SHIV

Masik Shivratri 2025: मासिक शिवरात्रि के दिन जरूर करें ये उपाय, बिना रुकावट पूरा होगा हर काम

Masik Shivratri 2025: मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और विधिपूर्वक शिव पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। May Masik Shivratri 2025 Upay: हर माह आने वाली शिवरात्रि का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अति शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना के साथ-साथ अन्न, वस्त्र और अन्य जरूरतमंद चीजों का दान करते हैं। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और विधिपूर्वक शिव पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। Masik Shivratri puja Mein Jarur kare ye kaam: पूजा में जरूर करें ये काम मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित करें। इसके साथ ही इस भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र का जाप 11 बार रुद्राक्ष की माला से करें। ऐसा करने से शिव जी कृपा आपके ऊपर बनी रहती है। नहीं सातएगी धन की कमी अगर आप धन संबंधी परेशानियां झेल रहे हैं, तो इसके लिए मासिक शिवरात्रि के दिन आपको शिवलिंग पर गन्ने का रस जरूर अर्पित करें। ऐसा करने से आपको अपनी स्थिति में काफी लाभ देखने को मिल सकता है। Masik Shivratri साथ ही धन लाभ के योग भी बनने लगते हैं। नहीं पड़ेगा ग्रहों का अशुभ प्रभाव मासिक शिवरात्रि के दिन आप पूजा के दौरान शिवलिंग का शहद से अभिषेक कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे जातक को अशुभ ग्रहों के प्रभाव में मुक्ति मिल सकती है। Masik Shivratri वहीं शहद का संबंध गुरु ग्रह से माना गया है, ऐसे में मासिक शिवरात्रि पर शिवलिंग का शहद से अभिषेक करने से कुंडली में देवगुरु बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है। शिव जी के मंत्र 1. ॐ नमः शिवाय 2. ॐ नमो भगवते रूद्राय 3. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात 4. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् 5. कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् । सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

Masik Shivratri 2025: मासिक शिवरात्रि के दिन जरूर करें ये उपाय, बिना रुकावट पूरा होगा हर काम Read More »

Shiva Mantra: शिव के 5 दिव्य मंत्रों का करें नियमित जाप, जीवन में आएगा सुख-शांति

Shiv Mantra: भोलेनाथ अपने अनुयायियों पर अपनी कृपा बरसाते हैं, जिससे वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं. महादेव को अत्यधिक दयालु माना जाता है, इसलिए वे केवल एक लोटा जल से ही संतुष्ट हो जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र में महादेव के कुछ अद्भुत मंत्रों का उल्लेख किया गया है. यदि इन मंत्रों का जाप नियमों के अनुसार किया जाए, तो जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है. आइए, शिवजी के चमत्कारिक मंत्रों के बारे में जानते हैं. Shiva Mantra: शिव के 5 दिव्य मंत्रों का करें नियमित जाप होगी आरोग्य की प्राप्ति 1. ॐ नमः शिवाय Shiva Mantra: यह मंत्र जीतना सरल है उतना प्रभावशाली भी माना गया है। यदि कोई साधक रोजाना इस मंत्र का जाप करता है तो उसे आरोग्य की प्राप्ति हो सकती है। दूर होगा अकाल मृत्यु का भय 2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ Shiva Mantra: यह शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र है। माना जाता है कि रोजाना इस मंत्र का जप करने से व्यक्ति की अकाल मृत्यु का भय टाला जा सकता है। साथ ही व्यक्ति की आयु भी लंबी होती है और हर प्रकार के भय से भी मुक्ति मिलती है। इस मंत्र से होगी इच्छा पूरी 3. ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः यह शिव जी का रूद्र मंत्र है। माना जाता है कि प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की हर इच्छा पूरी हो सकती है। आर्थिक स्थिति होगी मजबूत 4. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ यह शिव जी का बहुत ही प्रभावशाली मंत्र है। यदि कोई साधक रोजाना शिव जी का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप करता है तो उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। भय होगा दूर 5. ऊं पषुप्ताय नमः यह भी शिव जी का एक प्रभावशाली मंत्र है। पूजा के दौरान रोजाना इस शिव मंत्र का जाप करने से साधक को महादेव की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है।

Shiva Mantra: शिव के 5 दिव्य मंत्रों का करें नियमित जाप, जीवन में आएगा सुख-शांति Read More »

Sawan Somwar Vrat Katha In Hindi: इस कथा के बिना अधूरी है सावन सोमवार की पूजा, जरूर करें इसका पाठ

