Amogh Kavach Lyrics:अमोघ कवच हिंदी,”संकट हरने वाला अमोघ कवच: पाठ विधि और चमत्कारी लाभ”

Amogh Kavach (अमोघ कवच हिंदी): आज में सर्व साधारण व समस्त आस्तिक भक्तो के लाभार्थ अति प्राचीन सिद्धीप्रद Amogh Kavach अमोघ शिव कवच प्रयोग दे रहा हूँ। Amogh Kavach इसके शुद्ध सत्य अनुष्ठान से भयंकर से भयंकर विपत्ति से छुटकारा मिल जाता है Amogh Kavach भक्तो की अनेक भयानक से भयानक विपत्तियों का निराकरण इस शिव कवच के अनुष्ठान से दिया है। इसके पाठ से निश्चित ही भगवान आशुतोष की कृपा होती है। विनियोग | Amogh Kavach – ॐ अस्य श्रीशिवकवचस्तोत्रमंत्रस्य ब्रह्मा ऋषि: अनुष्टप् छन्द:। श्रीसदाशिवरुद्रो देवता। ह्रीं शक्ति :। रं कीलकम्। श्रीं ह्री क्लीं बीजम्। श्रीसदाशिवप्रीत्यर्थे शिवकवचस्तोत्रजपे विनियोग:। कर न्यास ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ ह्रां सर्वशक्तिधाम्ने इशानात्मने अन्गुष्ठाभ्याम नम: ।ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ नं रिं नित्यतृप्तिधाम्ने तत्पुरुषातमने तर्जनीभ्याम नम:ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ मं रूं अनादिशक्तिधाम्ने अधोरात्मने मध्यमाभ्याम नम:।ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ शिं रैं स्वतंत्रशक्तिधाम्ने वामदेवात्मने अनामिकाभ्याम नम: ।ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ वां रौं अलुप्तशक्तिधाम्ने सद्योजातात्मने कनिष्ठिकाभ्याम नम: ।ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ यं र: अनादिशक्तिधाम्ने सर्वात्मने करतल करपृष्ठाभ्याम नम: । अंग न्यास  ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ ह्रां सर्वशक्तिधाम्ने इशानात्मने हृदयाय नम:।ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ नं रिं नित्यतृप्तिधाम्ने तत्पुरुषातमने शिरसे स्वाहा।ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ मं रूं अनादिशक्तिधाम्ने अधोरात्मने शिखायै वषट।ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ शिं रैं स्वतंत्रशक्तिधाम्ने वामदेवात्मने नेत्रत्रयाय वौषट।ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ वां रौं अलुप्तशक्तिधाम्ने सद्योजातात्मने कवचाय हुम।ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ यं र: अनादिशक्तिधाम्ने सर्वात्मने अस्त्राय फट। अथ दिग्बन्धन ॐ भूर्भुव: स्व: ध्यान कर्पुरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम ।सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ।। ऋषभ उवाच अथापरं सर्वपुराणगुह्यं निशे:षपापौघहरं पवित्रम् । जयप्रदं सर्वविपत्प्रमोचनं वक्ष्यामि शैवं कवचं हिताय ते ॥ 1॥ नमस्कृत्य महादेवं विश्वुव्यापिनमीश्वतरम्। वक्ष्ये शिवमयं वर्म सर्वरक्षाकरं नृणाम् ॥ 2॥ शुचौ देशे समासीनो यथावत्कल्पितासन: । जितेन्द्रियो जितप्राणश्चिंमतयेच्छिवमव्ययम् ॥ 3॥ ह्रत्पुंडरीक तरसन्निविष्टं स्वतेजसा व्याप्तनभोवकाशम् । अतींद्रियं सूक्ष्ममनंतताद्यंध्यायेत्परानंदमयं महेशम् ॥ 4॥ ध्यानावधूताखिलकर्मबन्धश्चयरं चितानन्दनिमग्नचेता: । षडक्षरन्याससमाहितात्मा शैवेन कुर्यात्कवचेन रक्षाम् ॥ 5॥ मां पातु देवोऽखिलदेवत्मा संसारकूपे पतितं गंभीरे तन्नाम । दिव्यं वरमंत्रमूलं धुनोतु मे सर्वमघं ह्रदिस्थम् ॥ 6॥ सर्वत्रमां रक्षतु विश्वामूर्तिर्ज्योतिर्मयानंदघनश्चियदात्मा । अणोरणीयानुरुशक्तिररेक: स ईश्व र: पातु भयादशेषात् ॥ 7॥ यो भूस्वरूपेण बिर्भीत विश्वंो पायात्स भूमेर्गिरिशोऽष्टमूर्ति: ॥ योऽपांस्वरूपेण नृणां करोति संजीवनं सोऽवतु मां जलेभ्य: ॥ 8॥ कल्पावसाने भुवनानि दग्ध्वा सर्वाणि यो नृत्यति भूरिलील: । स कालरुद्रोऽवतु मां दवाग्नेर्वात्यादिभीतेरखिलाच्च तापात् ॥ 9॥ प्रदीप्तविद्युत्कनकावभासो विद्यावराभीति कुठारपाणि: । चतुर्मुखस्तत्पुरुषस्त्रिनेत्र: प्राच्यां स्थितं रक्षतु मामजस्त्रम् ॥ 10॥ कुठारवेदांकुशपाशशूलकपालढक्काक्षगुणान् दधान: । चतुर्मुखोनीलरुचिस्त्रिनेत्र: पायादघोरो दिशि दक्षिणस्याम् ॥ 11॥ कुंदेंदुशंखस्फटिकावभासो वेदाक्षमाला वरदाभयांक: । त्र्यक्षश्चितुर्वक्र उरुप्रभाव: सद्योधिजातोऽवस्तु मां प्रतीच्याम् ॥ 12॥ वराक्षमालाभयटंकहस्त: सरोज किंजल्कसमानवर्ण: । त्रिलोचनश्चायरुचतुर्मुखो मां पायादुदीच्या दिशि वामदेव: ॥ 13॥ वेदाभ्येष्टांकुशपाश टंककपालढक्काक्षकशूलपाणि: ॥ सितद्युति: पंचमुखोऽवतान्मामीशान ऊर्ध्वं परमप्रकाश: ॥ 14॥ मूर्धानमव्यान्मम चंद्रमौलिर्भालं ममाव्यादथ भालनेत्र: । नेत्रे ममा व्याद्भगनेत्रहारी नासां सदा रक्षतु विश्व नाथ: ॥ 15॥ पायाच्छ्र ती मे श्रुतिगीतकीर्ति: कपोलमव्यात्सततं कपाली । वक्रं सदा रक्षतु पंचवक्रो जिह्वां सदा रक्षतु वेदजिह्व: ॥ 16॥ कंठं गिरीशोऽवतु नीलकण्ठ: पाणि: द्वयं पातु: पिनाकपाणि: । दोर्मूलमव्यान्मम धर्मवाहुर्वक्ष:स्थलं दक्षमखातकोऽव्यात् ॥ 17॥ मनोदरं पातु गिरींद्रधन्वा मध्यं ममाव्यान्मदनांतकारी । हेरंबतातो मम पातु नाभिं पायात्कटिं धूर्जटिरीश्व रो मे ॥ 18॥ ऊरुद्वयं पातु कुबेरमित्रो जानुद्वयं मे जगदीश्वतरोऽव्यात् । जंघायुगंपुंगवकेतुख्यातपादौ ममाव्यत्सुरवंद्यपाद: ॥ 19॥ महेश्वनर: पातु दिनादियामे मां मध्ययामेऽवतु वामदेव: ॥ त्रिलोचन: पातु तृतीययामे वृषध्वज: पातु दिनांत्ययामे ॥ 20॥ पायान्निशादौ शशिशेखरो मां गंगाधरो रक्षतु मां निशीथे । गौरी पति: पातु निशावसाने मृत्युंजयो रक्षतु सर्वकालम् ॥ 21॥ अन्त:स्थितं रक्षतु शंकरो मां स्थाणु: सदापातु बहि: स्थित माम् । तदंतरे पातु पति: पशूनां सदाशिवोरक्षतु मां समंतात् ॥ 