Lakshmanakritam

ShrImahAlakShmI kavacham: श्रीमहालक्ष्मीकवचम्

ShrImahAlakShmI kavacham: श्रीमहालक्ष्मीकवचम् श्री गणेशाय नमः ।अस्य श्रीमहालक्ष्मीकवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः गायत्री छन्दःमहालक्ष्मीर्देवता महालक्ष्मीप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।इन्द्र उवाच । समस्तकवचानां तु तेजस्वि कवचोत्तमम् ।आत्मरक्षणमारोग्यं सत्यं त्वं ब्रूहि गीष्पते ॥ १॥ श्रीगुरुरुवाच । महालक्ष्म्यास्तु कवचं प्रवक्ष्यामि समासतः ।चतुर्दशसु लोकेषु रहस्यं ब्रह्मणोदितम् ॥ २॥ ब्रह्मोवाच । शिरो मे विष्णुपत्नी च ललाटममृतोद्भवा ।चक्षुषी सुविशालाक्षी श्रवणे सागराम्बुजा ॥ ३॥ घ्राणं पातु वरारोहा जिह्वामाम्नायरूपिणी ।मुखं पातु महालक्ष्मीः कण्ठं वैकुण्ठवासिनी ॥ ४॥ स्कन्धौ मे जानकी पातु भुजौ भार्गवनन्दिनी ।बाहू द्वौ द्रविणी पातु करौ हरिवराङ्गना ॥ ५॥ वक्षः पातु च श्रीर्देवी हृदयं हरिसुन्दरी ।कुक्षिं च वैष्णवी पातु नाभिं भुवनमातृका ॥ ६॥ कटिं च पातु वाराही सक्थिनी देवदेवता ।ऊरू नारायणी पातु जानुनी चन्द्रसोदरी ॥ ७॥ इन्दिरा पातु जंघे मे पादौ भक्तनमस्कृता ।नखान् तेजस्विनी पातु सर्वाङ्गं करुणामयी ॥ ८॥ ब्रह्मणा लोकरक्षार्थं निर्मितं कवचं श्रियः ।ये पठन्ति महात्मानस्ते च धन्या जगत्त्रये ॥ ९॥ कवचेनावृताङ्गनां ShrImahAlakShmI जनानां जयदा सदा ।मातेव सर्वसुखदा भव त्वममरेश्वरी ॥ १०॥ भूयः सिद्धिमवाप्नोति पूर्वोक्तं ब्रह्मणा स्वयम् ।लक्ष्मीर्हरिप्रिया पद्मा एतन्नामत्रयं स्मरन् ॥ ११॥ नामत्रयमिदं जप्त्वा स याति परमां श्रियम् ।यः पठेत्स च धर्मात्मा सर्वान्कामानवाप्नुयात् ॥ १२॥ ॥ इति श्रीब्रह्मपुराणे इन्द्रोपदिष्टं महालक्ष्मीकवचं सम्पूर्णम् ॥

ShrImahAlakShmI kavacham: श्रीमहालक्ष्मीकवचम् Read More »

Lakshmanakritam

ShrIdIpalakShmIstotram: श्रीदीपलक्ष्मीस्तोत्रम्

ShrIdIpalakShmIstotram: श्रीदीपलक्ष्मीस्तोत्रम् दीपस्त्वमेव जगतां दयिता रुचिस्ते,दीर्घं तमः प्रतिनिवृत्यमितं युवाभ्याम् ।स्तव्यं स्तवप्रियमतः शरणोक्तिवश्यंस्तोतुं भवन्तमभिलष्यति जन्तुरेषः ॥ दीपः पापहरो नॄणां दीप आपन्निवारकःदीपो विधत्ते सुकृतिं दीपस्सम्पत्प्रदायकः ।देवानां तुष्टिदो दीपः पितॄणां प्रीतिदायकःदीपज्योतिः परम्ब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः ॥ दीपो हरतु मे पापं सन्ध्यादीप नमोऽस्तु ते ॥ फलश्रुतिःया स्त्री पतिव्रता लोके गृहे दीपं तु पूरयेत् ।दीपप्रदक्षिणं कुर्यात् सा भवेद्वै सुमङ्गला ॥ इति श्रीदीपलक्ष्मीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

ShrIdIpalakShmIstotram: श्रीदीपलक्ष्मीस्तोत्रम् Read More »

Papankusha Ekadashi

Papankusha Ekadashi 2025 Date: पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें, जीवन में मिलेंगे सभी सुख

