Karwa Chauth 2025

Karwa Chauth 2025 Date And Time : करवाचौथ कब है, 9 या 10 अक्टूबर? चांद निकलने का समय, क्या खाकर खोले व्रत

Karwa Chauth 2025 Kab Hai: शारदीय नवरात्रि चल रहे हैं और जल्द ही विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा। इसके बाद लोगों को साल के सबसे खास त्योहार, दीवाली, का इंतजार होता है। दीवाली से लगभग दो हफ्ते पहले करवा चौथ का पर्व आता है। करवा चौथ Karwa Chauth 2025 का व्रत शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं।Karwa Chauth 2025 इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और चांद के दिखने के बाद ही व्रत खोलती हैं। वहीं जिनकी शादी नहीं हुई हैं, वो लोग भी अच्छे या फिर मनचाहे वर के लिए इस व्रत को रखती हैं। हर बार की तरह इस बार भी (Karwa Chauth 2025) करवाचौथ की तारीख को लेकर लोगों के बीच कन्फ्यूजन बना हुआ है कि यह 9 अक्टूबर को है या 10 अक्टूबर को। नीचे जानें करवा चौथ की सही तारीख और पूजा के शुभ मुहूर्त। इस दिन है करवा चौथ 2025:This day is Karwa Chauth 2025 बता दें कि इस साल करवा चौथ 10 अक्टूबर को है। इस दिन शुक्रवार पड़ेगा और व्रत भी इसी तारीख को रखा जाएगा। Karwa Chauth 2025 व्रत रखने वाली महिलाएं शुभ मुहूर्त के समय ही विधि विधान के साथ पूजा कर सकती हैं। करवा चौथ 2025 के लिए शुभ मुहूर्त और समय इस प्रकार हैं:The auspicious muhurat and timings for Karva Chauth 2025 are as follows: विवरण समय व्रत का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से रात 8 बजकर 13 मिनट तक पूजा का समय (शुभ मुहूर्त) शाम 5 बजकर 57 मिनट से लेकर 7 बजकर 11 मिनट तक चंद्रमा के दिखने का समय (चंद्रोदय) 8 बजकर 13 मिनट व्रत रखने वाले लोग पूजा करते ही चांद देखकर अपना व्रत खोल सकते हैं। करवा चौथ पूजा सामग्री की लिस्ट:Karva Chauth puja material list करवा चौथ Karwa Chauth 2025 की पूजा के लिए कुछ आवश्यक चीजें होती हैं जिन्हें पहले से ही एकत्रित कर लेना चाहिए। Karwa Chauth 2025 पूजा के दौरान जिन चीजों की जरूरत पड़ती है, उनकी पूरी लिस्ट यहाँ दी गई है: 1. मिट्टी का करवा और ढक्कन। 2. दिया (दीपक)। 3. छलनी (छाननी)। 4. पानी का ग्लास या फिर लोटा। 5. रोली। 6. अक्षत (चावल)। 7. कुमकुम। 8. हल्दी। 9. धूपबत्ती। 10. फल। 11. चंदन। 12. सिंदूर। 13. फूल। 14. श्रृंगार की चीजें। 15. मीठा (मिठाई या पकवान)। करवा चौथ 2025 व्रत विधि | Karwa Chauth 2025 Vrat Vidhi पूजा सामग्री : पूजा के लिए जो सामान जरूरी होता है, उसमें शामिल हैं- करवा (मिट्टी या पीतल का), दीपक, धूपबत्ती, रोली, चंदन, चावल, फूल, मिठाई, फल, एक तांबे या पीतल का लोटा जिसमें जल हो, छलनी और करवा चौथ की कथा की पुस्तक. साफ-सफाई करें: पूजा से पहले अपने हाथ-पैर धो लें और साफ कपड़े पहनें.पूजा की थाली तैयार करें: थाली में दीपक, अगरबत्ती, चावल, हल्दी, सिंदूर, रुई, पूजा की मिट्टी (गंगाजल), मिठाई, फल और पानी रखें.भगवान और माता पार्वती की तस्वीर या मूर्ति रखें: घर में माँ पार्वती और भगवान शिव की तस्वीर या मूर्ति रखकर पूजा करें.माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना करें: ध्यान लगाकर माता पार्वती और शिवजी को फूल, जल, सिंदूर और चावल चढ़ाएं. कथा या पूजा का पाठ करें: करवा चौथ की कथा सुनें या पढ़ें. इससे व्रत का महत्व बढ़ता है.दीपक जलाएं और आरती करें: दीपक जलाकर आरती करें और मां से व्रत पूरा होने तक पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें.चंद्रमा देखने का इंतजार करें: रात को चंद्रमा निकलने का इंतजार करें. जैसे ही चंद्रमा दिखाई दे, पूजा की थाली लेकर उसे देखें.चंद्रमा को अर्ध्य दें: थाली में पानी लेकर चंद्रमा को अर्ध्य दें यानी पानी अर्पित करें.व्रत खोलें: पति के हाथ लेकर व्रत खोलें और खजूर, पानी या गन्ने का रस पिएं. ध्यान रखें: पूरे दिन भूखे और प्यासे रहें, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान जरूर रखें. पूजा की प्रक्रिया और गणेश पूजन कैसे करें:Process of worship and how to do Ganesh puja सभी महिलाएं एक साथ बैठकर पहले गणेश जी की पूजा करती हैं. Karwa Chauth 2025 फिर करवा माता की पूजा होती है. इसके बाद करवा चौथ की कथा पढ़ी या सुनी जाती है. यह कथा एक साहसी रानी और उसके विश्वास की कहानी होती है, जो Karwa Chauth 2025 व्रत के महत्व को दर्शाती है. करवा चौथ पर चांद देखने की परंपरा | Chand Kab Niklega 2025 में चंद्रोदय का समय : हिंदू पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 10 अक्टूबर को शाम 7:38 बजे तक रहेगी और चंद्रोदय शाम 7:42 बजे होगा. यही वह समय होगा जब महिलाएं चांद को देखकर व्रत खोलेंगी. क्या खाकर खोलें करवा चौथ का व्रत? | Karwa Chauth Ka Vrat Kaise Khole रात को जैसे ही चांद निकलता है, महिलाएं छलनी से पहले चांद को देखती हैं और फिर अपने पति का चेहरा निहारती हैं. इसके बाद चांद को अर्घ्य (जल चढ़ाना) दिया जाता है. इसके तुरंत बाद पति के हाथों से जल पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोला जाता है. करवा चौथ का व्रत खोलने के लिए क्या खाना चाहिए:What should be eaten to break the fast of Karva Chauth? जब करवा चौथ का व्रत खत्म होता है, तो सबसे पहले खजूर खाते हैं. खजूर बहुत खास होता है और व्रत खोलने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है.  what not to do on this day:इस दिन क्या न करें करवा चौथ Karwa Chauth 2025 के दिन मांसाहारी भोजन, शराब और नकारात्मक सोच से पूरी तरह दूर रहना चाहिए. दिनभर शांतिपूर्ण मन से व्रत रखें और किसी से वाद-विवाद न करें. How to start Karva Chauth:करवा चौथ की शुरुआत कैसे करें? करवा चौथ के दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. Karwa Chauth 2025 उसके बाद सरगी खाएं, जो आपकी सास की ओर से दी जाती है. सरगी में फल, सूखे मेवे, मिठाई और हल्का भोजन होता है. इसके बाद व्रत का संकल्प लें कि आप पूरे दिन बिना जल के यह व्रत रखेंगी. How to prepare for puja on the evening of Karva Chauth:कैसे करें करवा चौथ की शाम को पूजा की तैयारी? शाम के समय पूजा के लिए साफ कपड़े पहनें और सोलह श्रृंगार करें. पूजा के लिए एक साफ स्थान पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर करवा माता की तस्वीर रखें. साथ ही

