण देवी है और मां पार्वती के तांत्रिक रूप में पूजी जाती है। यहां हम ललिता पंचमी 2023 की तिथि, समय, महत्व और अनुष्ठान के बारे में जानकारी दे रहे है Lalita Panchami 2023 Date | ललिता पंचमी 2023 तिथि हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष अश्विन महीने के दौरान शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। इस साल यह गुरूवार, 19 अक्टूबर 2023 (Lalita Panchami 2023 Date) के दिन पड़ेगा। इस दिन भक्त देवी पार्वती के इस स्वरुप के सम्मान में उपवास करते हैं, जिसे “उपंग ललिता व्रत” भी कहा जाता है। Lalita Panchami 2023 Timings | ललिता पंचमी 2023 समय पंचमी तिथि प्रारंभ: 19 अक्टूबर को प्रातः 01:12 बजेपंचमी तिथि समापन : 20 अक्टूबर को रात्रि 12:32 बजे तक Significance of Lalita Panchami | ललिता पंचमी का महत्व • ‘कालिका पुराण’ सहित अनेक ग्रंथों में ललिता पंचमी के धार्मिक महत्व के बारे में बताया गया है। इन शास्त्रों में देवी ललिता की पूजा बहुत महत्वपूर्ण और विशेष बताया जाता है। • भारत के दक्षिणी हिस्से में क्षेत्र में देवी ललिता को देवी चंडी का ही स्वरुप माना जाता है। इस दिन भक्त श्रद्धापूर्वक देवी का पूजन पूजा करते हैं और उनके लिए दिनभर उपवास रखते है। मान्यता है कि, इस दिन देवी के दर्शन से जीवन के कष्टों और परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है। • किंवदंतियों के अनुसार इस शुभ दिन पर देवी ललिता ने राक्षस भंडासुर का संहार करने के लिए धरती पर प्रकट हुई थीं। इसलिए ललिता पंचमी (Significance of Lalita Panchami) को देवी ललिता की ‘जयंती’ के रूप में मनाया जाता है। देवी ललिता देवी दुर्गा का अवतार हैं और ‘पंच महाभूतों’ (पृथ्वी, वायु, अग्नि, जल और आकाश) से जुड़ी है। Benefits of Lalita Panchami Fast | ललिता पंचमी पर व्रत के लाभ ललिता पंचमी 2023 के दिन ‘उपंग ललिता व्रत’ रखना अत्याधिक फलदायक (Lalita Panchami Fast benefits) माना जाता है। मान्यता है कि विधि विधान से ललिता पंचमी का व्रत करने से देवी ललिता के साथ ही दसों महाविद्याओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पुराणों के अनुसार यह व्रत भक्तों के जीवन में सुख, धन, समृद्धि और शांति को आकर्षित करता है। माता ललिता को सभी सुखों की दाता माना जाता है। इसलिए सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए ललिता पंचमी 2023 के अवसर पर उपंग ललिता व्रत अवश्य करना चाहिए। सच्चे मन से देवी की पूजा करने से जीवन में आने वाली सभी परेशानियों और दुःखों से छुटकारा मिलता है। ललिता पंचमी की पूजा विधि (Lalita Panchami Puja Vidhi) माता ललिता को समर्पित इस व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान सम्पन्न कर लेना चाहिए और फिर मंदिर जाकर ललिता पंचमी व्रत के लिए संकल्प करना चाहिए. सबसे पहले आपको भगवान श्री गणेश, भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए. इसके बाद माता अशोक सुन्दरी की पूजा करनी चाहिए. सुख-समृद्धि का आशीर्वाद पाने के लिए माता ललिता की प्रतिमा के आगे शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए और फिर माता ललिता सहस्रावली का पाठ करना चाहिए. पूजा के समय ध्यान रखना चाहिए कि मुख उत्तर की ओर न रहे.

