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Govardhan Puja के दिन सुबह करें ये उपाय, श्रीकृष्ण की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी

श्रीकृष्ण गोवर्धन पूजा के पर्व को हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार माना जाता है, जो पांच दिवसीय पर्व दिवाली के आखिरी दिन भाई दूज से पहले मनाया जाता है। इस दिन गोवर्धन पर्वत और भगवान कृष्ण की पूजा करना शुभ माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, हर वर्ष कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों में गोवर्धन पर्वत और भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति व चित्र बनाते हैं, जिसकी पूजा की जाती है। साथ ही भगवान को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से गोवर्धन पूजा के दिन कुछ अचूक उपाय करता है, तो उसके जीवन में चल रही तमाम समस्याएं कम हो जाती हैं। चलिए जानते हैं ऐसे 3 उपायों के बारे में, जिन्हें गोवर्धन पूजा के दिन सुबह के समय करने से भगवान कृष्ण को प्रसन्न किया जा सकता है। श्रीकृष्ण गोवर्धन पूजा के अचूक उपाय 1. तुलसी की पूजा करेंशास्त्रों में देवी तुलसी को धन की देवी मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। गोवर्धन पूजा के दिन तुलसी में जल चढ़ाने और सुबह चुपचाप घी का दीपक जलाने से माता लक्ष्मी, भगवान श्रीकृष्ण और देवी तुलसी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे घर में धन, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है। 2. श्री कृष्ण की पूजा करेंगोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन पर्वत उठाए हुए भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर घर में स्थापित करें। गोवर्धन पर्वत की पूजा के साथ-साथ श्रीकृष्ण की पूजा करें और उन्हें अन्नकूट का भोग अर्पित करें। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है और समस्याओं से राहत मिलती है। 3. गौ माता की पूजा करेंभगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद पाने के लिए गोवर्धन पूजा के दिन गौ माता की पूजा अवश्य करें। सबसे पहले गाय को स्नान कराएं और माथे पर तिलक लगाएं। अपने हाथों से गाय को चारा खिलाएं और गौ माता की 11 बार परिक्रमा करें। इस प्रक्रिया से घर में शांति और संपन्नता आती है। 4. गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करेंगोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का विशेष महत्व है। यदि संभव हो तो स्वयं गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करें, या घर पर गोवर्धन पर्वत की छवि के चारों ओर परिक्रमा करें। यह भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने का उत्तम उपाय माना जाता है। 5. अन्नकूट का आयोजन करेंगोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट का आयोजन करना शुभ माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण को अपने हाथों से बने विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाएं। इससे भगवान का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहती है। 6. दीपदान करेंगोवर्धन पूजा के अवसर पर रात में घर के बाहर दीप जलाकर दीपदान करें। माना जाता है कि दीपदान करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। 7. गोवर्धन पर्वत की मिट्टी का तिलक करेंगोवर्धन पर्वत की मिट्टी को माथे पर तिलक के रूप में लगाने से श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह तिलक करने से परिवार में उन्नति, सफलता और समृद्धि बनी रहती है। 8. भजन-कीर्तन का आयोजन करेंगोवर्धन पूजा के दिन श्रीकृष्ण के भजन-कीर्तन का आयोजन करें। इससे घर का वातावरण पवित्र होता है और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा बरसती है। इन अचूक उपायों से गोवर्धन पूजा का महत्व और बढ़ जाता है और घर में धन, सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

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Diwali wishes in Sanskrit – दीपावली पर संस्कृत में शुभकामनाएं और मंत्र

दीपावली पर संस्कृत में शुभकामनाएं और मंत्र: दिवाली के लिए विशेष संदेश दीपावली का पर्व माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सबसे शुभ समय माना जाता है। दीपों का यह पर्व समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जो घर में सुख-शांति और धन की वर्षा करता है। के अवसर पर संस्कृत में कुछ सुंदर मंत्र और शुभकामनाएं प्रस्तुत हैं, जो इस पर्व की पवित्रता को और अधिक बढ़ाते हैं। माँ लक्ष्मी की कृपा पाने के मंत्र 1. शुभं करोति कल्याणं मंत्र:शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा।शत्रु बुद्धि विनाशाय दीपज्योतिर्नमोस्तुते॥ अर्थ: मैं दीपक की ज्योति को प्रणाम करता हूँ, जो शुभता, स्वास्थ्य, धन और समृद्धि लाती है, और शत्रुओं की नकारात्मकता को दूर करती है। 2. दीपज्योतिः परब्रह्म मंत्र मंत्र:दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः।दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोस्तुते॥ अर्थ: मैं दीपक की उस ज्योति को प्रणाम करता हूँ जो परम ब्रह्म और भगवान जनार्दन का प्रतीक है। यह ज्योति मेरे पापों को हर ले और मुझे पवित्रता की ओर ले जाए। संस्कृत में दीपावली की शुभकामनाएं WhatsApp और Instagram के लिए संस्कृत में दीपावली शुभकामनाएं Facebook और Quotes के लिए संस्कृत में शुभकामना संदेश यह पर्व माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने का समय है। संस्कृत के मंत्र और शुभकामनाएं इस पर्व को और भी विशेष बना देती हैं, जो हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि का संचार करती हैं। पर इन मंत्रों का जाप और इन शुभकामनाओं को भेजना आपके जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि लाए।

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दीपावली पर धन प्राप्ति के लिए माँ लक्ष्मी के शक्तिशाली मंत्र – DIWALI MANTRA

