शुक्रवार के ये उपाय बदल देंगे आपकी किस्मत! घर में दौड़ी आएंगी मां लक्ष्मी

Shukrawar Ke Upay: शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन-संपत्ति का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन कुछ खास उपाय करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसलिए आज हम आपको शुक्रवार के दिन किए जाने वाले कुछ अचूक उपाय बताने जा रहे हैं, जिससे घर में धन के साथ-साथ सुख-शांति भी आएगी. हिंदू धर्म में हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से मां लक्ष्मी की पूजा- अर्चना करनी चाहिए। मां लक्ष्मी को धन की देवी भी कहा जाता है।  मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार के दिन कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं। इन उपायों को करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय मां को लाल वस्त्र अर्पित करें maa ko lal bastra arpeet kare मां लक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें maa laximi ko pusp arpeet kare विष्णु भगवान की पूजा करें bhagwan vishnu ki puja kare खीर का भोग लगाएं kheer ka bhog lagaye शुक्रवार के दिन श्री लक्ष्मीनारायण भगवान और मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं। इस उपाय को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और धन- लाभ होता है।  मंत्र जाप Mantra jap मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को इन मंत्रों का जाप करें: दिन ॐ शुं शुक्राय नम: या ॐ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहं. दान करें सफेद वस्तुएं dan kare safed bastuye शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ ही सफेद रंग की वस्तुएं जैसे सफेद कपड़े, चावल, आटा, चीनी, दूध और दही का दान करें. शास्त्रों के अनुसार सफेद रंग मां लक्ष्मी को प्रिय है. कलह-कलेश से मुक्ति अगर आपके घर में लगातार कलह-कलेश रहता है तो हर शुक्रवार को गाय को रोटी खिलाना शुरू कर दें. गाय को रोटी खिलाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. अखंड ज्योति akhand jyoti अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो शुक्रवार को मां लक्ष्मी की मूर्ति के सामने 11 दिनों तक अखंड ज्योति जलाएं.  ऐसा करने से आपको आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. कमल गट्टे की माला kamal gatte ki mala अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने और धन की कमी से छुटकारा पाने के लिए हर शुक्रवार को कमल गट्टे की माला से देवी लक्ष्मी का नाम जपें. इससे देवी लक्ष्मी की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी. जल चढ़ाने का उपाय jal chadane ka uppay शुक्रवार के दिन नीम के पेड़ पर जल चढ़ाएं क्योंकि इसे देवी दुर्गा का एक रूप माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति मिलती है.

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Vishnu Puja Vidhi: भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए इस तरीके से करें पूजा-अर्चना, उत्तम फल की होगी प्राप्ति

Vishnu Puja Vidhi:सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना आप कभी भी कर सकते हैं। लेकिन गुरुवार के दिन श्रीहरि की पूजा अत्यंत ही मंगलकारी मानी गई है। भगवान विष्णु की पूजा से जीवन के सभी दुखों का अंत हो जाता है। सनातन परंपरा में सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु Vishnu Puja Vidhi की पूजा-अर्चना करने से मनचाहा फल प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं में भी श्रीहरि विष्णु की पूजा किए जाने से कई कष्टों से मुक्ति मिलने के साथ ही उनकी कृपा प्राप्त होने का उल्लेख मिलता है। भगवान विष्णु की पूजा के लिए गुरुवार का दिन अत्यंत ही शुभ और मंगलकारी माना गया है। मान्यता के अनुसार, श्रीहरि भगवान विष्णु की गुरुवार के दिन पूजा-अर्चना से वे शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और जीवन से जुड़े सभी सुखों की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि कभगवान विष्णु Vishnu Puja Vidhi की पूजा से व्यक्ति के पूर्व जन्म और इस जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही व्यक्ति को पुण्यफल की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु की साधना-आराधना करने से धन-संपदा के साथ ही वैवाहिक सुखों की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की किस विधि से पूजा करनी चाहिए Vishnu Puja Vidhi और उनके किस मंत्र का जाप करना चाहिए। श्रीहरि की कृपा पाने के लिए करें इसका पाठ vishnu ki krapa pane ke liye kare eska path Vishnu Puja Vidhi भगवान श्रीहरि की कृपा पाने के लिए आप उनके सरल मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ नमो नारायण’ और ‘श्रीमन नारायण नारायण हरि-हरि’ का पूरे श्रद्धा और भक्ति से जाप करें। इसके अलावा आप विष्णु सहस्त्रनाम, गजेंद्र मोक्ष और नारायण कवच आदि का पाठ कर सकते हैं। इनका पाठ करने से आप पर निश्चित ही भगवान विष्णु की विशेष कृपा बरसती है।  मां लक्ष्मी संग करें नारायण की पूजा maa laximi sang kare narayan ki puja Vishnu Puja Vidhi अगर आप आर्थिक रूप से परेशान हैं तो भगवान विष्णु Vishnu Puja Vidhi के साथ मां लक्ष्मी का पूजन जरूर करना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली हल्दी का प्रयोग आप मां लक्ष्मी को भी प्रसन्न करने के लिए कर सकते हैं। मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए धन की देवी को 5 हल्दी की साबुत गांठें अर्पित करें। इसके बाद उन हल्दी की गांठों को अगले दिन लाल कपड़े में लपेट कर अपने धन वाले स्थान पर रख दें। इस उपाय को करने से आपको मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने लगेगी। भगवान विष्णु की पूजा विधि (Lord Vishnu Puja Vidhi) भगवान विष्णु की आरती (Lord Vishnu Aarti) ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे। भगवान विष्णु की आरती भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे। जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे। मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे। दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे। विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, सन्तन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे। श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय जगदीश हरे।

