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शुक्रवार के ये उपाय बदल देंगे आपकी किस्मत! घर में दौड़ी आएंगी मां लक्ष्मी

Shukrawar Ke Upay: शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन-संपत्ति का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन कुछ खास उपाय करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसलिए आज हम आपको शुक्रवार के दिन किए जाने वाले कुछ अचूक उपाय बताने जा रहे हैं, जिससे घर में धन के साथ-साथ सुख-शांति भी आएगी. हिंदू धर्म में हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से मां लक्ष्मी की पूजा- अर्चना करनी चाहिए। मां लक्ष्मी को धन की देवी भी कहा जाता है।  मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार के दिन कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं। इन उपायों को करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय मां को लाल वस्त्र अर्पित करें maa ko lal bastra arpeet kare मां लक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें maa laximi ko pusp arpeet kare विष्णु भगवान की पूजा करें bhagwan vishnu ki puja kare खीर का भोग लगाएं kheer ka bhog lagaye शुक्रवार के दिन श्री लक्ष्मीनारायण भगवान और मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं। इस उपाय को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और धन- लाभ होता है।  मंत्र जाप Mantra jap मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को इन मंत्रों का जाप करें: दिन ॐ शुं शुक्राय नम: या ॐ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहं. दान करें सफेद वस्तुएं dan kare safed bastuye शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ ही सफेद रंग की वस्तुएं जैसे सफेद कपड़े, चावल, आटा, चीनी, दूध और दही का दान करें. शास्त्रों के अनुसार सफेद रंग मां लक्ष्मी को प्रिय है. कलह-कलेश से मुक्ति अगर आपके घर में लगातार कलह-कलेश रहता है तो हर शुक्रवार को गाय को रोटी खिलाना शुरू कर दें. गाय को रोटी खिलाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. अखंड ज्योति akhand jyoti अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो शुक्रवार को मां लक्ष्मी की मूर्ति के सामने 11 दिनों तक अखंड ज्योति जलाएं.  ऐसा करने से आपको आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. कमल गट्टे की माला kamal gatte ki mala अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने और धन की कमी से छुटकारा पाने के लिए हर शुक्रवार को कमल गट्टे की माला से देवी लक्ष्मी का नाम जपें. इससे देवी लक्ष्मी की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी. जल चढ़ाने का उपाय jal chadane ka uppay शुक्रवार के दिन नीम के पेड़ पर जल चढ़ाएं क्योंकि इसे देवी दुर्गा का एक रूप माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति मिलती है.

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Vishnu Puja Vidhi: भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए इस तरीके से करें पूजा-अर्चना, उत्तम फल की होगी प्राप्ति

Vishnu Puja Vidhi:सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना आप कभी भी कर सकते हैं। लेकिन गुरुवार के दिन श्रीहरि की पूजा अत्यंत ही मंगलकारी मानी गई है। भगवान विष्णु की पूजा से जीवन के सभी दुखों का अंत हो जाता है। सनातन परंपरा में सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु Vishnu Puja Vidhi की पूजा-अर्चना करने से मनचाहा फल प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं में भी श्रीहरि विष्णु की पूजा किए जाने से कई कष्टों से मुक्ति मिलने के साथ ही उनकी कृपा प्राप्त होने का उल्लेख मिलता है। भगवान विष्णु की पूजा के लिए गुरुवार का दिन अत्यंत ही शुभ और मंगलकारी माना गया है। मान्यता के अनुसार, श्रीहरि भगवान विष्णु की गुरुवार के दिन पूजा-अर्चना से वे शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और जीवन से जुड़े सभी सुखों की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि कभगवान विष्णु Vishnu Puja Vidhi की पूजा से व्यक्ति के पूर्व जन्म और इस जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही व्यक्ति को पुण्यफल की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु की साधना-आराधना करने से धन-संपदा के साथ ही वैवाहिक सुखों की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की किस विधि से पूजा करनी चाहिए Vishnu Puja Vidhi और उनके किस मंत्र का जाप करना चाहिए। श्रीहरि की कृपा पाने के लिए करें इसका पाठ vishnu ki krapa pane ke liye kare eska path Vishnu Puja Vidhi भगवान श्रीहरि की कृपा पाने के लिए आप उनके सरल मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ नमो नारायण’ और ‘श्रीमन नारायण नारायण हरि-हरि’ का पूरे श्रद्धा और भक्ति से जाप करें। इसके अलावा आप विष्णु सहस्त्रनाम, गजेंद्र मोक्ष और नारायण कवच आदि का पाठ कर सकते हैं। इनका पाठ करने से आप पर निश्चित ही भगवान विष्णु की विशेष कृपा बरसती है।  मां लक्ष्मी संग करें नारायण की पूजा maa laximi sang kare narayan ki puja Vishnu Puja Vidhi अगर आप आर्थिक रूप से परेशान हैं तो भगवान विष्णु Vishnu Puja Vidhi के साथ मां लक्ष्मी का पूजन जरूर करना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली हल्दी का प्रयोग आप मां लक्ष्मी को भी प्रसन्न करने के लिए कर सकते हैं। मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए धन की देवी को 5 हल्दी की साबुत गांठें अर्पित करें। इसके बाद उन हल्दी की गांठों को अगले दिन लाल कपड़े में लपेट कर अपने धन वाले स्थान पर रख दें। इस उपाय को करने से आपको मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने लगेगी। भगवान विष्णु की पूजा विधि (Lord Vishnu Puja Vidhi) भगवान विष्णु की आरती (Lord Vishnu Aarti) ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे। भगवान विष्णु की आरती भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे। जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे। मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे। दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे। विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, सन्तन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे। श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय जगदीश हरे।