22॥ तिष्ठतमव्याद्भुुवनैकनाथ: पायाद्व्रेजंतं प्रथमाधिनाथ: । वेदांतवेद्योऽवतु मां निषण्णं मामव्यय: पातु शिव: शयानम् ॥ 23॥ मार्गेषु मां रक्षतु नीलकंठ: शैलादिदुर्गेषु पुरत्रयारि: । अरण्यवासादिमहाप्रवासे पायान्मृगव्याध उदारशक्ति: ॥ 24॥ कल्पांतकोटोपपटुप्रकोप-स्फुटाट्टहासोच्चलितांडकोश: । घोरारिसेनर्णवदुर्निवारमहाभयाद्रक्षतु वीरभद्र: ॥ 25॥ पत्त्यश्वटमातंगघटावरूथसहस्रलक्षायुतकोटिभीषणम् । अक्षौहिणीनां शतमाततायिनां छिंद्यान्मृडोघोर कुठार धारया ॥26॥ निहंतु दस्यून्प्रलयानलार्चिर्ज्वलत्रिशूलं त्रिपुरांतकस्य । शार्दूल सिंहर्क्षवृकादिहिंस्रान्संत्रासयत्वीशधनु: पिनाक: ॥ 27॥ दु:स्वप्नदु:शकुनदुर्गतिदौर्मनस्यर्दुर्भिक्षदुर्व्यसनदु:सहदुर्यशांसि । उत्पाततापविषभीतिमसद्ग्रवहार्ति व्याधींश्च् नाशयतु मे जगतामधीश: ॥ 28॥ अथ कवच ॐ नमो भगवते सदाशिवाय सकलतत्त्वात्मकाय सर्वमंत्रस्वरूपाय सर्वयंत्राधिष्ठिताय सर्वतंत्रस्वरूपाय सर्वत्त्वविदूराय ब्रह्मरुद्रावतारिणे नीलकंठाय पार्वतीमनोहरप्रियाय सोमसूर्याग्निलोचनाय भस्मोद्धूसलितविग्रहाय महामणिमुकुटधारणाय माणिक्यभूषणाय सृष्टिस्थितिप्रलयकालरौद्रावताराय दक्षाध्वरध्वंसकाय महाकालभेदनाय मूलाधारैकनिलयाय तत्त्वातीताय गंगाधराय सर्वदेवाधिदेवाय षडाश्रयाय वेदांतसाराय त्रिवर्गसाधनायानंतकोटिब्रह्माण्डनायकायानंतवासुकितक्षककर्कोटकङ्खिकुलिक पद्ममहापद्मेत्यष्टमहानागकुलभूषणायप्रणवस्वरूपाय चिदाकाशाय आकाशदिक्स्वरूपायग्रहनक्षत्रमालिने सकलाय कलंकरहिताय सकललोकैकर्त्रे सकललोकैकभर्त्रे सकललोकैकसंहर्त्रे सकललोकैकगुरवे सकललोकैकसाक्षिणे सकलनिगमगुह्याय सकल वेदान्तपारगाय सकललोकैकवरप्रदाय सकलकोलोकैकशंकराय शशांकशेखराय शाश्वगतनिजावासाय निराभासाय निरामयाय निर्मलाय निर्लोभाय निर्मदाय निश्चिंेताय निरहंकाराय निरंकुशाय निष्कलंकाय निर्गुणाय निष्कामाय निरुपप्लवाय निरवद्याय निरंतराय निष्कारणाय निरंतकाय निष्प्रपंचाय नि:संगाय निर्द्वंद्वाय निराधाराय नीरागाय निष्क्रोधाय निर्मलाय निष्पापाय निर्भयाय निर्विकल्पाय निर्भेदाय निष्क्रियय निस्तुलाय नि:संशयाय निरंजनाय निरुपमविभवायनित्यशुद्धबुद्ध परिपूर्णसच्चिदानंदाद्वयाय परमशांतस्वरूपाय तेजोरूपाय तेजोमयाय जय जय रुद्रमहारौद्रभद्रावतार महाभैरव कालभैरव कल्पांतभैरव कपालमालाधर खट्वांेगखड्गचर्मपाशांकुशडमरुशूलचापबाणगदाशक्तिवभिंदिपालतोमरमुसलमुद्‌गरपाशपरिघ भुशुण्डीशतघ्नीचक्राद्यायुधभीषणकरसहस्रमुखदंष्ट्राकरालवदनविकटाट्टहासविस्फारितब्रह्मांडमंडल नागेंद्रकुंडल नागेंद्रहार नागेन्द्रवलय नागेंद्रचर्मधरमृयुंजय त्र्यंबकपुरांतक विश्विरूप विरूपाक्ष विश्वेलश्वर वृषभवाहन विषविभूषण विश्वदतोमुख सर्वतो रक्ष रक्ष मां ज्वल ज्वल महामृत्युमपमृत्युभयं नाशयनाशयचोरभयमुत्सादयोत्सादय विषसर्पभयं शमय शमय चोरान्मारय मारय ममशमनुच्चाट्योच्चाटयत्रिशूलेनविदारय कुठारेणभिंधिभिंभधि खड्‌गेन छिंधि छिंधि खट्वां गेन विपोथय विपोथय मुसलेन निष्पेषय निष्पेषय वाणै: संताडय संताडय रक्षांसि भीषय भीषयशेषभूतानि निद्रावय कूष्मांडवेतालमारीच ब्रह्मराक्षसगणान्‌संत्रासय संत्रासय ममाभय कुरु कुरु वित्रस्तं मामाश्वा सयाश्वाासय नरकमहाभयान्मामुद्धरसंजीवय संजीवयक्षुत्तृड्‌भ्यां मामाप्याय-आप्याय दु:खातुरं मामानन्दयानन्दयशिवकवचेन मामाच्छादयाच्छादयमृत्युंजय त्र्यंबक सदाशिव नमस्ते नमस्ते नमस्ते। ऋषभ उवाच इत्येतत्कवचं शैवं वरदं व्याह्रतं मया ॥ सर्वबाधाप्रशमनं रहस्यं सर्वदेहिनाम् ॥ 29॥ य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ क्षीणायुअ:प्राप्तमृत्युर्वा महारोगहतोऽपि वा ॥ सद्य: सुखमवाप्नोति दीर्घमायुश्चतविंदति ॥ 31॥ सर्वदारिद्र्य शमनं सौमंगल्यविवर्धनम् । यो धत्ते कवचं शैवं सदेवैरपि पूज्यते ॥ 32॥ महापातकसंघातैर्मुच्यते चोपपातकै: । देहांते मुक्तिंमाप्नोति शिववर्मानुभावत: ॥ 33॥ त्वमपि श्रद्धया वत्स शैवं कवचमुत्तमम् । धारयस्व मया दत्तं सद्य: श्रेयो ह्यवाप्स्यसि ॥ 34॥ सूत उवाच  इत्युक्त्वाऋषभो योगी तस्मै पार्थिवसूनवे । ददौ शंखं महारावं खड्गं चारिनिषूदनम् ॥ 35॥ पुनश्च भस्म संमत्र्य तदंगं परितोऽस्पृशत् । गजानां षट्सदहस्रस्य द्विगुणस्य बलं ददौ ॥ 36॥ भस्मप्रभावात्संप्राप्तबलैश्वर्यधृतिस्मृति: । स राजपुत्र: शुशुभे शरदर्क इव श्रिया ॥ 37॥ तमाह प्रांजलिं भूय: स योगी नृपनंदनम् । एष खड्गोश मया दत्तस्तपोमंत्रानुभावित: ॥ 38॥ शितधारमिमंखड्गं यस्मै दर्शयसे स्फुटम् । स सद्यो म्रियतेशत्रु: साक्षान्मृत्युरपि स्वयम् ॥ 39॥ अस्य शंखस्य निर्ह्लादं ये श्रृण्वंति तवाहिता: । ते मूर्च्छिता: पतिष्यंति न्यस्तशस्त्रा विचेतना: ॥ 40॥ खड्‌गशंखाविमौ दिव्यौ परसैन्य निवाशिनौ । आत्मसैन्यस्यपक्षाणां शौर्यतेजोविवर्धनो ॥ 41॥ एतयोश्च  प्रभावेण शैवेन कवचेन च । द्विषट्सौहस्त्रनागानां बलेन महतापि च ॥ 42॥ भस्मधारणसामर्थ्याच्छत्रुसैन्यं विजेष्यसि । प्राप्य सिंहासनं पित्र्यं गोप्तासि पृथिवीमिमाम् ॥ 43॥ इति भद्रायुषं सम्यगनुशास्य समातृकम् । ताभ्यां पूजित: सोऽथ योगी स्वैरगतिर्ययौ ॥ 44॥ अमोघ कवच हिंदी विशेषताएँ | Amogh Kavach In Hindi: अमोघ कवच हिंदी (Amogh Kavach) के साथ-साथ यदि शिव अमोघ कवच का पाठ किया जाए तो, अमोघ कवच स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है यह कवच शीघ्र ही फल देने लग जाता है। Amogh Kavach अपने शरीर की तथा अपने घर की सुरक्षा करने के लिए भैरव कवच का पाठ करना चाहिए। Amogh Kavach घर में सुख, शांति और समृधि बनाये रखने के लिए लक्ष्मी नारायण कवच का पाठ करना