दीपावली पर धन प्राप्ति के लिए माँ लक्ष्मी के शक्तिशाली मंत्र दीपावली, या दिवाली, माँ लक्ष्मी की पूजा का प्रमुख पर्व है। इस दिन माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना और मंत्रों का जाप किया जाता है ताकि घर में सुख-समृद्धि, शांति और धन की वर्षा हो सके। माँ लक्ष्मी धन, वैभव और सौभाग्य की देवी मानी जाती हैं, और दीपावली पर उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष मंत्रों का जाप अत्यंत लाभकारी माना जाता है। नीचे हम कुछ शक्तिशाली लक्ष्मी मंत्र प्रस्तुत कर रहे हैं, जो आपके जीवन में धन-संपत्ति और समृद्धि ला सकते हैं। इन मंत्रों का दीपावली की रात को श्रद्धा और विश्वास के साथ जाप करने से माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सकती है। 1. श्री महालक्ष्मी मंत्र मंत्र:ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद,ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः। अर्थ (Meaning):O divine Lakshmi, who resides in the lotus, kindly bestow your blessings. I bow to you, O Mahalakshmi. लाभ:इस मंत्र का जाप धन, वैभव और समृद्धि के लिए किया जाता है। यह मंत्र घर में धन की वर्षा करने के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। 2. श्री लक्ष्मी बीज मंत्र मंत्र:ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः। अर्थ:I offer my obeisance to Goddess Lakshmi, the divine source of wealth. लाभ:इस बीज मंत्र का रोज़ाना 108 बार जाप करने से माँ लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह धन, संपत्ति और आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावी है। 3. श्री कनकधारा स्तोत्र मंत्र मंत्र:अंगं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती,भ्रिंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम्।अंगीकृताखिलविभूतिरपांगलीला,मां धामिनि ध्रुवपदां विजयां ददातु॥ अर्थ:I pray to the goddess who showers wealth as Kanakadhara (rain of gold) to bless me with prosperity. लाभ:इस मंत्र का जाप कनकधारा स्तोत्र का हिस्सा है और इसे धन की वर्षा कराने वाला मंत्र माना जाता है। दीपावली की रात इसका जाप विशेष रूप से लाभकारी होता है। 4. श्री लक्ष्मी गायत्री मंत्र मंत्र:ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि।तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात्॥ अर्थ:I meditate upon the Great Lakshmi, consort of Vishnu, and invoke her blessings for wealth and fortune. लाभ:इस गायत्री मंत्र का जाप करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर धन, वैभव और शांति की कृपा करती हैं। 5. श्री लक्ष्मी कुबेर मंत्र मंत्र:ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये,धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥ अर्थ:I bow to Kuber, the lord of wealth and prosperity, and seek his blessings for abundance. लाभ:कुबेर और लक्ष्मी दोनों को धन के देवता माना जाता है। इस मंत्र का जाप करने से धन की प्राप्ति होती है और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है। 6. श्री सिद्धि मंत्र मंत्र:ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध्यै नमः। अर्थ:I offer my salutations to Goddess Lakshmi for wealth, power, and spiritual success. लाभ:इसे सिद्धि मंत्र माना जाता है जो आपके जीवन में समृद्धि और सफलता लाता है। इसका जाप करने से व्यापार में वृद्धि और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। 7. श्री लक्ष्मी अष्टकम मंत्र मंत्र:नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ अर्थ:Salutations to Mahalakshmi, who is worshipped by the gods and resides in wealth. लाभ:यह मंत्र समृद्धि और आर्थिक सफलता के लिए अत्यंत प्रभावी है। दीपावली के अवसर पर इसका जाप करने से माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 8. श्री धन प्राप्ति मंत्र मंत्र:ॐ श्रीं श्रीं श्रीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी श्रीं श्रीं श्रीं स्वाहा॥ अर्थ:I invoke the supreme wealth of Mahalakshmi, bringing blessings of prosperity and abundance. लाभ:यह एक विशेष धन प्राप्ति मंत्र है, जो दीपावली पर 108 बार जपा जाता है। इसका जाप आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। दीपावली पर इन मंत्रों का श्रद्धा और समर्पण के साथ जाप करने से माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में धन, वैभव, और समृद्धि का संचार होता है। दीपावली के इस पावन पर्व पर माँ लक्ष्मी की कृपा से आपके जीवन में अपार खुशियों का आगमन हो। शुभ दीपावली!

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Happy Diwali in Sanskrit – शुभ दीपावली

