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Satyanarayan Vrat

Ashwin Satyanarayan Vrat 2025 Date and Time: साल 2025 के श्री सत्यनारायण पूजा की तिथि व मुहूर्त

Satyanarayan Vrat: सत्यनारायण पूजा तिथि और मुहूर्त से जानिए पूजा का सही समय। इस पूजा से घर में सुख, समृद्धि और आशीर्वाद का वास होता है, जिससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। सत्यनारायण पूजा तिथि और मुहूर्त के बारे में:About Satyanarayan Puja date and time Satyanarayan Vrat: सत्यनारायण पूजा किसी भी शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इसे पूर्णिमा, संकष्टी चतुर्थी, एकादशी, या विशेष मांगलिक अवसरों पर किया जाता है। पूजा का शुभ मुहूर्त प्रायः प्रदोष काल या चंद्रमा की वृद्धि वाले समय में होता है। Satyanarayan Vrat इस पूजा के लिए पंचांग देखकर शुभ तिथि और समय का चयन करें, जिससे भगवान विष्णु की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त हो। कब है शरद पूर्णिमा? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धन वृद्धि के अचूक उपाय हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान सत्यनारायण व्रत करने से और कथा सुनने से पुण्य फल प्राप्त होती है। श्री सत्यनारायण पूजा भगवान नारायण का आशीर्वाद लेने के लिए की जाती है जो भगवान विष्णु के रूपों में से एक हैं। इस रूप में भगवान को सत्य का अवतार माना जाता है। हालांकि सत्यनारायण पूजा करने के लिए कोई निश्चित दिन नहीं है, लेकिन पूर्णिमा या पूर्णिमा के दौरान इसे करना बेहद शुभ माना जाता है। सत्यनारायण पूजा तिथि और मुहूर्त:Satyanarayan Puja date and time Satyanarayan Vrat श्री सत्यनारायण पूजा नारायण यानी भगवान विष्णु को समर्पित है। यह पूजा भगवान का आशीर्वाद पाने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए की जाती है। वैसे तो सत्यनारायण पूजा किसी भी दिन की जा सकती है, Satyanarayan Vrat लेकिन पूर्णिमा के दिन इसका विशेष महत्व माना गया है। इस दिन श्रद्धालुओं द्वारा उपवास रखने का विधान है। सत्यनारायण पूजा प्रातःकाल या सायंकाल दोनों समय की जा सकती है, लेकिन सायंकाल का समय अधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस समय पूजा के बाद व्रती जातक प्रसाद ग्रहण कर अपना उपवास पूर्ण कर सकते हैं। Ashwin Satyanarayan Vrat Puja Puja: सत्यनारायण व्रत की पूजा विधि शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है ऐसा माना जाता है। Satyanarayan Vrat पूजा सुबह के साथ-साथ शाम को भी की जा सकती है और शाम को सत्यनारायण पूजा करना अधिक उपयुक्त माना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।इसके बाद सत्यनारायण की मूर्ति को स्थापित करें और उसके चारों ओर केले के पत्ते बांध दें।पंचामृतम (दूध, शहद, घी/मक्खन, दही और चीनी का मिश्रण) का उपयोग देवता को साफ करने के लिए किया जाता है, आमतौर पर शालिग्राम, जो महा विष्णु का दिव्य पत्थर है।चौकी पर जल से भरा कलश रखें और देसी घी का दीपक जलाएं।अब सत्यनारायण की पूजा और कथा करें।भुने हुए आटे में शक्कर मिलाकर भगवान को अर्पित करें।प्रसाद में तुलसी जरूर डालें।पूजा के बाद प्रसाद बांटें। Satyanarayan Vrat पूजा एक आरती के साथ समाप्त होती है, जिसमें भगवान की छवि या देवता के चारों ओर कपूर से जलाई गई एक छोटी सी आग की परिक्रमा होती है। आरती के बाद व्रतियों को पंचामृत और प्रसाद ग्रहण करना होता है। व्रती पंचामृत से व्रत तोड़ने के बाद प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं। साल 2025 के श्री सत्यनारायण पूजा की तिथि व मुहूर्त:Ashwin Satyanarayan Vrat 2025 Date and Time सत्यनारायण पूजा डेट 2025:satyanarayan puja date 2025 13 जनवरी 2025, सोमवार (पौष, शुक्ल पूर्णिमा) 12 फरवरी 2025, बुधवार (माघ, शुक्ल पूर्णिमा) 13 मार्च 2025, बृहस्पतिवार (फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा) 12 अप्रैल 2025, शनिवार (चैत्र, शुक्ल पूर्णिमा) 12 मई 2025, सोमवार (वैशाख, शुक्ल पूर्णिमा) 10 जून 2025, मंगलवार (ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा) 10 जुलाई 2025, बृहस्पतिवार (आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा) 09 अगस्त 2025, शनिवार (श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा) 07 सितम्बर 2025, रविवार (भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा) 06 अक्टूबर 2025, सोमवार (आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा) 05 नवम्बर 2025, बुधवार (कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा) 04 दिसम्बर 2025, बृहस्पतिवार (मार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा) तो ये थी जानकारी साल 2025 के श्री सत्यनारायण पूजा की डेट व तिथि के बारे में। आप भी इन पूर्णिमा तिथियों पर भगवान विष्णु को समर्पित ये अनुष्ठान अवश्य करें, और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को धन्य बनाएं। व्रत-त्यौहारों व अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए ‘श्री मंदिर’ पर।

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Sharad Purnima 2025

Sharad Purnima 2025 Start Date:कब है शरद पूर्णिमा? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धन वृद्धि के अचूक उपाय

Sharad Purnima 2025 Start Date; शरद पूर्णिमा 2025 का धार्मिक महत्व: सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ माना गया है। विशेष रूप से शरद पूर्णिमा को सभी 12 पूर्णिमाओं में सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। Sharad Purnima 2025 इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना और दान करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि और खुशियों का आगमन होता है। Sharad Purnima 2025 इस माह (अश्विन माह) में मां दुर्गा और पितरों की पूजा-अर्चना करने का भी विधान है। कब मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा 2025? (Sharad Purnima 2025 Date and Time) वैदिक पंचांग के अनुसार, अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि हर वर्ष बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। विवरण तिथि और समय (द्रिक पंचांग के अनुसार) पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 06 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर होगी। पूर्णिमा तिथि का समापन अगले दिन यानी 07 अक्टूबर 2025 को सुबह 09 बजकर 16 मिनट पर होगा। शरद पूर्णिमा 2025 पर्व 06 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। Why is the moon special on the night of Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा क्यों है खास? शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत की वर्षा करता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में दिव्य औषधीय गुण होते हैं। इसी वजह से, इस रात को दूध से बनी खीर चांदनी में रखी जाती है, और अगले दिन इसका सेवन प्रसाद के रूप में किया जाता है। माना जाता है कि इसे ग्रहण करने से जातक के शरीर और मन दोनों को शुद्धि एवं शक्ति मिलती है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें ये विशेष उपाय (Sharad Purnima Upay) अगर आप आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं या जीवन में धन में अपार वृद्धि चाहते हैं, तो Sharad Purnima 2025 शरद पूर्णिमा के दिन ये उपाय अत्यंत लाभकारी माने गए हैं: 1. आर्थिक तंगी से छुटकारा: शरद पूर्णिमा के दिन स्नान करने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। इस दौरान देवी लक्ष्मी को कमल का फूल और नारियल (या एकाक्षी नारियल) अर्पित करें। Sharad Purnima 2025 ऐसी मान्यता है कि इस उपाय से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आर्थिक तंगी की समस्या से छुटकारा मिलता है। 2. धन में अपार वृद्धि: धन में अपार वृद्धि के लिए शरद पूर्णिमा की रात को 11 पीले रंग की कौड़ियों को एक पीले कपड़े में बांधकर मां लक्ष्मी के सामने रखें। अगले दिन इन कौड़ियों को अपनी तिजोरी में रख दें। Sharad Purnima 2025 ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से धन में अपार वृद्धि होती है और घर-परिवार में कभी भी धन की कमी नहीं होती है, तथा लक्ष्मी माता का वास होता है। मां लक्ष्मी के प्रिय मंत्र:Favorite mantras of Goddess Lakshmi पूजा के दौरान आप मां लक्ष्मी के इन मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं: • श्री लक्ष्मी बीज मन्त्र: ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः।। • लक्ष्मी प्रार्थना मंत्र: नमस्ते सर्वगेवानां वरदासि हरे: प्रिया। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां या सा मे भूयात्वदर्चनात्।। • श्री लक्ष्मी महामंत्र: ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।