Papankusha Ekadashi: सनातन धर्म में, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की सभी तिथियों का विशेष महत्व होता है, जिसमें एकादशी तिथि भी शामिल है. वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को (Papankusha Ekadashi) पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी दुखों से छुटकारा मिलता है. इस व्रत को करने से सभी पापों से भी छुटकारा मिलता है. पापांकुशा एकादशी 03 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी व्रत करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी दुखों से छुटकारा मिलता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करना भी शुभ माना गया है। एकादशी के दिन महादेव की पूजा करने से जीवन खुशहाल रहता है और बिगड़े काम पूरे होते हैं। अगर आप भी शिव जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर विशेष चीजें अर्पित करें। इससे शुभ फल की प्राप्ति होगी। पापांकुशा एकादशी 2025 कब है? (Papankusha Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2025 में पापांकुशा एकादशी 03 अक्टूबर को मनाई जाएगी. तिथि की शुरुआत: आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 02 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 10 मिनट पर होगी. तिथि का समापन: एकादशी तिथि का समापन 03 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 32 मिनट पर होगा. व्रत का पारण: व्रत का पारण 04 अक्टूबर को किया जाएगा. एकादशी पर क्यों करें भगवान शिव की पूजा:Why worship Lord Shiva on Ekadashi? पापांकुशा एकादशी Papankusha Ekadashi पर मुख्य रूप से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है. लेकिन, इस दिन भगवान शिव की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना गया है. एकादशी के दिन महादेव की पूजा करने से जीवन खुशहाल रहता है, और साधक के बिगड़े काम पूरे होते हैं. अगर आप भी शिव जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर विशेष चीजें अर्पित करनी चाहिए. इससे शुभ फल की प्राप्ति होगी. शिवलिंग पर क्या-क्या चढ़ाएं और क्या लाभ मिलेगा:What should be offered to Shivling and what will be the benefit? यदि आप भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता चाहते हैं, तो Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के दिन निम्नलिखित चीजें शिवलिंग पर अर्पित करें: 1. आर्थिक तंगी होगी दूर: कच्चे चावल (Raw Rice) अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी (Financial Difficulties) का सामना कर रहे हैं, तो Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर कच्चे चावल अर्पित करें. इसके साथ ही, महादेव से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें. धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर कच्चे चावल अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और आपकी आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है. 2. मिलेगा मनचाहा वर: घी (Ghee) शिवलिंग पर घी अर्पित करना भी बहुत शुभ माना जाता है. एकादशी के दिन महादेव का घी से अभिषेक करने से साधक को मनचाहे वर (Desired Spouse) की प्राप्ति होती है और जीवन में सफलता (Success) मिलती है. 3. जीवन में मिलेंगे सभी सुख: गन्ने का रस (Sugarcane Juice) जीवन में सभी सुखों (All Worldly Comforts) की प्राप्ति के लिए Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के अवसर पर शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करें. ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से साधक को जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं और उसे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. भगवान शिव के मुख्य मंत्र:Main mantras of Lord Shiva शिवलिंग पर अभिषेक और पूजन करते समय आप इन पवित्र मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं: 1. शिव जी का मूल मंत्र: ॐ नमः शिवाय॥ 2. महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ 3. रूद्र मंत्र: ॐ नमो भगवते रूद्राय। 4. रूद्र गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

Papankusha Ekadashi 2025 Date: पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें, जीवन में मिलेंगे सभी सुख Read More »

nAmAvali

Lord Ganesha Mantra: गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए करें इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप…

Lord Ganesha Mantra in Hindi: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो साधक भगवान गणेश की पूजा-पाठ करते हैं उसके जीवन में हमेशा सुख-समृद्धि बना रहता है। ऐसे में यदि आप रोजाना इन गणेश मंत्रों का जाप करेंगे तो इससे आपको जीवन में विशेष लाभ देखने को मिल सकता है। Lord Ganesha Mantra in Hindi: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी की उपासना करने से साधक के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। वहीं,हिंदू धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित माना गया है। सनातन धर्म में भगवान गणेश के कई ऐसे मंत्र हैं जो व्यक्ति को कई तरह के लाभ पहुंचा सकते हैं। ऐसे में आइए यहां जानते हैं कि रोजाना किन मंत्रों के जाप से गणेश जी की कृपा प्राप्त की जा सकती है। भगवान गणेश के शक्तिशाली मंत्र (Lord Ganesha Mantra in Hindi) ॐ गं गणपतये नम:। वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं।नागाननाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥ एकदन्ताय शुद्घाय सुमुखाय नमो नमः ।प्रपन्न जनपालाय प्रणतार्ति विनाशिने ॥ ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि,तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥ ॐ नमो सिद्धि विनायकाय सर्व कार्य कर्त्रे सर्व विघ्न प्रशमनायसर्व राज्य वश्यकरणाय सर्वजन सर्वस्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा ॥ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।। ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरु गणेश।ग्लौम गणपति, ऋद्धि पति, सिद्धि पति. करो दूर क्लेश ।। गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥ ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥ एकदन्ताय विद्महे । वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ ॐ लम्बोदराय नमः

Lord Ganesha Mantra: गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए करें इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप… Read More »

Ram

Bhagwan Ram Ke Shaktisali mantra : राम से बड़ा राम का नाम, जानें राम के वे 8 मंत्र, जिनसे मिलती है सफलता, शक्ति एवं सर्वसिद्धी

Ram Mantra: राम से बड़ा राम का नाम ये तो आपने सुना ही होगा परंतु क्या आप जानते हैं कि प्रभु श्रीराम के नाम की महिमा का गोस्वामी जी ने कितना वर्णन किया है। Ram Mantra: राम से बड़ा राम का नाम ये तो आपने सुना ही होगा परंतु क्या आप जानते हैं कि प्रभु श्रीराम के नाम की महिमा का गोस्वामी जी ने कितना वर्णन किया है। इस नाम का अर्थ और औचित्य क्या है। Ram ‘श्रीराम’ -का अर्थ है प्रभु श्रीराम को पुकारना। यह भगवान राम के प्रति पुकार है । ‘जय राम’- यह उनकी स्तुति है जय जय राम’-यह उनके प्रति पूर्ण समर्पण है। प्रतिदिन भगवान श्रीराम के मंत्रों का जाप करने से मनचाही कामना पूरी होती है। अतः आइये जानते हैं इन चमत्कारी ‘राम मंत्रों’ के बारे में। Bhagwan Ram Ke Shaktisali mantra : राम से बड़ा राम का नाम… सर्वार्थसिद्धि श्री राम ध्यान मंत्र ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम, लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम ! श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः ! किसी संकट में सहायता हेतु लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्। कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥ — आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्।। ग्रह क्लेश निवारण और सुख संपत्ति दायक हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा। गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा॥ हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते। बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्॥ चहुओर सफलता के लिए ” ॐ राम ॐ राम ॐ राम ह्रीं राम ह्रीं राम श्रीं राम श्रीं राम – क्लीं राम क्लीं राम। फ़ट् राम फ़ट् रामाय नमः । प्रतिदिन प्रभु के स्मरण हेतु || श्री राम जय राम जय जय राम || मनोकामना पूर्ति हेतु || श्री रामचन्द्राय नमः || विपत्ति में रक्षा हेतु || राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने || मुक्ति और प्रभु प्रेम हेतु || नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट || || लोचन निजपद जंत्रित जाहि प्राण केहि बाट || भगवान राम का नाम स्वयं में एक महामंत्र है। राम नाम की महिमा अपरंपार है। इस अतिरिक्त राम नाम का मंत्र सर्व रूप मे ग्रहण किया जाता है । इस के जप से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति सहज हो जाती है । अन्य नामो कि अपेक्षा राम नाम हजार नामों के समान है । राम मंत्र को तारक मंत्र भी कहा जाता है। इस मंत्र के जपने से सभी दुःखों का अंत होता है।

