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Makar Sankranti 2025 Daan:मकर संक्रांति पर करें ये उपाय, भगवान सूर्य का मिलेगा आशीर्वाद

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति का पर्व पौष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है. हालांकि, मकर संक्रांति को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों जैसे लोहड़ी, उत्तरायण, खिचड़ी, टिहरी, पोंगल आदि कई नामों से जाना जाता है. इसी दिन से खरमास खत्म होता है और शुभ व मांगलिक कार्यों जैसे शादी, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश आदि की शुरुआत होती है.  Makar Sankranti 2025: सनातन धर्म में मकर संक्रांति तिथि का विशेष महत्व है। यह पर्व सूर्य देव के मकर राशि में गोचर करने की तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान कर सूर्य देव की पूजा की जाती है। साथ ही दान-पुण्य किया जाता है। सूर्य देव की उपासना करने से साधक को करियर में मनमुताबिक सफलता मिलती है। राशि अनुसार दान Rasi ke anusar kare dhan मेष राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन मूंगफली, गुड़ और शहद का दान करें। वृषभ राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन सफेद तिल और तिल के लड्डू का दान करें। मिथुन राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन साबुत मूंग और हरी सब्जियों का दान करें। कर्क राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन दूध, चावल और उड़द दाल का दान करें। सिंह राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन गेहूं, गुड़, चिक्की आदि चीजों का दान करें। कन्या राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन गन्ने और हरे रंग के कपड़े का दान करें। तुला राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन पोहा (चूड़ा), दही और तिल का दान करें। वृश्चिक राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन मूंगफली, शहद और चिक्की का दान करें। धनु राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन पीले रंग के कपड़े और लड्डू का दान करें। मकर राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन उड़द की दाल और काले तिल का दान करें। कुंभ राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन कंबल और चमड़े के चप्पल-जूते का दान करें। मीन राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन बेसन, चने की दाल और पके केले का दान करें। Makar Sankranti per kare ye upay मकर संक्रांति पर करें ये उपाय 1. मकर संक्रांति के दिन स्नान करने के पानी में काले तिल डालें. तिल के पानी से स्नान करना बेहद ही शुभ माना जाता है. साथ ही ऐसा करने वाले व्यक्ति को रोग से मुक्ति मिलती है. 2. मकर संक्रांति के दिन स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और सूर्य देव को चढ़ाए जाने वाले जल में तिल अवश्य डालें. ऐसा करने से इंसान की बंद किस्मत के दरवाजे खुलते हैं. 3. इस दिन कंबल, गर्म कपड़े, घी, दाल चावल की खिचड़ी और तिल का दान करने से गलती से भी हुए पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख समृद्धि आती है.  4. पितरों की शांति के लिए इस दिन उन्हें जल देते समय उसमें तिल अवश्य डालें. ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. मकर संक्रांति पूजन विधि Makar Sankranti pujan vidhi इस दिन पूजा करने के लिए सूर्योदय से पहले उठकर साफ सफाई कर लें. इसके बाद यदि संभव हो तो आसपास किसी पवित्र नदी में स्नान करें. यदि ऐसा करना संभव न हो तो घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें. यदि आप व्रत रखना चाहते हैं तो इस दिन व्रत का संकल्प लें. इस दिन पीले वस्त्र पहनें क्योंकि इस दिन पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है और फिर सूर्यदेव को अर्घ्य दें. इसके बाद सूर्य चालीसा पढ़ें और आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ जरूर करें.  अंत में आरती करें और गरीबों को दान करें क्योंकि इस दिन दान करने का विशेष महत्व है. Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर तिल के लड्डू क्यों बनाए जाते हैं, क्या है मान्यता? Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर क्यों बनाई जाती है खिचड़ी? जानें इसका पौराणिक महत्व Makar Sankranti 2025:मकर संक्रांति 2025 कब है 14 या 15 जनवरी, जानें, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Ram Mandir Pran Pratishtha: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ की कैसी है तैयारी

