Dharmraj Ki Aarti धर्मराज आरती – धर्मराज कर सिद्ध काज

Dharmraj Ki Aarti:धर्मराज की आरती करने के कई लाभ होते हैं, जो भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने में सहायक माने जाते हैं। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं: धर्मराज की आरती नियमित रूप से करने से व्यक्ति का मनोबल, आत्मविश्वास, और आंतरिक शांति प्राप्त होती है, जो उसके जीवन को समृद्ध और सफल बनाता है। Dharmraj Ki Aarti धर्मराज आरती – धर्मराज कर सिद्ध काज धर्मराज कर सिद्ध काज,प्रभु मैं शरणागत हूँ तेरी ।पड़ी नाव मझदार भंवर में,पार करो, न करो देरी ॥॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥ धर्मलोक के तुम स्वामी,श्री यमराज कहलाते हो ।जों जों प्राणी कर्म करत हैं,तुम सब लिखते जाते हो ॥ अंत समय में सब ही को,तुम दूत भेज बुलाते हो ।पाप पुण्य का सारा लेखा,उनको बांच सुनते हो ॥ भुगताते हो प्राणिन को तुम,लख चौरासी की फेरी ॥॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥ चित्रगुप्त हैं लेखक तुम्हारे,फुर्ती से लिखने वाले ।अलग अगल से सब जीवों का,लेखा जोखा लेने वाले ॥ पापी जन को पकड़ बुलाते,नरको में ढाने वाले ।बुरे काम करने वालो को,खूब सजा देने वाले ॥ कोई नही बच पाता न,याय निति ऐसी तेरी ॥॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥ दूत भयंकर तेरे स्वामी,बड़े बड़े दर जाते हैं ।पापी जन तो जिन्हें देखते ही,भय से थर्राते हैं ॥ बांध गले में रस्सी वे,पापी जन को ले जाते हैं ।चाबुक मार लाते,जरा रहम नहीं मन में लाते हैं ॥ नरक कुंड भुगताते उनको,नहीं मिलती जिसमें सेरी ॥॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥ धर्मी जन को धर्मराज,तुम खुद ही लेने आते हो ।सादर ले जाकर उनको तुम,स्वर्ग धाम पहुचाते हो । जों जन पाप कपट से डरकर,तेरी भक्ति करते हैं ।नर्क यातना कभी ना करते,भवसागर तरते हैं ॥ कपिल मोहन पर कृपा करिये,जपता हूँ तेरी माला ॥॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥

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Dream Meaning: क्या सपने में आपको भी दिखते हैं अनजान चेहरे ? 

Dream Meaning:सपनों की दुनिया में सब कुछ हकीकत लगता है। सपनों के कई जाने पहचाने चेहरे हमारे आस पास रहते हैं, लेकिन कई बार हमारे सपने में कुछ ऐसे चेहरे दिखाई दे जाते हैं, जिन्हें कभी देखा तक नहीं। कभी न कभी आपके सपने में भी कोई अनजाना चेहरा जरूर आया होगा। जानिए आखिर सपने में अनजान चेहरे क्यों दिखाई देते हैं। कई बार सपनों में अनजाने चेहरे दिखते हैं, जिनसे असल जिंदगी में ना कभी मिले और कही भीड़ में उन्हें देखा। फिर भी सपनों में आ जाते हैं। कभी दोस्त बनकर तो कभी दुश्मन बनकर। अगर आपके सपनों में भी अनजाने चेहरे आ रहे हैं। मतलब जब आप सो रहे हैं और सपने में अनजान चेहरा देख रहे हैं तो कोई शक्ति उस समय आप पर नजर रखें हुए हैं। Dream Meaning:अनजान लोगों से बात करना  स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आप किसी अनजान लोगों से सपने में बात करते हुए खुद को देख रहे हैं तो असल जीवन में आप अलग-थलग हो सकते हैं. इसका अर्थ है Dream Meaning आपका समाजित दायरा सीमित हो सकता है. दोस्त कम हो सकते हैं. इतना ही नहीं, ये सपना इस बातकी ओर भी इशारा करता है, तो आप अपनी बात को व्यक्त कर पाने में परेशानी का सामना कर रहे हैं. ऐसे में ऐसा सपना आने का बाद आप लोगों को अपने कम्यूनिकेशन स्किल को सुधराना चाहिए.   Dream Meaning:किसी अनजान व्यक्ति से गिफ्ट लेना अगर सपने में आपको कोई अनजान व्यक्ति सपने में आपको उपहार देते दिखाई देता है, तो खुश हो जाएं. इसका अर्थ है, आपको अचानक से धन लाभ हो सकता है या फिर जल्द कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है.   Dream Meaning:सपने में अनजान का पीछा करना  अगर आपको सपने में कोई अपरिचित व्यक्ति पीछा करते दिखाई देता है, तो इसका अर्थ डर से है. इसका मतलब है कि आप किसी बात को लेकर परेशान हैं. ऐसा कोई मामला है, जिसे आप सुलझा नहीं पा रहे हैं.  इसलिए अगर आपको लाइफ में ऐसा सपना दिखाई देता है, तो आपको जीवन के हर पहलू पर नजर दौड़ानी होगी और समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करें.  सपने में अनजान मृत शख्स का आना  स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आपके सपने में कोई अनजान शख्य को मृत् अवस्था में दिखाई देता है, तो समझ लें कि आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या हो सकती है. ऐसे में आपको सेहत को लेकर बहुत सतर्कता बरतनी होगी.  (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Shri Chitragupt Aarti:श्री चित्रगुप्त जी की आरती