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Kumar Purnima 2025

Kumar Purnima 2025 Date: कुमार पूर्णिमा 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Kumar Purnima 2025: कुमार पूर्णिमा, अश्विन महीने के दौरान पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला त्योहार है। यह त्योहार ओडिशा के सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। अविवाहित महिलाएं मुख्यतः यह त्यौहार का पालन करते हैं, एक सुंदर पति की कामना करती हैं, इसलिए वे कुमार कार्तिकेय की आराधना करती हैं। लेकिन, विशेष रूप से पर्याप्त भगवान के लिए कोई अनुष्ठान नहीं है, इसके बजाय सूर्य और चंद्रमा की पूजा की जाती है। कैसे मनाया जाता है कुमार पूर्णिमा:How is Kumar Purnima 2025 celebrated? प्रात:काल स्नान के बाद कन्याएं नये वस्त्र पहनती हैं और सूर्य को अन्नबलि चढ़ाती हैं।अविवाहित महिलाएं दिन भर उपवास रखते हैं।शाम को जब चंद्रमा उगता है तो वे फिर से एक विशेष किस्म के भोजन का प्रसाद बनाते हैं और अनुष्ठान समाप्त होने के बाद इसे प्रसाद के तौर पर ग्रहण करते हैं। यह लड़कियों के लिए खुशी का त्योहार है, सभी गाते और नाचते हैं। गीत विशेष प्रकृति के होते हैं। वे एक तरह का खेल भी खेलते हैं जिसे ‘पुची’ के नाम से जाना जाता है। कुमार पूर्णिमा में लक्ष्मी पूजा उत्सव:Lakshmi Puja festival in Kumar Purnima इस दिन को धन की देवी लक्ष्मी के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। Kumar Purnima 2025 इसलिए, कई लोग अपने घरों में देवी की पूजा करते हैं। जो की ओड़िसा और वेस्ट बंगाल में मशहूर है । कुमार पूर्णिमा Kumar Purnima 2025 के साथ कार्तिक महीने का प्रारम्भ होता है जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार सबसे पवित्र महीनों में से एक है। हिंदू संस्कृति में इसका बहुत महत्व है। Kumar Purnima 2025 भगवान जगन्नाथ और कृष्ण की ‘कार्तिक’ के पूरे महीने में प्रार्थना की जाती है जो Kumar Purnima 2025 कुमार पूर्णिमा के बाद से शुरू होकर ‘रस’ पूर्णिमा तक होती है। शुभ मुहूर्त (अनुमानित):Auspicious time (approximate) पूजा या विशेष अनुष्ठान करने के लिए शुभ मुहूर्त जानना महत्वपूर्ण है। चूँकि “(Kumar Purnima 2025) कुमार पूर्णिमा” एक क्षेत्रीय व लोकपारंपरिक उत्सव है, इसलिए मुहूर्त की जानकारी अलग-अलग स्रोतों और पंचांगों में भिन्न हो सकती है। लेकिन कुछ सामान्य दिशानिर्देश इस प्रकार हो सकते हैं: पूजा विधि एवं अनुष्ठान:Worship method and rituals नीचे एक संक्षिप्त पूजा विधि है जिसे आप “कुमार पूर्णिमा” के अवसर पर कर सकती/सकते हैं:   • “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः”   • अन्य चंद्र संबंधी या देवी-देवता संबंधी मंत्र आपके अनुकूल हो सकते हैं।  • मनोकामना बताते हुए प्रार्थना करें — विशेष रूप से विवाह/उच्च साझेदारी आदि। Diwali 2025 Date And Time: 20 या 21 अक्टूबर, कब है दिवाली? जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और दीपावली कैलेंडर

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Dhanteras 2025

Dhanteras 2025 Date And Time: 18 या 19 अक्टूबर, कब है धनतेरस? नोट करें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Dhanteras 2025 Kab Hai: धनतेरस 2025: दीपावली उत्सव का प्रथम और महत्वपूर्ण पर्व Dhanteras 2025: सनातन धर्म में धनतेरस (Dhanteras 2025) का पर्व विशेष महत्व रखता है। इसे दीपावली (दीवाली) उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और यह पांच दिवसीय उत्सव का पहला महत्वपूर्ण पर्व होता है। यह पर्व हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित व्रत रखा जाता है, जिनकी पूजा करने से धन संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं। 18 या 19 अक्टूबर, कब मनाया जाएगा धनतेरस 2025? (Dhanteras 2025 Date) Dhanteras 2025: धनतेरस 2025 की सही तिथि को लेकर भक्तों के मन में अक्सर असमंजस रहता है कि यह पर्व 18 अक्टूबर को है या 19 अक्टूबर को। आइए वैदिक पंचांग और द्रिक पंचांग के अनुसार सही तिथि और समय जानते हैं: त्रयोदशी तिथि का आरंभ: 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार) को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर। त्रयोदशी तिथि का समापन: 19 अक्टूबर 2025 (रविवार) को दोपहर 1 बजकर 51 मिनट पर। चूँकि हिंदू धर्म में उदयातिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, यानी वह तिथि जो सूर्योदय के समय मौजूद हो, इसलिए धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर 2025, शनिवार के दिन ही मनाया जाएगा। धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त 2025 (Dhanteras Puja Muhurat 2025) Dhanteras : धनतेरस के दिन पूजन के लिए प्रदोष काल यानी संध्याकाल को सबसे शुभ माना गया है। इस समय भगवान धन्वंतरि की पूजा और दीपदान करना श्रेष्ठ होता है। विवरण तिथि समय अवधि स्रोत धनतेरस 2025 तिथि 18 अक्टूबर 2025 शनिवार – पूजन का शुभ समय (प्रदोष काल) | 18 अक्टूबर 2025 शाम 7 बजकर 16 मिनट से 8 बजकर 20 मिनट तक 1 घंटा 4 मिनट धनतेरस का धार्मिक महत्व और पौराणिक मान्यताएं:Religious significance and mythological beliefs of Dhanteras धनतेरस Dhanteras 2025 को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व से जुड़ी मुख्य मान्यताएं और महत्व निम्नलिखित हैं: 1. भगवान धन्वंतरि का जन्म: पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का जनक (देवताओं का वैद्य) भी कहा जाता है। 2. स्वास्थ्य और समृद्धि: इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि उनकी पूजा से शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। 3. खरीददारी का महत्व: इस दिन सोना-चांदी से बने आभूषणों, बर्तनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि धनतेरस पर की गई खरीदारी से धन में 13 गुना वृद्धि होती है। 4. यम दीपदान: माना जाता है कि Dhanteras धनतेरस पर दीपदान करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-शांति आती है। शाम के समय घर के बाहर यम देवता के लिए एक बड़ा दीपक (यम दीप) जलाया जाता है, जिससे अकाल मृत्यु से बचाव होता है। धनतेरस की पूजा विधि (Dhanteras Puja Vidhi) धनतेरस Dhanteras 2025 पर मां लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और स्वास्थ्य के देवता धन्वंतरि की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान इन चरणों का पालन करें: 1. सफाई और स्थापना: पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें। पूजा के लिए एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। 2. देवताओं को स्थापित करें: चौकी पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 3. दीपक प्रज्ज्वलित करें: पूजा शुरू करने से पहले धन्वंतरि देव के लिए एक घी का दीपक जलाएं। यह दीपक स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 4. मंत्र जाप: पूजा करते समय ‘ॐ धन्वंतराय नमः’ और धन प्राप्ति के लिए ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः’ जैसे मंत्रों का जाप करें। 5. अर्पण: भगवान को फल, फूल, मिठाई, और धनिया के बीज (जिसे धन का प्रतीक माना जाता है) अर्पित करें। 6. कथा श्रवण: पूजा समाप्त होने के बाद धनतेरस की कथा अवश्य सुनें। 7. यम दीप: शाम को, घर के बाहर यम देवता के लिए एक बड़ा दीपक जलाना न भूलें। Diwali 2025 Date And Time: 20 या 21 अक्टूबर, कब है दिवाली? जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और दीपावली कैलेंडर