Bhagwan Ram Ke Shaktisali mantra : राम से बड़ा राम का नाम, जानें राम के वे 8 मंत्र, जिनसे मिलती है सफलता, शक्ति एवं सर्वसिद्धी Read More »

Dussehra 2025

Dussehra 2025 Upay: विजयादशमी के दिन करें ये सिद्ध 10+ उपाय, मां जाते-जाते घर में लगा देंगी धन का अंबार !

Dussehra 2025 Upay: आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी या दशहरा कहा जाता है। यह केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। Dussehra 2025 दशहरा केवल एक त्योहार भर नहीं है, बल्कि यह आत्मबल और संकल्प का प्रतीक भी है। मान्यता है कि इस तिथि पर लोग अपने जीवन से नकारात्मकता को हटाने और सकारात्मक ऊर्जा को अपनाने का संकल्प लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी का दिन घर-परिवार के लिए शुभता और सौभाग्य लेकर आता है। यही कारण है कि लोग इस अवसर पर नए कार्यों की शुरुआत को शुभ मानते हैं। Dussehra 2025 Upay, विजयादशमी के उपाय, दशहरा पर धन प्राप्ति, शमी वृक्ष पूजा, नीलकंठ दर्शन, विजयदशमी इस शुभ दिन पर किए गए विशेष उपायों से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और नई राह खुलती है। यह दिन घर में सुख-समृद्धि लाने का अवसर भी देता है, और इन उपायों से मां दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त होती है। धन, समृद्धि और आर्थिक प्रगति के लिए 6 विशेष उपाय:6 special remedies for wealth, prosperity and economic progress यदि आप अपने जीवन में आर्थिक स्थिरता, धन में वृद्धि और मां लक्ष्मी का स्थायी वास चाहते हैं, तो दशहरा के दिन ये सिद्ध उपाय अवश्य करें: 1. माता लक्ष्मी का स्मरण और झाड़ू अर्पण: दशहरे की शाम माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए किसी मंदिर में झाड़ू अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। Dussehra 2025 मान्यता है कि इस उपाय से घर में लक्ष्मी का वास होता है और धन-संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। 2. शमी वृक्ष की पूजा और पत्ते घर लाना: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शमी के वृक्ष में लक्ष्मी का वास माना जाता है। दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा करना और उसके पत्ते घर में लाना धन वृद्धि करता है और आर्थिक संकटों को दूर करता है। 3. अपराजिता देवी की आराधना: अपराजिता देवी (अपराजिता) की पूजा दशहरे पर विशेष फल देती है। घर के उत्तर दिशा में देवी अपराजिता की पूजा करें और उन्हें सिंदूर और चावल अर्पित करें। माना जाता है कि इससे जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती। 4. स्वर्ण या धातु खरीदना: दशहरा एक शुभ मुहूर्त का पर्व माना जाता है। इस दिन स्वर्ण, चांदी, तांबे, या पीतल जैसी धातु खरीदने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक स्थिरता मिलती है। 5. कुत्ते को लड्डू खिलाना: Dussehra 2025 दशहरे से शुरुआत कर लगातार 43 दिनों तक कुत्ते को बेसन के लड्डू खिलाने से धन संबंधी रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। 6. मां दुर्गा का विसर्जन: दशहरे के दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा या कलश का विधिपूर्वक पूजन कर विसर्जन करना चाहिए। श्रद्धा से की गई यह पूजा परिवार में सौभाग्य और समृद्धि लाती है। करियर, सफलता और विजय के लिए उपाय:Tips for career, success and victory 1. करियर/व्यापार में सफलता के लिए फल दान: यदि करियर या व्यापार में बाधाएं आ रही हों, तो दशहरे के दिन देवी की पूजा कर उन पर 10 तरह के फल चढ़ाएं और फिर उन्हें जरूरतमंदों में बांट दें। इस पूजन के दौरान ‘ॐ विजयायै नमः’ मंत्र का जप अवश्य करें। 2. कारोबार की उन्नति के लिए नारियल का उपाय: यदि व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा है, तो Dussehra 2025 दशहरे के दिन एक नारियल को पीले कपड़े में लपेटें। साथ में एक जोड़ी जनेऊ और मिठाई रखें और इसे किसी राम मंदिर में अर्पित करें। माना जाता है कि इससे कारोबार तेजी से आगे बढ़ता है। 3. शुभ संकेत और नीलकंठ दर्शन: धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध करने से पहले नीलकंठ पक्षी का दर्शन किया था। दशहरे के दिन नीलकंठ को देखना अत्यंत शुभ माना जाता है और यह विजय का प्रतीक समझा जाता है। 4. भगवान श्रीराम की आराधना: दशहरा भगवान श्रीराम की विजय का दिन है। Dussehra 2025 इस दिन श्रीराम का स्मरण और रामचरितमानस का पाठ करना विशेष लाभदायी है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और लक्ष्मी-कुबेर की कृपा मिलती है। स्वास्थ्य और संकटों से मुक्ति के उपाय:Ways to get rid of health and problems 1. बीमारी और संकट से छुटकारा: यदि परिवार का कोई सदस्य बीमारी या संकट से जूझ रहा हो, तो दशहरे के दिन एक साबुत नारियल लेकर उसे अपने ऊपर से 21 बार वारें। इसके बाद उस नारियल को रावण दहन की अग्नि में डाल दें। यह उपाय घर के सभी सदस्यों के लिए करना लाभकारी होता है। 2. मानसिक शांति के लिए पाठ: Dussehra 2025 दशहरे पर सुंदरकांड का पाठ या कथा करवाना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। यह उपाय मानसिक तनाव, रोग और संकटों को दूर कर घर में सुख-शांति लाता है। 3. मुकदमे से छुटकारे के लिए: Dussehra 2025 कोर्ट-कचहरी से संबंधित मामलों को शांत करने और सौभाग्य में वृद्धि के लिए दशहरे पर शमी वृक्ष के नीचे दीपक जलाना अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

