Chandra Dev Aarti:चन्द्र देव आरती

Chandra Dev चंद्र देव की आरती के लाभ (फायदे): Chandra Dev:चंद्र देव, मन के स्वामी और ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण ग्रह के रूप में माने जाते हैं। उनकी आरती करने से मन, भावनाओं और जीवन के अन्य पहलुओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। Chandra Dev :चंद्र देव आरती के फायदे: 1. मानसिक शांति और स्थिरता: 2. भावनात्मक संतुलन: 3. धन और समृद्धि: 4. स्वास्थ्य लाभ: 5. वैवाहिक जीवन में सुख: 6. चंद्र दोष का निवारण: 7. रचनात्मकता और कलात्मक क्षमता: Chandra Dev Aarti:चन्द्र देव आरती ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी । रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी । जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि । योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा । वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी । शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे । विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें । ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।

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Gorakhnath ji Arti:श्री नाथ जी आरती 

Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी आरती के लाभ Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी, भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के रूप में पूजे जाते हैं। उनकी आरती करने से कई आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। 1. आध्यात्मिक शांति और भक्ति का भाव श्रीनाथ जी की आरती नियमित करने से मन शांत होता है और भक्त के हृदय में श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव प्रबल होता है। 2. परिवार में सुख-शांति श्रीनाथ जी को समर्पित आरती करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और कलह दूर होते हैं। यह आरती परिवार में आपसी प्रेम और सौहार्द बढ़ाती है। 3. धन-समृद्धि का आशीर्वाद Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी, गोवर्धन पर्वत के उद्धारकर्ता, धन और समृद्धि के प्रतीक हैं। उनकी आरती करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और घर में धन की बरकत होती है। 4. संकटों और कष्टों से मुक्ति श्रीनाथ जी को “संकट मोचन” भी माना जाता है। उनकी आरती करने से जीवन के सभी संकट और बाधाएं दूर होती हैं। 5. आध्यात्मिक उन्नति आरती के माध्यम से भक्त अपने मन को श्रीकृष्ण के चरणों में लगाकर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे आत्मा की उन्नति होती है। 6. कार्यों में सफलता Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी की कृपा से हर कार्य निर्विघ्न और सफल होता है। उनके प्रति समर्पित आरती व्यापार, नौकरी, और अन्य क्षेत्रों में सफलता दिलाती है। 7. संतान प्राप्ति और संतानों की रक्षा Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी को बाल स्वरूप मानकर उनकी आरती करने से नि:संतान दंपतियों को संतान का सुख प्राप्त होता है और संतान की उन्नति होती है। आरती करने का शुभ समय आरती विधि महत्व:Gorakhnath ji Arti:श्रीनाथ जी की आरती करने से जीवन में श्रीकृष्ण का आशीर्वाद बना रहता है, जो जीवन को मंगलमय और सुखद बनाता है। Gorakhnath ji Arti:श्री नाथ जी आरती  जय गोरख योगी (श्री गुरु जी) हर हर गोरख योगी ।वेद पुराण बखानत, ब्रह्मादिक सुरमानत, अटल भवन योगी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ बाल जती ब्रह्मज्ञानी योग युक्ति पूरे (श्रीगुरुजी) योग युक्ति पूरे ।सोहं शब्द निरन्तर (अनहद नाद निरन्तर) बाज रहे तूरे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ रत्नजड़ित मणि माणिक कुण्डल कानन में (श्री गुरुजी) कुंडल कानन मेंजटा मुकुट सिर सोहत मन मोहत भस्मन्ती तन में ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ आदि पुरुष अविनाशी, निर्गुण गुणराशी (श्री गुरुजी) निर्गुण गुणराशी,सुमिरण से अघ छूटे, सुमिरन से पाप छूटे, टूटे यम फाँसी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ ध्यान कियो दशरथ सुत रघुकुल वंशमणी (श्री गुरुजी) रघुकुल वंशमणि,सीता शोक निवारक, सीता मुक्त कराई, मार्यो लंक धनी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ नन्दनन्दन जगवन्दन, गिरधर वनमाली, (श्री गुरुजी) गिरधर वनमालीनिश वासर गुण गावत, वंशी मधुर वजावत, संग रुक्मणी बाली ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ धारा नगर मैनावती तुम्हरो ध्यानधरे (श्रीगुरुजी) तुम्हरो ध्यान धरेअमर किये गोपीचन्द, अमर किये पूर्णमल, संकट दूर करे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ चन्द्रावल लखरावल निजकर घातमरी, (श्रीगुरुजी) निजकर घातमरी,योग अमर फल देकर, 2 क्षण में अमर करी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ भूप अमित शरणागत जनकादिक ज्ञानी, (श्रीगुरुजी)जनकादिक ज्ञानीमान दिलीप युधिष्ठिर 2 हरिश्चन्द्र से दानी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ वीर धीर संग ऋद्धि सिद्धि गणपति चंवर करे (श्रीगुरुजी) गणपति चँवर करेजगदम्बा जगजननी 2 योगिनी ध्यान धरे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ दया करी चौरंग पर कठिन विपतिटारी (श्रीगुरुजी) कठिन विपतिटारीदीनदयाल दयानिधि 2 सेवक सुखकारी ।ऊँ जय गोरख योगी ॥ इतनी श्री नाथ जी की मंगल आरती निशदिन जो गावे (श्रीगुरुजी)प्रात समय गावे, भणत विचार पद (भर्तृहरि भूप अमर पद)सो निश्चय पावे ।ऊँ जय गोरख योगी ॥

