April 18, 2025

Buddh Stotra

Buddh Stotra | बुध स्तोत्र

Buddh Stotra बुद्ध स्तोत्र: बुध ग्रह, बुध ग्रह, हमारी जन्म कुंडली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह हमारे जीवन को प्रभावित करता है। पौराणिक हिंदू पौराणिक कथाओं में, बुद्ध को देवता भी माना जाता है। ज्योतिष में, बुध ग्रह (बुद्ध ग्रह) तर्क, चुस्त दिमाग और याददाश्त, बुद्धि और बुद्धि का प्रतिनिधित्व करता है। बुध को सभी नौ ग्रहों में राजकुमार का स्थान दिया गया है। यह शुभ ग्रहों के साथ होने पर अच्छे परिणाम देता है और पाप ग्रहों के साथ होने पर बुरे परिणाम देता है। आपने सुना होगा कि कई बार, बुध ग्रह की स्थिति हमारे जीवन में नकारात्मक या बुरे प्रभाव पैदा कर सकती है Buddh Stotra जैसे व्यापार में नुकसान, स्वास्थ्य समस्याएं, शिक्षा में रुकावट और कई अन्य चीजें। जब कोई ग्रह गोचर के दौरान अशुभ परिणाम देता है, तो उस ग्रह के बुरे प्रभावों को शांत करने के लिए उपाय करना आवश्यक होता है। किसी ग्रह की महादशा या दशा के दौरान किए जाने वाले उपायों का अभ्यास लाभकारी परिणाम प्राप्त करने में मदद करता है। बुध ज्योतिष में एक युवा ग्रह है। यह हमारे सौरमंडल का एक तेज़ गति से चलने वाला ग्रह है Buddh Stotra और हमारे जीवन को कई तरह से प्रभावित करता है। बुध एक ऐसा ग्रह है जो बुद्धि, व्यापार, संचार कौशल, भाषण, व्यापार और वाणिज्य, सांख्यिकी, गणित, वाक्पटुता, कौशल, मित्र, ज्योतिष आदि प्रदान करता है। इसे वैदिक ज्योतिष में एक लाभकारी ग्रह माना जाता है, लेकिन दूसरी ओर, जब बुध किसी भी पाप ग्रह के साथ जन्म कुंडली के किसी भी घर में बैठता है, तो यह एक पापी ग्रह की तरह कार्य करता है। यह मिथुन और कन्या राशियों का स्वामी है और कन्या राशि में उच्च और मीन राशि में नीच का हो जाता है। Buddh Stotra सूर्य और शुक्र बुध के स्वाभाविक मित्र हैं। Buddh Stotra बुद्ध स्तोत्र के लाभ: शुद्ध मन से बुद्ध स्तोत्र का जाप करने से बुद्ध ग्रह के नकारात्मक प्रभाव शांत होंगे, आपके जीवन से बुराई दूर रहेगी और स्वास्थ्य और धन में सुधार होगा।यह देखा गया है कि नियमित रूप से बुद्ध स्तोत्र का जाप करने से बुद्धि, संचार कौशल में सुधार होता है और यहाँ तक कि मजबूत रिश्ते भी बनते हैं। बुद्ध स्तोत्र का हमारे स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि यह हमें रक्त शर्करा और रक्तचाप के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है।बुद्ध स्तोत्र हमें मानसिक शांति प्रदान करता है और बुराइयों को दूर रखता है। यहां तक ​​कि जो छात्र अपने परिणामों और एकाग्रता की कमी के बारे में चिंतित हैं, वे भी बुद्ध स्तोत्र का जाप कर सकते हैं क्योंकि यह आपकी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का निर्माण करता है। Buddh Stotra किसको यह स्तोत्र पढ़ना चाहिए: बुद्ध के बुरे प्रभावों, तंत्र के बुरे प्रभावों, कम संचार कौशल या दूसरों को तथ्यों के साथ समझाने में विफल होने वाले लोगों को बुद्ध स्तोत्र का जाप करना चाहिए। बुध स्तोत्र | Buddh Stotra पीताम्बर: पीतवपुः किरीटश्र्वतुर्भजो देवदु: खपहर्ता। धर्मस्य धृक् सोमसुत: सदा मे सिंहाधिरुढो वरदो बुधश्र्व ।।1।। प्रियंगुकनकश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम्। सौम्यं सौम्य गुणोपेतं नमामि शशिनंदनम ।।2।। सोमसूनुर्बुधश्चैव सौम्य: सौम्यगुणान्वित:। सदा शान्त: सदा क्षेमो नमामि शशिनन्दनम् ।।3।। उत्पातरूप: जगतां चन्द्रपुत्रो महाधुति:। सूर्यप्रियकारी विद्वान् पीडां हरतु मे बुध: ।।4।। शिरीष पुष्पसडंकाश: कपिशीलो युवा पुन:। सोमपुत्रो बुधश्र्वैव सदा शान्ति प्रयच्छतु ।।5।। श्याम: शिरालश्र्व कलाविधिज्ञ: कौतूहली कोमलवाग्विलासी । रजोधिकोमध्यमरूपधृक्स्यादाताम्रनेत्रीद्विजराजपुत्र: ।।6।। अहो चन्द्र्सुत श्रीमन् मागधर्मासमुद्रव:। अत्रिगोत्रश्र्वतुर्बाहु: खड्गखेटक धारक: ।।7।। गदाधरो न्रसिंहस्थ: स्वर्णनाभसमन्वित:। केतकीद्रुमपत्राभ इंद्रविष्णुपूजित: ।।8।। ज्ञेयो बुध: पण्डितश्र्व रोहिणेयश्र्व सोमज:। कुमारो राजपुत्रश्र्व शैशेव: शशिनन्दन: ।।9।। गुरुपुत्रश्र्व तारेयो विबुधो बोधनस्तथा। सौम्य: सौम्यगुणोपेतो रत्नदानफलप्रद: ।।10।। एतानि बुध नमामि प्रात: काले पठेन्नर:। बुद्धिर्विव्रद्वितांयाति बुधपीड़ा न जायते ।।11।।