Dussehra 2025 Upay: विजयादशमी के दिन करें ये सिद्ध 10+ उपाय, मां जाते-जाते घर में लगा देंगी धन का अंबार ! Read More »

Shani pradosh vrat 2025

Shani pradosh vrat 2025: अक्टूबर 2025 में दो ‘शनि प्रदोष व्रत’ का अद्भुत संयोग! जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Shani pradosh vrat 2025: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का नाम महत्वपूर्ण व्रतों में आता है, क्योंकि इस व्रत की महिमा का वर्णन स्वयं शिवपुराण में किया गया है। यह पवित्र व्रत देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित होता है। Shani pradosh vrat 2025 हर महीने में यह व्रत दो बार किया जाता है: एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में, त्रयोदशी तिथि पर। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखकर प्रदोष काल (सायंकाल) में पूजा करने से साधकों को धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। Shani Pradosh Vrat 2025: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का नाम महत्वपूर्ण व्रत में आता है। क्योंकि इस व्रत की महिमा वर्णन खुद शिवपुराण में किया गया है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। Shani pradosh vrat 2025 प्रदोष का व्रत हर महीने में दो बार किया जाता है, एक कृष्ण पक्ष में तो दूसरा शुक्ल पक्ष में, इस दिन महादेव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का विधान है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखकर प्रदोष काल में पूजा करने से धन- समृद्धि की प्राप्ति होती है। Shani pradosh vrat 2025 वहीं यहां हम बात करने जा रहे हैं आश्विन प्रदोष व्रत के बारे में, जो 4 अक्टूबर को रखा जाएगा। वहीं यह शनि प्रदोष होगा, क्योंकि इस दिन शनिवार है। Shani pradosh vrat 2025 आइए जानते हैं प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम… shani pradosh vrat 2025 ashwin month last pradosh vrat 2025 kab hai know date and time shubh muhurat अक्टूबर 2025 का अजब संयोग: दो शनि प्रदोष व्रत:Strange coincidence of October 2025: Do Shani Pradosh fast अक्टूबर 2025 में एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब दोनों प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ रहे हैं, जिसके कारण ये दोनों ही ‘शनि प्रदोष व्रत’ कहलाएंगे। ज्योतिष के अनुसार, शनि देव के आराध्य देव महादेव ही हैं, Shani pradosh vrat 2025 इसलिए भगवान शिव की पूजा करने वाले साधकों पर शनिदेव की असीम कृपा बरसती है। आइए जानते हैं अक्टूबर 2025 में पड़ने वाले दोनों शनि प्रदोष व्रतों की तिथि और शुभ मुहूर्त: पहला शनि प्रदोष व्रत (04 अक्टूबर 2025):First Shani Pradosh Vrat (04 October 2025) अक्टूबर 2025 का पहला प्रदोष व्रत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ेगा। विवरण तिथि/समय (Pradosh Vrat 2025 Date) व्रत का दिन 04 अक्टूबर 2025 (शनिवार) त्रयोदशी तिथि का आरंभ शाम 05 बजकर 08 मिनट/09 मिनट पर (04 अक्टूबर) त्रयोदशी तिथि का समापन दोपहर 03 बजकर 04 मिनट/03 मिनट पर (05 अक्टूबर) पूजा का शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल) शाम 05 बजकर 29 मिनट से लेकर रात 07 बजकर 55 मिनट तक विशेष योग इस दिन द्विपुष्कर योग बन रहा है (सुबह 06 बजकर 13 मिनट से 09 बजकर 09 मिनट तक), जिसमें पूजा करने से दोगुना फल प्राप्त होता है दूसरा शनि प्रदोष व्रत (18 अक्टूबर 2025):Second Shani Pradosh Vrat (18 October 2025) अक्टूबर 2025 का दूसरा प्रदोष व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आएगा। विवरण तिथि/समय (Pradosh Vrat 2025 Date) व्रत का दिन 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार) त्रयोदशी तिथि का आरंभ दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर (18 अक्टूबर) त्रयोदशी तिथि का समापन दोपहर 01 बजकर 51 मिनट पर (19 अक्टूबर) पूजा का शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल) शाम 05 बजकर 15 मिनट से लेकर 07 बजकर 45 मिनट के बीच शनि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व (Shani Pradosh Vrat Mahatva) शनि प्रदोष व्रत को अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। यह व्रत रखने से कई प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। 1. शनि देव की कृपा: शनि प्रदोष का व्रत करने से शनि देव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे साधक को शनि दोष से मुक्ति मिलती है। 2. संतान सुख और आरोग्य: यह व्रत संतान सुख की प्राप्ति के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। साथ ही, व्रत रखने से आरोग्य (स्वास्थ्य) की प्राप्ति भी होती है। 3. दोषों से मुक्ति: जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु और कालसर्प दोष हैं, उन्हें इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से इन दोषों के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है। 4. सुख-समृद्धि: महादेव की कृपा से घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। Diwali 2025 Mantra: दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप, धन की समस्या होगी दूर

