Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति आज, जानें पुण्य और महापुण्य काल का मुहूर्त और महत्व

Makar Sankranti 2025: मकर संक्राति पर सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं जिस कारण से इसे उत्तरायण पर्व भी कहते हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, सूर्यदेव की विशेष पूजा का विशेष महत्व होता है। Makar Sankranti 2025: आज मकर संक्रांति का पावन पर्व है। तीर्थराज प्रयागराज में मकर संक्रांति पर साधु-संत और गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग गंगा, यमुना, त्रिवेणी, नर्मदा और शिप्रा जैसी अन्य पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य लाभ की प्राप्ति करते हैं। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के त्योहार का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक साल यह त्योहार पौष महीने में मनाया जाता है। लेकिन इस बार मकर संक्रांति पौष माह के खत्म होने के बाद मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस सूर्य धनु राशि की अपनी यात्रा को विराम देकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। जिसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्राति पर सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं जिस कारण से इसे उत्तरायण पर्व भी कहते हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, सूर्यदेव की विशेष पूजा का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा इस दिन दान करने का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति का महत्व, पूजा विधि और स्नान का शुभ मुहूर्त। मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2025 Shubh Muhurat)  उदयातिथि के अनुसार, मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी 2025 यानी आज ही मनाई जाएगी. आज सुबह सूर्य 8 बजकर 41 मिनट मकर राशि में प्रवेश करेंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति पुण्य काल का समय आज सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और महापुण्य काल का समय आज सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. दान करना शुभ Makar Sankranti dhan karna subh मकर संक्राति के पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहा जाता है. इस दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्यदेव की उपासना करने का विशेष महत्व है. इस दिन किया गया दान अक्षय फलदायी होता है. शनि देव के लिए प्रकाश का दान करना भी बहुत शुभ होता है. पंजाब, यूपी, बिहार और तमिलनाडु में ये नई फसल काटने का समय होता है. इसलिए किसान इस दिन को आभार दिवस के रूप में भी मनाते हैं. इस दिन तिल और गुड़ की बनी मिठाई बांटी जाती है. इसके अलावा मकर संक्रांति पर कहीं-कहीं पतंग उड़ाने की भी परंपरा है. मकर संक्रांति का महत्व  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं. चूंकि शनि मकर व कुंभ राशि का स्वामी है. लिहाजा यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है. एक अन्य कथा के अनुसार असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति मनाई जाती है. बताया जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था. तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा मकर संक्रांति पूजा विधि Makar Sankranti puja vidhi मकर संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस त्योहार के देशभर के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की विधि-विधान के साथ पूजा करने का महत्व होता है। मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर घर के साफ-सफाई करने के बाद घर के पास किसी पवित्र नदी में स्नान करने जाएं और वहां पर स्नान करने के बाद सूर्य देव अर्घ्य दें। फिर सूर्यदेव से जुड़े मंत्रों का जाप करें और दान-दक्षिणा करें।   मकर संक्रांति पर प्रयागराज के त्रिवेणी में स्नान का महत्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश काल के समय जब सभी देवों के दिन का शुभारंभ होता है तो तीनों लोकों में प्रतिष्ठित गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगमतट ‘त्रिवेणी’ पर साठ हजार तीर्थ और साठ करोड़ नदियाँ, सभी देवी-देवता, यक्ष, गन्धर्व, नाग, किन्नर आदि तीर्थराज प्रयाग’ में एकत्रित होकर गंगा-यमुना-सरस्वती के पावन संगम तट पर स्नान, जप-तप और दान-पुण्य कर अपना जीवन धन्य करते हैं। तभी इसे तीर्थों का कुंभ भी कहा जाता है। 

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Laxmi prapti upay : रूठी लक्ष्मी को मनाकर घर कैसे लाऐं, लक्ष्मी आओ हमारे द्वार, दूर करो दरिद्रता, भर दो घर को धन-धान्य से

Laxmi prapti upay : आज दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है और शाम के समय भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाएगी। रूठी लक्ष्मी को मनाने और घर पर बुलाने के लिए अनेक उपाय तंत्र-मंत्र के ग्रंथों से लेकर लाल किताब, वास्तु शास्त्र एवं धार्मिक ग्रंथों में वर्णित हैं। दीपावली के दिन इन उपायों को अवश्य करें। दीपावली के दिन सर्वप्रथम घर की अच्छी प्रकार से सफाई करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मुख्य द्वार को स्वच्छ और साफ करके उसकी सजावट करें तथा रंगोली फूलों और दीयों से सजाऐं। लक्ष्मी जी का स्वागत करने के लिए प्रवेश द्वार पर कमल का फूल या रंगोली में श्री का चिन्ह बनाना शुभकारी है। प्रदोषकाल में स्थिर लग्न का चयन कर लक्ष्मी पूजन हेतु संपूर्ण पूजा सामग्री एकत्रित करके लक्ष्मी गणेश जी की मूर्तियों को सम्मुख रखकर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके साफ कपड़े से पोंछ कर पूजा घर में शुद्ध आसन पर स्थापित करें। कम से कम पांच अथवा ग्यारह, दीपक जलाकर पूजा स्थल पर भगवान के सम्मुख रखें, जिसके पश्चात् पूरे घर में दीपमालिका प्रज्जविलत करें। धूप-दीप से पूजा करें, नैवेद्य मिठाई खील, बताशे फल आदि का भोग लगाएं, तथा दक्षिणा अर्पण करें। कपूर से आरती करें तथा पूजा आदि में कोई त्रुटि आदि हो गई हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थना करें । लक्ष्मी जी की प्रसन्नता के लिए पूरे परिवार के साथ गणेश, लक्ष्मी, हनुमान जी, सरस्वती जी, काली एवं कुबेर आदि देवों की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। धन, भवन, वाहन, स्त्री, कन्या, यश, एकता, सद्बुद्धि, आठ रूपों में लक्ष्मी का वास माना गया है। धन लक्ष्मी, सौभाग्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, यश लक्ष्मी आदि स्वरूपों में लक्ष्मी का पूजन करें। दीपावली देने का त्योहार है, जो व्यक्ति जरूरतमंदों को दान-पुण्य करता है, उसके इस पुण्य कार्य से मां लक्ष्मी उस पर प्रसन्न होकर उसे और ज्यादा धन-दौलत देती हैं। जैसे मान लीजिए आप दस लोगों को रोज़ भोजन कराने का संकल्प करते हैं, अगर आप उन्हें भोजन नहीं भी कराते तो किसी न किसी माध्यम से वे भोजन करेंगे ही, भूखे नहीं रहेंगे, लेकिन जब आप उन्हें भोजन कराते हैं, तो उनसे संबंधित भाग्य, धन-लाभ आपको प्राप्त होता है। ये देने का नियम है, इसलिए जो व्यक्ति नियमित रूप से दान-पुण्य, भण्डारा आदि कराते रहते हैं, उनका धनकोष कभी खाली नहीं होता, बल्कि और बढ़ता जाता है। यह लक्ष्मीजी की कृपा और दान-पुण्य की महिमा है।

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Dream Interpretation Money : सपने में पैसे देखना शुभ या अशुभ, जानें क्या शुरु होंगे अच्छे दिन या होगा बैड लक