Sawan Somwar Vrat Katha: हिंदू धर्म की पवित्र परंपराओं में सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत केवल एक नियम नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मिक जुड़ाव की गहराई से जुड़ा एक दिव्य साधन है। यह व्रत न केवल मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग है, बल्कि भगवान शिव के चरणों में समर्पण का प्रतीक भी है। सावन (Sawan Somwar Vrat Katha) का महीना बेहद पावन होता है। इस महीने के प्रत्येक सोमवार पर भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत रखा जाता है। साथ ही सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत रखा जाता है। इस व्रत की महिमा का वर्णन शास्त्रों में निहित है। भगवान शिव की पूजा से हर मनोकामना पूरी होती है। Sawan Somvar Vrat Katha in Hindi: सावन सोमवार Somwar Vrat Katha के व्रत में कथा का पाठ करने का महत्‍व श‍िव पुराण में बहुत खास माना गया है। मान्‍यता है कि जो लोग सावन सोमवार का व्रत करते हैं उनको विधि विधान से पूजा करने के बाद व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। भगवान शिव का सबसे पहले दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है और फिर विधि विधान से पूजा करने के बाद सावन सोमवार के व्रत की कथा का पाठ करने से आपका व्रत संपूर्ण माना जाता है और पूजा का शुभ फल प्राप्‍त होता है। तो पढ़ें सावन सोमवार की व्रत कथा विस्‍तार से। Sawan Somwar Vrat Katha: सावन सोमवार की व्रत कथा मृत्युलोक में भ्रमण करने की इच्‍छा करके एक समय श्री भूतनाथ भगवान भोलेनाथ माता पार्वती के साथ मृत्युलोक में पधारे। भ्रमण करते-करते दोनों विदर्भ देशांतर्गत अमरावती नाम की अति रमणीक नगरी में पहुंचे। अमरावती नगरी स्‍वर्ग के सदृश सभी प्रकार के सुखों से परिपूर्ण थी। उसमें वहां के महाराज द्वारा बनवाया हुआ अति रमणीक शिवजी का मंदिर भी था। भगवान शंकर भगवती पार्वती के साथ इस मन्दिर में निवास करने लगे। Somwar Vrat Katha एक समय माता पार्वतीजी भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न देखकर बोली, हे महाराज आज तो हम दोनों चौंसर खेलेंगे। शिवजी ने प्राण प्रिया की बात को मान लिया और चौंसर खेलने लगे। उसी समय मन्दिर का पुजारी ब्राह्मण मन्दिर में पूजा करने आया। माता पार्वती ने पुजारी से प्रश्‍न किया पुजारी जी, बताओ इस बाजी में हम दोनों में से किसी जीत होगी? ब्राह्मण बिना विचारे जल्‍दी से बोल उठा कि महादेव जी की जीत होगी। थोड़ी देर में बाजी समाप्‍त हो गई और पार्वतीजी जीत हुई। Somwar Vrat Katha पार्वतीजी को बहुत गुस्सा आया और ब्राह्मण को झूठ बोलने के अपराध के कारण श्राप देने चलीं। भोलेनाथ ने पार्वती को बहुत समझाया लेकिन उन्होंने ब्राह्मण को कोढ़ी होने का शाप दे दिया। कुछ समय बाद पार्वती जी के श्रापवश पुजारी के शरीर में कोढ़ पैदा हो गया। वह बहुत अधिक दुखी रहने लगा। पूजारी को कष्ट भोगते हुए जब बहुत दिन गुजर गए तब एक दिन देवलोक की अप्‍सराएं शिवजी की पूजा करने के लिए उस मंदिर में पधारीं। Somwar Vrat Katha पुजारी के कोड़ के कष्ट को देखकर उन्हें बड़ी दया आई। उन्‍होंने उससे रोगी होने का कारण पूछा। पुजारी ने निसंकोच सारी बातें बता दीं। वे अप्‍सराएं बोलीं हे पुजारी, अब तुम अधिक दुःखी मत होना। सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत भक्तिभाव से करो। पुजारी ने अप्‍सराओं से व्रत की विधि पूछी। अप्‍सराओं ने बताया, सोमवार को भक्ति भाव से व्रत करो। साफ वस्‍त्र पहनो। संध्या व उपासना के बाद आधा सेर गेहूं का आटा लो और उसके तीन भाग कर लो। घी, गुड़, दीप, नैवेद्य, पूंगीफल, बेलपत्र, जनेऊ जोड़ा, चंदन, अक्षत पुष्‍पादि से प्रदोषकाल में भगवान शिव की पूजा करो। उसके बाद तीन भागों में से एक भाग शिवजी को अर्पण करो, बाकी दो शिवजी का प्रसाद समझकर उपस्थित लोगों में बांट दो और आप भी प्रसाद समझकर खाओ। इस विधि से सोलह सोमवार व्रत रखो। Somwar Vrat Katha सत्रहवें सोमवार को पाच-सेर पवित्र गेहूं के आटे की बाटी बनाओ, उसमें घी और गुड़ मिलाकर चूरमा बनाओ। भगवान भोलेनाथ को भोग लगाकर उपस्थित भक्तों में बांट दो। इसके बाद कुट्‌म्ब सहित प्रसाद लो तो शिवजी की कृपा से उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। “ऐसा कहकर अप्सराएं स्वर्ग को चली गईं। ब्राहाण ने यथाविधि षोड्श सोमवार व्रत किया तथा भगवान शिव की कृपा से रोग से मुक्ति पाकर आनन्द से रहने लगा। कुछ दिन बाद शिवजी और पार्वतीजी उस मन्दिर में पुनः पधारे। ब्राह्मण को निरोग देखकर पार्वती जी ने ब्राह्मण से रोग से मुक्त होने का उपाय पूछा। ब्राह्मण ने सोलह सोमवार व्रत कथा सुनाई। पार्वतीजी बहुत प्रसन्‍न हुईं। ब्राह्मण से व्रत विधि पूछकर स्‍वयं भी व्रत करने के लिए तैयार हो गई। व्रत करने के बाद उनकी मनोकामना पूरी हुई हुई और उनके रूठे बेटे स्वामी कार्तिकेय स्वय माता के आज्ञाकारी हुए। कार्तिकेय जी को अपना यह विचार परिवर्तन का रहस्य जानने की इच्छा हुई। वे माता से बोले हे माता। आपने ऐसा कौन सा उपाय किया जिससे मेरा मम आपकी ओर आकर्षित हो गया?” पार्वती जी ने वही षोड्श सोमवार व्रत कथा की कथा उनको सुना दी। कार्तिकय जी कहा इस व्रत को में भी करूंगा, क्योंकि मेरा प्रिय मित्र ब्राह्मण बहुत दुःखी दिल से परदेश गया है। मेरी इसमे मिलने की बहुत इच्छा है। कार्तिकेय जी ने भी इस व्रत को किया और उनका प्यारा मित्र मिल गया। मित्र ने इस आकस्मिक मिलन का भेद पूछा तो कार्तिकेय जी बोले हे मित्र। हमने तुम्हारे मिलने की इच्छा करके सोलह सोमवार का व्रत किया था। अब तो ब्राह्मण मित्र को अपने विवाह की बड़ी चिन्ता हुई। Somwar Vrat Katha उसने कार्तिकेय जी से व्रत की विधि पूछी और यथाविधि व्रत किया। व्रत के प्रभाव से जब वह किसी कार्य से विदेश गया तो वहां के राजा की लड़की का स्वयंवर था। राजा ने प्रण किया था कि जिस राजकुमार के गले में सब प्रकार से श्रृङ्गारित हथिनी माला डालेगी, मैं उसी के साथ अपनी प्यारी बेटी का विवाह कर दूंगा। शिवजी की कृपा से वह ब्राह्मण भी उस स्वयंवर को देखने की इच्छा से राज्यसभा में एक ओर जाकर बैठ गया। Somwar Vrat Katha नियत समय पर हथिनी आई और उसने जयमाला उस ब्राह्मण

Sawan Somwar Vrat Katha In Hindi: इस कथा के बिना अधूरी है सावन सोमवार की पूजा, जरूर करें इसका पाठ Read More »

Sawan upay: सावन में कहां जलाएं दीया? जानिए 5 शुभ स्थान और उनका महत्व

Sawan upay: सावन के दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक के जीवन में मंगल का आगमन होता है। साथ ही घर में सुख समृद्धि एवं खुशहाली होती है। सावन महीने में दान करने से व्यक्ति को जीवन में अक्षय फल मिलता है। सावन सोमवार पर दो राशि ( Sawan upay ) के जातकों को लाभ मिलने वाला है। Sawan upay: वैदिक पंचांग के अनुसार, 14 जुलाई को सावन माह का पहला सोमवार है। सावन सोमवार के दिन देवों के देव महादेव की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाता है। इस शुभ अवसर पर साधक गंगा स्नान कर देवों के देव महादेव का गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं। भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में आने वाली बलाएं भी टल जाती हैं। Sawan mah me shiv ji ko khush karne ke upay : श्रावण मास जिसे “सावन” भी कहा जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का पांचवा माह होता है. यह मास धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. आपको बता दें कि श्रावण मास भगवान शिव Sawan upay का प्रिय माह है. इस महीने में विशेष रूप से सोमवार का व्रत रखकर शिवजी की विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है सावन माह में भोलेनाथ की आराधना करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस माह में आप पूजा पाठ के अलावा कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है… कैसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न: Sawan upay सावन के पवित्र महीने में रोजाना सुबह और प्रदोष काल में शिवलिंग के पास दीपक जलाने से जीवन के अंधकार दूर होते हैं जो आपको शांति प्रदान करता है. आप इस माह में तुलसी और शमी के पौधे के पास दीपक जलाते हैं तो घर में सकारात्मकता आती है. इससे दुख-दरिद्र दूर होता है. इस माह में पीपल के पेड़ के नीचे भी दीपक जलाने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसे देव वृक्ष कहा गया है. मान्यता है इस पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश निवास करते हैं. Sawan upay आप प्रदोष काल में पीपल के वृक्ष के नीचे दीया जलाते हैं तो त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.  सावन माह में घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में लक्ष्मी जी का वास होता है. इसके अलावा सावन में स्नान के बाद नाग देवता का ध्यान करते हुए सुनसान स्थान में और घर के बाहर एक दीपक जरूर जलाएं. सावन के महीने में रोजाना पूजा घर में एक दीपक उत्तर मुंह करके भगवान शिव को अर्पित करने से कैलाश पर्वत पर विराजमान भगवान शिव का ध्यान करें. 

