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Putrada Ekadashi

Paush Putrada Ekadashi 2025 Date And Time: कब है पौष पुत्रदा एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त और संतान प्राप्ति की विशेष पूजा विधि

Paush Putrada Ekadashi 2025 Mein Kab Hai: सनातन धर्म में पौष माह (Paush Month) को अत्यंत शुभ माना गया है, क्योंकि इस माह में किए गए व्रत, जप और दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। पौष माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इसे एक अत्यंत पावन एकादशी माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। यह एकादशी विशेष रूप से संतान प्राप्ति, संतान सुख, वंश वृद्धि (वंश को आगे बढ़ाना) और पूरे परिवार की समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है,,। Putrada Ekadashi 2025 जिन विवाहित दंपत्तियों को संतानहीनता का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व (Significance of Putrada Ekadashi) पुत्रदा एकादशी वर्ष में दो बार आती है: पहली सावन मास में और दूसरी पौष मास में। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत रखने से दंपत्तियों को योग्य, स्वस्थ और दीर्घायु संतान का आशीर्वाद मिलता है। Putrada Ekadashi 2025 इस दिन विधि-विधान से उपवास, पूजा-अर्चना और भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करने से जीवन में सौभाग्य और शांति का आशीर्वाद मिलता है, जिससे जीवन से अज्ञान और कष्टों का अंधकार दूर होता है,। संतान की इच्छा रखने वाले दंपत्ति के लिए इस व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। Saphala Ekadashi: सफला एकादशी के दिन करवाएं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, बन जाएंगे सारे बिगड़े काम पौष पुत्रदा एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी 2025 की तिथियां और शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: विवरण (Detail) समय (Time) तिथि (Date) एकादशी तिथि प्रारंभ सुबह 07:50 बजे 30 दिसंबर 2025 एकादशी तिथि समाप्त सुबह 05:00 बजे 31 दिसंबर 2025 व्रत धारण करने का दिन पूरे दिन 30 दिसंबर 2025 व्रत पारण का शुभ समय दोपहर 01:29 बजे से 03:33 बजे तक 31 दिसंबर 2025 ध्यान दें: वैष्णव संप्रदाय की परंपरा के अनुसार, यह एकादशी 31 दिसंबर को भी मानी जाएगी। व्रत पारण की अवधि में भगवान विष्णु को तिल, पंचामृत, तुलसी और फलों का अर्पण करके व्रत का समापन करना शुभ माना गया है। पौष पुत्रदा एकादशी की सरल पूजा विधि (Puja Vidhi) पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत अत्यंत पवित्रता से किया जाता है। व्रत करने वाले साधक को निम्नलिखित विधि का पालन करना चाहिए: 1. संकल्प और स्नान: व्रत के दिन प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए,। Putrada Ekadashi 2025 स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें,। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें,। 2. पूजा-अर्चना: संकल्प लेने के बाद भगवान श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें और उनकी विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है,। सबसे पहले भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं। 3. सामग्री अर्पित करें: पूजा में पीला चंदन, रोली, मोली, अक्षत, पीले पुष्प, ऋतुफल (मौसमी फल), पंचामृत और मिष्ठान (मिठाई) अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। भोग लगाते समय पीली मिठाई और फल का भोग लगाएं, जिसमें तुलसी दल जरूर शामिल होना चाहिए। 4. आरती और दीपदान: पूजा के बाद भगवान की धूप-दीप से आरती करें। अंत में दीपदान अवश्य करें, क्योंकि दीपदान को विष्णु भक्ति में विशेष पुण्यदायी माना गया है। यह दीपक अज्ञान और कष्टों के अंधकार को दूर करने का प्रतीक है। 5. संतान प्राप्ति के लिए विशेष पूजा: संतान की कामना करने वाले दंपत्ति प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण कर विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करें। Putrada Ekadashi 2025 बाल गोपाल को नैवेद्य, फूल, तिल और मिश्री अर्पित कर श्रद्धा से उनकी आरती करें। संतान प्राप्ति की कामना करने वाले जातक विशेष रूप से भगवान को पंचामृत चढ़ाएं। 6. व्रत कथा: पूजा के दौरान पुत्रदा एकादशी व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। पूजन मंत्र और जाप (Puja Mantra and Chanting) पूजा के दौरान मंत्र जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। इससे संतान प्राप्ति, संतति रक्षा और वंश वृद्धि के लिए विशेष प्रभावकारी आशीर्वाद मिलता है। व्रत के दिन विशेष रूप से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए,। इसके अतिरिक्त, Putrada Ekadashi 2025 विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है। आप इन मंत्रों का भी जाप कर सकते हैं: • ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ • शांताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, वन्दे विष्णुम् भवभयहरं सर्व लोकेकनाथम्:॥ • मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरीकाक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ व्रत का पारण कैसे करें? (How to Break the Fast) Putrada Ekadashi 2025 व्रत पूर्ण करने के लिए द्वादशी (एकादशी के अगले दिन) के शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करना आवश्यक है। व्रत पारण से पहले, ब्राह्मणों या गरीब व्यक्ति को भोजन कराकर दान दें,। इसके बाद ही स्वयं भोजन करने से व्रत पूर्ण होता है। व्रत पारण का शुभ समय 31 दिसंबर को दोपहर 01:29 बजे से 03:33 बजे तक है।

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Kalpataru Utsav 2026

Kalpataru Utsav 2026 Date And Time: कल्पतरु उत्सव तिथि, महत्व, इतिहास और आध्यात्मिक लाभ

Kalpataru Utsav 2026 Mein Kab Hai: कल्पतरु उत्सव 2026 भारत के प्रमुख आध्यात्मिक पर्वों में से एक है, जो परमहंस श्रीरामकृष्ण से जुड़ा हुआ अत्यंत पावन दिवस माना जाता है। यह उत्सव विशेष रूप से कोलकाता स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। Kalpataru Utsav 2026 Mein Kab Hai: कल्पतरु उत्सव 2026 कब है? 1 जनवरी 2026, गुरुवार कल्पतरु उत्सव कैसे मनाया जाता है दुनिया के हर एक कोने में स्थित रामकृष्ण मठ मैं, दक्षिणेश्वर मंदिर में ये उत्सव मनायी जाती है। Kalpataru Utsav 2026 कल्पतरु दिन की शुरुआत मंगल आरती, वैदिक मंत्रों के जाप, गीता के श्लोकों के जाप, चंडी पाठ, भजन गायन और श्री रामकृष्णन के जीवन और दिव्य कार्यों पर प्रवचन के साथ होता है। इसके बाद सभी के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है। कल्पतरु उत्सव का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व यह दिन आध्यात्मिक जागरण और कृपा प्राप्ति का प्रतीक है सच्चे मन से की गई प्रार्थना शीघ्र फल देती है आत्मिक शुद्धि और जीवन की नकारात्मकता दूर होती है गुरु कृपा और ईश्वर की अनुकंपा प्राप्त होती है साधना, ध्यान और भक्ति के लिए अत्यंत शुभ दिन माना जाता है सफला एकादशी के दिन करवाएं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, बन जाएंगे सारे बिगड़े काम कल्पतरु उत्सव पर क्या करें? इस पावन दिन पर श्रद्धालु निम्न कार्य करते हैं: प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें गुरु, ईश्वर या मां काली की पूजा करें श्रीरामकृष्ण परमहंस के विचारों का स्मरण करें ध्यान, जप और भजन-कीर्तन करें जरूरतमंदों को दान दें मन, वाणी और कर्म से पवित्र रहने का संकल्प लें कल्पतरु उत्सव पर मिलने वाले लाभ मनोकामनाओं की पूर्ति मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा आध्यात्मिक उन्नति जीवन के संकटों से मुक्ति गुरु और ईश्वर का आशीर्वाद

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Saphala Ekadashi

Saphala Ekadashi: सफला एकादशी के दिन करवाएं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, बन जाएंगे सारे बिगड़े काम