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जीवन के हर कष्ट को दूर करेंगे हनुमान जी के ये powerful मंत्र

बचपन में सूर्य को फल समझकर खा जाने वाले, बड़े-बड़े पर्वत उठाने वाले और स्वयं प्रभु का कार्य संवारने वाले महाबली हनुमान की पूजा के लिए मंगलवार का दिन उत्तम माना जाता है। मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा अर्चना करने से सभी विघ्न बाधाओं का अंत होता है। साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल दोष है तो उसे हनुमान जी की आराधना जरूर करनी चाहिए। इससे मंगल दोष दूर होता है। प्रभु श्री राम के परम भक्त भगवान हनुमान को अमरता का वरदान प्राप्त है। कहा जाता है कि हनुमान जी ऐसे देवता हैं जो हमारे बीच धरती पर मौजूद हैं। आठों सिद्धियों और नौ निधियों के दाता की कृपा पाने के लिए मंगलवार के दिन पूजा के साथ ही हनुमान जी के कुछ चमत्कारी मंत्रों का भी जाप करना चाहिए। इसके अलावा संकट मोचन हनुमान के कुछ चमत्कारी मंत्र हैं, जिनका जाप करने से भय, संकट और शत्रुओं का नाश हो जाता है। तो आइए जानते हैं हनुमान जी के प्रभावशाली मंत्रों के बारे में… ‘ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।’रोगों से ग्रस्त व्यक्ति अगर बीमारियों से जल्द छुटकारा पाना चाहता है तो उसे इस मंत्र का प्रयोग करना चाहिए। ये मंत्र सारी बीमारियों को व्यक्ति से दूर रखता है। ‘ॐ हं पवननन्दनाय स्वाहा।’संकटमोचन का जल्द से जल्द आशीर्वाद पाने की चाह है तो ये मंत्र सबसे ज्यादा लाभदायक है। सच्चे मन से इस मंत्र का जाप करने से हनुमान जी की विशेष कृपा बनी रहती है। Hanuman Mantra: प्रत्येक मंगलवार को जपें हनुमान जी के ये मंत्र, जीवन की सभी परेशानियां होंगी दूर ओम नमो भगवते हनुमते नम: यदि घर-परिवार में हमेशा क्लेश होता है, परिवार के लोगों की आपस में बनती नहीं है तो ऐसे में आपको हनुमान जी के इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मान्यता है कि इस मंत्र के प्रभाव से लोगों के जीवन में सुख एवं शांति आ सकती है।  ओम हं हनुमते नम: हनुमान जी का यह मंत्र बहुत चमत्कारी माना जाता है। इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को कोर्ट से जुड़े मामलों में लाभ मिलता है। कहा जाता है कि इस मंत्र के प्रभाव से फैसला आपके पक्ष में आ सकता है या फिर आपको कोर्ट की तरफ से कोई राहत मिल सकता है। मनोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥ मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से बजरगंबली आपसे प्रसन्न होते हैं और वे अपने भक्तों को सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। साथ ही अपने भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं।  ओम हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट राम भक्त हनुमान के इस मंत्र का जाप करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होता है। साथ ही उनसे उत्पन्न संकटों को दूर करने के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है।  ओम नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा। महाबली हनुमान के इस मंत्र का जाप करने से शत्रु परास्त होते हैं। साथ ही रोगों को दूर करने और संकटों से रक्षा के लिए भी इस मंत्र का जाप किया जाता है। 

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आजीवन ब्रह्मचारी रहे Hanuman Ji का था बेटा, पसीने की बूंद से हुआ था पैदा

भगवान हनुमान ने आजीवन विवाह नहीं किया था, लेकिन उनका एक बेटा था मकरध्‍वज. पुत्र मकरध्‍वज के जन्‍म के पीछे एक रोचक कथा है. हनुमान जी (Hanuman Ji) ब्रह्मचारी थे, ये बात सभी जानते हैं लेकिन ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि आजीवन अविवाहित (Unmarried) रहने के बाद भी उनका एक पुत्र पैदा हुआ था. श्रीराम के अनन्य भक्त, अनंत बलशाली, समुद्र को एक छलांग मे लांघ जाने वाले, सोने की लंका जलाने वाले बजरंगबली को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं. हालांकि उनके पुत्र के जन्‍म (Birth Story) की कथा कम ही लोग जानते हैं. आइए जानते हैं हनुमान जी के पुत्र का जन्‍म कैसे हुआ था.  