Vaikuntha Ekadashi 2025: कब है बैकुंठ एकादशी व्रत क्यों रखा जाता है? जानें इसका धार्मिक महत्व

धार्मिक मत है कि बैकुंठ एकादशी (Putrada Ekadashi 2025 Date) तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को पृथ्वी लोक पर स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होती है। वहीं मृत्यु उपरांत बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है। साधक बैकुंठ एकादशी पर श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। सनातन धर्म में बैकुंठ एकादशी का विशेष महत्व है। इस शुभ अवसर पर बैकुंठ के स्वामी भगवान bhagwan jagdish जगदीश की और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही बैकुंठ एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक को भगवान विष्णु के लोक में स्थान मिलता है। साथ ही जन्म-मृत्यु के चक्र से व्यक्ति मुक्त हो जाता है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि बैकुंठ एकादशी तिथि पर बैकुंठ लोक का मुख्य द्वार (मुख्य दरवाजा) खुला रहता है। वैदिक गणना के अनुसार, यह पर्व सूर्य देव के धनु राशि में गोचर करने के दौरान मनाया जाता है। कई बार पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाया जाता है। साधक बैकुंठ एकादशी तिथि पर श्रद्धा भाव से भगवान श्रीहरि की पूजा करते हैं। आइए, बैकुंठ एकादशी की सही डेट शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं महत्व जानते हैं- Vaikuntha Ekadashi: हिन्दू धर्म शास्त्रों में वैकुंठ एकादशी का दिन बहुत विशेष माना गया है. ये दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है. इस दिन भगवान विष्णु का व्रत और पूजन किया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के व्रत का एक विशेष महत्व है. आइए जानते हैं इस दिन भगवान विष्णु के व्रत से क्या लाभ मिलते हैं. Vaikuntha Ekadashi 2025 Vrat And Importance: हिन्दू धर्म शास्त्रों में वैकुंठ एकादशी को बहुत ही पवित्र दिन माना गया है. ये दिन जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु shri vishnu bhagwan को समर्पित किया गया है. इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के पूजन और व्रत का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैकुंठ एकादशी पर भगवान विष्णु के व्रत और पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है. साथ ही हर काम में सफलता मिलती हैं. ES SAL KAB HAI Vaikuntha Ekadashi:इस साल कब है वैकुंठ एकादशी? हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल वैकुंठ एकादशी की तिथि की शुरुआत 9 जनवरी दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी. वहीं इस तिथि का समापन 10 जनवरी को सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि के अनुसार, वैकुंठ एकादशी का व्रत 10 जनवरी को रखा जाएगा. Kyu rakha jata hai Vaikuntha Ekadashi : क्यों रखा जाता है वैकुंठ एकादशी का व्रत? हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी वैकुंठ एकादशी पर भगवान विष्णु का व्रत और पूजन करता है उस पर श्री हरि प्रसन्न होते हैं. इतना ही नहीं व्रत और पूजन करने वालों को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. मान्यता है कि जो भी इस दिन व्रत करता है उसके सभी पापों का नाश हो जाता है. इस दिन व्रत करने वालों का मन शुद्ध हो जाता है. उन्हें जीवन में सभी प्रकार की सुख सुविधाएं प्राप्त होती हैं. जीवन के सभी सुखों को भोग कर उन्हें मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. साथ ही वैकुंठ धाम में जगह मिलती है. वैकुंठ एकादशी का धार्मिक महत्व Vaikuntha Ekadashi ka dharmik mahetwa हिंदू धर्म शास्त्रों में वैकुंठ एकादशी बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है. बैकुंठ एकादशी पर भगवान विष्णु का पूजन और व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है. इस दिन व्रत और पूजन करने वालों को न सिर्फ संसार के सुख प्राप्त होते हैं, बल्कि उन्हें जन्म और मरण के चक्र से भी मुक्ति प्राप्त होती है. वैकुंठ एकादशी पर व्रत करने वालों का स्वर्ग प्राप्ति का रास्ता आसान हो जाता है. वैकुंठ एकादशी पूजा विधि Vaikuntha Ekadashi puja vidhi Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Swapna Shastra: सपने में घोडा देखना शुभ या अशुभ? जानिए क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Sapne Me Ghoda Dekhna: सनातन धर्म में स्वप्न शास्त्र का बेहद खास महत्व है। कुछ सपने इंसान के जीवन के लिए शुभ और कुछ अशुभ माने जाते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में घोडा देखना बेहद अच्छा माना जाता है। हर सपने का कोई न कोई अर्थ जरूर होता है। ऐसा माना जाता है कि सपने भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में संकेत देते हैं। Sapne Me Ghoda Dekhna: स्वप्नशास्त्र में हर एक सपने की व्याख्या की गई है. सपने में घोड़ा दिखाई देना खास संकेत देता है. यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि सपने में आपको किस तरह का घोड़ा दिखाई देता है. Sapne me Horse  dekhne ka matlab:सपने में घोड़ा देखने का मतलब रात में सोते समय ज्यादातर लोगों को सपने आते हैं. कुछ सपने अच्छे होते हैं तो कुछ बेहद खराब. स्वप्नशास्त्र के अनुसार हर सपने का कोई न कोई मतलब जरूर होता है. अगर आपको सपने में घोड़ा दिखाई देता है तो इसका भी एक खास मतलब है. सपने में घोड़े को देखना- सपने में घोड़ा देखना बहुत अच्छा माना जाता है. यह सपना बताता है कि आप शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य हैं और आने वाला समय आपके लिए बहुत शुभ रहने वाला है. इसका मतलब है कि आपको किसी काम में जल्दी कामयाबी मिल सकती है. सपने में घुड़सवारी करना- अगर आप सपने में खुद को घुड़सवारी करते देखते हैं को इसका मतलब है कि आपको जल्द अपने लक्ष्य की प्राप्ति होने वाली है. यह सपना बताता है कि आपको जल्द तरक्की मिलने वाली है. घायल घोड़ा देखना- घायल घोड़े का सपना देखना बहुत अशुभ माना जाता है. यह व्यापार या कार्यक्षेत्र में भारी नुकसान होने का संकेत देता है. ये सपना बताता है कि आपको अपने सेहत को लेकर भी सावधान रहने की जरूरत है. सपने में घोड़े की तस्वीर देखना- सपने में घोड़े की तस्वीर देखने का सपना भी काफी अच्छा होता है. यह सपना संकेत देता है कि आने वाले दिनों में आपके मान सम्मान में बढ़ोतरी होने वाली है. समाज में आपको अच्छा दर्जा प्राप्त होने वाला है. पंखो वाले घोड़े का सपना- अगर आप सपने में पंखों वाले घोड़े देखते हैं तो इसका मतलब है कि आपके घर जल्द कोई मांगलिक कार्य होने वाला है. यह सपना जल्द विवाह होने का भी संकेत देता है. यह सपना प्रेम बढ़ने का संकेत देता है.