Buddh Stotra | बुध स्तोत्र Read More »

भूतेश्वर मंदिर:मथुरा, उत्तरप्रदेश, भारत Bhuteshwar Temple: Mathura, Uttar Pradesh, India

भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर दिव्य शिवलिंग के रूप में भी जाना जाता है। भूतेश्वर मंदिर भगवान श्री कृष्ण की पावन नगरी मथुरा में स्थित है भूतेश्वर मंदिर। यह मंदिर शहर के प्राचीन शिव मंदिर में शामिल है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर दिव्य शिवलिंग के रूप में भी जाना जाता है। इसके अलावा भूतेश्वर महादेव को मथुरा का रक्षक और क्षेत्रपाल भी कहते है। आपको बता दे कि मथुरा में महादेव मंदिर चार हैं। इन्हें मथुरा नगरी के रक्षक माना जाता है। पूर्व में पिघलेश्वर, पश्चिम में भूतेश्वर, उत्तर में गोकर्णेश्वर और दक्षिण में रंगेश्वर दिशा के क्षेत्रपाल माने जाते हैं । प्रतिवर्ष इस मंदिर में भाद्रपद मास के दौरान बृज चौरासी कोस की परिक्रमा आरम्भ होती है और यहीं पर समाप्त होती है। शहर की सीमा के भीतर स्थित यह मंदिर लोकप्रिय तीर्थ स्थल है। भूतेश्वर मंदिर का इतिहास प्राचीन मान्यताओं और किंवदंतियों के अनुसार, मंदिर की उत्पत्ति मथुरा की स्थापना से ही मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मथुरा की स्थापना तब हुई जब शत्रुघ्न ने राक्षस मधु का वध किया। शत्रुघ्न भगवान राम के छोटे भाई थे। इस महत्वपूर्ण घटना की स्मृति में भूतेश्वर मंदिर का निर्माण किया गया, जिससे यह शहर का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि भूतेश्वर महादेव के इस प्राचीन शिवलिंग को नाग शासकों द्वारा स्थापित किया था। भूतेश्वर मंदिर का महत्व भूतेश्वर महादेव मंदिर स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों के लिए धार्मिक महत्व रखता है। ऐसा माना जाता है कि भूतेश्वर महादेव मथुरा शहर को बुरी ताकतों से बचाते हैं। मथुरा के लोगों, ब्रजवासियों द्वारा रक्षक के रूप में भूतेश्वर भगवान की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि भूतेश्वर भगवान हर संकटों से उनकी रक्षा करते हैं। भूतेश्वर मंदिर एक शक्तिपीठ है ऐसा कहा जाता है कि यह वह जगह है जहाँ पर माता सती के शरीर के नष्ट होने के बाद उनकी अंगूठी गिरी थी। यह मंदिर सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के पाताल देवी गुफा में राजा कंस द्वारा पूजा की जाती थी। भूतेश्वर मंदिर की वास्तुकला भूतेश्वर मंदिर अद्भुत स्थापत्य शैली द्वारा निर्मित है। इस मंदिर में एक मुख्य गर्भगृह और पाताल देवी गुफा है। मंदिर का गर्भगृह 100 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। मंदिर में एक नाली है, जो साइड गेट के बाहरी हिस्से को अंदर से जोड़ती है, जिससे भक्त शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं। इसके अलावा मुख्य प्रवेश द्वार के बाईं ओर कई छोटे-छोटे शिवलिंग हैं। जहाँ भक्त बिना किसी परेशानी के फूल चढ़ा सकते है। मंदिर परिसर में पाताल देवी, काली देवी, गिरिराज महाराज और अन्य सुंदर मंदिर स्थित हैं। मंदिर का समय भूतेश्वर मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 01:00 PM सुबह की आरती का समय 07:00 AM – 08:00 AM शाम को भूतेश्वर मंदिर खुलने का समय 04:30 PM – 10:30 PM संध्या आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद भूतेश्वर महादेव को दूध, दही, शहद, जल और पेड़े का भोग लगाया जाता है। साथ ही मंदिर में शिवलिंग पर फूल भी अर्पित किए जाते हैं।