Diwali:नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥  Transliteration:namaste’stu mahāmāye śrīpīṭhe surapūjite।śaṅkhacakragadāhaste mahālakṣmi namo’stu te॥ English Translation:The illusory power of the universe, the basis for all wealth,and worshipped by deities, Salutations to you (Mahālakṣmī).who has a conch, discus, and mace in hand. Oh Mahālakṣmī, obeisances to you. Hindi Translation:जो महामाया है, सभी वैभव का आधार है,जो देवताओं द्वारा पूजित है, (महालक्ष्मी) Diwali आपको नमन है।जिसके हाथों में शंख, चक्र और गदा हैं। हे महालक्ष्मी, तुम्हे नमन है। Source:  Mahālakṣmyaṣṭakam 1 दीपावली: प्रकाश का पर्व और श्लोकों के माध्यम से शुभकामनाएं दीपावली, जिसे दीवाली के नाम से भी जाना जाता है, Diwali भारतीय संस्कृति का प्रमुख पर्व है। Diwali यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा का प्रतीक है और जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि लाने का संदेश देता है। इस त्योहार पर लोग घरों में दीप जलाते हैं,Diwali मिठाई बांटते हैं Diwali और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। इस लेख में हम दीपावली पर आधारित कुछ Diwali संस्कृत श्लोकों के साथ उनका अंग्रेजी अर्थ प्रस्तुत कर रहे हैं, जो इस पर्व की महत्ता को और बढ़ाते हैं। 1. दीपज्योतिः परं ज्योतिर्दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥ अर्थ (Translation):This lamp symbolizes the supreme light; it is like Lord Janardana (Vishnu) who removes sins. I bow to this light of the lamp, may it take away all my sins. 2. तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय॥ अर्थ:Lead me from darkness to light, from death to immortality.This mantra reminds us to seek enlightenment and to move towards a life of knowledge and purity. 3. सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुःखभाग्भवेत्॥ अर्थ:May all be happy, may all be free from illness, may all see the auspicious, and may no one suffer in any way.It is a universal prayer for happiness, health, and well-being for all. 4. दीपस्य प्रकाशेन यशो देवानामस्तु। अर्थ:May the light of the lamp bring glory to the gods.This shloka emphasizes the divine aspect of light and its significance in connecting with the divine. 5. असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। अर्थ:Lead me from untruth to truth, from darkness to light.It is a prayer to lead us from falsehood to truth and from ignorance to knowledge. 6. लक्ष्मी करोतु कल्याणं आरोग्यं सुखसम्पदा। मातुः कृपया सर्वे भवन्तु सुखिनः सदा॥ अर्थ:May Goddess Lakshmi bring welfare, health, and prosperity to all.It is a prayer to Goddess Lakshmi to bless everyone with happiness and health. 7. सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ अर्थ:O most auspicious one, O fulfiller of all purposes, I bow to you, O consort of Shiva, Narayani.This shloka is a prayer for auspiciousness, seeking blessings from the divine for prosperity and well-being. 8. दीपेन च प्रकाशेन ह्रदयस्य प्रदीपनम्। अर्थ:May the light of the lamp illuminate our hearts.This simple yet profound shloka reminds us of the light of wisdom and compassion within. 9. गणानां त्वा गणपतिं हवामहे। अर्थ:We call upon the leader of all groups and seek blessings.This prayer is dedicated to Lord Ganesha, invoking his blessings for auspicious beginnings. 10. ॐ दीपज्योति नमोऽस्तुते। अर्थ:I bow to the divine light of the lamp.A humble offering to the divine light, this shloka emphasizes respect and devotion. 11. धनं धान्यं सुखं चेमं लक्ष्मीरूपेण संस्थिते। अर्थ:May we receive wealth, grains, and happiness in the form of Goddess Lakshmi.This prayer is an invocation to Goddess Lakshmi to bless the household with prosperity and abundance. दीपावली का यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हर अंधकार का अंत होता है और प्रकाश सदा विजयी होता है। ये श्लोक न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण हैं बल्कि ये हमारे भीतर की सकारात्मकता और आध्यात्मिकता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। दीपावली की शुभकामनाओं के साथ, हम अपने जीवन को ज्ञान, करुणा और प्रकाश से भर सकते हैं। शुभ दीपावली!

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Chhath Puja 2024: छठी मैया के आगमन पर घर में बनता है खरना का विशेष प्रसाद, जानें इसे बनाने का सही तरीका

Chhath Puja 2024 Kharna Kheer: छठ पूजा में खरना के दिन को विशेष माना जाता है. इस दिन छठी मैया आगमन अपने भक्तों के घर में होता है. व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्य देव को जल देकर प्रसाद ग्रहण करती हैं.लोक आस्था का महापर्व छठ कार्तिक महीने में पड़ता है. इस पर्व की शुरुआत सतयुग और द्वापर के समय से मानी जाती है. माता सीता और द्रौपदी ने भी छठ का व्रत रखकर सूर्य (Surya) उपासना की थी. Chhath Puja 2024: छठ पूजा की शुरुआत इस साल 7 नवंबर 2024 से हो रही है. ये बिहार और झारखंड का सबसे बड़ा पर्व  है जो पूरे देश में बेहद धूम धाम के साथ मनाया जाता है. हिन्दू धर्म में इसका विशेष महत्व है. Chhath Puja 2024:यह पर्व कार्तिक मास (Kartik Maas) के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को शुरू होता है और सप्तमी तिथि तक चलता है. चार दिनों तक चलने वाला ये पर्व सभी के लिए बहुत खास और एहम  होता है. इसकी शुरुआत नहाय-खाय (Nahay Khaye) के साथ होती है. छठ पूजा में सूर्य देव (Surya Dev) के साथ उनकी बहन छठ मैया की भी पूजा की जाती है. Chhath Puja 2024:छठ पूजा को लेकर कई मान्यताए है जो इस के व्रत को और भी खास बनाती है. छठ पूजा पर रखे जाने वाला व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. यह व्रत संतान के लिए रखा जाता है उनकी लंबी उम्र ,अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि  के लिया 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते है. यह व्रत महिलायें रखती है और इसके कुछ कड़े नियम भी है जिनका पालन भी करना पड़ता है. Chhath Puja 2024:साफ सफाई का रखें ख्याल Chhath Puja 2024:खरना के दिन व्रत का प्रसाद तैयार किया जाता है, जिसको लेकर साफ-सफाई का काफी ख्याल रखा जाता है, व्रती के साथ-साथ घर के दूसरे सदस्य भी प्रसाद बनाने में मदद करते हैं. छठ पूजा के दूसरे दिन प्रसाद बनाया जाता है, घर की महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं. प्रसाद में दूध, गुड़ और चावल की खीर बनाई जाती है. व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्य देव को जल देकर ही इस प्रसाद को ग्रहण करती हैं. फिर घर के बाकी सदस्यों में इसे बांट दिया जाता है. माना जाता है कि छठ पर्व की असली शुरुआत इसी दिन से होती है. करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है और जब तक उगते सूर्य को अर्घ्य नहीं दिया जाता ये कठिन व्रत जारी रहता है. Chhath Puja 2024:ऐसे बनाएं खरना का खीर  Chhath Puja 2024:छठ पूजा के इस खीर को बनाने के लिए गुड़ और दूध का इस्तेमाल होता है. इसे बनाने के लिए दूध में गुड़ न डालें क्योंकि इससे खीर फट सकती है. खीर न फटे इसके लिए आपको इसे बनाने के दौरान इस बातों का ख्याल रखना होता है.  जब दूध और खीर अच्छी तरह से पक जाए और मिला जुला लगने लगे तो गैस बंद कर दें. सबसे पहले चावल को धो लें, और उसे कुछ देर भींगने दें. उसे बाद गर्म पानी में चावल डालकर अच्छी तरह से पकाएं. कोई दूसरा सामान डालने से पहले चावल को छूकर देखें कि चावल पका है या नहीं. जब चावल पक जाएं तो इसमें गुड़ डालें. गुड़ को पूरी तरह से पिघलकर कर चावल के साथ पकने दें. गुड़ पूरी तरह से पिघलने के बाद उसमें दूध मिलाएं और खीर को पकने दें. इसके बाद ऊपर से ड्राई फ्रूट्स काटकर मिलाएं. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें Chhath Puja 2024: नवंबर में कब है छठ पूजा? यहां देखें नहाय-खाय, खरना से लेकर उषा अर्घ्य तक का पूरा कैलेंडर Chhath Puja 2024: छठ पूजा पर भूल कर भी ना करें ये चीजें

