Rama Ekadashi 2026

Rama Ekadashi 2026 Date, Shubh Muhurat And Vrat Katha: जानिए रमा एकादशी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक कथा….

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Rama Ekadashi 2026 Date, Shubh Muhurat And Vrat Katha: जानिए रमा एकादशी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक कथा….
KARMASU 26 October 2026 9 मिनट पढ़ें
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Rama Ekadashi 2026 Date, Shubh Muhurat And Vrat Katha : कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सनातन धर्म में Rama Ekadashi 2026 के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। दीपावली के पावन त्यौहार से ठीक चार दिन पूर्व आने के कारण इस एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। Rama Ekadashi 2026 भगवान विष्णु (केशव स्वरूप) और धन की देवी मां लक्ष्मी (रमा स्वरूप) को समर्पित यह व्रत साधक के जीवन से समस्त कष्टों, पापों और दरिद्रता का नाश कर अक्षय सुख-समृद्धि और मोक्ष प्रदान करता है।

वर्ष 2026 में Rama Ekadashi 2026 का यह व्रत किस दिन रखा जाएगा, एकादशी तिथि का प्रारंभ व समापन समय क्या है, पारण का शुभ मुहूर्त क्या है, और इसके पीछे की पौराणिक कथा क्या है Rama Ekadashi 2026 यदि आप इन सभी प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण और विस्तृत मार्गदर्शिका है।

रमा एकादशी 2026 : सही तिथि और पंचांगीय शुभ मुहूर्त :Rama Ekadashi 2026: Correct Date and Auspicious Timing (Muhurat) According to the Panchang

वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रमा एकादशी मनाई जाती है। Rama Ekadashi 2026 पूर्णिमंत पंचांग के अनुसार यह कार्तिक मास में और अमान्त पंचांग (दक्षिण भारत व महाराष्ट्र) के अनुसार यह आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ती है।

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वर्ष 2026 में Rama Ekadashi 2026 की तिथि और पूजा के शुभ मुहूर्त का शास्त्रीय विवरण निम्नलिखित है

पंचांगीय विवरणशास्त्रीय तिथि एवं समय (IST – भारत)
मुख्य व्रत तिथि05 नवंबर 2026 (दिन: गुरुवार)
एकादशी तिथि प्रारंभ04 नवंबर 2026, सुबह 11:03 AM बजे
एकादशी तिथि समाप्त05 नवंबर 2026, सुबह 10:35 AM बजे
उदयातिथि अनुसार व्रत05 नवंबर 2026 (गुरुवार)
अभिजीत मुहूर्त (पूजा समय)सुबह 11:43 AM से दोपहर 12:26 PM तक
पारण का शुभ समय (6 नवंबर)सुबह 06:37 AM से 08:48 AM तक
द्वादशी तिथि समाप्त (6 नवंबर)सुबह 10:30 AM बजे

गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय का अद्भुत संयोग

सामान्यतः कई एकादशियों में गृहस्थों और वैष्णव संप्रदाय के संन्यासियों के लिए व्रत की तारीखें अलग-अलग हो जाती हैं । परंतु इस वर्ष रमा एकादशी का व्रत गृहस्थों और वैष्णव संप्रदाय दोनों के लिए एक ही दिन यानी 5 नवंबर 2026, गुरुवार को ही मान्य होगा।

4 नवंबर को सूर्योदय के समय दशमी तिथि रहेगी और एकादशी तिथि सुबह 11:03 बजे शुरू होगी। 5 नवंबर की सुबह सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदयातिथि के शास्त्रीय नियमानुसार 5 नवंबर को ही एकादशी का उपवास रखा जाएगा।

रमा एकादशी का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व

सनातन शास्त्रों, विशेषकर ‘ब्रह्मवैवर्त पुराण’ में रमा एकादशी के महात्म्य का विस्तार से वर्णन मिलता है। अर्जुन के पूछने पर स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इस व्रत की महिमा का बखान किया था।

लक्ष्मी-विष्णु की संयुक्त कृपा: ‘रमा’ माता लक्ष्मी का ही एक पावन नाम है। इस दिन भगवान विष्णु के केशव स्वरूप के साथ मां लक्ष्मी के रमा स्वरूप का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत व पूजन करने से घर में स्थायी लक्ष्मी का वास होता है और दरिद्रता का नाश होता है।

वाजपेय यज्ञ के समान फल: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो पुण्य फल बड़े-बड़े यज्ञों और वाजपेय यज्ञ करने से प्राप्त होता है, वही फल केवल Rama Ekadashi 2026 का व्रत निष्ठापूर्वक रखने से प्राप्त हो जाता है।