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Navratri Day 6

Shardiya Navratri Day 6, Maa Katyayini Puja Vidhi: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की होती है आराधना, जानिए पूजा- विधि, मंत्र, भोग और आरती

Shardiya Navratri Day 6, Maa Katyayini Puja Vidhi:देवी भागवत पुराण में कहा गया है कि मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्त को अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। Shardiya Navratri 6 Day, Maa Katyayani Puja Vidhi, Aarti In Hindi: शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा- अर्चना करने का विधान है। वहीं आपको बता दें कि देवी कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना जाता है। वहीं अगर मां के स्वरूप की बात करी जाए तो मां 4 भुजाधारी और सिंह पर सवार हैं। Navratri Day 6 उन्होंने एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल का पुष्प धारण किया हुआ है। अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं। मान्यता है कि कात्यायनी की पूजा करने से भक्त को अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी का भोग, आरती और पूजा- विधि… Shardiya Navratri Day 6, Maa Katyayini Puja Vidhi: मां कात्यायनी की पूजा- विधि Navratri 2025: इस दिन सुबह जल्दी उठ जाएं। साथ ही स्नान करने के बाद साफ- सुथरे वस्त्र धारण कर लें। वहीं सबसे पहले धूप अगरबत्ती जलाएं। साथ ही पूजा आरंभ करें। सबसे पहले कलश की विधिवत पूजा करें। इसके बाद Navratri Day 6 मां दुर्गा के साथ मां कात्यायनी की पूजा करें। वहीं माता को फूल चढ़ाएं। साथ ही माला, सिंदूर, कुमकुम, रोला, अक्षत लगाने के साथ मां का श्रृंगार भी करें। वहीं  इसके बाद मां को भोग में शहद, फल, मिठाई का भोग लगाएं। इसके साथ ही एक पान में 2 लौंग, एक इलायची, बाताशा, एक सिक्का रखकर चढ़ा दें। साथ ही अंत में माता के सभी मंत्रों का उच्चारण करें। Navratri Day 6 साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। वहीं अंत में आरती करें और जो प्रसाद लगाया है, वो घर के सभी सदस्यों में बांट दें और अंत में क्षमा प्रार्थना करें। मां कात्यायनी प्रिय भोग:Maa Katyayini Priy bhog नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा के समय शहद का भोग लगाना चाहिए। Navratri Day 6 इससे मां प्रसन्न होकर सुख- समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। मां कात्यायनी का प्रिय रंग:Maa Katyayini Ka Priy Rang मां कात्यायनी को लाल रंग अति प्रिय है। Navratri Day 6 इसलिए इस रंग के वस्त्र अर्पित करने के साथ लाल रंग के गुलाब अर्पित करें। मां कात्यायनी का बीज मंत्र:Maa Katyayini Ka Beej Mantra क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:। मां कात्यायनी आराधना मंत्र:Maa Katyayini Aradhana Mantra 1- या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। 2-चंद्र हासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना|कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि|| मां कात्यायनी स्तोत्र पाठ:Maa Katyayini Stotra Path कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोच्जवलां।स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥परमांवदमयी देवि परब्रह्मा परमात्मा।परमशक्ति, परमभक्ति, कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥ मां कात्यायनी कवच: Maa Katyayini Kavach कात्यायनी मुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी॥ मां कात्यायनी की आरती:Maa Katyayini Ki Aarti जय-जय अम्बे जय कात्यायनीजय जगमाता जग की महारानीबैजनाथ स्थान तुम्हारावहा वरदाती नाम पुकाराकई नाम है कई धाम हैयह स्थान भी तो सुखधाम हैहर मंदिर में ज्योत तुम्हारीकही योगेश्वरी महिमा न्यारीहर जगह उत्सव होते रहतेहर मंदिर में भगत हैं कहतेकत्यानी रक्षक काया कीग्रंथि काटे मोह माया कीझूठे मोह से छुडाने वालीअपना नाम जपाने वालीबृहस्पतिवार को पूजा करिएध्यान कात्यायनी का धरिएहर संकट को दूर करेगीभंडारे भरपूर करेगीजो भी मां को ‘चमन’ पुकारेकात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

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Day 3 Navratri

Day 3 Navratri Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें सही विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा

Day 3 Navratri Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है. आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा. Navratri 2025 Day 3: नवरात्रि के तीसरे दिन देवी दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है. मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है. इनके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है, Day 3 Navratri Puja Vidhi मां के दस हाथ हैं, जिनमें अलग-अलग अस्त्र और शस्त्र होते हैं. वहीं, मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह है. मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की सच्ची निष्ठा से पूजा-अर्चना करने से जीवन में शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन आता है. ऐसे में आइए जानते हैं Day 3 Navratri मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा. Day 3 Navratri Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा…. मां चंद्रघंटा की पूजा विधि (Maa Chandraghanta Puja Vidhi) इसके बाद, मां के चरणों में पुष्प अर्पित कर आरती गाएं. देवी चंद्रघंटा की आराधना करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ कपड़े धारण कर लें. मंदिर को साफ कर पूजा स्थान पर देवी की मूर्ति की स्थापना करें.  मां की प्रतिमा को गंगा जल से स्नान कराएं.  इसके बाद धूप-दीप, पुष्प, रोली, चंदन अर्पित करें. मां को भोग लगाकर उनके मंत्रों का जाप करें. मां चंद्रघंटा का मंत्र  (Maa Chandraghanta Mantra) पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता.प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥ ध्यान मंत्र वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्.सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्.खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्.मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्.कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥ मां चंद्रघंटा का भोग (Maa Chandraghanta ka bhog) नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग समर्पित किया जाता है. मां चंद्रघंटा शुभ रंग (Maa Chandraghanta ka Shubh Rang) नवरात्रि के तीसरे दिन का शुभ रंग लाल होता है.मां चंद्रघंटा की कथा (Maa Chandraghanta ki Katha) पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर नाम के एक राक्षस ने देवराज इंद्र का सिंहासन हड़प लिया था.  महिषासुर स्वर्गलोक पर राज करना चाहता था. Day 3 Navratri उसकी यह इच्छा जानकार देवता चितिंत हो गए, जिसके बाद वे अपनी इस परेशानी के लिए त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और शंकर के पास पहुंचें. महिषासुर के आतंक की गाथा सुनकर त्रिदेव क्रोधिक हो गए. इस क्रोध के चलते तीनों के मुख से ऊर्जा उत्पन्न हुई. इसी उर्जा से मां चंद्रघंटा का जन्म हुआ. महिषासुर का अंत करने के लिए भगवान शंकर ने मां को अपना त्रिशूल और भगवान विष्णु ने अपना चक्र प्रदान किया. इसके बाद सभी देवी देवताओं ने भी माता को अपना-अपना अस्त्र सौंप दिया. इंद्रदेव ने मां को अपना एक घंटा दिया. इसके बाद मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का संहार कर देवताओं की रक्षा की. Durga Puja 2025 Date And Time :दुर्गा पूजा 2025 कब से होगी शुरू? जानें महत्वपूर्ण तिथियां, घटस्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