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Chhath Puja 2024: छठ पूजा पर भूल कर भी ना करें ये चीजें

Chhath Puja 2024: छठ पर्व का खास महत्व है. इस पर्व में सूर्य और छठी मैया की उपासना की जाती है साथ ही 36 घंटो का कड़ा निर्जला व्रत रखा जाता है जिसके लिए कुछ बातें विषेश है तो आईए जानते है. Chhath Puja 2024: छठ पूजा की शुरुआत इस साल 7 नवंबर 2024 से हो रही है. ये बिहार और झारखंड का सबसे बड़ा पर्व  है जो पूरे देश में बेहद धूम धाम के साथ मनाया जाता है. हिन्दू धर्म में इसका विशेष महत्व है. यह पर्व कार्तिक मास (Kartik Maas) के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को शुरू होता है और सप्तमी तिथि तक चलता है. चार दिनों तक चलने वाला ये पर्व सभी के लिए बहुत खास और एहम  होता है. इसकी शुरुआत नहाय-खाय (Nahay Khaye) के साथ होती है. छठ पूजा में सूर्य देव (Surya Dev) के साथ उनकी बहन छठ मैया की भी पूजा की जाती है. छठ पूजा को लेकर कई मान्यताए है जो इस के व्रत को और भी खास बनाती है. छठ पूजा पर रखे जाने वाला व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. Chhath Puja यह व्रत संतान के लिए रखा जाता है उनकी लंबी उम्र ,अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि  के लिया 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते है. यह व्रत महिलायें रखती है और इसके कुछ कड़े नियम भी है जिनका पालन भी करना पड़ता है. ऐसे में आईये जाने है  Chhath Puja छठ पूजा के दौरान महिलाओं को किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए और कौन सी चीज़े भूल कर भी नहीं करनी चाहिए. Chhath Puja:इन बातों का रखें ध्यान Chhath Puja:छठ पूजा के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि पूजा सही तरीके से संपन्न हो सके और इसका पूरा फल प्राप्त हो सके। यहाँ कुछ ऐसी चीजें बताई गई हैं जिन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए: Chhath Puja:इन बातों का ध्यान रखने से छठ पूजा विधिवत सम्पन्न होती है और इसका संपूर्ण फल प्राप्त होता है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Chhath Puja 2024: नवंबर में कब है छठ पूजा? यहां देखें नहाय-खाय, खरना से लेकर उषा अर्घ्य तक का पूरा कैलेंडर