भूतेश्वर मंदिर:मथुरा, उत्तरप्रदेश, भारत Bhuteshwar Temple: Mathura, Uttar Pradesh, India Read More »

काल भैरव मंदिर, इंदौर मध्य प्रदेश, भारत:Kaal Bhairav ​​Temple, Indore Madhya Pradesh, India

यहां हादसों के पहरेदार हैं भैंरव बाबा काल भैरव मंदिर मध्य प्रदेश के इंदौर में भैरव घाट, खण्डवा रोड पर काल भैरव मंदिर स्थित है। यह मंदिर बहुत ही चमत्कारिक है। भैरव अष्टमी पर इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है। जिस दौरान विशाल भंडारा और महा आरती का आयोजन किया जाता है। जिसमें हजारों संख्या में लोग शामिल होते है। वहीं भैंरव बाबा को छप्पन भोग भी लगाए जाते हैं। काल भैरव मंदिर का इतिहास भैरव घाट के भैरव मंदिर के इतिहास की कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है। परन्तु मंदिर के पुजारियों द्वारा बताया जाता है कि काल भैरव के इस मंदिर का इतिहास करीब 500 वर्ष पुराना है। यह प्राचीन काल से ही अपनी चमत्कारिक शक्तियों के लिए जाना जाता है। इन्हें यहां के रक्षक के रूप में भी पूजते हैं। काल भैरव मंदिर का महत्व भैरव घाट एक ऐसा खतरनाक घाट है। जहाँ पर अधिकांशत: दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस घाट पर जाने से पहले भैरव मंदिर में रूककर दर्शन करते हैं, तो बाबा उन्हें दुर्घटनाओं से बचाते हैं। भैरव मंदिर में दर्शन करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। यह घाट बहुत ही सुन्दर है साथ ही आपको रोड के दोनों तरफ प्राकृतिक नज़ारे भी देखने को मिलेंगे। खासकर बारिश के मौसम में यहाँ का वातावरण बहुत शानदार होता है। ऐसा भी बताया जाता है कि इस घाट पर दुर्घटनाओं के कारण कई नकारात्मक शक्तियां भटकती रहती हैं। जो दुर्घटनाओं का कारण बनती है। इसलिए भैरव बाबा के दर्शन के बाद ही इस घाट की चढ़ाई करनी चाहिए। भैरव घाट पर स्थित भगवान भैरव को हादसों का पहरेदार भी कहते है। काल भैरव मंदिर की वास्तुकला इस मंदिर में भगवान भैरव की विशाल पत्थर पर प्रतिमा स्थापित है। जो देखने में बहुत ही आकर्षक है। काल भैरव एक छोटे से पुल नुमा रास्ते से होते हुए मंदिर के दर्शन के लिए भक्त यहां पहुंचते है। भैंरव बाबा की प्रतिमा का रंग सिंदूरी रहता है। प्रतिदिन इनका शृंगार भी किया जाता है। जिसमें बाबा के कई रूपों के दर्शन अलग अलग दिन करने को मिलते हैं। मंदिर में भैंरव बाबा की प्रतिमा के ठीक सामने उनके वाहन श्वान की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। काल भैरव मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 09:00 PM सायंकाल आरती का समय 06:00 PM – 07:00 PM मंदिर का प्रसाद भैंरव बाबा को दही-इमरती का भोग लगाया जाता है। साथ ही भक्त लोग पान, तंबाकू, सिगरेट, शराब जैसी सभी चीजें भैंरव बाबा को अर्पण करते है। साथ ही नारियल और अगरबत्ती भी बाबा को चढ़ाई जाती है।

