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Kawad Yatra 2025 Start Date: साल 2025 में कब निकलेगी कांवड़ यात्रा, जानिए यहां महत्व और नियम

Kawad Yatra 2025: श्रावण माह में कांवड यात्रा भी निकलती है, जिसमें हरिद्वार से जल लाकर सावन शिवरात्रि के शुभ अवसर पर भक्त महादेव का अभिषेक करते हैं. Sawan month 2025 : पंचांग के अनुसार, साल 2025 में सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई को रात 2 बजकर 6 मिनट से हो रही है और इसका समापन 9 अगस्त को होगा। इस बार सावन पूरे 30 दिनों का रहेगा। चूंकि सावन के पहले दिन से ही कांवड़ यात्रा आरंभ हो जाती है, इसलिए कांवड़ यात्रा 2025 की शुरुआत भी 11 जुलाई से मानी जाएगी। कांवड़ यात्रा सावन शिवरात्रि तक चलती है, जो इस बार अगस्त की शुरुआत में पड़ेगी। इस दौरान श्रद्धालु गंगा जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। माना जाता है कि इस यात्रा से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2025 – When will Kawad Yatra 2025 start पंचांग के अनुसार, Kawad Yatra 2025 सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 11 जुलाई देर रात 02 बजकर 06 मिनट से होगी और समापन अगले दिन यानी 12 जुलाई को देर रात 02 बजकर 08 मिनट पर समापन होगा. ऐसे में सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई से होगी. वहीं, इस माह का समापन 09 अगस्त को होगा. ऐसे में कांवड यात्रा की शुरूआत 11 जुलाई से शूरू हो जाएगी और सावन शिवरात्रि के दिन समाप्त. Kanwar Yatra 2025 Importance: सावन की सबसे बड़ी विशेषता Kawad Yatra 2025 कांवड़ यात्रा है, जिसमें भक्त हरिद्वार, गौमुख या गंगोत्री जैसे तीर्थस्थलों से गंगा जल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। यह यात्रा शिवरात्रि तक चलती है और विशेषकर सावन शिवरात्रि के दिन जल चढ़ाने का अत्यंत पुण्यफल माना जाता है। कहा जाता है कि कांवड़ यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी। Kawad Yatra 2025 आज यह यात्रा आस्था, श्रद्धा और निष्ठा का प्रतीक बन चुकी है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। Sawan Shivratri Kab Hai:सावन शिवरात्रि कब है? Kawad Yatra 2025 साल 2025 में सावन माह की शिवरात्रि 23 जुलाई को मनाई जाएगी। यह पर्व हर साल सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 23 जुलाई को सुबह 4 बजकर 39 मिनट से होगी और इसका समापन 24 जुलाई की रात 2 बजकर 28 मिनट पर होगा। इसलिए शिव भक्त 23 जुलाई को सावन शिवरात्रि का व्रत रखेंगे और दिनभर व्रत-पूजन कर रात को भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। यह दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने और मनोकामनाएं पूर्ण कराने के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसीलिए 23 जुलाई से कांवड़ यात्रा आरम्भ होगी।  कांवड़ यात्रा के प्रकार :Types of Kanwar Yatra कांवड़ यात्रा चार अलग-अलग प्रकारों में की जाती है, जो भक्तों की आस्था, सामर्थ्य और नियमों के अनुसार होती है।  कांवड़ यात्रा के नियम:rules of kanwar yatra

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Sawan Shivratri 2025 Date:सावन में कब रखा जाएगा मासिक शिवरात्रि का व्रत? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

Sawan Shivratri 2025 Date : हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना सावन महादेव की भक्ति के लिए बहुत खास माना गया है। शिव भक्तों को इस महीने का विशेष इंतजार रहता है। इस महीने में आने वाले सोमवार बहुत शुभ माने गए हैं। इनके अलावा भी सावन में शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कईं खास व्रत किए जाते है मासिक शिवरात्रि भी इनमें से एक है। वैसे तो मासिक शिवरात्रि का व्रत हर महीने आता है लेकिन इन सभी में सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व है। जानें साल 2025 में कब है सावन शिवरात्रि व्रत… Sawan Masik Shivratri 2025 Date And Time: सनातन संस्कृति में सावन माह को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। यह महीना विशेष रूप से भगवान शिव की उपासना के लिए समर्पित होता है। इस दौरान लोग व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और मंत्र जाप करते हैं और भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं। Sawan Shivratri 2025 Date सावन में आने वाली मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे शिवभक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा विशेष रूप से करने से जीवन में सुख-शांति, वैवाहिक जीवन में खुशहाल रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल सावन में मासिक शिवरात्रि का व्रत किस दिन रखा जाएगा। Sawan Shivratri 2025: सावन मास में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। इस महीने में आने वाला शिवरात्रि व्रत भी बहुत खास होता है क्योंकि साल में सिर्फ एक बार ही सावन शिवरात्रि का संयोग बनता है।  कब से शुरू होगा सावन 2025? (Sawan 2025 Start Date) उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, साल 2025 में सावन मास 11 जुलाई से शुरू होगा, जो 9 अगस्त तक रहेगा यानी इस बार सावन मास पूरे 30 दिन का रहेगा। इस सावन में 4 सोमवार का संयोग बन रहा है। पहला सावन सोमवार 14 जुलाई, दूसरा 21 जुलाई, तीसरा 28 जुलाई और चौथा 4 अगस्त को रहेगा। ये सभी सोमवार शिवजी की पूजा के लिए बहुत शुभ फल देने वाला रहेंगे। कब है सावन शिवरात्रि 2025? (Sawan Shivratri 2025 Date) मासिक शिवरात्रि का व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। Sawan Shivratri 2025 Date इस बार सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 23 जुलाई, बुधवार को सुबह 04:39 से देर रात 02: 28 तक रहेगी। चूंकि चतुर्दशी तिथि का सूर्योदय 23 जुलाई को होगा, इसलिए इसी दिन ये सावन शिवरात्रि का व्रत किया जाएगा। मासिक शिवरात्रि में रात्रि पूजन का महत्व है। सावन शिवरात्रि 2025 पूजा मुहूर्त (Sawan Shivratri Shubh Muhurat) पूजा का शुभ मुहूर्त Puja ka Subh Muhurat Sawan Shivratri 2025 Date सावन शिवरात्रि की रात्रि में भगवान शिव की पूजा का विशेष मुहूर्त 24 जुलाई की रात 12:07 बजे से 12:48 बजे तक का है। इस दौरान कुल 41 मिनट की अवधि को शिव पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस समय रात्रि जागरण, शिव नाम का जाप, और बेलपत्र, दूध, गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करना विशेष फलदायक होता है। पारण का समय Sawan Shivratri 2025 Date सावन शिवरात्रि व्रत का पारण 24 जुलाई को किया जाएगा। इस दिन पारण का समय सुबह 05:38 बजे का है। इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में सामंजस्य और प्रेम बना रहता है। साथ ही यह दिन जीवन के कष्टों को दूर करने, रोगों से मुक्ति और सौभाग्य प्राप्ति के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। धार्मिक महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन मास की शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और देवी पार्वती का पुनः मिलन हुआ था। इस दिन विधिवत व्रत और पूजन करने से शिवजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।  Disclaimerइस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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First Sawan Somwar 2025:सावन का पहला सोमवार कब है? जानिए व्रत की तारीखें और भगवान शिव की कृपा पाने का सही समय