Chhath Puja 2024 Date And Time: पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से छठ पूजा का आरंभ हो जाता है। यह महापर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। छठ पूजा का मुख्य व्रत कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और भविष्य के लिए सूर्य देव और छठी मैया की पूजा-अर्चना करती है। इस दौरान महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं। यही वजह है कि इस व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। पहले दिन नहाय-खाय के साथ छठ पूजा की शुरुआत होती है। दूसरे दिन लोहंडा और खरना होता है। वहीं तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का पारण किया जाता है और इसी के साथ इस पर्व का समापन हो जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल छठ पूजा कब से शुरू हो रही है। Chhath Puja 2024 Ka Mhetwa:छठ पूजा का महत्व Chhath Puja 2024:छठ पूजा में सूर्य देवता की आराधना की जाती है क्योंकि सूर्य को ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि का स्रोत माना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से संतान की उन्नति और परिवार की सुख-शांति के लिए मनाया जाता है। मान्यता है कि छठ पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। छठ पर्व में व्रती कठिन नियमों का पालन करते हैं, जैसे लगातार दो दिन निर्जला उपवास रखना और पूरी श्रद्धा व संयम के साथ पूजा करना। इसमें प्राकृतिक तत्वों—सूर्य, जल, और वायु—की पूजा करके प्रकृति के प्रति सम्मान और आभार प्रकट किया जाता है। Chhath Puja 2024 Kab Hai:कब है छठ पूजा? दृक पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि के साथ छठ पूजा का आरंभ हो जात है। वहीं षष्ठी तिथि को शाम के समय सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 7 नवंबर को 12 बजकर 41 मिनट (ए एम) से आरंभ हो रही है, जो 8 नवंबर को 12 बजकर 34 मिनट (ए एम) पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 7 नवंबर को ही सूर्य को संध्या अर्घ्य दी जाएगी। Chhath Puja 2024:छठ पूजा 2024 कैलेंडर छठ पूजा का पहला दिन, 5 नवंबर 2024- नहाय खाय (मंगलवार)छठ पूजा का दूसरा दिन, 6 नवंबर 2024- खरना (बुधवार)छठ पूजा का तीसरा दिन, 7 नवंबर 2024- संध्या अर्घ्य (गुरुवार)छठ पूजा का चौथा दिन, 8 नवंबर 2024- उषा अर्घ्य (शुक्रवार) Chhath Puja 2024:नहाय खाय का महत्व नहाय-खाय से छठ पूजा की शुरुआत होती है। नहाय खाय जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट होता है कि इस दिन स्नान करके भोजन करने का विधान है। नहाय खाय के दिन व्रत करने वाली महिलाएं नदी या तालाब में स्नान करती हैं। यहि नदी में नहाना संभव न हो ते घर पर भी नहा सकते हैं। इसके बाद व्रती महिलाएं भात, चना दाल और लौकी का प्रसाद बनाकर ग्रहण करती हैं। Chhath Puja 2024:खरना 2024 छठ पूजा के दूसरे दिन को लोहंडा या खरना कहा जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना का प्रसाद बनाया जाता है। इस दिन माताएं दिनभर व्रत रखती हैं और पूजा के बाद खरना का प्रसाद खाकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का आरंभ करती है। इस दिन मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी से आग जलाकर प्रसाद बनया जाता है। Chhath Puja 2024:तीसरा दिन संध्या अर्घ्य  छठ पूजा के तीसरे दिन शाम के समय नदी या तालाब में खड़े होकर अस्त होते सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही बांस के सूप में फल, गन्ना, चावल के लड्डू, ठेकुआ सहित अन्य सामग्री रखकर पानी में खड़े होकर पूजा की जाती है।  चौथा दिन उषा अर्घ्य छठ पूजा के चौथे और आखिरी दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन व्रती अपने व्रत का पारण करते हैं। साथ ही अपनी संतान की लंबी उम्र और अच्छे भविष्य की कामना करते हैं। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

Chhath Puja 2024: नवंबर में कब है छठ पूजा? यहां देखें नहाय-खाय, खरना से लेकर उषा अर्घ्य तक का पूरा कैलेंडर Read More »

Bhai Dooj 2024 Date: 2 या 3 नवंबर कब है भाई दूज ? यहां जानें सही तिथि और महत्व

Bhai Dooj 2024:यह पर्व दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है, जब बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक करती हैं और उनकी आरती उतारती हैं, वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार और सुरक्षा का वचन देते हैं। Bhai Dooj 2024:भाई दूज का पर्व बहन और भाई के प्रति विश्वास और प्रेम का होता है। इस साल भाई दूज का पर्व किस दिन मनाया जाएगा इस बात को लेकर लोगों के बीच, थोड़ी दुविधा है। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल भाई दूज का पर्व किस दिन मनाया जाता है।  Bhai Dooj 2024: भाई दूज के साथ ही पांच दिवसीय दिवाली उत्सव का समापन होता है। भाई दूज का पर्व बहन और भाई के प्रति विश्वास और प्रेम का होता है। हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन भाई दूज के पर्व मनाया जाता है। देशभर में भाई दूज के पर्व को अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। यह दिन भाई बहन के प्यार और स्नेह के रिश्ते का प्रतीक होता है। हालांकि इस साल भाई दूज का पर्व किस दिन मनाया जाएगा इस बात को लेकर लोगों के बीच, थोड़ी दुविधा है। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल भाई दूज का पर्व किस दिन मनाया जाता है। Bhai Dooj 2024:कब है भाई दूज 2024? कार्तिक मास द्वितीया तिथि का आरंभ 2 नवंबर को रात 8:22 बजे हो जाएगा और कार्तिक द्वितीया तिथि 3 नवंबर को रात में 10:06 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार 3 नवंबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सुबह में 11 बजकर 39 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा। इसके बाद शोभन योग शुरू हो जाएगा। इसलिए भाई दूज के दिन पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त 11:45 मिनट तक रहेगा। भाई दूज का महत्व:Bhai Dooj 2024 MAHETWA हिंदू धर्म में भाई दूज एक प्रमुख त्यौहार है। यह भाई बहन के बीच मान सम्मान और प्रेम प्रकट करने का दिन होता है। शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि पर यम अपनी बहन के घर गए थे। वहां उनकी बहन ने उनका खूब आदर सत्कार किया था, जिससे प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि, जो भाई बहन इस दिन यमुना में स्नान करके यम पूजा करेंगे। वह मृत्यु के बाद यमलोक नहीं जाएगा। भाई दूज को लेकर एक अन्य पौराणिक कथा यह भी है कि भगवान कृष्ण जब नरकासुर राक्षस का वध करके द्वारका लौटे थे, तो भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा ने फूल, मिठाई और अनेकों दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था। इस दिन सुभद्रा ने भगवान कृष्ण के मस्तक पर टीका लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना की थी। तभी से भाई दूज का पर्व मनाने की परंपरा शुरू हो गई डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। गोवर्धन पूजा पर भूल से भी न करें ये 8 अशुभ काम