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Vinayak Chaturthi 2025: साल 2025 में पहली विनायक चतुर्थी कब है, जानें भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Vinayak Chaturthi 2025 हिंदू धर्म में विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान Ganesh bhagwan गणेश की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। अब ऐसे में साल 2025 की पहली विनायक चतुर्थी कब है। इसके बारे में विस्तार से जानते हैं I Vinayak Chaturthi 2025:सनातन धर्म में विनायक चतुर्थी को सुख-समृद्धि और सौभाग्यशाली माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेष की पूजा विधिवत रूप से करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती है और सुख-समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि Vinayak Chaturthi 2025 विनायक चतुर्थी के दिन मनोकामना पूर्ति के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं। जिससे उत्तम फलों की प्राप्ति हो सकती है। अब ऐसे में साल 2025 में पहली विनायक चतुर्थी का व्रत कब रखा जाएगा, पूजा का शुभ मुहूर्त कब है और भगवान गणेश की पूजा का महत्व क्या है? कब है पौष मास की विनायकी चतुर्थी? (Vinayak Chaturthi January 2025 Kab hai) Vinayak Chaturthi 2025 पंचांग के अनुसार, पौष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 2 जनवरी, गुरुवार की रात 01 बजकर 08 मिनिट से शुरू होगी, जो 03 जनवरी, शुक्रवार की रात 11 बजकर 39 मिनिट तक रहेगी। Vinayak Chaturthi 2025 चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय 3 जनवरी को होगा, इसलिए इस दिन पौष मास की विनायकी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस दिन सिद्धि, प्रजापति और सौम्य नाम के 3 शुभ योग होने से इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है। ये हैं पौष विनायकी चतुर्थी के शुभ मुहूर्त (Vinayaka Chaturthi January 2025 Shubh Muhurat) – दोपहर 12:31 से 13:50 तक– दोपहर 12:10 से 12:52 तक (अभिजीत मुहूर्त)– शाम 04:30 से 05:49 तक इस विधि से करें विनायकी चतुर्थी व्रत-पूजा (Vinayaki Chaturthi 2025 Puja Vidhi) Vinayak Chaturthi 2025 3 जनवरी, शुक्रवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और इसके बाद हाथ में जल-चावल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में घर में किसी साफ स्थान पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा या चित्र एक बाजोट यानी पटिए के ऊपर स्थापित करें। पूजा की शुरूआत में सबसे पहले गणेश प्रतिमा पर तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं।इसके बाद दूर्वा, अबीर, गुलाल, रोली आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें। इस दौरान ऊं गं गणपतयै नम: मंत्र का जाप करें।भगवान श्रीगणेश को भोग लगाएं और आरती करें। प्रसाद भक्तों में बांट दें। संभव हो तो मंत्र जाप भी कर सकते हैं।जो व्यक्ति विनायकी चतुर्थी का व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामना पूरी होती हैं Vinayak Chaturthi 2025 घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। भगवान श्रीगणेश की आरती (Lord Ganesha Aarti) जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ Disclaimerइस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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Lord Hanuman: मंगलवार के दिन ऐसे करें हनुमान जी की पूजा, जीवन के संकटों से मिलेगा छुटकारा