Dream Interpretation about Money: सपने हमारे जीवन का आईना होते हैं। कहा जाता है कि इंसान जिस तरह की स्थिति से गुजर रहा होता है, उसे वैसे ही सपने आते हैं। स्वप्न विज्ञान के जानकारों की मानें तो कुछ सपने ऐसे भी होते हैं जिनसे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हमें अक्सर जो सपने आते हैं वह हम तुरंत अपनों के साथ या फिर दोस्तों के साथ साझा कर लेते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, आने वाले हर सपने का कोई ना कोई संकेत जरूर होता है, जो हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं को लेकर सचेत करता है। हर व्यक्ति पैसा कमाने की चाह रखता है। ऐसे में यदि सपने में पैसे दिख जाएं तो व्यक्ति को बहुत खुशी होती है। लेकिन सपने में रुपये पैसे का दिखना शुभ होता है या अशुभ आइए जानते हैं विस्तार से। सपने में सिक्के दिखाई देना का मतलब Sapne me coin dikhai dena ka matlab स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आपको सपने में सिक्के देखते हैं या फिर सिक्कों को खड़कते देखते हैं तो इस तरह के सपने शुभ संकेत नहीं देते हैं। इस तरह के सपनों का आर्थिक है कि आने वाला समय आपके लिए काफी कष्टकारी रहने वाला है। आपको आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस तरह के सपने आने पर आपको किसी जरूरतमंद कुछ धनराशि दान करनी चाहिए। या फिर आप किसी मंदिर में भी दान कर सकते हैं। सपने में किसी से पैसे लेने का मतलब sapne me kisi se pese lene ka matlab कई बार लोगों को ऐसे सपने भी आते हैं कि कोई व्यक्ति उन्हें नोट दे रहा है। इस तरह के सपनों को स्वप्न शास्त्र में बहुत ही शुभ माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस तरह के सपने आने का मतलब है कि आपको जल्द ही अचानक से धन लाभ मिल सकता है। साथ ही इस तरह के सपने आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाले भी रहेंगे। इस तरह के सपनों का अर्थ है कि आप यदि पिछले लंबे समय से आर्थिक तंगी झेल रहे हैं तो उसमें आपको थोड़ी राहत मिलेगी। सपने में फटे पुराने नोट दिखाई देना sapne me fate purane note dikhai dena स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आप सपने में फटे हुए नोट देखते हैं तो इस तरह के सपनों को भी स्वप्न शास्त्र में अशुभ माना गया है। इस तरह के सपनों का अर्थ है कि आने वाला समय आपके लिए काफी मुश्किल भरा होने वाला है। आपको करियर से जुड़े कुछ उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस तरह के सपने आने पर आपको सबसे पहले किसी जरुरमंद व्यक्ति को उनकी जरूरत की कोई चीज भेट करनी चाहि सपने में धन चोरी होते दिखाई देना sapne me dhan chori hote dikhai dena सपने में यदि आप देखते हैं कि आपका धन कोई चोरी कर रहा है तो इस तरह के सपनों को स्वप्न शास्त्र में शुभ माना गया है। इस तरह के सपने आने का अर्थ है कि आपको आने वाले कुछ ही दिनों में बड़ी मात्रा में धन प्राप्त होगी। साथ ही आपके जो काम पिछले काफी समय से अटके हुए थे वह अब पूरे हो जाएंगे। इस तरह के सपने आने पर आपको किसी के साथ इन्हें साझा नहीं करना चाहिए। बल्कि, आपको अगले दिन तुरंत भगवान के मंदिर में जाकर दर्शन करके आना चाहिए।

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Mahakumbh 2025: महाकुंभ में कब-कब हैं शाही स्नान? नोट कर लें सभी 6 स्नानों की डेट और शुभ मुहूर्त

Mahakumbh 2025 Shahi Snan Kab Kab Hai: महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है जिसमें शाही स्नान का विशेष महत्व है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ में शाही स्नान करने वाले मोक्ष को प्राप्त करते हैं. ऐसे में अगर आप भी महाकुंभ मेंं जाने वाले हैं, तो शाही स्नान की तिथियां और स्नान का समय जान लें. Kumbh Mela 2025: पूरे 12 वर्षों बाद महाकुंभ मेला लगता है। यह सबसे बड़ा और प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान होता है। इस साल प्रयागराज की धरती पर महाकुंभ मेले का आयोजन हो रहा है। महाकुंभ का आंरभ 13 जनवरी 2025 से होगा। महाकुंभ में त्रिवेणी में स्नान करने के लिए देश-विदेश से तीर्थयात्री आएंगे। धार्मिक मान्यता है कि महाकुंभ में गंगा स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। यूं तो महाकुंभ में हर दिन स्नान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है लेकिन कुंभ में शाही स्नान का खास महत्व होता है। शाही स्नान के दिन स्नान करने के लिए लाखों- करोड़ों की संख्या में तीर्थयात्री जुटते हैं। तो आइए जानते हैं कि शाही स्नान कब-कब किया जाएगा।  Mahakumbh 2025 Shahi Snan Date: प्रयागराज में 13 जनवरी से महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है. ये महाकुंभ 45 दिनों तक चलेगा. वहीं महाकुंभ की समापन 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर होगा. इस महाकुंभ में साधु संतों के साथ-साथ बड़ी तादाद में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे. इस महाकुंभ में कुल 6 शाही स्नान की तिथियां पड़ रही हैं. तो आइए पंचांग के अनुसार जानते हैं कि 6 शाही स्नान कब-कब हैं. साथ ही शाही स्नान का शुभ मुहूर्त क्या हैं? पहला शाही स्नान महाकुंभ में पहला शाही स्नान पौष पूर्णिमा पर होगा. पौष पूर्णिमा 13 जनवरी को पड़ रही है. इस दिन स्नान का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. मकर संक्रांति का है स्नान महाकुंभ में दूसरा शाही स्नान मकर संक्रांति पर किया जाएगा. इस दिन स्नान का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. इस दिन स्नान के साथ साथ दान करने की भी मान्यता है. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान के बाद दान करने से पुण्यकारी फल प्राप्त होते हैं. मौनी अमावस्या का शाही स्नान महाकुंभ में तीसरा शाही स्नान मौनी अमावस्या का होगा. मौनी अमावस्या का स्नान सबसे बड़ा शाही स्नान होता है. ये शाही स्नान 29 जनवरी को किया जाएगा. मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज समेत अन्य तीर्थ स्थलों पर स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन स्नान का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगा. सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर ये मुहूर्त समाप्त हो जाएगा. बसंत पंचमी का शाही स्नान महाकुंभ में चौथा शाही स्नान बसंत पंचमी के दिन किया जाएगा. ये शाही स्नान 3 फरवरी को होगा. इस स्नान का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 23 पर शुरू होगा ये मुहूर्त 6 बजकर 16 मिनट तक रहेगा. माघी पूर्णिमा का शाही स्नान महाकुंभ का पांचवा शाही माघी पूर्णिमा पर किया जाएगा. ये शाही 12 फरवरी को होगा. सामान्य दिनों में भी माघी पूर्णिमा का स्नान महत्वपूर्ण होता है. इस दिन स्नान का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त सुबह 6 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. महाशिवरात्रि का शाही स्नान महाकुंभ का अंतिम शाही स्नान महाशिवरात्रि को किया जाएगा. ये शाही स्नान 26 फरवरी को होगा. इस दिन लोग व्रत रखेंगे और महादेव की पूजा करेंगे. इस दिन महाकुंभ का समापन भी होगा. इस दिन स्नान का ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 9 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त सुबह 5 बजकर 59 मिनट पर समाप्त होगा. (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Gajendra Moksha Stotram:गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र

गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र (Gajendra Moksha Stotram) श्रीशुक उवाच एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो ह्रदि । जजाप परमं जाप्यं प्राक्जन्मन्यनुशिक्षितम् ॥  १ ॥ गजेन्द्र उवाच ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम् । पुरुषायादिबीजाय परेशायाभीधीमहि ॥  २ ॥ यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयम् । योऽस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्दे स्वयंभुवम् ॥ ३ ॥ यः स्वात्मनीदं निजमाययार्पितम् । क्वचिद्विभांतं क्व च तत्तिरोहितम् ।। अविद्धदृक् साक्ष्युभयम तदीक्षते । सआत्ममूलोऽवतु मां परात्पतरः ।। ४ ।। कालेन पंचत्वमितेषु कृत्स्नशो । लोकेषु पालेषु च सर्वहेतुषु ।। तमस्तदा ऽ ऽ सीद् गहनं गभीरम् । यस्तस्य पारे ऽ भिविराजते विभुः ॥ ५ ॥ न यस्य देवा ऋषयः पदं विदुः । जन्तुः पुनः कोऽर्हति गंतुमीरितुम् ।। यथा नटस्याकृतिभिर्विचेष्टतो । दुरत्ययानुक्रमणः स माऽवतु ॥ ६ ॥ दिदृक्षवो यस्य पदं सुमंगलम् । विमुक्तसंगा मुनयः सुसाधवः ।। चरंत्यलोकव्रतमव्रणं वने । भूतात्मभूतः सुह्रदः स मे गतिः ॥ ७ ॥- गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र न विद्यते यस्य च जन्म कर्म वा । न नामरुपे गुणदोष एव वा ।। तथापि लोकाप्ययसंभवाय यः । स्वमायया तान्यनुकालमृच्छति ॥ ८ ॥ तस्मै नमः परेशाय ब्रह्मणेऽनन्तशक्तये । अरुपायोरुरुपाय नम आश्र्चर्य कर्मणे ॥ ९ ॥ नम आत्मप्रदीपाय साक्षिणे परमात्मने । नमो गिरां विदूराय मनसश्चेतसामपि ॥ १० ॥ सत्त्वेन प्रतिलभ्याय नैष्कर्म्येण विपश्र्चिता । नमः कैवल्यनाथाय निर्वाणसुखसंविदे ॥ ११ ॥ नमः शांताय घोराय मूढाय गुणधर्मिणे । निर्विशेषाय साम्याय नमो ज्ञानघनाय च ॥ १२ ॥ क्षेत्रज्ञाय नमस्तुभ्यं सर्वाध्यक्षाय साक्षिणे । पुरुषायात्ममूलाय मूलप्रकृतये नमः ॥ १३ ॥ सर्वेन्द्रियगुणद्रष्ट्रे सर्वप्रत्ययहेतवे । असताच्छाययोक्ताय सदाभासाय ते नमः ॥ १४ ॥ नमो नमस्तेऽखिल कारणाय । निष्कारणायाद्भुत कारणाय ।। सर्वागमाम्नायमहार्णवाय । नमोऽपवर्गाय परायणाय ॥ १५ ॥ गुणारणिच्छन्नचिदूष्मपाय । तत्क्षोभ-विस्फूर्जितमानसाय ।। नैष्कर्म्यभावेन विवर्जितागम । स्वयंप्रकाशाय नमस्करोमि ॥ १६ ॥ मादृक्प्रपन्नपशुपाशविमोक्षणाय । मुक्ताय भुरिकरुणाय नमोऽलयाय ।। स्वांशेनसर्वतनुभृत्मनसि-प्रतीत–प्रत्यग् दृशे भगवते बृहते नमस्ते ॥ १७ ॥ आत्मात्मजाप्तगृहवित्तजनेषु सक्तैः । दुष्प्रापणाय गुणसंगविवर्जिताय ।। मुक्तात्मभिः स्वह्रदये परिभाविताय । ज्ञानात्मने भगवते नमः ईश्र्वराय ॥ १८ ॥ यं धर्मकामार्थ-विमुक्तिकामाः । भजन्त इष्टां गतिमाप्नुवन्ति ।। किंत्वाशिषो रात्यपि देहमव्ययम् । करोतु मेऽदभ्रदयो विमोक्षणम् ॥ १९ ॥ एकांतिनो यस्य न कंचनार्थम् । वांछन्ति ये वै भगवत् प्रपन्नाः ।। अत्यद्भुतं तच्चरितं सुमंगलम् । गायन्त आनन्द समुद्रमग्नाः ॥ २० ॥ तमक्षरं ब्रह्म परं परेशम् । अव्यक्तमाध्यात्मिकयोगगम्यम् ।। अतीन्द्रियं सूक्ष्ममिवातिदूरम् । अनंतमाद्यं परिपूर्णमिडे ॥ २१ ॥ यस्य ब्रह्मादयो देवा वेदा लोकाश्र्चराचराः । नामरुपविभेदेन फल्ग्व्या च कलया कृताः ॥ २२ ॥ यथार्चिषोऽग्ने सवितुर्गभस्तयोः । निर्यान्ति संयान्त्यसकृत् स्वरोचिषः ।। तथा यतोऽयं गुणसंप्रवाहो । बुद्धिर्मनः ख्रानि शरीरसर्गाः ॥ २३ ॥ स वै न देवासुरमर्त्यतिर्यङ । न स्त्री न षंढो न पुमान् न जन्तुः ।। नायं गुणः कर्म न सन्न चासन् । निषेधशेषो जयतादशेषः ॥ २४ ॥ जिजी विषे नाहमियामुया किम् । अन्तर्बहिश्र्चावृतयेभयोन्या ।। इच्छामि कालेन न यस्य विप्लवः । तस्यात्मलोकावरणस्य मोक्षम् ॥ २५ ॥ सोऽहं विश्र्वसृजं विश्र्वमविश्र्वं विश्र्ववेदसम् । विश्र्वात्मानमजंब्रह्म प्रणतोऽस्मि परं पदम् ॥ २६ ॥ योगरंधितकर्माणो ह्रदि योग-विभाविते । योगिनो यं प्रपश्यति योगेशं तं नतोऽस्म्यहम् ॥ २७ ॥ नमो नमस्तुभ्यमसह्यवेग–शक्तित्रयायाखिलधीगुणाय ।। प्रपन्नपालाय दुरन्तशक्तये । कदिन्द्रियाणामनवाप्यवर्त्मने ॥ २८ ॥ नायं वेद स्वमात्मानं यच्छक्त्याहं धिया हतम् । तं दुरत्ययमाहात्म्यं भगवंतमितोऽस्म्यहम् ॥ २९ ॥ श्रीशुक उवाच एवं गजेन्द्र मुपवर्णितनिर्विशेषम् । ब्रह्मादयो विविधलिंग भिदाभिमानाः ।। नैते यदोपससृपुनिंखिलात्मकत्वात् । तत्राखिलामरमयो हरिराविरासीत् ॥ ३० ॥ तं तद्वदार्तमुपलभ्य जगन्निवासः । स्तोत्रं निशम्य दिविजै सह संस्तुवद्भिः ।। छंदोमयेन गरुडेन समुह्यमानः । चक्रायुधोऽभ्यगमदाशु यतो गजेन्द्रः ॥ ३१ ॥ सोऽन्तः सरस्युरुबलेन गृहीत आर्तो । दृष्टवा गरुत्मति हरिं ख उपात्तचक्रम् ।। उत्क्षिप्य साम्बुजकरं गिरमाह कृच्छ्रात् । नारायणाखिलगुरो भगवन् नमस्ते ॥ ३२ ॥ तं वीक्ष्य पीडितमजः सहसावतीर्य । सग्राहमाशु सरसः कृपायोज्जहार ।। ग्राहाद् विपाटितमुखादरिणा गजेन्द्रम् । संपश्यतां हरिरमूमुचदुस्त्रियाणाम् ॥ ३३ ॥ योऽसौ ग्राहः स वै सद्यः परमाश्र्चर्य रुपधृक् । मुक्तो देवलशापेन हुहु-गंधर्व सत्तमः ।। सोऽनुकंपित ईशेन परिक्रम्य प्रणम्य तम् । लोकस्य पश्यतो लोकं स्वमगान्मुक्त-किल्बिषः ॥ ३४ ॥ गजेन्द्रो भगवत्स्पर्शाद् विमुक्तोऽज्ञानबंधनात् । प्राप्तो भगवतो रुपं पीतवासाश्र्चतुर्भुजः ।। एवं विमोक्ष्य गजयुथपमब्जनाभः । स्तेनापि पार्षदगति गमितेन युक्तः ॥ ३५ ॥ गंधर्वसिद्धविबुधैरुपगीयमान- कर्माभ्दुतं स्वभवनं गरुडासनोऽगात् ॥ ३६ ॥ ॥ इति श्रीमद् भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां अष्टमस्कन्धे गजेंन्द्रमोक्षणे तृतीयोऽध्यायः ॥