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Ketu Stotra:केतु स्तोत्र

Ketu Stotra:केतु स्तोत्र: केतु स्तोत्र स्कंद पुराण से लिया गया है! किसी भी व्यक्ति की कुंडली में यदि केतु ग्रह बुरे प्रभाव में हो या गोचर में हो या फिर ग्रह की स्थिति खराब हो और हृदय में अशुभता हो तो दिए गए केतु के प्रतिदिन जाप से केतु से संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिलती है। केतु स्तोत्र के प्रतिदिन पाठ से केतु अपना बुरा प्रभाव छोड़कर अच्छा परिणाम देने लगता है। दक्षिण नोड या केतु को पिछले जन्म के कठिन कर्मों का बिंदु माना जाता है जिसमें व्यक्ति ने दूसरों की कीमत पर अपने स्वार्थ को आगे बढ़ाया। सकारात्मक पक्ष पर दक्षिण नोड मजबूत एकाग्रता और अस्पष्ट या रहस्यमय विषयों पर महारत विकसित कर सकता है। केतु अच्छे या बुरे के लिए अचानक और अप्रत्याशित परिणाम देता है। आध्यात्मिक मोर्चे पर केतु अधिक वास्तविक तरीके से धारणा, मुक्ति, ज्ञान और मानसिक संवेदनशीलता देता है। केतु एक छाया ग्रह है और ऋषि कश्यप और सिमिहिका नामक एक राक्षस का पुत्र है। वह एक सर्प के सिर के साथ पैदा हुआ था। जब मोहिनी (भगवान विष्णु का स्त्री रूप) देवताओं को अमृत बांट रही थी, तब केतु ने पंक्ति में प्रवेश किया और अमृत पी लिया। Ketu Stotra सूर्य और चंद्रमा ने यह देखा और भगवान विष्णु को इसकी जानकारी दी। भगवान विष्णु ने उसे दो टुकड़ों में काट दिया। सिर वाला टुकड़ा राहु है। बिना सिर वाला टुकड़ा केतु है। दोनों टुकड़े जीवित रहे और घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में पृथ्वी की परिक्रमा करते रहे। केतु उन सभी समस्याओं का कारण है जो मंगल ग्रह द्वारा उत्पन्न की जाती हैं। केतु एक ग्रह के रूप में हानिकारक और लाभकारी दोनों हो सकता है। एक अच्छा केतु अचानक ऊर्जा, मुक्ति, विवेक, आदर्शवाद, करुणा, आत्म-बलिदान और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। इसे एक महान सलाहकार और यात्रा के स्वामी के रूप में जाना जाता है। एक कमजोर केतु कठोर और क्रूर हो सकता है, और चीजों को दूर ले Ketu Stotra जाने के लिए जाना जाता है। केतु स्तोत्र रीढ़ और तंत्रिका तंत्र के रोग, घाव, चोट, मोटापा, घुटने की समस्या, मानसिक अस्थिरता और थकान जैसी संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत देता है। Ketu Stotra ke labh केतु स्तोत्र के लाभ ऐसा माना जाता है कि केतु स्तोत्र व्यक्ति के जीवन में समृद्धि के साथ-साथ बुद्धि, ज्ञान, अच्छा स्वास्थ्य और आध्यात्मिक ऊंचाइयां भी लाता है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए? जिन व्यक्तियों के केतु अशुभ होते हैं, उन्हें भौतिक हानि, मानसिक अशांति, असीम चिंताएं, एकाग्रता में कमी और अनावश्यक अवसाद का सामना करना पड़ सकता है, उन्हें वैदिक पद्धति के अनुसार केतु स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। केतु स्तोत्र | Ketu Stotra केतु: काल: कलयिता धूम्रकेतुर्विवर्णक:। लोककेतुर्महाकेतु: सर्वकेतुर्भयप्रद: ।।1।। रौद्रो रूद्रप्रियो रूद्र: क्रूरकर्मा सुगन्ध्रक्। फलाशधूमसंकाशश्चित्रयज्ञोपवीतधृक् ।।2।। तारागणविमर्दो च जैमिनेयो ग्रहाधिप:। पंचविंशति नामानि केतुर्य: सततं पठेत् ।।3।। तस्य नश्यंति बाधाश्चसर्वा: केतुप्रसादत:। धनधान्यपशूनां च भवेद् व्रद्विर्नसंशय: ।।4।।

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Krishna Stotra: कृष्ण स्तोत्र

Krishna Stotra:कृष्ण स्तोत्र:श्री कृष्ण भगवान विष्णु के 8वें अवतार के रूप में जाने जाते हैं। कृष्ण का प्रभाव दुनिया भर में है और उनके लाखों अनुयायी हैं जिन्होंने अपना जीवन भगवान कृष्ण को समर्पित कर दिया है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के केवल दो अवतारों को दुनिया में सबसे अधिक प्रसिद्धि मिली – राम और कृष्ण। अन्य अवतारों के बारे में केवल वही लोग जानते हैं जिन्हें हिंदू पौराणिक कथाओं का गहरा ज्ञान है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अगर स्तोत्र का सही तरीके से उच्चारण नहीं किया जाता है, तो वे प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। 13 चमत्कारी कृष्ण मंत्र हैं जो आपको प्रचुरता, धन और समृद्धि प्रदान करेंगे। प्राचीन भारत के बुद्धिमान पुरुषों और ऋषियों ने सप्ताह के एक दिन को किसी विशेष भगवान की पूजा करने के लिए निर्धारित किया था। ऐसा माना जाता है Krishna Stotra कि उन्हें समर्पित दिन पर भगवान की प्रार्थना और पूजा करने से वे आसानी से प्रसन्न होते हैं और आपको अच्छे लाभ प्राप्त करने में मदद करते हैं। बुधवार का दिन भगवान कृष्ण को समर्पित है। भगवान कृष्ण के भक्त उनके समर्पित मंदिरों में जाते हैं। वे अक्सर भगवान को प्रसन्न करने के लिए व्रत और उपवास रखते हैं। भगवान कृष्ण को समर्पित मंदिरों में बुधवार को विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। Krishna Stotra हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार कृष्ण स्तोत्र का नियमित जाप भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने का सबसे शक्तिशाली तरीका है। Krishna Stotra सर्वोत्तम परिणाम पाने के लिए आपको सुबह स्नान करने के बाद भगवान कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर के सामने कृष्ण स्तोत्र का जाप करना चाहिए। इसके प्रभाव को अधिकतम करने के लिए आपको सबसे पहले हिंदी में कृष्ण मंत्र का अर्थ समझना चाहिए। यह कृष्ण स्तोत्र बुधवार को जपे जाने वाले सबसे लोकप्रिय मंत्रों में से एक है। भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए कई अन्य मंत्र भी जपे जाते हैं। Krishna Stotra ke labh:कृष्ण स्तोत्र के लाभ बेहतर परिणामों के लिए, सुबह स्नान के बाद 108 बार इस कृष्ण स्तोत्र का जाप करें। इस मंत्र का जाप आपके जीवन को बाधा मुक्त और खुशहाल बना देगा। इस मंत्र का जाप करने से कहीं भी पैसा नहीं अटकेगा। यह कृष्ण स्तोत्र बहुत लाभकारी है लेकिन इसका जाप नियमित रूप से किया जाना चाहिए। इस कृष्ण स्तोत्र का नियमित जाप करने से सभी परेशानियाँ आपसे दूर रहेंगी। Krishna Stotra ka jap kese kare इस स्तोत्र का जाप किसे करना चाहिए जिन व्यक्तियों को धन की कमी है और कोई समाधान नहीं मिल रहा है, उन्हें नियमित रूप से इस कृष्ण स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। कृष्ण स्तोत्र | Krishna Stotra त्वं ब्रह्म परमं धाम निरीहो निरहंकृतिः । निर्गुणश्च निराकारः साकारस्सगुणः स्वयम् ॥ १ ॥ साक्षिरूपश्च निर्लिप्तः परमात्मा निराकृतिः । प्रकृतिः पुरुषस्त्वं च कारणं च तयोः परम् ॥ २ ॥ सृष्टिस्थित्यन्तविषये ये च देवास्त्रयः स्मृताः । ते त्वदंशास्सर्वबीजाः ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः॥ ३ ॥ यस्य लोम्नां च विवरे चाखिलं विश्वमीश्वर । महाविराण् महाविष्णुः त्वं तस्य जनको विभो ॥ ४ ॥ तेजस्त्वं चापि तेजस्वी ज्ञानं ज्ञानी च तत्परः । वेदेऽनिर्वचनीयस्त्वं कस्त्वां स्तोतुमिहेश्वरः ॥ ५ ॥ महदादेस्सृष्टिसूत्रं पञ्चतन्मात्रमेव च । बीजं त्वं सर्वशक्तीनां सर्वशक्तिस्वरूपकः ॥ ६ ॥ सर्वशक्तीश्वरः सर्वः सर्वशक्त्याश्रयस्सदा । त्वमनीहः स्वयंज्योतिः सर्वानन्दस्सनातनः ॥ ७ ॥ अहो आकारहीनस्त्वं सर्वविग्रहवानपि । सर्वेन्द्रियाणां विषयं जानासि नेन्द्रियी भवान् ॥ ८ ॥ सरस्वती जडीभूता यत्स्तोत्रे यन्निरूपणे । जडीभूतो महेशश्च शेषो धर्मो विधिः स्वयम् ॥ ९ ॥ पार्वती कमला राधा सावित्री वेदसूरपि । वेदश्च जडतां याति को वा शक्ता विपश्चितः ॥ १० ॥ वयं किं स्तवनं कुर्मः स्त्रियः प्राणेश्वरेश्वर । प्रसन्नो भव नो देव दीनबन्धो कृपां कुरु ॥ ११ ॥ विप्रपत्नीकृतं स्तोत्रं पूजाकाले च यः पठेत् । स गतिं विप्रपत्नीनां लभते नात्र संशयः ॥ १२ ॥