Ram Mandir Pran Pratishtha:22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला मंदिर में विराजमान होंगे, श्री राम भगवान की प्राण प्रतिष्ठा होगी और फिर रामलला के भव्य दर्शन होंगे। राम मंदिर की गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम की रूपरेखा काफी आगे है। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए 7 दिनों तक अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। अयोध्या में भगवान राम का पूरे विधि-विधान के साथ स्वागत किया जाएगा। प्राण प्रतिष्ठा उत्सव के लिए प्रायश्चित पूजा, कर्मकुटी पूजा, तीर्थ पूजा, जल यात्रा, जलाधिवास और गंधाधिवास, औषधिधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास, धन्याधिवास, कर्कराधिवास, फलधिवास और पुष्पाधिवास, मध्याधिवास और शयाधिवास आदि नियमों का पालन किया जा रहा है। First Anniversary Of Ayodhya Ram Mandir: श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा (First Anniversary of The Ayodhya Ram Mandir Prana Pratishtha) की पहली वर्षगांठ धूमधाम से मनाई जाएगी. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (Shri Ram Janmbhoomi Teerth) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी दी. पोस्ट में बताया गया है कि अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर (Shri Ram Janmabhoomi Mandir in Ayodhya) में श्री राम लला विग्रह (Shri Ram Lalla Vigraha) के प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ 11 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी. कैसा है प्लान? राम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ को प्रतिष्ठा द्वादशी (Pratishtha Dwadashi) के रूप में मनाया जाएगा. इस दिन मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. यज्ञ मंडप में शुक्ल यजुर्वेद के मंत्रों के साथ अग्निहोत्र का आयोजन सुबह 8 से 11 बजे और फिर दोपहर 2 से 5 बजे तक किया जाएगा. इसके अलावा, 6 लाख श्री राम मंत्रों का जप और राम रक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा सहित अन्य धार्मिक मंत्रों का उच्चारण भी किया जाएगा. मंदिर के भूतल पर 3 से 5 बजे तक राग सेवा 6-9 बजे तक बधाई गीत प्रस्तुत किए जाएंगे. इसके बाद, यात्री सुविधा केंद्र की पहली मंजिल पर रामचरितमानस का संगीतबद्ध पाठ होगा. अंगद टीला पर राम कथा (2 से साढ़े तीन बजे तक), रामचरितमानस पर प्रवचन (साढ़े तीन से 5 बजे तक), साढ़े पांच से साढ़े सात बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम और सुबह से श्री राम के प्रसाद का वितरण होगा. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने सभी श्रद्धालुओं और भक्तों को इस ऐतिहासिक अवसर पर भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है. यह दिन अयोध्या और भारत के लिए एक विशेष धार्मिक महत्व का दिन होगा, जिसमें भक्तगण श्री राम के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति को व्यक्त करेंगे. 22 जनवरी 2024 को अयोध्या राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा हुआ था. प्राण प्रतिष्ठा के लिए 84 सेकंड का शुभ मुहूर्त निकाला गया था. 22 जनवरी को 12 बजकर 29 मिनट 8 सेकंड से 12 बजकर 30 मिनट 32 सेकंड तक प्राण प्रतिष्ठा हुआ था. प्राण प्रतिष्ठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस चीफ मोहन भागवत समेत कई दिग्गज शामिल हुए थे.

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Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर तिल के लड्डू क्यों बनाए जाते हैं, क्या है मान्यता?

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है. भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर ये त्योहार मनाया जाता है. मकर संक्रांति हिंदुओं का साल का पहला त्योहार होता है. मकर संक्रांति पर हर घर में तिल के लड्डू बनाए और खाए जाते हैं, लेकिन आपको पता है कि इस दिन तिल के लडडू बनाने और खाने की परंपरा क्यों शुरू हई. आइए जानते हैं… Makar Sankranti Til ke Laddu: मकर संक्रांति को हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में गिना जाता है. भगवान सूर्य जब धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है. मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान बहुत पुण्यकारी माना गया है. मकर संक्रांति पर तिल का दान करने और खिचड़ी खाने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इस साल 14 जनवरी मंगलवार को 9 बजकर 3 मिनट पर भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी. इस दिन तिल के लड्डू बनाने की भी परंपरा है. इस दिन हर घर में तिल के लड्डू बनाएं जाते हैं. तिल के लड्डओं को भगवान सूर्य को भेंट किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति पर तिल के लड्डू बनाए और खाए क्यूं जाते हैं. क्यों बनाए जाते हैं मकर संक्रांति पर लिल के लड्डू? पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव से काफी क्रोधित हो गए थे. क्रोध में उन्होंने अपने तेज से शनि देव का कुंभ राशि वाला घर जला दिया था. इसके बाद शनि देव ने अपने पिता से माफी मांगी. फिर जाकर भगवान सूर्य का क्रोध शांत हुआ. इसके बाद भगवान सूर्य ने शनि देव से कहा कि जब भी उनका प्रवेश मकर राशि में होगा, तो वो घर धन-धान्य और खुशियों भर जाएगा. मकर राशि शनि देव का एक और अन्य घर माना जाता है. इसके बाद जब भगवान सूर्य शनि देव के मकर राशि वाले घर में आए तो पुत्र ने तिल और गुड़ से अपने पिता की पूजा की. साथ ही शनि देव ने अपने पिता को तिल और गुड़ खाने के लिए दिया. शनि देव ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि भगवान सूर्य द्वारा उनका कुंभ राशि वाला घर जला दिए जाने के बाद उनके पास कुछ भी बाकी नहीं बचा था. भगवान सूर्य शनि देव द्वारा तिल और गुड़ भेंट किए जाने से बहुत प्रसन्न हुए. इसके बाद कहा कि जो भी लोग मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से उनकी पूजा करेंगे, उस पर शनि देव सहित उनका भी आर्शीवाद बना रहेगा. यही कारण है कि मकर संक्रांति पर तिल के लड्डू बनाने और खाने की परंपरा है. Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर क्यों बनाई जाती है खिचड़ी? जानें इसका पौराणिक महत्व Makar Sankranti 2025:मकर संक्रांति 2025 कब है 14 या 15 जनवरी, जानें, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर क्यों बनाई जाती है खिचड़ी? जानें इसका पौराणिक महत्व