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Apadunmoolana Durga Stotram Lyrics:आपदुन्मूलन दुर्गा स्तोत्रम् हिंदी

आपदुन्मूलन दुर्गा स्तोत्रम् हिंदी (Apadunmoolana Durga Stotram) माँ दुर्गा को समर्पित किया गया है। इसका पाठ नियमित रूप से करने से व्यक्ति के जीवन के सारे दुःख, पीड़ा व दर्द समाप्त हो जाते हैं और जिन जातकों के विवाहित जीवन में हो रही कठिनाईयों भी समाप्त हो जाती है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि, और खुशहाली का आगमन होने लगता है। इस पाठ को रोज करने से व्यापार और नौकरी में दिनों-दिन सफलता मिलने लगती है। Apadunmoolana Durga Stotram:आपदुद्धारक दुर्गा स्तोत्रम् (आपदुन्मूलन स्तोत्र) माता दुर्गा को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है, जो विशेष रूप से संकटों और बाधाओं को दूर करने के लिए पढ़ा जाता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में शांति, सुरक्षा, और देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। Apadunmoolana Durga Stotram:आपदुन्मूलन दुर्गा स्तोत्रम् का महत्व Apadunmoolana Durga Stotram vidhi:आपदुन्मूलन स्तोत्रम् का पाठ विधि कब करना चाहिए? कैसे करें? आपदुन्मूलन दुर्गा स्तोत्रम् हिंदी | Apadunmoolana Durga Stotram लक्ष्मीशे योगनिद्रां प्रभजति भुजगाधीशतल्पे सदर्पा- वुत्पन्नौ दानवौ तच्छ्रवणमलमयाङ्गौ मधुं कैटभं च ।दृष्ट्वा भीतस्य धातुः स्तुतिभिरभिनुतां आशु तौ नाशयन्तीं, दुर्गां देवीं प्रपद्ये शरणमहमशेषापदुन्मूलनाय ॥ १ ॥ युद्धे निर्जित्य दैत्यस्त्रिभुवनमखिलं यस्तदीय धिष्ण्ये- ष्वास्थाप्य स्वान् विधेयान् स्वयमगमदसौ शक्रतां विक्रमेण ।तं सामात्याप्तमित्रं महिषमभिनिहत्यास्यमूर्धाधिरूढां, दुर्गां देवीं प्रपद्ये शरणमहमशेषापदुन्मूलनाय ॥ २ ॥ विश्वोत्पत्तिप्रणाशस्थितिविहृतिपरे देवि घोरामरारि- त्रासात् त्रातुं कुलं नः पुनरपि च महासङ्कटेष्वीदृशेषु ।आविर्भूयाः पुरस्तादिति चरणनमत् सर्वगीर्वाणवर्गां, दुर्गां देवीं प्रपद्ये शरणमहमशेषापदुन्मूलनाय ॥ ३ ॥ हन्तुं शुंभं निशुंभं विबुधगणनुतां हेमडोलां हिमाद्रा- वारूढां व्यूढदर्पान् युधि निहतवतीं धूम्रदृक् चण्डमुण्डान् ।चामुण्डाख्यां दधानां उपशमितमहारक्तबीजोपसर्गां, दुर्गां देवीं प्रपद्ये शरणमहमशेषापदुन्मूलनाय ॥ ४ ॥ ब्रह्मेशस्कन्दनारायणकिटिनरसिंहेन्द्रशक्तीः स्वभृत्याः, कृत्वा हत्वा निशुंभं जितविबुधगणं त्रासिताशेषलोकम् ।एकीभूयाथ शुंभं रणशिरसि निहत्यास्थितां आत्तखड्गां, दुर्गां देवीं प्रपद्ये शरणमहमशेषापदुन्मूलनाय ॥ ५ ॥ उत्पन्ना नन्दजेति स्वयमवनितले शुंभमन्यं निशुंभम्, भ्रामर्याख्यारुणाख्या पुनरपि जननी दुर्गमाख्यं निहन्तुम् ।भीमा शाकंभरीति त्रुटितरिपुभटां रक्तदन्तेति जातां, दुर्गां देवीं प्रपद्ये शरणमहमशेषापदुन्मूलनाय ॥ ६ ॥ त्रैगुण्यानां गुणानां अनुसरणकलाकेलि नानावतारैः, त्रैलोक्यत्राणशीलां दनुजकुलवनीवह्निलीलां सलीलाम् ।देवीं सच्चिन्मयीं तां वितरितविनमत्सत्रिवर्गापवर्गां, दुर्गां देवीं प्रपद्ये शरणमहमशेषापदुन्मूलनाय ॥ ७ ॥ सिंहारूढां त्रिनेत्रां करतलविलसत् शंखचक्रासिरम्यां, भक्ताभीष्टप्रदात्रीं रिपुमथनकरीं सर्वलोकैकवन्द्याम् ।सर्वालङ्कारयुक्तां शशियुतमकुटां श्यामलाङ्गीं कृशाङ्गीं, दुर्गां देवीं प्रपद्ये शरणमहमशेषापदुन्मूलनाय ॥ ८ ॥ त्रायस्वस्वामिनीति त्रिभुवनजननि प्रार्थना त्वय्यपार्था, पाल्यन्तेऽभ्यर्थनायां भगवति शिशवः किन्न्वनन्याः जनन्या ।तत्तुभ्यं स्यान्नमस्येत्यवनतविबुधाह्लादिवीक्षाविसर्गां, दुर्गां देवीं प्रपद्ये शरणमहमशेषापदुन्मूलनाय ॥ ९ ॥ एतं सन्तः पठन्तु स्तवमखिलविपज्जालतूलानलाभं, हृन्मोहध्वान्तभानुप्रतिममखिलसङ्कल्पकल्पद्रुकल्पम् ।दौर्गं दौर्गत्यघोरातपतुहिनकरप्रख्यमंहोगजेन्द्र- श्रेणीपञ्चास्यदेश्यं विपुलभयदकालाहितार्क्ष्यप्रभावम्  ॥ १० ॥

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Angaraka Stotram Lyrics:श्री अंगारक स्तोत्रम् हिंदी,मंगल दोष निवारण के लिए: श्री अंगारक स्तोत्रम् का चमत्कारी पाठ

Angaraka Stotram:श्री अंगारक स्तोत्रम् हिंदी (Angaraka Stotram) एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है इसका नित्य पाठ करने से जातक की जन्मकुंडली में मंगल दोष या मांगलिक दोष भी दूर हो जाता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में दरिद्रता का नाश व कर्ज से भी छुटकारा मिलता है और धन समृधि का आगमन होने लगता है। अंगारक स्तोत्रम् का पाठ करने से जातक की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। Angaraka Stotram:श्री अंगारक स्तोत्रम् भगवान मंगलदेव (अंगारक) को समर्पित एक स्तोत्र है, जो उनकी कृपा प्राप्त करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए पढ़ा जाता है। मंगल ग्रह का हिंदू ज्योतिष में विशेष महत्व है, और यह स्तोत्र उन लोगों के लिए बहुत लाभकारी है जो मंगल दोष से प्रभावित हैं या जिनके जीवन में संघर्ष, रोग, या अन्य समस्याएं चल रही हैं। Angaraka Stotram:श्री अंगारक स्तोत्रम् का पाठ विधि Angaraka Stotram kab karna chahiye:कब करना चाहिए? Angaraka Stotram kese kare:कैसे करें? Angaraka Stotram Lyrics:श्री अंगारक स्तोत्रम् हिंदी अंगारकः शक्तिधरो लोहितांगो धरासुतः। कुमारो मंगलो भौमो महाकायो धनप्रदः ॥१॥ ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृत् रोगनाशनः। विद्युत्प्रभो व्रणकरः कामदो धनहृत् कुजः ॥२॥ सामगानप्रियो रक्तवस्त्रो रक्तायतेक्षणः। लोहितो रक्तवर्णश्च सर्वकर्मावबोधकः ॥३॥ रक्तमाल्यधरो हेमकुण्डली ग्रहनायकः। नामान्येतानि भौमस्य यः पठेत् सततं नरः॥४॥ ऋणं तस्य च दौर्भाग्यं दारिद्र्यं च विनश्यति। धनं प्राप्नोति विपुलं स्त्रियं चैव मनोरमाम् ॥५॥ वंशोद्योतकरं पुत्रं लभते नात्र संशयः, योऽर्चयेदह्नि भौमस्य मङ्गलं बहुपुष्पकैः। सर्वं नश्यति पीडा च तस्य ग्रहकृता ध्रुवम् ॥६॥