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Diwali 2025

Diwali 2025 Date And Time: 20 या 21 अक्टूबर, कब है दिवाली? जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और दीपावली कैलेंडर

Diwali 2025 Kab Hai: हिंदू धर्म में दिवाली (दीपावली) का पर्व प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। यह पावन पर्व अंधकार पर प्रकाश की जीत, अधर्म पर धर्म की विजय और अज्ञानता पर ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली का त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन प्रभु श्री राम 14 वर्ष का कठिन वनवास पूरा करके माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में नगरवासियों ने पूरे अयोध्या को घी के दीपकों से सजाया था, तभी से यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। दिवाली (Diwali) का पांच दिवसीय पर्व धनतेरस के साथ आरंभ होता है और भाई दूज के साथ समाप्त होता है। आइए जानते हैं Diwali 2025 दिवाली 2025 की सही तिथि और संपूर्ण कैलेंडर। कब है दिवाली 2025? (Diwali 2025 Date) वर्ष 2025 में, Diwali दिवाली के पर्व की तिथि को लेकर लोगों में अक्सर असमंजस रहता है। यहाँ द्रिक पंचांग के अनुसार सही तिथि और समय दिया गया है: 1. कार्तिक अमावस्या का आरंभ: 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 3 बजकर 45 मिनट पर। (अन्य स्रोत के अनुसार 03 बजकर 44 मिनट पर)। 2. कार्तिक अमावस्या का समापन: 21 अक्टूबर 2025 को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर। (अन्य स्रोत के अनुसार 21 अक्टूबर 2025 को सुबह 05 बजकर 54 मिनट पर)। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा निशिता काल (मध्यरात्रि) में करने का विशेष विधान होता है। इसी कारण, दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025, सोमवार के दिन मनाया जाएगा। दिवाली 2025 लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त (Lakshmi Puja Muhurat) दिवाली Diwali पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी की पूजा-अर्चना की जाती है। लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए सबसे शुभ समय प्रदोष काल और स्थिर लग्न का माना जाता है। पूजन का विवरण तिथि और समय अवधि लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 18 मिनट तक 1 घंटा 10 मिनट अन्य लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 20 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक 1 घंटा 8 मिनट प्रदोष काल शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 8 मिनट तक – वृषभ काल (सन्ध्या) शाम 6 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 53 मिनट तक 1 घण्टा 56 मिनट्स निशिता काल का मुहूर्त (मध्यरात्रि) रात 11:41 से 21 अक्टूबर को सुबह 12:31 तक – दिवाली 2025 का 5 दिवसीय कैलेंडर (Diwali 2025 Calendar) दिवाली का पर्व एक दिन का नहीं, बल्कि पांच दिनों का त्योहार होता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। त्योहार का नाम तिथि दिन धनतेरस 18 अक्टूबर 2025 शनिवार काली चौदस 19 अक्टूबर 2025 रविवार नरक चतुर्दशी 20 अक्टूबर 2025 सोमवार दिवाली 20 अक्टूबर 2025 सोमवार दिवाली स्नान 21 अक्टूबर 2025 मंगलवार गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025 बुधवार भाई दूज 23 अक्टूबर 2025 गुरुवार Dhanteras Kab Hai: धनतेरस कब है कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर आरंभ हो रही है, जिसके कारण धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 से 19 अक्टूबर को सुबह 06:08 तक है। Diwali Pujan Vidhi or Mahetwapurn Upay: दिवाली पूजन विधि और महत्वपूर्ण उपाय दिवाली Diwali के दिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए सही विधि से पूजा करना आवश्यक है: पूजन विधि: Puja Vidhi 1. स्थान की तैयारी: सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके पूर्व दिशा या ईशान कोण (North-East) में लकड़ी की चौकी रखें। 2. स्थापना: चौकी पर लाल या गुलाबी रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर विराजमान करें। 3. शुद्धिकरण: संकल्प लें, एकमुखी घी का दीपक जलाएं, और अपने चारों ओर जल छिड़ककर शुद्धिकरण करें। 4. पूजन क्रम: सबसे पहले भगवान गणेश को पुष्प और मिठाई अर्पित करें। उसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें। 5. समापन: दोनों देवताओं के मंत्रों का जप करने के बाद आरती करें और शंखनाद करें। 6. वस्त्र: पूजा के समय लाल, पीले या चमकीले वस्त्र धारण करें और काले व गहरे रंगों से परहेज करें। 7. दीप प्रज्ज्वलन: दिवाली की रात घर के प्रत्येक कोने, मुख्य द्वार, छत और आंगन में दीपक अवश्य जलाएं। धन-समृद्धि के लिए विशेष उपाय • धन प्राप्ति: धन-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए पूजा के समय मां लक्ष्मी को एकाक्षी नारियल (one-eyed coconut) अर्पित करें। • सुख-शांति: जीवन में सुख-शांति के लिए इस दिव्य मंत्र का जप करें: “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीं क्लीं क्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै मम गृहे धनं पूरय पूरय, चिंतां दूरय दूरय स्वाहा॥” मान्यता है कि सच्चे मन से यह उपाय करने पर मां लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

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Maa Siddhidhatri

Navratri 2025 Day 9 Maa Siddhidhatri Puja Vidhi : नवरात्रि के 9वें दिन मां सिद्धिदात्री की होती है पूजा, नोट कर लें पूजन….

