गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra)

Ganesha Shubh Labh Mantra:गणेश शुभ लाभ मंत्र: धन और समृद्धि के लिए Ganesha Shubh Labh Mantra:गणेश जी को सभी कार्यों का आरंभ करने वाले देवता माना जाता है। व्यापार, उद्योग और धन से जुड़े मामलों में उनकी विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए कई मंत्र हैं। इन मंत्रों का जाप करने से धन लाभ, व्यापार में वृद्धि और समृद्धि प्राप्त होती है। कुछ प्रमुख गणेश शुभ लाभ मंत्र: Ganesha Shubh Labh Mantra:मंत्र जाप करने की विधि वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok) ध्यान रखें: अन्य उपाय: विशेष नोट: गणेश शुभ लाभ समृद्धि के लिए प्रार्थना है जो भगवान गणेश के बीज यानी बीज मंत्र पर आधारित है। गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra) ॐ श्रीम गम सौभाग्य गणपतयेवर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः ॥ हिन्दी रूपांतरण:गम – भगवान गणेश के लिए बीज यानी बीज मंत्रसौभाग्य -सौभाग्यगणपतये – विघ्नहर्तावर्वर्द -ढेर सारी शुभकामनाएं और शुभकामनाएंसर्वजन्म में – हमारे वर्तमान और भविष्य के जीवन-काल के लिएवषमान्य – जो हमें स्वास्थ्य और खुशी के लंबे जीवन के साथ रक्षा करता हैनमः – नमन

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श्री गणेशपञ्चरत्नम् – मुदाकरात्तमोदकं (Shri Ganesha Pancharatnam – Mudakaratta Modakam)

Shri Ganesha Pancharatnam:श्री गणेशपञ्चरत्नम् – मुदाकरात्तमोदकं Shri Ganesha Pancharatnam:आपने बहुत ही सुंदर स्तोत्र का नाम लिया है! श्री गणेशपञ्चरत्नम्, विशेषकर ‘मुदाकरात्तमोदकं’ से शुरू होने वाला स्तोत्र, भगवान गणेश की अत्यंत प्रसिद्ध और शक्तिशाली स्तुति है। Shri Ganesha Pancharatnam:स्तोत्र का अर्थ और महत्व श्री गणेशपञ्चरत्नम् – मुदाकरात्तमोदकं (Shri Ganesha Pancharatnam – Mudakaratta Modakam) श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र!मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् ।कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् ।अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् ।नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1 ॥ नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् ।नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् ।सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम् ।महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥ 2 ॥ समस्त लोक शङ्करं निरस्त दैत्य कुञ्जरम् ।दरेतरोदरं वरं वरेभ वक्त्रमक्षरम् ।कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम् ।मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥ 3 ॥ अकिञ्चनार्ति मार्जनं चिरन्तनोक्ति भाजनम् ।पुरारि पूर्व नन्दनं सुरारि गर्व चर्वणम् ।प्रपञ्च नाश भीषणं धनञ्जयादि भूषणम् ।कपोल दानवारणं भजे पुराण वारणम् ॥ 4 ॥ नितान्त कान्ति दन्त कान्ति मन्त कान्ति कात्मजम् ।अचिन्त्य रूपमन्त हीन मन्तराय कृन्तनम् ।हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनाम् ।तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥ 5 ॥ महागणेश पञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं ।प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रताम् ।समाहितायु रष्टभूति मभ्युपैति सोऽचिरात् ॥ 6 ॥श्रीमत् शंकर भगित्पादकृत श्रीगणेशपञ्चरत्न स्तोत्रम् संपूणकम्। मूल रूप: श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र! मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकंकलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् ।अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकंनताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥१॥ नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरंनमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम् ।सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरंमहेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥२॥ समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुञ्जरंदरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् ।कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करंमनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥३॥ अकिंचनार्तिमार्जनं चिरन्तनोक्तिभाजनंपुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम् ।प्रपञ्चनाशभीषणं धनंजयादिभूषणम्कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम् ॥४॥ नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मजंअचिन्त्यरूपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम् ।हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनांतमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥५॥ महागणेशपञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहंप्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रतांसमाहितायुरष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात् ॥६॥ वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok) Shri Ganesha Pancharatnam:हिंदी रूपांतरणमैं मुक्ति के दाता-प्रदाता श्री गणेश भगवान को बहुत ही विनम्रता के साथ अपने हाथों से मोदक प्रदान (समर्पित) करता हूँ। जिनके सिर पर चंद्रमा एक मुकुट के समान विराजमान है, जो राजाधिराज हैं और जिन्होंने गजासुर नामक दानव हाथी का वध किया था, जो सभी के पापों का आसानी से विनाश कर देते हैं, ऐसे गणेश भगवान जी की मैं पूजा करता हूँ।1 मैं उन श्री गणेश भगवान पर सदा अपना मन और ध्यान अर्पित करता हूँ जो हमेशा उषा काल की तरह चमकते रहते हैं, जिनका सभी राक्षस और देवता सम्मान करते हैं, जो भगवानों में सबसे सर्वोत्तम हैं।2 मैं अपने मन को उस चमकते हुए गणपति भगवान के समक्ष झुकाता हूँ, जो पूरे संसार की खुशियों के दाता हैं, जिन्होंने दानव गजासुर का वध किया था, जिनका बड़ा सा पेट और हाथी की तरह सुन्दर चेहरा है, जो अविनाशी हैं, जो खुशियां और प्रसिद्धि प्रदान करते हैं और बुद्धि के दाता-प्रदाता हैं।3 मैं उन भगवान की पूजा-अर्चना करता हूँ जो गरीबों के सभी दुःख दूर करते हैं, जो ॐ का निवास हैं, जो शिव भगवान के पहले पुत्र (बेटे) हैं, जो परमपिता परमेश्वर के शत्रुओं का विनाश करने वाले हैं, जो विनाश के समान भयंकर हैं, जो एक गज के समान दुष्ट और धनंजय हैं और सर्प को अपने आभूषण के रूप में धारण करते हैं।4 मै सदा उस भगवान को प्रतिबिंबित करता हूँ जिनके चमकदार दन्त (दांत) हैं, जिनके दन्त बहुत सुन्दर हैं, स्वरूप अमर और अविनाशी हैं, जो सभी बाधाओं को दूर करते हैं और हमेशा योगियों के दिलों में वास करते हैं।5 जो भी भक्त प्रातःकाल में गणेश पंचरत्न स्तोत्र का पाठ करता है, जो भगवान गणेश के पांच रत्न अपने शुद्ध हृदय में याद करता है तुरंत ही उसका शरीर दाग-धब्बों और दुखों से मुक्त होकर स्वस्थ हो जायगा, वह शिक्षा के शिखर को प्राप्त करेगा, जीवन शांति, सुख के साथ आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि के साथ सम्पन्न हो जायेगा।