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Anadi Kalpeshwar Stotra Lyrics:अनादि कल्पेश्वर स्तोत्र हिंदी

Anadi Kalpeshwar Stotra:अनादि कल्पेश्वर स्तोत्र हिंदी (Anadi Kalpeshwar Stotra) एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, इसका नियमित रूप से पाठ करने से जातक को सभी प्रकार के डर, भय, रोग और तनाव से मुक्ति प्राप्त होने लगती है। अनादि कल्पेश्वर स्तोत्र का पाठ रोजाना करने से मनुष्य को सभी तीर्थों का फल भी शीघ्र ही प्राप्त होता हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद बना रहता है। Anadi Kalpeshwar Stotra:अनादि कल्पेश्वर स्तोत्र भगवान शिव की स्तुति में रचित एक पवित्र स्तोत्र है, जो उनके अनादि और सर्वशक्तिमान स्वरूप का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनके अनंत आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। इसका पाठ जीवन में शांति, समृद्धि, और संकटों से मुक्ति के लिए किया जाता है। Anadi Kalpeshwar Stotra:अनादि कल्पेश्वर स्तोत्र का महत्व कब और कैसे करें पाठ? कब करना चाहिए? कैसे करें? Anadi Kalpeshwar Stotra Lyrics:अनादि कल्पेश्वर स्तोत्र हिंदी कर्पूरगौरो भुजगेन्द्रहारो गङ्गाधरो लोकहितावहः सः । सर्वेश्र्वरो देववरोऽप्यघोरो योऽनादिकल्पेश्र्वर एव सोऽसौ ॥ १ ॥ कैलासवासी गिरिजाविलासी श्मशानवासी सुमनोनिवासी । काशीनिवासी विजयप्रकाशी योऽनादिकल्पेश्र्वर एव सोऽसौ ॥ २ ॥ त्रिशूलधारी भवदुःखहारी कन्दर्पवैरी रजनीशधारी । कपर्दधारी भजकानुसारी योऽनादिकल्पेश्र्वर एव सोऽसौ ॥ ३ ॥ लोकाधिनाथः प्रमथाधिनाथः कैवल्यनाथः श्रुतिशास्त्रनाथः । विद्यार्थनाथः पुरुषार्थनाथो योऽनादिकल्पेश्र्वर एव सोऽसौ ॥ ४ ॥ लिङ्गं परिच्छेत्तुमधोगतस्य नारायणश्र्चोपरि लोकनाथः । बभूवतुस्तावपि नो समर्थौ योऽनादिकल्पेश्र्वर एव सोऽसौ ॥ ५ ॥ यं रावणस्ताण्डवकौशलेन गीतेन चातोषयदस्य सोऽत्र । कृपाकटाक्षेण समृद्धिमाप योऽनादिकल्पेश्र्वर एव सोऽसौ ॥ ६ ॥ सकृच्च बाणोऽवनमय्यशीर्षं यस्याग्रतः सोप्यलभत्समृद्धिम् । देवेन्द्रसम्पत्त्यधिकां गरिष्ठां योऽनादिकल्पेश्र्वर एव सोऽसौ ॥ ७ ॥ गुणान्विमातुं न समर्थ एष वेषश्र्च जीवोऽपि विकुण्ठितोऽस्य । श्रुतिश्र्च नूनं चलितं बभाषे योऽनादिकल्पेश्र्वर एव सोऽसौ ॥ ८ ॥ अनादिकल्पेश उमेश एतत् स्तवाष्टकं यः पठति त्रिकालम् । स धौतपापोऽखिललोकवन्द्यं शैवं पदं यास्यति भक्तिमांश्र्चेत् ॥ ९ ॥ ॥ इति श्रीवासुदेवानन्दसरस्वतीकृतमनादिकल्पेश्वरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ Anadi Kalpeshwar Stotra:अनादि कल्पेश्वर स्तोत्र विशेषताऐ: Anadi Kalpeshwar Stotra:अनादि कल्पेश्वर स्तोत्र के साथ-साथ यदि श्री नारायण अष्टकम का पाठ किया जाए तो, अनादि कल्पेश्वर स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है, यह स्तोत्र शीघ्र ही फल देने लग जाता है। शिव अमोघ कवच का पाठ करने से मनोवांछित कामना पूर्ण होती है। मन की शांति और जीवन में से सभी बुराईयों को दूर रखने के लिए लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। स्तोत्र का महत्व समझने के लिए स्तोत्र शक्ति पुस्तक को पढना चाहिए। सूर्य ग्रह के अशुभ फल से बचने के लिए सूर्य मंत्र  सबसे अच्छा उपाय है।

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Agney Stotra Lyrics:आग्नेय स्तोत्र हिंदी,महत्व और इसके पाठ से लाभ