Chitragupt Aarti:श्री चित्रगुप्त जी की आरती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो अपने कर्मों का मूल्यांकन और सुधार करना चाहते हैं। Chitragupt Aarti चित्रगुप्त जी को कर्मों के लेखा-जोखा के देवता माना जाता है, जो यमराज के साथ प्रत्येक व्यक्ति के कर्मों का हिसाब रखते हैं। उनकी आरती से जीवन में ईमानदारी, सत्कर्म, और धार्मिकता का विकास होता है। Chitragupt Aarti:श्री चित्रगुप्त जी की आरती के लाभ श्री Chitragupt Aarti चित्रगुप्त जी की आरती करते समय मन को एकाग्र और कर्मों के प्रति जागरूक बनाना चाहिए। उनकी आरती से भक्त को अपने कर्मों का सही मूल्यांकन करने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। Shri Chitragupt Aarti:श्री चित्रगुप्त जी की आरती श्री विरंचि कुलभूषण,यमपुर के धामी ।पुण्य पाप के लेखक,चित्रगुप्त स्वामी ॥ सीस मुकुट, कानों में कुण्डल,अति सोहे ।श्यामवर्ण शशि सा मुख,सबके मन मोहे ॥ भाल तिलक से भूषित,लोचन सुविशाला ।शंख सरीखी गरदन,गले में मणिमाला ॥ अर्ध शरीर जनेऊ,लंबी भुजा छाजै ।कमल दवात हाथ में,पादुक परा भ्राजे ॥ नृप सौदास अनर्थी,था अति बलवाला ।आपकी कृपा द्वारा,सुरपुर पग धारा ॥ भक्ति भाव से यह,आरती जो कोई गावे ।मनवांछित फल पाकर,सद्गति पावे ॥

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Aarti Shri Bhagwat Geeta Aarti:भगवद्‍ गीता आरती

Bhagwat Geeta Aarti:भगवद् गीता की आरती का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। गीता का संदेश जीवन के वास्तविक उद्देश्यों, कर्तव्यों, और आत्मज्ञान को समझने में सहायक होता है। गीता की आरती करने से Bhagwat Geeta Aarti भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है, जो जीवन में धैर्य, शांति, और आध्यात्मिक ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करती है। श्रीकृष्ण ने भगवद्‍ गीता में अर्जुन को जो उपदेश दिए थे, वे आज भी हर व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक हैं और जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शक हैं। Bhagwat Geeta Aarti:भगवद्‍ गीता आरती के लाभ Bhagwat Geeta Aarti:भगवद्‍ गीता आरती की विधि भगवद्‍ गीता की आरती से मन, बुद्धि और आत्मा को दिव्य आनंद की प्राप्ति होती है। यह व्यक्ति को अपने जीवन के धर्म और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाती है और उसे जीवन में सफलता, शांति और संतोष का अनुभव कराती है। Aarti Shri Bhagwat Geeta Aarti:भगवद्‍ गीता आरती जय भगवद् गीते,जय भगवद् गीते ।हरि-हिय-कमल-विहारिणि,सुन्दर सुपुनीते ॥ कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,कामासक्तिहरा ।तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,विद्या ब्रह्म परा ॥जय भगवद् गीते…॥ निश्चल-भक्ति-विधायिनि,निर्मल मलहारी ।शरण-सहस्य-प्रदायिनि,सब विधि सुखकारी ॥जय भगवद् गीते…॥ राग-द्वेष-विदारिणि,कारिणि मोद सदा ।भव-भय-हारिणि,तारिणि परमानन्दप्रदा ॥जय भगवद् गीते…॥ आसुर-भाव-विनाशिनि,नाशिनि तम रजनी ।दैवी सद् गुणदायिनि,हरि-रसिका सजनी ॥जय भगवद् गीते…॥ समता, त्याग सिखावनि,हरि-मुख की बानी ।सकल शास्त्र की स्वामिनी,श्रुतियों की रानी ॥जय भगवद् गीते…॥ दया-सुधा बरसावनि,मातु! कृपा कीजै ।हरिपद-प्रेम दान कर,अपनो कर लीजै ॥जय भगवद् गीते…॥ जय भगवद् गीते,जय भगवद् गीते ।हरि-हिय-कमल-विहारिणि,सुन्दर सुपुनीते ॥

