September 2022

मोहिनी और विष्णु भक्त रुक्मांगद की कहानी

 प्राचीन काल में रुक्मांगद नामक एक प्रसिद्ध सार्वभौम नरेश थे। भगवान की आराधना ही उनका जीवन था। वे चराचार जगत में अपने आराध्य भगवान हषीकेश के दर्शन करते तथा भगवान विष्णु की सेवा की भावना से ही अपने राज्य का संचालन करते थे। वे सभी प्राणियों पर क्षमा भाव रखते थे।राजा रुक्मांगद ने अपने जीवन

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राधा जन्म की कहानी – ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार मां के गर्भ से नहीं जन्मी थी राधा 

 धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन व्रज में श्रीकृष्ण के प्रेयसी राधा का जन्म हुआ था। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, राधा भी श्रीकृष्ण की तरह ही अनादि और अजन्मी हैं, उनका जन्म माता के गर्भ

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उच्ची पिल्लयार मंदिर- मान्यता है की यहां विभीषण ने किया था श्रीगणेश पर वार, जानिए क्यों 

भगवान गणेश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है उच्ची पिल्लयार मंदिर (Ucchi Pillayar Temple) जो की तमिलनाडू के तिरुचिरापल्ली (त्रिचि) नामक स्थान पर रॉक फोर्ट पहाड़ी की चोटी पर बसा बसा हुआ है। यह मंदिर लगभग 273 फुट की ऊंचाई पर है और मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 400 सिढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है।

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जानिए कैसे हुआ भागीरथी गंगा से पहले,”पंच गंगाओं “का धरती पर अवतरण

हिन्दू धर्म ग्रंथो के अनुसार इस धरती पर भागीरथी गंगा के आने से पहले ही पंच गंगाओं का धरती पर अवतरण हो चूका था। इन पंच गंगाओं का जहाँ अवतरण हुआ था वो जगह “पंचनद तीर्थ” कहलाती है। आइए जानते है कैसे हुआ पंच गंगाओं का धरती पे आगमन ? रिषी शालंकायन के पुत्र शिलाद

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महाभारत प्रसंग- जब एक स्त्री के देखने मात्र से काले हो गए थे युधिष्ठिर के पैरों के नाखून

शास्त्रों में महाभारत को पांचवां वेद कहा गया है। महाभारत की कथा जितनी बड़ी है, उतनी ही रोचक भी है। इसके रचयिता महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास हैं। इस ग्रंथ में कुल एक लाख श्लोक हैं, इसलिए इसे शतसाहस्त्री संहिता भी कहते हैं।हम अब तक आपको महाभारत में वर्णित अनेकों कथाएं व प्रसंग बता चुके है। आज

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जब सुदर्शन चक्र के भय से भागे दुर्वासा

अम्बरीष (Ambarish) बड़े धर्मात्मा राजा थे। उनके राज्य में बड़ी सुख शांति थी। धन, वैभव,राज्य, सुख, अधिकार, लोभ, लालच से दूर निश्चिन्त होकर वह अपना अधिकतर समय ईश्वर भक्ति में लगाते थे। अपनी सारी सम्पदा, राज्य आदि सब कुछ वे भगवान विष्णु की समझते थे। उन्हीं के नाम पर वह सबकी देखभाल करते और स्वयं

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रहस्यमई “चूडामणि” का अदभुत रहस्य “

आज हम अपने पाठकों को रामायण में वर्णित चूडामणि की कहानी (Story of Chudamani) बता रहे है। इस कहानी में आप जानेंगे की- १–कहाँ से आई चूडा मणि ? २–किसने दी सीता जी को चूडामणि ? ३–क्यों दिया लंका में हनुमानजी को सीता जी ने चूडामणि ? ४–कैसे हुआ वैष्णो माता का जन्म? चौ.-मातु मोहि

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तुलसी और विष्णु की कहानी

 सावर्णि मुनि की पुत्री तुलसी अपूर्व सुंदरी थी। उनकी इच्छा थी कि उनका विवाह भगवान नारायण के साथ हो। इसके लिए उन्होंने नारायण पर्वत की घाटी में स्थित बदरीवन में घोर तपस्या की। दीर्घ काल तक तपस्या के उपरांत ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर दर्शन दिया और वर मांगने को कहा।तुलसी ने कहा- “सृष्टिकर्ता ब्रह्मदेव

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गजेन्द्र मोक्ष की कहानी 

अति प्राचीन काल की बात है। द्रविड़ देश में एक पाण्ड्यवंशी राजा राज्य करते थे। उनका नाम था इंद्रद्युम्न। वे भगवान की आराधना में ही अपना अधिक समय व्यतीत करते थे। यद्यपि उनके राज्य में सर्वत्र सुख-शांति थी। प्रजा प्रत्येक रीति से संतुष्ट थी तथापि राजा इंद्रद्युम्न अपना समय राजकार्य में कम ही दे पाते

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वराह अवतार कथा – जब हिरण्याक्ष का वध करने के लिए विष्णु बने वराह

एक बार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सनत-सनकादि भगवान विष्णु के दर्शन करने वैकुंठ धाम पहुंचे। वैकुंठ में विष्णु धाम के द्वार पर भगवान के दो पार्षद जय-विजय द्वारपाल के रूप में बैठे थे। इन दिगम्बर साधुओं को देखकर पहले तो उन्हें हंसी आ गई, फिर पूछा- “आप लोग कौन है ? ऐसे नंग-धड़ंग यहां

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कोकिलावन – यहाँ कोयल दर्शन दिए थे, श्री कृष्ण ने शनिदेव को

 दिल्ली से 128 किमी की दूरी पर तथा मथुरा से 60 किमी की दूरी पर स्थित कोसी कला स्थान पर सूर्यपुत्र भगवान शनिदेव जी का एक अति प्राचीन मंदिर स्थापित है। इसके आसपास ही नंदगांव, बरसाना एवं श्री बांके बिहारी मंदिर स्थित है। कोकिलावन धाम का यह सुन्दर परिसर लगभग 20 एकड में फैला है।

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असावरी देवी – यह है भगवान शिव कि बहन, जानिए कैसे और क्यों हुई उत्पन्न?

पौराणिक कथा के अनुसार जब देवी पार्वती ने भगवान शिव से विवाह किया तो वह खुद को घर में अकेली महसूस करती थीं। उनकी इच्छा थी कि काश उनकी भी एक ननद होती जिससे उनका मन लगा रहता। लेकिन भगवान शिव तो अजन्मे थे, उनकी कोई बहन नहीं थी इसलिए पार्वती मन की बात मन

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