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Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर क्यों बनाई जाती है खिचड़ी? जानें इसका पौराणिक महत्व

Makar Sankranti 2025:सनातन धर्म में मकर संक्रांति का त्योहार अपने आप में बहुत खास माना जाता है। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा होती है। इस साल यह पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा-पाठ और दान-पुण्य जैसे शुभ कार्य करने चाहिए। वहीं इस शुभ दिन (Makar Sankranti Rituals) पर खिचड़ी खाने का भी महत्व है तो आइए इस दिन से जुड़ी कुछ बातों को जानते हैं। Makar Sankranti 2025:खिचड़ी का दान भी जरूर करें आपको बता दें, खिचड़ी बेहद ही पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन है। इसका संबंध सूर्य और शनि से है। कहते हैं, इसे (Makar Sankranti significance) खाने से परिवार में खुशहाली आती है। वहीं, मकर संक्रांति पर दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इसलिए इस शुभ दिन पर खिचड़ी खाने के साथ-साथ दान भी करनी चाहिए, क्योंकि दान इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य माना गया है। Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति का त्योहार आने वाला है. इस बार 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, तो इसे सूर्य का संक्रमण काल कहा जाता है. इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है. देश के कई हिस्सों में इसे खिचड़ी के नाम से भी मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत के समय भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही अपने शरीर का त्याग किया था और उसी दिन उनका श्राद्ध और तर्पण कर्म किया गया था. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व माना जाता है.  खिचड़ी का महत्व (Significance of Khichadi) ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति की खिचड़ी चावल, काली दाल, हल्दी, मटर और हरी सब्जियों का विशेष महत्व है. खिचड़ी के चावल से चंद्रमा और शुक्र की शांति का महत्व है. काली दाल से शनि, राहू और केतु का महत्व है, हल्दी से बृहस्पति का संबंध है और हरी सब्जियों से बुध का संबंध है. वहीं जब खिचड़ी पकती है तो उसकी गर्माहट का संबंध मंगल और सूर्य देव से है. इस प्रकार लगभग सभी ग्रहों का संबंध खिचड़ी से है, इसलिए मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और दान का महत्व अधिक होता है. खिचड़ी की पौराणिक कथा  ज्योतिषाचार्य ने बताया कि खिचड़ी से जुड़ी एक बाबा गोरखनाथ की कथा है. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने की ऐसी भी मान्यता है कि खिलजी के आक्रमण के दौरान बाबा गोरखनाथ के योगी खाना नहीं बना पाते थे और भूखे रहने की वजह से हर ढलते दिन के साथ कमजोर हो रहे थे. योगियों की बिगड़ती हालत को देखते हुए बाबा ने अपने योगियों को चावल, दाल और सब्जियों को मिलाकर पकाने की सलाह दी. यह भोजन कम समय में तैयार हो जाता था और इससे योगियों को ऊर्जा भी मिलती थी. बाबा गोरखनाथ ने इस दाल, चावल और सब्जी से बने भोजन को खिचड़ी का नाम दिया. यही कारण है कि आज भी मकर संक्रांति के पर्व पर गोरखपुर में स्थित बाबा गोरखनाथ के मंदिर के पास खिचड़ी का मेला लगता है. इस दौरान बाबा को खासतौर पर खिचड़ी को भोग लगाया जाता है.  मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2025 Shubh Muhurat) उदयातिथि के अनुसार, मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी 2025 को ही मनाई जाएगी. इस दिन सूर्य सुबह 8 बजकर 41 मिनट मकर राशि में प्रवेश करेंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति पुण्य काल का समय सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और महापुण्य काल का समय सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा.