Lord Hanuman:सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता की पूजा के लिए समर्पित है। मंगलवार के दिन संकटमोचन Lord Hanuman हनुमान जी की पूजा-व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति मंगलवार के दिन विधिपूर्वक भगवान हनुमान जी की पूजा-अर्चना करता है। उसे बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त होता है और सभी कार्यों में सफलता मिलती है। साथ ही जीवन के हर संकट से निजात मिलती है। Mangalwar Vrat Niyam: सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित हैं. कहते हैं कि मंगलवार को हनुमान जी पूजा का विधान है. कहते हैं कि इस दिन बजरंगबली की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. वहीं, जीवन में आ रही परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. मंगलवार के दिन इन उपायों को अपना कर  जीवन की सभी बाधाओं को दूर किया जा सकता है हनुमान जी की पूजा विधि Hanuman ji ki puja vidhi मंगलवार के दिन सुबह उठकर हनुमान जी को प्रणाम करें। इसके बाद स्नान करें और हथेली में जल लेकर ‘ॐ केशवाय नम:, ॐ नाराणाय नम:, ॐ माधवाय नम:, ॐ हृषीकेशाय नम: मंत्र का जाप करें। अब ‘ॐ गोविंदाय नमः’ मंत्र जाप कर हाथ धो लें और साफ वस्त्र धारण करें। अब मंदिर की साफ-सफाई कर गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें। इसके बाद चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमानजी की मूर्ति स्थापित करें। अब हनुमान जी को वस्त्र पहनाएं और रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद चमेली के तेल का दिया जलाएं। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी करें। संकटमोचन हनुमान जी की आरती कर बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं। अंत में प्रसाद का वितरण करें। हनुमान जी की पूजा के लाभ Hanuman ji ki puja ke labh मान्यता है कि मंगलवार Lord Hanuman के दिन हनुमान जी की पूजा करने से साधक के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन ‘ऊॅं श्री हनुमंते नम:’ मंत्र का जाप करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। Lord Hanuman हनुमान पूजा सामग्री लिस्ट Hanuman ji ki puja samagree गंगाजल जल रोली अक्षत पुष्प फल मिठाई चमेली का तेल बूंदी के लड्डू

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Sakat Chauth 2025: कब है सकट चौथ? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Sakat chauth 2025 mein kab hai date and time: सकट चौथ का व्रत भगवान श्रीगणेश व माता सकट को समर्पित है। जानें जनवरी में सकट चौथ कब है- Sakat chauth 2025 Kab Hai:हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश ganesh bhagwan को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतु्र्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का व्रत रखा जाता है। यह व्रत सकट माता को समर्पित है। इस दिन माताएं अपने संतान की अच्छे स्वास्थ्य व खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं। सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। मान्यता है कि इस दिन श्रीगणेश की पूजा करने से सुख-समृद्धि का आगमन होता है। सकट चौथ को तिलकुटा चौथ, माघी चौथ या व्रकतुण्ड चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। Sakat Chauth Significance: साल भर में 12 संकष्टी चतुर्थी व्रत आते हैं। इनमें से कुछ चतुर्थी साल की सबसे बड़ी चौथ में से एक हैं, उनमें से एक है सकट चौथ व्रत। सकट चौथ भगवान गणेश के सबसे महत्वपूर्ण पर्व में से एक है। हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन सकट चौथ का त्योहार मनाया जाता है। सकट चौथ व्रत की महिमा से संतान की सभी चिंताएं दूर हो जाएंगी। भक्तों को सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। सकट चौथ वर्ष की शुरुआत में पड़ता है, इसलिए जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं।  उन्हें पूरे वर्ष अनंत सुख, धन, सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं 2025 में कब है सकट चौथ। सकट चौथ चंद्रोदय टाइमिंग- सकट चौथ के दिन चन्द्रमा को जल अर्घ्य देने और पूजा करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होचा है और जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। सकट चौथ के दिन चंद्रमा निकलने का समय रात 09 बजकर 09 मिनट है। कब है सकट चौथ? Sakat Chauth 2025 17 जनवरी 2025, शुक्रवार को सकट चौथ है। इसे संकष्टी चतुर्थी, सकट चौथ, तिलकुट चौथ, माघी चौथ, लंबोदर संकष्टी, तिलकुट चतुर्थी और संकटा चौथ आदि नामों से भी जाना जाता है।  सकट चौथ 2025 Sakat Chauth माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आरंभ:  17 जनवरी 2025, प्रातः 4 बजकर 06 मिनट पर माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त: 18 जनवरी 2025, प्रातः 5 बजकर 30 मिनट पर  गणपति पूजा मुहूर्त-   17 जनवरी 2025 प्रातः 7:15 – प्रातः 11:12 सकट चौथ 2025 Sakat Chauth 2025 चंद्रोदय समय17 जनवरी 2025 , रात्रि 09: 09 मिनट पर सकट चौथ व्रत क्यों किया जाता है ?सकट चौथ का दिन भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है। Sakat Chauth 2025 इस दिन माताएं अपने पुत्रों के कल्याण की कामना से व्रत रखती हैं। सकट चौथ के दिन भगवान गणेश की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है। इस पूरे दिन व्रत रखा जाता है।  रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा Sakat Chauth 2025 को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। यही कारण है कि सकट चौथ Sakat Chauth 2025 पर चंद्रमा दर्शन और पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन गणपति जी को पूजा में तिल के लड्डू या मिठाई अर्पित करते हैं, साथ में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पारण करते हैं।  सकट चौथ Sakat Chauth 2025 PUJA Vidhi:पूजा विधि डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra) श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti) Rinharta Ganesh Stotra:ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र: कर्ज से मुक्ति पाने का चमत्कारी उपाय Ganesh Chalisa:श्री गणेश चालीसा

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TULSI VIVAH 2024:तुलसी विवाह: महत्व, विधि, और वेदों में प्रमाण

