September 2022

ऋषि दुर्वासा और कल्पवृक्ष की कथा

एक समय जब श्री रामचंद्र जी का दर्शन करने के लिए अपने साठ हजार शिष्यों सहित दुर्वासा ऋषि अयोध्या को जा रहे थे, तब मार्ग में जाते हुए दुर्वासा ने सोचा कि, मनुष्य का रूप धारण कर यह तो विष्णु जी ही संसार में अवतीर्ण हुए हैं; यह तो मैं जानता हूँ किन्तु संसारी जनों

ऋषि दुर्वासा और कल्पवृक्ष की कथा Read More »

शीतला माता की कहानी

यह कथा बहुत पुरानी है। एक बार शीतला माता ने सोचा कि चलो आज देखु कि धरती पर मेरी पूजा कौन करता है, कौन मुझे मानता है। यही सोचकर शीतला माता धरती पर राजस्थान के डुंगरी गाँव में आई और देखा कि इस गाँव में मेरा मंदिर भी नही है, ना मेरी पुजा है।माता शीतला

शीतला माता की कहानी Read More »

नवरात्रि की शुरूआत के पीछे की पौराणिक कथा क्या है ?

नवरात्रि का त्योहार हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है. नवरात्रि में 9 दिनो तक माँ शक्ति की 9 रूपों में पूजा की जाती है. जिसके बारे में आमतौर पर सभी को पता होता है. लेकिन काफी लोगों के मन में सवाल होता है कि नवरात्रि की पूजा क्यों शुरू की गई थी. इसके पीछे

नवरात्रि की शुरूआत के पीछे की पौराणिक कथा क्या है ? Read More »

कैसे हुई नवरात्रि मनाने की शुरुआत, पढ़ें ये पौराणिक कथाएं

नवरात्रि पर्व हिन्दू धर्म में बेहद महत्व रखता है. इस पर्व को लेकर लोग काफी उत्साहित (Excited) रहते हैं और मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना में नतमस्तक हो जाते हैं. नवरात्रि पर्व मनाये जाने की पौराणिक कथा पहली पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर नाम का एक राक्षस था जो ब्रह्माजी का बहुत बड़ा

कैसे हुई नवरात्रि मनाने की शुरुआत, पढ़ें ये पौराणिक कथाएं Read More »

यूं ही नहीं हुई थी शारदीय नवरात्र की शुरुआत, जान‍िए क्‍या है पौराणिक कथा

उपासना का पर्व है। गजब का है ये शक्तिपीठ, यहां दर्शन से एक, दो नहीं सात जन्‍मों के पापों से म‍िल जाती है मुक्ति शारदीय नवरात्र पर्व की पौराण‍िक कथा शास्त्रों में नवरात्र पर्व मनाए जानेशारदीय नवरात्र मां नवदुर्गा जी की उपासना का पर्व हर साल यह पावन पर्व श्राद्ध खत्म होते ही शुरू हो

यूं ही नहीं हुई थी शारदीय नवरात्र की शुरुआत, जान‍िए क्‍या है पौराणिक कथा Read More »

श्री मुचुकुन्द जी की कथा

 महाराज मुचुकुन्द राजा मान्धाता के पुत्र थे। ये पृथ्वी के एक छत्र सम्राट थे। बल और पराक्रम इतना कि देवराज इन्द्र भी इनकी सहायता के इच्छुक रहते थे। एक बार असुरों ने देवताओं को परास्त कर दिया। दुखी होकर देवताओं ने महाराज मुचुकुन्द से सहायता की प्रार्थना की। देवराज की प्रार्थना स्वीकार करके वे बहुत

श्री मुचुकुन्द जी की कथा Read More »

वनवास काल में महाराज युधिष्ठिर को श्री कृष्ण ने दी राम नाम की दीक्षा

अब एक भूत-समन्वित भविष्य की कथा सुनिए। जब युधिष्ठुर अपनी माता और भाइयों को साथ लिए वनवास कर रहे थे, तब उन्हें देखने के लिए श्री कृष्ण जी वन में गये। वहाँ पाण्डवों ने बड़े प्रेम से श्री कृष्ण जी की पूजा की और युधिष्ठर ने कहा — हे जगन्नाथ ! यदि आप मुझ पर