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 Kamala Stotram:कमला स्तोत्रम्

कमला स्तोत्रम् | Kamala Stotram कमला स्तोत्रम् (Kamala Stotram) ओंकाररूपिणी देवि विशुद्धसत्त्वरूपिणी।देवानां जननी त्वं हि प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी लक्ष्मी! आप ओंकारस्वरूपिणी हैं, आप विशुद्धसत्त्व गुणरूपिणीऔर देवताओं की माता हैम्। हे सुंदरी! आप हम पर प्रसन्न होम्। तन्मात्रंचैव भूतानि तव वक्षस्थलं स्मृतम्।त्वमेव वेदगम्या तु प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे सुंदरी! पंचभूत और पंचतन्मात्रा आपके वक्षस्थल हैं,केवल वेद द्वारा ही आपको जाना जाता है। आप मुझ पर कृपा करें। देवदानवगन्धर्वयक्षराक्षसकिन्नरः।स्तूयसे त्वं सदा लक्ष्मि प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी लक्ष्मी! देव, दानव, गंधर्व, यक्ष, राक्षस्और किन्नर सभी आपकी स्तुति करते हैम्। आप हम पर प्रसन्न होम्। लोकातीता द्वैतातीता समस्तभूतवेष्टिता।विद्वज्जनकीर्त्तिता च प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे जननी! आप लोक और द्वैत से परे और सम्पूर्ण भूतगणों सेघिरी हुई रहती हैं। विद्वान लोग सदा आपका गुण-कीर्तन करते हैं।हे सुंदरी! आप मुझ पर प्रसन्न होम्। परिपूर्णा सदा लक्ष्मि त्रात्री तु शरणार्थिषु।विश्वाद्या विश्वकत्रीं च प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी लक्ष्मी! आप नित्यपूर्णा शरणागतों का उद्धार करने वाली,विश्व की आदि और रचना करने वाली हैं। हे सुन्दरी! आप मुझ परप्रसन्न होम्। ब्रह्मरूपा च सावित्री त्वद्दीप्त्या भासते जगत्।विश्वरूपा वरेण्या च प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे माता! आप ब्रह्मरूपिणी, सावित्री हैं। आपकी दीप्ति से ही त्रिजगतप्रकाशित होता है, आप विश्वरूपा और वर्णन करने योग्य हैं।हे सुंदरी! आप मुझ पर कृपा करें। क्षित्यप्तेजोमरूद्धयोमपंचभूतस्वरूपिणी।बन्धादेः कारणं त्वं हि प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे जननी! क्षिति, जल, तेज, मरूत् और व्योमपंचभूतों की स्वरूप आप ही हैं। गंध, जल का रस,तेज का रूप, वायु का स्पर्श और आकाश में शब्द आप ही हैं।आप इन पंचभूतों के गुण प्रपंच का कारण हैं, आप हमपर प्रसन्न होम्। महेशे त्वं हेमवती कमला केशवेऽपि च।ब्रह्मणः प्रेयसी त्वं हि प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे देवी! आप शूलपाणि महादेवजी की प्रियतमा हैं। आप केशव कीप्रियतमा कमला और ब्रह्मा की प्रेयसी ब्रह्माणी हैं, आप हम परप्रसन्न होम्। चंडी दुर्गा कालिका च कौशिकी सिद्धिरूपिणी।योगिनी योगगम्या च प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप चंडी, दुर्गा, कालिका, कौशिकी,सिद्धिरूपिणी, योगिनी हैं। आपको केवल योग से ही प्राप्त किया जाता है।आप हम पर प्रसन्न होम्। बाल्ये च बालिका त्वं हि यौवने युवतीति च।स्थविरे वृद्धरूपा च प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप बाल्यकाल में बालिका, यौवनकाल में युवती औरवृद्धावस्था में वृद्धारूप होती हैं। हे सुन्दरी! आप हम परप्रसन्न होम्। गुणमयी गुणातीता आद्या विद्या सनातनी।महत्तत्त्वादिसंयुक्ता प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे जननी! आप गुणमयी, गुणों से परे, आप आदि, आप सनातनीऔर महत्तत्त्वादिसंयुक्त हैं। हे सुंदरी!आप हम पर प्रसन्न होम्। तपस्विनी तपः सिद्धि स्वर्गसिद्धिस्तदर्थिषु।चिन्मयी प्रकृतिस्त्वं तु प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे माता! आप तपस्वियों की तपःसिद्धि स्वर्गार्थिगणों कीस्वर्गसिद्धि, आनंदस्वरूप और मूल प्रकृति हैं।हे सुंदरी! आप हम पर प्रसन्न होम्। त्वमादिर्जगतां देवि त्वमेव स्थितिकारणम्।त्वमन्ते निधनस्थानं स्वेच्छाचारा त्वमेवहि॥ हे जननी! आप जगत् की आदि, स्थिति का एकमात्र कारण हैं। देह केअंत में जीवगण आपके ही निकट जाते हैं। आप स्वेच्छाचारिणी हैं।आप हम पर प्रसन्न होम्। चराचराणां भूतानां बहिरन्तस्त्वमेव हि।व्याप्यव्याकरूपेण त्वं भासि भक्तवत्सले॥ हे भक्तवत्सले! आप चराचर जीवगणों के बाहर और भीतर दोनोंस्थलों में विराजमान रहती हैं, आपको नमस्कार है। त्वन्मायया हृतज्ञाना नष्टात्मानो विचेतसः।गतागतं प्रपद्यन्ते पापपुण्यवशात्सदा॥ हे माता! जीवगण आपकी माया से ही अज्ञानी और चेतनारहित होकरपुण्य के वश से बारम्बार इस संसार में आवागमन करते हैं। तावन्सत्यं जगद्भाति शुक्तिकारजतं यथा।यावन्न ज्ञायते ज्ञानं चेतसा नान्वगामिनी॥ जैसे सीपी में अज्ञानतावश चांदी का भ्रम हो जाता है और फिरउसके स्वरूप का ज्ञान होने पर वह भ्रम दूर हो जाता है, वैसेही जब तक ज्ञानमयी चित्त में आपका स्वरूप नहीं जाना जाता है,तब तक ही यह जगत् सत्य भासित होता है, परन्तु आपके स्वरूपका ज्ञान हो जाने से यह सारा संसार मिथ्या लगने लगता है। त्वज्ज्ञानात्तु सदा युक्तः पुत्रदारगृहादिषु।रमन्ते विषयान्सर्वानन्ते दुखप्रदान् ध्रुवम्॥ जो मनुष्य आपके ज्ञान से पृथक रहते हुए जगत् को ही सत्यमानकर विषयों में लगे रहते हैं, निःसंदेह अंत में उनकोमहादुख मिलता है। त्वदाज्ञया तु देवेशि गगने सूर्यमण्डलम्।चन्द्रश्च भ्रमते नित्यं प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवेश्वरी! आपकी आज्ञा से ही सूर्य और चंद्रमा आकाश मण्डलमें नियमित भ्रमण करते हैम्। आप हम पर प्रसन्न होम्। ब्रह्मेशविष्णुजननी ब्रह्माख्या ब्रह्मसंश्रया।व्यक्ताव्यक्त च देवेशि प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवेश्वरी! आप ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर की भी जननी हैं।आप ब्रह्माख्या और ब्रह्मासंश्रया हैं, आप ही प्रगट और गुप्त रूपसे विराजमान रहती हैम्। हे देवी! आप हम पर प्रसन्न होम्। अचला सर्वगा त्वं हि मायातीता महेश्वरि।शिवात्मा शाश्वता नित्या प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप अचल, सर्वगामिनी, माया से परे,शिवात्मा और नित्य हैम्। हे देवी! आप हम पर प्रसन्न होम्। सर्वकायनियन्त्री च सर्वभूतेश्वरी।अनन्ता निष्काला त्वं हि प्रसन्ना भवसुन्दरि॥ हे देवी! आप सबकी देह की रक्षक हैं। आप सम्पूर्ण जीवों कीईश्वरी, अनन्त और अखंड हैम्। आप हम पर प्रसन्न होम्। सर्वेश्वरी सर्ववद्या अचिन्त्या परमात्मिका।भुक्तिमुक्तिप्रदा त्वं हि प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे माता! सभी भक्तिपूर्वक आपकी वंदना करते हैं। आपकी कृपासे ही भुक्ति और मुक्ति प्राप्त होती है। हे सुंदरि! आप हम परप्रसन्न होम्। ब्रह्माणी ब्रह्मलोके त्वं वैकुण्ठे सर्वमंगला।इंद्राणी अमरावत्यामम्बिका वरूणालये॥ हे माता! आप ब्रह्मलोक में ब्रह्माणी, वैकुण्ठ में सर्वमंगलाअमरावती में इंद्राणी और वरूणालय में अम्बिकास्वरूपिणी हैं।आपको नमस्कार है। यमालये कालरूपा कुबेरभवने शुभा।महानन्दाग्निकोणे च प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप यम के गृह में कालरूप, कुबेर के भवन मेंशुभदायिनी और अग्निकोण में महानन्दस्वरूपिणी हैं, हे सुन्दरी! आप हम पर प्रसन्न होम्।नैरृत्यां रक्तदन्ता त्वं वायव्यां मृगवाहिनी।पाताले वैष्णवीरूपा प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप नैरृत्य में रक्तदन्ता, वायव्य कोण में मृगवाहिनीऔर पाताल में वैष्णवी रूप से विराजमान रहती हैं। हे सुंदरी!आप हम पर प्रसन्न होम्। सुरसा त्वं मणिद्वीपे ऐशान्यां शूलधारिणी।भद्रकाली च लंकायां प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप मणिद्वीप में सुरसा, ईशान कोण में शूलधारिणी औरलंकापुरी में भद्रकाली रूप में स्थित रहती हैं। हे सुंदरी! आपहम पर प्रसन्न होम्। रामेश्वरी सेतुबन्धे सिंहले देवमोहिनी।विमला त्वं च श्रीक्षेत्रे प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप सेतुबन्ध में रामेश्वरी, सिंहद्वीप में देवमोहिनीऔर पुरूषोत्तम में विमला नाम से स्थित रहती हैं। हे सुंदरी!आप हम पर प्रसन्न होम्। कालिका त्वं कालिघाटे कामाख्या नीलपर्वत।विरजा ओड्रदेशे त्वं प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे देवी! आप कालीघाट पर कालिका, नीलपर्वत पर कामाख्या औरऔड्र देश में विरजारूप में विराजमान रहती हैं। हे सुंदरी!आप हम पर प्रसन्न होम्। वाराणस्यामन्नपूर्णा अयोध्यायां महेश्वरी।गयासुरी गयाधाम्नि प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे देवी! आप वाराणसी क्षेत्र में अन्नपूर्णा, अयोध्या नगरी मेंमाहेश्वरी और गयाधाम में गयासुरी रूप से विराजमान रहती हैं।हे सुंदरी! आप हम पर प्रसन्न होम्। भद्रकाली कुरूक्षेत्रे त्वंच कात्यायनी व्रजे।माहामाया द्वारकायां प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप कुरूक्षेत्र में भद्रकाली, वज्रधाम में कात्यायनी औरद्वारकापुरी में महामाया रूप में विराजमान रहती हैं। हे देवी! आपहम पर प्रसन्न होम। क्षुधा त्वं सर्वजीवानां वेला