Maa Siddhidhatri Puja Vidhi : सिद्धिदात्री को आठ सिद्धियों की देवी माना जाता है। भक्त पूरे विधि-विधान और श्रद्धा से उनकी पूजा करके अष्ट सिद्धि प्राप्त कर सकते हैं। नवरात्रि के 9वें दिन माता सिद्धिदात्री की कृपा पाने के लिए व्रत रखा जाता है। आइए, विस्तार से जानते हैं नवरात्रि के 9वें दिन की पूजा विधि और भोग। 9वां दिन है, जिसे रामनवमी भी कहते हैं। इस दिन (Maa Siddhidhatri) मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री सिद्धियां और मोक्ष देती हैं इसलिए उनकी पूजा करने से सारे काम पूरे होते हैं और मोक्ष मिलता है। कुछ कहानियों के अनुसार, भगवान शिव ने भी Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री से ही सिद्धियां पाई थीं। आइए, जानते हैं मां सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें, उन्हें क्या भोग लगाएं और इस दिन का क्या महत्व है। Navratri 9th Day Maa Siddhidatri Puja :  नवरात्रि का अंतिम यानी 9वां दिन है। नवरात्रि के 9वें दिन मां दुर्गा के के नवमं स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। नव दुर्गाओं में मां सिद्धिदात्री अंतिम हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उन्हें यश, बल और धन भी प्रदान करती हैं। शास्त्रों में मां सिद्धिदात्री को सिद्धि और मोक्ष की देवी माना जाता है। मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली हैं। सभी देवी-देवताओं को मां से ही सिद्धियों की प्राप्ति हुई हैं। भगवान शिव ने भी मां की तपस्या कर सिद्धियों को प्राप्त किया। मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वह अर्धनारीश्वर कहलाए। नवरात्र में नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद नवरात्र का समापन माना जाता है। Siddhidatri Mata Koun Hai: सिद्धिदात्री माता कौन है नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। यह दिन बहुत खास है। Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री कमल के फूल पर बैठती हैं। उनकी पूजा में नौ तरह के फल और फूल चढ़ाए जाते हैं। उन्हें विद्या और कला की देवी सरस्वती का रूप भी मानते हैं। माता सिद्धिदात्री के पास हैं 8 सिद्धियां:Mata Siddhidatri has 8 Siddhiyas भक्त नवरात्रि के नौ दिनों तक उपवास और पूजा-अर्चना करके मां दुर्गा की कृपा पाते हैं और मनचाहा फल प्राप्त करते हैं। साथ ही, घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। देवी-देवता, गंधर्व, ऋषि और असुर भी माता सिद्धिदात्री की पूजा करके आठ सिद्धियां प्राप्त कर सकते हैं और अंत में मोक्ष प्राप्त करते हैं। नवरात्रि के 9वें पूजा विधि:9th puja method of Navratri Maa Siddhidhatri: नवरात्रि के 9वें दिन कन्या पूजन किया जाता है. इस दिन 9 कन्याओं और एक लांगूर (बालक) का पूजन करने का विधान है। हालांकि, अपनी क्षमता के अनुसार 5 कन्याओं का पूजन भी किया जा सकता है। कन्या पूजन में कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें दान-दक्षिणा दी जाती है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है. यह पूजन श्रद्धा और सम्मान के साथ किया जाता है। नवरात्रि के 9वें दिन का भोग:Offerings on the 9th day of Navratri मां सिद्धिदात्री Maa Siddhidhatri को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई तरह के भोग लगाते हैं। हलवा, पूरी, चना, फल, खीर और नारियल जैसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। मान्यता है कि जामुनी या बैंगनी रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से विशेष फल मिलता है। भोग लगाने के बाद मां सिद्धिदात्री माता की विशेष रूप से आरती की जाती है। पूजा-विधि:Method of worship सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं। मां को सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां को सफेद रंग पसंद है। मां को स्नान कराने के बाद सफेद पुष्प अर्पित करें। मां को रोली कुमकुम लगाएं। मां को मिष्ठान, पंच मेवा, फल अर्पित करें। माता सिद्धिदात्री को प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के ही फल अर्पित करने चाहिए। मां सिद्धिदात्री Maa Siddhidhatri को मौसमी फल, चना, पूड़ी, खीर, नारियल और हलवा अतिप्रिय है। कहते हैं कि मां को इन चीजों का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं। माता सिद्धिदात्री का अधिक से अधिक ध्यान करें। मां की आरती भी करें। नवमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन कन्या पूजन भी करें। मां सिद्धिदात्री बीज मंत्र- ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:। कन्या पूजन अति उत्तम-ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन करना अति उत्तम माना जाता है। कहते हैं कि नवरात्रि के आखिरी दिन कन्या पूजन करने से Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री प्रसन्न होती हैं। Aarti of Maa Siddhidhatri :मां सिद्धिदात्री की आरती जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता। तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता। तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि। कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम। तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है। रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो। तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे। तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया। सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली। जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली। हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा। महा नंदा मंदिर में है वास तेरा। मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता। भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता। Shardiya Navratri 2025 Day 8 Puja Vidhi: अष्टमी विशेष, जानिए मां महागौरी की कृपा पाने का सही तरीका

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Navratri 2025 Day 8

Shardiya Navratri 2025 Day 8 Puja Vidhi: अष्टमी विशेष, जानिए मां महागौरी की कृपा पाने का सही तरीका