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Shri Badrinath Aarti:श्री बद्रीनाथजी की आरती

Shri Badrinath Aarti:श्री बद्रीनाथजी की आरती भगवान विष्णु के एक रूप बद्रीनारायण की स्तुति में गाई जाती है। बद्रीनाथ मंदिर उत्तराखंड के चारधामों में से एक है और यह विशेष रूप से वैष्णव भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। Shri Badrinath Aarti यहाँ बद्रीनाथजी की आरती करने से मन की शांति, समृद्धि, और धर्म में रुचि का विकास होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बद्रीनाथजी की आराधना करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। Shri Badrinath Aarti:श्री बद्रीनाथजी की आरती के लाभ इस आरती का श्रद्धा और भक्ति भाव से पाठ करने से बद्रीनाथ भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है, Shri Badrinath Aarti जिससे भक्त को सभी सुख, शांति, और समृद्धि मिलती है। श्री बद्रीनाथजी की आरती की विधि बद्रीनाथजी की आरती करने से व्यक्ति की धार्मिकता में वृद्धि होती है और उसके जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति का वास होता है। Shri Badrinath Aarti:श्री बद्रीनाथजी की आरती पवन मंद सुगंध शीतल,हेम मंदिर शोभितम् ।निकट गंगा बहत निर्मल,श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥ शेष सुमिरन करत निशदिन,धरत ध्यान महेश्वरम् ।वेद ब्रह्मा करत स्तुति,श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ शक्ति गौरी गणेश शारद,नारद मुनि उच्चारणम् ।जोग ध्यान अपार लीला,श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर,धूप दीप प्रकाशितम् ।सिद्ध मुनिजन करत जय जय,बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ यक्ष किन्नर करत कौतुक,ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम् ।श्री लक्ष्मी कमला चंवरडोल,श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ कैलाश में एक देव निरंजन,शैल शिखर महेश्वरम् ।राजयुधिष्ठिर करत स्तुति,श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ श्री बद्रजी के पंच रत्न,पढ्त पाप विनाशनम् ।कोटि तीर्थ भवेत पुण्य,प्राप्यते फलदायकम् ॥॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥ पवन मंद सुगंध शीतल,हेम मंदिर शोभितम् ।निकट गंगा बहत निर्मल,श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥

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Maa Kali arti:आरती: माँ महाकाली 

Maa Kali arti:माँ महाकाली की आरती का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। माँ काली को शक्ति, साहस, और रक्षक देवी माना जाता है। वे विनाश और पुनः सृजन की देवी हैं, जो भक्तों को निडरता, आत्मबल, और संकटों से मुक्ति प्रदान करती हैं। उनकी आरती करने से जीवन में नकारात्मकता का नाश होता है और भक्त में शक्ति और साहस का संचार होता है। Maa Kali arti माँ काली की आराधना से भक्त को हर प्रकार के भय और कष्टों से मुक्ति मिलती है। Maa Kali arti:माँ महाकाली की आरती के लाभ इस आरती का नियमित रूप से श्रद्धा और भावपूर्वक पाठ करने से माँ काली की कृपा से जीवन में सुख, शांति, और सुरक्षा का अनुभव होता है। Maa Kali arti:माँ महाकाली की आरती की विधि Maa Kali arti माँ महाकाली की आरती से भक्तों का मन और आत्मा शुद्ध होती है, और माँ काली के आशीर्वाद से जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा प्राप्त होती है। Aarti: Maa Maha Kali:आरती: माँ महाकाली  जय काली माता, माँ जय महा काली माँ।रतबीजा वध कारिणी माता।सुरनर मुनि ध्याता, माँ जय महा काली माँ॥ दक्ष यज्ञ विदवंस करनी माँ शुभ निशूंभ हरलि।मधु और कैितभा नासिनी माता।महेशासुर मारदिनी, ओ माता जय महा काली माँ॥ हे हीमा गिरिकी नंदिनी प्रकृति रचा इत्ठि।काल विनासिनी काली माता।सुरंजना सूख दात्री हे माता॥ अननधम वस्तराँ दायनी माता आदि शक्ति अंबे।कनकाना कना निवासिनी माता।भगवती जगदंबे, ओ माता जय महा काली माँ॥ दक्षिणा काली आध्या काली, काली नामा रूपा।तीनो लोक विचारिती माता धर्मा मोक्ष रूपा॥ ॥ जय महा काली माँ ॥

