हिन्दू धर्म के पौराणिक काल के 7 रहस्यमयी लोग
भारत चमत्कारों और रहस्यों से भरा देश है। भारत को देवभूमि कहे जाने के कई कारणों में से एक कारण यह भी है कि यहां का दर्शन, धर्म और अध्यात्म सत्य सनातन है। इसके कारण ही दुनिया के अन्य धर्मों की उत्पत्ति हुई। ऋग्वेद दुनिया का प्रथम ऐसा धर्म ग्रंथ है जिसमें दर्शन, अध्यात्म, विज्ञान, ज्योतिष, गणित, आयुर्वेद, कृषि, मौसम, समाज, राजनीति आदि अनेक विषयों की गंभीर जानकारी सम्मलित है। भारत की सीमा हिमालय के कैलाश पर्वत से लेकर श्रीलंका तक और हिन्दुकुश की पहाड़ी से लेकर अरुणाचल की पहाड़ियों तक फैली है। नीचे अरुणाचल की पहाड़ियों से लेकर बर्मा, थाईलैंड, इंडोनेशिया और मलेशिया आदि तक फैली है। इसी भारत में कालांतर में पहले जनपद हुआ करते थे अब राष्ट्र और भिन्न भिन्न धर्मों में यह क्षेत्र बंट गया है। यह संपूर्ण क्षेत्र रहस्य, रोमांच, प्राचीन इतिहास और अध्यात्मिक ज्ञान से भरा हुआ है। आओ जानते हैं भारत के ऐसे 10 रहस्यमयी व्यक्तियों के बारे में जिनमें से कुछ के बारे में आप शायद ही जानते होंगे। ‘अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः॥ सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्। जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।’- पद्म पुराण (51/6-7) हम यह नहीं बताने वाले हैं:- हम आपको हनुमानजी, अश्वत्थामा, अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम और ऋषि मार्कण्डेय के बारे में बताने वाले नहीं है, जोकि आज भी जीवित हैं। हम जो ऐसे रहस्यमयी लोगों के बारे में बताने वाले हैं जिन्होंने विश्व की कई सभ्यताओं को प्रभावित किया है। जाम्बवन्त, जाम्बवंत, जामवंत या जाम्बवन धरती पर जाम्बिया, जिम्बाब्वे, जामवन, जामुन, जाम्बेजी नदी आदि जाम्बवंतजी से मिलते जुलते कई नाम मिल जाएंगे। जाम्बवंतजी सतयुग में जन्मे और उनकी चर्चा रामायण काल के बाद द्वापाल काल में भी होती है। जाम्बवंतजी अग्नि देव और गंधर्व कन्या के पुत्र थे। जामवन्त की माता एक गंधर्व कन्या थी। जब पिता देव और माता गंधर्व थीं तो वे कैसे रीछमानव हो सकते हैं? प्राचीन काल में इंद्र पुत्र, सूर्य पुत्र, चंद्र पुत्र, पवन पुत्र, वरुण पुत्र, अग्नि आदि देवताओं के पुत्रों का अधिक वर्णन मिलता है। जाम्बवन्तजी का जन्म सतयुग में हुआ था। जाम्बवन्तजी रामायण काल में थे। उन्होंने ही हनुमानजी को उनकी खोई हुई शक्ति का स्मरण कराया था। आश्चर्य की वे लगभग 2500 वर्ष बाद बाद हुए महाभारत के काल में भी मौजूद थे जबकि वे अपनी पुत्री जाम्बवंति का विवाह भगवान श्रीकृष्ण से करते हैं। महाभारत में जाम्बवन्त, भगवान श्रीकृष्ण के साथ युद्ध करते हैं तथा यह पता पड़ने पर की वो एक विष्णु अवतार है, अपनी बेटी जामवंती का विवाह श्रीकृष्ण के साथ कर देते हैं। जाम्बवन्तजी को रहस्यमयी व्यक्ति इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह सभी जानते हैं कि वे एक रीछ मानव थे। अब यह शोध का विषय हो सकता है कि वे मानव जैसे रीछ थे या कि रीछ जैसे मानव। वह कैसे इतने वर्षों तक जीवित रहे और महाभारत काल में उन्होंने उनकी पुत्री जामवंती कैसी थी? क्या वह भी रीछ मानव थी? एक दूसरी मान्यता अनुसार भगवान ब्रह्मा ने