समस्त पापों का क्षय: मनुष्य द्वारा पूर्व जन्मों या इस जन्म में जाने-अनजाने में किए गए ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी इस पावन व्रत के प्रभाव से भस्म हो जाते हैं और साधक को अंत समय में विष्णुलोक (वैकुंठ) की प्राप्ति होती है।

दीपावली उत्सव का शुभारंभ: यह एकादशी दिवाली की तैयारियों का व्यावहारिक और आध्यात्मिक turning point मानी जाती है। घर की साफ़-सफाई और मानसिक शुद्धि का कार्य इसी दिन से पूर्ण रूप से शुरू हो जाता है।

    Rama Ekadashi 2026 Vrat Katha: राजा मुचुकुंद और चंद्रभागा की अमर कथा

    पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में मुचुकुंद नाम के एक अत्यंत सत्यवादी और विष्णुभक्त राजा राज्य करते थे[23]। उनकी एक परम सुंदर और धर्मनिष्ठ पुत्री थी, जिसका नाम ‘चंद्रभागा’ था। चंद्रभागा बचपन (आठ वर्ष की आयु) से ही एकादशी का कठोर व्रत नियमपूर्वक रखती आ रही थी।

    राजा मुचुकुंद का कड़ा नियम

    राजा मुचुकुंद के राज्य में यह सख्त नियम था कि एकादशी के दिन राज्य का कोई भी मनुष्य, पशु, पक्षी या जीव अन्न-जल ग्रहण नहीं करेगा। सभी के लिए एकादशी का उपवास रखना अनिवार्य था।

    शोभन का विवाह और एकादशी का संकट

    समय बीतने पर चंद्रभागा का विवाह राजा चंद्रसेन के पुत्र ‘शोभन’ के साथ हुआ। विवाह के पश्चात एक बार शोभन अपने ससुराल (राजा मुचुकुंद के राज्य) आया। उसी दौरान कार्तिक मास की रमा एकादशी का व्रत आ गया। चंद्रभागा चिंतित हो गई क्योंकि उसका पति शोभन शारीरिक रूप से अत्यंत दुर्बल था और भूख-प्यास सहन करने में असमर्थ था।

    शोभन ने अपनी पत्नी से कहा—”हे प्रिय! तुम्हारे पिता के राज्य में तो जानवरों को भी अन्न नहीं दिया जाता। Rama Ekadashi 2026 यदि मैं भोजन करूंगा तो राजा दंड देंगे और यदि व्रत रखूंगा तो भूख से मेरे प्राण निकल जाएंगे।” चंद्रभागा ने सलाह दी कि वे राज्य की सीमा से बाहर चले जाएं, परंतु शोभन ने आत्म-सम्मान के कारण व्रत रखने का ही निश्चय किया।

    शोभन की मृत्यु और देवपुर की प्राप्ति

    शोभन ने दिनभर निर्जला व्रत रखा, किंतु भूख और प्यास की व्याकुलता के कारण सूर्योदय होने से पूर्व ही रात्रि में उसके प्राण पखेरू उड़ गए। Rama Ekadashi 2026 राजा मुचुकुंद ने राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार कराया। पतिव्रता चंद्रभागा अपने पिता के घर ही रहकर भक्ति भाव से एकादशी व्रत करती रही।

    दूसरी ओर, अनिच्छा से ही सही परंतु रमा एकादशी का संपूर्ण व्रत निष्ठा से करने के महापुण्य के फलस्वरूप शोभन को मंदराचल पर्वत पर स्थित दिव्य और अलौकिक ‘देवपुर’ नगर की प्राप्ति हुई। वह रत्नजटिल सिंहासन पर राजा की भांति विराजमान हो गया और अप्सराएं उसकी सेवा करने लगीं। Rama Ekadashi 2026 परंतु क्योंकि उसने यह व्रत विवशता और अनिच्छा से किया था, इसलिए वह नगर अस्थाई (चंचल) था।

    चंद्रभागा का तपोबल और पति से पुनर्मिलन

    एक बार राजा मुचुकुंद के राज्य का ‘सोमशर्मा’ नामक एक सोमयाजी ब्राह्मण तीर्थयात्रा करते हुए मंदराचल पर्वत पहुंचा। वहां उसने शोभन को पहचाना और उससे पूरी बात पूछी। शोभन ने बताया कि यह राज्य रमा एकादशी के पुण्य से मिला है, परंतु यह अस्थाई है। यदि मेरी पत्नी चंद्रभागा अपने बचपन से किए गए एकादशी व्रतों का पुण्य मुझे दान कर दे, तो यह राज्य सदा के लिए स्थाई हो जाएगा।