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Putrada Ekadashi 2025 Date :पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, जानें सही तारीख और व्रत का महत्व

Putrada Ekadashi 2025 : पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को संतान सुख मिलता है। साथ ही व्यक्ति को सभी प्रकार की सुख सुविधाएं भी मिलती है। आइए जानते हैं साल 2025 में पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा 9 या 10 जनवरी। साथ ही जानें पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व । Putrada Ekadashi 2025 Date: साल 2025 में आने वाली सबसे पहली एकादशी है पुत्रदा एकादशी। वैसे तो सभी एकादशी का हिंदू धर्म में महत्व है। लेकिन, पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व हिंदू धर्म में बताया गया है।  पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। यह व्रत संतान प्राप्ति और संतान की सुख समृद्धि के लिए अति उत्तम माना गया है। Putrada Ekadashi 2025 पौष माह में आने वाला यह व्रत कई दंपतियों के जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला होता है। साल 2025 की पहली एकादशी पुत्रदा एकादशी ही है। ऐसे में इस दिन व्रत रखने से आप पूरे साल भर शुभ फल भी प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि, जनवरी के महीने में पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा। व्रत की विधि क्या और हिंदू धर्म में इसका क्या महत्व है।   Putrada Ekadashi 2025 पुत्रदा एकादशी तिथि 2025 kab hai Putrada Ekadashi 2025 कब है पुत्रदा एकादशी 2025 ?पंचांग के अनुसार, पुत्रदा एकादशी तिथि का आरंभ 9 जनवरी को दोपहर में 12 बजकर 23 मिनट पर होगा और 10 जनवरी को सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, उदय काल में एकादशी तिथि होने के कारण पुत्रदा एकादशी का व्रत 10 जनवरी को रखा जाएगा। Putrada Ekadashi 2025 brat vidhi पुत्रदा एकादशी व्रत विधि एकादशी तिथि के व्रत रखने वाले हैं तो दशमी तिथि से ही आपको सात्विक जीवन जीना चाहिए। इसके बाद एकादशी तिथि के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और व्रत का संकल्प आपको लेना चाहिए। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित इसके बाद करें। विष्णु भगवान को गंगाजल, रोली, चावल, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद दीपक और अगरबत्ती जलाएं। तत्पश्चात भगवान को फल, मिष्ठान्न और पंचामृत अर्पित करें। व्रत रखने वालों के लिए पूजा के दौरान पुत्रदा एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना गया है। कथा सुनने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है। इस दिन व्रत रखने वालों को दिनभर भगवान विष्णु के नाम का जप करना चाहिए। आप चाहें तो “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर सकते हैं। व्रत का पारण द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद आपको करना चाहिए। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन खिलाकर दान-दक्षिणा दें और फिर स्वयं भोजन ग्रहण करें। Putrada Ekadashi 2025 mahetwa पुत्रदा एकादशी का महत्व पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत पारिवारिक सुख-शांति और संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिष्मति नगरी के राजा सुकेतुमान और उनकी रानी शैव्या ने इस व्रत को रखा था, जिससे उन्हें योग्य संतान की प्राप्ति हुई थी। तभी से संतान सुख की कामना रखने वाले लोग इस व्रत को करने लगे। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। Karmasu.in एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।) Ekadashi Date List 2025:साल 2025 में कब-कब है एकादशी?नोट करें सही डेट एवं पूरी लिस्ट