Sawan upay: सावन में कहां जलाएं दीया? जानिए 5 शुभ स्थान और उनका महत्व Read More »

kunwari kanya sawan ka vrat kaise rakhein: कुंवारी कन्याएं ना करें ये गलतियां, जानें सही पूजा विधि

sawan ka vrat kaise rakhein : सावन शुरू होने वाला है और ऐसे में अगर कोई पहली बार सोमवार व्रत रखने वाला है तो उसे कई तरह के कन्फ्यूजन भी होंगे। यहां जानें आखिर कुंवारी कन्याएं किस तरह से व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न कर सकती हैं? Sawan Somvar Vrat 2025 Puja Vidhi, Niyam and Samagri: ऐसा माना जाता है कि सावन में की गई पूजा से भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि सावन सोमवार व्रत का नियम क्या है, कौन-कौन सी सामग्री पूजा के लिए आवश्यक होती है और पूजा की सही विधि क्या है… sawan somvar vrat easy shiva puja vidhi for unmarried girl: भगवान शिव और शिवभक्तों के लिए सावन का महीना सबसे प्रिय होता है। वहीं महिलाएं सावन के हर सोमवार का व्रत रखती हैं। कहते हैं कि सच्चे मन और सारे विधि-विधान से जिस किसी ने भी सावन भर पूजा की उसकी नैय्या खुद भगवान शिव ही लगाते हैं। बता दें कि हिंदू ग्रंथों में सावन के सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। sawan ka vrat मान्यता तो ये भी है कि जब कोई कुंवारी कन्या सावन के सोमवार का व्रत रखने के साथ-साथ भगवान शिव को सच्चे मन से पूजती है तो उसे मनचाहा वर मिल जाता है। ऐसे में हर साल सावन के सोमवार का व्रत कई कुंवारी कन्याएं रखती हैं। वैसे इस व्रत को लेकर कोई कठोर नियम तो नहीं है, sawan ka vrat लेकिन कुछ बातों का ध्यान रख लिया जाए तो इस व्रत का पूरा-पूरा फल प्राप्त किया जा सकता है। तो चलिए जान लेते हैं कि कोई कुंवारी कन्या सावन सोमवार का व्रत कैसे रखें। साथ ही जानेंगे उन गलतियों के बारे में जो लोग अक्सर जाने-अनजाने कर दिया करते हैं। कुंवारी कन्याएं ऐसे करें भगवान शिव की पूजा:This is how unmarried girls sawan ka vrat should worship Lord Shiva अगर कोई कुंवारी कन्या पहली बार सावन का व्रत रख रही है और भगवान शिव की पूजा करने वाली है तो उसके लिए कुछ नियम है जो उन्हें हर सोमवार को पूरे करने हैं। सबसे पहले सुबह उठकर घर साफ कर लें। ये काम एक दिन पहले भी कर सकते हैं। sawan ka vrat इसके बाद पानी में कुछ बूंद गंगाजल डालकर नहा लें। पीले रंग के कपड़े पहनकर भगवान शिव की पूजा करें और शिवलिंग का जलाभिषेक करें। आप पंचामृत से भी शिवलिंग का अभिषेक कर सकती हैं। शिवलिंग पर फूल, बेलपत्र और धतूरा चढाएं। इसके बाद ॐ नमः शिवाय का जाप कर लें। कुंवारी कन्याएं ना करें ये काम:Unmarried girls should not do this work कुंवारी कन्याएं कभी भी भगवान शिव को हल्दी ना लगाएं। कई लोग पंचामृत में तुलसी की पत्तियां भी डाल देते हैं। कुंवारी कन्याएं इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग पर तुलसी बिल्कुल भी नहीं चढ़ानी होती है। sawan ka vrat सोमवार के व्रत के दिन आटा, बेसन, सत्तू और मैदे से बनी किसी भी चीज का सेवन नहीं करना है। इस दिन प्याज और लहसुन के सेवन से भी बचना है। सोमवार के दिन किसी भी तरह के अन्न का सेवन नहीं करना है। सोमवार व्रत में करें ये काम:Do this work during Monday fast sawan ka vrat सावन सोमवार के व्रत में सेंधा नमक ही खाएं। आप साबूदाना खिचड़ी के साथ-साथ दूध और दूध से बनी चीजें खा सकती हैं। इसके अलावा सीजनल फलों का सेवन किया जा सकता है। sawan ka vrat अगर आप नॉन वेजिटेरियन हैं sawan ka vrat तो इस बात का पूरा ध्यान रखना है कि सावन में पूरे महीने नॉनवेज नहीं खाना है। सावन के सोमवार व्रत की तिथियां (Sawan Somvar 2025 Dates) सावन सोमवार व्रत की आवश्यक सामग्री (Sawan Somvar Puja Samagri List) सावन सोमवार की पूजा विधि (Sawan Somvar Vrat Puja Vidhi) सावन सोमवार व्रत नियम (Sawan Somvar Vrat Rules You Must Follow) सोमवार व्रत का महत्व (Somvar Vrat Katha Mahatv) sawan ka vrat पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर व्रत और तपस्या की थी। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रेरणा से उन्होंने सोमवार का व्रत रखा, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। sawan ka vrat तभी से सोमवार व्रत को विशेष रूप से सौभाग्य प्राप्ति और वैवाहिक सुख के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। sawan ka vrat मान्यता है कि इस व्रत को पूरे नियमों और भक्ति भाव से करने पर जीवन की कठिनाइयों का अंत होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही, भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

kunwari kanya sawan ka vrat kaise rakhein: कुंवारी कन्याएं ना करें ये गलतियां, जानें सही पूजा विधि Read More »

Sawan 2025 Vrat: सावन सोमवार व्रत: कुंवारी कन्याएं ना करें ये गलतियां, जानें सही पूजा विधि