Makar Sankranti 2025:सनातन धर्म में मकर संक्रांति का त्योहार अपने आप में बहुत खास माना जाता है। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा होती है। इस साल यह पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा-पाठ और दान-पुण्य जैसे शुभ कार्य करने चाहिए। वहीं इस शुभ दिन (Makar Sankranti Rituals) पर खिचड़ी खाने का भी महत्व है तो आइए इस दिन से जुड़ी कुछ बातों को जानते हैं। Makar Sankranti 2025:खिचड़ी का दान भी जरूर करें आपको बता दें, खिचड़ी बेहद ही पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन है। इसका संबंध सूर्य और शनि से है। कहते हैं, इसे (Makar Sankranti significance) खाने से परिवार में खुशहाली आती है। वहीं, मकर संक्रांति पर दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इसलिए इस शुभ दिन पर खिचड़ी खाने के साथ-साथ दान भी करनी चाहिए, क्योंकि दान इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य माना गया है। Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति का त्योहार आने वाला है. इस बार 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, तो इसे सूर्य का संक्रमण काल कहा जाता है. इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है. देश के कई हिस्सों में इसे खिचड़ी के नाम से भी मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत के समय भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही अपने शरीर का त्याग किया था और उसी दिन उनका श्राद्ध और तर्पण कर्म किया गया था. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व माना जाता है.  खिचड़ी का महत्व (Significance of Khichadi) ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति की खिचड़ी चावल, काली दाल, हल्दी, मटर और हरी सब्जियों का विशेष महत्व है. खिचड़ी के चावल से चंद्रमा और शुक्र की शांति का महत्व है. काली दाल से शनि, राहू और केतु का महत्व है, हल्दी से बृहस्पति का संबंध है और हरी सब्जियों से बुध का संबंध है. वहीं जब खिचड़ी पकती है तो उसकी गर्माहट का संबंध मंगल और सूर्य देव से है. इस प्रकार लगभग सभी ग्रहों का संबंध खिचड़ी से है, इसलिए मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और दान का महत्व अधिक होता है. खिचड़ी की पौराणिक कथा  ज्योतिषाचार्य ने बताया कि खिचड़ी से जुड़ी एक बाबा गोरखनाथ की कथा है. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने की ऐसी भी मान्यता है कि खिलजी के आक्रमण के दौरान बाबा गोरखनाथ के योगी खाना नहीं बना पाते थे और भूखे रहने की वजह से हर ढलते दिन के साथ कमजोर हो रहे थे. योगियों की बिगड़ती हालत को देखते हुए बाबा ने अपने योगियों को चावल, दाल और सब्जियों को मिलाकर पकाने की सलाह दी. यह भोजन कम समय में तैयार हो जाता था और इससे योगियों को ऊर्जा भी मिलती थी. बाबा गोरखनाथ ने इस दाल, चावल और सब्जी से बने भोजन को खिचड़ी का नाम दिया. यही कारण है कि आज भी मकर संक्रांति के पर्व पर गोरखपुर में स्थित बाबा गोरखनाथ के मंदिर के पास खिचड़ी का मेला लगता है. इस दौरान बाबा को खासतौर पर खिचड़ी को भोग लगाया जाता है.  मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2025 Shubh Muhurat) उदयातिथि के अनुसार, मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी 2025 को ही मनाई जाएगी. इस दिन सूर्य सुबह 8 बजकर 41 मिनट मकर राशि में प्रवेश करेंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति पुण्य काल का समय सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और महापुण्य काल का समय सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा.

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Magha Kalashtami Vrat:माघ कालाष्टमी व्रत कब है

Magha Kalashtami Vrat:कालाष्टमी प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आने वाला एक हिंदू त्यौहार है जोकि भगवान शिव के ही एक रौद्र रूप भगवान भैरव को समर्पित है। प्रत्येक माह में आने के कारण यह त्यौहार एक वर्ष में कुल 12 बार, तथा अधिक मास की स्थिति में 13 बार मनाया जाता है। काल भैरव को पूजे जाने के कारण इसे काल भैरव अष्टमी अथवा भैरव अष्टमी भी कहा जाता है। मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष को आने वाली मास में पड़ने वाली कालाष्टमी सबसे अधिक प्रसिद्ध है जिसे कालभैरव जयंती के नाम से जाना जाता है। कालाष्टमी के रविवार अथवा मंगलवार के दिन पड़ने पर इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि साप्ताह के ये दिन भी भगवान भैरव को समर्पित माने जाते हैं। कालाष्टमी व्रत कब है? – Kalashtami Vrat Kab Hai मंगलवार, 21 जनवरी 2025माघ कृष्ण अष्टमी : 21 जनवरी 12:39 PM – 22 जनवरी 3:18 PM साल 2025 में माघ महीने में कालाष्टमी 21 जनवरी को है. कालाष्टमी, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप भैरव की पूजा की जाती है. कालाष्टमी को भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से जीवन से सभी संकट दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कालाष्टमी पर भोग में हलवा, खीर, गुलगुले, जलेबी, फल आदि शामिल किए जाते हैं. भगवान काल भैरव को पान, सुपारी, लौंग, इलायची, मुखवास आदि चीज़ें भी चढ़ाई जाती हैं. Rinharta Ganesh Stotra:ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र: कर्ज से मुक्ति पाने का चमत्कारी उपाय Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra) Sapne Me Shivling Dekhna: सपने में शिवलिंग की पूजा करने का मतलब…? Maha Shivratri:2025 में महाशिवरात्रि कब है? नोट कर लें डेट और पूजा-विधि

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Sakat Chauth Vrat : सकट चौथ व्रत कब रखा जाएगा? जानें डेट, पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त