Shardiya Navratri 2025 Day 8: आइए जानते हैं शारदीय नवरात्रि 2025 की अष्टमी का महत्व, (Maa Mahagauri) माँ महागौरी की कथा और स्वरूप, पूजा विधि, शुभ रंग, प्रिय भोग और इस Shardiya Navratri 2025 Day 8 Maa Mahagauri: शारदीय नवरात्रि हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व है, जिसे नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और आराधना करके मनाया जाता है। Navratri 2025 Day 8 नवरात्रि की अष्टमी तिथि यानी आठवाँ दिन, माँ महागौरी को समर्पित होता है। इस दिन को दुर्गा अष्टमी या महाअष्टमी भी कहा जाता है। माना जाता है कि माँ महागौरी अपने भक्तों के पाप दूर कर उन्हें पुण्य, शांति और सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं। अष्टमी का दिन विशेष रूप से कन्या पूजन और कन्याभोज के लिए शुभ माना गया है। इस दिन माँ महागौरी की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। Shardiya Navratri 2025 Day 8 Puja Vidhi: शारदीय नवरात्रि कब से आरंभ अष्टमी तिथि कब है:When is Ashtami Tithi? Navratri 2025 Day 8: शारदीय नवरात्रि 2025 का आठवाँ दिन यानी महाअष्टमी 30 सितंबर 2025, मंगलवार को पड़ेगा। इस दिन भक्त विशेष रूप से कन्या पूजन, माँ दुर्गा के महागौरी स्वरूप की आराधना और दुर्गा सप्तशती पाठ का आयोजन करते हैं। माँ महागौरी का स्वरूप:Nature of Mother Mahagauri माँ दुर्गा का आठवाँ रूप ‘महागौरी’ अत्यंत सौम्य, शांत और करुणामयी माना गया है। मां महागौरी का रंग हिम और चंद्रमा की तरह श्वेत और उज्ज्वल होता है, इसलिए उन्हें महागौरी कहा जाता है। उनके वस्त्र और आभूषण भी सफेद होते हैं, जो शुद्धता और निर्मलता का प्रतीक हैं। Navratri 2025 Day 8 मां महागौरी के चार हाथ होते हैं – एक हाथ में त्रिशूल, दूसरा हाथ में डमरू, तीसरा हाथ अभय मुद्रा में होता है जो निर्भयता दिखाता है और चौथा हाथ वर मुद्रा में होता है जो कृपा का संदेश देता है। उनका वाहन वृषभ यानी सफेद बैल है जो धर्म और सत्य का प्रतीक माना जाता है। माँ महागौरी की कथा:Story of Mother Mahagauri Navratri 2025 Day 8 पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की, जिसके कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। उनके इस तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें गंगाजल से स्नान कराया जिससे उनका शरीर स्वर्ण सा उज्ज्वल, गौर और पवित्र हो गया। इसी कारण उन्हें महागौरी कहा जाता है। Navratri 2025 Day 8 एक और कथा के अनुसार माता पार्वती ने बाल्यकाल में शिवजी को पति रूप में पाने के लिए कठिन व्रत रखा, जिससे उनके तन पर धूल-मिट्टी जम गई थी और शिवजी ने गंगाजल से उनका शरीर पवित्र और गौर वर्ण बना दिया। अष्टमी का महत्व:Importance of Ashtami नवरात्रि का आठवां दिन यानि Navratri 2025 Day 8 अष्टमी माँ महागौरी को समर्पित होता है और इसे बहुत पवित्र और शुभ माना जाता है। इस दिन पापों का नाश और संकटों से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है, जिससे भक्तों के जीवन के दुख और परेशानियाँ दूर होती हैं। समाज में अष्टमी का सबसे खास महत्व कन्या पूजन का है क्योंकि कन्याओं को माँ शक्ति का स्वरूप माना जाता है। इस दिन दुर्गा सप्तशती, रामचरितमानस और देवी माहात्म्य का पाठ करना बहुत पुण्यकारी होता है। माँ महागौरी विशेष रूप से उन भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। माँ महागौरी की पूजा-विधि;Worship method of Maa Mahagauri अष्टमी तिथि पर माँ महागौरी की पूजा बहुत ही नियमपूर्वक और श्रद्धा भाव से करनी चाहिए। प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ सफेद या गुलाबी वस्त्र धारण करें। घर या मंदिर के पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। माँ दुर्गा का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें और विशेषकर महागौरी का ध्यान करें। दीपक, धूप, कपूर और अगरबत्ती जलाएँ। देवी को सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत, रोली और सिंदूर अर्पित करें। माँ महागौरी को विशेष रूप से सफेद पुष्प, कमल या चमेली अर्पित करने की परंपरा है। भोग के रूप में सफेद रंग की मिठाइयाँ जैसे नारियल लड्डू, खीर, मालपुआ, सफेद मिठाई और फल अर्पित किए जाते हैं। “ॐ देवी महागौर्यै नमः” मंत्र का 108 बार जप करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ और “अर्जुन कृत देवी स्तुति” का पाठ विशेष लाभदायक माना जाता है। अंत में देवी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। माँ महागौरी का प्रिय भोग:Mother Mahagauri’s favorite treat Navratri 2025 Day 8: मां महागौरी को भोग अर्पित करने में नारियल, गुड़, दूध और सफेद मिठाइयाँ बहुत शुभ मानी जाती हैं। खासकर खीर, मालपुआ, नारियल बर्फी, सफेद मिठाई और घी से बने पकवान उनकी पूजा में प्रिय होते हैं। मान्यता है कि दूध और नारियल का भोग अर्पित करने से मां महागौरी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को अच्छा स्वास्थ्य, सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसके अलावा हलवा, पूड़ी और काले चने का भोग भी अष्टमी के दिन बहुत शुभ माना जाता है। माँ महागौरी का मंत्र:Mantra of Maa Mahagauri: अष्टमी तिथि पर निम्न मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है: “ॐ देवी महागौर्यै नमः।” इस मंत्र के जाप से मन की अशांति दूर होती है, मानसिक शांति मिलती है और कठिनाइयों से छुटकारा मिलता है। साथ ही साधक के जीवन में धन-समृद्धि और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। अष्टमी का शुभ रंग:Auspicious color of Ashtami Navratri 2025 Day 8 नवरात्रि के आठवें दिन यानी अष्टमी पर मोर-परी हरा रंग पहना जाता है। यह रंग नीले और हरे का सुंदर मिश्रण है और इसे पहनने से जीवन में ताजगी, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा आती है। इस दिन इस रंग का चुनाव करना शुभ माना जाता है और यह मां महागौरी की कृपा को आकर्षित करने में मदद करता है। अष्टमी पर कन्या पूजन की परंपरा:Tradition of worshiping girls on Ashtami Navratri 2025 Day 8 नवरात्रि में मां शक्ति को खुश करने का सबसे उत्तम तरीका अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करना माना जाता है। इस पूजन में आमतौर पर 2 से 9 साल तक की कन्याओं के साथ एक सुहागिन स्त्री को भी आमंत्रित किया जाता है। आमंत्रित कन्याओं के चरण धोकर साफ आसन पर बैठाया जाता है और उन्हें पूरी, चने, हलवा आदि प्रसाद चढ़ाकर भोजन कराया

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Shardiya Navratri 2025 7th Day Maa Kalratri Puja Vidhi: नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा का महत्व, जानें पूजा विधि और भोग