Sawan 2025 Vrat: सावन शुरू होने वाला है और ऐसे में अगर कोई पहली बार सोमवार व्रत रखने वाला है तो उसे कई तरह के कन्फ्यूजन भी होंगे। यहां जानें आखिर कुंवारी कन्याएं किस तरह से व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न कर सकती हैं? Sawan Somvar Vrat: भगवान शिव और शिवभक्तों के लिए सावन का महीना सबसे प्रिय होता है। वहीं महिलाएं सावन के हर सोमवार का व्रत रखती हैं। कहते हैं कि सच्चे मन और सारे विधि-विधान से जिस किसी ने भी सावन भर पूजा की उसकी नैय्या खुद भगवान शिव ही लगाते हैं। बता दें कि हिंदू ग्रंथों में सावन के सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। Sawan 2025 Vrat मान्यता तो ये भी है कि जब कोई कुंवारी कन्या सावन के सोमवार का व्रत रखने के साथ-साथ भगवान शिव को सच्चे मन से पूजती है तो उसे मनचाहा वर मिल जाता है। ऐसे में हर साल सावन के सोमवार का व्रत कई कुंवारी कन्याएं रखती हैं। वैसे इस व्रत को लेकर कोई कठोर नियम तो नहीं है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रख लिया जाए तो इस व्रत का पूरा-पूरा फल प्राप्त किया जा सकता है। Sawan 2025 Vrat तो चलिए जान लेते हैं कि कोई कुंवारी कन्या सावन सोमवार का व्रत कैसे रखें। साथ ही जानेंगे उन गलतियों के बारे में जो लोग अक्सर जाने-अनजाने कर दिया करते हैं। Sawan 2025 Vrat:कुंवारी कन्याएं ऐसे करें भगवान शिव की पूजा अगर कोई कुंवारी कन्या पहली बार सावन का व्रत रख रही है और भगवान शिव की पूजा करने वाली है तो उसके लिए कुछ नियम है जो उन्हें हर सोमवार को पूरे करने हैं। सबसे पहले सुबह उठकर घर साफ कर लें। ये काम एक दिन पहले भी कर सकते हैं। इसके बाद पानी में कुछ बूंद गंगाजल डालकर नहा लें। पीले रंग के कपड़े पहनकर भगवान शिव की पूजा करें और शिवलिंग का जलाभिषेक करें। आप पंचामृत से भी शिवलिंग का अभिषेक कर सकती हैं। शिवलिंग पर फूल, बेलपत्र और धतूरा चढाएं। इसके बाद ॐ नमः शिवाय का जाप कर लें। कुंवारी कन्याएं ना करें ये काम :Unmarried girls should not do this work कुंवारी कन्याएं कभी भी भगवान शिव को हल्दी ना लगाएं। कई लोग पंचामृत में तुलसी की पत्तियां भी डाल देते हैं। कुंवारी कन्याएं इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग पर तुलसी बिल्कुल भी नहीं चढ़ानी होती है। सोमवार के व्रत के दिन आटा, बेसन, सत्तू और मैदे से बनी किसी भी चीज का सेवन नहीं करना है। Sawan 2025 Vrat इस दिन प्याज और लहसुन के सेवन से भी बचना है। सोमवार के दिन किसी भी तरह के अन्न का सेवन नहीं करना है। सोमवार व्रत में करें ये काम: Do this work during Monday fast सावन सोमवार के व्रत में सेंधा नमक ही खाएं। आप साबूदाना खिचड़ी के साथ-साथ दूध और दूध से बनी चीजें खा सकती हैं। इसके अलावा सीजनल फलों का सेवन किया जा सकता है। अगर आप नॉन वेजिटेरियन हैं तो इस बात का पूरा ध्यान रखना है कि सावन में पूरे महीने नॉनवेज नहीं खाना है। डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Sawan 2025 Vrat: सावन सोमवार व्रत: कुंवारी कन्याएं ना करें ये गलतियां, जानें सही पूजा विधि Read More »

Sawan 2025: सावन शुरू होने से पहले घर में लाएं ये शुभ चीजें, भोलेनाथ की बरसेगी कृपा

Sawan 2025 Vishesh Upay: कुछ ही दिनों में सावन महीने की शुरूआत होने वाली है, ऐसे में इन चीजों को घर लाने से और इनकी विधिवत पूजा करने से आपके सब कष्ट दूर हो जाएंगे. ज्योतिष शास्त्र में सावन Sawan 2025 में करने वाले कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन उपायों को करने से आपकी हर परेशानी दूर हो सकती है. अगर आप आर्थिक तंगी से छुटकारा पाना चाहते हैं और भोलेनाथ की कृपा पाना चाहते हैं, तो सावन शुरू होने से पहले कुछ शुभ चीजें घर ले आएं. हिन्दू धर्म में सावन का माह सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है. कहते हैं कि यह माह देवाधिदेव भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. शास्त्रों के मुताबिक, इस माह में भगवान शिव अपने परिवार के साथ पृथ्वी का विचरण करने के लिए आते हैं. यही वजह है कि इस पूरे महीने भगवान शिव से जुड़ी तमाम कष्टप्रद यात्राएं होती हैं. साथ ही लोग पूरे माह मंदिर में शिवलिंग पर जल अर्पित कर भोलेनाथ का नाम स्मरण करते हैं. ज्योतिष शास्त्र में सावन के महीने में करने वाले कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं. धार्मिक मान्यता है कि इन उपायों को करने से व्यक्ति के जीवन की हर परेशानी दूर हो जाती है. अगर आप आर्थिक तंगी व रोगों के साथ कई दुखों से निजात पाना चाहते हैं, तो उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार सावन शुरू होने से पहले कुछ शुभ चीजें घर ले आएं. जानिए किन वस्तुओं को घर लाना शुभ  भगवान शिव अपने भक्तों और गणों से अगाध स्नेह करते हैं. इसलिए अगर आप भोलेनाथ को प्रसन्न करना चाहते हैं तो उनकी पूजा से पहले उनके प्रिय गण यानी नंदी की पूजा करें. इसके लिए आप सावन शुरू होने से पहले नंदी की प्रतिमा घर ले आएं और उसे मंदिर में स्थापित करें. फिर पूरे सावन माह नंदी महाराज और भोलेनाथ की पूजा करें. इससे आप पर भगवान शिव की कृपा लगातार बरसती रहेगी. Sawan 2025 Vishesh Upay:घर ले आएं ये चीजें? महामृत्युंजय यंत्र:- अगर आप अपने घर से वास्तु दोष से दूर करना चाहते हैं, तो सावन आने से पहले अपने घर में महामृत्युंजय यंत्र जरूर ले आएं. आप चाहें तो सावन सोमवार के दिन भी महामृत्युंजय यंत्र लेकर आ सकते हैं. फिर विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा कर घर में महामृत्युंजय यंत्र स्थापित करनी चाहिए. Sawan 2025 मान्यता है कि इससे हर परेशानी दूर हो सकती है. चांदी के नंदी:- अगर आप पैसों की तंगी से निजात पाना चाहते हैं, तो सावन शुरू होने से पहले अपने घर में चांदी से निर्मित नंदी ले आएं. सोमवार के दिन नंदी को घर में लाकर स्थापित करें. Sawan 2025 धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की सवारी नंदी को घर में स्थापित करने से हर परेशानी दूर हो जाती है. आप चाहे तो नंदी को घर की तिजोरी में भी रख सकते हैं. पारद शिवलिंग:- अगर आप भोलेनाथ की कृपा पाना चाहते हैं, तो सावन से पहले अपने घर में पारद शिवलिंग ले आएं. आप सावन के महीने में किसी दिन अपने घर पर पारद शिवलिंग लाकर स्थापित कर सकते हैं. Sawan 2025 फिर इसका गंगाजल या कच्चे दूध से भगवान शिव का अभिषेक करें. ऐसा करने से शिव जी की कृपा बरसती है और घर में सुख, समृद्धि के साथ खुशहाली आती है. डमरू:- अगर आप जीवन में किसी भी परेशानी से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सावन के महीने में डमरू घर लें आएं. Sawan 2025 इसके बाद विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा के समय डमरू बजाना चाहिए. पूजा के बाद मंदिर में ही डमरू को रखें. मान्यता है कि इस उपाय को करने से वास्तु दोष दूर होता है. (Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Sawan 2025: सावन शुरू होने से पहले घर में लाएं ये शुभ चीजें, भोलेनाथ की बरसेगी कृपा Read More »