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Gauri Nandan Arti: गौरी नंदन आरती

Gauri Nandan Arti:गौरी नंदन आरती के फायदे और शुभ मुहूर्त Gauri Nandan Arti:गौरी नंदन आरती के फायदे: Gauri Nandan Arti;गौरी नंदन आरती के शुभ मुहूर्त: Gauri Nandan Arti:आरती करने का तरीका: यह आरती जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाती है और भगवान गणेश का विशेष आशीर्वाद प्रदान करती है। Gauri Nandan Arti: गौरी नंदन आरती जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते शुभ कार्यो में सबसे पहलेतेरा पूजन करतेविघ्न हटाते काज बनातेसभी अमंगल हरतेओ देवा सिद्धि और सिद्धि बाटेचुनते राहो के काटेखुशियों के रंग को बिखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते ओमकार है रूप तिहाराअलौकिक है मायालम्ब कर्ण तेरे उज्जवल नैनाधुम्रवर्ण है कायाओम्हर है रूप तिहाराअलौकिक है मायाओ देवा शम्भू के लाल दुलारेसंतो के नैनन तारेमस्तक पे चन्द्रमा को वारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते गणपति बाप्पा घर में आनासुख वैभव कर जानाएक दन्त लम्बोदर स्वामीसारे कष्ट मिटानागणपति बाप्पा घर में आनासुख वैभव बरसानादेवा लडूअन का भोग लगातेमूषक वहानपे आतेभक्तो की बिगड़ी संवारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते धन कुबेर चरणों के चाकरलक्ष्मी संग विराजेदसो दिशा नवखण्ड में देवाडंका तेरा बाजेदेवा तुझमे ध्यान लगायेमन चाहा फल वो पाएनैया भवंर से उबारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते बांझो की गोदे भर देनानिर्धन को धन देनादिनों को सन्मान दिलानानिर्बल को बाल देनाओ देवा सुनलो अरदास हमारीविनती करते नर नारीसेवा में तन मन वारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते जय हो जय जय है गौरी नंदनदेवा गणेशा गजाननचरणों को तेरे हम पखारतेहो देवा आरती तेरी हम उतारते

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Utpanna Ekadashi 2024: 26 या 27 नवंबर, कब है उत्पन्ना एकादशी? जाने इस व्रत की सही डेट

