Utpanna Ekadashi Puja Muhurat : उत्पन्ना एकादशी के दिन क्या करें क्या नहीं? जानें सभी जरूरी नियम

Utpanna Ekadashi 2024 Dos and dont: उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता की उत्पति मानी जाती है। शास्त्र में इस दिन को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी के दिन क्या करें और क्या नहीं। Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का एक प्रमुख माध्यम माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है और व्यक्ति को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से व्यक्ति को हजारों यज्ञ करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. Utpanna Ekadashi 2024 Dos and dont: उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर 2024 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्ण की विधि- विधान से पूजा की जाती है। Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पुण्य फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता उत्पन्न हुईं थी, इसलिए इसे उत्पन्ना एकादशी के नाम जाना जाता है। शास्त्रों में उत्पन्ना एकादशी के लिए कुछ खास नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं इस दिन क्या करें क्या नहीं। उत्पन्ना एकादशी तिथि | Utpanna Ekadashi Date पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 26 नवंबर दिन मंगलवार को देर रात 01 बजकर 01 मिनट से लेकर अगले दिन यानी 27 नवंबर दिन बुधवार को देर रात 03 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि तिथि के अनुसार, 26 नवंबर को ही उत्पन्ना एकादशी का व्रत किया जाएगा. वहीं व्रत का पारण 27 नवंबर की दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक किया जा सकता है. उत्पन्ना एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त | Utpanna Ekadashi Puja Muhurat पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी पूजा का समय 26 नवंबर सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी के दिन करें ये काम Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी के दिन न करें ये काम उत्पन्ना एकादशी का महत्व | Utpanna Ekadashi Significance मान्यता के अनुसार, एकादशी का पालन करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है. इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मोक्ष प्राप्ति और विष्णु लोक में स्थान मिलता है. इस व्रत को करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है. यह व्रत करने से न केवल वर्तमान जीवन में सुख-शांति मिलती है, बल्कि अगले जन्म में भी शुभ फल प्राप्त होते हैं. Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Baba Goraknath Aarti:बाबा गोरखनाथ आरती

Baba Goraknath Aarti:बाबा गोरखनाथ आरती के लाभ Baba Goraknath Aarti:बाबा गोरखनाथ, नाथ संप्रदाय के एक प्रमुख संत हैं और उन्हें योगीश्वर भी कहा जाता है। Baba Goraknath Aarti उनकी आरती का गायन न केवल आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है बल्कि कई अन्य लाभ भी देता है। Baba Goraknath Aarti:बाबा गोरखनाथ आरती के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: कब करें आरती: कैसे करें आरती: ध्यान रखें: Baba Goraknath Aarti:बाबा गोरखनाथ आरती जय गोरख देवा,जय गोरख देवा ।कर कृपा मम ऊपर,नित्य करूँ सेवा ॥ शीश जटा अति सुंदर,भाल चन्द्र सोहे ।कानन कुंडल झलकत,निरखत मन मोहे ॥ गल सेली विच नाग सुशोभित,तन भस्मी धारी ।आदि पुरुष योगीश्वर,संतन हितकारी ॥ नाथ नरंजन आप ही,घट घट के वासी ।करत कृपा निज जन पर,मेटत यम फांसी ॥ रिद्धी सिद्धि चरणों में लोटत,माया है दासी ।आप अलख अवधूता,उतराखंड वासी ॥ अगम अगोचर अकथ,अरुपी सबसे हो न्यारे ।योगीजन के आप ही,सदा हो रखवारे ॥ ब्रह्मा विष्णु तुम्हारा,निशदिन गुण गावे ।नारद शारद सुर मिल,चरनन चित लावे ॥ चारो युग में आप विराजत,योगी तन धारी ।सतयुग द्वापर त्रेता,कलयुग भय टारी ॥ गुरु गोरख नाथ की आरती,निशदिन जो गावे ।विनवित बाल त्रिलोकी,मुक्ति फल पावे ॥

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Bharat Mata Ki Aarti:भारत माता की आरती