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Ganga Dussehra Stotra:गंगा दशहरा स्तोत्र

Ganga Dussehra Stotra:गंगा दशहरा स्तोत्र: यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करके गंगा दशहरा स्तोत्र का पाठ करता है, तो व्यक्ति के सभी दोष और पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही जातक को अग्नि, चोर, सांप आदि का भय नहीं रहता। भविष्य पुराण में इसके बारे में बताया गया है। इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद मां गंगा स्तोत्र का पाठ करने से दस प्रकार के दोष नष्ट हो जाते हैं। भक्तिपूर्वक गंगा दशहरा स्तोत्र पढ़ने, सुनने और शरीर द्वारा किए जा रहे दस प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाता है। गंगा दशहरा स्तोत्र जिसके घर में लिखकर रखा जाता है, उसे अग्नि, चोर, सांप आदि का कभी भय नहीं रहता। वैदिक शास्त्रों के अनुसार, राजा सगर सत्य युग में सूर्यवंश के एक प्रसिद्ध राजा थे। विदर्भ की राजकुमारी और शाही सिवी राजवंश की दूसरी राजकुमारी से विवाहित, राजा राजा भगीरथ, राजा दशरथ और राजकुमार राम (भगवान कृष्ण के अवतार) के पूर्वज थे। हिंदुओं का मानना ​​है कि इस दिन पवित्र नदी गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरी थी। Ganga Dussehra Stotra गंगा दशहरा स्तोत्र हिंदू कैलेंडर महीने ज्येष्ठ के शुक्ल पक्ष की दशमी (10वें दिन) को होता है। एक बार की बात है, राजा सगर ने योग्य ब्राह्मणों की मदद से अश्वमेध यज्ञ नामक एक यज्ञ किया। यह राजा की संप्रभुता को साबित करने के लिए था। स्वर्ग के राजा इंद्र को यज्ञ के परिणामों पर चिंता होने लगी और फिर उन्होंने अपनी रहस्यमय शक्तियों के माध्यम से घोड़ों को चुरा लिया। Ganga Dussehra Stotra:गंगा दशहरा स्तोत्र लाभ वैदिक पुराण में लिखा है कि, जो व्यक्ति इस दशहरा के दिन गंगा के जल में खड़ा होकर इस स्तोत्र का दस बार पाठ करता है, चाहे वह दरिद्र हो, असमर्थ हो, तो भी वह प्रयासपूर्वक गंगा की पूजा करके फल प्राप्त करता है। दशहरा पर स्नान की यह विधि पूरी हुई। स्कंद पुराण के वचनों को गंगा दशहरा स्तोत्र कहा जाता है और इसके पाठ की विधि – सभी घटकों से युक्त सुंदर तीन नेत्रों वाला चतुर्भुज, जो चार भुज, रत्न कुंभ, श्वेतकमल, वरद और अभय से सुशोभित है, सफेद वस्त्र पहने हुए है। Ganga Dussehra Stotra:किसको करना है यह स्तोत्र गंगा दशहरा स्तोत्र Ganga Dussehra Stotra का जाप कोई भी व्यक्ति कर सकता है क्योंकि यह सार्वभौमिक है और इस मानव जीवन में जाने-अनजाने में पाप होते हैं। वैदिक नियम के अनुसार गंगा दशहरा स्तोत्र का जाप करने से व्यक्ति सभी बुराइयों से मुक्त हो जाता है।गंगा दशहरा स्तोत्र के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया एस्ट्रो मंत्र से संपर्क करें। गंगा दशहरा स्तोत्र | Ganga Dussehra Stotra ॐ नमः शिवायै गंगायै, शिवदायै नमो नमः। नमस्ते विष्णु-रुपिण्यै, ब्रह्म-मूर्त्यै नमोऽस्तु ते।। नमस्ते रुद्र-रुपिण्यै, शांकर्यै ते नमो नमः। सर्व-देव-स्वरुपिण्यै, नमो भेषज-मूर्त्तये।। सर्वस्य सर्व-व्याधीनां, भिषक्-श्रेष्ठ्यै नमोऽस्तु ते। स्थास्नु-जंगम-सम्भूत-विष-हन्त्र्यै नमोऽस्तु ते।। संसार-विष-नाशिन्यै, जीवानायै नमोऽस्तु ते। ताप-त्रितय-संहन्त्र्यै, प्राणश्यै ते नमो नमः।। शन्ति-सन्तान-कारिण्यै, नमस्ते शुद्ध-मूर्त्तये। सर्व-संशुद्धि-कारिण्यै, नमः पापारि-मूर्त्तये।। भुक्ति-मुक्ति-प्रदायिन्यै, भद्रदायै नमो नमः। भोगोपभोग-दायिन्यै, भोग-वत्यै नमोऽस्तु ते।। मन्दाकिन्यै नमस्तेऽस्तु, स्वर्गदायै नमो नमः। नमस्त्रैलोक्य-भूषायै, त्रि-पथायै नमो नमः।। नमस्त्रि-शुक्ल-संस्थायै, क्षमा-वत्यै नमो नमः। त्रि-हुताशन-संस्थायै, तेजो-वत्यै नमो नमः।। नन्दायै लिंग-धारिण्यै, सुधा-धारात्मने नमः। नमस्ते विश्व-मुख्यायै, रेवत्यै ते नमो नमः।। बृहत्यै ते नमस्तेऽस्तु, लोक-धात्र्यै नमोऽस्तु ते। नमस्ते विश्व-मित्रायै, नन्दिन्यै ते नमो नमः।। पृथ्व्यै शिवामृतायै च, सु-वृषायै नमो नमः। परापर-शताढ्यै, तारायै ते नमो नमः।। पाश-जाल-निकृन्तिन्यै, अभिन्नायै नमोऽस्तु ते। शान्तायै च वरिष्ठायै, वरदायै नमो नमः।। उग्रायै सुख-जग्ध्यै च, सञ्जीविन्यै नमोऽस्तु ते। ब्रह्मिष्ठायै-ब्रह्मदायै, दुरितघ्न्यै नमो नमः।। प्रणतार्ति-प्रभञजिन्यै, जग्मात्रे नमोऽस्तु ते। सर्वापत्-प्रति-पक्षायै, मंगलायै नमो नमः।। शरणागत-दीनार्त-परित्राण-परायणे। सर्वस्यार्ति-हरे देवि! नारायणि ! नमोऽस्तु ते।। निर्लेपायै दुर्ग-हन्त्र्यै, सक्षायै ते नमो नमः। परापर-परायै च, गंगे निर्वाण-दायिनि।। गंगे ममाऽग्रतो भूया, गंगे मे तिष्ठ पृष्ठतः। गंगे मे पार्श्वयोरेधि, गंगे त्वय्यस्तु मे स्थितिः। आदौ त्वमन्ते मध्ये च, सर्व त्वं गांगते शिवे! त्वमेव मूल-प्रकृतिस्त्वं पुमान् पर एव हि।। गंगे त्वं परमात्मा च, शिवस्तुभ्यं नमः शिवे।। ।।फल-श्रुति।। य इदं पठते स्तोत्रं, श्रृणुयाच्छ्रद्धयाऽपि यः। दशधा मुच्यते पापैः, काय-वाक्-चित्त-सम्भवैः।। रोगस्थो रोगतो मुच्येद्, विपद्भ्यश्च विपद्-युतः। मुच्यते बन्धनाद् बद्धो, भीतो भीतेः प्रमुच्यते।