Utpanna Ekadashi 2024: भगवान विष्णु को समर्पित उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। साल 2024 में ये व्रत कब है और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा, आइए जानते हैं। Utpanna Ekadashi 2024: उत्पन्ना एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास (अगहन) के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और सभी पापों का नाश होता है। साल 2024 में यह तिथि नवंबर के महीने में है, लेकिन इसको लेकर संशय बना हुआ है कि, उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर को रखा जाएगा कि 27 नवंबर को। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा। इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब है और किस विधि से आपको इस दिन पूजा करनी चाहिए। Utpanna Ekadashi :उत्पन्ना एकादशी की सही तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार, Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह की एकादशी तिथि को रखा जाता है। साल 2024 में इस तिथि की शुरुआत 26 नवंबर की सुबह 1 बजकर 1 मिनट (25 नवंबर की रात्रि) पर होगी वहीं इसका समापन 27 नवंबर की देर सुबह 3 बजकर 47 मिनट (26 नवंबर की देर रात) पर होगा। यानि उदयातिथि के अनुसार, एकादशी तिथि 26 नवंबर को ही रहेगी, इसलिए उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर को ही रखा जाएगा।  उत्पन्ना एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त उत्पन्ना एकादशी के दिन सुबह 5 बजकर 5 मिनट से पूजा का शुभ मुहूर्त शुरू होगा और लगभग 6 बजे तक आप ब्रह्म मुहूर्त की पूजा कर सकते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करने से भक्तों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। वहीं जो लोग सुबह के समय पूजा न कर पाएं वो सुबह 11 बजकर 46 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी की पूजा कर सकते हैं। वहीं एकादशी व्रत का पारण आप 27 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट के बीच कर सकते हैं।  उत्पन्ना एकादशी 2024 डेट और शुभ मुहूर्त (Utpanna Ekadashi 2024 Date and Shubh Muhurat) पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 26 नवंबर को देर रात 01 बजकर 01 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 27 नवंबर को देर रात 03 बजकर 47 मिनट पर होगा। ऐसे में 26 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी (Kab Hai Utpanna Ekadashi 2024) व्रत किया जाएगा। उत्पन्ना एकादशी व्रत की पूजा विधि 1. व्रत का संकल्प: 2. पूजा सामग्री: 3. पूजा विधि: व्रत का पारण: Utpanna Ekadashi 2024 उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा भक्तों को प्राप्त होती है। साथ ही आपकी मनोकामनाओं को भी भगवान विष्णु पूरा करते हैं। इस दिन व्रत रखने वालों को पारिवारिक जीवन में भी सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।  Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।

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Meaning of dreams : सपने में खुद को भागने और गिरते हुए देखते हैं? जानें इसका मतलब