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Day 2 Navratri Puja Vidhi

Day 2 Navratri Puja Vidhi : नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की होती है पूजा, नोट कर लें पूजन विधि, शुभ

Day 2 Navratri Puja Vidhi : नवरात्रि के दूसरे दिन मां के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान और तप की देवी कहा जाता है। भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए मां पार्वती ने कठोर…. 2nd Day of Navratri Maa brahmacharini : इस समय चैत्र नवरात्रि चल रही हैं। आज चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान और तप की देवी कहा जाता है। भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए मां पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। Day 2 Navratri Puja Vidhi: मां ब्रह्मचारिणी सफेद साड़ी धारण करती हैं। साथ ही उनके दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमण्डल है। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से जातक को आदि और व्याधि रोगों से मुक्ति मिलती है। Day 2 Navratri Puja Vidhi शास्त्रों में वर्णित है कि मां ब्रह्मचारिणी के पूजन से भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं। यम, नियम के बंधन से मुक्ति मिलती है। ब्रह्म को प्राप्त करने के लिए भगवती ने तपस्या की, इसलिए उनका नाम ब्रहमचारिणी पढ़ा। शुभ रंग- मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग बहुत प्रिय है। मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन मां दुर्गा को सफेद रंग के पुष्प अर्पित करने चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को खीर, बर्फी, चीनी और पंचामृता का भोग लगा सकते हैं। Day 2 Navratri Puja Vidhi इस दिन आप पूजा के दौरान सफेद रंग के वस्त्रों को पहन सकते हैं। मां ब्रह्मचारिणी का बीज मंत्र: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए उनके बीज मंत्र ‘ह्रीं श्री अम्बिकायै नमः’ का 108 बार जाप कर सकते हैं। इसके अलावा ‘ या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।’ मंत्र का जाप करना भी बेहद शुभ माना जाता है। व्रत कथा – मां ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर जन्म लिया था। नारदजी की सलाह पर उन्होंने कठोर तप किया, ताकि वे भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त कर सकें। कठोर तप के कारण उनका ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी नाम पड़ा। Day 2 Navratri Puja Vidhi भगवान शिव की आराधना के दौरान उन्होंने 1000 वर्ष तक केवल फल-फूल खाए तथा 100 वर्ष तक शाक खाकर जीवित रहीं। कठोर तप से उनका शरीर क्षीण हो गया। Day 2 Navratri Puja Vidhi उनक तप देखकर सभी देवता, ऋषि-मुनि अत्यंत प्रभावित हुए। Day 2 Navratri Puja Vidhi उन्होंने कहा कि आपके जैसा तक कोई नहीं कर सकता है। आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगा। भगवान शिव आपको पति स्वरूप में प्राप्त होंगे। पूजा-विधि: Day 2 Navratri Puja Vidhi इस दिन सुबह उठकर जल्दी स्नान कर लें, फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें। मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें। अब मां दुर्गा को अर्घ्य दें। मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं। धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें। मां को भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की आरती:(Maa Brahmacharini Aarti) जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा। जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने। जो ​तेरी महिमा को जाने। रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना। ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी। Navratri 2025 2nd Day Maa Brahmacharini Puja : नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी पूजा, जाने पूजा विध, महत्व, मंत्र, भोग और पीले रंग का क्या है महत्व

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Kojagari Puja 2025

Kojagari Puja 2025 Date And Time: कोजागरी पूजा कब है? धरती पर पधारेंगी मां लक्ष्मी, नोट करें शुभ मुहूर्त और महत्व

Kojagari Puja 2025: कोजागरी पूर्णिमा (Kojagari Purnima) हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है, जिसे कोजागरी लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व अश्विन माह की पूर्णिमा पर मनाया जाता है। इसे शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) भी कहते हैं। माना जाता है कि पूर्णिमा तिथि मां लक्ष्मी की जन्म तिथि भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष रात्रि को मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करने आती हैं और अपने भक्तों के संकटों को दूर करती हैं। जो भी भक्त इस रात को जागरण करते हैं, Kojagari Puja 2025 माता लक्ष्मी उन पर विशेष कृपा बरसाती हैं और उन्हें धन-धान्य से सम्पन्न कर देती हैं। Kojagari Puja 2025 Date And Time : सही तारीख और तिथि कब है? इस वर्ष कोजागरी लक्ष्मी पूजा 6 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। कोजागर व्रत (Kojagar Vrat) सोमवार, 6 अक्टूबर को किया जाएगा। Kojagari Puja 2025 यह पूजा मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा असम आदि राज्यों में विशेष रूप से मनाई जाती है। पूर्णिमा तिथि का आरंभ और समापन:Beginning and end of Purnima Tithi अश्विन पूर्णिमा तिथि (यानी कोजागरी पूर्णिमा तिथि) का विवरण इस प्रकार है: • पूर्णिमा तिथि शुरू: 6 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से। • पूर्णिमा तिथि समाप्त: अगले दिन 7 अक्टूबर 2025 को सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर। कोजागरी लक्ष्मी पूजा 2025 शुभ मुहूर्त (Kojagari Puja Shubh Muhurat) मां लक्ष्मी की पूजा के लिए निशिता काल को सबसे उत्तम माना गया है। विवरण समय स्रोत कोजागरी पूजा निशिता काल समय रात 11 बजकर 45 मिनट से देर रात 12 बजकर 24 मिनट तक। (एक अन्य स्रोत में रात 12 बजकर 34 मिनट तक बताया गया है) चंद्रोदय समय शाम 5 बजकर 27 मिनट। (एक अन्य स्रोत में शाम 5 बजकर 26 मिनट बताया गया है) Importance of Kojagari Puja: Why is night vigil performed: कोजागरी पूजा का महत्व: क्यों किया जाता है रात्रि जागरण? हिंदू धर्म में इस पूजा का अत्यधिक महत्व है। दिवाली की तरह ही, इस दिन भी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। 1. ‘कोजागरी’ का अर्थ: हिन्दू धर्म के अनुसार, इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और यह देखती हैं कि ‘कौन रात्रि जागरण कर रहा है’। इसी कारण इस पूजा को ‘कोजागरी’ (Kojagari) कहा गया है। 2. धन-धान्य की प्राप्ति: जो व्यक्ति इस रात जागरण करता है (रात्रि जागरण करने वाले व्यक्ति का महालक्ष्मी कल्याण करती हैं), माता लक्ष्मी उसे धन-धान्य से सम्पन्न कर देती हैं। 3. अमृत वर्षा और इंद्र पूजा: इस दिन चंद्रमा से अमृत बरसता है, इसलिए चांद की पूजा महत्वपूर्ण मानी गई है। साथ ही, माता लक्ष्मी की विधि-विधान के साथ पूजा करने के साथ ही इंद्र (Indra) की भी पूजा की जाती है, जिससे पूजा करने वाले व्यक्ति के लिए धन प्राप्ति के द्वार खुल जाते हैं। 4. खुले द्वार: भक्त इस दिन अपने घरों में मिट्टी का दीपक जलाते हैं और पूजा के दौरान दरवाजे और खिड़कियां खुली छोड़ देते हैं, ताकि लक्ष्मी जी का आगमन हो सके। Description of Kojagari fast in Skanda Purana: स्कंद पुराण में कोजागरी व्रत का वर्णन स्कंद पुराण के अनुसार, Kojagari Puja 2025 कोजागरी पूजा को एक सर्वश्रेष्ठ व्रत बताया गया है। इस व्रत का विधिवत पालन करने से एक साधारण प्राणी भी उत्तम गति प्राप्त करता है, और इस जन्म तथा दूसरे जन्मों में भी ऐश्वर्य, आरोग्य एवं पुत्र-पौत्रादि का आनन्द भोगता है। Eight forms of Goddess Lakshmi:मां लक्ष्मी के आठ स्वरूप Kojagari Puja 2025 कोजागरी पूजा के दौरान माता लक्ष्मी के आठ स्वरूपों का ध्यान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। ये आठ स्वरूप हैं: धनलक्ष्मी, धन्य लक्ष्मी, राजलक्ष्मी, वैभवलक्ष्मी, ऐश्वर्य लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, कमला लक्ष्मी और विजय लक्ष्मी। Mantra to get the blessings of Mahalakshmi:महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए मंत्र Kojagari Puja 2025: कोजागरी पूजा के दिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इन मंत्रों का जप करना अत्यंत फलदायी होता है: 1. श्री लक्ष्मी बीज मंत्र ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः।। 2. लक्ष्मी प्रार्थना मंत्र नमस्ते सर्वगेवानां वरदासि हरे: प्रिया। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां या सा मे भूयात्वदर्चनात्।। 3. श्री लक्ष्मी महामंत्र ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।