Shani pradosh vrat 2025: अक्टूबर 2025 में दो ‘शनि प्रदोष व्रत’ का अद्भुत संयोग! जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व Read More »

आश्विन मास

Ashwin Maas 2025 Date: आश्विन मास का उत्सव 

आश्विन माह वर्ष का सातवां महीना माना जाता है। यह ग्रेगोरियन कैलेंडर के सितंबर-अक्टूबर में आता है। विक्रम संवत के अनुसार भाद्रपद माह की पूर्णिमा के बाद की प्रतिपदा आश्विन माह की पहली तिथि होती है। आश्विन मास का नाम ‘अश्विनी’ नक्षत्र के कारण ही पड़ा है। ‘अश्विनी’ हिंदू कैलेंडर में समय की गणना में उपयोग किए जाने वाले 27 नक्षत्रों में से पहला है। आश्विन मास का उत्सव:Ashwin month celebration हिंदू धर्म के लोगों के लिए आश्विन मास का विशेष महत्व है। इस माह में पितरों को मुक्ति दिलाने और उन्हें ऊर्जा देने के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म किया जाता है। पितृ पक्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में आता है। मान्यता है कि इस पक्ष में पूर्वज किसी भी रूप में घर पर आ सकते हैं। इसलिए इस एक पखवाड़े (पितृ पक्ष) में किसी भी जीव का अपमान नहीं करना चाहिए। बल्कि अपने द्वार पर आने वाले प्रत्येक प्राणी को भोजन देकर उसका सम्मान करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में पितृ दोष बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसलिए पितरों को मनाने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान कोई भी नया काम शुरू नहीं किया जाता है। यह पक्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से प्रारंभ होकर अमावस्या तक चलता है। आश्विन मास 2025:Ashwin month 2025 इस वर्ष आश्विन मास की गणना 8 सितंबर से 7 अक्टूबर 2025 तक है। आश्विन मास का महत्व:Importance of Ashwin month जिस तरह सावन को भगवान शिव का महीना माना जाता है, भाद्रपद को भगवान कृष्ण का महीना माना जाता है, उसी तरह आश्विन महीने को देवी दुर्गा का महीना कहा जाता है। भारत में हर साल चार नवरात्र मनाए जाते हैं, लेकिन आम तौर पर लोग चैत्र और शारदीय नवरात्र को साल में सबसे ज्यादा मानते हैं। शारदीय नवरात्रि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में शुरू होती है और विजयादशमी पर समाप्त होती है। नवरात्रि के दौरान भक्त 9 दिनों तक व्रत रखते हैं और विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा करते हैं। What to do in the month of Ashwin :आश्विन माह में क्या करें? आश्विन माह में पितरों का श्राद्ध और तर्पण जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से जातक को पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।इसके अलावा शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें। रोजाना दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।शारदीय नवरात्र व्रत करें।स्नान, दान-पुण्य का अधिक महत्व है।गरीब लोगों में अन्न, वस्त्र और धन का दान करें। आश्विन माह करें ये उपाय:Do these remedies in the month of Ashwin अगर आप पितृ दोष का सामना कर रहे हैं, तो पितृ पक्ष में पितरों की पूजा करें। साथ ही माता-पिता की सेवा और सम्मान करें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

Ashwin Maas 2025 Date: आश्विन मास का उत्सव  Read More »

Bhai Dooj 2025

Bhai Dooj 2025 Date And Time: भाई दूज कब है? जानें शुभ मुहूर्त, तिलक विधि और महत्व

Bhai Dooj 2025: हिंदू धर्म में भाई दूज का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का अंतिम दिन होता है, जिसे भैया दूज, भाऊ बीज, भाई द्वितीया, भात्र द्वितीया, या भतरु द्वितीया भी कहा जाता है। इस पावन दिन पर बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करती हैं। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है, और यह दिवाली पूजा के दो दिन बाद आता है। भाई दूज 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त (Bhai Dooj 2025 Shubh Muhurat) द्रिक पंचांग और अन्य स्रोतों के अनुसार, साल 2025 में Bhai Dooj 2025 भाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। तिलक करने के लिए इस दिन एक विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा: विवरण (Detail) समय (Time) द्वितीया तिथि प्रारंभ 22 अक्टूबर 2025, रात 08 बजकर 16 मिनट पर द्वितीया तिथि समाप्त 23 अक्टूबर 2025, रात 10 बजकर 46 मिनट पर भाई दूज पर्व की तिथि 23 अक्टूबर 2025 तिलक का शुभ समय दोपहर 01 बजकर 13 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक तिलक की कुल अवधि 2 घंटे 15 मिनट बहनें इस शुभ समय में अपने भाइयों का तिलक कर सकती हैं। भाई दूज पूजा और तिलक विधि (Bhai Dooj 2025 Tilak Vidhi) भाई दूज पर तिलक की परंपरा विशेष महत्व रखती है। तिलक की सही विधि इस प्रकार है: 1. थाली तैयार करें: सबसे पहले पूजा की थाली तैयार करें। थाली में एक दीपक, रोली, अक्षत, हल्दी, मिठाई, सुपारी, सूखा नारियल, और मौली धागा आदि चीजें रखें। 2. दिशा: अपने भाई का मुख उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर करवाएं। यह दिशा शुभ मानी जाती है। 3. तिलक: बहनें अपने भाई के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक लगाएं। 4. आरती और मिष्ठान: तिलक लगाने के बाद, बहनें भाई की आरती उतारें और उन्हें मिठाई खिलाएं। 5. उपहार और वचन: इसके बाद, भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं और उनकी सदैव रक्षा करने का वचन देते हैं। भाई दूज का महत्व: यम द्वितीया की कथा (Bhai Dooj 2025 Significance and Katha) Bhai Dooj 2025 भाई दूज केवल भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार नहीं है, बल्कि यह पौराणिक मान्यताओं से भी जुड़ा है। इस पर्व का महत्व मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन देवी यमुना से जुड़ा है। पौराणिक कथा: कार्तिक माह की द्वितीया तिथि पर यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने के लिए गए थे। यमुना ने अत्यंत प्रेमपूर्वक उनका तिलक किया, आरती उतारी और उन्हें भोजन कराया। बहन के प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना को वरदान दिया। उन्होंने वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु (premature death) का भय नहीं होगा। इसी पौराणिक कथा और घटना की वजह से इस पर्व को ‘यम द्वितीया’ के नाम से भी जाना जाता है। कथा यह भी बताती है कि इस दिन यमराज एवं यमुना के मिलन की स्मृति में यमुना-स्नान का भी विशेष महत्व होता है क्योंकि यमुना ने यमराज का आदर-सत्कार किया था। भाई दूज का महत्व (Bhai Dooj 2025 Katha) भाई दूज Bhai Dooj 2025 का पर्व यमराज और उनकी बहन देवी यमुना से जुड़ा है। कथा के अनुसार, कार्तिक माह की द्वितीया तिथि पर यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने के लिए गए। यमुना ने उनका तिलक कर आरती उतारी और उन्हें भोजन कराया। यमुना के प्रेम से खुश होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा। इसी वजह से इस पर्व को ‘यम द्वितीया’ के नाम से भी जाना जाता है। Diwali 2025 Mantra: दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप, धन की समस्या होगी दूर