Saphala Ekadashi: सफला एकादशी पर विष्णु सहस्त्रनाम पाठ करवाएं बन जाएंगे रुके हुए काम, जीवन में आएगी स्थिरता और सौभाग्य क्या आपके जीवन में भी मेहनत के बावजूद काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं?क्या धन, करियर, विवाह, कोर्ट-कचहरी या पारिवारिक समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं? तो इस सफला एकादशी (Saphala Ekadashi) पर एक विशेष आध्यात्मिक उपाय आपके जीवन की दिशा बदल सकता है — 🌼 विष्णु सहस्त्रनाम का विशेष अनुष्ठानात्मक पाठ 🌼 🔱 सफला एकादशी क्यों है अत्यंत प्रभावशाली? सफला एकादशी को सभी एकादशियों में फल देने वाली कहा गया है।शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया जप-पाठ: ✔️ रुके कार्यों को गति देता है✔️ भाग्य में आए अवरोध हटाता है✔️ नकारात्मक ग्रह प्रभाव कम करता है✔️ भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाता है 📿 विष्णु सहस्त्रनाम पाठ का महत्व विष्णु सहस्त्रनाम में भगवान विष्णु के 1000 दिव्य नाम हैं।इन नामों का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से: ✨ जीवन की हर समस्या का समाधान होता है✨ मानसिक शांति और आत्मबल बढ़ता है✨ धन, पद-प्रतिष्ठा और सफलता प्राप्त होती है✨ पाप कर्मों का क्षय होता है✨ परिवार में सुख-समृद्धि आती है 🌺 हमारे द्वारा कराया जाने वाला विशेष पाठ इस सफला एकादशी Saphala Ekadashi पर हम अनुभवी वैदिक ब्राह्मणों द्वारा विधि-विधान से करवा रहे हैं: 🔸 संकल्प सहित Saphala Ekadashi विष्णु सहस्त्रनाम पाठ🔸 शुद्ध वैदिक मंत्रोच्चारण🔸 आपकी समस्या-विशेष के अनुसार संकल्प🔸 पाठ के बाद विशेष विष्णु आरती🔸 पाठ पूर्ण होने पर फोटो/वीडियो प्रमाण 🙏 यह पाठ विशेष रूप से लाभकारी है यदि— ✔️ नौकरी या बिज़नेस में बार-बार नुकसान हो रहा हो✔️ विवाह में देरी या बाधा आ रही हो✔️ कोर्ट केस या सरकारी काम अटके हों✔️ घर में क्लेश और मानसिक तनाव हो✔️ बार-बार दुर्भाग्य का सामना करना पड़ रहा हो 📅 पाठ की तिथि: सफला एकादशी (सीमित संकल्प स्वीकार किए जाएंगे) 👉 सीट सीमित हैं, क्योंकि पाठ पूर्ण विधि से व्यक्तिगत संकल्प के साथ कराया जाता है। 📞 अभी बुकिंग करवाएं CONT. 9129388891 अगर आप भी चाहते हैं किभगवान विष्णु आपकी बिगड़ी किस्मत को संवार दें,तो इस सफला एकादशी Saphala Ekadashi पर विष्णु सहस्त्रनाम पाठ अवश्य करवाएं। 📲 आज ही संपर्क करें / मैसेज करें📿 आपका संकल्प – हमारी जिम्मेदारी भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए इस तरीके से करें पूजा-अर्चना, उत्तम फल की होगी प्राप्ति..

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Skanda Sashti 2025

Skanda Sashti 2025 Date And Time: स्कंद षष्ठी व्रत भगवान कार्तिकेय की विशेष कृपा पाने का तरीका

 Skanda Sashti 2025 Mein Kab Hai: हर महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को स्कंद षष्ठी के रूप में मनाया जाता है। वहीं, अब कुछ ही दिनों में नए साल की शुरुआत होने जा रही है, तो ऐसे में चलिए जानते हैं कि वर्ष 2025 में स्कंद षष्ठी का पर्व कब-कब (Skanda Sashti 2025) मनाया जाएगा।   Skanda Sashti 2025 Subh Muhurat: स्कंद षष्ठी शुभ मुहूर्त 25 दिसंबर 2025, गुरुवार — शुक्ल पक्ष षष्ठी स्कंद षष्ठी व्रतषष्ठी तिथि आरंभ: 25 दिसंबर दोपहर ~01:42 बजेषष्ठी तिथि समाप्त: 26 दिसंबर दोपहर ~01:43 बजे (लगभग)यह वही तिथि है जब स्कंद षष्ठी का व्रत और पूजा विधि किया जाता है। स्कंद षष्ठी पूजा विधि (Skanda Sashti Puja Vidhi) स्कंद षष्ठी का धार्मिक महत्व (Skanda Sashti Significance) स्कंद षष्ठी व्रत Skanda Sashti 2025 रखने और पूजा करने से शक्ति-बल, साहस, विजय की प्राप्ति होती है, Skanda Sashti 2025 क्योंकि कार्तिकेय युद्ध-देवता हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है, जिन्हें अपने जीवन में संघर्ष, बाधा या भय का सामना करना पड़ रहा हो — इस व्रत से उन्हें दिव्य संरक्षण और सहायता मिल सकती है। पारिवारिक और आध्यात्मिक समृद्धि की कामना करने वाले भक्त इस दिन पूजा और व्रत से अपने घर-परिवार में शांति और खुशहाली लाने की ओर अग्रसर हो सकते हैं। स्कंद षष्ठी की पूजा के दौरान जरूर करें इन मंत्रों का जप ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कंदा प्रचोदयात: देव सेनापते स्कंद कार्तिकेय भवोद्भव। कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते॥ ॐ शारवाना-भावाया नम: ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा वल्लीईकल्याणा सुंदरा देवसेना मन: कांता कार्तिकेया नामोस्तुते।

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Vrat Katha

Saphala Ekadashi Vrat Katha: सफला एकादशी व्रत कथा….