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Padmanabha Dwadashi 2025

Padmanabha Dwadashi 2025 Date: पद्मनाभ द्वादशी तिथि, महत्व, और भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा विधि

Padmanabha Dwadashi 2025 Mein Kab Hai: हिंदू धर्म में द्वादशी तिथि का अत्यंत आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। द्वादशी चंद्र कैलेंडर के प्रत्येक पखवाड़े का बारहवां दिन होता है। यह तिथि एकादशी के उपवास और आध्यात्मिक अभ्यासों के ठीक बाद आती है, और इसे उपवास अनुष्ठानों और पूजा को पूरा करने के लिए एक अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। Padmanabha Dwadashi 2025 द्वादशी को अक्सर भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है, जिन्हें ब्रह्मांड का संरक्षक माना जाता है। भक्त दिव्य आशीर्वाद, आध्यात्मिक शुद्धि, और व्यक्तिगत विकास के लिए इस दिन विभिन्न अनुष्ठान और प्रार्थना करते हैं। Spiritual and physical importance of Padmanabha Dwadashi 2025 :द्वादशी का आध्यात्मिक और शारीरिक महत्व Padmanabha Dwadashi 2025: द्वादशी का पालन करने से व्यक्ति को कई आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक लाभ प्राप्त होते हैं। 1. एकादशी व्रत की पूर्णता द्वादशी एकादशी व्रत (उपवास) के समापन का दिन होता है और उपवास तोड़ने के लिए इसे अत्यधिक शुभ माना जाता है। उपवास तोड़ने का सही समय, जिसे पारण कहा जाता है, Padmanabha Dwadashi 2025 द्वादशी पर सूर्योदय के बाद और धार्मिक ग्रंथों द्वारा निर्दिष्ट समय के दौरान करना आवश्यक है। यह एकादशी के आध्यात्मिक लाभों को बनाए रखता है। 2. दैवीय कृपा और शुद्धि द्वादशी का पालन करने से आध्यात्मिक शुद्धि की भावना आती है, क्योंकि एकादशी का आत्म-अनुशासन और आत्म-नियंत्रण इस दिन आगे बढ़ता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से शांति, सुरक्षा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। 3. दान और करुणा का भाव द्वादशी दान और करुणा का दिन भी है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या दान देने से सद्भाव, दयालुता और निस्वार्थता के मूल्यों को बढ़ावा मिलता है। द्वादशी पर किए गए ऐसे कार्य धन्य और लाभकारी माने जाते हैं। 4. शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्पष्टता उपवास करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। द्वादशी उपवास मन और शरीर को सामंजस्य बिठाने में मदद करता है। यह मानसिक स्पष्टता और बेहतर एकाग्रता को भी बढ़ावा देता है, जिससे ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यासों पर बेहतर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। 5. मोक्ष की ओर मार्ग मान्यता है कि द्वादशी पर उपवास और भक्ति का ईमानदारी से अभ्यास करने वाले लोग चेतना की उच्च अवस्था प्राप्त कर सकते हैं और मोक्ष (मुक्ति) की ओर अपना मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। Padmanabha Dwadashi 2025: Worship of special form of Lord Vishnu:पद्मनाभ द्वादशी 2025: भगवान विष्णु के विशेष स्वरूप की पूजा Padmanabha Dwadashi 2025: पद्मनाभ द्वादशी आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाई जाती है। यह पापांकुशा एकादशी (Pasankusa Ekadasi) के ठीक अगले दिन होती है। पद्मनाभ द्वादशी का महत्व:Importance of Padmanabha Dwadashi यह व्रत श्री हरि विष्णु के अनंत पद्मनाभ स्वरूप को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, चातुर्मास में जब सूर्य कन्या राशि में आते हैं, Padmanabha Dwadashi 2025 तब आने वाली द्वादशी को पद्मनाभ द्वादशी कहा जाता है। चातुर्मास के दौरान श्री हरि क्षीरसागर में शयन करते हैं, और भगवान विष्णु की इसी विश्राम अवस्था को पद्मनाभ कहा जाता है। पद्मनाभ का अर्थ कमल भी है, क्योंकि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने विष्णु की नाभि-कमल से उत्पन्न होकर सृष्टि की रचना की थी। लाभ: जो व्यक्ति पद्मनाभ द्वादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। Padmanabha Dwadashi 2025 इस व्रत के प्रभाव से जीवन में धन-संपदा और वैभव की कमी नहीं होती है। विशेष पूजन से निर्धन भी अमीर बन जाते हैं और नि:संतानों को संतान सुख प्राप्त होता है। पद्मनाभ द्वादशी 2025 तिथि: पद्मनाभ व्रत 2025 की तिथि 4 अक्टूबर है। पद्मनाभ द्वादशी पूजा विधि (Puja Vidhi) पद्मनाभ द्वादशी पर विधि-विधान से पूजा की जाती है। यहां पूजा की चरण-दर-चरण विधि दी गई है: 1. स्थापना: घर की पूर्व दिशा में एक लाल कपड़े पर भगवान पद्मनाभ का चित्र स्थापित करें। 2. कलश स्थापना: एक पीतल का कलश स्थापित करें। इस कलश में जल, रोली, और सिक्के डालें। कलश के मुख पर अशोक के पत्ते रखें और उस पर नारियल रखें, फिर विधिवत पूजन करें। 3. पूजा सामग्री: गाय के घी (गौघृत) का दीपक जलाएं, गुलाब की अगरबत्ती जलाएं, चंदन और लाल फूल चढ़ाएं। 4. भोग: गेहूं और गुड़ के दलिए का भोग लगाएं। 5. तुलसी अर्पण: 12 तुलसी पत्र चढ़ाएं। 6. मंत्र जाप: लाल चंदन की माला से इस विशेष मंत्र का 108 बार जाप करें: ॐ पद्मनाभाय नम:।। 7. प्रसाद वितरण: पूजा समाप्त होने के बाद दलिए का प्रसाद वितरित करें। Devi Skandmata: मंत्र, प्रार्थना, स्तुति, ध्यान, स्तोत्र, कवच और आरती द्वादशी पर क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts) द्वादशी के दिन आध्यात्मिक लाभों को अधिकतम करने के लिए कुछ आचार संहिता का पालन करना महत्वपूर्ण है: क्या करें (Do’s) क्या न करें (Don’ts) एकादशी व्रत का पारण सही समय पर करें। भोजन में अति-लिप्तता से बचें; सादा, शाकाहारी भोजन करें। भारी, मसालेदार या तैलीय भोजन से बचें। भगवान विष्णु की पूजा करें, मंदिर जाएं या घर पर शांतिपूर्ण स्थान पर पूजा करें। मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन न करें। तुलसी के पौधे की पूजा करें (जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं)। नकारात्मक विचार या कार्य (जैसे गपशप या बहस) से बचें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या सुनें। तुलसी के पत्ते न काटें या तोड़ें। दान-पुण्य करें, जैसे जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, या धन दान करना। दिन में सोने से बचें, क्योंकि इससे आध्यात्मिक योग्यता कम हो सकती है। साफ और हल्के रंग के कपड़े पहनें। पैसे उधार देने या लेने जैसे वित्तीय लेनदेन से बचें।