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Vastu Tips: ये वस्तुएं बनती हैं जीवन में दुर्भाग्य का कारण, तुरंत इन चीजों को कर दें घर से बाहर

Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिक्र किया गया है, जो यदि घर में मौजूद हों तो नकारात्मक ऊर्जा आती है और एक के बाद एक परेशानियां बनी रहती हैं। Vastu Tips For Home: हर व्यक्ति यही चाहता है कि उसके पास पर्याप्त धन हो। पूरा जीवन सुख शांति में बीते और कभी भी धन-धान्य की कमी न हो। इसके लिए लोग कड़ी मेहनत भी करते हैं, लेकिन आपने देखा होगा कि कुछ लोग चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, उन्हें सफलता हासिल नहीं होती है। ऐसे लोगों के जीवन में कोई न कोई मुसीबत लगी रहती है। वास्तु के जानकारों की मानें तो घर में ही मौजूद नकारात्मक ऊर्जा के कारण व्यक्ति को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिक्र किया गया है, जो यदि घर में मौजूद हों तो नकारात्मक ऊर्जा आती है और एक के बाद एक परेशानियां बनी रहती हैं। आइए जानते हैं किन चीजों को घर में नहीं रखना चाहिए वरना ये पैसों से जुड़ी दिक्कतें पैदा कर सकती हैं… स्टोर में रखे पुराने सामान  जिन चीजों की जरूरत नहीं होती है, लोग उसे फेंकने के बजाय स्टोर रूम में रख देते हैं। जबकि अनुपयोगी चीजों को स्टोर में रखना सही नहीं होता है। इन चीजों की वजह से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं, जिसकी वजह से आपको आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। बंद घड़ी घड़ियां आपको जीवन में आगे ले जाती हैं और ये आपके बुरे समय को टाल भी सकती हैं. इसलिए, घर में बंद घड़ियां बिल्कुल ना रखें. इससे आपकी किस्मत एक जगह पर रुक जाएगी. आपका खराब समय समाप्त होने का नाम ही नहीं लेगा. खराब ताले   ताला आपकी किस्मत को खोल भी सकता है और ये ही आपकी किस्मत को बंद भी कर सकता है. घर में भूलकर भी खराब या बंद ताले ना रखें, इससे आपके करियर में रुकावट आएगी. साथ ही, विवाह हो पाना मुश्चिल होता जाएगा.  पुरानी डायरी पुरानी डायरी जिनका इस्तेमाल आप नहीं करते हैं, उन्हें भी घर में न रखें। वास्तु शास्त्र के अनुसार पुरानी डायरी भी नकारात्मक ऊर्जा का कारण बनती हैं, जिसका असर परिवार के लोगों और उनकी तरक्की पर पड़ता है। ऐसे में पुरानी या बेकार डायरी को भी तुरंत बाहर निकाल दें। पुराने अखबार  घर में पुराने अखबार भी जमा कर नहीं रखने चाहिए। ये भी नकारात्मकता का कारण बनते हैं, जिसकी वजह से परिवार में अशांति का वातावरण बन जाता है। ऐसे में यदि आपके भी घर में काफी समय से पुराने अखबार पड़े हुए हैं तो आज ही बाहर निकाल दें या कबाड़ वाले को दे दें। पुराने-खराब इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और मोबाइल फोन घर में खराब मोबाइल फोन, चार्जर, केबल, बल्ब आदि चीजें भी नहीं रखनी चाहिए। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है और परिवार के लोगों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। कपड़ों का सीधा संबंध आपके भाग्य से होता है. घर में अनुपयोगी या खराब कपड़े हमेशा दुर्भाग्य लाते हैं. ऐसे कपड़ों को हटा देना या बांट देना ही बेहतर होता है. जूते चप्पल का संबंध हो आपके संघर्ष से होता है. जीवन में संघर्ष को कम करना हो तो जूते चप्पल ठीक रखें. घर में फटे या खराब जूते चप्पल रखने से संघर्ष बढ़ेगा और हर कदम कदम पर मेहनत करनी पड़ेगी. ऐसे जूते चप्पलों को शनिवार को हटा दें या बांट दें. 

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मोरपंख और एक रुपये ONE RUPEE के सिक्के से किया ये टोटका किस्मत को करेगा मजबूत, हर मोड़ पर मिलेगा भाग्य का साथ

One Rupee Coin Upay: धार्मिक शास्त्रों में एक रुपये के सिक्का का विशेष महत्व बताया गया है. अक्सर आपने देखा होगा मंदिर या किसी भी शुभ काम में एक रुपये का सिक्का इस्तेमाल किया जाता है. जानें एक रुपये का सिक्का किस्मत कैसे चमका सकता है.   1. आर्थिक समृद्धि के लिएअगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं, तो शुक्रवार के दिन मुख्य रूप से पूजा करें. माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करके एक मिट्टी या पीतल के कलश में केसर से स्वास्तिक बनाएं. इस कलश में एक सिक्का डालें और इसे एक चौकी पर रखें. प्रतिदिन इस कलश की पूजा करें, जिससे घर में धन की कमी नहीं होगी और मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहेगी. 2. भाग्य को जागृत करेंअगर आप चाहते हैं कि आपका भाग्य हमेशा आपका साथ दे और सफलता आपके कदम चूमे, तो अपनी जेब में एक मोर पंख के साथ 1 रुपए का सिक्का रखें. यह उपाय आपके भाग्य को जगा सकता है और इससे मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहेगी, जिससे हर काम में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है. Astro tips for 1 rupee coin: कई बार व्यक्ति इतनी समस्याओं और परेशानियों में घिर जाता है कि उसे उनसे बाहर निकलने का रास्ता दिखाई नहीं देता. ज्योतिष शास्त्र में इन समस्यओं से बचने के लिए कई उपाय बताए गए हैं. अगर इन उपायों को विधिपूर्वक किया जाए, तो व्यक्ति को जल्द ही छुटकारा मिलता है. अगर लाख कोशिशों के बाद भी आपको मेहनत का फल नहीं मिल रहा है तो  1 रुपये के सिक्के के उपायों को अपनाया जा सकता है.  वास्तु शास्त्र के अनुसार कई वास्तु दोष व्यक्ति के जीवन में परेशानियां उत्पन्न करते हैं. इन समस्याओं को एक रुपये के सिक्के के उपायों से दूर किया जा सकता है. आर्थिक परेशानी से लेकर किसी भी प्रकार की मनोकामना पूर्ति के लिए 1 रुपये के सिक्कों का इस्तेमाल किया जा सकता है. जानें इससे जुड़े कुछ उपायों के बारे में.  सभी परेशानियों से छुटकारे के लिए यदि व्यक्ति की कोई समस्या लंबे समय से चली आ रही है तो इससे छुटकारा 1 रुपए का सिक्का दिला सकता है. इसके लिए एक मुट्ठी चावल और 1 रुपए का सिक्का अपने हाथों से छूकर पास के मंदिर में अपनी परेशानी को बोल कर चुपके से रख दें. फिर पीछे पलट कर ना देखें. ऐसा करने से जल्द ही परेशानी दूर हो जाएगी. नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए यदि घर में कई समय से नकारात्मक ऊर्जा का वास है तो ऐसे में 1 रुपए के सिक्के के अचूक उपाय को अपनाएं. इसके लिए पूजा समाप्त होने के बाद घर के द्वार पर घी का चौमुखी दिया जलाकर उसमें 1 रुपए का सिक्का डाल दें. इससे ना केवल नकारात्मक  ऊर्जा दूर होगी साथ ही दरिद्रता का भी व्यक्ति के घर से कोई वास्ता नहीं रहेगा. किस्मत को मजबूत बनाने के लिए यदि व्यक्ति चाहता है कि उसे नए अवसर मिले और वह उसमे सफलता हासिल करे तो इसके लिए पॉकेट में मोर पंख के साथ 1 रुपए का सिक्का रखें. इससे ना केवल आपकी किस्मत का नया उदय होगा बल्कि धन की प्राप्ति के भी योग बनेंगे. आर्थिक तंगी से दिलाएगा छुटकारा यदि घर में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है तो ऐसे में शुक्रवार के दिन मंदिर में चौकी बनाकर भगवान के सामने पानी का कलश रख कर उसमें 1 रुपए का सिक्का रख दें. ध्यान रखें कि कलश पर स्वास्तिक जरूर बनाएं.  (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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सपने में धतूरे का फूल देखना Sapne mein dhature ka phool dekhna