Bharat Mata Ki Aarti:भारत माता की आरती के लाभ Bharat Mata Ki Aarti:भारत माता की आरती करना मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति और देश प्रेम का प्रतीक भी है। यह आरती न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है बल्कि देश के प्रति समर्पण की भावना को भी जागृत करती है। Bharat Mata Ki Aarti:भारत माता की आरती के कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: Bharat Mata Ki Aarti:कब करें आरती: Bharat Mata Ki Aarti:कैसे करें आरती: ध्यान रखें: Bharat Mata Ki Aarti:भारत माता की आरती आरती भारत माता की,जगत के भाग्य विधाता की ।आरती भारत माता की,ज़गत के भाग्य विधाता की । सिर पर हिम गिरिवर सोहै,चरण को रत्नाकर धोए,देवता गोदी में सोए,रहे आनंद, हुए न द्वन्द,समर्पित छंद,बोलो जय बुद्धिप्रदाता की,जगत के भाग्य विधाता की आरती भारत माता की,जगत के भाग्यविधाता की । जगत में लगती है न्यारी,बनी है इसकी छवि न्यारी,कि दुनियाँ देख जले सारी,देखकर झलक,झुकी है पलक, बढ़ी है ललक,कृपा बरसे जहाँ दाता की,जगत के भाग्य विधाता की आरती भारत माता की,जगत के भाग्यविधाता की । गोद गंगा जमुना लहरे,भगवा फहर फहर फहरे,लगे हैं घाव बहुत गहरे,हुए हैं खण्ड, करेंगे अखण्ड,देकर दंड मौत परदेशी दाता की,जगत के भाग्य विधाता की आरती भारत माता की,जगत के भाग्यविधाता की । पले जहाँ रघुकुल भूषण राम,बजाये बँसी जहाँ घनश्याम,जहाँ का कण कण तीरथ धाम,बड़े हर धर्म, साथ शुभ कर्म,लढे बेशर्म बनी श्री राम दाता की,जगत के भाग्य विधाता की आरती भारत माता की,जगत के भाग्यविधाता की । बड़े हिन्दू का स्वाभिमान ,किया केशव ने जीवनदान,बढाया माधव ने भी मान,चलेंगे साथ,हाथ में हाथ, उठाकर माथ,शपथ गीता गौमाता की,जगत के भाग्य विधाता कीआरती भारत माता की,जगत के भाग्यविधाता की ।

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Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती

Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती के लाभ Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती का गायन मात्र ही मन को शांति और आत्मविश्वास प्रदान करता है। यह माना जाता है कि उनकी कृपा से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: Shakumbhari Devi Ki Aarti:कब करें आरती: कैसे करें आरती: ध्यान रखें: Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती हरि ओम श्री शाकुम्भरी अंबा जी की आरती क़ीजोएसी अद्वभुत रूप हृदय धर लीजोशताक्षी दयालू की आरती किजो तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ,सब घट तुम आप भखनी माँशकुंभारी अंबा जी की आरती किजो तुम्ही हो शाकुम्भर,तुम ही हो सताक्षी माँशिवमूर्ति माया प्रकाशी माँशाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो नित जो नर नारी अंबे आरती गावे माँइच्छा पूरण किजो,शाकुम्भर दर्शन पावे माँशाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो जो नर आरती पढ़े पढ़ावे माँ,जो नर आरती सुनावे माँबस बैकुण्ठ शाकुम्भर दर्शन पावेशाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो

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Kushmanda Aarti:कूष्मांडा आरती

Kushmanda Aarti:मां कूष्मांडा आरती के लाभ Kushmanda Aarti:मां कूष्मांडा की आरती का गायन मात्र ही मन को शांति और आत्मविश्वास प्रदान करता है। यह माना जाता है कि उनकी कृपा से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। Kushmanda Aarti:मां कूष्मांडा आरती के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: कब करें आरती: कैसे करें आरती: ध्यान रखें: अन्य लाभ: निष्कर्ष: Kushmanda Aarti:मां कूष्मांडा की आरती का गायन एक पवित्र अनुष्ठान है Kushmanda Aarti जो भक्तों को शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक विकास प्रदान करता है। Kushmanda Aarti:कूष्मांडा आरती माँ कूष्मांडा आरती:कूष्मांडा जय जग सुखदानी ।मुझ पर दया करो महारानी ॥ पिगंला ज्वालामुखी निराली ।शाकंबरी मां भोली भाली ॥ लाखों नाम निराले तेरे ।भक्त कई मतवाले तेरे ॥ भीमा पर्वत पर है डेरा ।स्वीकारो प्रणाम ये मेरा ॥ सबकी सुनती हो जगदंबे ।सुख पहुंचती हो मां अंबे ॥ तेरे दर्शन का मैं प्यासा ।पूर्ण कर दो मेरी आशा ॥ मां के मन में ममता भारी ।क्यों ना सुनेगी अरज हमारी ॥ तेरे दर पर किया है डेरा ।दूर करो माँ संकट मेरा ॥ मेरे कारज पूरे कर दो ।मेरे तुम भंडारे भर दो ॥ तेरा दास तुझे ही ध्याए ।भक्त तेरे दर शीश झुकाए ॥