Saphala Ekadashi Vrat Katha: सफला एकादशी व्रत कथा…. Saphala Ekadashi Vrat Katha: महाराज युधिष्ठिर ने पूछा- हे जनार्दन! पौष कृष्ण एकादशी का क्या नाम है? उस दिन कौन से देवता का पूजन किया जाता है और उसकी क्या विधि है? कृपया मुझे बताएँ। भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि धर्मराज, मैं तुम्हारे स्नेह के कारण तुमसे कहता हूँ कि एकादशी व्रत के अतिरिक्त मैं अधिक से अधिक दक्षिणा पाने वाले यज्ञ से भी प्रसन्न नहीं होता हूँ। अत: इसे अत्यंत भक्ति और श्रद्धा से युक्त होकर करें। हे राजन! द्वादशीयुक्त पौष कृष्ण एकादशी का माहात्म्य तुम एकाग्रचित्त होकर सुनो। इस एकादशी का नाम सफला एकादशी है। इस एकादशी के देवता श्रीनारायण हैं। विधिपूर्वक इस व्रत को करना चाहिए। जिस प्रकार नागों में शेषनाग, पक्षियों में गरुड़, सब ग्रहों में चंद्रमा, यज्ञों में अश्वमेध और देवताओं में भगवान विष्णु श्रेष्ठ हैं, Vrat Katha उसी तरह सब व्रतों में एकादशी का व्रत श्रेष्ठ है। जो मनुष्य सदैव एकादशी का व्रत करते हैं, वे मुझे परम प्रिय हैं। अब इस व्रत की विधि कहता हूँ। मेरी पूजा के लिए ऋतु के अनुकूल फल, नारियल, नींबू, नैवेद्य आदि सोलह वस्तुओं का संग्रह करें। इस सामग्री से मेरी पूजा करने के बाद रात्रि जागरण करें। Vrat Katha इस एकादशी के व्रत के समान यज्ञ, तीर्थ, दान, तप तथा और कोई दूसरा व्रत नहीं है। पाँच हजार वर्ष तप करने से जो फल मिलता है, उससे भी अधिक सफला एकादशी का व्रत करने से मिलता है। हे राजन! अब आप इस एकादशी की कथा सुनिए। चम्पावती नगरी में एक महिष्मान नाम का राजा राज्य करता था। उसके चार पुत्र थे। Vrat Katha उन सबमें लुम्पक नामवाला बड़ा राजपुत्र महापापी था। वह पापी सदा परस्त्री और वेश्यागमन तथा दूसरे बुरे कामों में अपने पिता का धन नष्ट किया करता था। Vrat Katha सदैव ही देवता, बाह्मण, वैष्णवों की निंदा किया करता था। जब राजा को अपने बड़े पुत्र के ऐसे कुकर्मों का पता चला तो उन्होंने उसे अपने राज्य से निकाल दिया। तब वह विचारने लगा कि कहाँ जाऊँ? क्या करूँ? अंत में उसने चोरी करने का निश्चय किया। दिन में वह वन में रहता और रात्रि को अपने पिता की नगरी में चोरी करता तथा प्रजा को तंग करने और उन्हें मारने का कुकर्म करता। कुछ समय पश्चात सारी नगरी भयभीत हो गई। वह वन में रहकर पशु आदि को मारकर खाने लगा। नागरिक और राज्य के कर्मचारी उसे पकड़ लेते किंतु राजा के भय से छोड़ देते। वन के एक अतिप्राचीन विशाल पीपल का वृक्ष था। लोग उसकी भगवान के समान पूजा करते थे। उसी वृक्ष के नीचे वह महापापी लुम्पक रहा करता था। Vrat Katha इस वन को लोग देवताओं की क्रीड़ास्थली मानते थे। Vrat Katha कुछ समय पश्चात पौष कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन वह वस्त्रहीन होने के कारण शीत के चलते सारी रात्रि सो नहीं सका। उसके हाथ-पैर अकड़ गए। Saphala Ekadashi 2025 Vrat Niyam: सफला एकादशी पर क्या करें और क्या न करें, ताकि श्रीहरि की कृपा बनी रहे ? सूर्योदय होते-होते वह मूर्छित हो गया। दूसरे दिन एकादशी को मध्याह्न के समय सूर्य की गर्मी पाकर उसकी मूर्छा दूर हुई। गिरता-पड़ता वह भोजन की तलाश में निकला। पशुओं को मारने में वह समर्थ नहीं था अत: पेड़ों के नीचे गिर हुए फल उठाकर वापस उसी पीपल वृक्ष के नीचे आ गया। उस समय तक भगवान सूर्य अस्त हो चुके थे। वृक्ष के नीचे फल रखकर कहने लगा- हे भगवन! अब आपके ही अर्पण है ये फल। आप ही तृप्त हो जाइए। उस रात्रि को दु:ख के कारण रात्रि को भी नींद नहीं आई। उसके इस उपवास और जागरण से भगवान अत्यंत प्रसन्न हो गए और उसके सारे पाप नष्ट हो गए। दूसरे दिन प्रात: एक ‍अतिसुंदर घोड़ा अनेक सुंदर वस्तुअओं से सजा हुआ उसके सामने आकर खड़ा हो गया। उसी समय आकाशवाणी हुई कि हे राजपुत्र! श्रीनारायण की कृपा से तेरे पाप नष्ट हो गए। Vrat Katha अब तू अपने पिता के पास जाकर राज्य प्राप्त कर। ऐसी वाणी सुनकर वह अत्यंत प्रसन्न हुआ और दिव्य वस्त्र धारण करके ‘भगवान आपकी जय हो’ कहकर अपने पिता के पास गया। उसके पिता ने प्रसन्न होकर उसे समस्त राज्य का भार सौंप दिया और वन का रास्ता लिया। अब लुम्पक शास्त्रानुसार राज्य करने लगा। उसके स्त्री, पुत्र आदि सारा कुटुम्ब भगवान नारायण का परम भक्त हो गया। Vrat Katha वृद्ध होने पर वह भी अपने पुत्र को राज्य का भार सौंपकर वन में तपस्या करने चला गया और अंत समय में वैकुंठ को प्राप्त हुआ। अत: जो मनुष्य इस परम पवित्र सफला एकादशी का व्रत करता है उसे अंत में मुक्ति मिलती है। जो नहीं करते वे पूँछ और सींगों से रहित पशुओं के समान हैं। इस सफला एकादशी के माहात्म्य को पढ़ने से अथवा श्रवण करने से मनुष्य को अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।

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Hanuman Jayanti

Tamil Hanuman Jayanti 2025 Date And Time:कन्नड़ और तमिल हनुमान जयंती कब है,जानें….

Kannada Hanuman Jayanti 2025 Date And Puja Vidhi: दक्षिण भारत  में हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाएगा। वहीं तमिलनाडु में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को मनाई जाएगी। हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान हनुमान की बहुत प्रासंगिकता है और हनुमान जयंती पूरे देश में बहुत धूमधाम और भव्यता के साथ मनाई जाती है। भक्तों का मानना ​​है कि भक्ति और समर्पण के साथ देवता की पूजा करने से उनके दुख और दर्द दूर हो जाते हैं और उनके स्थान पर उत्साह, साहस और बहादुरी आ जाती है। दक्षिण भारत में, मुख्य रूप से तमिलनाडु में हनुमान जयंती को हनुमत जयंती के रूप में मनाया जाता है। Kannada Hanuman Jayanti 2025 Date And Puja Vidhi:  इसके साथ ही मार्गशीर्ष माह के शुक्ल की त्रयोदशी तिथि है। इसके चलते आज कर्नाटक में हनुमान जयंती मनाई जाएगी। वहीं, तमिल में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को पड़ेगी। Hanuman Jayanti इस कारण आज के दिन हनुमान जी का पूजन बेहद ही फलदायक रहेगा। वहीं, मार्गशीर्ष माह की अमावस्या पर तमिल में हनुमान जयंती मनाई जाएगी। क्या है तमिल हनुमान जयंती की डेट:What is the date of Tamil Hanuman Jayanti? उत्तर भारत में चैत्र माह की पूर्णिमा को भगवान हनुमान का जन्मदिन मनाया जाता है। वहीं, दक्षिण भारत में मार्गशीर्ष माह की त्रयोदशी और अमावस्या को मनाया जाता है। अब मार्गशीर्ष माह के शु्क्ल पक्ष की त्रयोदशी तो 3 दिसंबर को है, लेकिन मार्गशीर्ष माह की अमावस्या 19 दिसंबर को होगी। दरअसल दक्षिण भारत में पहले शुक्ल पक्ष आता है और फिर कृष्ण पक्ष आता है। ऐसे में उत्तर भारत में पौष माह के कृष्ण पक्ष की जब अमावस्या होगी, तब वहां मार्गशीर्ष माह की अमावस्या तिथि होगी। दक्षिण भारत का कैलेंडर उत्तर भारत के कैलेंडर से 15 दिन पीछे रहता है। तमिल कैलेंडर में मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को हनुमान जयंती मनाते हैं और यह 2025 में 19 दिसंबर को पड़ रही है। इस दिन विशेष अभिषेक, वेनाई काप्पू और वडई माला चढ़ाई जाती है। अलग-अलग तिथियों पर मनाई जाती है हनुमान जयंती:Hanuman Jayanti is celebrated on different dates हनुमान जयंती साल में चार बार विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तिथियों पर मनाई जाती है। उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा पर, आंध्र-तेलंगाना में ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष दशमी पर, लेकिन दक्षिण में ये मार्गशीर्ष में मनाई जाती है। हनुमान जयंती का क्या है महत्व:What is the significance of Hanuman Jayanti? ऐसा माना जाता है कि भगवान हनुमान का जन्म मार्गशीर्ष अमावस्या के दौरान हुआ था जब मूलम नक्षत्र प्रबल था। अधिकांश वर्ष मार्गशीर्ष अमावस्या मूलम नक्षत्र के साथ मेल खाती है। जिन वर्षों में मार्गशीर्ष अमावस्या मूलम नक्षत्र के साथ मेल नहीं खाती है, तो उत्सव की तारीख निर्धारित करने के लिए अमावस्या के दिन को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान हनुमान का जन्म सूर्योदय के दौरान हुआ था – इसलिए, मंदिरों में आध्यात्मिक प्रवचन शुरू होते हैं जो भोर में शुरू होते हैं और सूर्योदय के बाद समाप्त होते हैं। हनुमान जी रामभक्त और संकटमोचन हैं। प्रभु का पूजन भय, नकारात्मक ऊर्जा और असफलता से मुक्ति दिलाता है।। कन्नड़ परंपरा में यह व्रत ‘हनुमान व्रतम’ कहलाता है, जो साहस, सफलता और बाधा निवारण के लिए रखा जाता है। आज के दिन हनुमान जी की उपासना से जीवन में स्थिरता आती है और हर काम आसान हो जाता है। कन्नड़ हनुमान जयंती पूजा विधि:Kannada Hanuman Jayanti Puja Method सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। घर के बाहर रंगोली बनाएं। शुभ मुहूर्त में हनुमान जी की मूर्ति या फोटो स्थापित करें। सिंदूर, रोली, अक्षत, चंदन और फूल चढ़ाएं। माला अवश्य चढ़ाएं। धूप जलाकर हनुमान चालीसा और बजरंग बान का पाठ करें। हनुमान मंत्रों का जप करें। भोग में लड्डू, बेसन के लड्डू या फल चढ़ाएं। आरती करें और भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें। व्रत शाम तक रखें या फलाहार करें। इसके साथ ही हनुमान जी के ॐ हं हनुमते नमः और ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा मंत्रों का जाप करें।