अहिरावण ने रखा था हनुमान का रूप  जब रावण भगवान राम (Lord Ram) से युद्ध में हारने लगा तो उसने पाताल लोक के स्वामी अहिरावण को श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण करने के लिए मजबूर किया. अहिरावण अत्यंत मायावी राक्षस राजा था, उसने हनुमान का रूप धारण करके श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण किया और उन्‍हें पाताल लोक ले गए. जब इस बात का पता चला तो भगवान राम के शिविर में हाहाकार मच गया और उनकी खोज होने लगी. बजरंगबली श्रीराम और लक्ष्मण को ढूंढते हुए पताल में जाने लगे. पाताल लोक के सात द्वार थे और हर द्वार पर एक पहरेदार था. सभी पहरेदारों को हनुमान जी ने परास्त कर दिया, लेकिन अंतिम द्वार पर उन्हीं के समान बलशाली एक वानर पहरा दे रहा था. पाताल लोक में हनुमान जी को मिला अपना पुत्र  दिखने में एकदम अपने जैसे वानर को देखकर हनुमान जी को आश्चर्य हुआ. उन्‍होंने जब उस वानर से परिचय पूछा, तो उसने अपना नाम मकरध्वज (Makardhwaj) बताया और अपने पिता का नाम हनुमान बताया. मकरध्वज के मुंह से पिता के रूप में अपना नाम सुनकर हनुमान अत्यंत क्रोधित हो गए और बोले कि यह असंभव है, क्योंकि मैं आजीवन ब्रह्मचारी रहा हूं. फिर मकरध्वज ने बताया कि जब हनुमान जी लंका जला कर समुद्र में आग बुझाने को कूदे थे, तब उनके शरीर का तापमान बहुत ज्‍यादा था. जब वह सागर के ऊपर थे, तब उनके शरीर के पसीने की एक बूंद सागर में गिर गई थी, जिसे एक मकर ने पी लिया था, और उसी पसीने की बूंद से वह गर्भावस्था को प्राप्त हो गई. उसने ही मकरध्‍वज को जन्‍म दिया था. पूर्व जन्म में अप्सरा थी मछली ऐसा माना जाता है कि वह मछली पूर्व जन्म में कोई थी लेकिन श्राप के कारण वह मछली बन गई थी। बाद में उसी मछली को अहिरावण उसके मछुआरों ने पकड़ लिया और मार दिया था। आपको बता दें कि अहिरावण एक मायावी राक्षस राजा था। कुछ समय बाद वह अप्सरा श्राप से मुक्त हो गई था। यह सब सुनकर हनुमान जी ने मकरध्वज को अपने गले से लगा लिया। लेकिन अपने पिता के रूप में हनुमान जी को पहचानने के बाद भी मकरध्वज ने हनुमान जी को अंदर नहीं जाने दिया था। इससे हनुमान जी प्रसन्न भी हुए थे। बाद में हनुमान जी और मकरध्वज के बीच युद्ध भी हुआ और अंत में हनुमान जी ने अपनी पूंछ से उसे बांधकर दरवाजे से हटा दिया था और फिर श्री राम और लक्ष्मण को बंधन से मुक्त कराया था। बाद में भगवान श्री राम ने ही मकरध्वज को ही पाताल का नया राजा घोषित किया था।  

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Hanuman Jayanti : यहां हुआ था हनुमान जी का जन्‍म, आज भी मौजूद हैं ये स्‍थान

भगवान राम और हनुमानजी के जीवन पर रचे गए महाकाव्‍य रामायण में हनुमानजी को भगवान राम का सबसे बड़ा भक्‍त बताया गया है। पुराणों में बजरंगबली को रुद्रावतार यानी भोले बाबा का 11वां अवतार बताया गया है। हनुमान जयंती को उनके जन्‍मदिवस के रूप में मनाया जाता है। हनुमान जयंती साल में दो बार मनाई जाती है। पहली जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है और दूसरी कार्तिक मास में दीपावली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी के दिन भी हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस अवसर पर आपको बताते हैं कि बजरंगबली का जन्‍म कहां हुआ था और अभी कहां स्थित हैं ये स्‍थान… ऐसे कहलाए अंजनि पुत्र हनुमानजी की माता का नाम अंजना था। जो अपने पूर्व जन्म में एक अप्सरा थीं। अंजना ब्रह्मा लोक की एक अप्‍सरा थीं, उन्हें एक ऋषि ने बंदरिया बनने का शाप दिया था। शाप के अनुसार जिस दिन अंजना को किसी से प्रेम हो जाएगा, उसी क्षण वह बंदरिया बन जाएगी और उनका पुत्र भगवान शिव का रूप होगा। अंजना को अपनी युवा अवस्था में केसरी से प्रेम हो गया और दोनों का विवाह हो गा। ऐसे हुआ हनुमान जी का जन्‍म उड़ते-उड़ते वह पक्षी देवी अंजना के आश्रम चला गया. यहां माता अंजना तपस्या कर रही थी. उस दौरान पक्षी के मुंह से खीर माता अंजना