Sankashti Chaturthi

Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 And Time: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी पूजा-विधि, महत्व और शुभ योग

Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 Kab Hai: गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है।

नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। Sankashti Chaturthi गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है, साल भर में 12-3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है।

दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।

Sankashti Chaturthi संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित होता है। Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 And Time: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी पूजा-विधि, महत्व और शुभ योग जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए प्रायः ऐसा देखा गया है कि, कभी-कभी संकष्टी चतुर्थी व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व अर्थात तृतीया तिथि के दिन ही होता है।

कहा जाता है कि Sankashti Chaturthi संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमानुसार ही संपन्न करना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है। इसके अलावा गणपति बप्पा की पूजा करने से यश, धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 And Time……

संकष्टी चतुर्थी कब है? – Sankashti Chaturthi Kab Hai

अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत : रविवार, 7 दिसम्बर, 2025 | [Delhi]
संकष्टी चन्द्रोदय समय – 7:55 PM
संकष्टी चतुर्थी तिथि : 7 दिसम्बर 2025 6:24 PM – 8 दिसम्बर 2025 4:03 PM

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि:Sankashti Chaturthi puja method

गणेश संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रात: काल स्नान आदि करके व्रत लें।
स्नान के बाद गणेश जी की पूज आराधना करें, गणेश जी के मन्त्र का उच्चारण करें।
पूजा की तैयारी करें और गणेश जी को उनकी पसंदीदा चीजें जैसे मोदक, लड्डू और दूर्वा घास चढ़ाएं।

गणेश मंत्रों का जाप करें और श्री गणेश चालीसा का पाठ करें और आरती करें।
शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा की जाती है, अगर बादल के चलते चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के हिसाब से चंद्रोदय के समय में पूजा कर लें।शाम के पूजा के लिए गणेश जी की मूर्ति के बाजू में दुर्गा जी की भी फोटो या मूर्ति रखें, इस दिन दुर्गा जी की पूजा बहुत जरुरी मानी जाती है।

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मूर्ति/फोटो पर धुप, दीप, अगरबत्ती लगाएँ, फुल से सजाएँ एवं प्रसाद में केला, नारियल रखें।
गणेश जी के प्रिय मोदक बनाकर रखें, इस दिन तिल या गुड़ के मोदक बनाये जाते है।
गणेश जी के मन्त्र का जाप करते हुए कुछ मिनट का ध्यान करें, कथा सुने, आरती करें, प्रार्थना करें।
इसके बाद चन्द्रमा की पूजा करें, उन्हें जल अर्पण कर फुल, चन्दन, चावल चढ़ाएं।
पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सबको वितरित किया जाता है।
गरीबों को दान भी किया जाता है।

अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का महत्व:Importance of Akhurath Sankashti Chaturthi

इस व्रत के मुख्य लाभ

जीवन की रुकावटें और बाधाएं दूर होती हैं

परिवार में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ता है

आर्थिक स्थिति मजबूत होती है

बुद्धि, स्मरण शक्ति और कार्यक्षमता बढ़ती है

संतान की उन्नति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है

मानसिक शांति और आध्यात्मिक प्रगति होती है

अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2025 के शुभ योग

1. शिव योग

इस योग में किए गए कार्य सिद्ध होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

2. सिद्ध योग

यह योग कार्यों की सफलता, धनलाभ और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

इन दोनों योगों के संयोग से इस दिन भगवान गणेश की उपासना का फल कई गुना बढ़ जाता है।

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