Agney Stotra:आग्नेय स्तोत्र विशेषताऐ आग्नेय स्तोत्र (Agney Stotra) के साथ-साथ यदि दुर्गा कवच और चंडी कवच का पाठ किया जाए तो, आग्नेय स्तोत्र का बहुत लाभ मिलता है। यह कवच शीघ्र ही फल देने लग जाता है। नारायणास्त्र कवच का पाठ करने से मनोवांछित कामना पूर्ण होती है। अगर आपका मन पढाई में नही लग पा रहा है, तो आपको सरस्वती सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। जीवन में शांति प्राप्त करने के लिए नृसिंह विजय कवच का पाठ करना चाहिए। संतान या पुत्र प्राप्ति के लिए गोपाल कवच का पाठ करना चाहिए। Agney Stotra:आग्नेय स्तोत्र भगवान अग्नि को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है, जो विशेष रूप से अग्नि देवता की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इसे जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य, और शुद्धि के लिए पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र वैदिक और पौराणिक ग्रंथों से लिया गया है और अग्नि तत्व की उपासना में सहायक है। Agney Stotra ke Labh:लाभ: कैसे करें? Agney Stotra:आग्नेय स्तोत्र Agney Stotra:आग्नेय स्तोत्र हिंदी (Agney Stotra) एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, इसका नित्य पाठ करने से सभी प्रकार की तंत्र-मन्त्र-यंत्र और ग्रह पीड़ा से रक्षा होती है। इस आग्नेय स्तोत्र का पाठ बोलकर यानि वाचिक, उच्च स्वर में करना चाहियें, जिससें आपको इस स्तोत्र का शीघ्र लाभ मिलें। अधुना गिरिजानन्द आञ्जनेयास्त्रमुत्तमम् । समन्त्रं सप्रयोगं च वद मे परमेश्वर ।।१।। ।।ईश्वर उवाच।। ब्रह्मास्त्रं स्तम्भकाधारि महाबलपराक्रम् । मन्त्रोद्धारमहं वक्ष्ये श्रृणु त्वं परमेश्वरि ।।२।। आदौ प्रणवमुच्चार्य मायामन्मथ वाग्भवम् । शक्तिवाराहबीजं व वायुबीजमनन्तरम् ।।३।। विषयं द्वितीयं पश्चाद्वायु-बीजमनन्तरम् । ग्रसयुग्मं पुनर्वायुबीजं चोच्चार्य पार्वति ।।४।। स्फुर-युग्मं वायु-बीजं प्रस्फुरद्वितीयं पुनः । वायुबीजं ततोच्चार्य हुं फट् स्वाहा समन्वितम् ।।५।। आञ्जनेयास्त्रमनघे पञ्चपञ्चदशाक्षरम् । कालरुद्रो ऋषिः प्रोक्तो गायत्रीछन्द उच्यते ।।६।। देवता विश्वरुप श्रीवायुपुत्रः कुलेश्वरि । ह्रूं बीजं कीलकं ग्लौं च ह्रीं-कार शक्तिमेव च ।।७।। प्रयोगं सर्वकार्येषु चास्त्रेणानेन पार्वति । विद्वेषोच्चाटनेष्वेव मारणेषु प्रशस्यते ।।८।। सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़कर जल भूमि पर छोड़ दे। विनियोगः- ॐ अस्य श्रीहनुमाद्-आञ्जनेयास्त्र-विद्या-मन्त्रस्य कालरुद्र ऋषिः, गायत्री छन्दः, विश्वरुप-श्रीवायुपुत्रो देवता, ह्रूं बीजं, ग्लौं कीलकं, ह्रीं शक्तिः, मम शत्रुनिग्रहार्थे हनुमन्नस्त्र जपे विनियोगः। मन्त्रः- “ॐ ह्रीं क्लीं ऐं सौं ग्लौं यं शोषय शोषय यं ग्रस ग्रस यं विदारय विदारय यं भस्मी कुरु कुरु यं स्फुर स्फुर यं प्रस्फुर प्रस्फुर यं सौं ग्लौं हुं फट् स्वाहा ।” ।। विधान ।। नामद्वयं समुच्चार्यं मन्त्रदौ कुलसुन्दरि । प्रयोगेषु तथान्येषु सुप्रशस्तो ह्ययं मनुः ।।९।। आदौ विद्वेषणं वक्ष्ये मन्त्रेणानेन पार्वति । काकोलूकदलग्रन्थी पवित्रीकृत-बुद्धिमान् ।।१०।। तर्पयेच्छतवारं तु त्रिदिनाद्द्वेषमाप्नुयात् । ईक्ष्यकर्ममिदं म मन्त्रांते त्रिशतं जपेत् ।।११।। वसिष्ठारुन्धतीभ्यां च भवोद्विद्वेषणं प्रिये । महद्विद्वेषणं भूत्वा कुरु शब्दं विना प्रिये ।।१२।। मन्त्रं त्रिशतमुच्चार्य नित्यं मे कलहप्रिये । ग्राहस्थाने ग्रामपदे उच्चार्याष्ट शतं जपेत् ।।१३।। ग्रामान्योन्यं भवेद्वैरमिष्टलाभो भवेत् प्रिये । देशशब्द समुच्चार्य द्विसहस्त्रं जपेन्मनुम् ।।१४।। देशो नाशं समायाति अन्योन्यं क्लेश मे वच । रणशब्दं समुच्चार्य जपेदष्टोत्तरं शतम् ।।१५।। अग्नौ नता तदा वायुदिनान्ते कलहो भवेत् । उच्चाटन प्रयोगं च वक्ष्येऽहं तव सुव्रते ।।१६।। उच्चाटन पदान्तं च अस्त्रमष्टोत्तरं शतम् । तर्पयेद्भानुवारे यो निशायां लवणांबुना ।।१७।। त्रिदिनादिकमन्त्रांते उच्चाटनमथो भवेत् । भौमे रात्रौ तथा नग्नो हनुमन् मूलमृत्तिकाम् ।।१८।। नग्नेन संग्रहीत्वा तु स्पष्ट वाचाष्टोत्तरं जपेत् । समांशं च प्रेतभस्म शल्यचूर्णे समांशकम् ।।१९।। यस्य मूर्ध्नि क्षिपेत्सद्यः काकवद्-भ्रमतेमहीम् । विप्रचाण्डालयोः शल्यं चिताभस्म तथैव च ।।२०।। हनुमन्मूलमृद्ग्राह्या बध्वा प्रेतपटेन तु । गृहे वा ग्राममध्ये वा पत्तने रणमध्यमे ।।२१।। निक्षिपेच्छत्रुगर्तेषु सद्यश्चोच्चाटनं भवेत् । तडागे स्थापयित्वा तु जलदारिद्यमाप्नुयात् ।।२२।। मारणं संप्रवक्ष्यामि तवाहं श्रृणु सुव्रते । नरास्थिलेखनीं कृत्वा चिताङ्गारं च कज्जलम् ।।२३।। प्रेतवस्त्रे लिखेदस्त्रं गर्त्त कृत्वा समुत्तमम् । श्मशाने निखनेत्सद्यः सहस्त्राद्रिपुमारणे ।।२४।। न कुर्याद्विप्रजातिभ्यो मारणं मुक्तिमिच्छता । देवानां ब्राह्मणानां च गवां चैव सुरेश्वरि ।।२५।। उपद्रवं न कुर्वीत द्वेषबुद्धया कदाचन । प्रयोक्तव्यं तथान्येषां न दोषो मुनिरब्रवीत् ।।२६।। ।। इति सुदर्शन-संहिताया आञ्नेयास्त्रम् ।।

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Sapne mein purvaj ko dekhna:सपने में पूर्वजों के नजर आने का क्या होता है अर्थ जानें संकेत..

Sapne mein purvaj ko dekhna:अक्सर लोगों को स्वप्न में मृत व्यक्ति दिखाई देते हैं, आइये जानते हैं सपने (Dreams) में किसी मृत व्यक्ति का दिखना आपके लिए अच्छा है या बुरा.. Sapne mein purvaj ko dekhna : हमारे सपने हमारे भूत, वर्तमान और भविष्य की जानकारी देते हैं। इससे यह पता चल सकता है कि आपकी शारीरिक और मानसिक स्थि‍ति क्या है। यदि आपके सपनों में आपके दिवंगत या पूर्वज आपको बार बार नजर आते हैं तो इसका क्या अर्थ हो सकता है? 1. स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि किसी स्वस्थ व्यक्ति का स्वर्गवास हो चुका है और वह आपको सपने में दिखाई दे रहा है और वह बीमार लग रहा है तो इसका अर्थ है कि उस व्यक्ति की कोई इच्छा है, Sapne mein purvaj ko dekhna जिसे वह पूरी करना चाहता है। वहीं एक अर्थ यह भी है कि आपके घर में कोई बीमार पड़ने वाला है। 2. यदि किसी व्यक्ति की बीमारी से मौत हुई है और वह सपने में आपको स्वस्थ दिखाई दे रहा है तो इसका अर्थ है कि उसे अच्छा जन्म या स्थान मिल गया है और अब वह खुश है।3. यदि आपके सपने में कोई मृत परिजन आपसे बात करते हुए दिखाई दे तो इसका अर्थ है कि वह बहुत खुश है और अब आपके अटके कार्य पूरे होने वाले हैं। 4. सपने में कोई दिवंगत व्यक्ति आपको सलाह दे रहा है तो उसकी सलाह जरूर मानें, स्वप्न शास्त्र कहता है कि इसका आपको लाभ जरूर मिलेगा।5. यदि कोई परिचित या पहचान वाला मृत व्यक्ति सपने में क्रोधित या रोते हुए नजर आता है तो इसका अर्थ है कि उसकी कोई इच्छा अधूरी है। 6. स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि सपने में कोई मृत व्यक्ति नजर आता है और आपको कुछ बताने का प्रयास करता है, लेकिन आपको कुछ समझ में नहीं आ रहा है तो इसका अर्थ है कोई संकट आने वाला है।7. आपके सपने में मृत परिजन दिखाई दे लेकिन वह चुप रहे तो इसका अर्थ है कि वह आपको यह बताना चाहता है कि आप या तो कुछ गलत कर रहे हैं या भविष्य में कुछ गलत करने वाले हैं। 8. सपने में पूर्वज आपको आशीर्वाद दें और कुछ कहे नहीं तो इसका अर्थ है कि भविष्य में आप किसी काम में सफल होने वाले हैं।9. सपने में स्वर्गवासी पूर्वज या परिजन उदास रहें तो इसका अर्थ है कि वे Sapne mein purvaj ko dekhna आप से खुश नहीं हैं। वहीं क्रोधित या रोते हुए दिखाई दें तो समझिए कि कोई संकट आने वाला है।10. स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में आपको स्वर्गवासी परिजन आकाश में कहीं दूर दिखाई दें तो इसका अर्थ है कि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो गई है। 12. यदि कोई मृत परिचित सपने में घर में ही या पास में ही दिखाई दे तो इसका अर्थ है कि उनका आपके प्रति मोहभंग नहीं हुआ है। Sapne mein purvaj ko dekhna उनकी आत्मा की शांति के लिए आपको कुछ करना चाहिए।13. स्वप्न शास्त्र के अनुसार मृत परिजनों का बार-बार सपने में आने का अर्थ है कि उनकी आत्मा भटक रही है। उन्हें दूसरा जन्म नहीं मिल पा रहा है या उन्हें मुक्ति नहीं मिल पा रही है। उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण आदि करना चाहिए। 14. स्वप्न में मृत परिजय अन्न या पानी मांग रहे हैं तो यह शुभ नहीं माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके लिए बुरा समय आने वाला है। उन्हें उचित स्थान नहीं मिला है और उनकी आत्मा की शांति के लिए कार्य करें।15. सपने में मृत पिता या कोई अन्य परिजन आपको कोई सामान देता हुए दिखाई दे तो यह शुभ है Sapne mein purvaj ko dekhna और लेता हुआ दिखाई दे तो यह अशुभ है। 16. सपने में मृत पिता का जिंदा दिखाई देना, इस बात का संकेत हैं कि वे चाहते हैं कि आप उनकी जगह किसी को पिता समान समझकर उसकी आज्ञा का पालन करें।17. सपने में मां या पिता को हंसते हुए देखने का अर्थ है कि वे चाहते हैं कि Sapne mein purvaj ko dekhna आप उनके प्रति निश्‍चिंत रहें और खुश रहें। उनको लेकर दु:खी न हों।