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वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok)

Vakratunda Mahakaya:वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र – गणेश जी की स्तुति Vakratunda Mahakaya:वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।। Vakratunda Mahakaya:यह मंत्र भगवान गणेश को समर्पित एक बहुत ही प्रसिद्ध और शक्तिशाली मंत्र है। इसका जाप करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है और विघ्न दूर होते हैं। Vakratunda Mahakaya:मंत्र का अर्थ Vakratunda Mahakaya:मंत्र का महत्व श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti) मंत्र का जाप कैसे करें यहाँ कुछ अतिरिक्त जानकारी दी गई है: अगर आप गणेश जी के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो आप इन विषयों पर खोज कर सकते हैं: वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok) किसी भी प्रकार के कार्य प्रारंभ करने के पूर्व श्री गणेश जी का स्मरण इस मंत्र के साथ अवश्य करना चाहिए, आपके शुभकार्य निश्चित ही सिद्ध होंगे।वक्रतुण्ड महाकायसूर्यकोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरु मे देवसर्वकार्येषु सर्वदा ॥ हिन्दी रूपांतरण:वक्रतुण्ड: घुमावदार सूंडमहाकाय: महा काया, विशाल शरीरसूर्यकोटि: सूर्य के समानसमप्रभ: महान प्रतिभाशालीनिर्विघ्नं: बिना विघ्नकुरु: पूरे करेंमे: मेरेदेव: प्रभुसर्वकार्येषु: सारे कार्यसर्वदा: हमेशा, सदैव घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली।मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करें (करने की कृपा करें)॥

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Sapne:सपने में अपनी या फैमिली (Family)मेंबर की मौत देखना शुभ या अशुभ! ज्योतिषी से जानें इसका मतलब

Sapne:सपने अक्सर रात में सोते समय हम सपने तो देखते ही हैं और कई बार सपने में कुछ ऐसे हादसे देखते हैं, जिसको देखते ही नींद में ही पसीने छूट जाते हैं. इसी में से एक सपना ऐसा है जिसे देखना किसी को पसंद नहीं होगा सपने और लोग डर भी जाते हैं. दरअसल, कई बार व्यक्ति नींद में खुद की मौत या फिर अपने परिजन की मौत देखता है तो वह घबरा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में इस सपने का एक विशेष अर्थ बताया गया है. सपने में मौत देखना एक आम अनुभव है, और यह कई लोगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। सपने हालांकि, सपनों का अर्थ व्यक्तिगत और जटिल होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सपने में मौत देखने के कई अर्थ हो सकते हैं, जो सपने के विशिष्ट विवरणों और व्यक्ति के जीवन की स्थिति पर निर्भर करते हैं। Sapne:सपने इस तरह के सपने आना आम बात है और लगभग हर एक व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी ऐसा सपने आते ही हैं और ऐसे सपने को देखकर डरना स्वाभाविक है, पर लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं, क्योंकि यह एक शुभ सपना माना जाता है. Sapne:क्या होता है इस सपने का मतलब Sapne:सपने आप सपने में खुद को मृत अवस्था में देखते हैं तो आप समझ जाइए कि आपकी आयु बढ़ गई है और सिर्फ आयु ही नहीं बल्कि, अगर आपके ऊपर कोई बड़ी मुसीबत आने को है तो वह भी सोचिए टल गई. तो ऐसे सपने देखना काफी शुभ माना जाता है. मौत का मतलब है अशुभ चीजों का आपके जीवन से समाप्त होना. Sapne:आपने अपनी किसी अपने या फिर अपने परिवार के किसी सदस्य की मौत देखी है तो यह उनके आयु में वृद्धि होने का संकेत है. उनके लिए कोई नया प्रारंभ या कोई नई शुभ चीज इंतजार कर रही है. सपने इससे आपके घर परिवार और खानदान में खुशहाली का माहौल रहेगा. इसलिए ऐसे सपने को देखकर घबराने वाली बात नहीं है. बल्कि, ऐसे सपने को देखकर आप बिल्कुल निश्चित और खुश हो जाइए. मृत्यु के संकेत होते हैं ये डरावने सपने, देखने पर न करें अनदेखी Sapne:सपने में मौत देखने के कुछ सामान्य अर्थ: Sapne:सपने में अपनी या परिवार के किसी सदस्य की मौत देखना: Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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दशरथकृत शनि स्तोत्र (Dashratha Shani Sotra)