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Arti Bhagwan Shri Sheetalnath Ji:आरती: भगवान श्री शीतलनाथ जी

Arti Bhagwan Shri Sheetalnath:भगवान श्री शीतलनाथ जी की आरती का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। शीतलनाथ जी, जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर, भक्तों के लिए करुणा, शांतिप्रद मार्ग, और कल्याणकारी भावना के प्रतीक हैं। उनकी आरती से मानसिक शांति, शीतलता, और रोगों से मुक्ति मिलती है। विशेषतौर पर Arti Bhagwan Shri Sheetalnath शीतलनाथ जी की आरती करने से शांति और संयम का विकास होता है, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है। Arti Bhagwan Shri Sheetalnath:भगवान श्री शीतलनाथ जी की आरती के लाभ Arti Bhagwan Shri Sheetalnath:भगवान श्री शीतलनाथ जी की आरती का महत्व भगवान श्री शीतलनाथ Arti Bhagwan Shri Sheetalnath जी की आरती करने से जीवन में शांति, समर्पण, और धर्म की ओर झुकाव बढ़ता है। उनकी पूजा और आरती से व्यक्ति के कर्मों का शुद्धिकरण होता है, जो मोक्ष की ओर बढ़ने में सहायक है। विशेष रूप से जैन पर्व और महत्वपूर्ण अवसरों पर उनकी आरती करने से भक्त को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और समृद्धि का अनुभव होता है। यदि आप शीतलनाथ Arti Bhagwan Shri Sheetalnath जी की आरती को नियमित रूप से करते हैं, तो यह आपके जीवन में शांति, संतोष, और मानसिक स्थिरता लेकर आती है। Arti Bhagwan Shri Sheetalnath Ji:आरती: भगवान श्री शीतलनाथ जी ॐ जय शीतलनाथ स्वामी,स्वामी जय शीतलनाथ स्वामी।घृत दीपक से करू आरती,घृत दीपक से करू आरती।तुम अंतरयामी,ॐ जयशीतलनाथ स्वामी॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ भदिदलपुर में जनम लिया प्रभु,दृढरथ पितु नामी,दृढरथ पितु नामी।मात सुनन्दा के नन्दा तुम,शिवपथ के स्वामी॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ जन्म समय इन्द्रो ने,उत्सव खूब किया,स्वामी उत्सव खूबकिया ।मेरु सुदर्शन ऊपर,अभिषेक खूब किया॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ पंच कल्याणक अधिपति,होते तीर्थंकर,स्वामी होते तीर्थंकर ।तुम दसवे तीर्थंकर स्वामी,हो प्रभु क्षेमंकर॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ अपने पूजक निन्दक केप्रति,तुम हो वैरागी,स्वामी तुम हो वैरागी ।केवल चित्त पवित्र करन नित,तुमपूजे रागी॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ पाप प्रणाशक सुखकारक,तेरे वचन प्रभो,स्वामी तेरे वचन प्रभो।आत्मा को शीतलता शाश्वत,दे तब कथन विभो॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ जिनवर प्रतिमा जिनवर जैसी,हम यह मान रहे,स्वामी हम यह मान रहे।प्रभो चंदानामती तब आरती,भाव दुःख हान करें॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी,स्वामी जय शीतलनाथ स्वामी।घृत दीपक से करू आरती,घृत दीपक से करू आरती।तुम अंतरयामी,ॐ जयशीतलनाथ स्वामी॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥

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Shri Bhagwat Bhagwan Ki Aarti:श्री भगवत भगवान की है आरती