First Sawan Somwar 2025: यदि आप भी भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं तो सावन सोमवार का व्रत जरूर रखें। मान्यता है कि भोलेनाथ की भक्ति से जीवन का हर कष्ट दूर होता है और सुख-समृद्धि मिलती है। Sawan 2025:हिंदू धर्म में भगवान शिव को सृष्टि के संहारक और कल्याणकारी देव के रूप में पूजा जाता है। शिवभक्तों के लिए श्रावण मास अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। यह महीना पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित होता है और माना जाता है कि इस दौरान शिवजी पृथ्वी पर निवास करते हैं। ऐसे में भक्तों की प्रार्थनाओं का प्रभाव भी शीघ्र दिखाई देता है। सोमवार भगवान शिव का वार है और सावन शिव का महीना, इसलिए इस महीने के सोमवार विशेष रूप से पूजनीय माने जाते हैं। इन सोमवारों को सावन सोमवारी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु शिवजी का व्रत रखते हैं, उपवास करते हैं, शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित करते हैं और शिव चालीसा, रुद्राष्टक या महामृत्युंजय जाप का पाठ करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं साल 2025 में सावन का महीना कब से शुरू हो रहा है और सावन का पहला सोमवार व्रत किस दिन रखा जाएगा।  Kab Se Suru Ho Raha Hai Sawan 2025;कब से शुरू हो रहा है सावन 2025 ? Sawan Somwar 2025 इस साल 2025 में सावन मास की शुरुआत 11 जुलाई 2025, शुक्रवार से हो रही है। द्रिक पंचांग के अनुसार यह महीना विशेष रूप से शुभ रहेगा क्योंकि इस बार सावन के दौरान किसी भी तिथि का क्षय (लोप) नहीं हो रहा है। इसका मतलब है कि भक्तों को पूरे 30 दिनों तक भगवान शिव की पूजा और उपासना का अवसर मिलेगा। सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाना, रुद्राभिषेक करना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना और सोमवार के दिन व्रत रखना विशेष फलदायी माना जाता है। Sawan Month 2025 start date and End date: कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें व्रत तिथि, पूजन विधि… First Sawan Somwar 2025:सावन का पहला सोमवार कब है? Sawan Somwar 2025 सावन के पहले सोमवार को प्रथम श्रावणी सोमवार कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। शिव भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करते हैं। 2025 में सावन का पहला सोमवार 14 जुलाई 2025 को पड़ेगा। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होती है और भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। सावन सोमवार की तिथियां:Sawan Monday dates पहला सोमवार- 14 जुलाई 2025दूसरा सोमवार- 21 जुलाई 2025तीसरा सोमवार- 28 जुलाई 2025चौथा सोमवार- 4 अगस्त 2025 पहले सावन सोमवार पर शुभ मुहूर्त:Auspicious time on first Monday of Sawan ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:16 से 5:04 बजे तकअभिजित मुहूर्त- दोपहर 11:59 बजे से 12:55 बजे तकअमृत काल- रात 11:21 बजे से 12:55 बजे तक, जुलाई 15पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय- दोपहर 11:38 बजे से 12:32 बजे तक ऐसी मान्यता है कि जो भक्त पूरे सावन मास के सभी Sawan Somwar 2025 सोमवारों का व्रत नहीं कर सकते, वे कम से कम पहले और अंतिम सोमवार का व्रत अवश्य करें। यह भी उतना ही पुण्यदायी होता है और शिव कृपा प्राप्त होती है। कब शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2025?:When will Kanwar Yatra 2025 start? Sawan Somwar 2025 सावन महीने में शिव भक्तों द्वारा की जाने वाली कांवड़ यात्रा का भी खास महत्व है। इस यात्रा में भक्त पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा नदी से जल भरकर पैदल यात्रा करते हैं और उसे अपने नजदीकी या प्रसिद्ध शिव मंदिरों में अर्पित करते हैं। Sawan Somwar 2025 इस साल कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी 11 जुलाई 2025 से ही हो रही है। सावन का महत्व:Importance of Sawan सावन मास को शिवभक्ति का महीना माना जाता है। मान्यता है कि इसी महीने में समुद्र मंथन हुआ था और भगवान शिव ने विषपान कर संसार की रक्षा की थी। तभी से इस माह में शिव की विशेष पूजा की जाती है। खासकर सोमवार का व्रत अविवाहित लड़कियों द्वारा अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

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Secrets of Mahadev:क्या आप जानते हैं शिव से जुड़े ये 7 गुप्त रहस्य ?

Secrets of Mahadev:शिव पुराण में भगवान शिव को देवों का देव अर्थात महादेव कहा गया है। भगवान शिव को सृष्टि का संहारक भी कहा जाता है लेकिन संहारक का अर्थ यहां केवल सृष्टि के अंत से नहीं है बल्कि सृजन की प्रक्रिया से है। जब-जब पाप धरती पर हावी हो जाता है और मनुष्यता का अंत होने लग जाता है, तो धरा को नवजीवन की आवश्यता होती है, ऐसे में धरती के सृजन के लिए भगवान शिव संहारक की भूमिका निभाते हुए सृष्टि का संहार करते हैं। Secrets of Mahadev:इसके बाद ब्रह्मा धरा का सृजन करते हैं और फिर भगवान विष्णु जगत के पालनहार की भूमिका निभाते हैं। बात करें, भगवान शिव के जीवन की,तो महादेव के बारे में कहा जाता है कि शिव समस्त मोह-माया से दूर रहकर भी संसार से प्रेम करते हैं। कुछ पौराणिक कहानियों में महादेव को निर्मोही भी कहा गया है। आइए, जानते हैं भगवान शिव के जीवन के 7 अद्भुत रहस्य, जो आपको कलियुग के कई सवालों के जवाब देकर आपको जीवन को समझने में मदद करेंगे। इन रहस्यों में जीवन के ऐसे उत्तर छुपे हैं, जो जीवन के प्रति आपको एक उम्मीद भी देंगे। Secrets of Mahadev:शिव से जुड़े ये 7 गुप्त रहस्य? 1. Shiv Ji Ki Kitni Wife Thi:कितनी थीं शिव की पत्नियां? यह रहस्य की बात है कि भगवान शंकर का विवाह सर्वप्रथम प्रजापति दक्ष की पुत्री सती से हुआ फिर जब वे यज्ञकुंड में कूदकर भस्म हो गईं, तब उन्होंने दूसरा जन्म लिया और हिमवान की पुत्री पार्वती कहलाईं। कहते हैं कि गंगा, काली और उमा भी शिव की पत्नियां थीं। 2. कितने हैं शिव के पुत्र:How many sons does Shiva have? भगवान शिव ने पार्वती से विवाह करने के बाद कार्तिकेय नाम का एक पुत्र प्राप्त किया। Secrets of Mahadev गणेश तो माता पार्वती के उबटन से बने थे। सुकेश नामक एक अनाथ बालक को उन्होंने पाला था। जलंधर शिव के तेज से उत्पन्न हुआ था। अय्यप्पा शिव और मोहिनी के संयोग से जन्मे थे। भूमा उनके ललाट के पसीने की बूंद से जन्मे थे। अंधक और खुजा नामक 2 पुत्र और थे जिसके बारे में ज्यादा उल्लेख नहीं मिलता है। 3. शिव के कितने शिष्य:How many disciples does Shiva have? शिव के प्रमुख 7 शिष्य हैं जिन्हें प्रारंभिक सप्तऋषि माना गया है। इन ऋषियों ने ही शिव के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया जिसके चलते भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। शिव के शिष्य हैं- बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज इसके अलावा 8वें गौरशिरस मुनि भी थे। Secrets of Mahadev शिव के शिष्यों में वशिष्ठ और अगस्त्य मुनि का नाम भी लिया जाता है। 4. क्या शिव ही बुद्ध थे Was Shiva the Buddha? बौद्ध साहित्य के मर्मज्ञ अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान प्रोफेसर उपासक का मानना है कि शंकर ने ही बुद्ध के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने पालि ग्रंथों में वर्णित 27 बुद्धों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें बुद्ध के 3 नाम अतिप्राचीन हैं- तणंकर, शणंकर और मेघंकर। 5. क्या शिव और शंकर एक ही हैं Are Shiv and Shankar the same? कुछ पुराणों के अनुसार भगवान शंकर को शिव इसलिए कहते हैं कि वे निराकार शिव के समान हैं। निराकार शिव को शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के 2 नाम बताते हैं। असल में दोनों की प्रतिमाएं अलग-अलग आकृति की हैं। शंकर को हमेशा तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। कई जगह तो शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए दिखाया गया है। अत: शिव और शंकर 2 अलग-अलग सत्ताएं हैं। माना जाता है कि महेश (नंदी) और महाकाल, भगवान शंकर के द्वारपाल हैं। रुद्र देवता शंकर की पंचायत के सदस्य हैं। 6. हर काल में शिव:Shiva in every era भगवान शिव ने हर काल में लोगों को दर्शन दिए हैं। Secrets of Mahadev वे सतयुग में समुद्र मंथन के समय भी थे और त्रेता में राम के समय भी। द्वापर युग की महाभारत काल में भी शिव थे और कलिकाल में विक्रमादित्य के काल में भी शिव के दर्शन होने का उल्लेख मिलता है। भविष्य पुराण के अनुसार राजा हर्षवर्धन को भगवान शिव ने मरुभूमि पर दर्शन दिए थे। 7. वनवासी और आदिवासियों के देवता:God of forest dwellers and tribals? भारत की असुर, दानव, राक्षस, गंधर्व, यक्ष, आदिवासी और सभी वनवासियों के आराध्य देव शिव ही हैं। Secrets of Mahadev शैव धर्म भारत के आदिवासियों का धर्म है। सभी दसनामी, शाक्त, सिद्ध, दिगंबर, नाथ, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव धर्म से जुड़े हुए हैं। चंद्रवंशी, सूर्यवंशी, अग्निवंशी और नागवंशी भी शिव की ही परंपरा से ही माने जाते हैं।