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Shri Rani Sati Dadi Ji Arti:श्री राणी सती दादी जी

Rani Sati Dadi Ji Arti:श्री राणी सती दादी जी की आरती के लाभ Rani Sati Dadi Ji Arti:श्री राणी सती दादी जी की आरती का गायन मात्र ही मन को शांति और आत्मविश्वास प्रदान करता है। यह माना जाता है कि उनकी कृपा से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं Rani Sati Dadi Ji Arti आरती के कुछ प्रमुख लाभ: Shri Rani Sati Dadi Ji Arti:कब करें आरती: कैसे करें आरती: ध्यान रखें: अन्य लाभ: निष्कर्ष: Shri Rani Sati Dadi Ji Arti:श्री राणी सती दादी जी की आरती का गायन एक पवित्र अनुष्ठान है जो भक्तों को शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक विकास प्रदान करता है। Shri Rani Sati Dadi Ji Arti:श्री राणी सती दादी जी ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ।अपने भक्त जनन की,दूर करन विपत्ती ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ अवनि अननंतर ज्योति अखंडीत,मंडितचहुँक कुंभा ।दुर्जन दलन खडग की,विद्युतसम प्रतिभा ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ मरकत मणि मंदिर अतिमंजुल,शोभा लखि न पडे ।ललित ध्वजा चहुँ ओरे,कंचन कलश धरे ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ घंटा घनन घडावल बाजे,शंख मृदुग घूरे ।किन्नर गायन करते,वेद ध्वनि उचरे ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ सप्त मात्रिका करे आरती,सुरगण ध्यान धरे ।विविध प्रकार के व्यजंन,श्रीफल भेट धरे ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ संकट विकट विदारनि,नाशनि हो कुमति ।सेवक जन ह्रदय पटले,मृदूल करन सुमति ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ अमल कमल दल लोचनी,मोचनी त्रय तापा ।त्रिलोक चंद्र मैया तेरी,शरण गहुँ माता ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ॥ या मैया जी की आरती,प्रतिदिन जो कोई गाता ।सदन सिद्ध नव निध फल,मनवांछित पावे ॥ ॐ जय श्री राणी सती माता,मैया जय राणी सती माता ।अपने भक्त जनन की,दूर करन विपत्ती ॥

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Meaning of dreams:किसी के सपने में आने का क्या होता है मतलब?