के हाथ में गिर गई. देवी ने इसे भोलेनाथ का प्रसाद मानकर ग्रहण कर लिया. इस प्रसाद के प्रभाव और ईश्वर की कृपा से माता अंजना ने शिव के अवतार बाल हनुमान को जन्म दिया. उस दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि थी. जन्मस्थान का पहला मत बजरंग बली के पिता केसरी कपि क्षेत्र के राजा थे। कपिस्थल कुरु साम्राज्य का एक प्रमुख भाग था। हरियाणा का कैथल पहले करनाल जिले का भाग था। यह कैथल ही पहले कपिस्थल था। कुछ शास्त्रों में ऐसा वर्णन आता है कि कैथल ही हनुमानजी का जन्म स्थान है। यहां हनुमानजी का बहुत बड़ा मंदिर भी स्थित है। जन्मस्थान का दूसरा मत गुजरात स्थित डांग जिला रामायण काल में दंडकारण्य प्रदेश के रूप में पहचाना जाता था। मान्यता के अनुसार यहीं भगवान राम व लक्ष्मण को शबरी ने बेर खिलाए थे। आज यह स्थल शबरी धाम के नाम से जाना जाता है। अंजनी पर्वत पर स्थित अंजनी गुफा में ही हनुमानजी का भी जन्म हुआ था। कहा जाता है कि अंजना माता ने अंजनी पर्वत पर ही कठोर तपस्या की थी और इसी तपस्या के फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न यानी हनुमान जी की प्राप्ति हुई थी। माता अंजना ने अंजनी गुफा में ही हनुमानजी को जन्म दिया था। जन्मस्थान का तीसरा मत धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी का जन्म झारखंड राज्य के गुमला जिला के आंजन गांव की एक गुफा में हुआ था। आंजन गांव में ही माता अंजनी निवास करती थीं और इसी गांव की एक पहाड़ी पर स्थित गुफा में रामभक्त हनुमान का जन्म हुआ था। इसी विश्वास के साथ यहां की जनजाति भी बड़ी संख्या में भक्ति और श्रद्धा के साथ माता अंजना और भगवान महावीर की पूजा करते हैं। जन्मस्थान का चौथा मत पंपासरोवर अथवा पंपासर होस्पेट तालुका, मैसूर का एक पौराणिक स्थान है। हंपी के निकट बसे हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायणकालीन किष्किंधा माना जाता है। तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मुख्य मार्ग से कुछ हटकर बाईं ओर पश्चिम दिशा में, पंपासरोवर स्थित है। यहां स्थित एक पर्वत में एक गुफा भी है जिसे रामभक्तनी शबरी के नाम पर शबरी गुफा कहते हैं। इसी के निकट शबरी के गुरु मतंग ऋषि का आश्रम था और कहते हैं कि इसी आश्रम में बजरंगबली जन्‍मे थे।

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Dream:सपने में जीवनसाथी से रिश्ता टूटना देता है ये संकेत

अगर आपको सपने में कभी अपने जीवनसाथी से रिश्ता टूटता हुआ  दिखे तो ये अलग बातों के संकेत देता है। आइए जानें ऐसे सपने से जुड़े मतलब के बारे में और इससे मिलने वाले सकेतों के बारे में।  हर सपने का एक आध्यात्मिक अर्थ भी होता है और यह सामान्य से अलग हो सकता है। कई बार सपने में कुछ ऐसी चीजें दिखती हैं जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता है और कुछ सपने आपके भूत, वर्तमान और भविष्य का आइना दिखाते हैं। ऐसे ही एक सपना है जीवनसाथी से रिश्ता टूटने का सपना। ऐसा सपना आपके जीवन में कई संकेत देता है। दरअसल, ये इस बात का संकेत नहीं है कि आपका वास्तव में रिश्ता टूट रहा है बल्कि ये अन्य पहलुओं के बारे में भी बताता है। अगर आपको बार-बार ऐसे सपने दिखते हैं तो ये आपको बताते हैं कि आपको अपने रिश्ते के बारे में ज्यादा सोचने और उसे समय देने की आवश्यकता है। आइए ज्योतिषाचार्य डॉ आरती दहिया जी से जानें ऐसे सपने से मिलने वाले संकेतों के बारे में जिससे आपका पार्टनर से रिश्ता टूटता हुआ दिखाई देता है। असुरक्षा की भावना कई बार आप वही सोने में देखते हैं जो वास्तव में सोचते हैं। यदि आपको ऐसा सपना दिखे जिसमें जीवनसाथी से रिश्ता टूटने जैसी बातें दिखाई दें तो ये आपकी असुरक्षा की भावना को दिखाता है। हो सकता है कि असल जिंदगी में आपको इस बात का डर बना रहता हो कि आपके रिश्ते में कहीं दरार न पड़ जाए। ऐसा सपना आने का मतलब है कि आपको पार्टनर के साथ ज्यादा समय बिताने की जरूरत है जिससे आप उन्हें अच्छी तरह से समझ सकें। बेवजह जीवनसाथी पर शक करना कई बार आपका अपने पार्टनर पर शक करना ऐसे सपने की वजह