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Calendar 2026

Hindu Calendar 2026: हिंदू कैलेंडर 2026: वर्ष भर के त्योहारों और व्रतों की लिस्ट…..

Hindu Calendar 2026: नया साल 2026 शुरू होने वाला है. Calendar 2026 ऐसे में लोगों को व्रत और त्योहारों की तारीखें जाननी होंगी. यह है Calendar 2026 पंचांग के अनुसार जनवरी 2026 से दिसंबर 2026 तक के व्रत और त्योहारों की लिस्ट. साल 2026 गुरुवार, 1 जनवरी 2026 से शुरू हो रहा है. हिंदू कैलेंडर Calendar 2026 के अनुसार इस पूरे वर्ष में कई पवित्र पर्व-व्रत और त्योहार तो आयोजित होंगे ही, मगर इस वर्ष की खास बात यह है कि हिंदू पंचांग में इस साल ज्येष्ठ माह में मलमास (अधिक मास) लग रहा है. Calendar 2026 जिस वजह से कुछ त्योहारों की तिथियों में बदलाव देखने को मिल सकता है. Calendar 2026 यह मलमास 17 मई से शुरू होगा और 15 जून तक चलेगा.  Calendar 2026 साल का पहला बड़ा त्योहार मकर संक्रांति होगा. Calendar 2026 जहां से सभी त्योहारों की शुरुआत हो जाएगी. ऐसे में आइए जानते है Calendar 2026 में नवरात्रि, होली, करवा चौथ, दिवाली, रक्षा बंधन, छठ पूजा, बसंत पंचमी, महा शिवरात्रि जैसे बड़े व्रत और त्योहारों की तारीखें क्या हैं.  Hindu Calendar 2026: हिंदू कैलेंडर 2026…… जनवरी 2026 त्यौहार:(January 2026 Festival) 1 गुरुवार प्रदोष व्रत (शुक्ल)3 शनिवार पौष पूर्णिमा व्रत6 मंगलवार संकष्टी चतुर्थी14 बुधवार षटतिला एकादशी, पोंगल, उत्तरायण, मकर संक्रांति16 शुक्रवार प्रदोष व्रत (कृष्ण), मासिक शिवरात्रि18 रविवार माघ अमावस्या23 शुक्रवार बसंत पंचमी, सरस्वती पूजा29 गुरुवार जया एकादशी30 शुक्रवार प्रदोष व्रत (शुक्ल) फरवरी 2026 त्यौहार:(february 2026 festival) 1 रविवार माघ पूर्णिमा व्रत5 गुरुवार संकष्टी चतुर्थी13 शुक्रवार विजया एकादशी, कुम्भ संक्रांति14 शनिवार प्रदोष व्रत (कृष्ण)15 रविवार महाशिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि17 मंगलवार फाल्गुन अमावस्या27 शुक्रवार आमलकी एकादशी28 शनिवार प्रदोष व्रत (शुक्ल) मार्च 2026 त्यौहार:(march 2026 festival) 3 मंगलवार होलिका दहन, फाल्गुन पूर्णिमा व्रत4 बुधवार होली6 शुक्रवार संकष्टी चतुर्थी15 रविवार पापमोचिनी एकादशी, मीन संक्रांति16 सोमवार प्रदोष व्रत (कृष्ण)17 मंगलवार मासिक शिवरात्रि19 गुरुवार चैत्र नवरात्रि, उगाडी, घटस्थापना, गुड़ी पड़वा20 शुक्रवार चेटी चंड26 गुरुवार राम नवमी27 शुक्रवार चैत्र नवरात्रि पारणा29 रविवार कामदा एकादशी30 सोमवार प्रदोष व्रत (शुक्ल) अप्रैल 2026 त्यौहार:(april 2026 festival) 2 गुरुवार हनुमान जयंती, चैत्र पूर्णिमा व्रत5 रविवार संकष्टी चतुर्थी13 सोमवार वरुथिनी एकादशी14 मंगलवार मेष संक्रांति15 बुधवार मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत (कृष्ण)17 शुक्रवार वैशाख अमावस्या19 रविवार अक्षय तृतीया27 सोमवार मोहिनी एकादशी28 मंगलवार प्रदोष व्रत (शुक्ल) मई 2026 त्यौहार:(may 2026 festival) 1 शुक्रवार वैशाख पूर्णिमा व्रत5 मंगलवार संकष्टी चतुर्थी13 बुधवार अपरा एकादशी14 गुरुवार प्रदोष व्रत (कृष्ण)15 शुक्रवार मासिक शिवरात्रि, वृष संक्रांति16 शनिवार ज्येष्ठ अमावस्या27 बुधवार पद्मिनी एकादशी28 गुरुवार प्रदोष व्रत (शुक्ल)31 रविवार पूर्णिमा व्रत जून 2026 त्यौहार:(june 2026 festivals) 3 बुधवार संकष्टी चतुर्थी11 गुरुवार परम एकादशी12 शुक्रवार प्रदोष व्रत (कृष्ण)13 शनिवार मासिक शिवरात्रि15 सोमवार अमावस्या, मिथुन संक्रांति25 गुरुवार निर्जला एकादशी27 शनिवार प्रदोष व्रत (शुक्ल)29 सोमवार ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत जुलाई 2026 त्यौहार:(july 2026 festival) 3 शुक्रवार संकष्टी चतुर्थी10 शुक्रवार योगिनी एकादशी12 रविवार मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत (कृष्ण)14 मंगलवार आषाढ़ अमावस्या16 गुरुवार जगन्नाथ रथ यात्रा, कर्क संक्रांति25 शनिवार देवशयनी एकादशी, अषाढ़ी एकादशी26 रविवार प्रदोष व्रत (शुक्ल)29 बुधवार गुरु-पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा व्रत अगस्त 2026 त्यौहार(August 2026 Festival) 2 रविवार संकष्टी चतुर्थी9 रविवार कामिका एकादशी10 सोमवार प्रदोष व्रत (कृष्ण)11 मंगलवार मासिक शिवरात्रि12 बुधवार श्रावण अमावस्या15 शनिवार हरियाली तीज17 सोमवार नाग पंचमी, सिंह संक्रांति23 रविवार श्रावण पुत्रदा एकादशी25 मंगलवार प्रदोष व्रत (शुक्ल)26 बुधवार ओणम/थिरुवोणम28 शुक्रवार रक्षा बंधन, श्रावण पूर्णिमा व्रत31 सोमवार संकष्टी चतुर्थी, कजरी तीज सितंबर 2026 त्यौहार(September 2026 Festival) 4 शुक्रवार जन्माष्टमी7 सोमवार अजा एकादशी8 मंगलवार प्रदोष व्रत (कृष्ण)9 बुधवार मासिक शिवरात्रि11 शुक्रवार भाद्रपद अमावस्या14 सोमवार गणेश चतुर्थी, हरतालिका तीज17 गुरुवार कन्या संक्रांति22 मंगलवार परिवर्तिनी एकादशी24 गुरुवार प्रदोष व्रत (शुक्ल)25 शुक्रवार अनंत चतुर्दशी26 शनिवार भाद्रपद पूर्णिमा व्रत29 मंगलवार संकष्टी चतुर्थी अक्टूबर 2026 त्यौहार:(October 2026 Festival) 6 मंगलवार इन्दिरा एकादशी8 गुरुवार मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत (कृष्ण)10 शनिवार अश्विन अमावस्या11 रविवार शरद नवरात्रि, घटस्थापना16 शुक्रवार कल्परम्भ17 शनिवार नवपत्रिका पूजा, तुला संक्रांति19 सोमवार दुर्गा महा नवमी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा20 मंगलवार दशहरा, शरद नवरात्रि पारणा21 बुधवार दुर्गा विसर्जन22 गुरुवार पापांकुशा एकादशी23 शुक्रवार प्रदोष व्रत (शुक्ल)26 सोमवार अश्विन पूर्णिमा व्रत29 गुरुवार संकष्टी चतुर्थी, करवा चौथ नवंबर 2026 त्यौहार:(November 2026 Festival) 5 गुरुवार रमा एकादशी6 शुक्रवार धनतेरस, प्रदोष व्रत (कृष्ण)7 शनिवार मासिक शिवरात्रि8 रविवार दिवाली, नरक चतुर्दशी9 सोमवार कार्तिक अमावस्या10 मंगलवार गोवर्धन पूजा11 बुधवार भाई दूज15 रविवार छठ पूजा16 सोमवार वृश्चिक संक्रांति20 शुक्रवार देवुत्थान एकादशी22 रविवार प्रदोष व्रत (शुक्ल)24 मंगलवार कार्तिक पूर्णिमा व्रत27 शुक्रवार संकष्टी चतुर्थी दिसंबर 2026 त्यौहार:(december 2026 festivals) 4 शुक्रवार उत्पन्ना एकादशी6 रविवार प्रदोष व्रत (कृष्ण)7 सोमवार मासिक शिवरात्रि8 मंगलवार मार्गशीर्ष अमावस्या16 बुधवार धनु संक्रांति20 रविवार मोक्षदा एकादशी21 सोमवार प्रदोष व्रत (शुक्ल)23 बुधवार मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत26 शनिवार संकष्टी चतुर्थी