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गोवर्धन पूजा पर भूल से भी न करें ये 8 अशुभ काम

गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है. इस  पूजा की शुरुआत भगवान श्री कृष्ण ने की थी. इस दिन प्रकृति के आधार के रूप में गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है और समाज के आधार के रूप में गाय की पूजा होती है.  अगर आप भी गोवर्धन पूजा करते हैं और परिक्रमा पर जाते हैं तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें. गोवर्धन पूजा पर कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्हें अशुभ माना जाता है और इनसे बचना चाहिए। यहां आठ ऐसे कार्य दिए गए हैं जिन्हें गोवर्धन पूजा के दिन भूल से भी नहीं करना चाहिए: 1. जूठे या अशुद्ध स्थान पर पूजा न करें पूजा स्थान और स्वयं को शुद्ध करके ही पूजा करनी चाहिए। अशुद्धता से भगवान की कृपा नहीं मिलती। गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन बंद कमरे में न करें. गायों की पूजा करते हुए ईष्टदेव या भगवान कृष्ण की पूजा करना न भूलें. 2. अहंकार से बचें इस दिन अहंकार और घमंड से बचना चाहिए, क्योंकि भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। विनम्रता और भक्ति के साथ पूजा करें। परिवार के सभी लोग अलग अलग होकर पूजा ना करें, एक साथ ही पूजा-अर्चना करें. 3. प्रकृति का अनादर न करें गोवर्धन पूजा में प्रकृति और पर्यावरण का सम्मान किया जाता है। इस दिन जल, वायु, पेड़-पौधों, और जीव-जंतुओं का अनादर नहीं करना चाहिए। पूजन में सम्मिलित लोग काले रंग के कपड़े न पहनें. हल्के पीले या नारंगी रंग के वस्त्र पहनें तो उत्तम रहेगा. 4. गायों को परेशान न करें गोवर्धन पूजा पर गायों का विशेष महत्व है, इसलिए उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए। बल्कि उनकी सेवा और पूजा करें। गोवर्धन पूजा के दिन गाय या जीवों की सेवा करें और उन्हें खाना खिलाएं. 5. अन्न का अपमान न करें गोवर्धन पूजा पर अन्नकूट का भोग तैयार किया जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के अन्न का उपयोग होता है। अन्न का अपमान करना अशुभ माना जाता है, इसलिए अन्न का आदर करें। परिक्रमा करते समय जूते, चप्पल न पहनें. अगर कोई व्यक्ति कमजोर हो या फिर कोई छोटा बच्चा साथ में हो तो रबड़ की चप्पल या फिर कपड़े के जूते पहन सकते हैं. 6. लड़ाई-झगड़ा न करें गोवर्धन पूजा का उद्देश्य शांति और भाईचारे का संदेश देना है, इसलिए इस दिन किसी भी प्रकार का वाद-विवाद या झगड़ा नहीं करना चाहिए। गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कभी भी अधूरी नहीं छोड़नी चाहिए. 7. दुर्व्यवहार या कठोर वाणी का प्रयोग न करें इस दिन विशेष रूप से मधुर और विनम्र वाणी का प्रयोग करना चाहिए। कठोर वाणी का प्रयोग भगवान की कृपा में बाधा डाल सकता है। किसी भी प्रकार का धूम्रपान या कोई भी नशीली वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए. Govardhan Puja 2024: गोवर्धन पूजा में क्यों करते हैं गायों की पूजा, क्यों बनता है अन्नकूट का भोग? 8. बड़ों का अपमान न करें इस दिन अपने से बड़े और बुजुर्गों का आदर करना चाहिए। उनका अपमान करने से पुण्य की हानि होती है और भगवान की कृपा प्राप्त नहीं होती। इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए गोवर्धन पूजा में श्रद्धा और समर्पण के साथ पूजा करें, जिससे भगवान कृष्ण की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त हो सके। गोवर्धन पूजा पर क्या करना चाहिए गोवर्धन पूजा में कुछ विशेष कार्य और विधियाँ हैं जिन्हें करने से भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। यहां बताया गया है कि गोवर्धन पूजा में क्या करना चाहिए: 1. पूजा स्थल की सफाई और सजावट सबसे पहले पूजा स्थान को अच्छे से साफ करें और गंगाजल या साफ जल से शुद्ध करें। रंगोली बनाएं और फूलों से सजाएं, जिससे पूजा स्थल का वातावरण पवित्र और सुंदर बने। 2. गाय और बछड़ों की पूजा करें गोवर्धन पूजा पर गायों का विशेष महत्व है। इस दिन गायों को नहलाकर सजाएं, उनके सींगों पर हल्दी और सिंदूर लगाएं, और उन्हें फूलों की माला पहनाएं। गायों को ताजे हरे चारे, गुड़, और मिठाई का भोग लगाएं और उनकी पूजा करें। 3. गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाएं घर में गोबर से गोवर्धन पर्वत का छोटा सा प्रतीकात्मक ढेर बनाएं और इसे फूलों से सजाएं। इसे गोवर्धन पर्वत का प्रतीक मानकर भगवान कृष्ण की पूजा करें। 4. अन्नकूट का भोग तैयार करें अन्नकूट का भोग तैयार करें जिसमें चावल, दाल, सब्जियाँ, मिठाई, रोटी और अन्य व्यंजन बनाएं। इन पकवानों को गोवर्धन पर्वत के प्रतीक और भगवान कृष्ण को अर्पित करें। भोग में पकवानों का ढेर बनाकर पर्वत का रूप दें। 5. भगवान कृष्ण की पूजा करें भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं, चंदन, फूल, धूप, और तुलसी दल अर्पित करें। भगवान कृष्ण को भोग लगाने के बाद उनकी आरती करें और भक्ति भाव से उनकी प्रार्थना करें। 6. गोवर्धन परिक्रमा करें गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर उसकी परिक्रमा करें। इसे 3 या 7 बार घूमें, और गोवर्धन पर्वत की महिमा का स्मरण करते हुए भक्ति भाव से परिक्रमा करें। 7. भोग और प्रसाद का वितरण करें अन्नकूट के भोग को परिवार और समुदाय में बाँटें। इसे प्रसाद के रूप में सभी के बीच वितरित करें। इससे समाज में एकता और प्रेम का संदेश मिलता है। 8. गायों की सेवा और दान करें इस दिन गायों की सेवा करें और उन्हें अच्छे भोजन का दान करें। इसके साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, और धन का दान करें। यह कार्य पुण्य का कारक माना जाता है। इन सभी विधियों के साथ श्रद्धा और विश्वास के साथ गोवर्धन पूजा करें। भगवान कृष्ण की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।