हो सकता है जिसमें आपका पार्टनर के साथ ब्रेकअप हो रहा हो। हो सकता है कि आपको असल जिंदगी में पार्टनर पर भरोसा नहीं है और आपको ऐसा लगता है कि वो आपको कभी भी धोखा दे सकता है। हालांकि ऐसा वास्तविक जीवन में भी हो ये जरूरी नहीं है। इसलिए ऐसे सपने से घबराने के बजाय पार्टनर पर भरोसा करें। कोई काम बिगड़ सकता है अगर सपने में आपको जीवनसाथी से रिश्ता टूटता हुआ दिखाई देता है तो समझें कि भविष्य में कोई बना हुआ काम बिगड़ सकता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि इससे वास्तव में आपका रिश्ता टूटने वाला है बल्कि कोई और काम भी बिगड़ सकता है। आपको हर एक काम सोच-समझकर करने की जरूरत है और ध्यान रखें कि कोई भी बड़ा निर्णय सोच समझकर ही लें। पारिवारिक कलह हो सकती है अगर आपको कभी ऐसा सपना दिखे कि आपका पार्टनर से ब्रेकअप हो गया है तो ये वास्तव में पारिवारिक कलह का संकेत भी हो सकता है। आपको सभी सामंजस्य बनाए रखने की जरूरत है और झगड़ों से बचने की भी आवश्यकता है। पार्टनर से नाखुश होना ऐसा हो सकता है कि वास्तविक जीवन में भी आप पार्टनर से खुश न हों, इसलिए आपको ऐसे सपने दिखाई देते हों। सपने में रिश्ता टूटना इस बात का संकेत है कि आपको अपने रिश्ते को ज्यादा समय देने की जरूरत है। एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें और बेवजह मनमुटाव से बचें। नई शुरुआत ब्रेकअप का सपना देखना यह दर्शाता है कि आप अपने असल जीवन में अधिक स्वतंत्र होने की इच्छा रखती हैं। यह इस बात का भी संकेत हो सकता है कि आपके साथी ने आप पर कई सीमाएं लगाई हैं, जिनसे आप मुक्त होना चाहती हैं। साथ ही, हो सकता है कि आप अपने साथी पर बहुत अधिक निर्भर हो गए हों और अब आप सीमाओं से मुक्त जीवन जीने की इच्छा रखते हों। रिश्ते में अनिश्चितता आपके प्रेम या वैवाहिक जीवन में आपके लिए भविष्य क्या है, इसका स्पष्ट दृष्टिकोण न होने पर भी आपको ऐसे सपने दिखाई देते हैं। ऐसा सपना दिखने पर आपको यह सुनिश्चित करने के लिए बैठकर अपने रिश्ते का फिर से विश्लेषण करने की आवश्यकता है कि आप रिश्ते से संतुष्ट क्यों नहीं हैं। इस सपने का यह भी मतलब हो सकता है कि आप अपने पार्टनर के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। अगर आपको भी रिश्ता टूटने जैसा कोई सपना दिखाई देता है तो ये आपके जीवन में मिले-जुले संकेत देता है। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से। अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर भेजें। सपने में शादी का टूटना कैसा होता है? दोस्तों यदि आपको कुछ ऐसा सपना आता है जहां सपने में शादी टूट जाती है या शादी के मंडप में दूल्हा या दुल्हन नहीं आते इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में आपके हाथों से शुभ कार्य होने वाला था वह सफल नहीं होता | आपके हाथों शुभ कार्य होते होते रह जाता है जिसके चलते आप पर मानसिक तनाव बढ़ सकता है और आप क्रोधित भी हो सकते हैं | सपने में शादी का टुकड़ा जो भी दर्शाता है कि आपका वैवाहिक जीवन कुछ अच्छा नहीं चल रहा और आप में मतभेद होने की शंका है | यदि आप सिंगल हो तो हो सकता है कि आने वाले लंबे समय तक आपको अपना जीवन साथी नहीं मिलेगा और अपना मनपसंद जीवनसाथी पाने के लिए आपको और भी वेट करना पड़ेगा | सपने में शादी का टूटना का क्या मतलब होता है? दोस्तों यदि आपको कुछ ऐसा सपना आता है जहां सपने में शादी टूट जाती है या शादी के मंडप में दूल्हा या दुल्हन नहीं आते इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में आपके हाथों से शुभ कार्य होने वाला था वह सफल नहीं होता | आपके हाथों शुभ कार्य होते होते रह जाता है जिसके चलते आप पर मानसिक तनाव बढ़ सकता है और आप क्रोधित भी हो सकते हैं | सपने में शादी का टुकड़ा जो भी दर्शाता है कि आपका वैवाहिक जीवन कुछ अच्छा नहीं चल रहा और आप में मतभेद होने की शंका है | यदि आप सिंगल हो तो हो सकता है कि आने वाले लंबे समय तक आपको अपना

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Hanuman:हनुमानजी भगवान राम के परम भक्त कैसे बने?

