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Calendar 2024 : साल 2024 के व्रत-त्योहार की तारीखें, होली से लेकर रामनवमी, नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा तक

जनवरी, 2024 को नए साल की शुरुआत हो गई है। अंग्रेजी कैलेंडर (Calendar 2024) के अनुसार, साल का पहला महीना जनवरी से शुरू होता है। इस बार नया साल 2024 सोमवार से शुरू हो रहा है। यह दिन भगवान शिवजी का प्रिय वार है। साथ ही इस बार नए साल के पहले दिन आयुष्मान योग का भी निर्माण हुआ है। आयुष्मान योग को बहुत ही शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है। Calendar 2024 हिंदी कैलेंडर के अनुसार हिंदी कैलेंडर के अनुसार, नए साल की शुरुआत पौष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और मघा नक्षत्र में होगी। इस दिन सुबह 08:36 मिनट तक मघा नक्षत्र है और फिर बाद पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। नए साल के शुभ योग नए साल के पहले दिन बहुत ही शुभ और मंगलकारी आयुष्मान योग भी बनेगा। आयुष्मान योग को बहुत ही शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में शिवजी की पूजा करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। Calendar 2024: हिंदू कैलेंडर 2024, जानें सालभर के सभी  व्रत-त्योहारों की लिस्ट नए साल का इंतजार सभी को नए साल के आने का बेसब्री से इंतजार रहता है। साथ ही हर कोई साल में आने वाले प्रमुख व्रत-त्योहार की तारीख को लेकर उत्सुक रहता है। Festivals And Holidays List In 2024: साल 2024 के पहले महीने में सबसे बड़ा और प्रमुख त्योहार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। फिर 14 फरवरी को बसंत पंचमी, 08 मार्च को महाशिवरात्रि, 25 मार्च को होली, 19 अगस्त को रक्षाबंधन और 01 नवंबर 2024 को दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं साल 2024 में जनवरी से लेकर दिसंबर के महीने में कब-कब और कौन-कौन से व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे। साल 2024 के प्रमुख त्योहार और तारीखें Calendar 2024 15 जनवरी  मकर संक्रंति  14 फरवरी बसंत पंचमी   08 मार्च महाशिवरात्रि   25 मार्च   होली 09 अप्रैल चैत्र नवरात्रि                 17 अप्रैल राम नवमी                   10 मई अक्षय तृतीया                 09 अगस्त नाग पंचमी                     19 अगस्त रक्षा बंधन                     26 अगस्त जन्माष्टमी                     07 सितंबर गणेश चतुर्थी                 03 अक्तूबर शरद नवरात्रि             12 अक्तूबर दशहरा                       20 अक्तूबर करवा चौथ                 29 अक्तूबर धनतेरस                     01 नवंबर दिवाली                       07 नवंबर छठ पूजा       साल के पहले महीने यानी जनवरी में मकर संक्रांति, पोंगल और सूर्य के उत्तरायण का त्योहार मनाया जाएगा। फरवरी माह के शुरुआत में षटतिला एकादशी फिर 14 फरवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का बड़ा त्योहार मनाया जाएगा। मार्च के महीने में महाशिवरात्रि फिर 25 मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार अप्रैल माह में चैत्र नवरात्रि और राम नवमी जैसे बड़े त्योहार आएंगे। मई माह में वैशाख अमावस्या और अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। जून के महीने में निर्जला एकादशी का त्योहार मनाया जाएगा। इसके अलावा इस माह ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत भी रखा जाएगा। जुलाई के महीने विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसके अलावा चार माह के लिए भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी पर योग निद्रा में चले जाएंगे। अगस्त माह में नाग पंचमी, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी और हरियाली तीज जैसे प्रमुख त्योहार होंगे। सितंबर में गणेश चतुर्थी और ओणम जैसे प्रमुख त्योहार मनाएंं जाएंगे। अक्तूबर के महीने में शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाएंगे। 14 अक्तूबर को दशहरा, 20 अक्तूबर को करवा चौथ और 29 अक्तूबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा। साल 2024 में दिवाली का त्योहार 01 नवंबर को मनाया जाएगा और 7 नवंबर को सूर्य आराधना का महापर्व छठ पूजा होगी। साल के आखिरी महीने यानी दिसंबर में मोक्षदा एकादशी और क्रिसमस का त्योहार मनाया जाएगा। Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यह बताना जरूरी है कि Karmasu.in किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. /

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Shani Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi:शनि प्रदोष व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि

शनि प्रदोष व्रत कथा | Shani Pradosh Vrat Katha in Hindi शनि प्रदोष व्रत कथा Shani Pradosh Vrat Katha एक समय की बात है। एक नगर में एक सेठ रहता था। वह बहुत धनी और दयालु था। वह दूसरों की मदद करने में हमेशा तत्पर रहता था। लेकिन सेठ और उसकी पत्नी को कोई संतान नहीं थी। इससे वे दोनों बहुत दुखी थे। एक दिन, सेठ और उसकी पत्नी तीर्थयात्रा पर गए। रास्ते में उन्हें एक साधु मिले। साधु ने सेठ और उसकी पत्नी को शनि प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इस व्रत को करने से उनके संतान प्राप्ति की कामना पूरी होगी। सेठ और उसकी पत्नी ने साधु की बात मान ली और शनि प्रदोष Shani Pradosh व्रत करने लगे। व्रत के दौरान वे नियमपूर्वक पूजा-पाठ करते थे और शनि देव की वंदना करते थे। श्री शनिदेव चालीसा Sri Shani Dev Chalisa कुछ समय बाद, सेठ की पत्नी को एक पुत्र हुआ। सेठ और उसकी पत्नी बहुत खुश हुए। उन्होंने पुत्र का नाम शंकर रखा। शंकर एक बुद्धिमान और कर्मठ व्यक्ति था। उसने अपने माता-पिता की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। शंकर के जन्म से सेठ और उसकी पत्नी की सभी समस्याएं दूर हो गईं। वे दोनों सुखपूर्वक रहने लगे। शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि SHANI PRADOSH BRAT KI PUJA BIDHI शनि प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय की जाती है। पूजा के लिए सबसे अच्छा समय शाम 4:30 बजे से 7:00 बजे तक का होता है। पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है: पूजा विधि: PUJA BIDHI शनि प्रदोष व्रत का महत्व SHANI PRADOSH BRAT KA mahatv शनि प्रदोष Shani Pradosh व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस व्रत को करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है। वे अच्छे और बुरे दोनों कर्मों का फल देते हैं। शनि प्रदोष व्रत करने से शनि देव के क्रोध से मुक्ति मिलती है। साथ ही, इस व्रत को करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। शनि प्रदोष व्रत करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं: शनि प्रदोष व्रत के नियम SHANI PRADOSH BRAT KE NIYAM शनि प्रदोष Shani Pradosh व्रत को करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए: शनि प्रदोष व्रत करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

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Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि व्रत में रात को ही क्यों की जाती है भोलेनाथ की पूजा? जानिए वजह

( Masik Shivratri ) मासिक शिवरात्रि व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत को रखने से भक्तों को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति, रोगों से मुक्ति, और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ( Masik Shivratri ) मासिक शिवरात्रि व्रत की मान्यताओं के अनुसार, चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं। इसलिए इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से उन्हें प्रसन्न किया जा सकता है। इसके अलावा, पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव का विवाह चतुर्दशी तिथि को हुआ था। इसलिए इस दिन का विशेष महत्व है। मासिक शिवरात्रि व्रत रखने वाले भक्तों को इस दिन निम्नलिखित बातों का पालन करना चाहिए: Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि व्रत रखने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं: मासिक शिवरात्रि व्रत हर महीने किया जा सकता है। यह व्रत सभी वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त है। मासिक शिवरात्रि का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मासिक शिवरात्रि का व्रत असंभव को भी संभव कर सकता है और इस व्रत को रखने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. इस व्रत में रात्रि के समय में पूजा करने के बाद रात को जागरण करते हुए भोलेनाथ की अराधना करनी चाहिए. यदि कुंवारे लोग मासिक शिवरात्रि का व्रत व पूजन करते हैं तो जल्द ही उन्हें अच्छा जीवनसाथी मिलता है. रात को क्यों होती है भोलेनाथ की पूजा पौराणिक कथाओं के अनुसार चतुर्दशी तिथि की रात्रि में भगवान शिव का विवाह हुआ था, इसलिए भोलेनाथ को रात्रि प्रिय है. यही वजह है कि मासिक शिवरात्रि के दिन अगर रात्रि के समय भगवान शिव का पूजन किया जाए तो वह प्रसन्न होते हैं. इसके अलावा शिव को संहार का देवता भी कहा गया है और रात्रि संहार काल की प्रतिनिधि है. इसलिए मासिक शिवरात्रि की रात को विधि-विधान के साथ भगवान शिव का पूजन करने से जीवन में आ रहे कष्टों से मुक्ति मिलती है. मासिक शिवरात्रि का व्रत करने पर जातक रात्रि के चार प्रहर में भगवान शिव का पूजन करता है. बता दें ​कि प्रत्येक प्रहर 3 घंटे का होता है. एक प्रहर में भोलेनाथ का दूध से अभिषेक किया जाता है, फिर दही और फिर शहद से ​अभिषेक होता है.