Dashratha Shani Sotra:दशरथकृत शनि स्तोत्र: एक संक्षिप्त परिचय Dashratha Shani Sotra:दशरथकृत शनि स्तोत्र एक प्राचीन और प्रभावशाली स्तोत्र है जो भगवान शनि को समर्पित है। माना जाता है कि इस स्तोत्र की रचना स्वयं राजा दशरथ ने की थी। इस स्तोत्र में भगवान शनि की महिमा का वर्णन करते हुए उनसे आशीर्वाद मांगा गया है। Dashratha Shani Sotra:स्तोत्र का महत्व Dashratha Shani Sotra:स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करें? Dashratha Shani Sotra:स्तोत्र के कुछ लाभ दशरथ उवाच:प्रसन्नो यदि मे सौरे ! एकश्चास्तु वरः परः ॥ रोहिणीं भेदयित्वा तु न गन्तव्यं कदाचन् ।सरितः सागरा यावद्यावच्चन्द्रार्कमेदिनी ॥ याचितं तु महासौरे ! नऽन्यमिच्छाम्यहं ।एवमस्तुशनिप्रोक्तं वरलब्ध्वा तु शाश्वतम् ॥ प्राप्यैवं तु वरं राजा कृतकृत्योऽभवत्तदा ।पुनरेवाऽब्रवीत्तुष्टो वरं वरम् सुव्रत ॥ Dashratha Shani Sotra:दशरथकृत शनि स्तोत्र:नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च ।नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ॥1॥ नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च ।नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते ॥2॥ नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम: ।नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते ॥3॥ नमस्ते कोटराक्षाय दुर्नरीक्ष्याय वै नम: ।नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने ॥4॥ नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते ।सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च ॥5॥ अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते ।नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तुते ॥6॥ तपसा दग्ध-देहाय नित्यं योगरताय च ।नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम: ॥7॥ ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज-सूनवे ।तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ॥8॥ देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरगा: ।त्वया विलोकिता: सर्वे नाशं यान्ति समूलत: ॥9॥ प्रसाद कुरु मे सौरे ! वारदो भव भास्करे ।एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबल: ॥10॥ दशरथ उवाच:प्रसन्नो यदि मे सौरे ! वरं देहि ममेप्सितम् ।अद्य प्रभृति-पिंगाक्ष ! पीडा देया न कस्यचित् ॥ हे श्यामवर्णवाले, हे नील कण्ठ वाले।कालाग्नि रूप वाले, हल्के शरीर वाले॥स्वीकारो नमन मेरे, शनिदेव हम तुम्हारे।सच्चे सुकर्म वाले हैं, मन से हो तुम हमारे॥स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे॥ हे दाढ़ी-मूछों वाले, लम्बी जटायें पाले।हे दीर्घ नेत्र वाले, शुष्कोदरा निराले॥भय आकृति तुम्हारी, सब पापियों को मारे।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे॥ हे पुष्ट देहधारी, स्थूल-रोम वाले।कोटर सुनेत्र वाले, हे बज्र देह वाले॥तुम ही सुयश दिलाते, सौभाग्य के सितारे।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे॥ हे घोर रौद्र रूपा, भीषण कपालि भूपा।हे नमन सर्वभक्षी बलिमुख शनी अनूपा ॥हे भक्तों के सहारे, शनि! सब हवाले तेरे।हैं पूज्य चरण तेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥ हे सूर्य-सुत तपस्वी, भास्कर के भय मनस्वी।हे अधो दृष्टि वाले, हे विश्वमय यशस्वी॥विश्वास श्रद्धा अर्पित सब कुछ तू ही निभाले।स्वीकारो नमन मेरे। हे पूज्य देव मेरे॥ अतितेज खड्गधारी, हे मन्दगति सुप्यारी।तप-दग्ध-देहधारी, नित योगरत अपारी॥संकट विकट हटा दे, हे महातेज वाले।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥ नितप्रियसुधा में रत हो, अतृप्ति में निरत हो।हो पूज्यतम जगत में, अत्यंत करुणा नत हो॥हे ज्ञान नेत्र वाले, पावन प्रकाश वाले।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥ जिस पर प्रसन्न दृष्टि, वैभव सुयश की वृष्टि।वह जग का राज्य पाये, सम्राट तक कहाये॥उत्तम स्वभाव वाले, तुमसे तिमिर उजाले।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥ हो वक्र दृष्टि जिसपै, तत्क्षण विनष्ट होता।मिट जाती राज्यसत्ता, हो के भिखारी रोता॥डूबे न भक्त-नैय्या पतवार दे बचा ले।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥ हो मूलनाश उनका, दुर्बुद्धि होती जिन पर।हो देव असुर मानव, हो सिद्ध या विद्याधर॥देकर प्रसन्नता प्रभु अपने चरण लगा ले।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥ होकर प्रसन्न हे प्रभु! वरदान यही दीजै।बजरंग भक्त गण को दुनिया में अभय कीजै॥सारे ग्रहों के स्वामी अपना विरद बचाले।स्वीकारो नमन मेरे। हैं पूज्य चरण तेरे॥

