September 2022

कैसे आये भगवान राम के पग तलवे में ये चार चिन्ह :–कमल_ वज्र _अंकुश _ध्वजा

बाबा तुलसी दास जी ने रामचरित्र मानस में लिखा है।“ललित अंक कुलसादिक चारी ।।” अर्थात भगवान राम के पग तलवे में चार चिन्ह अंकित हैं। १- कमल २- वज्र ३-अंकुश ४-ध्वजा। आइए जानते है कैसे आए प्रभु श्री राम के पग तलवे में ये चिन्ह  पूर्व कल्प में गज के पैर को ग्राह ने अपने

कैसे आये भगवान राम के पग तलवे में ये चार चिन्ह :–कमल_ वज्र _अंकुश _ध्वजा Read More »

महाभारत युद्ध का 18 दिनों का घटनाक्रम : जानिए किस दिन क्या हुआ था

मार्गशीर्ष शुक्ल 14 को महाभारत युद्ध प्रारम्भ हुआ था जो लगातार 18 दिनों तक चला था। यहां जानिए महाभारत युद्ध के 18 दिनों में किस दिन क्या हुआ था… पहला दिनयुद्ध के पहले दिन पांडव पक्ष को भारी हानि हुई थी। विराट नरेश के पुत्र उत्तर और श्वेत को शल्य और भीष्म ने मार दिया

महाभारत युद्ध का 18 दिनों का घटनाक्रम : जानिए किस दिन क्या हुआ था Read More »

अदभुत रहस्य :- आखिर क्यों निगला सीताजी ने लक्ष्मण को

एक समय की बात है मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम रावण का वध करके भगवती सीता के साथ अवधपुरी वापस आ गए । अयोध्या को एक दुल्हन की तरह से सजाया गया और उत्सव मनाया गया ।उत्सव मनाया जा रहा था तभी सीता जी को यह ख्याल आया की वनवास जाने से पूर्व मां सरयु से वादा

अदभुत रहस्य :- आखिर क्यों निगला सीताजी ने लक्ष्मण को Read More »

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा

अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनंत फल देने वाला माना गया है। भगवान विष्णु को समर्पित अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इसे लोकभाषा में अनंत चौदस के नाम से भी जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णुजी के

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा Read More »

सम्पूर्ण जीवन अधर्म करने के बाद भी दुर्योधन को क्यों मिला स्वर्ग में स्थान

 महाभारत का युद्ध खत्म हुआ। कौरव तो सभी युद्ध में मारे जा चुके थे। पांडव भी कुछ समय तक राज्य करके हिमालय पर चले गए। वहां पर एक, एक करके सभी भाई गिर गए। अकेले युधिष्ठिर अपने एक मात्र साथी कुत्ते के साथ बचे रहे और वे स्वर्ग गए। कहते हैं युधिष्ठिर जीवित ही स्वर्ग

सम्पूर्ण जीवन अधर्म करने के बाद भी दुर्योधन को क्यों मिला स्वर्ग में स्थान Read More »

सतयुग में पृथ्वी पर श्री हनुमान जन्म का अदभुत रहस्य

श्री व्यास जी ने राजा परीक्षित से कहा:–परीक्षित होनी तो होके रहती है, इसे कोई बदल नही सकता। आज मैं तुम्हे उस रहस्य को बताता हूँ, जो दुर्लभ है। एक समय सृष्टि से जल तत्व अदृश्य हो गया ।सृष्टि में त्राहि-त्राहि मच गयीऔर जीवन का अंत होने लगा तब व्रम्हा जी विष्णु जी ऋषि गण

सतयुग में पृथ्वी पर श्री हनुमान जन्म का अदभुत रहस्य Read More »