Sakat Chauth Vrat:हिंदू पंचांग के अनुसार माह की चतुर्थी तिथि भगवान श्री गणेश के पूजन के लिए शुभ मानी गई है। सकट चौथ का व्रत, माघ कृष्णा चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। सकट चौथव्रत के दिन स्त्रियां अपने संतान की दीर्घायु एवं सफलता के लिये व्रत रखती हैं। व्रत के फलस्वरूप विघ्न हरण श्री गणेश व्रती स्त्रियों के संतानों को रिद्धि-सिद्धि प्रदान करते हैं। Sakat Chauth 2025: माघ महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी व्रत को सकट चौथ कहा जाता है। सकट चौथ व्रत में भगवान श्रीगणेश की विधि- विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विघ्नहर्ता की पूजा करने संतान की रक्षा होती है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। सकट चौथ व्रत के दिन चंद्र पूजन अनिवार्य माना गया है। सकट चौथ व्रत संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। इस दिन संकट हरण गणेश जी का पूजन होता है। पूजा में दूर्वा, शमी पत्र, बेल पत्र, गुड़ और तिल के लड्डू चढ़ाए जाते है। यह व्रत संतान के जीवन में विघ्न, बाधाओं को हरता है। संकटों व दुखों को दूर करने वाला और रिद्धि-सिद्धि देने वाला है। सकट चौथ पर तिल का विशेष महत्व है। इसलिए भगवान गणेश को तिल के लड्डुओं का भोग जरूर लगाना चाहिए। 2025 में सकट चौथ व्रत की डेट-शुक्रवार, 17 जनवरी 2025 Sakat Chauth Vrat muhurat:मुहूर्त चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – जनवरी 17, 2025 को 04:06 ए एम बजे चतुर्थी तिथि समाप्त – जनवरी 18, 2025 को 05:30 ए एम बजे सकट चौथ के दिन चन्द्रोदय समय – 09:09 पी एम (देश के अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का टाइम भी अलग होता है) सकट चौथ के दिन दिया जाता है चंद्रमा को अर्घ्य- शास्त्रों के अनुसार, चंद्रमा को औषधियों का स्वामी और मन का कारक माना जाता है। चंद्रदेव की पूजा के दौरान महिलाएं संतान के दीर्घायु और निरोगी होने की कामना करती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने से सौभाग्य का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस विधि से दें अर्घ्य-चांदी के पात्र में पानी में थोड़ा सा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। संध्याकाल में चंद्रमा को अर्ध्य देना काफी लाभप्रद होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन में आ रहे समस्त नकारात्मक विचार, दुर्भावना और स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्र की स्थिति भी मजबूत होती है। सकट चौथ व्रत के दौरान स्त्रियाँ पूरे ही दिन निर्जला व्रत (बिना पानी पिए) रखती हैं तथा संध्या के समय भगवान श्री गणेश का पूजन कर चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात् ही जल ग्रहण करती है। राजस्थान में सकट चौथ व्रत माता सकट को समर्पित किया जाता है। संकट चौथ माता का मंदिर, अलवर से 60 किमी दूर सकट गाँव में स्थित है। नैवेद्य के रूप में तिल तथा गुड़ से बने हुए लड्डू, ईख, शकरकंद (गंजी), अमरूद, गुड़ तथा घी को अर्पित करने की महिमा है, अतः सकट चौथ को तिल चौथ तथा तिलकुट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। पूजा-विधि: puja vidhi सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें। गणपित भगवान का गंगा जल से अभिषेक करें। भगवान गणेश को पुष्प अर्पित करें। भगवान गणेश को दूर्वाघास भी अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वाघास चढ़ाने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं। भगवान गणेश को सिंदूर लगाएं। भगवान गणेश का ध्यान करें। गणेश जी को भोग भी लगाएं। आप गणेश जी को मोदक या लड्डूओं का भोग भी लगा सकते हैं। इस व्रत में चांद की पूजा का भी महत्व होता है। शाम को चांद के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोलें। भगवान गणेश की आरती जरूर करें।

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Makar Sankranti 2025:मकर संक्रांति 2025 कब है 14 या 15 जनवरी, जानें, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Makar Sankranti 2025: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बड़ा महत्व है. इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी. इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है, जिसका अर्थ है सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है. साथ ही, मकर संक्रांति से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है. पौष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है. Makar Sankranti 2025: सूर्य का किसी राशि विशेष राशि में भ्रमण करना संक्रांति कहलाता है. सूर्य हर माह में राशि का परिवर्तन करते हैं. साल में बारह संक्रांतियां होती हैं और दो संक्रांतियां महत्वपूर्ण होती हैं- मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति. सूर्य जब मकर राशि में जाता है तब मकर संक्रांति होती है. मकर संक्रांति से वातावरण में बदलाव शुरू हो जाता है क्योंकि इस संक्रांति से अग्नि तत्व की शुरुआत हो जाती है. इस समय सूर्य उत्तरायण होता है. इस दिन किए गए जाप और दान का फल अनंत गुना होता है. इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी. आइए आपको मकर संक्रांति के बारे में विस्तार से बताते हैं.  मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2025 Shubh Muhurat) हिंदू धर्म में हर त्योहार उदया तिथि के अनुसार ही मनाया जाता है. इस वजह से इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी. सूर्य इस दिन सुबह 8 बजकर 41 मिनट के करीब मकर राशि में प्रवेश करेगा. वहीं, इसका पुण्यकाल सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक जारी रहेगा. Makar Sankranti 2025 puny kal muhurat मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त मकर संक्रांति- मंगलवार, 14 जनवरी 2025 मकर संक्रांति पुण्य काल- सुबह 9.03 मिनट से शाम 5.29 मिनट तक कुल अवधि-8 घंटे 26 मिनट मकर संक्रांति महा पुण्य काल- सुबह 9.03 बजे से 10.50 मिनट तक कुल अवधि-01 घंटा 47 मिनट मकर संक्रांति का क्षण-9.03 मिनट दान करके कमाइये पुण्य ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति 2025 के दिन पवित्र नदी में स्नान करना शुभ होता है. इसके साथ-साथ सूर्यदेव की पूजा भी विशेष लाभ देती है. वहीं, दान देना भी लाभकारी होता है. उत्तर भारत में इस दिन सभी लोग खिचड़ी का दान करते हैं. कुछ राज्यों में नई फसल की भी कटाई होती है.