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Devi Skandmata

Devi Skandmata: मंत्र, प्रार्थना, स्तुति, ध्यान, स्तोत्र, कवच और आरती

Devi Skandmata मां दुर्गा का दूसरा रूप हैं और माना जाता है कि वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं, जैसे एक मां अपने बच्चे को नुकसान से बचाती है। Devi Skandmata एक शक्तिशाली देवी हैं जिनके प्यार और देखभाल ने भगवान कार्तिकेय को राक्षस तारकासुर को हराने में मदद की। भगवान शिव और मां पार्वती के पहले पुत्र, भगवान कार्तिकेय को “स्कंद” के नाम से भी जाना जाता था। इसलिए, माँ पार्वती को अक्सर स्कंदमाता के रूप में जाना जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ कार्तिकेय या स्कंद की माँ है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि बुद्ध ग्रह देवी स्कंदमाता द्वारा शासित हैं। Devi Skandmata का स्वरुप देवी स्कंदमाता क्रूर सिंह पर विराजमान हैं। वह बच्चे मुरुगन को गोद में उठाती हैं। भगवान मुरुगन को कार्तिकेय और भगवान गणेश के भाई के रूप में भी जाना जाता है। देवी स्कंदमाता को चार हाथों से चित्रित किया गया है। वह अपने ऊपर के दोनों हाथों में कमल के फूल लिए हुए हैं। वह अपने एक दाहिने हाथ में मुरुगन को रखती है और दूसरे को अभय मुद्रा में रखती है। वह कमल के फूल पर विराजमान हैं और इसी वजह से स्कंदमाता को देवी पद्मासन के नाम से भी जाना जाता है। देवी स्कंदमाता का रंग शुभ्रा (शुभ्र) है जो उनके सफेद रंग का वर्णन करता है। देवी पार्वती के इस रूप की पूजा करने वाले भक्तों को भगवान कार्तिकेय की पूजा का लाभ मिलता है। यह गुण केवल देवी पार्वती के स्कंदमाता रूप में है। Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्रि 5वें दिन स्कंदमाता पूजन विधि, मंत्र, आरती और प्रसाद का महत्व Devi Skandmata Mantra:देवी स्कंदमाता मंत्र ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ Om Devi Skandamatayai Namah॥ goddess skandamata prayer:देवी स्कंदमाता प्रार्थना सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ Simhasanagata Nityam Padmanchita Karadvaya।Shubhadastu Sada Devi Skandamata Yashasvini॥ Devi Skandmata Stuthi:स्तुति या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ Ya Devi Sarvabhuteshu Ma Skandamata Rupena Samsthita।Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah॥ देवी स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय को अपनी दाहिनी भुजा में पकड़े हुए दिखाई देती हैं Devi Skandmata Dyan:देवी स्कंदमाता ध्यान वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम्॥ धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पञ्चम दुर्गा त्रिनेत्राम्।अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल धारिणीम्॥ प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् पीन पयोधराम्।कमनीयां लावण्यां चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥ Vande Vanchhita Kamarthe Chandrardhakritashekharam।Simharudha Chaturbhuja Skandamata Yashasvinim॥ Dhawalavarna Vishuddha Chakrasthitom Panchama Durga Trinetram।Abhaya Padma Yugma Karam Dakshina Uru Putradharam Bhajem॥ Patambara Paridhanam Mriduhasya Nanalankara Bhushitam।Manjira, Hara, Keyura, Kinkini, Ratnakundala Dharinim॥ Praphulla Vandana Pallavadharam Kanta Kapolam Pina Payodharam।Kamaniyam Lavanyam Charu Triwali Nitambanim॥ Devi Skandmata Stotra:देवी स्कंदमाता स्तोत्र नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।समग्रतत्वसागरम् पारपारगहराम्॥ शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रदीप्ति भास्कराम्॥ महेन्द्रकश्यपार्चितां सनत्कुमार संस्तुताम्।सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलाद्भुताम्॥ अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।मुमुक्षुभिर्विचिन्तितां विशेषतत्वमुचिताम्॥ नानालङ्कार भूषिताम् मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेदमार भूषणाम्॥ सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्र वैरिघातिनीम्।शुभां पुष्पमालिनीं सुवर्णकल्पशाखिनीम्॥ तमोऽन्धकारयामिनीं शिवस्वभावकामिनीम्।सहस्रसूर्यराजिकां धनज्जयोग्रकारिकाम्॥ सुशुध्द काल कन्दला सुभृडवृन्दमज्जुलाम्।प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरम् सतीम्॥ स्वकर्मकारणे गतिं हरिप्रयाच पार्वतीम्।अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥ पुनः पुनर्जगद्धितां नमाम्यहम् सुरार्चिताम्।जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवी पाहिमाम्॥ Namami Skandamata Skandadharinim।Samagratatvasagaram Paraparagaharam॥ Shivaprabha Samujvalam Sphuchchhashagashekharam।Lalataratnabhaskaram Jagatpradipti Bhaskaram॥ Mahendrakashyaparchita Sanantakumara Samstutam।Surasurendravandita Yatharthanirmaladbhutam॥ Atarkyarochiruvijam Vikara Doshavarjitam।Mumukshubhirvichintitam Visheshatatvamuchitam॥ Nanalankara Bhushitam Mrigendravahanagrajam।Sushuddhatatvatoshanam Trivedamara Bhushanam॥ Sudharmikaupakarini Surendra Vairighatinim।Shubham Pushpamalinim Suvarnakalpashakhinim॥ Tamoandhakarayamini Shivasvabhavakaminim।Sahasrasuryarajikam Dhanajjayogakarikam॥ Sushuddha Kala Kandala Subhridavrindamajjulam।Prajayini Prajawati Namami Mataram Satim॥ Swakarmakarane Gatim Hariprayacha Parvatim।Anantashakti Kantidam Yashoarthabhuktimuktidam॥ Punah Punarjagadditam Namamyaham Surarchitam।Jayeshwari Trilochane Prasida Devi Pahimam॥ Devi Skandmata Kavach:देवी स्कंदमाता कवच ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मधरापरा।हृदयम् पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥ श्री ह्रीं हुं ऐं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा।सर्वाङ्ग में सदा पातु स्कन्दमाता पुत्रप्रदा॥ वाणवाणामृते हुं फट् बीज समन्विता।उत्तरस्या तथाग्ने च वारुणे नैॠतेअवतु॥ इन्द्राणी भैरवी चैवासिताङ्गी च संहारिणी।सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥ Aim Bijalinka Devi Padayugmadharapara।Hridayam Patu Sa Devi Kartikeyayuta॥ Shri Hrim Hum Aim Devi Parvasya Patu Sarvada।Sarvanga Mein Sada Patu Skandamata Putraprada॥ Vanavanamritem Hum Phat Bija Samanvita।Uttarasya Tathagne Cha Varune Nairiteavatu॥ Indrani Bhairavi Chaivasitangi Cha Samharini।Sarvada Patu Mam Devi Chanyanyasu Hi Dikshu Vai॥ Devi Skandmata Aarti:देवी स्कंदमाता आरती जय तेरी हो स्कन्द माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता॥सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी॥तेरी जोत जलाता रहूं मैं। हरदम तुझे ध्याता रहूं मै॥कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा॥कही पहाड़ों पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा॥हर मन्दिर में तेरे नजारे। गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥इन्द्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खण्ड हाथ उठाए॥दासों को सदा बचाने आयी। भक्त की आस पुजाने आयी॥