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Magha Kalashtami Vrat:माघ कालाष्टमी व्रत कब है

Magha Kalashtami Vrat:कालाष्टमी प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आने वाला एक हिंदू त्यौहार है जोकि भगवान शिव के ही एक रौद्र रूप भगवान भैरव को समर्पित है। प्रत्येक माह में आने के कारण यह त्यौहार एक वर्ष में कुल 12 बार, तथा अधिक मास की स्थिति में 13 बार मनाया जाता है। काल भैरव को पूजे जाने के कारण इसे काल भैरव अष्टमी अथवा भैरव अष्टमी भी कहा जाता है। मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष को आने वाली मास में पड़ने वाली कालाष्टमी सबसे अधिक प्रसिद्ध है जिसे कालभैरव जयंती के नाम से जाना जाता है। कालाष्टमी के रविवार अथवा मंगलवार के दिन पड़ने पर इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि साप्ताह के ये दिन भी भगवान भैरव को समर्पित माने जाते हैं। कालाष्टमी व्रत कब है? – Kalashtami Vrat Kab Hai मंगलवार, 21 जनवरी 2025माघ कृष्ण अष्टमी : 21 जनवरी 12:39 PM – 22 जनवरी 3:18 PM साल 2025 में माघ महीने में कालाष्टमी 21 जनवरी को है. कालाष्टमी, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप भैरव की पूजा की जाती है. कालाष्टमी को भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से जीवन से सभी संकट दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कालाष्टमी पर भोग में हलवा, खीर, गुलगुले, जलेबी, फल आदि शामिल किए जाते हैं. भगवान काल भैरव को पान, सुपारी, लौंग, इलायची, मुखवास आदि चीज़ें भी चढ़ाई जाती हैं. Rinharta Ganesh Stotra:ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र: कर्ज से मुक्ति पाने का चमत्कारी उपाय Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra) Sapne Me Shivling Dekhna: सपने में शिवलिंग की पूजा करने का मतलब…? Maha Shivratri:2025 में महाशिवरात्रि कब है? नोट कर लें डेट और पूजा-विधि

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Sakat Chauth Vrat : सकट चौथ व्रत कब रखा जाएगा? जानें डेट, पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त

Sakat Chauth Vrat:हिंदू पंचांग के अनुसार माह की चतुर्थी तिथि भगवान श्री गणेश के पूजन के लिए शुभ मानी गई है। सकट चौथ का व्रत, माघ कृष्णा चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। सकट चौथव्रत के दिन स्त्रियां अपने संतान की दीर्घायु एवं सफलता के लिये व्रत रखती हैं। व्रत के फलस्वरूप विघ्न हरण श्री गणेश व्रती स्त्रियों के संतानों को रिद्धि-सिद्धि प्रदान करते हैं। Sakat Chauth 2025: माघ महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी व्रत को सकट चौथ कहा जाता है। सकट चौथ व्रत में भगवान श्रीगणेश की विधि- विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विघ्नहर्ता की पूजा करने संतान की रक्षा होती है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। सकट चौथ व्रत के दिन चंद्र पूजन अनिवार्य माना गया है। सकट चौथ व्रत संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। इस दिन संकट हरण गणेश जी का पूजन होता है। पूजा में दूर्वा, शमी पत्र, बेल पत्र, गुड़ और तिल के लड्डू चढ़ाए जाते है। यह व्रत संतान के जीवन में विघ्न, बाधाओं को हरता है। संकटों व दुखों को दूर करने वाला और रिद्धि-सिद्धि देने वाला है। सकट चौथ पर तिल का विशेष महत्व है। इसलिए भगवान गणेश को तिल के लड्डुओं का भोग जरूर लगाना चाहिए। 2025 में सकट चौथ व्रत की डेट-शुक्रवार, 17 जनवरी 2025 Sakat Chauth Vrat muhurat:मुहूर्त चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – जनवरी 17, 2025 को 04:06 ए एम बजे चतुर्थी तिथि समाप्त – जनवरी 18, 2025 को 05:30 ए एम बजे सकट चौथ के दिन चन्द्रोदय समय – 09:09 पी एम (देश के अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का टाइम भी अलग होता है) सकट चौथ के दिन दिया जाता है चंद्रमा को अर्घ्य- शास्त्रों के अनुसार, चंद्रमा को औषधियों का स्वामी और मन का कारक माना जाता है। चंद्रदेव की पूजा के दौरान महिलाएं संतान के दीर्घायु और निरोगी होने की कामना करती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने से सौभाग्य का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस विधि से दें अर्घ्य-चांदी के पात्र में पानी में थोड़ा सा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। संध्याकाल में चंद्रमा को अर्ध्य देना काफी लाभप्रद होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन में आ रहे समस्त नकारात्मक विचार, दुर्भावना और स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्र की स्थिति भी मजबूत होती है। सकट चौथ व्रत के दौरान स्त्रियाँ पूरे ही दिन निर्जला व्रत (बिना पानी पिए) रखती हैं तथा संध्या के समय भगवान श्री गणेश का पूजन कर चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात् ही जल ग्रहण करती है। राजस्थान में सकट चौथ व्रत माता सकट को समर्पित किया जाता है। संकट चौथ माता का मंदिर, अलवर से 60 किमी दूर सकट गाँव में स्थित है। नैवेद्य के रूप में तिल तथा गुड़ से बने हुए लड्डू, ईख, शकरकंद (गंजी), अमरूद, गुड़ तथा घी को अर्पित करने की महिमा है, अतः सकट चौथ को तिल चौथ तथा तिलकुट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। पूजा-विधि: puja vidhi सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें। गणपित भगवान का गंगा जल से अभिषेक करें। भगवान गणेश को पुष्प अर्पित करें। भगवान गणेश को दूर्वाघास भी अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वाघास चढ़ाने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं। भगवान गणेश को सिंदूर लगाएं। भगवान गणेश का ध्यान करें। गणेश जी को भोग भी लगाएं। आप गणेश जी को मोदक या लड्डूओं का भोग भी लगा सकते हैं। इस व्रत में चांद की पूजा का भी महत्व होता है। शाम को चांद के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोलें। भगवान गणेश की आरती जरूर करें।

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Sleeping in dream :सोते समय ये 10 सपने दिखाई देने पर मिलते हैं अशुभ संकेत!