Swapn Shastra of Plants: स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में पेड़-पौधों का दिखना बहुत लकी माना जाता है. कहते हैं कि सपने में कुछ पेड़-पौधों का दिखना किस्मत चमका सकता है. आइए जानें इन पेड़-पौधों के बारे में.  Plant In Dream Meaning: वास्तु शास्त्र में पेड़-पौधों का विशेष महत्व बताया गया है. वहीं, ज्योतिष शास्त्र में भी पेड़-पौधों को शुभ और पवित्र माना गया है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में पेड़-पौधों का दिखना बहुत लकी माना जाता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में पेड़-पौधों का दिखना शुभ संकेत माना जाता है. सपने में कुछ खास पौधों का दिखना आर्थिक लाभ के साथ-साथ जीवन में खुशियां भी भर सकता है. आइए जानें सपने में किन पेड़-पौधों का दिखना शुभ संकेत होता है.  बेलपत्र का पौधा Belptra ka poudha dekhna सपने में बेलपत्र का पौधा दिखना भी बहुत शुभ होता है. सपने में बेल पत्र का दिखना मतलब आपके ऊपर भगवान शिव की कृपा है औऱ भोलेनाथ आपकी मनोकामना पूरी करेंगे. केले का पेड़ kele ka paudha dekhna सपने में केले का पौधा दिखना भी अच्छा माना जाता है. कहते हैं सपने में केले का पौधा दिखना मतलब की आपको आर्थिक लाभ होले वाला है. मनी प्लांट money plant dekhna सपने में मनी प्लांट का दिखना बेहद शुभ होता है. मनी प्लांट धन का प्रतीक हैं इसका सपने में दिखना यानी की आपको धन लाभ होने वाला है. सपने में धतूरे का फूल देखना sapne mein dhature ka phool dekhna सपने में धतूरे का फूल देखना : इस सपने का मतलब होता है कि भविष्य में आपको आपके द्वारा किए गए कार्यों से धन की प्राप्ति हो सकती है। यह सपना आपको धन मिलने से पूर्व धन के आने का संकेत देता है । इस प्रकार के शुभ सपनों को दिखाई देने के बाद किसी को बताना नहीं चाहिए । सपने में धतूरे का फूल दिखाई देने वाला सपना बहुत ही शुभ सपना माना गया है। सपने में धतूरे का फल तोड़ना sapne mein dhature ka fal todna सपने में धतूरे का फल तोड़ना : सपने में धतूरे का फल फल तोड़ना बहुत ही शुभ माना गया है। यदि आप सपने में धतूरे का फल शिवलिंग पर चढ़ने के लिए तोड़ रहे हैं तो यह सपना आपके लिए बहुत ही शुभ सपना होने वाला है। इस सपने का मतलब होता है कि जल्द ही आपकी आर्थिक परेशानियां, मानसिक परेशानियों और स्वास्थ्य से जुड़े हुए परेशानियां समाप्त होने वाली है । सपने में धतूरे का पौधा देखना sapne mein dhature ka paudha dekhna सपने में धतूरे का पौधा देखना : सपने में धतूरे का पौधा देखना बहुत ही शुभ माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में धतूरे का पौधा देखने का मतलब होता है कि आपके ऊपर से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव और दूर होने वाला है। सपने में धतूरे का पौधा देखना इस बात की ओर संकेत करता है कि जल्द ही भगवान भोलेनाथ आप पर से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव दूर कर देंगे । sapne me dhatura dekhna सपने में धतूरा देखना sapne me dhatura dekhna : सपने में धतूरा देखना बहुत ही शुभ माना गया है। सपने में धतूरा देखने का मतलब होता है कि आपके जीवन में सुख शांति आने वाली है नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव दूर होने वाला है और आपको धन लाभ होने वाला है। यह सपना आपको आर्थिक लाभ की ओर संकेत करता है और धन हानि से बचने का प्रयास करता है । (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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Kshama Stotra:क्षमा स्तोत्र