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Govardhan Puja 2024: गोवर्धन पूजा में क्यों करते हैं गायों की पूजा, क्यों बनता है अन्नकूट का भोग?

Govardhan Puja 2024: हर साल बड़े ही धूमधाम से दीपोत्सव मनाया जाता है. इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और पांच दिनों दिवाली मनाई जाती है. इसके ठीक बाद गोवर्धन पूजा करने की परंपरा है, लेकिन क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं? Govardhan Puja 2024: वैसे तो सनातन धर्म में हर त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन दीपों के उत्सव दीपावली की अलग ही रौनक होती है. ये त्योहार धनतेरस से शुरू होकर पांच दिनों तक मनाया जाता है. जैसे ही ये त्योहार खत्म होता है, उसके ठीक बाद गोवर्धन की पूजा की जाती है. इसके पीछे की वजह भी बेहद खास है. दरअसल, हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा होती है. इस दौरान घर के बाहर गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा की जाती है. गोवर्धन पूजा में गायों की पूजा का भी खास महत्व है. क्यों मनाया जाता है ये पर्व?गोवर्धन पूजा भागवत पुराण में बताई गई पौराणिक कथाओं पर आधारित है. मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने वृंदावन वासियों से इंद्रदेव को प्रसाद चढ़ाने के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा था. जब इस बात की जानकारी वर्षा के देवता इंद्रदेव को हुई तब वो क्रोधित होकर वृंदावन पर मूसलाधार बारिश करने लगे. इस बारिश ने देखते ही देखते भयावह रूप ले लिया. जिससे वृंदावन वासियों और जानवरों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठा लिया. Govardhan Puja 2024: कब और क्यों मनाई मनाया जाता है गोवर्धन पूजा का पर्व? क्या है इस दिन का शुभ मुहूर्त इंद्रदेव ने मांगी श्रीकृष्ण से माफीसात दिनों तक गोवर्धन पर्वत के नीचे ही वृंदावन वासियों ने शरण ली. इसके बाद ब्रह्मजी ने इंद्रदेव को बताया कि भगवान विष्णु ने ही पृथ्वी लोक पर श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया है. उनसे बैर लेना ठीक नहीं है. जब ये बात इंद्रदेव को पता चली तो उन्होंने श्रीकृष्ण से माफी मांगी. इसके बाद भगवान ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रख दिया. फिर हर साल गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा श्रीकृष्ण ने दी. जिसके बाद गोवर्धन पूजा का उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा. इस दिन घरों में अन्नकूट का भोग बनाया जाता है. हर घर में गाय के गोबर से गोवर्धन महाराज की प्रतिमा बनाकर पूरे परिवार के साथ पूजा अर्चना की जाती है. गायों की पूजा का महत्व गायों को भारतीय संस्कृति में “माता” का दर्जा दिया गया है, और इन्हें समृद्धि, शांति, और पालन-पोषण का प्रतीक माना जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन गायों को सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है, क्योंकि भगवान कृष्ण भी ग्वालों और गायों के साथ जुड़े हुए थे और वे उन्हें बहुत प्रिय थे। गायों की पूजा करने से भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। अन्नकूट भोग का महत्व अन्नकूट का अर्थ है “अन्न का ढेर।” गोवर्धन पूजा के दिन विभिन्न प्रकार के अन्न, सब्जियाँ, मिठाई, और पकवान बनाकर भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत को अर्पित किए जाते हैं। यह भोग भगवान को प्रकृति से मिली संपदा का धन्यवाद देने के उद्देश्य से चढ़ाया जाता है। अन्नकूट भोग में पकवानों का ढेर बनाकर उसे पर्वत के आकार में सजाया जाता है, जो गोवर्धन पर्वत का प्रतीक है। इस भोग को बाँटकर प्रसाद के रूप में सभी में वितरित किया जाता है, जिससे समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी मिलता है। गोवर्धन पूजा की कथा पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने गोकुलवासियों को इंद्रदेव की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। जब इंद्रदेव ने इस बात पर क्रोधित होकर भारी वर्षा की, तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर सभी की रक्षा की। इस घटना के बाद गोवर्धन पूजा का प्रचलन हुआ, जिसमें प्रकृति, गोवर्धन पर्वत, और गायों का महत्व प्रतिपादित होता है।

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Govardhan Puja 2024: कब और क्यों मनाई मनाया जाता है गोवर्धन पूजा का पर्व? क्या है इस दिन का शुभ मुहूर्त