Maa Kalratri: नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा होती है। उन्हें काली मां भी कहते हैं। दुर्गा मां का सातवां रूप, कालरात्रि, पापियों को समाप्त करने के लिए धरती पर आती हैं। इस दिन रात की रानी का फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है। माता कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें, जैसे मालपुआ, का भोग लगाया जाता है। Shardiya Navratri: आज नवरात्रि का सातवां दिन है, जिसे महासप्तमी भी कहते हैं। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। माना जाता है कि मां कालरात्रि दुर्गा मां के नौ रूपों में सबसे ज्यादा गुस्से वाली हैं। जब धरती पर पाप बढ़ जाता है, तब वे पापियों को खत्म करने के लिए अवतार लेती हैं। उन्हें अंधकार को मिटाने वाली देवी भी कहा जाता है। जो भक्त उनकी पूजा करते हैं, उन पर मां कालरात्रि हमेशा दयालु रहती हैं और उन्हें अकाल मृत्यु का डर नहीं रहता। आइए, जानते हैं कि नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा कैसे करें, उन्हें क्या भोग लगाएं और इस दिन का क्या महत्व है। माता दुर्गा का विकराल रूप है कालरात्रि:Kalratri is the monstrous form of Goddess Durga. नवरात्रि में सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का महत्व है। उनका नाम ‘कालरात्रि’ है, जिसका अर्थ है ‘अंधेरी रात’. यह नाम उनके भयानक रूप को दर्शाता है। जब मां कालरात्रि क्रोधित होती हैं, तो उनका रूप बहुत विकराल हो जाता है। मां कालरात्रि का रंग काला होता है। उनके बाल खुले और बिखरे हुए होते हैं। यह रूप अंधकार का प्रतीक है। उनके गले में मुंड माला होती है, जो बिजली की तरह चमकती है। मां कालरात्रि बुरी शक्तियों को नष्ट करती हैं। वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। भले ही उनका रूप अंधेरे में भयानक दिखता है, लेकिन उनके आने से दुष्टों का नाश होता है। चारों तरफ प्रकाश फैल जाता है। Shardiya Navratri 2025 7th Day Maa Kalratri Puja Vidhi Timings Mantra Aarti Samagri Muhurat Kahani Vrat Katha माता कालरात्रि की पूजा का महत्व:Importance of worshiping Mata Kalratri कालरात्रि की कृपा से भक्तों के भीतर से हर तरह का डर खत्म होता जाता है। कालरात्रि के भक्त निडर बनते हैं और किसी भी परेशानी से नहीं डरते हैं। कालरात्रि की कृपा से भक्तों के सभी शत्रुओं का नाश होता है और वे विजय पथ पर आगे बढ़ते रहते हैं। इसका मतलब है कि माता कालरात्रि अपने भक्तों को हमेशा सुरक्षित रखती हैं। माता कालरात्रि की पूजा विधि:Method of worship of Mata Kalratri पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठें। स्नान करके साफ कपड़े पहनें। फिर पूजा की तैयारी करें। एक चौकी सजाएं. माता कालरात्रि की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। तस्वीर पर काले रंग की चुन्नी चढ़ाएं। इसके बाद माता को रोली, अक्षत, दीप और धूप दिखाएं. माता कालरात्रि को रात रानी का फूल बहुत पसंद है इसलिए उन्हें यह फूल जरूर चढ़ाएं। गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के अंत में माता कालरात्रि का पाठ करें। दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। माता कालरात्रि को कौन-सा भोग लगाएं:Which offering should be offered to Mata Kalratri? माता कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें पसंद हैं। इसका कारण यह है कि माता कालरात्रि का स्वभाव बहुत ही क्रोधी है। क्रोध की उष्मा को शीतलता में बदलने के लिए मीठे आहार की आवश्यकता होती हैं। इस कारण से माता कालरात्रि को मालपुए का भोग भी लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे माता कालरात्रि प्रसन्न होती हैं और कृपा बरसाती हैं। मां कालरात्रि के मंत्र:Mantras of Maa Kalratri दंष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे। चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते।। या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। ॐ कालरात्र्यै नम:ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा या देवी सर्वभूतेषु कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। मां कालरात्रि की आरती:Aarti of Maa Kalratri कालरात्रि जय-जय-महाकाली।काल के मुह से बचाने वाली॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।महाचंडी तेरा अवतार॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा।महाकाली है तेरा पसारा॥ खडग खप्पर रखने वाली।दुष्टों का लहू चखने वाली॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा।सब जगह देखूं तेरा नजारा॥ सभी देवता सब नर-नारी।गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥ रक्तदंता और अन्नपूर्णा।कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥ ना कोई चिंता रहे बीमारी।ना कोई गम ना संकट भारी॥ उस पर कभी कष्ट ना आवें।महाकाली मां जिसे बचावे॥ तू भी भक्त प्रेम से कह।कालरात्रि मां तेरी जय॥ Sharad Purnima 2025 Start Date:कब है शरद पूर्णिमा? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धन वृद्धि के अचूक उपाय

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Ashwin Satyanarayan Vrat 2025 Date and Time: साल 2025 के श्री सत्यनारायण पूजा की तिथि व मुहूर्त

Satyanarayan Vrat: सत्यनारायण पूजा तिथि और मुहूर्त से जानिए पूजा का सही समय। इस पूजा से घर में सुख, समृद्धि और आशीर्वाद का वास होता है, जिससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। सत्यनारायण पूजा तिथि और मुहूर्त के बारे में:About Satyanarayan Puja date and time Satyanarayan Vrat: सत्यनारायण पूजा किसी भी शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इसे पूर्णिमा, संकष्टी चतुर्थी, एकादशी, या विशेष मांगलिक अवसरों पर किया जाता है। पूजा का शुभ मुहूर्त प्रायः प्रदोष काल या चंद्रमा की वृद्धि वाले समय में होता है। Satyanarayan Vrat इस पूजा के लिए पंचांग देखकर शुभ तिथि और समय का चयन करें, जिससे भगवान विष्णु की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त हो। कब है शरद पूर्णिमा? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धन वृद्धि के अचूक उपाय हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान सत्यनारायण व्रत करने से और कथा सुनने से पुण्य फल प्राप्त होती है। श्री सत्यनारायण पूजा भगवान नारायण का आशीर्वाद लेने के लिए की जाती है जो भगवान विष्णु के रूपों में से एक हैं। इस रूप में भगवान को सत्य का अवतार माना जाता है। हालांकि सत्यनारायण पूजा करने के लिए कोई निश्चित दिन नहीं है, लेकिन पूर्णिमा या पूर्णिमा के दौरान इसे करना बेहद शुभ माना जाता है। सत्यनारायण पूजा तिथि और मुहूर्त:Satyanarayan Puja date and time Satyanarayan Vrat श्री सत्यनारायण पूजा नारायण यानी भगवान विष्णु को समर्पित है। यह पूजा भगवान का आशीर्वाद पाने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए की जाती है। वैसे तो सत्यनारायण पूजा किसी भी दिन की जा सकती है, Satyanarayan Vrat लेकिन पूर्णिमा के दिन इसका विशेष महत्व माना गया है। इस दिन श्रद्धालुओं द्वारा उपवास रखने का विधान है। सत्यनारायण पूजा प्रातःकाल या सायंकाल दोनों समय की जा सकती है, लेकिन सायंकाल का समय अधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस समय पूजा के बाद व्रती जातक प्रसाद ग्रहण कर अपना उपवास पूर्ण कर सकते हैं। Ashwin Satyanarayan Vrat Puja Puja: सत्यनारायण व्रत की पूजा विधि शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है ऐसा माना जाता है। Satyanarayan Vrat पूजा सुबह के साथ-साथ शाम को भी की जा सकती है और शाम को सत्यनारायण पूजा करना अधिक उपयुक्त माना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।इसके बाद सत्यनारायण की मूर्ति को स्थापित करें और उसके चारों ओर केले के पत्ते बांध दें।पंचामृतम (दूध, शहद, घी/मक्खन, दही और चीनी का मिश्रण) का उपयोग देवता को साफ करने के लिए किया जाता है, आमतौर पर शालिग्राम, जो महा विष्णु का दिव्य पत्थर है।चौकी पर जल से भरा कलश रखें और देसी घी का दीपक जलाएं।अब सत्यनारायण की पूजा और कथा करें।भुने हुए आटे में शक्कर मिलाकर भगवान को अर्पित करें।प्रसाद में तुलसी जरूर डालें।पूजा के बाद प्रसाद बांटें। Satyanarayan Vrat पूजा एक आरती के साथ समाप्त होती है, जिसमें भगवान की छवि या देवता के चारों ओर कपूर से जलाई गई एक छोटी सी आग की परिक्रमा होती है। आरती के बाद व्रतियों को पंचामृत और प्रसाद ग्रहण करना होता है। व्रती पंचामृत से व्रत तोड़ने के बाद प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं। साल 2025 के श्री सत्यनारायण पूजा की तिथि व मुहूर्त:Ashwin Satyanarayan Vrat 2025 Date and Time सत्यनारायण पूजा डेट 2025:satyanarayan puja date 2025 13 जनवरी 2025, सोमवार (पौष, शुक्ल पूर्णिमा) 12 फरवरी 2025, बुधवार (माघ, शुक्ल पूर्णिमा) 13 मार्च 2025, बृहस्पतिवार (फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा) 12 अप्रैल 2025, शनिवार (चैत्र, शुक्ल पूर्णिमा) 12 मई 2025, सोमवार (वैशाख, शुक्ल पूर्णिमा) 10 जून 2025, मंगलवार (ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा) 10 जुलाई 2025, बृहस्पतिवार (आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा) 09 अगस्त 2025, शनिवार (श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा) 07 सितम्बर 2025, रविवार (भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा) 06 अक्टूबर 2025, सोमवार (आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा) 05 नवम्बर 2025, बुधवार (कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा) 04 दिसम्बर 2025, बृहस्पतिवार (मार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा) तो ये थी जानकारी साल 2025 के श्री सत्यनारायण पूजा की डेट व तिथि के बारे में। आप भी इन पूर्णिमा तिथियों पर भगवान विष्णु को समर्पित ये अनुष्ठान अवश्य करें, और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को धन्य बनाएं। व्रत-त्यौहारों व अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए ‘श्री मंदिर’ पर।