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संकट मोचन हनुमानाष्टक (Sankatmochan Hanuman Ashtak)

Hanuman Ashtak:संकटमोचन हनुमानाष्टक: एक संक्षिप्त परिचय Hanuman Ashtak:संकटमोचन हनुमानाष्टक एक प्रसिद्ध हिंदू स्तोत्र है जो Hanuman Ashtakभगवान हनुमान को समर्पित है। यह स्तोत्र आठ श्लोकों का बना हुआ है और इसमें भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन किया गया है। यह माना जाता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। Hanuman Ashtak:स्तोत्र का महत्व स्तोत्र के कुछ श्लोक Hanuman Ashtak:संकटमोचन हनुमानाष्टक के सभी श्लोक बहुत ही प्रभावशाली हैं और भगवान हनुमान की विभिन्न विशेषताओं का वर्णन करते हैं। उदाहरण के लिए: Hanuman Ashtak:कब और कैसे करें पाठ? श्री हनुमंत लाल की पूजा आराधना में संकट मोचन हनुमान अष्टक का नियमित पाठ करने से भक्तों पर आये गंभीर संकट का भी निवारण हो जाता है। Hanuman Ashtak Hanuman Ashtak॥ हनुमानाष्टक ॥बाल समय रवि भक्षी लियो तब,तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।ताहि सों त्रास भयो जग को,यह संकट काहु सों जात न टारो ।देवन आनि करी बिनती तब,छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।को नहीं जानत है जग में कपि,संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥ बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,जात महाप्रभु पंथ निहारो ।चौंकि महामुनि साप दियो तब,चाहिए कौन बिचार बिचारो ।कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,सो तुम दास के सोक निवारो ॥ २ ॥ अंगद के संग लेन गए सिय,खोज कपीस यह बैन उचारो ।जीवत ना बचिहौ हम सो जु,बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।हेरी थके तट सिन्धु सबै तब,लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ ३ ॥ रावण त्रास दई सिय को सब,राक्षसी सों कही सोक निवारो ।ताहि समय हनुमान महाप्रभु,जाए महा रजनीचर मारो ।चाहत सीय असोक सों आगि सु,दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥ ४ ॥ बान लग्यो उर लछिमन के तब,प्राण तजे सुत रावन मारो ।लै गृह बैद्य सुषेन समेत,तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।आनि सजीवन हाथ दई तब,लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ ५ ॥ रावन युद्ध अजान कियो तब,नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,मोह भयो यह संकट भारो Iआनि खगेस तबै हनुमान जु,बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥ ६ ॥ बंधु समेत जबै अहिरावन,लै रघुनाथ पताल सिधारो ।देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि,देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।जाय सहाय भयो तब ही,अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥ ७ ॥ काज किये बड़ देवन के तुम,बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।कौन सो संकट मोर गरीब को,जो तुमसे नहिं जात है टारो ।बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,जो कछु संकट होय हमारो ॥ ८ ॥ ॥ दोहा ॥लाल देह लाली लसे,अरु धरि लाल लंगूर ।वज्र देह दानव दलन,जय जय जय कपि सूर ॥ रामायण के बाद हनुमानजी यहां चले गए थे और अब वे इन जगहों पर मिलते हैं…

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Shardiya Navratri 2024 Date: कब से शुरू हो रही है शारदीय नवरात्रि? जानें कलश स्थापना मुहूर्त, दुर्गा अष्टमी, महानवमी का दिन