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Dream Interpretation Money: सपने में सिक्के देखना अच्छा या बुरा, जानें कब शुरू होंगे अच्छे दिन या होगा बैड लक

Dream Interpretation Money:क्या आपने कभी सोचा है कि क्या हम अपने भविष्य को देख सकते हैं? देखा जाए तो रात में देखे जाने वाले हमारे सपने इस संबंध में हमारी मदद कर सकते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि हमारे द्वारा देखे जाने वाले कुछ सपने हमारे भविष्य से जुड़े हुए होते हैं। ये सपने हमें पहले से ही सूचना दे देते हैं कि आने वाले समय में हमारे साथ क्या होने वाला है; ये केवल एक संकेत मात्र होते हैं। हर व्यक्ति अलग-अलग सपने देखता है—किसी को अच्छे सपने दिखते हैं, तो किसी को बुरे। Money जब हम रुपया-पैसा या सिक्के देखते हैं, तो हम अक्सर जानना चाहते हैं कि ऐसे सपने देखना शुभ है या अशुभ। Money दरअसल, सिक्कों से जुड़े सपने, जो कई अलग-अलग परिस्तिथियों में देखे जाते हैं, उनका अर्थ भी परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग होता है, चाहे आपने सपने में सिक्के लिए हों, दिए हों या सिर्फ देखे हों। Dream Interpretation Money: सपने में सिक्के देखना अच्छा या बुरा, जानें कब शुरू होंगे…… सपने में विभिन्न प्रकार के सिक्के देखने का अर्थ:Meaning of seeing different types of coins in dreams 1. सपने में सोने के सिक्के देखना (Seeing gold coins in a dream) यदि आपको सपने में सोने के सिक्के दिखाई देते हैं, तो निराश न हों। Money यह सपना बहुत ही शुभ होता है। सफलता और ऊर्जा: सपने में सोने के सिक्के दिखने का सीधा संबंध सूर्य से है। सूर्य सबसे अधिक ऊर्जावान है और यह हमारे अंदर के उत्साह, जोश और उमंग की तरफ इशारा करता है। शुभ कार्य का संकेत: अगर आप किसी ऐसी परिस्थिति में हैं, जहां आप यह निर्णय नहीं ले पा रहे हैं Money कि आपको कोई कार्य करना चाहिए या नहीं, तो यह सपना आपको यही बता रहा है कि आप जो कार्य करने जा रहे हैं, वह आपके लिए बहुत ही शुभ और फलदायी होगा। व्यावसायिक लाभ: यह सपना आप के कारोबार में वृद्धि की तरफ इशारा करता है। इसका मतलब है कि आपको कारोबार में अप्रत्याशित लाभ होगा। यश और शक्ति: यह सपना आपके यश और शक्ति में वृद्धि की तरफ भी इशारा करता है। Money यदि आप कोई सामाजिक कार्य या चुनाव आदि लड़ने की सोच रहे हैं, तो इसमें भी आपको सफलता मिलेगी और आपकी समाज में इज्ज़त बढ़ेगी। 2. सपने में चांदी के सिक्के देखना (Seeing silver coins in a dream) यह सपना हर किसी को नहीं दिखता; इसे बड़ा ही शुभ सपना माना गया है और यह सपना किस्मत वालों को ही देखने को मिलता है। सहजबोध और निर्णय: चांदी के सिक्के चन्द्रमा को दर्शाते हैं। ऐसा सपना हमारे सहजबोध (इंट्यूशन) की तरफ इशारा करता है। यदि आप किसी ऐसी अवस्था में हैं, जहां आप यह निश्चय नहीं कर पा रहे हैं कि क्या करना सही होगा, तो आपको Money अपने सहजबोध की सुननी चाहिए। सपने में चांदी के सिक्के आपकी उलझन का उत्तर दर्शाते हैं। निवेश और धन लाभ: सपने में चांदी का सिक्का देखना आपके निवेश से जुड़ा हुआ है। यदि आपने किसी संपत्ति, मार्केट या वस्तु में निवेश किया हुआ है, तो आपको एक बड़ा लाभ होने वाला है, जिससे आपकी सारी उधारी या समस्या का समाधान हो जायेगा। छात्रों के लिए: यदि आप स्टूडेंट हैं, तो आपने जो मेहनत अपने एग्जाम को लेकर की है, उसका भी आपको अच्छा लाभ मिलने वाला है। 3. सपने में तांबे के सिक्के देखना (Seeing copper coins in a dream) तांबे के सिक्के ग्रह मंगल से संबंध रखते हैं। स्वास्थ्य सुधार: सपने में तांबे के सिक्के दिखने का मतलब है उभारना या इलाज (हीलिंग)। Money यदि आप सपने में खुद को किसी से तांबे के सिक्के लेते हुए देखते हैं, तो ये सपना आपके स्वास्थ्य की तरफ इशारा करता है। यह बताता है कि आप जिस समस्या या बीमारी से जूझ रहे थे, अब आप उससे बाहर आ जाएंगे। साथ ही, आने वाले समय में आपका स्वास्थ्य बेहतर होगा। 4. सपने में मुद्रा (करंसी) के सिक्के देखना:Seeing currency coins in dreams यदि आप सपने में अपने देश की करंसी के सिक्के देखते हैं, तो यह आपके आने वाले खर्चे या आने वाले मुनाफे की ओर संकेत करता है। लाभ का संकेत: यदि आपको सपने में कोई ये सिक्के दे, तो इसका मतलब है कि आपको आने वाले समय में कुछ न कुछ मुनाफा अवश्य होगा। हानि से बचाव: यदि सपने में आप ये सिक्के किसी को देते हुए दिखते हैं, Money तो इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में आपको जो बड़ी आर्थिक हानि होने वाली थी, वो थोड़े से नुक्सान से खत्म हो जाएगी (यानि आपका बड़ा घटा छोटे घाटे में टल जाएगा)। 5. सपने में पुराने सिक्के देखना (Sapne mein purane sikke dekhna) यदि आप सपने में पुराने सिक्के देखते हैं, तो यह एक बहुत ही सकारात्मक सपना है। आर्थिक लाभ: इसका मतलब है कि आपको आर्थिक लाभ होने वाला है। आपको किसी तरह का कोई खजाना या धन भी मिल सकता है। रुका हुआ धन: यदि आपने किसी दोस्त या व्यक्ति को पैसे उधार दिए हुए हैं, तो वह आपको ब्याज समेत मिलने वाले हैं। यदि कोई पैसों से संबंधित काम काफी समय से अटका हुआ है, तो वह भी अब पूरा होने वाला है। 6. सपने में पीतल के सिक्के देखना (Sapne mein pital ke sikke dekhna) सपने Money में पीतल के सिक्के देखना भी एक सकारात्मक सपना है, जिसका संबंध स्वास्थ्य से है। बीमारी से राहत: यदि आप काफी समय से किसी बीमारी या समस्या से जूझ रहे हैं, तो यह सपना एक शुभ संकेत है कि आपको हर तरह की बीमारी या परेशानी से राहत मिलने वाली है और स्वास्थ्य में सुधार होने वाला है। सर्वश्रेष्ठ मौका: यदि आप सपने में पीतल के सिक्के को उछालते हुए देखते हैं या कहीं से उठाते हुए देखते हैं, तो इसका अर्थ है कि समय आपके ही पक्ष में रहने वाला है, अर्थात किसी भी काम को करने का यह सर्व श्रेष्ठ मौका है।