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शुक्रवार के ये उपाय बदल देंगे आपकी किस्मत! घर में दौड़ी आएंगी मां लक्ष्मी

Shukrawar Ke Upay: शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन-संपत्ति का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन कुछ खास उपाय करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसलिए आज हम आपको शुक्रवार के दिन किए जाने वाले कुछ अचूक उपाय बताने जा रहे हैं, जिससे घर में धन के साथ-साथ सुख-शांति भी आएगी. हिंदू धर्म में हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से मां लक्ष्मी की पूजा- अर्चना करनी चाहिए। मां लक्ष्मी को धन की देवी भी कहा जाता है।  मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार के दिन कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं। इन उपायों को करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय मां को लाल वस्त्र अर्पित करें maa ko lal bastra arpeet kare मां लक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें maa laximi ko pusp arpeet kare विष्णु भगवान की पूजा करें bhagwan vishnu ki puja kare खीर का भोग लगाएं kheer ka bhog lagaye शुक्रवार के दिन श्री लक्ष्मीनारायण भगवान और मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं। इस उपाय को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और धन- लाभ होता है।  मंत्र जाप Mantra jap मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को इन मंत्रों का जाप करें: दिन ॐ शुं शुक्राय नम: या ॐ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहं. दान करें सफेद वस्तुएं dan kare safed bastuye शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ ही सफेद रंग की वस्तुएं जैसे सफेद कपड़े, चावल, आटा, चीनी, दूध और दही का दान करें. शास्त्रों के अनुसार सफेद रंग मां लक्ष्मी को प्रिय है. कलह-कलेश से मुक्ति अगर आपके घर में लगातार कलह-कलेश रहता है तो हर शुक्रवार को गाय को रोटी खिलाना शुरू कर दें. गाय को रोटी खिलाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. अखंड ज्योति akhand jyoti अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो शुक्रवार को मां लक्ष्मी की मूर्ति के सामने 11 दिनों तक अखंड ज्योति जलाएं.  ऐसा करने से आपको आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. कमल गट्टे की माला kamal gatte ki mala अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने और धन की कमी से छुटकारा पाने के लिए हर शुक्रवार को कमल गट्टे की माला से देवी लक्ष्मी का नाम जपें. इससे देवी लक्ष्मी की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी. जल चढ़ाने का उपाय jal chadane ka uppay शुक्रवार के दिन नीम के पेड़ पर जल चढ़ाएं क्योंकि इसे देवी दुर्गा का एक रूप माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति मिलती है.

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Sakat Chauth 2025: कब है सकट चौथ? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Sakat chauth 2025 mein kab hai date and time: सकट चौथ का व्रत भगवान श्रीगणेश व माता सकट को समर्पित है। जानें जनवरी में सकट चौथ कब है- Sakat chauth 2025 Kab Hai:हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश ganesh bhagwan को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतु्र्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का व्रत रखा जाता है। यह व्रत सकट माता को समर्पित है। इस दिन माताएं अपने संतान की अच्छे स्वास्थ्य व खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं। सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। मान्यता है कि इस दिन श्रीगणेश की पूजा करने से सुख-समृद्धि का आगमन होता है। सकट चौथ को तिलकुटा चौथ, माघी चौथ या व्रकतुण्ड चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। Sakat Chauth Significance: साल भर में 12 संकष्टी चतुर्थी व्रत आते हैं। इनमें से कुछ चतुर्थी साल की सबसे बड़ी चौथ में से एक हैं, उनमें से एक है सकट चौथ व्रत। सकट चौथ भगवान गणेश के सबसे महत्वपूर्ण पर्व में से एक है। हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन सकट चौथ का त्योहार मनाया जाता है। सकट चौथ व्रत की महिमा से संतान की सभी चिंताएं दूर हो जाएंगी। भक्तों को सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। सकट चौथ वर्ष की शुरुआत में पड़ता है, इसलिए जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं।  उन्हें पूरे वर्ष अनंत सुख, धन, सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं 2025 में कब है सकट चौथ। सकट चौथ चंद्रोदय टाइमिंग- सकट चौथ के दिन चन्द्रमा को जल अर्घ्य देने और पूजा करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होचा है और जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। सकट चौथ के दिन चंद्रमा निकलने का समय रात 09 बजकर 09 मिनट है। कब है सकट चौथ? Sakat Chauth 2025 17 जनवरी 2025, शुक्रवार को सकट चौथ है। इसे संकष्टी चतुर्थी, सकट चौथ, तिलकुट चौथ, माघी चौथ, लंबोदर संकष्टी, तिलकुट चतुर्थी और संकटा चौथ आदि नामों से भी जाना जाता है।  सकट चौथ 2025 Sakat Chauth माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आरंभ:  17 जनवरी 2025, प्रातः 4 बजकर 06 मिनट पर माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त: 18 जनवरी 2025, प्रातः 5 बजकर 30 मिनट पर  गणपति पूजा मुहूर्त-   17 जनवरी 2025 प्रातः 7:15 – प्रातः 11:12 सकट चौथ 2025 Sakat Chauth 2025 चंद्रोदय समय17 जनवरी 2025 , रात्रि 09: 09 मिनट पर सकट चौथ व्रत क्यों किया जाता है ?सकट चौथ का दिन भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है। Sakat Chauth 2025 इस दिन माताएं अपने पुत्रों के कल्याण की कामना से व्रत रखती हैं। सकट चौथ के दिन भगवान गणेश की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है। इस पूरे दिन व्रत रखा जाता है।  रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा Sakat Chauth 2025 को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। यही कारण है कि सकट चौथ Sakat Chauth 2025 पर चंद्रमा दर्शन और पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन गणपति जी को पूजा में तिल के लड्डू या मिठाई अर्पित करते हैं, साथ में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पारण करते हैं।  सकट चौथ Sakat Chauth 2025 PUJA Vidhi:पूजा विधि डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra) श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti) Rinharta Ganesh Stotra:ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र: कर्ज से मुक्ति पाने का चमत्कारी उपाय Ganesh Chalisa:श्री गणेश चालीसा