Sleeping in dream:सोते समय सपने देखना एक सामान्य क्रिया है लेकिन ज्योतिष और स्वप्नशास्त्र के अनुसार हमारे द्वारा देखे गए सपने हमें एक अलग तरह का संकेत देते हैं। यहां तक हमारे पुराणों में सपनों और उनके संकेतों के बारे में बताया गया है। इनके आधार पर ये सपने भव‌िष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत हो सकते हैं। इनमें से कुछ सपने आपको न‌िकट भव‌िष्य में कामयाबी और लाभ की सूचना देते हैं तो कुछ का अर्थ आने वाली हानि और समस्या भी हो सकता है। आज आपको कुछ ऐसे सपनों के बारे में बताते हैं जिनका संबंध भविष्य में होने वाली धन की हान‌ि से हो सकता है। अगर आप सभी को सपने आते हैं तो क्या आप जानते हैं कि आपको क्यों आते हैं और इनका क्या मतलब होता है. स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, सपने लोगों के जीवन का अहम हिस्सा होते हैं. सपने में किसी समय अच्छे और शुभ सपने दिखाई पड़ते हैं तो कभी बेहद ही डरावने सपने आते हैं. कुछ सपनों को शुभ को श्रेणी में रखा जाता है तो कुछ को अशुभ माना जाता है. सपने व्यक्ति के जीवन में आने वाले समय की तरफ इशारा करते हैं. कुछ शुभ सपने दिखाई देने पर व्यक्ति का जीवन सुखमय बना रहने का संकेत देते हैं जबकि कुछ सपने जीवन में किसी अनहोनी की तरफ इशारा करते हैं. स्वप्न शास्त्र एक प्राचीन विद्या है जो सपनों के अर्थ को समझने और उनका विश्लेषण करने का प्रयास करती है. सदियों से लोगों ने सपनों को भविष्य के संकेत, मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं का प्रतिबिंब और आध्यात्मिक अनुभवों का माध्यम माना है. सपने हमारे व्यक्तिगत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वे हमें अपनी भावनाओं, डर और इच्छाओं को समझने में मदद करते हैं. सपनों का विश्लेषण करने से हम अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ सकते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं. 10 अशुभ सपने और इनके संकेत जब कोई व्यक्ति रात के समय सपने में बैलगाड़ी देखता है तो जीवन में चल रही गतिविधियां धीरे होने की तरफ इशारा करता है. यह भविष्य में असफलताओं की तरफ इशारा करते हैं. जब व्यक्ति सपने में काले बादलों को देखता है तो यह दुखद संकेत माना जाता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार काले बादलों को दिखाई देना मतलब जल्द ही आपके जीवन में बाधाएं आने वाली हैं. स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में काले कौवे को देखना शुभ नहीं माना जाता है. यह कोई बड़ी दुर्घटना की तरफ संकेत देते है. इस सपने के दिखाई देने पर व्यक्ति की मृत्यु के समाचार मिलते हैं. जब सपने में अक्सर काला कपड़ा पहने कोई व्यक्ति या चीज दिखाई देती है तो इसे कोई गंभीर बीमारी के होने के संकेत माना जाता है. इसी तरह जब सपने में खून बहता हुआ दिखाई दे तो यह लंबी बीमारी का संकेत माना जाता है. जब सपने में कोई हिंसक जानवर आपका पीछा करते हुए दिखाई दे तो यह अशुभ संकेत माना जाता है. इस स्वप्न के दिखाई देने पर व्यक्ति को बहुत बड़ी आर्थिक हानि के संकेत माना जाता है. जब सपने में कोई व्यक्ति तूफान, बवंडर या फिर मकान के गिरने के सपना देखता है तो यह समझा जाता है कि व्यक्ति के पीछे दुर्भाग्य का साया होने लगता है. सपने में चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण के दिखाई देने की घटना को अशुभ माना जाता है. इससे व्यक्ति परेशानियों से घिर जाता है. जब सपने में कोई व्यक्ति चिड़ियों को उड़ते हुए देखता है तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार व्यक्ति को धन की हानि होती है. व्यक्ति कंगाली की और बढ़ने लगता है. जब सपने में व्यक्ति जोर-जोर की आवाजें सुनता है तो व्यक्ति के घर में पारिवारिक कलह के पैदा होने की तरफ संकेत माना जाता है. सपने हमारे अवचेतन मन की अभिव्यक्ति होते हैं. दिन भर के अनुभव, भावनाएं और चिंताएं हमारे सपनों में दिखाई देती हैं. कुछ सपने हमारे जीवन की समस्याओं का समाधान ढूंढने में मदद करते हैं. कुछ लोग मानते हैं कि सपने भविष्य के बारे में संकेत देते हैं. Swapna Shastra: क्या आपने भी सपने में देखा है हंस या तोता, जैसे इन 7 पक्षियों को तो जानिए क्या हो सकता है इसका मतलब Elephant in Dreams Meaning: सपने में हाथी देखने का मतलब, जानें मिलेगी गुड न्यूज या बढ़ेगी चिंता Swapana Shastra: सपने में दिखने वाली ये 8 चीजें देती हैं अच्छे दिन के संकेत, जानिए मतलब Sapne Me Shivling Dekhna: सपने में शिवलिंग की पूजा करने का मतलब…?