काल भैरव मंदिर, इंदौर मध्य प्रदेश, भारत:Kaal Bhairav ​​Temple, Indore Madhya Pradesh, India Read More »

Story of Kedarnath Temple :भगवान शिव ने भैंसे का रूप बनाकर पांडवों को किया था पाप मुक्त, ऐसी है केदारनाथ मंदिर की कथा

Story of Kedarnath Temple:धार्मिक मान्यतानुसार केदारनाथ (Kedarnath Temple) को द्वादश ज्योतिर्लिंगों (Jyotirlinga) में 11वां माना जाता है. साथ ही यह सबसे पवित्र तीर्थस्थलों (Holy Pilgrimage) में से एक है. कहा जाता है कि केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) की कहानी बेहद अनोखी और दिलचस्प है. History of Kedarnath Dham : द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ धाम में भगवान शिव लिंग रूप में विराजमान हैं। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव द्वारा धारण किए गए भैंसे के रूप के पिछले भाग की पूजा की जाती है। वहीं केदारनाथ मंदिर के इतिहास से जुड़ी अन्‍य कहानियां भी प्रचलित हैं। केदारनाथ धाम में हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। धाम के कपाट हर वर्ष अप्रैल या मई में खोले जाते हैं और भैयादूज पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। शीतकाल में बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली को ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर लाया जाता है। छह माह के लिए बाबा यहीं विराजमान रहते हैं।केदारनाथ धाम का उल्लेख स्कंद पुराण के केदार खंड में मिलता है। Story of Kedarnath Temple कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण कत्यूरी शैली में हुआ है। पांडवों के वंशज जन्मेजय ने यहां इस मंदिर की स्थापना की थी। बाद में आदि शंकराचार्य द्वारा इसका जीर्णोद्धार कराया गया था। Story of Kedarnath Temple:केदारनाथ धाम की प्राचीन मान्यता मंदिर के संबंध में कई मान्‍यताएं प्रचलित हैं। मान्‍यता है कि महाभारत के बाद पांडव अपने गोत्र बंधुओं की हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शिव की शरण में जाना चाहते थे। और इसके लिए वह भगवान शिव की खोज करने हिमालय की ओर गए। तब भगवान शिव अंतर्ध्यान होकर केदार में जा बसे। पांडव भी उनके पीछे केदार पर्वत पहुंच गए। Story of Kedarnath Temple तब भगवान शिव ने पांडवों को आता देख भैंसे का रूप धारण कर लिया और पशुओं के बीच में चले गए। भगवान शिव के दर्शन पाने के लिए पांडवों ने एक योजना बनाई और भीम ने विशाल रूप धारण कर अपने दोनों पैर केदार पर्वत के दोनों और फैला दिए। सभी पशु भीम के पैरों के बीच से गुजर गए, लेकिन भैंसे के रूप में भगवान शिव भीम के पैर के नीचे से निकले। तभी भगवान शिव को पहचान कर भीम ने भैंसे को पकड़ना चाहा तो वह धरती में समाने लगा। तब भीम ने भैंसे का पिछला भाग कस कर पकड़ लिया। भगवान शिव पांडवों की भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्‍हें दर्शन देकर पाप से मुक्त कर दिया। कहा जाता है कि तभी से भगवान शिव की यहां भैंसे की पीठ की आकृति के रूप में पूजे जाते हैं। मान्‍यता है Story of Kedarnath Temple कि इस भैंसे का मुख नेपाल में निकला, जहां भगवान शिव की पूजा पशुपतिनाथ के रूप में की जाती है। 