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Skanda Mata

Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्रि 5वें दिन स्कंदमाता पूजन विधि, मंत्र, आरती और प्रसाद का महत्व

Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की उपासना की जाती है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम दिया गया है। भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं। Skanda Mata ki Puja Kese Kare:  नवरात्रि की पंचमी तिथि को मां दुर्गा के पंचम स्वरूप माता स्कंदमाता की पूजा का विधान है। मान्यता है कि यह मां अपने भक्तों पर स्नेह लुटाती हैं। Skanda Mata Puja Vidhi मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करने से नकारात्मक शक्तियों दूर होती हैं और कार्यों की विघ्न-बाधा भी खत्म होती है। मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा नवरात्रि की पंचमी तिथि पर की जाती है। Skanda Mata स्कंदमाता की भक्तिभाव से पूजा-अर्चना करने व व्रत करने से जातक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण मां दुर्गा के इस स्वूप को स्कंदमाता का नाम मिला। जानें मां स्कंदमाता की पूजा विधि, भोग, मंत्र व आरती। मां स्कंदमाता का स्वरूप- Skanda Mata मां स्कंदमाता के स्वरूप की बात करें तो मां की गोद में स्कंद देव विराजमान हैं। मां कमल के आसन पर विराजमान हैं, जिसके कारण मां स्कंदमाता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है। Skanda Mata मां का वाहन सिंह है। मान्यता है कि मां भगवती के पंचम स्वरूप की उपासना करने से संतान संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। स्कंदमाता पूजा विधि– इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां स्कंदमाता को गंगाजल से स्नान कराएं। चुनरी व वस्त्र आदि अर्पित करें। रोली, कुमकुम आदि लगाएं। Skanda Mata इसके बाद मां को मिठाई व फलों का भोग लगाएं। मां की आरती करें। स्कंदमाता का प्रिय भोग- मान्यता है कि मां स्कंदमाता को केले का भोग अतिप्रिय है। Skanda Mata आप माता रानी को खीर का भोग भी लगा सकते हैं। स्कंदमाता का प्रिय रंग- नवरात्रि के पांचवें दिन का शुभ रंग पीला व सफेद है। मां की पूजा के समय श्वेत रंग या पीले रंग के वस्त्र धारण कर सकते हैं। Skanda Mata:स्कंदमाता का मंत्र या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः Skandmata Aarti:स्कंदमाता की आरती जय तेरी हो स्कंद माता, पांचवां नाम तुम्हारा आता। सबके मन की जानन हारी, जग जननी सबकी महतारी। तेरी ज्योत जलाता रहू मैं, हरदम तुझे ध्याता रहू मैं। कई नामों से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा। कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरों में तेरा बसेरा। हर मंदिर में तेरे नजारे, गुण गाए तेरे भक्त प्यारे। भक्ति अपनी मुझे दिला दो, शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो। इंद्र आदि देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे। दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए, तू ही खंडा हाथ उठाए। दासों को सदा बचाने आयी, भक्त की आस पुजाने आयी। कैसे करें पूजन: How to Worship सबसे पहले चौकी (बाजोट) पर स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें।  चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर कलश रखें। उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका (सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें।  इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा स्कंदमाता सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें।  इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें। Skanda Mata Puja Vidhi:स्कंदमाता के मंत्र मां स्कंदमाता का वाहन सिंह है। इस मंत्र के उच्चारण के साथ मां की आराधना की जाती है।  सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ संतान प्राप्ति हेतु जपें स्कंद माता का मंत्र पंचमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी स्कन्द माता हैं। जिन व्यक्तियों को संतानाभाव हो, वे माता की पूजन-अर्चन तथा मंत्र जप कर लाभ उठा सकते हैं। मंत्र अत्यंत सरल है – ‘ॐ स्कन्दमात्रै नम:।।’ निश्चित लाभ होगा। इसके अतिरिक्त इस मंत्र से भी मां की आराधना की जाती है: या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। भोग एवं प्रसाद – पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है। Durga Puja 2025 Date And Time :दुर्गा पूजा 2025 कब से होगी शुरू? जानें महत्वपूर्ण तिथियां, घटस्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्रि 5वें दिन स्कंदमाता पूजन विधि, मंत्र, आरती और प्रसाद का महत्व Read More »

Durga Puja 2025

Durga Puja 2025 Date And Time :दुर्गा पूजा 2025 कब से होगी शुरू? जानें महत्वपूर्ण तिथियां, घटस्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

