श्री शिवनिराजन स्तोत्रम एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव की आराधना करता है। यह स्तोत्र शिव के तीन रूपों, निराजन, शिव और शंकर की महिमा का वर्णन करता है।
स्तोत्र का प्रारंभ निराजन रूप की स्तुति से होता है। निराजन वह रूप है जिसमें भगवान शिव सभी सीमाओं से परे हैं। वे अनादि और अनंत हैं, और वे सभी सृष्टि के स्रोत हैं।
दूसरा श्लोक शिव रूप की स्तुति करता है। शिव वह रूप है जिसमें भगवान शिव सृष्टि के संहारक हैं। वे सभी दुष्टों का नाश करते हैं, और वे धर्म और न्याय के रक्षक हैं।
अंतिम श्लोक शंकर रूप की स्तुति करता है। शंकर वह रूप है जिसमें भगवान शिव भक्तों के कल्याण के लिए कार्य करते हैं। वे सभी दुखों को दूर करते हैं, और वे मोक्ष के मार्गदर्शक हैं।
श्री शिवनिराजन स्तोत्रम एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में मदद कर सकता है। यह स्तोत्र शांति, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने में सक्षम है।
स्तोत्र का पाठ इस प्रकार है:
निराजन रूपं शिवरूपं शंकररूपं नमः अनादि अनंतं ब्रह्मांडनाथं नमः सर्व सृष्टि सृज्य संहारि शत्रु विनाशं करोतु भक्तानां कल्याणं नमः
अर्थ:
मैं निराजन रूप, शिव रूप और शंकर रूप को नमन करता हूं। मैं अनादि अनंत, ब्रह्मांड के स्वामी को नमन करता हूं। आपने सभी सृष्टि को बनाया और संहार किया, आपने शत्रुओं का नाश किया। आप भक्तों के कल्याण के लिए कार्य करें, मैं आपको नमन करता हूं।
श्री शिवनिराजन स्तोत्रम की रचना किसने की है, यह ज्ञात नहीं है। यह स्तोत्र प्राचीन काल से ही प्रचलित है, और इसे कई संतों और आचार्यों ने प्रतिपादित किया है।
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