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Masik Shivratri 2023: इस दिन पड़ रही है मासिक शिवरात्रि, जानें तिथि और पूजा विधि

मासिक शिवरात्रि हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन पड़ रही है मासिक शिवरात्रि Masik Shivratri 2023 Masik Shivratri 2023 मासिक शिवरात्रि 11 दिसबंर के दिन शनिवार को सुबह 7 बजकर 10 मिनट से शुरू होगी। साथ ही इस तिथि की समाप्ति 12 दिसंबर, रविवार सुबह 6 बजकर 24 मिनट पर होगी। ऐसे में इस बार मासिक शिवरात्रि की उपासना 11 दिसंबर को की जाएगी। पूजा विधि मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह उठकर सबसे पहले स्नानादि से निवृत हो जाएं। इसके बाद महादेव की पूजा करें। ऐसा कहा जाता है औघड़दानी को बेलपत्र, भांग, धतूरा अति प्रिय है। व्रती को सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। फिर मंदिर में जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमाओं को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद भगवान शिव को दूध, दही, घी, शहद, फल, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें। भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। भगवान शिव की आरती करें। अंत में प्रसाद वितरित करें। इसलिए इन चीजों को अपनी पूजा में जरूर शामिल करें। इसके साथ व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। अंत में कपूर की आरती से पूजा का समापन करें। मासिक शिवरात्रि के व्रत का नियम मासिक शिवरात्रि के व्रत में व्रती को दिन में कुछ भी नहीं खाना चाहिए। केवल रात में एक बार भोजन करना चाहिए। व्रती को इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए। मासिक शिवरात्रि के व्रत के लाभ मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं: सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। मासिक शिवरात्रि के व्रत का महत्व और लाभ देखते हुए सभी लोगों को इस व्रत को अवश्य करना चाहिए। शिव स्तुति आशुतोष शशाँक शेखर, चन्द्र मौली चिदंबरा, कोटि कोटि प्रणाम शम्भू, कोटि नमन दिगम्बरा ॥ निर्विकार ओमकार अविनाशी, तुम्ही देवाधि देव, जगत सर्जक प्रलय करता, शिवम सत्यम सुंदरा ॥ निरंकार स्वरूप कालेश्वर, महा योगीश्वरा, दयानिधि दानिश्वर जय, जटाधार अभयंकरा ॥ शूल पानी त्रिशूल धारी, औगड़ी बाघम्बरी, जय महेश त्रिलोचनाय, विश्वनाथ विशम्भरा ॥ नाथ नागेश्वर हरो हर, पाप साप अभिशाप तम, महादेव महान भोले, सदा शिव शिव संकरा ॥ जगत पति अनुरकती भक्ति, सदैव तेरे चरण हो, क्षमा हो अपराध सब, जय जयति जगदीश्वरा ॥ जनम जीवन जगत का, संताप ताप मिटे सभी, ओम नमः शिवाय मन, जपता रहे पञ्चाक्षरा ॥ आशुतोष शशाँक शेखर, चन्द्र मौली चिदंबरा, कोटि कोटि प्रणाम शम्भू, कोटि नमन दिगम्बरा ॥ कोटि नमन दिगम्बरा.. कोटि नमन दिगम्बरा.. कोटि नमन दिगम्बरा.. मासिक शिवरात्रि के व्रत का नियम मासिक शिवरात्रि के व्रत में व्रती को दिन में कुछ भी नहीं खाना चाहिए। केवल रात में एक बार भोजन करना चाहिए। व्रती को इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए। मासिक शिवरात्रि के व्रत के लाभ मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं: सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। मासिक शिवरात्रि के व्रत का महत्व और लाभ देखते हुए सभी लोगों को इस व्रत को अवश्य करना चाहिए।

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Pradosh Vrat 2023: दिसंबर का पहला प्रदोष व्रत कब, नोट करें सही डेट और प्रदोष काल का समय

