Teja Dashmi 2026 Mein kab Hai : राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा की पावन माटी में लोक देवताओं की पूजा की अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली परंपरा रही है । सनातन लोक चेतना में गोवंश की रक्षा, सत्य-वचन और प्रजाहित के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले लोक देवताओं में वीर तेजाजी (Veer Tejaji) का नाम अत्यंत श्रद्धा और आदर के साथ लिया जाता है । भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को ‘तेजा दशमी’ के रूप में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है । वर्ष 2026 में आने वाली Teja Dashmi 2026 को लेकर राजस्थान के नागौर, अजमेर, बीकानेर, जयपुर और मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में विशेष उत्साह देखा जा रहा है ।
वीर तेजाजी महाराज को मुख्य रूप से सर्पों के देवता, गायों के मुक्तिदाता, कृषि कार्यों के उपकारक देवता और ‘काला-बाला के देवता’ के रूप में पूजा जाता है । किसानों और ग्रामीण अंचल के लोगों की ऐसी अटूट मान्यता है कि तेजाजी महाराज का नाम लेने से सर्पदंश का विष भी प्रभावहीन हो जाता है । आज हम Teja Dashmi 2026 की सही तिथि, वीर तेजाजी का ऐतिहासिक जीवन परिचय, उनके सत्यनिष्ठा की अमर पौराणिक कथा, पूजन विधि और परबतसर के प्रसिद्ध तेजा पशु मेले के महत्व का सविस्तार विवेचन करेंगे ।
तेजा दशमी जानिए कब है तेजा दशमी : Teja Dashmi: Find out when Teja Dashmi falls
हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को तेजा दशमी मनाई जाती है। वर्ष 2026 में इस पर्व की तिथि का विवरण इस प्रकार है
पर्व की मुख्य तिथि: इस वर्ष Teja Dashmi 2026 का पावन पर्व 21 सितंबर 2026, दिन सोमवार को पूरे भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा ।
हिंदी माह और पक्ष: भाद्रपद माह (भादों), शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि।
मुख्य आकर्षण: इस पावन दिन राजस्थान के नागौर जिले के परबतसर गांव में ऐतिहासिक ‘तेजा पशु मेला’ (Teja Pashu Mela) का भव्य शुभारंभ होता है, जहां लाखों की संख्या में किसान, पशुपालक और श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुंचते हैं ।
वीर तेजाजी महाराज का ऐतिहासिक जीवन परिचय : A Historical Account of the Life of Veer Tejaji Maharaj
इतिहास और लोक गाथाओं के अनुसार, वीर तेजाजी महाराज का जन्म जाट वंश के धोलिया गोत्र में माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन वर्ष 1074 ईस्वी (विक्रम संवत 1131) में हुआ था ।
जन्म स्थान: राजस्थान राज्य के नागौर जिले में स्थित खरनाल (वर्तमान खड़नाल) गांव में उनका जन्म हुआ था ।
माता-पिता: उनके पिता का नाम ताहड़ जी (ताहड़देव) और माता का नाम राजकुंवर था ।
धर्मपत्नी: तेजाजी महाराज का विवाह अजमेर जिले के पनेर गांव के निवासी रायचंद्र जी की पुत्री पैमलदे (पैमल) के साथ हुआ था ।
प्रिय घोड़ी: वीर तेजाजी की प्रिय घोड़ी का नाम ‘लीलण’ (Leelan) था । लोक मान्यताओं के अनुसार, तेजाजी के देहावसान की खबर उनकी घोड़ी लीलण ने ही उनके घर और ससुराल तक पहुंचाई थी ।
मुख्य प्रतीक: मूर्तियों और तस्वीरों में वीर तेजाजी को अपनी घोड़ी लीलण पर सवार, हाथ में तलवार लिए एक महान योद्धा के रूप में दर्शाया जाता है, जिनकी जीभ पर एक सर्प डंस रहा होता है।
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सत्य और बलिदान की अमर कथा: क्यों पूजे जाते हैं वीर तेजाजी : An Immortal Tale of Truth and Sacrifice: Why is Veer Tejaji Worshipped?
