मौनी अमावस्या पर करें ये महाउपाय उपाय, मिलेगी पितृदोष से मुक्ति

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मौनी अमावस्या पर करें ये महाउपाय उपाय, मिलेगी पितृदोष से मुक्ति
KARMASU 20 January 2023 3 मिनट पढ़ें
ASTROLOGY📅 20 January 2023⏱ 3 मिनट

मौनी अमावस्या पर मौन रहकर पवित्र नदी या जलकुंड में स्नान और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसा कहते हैं कि मौनी अमावस्या पर दान-स्नान करने से इंसान के सारे पाप मिट जाते हैं और उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.

कब है मौनी अमावस्या? (Mauni Amavasya 2023 Date and Time)
इस वर्ष मौनी अमावस्या की तिथि को लेकर लोगों में बहुत कन्फ्यूजन है. कुछ लोग 21 जनवरी तो कुछ 22 जनवरी को मौनी अमावस्या बता रहे हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या शनिवार, 21 जनवरी को सुबह 06 बजकर 16 मिनट से लेकर अगले दिन रविवार, 22 जनवरी को रात 02 बजकर 22 मिनट तक रहेगी. लेकिन उदया तिथि के कारण मौनी अमावस्या 21 जनवरी को ही मनाई जाएगी.

दान-स्नान का शुभ मुहूर्त (Mauni Amavasya 2023 Shubh Muhurt)

21 जनवरी को सुबह 8 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 52 मिनट के बीच स्नान और दान-धर्म से जुड़े कार्य करने का शुभ मुहूर्त रहेगा. इस दौरान पवित्र नदी या कुंड में स्नान करने के बाद गरीब और जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचने के लिए कम्बल, गुड़ और तिल का दान कर सकते हैं. पवित्र नदी में आस्था की डुबकी लेते समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ और ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का जाप जरूर करें.

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पितृदोष दूर करने के उपाय
आप शनिश्चरी अमावस्या के दिन घर के दक्षिण दिशा में अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाएं और फूल माला चढ़ाकर आशीर्वदा लें. साथ ही नियमित इनके ऊपर सफेद फूल अर्पित करें. ऐसा करने से पितरों की कृपा आप पर आने लगती है और पितृदोष से मुक्ति मिल जाती है.

पीपल के पेड़ के नीचे करें ये उपाय
माघ माह की मौनी अमावस्या के दिन पीपल स्नान-दान करने के बाद दोपहर के समय में पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं. साथ ही पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल अर्पित करें और पूर्वजों से आशीर्वाद मांगे. इस दिन शाम के वक्त सरसों के तेल में पीपल के पेड़ के नीचे 7 दीपक जलाएं. ऐसा करने से पितृदेव प्रसन्न होते हैं और पितृदोष से मुक्ति मिलती है. 

क्यों खास होती है मौनी अमावस्या? (Mauni Amavasya 2023 Significance)
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है. इससे तर्पण करने वालों को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस दिन नदी के घाट पर जाकर पितरों का तर्पण और दान करने से कुंडली के दोषों से मुक्ति पाई जाती है.

इसके अलावा, इस दिन मौन व्रत रखने से वाक् सिद्धि की प्राप्ति होती है. मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का विशेष महत्व होता है. मौन व्रत का अर्थ खुद के अंतर्मन में झांकना, ध्यान करना और भगवान की भक्ति में खो जाने से है.

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