Pradosh Vrat 2023:प्रदोष व्रत करने से भक्तों के सभी पापों का नाश होता है और उन्हें सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।दिसंबर माह में दो रवि प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है, रवि प्रदोष व्रत आरोग्य, सौभाग्य और सफलता प्रदान करता है. जानें दिसंबर के रवि प्रदोष व्रत की डेट, मुहूर्त December Pradosh Vrat 2023 रवि प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय की जाती है। पूजा करने के लिए सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर, मंदिर में जाकर शिवलिंग की पूजा करें। पूजा में बेलपत्र, धतूरा, चंदन, पुष्प आदि अर्पित करें। शिव चालीसा और शिव मंत्रों का जाप करें। अंत में, आरती करें और प्रसाद वितरित करें। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत सबसे अधिक फलदायी माना गया है. वार अनुसार प्रदोष व्रत का अलग-अलग महत्व है. इस साल 2023 में दिसंबर का पहला प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ रहा है, जो लंबी आयु की प्राप्ति के लिए बेहद शुभ फलदायी माना जाता है. दिसंबर का पहला रवि प्रदोष व्रत 2023 (First Ravi Pradosh Vrat 2023) दिसंबर माह का पहला रवि प्रदोष व्रत 10 दिसंबर 2023, रविवार के दिन रखा जाएगा. इस व्रत में शिव जी की पूजा प्रदोष काल में करनी चाहिए. पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 दिसंबर 2023 को सुबह 07 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 11 दिसंबर 2023 को सुबह 07 बजकर 10 मिनट पर इसका समापन होगा. पूजा का मुहूर्त – शाम 05.24 – रात 08.08 रवि प्रदोष व्रत का महत्व प्रदोष व्रत की महत्वता सप्ताह के दिनों के अनुसार अलग-अलग होती है. रविवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत और पूजा से आयु वृद्धि तथा अच्छा स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है. जो लोग आए दिन बीमारी का शिकार होते हैं उन्हें रवि प्रदोष व्रत जरुर करना चाहिए. प्रदोष काल यानी सूर्य अस्त होने से 45 मिनट पहले और सूर्य अस्त होने के 45 मिनट बाद तक का समय. इस दौरान शिव साधना करने से मनोकामना जल्द पूर्ण होती है.

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रविवार की कहानी | रविवार (इतवार) व्रत कथा | Sunday vrat katha in hindi

(Sunday vrat katha in hindi ) एक बूढ़ी औरत थी जो सूर्य देवता की पूजा करती थी। हर सुबह मैं अपना घर साफ करती और गाय के गोबर से लिपटी। इसके बाद ही वह खाना बनाती है और खाती थी पूर्णविराम वह अपने पड़ोसी के घर से गोबर इकट्ठा करती थी। पड़ोसी की पत्नी को यह पसंद नहीं था। एक दिन उसने अपनी गाय घर के अंदर बांध दी। अगले दिन बूढ़ी औरत को गोबर नहीं मिला और वह अपना घर नहीं लिप पाई। उसका घर साफ नहीं हो सका था, इसलिए उसने उस दिन भोजन नहीं किया। सूर्यकवचस्तोत्रम् २ Suryakavachastotram 2 उस रात सूर्य देवता उसके सपनों में आए। उन्होंने उसे एक गाय देने का वचन दिया। अगले दिन उसने अपने घर में एक गाय और बछड़े को पाया। पड़ोसी की पत्नी नहीं है देखा तो वह जल भुन गई। उसने यह भी देखा कि बुढ़िया की गाय तो सोने का गोबर करती है। उसके मन में लालच आ गया और उसने सोने का गोबर उठाकर उसकी जगह साधारण गोबर रख दिया। सूर्य देवता ने यह देख लिया। उन्होंने उस रात नगर में तूफान ला दिया। बूढ़ी औरत ने गाय को अपने घर के अंदर बांध लिया जिससे सोने का गोबर उसे ही मिल गया। पड़ोसी की पत्नी ने सोने का गोबर देने वाली गाय की बात जाकर राजा को बता दी। राजा ने वह जादुई गाय ले ली और अपने महल पर सोने के गोबर काले करा दिया। रात में सूर्य देवता राजा के सपने में आए और बोले कि वह गाय उन्होंने बूढ़ी औरत को भेज की है। जब राजा जागा तो उसने पाया कि उसके महल से दुर्गंध आ रही है। उसने देखा तो महल की दीवारों पर किया गया सोने के गोबर का लेप साधारण गोबर के लेप में बदल चुका था। उसे अपने कृत्य पर दुख हुआ और उसने बूढ़ी औरत को वह गाय लौटा दी। उसने पड़ोसी की चालाक पत्नी को दंड भी दिया। उसने यह घोषणा भी करा दी की उसके राज्य में हर कोई रविवार के दिन सूर्य की पूजा करेगा और उपवास रखेगा।