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Kanwar Yatra 2025:कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा,इस बार कितने पड़ेंगे सावन में सोमवार

Kanwar Yatra 2025:सावन( Kab Se Hai Sawan 2025) का महीना देवों के देव महादेव को समर्पित है। इस माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है और इस माह में कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2025) की शुरुआत होती है। इस दौरान हरिद्वार में बेहद खास रौनक देखने को मिलती है। हिंदू कैलेंडर का पांचवा सावन (Sawan 2025) होता है, जिसे श्रावण माह के नाम से भी जाना जाता है। इस माह में महादेव के संग मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही कांवड़ यात्रा की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कांवड़ यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी। तभी से कांवड़ यात्रा की परंपरा जारी है। इस पावन यात्रा में अधिक संख्या में शिव भक्त शामिल होते हैं। हरिद्वार से जल लाकर सावन शिवरात्रि के शुभ अवसर पर महादेव का अभिषेक करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा। साल 2025 में कितने सोमवार – How many Mondays in the year 2025 इस बार सावन में 4 सोमवार पड़ेंगे.  Sawan somvar list 2025 : सावन का महीना शिव भक्तों के लिए बहुत खास होता है. Kanwar Yatra 2025 इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करना शुभफलदायी माना जाता है. सोमवार का उपवास करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है. Kanwar Yatra 2025 साथ ही कुंआरी लड़कियों को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है. ऐसे में आइए जानते हैं कब से सावन का महीना शुरू हो रहा है और इस बार कितने सोमवार (sawan somavar vrat 2025) पड़ रहे हैं.  सावन सोमवार व्रत 2025 तारीख – Sawan somvar calendar 2025 सावन का पहला सोमवार व्रत 14 जुलाई को सावन का दूसरा सोमवार व्रत 21 जुलाई को सावन का तीसरा सोमवार व्रत 28 जुलाई को सावन का चौथा सोमवार व्रत 04 अगस्त को  कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2025 (Kawad Yatra 2025 Start Date) इस बार 11 जुलाई से सावन माह की शुरुआत हो रही है। Kanwar Yatra 2025 ऐसे में इसी दिन से कांवड़ यात्रा की शुरुआत होगी और सावन शिवरात्रि के दिन कांवड़ यात्रा का जल चढ़ेगा। सावन शिवरात्रि 2025 डेट (Sawan Shivratri 2025) Kanwar Yatra 2025 हर महीन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 23 जुलाई को सुबह 04 बजकर 39 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 24 जुलाई को देर रात 02 बजकर 28 मिनट से होगी। ऐसे में सावन शिवरात्रि का पर्व 23 जुलाई को मनाया जाएगा। सावन के महीने में क्या करें – What to do in the month of Sawan सावन के महीने में क्या न करें – What not to do in the month of Savan Sawan Month 2025 start date and End date: कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें व्रत तिथि, पूजन विधि… शिव मंत्र (Shiv Mantra) 1. सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।उज्जयिन्यां महाकालं ओम्कारम् अमलेश्वरम्॥परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।।2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

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Powerful Shiva Mantra:शिव के इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप, रोग-कष्ट और परेशानियों को दूर करता है