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Paush Purnima:पौष पूर्णिमा: शुभ तिथि, धार्मिक महत्व और पूजा विधि

Paush Purnima:हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है। यह दिन चंद्रमा की पूर्णता का प्रतीक है और पौष मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि के रूप में मनाया जाता है। जनवरी 2025 में पौष पूर्णिमा का व्रत, पूजन और इससे जुड़ी पौराणिक कथा धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन का महत्व न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में है, Paush Purnima बल्कि यह व्रत आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का भी एक साधन माना जाता है। जनवरी 2025 में पौष पूर्णिमा की तिथि और समय (January Purnima 2025 Date and Time) सत्यनारायण व्रत कब है? – सोमवार, 13 जनवरी 2025 | पौष शुक्ल पूर्णिमा पूर्णिमा प्रारंभ – 13 जनवरी 2025 5:03 AMपूर्णिमा समाप्त – 14 जनवरी 2025 3:56 AMपूर्णिमा चन्द्रोदय – 5:04 PM 13 जनवरी को प्रातः 05:03 बजे आरंभ होकर 14 जनवरी को प्रातः 03:56 बजे समाप्त होगा। पौष पूर्णिमा से जुड़ी पौराणिक कथा (Paush Purnima Katha) पौराणिक कथाओं Paush Purnima के अनुसार, एक समय की बात है जब कार्तिका नाम की नगरी में चंद्रहाश नामक राजा का शासन था। उसी नगर में धनेश्वर नामक एक ब्राह्मण भी रहता था। धनेश्वर की पत्नी बहुत ही सुशील और रूपवान थी। उनके घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उनके जीवन में एक बड़ी कमी थी—संतान का अभाव। यह उनके लिए अत्यंत दुख का कारण था। एक बार उस गांव में एक योगी आया। वह योगी अन्य सभी घरों से भिक्षा लेकर गंगा किनारे जाकर भोजन करने लगा, लेकिन उसने धनेश्वर के घर से भिक्षा नहीं ली। इस बात से व्यथित होकर धनेश्वर ने योगी से इसका कारण पूछा। योगी ने उत्तर दिया, “निसंतान के घर का अन्न पतितों के अन्न के समान होता है, और जो व्यक्ति पतितों का अन्न खाता है, वह स्वयं भी पतित हो जाता है। इसलिए, मैंने तुम्हारे घर से भिक्षा लेने से इनकार कर दिया।” योगी की इस बात से धनेश्वर अत्यंत दुखी हुआ और उसने योगी से संतान प्राप्ति का उपाय पूछा। योगी ने सलाह दी, “तुम मां चंडी की आराधना करो।” धनेश्वर ने इस सुझाव को मानकर वन में जाकर मां चंडी की कठोर तपस्या शुरू कर दी। उन्होंने नियमित रूप से उपवास करते हुए मां चंडी की आराधना की।धनेश्वर की तपस्या से प्रसन्न होकर मां चंडी ने सोलहवें दिन उन्हें स्वप्न में दर्शन दिया। उन्होंने वरदान देते हुए कहा, “तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी। लेकिन ध्यान रहे, अगर तुम दोनों पति-पत्नी लगातार 32 पूर्णिमा व्रत रखोगे, तो तुम्हारा पुत्र दीर्घायु होगा।” मां चंडी के इस आशीर्वाद से धनेश्वर ने व्रत का पालन किया और उन्हें संतान सुख प्राप्त हुआ। कहा जाता है कि पूर्णिमा का व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और विशेष फल की प्राप्ति होती है। दुर्गम दैत्य और पौष पूर्णिमा की कथा:(Story of inaccessible monster and Paush Purnima) एक अन्य कथा में बताया गया है कि दुर्गम नामक एक शक्तिशाली दैत्य ने अपने आतंक से तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था। उसके अत्याचारों के कारण पृथ्वी पर सौ वर्षों तक बारिश नहीं हुई। बारिश न होने के कारण पृथ्वी पर अकाल पड़ गया और लोग अन्न और जल के अभाव में अपने प्राण त्यागने लगे। इस स्थिति से मुक्ति दिलाने के लिए देवी-देवताओं ने मां दुर्गा से प्रार्थना की। उनकी प्रार्थना सुनकर मां दुर्गा ने शाकंभरी के रूप में अवतार लिया। कहा जाता है कि मां शाकंभरी की सौ आंखें थीं। धरती पर अवतरित होते ही उन्होंने रोना शुरू कर दिया। उनके आंसुओं से पूरी धरती जलमग्न हो गई, जिससे जल की कमी पूरी हो गई और धरती पर एक बार फिर हरियाली लौट आई। इसके बाद मां शाकंभरी ने दुर्गम दैत्य का अंत किया और पृथ्वी को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया। तब से पौष पूर्णिमा का दिन मां शाकंभरी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी पूजा के लिए विशेष माना जाता है। पौष पूर्णिमा की पूजा विधि (Paush Purnima Puja Vidhi) पौष पूर्णिमा Paush Purnima के दिन स्नान के बाद पवित्र मन से पूजा की तैयारी करें। सबसे पहले गेहूं और अन्य अनाज के पांच छोटे ढेर बनाएं। इन ढेरों पर भगवान विष्णु, सूर्य, रुद्र, ब्रह्मा और देवी लक्ष्मी को प्रतीक रूप में स्थापित करें। यदि उनके चित्र या मूर्ति उपलब्ध न हों, तो ध्यानपूर्वक उनके नाम का स्मरण करते हुए प्रत्येक ढेर पर एक पुष्प अर्पित करें। इसके बाद क्रमवार इनकी पूजा करें। घी का दीपक जलाएं और तिल, गुड़, तथा फल का प्रसाद अर्पित करें। भगवान की आरती करें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें। Paush Purnima अगले दिन इस अनाज को किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें।शाम को खीर का प्रसाद बनाकर देवी लक्ष्मी को अर्पित करें और उनकी आरती करें। ऐसा करने से घर में दुख और दरिद्रता समाप्त होती है और सुख-शांति का वास होता है। पौष पूर्णिमा से कल्पवास की शुरुआत (Paush Purnima Aur Kalpvaas) पौष पूर्णिमा के दिन से माघ स्नान का शुभारंभ होता है। इस व्रत के नियम अनुसार माघ के पूरे महीने सूर्योदय से पूर्व स्नान करना चाहिए। जितनी देर से स्नान करेंगे, उतना ही पुण्य कम प्राप्त होगा। माघ मास में भीषण ठंड के बावजूद जो व्यक्ति धर्मपरायण होकर सूर्योदय से पहले गंगा स्नान करता है, वह मोक्ष का अधिकारी बनता है।