TULSI VIVAH:तुलसी विवाह: महत्व, विधि, और वेदों में प्रमाण TULSI VIVAH तुलसी विवाह हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जो कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे देवउठनी एकादशी भी कहते हैं, पर मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का विवाह तुलसी माता से किया जाता है। इस पूजा का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है, और इसका उल्लेख वेदों एवं पुराणों में भी मिलता है। तुलसी विवाह को शुभ विवाहों का आरंभ भी माना जाता है, और ऐसा माना जाता है कि इसके बाद सभी मांगलिक कार्य जैसे शादी-विवाह पुनः आरंभ हो जाते हैं। TULSI VIVAH तुलसी विवाह का महत्व तुलसी का विवाह एक धार्मिक और पौराणिक अनुष्ठान है, जिसमें भगवान विष्णु के अवतार शालिग्राम जी का विवाह माता तुलसी से संपन्न किया जाता है। इसे धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। पद्म पुराण में बताया गया है कि जो भक्त तुलसी विवाह कराते हैं, वे असीम पुण्य के भागी होते हैं। ऐसा माना जाता है कि तुलसी विवाह से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है। इसके अलावा, तुलसी को जीवनदायिनी औषधि माना गया है, और इसके धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों ही लाभ होते हैं। TULSI VIVAH तुलसी विवाह का वेदों में प्रमाण तुलसी विवाह का उल्लेख विभिन्न वेदों और पुराणों में मिलता है। स्कंद पुराण, पद्म पुराण, और गरुड़ पुराण में तुलसी माता के महत्व और उनके विवाह का वर्णन किया गया है। स्कंद पुराण में तुलसी को लक्ष्मी का अवतार माना गया है, और उनके विवाह से संबंधित कथाएं दी गई हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी माता का जन्म वृंदा नाम की एक असुर कन्या के रूप में हुआ था। उनकी भक्ति और पवित्रता के कारण उन्हें विष्णु जी की पत्नी बनने का वरदान मिला। वेदों में तुलसी को जीवन का प्रतीक माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार, तुलसी के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वहीं, धार्मिक दृष्टिकोण से, तुलसी माता के पूजन से व्यक्ति को सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसलिए तुलसी विवाह एक धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ एक आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी है। TULSI VIVAH तुलसी विवाह के लाभ TULSI VIVAH तुलसी विवाह की पूजन सामग्री तुलसी विवाह में विशेष पूजा सामग्री का उपयोग किया जाता है। यह सामग्री पूजा की शुद्धता और प्रभाव को बढ़ाती है तुलसी विवाह की पूजा विधि तुलसी विवाह की पूजा विधि सरल है, परंतु इसे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ किया जाना चाहिए: तुलसी विवाह के मंत्र और स्तोत्र तुलसी विवाह में श्री विष्णु मंत्र और तुलसी स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, विष्णु सहस्रनाम और तुलसी चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। यह माना जाता है कि इन मंत्रों के उच्चारण से वातावरण पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। निष्कर्ष तुलसी विवाह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना भी है। इसका पालन कर हम भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। तुलसी विवाह के आयोजन से हमें धार्मिक, सामाजिक, और पारिवारिक लाभ प्राप्त होते हैं। इसका महत्व वेदों और पुराणों में भी दर्शाया गया है, जिससे इसकी प्राचीनता और पवित्रता का पता चलता है। तुलसी विवाह का आयोजन करके न केवल हम अपने घर में सुख-समृद्धि ला सकते हैं, बल्कि इसका पुण्य फल भी प्राप्त कर सकते हैं। इस पवित्र अनुष्ठान को श्रद्धा और विश्वास के साथ संपन्न करें और तुलसी माता एवं भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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अक्षय फल देनेवाली अक्षय नवमी