Bhai Dooj 2025 Date And Time: भाई दूज कब है? जानें शुभ मुहूर्त, तिलक विधि और महत्व Read More »

Meerabai Jayanti

Meerabai Jayanti 2025 Date: मीरा बाई जयंती – 2025 में मीराबाई की जयंती

Meerabai Jayanti 2025:शरद पूर्णिमा के दिन को मीराबाई की जयंती के रूप में मनाया जाता है। मीरा बाई के जीवन से जुड़ी से कई बातें आज भी एक रहस्य मानी जाती है। उनकी मृत्यु भी भगवान की मूर्ति में हुई। मीरा बाई को भगवान कृष्ण का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है। मीरा बाई ने जीवन भर भगवान कृष्ण की भक्ति की थी। मीराबाई जोधपुर, राजस्थान के मेड़वा राजकुल की राजकुमारी थीं। Meerabai Jayanti मीराबाई मेड़ता महाराज के छोटे भाई रतन सिंह की एकमात्र संतान थीं। मीरा जब केवल दो वर्ष की थीं, उनकी माता की मृत्यु हो गई। इसलिए इनके दादा राव दूदा उन्हें मेड़ता ले आए और अपनी देख-रेख में उनका पालन-पोषण किया। मीराबाई का जन्म 1498 के लगभग हुआ था। मीरा बाई को भगवान कृष्ण का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है। Meerabai Jayanti मीरा बाई ने जीवन भर भगवान कृष्ण की भक्ति की और कहा जाता है कि उनकी मृत्यु भी भगवान की मूर्ति में हुई। मीरा बाई की जयंती पर कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं हैं, लेकिन हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन को मीराबाई की जयंती के रूप में मनाया जाता है। मीरा बाई के जीवन से जुड़ी कई बातें आज भी एक रहस्य मानी जाती हैं। गीताप्रेस गोरखपुर की भक्त-चरितंका नामक पुस्तक के अनुसार, मीरा बाई के जीवन और मृत्यु से जुड़ी कुछ बातें बताई गई हैं। मीरा बाई जयंती 2025 तिथि:Meerabai Jayanti 2025 हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, शरद पूर्णिमा दिवस को मीराबाई की जयंती के रूप में मनाया जाता है। साल 2025 में मीरा बाई जयंती मंगलवार, 7 अक्टूबर, 2025 को पड़ रही है। पूर्णिमा तिथि शुरू – 6 अक्टूबर 2025, दोपहर 12:23 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त – 7 अक्टूबर 2025, सुबह 9:16 बजे तुलसीदास के कहने पर प्रभु श्री राम की भक्ति:Devotion to Lord Shri Ram on the advice of Tulsidas इतिहास में किसी स्थान पर, यह पाया जाता है कि मीरा बाई ने भी तुलसीदास को गुरु बनाया और भक्ति की। कृष्ण भक्त मीरा ने राम भजन भी लिखा है, हालांकि इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन कुछ इतिहासकारों का मानना ​​है कि पत्रों के माध्यम से मीराबाई और तुलसीदास के बीच एक संवाद था। ऐसा माना जाता है कि मीराबाई ने तुलसीदास जी को एक पत्र लिखा था कि उनके परिवार के सदस्य उन्हें कृष्ण की भक्ति नहीं करने देते। श्रीकृष्ण को पाने के लिए, Meerabai Jayanti मीराबाई ने अपने गुरु तुलसीदास से एक उपाय पूछा। तुलसी दास के कहने पर, Meerabai Jayanti मीरा ने कृष्ण के साथ भक्ति के भजन लिखे। जिसमें सबसे प्रसिद्ध भजन है “पायो जी मैने राम रमन धन पायो” भगवान कृष्ण बचपन से ही भक्त थे:Lord Krishna was a devotee since childhood जोधपुर की राठौड़ रतन सिंह की इकलौती बेटी मीरा बाई बचपन से ही कृष्ण-भक्ति में डूबी थीं। कृष्ण की छवि मीराबाई के बालमन से तय हुई थी, इसलिए युवावस्था से लेकर मृत्यु तक उन्होंने कृष्ण को अपना सब कुछ माना। बचपन की एक घटना के कारण उनका कृष्ण प्रेम अपने चरम पर पहुंच गया। बचपन में एक दिन, उनके पड़ोस में एक अमीर व्यक्ति के पास एक बारात आई। सभी महिलाएं छत पर खड़ी होकर बारात देख रही थीं। बारात देखने मीराबाई भी छत पर आईं। बारात को देखकर, मीरा ने अपनी माँ से पूछा कि मेरी दुल्हन कौन है, जिस पर मीरा बाई की माँ ने उपहास में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति की ओर इशारा किया और कहा कि यह तुम्हारी दुल्हन है, यह बात मीराबाई के बालमन में एक गाँठ की तरह है। और कृष्ण को अपना पति मानने लगी। भोजराज के साथ विवाह:marriage with bhojraj मीराबाई का परिवार शादी के योग्य होने पर उससे शादी करना चाहता था, लेकिन Meerabai Jayanti मीराबाई श्रीकृष्ण को अपना पति मानते हुए किसी और से शादी नहीं करना चाहती थी। मीराबाई की इच्छा के विरुद्ध जाकर उसकी शादी मेवाड़ के राजकुमार भोजराज से हुई थी। मीरा की कृष्ण भक्ति:Meera’s devotion to Krishna अपने पति की मृत्यु के बाद, मीरा की भक्ति दिन-ब-दिन बढ़ती गई। मीरा मंदिरों में जाती थीं और श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने घंटों नृत्य करती थीं। मीराबाई की कृष्ण भक्ति उनके पति के परिवार के अनुकूल नहीं थी। उसके परिवार ने भी Meerabai Jayanti मीरा को कई बार जहर देकर मारने की कोशिश की। लेकिन श्री कृष्ण की कृपा से मीराबाई को कुछ नहीं हुआ। मीराबाई का अंत श्री कृष्ण में हो गया:Mirabai ended up in Shri Krishna ऐसा कहा जाता है कि जीवन भर Meerabai Jayanti मीराबाई की भक्ति के कारण श्री कृष्ण की भक्ति करते हुए उनकी मृत्यु हो गई। मान्यताओं के अनुसार, वर्ष 1547 में, द्वारका में, कृष्ण की पूजा करते हुए, उन्होंने श्री कृष्ण की मूर्ति का दर्शन किया। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मीरा वृंदावन की गोपी थीं:According to mythology, Meera was the Gopi of Vrindavan. ऐसा माना जाता है कि मीरा अपने पूर्व जन्म में वृंदावन की एक गोपी थीं और उन दिनों वह राधा की मित्र थीं। वह अपने दिल में भगवान कृष्ण से प्यार करती थी। गोपा से विवाह करने के बाद भी, Meerabai Jayanti श्री कृष्ण से उनका लगाव कम नहीं हुआ और उन्होंने कृष्ण से मिलने की तड़प में अपनी जान दे दी। बाद में उसी गोपी का जन्म मीरा के रूप में हुआ। Kumar Purnima 2025 Date: कुमार पूर्णिमा 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Meerabai Jayanti 2025 Date: मीरा बाई जयंती – 2025 में मीराबाई की जयंती Read More »