वनवास काल में महाराज युधिष्ठिर को श्री कृष्ण ने दी राम नाम की दीक्षा Read More »

नवरात्रि में 9 दिनों की पूजा विधि और मंत्र

हिंदू धर्म में नवरात्रि के दौरान साधना और उपासना करने के सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। ऐसी मान्यता है की सामान्य दिनों में किसी भी साधना में सिद्धि हासिल करने के लिए कम से कम 40 दिनों की आवश्यकता होती है। वहीं, नवरात्रि में नौ दिन ही अनुष्ठान में सफलता हासिल करने के लिए पर्याप्त होते

नवरात्रि में 9 दिनों की पूजा विधि और मंत्र Read More »

जब तुलसीदास को भगवान जगन्नाथ ने दिये राम रुप में दर्शन

तुलसीदास जी अपने इष्टदेव का दर्शन करने श्रीजगन्नाथपुरी गये। मंदिर में भक्तों की भीड़ देख कर प्रसन्न मन से अंदर प्रविष्ट हुए। जगन्नाथ जी का दर्शन करते ही निराश हो गये। विचार किया कि यह हस्तपादविहीन देव हमारा इष्ट नहीं हो सकता। बाहर निकल कर दूर एक वृक्ष के तले बैठ गये। सोचा कि इतनी

जब तुलसीदास को भगवान जगन्नाथ ने दिये राम रुप में दर्शन Read More »

श्री कृष्ण ने किए थे 8 विवाह, जानिए उनकी कहानियां

पुराणों के अनुसार श्री कृष्ण ने 8 स्त्रियों से विवाह किया था जो उनकी पटरानियां बानी थी। ये थी – रुक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रविंदा, सत्या(नाग्नजिती), भद्रा और लक्ष्मणा। आइए जानते है श्रीकृष्ण द्वारा इन आठ के साथ किए गए विवाह की कहानियां – 1. रुक्मिणी-विदर्भ राज्य का भीष्म नामक एक वीर राजा था। उसकी

श्री कृष्ण ने किए थे 8 विवाह, जानिए उनकी कहानियां Read More »

अपने पुत्रों को ही नदी में बहाया था गंगा ने, पर क्यों?, जानिए गंगा से जुडी ऐसी ही रोचक बातें

हिन्दू धर्म में गंगा को सबसे पूजनीय नदी माना गया है। गंगा के संबंध में अनेक पुराणों में कई कथाएं पढ़ने को मिलती है। महाभारत के सबसे प्रमुख पात्र भीष्म भी गंगा के ही पुत्र थे। आज हम आपको गंगा से जुड़ी कुछ ऐसी रोचक बातें बता रहे हैं, जो बहुत कम लोग जानते हैं-

अपने पुत्रों को ही नदी में बहाया था गंगा ने, पर क्यों?, जानिए गंगा से जुडी ऐसी ही रोचक बातें Read More »

वनवास के बाद सीता जी का आगमन, अश्वमेघ यज्ञ का आरम्भ तथा अश्व के पूर्व जन्म की कथा

तदनन्तर लक्ष्मण ने जाकर पुनः जानकी के चरणों में प्रणाम किया। लक्ष्मण को आया देख पुनः अपने को बुलाये जाने की बात सुनकर सीता ने कहा —- ‘लक्ष्मण ! मुझे श्री रामचंद्र जी ने त्याग दिया है अतः अब मैं कैसे चल सकती हूँ? मैं यहीं रहकर श्री राम को स्मरण किया करूँगी।उनकी बात सुनकर

वनवास के बाद सीता जी का आगमन, अश्वमेघ यज्ञ का आरम्भ तथा अश्व के पूर्व जन्म की कथा Read More »