Meaning of dreams:सपने हम सभी को आते हैं. इनमें से अधिकांश का कोई सिरपैर नहीं होता है लेकिन हर कोई जानना चाहता है कि वह अपने देखे गए सपनों का अर्थ जाने समझ सके. कई बार हमारे द्वारा देखे गए सपने हमें ही हैरान करते हैं. तो कई सपने ही ऐसे होते हैं  जिनका मतलब जानने के लिए हम बेचैन हो जाते हैं. लेकिन क्या वास्तव में सपनों का मतलब होता है या केवल कुछ ही सपनों काअर्थ होता है. और जब सपने में हम किसी अपने  परिवार, प्रेमी या प्रेमिका, या फिर किसी व्यक्ति को देखते हैं और बार बार देखते हैं तो क्या उसका कोई खास अर्थ होता है.  वैसे तो धर्म और कई तरह के शास्त्र सपने की व्याख्या करते हैं, पर इस बारे में विज्ञान का कहना है यह जानना भी कम रोचक नहीं है. Meaning of dreams:सभी देखते हैं सपना Meaning of dreams:किसी के सपने में आने का क्या होता है मतलब? Meaning of dreams किसी के सपने में आने का क्या होता है मतलब?विज्ञान या मनोविज्ञान की माने तो सपनों के अर्थ तो होते हैं, लेकिन उनके अर्थ जानने से पहले यह समझना जरूरी होगा कि सपने होते क्या हैं.  द ओरेकल ऑफ नाइट: द हिस्ट्री ऑफ साइंस ऑफ ड्रीम्स के लेखक और न्यूरोसाइंटिस्ट सिद्धार्थ रिबेइरो कहते हैं कि हर कोई सपना देखता है भले ही उसे याद रहे या ना रहे. Meaning of dreams;रैपिड आई मूवमेंट की नींद रिबेइरो का कहना है कि लोगो को सपने नींद की रैपिड आई मूवमेंट यानी रेम स्लीप के दौर में आते हैं यह अवस्था रात के दूसरे हिस्से में आती है. इस दौरान बहुत ज्यादा सपने देखने को मिलते हैं. सपने अचेतन और चेतन मन के बीच सेतु की तरह काम करते हैं. Meaning of dreams उनके शोध के मुताबिक डेढ़ घंटे की नींद में करीब 5 सपने आते हैं. सपनों पर हमारे अचेतन मन में बैठी इच्छाओ और डर का असर पड़ता है. यादों की शृखंलाएंसपनों का तानाबाना हमारे यादों की शृंखलाओं की विद्युत सक्रियता पर आधारित होता है जो रेम नींद की दौरान जुड़ती हैं और मिल कर सपनों का संयोजन बनाती हैं. यह सब प्री फ्रंटल कोर्टेक्स में होता है. ऐसी स्थिति में अचेतन मन से कुछ छनने की संभावना कम ही या नहीं के बराबर ही रहती है. इन बातों को ध्यान में रखे तो इसकी संभवना कम ही होती है कि सपने यू हीं आते होंगे. आसान काम नहीं येलेकिन इन सपनों का अर्थ निकलना आसान काम नहीं है. हर व्यक्ति के लिए यह एक अलग ही प्रक्रिया होगी. मनोचिकित्सक रेचल राइट कहती हैं कि सपनों की व्याख्या आसान काम नहीं हैं और इससे कई सवाल एक साथ जुड़े जाते हैं. इसी तरह यह बताना भी बहुत मुश्किल है कि कोई एक व्यक्ति किसी विशेष सपने में क्यों आया था.  लेकिन कई मनोवैज्ञानिक यह मानते हैं कि इसका एक अर्थ यही है के हम उस व्यक्ति के साथ हाल ही में कुछ समय के लिए रहे थे. किसी एक का सपने में आने का अर्थरिबेइरो का मानते हैं एक ही व्यक्ति का सपना आना का मतलब यही हो सकता है कि वह व्यक्ति या उससे संबंधित आपके जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है. जैसे वर्तमान साथी का सपने में आने का अर्थ आपमें प्रेम, भावुकता, के बहुत अधिक भावनाएं हैं. लेकिन किसी के सपने आने का संबंध उससे या फिर किसी और बात से भी हो सकता है. कोई पुराना रिश्ताअगर आपके सपने में आपका कोई एक्स दिखता है तो इसका मतलब यही है कि आपके कुछ अधूरे काम छूटे हैं या फिर कुछ भावनात्मक जख्म अब भी हैं जिनका भरना बाकी है. या फिर इसका मतलब यह भी हो सकता है कि आपकी कुछ इच्छाएं अधूरी हैं. वहीं कुछ मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा होना सामान्य है क्योंकि नींद की भूमिका हमारी याद्दाश्यत कायम रखने की होती है. वहीं अगर आपको अपने परिवार के किसी सदस्य का सपना आ जाए तो यहभी सामान्य बात है Meaning of dreams क्योंकि आपने दिन में उसके साथ काफी वक्त बिताया होगा जिसस उसकी यादें में आपके भाव गुंथ गए होंगे. वहीं अगर आपके किसी के साथ संबंध खराब और चुनौतीपूर्ण चल रहे हों, या किसी प्रिय व्यक्ति की दुर्घटना (या मौत भी) हुई है तो भी उस व्यक्ति के सपने आने की संभावना ज्यादा होती है. कई बार मौत वाले सपनों के सांस्कृतिक कारण भी होते हैं. बहरहाल मतलबकुछ भी हो सपनों को रोका नहीं जा सकता है और सामान्य तौर पर सपने दिमागी सेहत के लिए अच्छे ही होते हैं अगर हम किसी को लेकर गिल्टी फील कर रहे हैं तो Meaning of dreams किसी के सपने में आने का क्या होता है मतलब?ये सपना इस कारण भी आ सकता है अगर आप किसी एक इंसान को लेकर बहुत गिल्टी फील कर रही हों। हो सकता है कि आपको ये लगे कि उस इंसान के साथ आपने कुछ गलत किया है तो आप उसे बार-बार सपने में इंटरेक्शन करते हुए देखेंगी। Meaning of dreams सपनों को लेकर कई तरह के मीनिंग निकाले जा सकते हैं, लेकिन अगर आप किसी सपने के कारण बहुत ज्यादा डर रही हैं तो उसके लिए आपको किसी एक्सपर्ट से बात करने की जरूरत है। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? Meaning of dreams अगर हां तो हमें आर्टिकल के नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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Shri Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती

Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती ही महाराष्ट्रातील एक प्रसिद्ध देवीची आरती आहे. शांतादुर्गा देवी ही शक्तिपीठांपैकी एक आहे आणि तिची पूजा शांती आणि समृद्धीसाठी केली जाते. आरतीचे काही महत्वाचे भाग: आरतीचे फायदे: आरती कशी करावी: किती वेळा आरती करावी: Shanta Durgechi Aarti:नियमितपणे आरती करणे अधिक फायद्याचे असते. Shanta Durgechi Aarti आपण रोज किंवा आठवड्यातून एकदाही आरती करू शकता. श्री शांतादुर्गेची आरतीचे महत्व: श्री शांतादुर्गेची आरती ही केवळ एक धार्मिक अनुष्ठान नाही तर एक आध्यात्मिक अनुभव आहे. देवीची भक्ति करण्याने मन शांत होते आणि जीवन सुखमय होते Shri Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ भूकैलासा ऐसी ही कवला नगरी ।शांतादुर्गा तेथे भक्तभवहारी ।असुराते मर्दुनिया सुरवरकैवारी ।स्मरती विधीहरीशंकर सुरगण अंतरी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ प्रबोध तुझा नव्हे विश्वाभीतरी ।नेति नेति शब्दे गर्जती पै चारी ।साही शास्त्रे मथिता न कळीसी निर्धारी ।अष्टादश गर्जती परी नेणती तव थोरी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ कोटी मदन रूपा ऐसी मुखशोभा ।सर्वांगी भूषणे जांबूनदगाभा ।नासाग्री मुक्ताफळ दिनमणीची प्रभा ।भक्तजनाते अभय देसी तू अंबा । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ अंबे भक्तांसाठी होसी साकार ।नातरी जगजीवन तू नव्हसी गोचर ।विराटरूपा धरूनी करीसी व्यापार ।त्रिगुणी विरहीत सहीत तुज कैचा पार । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ त्रितापतापे श्रमलो निजवी निजसदनी ।अंबे सकळारंभे राका शशीवदनी ।अगमे निगमे दुर्गे भक्तांचे जननी ।पद्माजी बाबाजी रमला तव भजनी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥

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Kaila Mata Aarti:कैला माता आरती

Kaila Mata Aarti:कैला माता आरती Kaila Mata Aarti:कैला माता की आरती एक अत्यंत पवित्र और भक्तिमय अनुष्ठान है। माँ कैला देवी को शक्ति की देवी माना जाता है और उनकी पूजा करने से भक्तों को मन की शांति, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने का वरदान मिलता है। Kaila Mata Aarti:आइए जानते हैं कैला माता की आरती के कुछ प्रमुख लाभ Kaila Mata Aarti:कैला माता की आरती कैसे करें Kaila Mata Aarti:कैला माता की आरती के कुछ पंक्तियाँ ध्यान रखें: निष्कर्ष: Kaila Mata Aarti:माँ कैला की आरती एक शक्तिशाली अनुष्ठान है जो भक्तों के जीवन में कई तरह के लाभ ला सकता है। यदि आप माँ कैला की भक्त हैं तो नियमित रूप से उनकी आरती करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुखमय बनाएं। Kaila Mata Aarti:कैला माता आरती ॐ जय कैला रानी,मैया जय कैला रानी ।ज्योति अखंड दिये माँतुम सब जगजानी ॥ तुम हो शक्ति भवानीमन वांछित फल दाता ॥मैया मन वांछित फल दाता ॥अद्भुत रूप अलौकिकसदानन्द माता ॥ॐ जय कैला रानी। गिरि त्रिकूट पर आपबिराजी चामुंडा संगा ॥मैया चामुंडा संगा ॥भक्तन पाप नसावौंबन पावन गंगा ॥ॐ जय कैला रानी। भक्त बहोरा द्वारे रहताकरता अगवानी ॥मैया करता अगवानी ॥लाल ध्वजा नभ चूमतराजेश्वर रानी ॥ॐ जय कैला रानी। नौबत बजे भवन मेंशंक नाद भारी ॥मैया शंक नाद भारी ॥जोगन गावत नाचतदे दे कर तारी ॥ॐ जय कैला रानी। ध्वजा नारियल रोलीपान सुपारी साथा ॥मैया पान सुपारी साथा ॥लेकर पड़े प्रेम सेजो जन यहाँ आता ॥ॐ जय कैला रानी । दर्श पार्श कर माँ केमुक्ती जान पाता ॥मैया मुक्ती जान पाता ॥भक्त सरन है तेरीरख अपने साथा ॥ॐ जय कैला रानी । कैला जी की आरतीजो जन है गाता ॥मैया जो जन है गाता ॥भक्त कहे भव सागरपार उतर जाता ॥ ॐ जय कैला रानी,मैया जय कैला रानी ।ज्योति अखंड दिये माँतुम सब जगजानी ॥