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Guru Gobind Singh Jayanti:गुरु गोबिन्द सिंह जयन्ती कब है? पढ़ें उनके ये 15 प्रेरणादायक विचार

Guru Gobind Singh Jayanti:सिखों के दसवें एवं अंतिम गुरु Guru Gobind Singh Jayanti श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्म दिवस पर मनाई जाती है यह गुरु गोबिंद सिंह जयंती। सिख संप्रदाय में गुरुओं की जयंती को प्रकाश पर्व के नाम से जाता है। प्रकाश पर्व को सिख संप्रदाय में सबसे ऊँचा उत्सव माना जाता है। अतः इस उत्सव को गुरु गोबिंद सिंह प्रकाश पर्व कहा जाता है। Guru Gobind Singh Jayanti:गुरू गोबिंद सिंह जी सिखों के दसवें गुरू थे. उनका जन्म पौष मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन 1666 में बिहार के पटना शहर में हुआ था. साल 2024 में 17 जनवरी, बुधवार के दिन गुरू गोबिंद सिंह जयंती पड़ेगी. Guru Gobind Singh Jayanti:इनके पिता श्री गुरू तेग बहादुर सिंह जी सिखों के 9वें गुरू थे. इनके शुरुवाती चार साल पटना में ही बीते. इसके बाद उनका परिवार आनंदपुर साहिब आ गया. गुरू गोबिंद सिंह जी ने योद्धा बनने के लिए कला सीखी और साथ ही संस्कृत और फारसी भाषा का भी ज्ञान लिया. इनके पिता ने धर्म परिवर्तन के खिलाफ खुद का बलिदान दे दिया. लोगों को धर्म परिवर्तन से बचाने के लिए दिल्ली के चांदनी चौक पर इनके पिता गुरू तेग बहादुर जी का गला औरंगजेब ने सिर धड़ से अलग कर दिया. इसके बाद उनके बेटे गुरू गोबिंद सिंह जी को 10वां गुरू घोषित किया गया. उ समय उनकी उम्र 10 साल थी. गुरु गोबिंद सिंह के विचार Guru Gobind Singh Jayanti 1- अगर आप केवल भविष्य के बारे में सोचते रहेंगे, तो वर्तमान भी खो देंगे।2.- जब आप अपने अन्दर से अहंकार मिटा देंगे, तभी आपको वास्तविक शांति प्राप्त होगी।3 – मैं उन लोगों को पसंद करता हूँ जो सच्चाई के मार्ग पर चलते हैं।4- ईश्वर ने हमें जन्म दिया है ताकि हम संसार में अच्छे काम करें और बुराई को दूर करें।5- इंसान से प्रेम ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है। 6 -अच्छे कर्मों से ही आप ईश्वर को पा सकते हैं। अच्छे कर्म करने वालों की ही ईश्वर मदद करता है।7- असहायों पर अपनी तलवार चलाने वाले का खून ईश्वर बहाता है। 8- बगैर गुरु के किसी को भगवान का नाम नहीं मिलता।9 – जितन संभव हो सके, जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए।10- अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दान करें।  11- छोटे से छोटे काम में भी लापरवाही न बरतें। सभी कार्यों को लगन और मेहनत के साथ करें। 12- मनुष्य अनंत जीवन का एक भाग है इस जीवन का कोई अंत नहीं है। इसे अपने कर्मों से सुंदर बनाएं। 13- सत्कर्म कर्म के द्वारा सच्चा गुरु प्राप्त होता है और गुरु के मार्गदर्शन से भगवान मिलते हैं। 14- किसी भी व्यक्ति की चुगली और निंदा करने से बचें और किसी से ईर्ष्या करने के बजाय अपने कर्म पर ध्यान दें। 15- एक सुंदर जीवन के लिए आहार और व्यायाम ही काफी नहीं है, बल्कि गरीब और बेसहारा लोगों की सेवा भी जरूरी है।