क्षमा स्तोत्र: क्षमा स्तोत्र प्रायश्चित की प्रार्थना है जिसमें भगवान से किसी भी प्रकार की भूल, चूक, भूल या गलती के लिए क्षमा मांगी जाती है जो भक्ति पूजा के दौरान जानबूझकर या अनजाने में हुई हो। अधिकांश हिंदू अनुष्ठानों में यह अनिवार्य रूप से पूजा का एक अभिन्न अंग है, और इसका प्रचलन ऋग्वेद काल से है, जिसके दौरान ब्राह्मण पुजारी (या मुख्य पुजारी) स्तोत्र का उच्चारण करते थे। क्षमा स्तोत्र आपको उन सभी समस्याओं से उबरने में मदद कर सकता है जो एक आम आदमी अपने जीवन में सामना करता है। भक्त इस प्रार्थना का पाठ करते हैं और किसी भी पाप के लिए क्षमा, आध्यात्मिक सुंदरता, प्रसिद्धि और आंतरिक शत्रुओं से विजय की प्रार्थना करते हैं। क्षमा स्तोत्र देर से शादी के मामले में भी मदद करता है। क्षमा स्तोत्र की व्याख्या भगवान से दया मांगने के रूप में की जाती है, लेकिन गहन अध्ययन और सीखने के साथ, आप प्रत्येक श्लोक में खुशहाल जीवन जीने की कई छिपी और गुप्त कुंजियाँ भी पा सकते हैं। क्षमा स्तोत्र का पाठ आमतौर पर पूजा के बाद या पूजा के पूरा होने के बाद किया जाता है। यह देवी से विभिन्न गलतियों के लिए क्षमा मांगने जैसा है जो किसी ने पाठ/पूजा के दौरान की हो सकती हैं, जिसमें मंत्र का गलत उच्चारण, बिन्दु विसर्ग आदि का छूट जाना, उचित मुद्रा न दिखाना आदि शामिल हैं। भगवान की पूजा के दौरान भी इसी स्तोत्र का एक छोटा रूपांतर किया जाता है। क्षमा स्तोत्र का विषय भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और उनसे क्षमा मांगना है। जिस तरह माता-पिता अपने बेटे को कभी नहीं छोड़ते, चाहे उसने कितनी भी गलतियाँ की हों, उसी तरह क्षमा स्तोत्र में देवी से अपने बेटे की तरह हमारी रक्षा करने और हमें क्षमा करने के लिए कहा जाता है। क्षमा स्तोत्र के लाभ क्षमा स्तोत्र का (ईमानदारी से) पाठ करने का लाभ स्पष्ट रूप से भगवान द्वारा किए गए अपराधों और पापों के लिए क्षमा प्राप्त करना है। जीवन में जाने-अनजाने में हुए सभी पाप पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे और जीवन सुख और समृद्धि से भर जाएगा। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए जो व्यक्ति जानबूझकर या अनजाने में अपने जीवन में किए गए गलत कार्यों के कारण भगवान के श्राप के अधीन हैं, उन्हें क्षमा स्तोत्र का धार्मिक रूप से पाठ करना चाहिए ताकि उनके सभी दुख दूर हो जाएं और एक पुण्य जीवन की शुरुआत हो। क्षमा स्तोत्र | Kshama Stotra यह क्षमापन स्तोत्र है, जो देवी के भक्त है उनके लिए देवी को प्रसन्न करने का इससे बड़ा न कोई स्तोत्र है, न काव्य, इस स्तोत्र के माध्यम से देवी प्रसन्न होकर साधक के पाप, दोष, त्रुटि क्षमा करके सभी मनोरथ पूर्ण करती है। न मन्त्रं नो यन्त्रं तदापि च न जाने स्तुतिमहो न चाह्वानं ध्यानं तदापि च न जाने स्तुतिकथाः । न जाने मुद्रास्ते तदापि च न जाने विलपनं परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ॥ 1॥ विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत् । तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥2॥ पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहवः सन्ति सरलाः परं तेषां मध्ये विरलतरलोऽहं तव सुतः । मदीयोऽयं त्यागः समुचितमिदं नो तव शिवे कुपुत्रो जायते क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥3॥ जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया । तथापि त्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥ 4॥ परित्यक्ता देवा विविधविधसेवाकुलतया मया पञ्चाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि । इदानीं चेन्मातस्तव यदि कृपा नापि भविता निरालम्बो लम्बोदरजननि कं यामि शरणम् ॥ 5॥ श्र्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा निरातङ्को रङ्को विहरति चिरं कोटिकनकैः । तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं जनःको जानीते जनानि जपनीयं जपविधौ ॥ 6॥ चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो जटाधारी कण्ठे भुजगपतिहारी पशुपतिः । कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम् ॥ 7॥ न मोक्षस्याकाङ्क्षा भवविभववाञ्छापि च न मे न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुनः । अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै मृडानी रुद्राणी शिव शिव भवानीति जपतः ॥ 8॥ नाराधितासि विधिना विविधोपचारैः किं रुक्षचिन्तनपरैर्न कृतं वचोभिः । श्यामे त्वव यदि किञ्चन मय्यनाथे धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव ॥ 9॥ आपत्सु मग्नः स्मरणं त्वदीयं करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि । नैतच्छठत्वं मम भावयेथाः क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति ॥ 10॥ जगदम्ब विचित्रमत्र किं परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि । अपराधपरम्परावृत्तं न हि माता समुपेक्षते सुतम् ॥ 11॥ मत्समः पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि । एवं ज्ञात्वा महादेवि यथा योग्यं तथा कुरु ॥ 12॥

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Kopin Panchakam Stotra:कोपीनपञ्चकं स्तोत्र

Kopin Panchakam Stotra:कोपीनपञ्चकं स्तोत्र: हम अपने जीवन में प्रतिदिन तीन अवस्थाओं से गुजरते हैं। ये हैं जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति अवस्थाएँ। इन्हें जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति अवस्थाएँ कहते हैं। जाग्रत अवस्था में हम क्रियाशील होते हैं और अपने से बाहर की दुनिया से लेन-देन करते हैं। इस अवस्था में हमारे लिए अन्य दो अवस्थाएँ मौजूद नहीं होतीं। इसी तरह स्वप्न अवस्था में स्वप्नदर्शी क्रियाशील होता है और अपने से बाहर की दुनिया से लेन-देन करता है। इस अवस्था में भी स्वप्नदर्शी के लिए अन्य दो अवस्थाएँ मौजूद नहीं होतीं। स्वप्न की दुनिया वास्तविक नहीं है, बल्कि केवल मानसिक प्रक्षेपण है। यह केवल स्वप्नदर्शी के मन में ही मौजूद होती है, लेकिन वह इसे ऐसे देखता है जैसे यह उसके बाहर हो। इसमें वास्तविक दुनिया की सभी विशेषताएँ होती हैं जो हम अपनी जाग्रत अवस्था में पाते हैं। इसमें स्थान, समय आदि के आयाम होते हैं। यह उसके शरीर और मन पर ठोस प्रभाव डाल सकती है। कोई व्यक्ति स्वप्न में देख सकता है कि वह किसी खाई से गिर रहा है या बाघ उसका पीछा कर रहा है, और जागता है, लेकिन फिर भी उसे घबराहट और अत्यधिक पसीना आना जारी रहता है। स्वप्न देखने वाले के लिए स्वप्न की दुनिया वास्तविक है। गहरी नींद की अवस्था में, इंद्रियाँ और मन एकाग्र हो जाते हैं। इसलिए, कोई संसार नहीं है। हम स्वयं आनंद के रूप में हैं। यह आनंद किसी भी इंद्रियों के माध्यम से प्राप्त होने वाले किसी भी सुख से श्रेष्ठ है। यहाँ तक कि एक सम्राट जिसके पास सारी संपत्ति और शक्ति हो, वह भी हमेशा जागते रहने और अपने अधीन सुखों का आनंद लेने के लिए तैयार नहीं होगा। वह सो जाना और उच्च आनंद का आनंद लेना चाहेगा जो उसका वास्तविक स्वभाव है। लेकिन यह अवस्था अस्थायी है क्योंकि हमारा मन अज्ञानता से ढका रहता है। इसलिए जब हम जागते हैं तो हम वापस वहीं होते हैं जहाँ हम थे, अपनी सारी समस्याओं के साथ अपनी इस दुनिया में। यह कोपिन पंचकम स्तोत्र भ्रम, मिथ्या कल्पना और नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति दिलाता है। तीनों चरण सकारात्मक हो जाते हैं और बेहतर जीवन बनाने में मदद करते हैं। कोपिन पंचकम स्तोत्र के लाभ जो कोई भी भक्त प्रतिदिन इस कोपिन पंचकम स्तोत्र का पाठ करता है, देवी की कृपा से उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही, उसका जीवन सुखी, स्वस्थ, धनवान, सफल और शांतिपूर्ण होता है। किसको करना चाहिए यह स्तोत्र जिन लोगों को भ्रम है और उन्हें मनचाहा फल नहीं मिल रहा है, उन्हें इस कोपिन पंचकम स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। कोपीनपञ्चकं स्तोत्र | Kopin Panchakam Stotra वेदांतवाक्येषु सदा रमन्तो भिक्षान्नमात्रेण च तुष्टिमन्त: । अशोकवन्त: करुणैकवन्त: कौपीनवन्त: खलु भाग्यवन्त: ।।1।। मूलं तरो: केवलमाश्रयन्त: पाणिद्वये भोक्तुममत्रयन्त: । कन्थामपि स्त्रीमिव कुत्सयन्त: कौपीनवन्त: खलु भाग्यवन्त: ।।2।। देहाभिमानं परिह्रत्य दूरादात्मानमात्मन्यवलोकयन्त: । अहर्निशं ब्रम्हाणि ये रमन्त: कौपीनवन्त: खलु भाग्यवन्त: ।।3।। स्वानन्दभावे परितुष्टिमन्त: स्वशांतसर्वेन्द्रियवृत्तिमन्त: । नान्तं न मध्यं न बहि: स्मरन्त: कौपीनवन्त: खलु भाग्यवन्त: ।।4।। पञ्चाक्षरं पावनमुच्चरन्त: पतिं पशूनां हृदि भावयन्त: । भिक्षाशना दिक्षु परिभ्रमन्त: कौपीनवन्त: खलु भाग्यवन्त: ।।5।।

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Astro Tips:सपने में मोती या माला टूटना शुभ है या अशुभ ?