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Sharad Purnima 2025

Sharad Purnima 2025 Start Date:कब है शरद पूर्णिमा? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धन वृद्धि के अचूक उपाय

Sharad Purnima 2025 Start Date; शरद पूर्णिमा 2025 का धार्मिक महत्व: सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ माना गया है। विशेष रूप से शरद पूर्णिमा को सभी 12 पूर्णिमाओं में सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। Sharad Purnima 2025 इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना और दान करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि और खुशियों का आगमन होता है। Sharad Purnima 2025 इस माह (अश्विन माह) में मां दुर्गा और पितरों की पूजा-अर्चना करने का भी विधान है। कब मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा 2025? (Sharad Purnima 2025 Date and Time) वैदिक पंचांग के अनुसार, अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि हर वर्ष बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। विवरण तिथि और समय (द्रिक पंचांग के अनुसार) पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 06 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर होगी। पूर्णिमा तिथि का समापन अगले दिन यानी 07 अक्टूबर 2025 को सुबह 09 बजकर 16 मिनट पर होगा। शरद पूर्णिमा 2025 पर्व 06 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। Why is the moon special on the night of Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा क्यों है खास? शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत की वर्षा करता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में दिव्य औषधीय गुण होते हैं। इसी वजह से, इस रात को दूध से बनी खीर चांदनी में रखी जाती है, और अगले दिन इसका सेवन प्रसाद के रूप में किया जाता है। माना जाता है कि इसे ग्रहण करने से जातक के शरीर और मन दोनों को शुद्धि एवं शक्ति मिलती है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें ये विशेष उपाय (Sharad Purnima Upay) अगर आप आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं या जीवन में धन में अपार वृद्धि चाहते हैं, तो Sharad Purnima 2025 शरद पूर्णिमा के दिन ये उपाय अत्यंत लाभकारी माने गए हैं: 1. आर्थिक तंगी से छुटकारा: शरद पूर्णिमा के दिन स्नान करने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। इस दौरान देवी लक्ष्मी को कमल का फूल और नारियल (या एकाक्षी नारियल) अर्पित करें। Sharad Purnima 2025 ऐसी मान्यता है कि इस उपाय से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आर्थिक तंगी की समस्या से छुटकारा मिलता है। 2. धन में अपार वृद्धि: धन में अपार वृद्धि के लिए शरद पूर्णिमा की रात को 11 पीले रंग की कौड़ियों को एक पीले कपड़े में बांधकर मां लक्ष्मी के सामने रखें। अगले दिन इन कौड़ियों को अपनी तिजोरी में रख दें। Sharad Purnima 2025 ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से धन में अपार वृद्धि होती है और घर-परिवार में कभी भी धन की कमी नहीं होती है, तथा लक्ष्मी माता का वास होता है। मां लक्ष्मी के प्रिय मंत्र:Favorite mantras of Goddess Lakshmi पूजा के दौरान आप मां लक्ष्मी के इन मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं: • श्री लक्ष्मी बीज मन्त्र: ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः।। • लक्ष्मी प्रार्थना मंत्र: नमस्ते सर्वगेवानां वरदासि हरे: प्रिया। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां या सा मे भूयात्वदर्चनात्।। • श्री लक्ष्मी महामंत्र: ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।

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Navratri Day 6

Shardiya Navratri Day 6, Maa Katyayini Puja Vidhi: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की होती है आराधना, जानिए पूजा- विधि, मंत्र, भोग और आरती

Shardiya Navratri Day 6, Maa Katyayini Puja Vidhi:देवी भागवत पुराण में कहा गया है कि मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्त को अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। Shardiya Navratri 6 Day, Maa Katyayani Puja Vidhi, Aarti In Hindi: शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा- अर्चना करने का विधान है। वहीं आपको बता दें कि देवी कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना जाता है। वहीं अगर मां के स्वरूप की बात करी जाए तो मां 4 भुजाधारी और सिंह पर सवार हैं। Navratri Day 6 उन्होंने एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल का पुष्प धारण किया हुआ है। अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं। मान्यता है कि कात्यायनी की पूजा करने से भक्त को अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी का भोग, आरती और पूजा- विधि… Shardiya Navratri Day 6, Maa Katyayini Puja Vidhi: मां कात्यायनी की पूजा- विधि Navratri 2025: इस दिन सुबह जल्दी उठ जाएं। साथ ही स्नान करने के बाद साफ- सुथरे वस्त्र धारण कर लें। वहीं सबसे पहले धूप अगरबत्ती जलाएं। साथ ही पूजा आरंभ करें। सबसे पहले कलश की विधिवत पूजा करें। इसके बाद Navratri Day 6 मां दुर्गा के साथ मां कात्यायनी की पूजा करें। वहीं माता को फूल चढ़ाएं। साथ ही माला, सिंदूर, कुमकुम, रोला, अक्षत लगाने के साथ मां का श्रृंगार भी करें। वहीं  इसके बाद मां को भोग में शहद, फल, मिठाई का भोग लगाएं। इसके साथ ही एक पान में 2 लौंग, एक इलायची, बाताशा, एक सिक्का रखकर चढ़ा दें। साथ ही अंत में माता के सभी मंत्रों का उच्चारण करें। Navratri Day 6 साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। वहीं अंत में आरती करें और जो प्रसाद लगाया है, वो घर के सभी सदस्यों में बांट दें और अंत में क्षमा प्रार्थना करें। मां कात्यायनी प्रिय भोग:Maa Katyayini Priy bhog नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा के समय शहद का भोग लगाना चाहिए। Navratri Day 6 इससे मां प्रसन्न होकर सुख- समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। मां कात्यायनी का प्रिय रंग:Maa Katyayini Ka Priy Rang मां कात्यायनी को लाल रंग अति प्रिय है। Navratri Day 6 इसलिए इस रंग के वस्त्र अर्पित करने के साथ लाल रंग के गुलाब अर्पित करें। मां कात्यायनी का बीज मंत्र:Maa Katyayini Ka Beej Mantra क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:। मां कात्यायनी आराधना मंत्र:Maa Katyayini Aradhana Mantra 1- या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। 2-चंद्र हासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना|कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि|| मां कात्यायनी स्तोत्र पाठ:Maa Katyayini Stotra Path कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोच्जवलां।स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥परमांवदमयी देवि परब्रह्मा परमात्मा।परमशक्ति, परमभक्ति, कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥ मां कात्यायनी कवच: Maa Katyayini Kavach कात्यायनी मुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी॥ मां कात्यायनी की आरती:Maa Katyayini Ki Aarti जय-जय अम्बे जय कात्यायनीजय जगमाता जग की महारानीबैजनाथ स्थान तुम्हारावहा वरदाती नाम पुकाराकई नाम है कई धाम हैयह स्थान भी तो सुखधाम हैहर मंदिर में ज्योत तुम्हारीकही योगेश्वरी महिमा न्यारीहर जगह उत्सव होते रहतेहर मंदिर में भगत हैं कहतेकत्यानी रक्षक काया कीग्रंथि काटे मोह माया कीझूठे मोह से छुडाने वालीअपना नाम जपाने वालीबृहस्पतिवार को पूजा करिएध्यान कात्यायनी का धरिएहर संकट को दूर करेगीभंडारे भरपूर करेगीजो भी मां को ‘चमन’ पुकारेकात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

