March 17, 2025

श्री राधा वल्लभ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इसे राधा वल्लभलाल जी मंदिर भी कहा जाता है। श्री राधा वल्लभ मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृन्दावन शहर में एक ऐतिहासिक मंदिर है। इसे राधा वल्लभलाल जी मंदिर भी कहा जाता है, जो मथुरा आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। श्री राधा वल्लभ मंदिर मंदिर के केंद्रीय देवता श्री कृष्ण हैं, जिन्हें श्री राधा वल्लभ के नाम से पूजा जाता है। राधावल्लभ मंदिर में श्री कृष्ण के साथ, एक मुकुट रखा गया है श्री राधा वल्लभ मंदिर जो देवी राधा की उपस्थिति का प्रतीक है। यह मंदिर राधा वल्लभ संप्रदाय से संबंधित है और इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में वृंदावन के संत हित हरिवंश महाप्रभु के मार्गदर्शन में किया गया था। राधावल्लभ मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित स्थल की सूची में भी है। मंदिर का इतिहास राधावल्लभ मंदिर को हित मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण वर्ष 1585 में हित हरिवंश महाप्रभु के पुत्र श्री वनचंद्र के शिष्य सुंदरदास भटनागर ने करवाया था। श्री राधा वल्लभ मंदिर इतिहासकारों की माने तो राजा मान सिंह ने सबसे पहले इस मंदिर का निर्माण कराने का निर्णय लिया था। लेकिन यह अफवाह सुनकर कि जो कोई भी इस मंदिर का निर्माण करेगा उसकी एक वर्ष के भीतर मृत्यु हो जाएगी, वह पीछे हट गया। हालांकि मंदिर का निर्माण पूरा होने के एक वर्ष के भीतर ही सुंदरदास भटनागर की मृत्यु हो गई और ये अफवाह सच हो गई। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है की राधावल्लभ मंदिर में प्रभु उसी भक्त को दर्शन देते हैं जो सारे पाप कर्मों को त्याग कर निष्कपट होकर सच्चे मन के साथ मंदिर में प्रवेश करता है और जिस भक्त के हृद्य में सच्चे प्रेम और भक्ति की भावना नहीं होती वे लाख कोशिश कर ले उसे कभी दर्शन प्राप्त नही होते। मंदिर की वास्तुकला राधावल्लभ मंदिर वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के पास चट्टान पर स्थित है। यह अपनी आकर्षक वास्तुकला और भव्य सजावट के कारण अलग दिखता है। राधा वल्लभ मंदिर सबसे पुराने और लंबे समय तक जीवित रहने वाले मंदिरों में से एक है। श्री राधा वल्लभ मंदिर राधावल्लभ मंदिर में हिंदू और मुगल वास्तुकला की मिलीजुली शैली देखने को मिलती है। यह राजसी मंदिर लाल सैंडस्टोन के साथ बनाया गया है जो तब केवल शाही इमारतों, उच्च महलों और शाही किलों के निर्माण के लिए उपयोग किया जाता था। राधावल्लभ मंदिर उदार शैली में बनाया गया है, इसकी दीवार 10 फुट मोटी और 2 चरणों में बनी है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 09:00 PM मंगला आरती का समय 05:30 AM – 06:00 AM मंदिर का प्रसाद राधावल्लभ मंदिर में प्रभु को फूलों के साथ माखन, मिश्री, पेड़ा और बर्फी का भोग लगाया जाता है।