सपने में खुद को स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में दौड़ना ये बताता है कि आप अपने जीवन में बुरे दौर से गुजर रहे हैं और आप इसका सामना करने के बजाए परिस्थितियों से दूर भागने की कोशिश कर रहे हैं. सपने तो सभी देखते हैं अब चाहे वह अच्छे हों या बुरे. लेकिन ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है जो सपनों का मतलब जानते हैं. जी हां, स्वप्न शास्त्र में हर सपने का अपना विशेष महत्व है जो हमारे भविष्य को लेकर बड़े संकेत देते हैं. आमतौर पर ज्यादातर लोग सपना देखने के बाद उसे भूल जाते हैं. लेकिन एक तथ्य ये भी है कि यदि आप सपने का मतलब जानकर अपने व्यक्तित्व में बदलाव करें तो परिस्थितियां सुधर सकती हैं. इसी सिलसिले में आज हम आपको ‘सपने में दौड़ने’ के पीछे का मतलब बताने जा रहे हैं. आपने भी कई बार सपने में खुद को दौड़ते हुए देखा होगा, ऐसा भी हो सकता है कि आपको इस तरह के सपने के बारे में कुछ याद न हो. इसके अलावा, ऐसा भी हो सकता है कि आप कभी भविष्य में ऐसा सपना देख लें. किस ओर इशारा करता है ‘सपने में दौड़ना’ स्वप्न शास्त्र के मुताबिक सभी सपनों के पीछे एक खास वजह और एक खास संकेत होता है. लिहाजा, सपने में दौड़ना भी मनुष्य का एक खास संकेत देता है. यदि आप सोते समय सपने में खुद को दौड़ते हुए देखते हैं तो ये इस बात की ओर संकेत करता है कि आपको अपने व्यक्तित्व में बदलाव लाने की जरूरत है. दरअसल, स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में दौड़ना ये बताता है कि आप अपने जीवन में बुरे दौर से गुजर रहे हैं और आप इसका सामना करने के बजाए परिस्थितियों से दूर भागने की कोशिश कर रहे हैं. असल जिंदगी में हमें ऐसे कई लोग देखने को मिल जाते हैं जो मुश्किल समय से बचने या फिर मुसीबतों में घिरने के बाद उसका सामना करने के बजाए पीछा छुड़ाकर निकल लेते हैं. सपने में खुद को उंचाई से गिरना अगर आप खुद को सपने में खुद को ऊंचाई से गिरता हुआ पाएं या गिरने के बाद आपका मन दुखी महसूस हो तो इसका तलब है कि आप पर कोई परेशानी आने वाली है। वहीं अगर आप ऊंचाई से गिर कर खुश होते सपने में नजर आएं तो इसका मतलब है कि आप किसी विपदा से बाहर आने वाले हैं। सपने में खुद को भागते हुए देखना सपने में आप अगर किसी से बच कर भाग रहे या किसी अन्य कारण से भागते नजर आएं तो इसका मतलब है आप अपनी परेशानियों से भाग रहे हैं। किसी से बचकर भागने का मतलब है कि आपके पीछे कोई षडयंत्र कर रहा है। ऐसे में आपको सचेत रहने की जरूरत है। भागना आपके आत्मविश्वास की कमी को भी दर्शाता है। सपने में खुद को हवा में उड़ना इस सपने खुद को आप हवा में उड़ता पाएं तो समझ लें कि आपको कोई खुशियां मिलने वाली हैं। आप अपनी चल रहे परेशानी से मुक्त होंगे। सपने में छत गिरते देखना यदि आपको सपने में छत गिरते हुए दिखाई दे तो इससे आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस सपने का मतलब है कि आपको धन की प्राप्ति होने वाली है। सपने में नदी में गिरते देखना यदि आप खुद को किसी नदी में गिरता हुआ पाएं तो समझ लें कि ये एक अच्छा संकेत नहीं है। यह सपना आपके किसी मुसिबत में पड़ने का संकेत देता है। ऐसे में आपको हर कार्य बहुत ही सजगता के साथ करना चाहिए। सपने में रोते देखना सपने में खुद को रोते हुए या चिल्लाते हुए देखना यह बताता है कि आप अपने अतीत से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इसका एक दूसरा मतलब यह है कि आपको बेचैनी, दुख, पीड़ा, अवसाद जैसी भावनाएं घेरे हुए हैं। सपनों के मतलब को समझने के बाद आपको परेशानी से निकलने और मुकाबला करने की तैयारी करनी चाहिए।

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Sankata Mata Aarti:संकटा माता आरती

Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने से अनेक आध्यात्मिक, मानसिक, और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। संकटा माता को संकटों को हरने वाली देवी माना जाता है। उनकी आराधना से भक्त को जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने के फायदे 1. Sankata Mata Aarti संकटों और बाधाओं से मुक्ति 2. सुख-समृद्धि में वृद्धि 3. स्वास्थ्य लाभ 4. भय और नकारात्मकता का नाश 5. परिवारिक सुख और सामंजस्य 6. आध्यात्मिक जागरूकता 7. मनोकामनाओं की पूर्ति 8. शत्रुओं पर विजय 9. धार्मिक पुण्य का संचय आरती का समय और विधि सारांश Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने से व्यक्ति को न केवल संकटों से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का आगमन भी होता है। माता की कृपा से भक्त का जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है और वह हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। Sankata Mata Aarti:संकटा माता आरती जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।शरण पड़ी हूँ तेरी माता,अरज सुनहूं अब मेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ नहिं कोउ तुम समान जग दाता,सुर-नर-मुनि सब टेरी ।कष्ट निवारण करहु हमारा,लावहु तनिक न देरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ काम-क्रोध अरु लोभन के वशपापहि किया घनेरी ।सो अपराधन उर में आनहु,छमहु भूल बहु मेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ हरहु सकल सन्ताप हृदय का,ममता मोह निबेरी ।सिंहासन पर आज बिराजें,चंवर ढ़ुरै सिर छत्र-छतेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ खप्पर, खड्ग हाथ में धारे,वह शोभा नहिं कहत बनेरी ॥ब्रह्मादिक सुर पार न पाये,हारि थके हिय हेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ असुरन्ह का वध किन्हा,प्रकटेउ अमत दिलेरी ।संतन को सुख दियो सदा ही,टेर सुनत नहिं कियो अबेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ गावत गुण-गुण निज हो तेरी,बजत दुंदुभी भेरी ।अस निज जानि शरण में आयऊं,टेहि कर फल नहीं कहत बनेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।भव बंधन में सो नहिं आवै,निशदिन ध्यान धरीरी ॥ जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।शरण पड़ी हूँ तेरी माता,अरज सुनहूं अब मेरी ॥

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Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती

Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने के अनेक आध्यात्मिक और जीवनशैली से जुड़े लाभ हैं। एकादशी का व्रत और आरती विष्णु भगवान और उनकी अवतार स्वरूपा माता एकादशी को समर्पित होती है। यह भक्ति, ध्यान, और अनुशासन का प्रतीक है। Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने के लाभ 1. पापों का नाश 2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार 3. आध्यात्मिक बल और मानसिक शांति 4. सांसारिक सुख-समृद्धि में वृद्धि 5. भक्ति और विश्वास में वृद्धि 6. स्वास्थ्य में सुधार 7. मोक्ष और पुनर्जन्म से मुक्ति 8. धार्मिक और पारिवारिक एकता 9. विष्णु भगवान की कृपा आरती का समय और विधि सारांश Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने से मन, शरीर, और आत्मा को शांति मिलती है। यह आरती व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है। Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥ॐ जय एकादशी…॥ तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥ॐ जय एकादशी…॥ पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥ॐ जय एकादशी…॥ नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥ॐ जय एकादशी…॥ विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥ॐ जय एकादशी…॥ चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥ॐ जय एकादशी…॥ शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥ॐ जय एकादशी…॥ योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥ॐ जय एकादशी…॥ अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥ॐ जय एकादशी…॥ पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥ॐ जय एकादशी…॥ देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥ॐ जय एकादशी…॥ परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥ॐ जय एकादशी…॥

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Shri Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान आरती

Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान की आरती करने से अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। महावीर भगवान जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर हैं और उनकी आराधना आत्मिक शांति, संयम, और जीवन में सादगी लाने में सहायक मानी जाती है। आरती के निम्नलिखित लाभ हैं: 1. आत्मिक शांति और ध्यान में वृद्धि 2. संयम और सहनशीलता का विकास 3. सकारात्मक ऊर्जा का संचार 4. धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव 5. पापों का नाश और पुण्य का संचय 6. अहिंसा और सत्य की प्रेरणा Mahaveer Bhagwan Arti 7. Mahaveer Bhagwan Arti रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ 8. परिवार में शांति और सुख-समृद्धि आरती का समय और विधि: श्री महावीर भगवान की आरती से व्यक्ति का जीवन अध्यात्म, अहिंसा और सत्य की राह पर चलता है, जो जीवन को पूर्णता और समृद्धि प्रदान करता है। Shri Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान आरती जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ सिद्धार्थ नृप नन्द दुलारे,त्रिशला के जाये ।कुण्डलपुर अवतार लिया,प्रभु सुर नर हर्षाये ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ देव इन्द्र जन्माभिषेक कर,उर प्रमोद भरिया ।रुप आपका लख नहिं पाये,सहस आंख धरिया ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ जल में भिन्न कमल ज्यों रहिये,घर में बाल यती ।राजपाट ऐश्वर्य छोड़ सब,ममता मोह हती ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ बारह वर्ष छद्मावस्था में,आतम ध्यान किया।घाति-कर्म चूर-चूर,प्रभु केवल ज्ञान लिया ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ पावापुर के बीच सरोवर,आकर योग कसे ।हने अघातिया कर्म शत्रु सब,शिवपुर जाय बसे ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ भूमंडल के चांदनपुर में,मंदिर मध्य लसे ।शान्त जिनेश्वर मूर्ति आपकी,दर्शन पाप नसे ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ करुणासागर करुणा कीजे,आकर शरण गही।दीन दयाला जगप्रतिपाला,आनन्द भरण तु ही ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥ जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥

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Narasimha Aarti:नृसिंह आरती

Narasimha Aarti:नृसिंह आरती के लाभ (फायदे):नृसिंह भगवान की आरती करने से व्यक्ति को अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। Narasimha Aarti यह आरती विशेष रूप से भय और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने के लिए मानी जाती है। Narasimha Aarti:फायदे: Narasimha Aarti:शुभ मुहूर्त: नोट: पूजा के समय पवित्रता, भक्ति, और श्रद्धा का होना अति महत्वपूर्ण है। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान का आह्वान करने से आरती का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। Narasimha Aarti:नृसिंह आरती नमस्ते नरसिंहायप्रह्लादाह्लाद-दायिने हिरण्यकशिपोर्वक्षः-शिला-टङ्क-नखालये इतो नृसिंहः परतो नृसिंहोयतो यतो यामि ततो नृसिंहः बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहोनृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये तव करकमलवरे नखमद्भुत-शृङ्गंदलितहिरण्यकशिपुतनुभृङ्गम्केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे ।

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Murder In Dream:सपने में खुद को या किसी दूसरे को मरते हुए देखने का क्या होता है मतलब, जानिए रियल लाइफ पर क्या पड़ेगा प्रभाव