अक्षय फल देनेवाली अक्षय नवमी 🙏🏻अक्षय नवमी कार्तिक शुक्ल नवमी (10 नवम्बर 2024) रविवार को ‘अक्षय नवमी’ तथा ‘आँवला नवमी’ कहते हैं | अक्षय नवमी को जप, दान, तर्पण, स्नानादि का अक्षय फल होता है | इस दिन आँवले के वृक्ष के पूजन का विशेष महत्व है | पूजन में कर्पूर या घी के दीपक से आँवले के वृक्ष की आरती करनी चाहिए तथा निम्न मंत्र बोलते हुये इस वृक्ष की प्रदक्षिणा करने का भी विधान है :🌷 यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च | तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे ||🍏 इसके बाद आँवले के वृक्ष के नीचे पवित्र ब्राम्हणों व सच्चे साधक-भक्तों को भोजन कराके फिर स्वयं भी करना चाहिए | घर में आंवलें का वृक्ष न हो तो गमले में आँवले का पौधा लगा के अथवा किसी पवित्र, धार्मिक स्थान, आश्रम आदि में भी वृक्ष के नीचे पूजन कर सकते है | कई आश्रमों में आँवले के वृक्ष लगे हुये हैं | इस पुण्यस्थलों में जाकर भी आप भजन-पूजन का मंगलकारी लाभ ले सकते हैं | 10 नवम्बर 2024 रविवार को आँवला अक्षय नवमी है । 🙏🏻 नारद पुराण के अनुसार🌷 कार्तिके शुक्लनवमी याऽक्षया सा प्रकीर्तता । तस्यामश्वत्थमूले वै तर्प्पणं सम्यगाचरेत् ।। ११८-२३ ।।*देवानां च ऋषीणां च पितॄणां चापि नारद । स्वशाखोक्तैस्तथा मंत्रैः सूर्यायार्घ्यं ततोऽर्पयेत् ।। ११८-२४ ।।ततो द्विजान्भोजयित्वा मिष्टान्नेन मुनीश्वर । स्वयं भुक्त्वा च विहरेद्द्विजेभ्यो दत्तदक्षिणः ।। ११८-२५ ।।एवं यः कुरुते भक्त्या जपदानं द्विजार्चनम् । होमं च सर्वमक्षय्यं भवेदिति विधेर्वयः ।। ११८-२६ ।। 🍏 कार्तिक मास के शुक्लपक्ष में जो नवमी आती है, उसे अक्षयनवमी कहते हैं। उस दिन पीपलवृक्ष की जड़ के समीप देवताओं, ऋषियों तथा पितरों का विधिपूर्वक तर्पण करें और सूर्यदेवता को अर्घ्य दे। तत्पश्च्यात ब्राह्मणों को मिष्ठान्न भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा दे और स्वयं भोजन करे। इस प्रकार जो भक्तिपूर्वक अक्षय नवमी को जप, दान, ब्राह्मण पूजन और होम करता है, उसका वह सब कुछ अक्षय होता है, ऐसा ब्रह्माजी का कथन है।👉🏻 कार्तिक शुक्ल नवमी को दिया हुआ दान अक्षय होता है अतः इसको अक्षयनवमी कहते हैं। 🙏🏻 स्कन्दपुराण, नारदपुराण आदि सभी पुराणों के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी युगादि तिथि है। इसमें किया हुआ दान और होम अक्षय जानना चाहिये । प्रत्येक युग में सौ वर्षों तक दान करने से जो फल होता है, वह युगादि-काल में एक दिन के दान से प्राप्त हो जाता है “एतश्चतस्रस्तिथयो युगाद्या दत्तं हुतं चाक्षयमासु विद्यात् । युगे युगे वर्षशतेन दानं युगादिकाले दिवसेन तत्फलम्॥” 🙏🏻 देवीपुराण के अनुसार कार्तिक शुक्ल नवमीको व्रत, पूजा, तर्पण और अन्नादिका दान करनेसे अनन्त फल होता है।🍏 कार्तिक शुक्ल नवमी को ‘धात्री नवमी’ (आँवला नवमी) और ‘कूष्माण्ड नवमी’ (पेठा नवमी अथवा सीताफल नवमी) भी कहते है। स्कन्दपुराण के अनुसार अक्षय नवमी को आंवला पूजन से स्त्री जाति के लिए अखंड सौभाग्य और पेठा पूजन से घर में शांति, आयु एवं संतान वृद्धि होती है। 🍏 आंवले के वृक्ष में सभी देवताओं का निवास होता है तथा यह फल भगवान विष्णु को भी अति प्रिय है। अक्षय नवमी के दिन अगर आंवले की पूजा करना और आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन बनाना और खाना संभव नहीं हो तो इस दिन आंवला जरूर खाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि को आंवले के पेड़ से अमृत की बूंदे गिरती है और यदि इस पेड़ के नीचे व्यक्ति भोजन करता है तो भोजन में अमृत के अंश आ जाता है। जिसके प्रभाव से मनुष्य रोगमुक्त होकर दीर्घायु बनता है। चरक संहिता के अनुसार अक्षय नवमी को आंवला खाने से महर्षि च्यवन को फिर से जवानी यानी नवयौवन प्राप्त हुआ था।

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Best Time for Mala Jaap and Correct Rules:माला जपने का सही समय और सटीक नियम

Mala Jaap:माला जपने का सही समय और सटीक नियम | Best Time for Mala Jaap and Correct Rules Mala Jaap:माला जपना एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जो हमारे मन और आत्मा को शुद्ध करती है। सही समय और सही तरीके से माला जपने से इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं माला जपने का सही समय और उसके महत्वपूर्ण नियम। 1. Best Time for Mala Jaap | माला जपने का सही समय 2. माला जपने के सही नियम | Correct Rules for Mala Jaap 3. Additional Tips for Mala Jaap | माला जपने के अतिरिक्त सुझाव माला जपने के इन सरल और प्रभावी नियमों को अपनाकर आप अपनी आध्यात्मिक यात्रा को और भी अधिक सार्थक बना सकते हैं। सही समय और सही नियमों का पालन करने से जप का असर कई गुना बढ़ जाता है।

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Karwa Chauth 2024 Date: करवा चौथ कब है? 21 मिनट के लिए लगेगी भद्रा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चांद निकलने का समय