Powerful Shiva Mantra: सोमवार का दिन भोलेनाथ को समर्पित होता है. इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. कहा जाता है कि भोलेनाथ बहुत भोले हैं और भक्तों से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. भगवान शिव की पूजा में तरह-तरह की चीजों का इस्तेमाल किया जाता है Powerful Shiva Mantra ताकि उनकी कृपा प्राप्त की जा सके. इन सब में मंत्रों का जाप बहुत शक्तिशाली माना जाता है. माना जाता है कि शिव के इन शक्तिशाली मंत्रों के जाप से रोग-कष्ट और हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं.  शिव मंत्र के लाभ:Benefits of Shiva Mantra सोमवार के दिन शिव के इन मंत्रों का जाप करने से हर तरह के रोग, दोष और सभी सकंट समाप्त हो जाते हैं. इन मंत्रों के जाप से पितृ दोष, कालसर्प दोष, राहु- केतु और शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है. जिन लोगों के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना कठिन होता, उन्हें लघु महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए इससे असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं. Powerful Shiva Mantra इन मंत्रों का उच्चारण करने से काम, क्रोध, घृणा, मोह, लोभ, भय, विषाद सब खत्म हो जाता है. यह मंत्र व्यक्ति में साहस और उत्साह पैदा करते हैं. शिव के इन मंत्रों के जाप से शरीर संबंधी सभी विकार समाप्त हो जाते हैं. माना जाता है कि इन मंत्रों से आत्मीय और मानसिक शान्ति के साथ-साथ स्थिरता प्राप्त होती है. इनके जाप से आभामंडल में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगता है. Shaktishali Shiv Mantra: पवित्र सावन मास के पुण्यदायी दिन सोमवार को देवाधिदेव भगवान शिव की पूजा और भक्ति का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इस विशेष दिन को शिवमंत्रों का जाप करने से न केवल आशुतोष भगवान शिव की कृपा मिलती है, Powerful Shiva Mantra बल्कि साधक-साधिका की आत्मिक और मानसिक उन्नति होती है और शारीरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। भगवान शिव को प्रसन्न करने वाले शक्तिशाली शिवमंत्र:Powerful Shiva Mantras to please Lord Shiva यहां जो शिवमंत्र बताए गए है, वे विशेष जप-मंत्र हैं, जिनके जाप से व्यक्ति का चित्त शांत होता है Powerful Shiva Mantra और उनमें आध्यात्मिक चेतना विकसित होती है। प्रस्तुत है महत्वपूर्ण और उपयोगी शिवमंत्रों की सूची और उनसे प्राप्त होने वाले लाभ: 1. अति-शक्तिशाली और प्रसिद्ध शिवमंत्र “ॐ नमः शिवाय”“Om Namah Shivaya” यह महादेव शिव का सबसे सरल लेकिन अति-शक्तिशाली और प्रसिद्ध मंत्र है। Powerful Shiva Mantra इसका समुचित जाप करने से भक्त को शिवजी की कृपा और मानसिक शांति प्राप्त होती और साधक को हर क्षेत्र में उन्नति प्राप्त होती है। 2. दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य प्राप्ति शिवमंत्र “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥” “Om Tryambakam Yajamahe, Sugandhim Pushti Vardhanam.Urvarukamiva Bandhanan, Mrityor Mukshiya Maamritat.” यह महामृत्युंजय मंत्र है। इस सर्वकालिक सिद्ध मंत्र के नियमपूर्वक जाप से महादेव शिव अपने भक्त को असमय मृत्यु, हर प्रकार के रोग से रक्षा, अस्वस्थता और कष्टों से मुक्ति प्रदान करते हैं। 3. आत्मिक उन्नति और सर्व-शक्ति प्राप्ति शिवमंत्र “ॐ नमः शिवाय व्योमकेश्वराय”“Om Namah Shivaya Vyomakeshvaraya” इस मंत्र का जाप करने से साधक की मानसिक और आत्मिक उन्नति होती है। विशेष अनुष्ठान के साथ इस मंत्र का जाप व्यक्तिमात्र को सर्वशक्तिमान बनाता है। सुख-शांति और अक्षय समृद्धि की प्राप्ति होती है। 4. हर प्रकार के भय से मुक्ति का शिवमंत्र “ॐ नमो भगवते रुद्राय”“Om Namo Bhagavate Rudraya” इस मंत्र का जाप जगत-संहारक भगवान शंकर के रुद्र रूप को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। Powerful Shiva Mantra इसका जाप करने से व्यक्ति को किसी प्रकार का भय नहीं होता है यानी उसे अभय होने का वरदान मिलता है। उसे हर प्रकार का सुख और इंद्र के समान ऐश्वर्य और समृद्धि प्राप्त होती है। 5. सौभाग्य-प्राप्ति शक्तिशाली बीज शिवमंत्र “ॐ हं हं सह:”“Om Ham Ham Sah” यह सौभाग्य की प्राप्ति के लिए बहुत ही शक्तिशाली बीज शिवमंत्र है। इस मंत्र के विधानपूर्वक जाप करने से भगवान शिव की कृपा तो प्राप्त होती ही है, साथ ही शक्ति और प्रसिद्धि भी प्राप्त होती है। 6. सर्वसुरक्षा और धैर्य वृद्धि शिवमंत्र “ॐ नमः शिवाय गङ्गाधराय”“Om Namah Shivaya Gangadharaya” यह भगवान शिव की आराधना का विशेष मंत्र है। इस मंत्र का जाप करने से परम वंदनीय शिवजी की कृपा से जीवन में धैर्य और सहनशीलता आती है। हर प्रकार की सुरक्षा और धन-प्राप्ति होती है। 7. चिंता से मुक्ति और शांति प्राप्ति शिवमंत्र “ॐ नमः शिवाय शान्ताय”“Om Namah Shivaya Shantaya” Powerful Shiva Mantra भगवान शिव को समर्पित इस विशेष इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की सभी सांसारिक और आधिभौतिक चिंताएं और परेशानियां दूर हो जाती हैं। मन को शांति मिलती है। जीवन सुकून से भर जाता है। 8. शिव-कृपा प्राप्ति विशेष मंत्र/सर्व अभीष्ट प्राप्ति मंत्र “ॐ शंकराय नमः”“Om Shankaraya Namah” ‘ॐ नमः शिवाय” की भांति यह मंत्र भी भगवान शिव की आराधना का अति-लाभकारी मंत्र है। Powerful Shiva Mantra अघोरी और तांत्रिक साधना के साधक भी इस मंत्र का जाप करते हैं। इसके जाप से शिवकृपा तुरंत प्राप्त होती है। देश में एकमात्र यहां होती है खंडित शिवलिंग की पूजा, गैविनाथ के नाम से प्रसिद्ध है ये शिवधाम 9. सर्व-बाधा मुक्ति शिवमंत्र “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्”“Om Ham Hanumate Rudratmakaya Hum Phat” इस विशेष मंत्र में भगवान शिव का उनके अवतार हनुमानजी की एकसाथ स्तुति की गई है। यह बहुत फलदायी मंत्र है। इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से साधक को सभी बाधाओं और दुःखों से मुक्ति मिल जाती है। यह मंत्र कलियुग में विशेष प्रभावशाली है। 10. मनोवांछित फलप्राप्ति शिवमंत्र “ॐ पार्वतीपतये नमः”“Om Parvatipataye Namah” शक्ति-स्वरूपा देवी पार्वती के पति होने के कारण भगवान शिव का एक प्रसिद्ध नाम ‘पार्वतीपतये’ है। देवी पार्वती के नाम से युक्त इस मंत्र के जाप भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। सनातन धर्मग्रंथों से लिए गए इन चुनींदा शिवमंत्रों के नियमित और समुचित जप करने से मन की शुद्धि होती है। Powerful Shiva Mantra साधक-साधिका को सर्वपूज्य भगवान शिव की अनुकंपा से परम आत्मिक और सांसारिक उन्नति की प्राप्ति होती है। लेकिन स्मरण रहे कि इन सभी शिवमंत्रों का जाप पूरे विश्वास, सच्ची निष्ठा, पूर्ण एकाग्रता और असीम समर्पण के साथ करने से ही लाभ होता है। सनातन धर्म के ग्रंथों अनुसार, इन शिवमंत्रों का नियमित रूप से जाप करने से मानसिक, शारीरिक और

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Sawan Month 2025 start date and End date: कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें व्रत तिथि, पूजन विधि…