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Elephant in Dreams Meaning: सपने में हाथी देखने का मतलब, जानें मिलेगी गुड न्यूज या बढ़ेगी चिंता

Elephant in Dreams Meaning: सपने कई मायनों में हमें भविष्य का संकेत देते हैं. कहते हैं कि सपने में हाथी (Hathi) अगर हमला करता हुआ दिखाई दे तो इसका क्या मतलब होता है आइए जानते हैं. Sapne Mai Hathi Dekhna: हिंदू धर्म (Hindu Dharam) में हाथी को शुभता, समृद्धि, ऐश्वर्य और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. वास्तु (Vastu)के अनुसार घर में चांदी (Chandi) का हाथी रखना बेहद शुभ माना जाता है. इसे घर में सुख-शांति आने का सूचक माना जाता है. सपने में हाथी (Elephant dreams) देखने का मतलब कई शुभ-अशुभ संकेत देता है. स्वप्न शास्त्र से जानते हैं कि सपने में हाथी देखने का क्या मतलब होता है. आइए जानते हैं. Sapne me safed hathi dekhne ka matlab सपने में सफेद हाथी देखने का मतलब ? स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर आपको सपने में सफेद हाथी दिखाई देता है तो इसका मतलब जल्द ही घर में खुशियों का आगमन होने वाला है. मान्यता है कि इससे धन लाभ,  संतान पक्ष से सुखद समाचार प्राप्त हो सकते हैं. सफेद हाथी का सपने में दिखना बेहद शुभ माना जाता है.  हाथी का सपने में हमला करना Hathi ka sapne me hamla karna सपने में अगर कोई हाथी आप पर हमला करता दिखाई दे तो ये परेशानी आने संकेत देता है. इसका अर्थ है आपके जीवन में कई तरह की कठिनाईयां आने वाली हैं. धन हानि हो सकती है. कोई अपना आपको धोखा दे सकता है. हाथी का झुंड Hathi ka jhund सपने में हाथियों का झुंड दिखाई देना आकस्मिक धन लाभ का संकेत देता है. स्वप्न में खड़ा हाथी देखने का मतलब है कि आपके कार्य में कोई बाधा आ सकती है और मुसीबत के वक्त आप अकेले हो सकते हैं. Elephant in Dreams संतान का आगमन Elephant in Dreams अगर कोई गर्भवती स्त्री सपने में हाथी देखती है तो यह भाग्यशाली संतान आगमन का संकेत देता है.मस्त झूमते हुए हाथी का सपना देखने का मतलब है कि आपको जल्द अपनी सभी समस्याओं से छुटकारा मिलने वाला है. गर्भवती स्त्री के सपने में हाथी आने का मतलब अगर किसी गर्भवती स्त्री को सपने में हाथी दिखाई देता है तो यह बहुत ही अच्छा सपना माना जाता है। Elephant in Dreams इसका अर्थ है कि आपको भाग्यशाली संतान की प्राप्ति होगी। Elephant in Dreams साथ ही इस तरह का सपना संतान के तीव्र बुद्धि होने के योग भी दर्शाता है।

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Krishnashtakam-Bhaje Vrajaik Maṇḍanam:श्री कृष्णाष्टकम् -भजे व्रजैक मण्डनम्

Krishnashtakam-Bhaje Vrajaik Maṇḍanam:श्री कृष्णाष्टकम् -भजे व्रजैक मण्डनम् भजे व्रजैक मण्डनम्, समस्त पाप खण्डनम्,स्वभक्त चित्त रञ्जनम्, सदैव नन्द नन्दनम्,सुपिन्छ गुच्छ मस्तकम् , सुनाद वेणु हस्तकम् ,अनङ्ग रङ्ग सागरम्, नमामि कृष्ण नागरम् ॥ १ ॥ मनोज गर्व मोचनम् विशाल लोल लोचनम्,विधूत गोप शोचनम् नमामि पद्म लोचनम्,करारविन्द भूधरम् स्मितावलोक सुन्दरम्,महेन्द्र मान दारणम्, नमामि कृष्ण वारणम् ॥ २ ॥ कदम्ब सून कुण्डलम् सुचारु गण्ड मण्डलम्,व्रजान्गनैक वल्लभम नमामि कृष्ण दुर्लभम.यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया,युतम सुखैक दायकम् नमामि गोप नायकम् ॥ ३ ॥ सदैव पाद पङ्कजम मदीय मानसे निजम्,दधानमुत्तमालकम् , नमामि नन्द बालकम्,समस्त दोष शोषणम्, समस्त लोक पोषणम्,समस्त गोप मानसम्, नमामि नन्द लालसम् ॥ ४ ॥ भुवो भरावतारकम् भवाब्दि कर्ण धारकम्,यशोमती किशोरकम्, नमामि चित्त चोरकम्.दृगन्त कान्त भङ्गिनम् , सदा सदालसंगिनम्,दिने दिने नवम् नवम् नमामि नन्द संभवम् ॥ ५ ॥ गुणाकरम् सुखाकरम् क्रुपाकरम् कृपापरम् ,सुरद्विषन्निकन्दनम् , नमामि गोप नन्दनम्.नवीनगोप नागरम नवीन केलि लम्पटम् ,नमामि मेघ सुन्दरम् तथित प्रभालसथ्पतम् ॥ ६ ॥ समस्त गोप नन्दनम् , ह्रुदम्बुजैक मोदनम्,नमामि कुञ्ज मध्यगम्, प्रसन्न भानु शोभनम्.निकामकामदायकम् दृगन्त चारु सायकम्,रसालवेनु गायकम, नमामि कुञ्ज नायकम् ॥ ७ ॥ विदग्ध गोपिका मनो मनोज्ञा तल्पशायिनम्,नमामि कुञ्ज कानने प्रवृद्ध वह्नि पायिनम्.किशोरकान्ति रञ्जितम, द्रुगन्जनम् सुशोभितम,गजेन्द्र मोक्ष कारिणम, नमामि श्रीविहारिणम ॥ ८ ॥ यथा तथा यथा तथा तदैव कृष्ण सत्कथा ,मया सदैव गीयताम् तथा कृपा विधीयताम.प्रमानिकाश्टकद्वयम् जपत्यधीत्य यः पुमान ,भवेत् स नन्द नन्दने भवे भवे सुभक्तिमान ॥ ९ ॥ ॐ नमो श्रीकृष्णाय नमः॥ॐ नमो नारायणाय नमः॥

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महाकुंभ में वस्त्र दान का महत्व (वैदिक साक्ष्य सहित)