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Akhuratha Sankashti Chaturthi:अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2024: महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Akhuratha Sankashti Chaturth:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। Akhuratha Sankashti Chaturth:संकष्टी चतुर्थी व्रत की महिमा नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । Akhuratha Sankashti Chaturth इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है, साल भर में 12-3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित होता है। जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए प्रायः ऐसा देखा गया है कि, कभी-कभी संकष्टी चतुर्थी व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व अर्थात तृतीया तिथि के दिन ही होता है। कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमानुसार ही संपन्न करना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है। इसके अलावा गणपति बप्पा की पूजा करने से यश, धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2024 शुभ मुहूर्त (Akhuratha Sankashti Chaturthi 2024 Shubh Muhurat) Akhuratha Sankashti Chaturth पंचांग के अनुसार, इस बार पौष महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 18 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 43 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 19 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 02 मिनट पर होगा। ऐसे में खुरथ संकष्टी चतुर्थी 18 दिसंबर (Kab Hai Akhuratha Sankashti Chaturthi 2024) को मनाई जाएगी। ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 19 मिनट से 06 बजकर 04 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 01 मिनट से 02 बजकर 42 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 25 मिनट से 05 बजकर 52 मिनट तक अमृत काल- सुबह 06 बजकर 30 मिनट से 08 बजकर 07 मिनट तक गणोश मंत्र (Ganesh Mantra) 1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥2.ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥ Sankashti Chaturthi puja method:संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि ❀ गणेश संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रात: काल स्नान आदि करके व्रत लें।❀ स्नान के बाद गणेश जी की पूज आराधना करें, गणेश जी के मन्त्र का उच्चारण करें।❀ पूजा की तैयारी करें और गणेश जी को उनकी पसंदीदा चीजें जैसे मोदक, लड्डू और दूर्वा घास चढ़ाएं।❀ गणेश मंत्रों का जाप करें और श्री गणेश चालीसा का पाठ करें और आरती करें।❀ शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा की जाती है, अगर बादल के चलते चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के हिसाब से चंद्रोदय के समय में पूजा कर लें। ❀ शाम के पूजा के लिए गणेश जी Akhuratha Sankashti Chaturth की मूर्ति के बाजू में दुर्गा जी की भी फोटो या मूर्ति रखें, इस दिन दुर्गा जी की पूजा बहुत जरुरी मानी जाती है।❀ मूर्ति/फोटो पर धुप, दीप, अगरबत्ती लगाएँ, फुल से सजाएँ एवं प्रसाद में केला, नारियल रखें।❀ गणेश जी के प्रिय मोदक बनाकर रखें, इस दिन तिल या गुड़ के मोदक बनाये जाते है।❀ गणेश जी के मन्त्र का जाप करते हुए कुछ मिनट का ध्यान करें, कथा सुने, आरती करें, प्रार्थना करें।❀ इसके बाद चन्द्रमा की पूजा करें, उन्हें जल अर्पण कर फुल, चन्दन, चावल चढ़ाएं।❀ पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सबको वितरित किया जाता है।❀ गरीबों को दान भी किया जाता है। Akhuratha Sankashti Chaturth:सभी संकष्टी चतुर्थी के नाम आश्विन मास – विघ्नराज संकष्टी चतुर्थीकार्तिक मास – करवा चौथ, वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थीमार्गशीर्ष मास – गणाधिप संकष्टी चतुर्थीपौष मास – अखुरथ संकष्टी चतुर्थीमाघ मास – सकट चौथ, लम्बोदर संकष्टी चतुर्थीफाल्गुन मास – द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थीचैत्र मास – भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थीवैशाख मास – विकट संकष्टी चतुर्थीज्येष्ठ मास – एकदन्त संकष्टी चतुर्थीआषाढ़ मास – कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थीश्रावण मास – गजानन संकष्टी चतुर्थीअधिक मास – विभुवन संकष्टी चतुर्थीभाद्रपद मास – बहुला चतुर्थी, हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2024 का महत्व Akhuratha Sankashti Chaturth:अखुरथ संकष्टी चतुर्थी के दिन विघ्नहर्ता श्री गणेश भगवान की पूजा के साथ चन्द्रदर्शन का भी विशेष महत्व है। इस दिन चद्रोदय के समय चंद्र को अर्घ जरूर देना चाइये। धार्मिक मान्यता है की इस दिन गणेश जी की पूजा करने से जातक के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। और गणेश भगवान सुख शांति और आरोग्यता का वरदान  देतें है।

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International Gita Mahotsav:अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव

Gita Mahotsav:अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव हिंदुओं के पवित्र ग्रन्थ श्रीमद्भगवद गीता के प्रादुर्भाव का उत्साहित उत्सव स्वरुप है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव हरियाणा सरकार द्वारा कुरूक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर मनाया जाता है। कुरुक्षेत्र वह भूमि है जहाँ भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिव्य ज्ञान अर्थात ‘भगवद गीता’ सुनाई थी। यह पवित्र ग्रंथ गीता जीवन की किसी भी समस्या का सभी समाधान प्रदान करता है। गीता महोत्सव कब मनाया जाता है?(When is Geeta Mahotsav celebrated) गीता महोत्सव का समापन हिंदू कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष के 11वें दिन अर्थात गीता जयंती के साथ होता है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव Gita Mahotsav की सभी तिथियाँ एवं कार्यक्रम हरियाणा सरकार निर्धारित करती है। इस वर्ष, गीता महोत्सव 28 नवंबर से 15 दिसंबर मनाया जा रहा है। हरियाणा सरकार द्वारा गीता जयंती को वर्ष 2016 में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के रूप में घोषित किया गया था। गीता महोत्सव कहाँ मनाया जाता है? (Where is Geeta Mahotsav celebrated) गीता महोत्सव Gita Mahotsav मुख्य रूप से हरियाणा के कुरूक्षेत्र में आयोजित किया जाता है, परन्तु महोत्सव का महत्वपूर्ण स्थल एवं सभी कार्यक्रमों का केंद्र विन्दु ब्रह्म सरोवर ही होता है। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने कुरूक्षेत्र युद्ध के दौरान अर्जुन को भगवद गीता सुनाई थी। यह स्थान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रसिद्ध ऋषि मनु ने यहीं मनुस्मृति लिखी थी। ऋग्वेद और सामवेद की रचना भी यहीं हुई थी। गीता महोत्सव समारोह की प्रमुख गतिविधियाँ(Major activities of Geeta Mahotsav Celebrations)गीता महोत्सव Gita Mahotsav, कुरुक्षेत्र का एक लोकप्रिय उत्सव है जिसके अंतर्गत मेला, यज्ञ, गीता पाठ, भजन, आरती, नृत्य और नाटक जैसी विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। यह कार्यक्रम पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है, जिसमें मानव जाति पर इस पवित्र ग्रन्थ के प्रभाव को विद्वानों, दार्शनिकों, पुजारियों एवं ऋषियों द्वारा चर्चाओं, सेमिनार एवं संगोष्ठियों द्वारा मंथन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंचीय नाटक और गीता जप प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, जिसमें गीता के सार से युक्त पत्रक, पुस्तिकाएं और किताबें वितरित की जाती हैं।

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Annapurna Jayanti:अन्नपूर्णा जयंती 2024: पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और महत्त्व