Sawan Month 2025 start date:भगवान शिव की अराधना का सबसे पवित्र महीना सावन हिंदू धर्म के लोगों के लिए बेहद खास होता है। इस दौरान भक्त सावन सोमवार व्रत रखते हैं। चलिए आपको बताते हैं 2025 में सावन महीना कब से शुरू हो रहा है। Sawan 2025 Date (सावन कब से शुरू है 2025): सावन के महीने को श्रावण मास के नाम से भी जानते हैं। इस महीने में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। हिंदू पंचांग अनुसार ये साल का पांचवां महीना होता है। जो जुलाई-अगस्त में पड़ता है। इस दौरान सावन सोमवार व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। सावन के महीने में हर साल लाखों श्रद्धालु ज्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए जाते हैं। इस महीने में भक्त कांवड़ यात्रा भी निकालते हैं। चलिए आपको बताते हैं इस साल यानी 2025 में सावन कब से लग रहा है। Sawan Puja Rituals: सावन का महीना पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित होता है, जिसे शिवभक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। इस दौरान भक्त रोज़ाना भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं, लेकिन सावन के सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन शिव भक्त उपवास रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि अर्पित कर जलाभिषेक करते हैं। माना जाता है कि सावन सोमवार का व्रत करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर इच्छा पूरी करते हैं। Sawan Month 2025 start date:सनातन परंपरा के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस अवधि में सृष्टि का संचालन भगवान शिव संभालते हैं। यह समय ‘चातुर्मास’ कहलाता है, जो पूरी तरह धर्म, तप, व्रत और संयम का प्रतीक है। ऐसे में सावन का महीना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। भगवान शिव की आराधना से जीवन की समस्याएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। अब भक्तों को इंतज़ार है सावन के शुभारंभ की तारीख का, जब वे पूरे भक्ति भाव से भोलेनाथ की आराधना में जुट सकें। Sawan Month 2025 start date and End date:कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना  Sawan Month 2025 start date वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन का महीना 11 जुलाई 2025 से शुरू होगा। इससे पहले 10 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा है, जो 10 जुलाई की रात 1:36 बजे से शुरू होकर 11 जुलाई की रात 2:06 बजे तक रहेगी।  सनातन परंपरा में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसी कारण श्रावण मास की प्रतिपदा तिथि 11 जुलाई की रात 11:07 मिनट से आरम्भ होकर 12 जुलाई की रात 2:08 मिनट तक रहेगी। और इसीलिए 11 जुलाई से सावन माह की शुरुआत मानी जाएगी। सावन माह पर योग:Yoga on the month of Sawan Sawan Month 2025 start date इस बार सावन के पहले ही दिन एक विशेष योग बन रहा है, जिसे शिववास योग कहा जाता है। इस शुभ संयोग में भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे। Sawan Month 2025 start date मान्यता है कि इस योग में शिवजी की पूजा और जलाभिषेक करने से साधक को सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। सावन के सोमवार व्रत की तिथियां :Dates of Monday fast of Sawan 14 जुलाई – पहला सोमवार व्रत21 जुलाई – दूसरा सोमवार व्रत28 जुलाई – तीसरा सोमवार व्रत04 अगस्त – चौथा और अंतिम सोमवार व्रतइसके बाद 09 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ यह पावन महीना समाप्त होगा। Sawan Month 2025 start date इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा।  पूजा विधि Puja vidhi सावन माह का धार्मिक लाभ : Religious benefits of Sawan month Sawan Month 2025 start date सावन माह हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और यह विशेष रूप से भगवान शिव की उपासना का समय होता है। इस माह में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और पापों का नाश होता है। सावन सोमवार का व्रत रखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है। इस समय ध्यान, जप, व्रत और दान करने से आत्मिक शुद्धि होती है और पूर्व जन्मों के पाप भी नष्ट होते हैं। यह माह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।

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Sapne Me Shivling Dekhna:सपने में पार्थिव शिवलिंग देखने का मतलब जानिए, इस मामले में होता है बेहद लाभकारी

Shivling Dekhna:कई बार सपने में शिवलिंग हमें लगातार दिखाई देता है जिसे देखने के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं कि इसका क्या मतलब हो सकता है? अगर आपको कभी सपने में भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग का दर्शन हो तो आपको खुश हो जाना चाहिए। क्योंकि यह सपना आपके लिए बेहद शुभ है। Shivling Darshan: हिंदू धर्म में स्वप्नशास्त्र का बेहद महत्व है। ऐसा माना जाता है कि सपने हमें भविष्य से जुड़े संकेत देते हैं। कई बार सपने में शिवलिंग हमें लगातार दिखाई देता है, जिसे देखने के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं कि इसका क्या मतलब हो सकता है? Shivling Dekhna अगर आपको कभी सपने में भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग का दर्शन हो, तो आपको खुश हो जाना चाहिए। क्योंकि यह सपना आपके लिए बेहद शुभ है। तो आइए स्वप्नशास्त्र के अनुसार, जानते हैं सपने में शिवलिंग दिखने का महत्व- Sapne Me Shivling Dekhna:सपने में शिवलिंग का दिखना सपने में यदि आपने शिवलिंग को देखा तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा मानते हैं कि यदि सपने में आपको Shivling Dekhna शिवलिंग दिखाई दे तो निजी जीवन में आपका कोई बहुप्रतीक्षित कार्य बनने वाला है। ऐसा कहते हैं कि आपको उस कार्य में सफलता मिलना तय और भोले बाबा का हाथ आपके ऊपर है। सपने में शिवलिंग की पूजा करते देखना:Seeing worshiping Shivling in the dream यदि आपने सपने में खुद को शिवलिंग की पूजा करते देखा है तो समझ लीजिए आपके जीवन से सभी प्रकार के अशुभ तत्‍वों का नाश होने वाला है। ऐसा सपना अच्‍छा समय आने का और पुरानी परेशानियां दूर होने का संकेत देता है। यह सपना किसी की अधूरी इच्‍छा पूरी होने का और मनोकामना पूर्ति का संकेत देता है। सपने में सपरिवार भगवान शिव की पूजा करना:Worshiping Lord Shiva with family in the dream यदि आप खुद को अपने परिवार के साथ शिवजी की पूजा करते देखते हैं तो यह इस बात का संकेत है कि आप अपने काम में पूरे त्‍याग, समर्पण और ईमानदारी के साथ लगे रहते हैं।Shivling Dekhna ऐसा सपना आना बताता है कि कार्यक्षेत्र में आपकी आने वाली परेशानियां जल्‍द ही दूर होने वाली हैं। आपके जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्‍य आने वाला है। ऐसा सपना उन्‍नति और सुख सौभाग्‍य का प्रतीक माना जाता है। सपने में सफेद शिवलिंग देखना:Seeing white Shivling in dream अगर आपको सपने में यदि सफेद शिवलिंग के दर्शन हों तो यह इस बात का संकेत माना जाता है कि आने वाले वक्‍त में आपको या फिर आपके परिवार के किसी सदस्‍य को गंभीर रोग से छुटकारा मिल सकता है और आपके जीवन में कुछ अच्‍छा होने वाला है। सपने में शिव मंदिर की सीढ़ियां चढ़ना:Climbing the stairs of Shiva temple in a dream सपने में शिव मंदिर की सीढ़ियां चढ़ना भी असल जीवन में बहुत ही शुभ संकेत देता है। इसका अर्थ है कि आप अपने जीवन में सुख शांति की ओर बढ़ रहे हैं। संघर्ष का दौर आपके जीवन से समाप्‍त होने वाला है और जल्‍द ही आपके जीवन में स्‍थायित्‍व आने वाला है और सब कुछ आपके अनुसार होने वाला है। पुर्वजन्म से है जुड़ा है सपना:The dream is connected to the previous birth अगर आपको सपने में Shivling Dekhna शिवलिंग के दर्शन होते हैं, तो इसका संबंध पुर्वजन्म से भी हो सकता है। धार्मिक मान्यता है कि इस सपने से यह भी पता चलता है कि आपको आपके बुरे कर्मों की सजा मिल चुकी है। अब आपका बुरा समय खत्म हो गया है। साथ ही आपका भाग्योदय जल्द होने वाला है। सपने में शिवलिंग दिखने पर करें यह उपाय:Do this remedy if you see Shivling in your dream स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आपको सपने में शिवलिंग के दर्शन होते हैं, तो आपको अगली सुबह शिव मंदिर जाना चाहिए। इसके बाद भोलेनाथ की विधिवत पूजा – अर्चना करनी चाहिए। साथ ही शिव जी के पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ या फिर किसी मंत्र का जाप करना चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं, तो आपके सपनों का शुभ परिणाम दोगुना हो जाएगा।