Shardiya Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024, 3 अक्टूबर, 2024 से शुरू हो रही है। यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो माँ दुर्गा को समर्पित है। इस नौ दिनों के उत्सव में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ पितृ पक्ष के समापन के बाद यानी आश्विन आमवस्या के बाद ही होता है. आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होता है. यह नवरात्रि शरद ऋतु में आती है, इसलिए इसे शारदीय नवरात्रि कहते हैं. एक नवरात्रि चैत्र माह में आती है, उसे चैत्र नवरात्रि के नाम से जानते हैं. इन दो नवरा​त्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं. शारदीय नवरात्रि के समय में कोलकाता में प्रसिद्ध दुर्गा पूजा का आयोजन होता है. शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि विधान से पूजा करते हैं. दुर्गा अष्टमी या महा अष्टमी के दिन कन्या पूजा, नवमी को हवन और दशमी के दिन शारदीय नवरात्रि का समापन हो जाता है. Shardiya Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024 का शुभारंभ वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा ति​थि का प्रारंभ 2 अक्टूबर को देर रात 12:18 बजे से होगा. यह तिथि 4 अक्टूबर को तड़के 02:58 बजे तक मान्य रहेगी. ऐसे में उदयाति​थि के आधार पर इस साल शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 3 अक्टूबर दिन गुरुवार से हो रहा है. Navratri 2024 Date:दुर्गा अष्टमी 2024 कब है? दुर्गा अष्टमी आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. इस साल दुर्गा अष्टमी 11 अक्टूबर दिन शुक्रवार को है. उस दिन कन्या पूजा की जाएगी. Navratri 2024 Date:नवरात्रि के दौरान क्या करें? Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024 कलश स्थापना मुहूर्त Navratri 2024 Date:3 अक्टूबर से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्रि का कलश स्थापना करने के लिए दो शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं. कलश स्थापना के लिए सुबह में शुभ मुहूर्त 6 बजकर 15 मिनट से सुबह 7 बजकर 22 मिनट तक है. सुबह में घट स्थापना के लिए आपको 1 घंटा 6 मिनट का समय प्राप्त होगा. इसके अलावा दोपहर में भी कलश स्थापना का मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त में है. यह सबसे अच्छा समय माना जाता है. दिन में आप 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट के बीच कभी भी कलश स्थापना कर सकते हैं. दोपहर में आपको 47 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी महानवमी 2024 कब है? इस साल महा नवमी भी 11 अक्टूबर को ही है. महानवमी का हवन 12 अक्टूबर शनिवार को होगा. Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024 कैलेंडर शारदीय नवरात्रि का पहला दिन: 3 अक्टूबर, गुरुवार: घटस्थापना, शैलपुत्री पूजाशारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन: 4 अक्टूबर, शुक्रवार: ब्रह्मचारिणी पूजाशारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन: 5 अक्टूबर, शनिवार: चंद्रघंटा पूजाशारदीय नवरात्रि का चौथा दिन: 6 अक्टूबर, रविवार: विनायक चतुर्थीशारदीय नवरात्रि का पांचवा दिन: 7 अक्टूबर, सोमवार: कूष्मांडा पूजाशारदीय नवरात्रि का छठा दिन: 8 अक्टूबर, मंगलवार: स्कंदमाता पूजाशारदीय नवरात्रि का सातवां दिन: 9 अक्टूबर, बुधवार: कात्यायनी पूजाशारदीय नवरात्रि का आठवां दिन: 10 अक्टूबर, गुरुवार: कालरात्रि पूजाशारदीय नवरात्रि का नौवां दिन: 11 अक्टूबर, शुक्रवार: दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजाशारदीय नवरात्रि का दसवां दिन: 12 अक्टूबर, शनिवार: नवमी हवन, दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी, दशहरा, शस्त्र पूजा Navratri 2024:नवरात्रि का महत्व Navratri 2024:नवरात्रि का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। इस दौरान लोग व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाते हैं और माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Types of Havan and Yagya in Hindu Rituals According to Vedas and Puranas

Types of Havan and Yagya in Hindu Rituals According to Vedas and Puranas In Hinduism, Havan and Yagya are sacred fire rituals deeply rooted in Vedic traditions and the Puranas. These rituals are central to many ceremonies, ranging from personal purification to large-scale societal benefits. They invoke divine forces and create spiritual vibrations to cleanse the environment and individuals. Havan and Yagya rituals, when performed with specific mantras, help achieve specific goals. This post will explore various types of Havans and Yagyas, their significance, and the associated mantras. What is Havan and Yagya? Havan and Yagya Both involve chanting sacred Vedic mantras and offerings to the fire god, Agni, who is considered the carrier of these offerings to other deities. Types of Havan and Yagya According to the Vedas and Puranas Conclusion Havans and Yagyas are not merely religious rituals; they are potent spiritual tools that can cleanse the mind, body, and environment while invoking divine blessings. Each type of Havan or Yagya, when performed with the proper mantras and intentions, can bring about transformation and healing in various aspects of life. Rooted in the rich tradition of the Vedas and Puranas, these sacred fire ceremonies remain a vital part of Hindu religious practices, providing individuals with a direct connection to the divine. How to Book a Havan or Yagya Service Online At Karmasu, we offer personalized and community-based Havan and Yagya services performed by expert priests, both online and offline. Whether you’re seeking spiritual cleansing, prosperity, health, or protection, you can choose from a range of rituals tailored to your needs. Feel free to contact us or visit our website to learn more and book a ritual that suits your spiritual goals! CALL NOW – 9129388891 Keywords: Types of Havan, Types of Yagya, Hindu rituals, Vedic mantras, Fire rituals, Spiritual cleansing, Vedas and Puranas, Online Havan services, Karmasu Sri Durga Chalisa:श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी…

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दीपावली पूजा मंत्र (Deepawali Puja Mantras)