Annapurna Jayanti:धार्मिक मत है कि अन्नपूर्णा जयंती (Annapurna Jayanti 2024 Date) पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। किचन को गंदा नहीं रखना चाहिए। साथ ही अन्न का सम्मान करें। अन्न की बर्बादी करने से मां अन्नपूर्णा अप्रसन्न हो जाती हैं। इससे गृह में अन्न एवं धन की कमी होने लगती है। इस शुभ अवसर पर अन्न का दान करना उत्तम होता है। मागर्शीष शुक्ल पूर्णिमा के दिन माँ पार्वती के अन्नपूर्णा स्वरूप के अवतरण दिन को अन्नपूर्णा जयंती के रूप में मनाया जाता है। माता अन्नपूर्णा को अन्नपूर्णेश्वरी एवं अन्नदा नामो से भी जाना जाता है। इस दिन माँ अन्नपूर्णा की आराधना करनी चाहिए, माँ की कृपा से किसी भी घर में कभी भी अन्न की कोई कमी नही होती है। अन्नपूर्णा जयंती Annapurna Jayanti को अन्न दान की विशेष महिमा है। यदि इस दिन कोई भक्त अन्न दान करता है, तो उसे अगले जन्म में भी धन-धान्य की कभी कोई कमी नहीं होती है। अन्नपूर्णा जंयती पूजन में माँ अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करना चाहिए। जब पृथ्वी पर खाने के लिए कुछ नहीं बचा, तब माँ पार्वती ने अन्नपूर्णा रूप धारण कर सभी को इस संकट से उबारा। अन्नपूर्णा जयन्ती को मनुष्य के जीवन में अन्न के महत्व को समझाने हेतु मनाया जाता है। इस दिन रसोई की सफाई एवं अन्न के सदुपयोग को प्रचारित करना चाहिए। क्योंकि अन्न के सदुपयोग से व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। अन्नपूर्णा जयंती तिथि और शुभ मुहूर्त (Annapurna Jayanti 2024 Date And Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि 14 दिसंबर को संध्याकाल 04 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, पूर्णिमा तिथि का समापन 15 दिसंबर दोपहर 02 बजकर 31 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार 15 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा मनाई जाएगी। इसके साथ ही अन्नपूर्णा जयंती भी 15 दिसंबर को मनाई जाएगी। Annapurna Jayanti Subh Yog:शुभ योग Annapurna Jayanti:ज्योतिषियों की मानें तो अन्नपूर्णा जयंती पर शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का संयोग दिन भर है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दुर्लभ शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इस योग में भगवान शिव संग मां पार्वती की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही अन्न एवं धन में वृद्धि होती है। अन्नपूर्णा जयंती पूजा विधि (Annapurna Jayanti 2024 Puja Vidhi) मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में उठें। इसके बाद शिव-शक्ति को प्रणाम कर दिन की शुरुआत करें। इसके बाद घर की साफ-सफाई करें। दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें। अब आचमन कर लाल या श्वेत रंग का वस्त्र धारण करें। इसके बाद सर्वप्रथम सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक करें। पूजा गृह में पंचोपचार कर विधि-विधान से भगवान शिव एवं मां अन्नपूर्णा की पूजा करें। भगवान शिव एवं मां पार्वती को गृह में बने भोजन भोग में अर्पित करें। इस समय पार्वती चालीसा का पाठ करें। पूजा के अंत में शिव पार्वती जी की आरती करें। इस दिन किचन में चूल्हे की पूजा अवश्य करें। इसके साथ ही चूल्हे पर कुमकुम, चावल और फूल चढ़ाएं और धूप जलाकर मां अन्नपूर्णा से अन्न एवं धन में वृद्धि की कामना करें। अन्नपूर्ण जयंती का महत्व:Importance of Annapurna Jayanti ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा की पूजा करने वालों और व्रत रखने वालों को मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है. उनके घर में अन्न और धन की कमी नहीं होती. घर-परिवार में भी सुख-शांति बनी रहती है. पारिवारिक क्लेश भी दूर होता है. इस चीज का विशेष ध्यान रखें कि व्रत का पारण करने के बाद जरूरतमंद और गरीब लोगों कि अन्न, वस्त्र या धन की सहायता करें. Annapurna Jayanti इससे मां की कृपा आपके ऊपर बरसेगी. मां अन्नपूर्णा को भी इस दिन धनी की पंजीरी का भोग लगाएं, इससे वे प्रसन्न हो जाएंगी/ इस दिन पीले रंग के कपड़े पर ही मां की मूर्ति को स्थापति या विराजित करें, तभी आपको व्रत का फल मिल पाएगा. पौराणिक कथा एक समय पृथ्वी लोक पर जल और अन्न सभी कुछ समाप्त हो गया। सभी प्राणी अन्न और जल के न मिलने पर मरने लगे। इसके बाद पृथ्वीं पर लोग ब्रह्मा जी और विष्णु की आराधना करने लगे। ऋषियों ने ब्रह्म लोक और बैकुंठ लोक जाकर इस समस्या हल निकालने के लिए ब्रह्मा जी और विष्णु जी से कहा। जिसके बाद ब्रह्मा जी और विष्णु जी सभी ऋषियों के साथ कैलाश पर्वत पर पहुंचे। सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना की हे प्रभू पृथ्वी लोक बड़े ही संकट से गुजर रहा है। इसलिए अपना ध्यान तोड़िए और जाग्रत अवस्था में आइए। तब शिव आंखे खोलकर सभी के आने का कारण पूछा। तब सभी ने बताया की पृथ्वी लोक पर अन्न और जल की कमीं हो गई है। तब भगवान शिव ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि आप लोग धीरज रखिए। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती ने पृथ्वी लोक का भ्रमण किया। जिसके बाद माता पार्वती ने अन्नपूर्णा रूप धारण किया और भगवान शिव ने एक भिक्षु का रूप धारण किया। इसके बाद भगवान शिव ने भिक्षा लेकर सभी पृथ्वी वासियों में भोजन वितरित किया। जिसके बाद पृथ्वी पर अन्न और जल की कमी पूरी हो गई और सभी ने माता अन्नपूर्णी की जय जयकार की।

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Hanuman Mantra: संकट से मुक्ति पाना है तो हनुमान जी सिंदूर चढ़ाते समय इन मंत्रों का करें जाप

Hanuman Mantra:संकट से मुक्ति पाना है तो हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाते समय करें इन मंत्रों का जाप Hanuman Mantra:हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। उनका स्मरण करने मात्र से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं। यदि आप जीवन में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना कर रहे हैं, तो हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाकर पूजा करना अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है। साथ ही, विशेष मंत्रों का जाप करने से आपकी समस्याओं का शीघ्र समाधान होता है। Hanuman Mantra इस लेख में हम जानेंगे कि हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने का महत्व, सही विधि और साथ में कौन-कौन से मंत्रों का जाप करना चाहिए। Hanuman Mantra:हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। उनका स्मरण करने मात्र से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं। यदि आप जीवन में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना कर रहे हैं, तो हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाकर पूजा करना अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है। साथ ही, विशेष मंत्रों का जाप करने से आपकी समस्याओं का शीघ्र समाधान होता है। इस लेख में हम जानेंगे कि Hanuman Mantra हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने का महत्व, सही विधि और साथ में कौन-कौन से मंत्रों का जाप करना चाहिए। Hanuman Mantra:हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने का महत्व हनुमान Hanuman Mantra जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सीता ने हनुमान जी से उनके शरीर पर सिंदूर लगाने का कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि यह भगवान राम को खुश करने के लिए है। इसके बाद से ही हनुमान भक्तों द्वारा उन्हें सिंदूर चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सीता ने हनुमान जी से उनके शरीर पर Hanuman Mantra सिंदूर लगाने का कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि यह भगवान राम को खुश करने के लिए है। Hanuman Mantra। सनातन धर्म में मंगलवार का दिन महाबली हनुमान को समर्पित माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सभी संकट दूर हो जाते हैं। हनुमान जी को सिंदूर अति प्रिय है। Hanuman Mantra यदि मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाते हैं तो इस समय कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से जीवन में आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं तो मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाते समय इन मंत्रों का जाप जरूर करें – सिन्दूर समर्पण मंत्र दिव्यनागसमुद्भुतं सर्वमंगलारकम् | तैलाभ्यंगयिष्यामि सिन्दूरं गृह्यतां प्रभो || सर्वदुख निवारण मंत्र ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय आध्यात्मिकाधिदैवीकाधिभौतिक तापत्रय निवारणाय रामदूताय स्वाहा। स्वरक्षा मंत्र ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय वज्रदेहाय वज्रनखाय वज्रमुखाय वज्ररोम्णे वज्रदन्ताय वज्रकराय वज्रभक्ताय रामदूताय स्वाहा। शत्रु संकट निवारण मंत्र ऊँ पूर्वकपिमुखाय पंचमुखहनुमते टं टं टं टं टं सकल शत्रुसंहरणाय स्वाहा। प्रेत बाधा दूर करने हेतु मंत्र ॐ दक्षिणमुखाय पच्चमुख हनुमते करालबदनाय नारसिंहाय ॐ हां हीं हूं हौं हः सकलभीतप्रेतदमनाय स्वाहाः। प्रनवउं पवनकुमार खल बन पावक ग्यानधन। जासु हृदय आगार बसिंह राम सर चाप घर।। शत्रु पराजय हेतु मंत्र ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय रामसेवकाय रामभक्तितत्पराय रामहृदयाय लक्ष्मणशक्ति भेदनिवावरणाय लक्ष्मणरक्षकाय दुष्टनिबर्हणाय रामदूताय स्वाहा। व्यापार में लाभ पाने के लिए मंत्र अज्जनागर्भ सम्भूत कपीन्द्र सचिवोत्तम। रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमन् रक्ष सर्वदा।। धन प्राप्ति के लिए मंत्र मर्कटेश महोत्साह सर्वशोक विनाशन । शत्रून संहर मां रक्षा श्रियं दापय मे प्रभो।। प्रसन्न करने हेतु मंत्र सुमिरि पवन सुत पावन नामू। अपने बस करि राखे रामू।। अर्घ्य मंत्र कुसुमा-क्षत-सम्मिश्रं गृह्यतां कपिपुन्गव | दास्यामि ते अन्जनीपुत्र | स्वमर्घ्यं रत्नसंयुतम् || सिंदूर चढ़ाने की विधि