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Diwali 2023: दीपावली पर क्या करें, सुबह से लेकर रात तक की 25 जरूरी बातें

Diwali 2023 : ब्रह्म पुराण के अनुसार दिवाली पर अर्धरात्रि के समय महालक्ष्मीजी सद्ग्रहस्थों के घरों में विचरण करती हैं। इस दिन घर-बाहर को साफ-सुथरा कर सजाया-संवारा जाता है। दीपावली मनाने से श्री लक्ष्मीजी प्रसन्न होकर स्थायी रूप से सद्गृहस्थ के घर निवास करती हैं। दीपावली धनतेरस, नरक चतुर्दशी तथा महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाईदूज-इन 5 पर्वों का मिलन है। मंगल पर्व दीपावली के दिन सुबह से लेकर रात तक क्या करें कि महालक्ष्मी का घर में स्थायी निवास हो जाए.. आइए जानें विस्तार से….  Diwali pe kare ye kaam दीपावली के पूजन की संपूर्ण विधियां दी गई हैं। फिर भी संक्षेप में 25 बिंदुओं से जानें कि क्या करें इस दिन ….  Diwali 2023 Date: इस साल कब है दिवाली, जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त 1. प्रातः स्नानादि से निवृत्त हो स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 2 . अब निम्न संकल्प से दिनभर उपवास रहें-मम सर्वापच्छांतिपूर्वकदीर्घायुष्यबलपुष्टिनैरुज्यादि-सकलशुभफल प्राप्त्यर्थंगजतुरगरथराज्यैश्वर्यादिसकलसम्पदामुत्तरोत्तराभिवृद्ध्‌यर्थं इंद्रकुबेरसहितश्रीलक्ष्मीपूजनं करिष्ये।  3.दिन में पकवान बनाएं या घर सजाएं। बड़ों का आशीर्वाद लें।  4 . सायंकाल पुनः स्नान करें। 5 . लक्ष्मीजी के स्वागत की तैयारी में घर की सफाई करके दीवार को चूने अथवा गेरू से पोतकर लक्ष्मीजी का चित्र बनाएं। (लक्ष्मीजी का चित्र भी लगाया जा सकता है।) 6 . भोजन में स्वादिष्ट व्यंजन, कदली फल, पापड़ तथा अनेक प्रकार की मिठाइयां बनाएं। 7 .लक्ष्मीजी के चित्र के सामने एक चौकी रखकर उस पर मौली बांधें। 8. इस पर गणेशजी की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें। 9 . फिर गणेशजी को तिलक कर पूजा करें। 10. अब चौकी पर छः चौमुखे व 26 छोटे दीपक रखें। 11.इनमें तेल-बत्ती डालकर जलाएं। 12. फिर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, अबीर, गुलाल, धूप आदि से विधिवत पूजन करें। 13. पूजा के बाद एक-एक दीपक घर के कोनों में जलाकर रखें। 14. एक छोटा तथा एक चौमुखा दीपक रखकर निम्न मंत्र से लक्ष्मीजी का पूजन करें-  नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरेः प्रिया। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्वदर्चनात॥  साथ ही निम्न मंत्र से इंद्र का ध्यान करें-  ऐरावतसमारूढो वज्रहस्तो महाबलः। शतयज्ञाधिपो देवस्तमा इंद्राय ते नमः॥ पश्चात निम्न मंत्र से कुबेर का ध्यान करें-  धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च। भवंतु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादिसम्पदः॥  15. इस पूजन के पश्चात तिजोरी में गणेशजी तथा लक्ष्मीजी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजा करें। 16. तत्पश्चात इच्छानुसार घर की बहू-बेटियों को रुपए दें। 17. लक्ष्मी पूजन रात के बारह बजे करने का विशेष महत्व है। 18. इसके लिए एक पाट पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर एक जोड़ी लक्ष्मी तथा गणेशजी की मूर्ति रखें। 19. समीप ही एक सौ रुपए, सवा सेर चावल, गुड़, चार केले, मूली, हरी ग्वार की फली तथा पांच लड्डू रखकर लक्ष्मी-गणेश का पूजन करें। 20 उन्हें लड्डुओं से भोग लगाएं। 21. दीपकों का काजल सभी स्त्री-पुरुष आंखों में लगाएं। 22. फिर रात्रि जागरण कर गोपाल सहस्रनाम पाठ करें।  23. व्यावसायिक प्रतिष्ठान, गद्दी की भी विधिपूर्वक पूजा करें। 24. रात को बारह बजे दीपावली पूजन के उपरान्त चूने या गेरू में रुई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल तथा छाज (सूप) पर तिलक करें। 25. दूसरे दिन प्रातःकाल चार बजे उठकर पुराने छाज में कूड़ा रखकर उसे दूर फेंकने के लिए ले जाते समय कहें ‘लक्ष्मी-लक्ष्मी आओ, दरिद्र-दरिद्र जाओ’। 