Karwa Chauth 2024:करवा चौथ हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना के लिए रखा जाता है। करवा चौथ विशेष रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है, लेकिन अब यह पूरे देश में प्रसिद्ध हो चुका है। Karwa Chauth 2024 करवा चौथ के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले “सारगी” खाती हैं और दिन भर निर्जला उपवास रखती हैं। व्रत का समापन रात में चंद्रमा को देखकर और अर्घ्य देकर किया जाता है। इस व्रत का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसे वैवाहिक जीवन के प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। Karwa Chauth 2024:करवा चौथ 2024 की तारीख साल 2024 में करवा चौथ 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह दिन कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है। चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 20 अक्टूबर 2024 को सुबह 9:30 बजे होगा और इसका समापन 21 अक्टूबर 2024 को सुबह 9:59 बजे होगा। इसलिए, 20 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा। भद्रा काल का प्रभाव ज्योतिषीय दृष्टि से, चतुर्थी तिथि पर भद्रा का समय विशेष ध्यान देने योग्य होता है। भद्रा को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, और इसके दौरान पूजा करना वर्जित होता है। इस साल करवा चौथ पर भद्रा का समय भी आ रहा है, जो 21 मिनट का रहेगा। भद्रा काल शाम 6:08 बजे से 6:29 बजे तक रहेगा। इस दौरान पूजा करना वर्जित होगा। Karwa Chauth 2024 इसलिए, महिलाओं को इस समय के बाद ही पूजा-अर्चना करनी चाहिए। भद्रा समाप्त होते ही पूजा शुरू की जा सकती है। Puja Muhurat:पूजा का शुभ मुहूर्त करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त भद्रा के समाप्त होने के बाद शुरू होगा। इस साल Karwa Chauth 2024 करवा चौथ की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय शाम 6:29 बजे से रात 7:45 बजे तक रहेगा। इस समय के दौरान महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करेंगी और करवा चौथ की कथा सुनेंगी। पूजा में भगवान गणेश और माता पार्वती की आराधना के साथ-साथ करवा माता को विशेष रूप से पूजा जाता है। करवा एक मिट्टी का पात्र होता है, जिसे जल से भरकर पूजा में रखा जाता है और अंत में चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए उपयोग किया जाता है। Diwali 2024: 31 अक्टूबर या 01 नवंबर, कब है दिवाली? यहां दूर होगी असमंजस की स्थिति Karwa Chauth 2024 Date:चंद्रमा निकलने का समय करवा चौथ के व्रत का समापन चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद होता है। Karwa Chauth 2024 इस दिन महिलाएं चंद्रमा के दर्शन के बाद ही अपना व्रत तोड़ती हैं। साल 2024 में चंद्रमा के उदय होने का समय रात 8:11 बजे रहेगा। इसके बाद महिलाएं चंद्रमा को जल अर्पित करके अपने व्रत का समापन करेंगी और फिर पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत तोड़ेंगी। Karwa Chauth 2024 Puja Vidhi:करवा चौथ की पूजा विधि उपसंहार करवा चौथ Karwa Chauth 2024 विवाहित महिलाओं के लिए एक विशेष त्यौहार है, जो उनके पति के प्रति उनके प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। 2024 में करवा चौथ 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, और पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:29 बजे से रात 7:45 बजे तक रहेगा। चंद्रमा का उदय रात 8:11 बजे होगा, और इस समय के बाद महिलाएं अपना व्रत खोलेंगी। भद्रा काल के दौरान पूजा नहीं करनी चाहिए, इसलिए इस बात का ध्यान रखना जरूरी है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Navratri 2024:नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा: सम्पूर्ण गाइड (वेदिक प्रमाण सहित)