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Vaishno Mata Aarti:वैष्णो माता आरती

Vaishno Mata Aarti:वैष्णो माता आरती के लाभ Vaishno Mata Aarti:माँ वैष्णो देवी की आरती सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, Vaishno Mata Aarti बल्कि भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव भी है। माना जाता है कि माँ वैष्णो की आरती करने से मन शांत होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। Vaishno Mata Aarti:आइए जानते हैं वैष्णो माता आरती के कुछ प्रमुख लाभ Vaishno Mata Aarti:कब और कैसे करें आरती ध्यान रखें निष्कर्ष माँ वैष्णो की आरती एक शक्तिशाली अनुष्ठान है जो भक्तों के जीवन में कई तरह के लाभ ला सकता है। यदि आप माँ वैष्णो की भक्त हैं तो नियमित रूप से उनकी आरती करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुखमय बनाएं। Vaishno Mata Aarti:वैष्णो माता आरती जय वैष्णवी माता,मैया जय वैष्णवी माता ।हाथ जोड़ तेरे आगे,आरती मैं गाता ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ शीश पे छत्र विराजे,मूरतिया प्यारी ।गंगा बहती चरनन,ज्योति जगे न्यारी ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे,शंकर ध्यान धरे ।सेवक चंवर डुलावत,नारद नृत्य करे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ सुन्दर गुफा तुम्हारी,मन को अति भावे ।बार-बार देखन को,ऐ माँ मन चावे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ भवन पे झण्डे झूलें,घंटा ध्वनि बाजे ।ऊँचा पर्वत तेरा,माता प्रिय लागे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल,भेंट पुष्प मेवा ।दास खड़े चरणों में,दर्शन दो देवा ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ जो जन निश्चय करके,द्वार तेरे आवे ।उसकी इच्छा पूरण,माता हो जावे ॥॥ जय वैष्णवी माता..॥ इतनी स्तुति निश-दिन,जो नर भी गावे ।कहते सेवक ध्यानू,सुख सम्पत्ति पावे ॥ जय वैष्णवी माता,मैया जय वैष्णवी माता ।हाथ जोड़ तेरे आगे,आरती मैं गाता ॥

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Utpanna Ekadashi 2024: उत्पन्ना एकादशी पर करें मां तुलसी की खास पूजा, घर में बनी रहेगी बरकत