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Pausha Vinayak Chaturthi:पौष विनायक चतुर्थी 2025:जानें व्रत कथा, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Pausha Vinayak Chaturthi:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, Pausha Vinayak Chaturthi जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सभी देवताओं में गणेश जी का स्थान सर्वोपरि है। Pausha Vinayak Chaturthi गणेश जी को सभी परेशानियों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश की नियमित पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। Pausha Vinayak Chaturthi:विनायक चतुर्थी पूजा विधि कैसे करें मान्यता के अनुसार चतुर्थी तिथि की पूजा दोपहर के समय करनी चाहिए। क्योंकि शाम के समय चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से झूठा कलंक लगता है। मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने विनायक चतुर्थी की रात को चंद्रमा देखा था, जिसके बाद उन्हें स्यामंतक मणि चोरी करने के लिए झूठा कलंक लगाया गया था। इस दिन प्रात:काल स्नान कर व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर पूजा प्रारंभ करें। भगवान गणेश को पीले फूलों की माला अर्पित करने के बाद धूप-दीप, नैवेद्य, अक्षत और उनकी प्यारी दूर्वा घास अर्पित करें। इसके बाद मिठाई या मोदक का भोग लगाएं। अंत में व्रत कथा पढ़कर गणेश जी की आरती करें। मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को सिंदूर बहुत प्रिय होता है इसलिए विनायक चतुर्थी के दिन पूजा के समय गणेश जी को लाल रंग के सिंदूर का तिलक लगाएं। सिंदूर चढ़ाते समय निम्न मंत्र का जाप करें- Pausha Vinayak Chaturthi:पौष विनायक चतुर्थी 2025: जानें व्रत कथा, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त Pausha Vinayak Chaturthi:पौष विनायक चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना का विशेष दिन है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश का पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। गणपति, जिन्हें विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के नाम से जाना जाता है, की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है। आइए जानते हैं इस पर्व के महत्व, व्रत कथा, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में। विनायक चतुर्थी तिथि: शुक्रवार, 3 जनवरी 2025 पौष विनायक चतुर्थी का महत्व Pausha Vinayak Chaturthi Pausha Vinayak Chaturthi:भगवान गणेश को हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणपति पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है। पौष विनायक चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से उन भक्तों के लिए महत्व रखता है जो जीवन में बुद्धि, धन, समृद्धि और सुख-शांति की कामना करते हैं। इस दिन भगवान गणेश की आराधना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सभी प्रकार के विघ्न समाप्त होते हैं। इसके अलावा, इस व्रत को करने से पुत्र प्राप्ति, पारिवारिक सुख और विवाह में आ रही अड़चनों से मुक्ति मिलती है। पौष विनायक चतुर्थी पूजा विधि Pausha Vinayak Chaturthi पौष विनायक चतुर्थी व्रत कथा विनायक चतुर्थी व्रत कथा के अनुसार एक समय भगवान शिव और देवी पार्वती के घर एक बालक का जन्म हुआ। वह कोई और नहीं बल्कि स्वयं भगवान गणेश थे। एक दिन माता पार्वती स्नान कर रही थीं और उन्होंने बाल गणेश को द्वार पर पहरा देने को कहा। उसी समय भगवान शिव वहां पहुंचे। गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया, जिससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर काट दिया। माता पार्वती को जब यह बात पता चली, तो उन्होंने शिव जी से गणेश जी को पुनः जीवित करने का आग्रह किया। भगवान शिव ने बालक गणेश को जीवित करने के लिए पहले जीवित प्राणी के सिर को लगाने का वचन दिया। Pausha Vinayak Chaturthi संयोगवश उन्हें एक हाथी का सिर मिला, जिसे भगवान शिव ने गणेश जी के शरीर से जोड़ दिया। इस प्रकार भगवान गणेश का नया स्वरूप प्रकट हुआ और उन्हें विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य का आशीर्वाद मिला। व्रत के लाभ

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