उत्तर देने या ईश्वरीय सत्य को जानने के लिए मुझे थोड़ा शोध करना पड़ा। इस प्रश्न को पोस्ट करने के लिए धन्यवाद, इसने मुझे अज्ञात दिव्यता में गहराई से उतरने का अवसर दिया। श्री हनुमान: जन्म से वे वानर (बंदर) जाति के थे – एक पशु जनजाति। वह श्री राम, नरोत्तम या मनुष्यों में सर्वश्रेष्ठ के साथ थे। श्रीहनुमान वास्तव में भगवान हैं। संस्कृत में एक कहावत है, जो यह घोषणा करती है कि यदि कोई श्री हनुमान की पूजा करता है, तो सभी देवताओं की पूजा हो जाती है (अंजनेयः पूजितश्चेत् पूजिता ससर्व देवताः)। श्री हनुमान को अप्रतिम बुद्धि भी प्रदान की गई है। उन्हें बुद्धिमान लोगों में सर्वश्रेष्ठ और आध्यात्मिक विकासकर्ताओं में प्रथम बताया गया है। (बुद्धि मातम वरिष्ठ, ज्ञानेन अग्रगण्य) श्री राम ने स्वयं पहली मुलाकात में ही श्री हनुमान की योग्यता की बौद्धिक प्रतिभा को पहचान लिया था। भगवान हनुमान कौन हैं? एक बार “गर्दबा निस्वाना” नाम का एक राक्षस, जो भगवान शिव का परम भक्त था, ऋषियों और उनकी पवित्र गतिविधियों को परेशान कर रहा था, उसे भगवान शिव से वरदान मिला था कि कोई भी देवता, दानव या यक्ष उसे नहीं मार पाएगा। चूँकि दुष्कर्मों ने स्वर्ग और अन्य ग्रहों को परेशान करना जारी रखा, भगवान शिव चिंतित थे और राक्षस को खत्म करने के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंचे। भगवान शिव की इस घोषणा के बाद कि यदि राक्षस विष्णु द्वारा मारा जाता है, तो वह एक सेवक के रूप में उनकी सेवा करेंगे, अन्यथा विष्णु अपने निवास स्थान कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के साथ रहेंगे। अपना दांव हारने के बाद, भगवान शिव भगवान विष्णु की सेवा करने के लिए तैयार हो गए। भगवान विष्णु ने भगवान शिव को यह कहते हुए मना कर दिया कि उनका दांव ब्रह्मांड के कल्याण के लिए है। भगवान विष्णु ने कहा, “जब मैं त्रेता युग में श्री राम के रूप में अवतार लूंगा तो आप कपि वीर (वानर नायक) के रूप में अवतार लेकर मेरी सेवा करेंगे।” इस प्रकार भगवान शिव ने भगवान विष्णु की सेवा करने के अपने वचन को पूरा करने के लिए, श्री राम की सेवा करने के लिए श्री हनुमान के रूप में अवतार लिया अब मैं भगवान हनुमान के जन्म पर वापस नहीं जाऊंगा क्योंकि हममें से ज्यादातर लोग उनके माता-पिता के बारे में जानते होंगे। श्री हनुमान का जन्म कहाँ हुआ था? यह तिरुमाला में था. पुराण इस मत का समर्थन करते हैं। ब्रह्माण्ड पुराण में कहा गया है कि चूंकि अंजना ने पहाड़ी पर कड़ी तपस्या के माध्यम से एक बच्चे को जन्म दिया था, इसलिए पहाड़ी को “अंजनाद्रि” के नाम से जाना जाने का आशीर्वाद मिला। अंजनाद्रि वास्तव में उन सात पहाड़ियों में से एक है जो तिरुमाला पहाड़ियों को बनाती हैं। किष्किंधा कांड: वाल्मिकी रामायण । अपनी शिक्षा पूरी होने पर, हनुमान ने अपनी माँ से प्रार्थना की कि वह उन्हें भविष्य की कार्ययोजना के बारे में सलाह दें। वह अपने बेटे के अच्छे इरादों से प्रसन्न थी। उसने कहाः “बेटा! मैं अहल्या और गौतम ऋषि की पुत्री हूं। इन्द्र और सूर्य द्वारा ठगी गयी मेरी माता के दो पुत्र हुए। मेरे पिता, जो सच्चाई जानते थे, उन्होंने बच्चों को नदी में फेंक दिया और उन्हें बंदर के आकार का होने का श्राप दिया। शापित जोड़ी बाली और सुग्रीव हैं। बाली का जन्म इंद्र के कारण और सुग्रीव का जन्म सूर्य के कारण हुआ। दोनों मेरे भाई हैं. सुग्रीव धर्मात्मा है. बाली ने सुग्रीव को गलत समझा और सुग्रीव की पत्नी को छीन लिया। बाली दुष्ट मार्ग पर चल रहा है और वह सुग्रीव को मारने का इरादा रखता है। तुम सुग्रीव के पास जाओ और उसके मंत्री तथा रक्षक बनो। “मेरा बच्चा! अपने कर्तव्य की पुकार में, आप अपने भगवान से मिलेंगे। आप उसे तुरंत पहचान लेंगे, क्योंकि उसकी दृष्टि ही आपमें एक अज्ञात भावना उत्पन्न कर देगी। आप उनकी सेवा करें और अपने जीवन का उद्देश्य पूरा करें।” अंजना की सलाह ने अंजनेय को अपने मिशन, अपने भगवान के मिशन और अपने शिक्षक सूर्य के मिशन पर स्थापित किया। चूँकि सुग्रीव सूर्य की संतान थे, इसलिए सुग्रीव की सेवा करना उनके गुरु की सेवा करने के समान था। अपनी माँ की सलाह के अनुसार, अंजनेय सुग्रीव के मंत्री बने। रावण ने सीता का हरण किया। श्री राम और लक्ष्मण उनकी खोज में निकल पड़े। उन्होंने जटायु को देखा, जो