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Christmas 2025

Christmas 2025 Date And Time: क्रिसमस पर क्रिसमस-ट्री क्यों सजाया जाता है? जानिए महत्व, इतिहास और प्रतीकात्मक अर्थ

Christmas 2025: क्रिसमस 2025: हर साल 25 दिसंबर को दुनिया भर में ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है। इस खास पर्व पर क्रिसमस-ट्री सजाने की परंपरा इसे और भी खास बनाती है, जो जीवन में आशा, शांति और आनंद का संदेश देती है। ईसाई धर्म में क्रिसमस Christmas 2025 का त्योहार विशेष महत्व रखता है, जिसे बड़ा दिन भी कहा जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह प्रेम, शांति और एकता का प्रतीक भी है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ईसा मसीह (प्रभु यीशु मसीह) का जन्म हुआ था, जिन्होंने मानवता को पापों से मुक्ति दिलाने, प्रेम, दया और सहनशीलता का संदेश दिया था। इस अवसर पर चर्च जाकर प्रार्थना की जाती है, दोस्तों और परिवार को तोहफे दिए जाते हैं, और घरों को रंग-बिरंगी लाइट्स से सजाया जाता है। Christmas 2025 Date And Time: क्रिसमस पर क्रिसमस-ट्री क्यों सजाया जाता है…….. लेकिन यह क्रिसमस-ट्री सजाने की परंपरा कहाँ से आई और इसका वास्तविक महत्व क्या है? आइए जानते हैं। क्रिसमस-ट्री सजाने की परंपरा का इतिहास:History of the tradition of decorating the Christmas tree क्रिसमस पर क्रिसमस-ट्री लगाने और सजाने की परंपरा का इतिहास 16वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, और यह जर्मनी में शुरू हुई थी। इस परंपरा को लेकर दो मुख्य कहानियाँ प्रचलित हैं: 1. मार्टिन लूथर और सदाबहार वृक्ष (16वीं सदी):Martin Luther and the evergreen tree (16th century) मान्यताओं के अनुसार, 16वीं सदी में ईसाई धर्म के सुधारक मार्टिन लूथर ने ही सबसे पहले क्रिसमस-ट्री सजाने की शुरुआत की थी। एक बार मार्टिन लूथर 24 दिसंबर की शाम को एक बर्फीले जंगल (बर्फिला जंगल) से गुज़र रहे थे। जंगल में उन्हें एक सदाबहार का पेड़ दिखाई दिया, जिसकी डालियों पर चाँद की रोशनी पड़ रही थी। इस दृश्य से प्रभावित होकर, उन्होंने उस सदाबहार पेड़ को अपने घर में लगाया और उसे सजाया। इसके बाद, उन्होंने जीसस क्राइस्ट के जन्मदिन पर भी इस सदाबहार पेड़ को सजाया, और तभी से Christmas 2025 क्रिसमस के मौके पर घरों में क्रिसमस-ट्री लाने और उसे सजाने की परंपरा शुरू हो गई। 2. सेंट बोनिफेस और ओक ट्री (722 ईसवी):St. Boniface and the Oak Tree (722 AD) क्रिसमस-ट्री सजाने का एक अन्य रीति-रिवाज 722 ईसवी में जर्मनी से शुरू माना जाता है। एक बार जर्मनी के सेंट बोनिफेस को यह जानकारी मिली कि कुछ लोग एक विशाल ओक ट्री के नीचे बच्चों की बलि देने वाले हैं। बच्चों को बचाने के लिए सेंट बोनिफेस ने तुरंत उस ओक ट्री को काट दिया। ऐसा माना जाता है कि जिस जगह सेंट बोनिफेस ने पेड़ को काटा था, वहाँ एक सदाबहार पेड़ उग आया। लोग इस पेड़ को चमत्कारी कहने लगे। Christmas 2025 सेंट बोनिफेस ने लोगों से कहा कि यह देवीय पेड़ है और इसकी डालियाँ स्वर्ग की ओर संकेत करती हैं। तभी से, प्रभु ईसा मसीह के जन्म पर इस सदाबहार पेड़ को सजाया जाने लगा। क्रिसमस-ट्री का प्रतीकात्मक महत्व:Symbolic significance of Christmas tree क्रिसमस-ट्री Christmas 2025 केवल एक सजावट नहीं है, बल्कि यह कई गहरे प्रतीकात्मक अर्थों को दर्शाता है: 1. जीवन और आशा का प्रतीक: क्रिसमस-ट्री के लिए इस्तेमाल होने वाला सदाबहार पेड़ सर्दियों में भी हरा-भरा रहता है, जो जीवन, आशा (होप) और ईश्वर के अनंत प्रेम का प्रतीक माना जाता है। 2. प्रकाश और मार्गदर्शन: ट्री पर लगाई जाने वाली रोशनी (लाइट्स) ईश्वर के प्रकाश का प्रतीक होती है, Christmas 2025 जो हर कठिनाई में हमारा मार्गदर्शन करती है। इसके ऊपर लगने वाले तारे प्रकाश के प्रतीक हैं, जो जीवन से अंधेरे को दूर करते हैं और उत्साह तथा उमंग का संचार करते हैं। 3. खुशी और उत्सव: क्रिसमस-ट्री को रंगीन गेंदों, रिबन और घंटियों (बेल्स) से सजाया जाता है, Christmas 2025 जो खुशियों और उत्सव का प्रतीक होते हैं। 4. प्रेम और उदारता: ट्री के नीचे रखे जाने वाले उपहार (गिफ्ट्स/तोहफे) प्रेम, उदारता और आपसी स्नेह का प्रतीक होते हैं। यह परंपरा विशेष रूप से परिवार के सदस्यों और बच्चों के बीच खुशी लेकर आती है। क्रिसमस का संदेश:christmas message क्रिसमस ट्री Christmas 2025 सजाने का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है। यह केवल यीशु मसीह के जन्म का स्मरण नहीं कराता, बल्कि परिवार और मित्रों को एकजुटता और उत्सव का माध्यम भी प्रदान करता है। क्रिसमस का संदेश यह है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, हमें अपने भीतर प्रेम और दया के गुण बनाए रखने चाहिए। यह दिन जीवन में अच्छाई और करुणा को अपनाने की प्रेरणा देता है।

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Shakmbhari Navratri

Shakmbhari Navratri 2025 Date And Time: शाकंभरी नवरात्रि 2025: तिथि, महत्व और पूजा विधि – पोषण और स्वास्थ्य की देवी का नौ दिवसीय उत्सव