Govardhan Puja:गोवर्धन पूजा का पर्व भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत को समर्पित है। यह पर्व हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि (Govardhan Puja Date 2024) को मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना और 56 भोग अर्पित करने से साधक को समस्त दुख और संताप से छुटकारा मिलता है। Govardhan puja 2024: हिंदू धर्म में दीपावली (Diwali) का त्योहार 5 दिन तक मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस के साथ होती है. इसके बाद रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन और भाई दूज का पावन त्योहार मनाया जाता है, लेकिन इस बार दीपावली की डेट को लेकर बहुत असमंजस चल रहा है. जिसके कारण आगे और पीछे के त्योहारों को लेकर भी कंफ्यूजन है, तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा (Govardhan puja) कब की जाएगी. बता दें कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण (Lord Shri Krishna) की पूजा अर्चना की जाती है, साथ ही गोवर्धन पर्वत बनाकर उसकी भी आराधना होती है. आइए जानें इसकी सही तारीख क्या है और इस दिन आप किस तरीके से पूजा अर्चना कर सकते हैं. Govardhan Puja:गोवर्धन पूजा 2024 Date हिन्दू धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व होता है, जो हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है. कहते हैं कि इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना की जाए तो सभी दुख और संताप दूर हो जाते हैं. इस बार गोवर्धन पूजा का पावन त्योहार 2 नवंबर 2024 को मनाया जाएगा, हालांकि इसकी तिथि 1 नवंबर 2024 को शाम 6:16 को शुरू हो जाएगी और इसका समापन 2 नवंबर को रात 8:21 पर होगा, ऐसे में उदिया तिथि के अनुसार गोवर्धन पूजा का त्योहार 2 नवंबर को ही मनाया जाएगा. Govardhan Puja Subh Muhurat:गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त  ज्योतिषों के अनुसार, गोवर्धन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 2 नवंबर 2024 को सुबह 6 बजे से लेकर 8:00 तक रहेगा. इसके बाद दोपहर में 3:23 से लेकर 5:35 के बीच में भी पूजा अर्चना की जा सकती है. गोवर्धन पूजा के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गोबर से गोवर्धन पर्वत और भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति बनाई जाती है, मूर्ति को फूलों और रंगों से सजाया जाता है. इसके बाद गोवर्धन पर्वत और भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना की जाती है, भगवान को फल, फूल, मिष्ठान आदि अर्पित किए जाते हैं. इस दौरान कढ़ी और अन्नकूट, चावल का भोग जरूर लगाया जाता है. इसके बाद इस दिन गाय, बैल और भगवान विश्वकर्मा की पूजा भी की जाती है, पूजा करने के बाद घर में बनाए गए गोवर्धन पर्वत की सात परिक्रमा की जाती है और आखिर में आरती करके पूजा को संपन्न किया जाता है. Govardhan Puja:गोवर्धन पूजा विधि Govardhan Puja ka mahetwa:गोवर्धन पूजा का महत्व गोवर्धन पूजा के दिन को हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपने उंगली पर उठाकर इंद्र देव की घमंड को चूर-चूर किया था। इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा तो की ही जाती है, साथ ही यह त्योहार मानव और प्रकृति के बीच के संबंध को भी दर्शाता है। इस दिन दान-पुण्य करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और आपके जीवन में सकारात्मकता आती है। गोवर्धन महाराज की पूजा के साथ ही इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा आराधना करने से भी आपको लाभ मिलता है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Dhanteras ke din deepak kaha jalaye : धनतेरस के दिन इन जगहों पर दीपक जलाने से घर में होगा मां लक्ष्मी का वास!

deepak:lighting lamp on dhanteras : हिंदू धर्म में धनतेरस के पर्व से साथ ही रोशनी का त्योहार माने जाने वाले 5 दिन के उत्सव दिवाली की शुरुआत हो जाती है. धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए लोग तरह तरह की खरीदारी करते हैं और अपने घर को दीपक से सजाते हैं. deepak:धनतेरस पर दीप जलाने की परंपरा माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का स्वागत करने के लिए की जाती है, ताकि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। यहाँ कुछ विशेष स्थान दिए जा रहे हैं जहाँ दीपक जलाने से घर में माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है: इस वर्ष कब है धनतेरस? (Dhanteras 2024 Date) deepak:वैदिक पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि का आरंभ मंगलवार 29 अक्टूबर 2024 की सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर होगा, और त्रयोदशी तिथि का समापन अगले दिन बुधवार 30 अक्टूबर 2024 की दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस का त्योहार 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा. धनतेरस के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त (Dhanteras 2024 Puja Shubh Muhurat) हिंदू पंचांग के अनुसार, धनतेरस पूजा के लिए शुभ मुहूर्त की शुरुआत मंगलवार 29 अक्टूबर शाम 6 बजकर 31 मिनट से लेकर 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा, इस बार धनतेरस की पूजा के लिए कुल 1 घंटा 41 मिनट का समय मिलेगा. 1. मुख्य द्वार पर दीपक deepak 2. पूजा स्थल या मंदिर में 3. तिजोरी या धन रखने की जगह 4. रसोईघर में 5. पानी की टंकी के पास 6. द्वार पर मांडवा या तुलसी के पौधे के पास 7. छत पर दीपक 8. घर के प्रत्येक कोने में 9. द्वार पर रंगोली के साथ दीपक deepak 10. बगीचे या आंगन में इन विशेष स्थानों पर दीपक जलाने से घर में माँ लक्ष्मी का वास होता है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। ध्यान रहे कि दीपक नियमित रूप से जलते रहें ताकि माँ लक्ष्मी की कृपा अनवरत बनी रहे।

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