12वीं-13वीं शताब्दी का है मंदिर:The temple is from 12th-13th century राहुल सांकृत्यायन के अनुसार यह मंदिर 12वीं-13वीं शताब्दी का है। Story of Kedarnath Temple ग्वालियर से मिली एक राजा भोज स्तुति के अनुसार यह उनके द्वारा बनाया गया मंदिर है। वह राजा 1076-99 काल के थे। नर और नारायण ऋषि ने की थी तपस्या:Sage Nar and Narayan did penance यह भी कहा जाता है कि हिमालय के केदार पर्वत पर भगवान विष्णु के अवतार तपस्वी नर और नारायण ऋषि ने तपस्या की थी। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए। जिसके बाद नर और नारायण ऋषि ने भगवान शिव से ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वर प्राप्‍त किया। 2013 आपदा में क्षतिग्रस्‍त हो गया था धाम:The temple was damaged in the 2013 disaster. 2013 में आपदा के दौरान केदारनाथ धाम में मंदिर को छोड़ बाकी पूरा परिसर क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद से अब तक धाम में पुनर्निर्माण का कार्य चल रहा है। वहीं केदारनाथ पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में भी शामिल है। Story of Kedarnath Temple धाम में हो रहे पुनर्निर्माण कार्यों पर वह स्वयं नजर रखते हैं। केदारनाथ में 225 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की लागत से प्रथम चरण के कार्य पूरे किए जा चुके हैं। जिसमें शंकराचार्य की समाधि का पुनर्निर्माण, सरस्वती व मंदाकिनी नदी और उसके घाटों की सुरक्षा, तीर्थ पुरोहितों के आवासों का निर्माण किया गया है। मंदाकिनी नदी पर 60 मीटर लंबे पुल का निर्माण के साथ ही आस्था पथ का निर्माण किया गया है। अब दूसरे चरण में 184 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य चल रहे हैं। केदारनाथ मंदिर की कथा (Kedarnath Temple Story) Story of Kedarnath Temple केदारनाथ मंदिर के विषय में प्रचलित कथा के अनुसार, पांडवों की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव नें उन्हें हत्या के पाप से मुक्त कर दिया था. मान्यता है कि महाभारत के युद्ध में विजयी होने पर पांडव अपने भाईयों की हत्या से मुक्ति के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद पाना चाहते थे. परंतु, भगवान उनसे कर्म से खुश नहीं थे, इसलिए वे केदारनाथ चले गए. पांडव भी उनके दर्शन के लिए केदारनाथ पहुंच गए. पांडवों को वहां पहुंचने पर भगवान शिव में भैंसे का रूप धारण कर लिया. जिसके बाद वे अन्य पशुओं के बीच में चले गए ताकि पांडल भगवान शिव के उस रूप को ना पहचान पाए. कहते हैं कि भीम ने विशालकाय शरीर धारण कर दो पहाड़ों पर अपने पैर फैला दिए. जिसके बाद उस पहाड़ के नीचे से सभी पशु तो निकल गए, लेकिन वहां मौजूद एक भैंस ने ऐसा नहीं किया. जिसके बाद भीम पूरी शक्ति से भैंस की ओर झपटे, लेकिन वह जमीन में समाने लगा. तभी भीम ने उसकी की पीठ का पिछला हिस्सा पकड़ लिया. कहा जाता है Story of Kedarnath Temple कि भगवान शिव ने भैंसे का रूप बनाया था. मान्यता है Story of Kedarnath Temple कि भगवान शिव पांडवों की ईच्छाशक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन देकर हत्या के पाप से मुक्त होने का आशीर्वाद दिया. धार्मिक मान्यता है कि उसी समय से केदारानाथ में भैंस की पीठ को शिव का रूप मानकर पूजा होने लगी.

Story of Kedarnath Temple :भगवान शिव ने भैंसे का रूप बनाकर पांडवों को किया था पाप मुक्त, ऐसी है केदारनाथ मंदिर की कथा Read More »