Shivling Puja Vidhi: भोलेनाथ नहीं सुन रहे आपकी पुकार, तो इस दिशा में खड़े होकर चढ़ाएं शिवलिंग पर जल, जल्द होगी हर इच्छा पूरी

Shivling Puja Vidhi: शिवलिंग पर जल चढ़ाने की भी एक निर्धारित दिशा होती है। यदि जल अर्पित करते समय सही दिशा का ध्यान न रखा जाए, तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। आइए जानते हैं शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए कौन-सी दिशा उपयुक्त मानी जाती है? Shivling Puja Vidhi: भगवान शिव की पूजा में विधि-विधान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि यदि शिवलिंग पर विधिपूर्वक जल चढ़ाया जाए, तो भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने की भी एक निर्धारित दिशा होती है? यदि जल अर्पित करते समय सही दिशा का ध्यान न रखा जाए, तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। इसलिए यह जानना आवश्यक है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए कौन-सी दिशा उपयुक्त मानी जाती है। Somwar upay: सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है. इस दिन अधिकतर लोग शिव मंदिर जाते हैं और शिव जी पूजा कर उन्हें जल अर्पित करते हैं. शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग पर श्रृद्धाभाव से जल चढ़ाने मात्र से भगवान प्रसन्न हो जाते हैं Shivling Puja Vidhi और उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही दिशा क्या होती है? अगर नहीं तो जान लें कि भोलेनाथ पर जल चढ़ाते समय दिशा का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. क्योंकि अगर आप गलत दिशा में खड़े होकर जल अर्पित करते हैं तो इससे आपको पूजा का फल नहीं मिल पाता है. दरअसल, शिवलिंग पर जल चढ़ाने के कुछ नियम होते हैं. Shivling Puja Vidhi जिसमें सही दिशा भी बहुत मायने रखती है. ऐसे में आइए पंडित रमाकांत मिश्रा के अनुसार जानते हैं कि सोमवार के दिन जब भी शिव मंदिर जाएं तो शिवलिंग पर जल किस दिशा में खड़े होकर चढ़ायें. शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही दिशा: Shivling Puja Vidhi धार्मिक शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय हमेशा दक्षिण दिशा में खड़े होकर जल चढ़ाना चाहिए। Shivling Puja Vidhi ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। इसके विपरीत पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करना वर्जित माना गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह शिवलिंग का प्रमुख प्रवेश द्वार होता है और इस दिशा में खड़े होकर जल चढ़ाने से पूजा का प्रभाव कम हो सकता है। साथ ही जब दक्षिण दिशा में खड़े होकर जल चढ़ाएं, तो यह सुनिश्चित करें कि जल प्रवाह उत्तर दिशा की ओर जाए, इसे शुभ और फलदायी माना जाता है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने के महत्वपूर्ण नियम: Important rules for offering water to Shivalinga शिवलिंग पर कभी भी अशुद्ध, बासी या गंदा जल नहीं चढ़ाना चाहिए। यह अशुभ माना जाता है। जल चढ़ाने के लिए तांबे, पीतल या चांदी के लोटे का प्रयोग करना श्रेष्ठ माना जाता है। अभिषेक करते समय सीधे खड़े रहने की बजाय झुककर या बैठकर जल अर्पित करना चाहिए, इससे श्रद्धा और विनम्रता प्रकट होती है। शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय यह ध्यान दें कि जल या दूध की धारा अत्यधिक मोटी न हो, बल्कि धीमी और पतली रहे। जल अर्पण करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है, इससे पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इस दिशा में खड़े होकर चढ़ाएं जल: Stand in this direction and offer water Shivling Puja Vidhi शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर हमेशा दक्षिण दिशा में खड़े होकर जल चढ़ाना चाहिए. इसके आपको बता दें कि जल कभी भी पूर्व दिशा की तरफ मुख करके जल नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि इस दिशा में शिव जी का मुख्य प्रवेश द्वार होता है. इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि जब आप दक्षिण दिशा में खड़े होकर जल अर्पित कर रहे हैं तो आपका जल उत्तर दिशा की तरफ जाए. यह उत्तम माना जाता है.

Shivling Puja Vidhi: भोलेनाथ नहीं सुन रहे आपकी पुकार, तो इस दिशा में खड़े होकर चढ़ाएं शिवलिंग पर जल, जल्द होगी हर इच्छा पूरी Read More »

Sawan Kanwar Yatra 2025: पहली बार करने जा रहे हैं कांवड़ यात्रा? जान लें जरूरी नियम और सामग्री