वसुदेव, देवकी और रोहिणी के पूर्वजन्म की कथा

कश्यप मुनि और उनकी दो पत्नियों (अदिति और दिति) ने ही जल-जन्तुओं के स्वामी वरूणदेव के शापवश पृथ्वी पर वसुदेव, देवकी और रोहिणी के रूप में अवतार ग्रहण किया था।एक बार महर्षि कश्यप यज्ञकार्य के लिए वरुणदेव की गौ ले आये। यज्ञ-कार्य की समाप्ति के बाद वरुणदेव के बहुत याचना करने पर भी उन्होंने वह

वसुदेव, देवकी और रोहिणी के पूर्वजन्म की कथा Read More »

भगवान विष्णु ने देवकी और वसुदेव के घर क्यों लिया कृष्णावतार?

स्वायम्भुवमन्वन्तर में जब माता देवकी का पहला जन्म हुआ था, उस समय उनका नाम ‘पृश्नि’ तथा वसुदेव ‘सुतपा’ नामक प्रजापति थे। दोनों ने संतान प्राप्ति की अभिलाषा से सूखे पत्ते खाकर और कभी हवा पीकर देवताओं का बारह हजार वर्षों तक तप किया।इन्द्रियों का दमन करके दोनों ने वर्षा, वायु, धूप, शीत आदि काल के

भगवान विष्णु ने देवकी और वसुदेव के घर क्यों लिया कृष्णावतार? Read More »

पुराणों में वर्णित शनि देव से जुड़े अदभुत रहस्य

काशी-विश्वनाथ की स्थापना करी थी शनि देव ने :-स्कन्द पुराण में काशी खण्ड में वृतांत आता है, कि छाया सुत श्री शनिदेव ने अपने पिता भगवान सूर्य देव से प्रश्न किया कि हे पिता! मै ऐसा पद प्राप्त करना चाहता हूँ, जिसे आज तक किसी ने प्राप्त नही किया, हे पिता ! आपके मंडल से मेरा

पुराणों में वर्णित शनि देव से जुड़े अदभुत रहस्य Read More »

उर्वशी अप्सरा के पूर्व जन्म की कहानी

प्राचीन काल में कश्मीर देश में देवव्रत नामक एक द्विज थे। उनके सुन्दर रूप वाली एक कन्या थी। जो मालिनी के नाम से प्रसिद्ध थी। द्विज ने उस कन्या का विवाह सत्यशील नामक सुन्दर बुद्धि मान द्विज के साथ कर दिया।मालिनी कुमार्ग पर चलने वाली पुंश्चली होकर स्वच्छन्दतापूर्वक इधर-उधर रहने लगी। उसके घर में काम-

उर्वशी अप्सरा के पूर्व जन्म की कहानी Read More »

दीपावली की प्रतिपदा को करें:–पाँचवे वेद ” महाभारत की पूजा, फिर करें गोवर्धन पूजा

व्यास जी ने अर्जुन से कहा :—– पूर्वकाल की बात है,तीन वलवान् असुरों ने आकाश में अपने नगर बना रक्खे थे । वे नगर विमान के रूप में आकाश में विचरा करते थे । उन तीन नगरों में एक लोहे का, दूसरा चाँदी का और तीसरा सोने का बना था । जो सोने का बना

दीपावली की प्रतिपदा को करें:–पाँचवे वेद ” महाभारत की पूजा, फिर करें गोवर्धन पूजा Read More »

||अदभुत रहस्य:- जब मृत्यु की भी हुई मृत्यु ||

गोदावरी के पावन तट पे “श्वेत” नामक एक ब्राह्मण रहते थे । जो शिव जी के अनन्य भक्त थे,सदा शिव भक्ती में लीन रहते थे। उनकी आयु पूरी हो चुकी थी । यमदूत उन्हें समय से लेने आये , लेकिन यमदूत श्वेत के घर में प्रवेश नही कर पाये। तब स्वयं ” मृत्यु देव”आये और

||अदभुत रहस्य:- जब मृत्यु की भी हुई मृत्यु || Read More »