महाकुंभ में वस्त्र दान का महत्व (वैदिक साक्ष्य सहित) महाकुंभ का महत्व महाकुंभ मेला भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का सबसे बड़ा आयोजन है। यह 12 वर्षों के अंतराल पर चार पवित्र स्थानों – प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक – में आयोजित होता है। इसमें लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर अपने पापों से मुक्ति की कामना करते हैं। साथ ही, दान और पुण्य के कार्यों का महत्व इस अवसर पर और भी अधिक बढ़ जाता है। विशेष रूप से वस्त्र दान का कार्य महाकुंभ में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। महाकुंभ में वस्त्र दान का धार्मिक महत्व वैदिक साक्ष्य वस्त्र दान के सामाजिक और आध्यात्मिक लाभ महाकुंभ में वस्त्र दान कैसे करें? निष्कर्ष महाकुंभ में वस्त्र दान केवल एक धार्मिक कर्म नहीं है, बल्कि यह समाज सेवा और आत्मिक शुद्धि का एक माध्यम भी है। वैदिक शास्त्रों और पुराणों में इसे अत्यंत पुण्यदायी कार्य बताया गया है। यह न केवल दाता को ईश्वरीय कृपा दिलाता है, बल्कि समाज में दया, करुणा और समानता की भावना को भी बढ़ावा देता है। इस प्रकार, महाकुंभ में वस्त्र दान करने का हर श्रद्धालु को प्रयास करना चाहिए ताकि उसका जीवन धर्ममय और पुण्यमय बने। आयेएं, इस महाकुंभ में वस्त्र दान करें और इसे अपनी धार्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं।

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Kurma Stotram:कुर्म स्तोत्रम्

Kurma Stotram:कूर्म स्तोत्रम्: कूर्म विष्णु का दूसरा अवतार है। Kurma Stotram विष्णु के अन्य अवतारों की तरह, कूर्म भी संकट के समय ब्रह्मांडीय संतुलन को बहाल करने के लिए प्रकट होते हैं। उनकी प्रतिमा या तो कछुआ है, या अधिक सामान्यतः आधा मनुष्य-आधा कछुआ है। ये कई वैष्णव मंदिरों की छतों या दीवार की नक्काशी में पाए जाते हैं। कूर्म का सबसे पहला विवरण शतपथ ब्राह्मण (यजुर्वेद) में मिलता है, जहाँ वे प्रजापति-ब्रह्मा का एक रूप हैं और समुद्र मंथन (ब्रह्मांडीय महासागर का मंथन) में मदद करते हैं। महाकाव्यों और पुराणों में, किंवदंती कई संस्करणों में विस्तारित और विकसित होती है, जिसमें कूर्म विष्णु का अवतार बन जाता है। वे ब्रह्मांड और ब्रह्मांडीय मंथन छड़ी (मंदरा पर्वत) की नींव का समर्थन करने के लिए कछुए या कछुए के रूप में प्रकट होते हैं। कूर्म किंवदंती का वर्णन वैष्णव पुराणों में किया गया है। एक संस्करण में, ऋषि दुर्वासा ने देवताओं को अपनी शक्ति खोने का श्राप दिया क्योंकि उन्होंने उनका अपमान किया था। देवताओं को इस श्राप से उबरने के लिए अमरता के अमृत की आवश्यकता थी, और उन्होंने असुरों (राक्षसों) के साथ दूध के ब्रह्मांडीय सागर को मंथन करने के लिए एक समझौता किया, ताकि अमृत निकाला जा सके, और जब यह निकल जाए तो वे इसे साझा करेंगे। दूध के सागर को मंथन करने के लिए, उन्होंने मंदरा पर्वत को मथनी के रूप में इस्तेमाल किया, और नाग वासुकी को मथनी की रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया, जबकि कछुए कूर्म, विष्णु ने पर्वत को अपनी पीठ पर ढोया ताकि वे पानी को मथ सकें ताकि मथनी के कारण ब्रह्मांडीय जल डूब न जाए। ऐसे कई अन्य गुण हैं जिनकी जीवन के धार्मिक तरीके से मांग की जाती है। व्यक्ति को क्षमा करना चाहिए और दया दिखानी चाहिए; व्यक्ति को ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए और अपने स्वार्थों का त्याग करने के लिए तैयार रहना चाहिए। Kurma Stotram व्यक्ति को सत्यवादी होना चाहिए, अहिंसा का अभ्यास करना चाहिए और इंद्रियों को नियंत्रित करना सीखना चाहिए। व्यक्ति को तीर्थ स्थानों पर भी जाना चाहिए। कूर्म स्तोत्रम यह एहसास दिलाने के लिए भी महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति कर्मों के फल के लिए कर्म नहीं करता। सभी कर्मों का फल ब्रह्म (ईश्वरीय तत्व) में निहित है। वास्तव में, यह सोचना एक बड़ी भ्रांति है कि कोई विशिष्ट कर्म व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है। सभी कर्म ब्रह्म द्वारा किए जाते हैं; साधारण मनुष्य तो केवल एक साधन है। जब तक यह अहसास नहीं होता, तब तक व्यक्ति अज्ञानी है और सांसारिक बंधनों की बेड़ियों में जकड़ा रहता है। Kurma Stotram:कूर्म स्तोत्रम के लाभ कूर्म स्तोत्रम ऊर्जा के महान ब्रह्मांडीय संवाहक हैं, प्रकृति का एक एंटीना, सद्भाव, समृद्धि, सफलता, अच्छे स्वास्थ्य, योग और ध्यान के लिए एक शक्तिशाली उपकरण हैं। Kurma Stotram कूर्म स्तोत्रम में कूर्म स्तोत्रम के कई स्तोत्र शामिल हैं। Kurma Stotram चेतना के उच्च स्तर को प्राप्त करने के लिए आँखें और मन पाठ पर ध्यान केंद्रित करते हैं। जिन लोगों को कार्यस्थल और घर पर सकारात्मक ऊर्जा की कमी होती है, उन्हें लाभ मिलता है Kurma Stotram:किसको यह स्तोत्रम पढ़ना चाहिए जो लोग अपने प्रयासों में सफलता पाने के लिए संघर्ष करते हैंजो लोग शनि से पीड़ित हैंजो लोग बिना किसी बाधा के जीवन की लालसा रखते हैंजो लोग अधिक स्थिरता की आवश्यकता रखते हैंजो लोग अपने जीवन के लिए अधिक सकारात्मक आधार चाहते हैंजो लोग धैर्य में वृद्धि के लिए कछुए या कछुए को एक शगुन के रूप में अनुभव करते हैंजो लोग स्थिरता, दीर्घायु, ज्ञान, विश्वास चाहते हैंजो लोग एक दीर्घकालिक परियोजना शुरू करते हैं जिसके लिए दृढ़ता की आवश्यकता होगी। कुर्म स्तोत्रम् | Kurma Stotram श्रीगणेशाय नमः ॥ देवा ऊचुः ॥ नमाम ते देव पदारविंदं प्रपन्नतापोपशमातपत्रम् ॥ यन्मूलकेता यततोऽञ्जसोरु संसारदुःखबहिरुत्क्षिपंति ॥ धातर्यदस्मिन्भव ईश जीवास्तापत्रयेणोपहता न शर्म । आत्मँल्लभंते भगवंस्तवांघ्रिच्छायां सविद्यामत आश्रयेम ॥ मार्गंति यत्ते मुखपद्मनीडैश्छंदः सुपर्णैऋर्षयो विविक्ते । यस्याघमर्षोदसरिद्वरायाः पदं पदं तीर्थपदं प्रपन्ना ॥ यच्छ्रद्धया श्रुतवत्या च भक्त्या संमृज्यमाने ह्रदयेऽवधार्य । ज्ञानेन वैराग्यबलेन धीरा व्रजेम तत्तेऽङघ्रिसरोजपीठम् ॥ विश्वस्य जन्मस्थितिसंयमार्थे कृतावतारस्य पदांबुजं ते । व्रजेम सर्वे शरणं यदीश स्मृतं प्रयच्छत्यभयं स्वपुंसाम् ॥ यत्सानुबंधेऽसति देहगेहे ममाहमित्यूढदुराग्रहाणाम् । पुंसां सुदूरं वसतोऽपि पुर्यां भजेम तत्ते भगवत्पदाब्जम् ॥ पानेन ते देव कथासुधायाः प्रवृद्धभक्त्या विशदाशया ये । वैराग्यसारं प्रतिलभ्य बोधं यथांजसान्वीयुरकुण्ठधिष्ण्यम् ॥ तथापरे चात्मसमाधियोगबलेन जित्वा प्रकृतिं बलिष्ठाम् । त्वामेव धीराः पुरुषं विशंति तेषां श्रमः स्यान्न तु सेवय ते ॥ तत्ते वयं लोकसिसृक्षयाऽद्य त्वयानुसष्टास्त्रिभिरात्मभिः स्म । सर्वे वियुक्ताः स्वविहारतंत्रं न शक्नुमस्तत्प्रतिहर्तवे ते ॥ यावद्बलिं तेऽज हराम काले यथा वयं चान्नमदाम यत्र । यथोभयेषां त इमे हि लोका बलिं हरन्तोऽन्नमदंत्यनहाः ॥ त्वं नः सुराणामसि सान्वयानां कूटस्थ आद्यः पुरुषः पुराणः । त्वं देवशक्त्यां गुणकर्मयोनौ रेतस्त्वजायां कविमादधेऽजः ॥ ततो वयं सत्प्रमुखा यदर्थे बभूविमात्मन् करवाम किं ते । त्वं नः स्वचक्षुः परिदेहि शक्त्या देवक्रियार्थे यदनुग्रहाणाम् ॥ इति श्रीमद्भागवतांतर्गतं कूर्मस्तोत्रं समाप्तम् ।