उत्पन्ना एकादशी व्रत का दिन बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। मार्गशीर्ष मास में पड़ने वाली एकादशी को उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi 2024 Date And Time) के नाम से जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह एकादशी 26 नवंबर को मनाई जाएगी। वहीं इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है। Utpanna Ekadashi 2024:सनातन धर्म में एकादशी व्रत को बहुत ही पावन माना गया है। उत्पन्ना एकादशी यह दिन श्री हरि की पूजा के लिए बेहद खास होता है। इस पावन तिथि पर सभी विष्णु भक्त उपवास रखते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। इसके साथ ही द्वादशी तिथि पर अपना व्रत खोलते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी तिथि (Utpanna Ekadashi 2024) यानी 26 नवंबर 2024 को मनाई जाएगी। वहीं, इस दिन देवी तुलसी की पूजा का भी महत्व है। अगर आप जीवन में आ रही किसी भी समस्या से लगातार परेशान हैं, तो आपको इस एकादशी पर देवी तुलसी को जल चढ़ाना चाहिए। मां तुलसी की पूजा का महत्व उत्पन्ना एकादशी मां तुलसी को वैष्णव धर्म में विष्णु भगवान की पत्नी माना गया है। उत्पन्ना एकादशी पर तुलसी का पूजन करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन तुलसी के पौधे पर दीपक जलाने और विशेष मंत्रों का जाप करने से घर में बरकत बनी रहती है। Utpanna Ekadashi 2024: 26 या 27 नवंबर, कब है उत्पन्ना एकादशी? जाने इस व्रत की सही डेट पूजन विधि उत्पन्ना एकादशी के फायदे उत्पन्ना एकादशी फिर पांच दीपक देवी के सामने जलाने चाहिए और उनकी 7 बार परिक्रमा पूरी करके उनके 108 नामों का जाप (Maa Tulsi Ke 108 Naam) करना चाहिए, जो यहां पर दिए गए हैं। ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे और अपार धन की प्राप्ति होगी। ।।मां तुलसी के 108 नाम।। (Maa Tulsi Ke 108 Naam) 1.ॐ श्री तुलस्यै नमः। 2.ॐ नन्दिन्यै नमः। 3.ॐ देव्यै नमः। 4.ॐ शिखिन्यै नमः। 5.ॐ धारिण्यै नमः। 6.ॐ धात्र्यै नमः। 7.ॐ सावित्र्यै नमः। 8.ॐ सत्यसन्धायै नमः। 9.ॐ कालहारिण्यै नमः। 10.ॐ गौर्यै नमः। 11.ॐ देवगीतायै नमः। 12.ॐ द्रवीयस्यै नमः। 13.ॐ पद्मिन्यै नमः। 14.ॐ सीतायै नमः। 15.ॐ रुक्मिण्यै नमः। 16.ॐ प्रियभूषणायै नमः। 17.ॐ श्रेयस्यै नमः। 18.ॐ श्रीमत्यै 19.ॐ मान्यायै नमः। 20.ॐ गौर्यै नमः। 21.ॐ गौतमार्चितायै नमः। 22.ॐ त्रेतायै नमः। 23.ॐ त्रिपथगायै नमः। 24.ॐ त्रिपादायै नमः। 25.ॐ त्रैमूर्त्यै नमः। 26.ॐ जगत्रयायै नमः। 27.ॐ त्रासिन्यै नमः। 28.ॐ गात्रायै नमः। 29.ॐ गात्रियायै नमः। 30.ॐ गर्भवारिण्यै नमः। 31.ॐ शोभनायै नमः। 32.ॐ समायै नमः। 33.ॐ द्विरदायै नमः। 34.ॐ आराद्यै नमः। 35.ॐ यज्ञविद्यायै नमः। 36.ॐ महाविद्यायै नमः। 37.ॐ गुह्यविद्यायै नमः। 38.ॐ कामाक्ष्यै नमः। 39.ॐ कुलायै नमः। 40.ॐ श्रीयै नमः। 41.ॐ भूम्यै नमः। 42.ॐ भवित्र्यै नमः। 43.ॐ सावित्र्यै नमः। 44.ॐ सरवेदविदाम्वरायै नमः। 45.ॐ शंखिन्यै नमः। 46.ॐ चक्रिण्यै नमः। 47.ॐ चारिण्यै नमः। 48.ॐ चपलेक्षणायै नमः। 49.ॐ पीताम्बरायै नमः। 50.ॐ प्रोत सोमायै नमः। 51.ॐ सौरसायै नमः। 52.ॐ अक्षिण्यै नमः। 53.ॐ अम्बायै नमः। 54.ॐ सरस्वत्यै नमः। 55.ॐ सम्श्रयायै नमः। 56.ॐ सर्व देवत्यै नमः। 57.ॐ विश्वाश्रयायै नमः। 58.ॐ सुगन्धिन्यै नमः। 59.ॐ सुवासनायै नमः। 60.ॐ वरदायै नमः। 61.ॐ सुश्रोण्यै नमः। 62.ॐ चन्द्रभागायै नमः। 63.ॐ यमुनाप्रियायै नमः। 64.ॐ कावेर्यै नमः। 65.ॐ मणिकर्णिकायै नमः। 66.ॐ अर्चिन्यै नमः। 67.ॐ स्थायिन्यै नमः। 68.ॐ दानप्रदायै नमः। 69.ॐ धनवत्यै नमः। 70.ॐ सोच्यमानसायै नमः। 71.ॐ शुचिन्यै नमः। 72.ॐ श्रेयस्यै नमः। 73.ॐ प्रीतिचिन्तेक्षण्यै नमः। 74.ॐ विभूत्यै नमः। 75.ॐ आकृत्यै नमः। 76.ॐ आविर्भूत्यै नमः। 77.ॐ प्रभाविन्यै नमः। 78.ॐ गन्धिन्यै नमः। 79.ॐ स्वर्गिन्यै नमः। 80.ॐ गदायै नमः। 81.ॐ वेद्यायै नमः। 82.ॐ प्रभायै नमः। 83.ॐ सारस्यै नमः। 84.ॐ सरसिवासायै नमः। 85.ॐ सरस्वत्यै नमः। 86.ॐ शरावत्यै नमः। 87.ॐ रसिन्यै नमः। 88.ॐ काळिन्यै नमः। 89.ॐ श्रेयोवत्यै नमः। 90.ॐ यामायै नमः। 91.ॐ ब्रह्मप्रियायै नमः। 92.ॐ श्यामसुन्दरायै नमः। 93.ॐ रत्नरूपिण्यै नमः। 94.ॐ शमनिधिन्यै नमः। 95.ॐ शतानन्दायै नमः। 96.ॐ शतद्युतये नमः। 97.ॐ शितिकण्ठायै नमः। 98.ॐ प्रयायै नमः। 99.ॐ धात्र्यै नमः। 100.ॐ श्री वृन्दावन्यै नमः। 101.ॐ कृष्णायै नमः। 102.ॐ भक्तवत्सलायै नमः। 103.ॐ गोपिकाक्रीडायै नमः। 104.ॐ हरायै नमः। 105.ॐ अमृतरूपिण्यै नमः। 106.ॐ भूम्यै नमः। 107.ॐ श्री कृष्णकान्तायै नमः। 108.ॐ श्री तुलस्यै नमः।