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Scary dreams:डरावने सपने को देख अचानक खुल जाती है नींद? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

Scary dreams:डरावने सपने देखने पर अचानक खुल जाती है नींद? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान Scary dreams:हम सभी ने कभी न कभी ऐसे सपने देखे हैं जो हमें अचानक झकझोर कर नींद से जगा देते हैं। ऐसे सपने, जिन्हें आमतौर पर “डरावने सपने” या nightmares कहा जाता है, हमारी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। Scary dreams लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे के कारण और समाधान क्या हो सकते हैं? आइए विस्तार से जानते हैं। What are scary dreams:डरावने सपने क्या हैं? Scary dreams:डरावने सपने ऐसे अवचेतन अनुभव होते हैं जो आमतौर पर गहरी नींद के दौरान (REM sleep) आते हैं। इनमें डर, चिंता या असुरक्षा की भावना प्रबल होती है, जिससे व्यक्ति अचानक जाग जाता है। Reason Of NightMares: बचपन में बुरे सपने आना कॉमन है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 50 से 85 प्रतिशत वयस्कों को भी कभी-कभी बुरे सपने से नींद खुल जाती है। यहां जानिए इसकी हैरान कर देने वाली वजह Scary dreams बचपन में अक्सर बुरे सपनों का आना कॉमन माना जाता है। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनकी नींद रात के समय में डरावने सपनों को देखकर खुल जाती है। रिपोर्ट की मानें तो 50 से 85 प्रतिशत वयस्कों को कभी-कभी बुरे सपने आने लगते हैं।Scary dreams इस आर्टिकल के जरिए जानिए बुरे सपने आने के पीछे कारण क्या है और कैस इन्हें रोकें। What is the reason behind nightmares:क्या है बुरे सपने आने की वजह माना जाता है कि ऐसा तब होता है जब व्यक्ति बहुत ज्यादा टेंशन लेता है, काम का ज्यादा बोझ लेना, शराब वगैरह पीना बुरे सपने आने का कारण है। रिपोर्ट्स की मानें तो बार-बार आने वाले बुरे सपनों से निपटना जरूरी है क्योंकि ये नींद की कमी का कारण बन सकते हैं, ये हृदय रोग और मोटापे से भी जुड़े होते हैं। बुरे सपनों को कम करने के लिए करें ये काम (How to Stop Nightmares) 1) स्लीप रूटीन सेट करें- डरावने सपने रैपिड आई मूवमेंट नींद के दौरान आते हैं, ये तब होता है जब मांसपेशियां आराम करती हैं और हम सपने देखते हैं। इससे बचने के लिए हेल्दी नींद का रूटीन सबसे अच्छा है। एक्सरसाइज करके, नियमित नींद और जागने का समय तय करें। इसके अलावा सोने के लिए कमरे में अंधेरा और ठंडा रखें। ये सभी चीजें अपनाकर आपको अच्छी नींद आने में मदद मिलेगी।  2) सोने से पहले ना खाएं-रिपोर्ट की मानें तो स्नैकिंग मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा दे सकता है, जिससे आपका दिमाग ज्यादा एक्टिव हो जाता है और बुरे सपने आ सकते हैं। हालांकि, ऐसा करने के बाद कुछ लोगों को बेहतर नींद आती है, आपको सोने से दो से तीन घंटे पहले खाना बंद कर देना चाहिए।  3) टेंशन को कहें टाटा- रात के समय बुरे सपने आने की वजह टेंशन हो सकती है। अगर आपके दिमाग में कुछ ना कुछ चलता रहता है और आप सोने की कोशिश कर रहे हैं तो हो सकता है कि आपकी नींद बुरे सपने की वजह से खुल जाए। इससे बचने के लिए सोने से पहले योग रूटीन को शामिल करें। इसके लिए प्राणायाम कर सकते हैं। 4) परेशानी को लिखें-अगर आप किसी बात से परेशान हैं तो हो सकता है रात में आपकी नींद खुल जाए। इससे बचने के लिए अपनी चिंताओं को लिख लें। बुरे सपने और तनाव को कम करने के लिए डायरी लिखना मददगार हो सकता है। 5) ना पढ़ें-देखें डरावना कॉन्टेंट- कहते हैं कि रात में सोने से पहले आप जो भी देखते या पढ़ते हैं तो वह आपको सपने के तौर पर दिख सकता है। ऐसे में अगर आप कुछ डरावना देखते या पढ़ते हैं तो बुरे सपने की वजह से आपकी नींद खुल सकती है। ऐसे में इससे बचना बेहतर है।  6. सोने से पहले मोबाइल से दूरी (Avoid Screens Before Bed) सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल, टीवी या लैपटॉप का उपयोग न करें।

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What is tea called in sanskrit:चाय को संस्कृत में क्या कहते हैं? जानिए इसके नाम, इतिहास और महत्व

What is tea called in sanskrit:चाय को संस्कृत में क्या कहते हैं? जानिए इसके नाम, इतिहास और महत्व tea:परिचय चाय (Tea) दुनिया भर में सबसे लोकप्रिय पेय पदार्थों में से एक है। भारत में चाय का विशेष महत्व है, चाहे सुबह की शुरुआत हो या दोस्तों के साथ गपशप, चाय हर जगह अपनी खास पहचान बनाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चाय को संस्कृत में क्या कहते हैं? इस ब्लॉग में हम न केवल इसका उत्तर जानेंगे, बल्कि चाय से जुड़ी रोचक जानकारी भी साझा करेंगे। चाय को संस्कृत में क्या कहते हैं? चाय का शब्द संस्कृत ग्रंथों में सीधे उल्लेखित नहीं है क्योंकि चाय का प्रचलन भारत में बहुत बाद में हुआ। हालाँकि, संस्कृत में चाय के लिए निम्नलिखित संभावित नाम हैं: चाय का वर्तमान नाम “चाय” चीनी भाषा (Mandarin: “Cha”) से लिया गया है। चाय का इतिहास और भारतीय संस्कृति में महत्व चाय का वैश्विक इतिहास भारतीय संस्कृति में चाय का महत्व चाय के प्रकार और उनके संस्कृत नाम (What is Tea Called in Sanskrit?) 1. ग्रीन टी (Green Tea) 2. हर्बल टी (Herbal Tea) 3. मसाला चाय (Masala Tea) आयुर्वेद में चाय का महत्व आयुर्वेद में चाय को औषधीय दृष्टिकोण से देखा जाता है। हर्बल चाय और अन्य पेय तीन दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करने में सहायक होते हैं। आयुर्वेदिक लाभ: चाय से जुड़ी रोचक बातें (Interesting Facts About Tea) संस्कृत भाषा और चाय का पुनरुत्थान संस्कृत, भारत की प्राचीन भाषा, आधुनिक संदर्भों को समझने और संस्कृति को संरक्षित करने का माध्यम बन सकती है। चाय के संस्कृत नाम और आयुर्वेदिक महत्व हमें अपने परंपरागत ज्ञान से जोड़ते हैं। निष्कर्ष चाय न केवल एक पेय पदार्थ है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा भी है। संस्कृत में चाय को समझने का प्रयास हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक कदम है।

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