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Rohini Vrat 2023: रोहिणी व्रत पर हो रहा है दुर्लभ ‘भद्रावास’ योग का निर्माण, प्राप्त होगा अक्षय फल

रोहिणी व्रत के दिन सर्वप्रथम वणिज करण का निर्माण हो रहा है। वणिज करण सुबह 09 बजकर 51 मिनट तक है। इसके बाद विष्टि करण का निर्माण हो रहा है जो रात 09 बजकर 30 मिनट तक है। इस दौरान कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है। वहीं रात्रि में 09 बजकर 30 मिनट के बाद बव करण का निर्माण हो रहा है। 1 अक्टूबर को रोहिणी व्रत है। यह दिन भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित होता है। अतः विधि विधान और श्रद्धा भाव से भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा की जाती है। साथ ही विशेष कार्य में सफलता पाने हेतु व्रत भी रखा जाता है। स्त्री और पुरुष दोनों रोहिणी व्रत कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य प्रताप से विवाहित महिलाओं को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषियों की मानें तो रोहिणी व्रत पर दुर्लभ भद्रावास का निर्माण हो रहा है। आइए, शुभ मुहूर्त और शुभ योग जानते हैं Rohini Vrat 2023 Kab hai शुभ मुहूर्त कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया 31 अक्टूबर को रात 09 बजकर 30 मिनट तक है। इसके पश्चात, चतुर्थी शुरू हो जाएगी। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। Rohini Vrat 2023 भद्रावास योग कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को दुर्लभ ‘भद्रावास’ का निर्माण हो रहा है। इस योग का निर्माण सुबह 09 बजकर 51 मिनट से लेकर रात्रि 09 बजकर 30 मिनट तक है। इस दौरान वासुपूज्य की पूजा करने से अक्षय फल की प्राप्ति होगी। धार्मिक मान्यता है कि भद्रा के स्वर्ग में रहने के दौरान पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतु, पशु पक्षी, मानव जगत का कल्याण होता है। करण रोहिणी व्रत के दिन सर्वप्रथम वणिज करण का निर्माण हो रहा है। वणिज करण सुबह 09 बजकर 51 मिनट तक है। इसके बाद विष्टि करण का निर्माण हो रहा है, जो रात 09 बजकर 30 मिनट तक है। इस दौरान कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है। वहीं, रात्रि में 09 बजकर 30 मिनट के बाद बव करण का निर्माण हो रहा है। बव और वणिज दोनों करण शुभ माने जाते हैं। इस योग में मां की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।

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नागपंचमी पूजा आज , जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पूजन सामग्री

नाग पंचमी पूजा आज है. आज 21 अगस्त दिन सोमवार है. आज हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है. इस विशेष दिन पर नाग देवता की विधिवत उपासना और पूजा की जाती है. नाग पंचमी के दिन नाग देवता को जल चढ़ाकर पूजा-पाठ करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है और कई प्रकार की समस्याएं टल जाती है. आइए जानते हैं, नाग पंचमी पर शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इससे जुड़ी पूरी जानकारी के बारे में…………. नाग पंचमी पूजन विधि

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मकर संक्रांति आज या कल? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त में इन चीजों का करें दान