Navratri:नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा: सम्पूर्ण गाइड (वेदिक प्रमाण सहित) Navratri:नवरात्रि हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस पर्व के दौरान नौ दिनों तक माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की उपासना की जाती है, जिन्हें Navadurga कहा जाता है। हर दिन का विशेष महत्व है, और प्रत्येक दिन एक अलग देवी की पूजा का विधान है। यहाँ हम आपको बताएंगे कि Navratri नवरात्रि के नौ दिनों में कौन-कौन से देवी के रूपों की पूजा की जाती है, साथ ही उनके महत्त्व और वेदिक प्रमाण भी प्रदान करेंगे। 1. शैलपुत्री (Shailaputri) पूजा का दिन: नवरात्रि Navratri का पहला दिनमहत्व: माँ शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। यह माँ दुर्गा का पहला रूप है। इनकी पूजा से साधक को स्थिरता और धैर्य प्राप्त होता है।वेदिक प्रमाण: शैलपुत्री की महिमा “शिवपुराण” और “मार्कण्डेय पुराण” में उल्लेखित है। इनके ध्यान और मंत्रों का उल्लेख दुर्गा सप्तशती में मिलता है।मंत्र: “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” 2. ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini) पूजा का दिन: दूसरा दिनमहत्व: माँ ब्रह्मचारिणी तपस्या का प्रतीक हैं। इनकी पूजा से भक्त को संयम और साधना की शक्ति मिलती है।वेदिक प्रमाण: ब्रह्मचारिणी की पूजा का उल्लेख “मार्कण्डेय पुराण” में मिलता है। यह रूप सती के रूप में वर्णित है।मंत्र: “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः” 3. चंद्रघंटा (Chandraghanta) पूजा का दिन: तीसरा दिनमहत्व: माँ चंद्रघंटा शांति और साहस की देवी हैं। इनके माथे पर अर्धचंद्र है, जो इनकी शक्ति का प्रतीक है।वेदिक प्रमाण: चंद्रघंटा की पूजा का उल्लेख भी दुर्गा सप्तशती और मार्कण्डेय पुराण में है।मंत्र: “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः” 4. कूष्मांडा (Kushmanda) पूजा का दिन: चौथा दिनमहत्व: माँ कूष्मांडा सृजन की शक्ति का प्रतीक हैं। माना जाता है कि इन्होंने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया।वेदिक प्रमाण: कूष्मांडा देवी की महिमा “देवी भागवत” में वर्णित है।मंत्र: “ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः” 5. स्कंदमाता (Skandamata) पूजा का दिन: पांचवा दिनमहत्व: माँ स्कंदमाता, भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। इनकी पूजा से साधक को मातृस्नेह और ज्ञान की प्राप्ति होती है।वेदिक प्रमाण: स्कंदमाता की पूजा का उल्लेख भी देवी भागवत और मार्कण्डेय पुराण में मिलता है।मंत्र: “ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः” 6. कात्यायनी (Katyayani) पूजा का दिन: छठा दिनमहत्व: माँ कात्यायनी युद्ध की देवी मानी जाती हैं, जो बुराई का नाश करती हैं।वेदिक प्रमाण: कात्यायनी की पूजा का उल्लेख कालिका पुराण में किया गया है।मंत्र: “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” 7. कालरात्रि (Kalaratri) पूजा का दिन: सातवां दिनमहत्व: माँ कालरात्रि सभी नकारात्मक शक्तियों और भूत-प्रेतों का नाश करती हैं।वेदिक प्रमाण: इनकी पूजा का वर्णन दुर्गा सप्तशती में मिलता है।मंत्र: “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः” 8. महागौरी (Mahagauri) पूजा का दिन: आठवां दिनमहत्व: माँ महागौरी शांति, पवित्रता और ज्ञान की देवी हैं। इनकी पूजा से साधक को शुद्धि और मोक्ष प्राप्त होता है।वेदिक प्रमाण: इनकी महिमा देवी भागवत और शिवपुराण में वर्णित है।मंत्र: “ॐ देवी महागौर्यै नमः” 9. सिद्धिदात्री (Siddhidatri) पूजा का दिन: नवा दिनमहत्व: माँ सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों की दात्री हैं। इनकी पूजा से भक्त को समस्त सिद्धियों की प्राप्ति होती है।वेदिक प्रमाण: इनकी पूजा का उल्लेख “शिवपुराण” और “देवी भागवत” में किया गया है।मंत्र: “ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः” निष्कर्ष: Navratri:नवरात्रि में देवी दुर्गा के इन नौ रूपों की पूजा करके साधक अपनी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकते हैं। यह नौ दिन आत्मशुद्धि और साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वेदों और पुराणों में इनकी महिमा का वर्णन कर, नवरात्रि Navratri की पूजा को और भी अधिक महत्व दिया गया है। Sources: Maa Durga Maa Kali Aarti:माँ दुर्गे का साप्ताहिक दिन शुक्रवार, दोनों नवरात्रि, अष्टमी, माता की चौकी एवं जगराते में सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती।

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Shardiya Navratri 2024 Date: कब से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि, नोट करें सही तारीख, कलश स्थापना विधि व पूजन सामग्री