Shakmbhari Navratri 2025 Mein Kab Hai: शाकंभरी नवरात्रि, जिसे बाणदा एकादशी या पौष गुप्त नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है, देवी दुर्गा के शाकंभरी अवतार को समर्पित एक प्रतिष्ठित उत्सव है। यह त्यौहार पोषण और स्वास्थ्य का प्रतीक है। यह भारतीय संस्कृति में पृथ्वी की उदारता और दिव्य नारी के प्रति गहरी श्रद्धा को दर्शाता है। यह मुख्य रूप से राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में उत्साह के साथ मनाया जाता है। Shakmbhari Navratri 2025 Date And Time: शाकंभरी नवरात्रि 2025 की महत्वपूर्ण तिथियां…. यह त्योहार हिंदू चंद्र कैलेंडर के पौष महीने में मनाया जाता है। अधिकांश नवरात्रि जो शुक्ल प्रतिपदा को शुरू होती हैं, उनके विपरीत, शाकंभरी नवरात्रि पौष शुक्ल अष्टमी को शुरू होती है और पौष पूर्णिमा पर समाप्त होती है। Shakmbhari Navratri इस अवधि को पौष शुक्ल अष्टमी से पौष पूर्णिमा तक मनाया जाता है। जानकारी तिथि/अवधि आरंभ तिथि (पौष शुक्ल अष्टमी) रविवार, 28 दिसंबर 2025 समाप्ति तिथि (पौष पूर्णिमा) शनिवार, 03 जनवरी 2026 कुल अवधि 8 दिन (कभी-कभी 7 या 9 दिन भी हो सकती है) अन्य नाम बाणदा एकादशी, पौष गुप्त नवरात्रि, बंदा एकादशी आरंभ तिथि, पौष शुक्ल अष्टमी को बाणदा अष्टमी या बाणदष्टमी भी कहा जाता है। शाकंभरी नवरात्रि का समापन पौष पूर्णिमा को होता है, जिसे शाकंभरी पूर्णिमा या शाकंभरी जयंती के रूप में भी जाना जाता है। शाकंभरी नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? (पौराणिक कथा):Why is Shakmbhari Navratri celebrated? (mythology) यह उत्सव माता रानी (देवी दुर्गा) द्वारा मानवता पर कृपा बरसाने के कारण मनाया जाता है। Shakmbhari Navratri किंवदंती है कि जब पृथ्वी पर भीषण सूखा और अकाल पड़ा था, तब देवी दुर्गा ने पीड़ा को कम करने के लिए शाकंभरी के रूप में अवतार लिया था। देवी शाकंभरी को देवी भगवती का अवतार माना जाता है। उन्होंने जीविका और आराम प्रदान किया, जिससे उन्हें स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी देवी का दर्जा प्राप्त हुआ। ‘शाकम्भरी’ शब्द का अनुवाद ‘सब्जियों को धारण करने वाला’ होता है, Shakmbhari Navratri जो पोषण और जीविका प्रदाता का प्रतीक है। देवी शाकंभरी का दिव्य स्वरूप:Divine form of Goddess Shakambhari दुर्गा सप्तशती के मूर्ति रहस्य के अनुसार, माता शाकंभरी का रंग नीला बताया गया है। • माता की आंखें नीले कमल के समान हैं। • वह कमल के फूल पर विराजमान रहती हैं। • उनकी एक मुट्ठी में कमल का फूल है और दूसरी मुट्ठी में तीर बताए गए हैं। • उन्हें सब्जियों और फलों से सुसज्जित दर्शाया गया है, जो उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक है। शाकंभरी नवरात्रि पूजा विधि और अनुष्ठान:Shakambhari Navratri Puja Method and Rituals शाकंभरी नवरात्रि पर भक्त व्रत रखते हैं और देवी दुर्गा की विशेष पूजा करते हैं। यह त्योहार समुदाय की भावना को बढ़ावा देता है क्योंकि लोग प्रार्थना करने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए एक साथ आते हैं। पूजा के मुख्य चरण:Shakmbhari Navratri Main stages of puja 1. शुद्धिकरण: अनुष्ठान के अनुसार, पूजा स्थल को गंगाजल से साफ करें। 2. अर्पण: देवी को मिठाई, फल और फूल चढ़ाएं। भरपूर फसल के लिए उनका आशीर्वाद लेने हेतु फल, सब्जियां और अनाज का प्रसाद चढ़ाया जाता है। 3. जाप और पाठ: भक्त दुर्गा स्तोत्र का पाठ करते हैं। दुर्गा के मंत्र का 108 बार पाठ करना उत्सव से जुड़ा एक प्रमुख रिवाज है। 4. उपवास: भक्त इन दिनों के दौरान व्रत रखते हैं। कुछ भक्त सख्त उपवास रखते हैं और केवल फल, दूध और मेवे जैसे विशिष्ट खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। पूजा का महत्व और आशीर्वाद:Shakmbhari Navratri puja ka mhetwa or shirvad ऐसा माना जाता है कि शाकंभरी नवरात्रि पर देवी दुर्गा से स्वास्थ्य और समस्याओं के समाधान के रूप में आशीर्वाद मिलता है। भक्तों को असीम खुशी और एक पूर्ण जीवन का अनुभव होता है। देवी शाकम्भरी का आशीर्वाद न केवल कृषि समृद्धि के लिए बल्कि समग्र कल्याण और जीविका के लिए भी मांगा जाता है। स्वस्थ और समृद्ध जीवन का आशीर्वाद पाने के लिए यह उत्साह के साथ मनाया जाता है। सांस्कृतिक विरासत और श्रद्धा:Shakmbhari Navratri Cultural heritage and reverence शाकंभरी नवरात्रि कृषि परंपराओं और आध्यात्मिकता के समामेलन को प्रदर्शित करती है। यह भारतीय संस्कृति में पृथ्वी की उदारता और दिव्य नारी के प्रति गहरी श्रद्धा को दर्शाता है। निष्कर्ष शाकंभरी नवरात्रि Shakmbhari Navratri , हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर मनाई जाती है, कृषि, आध्यात्मिकता और परमात्मा के बीच संबंध पर जोर देने में गहरा महत्व रखती है। यह प्रकृति के उपहारों के महत्व और देवी के पोषण संबंधी पहलू की याद दिलाता है। Shakmbhari Navratri यह त्यौहार कृतज्ञता, उत्सव और जीवन की चक्रीय लय का सार समाहित करता है। जैसे ही भक्त देवी शाकंभरी का सम्मान करने के लिए एक साथ आते हैं, शाकंभरी नवरात्रि कृतज्ञता के सार के साथ गूंजती है, जो कृषि समृद्धि और आध्यात्मिक पूर्ति दोनों की फसल का वादा करती है। शाकंभरी नवरात्रि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों जैसे क्षेत्रों में लोकप्रिय है। कर्नाटक में, शाकंभरी देवी को बाणशंकरी देवी के रूप में पूजा जाता है, और बाणदा अष्टमी का पालन नवरात्रि के दौरान महत्वपूर्ण महत्व रखता है।