मरने वाला था। जटायु ने उन्हें रावण के दुष्कर्म के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि रावण ने दक्षिण की ओर यात्रा की। तदनुसार श्री राम और लक्ष्मण ने दक्षिण की यात्रा की और पंपा नदी के तट पर पहुँचे। यह ऐसा था जैसे सुग्रीव ने उन्हें देखा था। उसने सोचा: “क्या वे बाली द्वारा भेजे गए थे?” वह परेशान हो गया। उन्होंने अपनी चिंता हनुमान से साझा की। हनुमान ने सुग्रीव को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा: “वे खतरनाक प्रतीत नहीं होते हैं। इसके अलावा वली या उसके अनुयायी हमारे यहाँ नहीं आ सकते। आप वानर जाति के विशिष्ट ढुलमुल रवैये से पीड़ित हैं।” सुग्रीव बेचैन थे. वह चाहते थे कि हनुमान एक भिक्षुक के भेष में उन दो अजनबियों के पास जाएँ। अजनबी श्री राम और लक्ष्मण गृहस्थ (विवाहित पुरुष) थे। हनुमान भिक्षुक के भेष में थे। स्थापित प्रथा के अनुसार, विवाहित पुरुषों को भिक्षुक का सम्मान करना चाहिए, लेकिन अन्यथा बुद्धिमान का नहीं। परंपरा के विपरीत, भिक्षुक के भेष में हनुमान ने हाथ जोड़कर श्री राम और लक्ष्मण को सम्मान दिया। श्री राम के दर्शन मात्र से ही हनुमान अत्यंत प्रसन्न हो गये। उन्हें अजीब सी भक्ति भावना का अनुभव हो रहा था. उसे तुरंत अपनी माँ की बातें याद आ गईं। हनुमान ने श्री राम में अपने भगवान को पहचान लिया । उन्होंने बोलना प्रारम्भ कियाः “महापुरुषों! आप साधुओं की तरह कपड़े पहने हुए हैं, लेकिन तलवार, धनुष और तीर पहनते हैं। आपके कंधे बताते हैं कि वे शाही प्रतीक चिन्ह के पात्र हैं। कृपया मुझे बताएं कि आप कौन हैं? मैं वायु देवता, वायु देवता के आशीर्वाद से केसरी और उनकी पत्नी अंजना नाम के एक वानर वंश में पैदा हुआ हूं। मेरा नाम हनुमंत है. मैं सुग्रीव का अनुयायी हूं।” अपने बारे में सब कुछ बताने के बाद, हनुमान कहते हैं: “मैंने इतना कुछ कहा है और आप जवाब नहीं देते हैं”। हनुमान की बातें श्रीराम को आश्चर्यचकित कर देती हैं। वह लक्ष्मण के साथ अपना आश्चर्य साझा करते हुए कहते हैं: “लक्ष्मण, केवल चार वेदों में पारंगत व्यक्ति ही इस तरह की बात कर सकता है। यदि वह नौ प्रकार के व्याकरणों का विद्वान न

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Hanuman :श्री राम भक्त हनुमान जी के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र जो सभी प्रकार के कष्ट का निवारण

मंत्र श्री हनुमान मूल मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥द्वादशाक्षर हनुमान मंत्र: हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्.फल: से इस मंत्र के बारे शास्त्रो में वर्णित हैं की यह मंत्र स्वतंत शिवजी ने श्रीकृष्ण को बताया और श्रीकृष्ण नें यह मंत्र अर्जुन को सिद्ध करवाया था जिसे अर्जुन ने चर-अचर जगत् को जीत लिया था.प्रेत बाधा दूर करे चमत्कारी हनुमान मंत्र:हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार हनुमानजी का नाम लेने से भूत-प्रेत आदि सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं. यदि आप भी ऐसी ही किसी बाधा से पीडि़त हैं तो नीचे लिखे हनुमान मंत्र से इस समस्या का हल संभव है. यदि इस मंत्र का जप विधि-विधान से किया जाए तो कुछ ही समय में ऊपरी बाधा का निवारण हो सकता है. यह हनुमान मंत्र इस प्रकार हैमंत्र :हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:। अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।।जप विधि : स्वच्छ अवस्था में यानी स्नान आदि करने के बाद हनुमानजी की पूजा करें और उन्हें सिंदूर तथा गुड़-चना चढ़ाएं. इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश का आसन ग्रहण करें. तत्पश्चात लाल चंदन की माला से ऊपर लिखे मंत्र का जप करें. इस मंत्र का प्रभाव आपको कुछ ही समय में दिखने लगेगा.मुसीबतों को दूर करे हनुमान मंत्रहिन्दू धर्म शास्त्रों श्री हनुमान की इसी शक्ति और महिमा का गान करते हुए उनको शक्ति स्वरूपा माता सीता के शोक का नाश करने वाले देवता बताकर जानकी शोक नाशनम् कहकर पुकारा गया है. संकेत है कि श्री हनुमान की उपासना जीवन से हर शोक दूर रखती है. चूंकि श्री हनुमान मंगलमूर्ति भगवान शिव के अवतार भी हैं. यही कारण है कि संकट और शोक नाश के लिए श्री हनुमान की उपासना परंपराओं में शिव भक्ति की तरह आसान उपाय भी बताए गए हैं. इनको श्री हनुमान की उपासना में आचरण व विचारों की पवित्रता के साथ अपनाना निर्भय और बेदाग जीवन का मंत्र भी माना गया है. नीचे बताई पूजा सामग्री और विशेष छोटे-पर असरदार हनुमान मंत्र से श्री हनुमान की उपासना आज करना न चूकें !