Shardiya Navratri 2024: चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि (माघ/आषाढ़) आती हैं। शारदीय नवरात्रि अश्विन माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। इस पर्व पर भक्त नौ दिनों तक मां अम्बे की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं Shardiya Navratri 2024 Date: सनातन धर्म में त्योहारों का विशेष महत्व है। नवरात्रि का पर्व भी खास अवसरों में से एक है। नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। साल में चार बार नवरात्रि का पावन त्योहार आता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि आती है। हालांकि सबसे ज्यादा महत्व शारदीय नवरात्रि का है। पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का त्योहार हर साल अश्विनी माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। नवरात्रि के 10वें दिन दशहरा मनाया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि का त्योहार 3 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। Sri Durga Chalisa:श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी… Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि 2024 तिथियां शारदीय नवरात्रि पूजा पर कैसे करें कलश स्थापना, जानें विधि (Shardiya Navratri 2024 Ghatsthapana Vidhi)  1. सुबह उठकर सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साप वस्त्र पहन लें. 2. घर में सफाई करने के बाद मुख्य द्वार की चौखट पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं. 3. पूजा घर को साफ करें और गंगाजल से पवित्र कर लें. 4. अब चौकी लगाएं और माता की प्रतिमा स्थापित करें. 5. फिर उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा में कलश की स्थापना करें.  6. कलश स्थापना के लिए जौ के बीज बोएं. फिर कलश में एक तांबे के कलश में पानी और गंगाजल डालें.  7. कलश पर कलावा और आम के पत्ते बांधें. 8. अब कलश में दूब, अक्षत और सुपारी डालें. 9. कलश पर चुनरी और मौली बांध कर एक नारियल रख दें.  10 अब विधि-विधान से मां दुर्गा का पूजन करें.  11. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. 12. आखिरी में मां दुर्गा की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें. Navratri 2024:पूजन सामग्री Navratri 2024 नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा के लिए निम्नलिखित पूजन सामग्री की आवश्यकता होती है पालकी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा (Shardiya Navratri 2024 Maa Durga Sawari)  Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के आगमन पर वाहन (Maa Durga Sawari) का विशेष महत्व होता है. इसे शुभ और अशुभता से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में इस साल शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा पालकी में सवार होकर आएंगी. देवी पुराण में पालकी की सवारी को बहुत शुभ माना जाता है. Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त (Shardiya Navratri Date & Shubh Muhurat)  हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का त्योहार हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो जाता है और शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है. इस साल शारदीय नवरात्रि 03 अक्टूबर, 2024 से शुरू हो रहा है. वहीं समापन 11 अक्टूबर को होगा. इसके अगले दिन 12 अक्टूबर को विजयदशमी का पावन पर्व मनाया जाएगा.  हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 3 अक्टूबर, 2024 को सुबह 12:19 बजे से हो रहा है, जो 4 अक्टूबर को सुबह 2:58 बजे तक है. ऐसे में उदया तिथि के मुताबिक शारदीय नवरात्रि गुरुवार, 3 अक्टूबर 2024 आरंभ हो रही है.  Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Radha Ashtami 2024:कब है राधा अष्टमी, जानें डेट, पूजा-विधि व महत्व

Radha Ashtami 2024 Date : इस साल भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन राधा अष्टमी मनाई जाएगी। कई भक्त जन इस दिन उपवास भी करते हैं। यह दिन राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। Radha Ashtami 2024 Date: हर साल भाद्रपद महीने में राधा अष्टमी मनाई जाती है। जन्माष्टमी की तरह ही राधाष्टमी भी बड़े धूम-धाम से मनायी जाती है। इस साल भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन Radha Ashtami 2024 राधा अष्टमी मनाई जाएगी। कई भक्त जन इस दिन उपवास भी करते हैं। यह दिन राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण के जन्म के 15 दिन बाद राधा जी का जन्म हुआ था। आइए जानते हैं राधा अष्टमी की डेट, महत्व, मंत्र व पूजन-विधि Rishi Panchami 2024 Date: कब है ऋषि पंचमी? बन रहे 2 शुभ योग, जानें पूजा मुहूर्त, मंत्र और महत्व Radha Ashtami 2024 :कब है राधा अष्टमी? अष्टमी तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 10, 2024 को 11:11 पी एम बजे अष्टमी तिथि समाप्त – सितम्बर 11, 2024 को 11:46 पी एम बजे मध्याह्न समय – 11:03 ए एम से 01:32 पी एम अवधि – 02 घण्टे 29 मिनट्स दृक पंचांग के अनुसार, सितम्बर 10, के दिन दोपहर 11:11 बजे से अष्टमी तिथि लग रही है, जिसका समापन सितम्बर 11, के दिन 11:46 पी एम बजे होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, राधा अष्टमी का व्रत 11 सितंबर को रखा जाएगा।  मंत्र- ॐ ह्नीं श्री राधिकायै नमः Radha Ashtami 2024 राधा अष्टमी के दिन निम्नलिखित कार्य करने की प्रथा है: Radha Ashtami 2024 राधा अष्टमी पर क्या न करें: Radha Ashtami 2024 राधा अष्टमी पूजन-विधि पानी में गंगाजल मिलकर स्नान करें भगवान श्री कृष्ण और राधा जी का जलाभिषेक करें माता का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें अब राधा जी को लाल चंदन, लाल रंग के फूल और श्रृंगार का सामान अर्पित करें मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें संभव हो तो व्रत रखें और व्रत लेने का संकल्प करें व्रत कथा का पाठ करें श्री राधा चालीसा का पाठ करें पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की आरती करें माता को खीर का भोग लगाएं अंत में क्षमा प्रार्थना करें Radha Ashtami 2024 :राधा अष्टमी का महत्व  इस दिन विवाहित महिलाएं संतान सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो लोग राधा रानी जी को प्रसन्न कर लेते हैं, उनसे भगवान श्री कृष्ण अपने आप प्रसन्न हो जाते हैं।Radha Ashtami 2024 कहा जाता है कि व्रत करने से घर में मां लक्ष्मी आती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। राधा रानी के बिना भगवान श्री कृष्ण की पूजा भी अधूरी मानी जाती है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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