Deepawali Puja Mantras 1. गोवत्स द्वादशी मंत्र Deepawali Puja Mantras :अर्घ्य मंत्रक्षीरोदार्नवसंभूते सुरासुरनमस्कृते।सर्वदेवमये मातर्गृहाण्घ्यं नमो नमः॥ निवेदन मंत्रगोवत्स द्वादशी निवेदन मंत्र सुरभि त्वं जगन्मातरदेवी विष्णुपदे स्थिता।सर्वदेवमये ग्रसं मया दत्तमिदं ग्रसा॥ प्रार्थना मंत्रसर्वदेवमये देवि सर्वदेवैरलंकृते।मातरमाभिलाषितं सफलं कुरु नंदिनी॥ Deepawali Puja Mantra मन्त्र अर्थ – हे समस्त देवताओं द्वारा अलङ्कृत माता! नन्दिनी! मेरा मनोरथ पुर्ण करो। 2. यमदीप मंत्रमृत्युना पाषादण्डभ्यं कालेन श्यामया सहः।त्रयोदश्यां दीपदानत्सुर्यजः प्रियतम मम॥ मंत्र अर्थ – त्रयोदशी के दिन मैं यह दीपक सूर्य पुत्र यानि यमदेव को अर्पित करता हूं। वे मुझे मृत्युपाश से मुक्त करें और मेरा कल्याण करें। 3. अभ्यंग स्नान मंत्रसीतालोष्टासमायुक्ता सकान्तकदलन्विता।हर पापमपामार्ग भ्रम्यमानः पुनः पुनः॥ मंत्र का अर्थ – हे कांटेदार भूसी के फूल वाला पौधा, जो जुती हुई भूमि की मिट्टी, कांटों और पत्तियों से युक्त है; मेरे पापों को नष्ट कर दो. 4. नरक चतुर्दशी दीपदान मंत्रदत्तो दीपश्चतुर्दश्याम नरकाप्रीतये मया।चतुर्वर्तिसामायुक्तः सर्वपापनुत्तये॥ मंत्र अर्थ – इस चतुर्दशी के दिन, नर्क देवता की प्रसन्नता के लिए और सभी पापों के नाश के लिए मैं यह चार मुख वाला, चार बातियों वाला दीपक अर्पित करता हूं। 5. लक्ष्मी मंत्रॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः॥ मंत्र अर्थ – मैं धन और समृद्धि की देवी देवी लक्ष्मी को नमस्कार करता हूं। 6. बाली नमस्कार मंत्रबलिराजा नमस्तुभ्यं दैत्यदानववंदिता।इन्द्रशत्रोअमरते विष्णुसन्निध्यदो भव॥बलिमुद्दिश्य दीयन्ते दानानि कुरुनन्दना।यानि तन्यक्षान्याहुर्मयैवं सम्प्रदर्शितम्॥ मन्त्र का अर्थ – दैत्य तथा दानवों से पूजित हे बलिराज, आपको नमस्कार है। हे इन्द्रशत्रो, हे अमराराते, विष्णु के सानिध्य को देने वाला हो।हे कुरुनन्दन, बलि को उद्देश्य कर जो दान दिये जाते हैं वे अक्षय को प्राप्त होते हैं। मैंने इस प्रकार प्रदर्शित किया है। 7. गोवर्धन मंत्रगोवर्धन धराधर गोकुलत्राणकारक:।बहुबाहुकृतच्छया गावं कोटिप्रदो भव॥ मंत्र का अर्थ – हे गोवर्धन, जो पृथ्वी का समर्थन करता है! आप गोकुल के रक्षक हैं. भगवान श्री कृष्ण ने आपको अपनी भुजाओं पर उठा लिया था। मुझे करोड़ों गौएँ प्रदान करें। 8. गौ मंत्रलक्ष्मीर्य लोकापालं धेनुरूपेण संस्थिता।घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु॥ Deepawali Puja Mantras:मंत्र का अर्थ – हे गाय, जो स्वयं गाय के रूप में लक्ष्मी है और जो यज्ञ के लिए घी प्रदान करती है, मेरे पापों को नष्ट कर दे। 9. यम द्वितीया मंत्रएह्येहि मार्तण्डजा पाशहस्ता यमान्तकलोकधर्मरेषा।भ्रातृद्वितीयकृतदेवपूजं गृहाणा चार्घ्यं भगवन्नमोस्तु ते॥ Deepawali Puja Mantras मन्त्र का अर्थ – हे मार्तण्डज – सूर्य से उत्पन्न हुए, हे पाशहस्त – हाथ में पाश धारण करने वाले, हे यम, हे अन्तक, हे लोकधर, हे अमरेश, भातृद्वितीया में की हुई देवपूजा और अर्घ्य को ग्रहण करो। हे भगवन् आपको नमस्कार है। 10. मार्गपाली मंत्रमार्गपाली नमस्तेस्तु सर्वलोकसुखप्रदे।विधेयैः पुत्रदारद्यैः पुनरेहि व्रतस्य मे॥ मंत्र का अर्थ – हे मार्ग पर चलने वाले उत्सव, सभी जीवित प्राणियों को खुशी प्रदान करते हुए, मैं आपको प्रणाम करता हूं। मेरे संकल्पित धार्मिक अनुष्ठान (व्रत) के लिए दोबारा आना। Deepawali Puja Mantras

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सपने में दिख जाये गणपति जी की मूर्ति तो समज लीजिये होगा ऐसा – Sapne Me Dikhe Ganpati Ji Ki Murti To Samajh Lijiye Hoga Aesa.