Kanwar yatra 2025: सावन के महीने में पवित्र कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है. सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई 2025 के दिन से हो रही है. ऐसे में कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी इसी दिन से शुरू हो जायगी.  Kanwar Yatra 2025 हिन्दू धर्म में भगवान शंकर के प्रिय माह सावन की शुरुआत होने वाली है. 11 जुलाई से सावन का पवित्र महीना शुरू हो जाएगा. सावन की शुरुआत के साथ ही कांवड़ यात्रा का आगाज भी हो जाएगा. कांवड़ यात्रा में शिवभक्त नंगे पांव हाथ में कांवड़ लेकर ज्योतिर्लिंग जाते हैं और गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदी से उनका जलाभिषेक करते हैं. पूरे सावन महीने में ये काम चलता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है? Kanwar Yatra 2025 इन नियमों का पालन करने से आपकी यात्रा शुभ और सुरक्षित रहती है. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज ने हमें बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान कौन-कौन से नियमों का पालन करना चाहिए. मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से विष निकला था, जिसे जगत कल्याण के लिए भगवान शंकर ने पी लिया था, जिसके बाद भगवान शिव का गला नीला पड़ गया और तभी से भगवान शिव नीलकंठ कहलाने लगें. Kanwar Yatra 2025 भगवान शिव के विष का सेवन करने से दुनिया तो बच गई, लेकिन भगवान शिव का शरीर जलने लगा. ऐसे में देवताओं ने उन पर जल अर्पित करना शुरू कर दिया. इसी मान्यता के तहत कांवड़ यात्रा शुरू हुई. Kanwar Yatra 2025: कांवड़ यात्रा 2025 इस वर्ष Kanwar Yatra 2025 कांवड़ यात्रा की शुरुआत 11 जुलाई 2025, शुक्रवार से होगी, जो कि सावन मास का पहला दिन है। यह यात्रा 23 जुलाई 2025 को सावन शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक के साथ पूर्ण होगी। हालांकि देवघर जैसे तीर्थस्थलों पर पूरे सावन माह तक श्रद्धालु जल चढ़ाने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं। कांवड़ यात्रा के लिए सामग्री: Material for Kanwar Yatra यदि आप पहली बार कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं, तो कुछ वस्तुओं को अपने साथ अवश्य रखें। Kanwar Yatra 2025 इसमें कांवड़ (लकड़ी या बांस से बनी हुई), गंगा जल भरने के लिए पात्र, सजावट के लिए लाल-पीले वस्त्र और पुष्प, भगवान शिव की मूर्ति, फोटो, त्रिशूल, डमरू, रुद्राक्ष आदि शामिल हैं। इसके साथ ही चलने पर मधुर ध्वनि देने वाली घंटी, भजन, गीत या कीर्तन के लिए ऑडियो सिस्टम, श्रद्धालु के लिए लाल-पीले वस्त्र, गमछा, नी कैप, दातुन भी लेकर जा सकते हैं।  कांवड़ यात्रा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें: Things to keep in mind during Kanwar Yatra कांवड़ यात्रा एक पवित्र धार्मिक अनुष्ठान है, Kanwar Yatra 2025 इसलिए इस दौरान धूम्रपान, शराब, भांग या किसी भी नशीली वस्तु से दूरी बनाकर रखें। यात्रा के दौरान शुद्ध आचरण, शुद्ध वाणी और मन की पवित्रता बनाए रखें। महाकाल की नगरी में आते हैं सैकड़ो कावड़िया:Hundreds of Kavadias come to the city of Mahakal सावन में हर साल लाखों कांवड़िए महाकाल की नगरी उज्जैन आते हैं और Kanwar Yatra 2025 कांवड़ में गंगाजल भरकर पैदल यात्रा शुरू करते हैं. कांवड़िये अपने कांवड़ में जो गंगाजल भरते हैं, उससे सावन की चतुर्दशी पर भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है. कांवड़ यात्रा से होते हैं कहीं लाभ: What are the benefits of Kanwar Yatra? शास्त्रों के अनुसार, कांवड़ यात्रा भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने का एक अचूक उपाय है. मान्यता है कि सावन के पावन महीने में कांवड़ उठाने वाले भक्त के सभी पाप शाप नष्ट हो जाते हैं. कांवड में जलभकर शिवलिंग का अभिषेक करने वालों पर सालभर भोलेनाथ की कृपा बरसती है. दुख, दोष, दरिद्रता से मुक्ति मिलती है. व्यक्ति हर पल सुख प्राप्त करता है कावड़ यात्रा उठाने से पहले जान लें नियम:Know the rules before undertaking the Kavad Yatra कांवड़ यात्रा पर जाने वाले भक्तों को इस दौरान खास नियमों का पालन करना होता है. इस दौरान भक्तों को पैदल यात्रा करनी होती है. यात्रा के दौरान भक्तों को सात्विक भोजन का सेवन करना होता है. साथ ही आराम करते समय कांवड़ को जमीन पर नहीं बल्कि किसी पेड़ पर लटकाना होता है. अगर आप कांवड़ को जमीन पर रखते हैं तो आपको दोबारा से गंगाजल भरकर फिर से यात्रा शुरू करनी पड़ती है. कांवड़ यात्रा के दौरान बहुत से भक्त नंगे पांव चलते हैं. स्नान के बाद ही कांवड़ को छुआ जाता है.

Sawan Kanwar Yatra 2025: पहली बार करने जा रहे हैं कांवड़ यात्रा? जान लें जरूरी नियम और सामग्री Read More »

Lord Shiva Mantra: महादेव के इस महामंत्र को जपते ही कटते हैं सारे कष्ट, पूरी होती है हर मनोकामना

Lord Shiva Mantra: सनातन परंपरा में भगवान शिव (Lord Shiva) को कल्याण का देवता माना गया है, जिनकी साधना-आराधना से साधक सुख-संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. शिव की पूजा में जप-तप और व्रत का बहुत महत्व है, ऐसे में देवों के देव महादेव की कृपा बरसाने वाला महामंत्र जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. हिंदू (Hindu) धर्म में किसी भी देवी-देवता की कृपा पाने के लिए तमाम तरह की पूजा प​द्धति में मंत्र जप को अत्यंत ही उत्तम उपाय बताया गया है. मान्यता है कि मंत्रों (Mantra) में बहुत शक्ति होती है, जिसे श्रद्धा और विश्वास के साथ जपने साधक के जीवन से जुड़ी सभी दु:ख-दर्द और दुर्भाग्य दूर होता है और सुख-संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा में भी मंत्रों का बहुत महत्व है. आइए भगवान शिव से जुड़े पंचाक्षरी से लेकर महामृत्युंजय (Mahamritunjay Mantra) मंत्र आदि के बारे में विस्तार से जानते हैं, जिसे जपते ही जीवन में चमत्कारिक बदलाव आता है और साधक की बड़ी से बड़ी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होती है. सोमवार को करें शिव के शक्तिशाली मंत्रों का जाप: Chant powerful mantras of Lord Shiva on Monday सोमवार के दिन भोलेनाथ की पूजा की जाती है. भगवान शिव की आराधना के लिए यह दिन सर्वोत्तम होता है. कहा जाता है कि भोलेनाथ इतने भोले हैं कि बहुत सरल उपायों से भी प्रसन्न हो जाते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार सोमवार के दिन पूजा अर्चना करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है. साथ ही सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं. सोमवार के दिन कुछ मंत्रों के जाप से भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं. आइए जानते हैं शिव के इन चमत्कारी मंत्रों के बारे में. रोग-शोक दूर करने वाला शिव मंत्र: Shiva mantra that removes diseases and sorrows मान्यता है कि तंत्र-मंत्र-यंत्र और ज्योतिष का उद्गम भगवान शिव के मुखारविंद से हुआ है. ऐसे में जीवन से जुड़े मानसिक, शारीरिक या आर्थिक कष्ट आदि को दूर करने के लिए भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा और उनके महामंत्र यानि महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए. महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए. मंत्र जप करते समय आपकी माला किसी को न दिखाई दे, इसके लिए उसे गोमुखी में रखकर इस पावन मंत्र का जप करें. ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।। रोजी-रोजगार के लिए शिव मंत्र: Shiva mantra for livelihood यदि आप रोजी-रोजगार की कामना से भगवान शिव की पूजा कर रहे हैं और आप चाहते हैं कि आपकी शीघ्र ही आर्थिक उन्नति हो तो आप नीचे दिए गए मंत्र को कम से कम एक माला जप प्रतिदिन करें. विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे। श्रेय:प्राप्तिनिमित्ताय नम: सोमाद्र्धधारिणे।। यदि आपको शिव के किसी मंत्र को पढ़ने में दिक्कत आती है तो आप उनके अत्यंत ही सरल और पावन पंचाक्षरी मंत्र का जाप कर सकते हैं. मान्यता है कि शिव के इस मंत्र का जप करने से बड़ी से बड़ी समस्या पलक झपकते ही दूर हो जाती है और सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है. ॐ नम: शिवाय।। सभी बाधाओं से बचाने वाला शिव मंत्र : Shiva Mantra to protect from all obstacles यदि आपको हर किसी काम में अक्सर बाधाओं का सामना करना पड़ता है या फिर दूसरों के द्वारा करवाए जाने वाले टोने-टोटके का डर बना रहता है तो आप इन सभी चीजों से बचने के लिए रुद्राष्टकम् के इस मंत्र का प्रतिदिन श्रद्धा और विश्वास के साथ जाप करें. प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं। त्रय: शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्।। सर्वोच्च पद दिलाने वाला शिव मंत्र यदि आप अपने जीवन में किसी बड़े पद या लाभ की प्राप्ति की कामना रखते हैं तो आपके लिए नीचे दिया गया शिव मंत्र किसी वरदान से कम नहीं है. ॐ देवाधिदेव देवेश सर्वप्राणभूतां वर। प्राणिनामपि नाथस्त्वं मृत्युंजय नमोस्तुते।। 12 राशियों के अनुसार शिव मंत्र मेष – ॐ नम: शिवाय।। वृष – ॐ नागेश्वराय नमः।। मिथुन – ॐ नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नम:।। कर्क – ॐ चंद्रमौलेश्वर नम:।। सिंह – ॐ नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नम:।। कन्या – ॐ नमो शिवाय कालं ॐ नम:।। वृश्चिक – ॐ हौम ॐ जूँ स:।। धनु – ॐ नमो शिवाय गुरु देवाय नम:।। मकर – ॐ हौम ॐ जूँ स:।। कुंभ – ॐ हौम ॐ जूँ स:।। मीन – ॐ नमो शिवाय गुरु देवाय नम:।। शिव नमस्कार मंत्र:Shiva Namaskar Mantra नम: श‍िव जी को प्रसन्‍न करना है तो इस मंत्र का जाप पूजन से पहले करें.शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।। ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।। पंचाक्षरी मंत्र: Panchakshari Mantra इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से सभी संकटों तथा कष्टों से मुक्ति मिलती है ॐ नम: शिवाय। श‍िव नामावली मंत्र: Shiva Namavali Mantra सोमवार को पूजा करते समय नामावली मंत्रों का जाप करना अधिक फलदायी माना जाता है.।। श्री शिवाय नम:।।।। श्री शंकराय नम:।।।। श्री महेश्वराय नम:।।।। श्री सांबसदाशिवाय नम:।।।। श्री रुद्राय नम:।।।। ओम पार्वतीपतये नम:।।।। ओम नमो नीलकण्ठाय नम:।। महामृत्युंजय मंत्र: Mahamrityunjaya Mantra इस मंत्र का जाप नियमित रूप से करने से रोग, दोष तथा सभी सकंट समाप्त हो जाते हैं.ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ शिव गायत्री मंत्र: Shiv Gayatri Mantra गायत्री मंत्र का जाप करने से पितृ दोष, कालसर्प दोष, राहु केतु तथा शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है.।। ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात ।। लघु महामृत्युंजय मंत्र जिन लोगों के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना कठिन होता, उन्हें लघु महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए इससे असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं.ॐ हौं जूं सः