Bhagwat Bhagwan Ki Aarti:श्री भगवत भगवान की आरती का गहन धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इसे करने से जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का आगमन होता है और नकारात्मकता दूर होती है। Bhagwat Bhagwan Ki Aarti श्री भगवत भगवान को समर्पित आरती उनके दिव्य स्वरूप और लीला का स्मरण कराते हुए भक्तों के मन में विश्वास और आस्था को और भी दृढ़ बनाती है। Bhagwat Bhagwan Ki Aarti:श्री भगवत भगवान की आरती के लाभ Bhagwat Bhagwan Ki Aarti:श्री भगवत भगवान की आरती का महत्व भगवत भगवान की आरती का नियमित रूप से पाठ करने से भक्त के मन में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है। इसमें भगवान की महिमा का वर्णन और उनके दिव्य कार्यों का स्मरण किया जाता है, जिससे भक्त की भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास प्रबल होता है। आरती करते समय भक्त भगवान से अपनी परेशानियों के समाधान, सुख-शांति, और उन्नति की कामना कर सकते हैं। Shri Bhagwat Bhagwan Ki Aarti:श्री भगवत भगवान की है आरती श्री भगवत भगवान की है आरती,पापियों को पाप से है तारती। ये अमर ग्रन्थ ये मुक्ति पन्थ,ये पंचम वेद निराला,नव ज्योति जलाने वाला।हरि नाम यही हरि धाम यही,यही जग मंगल की आरतीपापियों को पाप से है तारती॥॥ श्री भगवत भगवान की है आरती…॥ ये शान्ति गीत पावन पुनीत,पापों को मिटाने वाला,हरि दरश दिखाने वाला।यह सुख करनी, यह दुःख हरिनी,श्री मधुसूदन की आरती,पापियों को पाप से है तारती॥॥ श्री भगवत भगवान की है आरती…॥ ये मधुर बोल, जग फन्द खोल,सन्मार्ग दिखाने वाला,बिगड़ी को बनानेवाला।श्री राम यही, घनश्याम यही,यही प्रभु की महिमा की आरतीपापियों को पाप से है तारती॥॥ श्री भगवत भगवान की है आरती…॥ श्री भगवत भगवान की है आरती,पापियों को पाप से है तारती।

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kaal Bhairav Jayanti 2024:काल भैरव जयंती कब है? नोट कर लें डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि

kaal Bhairav :हर साल मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर काल भैरव जयंती मनाई जाती है। धार्मिक कथाओं के अनुसार इसी दिन काल भैरव का अवतरण हुआ था। इस साल 22 नवंबर, शुक्रवार को काल भैरव जयंती है। kaal Bhairav :काल भैरव जयंती, जिसे महाकाल या भैरव अष्टमी के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। इसे भगवान शिव के उग्र रूप kaal Bhairav काल भैरव के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने स्वयं काल भैरव का रूप धारण किया था, जो उनके विनाशकारी रूप का प्रतीक है। यह तिथि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है और इस वर्ष 2024 में काल भैरव जयंती 22 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इस पर्व का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में। 1. kaal Bhairav काल भैरव जयंती 2024 का शुभ मुहूर्त काल भैरव जयंती पर विशेष पूजा का आयोजन शुभ मुहूर्त में करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन काल भैरव की पूजा रात्रि के समय करना उत्तम होता है। आइए जानते हैं इस बार का शुभ मुहूर्त: अष्टमी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 22, 2024 को 06:07 पी एम बजे अष्टमी तिथि समाप्त – नवम्बर 23, 2024 को 07:56 पी एम बजे 2. काल भैरव का महत्व भगवान काल भैरव को हिंदू धर्म में समय, शक्ति और न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है। kaal Bhairav उनका स्वरूप अत्यंत भयंकर है, जो अन्याय और अधर्म का नाश करने के लिए विख्यात हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव ने काल भैरव को बुराइयों को समाप्त करने और शत्रुओं का संहार करने के लिए अवतरित किया था। इस दिन की पूजा से: 3. काल भैरव जयंती पर पूजा विधि kaal Bhairav काल भैरव जयंती पर पूजा की विधि का विशेष महत्व होता है। kaal Bhairav पूजा विधि का पालन सही तरीके से करने पर भगवान काल भैरव प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस पर्व पर की जाने वाली पूजा विधि इस प्रकार है: 3.1. संकल्प लें 3.2. दीपक जलाएं 3.3. फूल, अक्षत और भोग चढ़ाएं 3.4. काल भैरव स्तोत्र और मंत्र जाप 3.5. पान और शराब का भोग 3.6. रात्रि जागरण और भैरव भजन 4. kaal Bhairav काल भैरव जयंती का पुण्यफल और लाभ इस दिन काल भैरव की पूजा करने से जीवन में आने वाली हर प्रकार की समस्याओं से छुटकारा मिलता है। काल भैरव की कृपा से भक्तों को हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से रक्षा मिलती है। इसके अतिरिक्त इस दिन पूजा करने से: निष्कर्ष काल भैरव जयंती को भगवान शिव के क्रोध और शक्ति के रूप के रूप में मनाया जाता है। इस दिन की पूजा विधि और मान्यताओं के अनुसार, भक्तों को काल भैरव के आशीर्वाद से जीवन में सुरक्षा, साहस और सभी समस्याओं से मुक्ति प्राप्त होती है। काल भैरव जयंती पर विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और भगवान की कृपा सदैव बनी रहती है।