पौष माह की शुक्ल की द्वादशी तिथि को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. पुराणों में मकर संक्रांति को देवताओं का दिन बताया गया है. मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है. मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है. मकर संक्रांति से ही ऋतु परिवर्तन भी होने लगता है. मकर संक्रांति से सर्दियां खत्म होने लगती हैं और वसंत ऋतु की शुरुआत होती है. इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी 2023, रविवार को मनाई जाएगी.  मकर संक्रांति का त्योहार हिंदू धर्म में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान सूर्य को समर्पित माना गया है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के ग्रह गोचर को संक्रांति कहा जाता है। मकर राशि में जाने को मकर संक्रांति कहते हैं। इस पर्व में लोग नई फसलों की पूजा भी करते हैं। मकर संक्रांति का पर्व हर राज्य में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। इसलिए इसे अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति को पूर्वी उत्तर प्रदेश खिचड़ी, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण, हरियाणा, पंजाब में माघी  और तमिलनाडु में पोंगल के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति का पर्व हर साल जनवरी महीने में ही आता है। लेकिन इस साल इस पर्व की तारीख को लेकर लोगों के बीच कंफ्यूजन है। मकर संक्रांति 2023 शुभ मुहूर्त- मकर संक्रांति पुण्य काल 15 जनवरी को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से शाम 05 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। अवधि 10 घंटे 31 मिनट की है। मकर संक्रांति महा पुण्यकाल का समय 15 जनवरी को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से सुबह 09 बजे तक रहेगा। अवधि 01 घंटा 45 मिनट की है। मकर संक्रांति पर किन चीजों का करें दान 1. तिल –  मकर संक्रांति पर  तिल का दान करना शुभ माना जाता है. तिल का दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं. 2. खिचड़ी-  मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाना जितना शुभ है उतना ही शुभ इसका दान करना भी माना जाता है.  3.  गुड़- इस दिन गुड़ का दान करना भी शुभ होता है. गुड़ का दान करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है. 4. तेल- इस दिन तेल दान करना शुभ होता है. ऐसा करने से शनि देव का आर्शीवाद मिलता है.  5. अनाज- मकर संक्रांति के दिन पांच तरह के अनाज दान करने से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है.6. रेवड़ी – मकर संक्रांति के दिन रेवड़ी का भी दान करना भी शुभ माना जाता है.  7. कंबल – इस दिन कंबल का दान करना शुभ होता है. इससे राहु और शनि शांत होते हैं.  

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पितृपक्ष में देवी देवता की पूजा करनी चाहिए की नहीं, जानिए नियम

आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन पितृपक्ष की शुरुआता होती है, जो कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को समाप्त होती है. इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनका तर्पण और पिंडदान किया जाता है. धार्मिक मान्यता अनुसार पितृपक्ष में सभी प्रकार के मांगलिक व शुभ कार्य वर्जित होते हैं. शास्त्रों में देवी-देवताओं की पूजा के साथ पूर्वजों की पूजा वर्जित है. ऐसे में अब सवाल उठता है कि पितृपक्ष में देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए या नहीं, आइए जानते हैं इसके बारे में… देवी-देवता की पूजा करनी चाहिए कि नहींपितरों को पूज्यनीय माना गया है. पितृ लोग पितृपक्ष के दौरान धरती पर वास करते हैं. ऐसे में इस दौरान पितरों की पूजा करना बेहद कल्याणकारी माना गया है. लेकिन अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि पितर पक्ष के दौरान देवी-देवता की पूजा करनी चाहिए कि नहीं तो हम आपको बता दें कि पितर पक्ष में प्रतिदिन की तरह ही पूजा करनी चाहिए, क्योंकि पितर देव हमारे लिए जरूर पूज्यनीय हैं. लेकिन हमारे ईश्वर से उच्च नहीं हैं. इन बातों का रखें ख्याल घर की मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमा के साथ पूर्वजों की तस्वीर न लगाएं. ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और घर में वास्तु दोष लगता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार पितरों की तस्वीर हमेशा घर में इस तरह लगाएं कि जहां उनका मुख दक्षिण दिशा की तरफ रहे.  वास्तु के अनुसार घर में पितरों की एक से अधिक तस्वीर नहीं होनी चाहिए. पितृपक्ष के दौरान प्रातः काल स्नान करने के बाद नित्य की तरह ही देवी-देवता की पूजा करनी चाहिए. देवी देवताओं के पूजा के बिना पितृपक्ष में श्राद्ध, पिंडदान इत्यादि का फल नहीं मिलता है. पितृपक्ष में कैसे करें पितरों का श्राद्धपितृपक्ष के दौरान नियमित देवी-देवता की पूजा करने के उपरातं दक्षिण दिशा में मुंह करके बाएं पैर को मोड़कर बाएं घुटने को जमीन पर टीका कर बैठ जाएं. इसके बाद पितरों का ध्यान करते हुए उनकी पूजा करें. पितरों के श्राद्ध के समय जल में काला तिल मिलाएंऔर हाथ में कुश रखकर उनका तर्पण करें. पितृपक्ष की अवधि में दोनों वेला में स्नान करने के पश्चात पितरों का ध्यान करें. इस दौराना ज्यादा से ज्यादा गरीबों को भोजन कराएं.