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History Of Kedarnath Temple:नर-नारायण और पांडवों से जुड़ा है केदारनाथ का इतिहास, आदिगुरु शंकराचार्य ने कराया था मंदिर का जिर्णोद्धार

History Of Kedarnath Temple:शिव जी का पांचवां ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में है। इसका नाम है केदारनाथ। ये मंदिर उत्तराखंड के चारधामों में भी शामिल है। शिव जी के इस धाम का इतिहास भगवान विष्णु के अवतार नर-नारायण, पांडव और आदिगुरु शंकराचार्य से जुड़ा है। ये मंदिर हिमालय क्षेत्र में है, इस वजह से शीत ऋतु के समय करीब 6 महीने बंद रहता है और ग्रीष्म ऋतु के समय भक्तों के लिए खोला जाता है। जानिए पांचवें ज्योतिर्लिंग से जुड़ी खास बातें… History Of Kedarnath Temple:नर-नारायण के तप से प्रसन्न होकर प्रकट हुए थे शिव जी पांडवों से जुड़ी है केदारनाथ की मान्यता:The belief of Kedarnath is related to Pandavas. History Of Kedarnath महाभारत के समय यानी द्वापर युग में केदार क्षेत्र में शिव जी ने पांडवों को बेल रूप में दर्शन दिए थे। वर्तमान मंदिर का निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने 8वीं-9वीं सदी में करवाया था। ये मंदिर उत्तराखंड के चार धामों में से एक है। मंदिर समुद्र तल से करीब 3,583 मीटर की ऊंचाई पर है। ये मंदिर हिमालय क्षेत्र में है, इस कारण शीत ऋतु के दिनों में बंद रहता है। गुरु शंकराचार्य ने कराया था मंदिर का जिर्णोद्धार:Guru Shankaracharya had renovated the temple मान्यता है कि ये केदारनाथ धाम में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। स्वयंभू शिवलिंग का अर्थ है जो स्वयं प्रकट हुआ है। History Of Kedarnath केदारनाथ मंदिर का निर्माण पांडव राजा जनमेजय ने करवाया था। बाद में आदि गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर का जिर्णोद्धार करवाया। मंदिर से जुड़ी अन्य खास बातें:Other special things related to the temple केदारनाथ मंदिर में सोना लगाने का इतिहास:History of applying gold in Kedarnath temple केदारनाथ मंदिर में सोना लगाने के इतिहास का जिक्र नहीं मिलता है. हालांकि ऐसा दावा किया जाता है कि History Of Kedarnath केदारनाथ मंदिर के निर्माण के बाद से 12 वीं शताब्दी तक यहां सोना-चांदी लगाया जाता था, इसके बाद यह प्रथा खत्म हो गई. पिछले साल जब यहां सोने की परत चढ़ाने काम काम शुरू हुआ था उससे पहले यहां दीवारों पर चांदी की परत चढ़ी थी. जब सोने की परत का काम शुरू हुआ तो पुजारियों ने विरोध किया था. उस वक्त केदार सभा के पूर्व अध्यक्ष महेश बगवाड़ी ने कहा था कि मंदिर की दीवारों पर सोना चढ़ाना हिंदू मान्यताओं और परंपराओं के अनुरूप है. उस वक्त BKTC के चेयरमैन अजेंद्र अजय ने भी कहा था कि यह सामान्य प्रक्रिया है, पहले छत लकड़ी से बनती थी, फिर पत्थर से बनी, इसके बाद तांबें की प्लेंटे आईं. उन्होंने विरोध को साजिश बताया था. महाभारत में है केदारनाथ का जिक्र:Kedarnath is mentioned in Mahabharata History Of Kedarnath केदारनाथ का इतिहास बेहद पुराना है, महाभारत में भी इसका जिक्र मिलता है, ऐसा दावा किया जाता है कि मंदिर का निर्माण पांडवों ने कराया था. इसके पीछे यहां एक किवदंती भी है, ऐसा कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद गौत्र बंधुओं की हत्या के पाप से मुक्ति के लिए पांडव भगवान शंकर के पास केदारघाटी गए. भोलेनाथ ने पांडवों को दर्शन न देने के लिए भैंसे का रूप रख लिया और जानवरों के बीच छिप गए. उन्हें ढूंढने के लिए भीम ने विशाल रूप रखकर घाटी के दोनों ओर पैर जमा लिए. जब भगवान शंकर पहचान लिए गए तो वह धरती में समाने लगे, तभी भीम ने उनका पृष्ठ भाग पकड़ लिया. इसके बाद भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर पांडवों को दर्शन दिए. History Of Kedarnath केदारनाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ के इसी पृष्ठ भाग का पूजन होता है.

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why celebrated mahesh navami:महेश नवमी क्यों मनाई जाती है, पढ़ें कथा