Murder In Dream: स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने में आत्महत्या करते हुए देखते हैं। तो इसका मतलब है कि आप किसी परेशानी में पड़ने वाले हैं। सपने में खुद को या किसी दूसरे को मरते हुए देखने के पीछे कई संभावित अर्थ होते हैं, और ये हमारे भावनात्मक, मानसिक और आध्यात्मिक पहलुओं से जुड़े हो सकते हैं। यहाँ इसके कुछ सामान्य मतलब दिए गए हैं: Murder In Dream: सपने हर कोई व्यक्ति देखता है, वहीं कुछ सपने देखकर हम चिंता में पड़ जाते हैं, तो कुछ सपने हमको बहुत सुखद एहसास कराते हैं। लेकिन आपको बता दें कि स्वप्न शास्त्र अनुसार जो सपना आपने देखा होगा कि उसका रियल लाइफ में भी वो ही मतलब हो आपको बता दें कि आमतौर पर सुबह के समय देखा गया सपना सच होता है। ऐसे में हम यहां आपको बताने जा रहे हैं कि आप सपने में किसी को मर्डर करते हुए देखते हैं तो इसका क्या अर्थ होता है। जानिए क्या कहता है स्वप्न शास्त्र… Murder In Dream:सपने में मर्डर करते हुए देखना Murder In Dream:स्वप्न शास्त्र अनुसार अगर किसी व्यक्ति को चाकू से मर्डर करते हुए देखते हैं तो यह एक बेहद अशुभ संकेत है। साथ ही इसका मतलब है कि आपको कोई अशुभ सूचना प्राप्त हो सकती है। साथ ही आपका किसी साथ झगड़ा हो सकता है। वहीं आपका किसी व्यक्ति से किसी विषय  को लेकर मनमुटाव हो सकता है। Murder In Dream:जहर पिलाकर मर्डर देखना  अगर आप सपने में किसी व्यक्ति को जहर पिलाकर मर्डर करते हुए देखते हैं तो भी यह बेहद अशुभ संकेत है। साथ ही इसका मतलब है कि आपको आने वाले दिनों में कोई व्यक्ति धोखा दे सकता है। साथ ही आपका कोई काम रुक सकता है। Murder In Dream वहीं आपको धन हानि हो सकती है। Murder In Dream:सपने में आत्महत्या करते देखना Murder In Dream:स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने में आत्महत्या करते हुए देखते हैं। तो इसका मतलब है कि आप किसी परेशानी में पड़ने वाले हैं या आपको कोई बीमारी हो सकती है। सपने में भूत दिखाई देना भी भविष्य में आने वाली किसी बड़ी परेशानी का संकेत देता है। साथ ही आपको कोई अशुभ सूचना मिल सकती है। स्वास्थ्य और चिंता: कभी-कभी, ऐसे सपने आ सकते हैं जब व्यक्ति स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हो या किसी तरह के अनिश्चित भविष्य का डर हो। Murder In Dream:सपने में माता- पिता का मर्डर देखना Murder In Dream:अगर आप सपने में अपने मातापिता का मर्डर होते देखते हैं तो यह एक बेहद अशुभ संकेत है। साथ ही . इसका मतलब है आपका अपने घर में अपमान हो सकता है। वहीं माता- पिता की सेहत खराब हो सकती है। Murder In Dream साथ ही ये सपना अपमानित होने का संकेत देता है। Murder In Dream:सपने में कटा हुए सिर देखना Murder In Dream:स्वप्न शास्त्र अनुसार यदि सपने में कटा हुआ सिर देखते हैं तो यह एक अशुभ संकेत है। साथ ही इसका मतलब आपके ऊपर कोई बड़ी परेशानी आने वाली है। इसलिए आने वाले दिनों में आपको बहुत सावधान रहना चाहिए। रियल लाइफ पर प्रभाव: Murder In Dream सपनों को कभी भी सीधे जीवन की घटनाओं से नहीं जोड़ा जा सकता है, क्योंकि उनका मुख्य उद्देश्य हमारे मन और अवचेतन की भावनाओं को प्रतिबिंबित करना है।

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Shri Nangli Niwasi Satguru Arti:गुरुदेव आरती — श्री नंगली निवासी सतगुरु

Nangli Niwasi Satguru Arti:गुरुदेव आरती – श्री नंगली निवासी सतगुरु जी Nangli Niwasi Satguru Arti:श्री नंगली निवासी सतगुरु जी की आरती का पाठ उनके प्रति श्रद्धा, समर्पण और आस्था का प्रतीक है। सतगुरु जी को मार्गदर्शक, कल्याणकारी और सत्य की राह दिखाने वाला माना जाता है। इस आरती का पाठ करते समय भक्त अपने गुरुदेव के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में शांति, मार्गदर्शन, और आत्मिक उन्नति प्राप्त करते हैं। Nangli Niwasi Satguru Arti:गुरुदेव आरती के लाभ और महत्व Nangli Niwasi Satguru Arti:गुरुदेव आरती का शुभ समय निष्कर्ष Nangli Niwasi Satguru Arti:गुरुदेव की आरती से उनके प्रति अपनी भक्ति, आस्था और समर्पण प्रकट किया जाता है। यह आरती जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, शांति, सद्गुणों का विकास और सुख-शांति का संचार करती है। श्री नंगली निवासी सतगुरु जी के आशीर्वाद से भक्त अपने जीवन में सफल, संतुलित, और सच्चे मार्ग पर चलने में सक्षम होते हैं। Guru Aarti – Shri Nangli Niwasi Satguru:गुरुदेव आरती — श्री नंगली निवासी सतगुरु आरती श्री गुरुदेव जी की गाऊँ ।बार-बार चरणन सिर नाऊँ ॥ त्रिभुवन महिमा गुरु जी की भारी ।ब्रह्मा विष्णु जपे त्रिपुरारी ॥ राम कृष्ण भी बने पुजारी ।आशीर्वाद में गुरु जी को पाऊं ॥ भव निधि तारण हार खिवैया ।भक्तों के प्रभु पार लगैया ॥ भंवर बीच घूमे मेरी नैया ।बार बार प्रभु शीष नवाऊँ ॥ ज्ञान दृष्टि प्रभु मो को दीजै ।माया जनित दुख हर लीजै ॥ ज्ञान भानु प्रकाश करीजै ।आवागमन को दुख नहीं पाऊं ॥ राम नाम प्रभु मोहि लखायो ।रूप चतुर्भुज हिय दर्शायो ॥ नाद बिंदु पुनि ज्योति लखायो ।अखंड ध्यान में गुरु जी को पाऊँ ॥ जय जयकार गुरु उपनायों ।भव मोचन गुरु नाम कहायो ॥श्री माताजी ने अमृत पायो ।