वीर तेजाजी की गाथा केवल वीरता की नहीं, बल्कि दिए गए वचन को निभाने और गोवंश की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने की एक अलौकिक मिसाल है:
1. बहन लाछां गूजरी की गायों की रक्षा : Protection of Sister Lachhan Gujari’s cows
लोक कथा के अनुसार, वीर तेजाजी की एक मुंहबोली बहन थीं जिनका नाम लाछां गूजरी था । एक बार जब तेजाजी अपनी बहन लाछां से मिलने गए, तो उन्हें पता चला कि मेर जाति के लुटेरे लाछां गूजरी की गायों को चुराकर ले गए हैं । अपनी मुंहबोली बहन के दुखों को देखकर और गायों की रक्षा हेतु वीर तेजाजी तुरंत अपनी घोड़ी लीलण पर सवार होकर लुटेरों के पीछे निकल पड़े ।
2. रास्ते में भाषक नाग से भेंट और वचनबद्धता : Meeting with the speaking Naga on the way and the pledge
जब तेजाजी गायों को छुड़ाने जा रहे थे, तो रास्ते में सैंदरिया नामक स्थान पर ‘भाषक’ नाम का एक अत्यंत विषैला सर्प उनका रास्ता रोककर डंसना चाहता था ।
तब वीर तेजाजी ने नागदेव से विनम्रतापूर्वक प्रार्थना की, “हे सर्प देवता! मैं अभी अपनी बहन की गायों को छुड़ाने जा रहा हूं। गायों को सुरक्षित वापस लाने के पश्चात मैं स्वयं आपके पास लौट आऊंगा, तब आप मुझे डंस लेना”। तेजाजी के इस सत्य वचन पर विश्वास करके नाग ने उन्हें जाने का रास्ता दे दिया ।
3. भीषण संग्राम और वचन पूर्ति : Fierce Battle and Fulfillment of the Vow
तेजाजी ने मेर के लोगों के साथ भीषण युद्ध किया और असीम पराक्रम दिखाते हुए उन सभी को परास्त कर गायों को मुक्त कराया। युद्ध में तेजाजी का पूरा शरीर घावों से क्षत-विक्षत हो गया था और उससे रक्त बह रहा था । लेकिन अपने दिए गए वचन को पूरा करने के लिए वे अत्यधिक घायल अवस्था में भी भाषक नाग के पास वापस पहुंचे ।
4. जिह्वा पर सर्पदंश और अमर वरदान : A Snakebite on the Tongue and the Boon of Immortality
तेजाजी को सामने देखकर नाग ने कहा, “तुम्हारा पूरा शरीर घावों से अपवित्र हो चुका है, मैं तुम्हें कहां डंसूं ?” तब वीर तेजाजी ने मुस्कुराते हुए अपनी जीभ आगे बढ़ा दी और कहा कि उनकी जिह्वा (जीभ) अभी भी घावों से सुरक्षित और पवित्र है । तेजाजी की ऐसी अगाध सत्यनिष्ठा और धर्मपरायणता को देखकर नागदेव गदगद हो गए। जीभ पर डंसने के बाद नागदेव ने उन्हें वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति सर्पदंश के बाद आपके नाम का धागा (तांती) बांधेगा, उस पर जहर का असर नहीं होगा और उसकी प्राण-रक्षा होगी ।
अजमेर के किशनगढ़ स्थित सुरसुरा नामक स्थान पर वीर तेजाजी महाराज ने अपना देह त्याग दिया ।
तेजा दशमी 2026 पर पूजन विधि और धार्मिक अनुष्ठान : Worship Rituals and Religious Ceremonies on Teja Dashmi 2026
ग्रामीण अंचल और शहरों में Teja Dashmi 2026 के दिन श्रद्धालु बड़े ही नियम और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करते हैं:
तांती (धागा) खोलना: जिन लोगों को या उनके पशुओं को कभी सांप या जहरीले कीड़े ने काटा होता है, वे सुरक्षा के लिए तेजाजी के नाम की ‘तांती’ (पवित्र धागा) बांधते हैं । Teja Dashmi 2026 के दिन श्रद्धालु तेजाजी के मंदिर/थान जाकर उस धागे को खोलकर चढ़ाते हैं ।
थान और मंदिर में पूजा: तेजाजी के थान (चबूतरे) पर जाकर श्रद्धालु नारियल, पताशे, कच्चा दूध, चूरमा और ध्वजा अर्पित करते हैं ।
भोपे (घोड़ला) द्वारा झाड़ा: तेजाजी के मंदिर के पुजारी को ‘घोड़ला’ कहा जाता है। इस दिन घोड़ला द्वारा विशेष प्रार्थना और झाड़ा लगाया जाता है।
तेजा गायन: इस पावन दिन गांव-गांव में ‘तेजा गायन’ (तेजाजी के लोकगीत) का आयोजन किया जाता है, जिसमें तेजाजी के त्याग और वीरता के गीत गाए जाते हैं।
परबतसर का प्रसिद्ध तेजा पशु मेला : Parbatsar’s famous Teja Cattle Fair
राजस्थान के नागौर जिले के परबतसर गांव में Teja Dashmi 2026 के अवसर पर भारत के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक ‘तेजा पशु मेला’ आयोजित किया जाता है। इस मेले में नागोरी बैलों, ऊंटों और घोड़ों की बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री होती है। दूर-दराज से आने वाले पशुपालक और किसान तेजाजी महाराज से अपने पशुओं के स्वास्थ्य और अच्छी फसल की मन्नत मांगते हैं।
वीर तेजाजी महाराज के विभिन्न नाम और स्वरूप : The Various Names and Forms of Veer Tejaji Maharaj
लोक आस्था में तेजाजी महाराज को कई नाम और उपाधियों से पुकारा जाता है
सर्पों के देवता: सर्पदंश से मुक्ति दिलाने वाले देव।
काला-बाला के देवता: नारू रोग (बाला) और बीमारियों से रक्षा करने वाले।
कृषि कार्यों के उपकारक देवता: किसान अपनी फसल की बुवाई शुरू करने से पहले तेजाजी को याद करते हैं।
गायों के मुक्तिदाता: गोवंश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले….

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