Lord Shiva Mantra: महादेव के इस महामंत्र को जपते ही कटते हैं सारे कष्ट, पूरी होती है हर मनोकामना Read More »

Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date: उज्जैन में महाकाल की शाही सवारियों की तैयारी शुरू, कब-कब निकलेगी राजसी सवारी..

Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date: उज्जैन में बाबा महाकाल के शाही सवारी की तैयारियां शुरू हो गईं हैं. इस बार सावन-भाद्रपद माह में बाबा महाकाल की कुल 6 राजसी सवारियां निकाली जाएंगी. उज्जैन, श्रावण और भाद्रपद माह में बाबा श्री महाकालेश्वर की सवारी के भव्य आयोजन को लेकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. शुक्रवार को प्रशासनिक संकुल भवन में आयोजित बैठक में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने निर्देश दिए कि पूर्व वर्षों के अनुभवों के आधार पर इस वर्ष व्यवस्थाओं को और अधिक बेहतर एवं सुव्यवस्थित बनाया जाए. Mahakaleshwar sawari ujjain 2025 : इस बार 11 जुलाई 2025, दिन शुक्रवार से श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। सावन मास का पहला सोमवार 14 जुलाई को रहेगा और इसी दिन महाकाल बाबा की पहली सवारी निकलने वाली है। सावन में उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की शाही सवारी 14 जुलाई से 18 अगस्त तक चलेगी। महाकालेश्वर भगवान Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date की सवारी निकलने के पहले मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे।  Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date:महाकाल की शाही सवारी का मार्ग Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date:भगवान महाकाल की सवारी को सबसे पहले मंदिर के द्वार पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया जाएगा। इसके बाद सवारी आरंभ होगी। सवारी अपने पारंपरिक मार्ग यानी महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्शी बाजार और कहारवाड़ी से होते हुए रामघाट पहुंचेगी। रामघाट पर, भगवान महाकाल को शिप्रा नदी के पवित्र जल से स्नान कराया जाएगा और पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद, सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर वापस आएगी। बैठक में बताया गया कि श्रावण मास में 4 और भाद्रपद मास में 2 सोमवार को बाबा महाकाल की सवारी निकाली जाएगी. अंतिम षष्ठम सवारी राजसी (शाही) स्वरूप में 18 अगस्त 2025 को निकलेगी. शाही सवारी का इतिहास:history of royal riding Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date:गौरतलब है श्रावण-भाद्रपद माह में हर सोमवार को निकलने वाली शाही सवारी का विशेष महत्व है. सावन सोमवार को बाबा महाकाले विशेष रूप के दर्शन तो होते ही हैं. साथ में सावन के हर सोमवार को महाकाल की सवारी भी निकाली जाती है, जिसमें बाबा महाकाल को विभिन्न वाहनों पर सजाकर नगर भ्रमण पर ले जाया जाता है. बाबा महाकाल की शाही सवारी दिव्य और अलौकिक होती है. बाबा महाकाल की शाही सवारी का इतिहास बहुत पुराना है. जिसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है. ग्यारहवीं शताब्दी के राजा भोज ने इस परंपरा को बड़े रूप में करना शुरू किया. कहा जाता है कि इस शाही सवारी में राजा भोज ने नए कलाकारों और संगीतकारों को शामिल किया, मुगल सम्राट अकबर और जहांगीर भी इस जुलूस में शामिल हुए थे, Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date सिंधिया वंश के राजाओं ने इस जुलूस को और अधिक भव्य बनाया उन्होंने जुलूस में कई नए रथ और हाथी घोड़ों को भी शामिल किया. कावड़ यात्रियों के लिए व्यवस्था:Arrangements for Kavad Yatris Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date:कावड़ यात्रियों को पूर्व सूचना दिए जाने पर शनिवार, रविवार और सोमवार को छोड़कर द्वार नंबर 04 से प्रवेश देकर विश्रामधाम, रेम्प, सभा मंडपम में जल पात्र के माध्यम से बाबा महाकाल को जल अर्पण करने की व्यवस्था की गई है। द्वार नंबर 01 के रास्ते से भी फेसेलिटी सेंटर 01, टनल के रास्ते, मंदिर परिसर, कार्तिक मंडपम और गणेश मंडपम से जल अर्पण कर सकते हैं। बिना किसी पूर्व सूचना के आने वाले कावड़ यात्री की व्यवस्था सामान्य दर्शन की तरह रहेगी। उक्त कावड़ यात्री कार्तिक मंडपम में लगे जल पात्र में जल अर्पण करेंगे।

Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date: उज्जैन में महाकाल की शाही सवारियों की तैयारी शुरू, कब-कब निकलेगी राजसी सवारी.. Read More »

Shiv ki puja ke Niyam: सावन में शिवलिंग की पूजा कैसे करें? जान लें सही विधि, नियम और पूजा सामग्री

Shiv ki puja ke Niyam: सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोमवार के दिन भगवान शिव (Lord Shiv) की पूजा और व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार के दिन भगवान महादेव की सच्चे मन से पूजा और व्रत करने से साधक को बिजनेस में सफलता मिलती है और धन का लाभ मिलता है। Sawan Mein Shivling Puja Kaise Kare: सावन का महीना देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए सबसे खास होता है. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक सावन का महीना साल का पांचवां महीना होता है. धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों के अनुसार, यह महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय माना गया है. सावन के महीने में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने और जलाभिषेक करने का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में माता पार्वती ने कठोर तपस्या करते हुए भगवान शिव को पति के रूप में पाया था.  Lord Shiv Puja Vidhi: Shiv ki puja ke Niyam सोमवार का दिन भगवान शिव को प्रिय है। यही वजह है कि इस दिन भगवन भोलेनाथ की पूजा और व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, Shiv ki puja ke Niyam सोमवार के दिन भगवान महादेव की सच्चे मन से पूजा-व्रत करने से साधक को बिजनेस में सफलता मिलती है और धन का लाभ मिलता है। Shiv ki puja ke Niyam ऐसा माना जाता है कि अगर भगवान शिव की पूजा विधिपूर्वक और अंत में आरती की जाए, तो ईश्वर प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा साधक पर सदैव बनी रहती है। आइए जानते हैं कि महादेव की पूजा किस तरह करना फलदायी होता है। Shiv ki puja ke Niyam:ऐसे करें पूजा सावन में शिवलिंग पूजा का महत्व (Sawan shiv puja significance) हिंदू कैलेंडर के अनुसार सावन को एक बेहद पूजनीय और पावन महीना माना जाता है जो विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है. इस शुभ महीने के दौरान भक्त समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास का आशीर्वाद पाने के लिए विभिन्न अनुष्ठान करते हैं. सावन में किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों में से एक है शिवलिंग की पूजा. धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग की पूजा का विशेष लाभ मिलते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. शिव पुराण में सावन के दौरान शिवलिंग की पूजा का महत्व माना गया है क्योंकि सावन हिंदू चंद्र कैलेंडर का पांचवां महीना होता है. ऐसा माना जाता है कि इस महीने के दौरान, ब्रह्मांड शिव में दिव्य ऊर्जा भर जाती है, Shiv ki puja ke Niyam जिससे यह शिवलिंग की पूजा के लिए आदर्श समय बताया गया है. सावन चातुर्मास के दौरान पड़ता है और इस दौरान जगत पालनहार भगवान विष्णु सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव को सौंप देते हैं. इसी वजह से जो भी भक्त सावन में शिवलिंग की पूजा करता है, उसके जीवन की हर परेशानी दूर हो जाती है. घर में कौन से शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए? Which Shivalinga should be worshiped at home? सावन में घर में शिवलिंग की पूजा करें तो आपको घर में कौन सा शिवलिंग रखना चाहिए यह भी बेहद महत्वपूर्ण होता है. ज्योतिष के अनुसार, घर में पारद शिवलिंग रखना सबसे शुभ माना गया है. इसके अलावा आप स्फटिक का शिवलिंग भी घर में रख सकते हैं. अगर आप नर्मदा नदी के शिवलिंग की पूजा करते हैं तो यह सबसे ज्यादा शुभ होता है. Shiv ki puja ke Niyam शिवलिंग भगवान शंकर के निराकार रूप का प्रतिनिधित्व करता है और उनके अनंत स्वरूप का प्रतीक भी माना गया है, इसलिए कुछ विशेष प्रकार के शिवलिंग की ही पूजा घर में करने की सलाह दी जाती है. सावन शिवलिंग पूजा सामग्री (Sawan Shivling puja samagri) अगर आप घर में शिवलिंग की पूजा या अभिषेक करने करने जा रहे हैं, तो आपको कुछ खास सामग्रियों की जरूरत होती है. आइए इनके बारे में जानें – बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, बिल्व पत्र, चंदन का लेप, आक के फूल, सफेद फूल, कमल, मौसमी फल, शहद, शक्कर, चीनी, गंगाजल, गाय का दूध, अगरबत्ती, कपूर, घी का दीपक, धूप, दीप, गंध, नैवेद्य, प्रसाद के लिए मिठाई, आचमन के लिए जल का पात्र. सावन में शिवलिंग की पूजा विधि (Sawan Shivling Puja vidhi) सावन में शिव पूजा के नियम (Sawan shivling puja niyam) 1. इन चीजों का करें त्याग- Shiv ki puja ke Niyam सावन के शुरू होते ही तामसिक चीजों जैसे मांस, शराब, नशीले पदार्थ, लहसुन, प्याज आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. सावन में पूरे महीने सात्विक भोजन करना चाहिए. पूजा से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए. 2. शिवलिंग पर ये चीजें न चढ़ाएं- महादेव की पूजा में तुलसी के पत्ते, हल्दी, केतकी का फूल, सिंदूर, शंख, नारियल आदि चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ये सभी चीजें शिव पूजा में वर्जित मानी गई हैं. 3. इन दिनों पर व्रत रखना है शुभ- Shiv ki puja ke Niyam सावन के सोमवार, प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए. ये तीनों ही दिन शिव जी की कृपा पाने के लिए सबसे विशेष माने गए हैं. 4. शिव जी मंत्रों का जाप करें- Shiv ki puja ke Niyam सावन में सामान्य पूजा के दौरान आप ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं. आप शिव चालीसा पढ़कर भी भगवान शिव की आरती कर सकते हैं. आरती करने से पूजा की कमियां दूर हो जाती हैं. 5. शिवलिंग के आकार का रखें ध्यान- Shiv ki puja ke Niyam ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घर में स्थापित किए जाने वाले शिवलिंग का आकार हमेशा छोटा ही होना चाहिए. घर में अंगूठे के आकार का शिवलिंग स्थापित करना सबसे उत्तम है. इसके अलावा शिवलिंग अकेले नहीं रखना चाहिए. उसके साथ में नंदी या शिव परिवार की फोटो जरूर रखें. 6. जलधारा युक्त शिवलिंग- Shiv ki puja ke Niyam शास्त्रों के मुताबिक, शिवलिंग से हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. उस ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने के लिए ही शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है. शिवलिंग की ऊर्जा को शांत रखने के लिए जलधारा होना जरूरी है. 7. इस दिशा में रखें शिवलिंग

Shiv ki puja ke Niyam: सावन में शिवलिंग की पूजा कैसे करें? जान लें सही विधि, नियम और पूजा सामग्री Read More »