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Mata Gayatri Aarti:माता गायत्री आरती

Mata Gayatri Aarti:गायत्री माता की आरती: महत्व और लाभ Gayatri Aarti:गायत्री माता को वेदों की माँ और त्रिदेवों की शक्ति का स्वरूप माना गया है। गायत्री माता की उपासना करने से व्यक्ति को ज्ञान, शुद्धता, और ऊर्जा प्राप्त होती है। गायत्री माता की आरती उनके प्रति आस्था और श्रद्धा को दर्शाने का माध्यम है, और इसे करने से भक्त को अनेक आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं। Mata Gayatri Aarti:गायत्री माता की आरती के लाभ और महत्व Mata Gayatri Aarti:गायत्री माता की आरती का शुभ समय निष्कर्ष Gayatri Aarti:गायत्री माता की आरती करने से व्यक्ति को ज्ञान, शक्ति, और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह आरती व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि, और सुख का संचार करती है। गायत्री माता अपने भक्तों को हर प्रकार के संकटों से दूर रखती हैं और उन्हें आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती हैं। Mata Gayatri Aarti:माता गायत्री आरती जयति जय गायत्री माता,जयति जय गायत्री माता ।सत् मारग पर हमें चलाओ,जो है सुखदाता ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जगपालक क‌र्त्री ।दु:ख शोक, भय, क्लेश कलश दारिद्र दैन्य हत्री ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ ब्रह्म रूपिणी, प्रणात पालिन जगत धातृ अम्बे ।भव भयहारी, जन-हितकारी, सुखदा जगदम्बे ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ भय हारिणी, भवतारिणी, अनघेअज आनन्द राशि ।अविकारी, अखहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ कामधेनु सतचित आनन्द जय गंगा गीता ।सविता की शाश्वती, शक्ति तुम सावित्री सीता ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ ऋग, यजु साम, अथर्व प्रणयनी, प्रणव महामहिमे ।कुण्डलिनी सहस्त्र सुषुमन शोभा गुण गरिमे ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ स्वाहा, स्वधा, शची ब्रह्माणी राधा रुद्राणी ।जय सतरूपा, वाणी, विद्या, कमला कल्याणी ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ जननी हम हैं दीन-हीन, दु:ख-दरिद्र के घेरे ।यदपि कुटिल, कपटी कपूत तउ बालक हैं तेरे ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ स्नेहसनी करुणामय माता चरण शरण दीजै ।विलख रहे हम शिशु सुत तेरे दया दृष्टि कीजै ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ काम, क्रोध, मद, लोभ, दम्भ, दुर्भाव द्वेष हरिये ।शुद्ध बुद्धि निष्पाप हृदय मन को पवित्र करिये ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ जयति जय गायत्री माता,जयति जय गायत्री माता ।सत् मारग पर हमें चलाओ,जो है सुखदाता ॥

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