Diwali 2025 Mantra

Diwali 2025 Mantra: दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप, धन की समस्या होगी दूर

Diwali 2025 Mantra: ज्योतिषियों की मानें तो दीवाली (Diwali 2025) पर दुर्लभ शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही प्रीति योग का भी संयोग बन रहा है। इन योग में धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। Diwali 2025 Mantra इसके अलावा सुख और सौभाग्य में अपार वृद्धि होगी। साधक दीवाली के अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। Diwali 2025 Mantra: दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप मां लक्ष्मी मंत्र:Maa Lakshmi Mantra 1. ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥ 2. ॐ ऐं श्रीं महालक्ष्म्यै कमल धारिण्यै गरूड़ वाहिन्यै श्रीं ऐं नमः 3. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ । 4. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्री ॐ। 5. ॐ ह्री श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा । 6. ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ ।। 7. ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥ शुक्र देव मंत्र:Shukra Dev Mantra 1. ऊँ अन्नात्परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत क्षत्रं पय: सेमं प्रजापति: । 2. ऊँ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम ।। 3. ॐ भृगुराजाय विद्महे दिव्य देहाय धीमहि तन्नो शुक्र प्रचोदयात् ।। 4. ॐ नमो अर्हते भगवते श्रीमते पुष्‍पदंत तीर्थंकराय। अजितयक्ष महाकालियक्षी सहिताय ॐ आं क्रों ह्रीं ह्र:।। 5. ऊँ शुं शुक्राय नम: कुबेर मंत्र:kuber mantra 1. ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये। धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥ 2. ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥ धनदा लक्ष्मी स्तोत्र (Dhanadalakshmi Stotram) ॥ धनदा उवाच ॥ देवी देवमुपागम्य नीलकण्ठं मम प्रियम्। कृपया पार्वती प्राह शंकरं करुणाकरम्॥1॥ ॥ देव्युवाच ॥ ब्रूहि वल्लभ साधूनां दरिद्राणां कुटुम्बिनाम्। दरिद्र दलनोपायमंजसैव धनप्रदम्॥ ॥ शिव उवाच ॥ पूजयन् पार्वतीवाक्यमिदमाह महेश्वरः। उचितं जगदम्बासि तव भूतानुकम्पया॥ स सीतं सानुजं रामं सांजनेयं सहानुगम्। प्रणम्य परमानन्दं वक्ष्येऽहं स्तोत्रमुत्तमम्॥ धनदं श्रद्धानानां सद्यः सुलभकारकम्। योगक्षेमकरं सत्यं सत्यमेव वचो मम॥ पठंतः पाठयंतोऽपि ब्रह्मणैरास्तिकोत्तमैः। धनलाभो भवेदाशु नाशमेति दरिद्रता॥ भूभवांशभवां भूत्यै भक्तिकल्पलतां शुभाम्। प्रार्थयत्तां यथाकामं कामधेनुस्वरूपिणीम्॥ धनदे धनदे देवि दानशीले दयाकरे। त्वं प्रसीद महेशानि! यदर्थं प्रार्थयाम्यहम्॥ धराऽमरप्रिये पुण्ये धन्ये धनदपूजिते। सुधनं र्धामिके देहि यजमानाय सत्वरम्॥ रम्ये रुद्रप्रिये रूपे रामरूपे रतिप्रिये। शिखीसखमनोमूर्त्ते प्रसीद प्रणते मयि॥ आरक्त-चरणाम्भोजे सिद्धि-सर्वार्थदायिके। दिव्याम्बरधरे दिव्ये दिव्यमाल्यानुशोभिते॥ समस्तगुणसम्पन्ने सर्वलक्षणलक्षिते। शरच्चन्द्रमुखे नीले नील नीरज लोचने॥ चंचरीक चमू चारु श्रीहार कुटिलालके। मत्ते भगवती मातः कलकण्ठरवामृते॥ हासाऽवलोकनैर्दिव्यैर्भक्तचिन्तापहारिके। रूप लावण्य तारूण्य कारूण्य गुणभाजने॥ क्वणत्कंकणमंजीरे लसल्लीलाकराम्बुजे। रुद्रप्रकाशिते तत्त्वे धर्माधरे धरालये॥ प्रयच्छ यजमानाय धनं धर्मेकसाधनम्। मातस्त्वं मेऽविलम्बेन दिशस्व जगदम्बिके॥ कृपया करुरागारे प्रार्थितं कुरु मे शुभे। वसुधे वसुधारूपे वसु वासव वन्दिते॥ धनदे यजमानाय वरदे वरदा भव। ब्रह्मण्यैर्ब्राह्मणैः पूज्ये पार्वतीशिवशंकरे॥ स्तोत्रं दरिद्रताव्याधिशमनं सुधनप्रदम्। श्रीकरे शंकरे श्रीदे प्रसीद मयिकिंकरे॥ पार्वतीशप्रसादेन सुरेश किंकरेरितम्। श्रद्धया ये पठिष्यन्ति पाठयिष्यन्ति भक्तितः॥ सहस्रमयुतं लक्षं धनलाभो भवेद् ध्रुवम् धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च। भवन्तु त्वत्प्रसादान्मे धन-धान्यादिसम्पदः॥

Diwali 2025 Mantra: दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप, धन की समस्या होगी दूर Read More »

nAmAvali

Laxmi ganesh mantra: लक्ष्मी-गणेश मंत्र

1. लक्ष्मी विनायक मन्त्र ॐ श्री गं सौम्याय गणपतये वरवरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।। Laxmi ganesh mantra: इस लक्ष्मी विनायक मंत्र का जाप रोजगार प्राप्ति और आर्थिक वृद्धि के लिए किया जाता है। इस मंत्र के ऋषि अंतर्यामी, छंद गायत्री, लक्ष्मी विनायक देवता हैं, श्रीं बीज और स्वाहा शक्ति है। भगवान श्री गणेश व मां लक्ष्मी के इस मंत्र में ॐ, श्रीं, गं बीजमंत्र हैं जो परमपिता परमात्मा, मां लक्ष्मी, और भगवान श्री गणेश के बीज मंत्र हैं। इस मंत्र का अर्थ है Laxmi ganesh mantra मां लक्ष्मी व विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की कृपा और आशीर्वाद हमें हर जन्म में मिलता रहे। इनके आशीर्वाद से हम एक स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन व्यतीत करें। यें हमें सौभाग्य प्रदान कर हमारी हर बाधा को दूर करें। 2. लक्ष्मी गणेश ध्यान मन्त्र:Laxmi ganesh mantra दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्। धृताब्जयालिङ्गितमाब्धि पुत्र्या-लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥ यह मां लक्ष्मी व भगवान श्री गणेश का ध्यान मंत्र है। इसमें एक दांत वाले, अभयमुद्रा वाले, चक्र तथा वरमुद्रा वाले, जिन्होंने स्वर्ण घट रखे हुए हैं, जो त्रिनेत्र हैं, जिनका वर्ण रक्त के समान है, रक्तवर्ण, लक्ष्मीजी के साथ श्री लक्ष्मी विनायक का ध्यान किया जाता है। 3. ऋणहर्ता गणपति मन्त्र ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्॥ Laxmi ganesh mantra: यदि व्यक्ति पर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा हो या कोई लंबे समय से कर्ज चुकाने के प्रयास करने के बावजूद भी उसे चुकाने में सक्षम न हो पा रहा हो तो ऐसे में भगवान श्री गणेश के इस ऋणहर्ता गणपति मंत्र का विधिपूर्वक जाप करने से साधक को लाभ पंहुचता है। Laxmi ganesh mantra अपने व्यवसाय में विस्तार एवं विकास हेतु भी यह मंत्र लाभकारी होता है साथ ही यह आपके जीवन में बाधक बनी नकारात्मक उर्जा को भी सकारात्मक बनाने में काफी कारगर है। इस मंत्र के ऋषि सदा-शिव हैं व छंद अनुष्टुप है, इसके देवता श्री ऋण-हर्ता गणपति हैं। 

Laxmi ganesh mantra: लक्ष्मी-गणेश मंत्र Read More »