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PRAYAGRAJ MAHA KUMBH MELA 2025:महाकुंभ 2025 में नहीं जा पा रहे तो चिंता की बात नहीं, घर पर कीजिए उपाय और पाइये स्नान का पुण्य

PRAYAGRAJ MAHA KUMBH MELA 2025:महाकुंभ 2025, 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में आयोजित होगा. जो श्रद्धालु मेले में नहीं जा सकते, वे घर बैठे करें ये उपाय उत्तर प्रदेश (uttar pradesh) के प्रयागराज में एक बार फिर आस्था का मेला उमड़ने वाला है, जहाँ संगम तट पर 13 जनवरी, 2025 से महाकुंभ का भव्य आयोजन आरंभ होगा। वहाँ विशाल तंबू, नागा साधुओं की श्रृंखला, चिलम धारण करते बाबा और जटाओं से सज्जित संतों का दृश्य देखने को मिलेगा। सुरक्षा के लिए पुलिस की कड़ी व्यवस्था रहेगी। यह एक अनोखा धार्मिक उत्सव है, जहाँ देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान करने आते हैं। हालांकि, कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि यदि वे महाकुंभ में शामिल नहीं हो पाते, तो क्या पुण्य प्राप्त कर सकते हैं? क्या घर पर ही रहकर कुछ विशेष उपाय करके कुंभ स्नान का लाभ उठाया जा सकता है? 45 दिनों तक चलेगा महाकुंभ अनुपम महाराज ने बताया कि महाकुंभ का आयोजन पौष पूर्णिमा के स्नान से 13 जनवरी, 2025 को शुरू होगा और 26 फरवरी, 2025 को महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान के साथ समाप्त होगा। इस तरह से यह महापर्व 45 दिनों तक चलेगा। उन्होंने कहा कि अगर आप महाकुंभ में भाग नहीं ले सकते, तो चिंता की कोई बात नहीं है। कुछ सरल उपायों से घर पर भी आप कुंभ स्नान का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। घर पर ही करें पुण्य अर्जित: अनुपम महाराज ने कुछ ऐसे उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर घर पर भी महाकुंभ के पुण्य को प्राप्त किया जा सकता है कुंभ स्नान का महत्व: अनुपम महाराज ने बताया कि, कुंभ स्नान सिर्फ एक स्नान नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है. यह वह समय होता है, जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा चरम पर होती है, और पवित्र नदियों में स्नान करने से इन ऊर्जाओं का लाभ मिलता है. माना जाता है कि इस समय किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है. अस्वीकरण: इस लेख में निहित जानकारी ज्योतिषी/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं. पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Mahakumbh 2025: आखिर कहां से आते हैं नागा साधु? रहस्य नहीं, अब जानिए हकीकत! Maha Kumbh Mela 2025 Niyam: महाकुम्भ में क्या करें, क्या न करें, जानें ये नियम ताकि आपसे जाने-अन्जाने कोई त्रुटि न हो Mahakumbh 2025: महाकुंभ क्यों लगता है? जानिए इसकी विशेषता और महत्व Mahakumbh 2025: क्या आप जानते हैं महाकुंभ, अर्ध कुंभ और पूर्ण कुंभ के बीच का अंतर Maha Kumbh 2025: महाकुंभ से घर में जरूर लाएं ये चीजें, बदल जाएगी किस्मत Maha Kumbh 2025: कब से शुरू हो रहा है महाकुंभ? जानें शाही स्थान की तिथियां और महत्व

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Makar Sankranti 2025:मकर संक्रांति 2025 कब है 14 या 15 जनवरी, जानें, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Makar Sankranti 2025: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बड़ा महत्व है. इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी. इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है, जिसका अर्थ है सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है. साथ ही, मकर संक्रांति से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है. पौष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है. Makar Sankranti 2025: सूर्य का किसी राशि विशेष राशि में भ्रमण करना संक्रांति कहलाता है. सूर्य हर माह में राशि का परिवर्तन करते हैं. साल में बारह संक्रांतियां होती हैं और दो संक्रांतियां महत्वपूर्ण होती हैं- मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति. सूर्य जब मकर राशि में जाता है तब मकर संक्रांति होती है. मकर संक्रांति से वातावरण में बदलाव शुरू हो जाता है क्योंकि इस संक्रांति से अग्नि तत्व की शुरुआत हो जाती है. इस समय सूर्य उत्तरायण होता है. इस दिन किए गए जाप और दान का फल अनंत गुना होता है. इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी. आइए आपको मकर संक्रांति के बारे में विस्तार से बताते हैं.  मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2025 Shubh Muhurat) हिंदू धर्म में हर त्योहार उदया तिथि के अनुसार ही मनाया जाता है. इस वजह से इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी. सूर्य इस दिन सुबह 8 बजकर 41 मिनट के करीब मकर राशि में प्रवेश करेगा. वहीं, इसका पुण्यकाल सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक जारी रहेगा. Makar Sankranti 2025 puny kal muhurat मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त मकर संक्रांति- मंगलवार, 14 जनवरी 2025 मकर संक्रांति पुण्य काल- सुबह 9.03 मिनट से शाम 5.29 मिनट तक कुल अवधि-8 घंटे 26 मिनट मकर संक्रांति महा पुण्य काल- सुबह 9.03 बजे से 10.50 मिनट तक कुल अवधि-01 घंटा 47 मिनट मकर संक्रांति का क्षण-9.03 मिनट दान करके कमाइये पुण्य ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति 2025 के दिन पवित्र नदी में स्नान करना शुभ होता है. इसके साथ-साथ सूर्यदेव की पूजा भी विशेष लाभ देती है. वहीं, दान देना भी लाभकारी होता है. उत्तर भारत में इस दिन सभी लोग खिचड़ी का दान करते हैं. कुछ राज्यों में नई फसल की भी कटाई होती है.

