Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी : भगवान गणेश के मूषक की रोचक कथा

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Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी : भगवान गणेश के मूषक की रोचक कथा
KARMASU 3 September 2024 5 मिनट पढ़ें
GANESH📅 3 September 2024⏱ 5 मिनट
इस लेख में
  1. Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय
  2. पहली कथा
  3. Ganesh ji पराशर ऋषि के आश्रम में मूषक रूप में लिया जन्म
  4. Ganesh ji गणेशजी ने इस तरह किया मूषक को अपने वश में 
  5. Ganesh ji दूसरी कथा
  6. मूषक का महत्व

Ganesh and mushak story in hindi: शास्त्रों और पुराणों में सिंह, मयूर और मूषक को गणेश जी का वाहन बताया गया है। गणेश पुराण के क्रीडाखण्ड (1) – में उल्लेख है कि सतयुग में गणेशजी का वाहन सिंह है। त्रेता युग में उनका वाहन मयूर है। द्वापर युग में उनका वाहन मूषक हैं और कलयुग में वे घोड़े पर आरूढ़ होंगे। आओ जानते हैं कि किस तरह गणेशजी का मूषक वाहन बना।

Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर हम सभी भगवान गणेश की पूजा करते हैं। गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है और उनकी सवारी मूषक यानी चूहा होती है। क्या आप जानते हैं कि गणेश जी और उनके मूषक के बीच का यह रिश्ता इतना खास क्यों है? आइए जानते हैं इस रोचक कथा के बारे में।

Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय

पहली कथा

पूर्वजन्म में मूषक था एक गंधर्व : एक पौराणिक कथा के अनुसार राजा इंद्र के दरबार में क्रौंच नामक गंधर्व था। एक बार इंद्र किसी गंभीर विषय पर चर्चा कर रहे थे लेकिन क्रौंच किसी और ही मूड में था। वह अप्सराओं से हंसी ठिठोली कर रहा था। इंद्र का ध्यान उस पर गया तो नाराज इंद्र ने उसे चूहा बन जाने का शाप दे दिया।

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Ganesh ji पराशर ऋषि के आश्रम में मूषक रूप में लिया जन्म

इंद्र के श्राप के चलते मूषक के रूप में वह सीधे पराशर ऋषि के आश्रम में आ गिरा। क्रौंच का चंचल स्वभाव तो बदलने से रहा। आते ही उसने भयंकर उत्पात मचा दिया, आश्रम के सारे मिट्टी के पात्र तोड़कर सारा अन्न समाप्त कर दिया। आश्रम की वाटिका उजाड़ डाली, ऋषियों के समस्त वल्कल वस्त्र और ग्रंथ कुतर दिए। 

आश्रम की सभी उपयोगी वस्तुएं नष्ट हो जाने के कारण पराशर ऋषि बहुत दुखी हुए और अपने पूर्व जन्म के कर्मों को कोसने लगे कि किस अपकर्म के फलस्वरूप मेरे आश्रम की शांति भंग हो गई है। अब इस चूहे के आतंक से कैसे निजात मिले? तब पराशर ऋषि श्री गणेश की शरण में गए। गणेश जी ने पराशर जी को कहा कि मैं अभी इस मूषक को अपना वाहन बना लेता हूं। 

Ganesh ji गणेशजी ने इस तरह किया मूषक को अपने वश में 

Ganesh ji गणेश जी ने अपना तेजस्वी पाश फेंका, पाश उस मूषक का पीछा करता पाताल तक गया और उसका कंठ बांध लिया और उसे घसीट कर बाहर निकाल गजानन के सम्मुख उपस्थित कर दिया। पाश की पकड़ से मूर्छित मूषक जब आंख खुली तो भयभीत होकर उसने गणेश जी की आराधना शुरू कर दी और अपने प्राणों की भीख मांगने लगा।

Ganesh ji गणेश जी मूषक की स्तुति से प्रसन्न तो हुए लेकिन उन्होंने कहा कि तूने ऋषियों को बहुत कष्ट दिया है। मैंने दुष्टों के नाश एवं साधु पुरुषों के कल्याण के लिए ही अवतार लिया है, लेकिन शरणागत की रक्षा भी मेरा परम धर्म है, इसलिए जो वरदान चाहो मांग लो।

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ऐसा सुनकर उस उत्पाती मूषक का अहंकार फिर से जाग उठा और वह बोला, ‘मुझे आपसे कुछ नहीं मांगना है, आप चाहें तो मुझसे वर की याचना कर सकते हैं।

मूषक की गर्वभरी वाणी सुनकर गणेश जी मन ही मन मुस्कराए और कहा, ‘यदि तेरा वचन सत्य है तो तू मेरा वाहन बन जा। मूषक के तथास्तु कहते ही गणेश जी तुरंत उस पर आरूढ़ हो गए। 

भारी भरकम गजानन के भार से दबकर मूषक को प्राणों का संकट बन आया। तब उसने गणेशजी से प्रार्थना की कि वे अपना भार उसके वहन करने योग्य बना लें। इस तरह मूषक का गर्व चूरकर गणेश जी ने उसे अपना वाहन बना लिया।

Ganesh ji दूसरी कथा

Ganesh ji गजमुखासुर नामक दैत्य ने अपने बाहुबल से देवताओं को बहुत परेशान कर दिया। सभी देवता एकत्रित होकर भगवान गणेश के पास पहुंचे। तब भगवान श्रीगणेश ने उन्हें गजमुखासुर से मुक्ति दिलाने का भरोसा दिलाया। तब श्रीगणेश का गजमुखासुर दैत्य से भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध में श्रीगणेश का एक दांत टूट गया। तब क्रोधित होकर श्रीगणेश ने टूटे दांत से गजमुखासुर पर ऐसा प्रहार किया कि वह घबराकर चूहा बनकर भागा लेकिन गणेशजी ने उसे पकड़ लिया। मृत्यु के भय से वह क्षमायाचना करने लगा। तब श्रीगणेश ने मूषक रूप में ही उसे अपना वाहन बना लिया।

मूषक का महत्व

  • विघ्नहर्ता: चूहा बहुत छोटा जीव है, लेकिन भगवान गणेश ने उसे अपनी सवारी बनाकर यह संदेश दिया कि कोई भी छोटा या कमजोर नहीं होता है।
  • ज्ञान का प्रतीक: चूहा बहुत चालाक और बुद्धिमान होता है। यह ज्ञान का प्रतीक है।
  • विश्वास का प्रतीक: भगवान गणेश ने चूहे पर पूरा विश्वास किया, भले ही उसे श्राप मिला हो। यह विश्वास का प्रतीक है।

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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