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Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती

Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती के लाभ (फायदे) Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि, माँ दुर्गा के सातवें रूप के रूप में पूजी जाती हैं। उनका स्वरूप भय को दूर करने वाला और भक्तों को शत्रु-भय, अंधकार, और बुरी शक्तियों से रक्षा प्रदान करने वाला है। माँ कालरात्रि की आरती करने से आध्यात्मिक और भौतिक दोनों लाभ मिलते हैं। Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती के फायदे: 1. भय और शत्रु से मुक्ति: 2. Mata Kalratri Ki Aarti नकारात्मक शक्तियों का नाश: 3. आध्यात्मिक उन्नति: 4. स्वास्थ्य लाभ: 5. आकस्मिक संकटों से सुरक्षा: 6. कुंडली दोष और ग्रह बाधा का निवारण 7. परिवार में सुख-शांति: माँ कालरात्रि की आरती का शुभ समय: आरती विधि: माँ कालरात्रि की आरती करने से न केवल भय और संकटों का नाश होता है, बल्कि भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि, और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है। Mata Kalratri Ki Aarti:माँ कालरात्रि की आरती नवरात्रि के सातवें दिन माँ दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है, माँ कालरात्रि की यह अत्यंत महत्वपूर्ण आरती के लिरिक्स कुछ इस प्रकार से हैं। कालरात्रि जय-जय-महाकाली ।काल के मुह से बचाने वाली ॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।महाचंडी तेरा अवतार ॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा ।महाकाली है तेरा पसारा ॥ खडग खप्पर रखने वाली ।दुष्टों का लहू चखने वाली ॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥ सभी देवता सब नर-नारी ।गावें स्तुति सभी तुम्हारी ॥ रक्तदंता और अन्नपूर्णा ।कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ॥ ना कोई चिंता रहे बीमारी ।ना कोई गम ना संकट भारी ॥ उस पर कभी कष्ट ना आवें ।महाकाली माँ जिसे बचाबे ॥ तू भी भक्त प्रेम से कह ।कालरात्रि माँ तेरी जय ॥

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