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Mahakumbh 2025: आखिर कहां से आते हैं नागा साधु? रहस्य नहीं, अब जानिए हकीकत!

Mahakumbh 2025: नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया को लेकर हर किसी के मन में उत्सुकता रहती है। आज हम आपको नागा साधुओं के कुछ रहस्यों के बारे में अपने इस लेख में जानकारी देंगे। Kumbh Mela 2025: महाकुंभ का मेला इस साल प्रयागराज में लगने वाला है। यहां सबसे पहले 13 जनवरी के दिन नागा साधुओं के द्वारा शाही स्नान किया जाएगा। बड़ी संख्या में नागा साधु कुंभ मेले में आते हैं। हालांकि, बाकी समय ये एकांतवास करते हैं, हिमालय की दुर्गम चोटियों पर ये दुनिया से अलग रहकर गुप्त तरीके से योग-ध्यान और साधना करते हैं। लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि, इन्हें महाकुंभ का पता कैसे लग जाता है, और कैसे महाकुंभ के दौरान बड़ी संख्या में नागा साधु पवित्र घाटों पर पहुंच जाते हैं। नागा साधुओं की दुनिया से जुड़े कुछ ऐसे ही रहस्यों के बारे में आज हम आपको अपने इस लेख में जानकारी देने वाले हैं।  Mahakumbh 2025: नागा परंपरा (Naga Sadhu) की पूरी दुनिया रहस्यों से भरी हुई है. कुंभ के आते ही नागा जंगलों से निकल आते हैं. घोड़े, हाथी पर सवार होकर जुलूस निकालते हुए कुंभ की ओर कूच करने लगते हैं. न सिर्फ आते हैं बल्कि लौटते वक्त अपने साथ तमाम नए नागा साधुओं को भी ले जाते हैं. महाकुंभ में आने वाले नागा साधु (Naga Sadhu) जंगलों में रहते हैं. यह वह धारणा है जो सबसे आम तौर पर प्रचलित है. लेकिन सवाल यह है कि वे कौन-से जंगल हैं, जहां ये साधु वास्तव में निवास करते हैं? इन दो क्षेत्रों में रहते हैं नागा साधु नागा साधु मुख्यतः देश के दो क्षेत्रों में रहते हैं. पहला, केदारखंड, जो केदारनाथ के आसपास के जंगलों में स्थित है. यह क्षेत्र उत्तराखंड के गढ़वाल इलाके में आता है. दूसरा क्षेत्र नर्मदा नदी के किनारे फैले जंगल हैं, जिन्हें नर्मदाखंड कहा जाता है. ये जंगल मुख्यतः महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में फैले हुए हैं. हिमालय या ऊंचे पहाड़ की गुफाओं में निवास करते हैं नागा नागा साधु किसी न किसी अखाड़े, आश्रम या मंदिर से जुड़े होते हैं. अखाड़े, आश्रम या मंदिर में रहने वाले नागा साधु “नागाओं के समूह” में रहते हैं, लेकिन इनमें से कुछ तप के लिए हिमालय या किसी ऊंचे पहाड़ की गुफाओं में निवास करते हैं. इनमें से कई अखाड़ा के नागा साधु पैदल भ्रमण कर भिक्षाटन करते हुए धुनी रमाते हैं. बहुत रहस्मयी होता है नागा साधुओं का जीवन नागा साधुओं का जीवन बहुत रहस्मयी होता है. कुंभ के बाद वह कहीं गायब हो जाते हैं. कहा जाता है कि नागा साधु जंगल के रास्ते से देर रात में यात्रा करते हैं. इसलिए ये किसी को नजर नहीं आते हैं. नागा साधु समय-समय पर अपनी जगह बदलते रहते हैं. इस कारण इनकी सही स्थिति का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है. ये लोग गुप्त स्थान पर रहकर ही तपस्या करते हैं. Mahakumbh : कैसे बनते हैं नागा साधु? नागा साधु बनने की प्रक्रिया बहुत कठिन होती है. यदि कोई नागा साधु बनाना चाहता तो उसकी प्रक्रिया महाकुंभ के दौरान ही शुरु होती है. इसके लिए उन्हें ब्रह्मचर्य की परीक्षा देनी पड़ती है. इसमें 6 महीने से लेकर 12 साल तक का समय लग जाता है. जिसके बाद महापुरुष का दर्जा मिलता है और फिर 5 गुरु भगवान शिव, भगवान विष्णु, शक्ति, सूर्य और गणेश निर्धारित किए जाते हैं. जिसके बाद नागाओं के बाल कटवाए जाते है. कुंभ के दौरान इन लोगों को गंगा नंदी में 108 डुबकियां भी लगानी पड़ती हैं. खुद को मृत घोषित कर खुद करते हैं पिंड दान महाकुंभ में ही तमाम सामान्य व्यक्ति जीते जी अपने आप को मृत घोषित करते हैं, फिर खुद और परिवार का पिंड दान करके गंगा किनारे सारे कपड़ों को त्याग करके बाकियों के साथ जंगल की ओर चल देते हैं. बिना पिंड दान के नागा साधु बनेंगे ही नहीं. चाहे पिता जीवत हो या मरा हो, इसके अलावा नागा साधु बनने से पहले व्यक्ति के सात पीड़ी का पिंड दान होता है. इसके अलावा व्यक्ति के शरीर का भी पिंड दान होता है, ऐसा इसलिए कि नागा साधुओं का मनाना है कि उनके मरने के बाद उनका पिंड दान कौन करेगा. पिंड दान के बाद ही साधु को नागा की दीक्षा दी जाती है. Mahakumbh : नागा का अर्थ ‘नागा’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है, जिसका अर्थ पहाड़ होता है और इस पर रहने वाले लोग ‘पहाड़ी’ या ‘नागा संन्यासी’ कहलाते हैं. कच्छारी भाषा में ‘नागा’ से तात्पर्य ‘एक युवा बहादुर सैनिक’ से भी है. ‘नागा’ का अर्थ बिना वस्त्रों के रहने वाले साधु भी है. Mahakumbh : नागा साधुओं का इतिहास Mahakumbh : बताया जाता है कि आदिगुरु शंकराचार्य ने 8वीं सदी में सनातन धर्म की स्थापना के लिए देश के चार कोनों पर चार पीठों की स्थापना की. गोवर्धन पीठ, शारदा पीठ, द्वारिका पीठ और ज्योतिर्मठ पीठ. इन पीठों, मठों-मन्दिरों और सनातन धर्म की रक्षा के लिए आदिगुरु ने सशस्त्र शाखाओं के रूप में अखाड़ों की स्थापना की शुरूआत की. इन्हीं अखाड़ों के सैनिकों को धर्म रक्षक या नागा कहा जाता था. (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Maha Kumbh Mela 2025 Niyam: महाकुम्भ में क्या करें, क्या न करें, जानें ये नियम ताकि आपसे जाने-अन्जाने कोई त्रुटि न हो