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तुलसी विवाह श्लोक (हिंदी, अंग्रेजी में अर्थ सहित): TULSI VIVAH 2024

तुलसी विवाह श्लोक (हिंदी, अंग्रेजी में अर्थ सहित) तुलसी विवाह में श्लोकों का पाठ किया जाता है जो भगवान विष्णु और माता की महिमा का वर्णन करते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख श्लोक हिंदी और अंग्रेजी में अर्थ सहित दिए गए हैं: 1. तुलसी स्तुति श्लोकत्वं तुलसी जगन्माता विष्णोश्च प्रियवल्लभा।नमस्ते नारदनुते नारायणमनः प्रिये॥ हिंदी अर्थहे तुलसी! आप इस जगत की माता हैं और भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी हैं। नारद मुनि ने आपकी महिमा का गान किया है। नारायण के मन को प्रिय हो, आपको प्रणाम। English TranslationO Tulsi! You are the mother of the universe and the beloved of Lord Vishnu. Sage Narada has sung your praises. You are dear to the heart of Narayana. I bow to you. 2. विष्णु स्तुति (श्री विष्णु मंत्र) श्लोकॐ नमो भगवते वासुदेवाय। हिंदी अर्थमैं भगवान वासुदेव को प्रणाम करता हूँ। English TranslationI bow to Lord Vasudeva. 3. तुलसी विवाह के लिए विशेष श्लोक श्लोकधर्मात्मनो महावीर्या धर्मिष्टे धर्मपूजिते।धर्मिष्ठो धर्मिणां श्रेष्ठो विष्णुस्तुलस्याः पतिः सदा॥ हिंदी अर्थतुलसी का विवाह हमेशा भगवान विष्णु से ही होता है, जो धर्म के रक्षक, महावीर, और सभी धार्मिक अनुष्ठानों के पालनकर्ता हैं। English TranslationTulsi’s marriage is always with Lord Vishnu, the protector of Dharma, the mighty one, and the upholder of all religious rituals. 4. माता विवाह मंत्र श्लोकत्वं लक्ष्मी साक्षाद् विष्णुपत्नी, त्वं भव सदा मंगलप्रदा।त्वया युक्तो हरिः साक्षात् तुलसी त्वां नमाम्यहम्॥ हिंदी अर्थहे माता , आप लक्ष्मी का रूप हैं और भगवान विष्णु की पत्नी हैं। आप सदा मंगल प्रदान करने वाली हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ। English TranslationO Tulsi, you are the form of Lakshmi and the consort of Lord Vishnu. You are always auspicious and bless us with prosperity. I bow to you. 5. मंत्र माता के विवाह के दौरान श्लोकतुलस्यामृतजन्मासि सदा त्वं केशवप्रिय।केशवस्त्वां पाणिग्राहिष्यति कं सन्निधौ॥ हिंदी अर्थहे तुलसी! आप अमृत स्वरूप हैं और सदा केशव (भगवान विष्णु) को प्रिय हैं। आपके विवाह में केशव (विष्णु) आपके पति बनेंगे। English TranslationO Tulsi! You are born of nectar and are always dear to Keshava (Lord Vishnu). In your wedding, Keshava (Vishnu) will become your husband. इन श्लोकों का उच्चारण विवाह के दौरान शुभ और पुण्यदायक माना गया है। ये श्लोक भगवान विष्णु और माता की पवित्रता और महत्व को दर्शाते हैं।

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TULSI VIVAH 2024:तुलसी विवाह: महत्व, विधि, और वेदों में प्रमाण