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राधा रमण मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर में श्री कृष्ण के राधा रमण रूप की पूजा की जाती है। राधा रमण मंदिर उत्तर प्रदेश मथुरा के वृंदावन धाम में स्थित है राधा रमण मंदिर। यह हिन्दू मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर में श्री कृष्ण के राधा रमण रूप की पूजा की जाती है। यह मंदिर सप्त देवालय में शामिल है जिसमे राधा वल्लभ मंदिर, राधा मदनमोहन मंदिर, राधा दामोदर मंदिर, राधा श्यामसुंदर मंदिर, राधा गोकुलनंदन मंदिर और राधा गोविंदजी मंदिर भी शामिल है। मंदिर का इतिहास यह मंदिर 500 साल पूर्व का है। इसकी स्थापना गोपाल भट्ट स्वामी ने की थी। गोपाल भट्ट स्वामी जब 30 वर्ष के थे तब वह वृन्दावन आये। चैतन्य महाप्रभु के अचानक चले जाने के बाद उन्होंने सपने में देखा कि भगवान उन्हें उनके दर्शन प्राप्त करने हेतु नेपाल जाने का निर्देश दे रहे है। इस लिए गोपाल भट्ट स्वामी नेपाल चले गए और वहां उन्होंने काली गंडकी नदी में स्नान किया। इस नदी में उन्होंने अपने पानी के बर्तन को डुबोया परन्तु उन्होंने देखा कि कई शालिग्राम उनके बर्तन आ गए है। उन्हें वापस नदी में गिराने की कोशिश भी की लेकिन वह बर्तन में ही रहे। उन्हें 12 शालिग्राम शिलाएँ मिलीं और वे उन्हें अपने साथ वृंदावन ले आये। वही शालिग्राम वृंदावन में स्थापित है। वर्तमान राधा रमन मंदिर का निर्माण 1826 में लखनऊ के शाह बिहारी लालजी के करवाया था। मंदिर का महत्व इस मंदिर में आज भी भगवान कृष्ण के असली सालिग्राम उपस्थित है जो राधारानी के साथ है। राधा रमण मंदिर में राधा जी का विग्रह नहीं है। क्योंकि राधा-रमण का यह विग्रह स्वयंभू है। इस मंदिर में त्योहारों को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। जिसे देखने के लिए लोग दूर दूर से आते है। पौराणिक कथा के मुताबिक चैतन्य महाप्रभु के शिष्य गोपाल भट्ट गोस्वामी हुआ करते थे उन्होंने अपनी भक्ति और तप द्वारा राधा रमण जी के विग्रह रूप को प्रकट किया। ऐसा भी बताया जाता है कि जब भगवान प्रकट हुए तो गोपाल भट्ट जी ने उनके लिए भोग बनाया। भोग बनाने के लिए उन्होंने हवन की लकड़ियों को रख कर मंत्रोच्चार से ही अग्नि प्रज्वलित की। तब से लेकर आज तक यह अग्नि ऐसे ही प्रज्जवलित हो रही है। राधा रमण मंदिर किसी भी प्रकार से इस अग्नि को बुझाया नहीं जा सका है। आज भी इस मंदिर में राधा रमन जी के लिए भोग इसी अग्नि पर पकाया जाता है। इस मंदिर में माचिस का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मंदिर की वास्तुकला राधा रमण मंदिर की वास्तुकला आधुनिक हिंदू शैली में बनायीं गयी है। इस मंदिर के अंदर सालिग्राम पत्थर की एक मूल स्वयं-प्रकट मूर्ति है। यह विशाल मंदिर नदी किनारे स्थित है जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाता है। परिसर के भीतर गोपाल भट्ट गोस्वामी की समाधि भी है जो इस मंदिर के निर्माता है। कहा जाता है कि राधा रमण मंदिर में गुरु चैतन्य द्वारा उपयोग किए गए कपड़े भी है। मंदिर का समय गर्मियों में राधारमण जी मन्दिर वृन्दावन खुलने का समय 05:00 AM – 12:15 PM गर्मियों में सुबह मंगला आरती का समय 05:00 AM – 05:30 AM गर्मियों में शाम को राधारमण जी मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 09:00 PM सर्दियों में राधारमण जी मन्दिर वृन्दावन खुलने का समय 05:30 AM – 12:15 PM सर्दियों में शाम को राधारमण जी मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद राधा रमण मंदिर में खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। साथ ही पुष्प भी चढ़ाये जाते है।

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Gudi Padwa 2025: कब है गुड़ी पड़वा? क्यों खास है ये पर्व ? जानिए इससे जुड़े रोचक तथ्य