Durga Puja 2025 Mein Kab suru hogi: हिंदू धर्म में दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्रि के दौरान मनाई जाने वाली दुर्गा पूजा विशेष रूप से पूर्वी भारत में, खासकर बंगाल, ओडिशा और असम में बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाई जाती है। इस पर्व को दुर्गोत्सव के नाम से भी जाना जाता है और यह देवी दुर्गा की पूजा का एक प्रमुख त्योहार है। यह अवधि नवदुर्गाओं की उपासना के लिए उत्तम मानी गई है। देवी दुर्गा का धरती पर आगमन देवी पक्ष के पहले दिन होता है और Durga Puja 2025 दुर्गा विसर्जन के दिन वह प्रस्थान करती हैं। मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान वाले दिन महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इन दिनों से आने वाले समय का अनुमान किया जाता है और यह माना जाता है कि मां के आगमन और प्रस्थान से भविष्य में शुभ और अशुभ स्थितियों का संकेत मिलता है। आइए, जानते हैं साल 2025 में दुर्गा पूजा और शारदीय नवरात्रि से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण तिथियां, घटस्थापना मुहूर्त और पूजा सामग्री के बारे में: Shardiya Navratri 2025 start and end Date: शारदीय नवरात्रि 2025: कब से कब तक? वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2025 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर 2025, सोमवार से हो रही है, जो 1 अक्टूबर 2025, बुधवार तक चलेगी। इस बार नवरात्रि 10 दिनों की होगी, क्योंकि तृतीया तिथि दो दिन रहेगी। इस दौरान Durga Puja 2025 मां दुर्गा की पूजा और व्रत करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। Durga Puja 2025: Important dates of Durga festival:दुर्गा पूजा 2025: दुर्गोत्सव की प्रमुख तिथियां Durga Puja 2025:दुर्गोत्सव पांच दिनों तक मनाया जाता है, Durga Puja 2025 जिसमें षष्ठी, महासप्तमी, महाष्टमी, महानवमी और विजयादशमी के दिन विशेष रूप से पूजे जाते हैं। Durga Puja vidhi 2025:दुर्गा पूजा की विधि क्या है? Durga Puja 2025:दुर्गा पूजा विधि में सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, फिर अपने घर के मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें. कलश स्थापना करें, दीप जलाकर गंगाजल छिड़कें, फिर अक्षत, सिंदूर, लाल फूल और फल-मिठाई मां को अर्पित करें. दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, और अंत में मां की आरती करके प्रसाद बांटें.  Durga Puja 2025:मुख्य पूजा विधि अतिरिक्त जानकारी Start of Durga Puja (Shashthi Tithi): 28 September 2025, Sunday:दुर्गा पूजा की शुरुआत (षष्ठी तिथि): 28 सितंबर 2025, रविवार     ◦ इस दिन मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है।     ◦ दुर्गा पूजा की मूर्ति स्थापना के लिए यह दिन शुभ माना गया है।     ◦ मूर्ति स्थापना का उत्तम मुहूर्त: सुबह 06:08 बजे से लेकर 10:30 बजे तक।     ◦ इस दिन बिल्व निमंत्रण और पंडाल सजाने की परंपरा भी निभाई जाती है। संधि पूजा (अष्टमी तिथि): 30 सितंबर 2025, मंगलवार     ◦ संधि पूजा अष्टमी और नवमी के संधिकाल में की जाती है।     ◦ संधिकाल का मुहूर्त: रात्रि 07:36 बजे से 08:24 बजे तक।     ◦ इस समय 108 दीपों और 108 कमल पुष्पों से मां की पूजा की जाती है।     ◦ यह समय मां दुर्गा के चामुंडा रूप की आराधना के लिए अत्यंत विशेष होता है। दुर्गा विसर्जन (विजयादशमी): 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों और तालाबों में किया जाएगा। शारदीय नवरात्रि 2025: घटस्थापना का महत्व और मुहूर्त शारदीय नवरात्रि Durga Puja 2025 के पहले दिन कलश स्थापना (घटस्थापना) की जाती है। Durga Puja 2025 ऐसा माना जाता है कि कलश स्थापना में विशेष चीजों को शामिल करने से साधक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और मां दुर्गा जीवन के सभी दुखों को दूर करती हैं। घटस्थापना के शुभ मुहूर्त: 22 सितंबर 2025, सोमवार को घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं: • पहला मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 09 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 06 मिनट तक। • दूसरा मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त): 11 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक। आप इन दोनों में से किसी भी मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं। Durga Panchami 2025 Start Date: दुर्गा पूजा 2025: कब से शुरू होगी यह महापर्व, जानें शुभ तिथियां और महत्व ! Shardiya Navratri 2025 Puja Samagri: घटस्थापना की सामग्री लिस्ट शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए आपको इन चीजों की आवश्यकता होगी: • अनाज, साफ जवा • कलश • गंगाजल • सुपारी, मौली, रोली • जटा वाला नारियल • आम या अशोक के पत्ते • मिट्टी का बर्तन • किसी पवित्र स्थान की मिट्टी (मंदिर आदि) • अखंड ज्योति के लिए बड़ा दीया, रुई की बाती • लाल सूत्र, सिक्का • लाल कपड़ा • फूल, फूल माला • इलायची, लौंग, कपूर • अक्षत, हल्दी इस तरह करें घटस्थापना (कलश स्थापना विधि) • सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। • इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करें। • कलश स्थापना के लिए घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। • कलश में साफ जल भरकर उसमें सिक्का, फूल और अक्षत डालें। • इसके बाद कलश पर स्वास्तिक बनाएं और कलावा लपेट दें। • लाल चुनरी में नारियल को लपेट कर कलश के ऊपर रख दें। • देसी घी का दीपक जलाकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करें। • व्रत कथा का पाठ करें। • फल और मिठाई का भोग लगाएं। मां दुर्गा के शक्तिशाली मंत्र मां दुर्गा की उपासना के दौरान आप इन मंत्रों का जप कर सकते हैं: • ॐ ह्रींग डुंग दुर्गायै नमः • ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै • सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।। मां दुर्गा का आह्वान मंत्र: • ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

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Devi Skandmata

Devi Skandmata: मंत्र, प्रार्थना, स्तुति, ध्यान, स्तोत्र, कवच और आरती

Devi Skandmata मां दुर्गा का रूप हैं और माना जाता है कि वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं, जैसे एक मां अपने बच्चे को नुकसान से बचाती है। Devi Skandmata एक शक्तिशाली देवी हैं जिनके प्यार और देखभाल ने भगवान कार्तिकेय को राक्षस तारकासुर को हराने में मदद की। भगवान शिव और मां पार्वती के पहले पुत्र, भगवान कार्तिकेय को “स्कंद” के नाम से भी जाना जाता था। Devi Skandmata इसलिए, माँ पार्वती को अक्सर स्कंदमाता के रूप में जाना जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ कार्तिकेय या स्कंद की माँ है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि बुद्ध ग्रह देवी स्कंदमाता द्वारा शासित हैं। Devi Skandmata का स्वरुप देवी स्कंदमाता Devi Skandmata क्रूर सिंह पर विराजमान हैं। वह बच्चे मुरुगन को गोद में उठाती हैं। भगवान मुरुगन को कार्तिकेय और भगवान गणेश के भाई के रूप में भी जाना जाता है। देवी स्कंदमाता को चार हाथों से चित्रित किया गया है। वह अपने ऊपर के दोनों हाथों में कमल के फूल लिए हुए हैं। वह अपने एक दाहिने हाथ में मुरुगन को रखती है और दूसरे को अभय मुद्रा में रखती है। वह कमल के फूल पर विराजमान हैं और इसी वजह से स्कंदमाता को देवी पद्मासन के नाम से भी जाना जाता है। देवी स्कंदमाता Devi Skandmata का रंग शुभ्रा (शुभ्र) है जो उनके सफेद रंग का वर्णन करता है। Devi Skandmata देवी पार्वती के इस रूप की पूजा करने वाले भक्तों को भगवान कार्तिकेय की पूजा का लाभ मिलता है। यह गुण केवल देवी पार्वती के स्कंदमाता रूप में है। देवी स्कंदमाता मंत्र ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ Om Devi Skandamatayai Namah॥ देवी स्कंदमाता प्रार्थना सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ Simhasanagata Nityam Padmanchita Karadvaya।Shubhadastu Sada Devi Skandamata Yashasvini॥ Devi Skandmata स्तुति या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ Ya Devi Sarvabhuteshu Ma Skandamata Rupena Samsthita।Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah॥ देवी स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय को अपनी दाहिनी भुजा में पकड़े हुए दिखाई देती हैं देवी स्कंदमाता ध्यान वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम्॥ धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पञ्चम दुर्गा त्रिनेत्राम्।अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल धारिणीम्॥ प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् पीन पयोधराम्।कमनीयां लावण्यां चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥ Vande Vanchhita Kamarthe Chandrardhakritashekharam।Simharudha Chaturbhuja Skandamata Yashasvinim॥ Dhawalavarna Vishuddha Chakrasthitom Panchama Durga Trinetram।Abhaya Padma Yugma Karam Dakshina Uru Putradharam Bhajem॥ Patambara Paridhanam Mriduhasya Nanalankara Bhushitam।Manjira, Hara, Keyura, Kinkini, Ratnakundala Dharinim॥ Praphulla Vandana Pallavadharam Kanta Kapolam Pina Payodharam।Kamaniyam Lavanyam Charu Triwali Nitambanim॥ देवी स्कंदमाता स्तोत्र नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।समग्रतत्वसागरम् पारपारगहराम्॥ शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रदीप्ति भास्कराम्॥ महेन्द्रकश्यपार्चितां सनत्कुमार संस्तुताम्।सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलाद्भुताम्॥ अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।मुमुक्षुभिर्विचिन्तितां विशेषतत्वमुचिताम्॥ नानालङ्कार भूषिताम् मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेदमार भूषणाम्॥ सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्र वैरिघातिनीम्।शुभां पुष्पमालिनीं सुवर्णकल्पशाखिनीम्॥ तमोऽन्धकारयामिनीं शिवस्वभावकामिनीम्।सहस्रसूर्यराजिकां धनज्जयोग्रकारिकाम्॥ सुशुध्द काल कन्दला सुभृडवृन्दमज्जुलाम्।प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरम् सतीम्॥ स्वकर्मकारणे गतिं हरिप्रयाच पार्वतीम्।अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥ पुनः पुनर्जगद्धितां नमाम्यहम् सुरार्चिताम्।जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवी पाहिमाम्॥ Namami Skandamata Skandadharinim।Samagratatvasagaram Paraparagaharam॥ Shivaprabha Samujvalam Sphuchchhashagashekharam।Lalataratnabhaskaram Jagatpradipti Bhaskaram॥ Sushuddha Kala Kandala Subhridavrindamajjulam।Prajayini Prajawati Namami Mataram Satim॥ Swakarmakarane Gatim Hariprayacha Parvatim।Anantashakti Kantidam Yashoarthabhuktimuktidam॥ Punah Punarjagadditam Namamyaham Surarchitam।Jayeshwari Trilochane Prasida Devi Pahimam॥ देवी स्कंदमाता कवच ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मधरापरा।हृदयम् पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥ श्री ह्रीं हुं ऐं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा।सर्वाङ्ग में सदा पातु स्कन्दमाता पुत्रप्रदा॥ वाणवाणामृते हुं फट् बीज समन्विता।उत्तरस्या तथाग्ने च वारुणे नैॠतेअवतु॥ इन्द्राणी भैरवी चैवासिताङ्गी च संहारिणी।सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥ Aim Bijalinka Devi Padayugmadharapara।Hridayam Patu Sa Devi Kartikeyayuta॥ Shri Hrim Hum Aim Devi Parvasya Patu Sarvada।Sarvanga Mein Sada Patu Skandamata Putraprada॥ Vanavanamritem Hum Phat Bija Samanvita।Uttarasya Tathagne Cha Varune Nairiteavatu॥ Indrani Bhairavi Chaivasitangi Cha Samharini।Sarvada Patu Mam Devi Chanyanyasu Hi Dikshu Vai॥ देवी स्कंदमाता आरती जय तेरी हो स्कन्द माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता॥सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी॥तेरी जोत जलाता रहूं मैं। हरदम तुझे ध्याता रहूं मै॥कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा॥कही पहाड़ों पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा॥हर मन्दिर में तेरे नजारे। गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥इन्द्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खण्ड हाथ उठाए॥दासों को सदा बचाने आयी। भक्त की आस पुजाने आयी॥ Maa Kushmanda: मंत्र, प्रार्थना, स्तुति, ध्यान, स्तोत्र, कवच और आरती