Ganpati Ji Ki Murti:सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना एक शुभ संकेत माना जाता है। हिंदू धर्म में, गणपति जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी वे सभी बाधाओं को दूर करते हैं। इसलिए, सपने में उनकी मूर्ति देखना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपके जीवन में आने वाली सभी मुश्किलें दूर होने वाली हैं। Ganpati Ji Ki Murti:सपने का अर्थ व्यक्ति के व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं पर भी निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, अगर आप सपने में गणपति जी की मूर्ति को पूजा करते हुए देखते हैं, तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि आप अपनी आध्यात्मिकता को गहरा बनाना चाहते हैं। अगर आप सपने में गणपति जी की मूर्ति को टूटते हुए देखते हैं, तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि आप किसी समस्या का सामना कर रहे हैं। यदि आपने सपने में गणपति जी की Ganpati Ji Ki Murti मूर्ति देखी है, तो इसका मतलब है कि आपको सकारात्मक रहना चाहिए और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। गणपति जी की कृपा से आप निश्चित रूप से सफल होंगे। Ganpati Ji Ki Murti:सपने में गणपति जी की मूर्ति: दोस्तों आज बात करने वाले है ऐसे सपने की जिससे आपके जीवन के सारे विघ्न दूर हो जायेगे। सपने में देवी देवताओ का आना बहुत ही शुभ माना जाता है क्युकी सपने में भगवान इंसान को आशीर्वाद और कुछ अच्छे संकेत देने के लिए आते है। Ganpati Ji Ki Murti सपने में इंसान जो भी देखता है उसका कोई न कोई रहस्य अवश्य होता है क्युकी सपने इंसान के भविष्य से जुड़े हुवे होते है। इसी तरह सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) जीवन में कोई संकेत जरूर देता है आइये जानते है आपके लिए क्या संकेत है। Ganpati Ji Ki Murti:इंसान के लिए सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) बहुत ही शुभ सपना है। क्युकी गणपति जी हिन्दू धर्म के प्रथम पूजनीय देव है किसी भी शुभ कार्य की शरुआत करने से पहले गणपति जी की पूजा की जाती है। गणपति जी विघ्नहर्ता है उसकी पूजा करने से आपके सभी कार्य शुभ होते है और सफल होते है। सच्चे मन से गणपति जी की पूजा अर्चना करने से जीवन में समृद्धि आती है और आप आने वाले विघ्न भी दूर हो जाते है। Ganpati Ji Ki Murti इंसान के जीवन में अगर कोई मुसीबत आये तो उसे गणेश जी पूजा करनी चाहिए जिससे मुसीबत दूर हो जाये गणपति जी सच्चे भक्तो की प्राथना सुनते है और उनका आशीर्वाद उन्हें दते है। सपनो की दुनिया (Sapno ki duniyaa) में आज बात करने वाले है विघ्नहर्ता श्री गणेश की जिसकी पूजा से सारी मुसीबते दूर जाती है। सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) आपके जीवन में अच्छे बदलाव की और इशारा करता है। गणपति जी आपको सपने में क्या क्या संकेत देने आये है आइये इसके बारे में जानते है। गणपति जी की मूर्ति आपको अलग अलग अवस्था में दिखाई दे सकती है आइये जानते है इस सपने से आपको क्या संकेत मिलता है। सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना मतलब – Sapne Me Ganpati Ji Ki Murti Dekhna Matlab पुराने शास्त्रों के आधारित यह सपना आपको संकेत देता है की इंसान के जीवन में खुशिया आने वाली है। सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) बेहद शुभ माना गया है। इस सपने से इंसान को यह संकेत मिलता है की आने वाले दिनों में बड़ी खुशखबर मिलने वाली है। ख़ुशी के इस समाचार से इंसान के जीवन में परेशानिया कम हो जाएगी और परिवार भी खुश रहेगा। Dream Astrology: मृत्यु के संकेत होते हैं ये डरावने सपने, देखने पर न करें अनदेखी सपने में गणपति जी की मूर्ति को मोदक का भोग लगाना – Sapne Me Ganpati Ji Ki Murti Ko Modak Ka Bhog Lagana शास्त्रों के अनुसार यह सपना आपको संकेत देता है जल्द ही इंसान के जीवन से सारे दुःख दूर हो जायेंगे। सपने में गणपति जी की मूर्ति को मोदक का भोग लगाना (Sapne me ganpati ji ki murti ko modak ka bhog lagana) इस बात का इशारा है की आपको पारिवारिक समस्या से छुटकारा मिलने वाला है परिवार में चल रही समस्या जल्द ही दूर हो जाएगी। यह सपना आपके लिए शुभ संकेत है। गणपति जी को मोदक बहुत प्रिय है इस लिए उन्हें मोदक का भोग लगाया जाता है। सपने में मोदक देखना (Sapne me modak dekhna) भी अच्छा सपना होता है मोदक का अर्थ होता है ख़ुशी इससे जीवन में ख़ुशी आती है और गणपति जी का आशीर्वाद भी मिलता है। सपने में गणपति जी की मूर्ति का विसर्जन देखना – Sapne Me Ganpati Ji Ki Murti Ka Visarjan Dekhna Ganpati Ji Ki Murti:स्वप्न शास्त्र में लिखा है की बाप्पा का विसर्जन देखना आने वाले दिनों में बुरा होने का इशारा करता है। सपने में गणपति जी की मूर्ति का विसर्जन देखना (Sapne me ganpati ji ki murti ka visarjan dekhna) इंसान को अशुभ संकेत देता है इंसान को व्यापार में धनहानि होगी। यह सपना आपको भविष्य में निराशा आने की और इशारा करता है और आपको चिंता में डाल सकता है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Parivartini Ekadashi 2024: परिवर्तिनी एकादशी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और उपाय