Astro Tips:आपमें से ज्यादातर लोग सोते समय सपने देखते हैं। स्वप्नशास्त्र में ऐसा माना जाता है कि सपनों के भी कुछ शुभ और अशुभ फल हो सकते हैं।  Sapne Me Mala Tutna: अक्सर आपको सोते समय कुछ ऐसी चीजें दिखती हैं जिनके कुछ शुभ अशुभ फल हो सकते हैं। कई बार हम सपने में ऐसी चीजें देखते हैं जिनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं होता है लेकिन इनका आने वाले जीवन में कुछ न कुछ असर जरूर होता है। ऐसा ही एक सपना है माला टूटते हुए देखना। सपने में मोती देखना (Sapne Me Moti Dekhna) – मोती सीप से उत्पन्न होता है जो देखने में बहुत ही प्यारा लगता है । ज्योतिष के नजरिए से भी मोती का महत्व अधिक होता है। बहुमूल्य आभूषणों में भी इसका प्रयोग होता है । इसलिए यही चीज अगर सपने में दिख जाए तो व्यक्ति को बेहद ही अच्छा लगेगा। लेकिन साथ-साथ व्यक्ति इसके अर्थ को जानने के लिए तब तक बेचैन रहेगा जब तक उसे इसका अर्थ पता नहीं चल जाता । हिन्दू धर्म में मंत्रों के (mantro ka jap) जाप के लिए माला का उपयोग किया जाता है और हमारा ऐसा विश्वास होता है कि माला जपने से हमारे इष्ट देव प्रसन्न होते हैं और हमारी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। माला जपने का जीवन में धार्मिक महत्व के साथ वैज्ञानिक आधार भी होता है। माला जपने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक विचारधाराएं प्रवेश करती हैं। अतः अपने देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप करना लाभदायक होता है। ज्यादातर लोग जाप करने के लिए रुद्राक्ष (Rudraksh Mala ka prayog) की माला का प्रयोग करते हैं। रुद्राक्ष की माला भगवान शिव के लिए विशेष मानी गई है। इसलिए इससे भगवान शिव के लिए जाप करने से अत्यधिक लाभ मिलता है। लेकिन यदि सपने में कभी आप किसी भी माला को टूटते हुए देखते हैं तो इसके अलग -अलग फल होते हैं और जीवन में कुछ अलग प्रभाव होते हैं। आइए ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ.आरती दहिया से जानें सपने में माला टूटते हुए देखना आपके जीवन में क्या प्रभाव डाल सकता है। सपने में मोती देखना इस तरह देता है अशुभ फल sapne me moti dekhna es tarah ka hota hai sasubh fal सपने में मोतियों का दिखना हानि का सूचक है। अगर कोई पुरुष सपने में मोती देखें तो उसकी आय कम होगी। अगर कोई स्त्री ऐसा सपना देखे तो उसके गहने खो जाएंगे। अगर कोई पुरुष सपने में मोती मोतियों की माला आदि गहना पहने तो समझ लीजिए कि उसकी पत्नी को कोई कष्ट होगा। सपने में माला देखने का मतलब (Sapne Me Mala Dekhna) दि कोई सपने में रुद्राक्ष की माला देखता है तो यह उसके लिए शुभ माना जाता है। आप सपने में रुद्राक्ष की मालादेखें या सिर्फ उसका 1 मनका देखें तो यह आपके लिए बहुत शुभ है। रुद्राक्ष का सपने में आना भगवान शिव को देखने जैसा होता है। यदि आप रुद्राक्ष की माला सपने में देखते हैं तो समझें कि जल्द ही आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने वाली हैं। इसका मतलब यह कि आपका भाग्योदय होने वाला है। माला का दिखना बीमारी दूर कर सकता है ( Sapne Me Rudraksh Mala) यदि कोई बीमार व्यक्ति सपने में रुद्राक्ष की माला देखता है तो इससे यह संकेत मिलता है कि उसकी बीमारी जल्द है ठीक होने वाली है। भगवान शिव (शिव जी को क्यों नहीं चढ़ाई जाती है हल्दी)का उसे आशीर्वाद मिलने वाला है और स्वास्थ्य लाभ मिलने वाला है। यदि आप रुद्राक्ष का हरा भरा पेड़ देखते हैं तो इसका अर्थ है कि आप जिस क्षेत्र में हैं वहां बहुत जल्दी उन्नति करेंगे। यह जीवन में हर तरफ तरक्की का संकेत देता है। रुद्राक्ष कीमाला टूटते हुए देखना हो सकता है अशुभ (Rudraksh Mala) यदि कोई सपने में रुद्राक्ष की माला टूटते हुए देखता है तो यह आपके लिए एक अशुभ संकेत है। यदि सपने में माला टूटती है तो इसका मतलब है कि आपके साथ कोई अनहोनी होने वाली है। आपका कोई काम पूरा नहीं होने वाला है। आप उस कार्य में असफल हो सकते हैं जिसमें आप पूरी मेहनत कर रहे हैं । टूटी हुई रुद्राक्ष की माला नकारात्मकता को दिखाती है। यह इस बात का भी संकेत देता है कि भविष्य में आपको धन हानि हो सकती है। आपका स्वास्थ्य भी ख़राब हो सकता है। यह आपके जीवन में किसी अनिष्ट का संकेत भी देता है। सपने में मोती की माला टूटते हुए देखना (Moti Ki Mala) आमतौर पर सपने में यदि आप मोती की माला देखते हैं तो ये आपके लिए शुभ माना जाता है। यदि आपको ऐसी माला दिखे तो समझ लें कि आपके जीवन में सकारात्मकता आने वाली है। लेकिन यदि आप मोती की माला को टूटते हुए देखते हैं तो यह आपके परिवार के बिखरने या फिर किसी परिवारीजन के स्वास्थ्य में खराबी के संकेत हो सकते हैं। इस प्रकार सपने में माला दिखना आपके लिए शुभ हो सकता है लेकिन यदि आप माला टूट्ते हुए देखते हैं तो ये जीवन में कुछ नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकता है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। सपने में सर्राफ मोती देखे तो sapne me saraf moti dekhe अगर कोई सर्राफ सपने में मोती देखें तो उसका व्यापार चमकेगा और वह खूब धन कमाएगा। सपने में मोतियों का खोना बताता है कि व्यक्ति स्वयं परिवार के किसी सदस्य का विवाह करेगा। अगर कोई नौकरी पेशा सपने में मोती खरीदे तो नौकरी में उसकी पदवृद्धि होगी। अगर बेकार आदमी यह सपने देखे तो शीघ्र ही नौकरी मिलेगी। डिसक्लेमर– इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।

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