महेश नवमी क्या है? (What is  Mahesh Navami) why celebrated mahesh navami:महेश नवमी (Mahesh Navami), ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर मनाया जाने वाला पर्व, महेश्वरी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है। यह भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा का दिन है और समुदाय की उत्पत्ति को चिन्हित करता है। इस दिन विशेष प्रार्थनाएं और अनुष्ठान होते हैं, और महेश्वरी समुदाय के सदस्य “बाबा की झांकी” भी करते हैं। महेश नवमी माहेश्वरी समाज का प्रमुख पर्व है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। माहेश्वरी समाज की उत्पति भगवान शिव के वरदान से इसी दिन हुई। महेश नवमी के दिन देवाधिदेव शिव व जगतजननी मां पार्वती की आराधना की जाती है। यहां पढ़ें महेश नवमी की कथा- कथा : एक खडगलसेन राजा थे। प्रजा राजा से प्रसन्न थी। राजा व प्रजा धर्म के कार्यों में संलग्न थे, पर राजा को कोई संतान नहीं होने के कारण राजा दु:खी रहते थे। राजा ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से कामेष्टि यज्ञ करवाया। why celebrated mahesh navami ऋषियों-मुनियों ने राजा को वीर व पराक्रमी पुत्र होने का आशीर्वाद दिया, लेकिन साथ में यह भी कहा 20 वर्ष तक उसे उत्तर दिशा में जाने से रोकना। नौवें माह प्रभु कृपा से पुत्र उत्पन्न हुआ। राजा ने धूमधाम से नामकरण संस्कार करवाया और उस पुत्र का नाम सुजान कंवर रखा। वह वीर, तेजस्वी व समस्त विद्याओं में शीघ्र ही निपुण हो गया। why celebrated mahesh navami एक दिन एक जैन मुनि उस गांव में आए। उनके धर्मोपदेश से कुंवर सुजान बहुत प्रभावित हुए। why celebrated mahesh navami उन्होंने जैन धर्म की दीक्षा ग्रहण कर ली और प्रवास के माध्यम से जैन धर्म का प्रचार-प्रसार करने लगे। धीरे-धीरे लोगों की जैन धर्म में आस्था बढ़ने लगी। स्थान-स्थान पर जैन मंदिरों का निर्माण होने लगा। एक दिन राजकुमार शिकार खेलने वन में गए और अचानक ही राजकुमार उत्तर दिशा की ओर जाने लगे। why celebrated mahesh navami सैनिकों के मना करने पर भी वे नहीं माने। उत्तर दिशा में सूर्य कुंड के पास ऋषि यज्ञ कर रहे थे। वेद ध्वनि से वातावरण गुंजित हो रहा था। यह देख राजकुमार क्रोधित हुए और बोले- ‘मुझे अंधरे में रखकर उत्तर दिशा में नहीं आने दिया’ और उन्होंने सभी सैनिकों को भेजकर यज्ञ में विघ्न उत्पन्न किया। इस कारण ऋषियों ने क्रोधित होकर उनको श्राप दिया और वे सब पत्थरवत हो गए। राजा ने यह सुनते ही प्राण त्याग दिए। उनकी रानियां सती हो गईं। why celebrated mahesh navami राजकुमार सुजान की पत्नी चन्द्रावती सभी सैनिकों की पत्नियों को लेकर ऋषियों के पास गईं और क्षमा-याचना करने लगीं। ऋषियों ने कहा कि हमारा श्राप विफल नहीं हो सकता, पर भगवान भोलेनाथ व मां पार्वती की आराधना करो। why celebrated mahesh navami सभी ने सच्चे मन से भगवान की प्रार्थना की और भगवान महेश व मां पार्वती ने अखंड सौभाग्यवती व पुत्रवती होने का आशीर्वाद दिया। चन्द्रावती ने सारा वृत्तांत बताया और सबने मिलकर 72 सैनिकों को जीवित करने की प्रार्थना की। महेश भगवान पत्नियों की पूजा से प्रसन्न हुए और सबको जीवनदान दिया। why celebrated mahesh navami भगवान शंकर की आज्ञा से ही इस समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म छोड़कर वैश्य धर्म को अपनाया। why celebrated mahesh navami समस्त माहेश्वरी समाज इस दिन श्रद्धा व भक्ति से भगवान शिव व मां पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। इसलिए आज भी ‘माहेश्वरी समाज’ के नाम से इसे जाना जाता है।  महेश नवमी के फायदे (Mahesh Navami Benefits) 1.महेश नवमी (Mahesh Navami) हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है।  2.इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 3.महेश नवमी के दिन शिवलिंग पर जल, दूध, भांग और बेलपत्र चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और बीमारियों से मुक्ति मिलती है।  3.इस दिन 21 बेलपत्र पर ‘ॐ’ लिखकर चढ़ाने से इच्छित फल प्राप्त होता है।  4.महेश नवमी का व्रत करने से शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।  5.इस दिन दान-पुण्य करने से भी पुण्य फल मिलता है। महेश नवमी व्रत (Mahesh Navami Vrat) को मनाने के प्रमुख नियम निम्नलिखित हैं | प्रातः स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। निकटतम शिव मंदिर जाकर भगवान शिव को दूध, फूल, बेल पत्र अर्पित करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। व्रत के दौरान एक समय भोजन करें। भोजन में फलाहार या सात्विक आहार लें। प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा आदि का सेवन न करें। दिन भर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करें। शिव चालीसा, शिव पुराण आदि का पाठ करें। महेश नवमी की कथा सुनें। महेश नवमी की व्रत कथा सुनने से आपको भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होगी। सायंकाल शिव मंदिर जाकर महाआरती में शामिल हों। शिव जी की वंदना का गायन करें। रात्रि में जागरण करें। भगवान शिव के गुणों का स्मरण करते हुए भजन-कीर्तन करें। अगले दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का पारण करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। महेश नवमी (Mahesh Navami) के दिन भगवान शिव (Lord Shiva) और माता पार्वती (Goddess Parvati) की विधिवत पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह व्रत विशेष रूप से माहेश्वरी समाज के लिए महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का आविर्भाव हुआ था, इसलिए इसे महाशिवजयंती भी कहा जाता है।

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Masik Shivratri 2025 List:साल 2025 में कब-कब है मासिक शिवरात्रि,जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र

Masik Shivratri 2025 List: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि दोनों का ही विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रखा जाता है, जबकि मासिक शिवरात्रि का पर्व साल में एक बार में मनाया जाता है। मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए भक्त व्रत रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से भक्तों की सभी परेशानियां दूर होती हैं। ऐसे में अगर नए साल में आप भी Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने वाले हैं तो साल 2025 में मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri 2025 List) की सही डेट एवं पूरी लिस्ट नोट कर लें। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि व्रत करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं. शास्त्रों के अनुसार, देवी लक्ष्मी, सरस्वती, इंद्राणी, गायत्री, सावित्रि और माता पार्वती ने शिवरात्रि का व्रत किया था और शिव कृपा से अनंत फल प्राप्त किए थे. धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव का देवी पार्वती से विवाह चतुर्दशी की रात्रि में हुआ था. इसलिए मासिक शिवरात्रि पर रात्रि में पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है. Masik Shivratri Puja Vidhi मासिक शिवरात्रि पूजा विधि शिव मंत्र Shiv Mantra बेहद खास होती है मासिक शिवरात्रि Monthly Shivratri is very special भविष्य पुराण के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मासिक शिवरात्रि पड़ने के कारण ये तिथि बेहद खास होती है. इस तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं. इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ- साथ शिव परिवार के सभी सदस्यों की उपासना की जाती है. सुख-शांति की कामना से शिव का पूजन किया जाता है और उनके निमित्त व्रत रखा जाता है. इस दिन शिवलिंग पर पुष्प चढ़ाने तथा शिव मंत्रों के जप का विशेष महत्व है. इस दिन पूरे विधि-विधान से शिवजी का पूजन और व्रत किया जाता है. Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि व्रत के प्रभाव से व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ और मोह आदि के बंधन से मुक्त हो जाता है. मासिक शिवरात्रि व्रत के लाभ Masik Shivratri Vrat labh ऐसी मान्यता है कि शिव मंत्रों का जाप शिवालय या घर के पूर्व भाग में बैठकर करने से अधिक फल प्राप्त होता है. मासिक शिवरात्रि की पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करना चाहिए. मासिक शिवरात्रि का व्रत जो भी भक्त पूरे श्रद्धाभाव से करता है, उसके माता-पिता के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. साथ ही स्वयं के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उस व्यक्ति जीवन को जीवन के सारे सुख प्राप्त होते हैं. इस व्रत की महिमा से व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य और संतान आदि प्राप्त करता है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. 2025 की मासिक शिवरात्रि की पूरी लिस्ट (Masik Shivratri 2025 List) 27 जनवरी 2025, सोमवार मासिक शिवरात्रि (माघ)26 फरवरी 2025, बुधवार महा शिवरात्रि (फाल्गुन)27 मार्च 2025, बृहस्पतिवार मासिक शिवरात्रि (चैत्र)26 अप्रैल 2025, शनिवार मासिक शिवरात्रि (वैशाख)25 मई 2025, रविवार मासिक शिवरात्रि (ज्येष्ठ)23 जून 2025, सोमवार मासिक शिवरात्रि (आषाढ़)23 जुलाई 2025, बुधवार श्रावण शिवरात्रि (श्रावण)21 अगस्त 2025, बृहस्पतिवार मासिक शिवरात्रि (भाद्रपद)19 सितंबर 2025, शुक्रवार मासिक शिवरात्रि (आश्विन)19 अक्तूबर 2025, रविवार मासिक शिवरात्रि (कार्तिक)18 नवंबर 2025, मंगलवार मासिक शिवरात्रि (मार्गशीर्ष)18 दिसंबर 2025, बृहस्पतिवार मासिक शिवरात्रि (पौष)