एक ऐसा रीछ मानव बनाया था जो दो पैरों से चल सकता था और जो मानवों से संवाद कर सकता था। पुराणों अनुसार वानर और मानवों की तुलना में अधिक विकसित रीछ जनजाति का उल्लेख मिलता है। वानर और किंपुरुष के बीच की यह जनजाति अधिक विकसित थी। हालांकि इस संबंध में अधिक शोध किए जाने की आवश्यकता है। गरुड़ : भगवान विष्णु के वाहन के रूप में गरुढ़ की प्रसिद्धि है। कहते हैं कि प्राचीनकाल में बहुत विशालकाय पक्षी हुआ करते थे। गरुड़ इतना विशालकाय पक्षी था कि वह अपनी चोंच में हाथी तक को दबा कर उड़ जाता था। इसी से अंदाज लगाया जा सकता है कि वह कितना विशालकाय रहा होगा। इनके नाम से एक अलग पुराण भी है जिसे गरुड़ पुराण कहते हैं। इस पुराण को तब पढ़ा जाता है जब किसी के घर में किसी की मृत्यु हो गई हो। प्रत्येक घरों में गरुढ़ घंटी होती है। माता के मंदिर के द्वारा पर एक ओर गरुड़ तो दूसरी ओर हनुमानजी की मूर्ति प्रतिष्ठापित होती है। गरुड़ के बारे में पुराणों में अनेक कथाएं मिलती है। रामायण में तो गरुड़ का सबसे महत्वपूर्ण पार्ट है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु की सवारी और भगवान राम को मेघनाथ के नागपाश से मुक्ति दिलाने वाले गरुड़ के बारे में कहा जाता है कि यह सौ वर्ष तक जीने की क्षमता रखता है। काकभुशुंडी नामक एक कौए ने गरुड़ को श्रीराम कथा सुनाई थी। लेकिन आज कल गरुड़ के अस्तित्व पर संकट गहरा रहा है। जटायु और संपाति गरुढ़ कुल के ही पक्षी थे। दक्ष प्रजापति की विनिता या विनता नामक कन्या का विवाह कश्यप ऋषि के साथ हुआ। कश्यप ऋषि से विनिता प्रसव के दौरान दो अंडे दिए। एक से अरुण का और दूसरे गरुढ़ का जन्म हुआ। अरुण तो सूर्य के रथ के सारथी बन गए तो गरुड़ ने भगवान विष्णु का वाहन होना स्वीकार किया। पक्षियों में गरुड़ को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। यह समझदार और बुद्धिमान होने के साथ-साथ तेज गति से उड़ने की क्षमता रखता है। गिद्ध और गरुड़ में फर्क होता है। संपूर्ण भारत में गरुड़ का ज्यादा प्रचार और प्रसार किसलिए है यह जानना जरूरी है। गरुड़ भारत का धार्मिक और अमेरिका का राष्ट्रीय पक्षी है। भारत के इतिहास में स्वर्ण युग के रूप में जाना जाने वाले गुप्त शासकों का प्रतीक चिन्ह गरुड़ ही था। कर्नाटक के होयसल शासकों का भी प्रतीक गरुड़ था। गरुड़ इंडोनेशिया, थाईलैंड और मंगोलिया आदि में भी सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में लोकप्रिय है। इंडोनेसिया का राष्ट्रिय प्रतीक गरुड़ है। वहां की राष्ट्रिय एयरलाइन्स का नाम भी गरुड़ है। इंडोनेशिया की सेनाएं संयुक्त राष्ट्र मिशन पर गरुड़ नाम से जाती है। इंडोनेशिया पहले एक हिन्दू राष्ट्र ही था। थाईलैंड का शाही परिवार भी प्रतीक के रूप में गरुड़ का प्रयोग करता है। थाईलैंड के कई बौद्ध मंदिर में गरुड़ की मूर्तियाँ और चित्र बने हैं। मंगोलिया की राजधानी उलनबटोर का प्रतीक गरुड़ है। मयासुर : बहुत ही कम लोगों को मालूम होगा की रावण के ससुर यानी मंदोदरी के पिता मयासुर थे। रावण की पत्नी मंदोदरी की मां हेमा एक अप्सरा थी और उसके पिता एक असुर। रामायण के उत्तरकांड के अनुसार मयासुर, कश्यप
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