Gudi Padwa 2025: गुड़ी पड़वा केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, जिसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सभी पहलु जुड़े हुए हैं।ह दिन न केवल महाराष्ट्र में रह रहे लोगों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक नई शुरुआत, खुशी और समृद्धि के आगमन का संदेश लेकर आता है। Gudi Padwa 2025:गुड़ी पड़वा का महत्व गुड़ी पड़वा Gudi Padwa 2025 हिंदू धर्म में एक विशेष स्थान रखता है। ऐसा माना जाता है कि गुड़ी को घर पर फहराने से घर से नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं और जीवन में सौभाग्य और समृद्धि आती है। यह दिन वसंत की शुरुआत का भी प्रतीक है और इसे फसल उत्सव के रूप में माना जाता है। कई अन्य राज्यों में इस पर्व को संवत्सर पड़वो, उगादि, चेती, नवारेह, साजिबु नोंगमा पानबा चीरोबा आदि नामों से जाना जाता है। कई लोगों का मानना ​​है कि इस दिन सोना या नई कार खरीदना शुभ होता है। चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाने वाला गुड़ी पड़वा भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो खासतौर पर महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा वसंत ऋतु का त्यौहार है Gudi Padwa 2025 जो मराठी हिंदुओं के लिए पारंपरिक नए साल का प्रतीक है। यह चैत्र महीने (मार्च-अप्रैल) के पहले दिन चंद्र-सौर हिंदू कैलेंडर के अनुसार नए साल की शुरुआत को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार रंगोली, एक विशेष गुड़ी ध्वज (फूलों, आम और नीम के पत्तों की माला, ऊपर से उलटे हुए मुकुट) के साथ मनाया जाता है। यह पर्व न केवल हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि इसमें कई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी छिपा हुआ है।  Gudi Padwa 2025:गुड़ी पड़वा 2025: तिथि और मुहूर्त गुड़ी पड़वा 30 मार्च 2025, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन को खास बनाती है इसकी तिथि, जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार एक नए साल की शुरुआत होती है। यह दिन न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बेहद अहम है, क्योंकि यह मराठी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 29 मार्च को सायं  04 बजकर 27 मिनट पर होगी और 30 मार्च को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि गणना अनुसार 30 मार्च को गुड़ी पड़वा मनाया जाएगा। इस दिन से चैत्र नवरात्र भी प्रारंभ होगा। Gudi Padwa 2025 गुड़ी पड़वा की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता गुड़ी पड़वा के दिन के साथ जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं। इनमें से एक प्रमुख कथा है छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी, जो इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाने का कारण बनती है। कहा जाता है कि इसी दिन शिवाजी महाराज ने विदेशी घुसपैठियों को पराजित कर विजय प्राप्त की थी। विजय के प्रतीक स्वरूप उन्होंने विजय ध्वज फहराया, जो गुड़ी पड़वा के दिन की परंपरा बन गई। क्यों मनाया जाता है गुड़ी पड़वा? Gudi Padwa 2025:गुड़ी पड़वा का महत्व न केवल धार्मिक रूप से है, बल्कि यह जीवन के हर पहलु में शुभता और समृद्धि की प्रतीक भी है। इस दिन घरों में पताका (झंडा) फहराया जाता है, जो यह दर्शाता है कि इस घर में समृद्धि और सुख का आगमन होने वाला है। इस दिन से चैत्र नवरात्रि भी प्रारंभ होती है, जिसमें देवी भगवती की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान ब्रह्मा की पूजा करना भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वह सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं।इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह नए साल की शुरुआत का प्रतीक है, और लोग इस दिन को हर्षोल्लास, परिवार के साथ समय बिताने और नए साल के साथ जीवन में नई ऊर्जा और आशा लेकर मनाते हैं। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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Vinayak Chaturthi 2025: विनायक चतुर्थी व्रत की जनवरी से दिसंबर की लिस्ट, देखें गणेश उत्सव कब होगा शुरू

Vinayak Chaturthi 2025:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सभी देवताओं में गणेश जी का स्थान सर्वोपरि है। गणेश जी को सभी परेशानियों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश की नियमित पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। Vinayak Chaturthi 2025: गणेश जी बुद्धि और विद्या के देवता हैं, Vinayak Chaturthi 2025 इनकी कृपा से व्यक्ति सुख, समृद्धि और ज्ञान पाता है. गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए विनायक चतुर्थी व्रत करना फलदायी माना गया है. Vinayak Chaturthi 2025: विनायकी चतुर्थी के दिन श्रद्वालू अपने बुरे समय व जीवन की कठिनाईओं को दूर करने के लिए भगवान गणेश की पूजा करते हैं. माना जाता है कि Vinayak Chaturthi 2025 विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है और साधक के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है. अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है.इस दिन लोग सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक व्रत करते हैं. शाम को गणेशजी के वरद Vinayak Chaturthi 2025 विनायक रुप की पूजा करने के बाद व्रत खोला जाता है.आज नए साल की पहली विनायक चतुर्थी है. आइए जानते हैं साल 2025 में विनायक चतुर्थी कब-कब है. Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती विनायक चतुर्थी 2025 लिस्ट (Vinayak Chaturthi 2025 List) 3 जनवरी 2025 – पौष विनायक चतुर्थी 1 फरवरी 2025 – माघ विनायक चतुर्थी (गणेश जयंती) 3 मार्च 2025 – फाल्गुन विनायक चतुर्थी 1 अप्रैल 2025 – चैत्र विनायक चतुर्थी 1 मई 2025 – वैशाख विनायक चतुर्थी 30 मई 2025 – ज्येष्ठ विनायक चतुर्थी 28 जून 2025 – आषाढ़ विनायक चतुर्थी 28 जुलाई 2025 – सावन विनायक चतुर्थी 27 अगस्त 2025 – भाद्रपद विनायक चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) 25 सितंबर 2025 – अश्विन विनायक चतुर्थी 25 अक्टूबर 2025 – कार्तिक विनायक चतुर्थी 24 नवंबर 2025 – मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी 24 दिसंबर 2025 – पौष विनायक चतुर्थी Vinayak Chaturthi 2025:विनायक चतुर्थी व्रत क्यों महत्वपूर्ण है गणपति की कृपा से उसे बल-बुद्धि, सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. Vinayak Chaturthi 2025 गणपति की कृपा से उसके सारे काम सिद्ध होते हैं. इसके अलावा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और जीवन में आने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलता है. विनायक चतुर्थी गणपति के विनायक रूप को समर्पित है. इस दिन व्रत पूजन करने से उनका आशीर्वाद मिलता है. गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra) Vinayak Chaturthi 2025:विनायक चतुर्थी पर व्रत पूजा की विधि Vinayak Chaturthi 2025 Puja Mantra गणपति पूजा मंत्र प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम्। तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयो: शिवाय।। प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोकदावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम्। अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहमुत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य।। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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