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kharmas 2025

kharmas 2025 Date:16 दिसंबर से शुरू हो रहा है खरमास, जानें कब तक रहेगी रोक और कौन से काम हैं वर्जित

kharmas 2025 Mein Kab Hai: सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में खरमास (Kharmas) या मलमास की अवधि का विशेष महत्व होता है। यह वह समय होता है जब सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों पर एक महीने के लिए रोक लग जाती है। दिसंबर का महीना न केवल वर्ष समाप्ति के लिए जाना जाता है, बल्कि खरमास के आगमन के लिए भी जाना जाता है। खरमास तब लगता है, जब ग्रहों के राजा सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं। kharmas 2025 यह समय हमें जीवन की भागदौड़ से विराम देकर आत्मिक शुद्धि, साधना और ईश्वरीय भक्ति की ओर प्रेरित करता है। आइए जानते हैं कि साल 2025 में खरमास kharmas 2025 कब से शुरू हो रहा है, इसका ज्योतिषीय कारण क्या है, और इस दौरान हमें कौन से कार्य नहीं करने चाहिए। खरमास 2025: प्रारंभ तिथि और समापन मुहूर्त:Kharmas 2025: Start date and completion time साल 2025 में खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर से होगी और यह अवधि पूरे एक महीने तक चलेगी। विवरण तिथि और समय खरमास प्रारंभ (सूर्य का धनु राशि में प्रवेश) 16 दिसंबर को सुबह 4 बजकर 27 मिनट पर खरमास समापन (सूर्य का मकर राशि में प्रवेश) 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर (मकर संक्रांति) खरमास 2025 कब लगेगा 16 दिसंबर 2025 से जैसे ही सूर्य देव 14 जनवरी 2026 को मकर राशि में अपना स्थान लेंगे, खरमास समाप्त हो जाएगा और पुनः सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो सकेगी। खरमास क्यों लगता है? (The Reason Behind Kharmas) खरमास का समय ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है और यह वर्ष में दो बार आता है—जब सूर्य धनु राशि (Dhanu Rashi) या मीन राशि (Meen Rashi) में स्थित होता है। सूर्य का तेज कम होना: धनु राशि के स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति (Guru Brihaspati) हैं। जब सूर्य देव गुरु के घर (धनु राशि) में प्रवेश करते हैं, तो उनका तेज या शक्ति (energy) कम हो जाती है। शुभ कार्यों पर रोक: चूंकि सूर्य का तेज कम हो जाता है, इसलिए शुभ ग्रह स्थितियों का प्रभाव भी कमजोर माना जाता है। इस कारण, ज्योतिष में माना जाता है कि इस समय में मांगलिक कार्यों को करने से व्यक्ति को वांछित फल नहीं मिलता। इसलिए, इस अवधि के दौरान शुभ-मांगलिक कार्यों पर रोक लगा दी जाती है। खरमास में कौन से काम न करें (Manglik Karya Nishedh) खरमास kharmas 2025 के दिनों में कई मांगलिक और सामाजिक समारोहों को करने की सख्त मनाही होती है। 1. विवाह और रिश्ते: शादी-विवाह जैसे कार्यक्रम इस दौरान नहीं करने चाहिए। इसके अलावा, आप सगाई, रिश्ता पक्का करने (रिश्ता पक्का जैसे काम), और मुंडन जैसे कार्य भी न करें। 2. नए निर्माण/खरीददारी: खरमास में घर, जमीन या किसी भी तरह का वाहन खरीदना अशुभ माना जाता है। 3. नया कार्य शुरू करना: आप इस दौरान घर में किसी भी चीज का नया निर्माण कार्य प्रारंभ न करें। नए व्यापार, दुकान सहित अन्य कार्यों की भी शुरुआत नहीं करनी चाहिए। 4. निवेश और आभूषण: खरमास होने पर सोने-चांदी के गहने भी न खरीदें। 5. संस्कार: गृह प्रवेश, नामकरण जैसे संस्कार और जनेऊ धारण करना भी इस अवधि में उचित नहीं होता है। खरमास में क्या करें (Shubh Karya aur Sadhna) खरमास kharmas 2025 का महीना आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत पवित्र समय माना जाता है। भले ही मांगलिक कार्य वर्जित हों, लेकिन धार्मिक कार्य करना अत्यंत शुभ होता है। 1. ईश्वरीय उपासना: खरमास में भगवान सूर्य और भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। 2. पूजा का फल: सूर्य देव की उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मकता आती है। वहीं भगवान विष्णु की भक्ति से जीवन में स्थिरता, समृद्धि और कल्याण की प्राप्ति होती है। 3. धार्मिक क्रियाएं: इस समय व्रत, मंत्र-जप, हवन, पदयात्रा, तीर्थ-स्नान और पूजा-पाठ में अधिक समय लगाना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी शुभ होता है। 4. दान-पुण्य: इस अवधि में दान-पुण्य करना अत्यधिक फलदायी माना गया है। kharmas 2025 खरमास में किया गया दान सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक फल देता है।   दान की वस्तुएं: अन्न, वस्त्र, पानी, तिल, गुड़, कंबल या जरूरतमंदों को सहायता देना शुभ फल देता है। सूर्य देव के 12 शक्तिशाली मंत्र:12 powerful mantras of Sun God सूर्य देव की उपासना के लिए kharmas 2025 खरमास के दिनों में इन 12 मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभप्रद माना गया है: 1. ॐ आदित्याय नमः। 2. ॐ सूर्याय नमः। 3. ॐ रवेय नमः। 4. ॐ पूषणे नमः। 5. ॐ दिनेशाय नमः। 6. ॐ सावित्रे नमः। 7. ॐ प्रभाकराय नमः। 8. ॐ मित्राय नमः। 9. ॐ उषाकराय नमः। 10. ॐ भानवे नमः। 11. ॐ दिनमणाय नमः। 12. ॐ मार्तंडाय नमः। Saphala Ekadashi 2025 Date And Time: दिसंबर में कब रखा जाएगा सफला एकादशी का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Sankashti Chaturthi

Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 And Time: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी पूजा-विधि, महत्व और शुभ योग

Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 Kab Hai: गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। Sankashti Chaturthi गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है, साल भर में 12-3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। Sankashti Chaturthi संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित होता है। Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 And Time: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी पूजा-विधि, महत्व और शुभ योग जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए प्रायः ऐसा देखा गया है कि, कभी-कभी संकष्टी चतुर्थी व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व अर्थात तृतीया तिथि के दिन ही होता है। कहा जाता है कि Sankashti Chaturthi संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमानुसार ही संपन्न करना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है। इसके अलावा गणपति बप्पा की पूजा करने से यश, धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 And Time…… संकष्टी चतुर्थी कब है? – Sankashti Chaturthi Kab Hai अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत : रविवार, 7 दिसम्बर, 2025 | [Delhi]संकष्टी चन्द्रोदय समय – 7:55 PMसंकष्टी चतुर्थी तिथि : 7 दिसम्बर 2025 6:24 PM – 8 दिसम्बर 2025 4:03 PM संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि:Sankashti Chaturthi puja method गणेश संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रात: काल स्नान आदि करके व्रत लें।स्नान के बाद गणेश जी की पूज आराधना करें, गणेश जी के मन्त्र का उच्चारण करें।पूजा की तैयारी करें और गणेश जी को उनकी पसंदीदा चीजें जैसे मोदक, लड्डू और दूर्वा घास चढ़ाएं। गणेश मंत्रों का जाप करें और श्री गणेश चालीसा का पाठ करें और आरती करें।शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा की जाती है, अगर बादल के चलते चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के हिसाब से चंद्रोदय के समय में पूजा कर लें।शाम के पूजा के लिए गणेश जी की मूर्ति के बाजू में दुर्गा जी की भी फोटो या मूर्ति रखें, इस दिन दुर्गा जी की पूजा बहुत जरुरी मानी जाती है। मूर्ति/फोटो पर धुप, दीप, अगरबत्ती लगाएँ, फुल से सजाएँ एवं प्रसाद में केला, नारियल रखें।गणेश जी के प्रिय मोदक बनाकर रखें, इस दिन तिल या गुड़ के मोदक बनाये जाते है। गणेश जी के मन्त्र का जाप करते हुए कुछ मिनट का ध्यान करें, कथा सुने, आरती करें, प्रार्थना करें।इसके बाद चन्द्रमा की पूजा करें, उन्हें जल अर्पण कर फुल, चन्दन, चावल चढ़ाएं।पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सबको वितरित किया जाता है।गरीबों को दान भी किया जाता है। अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का महत्व:Importance of Akhurath Sankashti Chaturthi इस व्रत के मुख्य लाभ जीवन की रुकावटें और बाधाएं दूर होती हैं परिवार में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ता है आर्थिक स्थिति मजबूत होती है बुद्धि, स्मरण शक्ति और कार्यक्षमता बढ़ती है संतान की उन्नति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है मानसिक शांति और आध्यात्मिक प्रगति होती है अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2025 के शुभ योग 1. शिव योग इस योग में किए गए कार्य सिद्ध होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 2. सिद्ध योग यह योग कार्यों की सफलता, धनलाभ और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इन दोनों योगों के संयोग से इस दिन भगवान गणेश की उपासना का फल कई गुना बढ़ जाता है।

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