TULSI VIVAH:तुलसी विवाह: महत्व, विधि, और वेदों में प्रमाण TULSI VIVAH तुलसी विवाह हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जो कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे देवउठनी एकादशी भी कहते हैं, पर मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का विवाह तुलसी माता से किया जाता है। इस पूजा का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है, और इसका उल्लेख वेदों एवं पुराणों में भी मिलता है। तुलसी विवाह को शुभ विवाहों का आरंभ भी माना जाता है, और ऐसा माना जाता है कि इसके बाद सभी मांगलिक कार्य जैसे शादी-विवाह पुनः आरंभ हो जाते हैं। TULSI VIVAH तुलसी विवाह का महत्व तुलसी का विवाह एक धार्मिक और पौराणिक अनुष्ठान है, जिसमें भगवान विष्णु के अवतार शालिग्राम जी का विवाह माता तुलसी से संपन्न किया जाता है। इसे धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। पद्म पुराण में बताया गया है कि जो भक्त तुलसी विवाह कराते हैं, वे असीम पुण्य के भागी होते हैं। ऐसा माना जाता है कि तुलसी विवाह से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है। इसके अलावा, तुलसी को जीवनदायिनी औषधि माना गया है, और इसके धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों ही लाभ होते हैं। TULSI VIVAH तुलसी विवाह का वेदों में प्रमाण तुलसी विवाह का उल्लेख विभिन्न वेदों और पुराणों में मिलता है। स्कंद पुराण, पद्म पुराण, और गरुड़ पुराण में तुलसी माता के महत्व और उनके विवाह का वर्णन किया गया है। स्कंद पुराण में तुलसी को लक्ष्मी का अवतार माना गया है, और उनके विवाह से संबंधित कथाएं दी गई हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी माता का जन्म वृंदा नाम की एक असुर कन्या के रूप में हुआ था। उनकी भक्ति और पवित्रता के कारण उन्हें विष्णु जी की पत्नी बनने का वरदान मिला। वेदों में तुलसी को जीवन का प्रतीक माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार, तुलसी के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वहीं, धार्मिक दृष्टिकोण से, तुलसी माता के पूजन से व्यक्ति को सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसलिए तुलसी विवाह एक धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ एक आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी है। TULSI VIVAH तुलसी विवाह के लाभ TULSI VIVAH तुलसी विवाह की पूजन सामग्री तुलसी विवाह में विशेष पूजा सामग्री का उपयोग किया जाता है। यह सामग्री पूजा की शुद्धता और प्रभाव को बढ़ाती है तुलसी विवाह की पूजा विधि तुलसी विवाह की पूजा विधि सरल है, परंतु इसे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ किया जाना चाहिए: तुलसी विवाह के मंत्र और स्तोत्र तुलसी विवाह में श्री विष्णु मंत्र और तुलसी स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, विष्णु सहस्रनाम और तुलसी चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। यह माना जाता है कि इन मंत्रों के उच्चारण से वातावरण पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। निष्कर्ष तुलसी विवाह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना भी है। इसका पालन कर हम भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। तुलसी विवाह के आयोजन से हमें धार्मिक, सामाजिक, और पारिवारिक लाभ प्राप्त होते हैं। इसका महत्व वेदों और पुराणों में भी दर्शाया गया है, जिससे इसकी प्राचीनता और पवित्रता का पता चलता है। तुलसी विवाह का आयोजन करके न केवल हम अपने घर में सुख-समृद्धि ला सकते हैं, बल्कि इसका पुण्य फल भी प्राप्त कर सकते हैं। इस पवित्र अनुष्ठान को श्रद्धा और विश्वास के साथ संपन्न करें और तुलसी माता एवं भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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Tulsi Aarti – Maharani Namo Namo:तुलसी आरती – महारानी नमो-नमो