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Swapana Shastra: सपने में दिखने वाली ये 8 चीजें देती हैं अच्छे दिन के संकेत, जानिए मतलब

Swapana Shastra: सोते वक्त सपनों का आना आम बात है. लेकिन स्वपन शास्त्र की मानें तो सपने हमें हमारे भविष्य में घटित होने वाली शुभ अशुभ घटनाओं के बारे में बताते हैं. ऐसे में आज हम आपको सात ऐसे सपने के बारे में बता रहे हैं, जो यदि रात को सोते वक्त आपको भी आते हैं तो इसका मतलब है कि आपकी किस्मत बहुत जल्द चमकने वाली है.  Swapana Shastra:समुद्र का पानी होता अशुभ संकेत अगर आप सपने में समुद्र का पानी देखते हैं तो ये अशुभ माना जाता है। Swapana Shastra स्वप्न शास्त्र के अनुसार इस तरह के सपने देखने के बाद मनुष्य को वाहन सावधानी पूर्वक चलाना चाहिए और ऊंचाई वाली जगहों पर सावधानी से जाना चाहिए। ये सपना भविष्य में सावधानी बरतने की तरफ इशारा करता है। सपने में गुलाब का फूल देखना Sapne me gulab ka fool dekhna स्वप्न शास्त्र Swapana Shastra के अनुसार अगर आप अपने सपने में गुलाब का फूल देखते हैं तो ये आपके लिए शुभ माना जाता है। ये आपके जीवन में आने वाली सकारात्मकता का संकेत है। ऐसे सपनों का ये अर्थ भी होता है कि जल्द ही आपके मन की कोई इच्छा पूरी होने वाली है। सपने में डूब जाना Sapne me dub jana स्वप्न शास्त्र Swapana Shastra के अनुसार अगर आप ऐसा सपना देखते हैं जिसमें आप गहरे पानी में डूब रहे हैं। ये इस बात का संकेत है कि आप किसी डर या दुख में हैं। सपने में अपने आपको उस व्यक्ति को उन घटनाओं के बारे में सोचना बंद करना चाहिए जो गुजर चुकी हैं। आपको किसी भी तरह की चिंता नहीं करनी चाहिए और अपने मन को शांत करने का प्रयास करना चाहिए। खुद को दरिद्र रूप में देखना आप सपने में खुद को गरीब दरिद्र देखते हैं तो आपके लिए ये Swapana Shastra स्वप्न अच्छा है। आपको इससे परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे स्वप्न का मतलब आपके धन में वृद्धि होना है। ये अटके हुए धन के वापस मिलने का भी संकेत है। सपने में तोता देखना sapne me tota dekhna अगर आपको सपने में तोता नजर आता है, तो इसका मतलब है कि आपको कोई अच्छा समाचार मिलने वाला है। आपके जीवन में सुख की शुरूआत होने वाली है। तोता हमेशा से सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। सपने में पहाड़ पर चढ़ना Sapne me pahad सपनों में पहाड़ चढ़ने का मतलब आप जीवन में उन्नति करने वाले हैं। इस तरह के सपने हमेशा सफलता के शिखर पर जाने की ओर इशारा करते हैं। सपने में फलों का पेड़ दिखाई देना sapne me falo ka tree dikhai dena अगर आप सपनों में फलों से लदा हुआ वृक्ष देखते हैं तो ये आपके जीवन में आने वाली ढेर सारी खुशियों की ओर इशारा करता है। फल-फूल खुशी का प्रतीक माने गए हैं। फूलों से लदा पेड़ खुशियों के आगमन का ही संकेत माना जाता है। मृत्यु देखना अगर आप सपनों में अपने किसी भी परिजन की मृत्यु होते हुए देखते हैं तो समझिए उनकी आयु में वृद्धि हो गई है। हिन्दू शास्त्रों में इस तरह के सपनों को गलत नहीं माना जाता। शिव पार्वती को देखना shiv parbati ko dekhna भगवान शिव-पार्वती जिन्हें सपनों में एक साथ दिखाई देते हैं। उनके लिए शुभ माना जाता है। Swapana Shastra खास तौर पर ऐसे लोगों के लिए जिनका विवाह नहीं हो रहा है। सपने में शिव-पार्वती के दर्शन होना जल्दी विवाह होने का संकेत भवन का निर्माण देखना bhawan ka nirman dekhna सपनों में भवन का निर्माण दिखाई देने का मलतब है आपके जीवन में उन्नति होने वाली है। आपको धन की प्राप्ति होने वाली है। झाड़ू का दिखना jhadu ka dikhna हिंदू शास्त्रों के अनुसार, सपने में झाड़ू का दिखाई देने शुभ संकेत होता है। झाड़ू को लक्षमी का प्रतीक माना जाता है। इसका सीधा संकेत है आपको धन लाभ होने वाला है। सपने में नेवले का दिखना sapne me neble ka dikhna सपनों में नेवले का दिखना शुभ माना जाता है। धर्म शास्त्रों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नेवला नजर आने का मतलब है हमारे आर्थिक पक्ष का मजबूत होना। Swapana Shastra ज्योतिष में सपने क्या हैं “हमारे सपने हमें हमारे अचेतन में रहने वाले गहन ज्ञान में टैप करने में मदद करते हैं जो हमें और अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकते हैं जो हमें हमारे ज्योतिष चार्ट के माध्यम से अपने बारे में जो कुछ भी सीख सकते हैं, उस पर विचार करने की अनुमति देते हैं।” Swapana Shastra ज्योतिष और सपने दोनों ही वास्तव में हमारी आत्म-जागरूकता और मानस में टैप करने के तरीके हैं हमें अजीबोगरीब सपने क्यों आते रहते हैं यदि आप अजीब सपने देख रहे हैं, तो यह तनाव, चिंता या नींद की कमी के कारण हो सकता है। अजीब सपने देखना बंद करने के लिए, तनाव के स्तर को प्रबंधित करने और नींद की दिनचर्या से चिपके रहने का प्रयास करें। Swapana Shastra यदि आप एक अजीब सपने से जागते हैं, तो गहरी सांस लेने या आराम करने वाली गतिविधि का उपयोग करके सो जाएं। स्वप्नदोष के लिए कौन सा ग्रह जिम्मेदार है राहु सपनों का अधिपति ग्रह है और कुंडली में नौवां भाव सपनों का स्थान है। स्पष्ट रूप से, नौवें घर में ग्रह और राहु के साथ उनका संबंध यह निर्धारित करता है कि आपको किस प्रकार के सपने देखने को मिलेंगे। यदि नौवें भाव के ग्रह राहु के शत्रु हैं और विशेष रूप से कमजोर हैं, तो आपको भयानक बुरे सपने आएंगे। सबसे दुर्लभ सपना क्या है अधिकांश विशेषज्ञों का मानना ​​है कि स्पष्ट सपने सबसे दुर्लभ प्रकार के सपने हैं। Swapana Shastra सपने देखते समय आप सचेत रहते हैं कि आप सपना देख रहे हैं लेकिन आप सपने देखते रहते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, 55 प्रतिशत लोग अपने जीवन में कम से कम एक बार इस प्रकार के सपनों का अनुभव करते हैं। sapne me subh sanket kya hai सपने में शुभ संकेत क्या है क्या आपने कभी सपने में अच्छे भाग्य के संकेत देखे हैं? हममें से ज्यादातर लोग सपने तब देखते हैं जब हम रात को सोते हैं लेकिन सपने में जो हुआ उसे पूरी तरह याद नहीं रख पाते। -जवाहर