Maha Kumbh Mela 2025 कुम्भ मेले में व्यक्ति पुण्य कमाने के उद्देश्य से संगम स्नान, दान, ध्यान करता है, इसलिए यह ध्यान रखना चाहिए कि जाने-अन्जाने में ऐसा कोई भी कार्य न करें, जिससे पाप अर्जन हो। कुम्भ मेले kumbh mela में व्यक्ति पुण्य कमाने के उद्देश्य से संगम स्नान, दान, ध्यान करता है, इसलिए यह ध्यान रखना चाहिए कि जाने-अन्जाने में ऐसा कोई भी कार्य न करें, जिससे पाप अर्जन हो।

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Swapna Shastra: क्या आपने भी सपने में देखा है हंस या तोता, जैसे इन 7 पक्षियों को तो जानिए क्या हो सकता है इसका मतलब

Swapna Shastra स्वप्न शास्त्र में भविष्य के बारे में कुछ खास संकेत दे सकता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार कुछ सपने भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत देते हैं तो कुछ ऐसे सपने माने गए हैं जिनके दिखाने पर व्यक्ति को धन लाभ के संकेत मिलते लगते हैं। स्वप्न शास्त्र में माना गया है कि हर सपने का एक खास मतलब होता है। Auspicious signs in Dreams: सोते समय हमें कई तरह के सपने आते हैं, लेकिन हम सभी का अर्थ नहीं समझ पाते। लेकिन स्वप्न शास्त्र में कहा गया है कि हर सपना व्यक्ति को कुछ न कुछ संकेत देता है। स्वप्न शास्त्र की मानें तो, कुछ पक्षियों को सपने में देखना बहुत ही शुभ माना गया है। यह व्यक्ति को भविष्य के बारे में बहुत ही शुभ संकेत देते हैं। आइए जानते हैं इन सपनों के बारे में। हंस का दिखना hansh ka dikhna स्वप्न शास्त्र sapne में माना गया है कि यदि आपको सपने में पानी में तैरता हुआ हंस दिखाई देता है या फिर दो हंसों का जोड़ा दिखाई देता है, तो इसे एक शुभ संकेत माना जाता है। यह आपके लिए घर में मांगलिक कार्य होने का संकेत दे सकता है। इसके साथ ही यह सपना धन लाभ की ओर भी इशारा करता है। लेकिन यदि आपको सपने में काले रंग का हंस या मृत हंस दिखाई देता है, तो यह एक बुरा सपना माना जाता है। मोर ( moor)- सपने में यदि मोर दिखाई दे तो समझिए कि जीवन में सुख-संपन्नता आने वाली है और कोई बड़ी उपलब्धि success आपको हासिल होने वाली है. लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि सपने में सफेद मोर को ही देखना शुभ माना गया है. यदि आपने मोर पर शनि देव को बैठे हुए देखा है तो यह अत्यंत ही शुभ होता है. इसका अर्थ होता है कि आपको जल्द ही अपार धन की प्राप्ति होने वाली है. तोता tota – सपने में तोता देखना शुभ समाचार का संकेत माना गया है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में जोड़ा तोता दिखाई दे तो इसका अर्थ यह होता है कि घर पर नया मेहमान आना वाला है. जोड़ा तोता देखने से आपके वैवाहिक जीवन में भी प्यार बढ़ता है. नीलकंठ nilkanth – नीलकंठ पक्षी को सपने में देखना शुभ होता है. कुंवारे लोगों द्वारा सपने में नीलकंठ पक्षी को देखना अत्यंत ही शुभ संकेत होता है. यह इस बात का संकेत है कि आपको जल्द ही आपका जीवनसाथी मिलने वाला है. सारस sarash – सपने में सारस पक्षी को देखने का संबंध धन लाभ से होता है. यदि आपने सपने में सारस पक्षी को देखा है तो इसका अर्थ है कि आपको व्यापार में लाभ होगा, नौकरी में तरक्की होगी या कहीं से आकस्मिक धन की प्राप्ति हो सकती है. आसमान में उड़ते हुए सारस देखना, सारस को दाना खिलाते हुए देखना और सारस को जोड़े में देखना बेहद शुभ होता है. लेकिन मछली को पकड़े हुए सारस को देखना या फिर मरा हुआ सारस देखना अशुभ होता है. चिड़िया bird –सपने में चिड़िया या बुलबुल को चहचहाते हुए देखना शुभ नहीं माना जाता है. हालांकि इन्हें देखना शुभ होता है. यदि सपने में चिड़िया या बुलबुल जैसे पक्षी दिखाई दे तो ये इस बात का संकेत होते हैं कि घर पर खुशियां आने वाली है. उल्लू ullu – सपने में उल्लू को देखना बहुत शुभ होता है. सपने में उल्लू देखने से मां लक्ष्मी laximi mata की कृपा प्राप्त होती है. ऐसे सपने को धन प्राप्ति का संकेत माना जाता है.