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Story of Kedarnath Temple :भगवान शिव ने भैंसे का रूप बनाकर पांडवों को किया था पाप मुक्त, ऐसी है केदारनाथ मंदिर की कथा

Story of Kedarnath Temple:धार्मिक मान्यतानुसार केदारनाथ (Kedarnath Temple) को द्वादश ज्योतिर्लिंगों (Jyotirlinga) में 11वां माना जाता है. साथ ही यह सबसे पवित्र तीर्थस्थलों (Holy Pilgrimage) में से एक है. कहा जाता है कि केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) की कहानी बेहद अनोखी और दिलचस्प है. History of Kedarnath Dham : द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ धाम में भगवान शिव लिंग रूप में विराजमान हैं। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव द्वारा धारण किए गए भैंसे के रूप के पिछले भाग की पूजा की जाती है। वहीं केदारनाथ मंदिर के इतिहास से जुड़ी अन्‍य कहानियां भी प्रचलित हैं। केदारनाथ धाम में हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। धाम के कपाट हर वर्ष अप्रैल या मई में खोले जाते हैं और भैयादूज पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। शीतकाल में बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली को ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर लाया जाता है। छह माह के लिए बाबा यहीं विराजमान रहते हैं।केदारनाथ धाम का उल्लेख स्कंद पुराण के केदार खंड में मिलता है। Story of Kedarnath Temple कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण कत्यूरी शैली में हुआ है। पांडवों के वंशज जन्मेजय ने यहां इस मंदिर की स्थापना की थी। बाद में आदि शंकराचार्य द्वारा इसका जीर्णोद्धार कराया गया था। Story of Kedarnath Temple:केदारनाथ धाम की प्राचीन मान्यता मंदिर के संबंध में कई मान्‍यताएं प्रचलित हैं। मान्‍यता है कि महाभारत के बाद पांडव अपने गोत्र बंधुओं की हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शिव की शरण में जाना चाहते थे। और इसके लिए वह भगवान शिव की खोज करने हिमालय की ओर गए। तब भगवान शिव अंतर्ध्यान होकर केदार में जा बसे। पांडव भी उनके पीछे केदार पर्वत पहुंच गए। Story of Kedarnath Temple तब भगवान शिव ने पांडवों को आता देख भैंसे का रूप धारण कर लिया और पशुओं के बीच में चले गए। भगवान शिव के दर्शन पाने के लिए पांडवों ने एक योजना बनाई और भीम ने विशाल रूप धारण कर अपने दोनों पैर केदार पर्वत के दोनों और फैला दिए। सभी पशु भीम के पैरों के बीच से गुजर गए, लेकिन भैंसे के रूप में भगवान शिव भीम के पैर के नीचे से निकले। तभी भगवान शिव को पहचान कर भीम ने भैंसे को पकड़ना चाहा तो वह धरती में समाने लगा। तब भीम ने भैंसे का पिछला भाग कस कर पकड़ लिया। भगवान शिव पांडवों की भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्‍हें दर्शन देकर पाप से मुक्त कर दिया। कहा जाता है कि तभी से भगवान शिव की यहां भैंसे की पीठ की आकृति के रूप में पूजे जाते हैं। मान्‍यता है Story of Kedarnath Temple कि इस भैंसे का मुख नेपाल में निकला, जहां भगवान शिव की पूजा पशुपतिनाथ के रूप में की जाती है। 12वीं-13वीं शताब्दी का है मंदिर:The temple is from 12th-13th century राहुल सांकृत्यायन के अनुसार यह मंदिर 12वीं-13वीं शताब्दी का है। Story of Kedarnath Temple ग्वालियर से मिली एक राजा भोज स्तुति के अनुसार यह उनके द्वारा बनाया गया मंदिर है। वह राजा 1076-99 काल के थे। नर और नारायण ऋषि ने की थी तपस्या:Sage Nar and Narayan did penance यह भी कहा जाता है कि हिमालय के केदार पर्वत पर भगवान विष्णु के अवतार तपस्वी नर और नारायण ऋषि ने तपस्या की थी। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए। जिसके बाद नर और नारायण ऋषि ने भगवान शिव से ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वर प्राप्‍त किया। 2013 आपदा में क्षतिग्रस्‍त हो गया था धाम:The temple was damaged in the 2013 disaster. 2013 में आपदा के दौरान केदारनाथ धाम में मंदिर को छोड़ बाकी पूरा परिसर क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद से अब तक धाम में पुनर्निर्माण का कार्य चल रहा है। वहीं केदारनाथ पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में भी शामिल है। Story of Kedarnath Temple धाम में हो रहे पुनर्निर्माण कार्यों पर वह स्वयं नजर रखते हैं। केदारनाथ में 225 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की लागत से प्रथम चरण के कार्य पूरे किए जा चुके हैं। जिसमें शंकराचार्य की समाधि का पुनर्निर्माण, सरस्वती व मंदाकिनी नदी और उसके घाटों की सुरक्षा, तीर्थ पुरोहितों के आवासों का निर्माण किया गया है। मंदाकिनी नदी पर 60 मीटर लंबे पुल का निर्माण के साथ ही आस्था पथ का निर्माण किया गया है। अब दूसरे चरण में 184 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य चल रहे हैं। केदारनाथ मंदिर की कथा (Kedarnath Temple Story) Story of Kedarnath Temple केदारनाथ मंदिर के विषय में प्रचलित कथा के अनुसार, पांडवों की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव नें उन्हें हत्या के पाप से मुक्त कर दिया था. मान्यता है कि महाभारत के युद्ध में विजयी होने पर पांडव अपने भाईयों की हत्या से मुक्ति के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद पाना चाहते थे. परंतु, भगवान उनसे कर्म से खुश नहीं थे, इसलिए वे केदारनाथ चले गए. पांडव भी उनके दर्शन के लिए केदारनाथ पहुंच गए. पांडवों को वहां पहुंचने पर भगवान शिव में भैंसे का रूप धारण कर लिया. जिसके बाद वे अन्य पशुओं के बीच में चले गए ताकि पांडल भगवान शिव के उस रूप को ना पहचान पाए. कहते हैं कि भीम ने विशालकाय शरीर धारण कर दो पहाड़ों पर अपने पैर फैला दिए. जिसके बाद उस पहाड़ के नीचे से सभी पशु तो निकल गए, लेकिन वहां मौजूद एक भैंस ने ऐसा नहीं किया. जिसके बाद भीम पूरी शक्ति से भैंस की ओर झपटे, लेकिन वह जमीन में समाने लगा. तभी भीम ने उसकी की पीठ का पिछला हिस्सा पकड़ लिया. कहा जाता है Story of Kedarnath Temple कि भगवान शिव ने भैंसे का रूप बनाया था. मान्यता है Story of Kedarnath Temple कि भगवान शिव पांडवों की ईच्छाशक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन देकर हत्या के पाप से मुक्त होने का आशीर्वाद दिया. धार्मिक मान्यता है कि उसी समय से केदारानाथ में भैंस की पीठ को शिव का रूप मानकर पूजा होने लगी.

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