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Ram mandir Murti: अयोध्या राम मंदिर में श्रीराम की 5 वर्षीय बालस्वरूप ही मूर्ति क्यों, जानें

Ram mandir Murti: जिस दिन का पूरे भारत को वर्षों से इंतजार था, वह दिन आ गया है। 22 जनवरी को पूरे विधि विधान के साथ अयोध्या राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो गई है। ऐसे में पूरा भारतवर्ष राममय हो गया है और हर तरफ हर्ष और उल्लास का माहौल है। गर्भगृह में रामलला की बालस्वरूप मूर्ति को स्थापित किया गया है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि आखिर पांच वर्ष के रामलला को ही मंदिर में क्यों स्थापित किया गया है। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।  Ram mandir Murti:अयोध्या भगवान राम की जन्मस्थली है, इसलिए इस बात पर कोई संशय नहीं था कि यहां मंदिर में उनका बालरूप ही विराजमान होना चाहिए। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई अधिकारियों का सुझाव था कि भगवान राम का यहां पर वही बाल रूप होना चाहिए जिसे देखकर माताओं के अंदर ममता भाव जागे… अयोध्या में भगवान राम के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान शुरू हो चुका है। 17 जनवरी को भगवान की चांदी की एक प्रतीकात्मक प्रतिमा को मंदिर भ्रमण कराया गया। 18 जनवरी को उनकी मुख्य मूर्ति को आसन पर विराजमान कर पूजन कार्यक्रम शुरू कर दिया जाएगा। मुख्य प्रतिमा के रूप में भगवान राम की पांच वर्ष के बालक रूप को मुख्य मूर्ति के रूप में चयनित किया गया है। भगवान राम की प्रतिमा के रूप में उनका पांच वर्ष का स्वरूप ही क्यों चुना गया, बहुत सोच विचार के बाद यह निर्णय किया गया था। लेकिन अंत में सहमति इस बात पर बनी कि Ram mandir Murti पांच वर्ष के रूप में भगवान राम की मूर्ति में एक बच्चे के समान उनके मुख पर कोमलता भी विराजमान हो सकती है, साथ ही धनुष बाण लिए उनके विराट रूप की एक झलक भी दिखाई पड़ सकती है। इससे उनकी मूर्ति को देखकर जहां माताओं के अंदर ममता की भावना जागेगी, वहीं पुरुषों को उनकी मूर्ति देखकर उनके पूर्ण रूप का आभास होगा, जिसके सामने नतमस्तक होकर वे आशीर्वाद और वरदान मांगने के लिए प्रेरित हो सकेंगे। यही कारण है कि अयोध्या में भगवान राम के पांच वर्ष के बच्चे के रूप में मूर्ति का चयन किया गया। कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने इस मूर्ति का आकार दिया है। कहा जा रहा है कि यह मूर्ति भव्य है और इसे देखकर भक्तों के अंदर अद्भुत भक्ति भाव पैदा होगा। मूर्ति से जुड़ी कुछ खास बातें Ram mandir Murti:सबसे पहले हम मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में जान लेते हैं। गर्भगृह में जिस मूर्ति की स्थापना की गई है, उस मूर्ति की ऊंचाई 51 इंच की है। भगवान श्रीराम बालस्वरूप में कमल के आसन पर खड़े हुए हैं, जिनके बाएं ओर हनुमान, मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, ऊं, शेषनाग और सूर्य हैं, जबकि श्रीराम के दाएं ओर गदा, स्वास्तिक, हाथ में धनुष, परशुराम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि और गरूड़ है। मूर्ति को मुख्यरूप से मैसूर के अरूण योगीराज द्वारा बनाया गया है।   बालस्वरूप मूर्ति की ही स्थापना क्यों अब सवाल है कि आखिर मंदिर के गर्भगृह में पांच वर्ष की मूर्ति की ही स्थापना क्यों की गई है, Ram mandir Murti तो आपको बता दें कि हिंदू धर्म में बाल्याकल पांच वर्ष की आयु तक माना जाता है। वहीं, पांच वर्ष की आयु के बाद बोधगम्य शुरू हो जाता है। इसके साथ ही मान्यताओं के मुताबिक, जन्मभूमि में बालस्वरूप में ही उपासना की जाती है। चाणक्य समेत अन्य विद्वानों ने भी पांच वर्ष की आयु को वह आयु माना है, Ram mandir Murti जब किसी बच्चे को गलती का अहसास नहीं होता है और इसके बाद उसे बोध होना शुरू हो जाता है। चाणक्य नीति में इन दोनों चरणों का कुछ इस तरह से वर्णन किया गया हैः  पांच वर्ष लौं लालिये, दस सौं ताड़न देइ। सुतहीं सोलह बरस में, मित्र सरसि गनि लेइ।। वहीं, काकभुशुंडी ने भी श्रीराम के बाल स्वरूप को लेकर वर्णन किया है, जिसमें कहा गया है कि  तब तब अवधपुरी मैं जाऊं। बालचरित बिलोकि हरषाऊं॥ जन्म महोत्सव देखउं जाई। बरष पांच तहं रहउं लोभाई॥ इसके अर्थ की बात करें, तब-तब मैं अवधपुरी जाता हूं, Ram mandir Murti तो उनकी बाल लीलाओं को देखकर खुश हो जाता हूं। Ram mandir Murti वहां जाकर मैं जन्म महोत्सव देखता हूं और उनकी लीला के लोभ में पांच वर्ष तक वही रहता हूं। 

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