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Lambodara Sankashti Chaturthi: कब है विनायक चतुर्थी और सकट चौथ? अभी नोट करें डेट एवं शुभ मुहूर्त

Lambodara Sankashti Chaturthi:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश ganesh bhagwan को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी 2025 शुभ मुहूर्त (Lambodara Sankashti Chaturthi 2025 Shubh Muhurat) पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 17 जनवरी (january) को सुबह 04 बजकर 06 मिनट पर होगा। वहीं, इस तिथि का समापन 18 जनवरी को सुबह 05 बजकर 30 मिनट पर होगा। ऐसे में 17 जनवरी को लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ (Sakat chauth 2024) के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा (Lord Ganesh Puja Vidhi) चतुर्थी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद घर और मंदिर की सफाई करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। व्रत का संकल्प लें। पूजा की शुरुआत करें। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। भगवान गणेश के मंत्रों का जप करें। इसके बाद फल और मोदक का भोग लगाएं। जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। अंत में लोगों में प्रसाद का वितरण करें। श्रद्धा अनुसार दान करें। गणोश मंत्र (Ganesh Mantra) 1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥2. ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥3. ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥ संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि Sankashti Chaturthi Puja vidhi ❀ गणेश संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रात: काल स्नान आदि करके व्रत लें।❀ स्नान के बाद गणेश जी की पूज आराधना करें, गणेश जी के मन्त्र का उच्चारण करें।❀ पूजा की तैयारी करें और गणेश जी को उनकी पसंदीदा चीजें जैसे मोदक, लड्डू और दूर्वा घास चढ़ाएं।❀ गणेश मंत्रों का जाप करें और श्री गणेश चालीसा का पाठ करें और आरती करें।❀ शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा की जाती है, अगर बादल के चलते चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के हिसाब से चंद्रोदय के समय में पूजा कर लें।❀ शाम के पूजा के लिए गणेश जी की मूर्ति murti के बाजू में दुर्गा जी की भी फोटो या मूर्ति रखें, इस दिन दुर्गा जी की पूजा बहुत जरुरी मानी जाती है।❀ मूर्ति/फोटो पर धुप, दीप, अगरबत्ती लगाएँ, फुल से सजाएँ एवं प्रसाद में केला, नारियल रखें।❀ गणेश जी के प्रिय मोदक बनाकर रखें, इस दिन तिल या गुड़ के मोदक बनाये जाते है।❀ गणेश जी के मन्त्र का जाप करते हुए कुछ मिनट का ध्यान करें, कथा सुने, आरती करें, प्रार्थना करें।❀ इसके बाद चन्द्रमा की पूजा करें, उन्हें जल अर्पण कर फुल, चन्दन, चावल चढ़ाएं।❀ पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सबको वितरित किया जाता है।❀ गरीबों को दान भी किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी व्रत की महिमा Sankashti Chaturthi Vrat ki mahima नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है, साल भर में 12-3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। ध्यान दें – संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित होता है। जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए प्रायः ऐसा देखा गया है कि, कभी-कभी संकष्टी चतुर्थी व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व अर्थात तृतीया तिथि के दिन ही होता है। कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमानुसार ही संपन्न करना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है। इसके अलावा गणपति बप्पा की पूजा करने से यश, धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

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