    ब्राह्मण ने लौटकर चंद्रभागा को सारा वृत्तांत सुनाया। चंद्रभागा अत्यंत प्रसन्न हुई और महर्षि वामदेव के आश्रम में जाकर उनके मार्गदर्शन में अपने जीवनभर के एकादशी व्रतों का पुण्य फल अपने पति शोभन को समर्पित कर दिया। चंद्रभागा के तपोबल और पुण्य के प्रभाव से देवपुर नगर अजर-अमर और स्थाई हो गया। शोभन और चंद्रभागा पुनः एक हो गए और अनंत काल तक सुखपूर्वक रहने लगे।

    रमा एकादशी व्रत और पूजन विधि (Puja Vidhi)

    Rama Ekadashi 2026 पर भगवान श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित विधि-विधान से पूजा संपन्न करें

    दशमी तिथि के नियम (एक दिन पूर्व): दशमी तिथि (4 नवंबर) की शाम को केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें। भोजन में प्याज, लहसुन, मसूर की दाल और चावल का त्याग करें।

    प्रातःकाल स्नान व संकल्प: एकादशी (5 नवंबर) के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी या घर पर गंगाजल युक्त जल से स्नान करें। पीले वस्त्र धारण कर हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान विष्णु के समक्ष निर्जला या फलाहार व्रत का संकल्प लें।

    तुलसी पत्र का नियम: भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अत्यंत प्रिय है। परंतु एकादशी तिथि को तुलसी जी के पत्ते तोड़ना वर्जित होता है। इसलिए पूजा के लिए तुलसी पत्र एक दिन पूर्व (दशमी तिथि को) ही तोड़कर रख लें।

    विष्णु-लक्ष्मी पूजन: पूजा स्थल पर पाटे पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं, पीले पुष्प, पीले वस्त्र, चंदन, रोली, धूप, दीप और नैवेद्य (पीली मिठाई/फलाहार) अर्पित करें।

    मंत्र जप व कथा श्रवण: पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। Rama Ekadashi 2026 तत्पश्चात भक्तिपूर्वक रमा एकादशी की व्रत कथा सुनें व आरती उतारें।

    रात्रि जागरण: संभव हो तो रात्रि में विष्णु भजनों और कीर्तन के साथ जागरण करें।

      फलाहार के नियम: क्या खाएं और क्या न खाएं?

      स्वीकार्य फलाहार (Allowed Food): ताजे फल (केला, सेब, अंगूर), दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, आलू, शकरकंद, बादाम, पिस्ता और सेंधा नमक।

      वर्जित सामग्री (Forbidden Food): चावल, गेहूं, जौ, दालें, मक्का, बीन्स, बैंगन, हरी पत्तेदार सब्जियां, प्याज, लहसुन, साधारण नमक और नशीले पदार्थ।

      Rama Ekadashi Vrat Parana Vidhi (व्रत खोलने के नियम)

      एकादशी व्रत का संपूर्ण पुण्य फल तभी प्राप्त होता है Rama Ekadashi 2026 जब उसका पारण सही समय और विधि से किया जाए…

      1. पारण का समय: Rama Ekadashi 2026 का पारण 06 नवंबर 2026, शुक्रवार को सुबह 06:37 AM से 08:48 AM के बीच किया जाना चाहिए।
      2. दान-दक्षिणा: पारण करने से पूर्व किसी ब्राह्मण, जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर में अन्न (गेहूं, तिल), पीली दाल, पीले वस्त्र, फल और दक्षिणा का दान करें।
      3. गौ सेवा: भोजन ग्रहण करने से पहले पहली रोटी या फल गौ माता को अर्पित करें।
      4. पारण का भोजन: तुलसी पत्र युक्त जल या सात्विक भोजन से व्रत खोलें।

      सपनों और त्योहारों का संक्षिप्त सारणी विवरण (Quick Summary)

      विवरणतथ्य एवं नियम
      पर्व का नामरमा एकादशी (Rama Ekadashi)
      व्रत की तिथि05 नवंबर 2026 (गुरुवार)
      पूजित देवी-देवताभगवान केशव (विष्णु) एवं मां रमा (लक्ष्मी)
      पारण की तिथि व समय06 नवंबर 2026, प्रातः 06:37 AM से 08:48 AM
      मुख्य कथा पात्रराजा मुचुकुंद, चंद्रभागा, शोभन व सोमशर्मा
      प्रमुख मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवाय
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