मंत्र : ॐ हं हनुमंताय नम:।जप विधि : स्नान के बाद श्री हनुमान मंदिर में जाकर श्री हनुमान की पूजा में केसर चंदन, अक्षत, लाल गुलाब के साथ अलावा विशेष रूप से चमेली का फूल आसान, किंतु अचूक हनुमान मंत्र के साथ अर्पित करें.इस मंत्र की 108 बार रुद्राक्ष की माला से जप भी संकटनाश में बहुत असरदार माने गए हैं. इसके साथ ही चमेली के तेल के साथ श्री हनुमान को सिंदूर चढ़ावें या चोला चढ़ाना भी शोक-पीड़ा मुक्ति की कामना के लिए मंगलकारी सिद्ध होगा. श्री हनुमान को यथाशक्ति भोग लगाकर गुग्गल धूप व गाय के घी के दीप से आरती करें व अक्षय सुख की कामना करें.संकटों को दूर करे ये हनुमान मंत्र!जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. कभी कोई विरोधी परेशान करता है तो कभी घर के किसी सदस्य को बीमार घेर लेती है. इनके अलावा भी जीवन में परेशानियों का आना-जाना लगा ही रहता है. ऐसे में हनुमानजी की आराधना करना ही सबसे श्रेष्ठ है. यदि आप चाहते हैं कि आपके जीवन में कोई संकट न आए तो नीचे लिखे मंत्र का जप हनुमान जयंती व प्रति मंगलवार को कर सकते हैं.मंत्र : ॐनमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा जप विधि := सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद अपने माता-पिता, गुरु, इष्ट व कुल देवता को नमन कर कुश का आसन ग्रहण करें. पारद हनुमान प्रतिमा के सामने इस मंत्र का जप करेंगे तो विशेष फल मिलता है. जप के लिए लाल हकीक की माला का प्रयोग करें.मनोकामना पूरी करे ये हनुमान मंत्र !हर सुबह बोलें यह हनुमान मंत्र !सांसारिक जीवन की आपाधापी में हर इंसान जीवन से जुड़े हर काम में अच्छे नतीजे ही चाहता है. लेकिन जीवन ही किसी प्रकार अच्छा बना लें? इस बारे में बिरले लोग ही विचार कर पाते हैं. अगर जीवन को ही अच्छे आचरण, अनुशासन और संकल्पों से जोड़ लिया जाए तो फिर किसी भी कार्य की सफलता में भय, संशय पैदा नहीं होता. हनुमान भक्ति जीवन में अच्छे आचरण को अपनाने के लिये सर्वश्रेष्ठ मानी गई है. शास्त्रों में हनुमान का स्मरण किसी भी वक्त अच्छे कामों व सोच की प्रेरणा ही देता है. इसलिए शास्त्रों में बताया गया विशेष हनुमान मंत्र हर रोज सुबह खासतौर पर हनुमान जयंती यानी चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर स्मरण किया जाए तो लक्ष्य की सफलता को लेकर पैदा होने वाले भय-संशय व बाधाएं खत्म हो जाते हैं. साथ ही अशुभ बातों से हमेशा रक्षा होती है. जानिए हैं यह मंत्र –जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. कभी कोई विरोधी परेशान करता है तो कभी घर के किसी सदस्य को बीमार घेर लेती है. इनके अलावा भी जीवन में परेशानियों का आना-जाना लगा ही रहता है. ऐसे में हनुमानजी की आराधना करना ही सबसे श्रेष्ठ है. यदि आप चाहते हैं कि आपके जीवन में कोई संकट न आए तो नीचे लिखे मंत्र का जप हनुमान जयंती या प्रतियेक मंगलवार को भी इस मंत्र का जप कर सकते हैं. मंत्र :  ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहाजप विधि:  सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद अपने माता-पिता, गुरु, इष्ट व कुल देवता को नमन कर कुश का आसन ग्रहण करें. पारद हनुमान प्रतिमा के सामने इस मंत्र का जप करेंगे तो विशेष फल मिलता है. जप के लिए लाल हकीक की माला का प्रयोग करें.भय का नाश करता है यह हनुमान मंत्र !क्या आप किसी अज्ञात भय से ग्रसित हैं या आपको हर समय किसी का डर सताता रहता है. कुछ लोगों को इस प्रकार की समस्या रहती है. उन्हें हर समय किसी न किसी बात का डर सताता रहता है. जब यह भय अधिक बढ़ जाता है तो एक रोग का रूप ले लेता है. यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो नीचे लिखे मंत्र का विधि-विधान से जप करने से इसका निदान संभव है.मंत्र : अंजनीर्ग सम्भूत कपीन्द्रसचिवोत्तम. राम प्रिय नमस्तुभ्यं हनुमते रक्ष सर्वदा।। विधि :  सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें उस के बाद अज्ञात भय से रक्षा के लिए इस

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