“Tulsi Aarti:तुलसी जी की आरती”: लाभ, महत्व और चमत्कारी फायदे Tulsi Aarti:तुलसी जी की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि तुलसी को हिंदू धर्म में एक पूजनीय और पवित्र पौधा माना गया है। तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय माना जाता है, और उनकी आरती करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। “Tulsi Aarti तुलसी जी की आरती” का नियमित पाठ परिवार और घर के लिए लाभकारी माना जाता है। आइए जानते हैं तुलसी जी की आरती के लाभ, महत्व, और इसे करने के विशेष फायदे। 1. सकारात्मक ऊर्जा का संचार तुलसी जी की Tulsi Aarti आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। तुलसी को वातावरण को शुद्ध करने वाला पौधा माना गया है, और उनकी आरती करने से घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक रहता है। इससे घर में शांति और खुशहाली बनी रहती है। 2. स्वास्थ्य लाभ और रोगों से मुक्ति Tulsi Aarti:तुलसी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है और उसकी आरती करने से स्वास्थ्य लाभ होता है। तुलसी की पूजा करने से व्यक्ति रोगों से सुरक्षित रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। तुलसी की आरती करने से स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं में कमी आती है। 3. परिवार में सुख-शांति और समृद्धि तुलसी जी की आरती करने से परिवार में सुख-शांति का वास होता है। इससे परिवार के सभी सदस्य प्रेम, एकता और सद्भाव से रहते हैं। तुलसी माता का आशीर्वाद प्राप्त करने से घर में समृद्धि और आर्थिक उन्नति का अनुभव होता है। 4. धार्मिक पुण्य और ईश्वर का आशीर्वाद तुलसी जी की आरती करने से व्यक्ति को धार्मिक पुण्य और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Tulsi Aarti तुलसी जी का पूजन करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में सभी प्रकार की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। 5. वास्तु दोष से मुक्ति तुलसी का पौधा घर के वास्तु दोष को दूर करने में सहायक माना जाता है। तुलसी जी की आरती करने से घर में वास्तु दोष से उत्पन्न समस्याएं दूर होती हैं और परिवार में खुशहाली का वातावरण बनता है। तुलसी माता के आशीर्वाद से घर में सकारात्मकता बनी रहती है। 6. पारिवारिक कलह का नाश तुलसी जी की आरती का नियमित पाठ परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम और सद्भावना को बढ़ाता है। Tulsi Aarti इससे पारिवारिक कलह समाप्त होती है और परिवार में सामंजस्य बना रहता है। तुलसी माता का आशीर्वाद परिवार को एकजुट रखता है। 7. मन और आत्मा की शांति तुलसी जी की Tulsi Aarti आरती का नियमित पाठ करने से मन को शांति और आत्मा को सुकून मिलता है। यह आरती मानसिक शांति प्रदान करती है और नकारात्मक विचारों को दूर करती है। इससे व्यक्ति का मन शांत और संयमित रहता है। 8. धन-धान्य की वृद्धि और आर्थिक समृद्धि तुलसी जी की आरती करने से धन-धान्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह आरती घर में आर्थिक स्थिरता और संपन्नता लाती है। तुलसी माता की कृपा से व्यक्ति के जीवन में आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं। 9. धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति तुलसी जी की आरती व्यक्ति को धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर ले जाती है। यह आरती भगवान विष्णु की भक्ति को और भी गहरा बनाती है और व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन को मजबूत बनाती है। तुलसी माता का आशीर्वाद मिलने से आध्यात्मिक मार्ग पर सफलता मिलती है। 10. बीमारियों से सुरक्षा और स्वास्थ्य में सुधार तुलसी जी की आरती करने से व्यक्ति को बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। तुलसी के औषधीय गुणों के कारण यह शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाता है। तुलसी माता की आरती करने से परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ और निरोग रहते हैं। 11. प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा तुलसी माता को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा देने वाली देवी माना गया है। तुलसी जी की आरती करने से व्यक्ति और उसका परिवार प्राकृतिक आपदाओं जैसे आंधी, तूफान, और अन्य विपदाओं से सुरक्षित रहता है। तुलसी माता का आशीर्वाद परिवार को इन संकटों से बचाने में सहायक होता है। 12. जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति तुलसी जी की आरती का नियमित पाठ जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने का मार्ग है। यह आरती भगवान विष्णु और तुलसी माता की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है। नियमित रूप से इसे गाने या सुनने से जीवन में सौभाग्य, खुशहाली और समृद्धि का अनुभव होता है। निष्कर्ष “तुलसी जी की आरती” का नियमित पाठ व्यक्ति और परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। यह आरती सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य, और आर्थिक उन्नति का कारण बनती है। तुलसी माता के आशीर्वाद से घर में शांति, संतोष, और सुरक्षा बनी रहती है। Tulsi Aarti – Maharani Namo Namo:तुलसी आरती – महारानी नमो-नमो माँ Tulsi Aarti तुलसी पूजन, तुलसी विवाह एवं कार्तिक माह में माँ तुलसी की आरती सबसे अधिक श्रवण की जाती है। तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो । धन तुलसी पूरण तप कीनो,शालिग्राम बनी पटरानी ।जाके पत्र मंजरी कोमल,श्रीपति कमल चरण लपटानी ॥ तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो । धूप-दीप-नवैद्य आरती,पुष्पन की वर्षा बरसानी ।छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन,बिन तुलसी हरि एक ना मानी ॥ तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो । सभी सखी मैया तेरो यश गावें,भक्तिदान दीजै महारानी ।नमो-नमो तुलसी महारानी,तुलसी महारानी नमो-नमो ॥ तुलसी महारानी नमो-नमो,हरि की पटरानी नमो-नमो ।

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