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Day 3 Navratri

Day 3 Navratri Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें सही विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा

Day 3 Navratri Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है. आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा. Navratri 2025 Day 3: नवरात्रि के तीसरे दिन देवी दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है. मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है. इनके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है, Day 3 Navratri Puja Vidhi मां के दस हाथ हैं, जिनमें अलग-अलग अस्त्र और शस्त्र होते हैं. वहीं, मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह है. मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की सच्ची निष्ठा से पूजा-अर्चना करने से जीवन में शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन आता है. ऐसे में आइए जानते हैं Day 3 Navratri मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा. Day 3 Navratri Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा…. मां चंद्रघंटा की पूजा विधि (Maa Chandraghanta Puja Vidhi) इसके बाद, मां के चरणों में पुष्प अर्पित कर आरती गाएं. देवी चंद्रघंटा की आराधना करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ कपड़े धारण कर लें. मंदिर को साफ कर पूजा स्थान पर देवी की मूर्ति की स्थापना करें.  मां की प्रतिमा को गंगा जल से स्नान कराएं.  इसके बाद धूप-दीप, पुष्प, रोली, चंदन अर्पित करें. मां को भोग लगाकर उनके मंत्रों का जाप करें. मां चंद्रघंटा का मंत्र  (Maa Chandraghanta Mantra) पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता.प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥ ध्यान मंत्र वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्.सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्.खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्.मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्.कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥ मां चंद्रघंटा का भोग (Maa Chandraghanta ka bhog) नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग समर्पित किया जाता है. मां चंद्रघंटा शुभ रंग (Maa Chandraghanta ka Shubh Rang) नवरात्रि के तीसरे दिन का शुभ रंग लाल होता है.मां चंद्रघंटा की कथा (Maa Chandraghanta ki Katha) पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर नाम के एक राक्षस ने देवराज इंद्र का सिंहासन हड़प लिया था.  महिषासुर स्वर्गलोक पर राज करना चाहता था. Day 3 Navratri उसकी यह इच्छा जानकार देवता चितिंत हो गए, जिसके बाद वे अपनी इस परेशानी के लिए त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और शंकर के पास पहुंचें. महिषासुर के आतंक की गाथा सुनकर त्रिदेव क्रोधिक हो गए. इस क्रोध के चलते तीनों के मुख से ऊर्जा उत्पन्न हुई. इसी उर्जा से मां चंद्रघंटा का जन्म हुआ. महिषासुर का अंत करने के लिए भगवान शंकर ने मां को अपना त्रिशूल और भगवान विष्णु ने अपना चक्र प्रदान किया. इसके बाद सभी देवी देवताओं ने भी माता को अपना-अपना अस्त्र सौंप दिया. इंद्रदेव ने मां को अपना एक घंटा दिया. इसके बाद मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का संहार कर देवताओं की रक्षा की. Durga Puja 2025 Date And Time :दुर्गा पूजा 2025 कब से होगी शुरू? जानें महत्वपूर्ण तिथियां, घटस्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

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Day 2 Navratri Puja Vidhi

Day 2 Navratri Puja Vidhi : नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की होती है पूजा, नोट कर लें पूजन विधि, शुभ

Day 2 Navratri Puja Vidhi : नवरात्रि के दूसरे दिन मां के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान और तप की देवी कहा जाता है। भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए मां पार्वती ने कठोर…. 2nd Day of Navratri Maa brahmacharini : इस समय चैत्र नवरात्रि चल रही हैं। आज चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान और तप की देवी कहा जाता है। भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए मां पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। Day 2 Navratri Puja Vidhi: मां ब्रह्मचारिणी सफेद साड़ी धारण करती हैं। साथ ही उनके दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमण्डल है। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से जातक को आदि और व्याधि रोगों से मुक्ति मिलती है। Day 2 Navratri Puja Vidhi शास्त्रों में वर्णित है कि मां ब्रह्मचारिणी के पूजन से भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं। यम, नियम के बंधन से मुक्ति मिलती है। ब्रह्म को प्राप्त करने के लिए भगवती ने तपस्या की, इसलिए उनका नाम ब्रहमचारिणी पढ़ा। शुभ रंग- मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग बहुत प्रिय है। मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन मां दुर्गा को सफेद रंग के पुष्प अर्पित करने चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को खीर, बर्फी, चीनी और पंचामृता का भोग लगा सकते हैं। Day 2 Navratri Puja Vidhi इस दिन आप पूजा के दौरान सफेद रंग के वस्त्रों को पहन सकते हैं। मां ब्रह्मचारिणी का बीज मंत्र: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए उनके बीज मंत्र ‘ह्रीं श्री अम्बिकायै नमः’ का 108 बार जाप कर सकते हैं। इसके अलावा ‘ या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।’ मंत्र का जाप करना भी बेहद शुभ माना जाता है। व्रत कथा – मां ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर जन्म लिया था। नारदजी की सलाह पर उन्होंने कठोर तप किया, ताकि वे भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त कर सकें। कठोर तप के कारण उनका ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी नाम पड़ा। Day 2 Navratri Puja Vidhi भगवान शिव की आराधना के दौरान उन्होंने 1000 वर्ष तक केवल फल-फूल खाए तथा 100 वर्ष तक शाक खाकर जीवित रहीं। कठोर तप से उनका शरीर क्षीण हो गया। Day 2 Navratri Puja Vidhi उनक तप देखकर सभी देवता, ऋषि-मुनि अत्यंत प्रभावित हुए। Day 2 Navratri Puja Vidhi उन्होंने कहा कि आपके जैसा तक कोई नहीं कर सकता है। आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगा। भगवान शिव आपको पति स्वरूप में प्राप्त होंगे। पूजा-विधि: Day 2 Navratri Puja Vidhi इस दिन सुबह उठकर जल्दी स्नान कर लें, फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें। मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें। अब मां दुर्गा को अर्घ्य दें। मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं। धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें। मां को भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की आरती:(Maa Brahmacharini Aarti) जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा। जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने। जो ​तेरी महिमा को जाने। रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना। ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी। Navratri 2025 2nd Day Maa Brahmacharini Puja : नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी पूजा, जाने पूजा विध, महत्व, मंत्र, भोग और पीले रंग का क्या है महत्व

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