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Chaitra Navratri 2022: चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को लगाएं इन चीजों का भोग

आदिशक्ति मां दुर्गा की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्रि 2 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की भक्ति भाव के साथ पूजा करने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां अंबे को अगर भक्त नवरात्रि के समय राशिनुसार भोग लगाते हैं तो उन्हें दोगुना फल मिलता है। जानें माता रानी को कौन-सा भोग लगाना चाहिए। पहला स्वरूप मां शैलपुत्री पहला दिन मां शैलपुत्री का माना जाता है। आरोग्य और धन लाभ के लिए मां को गाय के घी का भोग लगाना शुभ होगा। मेष- मेष राशि वालों के लिए जातक स्कंद माता की उपासना करें और रोज दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। इसके अलावा मां शैलपुत्री को सफेद चीजों का भोग लगाएं। माता रानी को नारियल चढ़ाएं। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को लगाएं ये भोग नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन मां ब्रह्मचारिणी को चीनी का भोग लगाना चाहिए। इससे अच्छी सेहत के साथ दीर्घायु का वरदान मिलता है। वृषभ- वृषभ राशि के लोग नवरात्रि में घर में मोर पंख लगाएं। सौभाग्य की प्राप्ति के लिए नवरात्रि के समय माता को मिश्री व पंचामृत का भोग लगाएं। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को लगाएं ये भोग तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है। इस दिन मां को भोग लगाने के साथ जरूरतमंद को दान देना शुभ माना जाता है। इसलिए तीसरे दिन मां को दूध या इससे संबंधी बनी हुई चीजों का भोग लगा सकते हैं। इससे धन लाभ होगा। मिथुन– नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के शक्कर का भोग लगाना शुभ रहेगा। मान्यता है कि इससे धन व वैभव की प्राप्ति होती है। चौथे दिन मां कुष्मांडा देवी को लगाएं ये भोग नवरात्रि के चौथे दिन माता कुष्मांडा देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन मां को मालपुआ का नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। इससे जातक के ऊपर मां का आशीर्वाद बना रहता है। कर्क- कर्क राशि वालों को गाय का घी अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भक्त को मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। पांचवें दिन माता स्कंदमाता को लगाएं ये भोग नवरात्रि के पांचवे दिन माता स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए। इससे व्यक्ति के बिजनेस, करियर में उन्नति होती है और हर काम बनने लगते है। सिंह- सिंह राशि के जातक माता रानी को मालपुए का भोग लगाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से बुद्धि व कौशल का विकास होता है। छठे स्वरूप मां कात्यायनी को लगाएं ये भोग नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठवें अवतार मां कात्यायनी की पूजा की जाती हैं। इस दिन मां को शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इससे जातक को धन, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। कन्या- कन्या राशि वालों को मां दुर्गा को शक्कर का भोग लगाना चाहिए। इससे धन व वैभव की प्राप्ति होती है। सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को लगाएं ये भोग नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करने का विधान है। रोग मुक्त होने के लिए मां कालरात्रि को गुड़ से बनाई हुई चीज का भोग लगाएं। तुला– तुला राशि वालों को मिठाई का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-शांति व खुशहाली आती है। आठवें स्वरूप मां महागौरी को लगाएं ये भोग नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा का आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा करने का विधान है। मां का आशीर्वाद पाने और हर इच्छा पूर्ण करने के लिए मां को नारियल का भोग लगाएं वृश्चिक- वृश्चिक राशि वालों को नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा को रोज 1 नारियल चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से मां दुर्गा के प्रसन्न होने की मान्यता है। नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री को लगाएं ये भोग नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूड़ी और खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इस दिन ये भोग लगाने से मां की कृपा हमेशा जातक के ऊपर बनी रहती है। धनु- धनु राशि वालों को मां दुर्गा को दूध व उससे बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से दुख व भय दूर होते हैं।मकर– मकर राशि वालों को नवरात्रि के दिनों में दूध व खीर का भोग लगाना चाहिए। सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।कुंभ- कुंभ राशि वालों को मां दुर्गा को गुड़ का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।मीन- मीन राशि वाले मां दुर्गा को खीर या दूध से बनी चीजों का भोग लगाएं। ऐसा करने से घर में खुशहाली आने की मान्यता है।

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