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Skanda Mata

Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्रि के 5वें दिन करें मां स्कंदमाता का पूजन: विधि, मंत्र और आरती सहित सम्पूर्ण जानकारी

Skanda Mata Ki Puja Kese Kare: नवरात्रि का पावन पर्व, देवी दुर्गा की शक्ति और भक्ति का उत्सव है. नौ दिनों और दस रातों तक चलने वाले इस महापर्व में, प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक विशिष्ट स्वरूप की पूजा की जाती है. Skanda Mata Puja Vidhi पांचवां दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप, मां स्कंदमाता को समर्पित है. यह दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मां स्कंदमाता अपने भक्तों पर पुत्र के समान स्नेह लुटाती हैं. Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्रि के 5वें दिन करें मां स्कंदमाता का पूजन मां स्कंदमाता का स्वरूप:Form of Mother skandamata Skanda Mata मां स्कंदमाता, स्कंद कुमार भगवान कार्तिकेय की माता हैं. भगवान स्कंद बालरूप में उनकी गोद में विराजमान हैं. मां कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है. Skanda Mata मां का वाहन सिंह है. इन्हें गौरी, माहेश्वरी, पार्वती और उमा जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है. मां स्कंदमाता का महत्व और पूजा से लाभ:Importance and benefits of worshiping Mother Skandamata नवरात्रि के पांचवें दिन पंचमी तिथि पर Skanda Mata मां स्कंदमाता की उपासना विशेष रूप से की जाती है. मां की उपासना से कई अलौकिक लाभ प्राप्त होते हैं: संतान सुख की प्राप्ति: जिन व्यक्तियों को संतान की इच्छा होती है, वे Skanda Mata मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चन और मंत्र जप से निश्चित रूप से लाभ उठा सकते हैं. नकारात्मक शक्तियों का नाश: मां की उपासना से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं. बुद्धि का विकास: भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है. परम शांति और सुख: देवी के इस स्वरूप की आराधना से व्यक्ति की सभी कामनाएं पूर्ण होती हैं, मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है और परम शांति व सुख का अनुभव होता है. अलौकिक तेज की प्राप्ति: मां को विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है, और उनकी उपासना से अलौकिक तेज की प्राप्ति होती है. स्कंदमाता पूजन विधि:Skandamata worship method मां स्कंदमाता की पूजा अत्यंत सरल और फलदायी है. यहाँ चरण-दर-चरण पूजन विधि दी गई है: 1. शुद्धिकरण: सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजन से पहले चौकी (बाजोट) पर मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और उसे गंगाजल या गोमूत्र से शुद्ध करें. 2. कलश स्थापना: चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर कलश स्थापित करें. 3. अन्य देवताओं की स्थापना: उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका (सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें. 4. संकल्प: इसके बाद व्रत और पूजन का संकल्प लें. 5. षोडशोपचार पूजा: वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा Skanda Mata स्कंदमाता सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें. इसमें निम्नलिखित क्रियाएं शामिल हैं: Skanda Mata आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा और मंत्र पुष्पांजलि. 6. भोग अर्पित करें: मां को मिष्ठान और पांच प्रकार के फलों का भोग लगाएं. विशेष रूप से, मां को केले का भोग अति प्रिय है और आप खीर का प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं. 7. ध्यान और आरती: मां स्कंदमाता का अधिक से अधिक ध्यान करें और अंत में मां की आरती अवश्य करें. 8. प्रसाद वितरण: पूजन संपन्न होने के बाद प्रसाद का वितरण करें. मां स्कंदमाता के शक्तिशाली मंत्र:Powerful mantras of Mother Skandamata मां की आराधना के लिए इन मंत्रों का जाप करें: मूल मंत्र: सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ सरल मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ संतान प्राप्ति हेतु विशेष मंत्र: ‘ॐ स्कन्दमात्रै नम:।।’ (यह मंत्र संतान प्राप्ति के लिए अत्यंत सरल और निश्चित लाभ देने वाला है). सार्वभौमिक मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। भोग और प्रसाद:Bhog and Prasad मां स्कंदमाता को केला अति प्रिय है. पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए. ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है. आप मां को खीर का प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं. शुभ रंग Skanda Mata मां स्कंदमाता को श्वेत रंग प्रिय है. मां की उपासना में श्वेत रंग के वस्त्रों का प्रयोग करना शुभ माना जाता है. पूजा के समय पीले रंग के वस्त्र धारण करना भी अत्यंत शुभ होता है. मां स्कंदमाता की आरती:Aarti of Maa Skandamata जय तेरी हो स्कंद माता, पांचवा नाम तुम्हारा आता. सब के मन की जानन हारी, जग जननी सब की महतारी. तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं, हरदम तुम्हे ध्याता रहूं मैं. कई नामो से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा. कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरों में तेरा बसेरा. हर मंदिर में तेरे नजारे गुण गाये, तेरे भगत प्यारे भगति. अपनी मुझे दिला दो शक्ति, मेरी बिगड़ी बना दो. इन्दर आदी देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे. दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये, तुम ही खंडा हाथ उठाये दासो को सदा बचाने आई, चमन की आस पुजाने आई। Durga Panchami 2025 Start Date: दुर्गा पूजा 2025: कब से शुरू होगी यह महापर्व, जानें शुभ तिथियां और महत्व !

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