Parivartini Ekadashi 2024: परिवर्तिनी एकादशी का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकदाशी तिथि को रखा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस एकादशी को पद्मा एकादशी और पार्श्व एकादशी भी कहा जाता है. Parivartini Ekadashi 2024: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा या परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी पर भगवान विष्णु विश्राम के दौरान करवट बदलते हैं. इसी वजह से इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 14 सितंबर यानी आज रखा जा रहा है.  परिवर्तिनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Parivartini Ekadashi 2024 Shubh Muhurat) Parivartini Ekadashi 2024:भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 13 सितंबर यानी कल रात 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 14 सितंबर यानी आज रात 8 बजकर 41 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार, आज ही परिवर्तिनी एकादशी मनाई जा रही है.  परिवर्तिनी एकादशी पूजन विधि (Parivartini Ekadashi Pujan Vidhi) Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी पर प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पित करें. इसके बाद पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु और गणेश जी की पूजा करें. श्री हरि को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें. गणेश जी को मोदक और दूर्वा अर्पित करें. पहले गणेश जी और फिर श्री हरि के मंत्रों का जाप करें. इसके बाद किसी निर्धन व्यक्ति को जल, अन्न-वस्त्र, या छाते का दान करें. इस दिन अन्न का सेवन बिल्कुल न करें. जलाहार या फलाहार ही ग्रहण करें. परिवर्तिनी एकादशी उपाय (Parivartini Ekadashi Upa) 1. पीले कपड़े दान करें परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है. मान्यता है Parivartini Ekadashi 2024 कि इस दिन जरूरतमंदों को पीले कपड़ों का दान करना शुभ होता है. ऐसा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है. वहीं, शुभ फलों की प्राप्ति होती है. 2. चांदी के सिक्के चढ़ाएं Parivartini Ekadashi 2024 परिवर्तिनी एकादशी के दिन पूजन के समय भगवान विष्णु को चांदी के कुछ सिक्के चढ़ाएं और पूजा के बाद उन सिक्कों को लाल रंग के कपड़े में लपेटकर तिजोरी में पैसे वाले स्थान पर रख दें. आर्थिक समस्याएं समाप्त हो जाएंगी.  3. केसर युक्त दूध से अभिषेक करें परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी मां की पूजा करने का विधान है और इस दिन भगवान विष्णु का अभिषेक केसर युक्त दूध से करें. ऐसा करने से घर में सुख,सौभाग्य का आगमन होता है.

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Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 14/09/2024

Aaj Ka Panchang Aaj Ka Panchang 🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞⛅दिनांक – 14 सितम्बर 2024⛅दिन – शनिवार⛅विक्रम संवत् – 2081⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – भाद्रपद⛅पक्ष – शुक्ल⛅तिथि –  एकादशी रात्रि 08:41 तक तत्पश्चात द्वादशी⛅नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा रात्रि 08:32 तक तत्पश्चात श्रवण⛅योग – शोभन शाम 06:18 तक तत्पश्चात अतिगण्ड Aaj Ka Panchang ⛅राहु काल – प्रातः 09:30 से प्रातः 11:03 तक⛅सूर्योदय – 06:26⛅सूर्यास्त – 06:44⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:39 तक⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:10 से दोपहर 12:59 तक⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:12 सितम्बर 15 से रात्रि 12:58 सितम्बर 15 तकव्रत पर्व विवरण – परिवर्तनी पद्मा एकादशी, हिंदी दिवस, सर्वार्थ सिद्धि योग (रात्रि 08:32 से प्रातः 06:26 सितम्बर 15 तक)⛅विशेष – एकादशी को सिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) Aaj Ka Panchang 🔹एकादशी व्रत के लाभ🔹 🔸एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है । 🔸 जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । 🔸 जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । 🔸 एकादशी व्रत करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है । 🔸 धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है । 🔸 कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है । 🔸 परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है । पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞 Aaj Ka Panchang English Mai 14/09/2024 Aaj Ka Panchang ~ Today’s Hindu Calendar ⛅Nakshatra – Uttarashadha till 08:32 pm and then Shravan ⛅Yoga – Shobhan till 06:18 pm then Atigand ⛅Rahu Kaal – 09:30 am to 11:03 am ⛅Sunrise – 06:26 ⛅Sunset – 06:44 ⛅Direction Shool – East direction in⛅Brahma Muhurta – from 04:52 to 05:39 in the morning⛅Abhijit Muhurta – from 12:10 in the afternoon to 12:59 in the afternoon⛅Nishita Muhurta – from 12:12 in the night of September 15 to 12:58 in the night of September 15Vrat Parv Vidhi – Parivartani Padma Ekadashi, Hindi Diwas, Sarvartha Siddhi Yoga (from 08:32 pm to 06:26 am on September 15)⛅Special – Eating Simbi (beans) on Ekadashi leads to the destruction of the son. (Brahma Vaivart Purana, Brahma Khand: 27.29-34) 🔹Benefits of Ekadashi fast🔹 🔸There is no other virtue like the virtue of Ekadashi fast. 🔸 The virtue that one gets by donating during a solar eclipse is many times more than the virtue one gets by fasting on Ekadashi. 🔸 The virtue that one gets by donating cow, gold, and performing Ashwamedha Yagna is more than the virtue one gets by fasting on Ekadashi. 🔸 The ancestors of those who observe Ekadashi fast are freed from low births and shower happiness on their family members. Therefore, there is happiness and peace in the house of those who observe this fast. Aaj Ka Panchang🔸 Wealth, grains, sons etc. increase. 🔸 Fame increases, Devotion and faith increase, which makes life full of joy. 🔸 One attains the pleasure of God. In the past, King Nahush, Ambarisha, King Gadhi etc. whoever observed Ekadashi fast, got all the wealth of this earth. Lord Shiva told Narada: There is no doubt that by observing Ekadashi fast, the sins of a man’s seven births are destroyed. Fasting, cow donation etc. on Ekadashi day are infinitely meritorious. 🌞🚩 🚩 ” ll Jai Shri Ram ll ” 🚩🚩🌞

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