MADHYA PRADESH

दत्ता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

मंदिर में दत्रात्रेय भगवान की पाषाण की प्रतिमा विराजमान है। दत्ता मंदिर:इंदौर मध्यप्रदेश के कान्ह नदी (खान) के समीप कृष्णपुरा छत्री के पास स्थित है दत्त मंदिर। दत्त मंदिर भगवान दत्तात्रेय को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान दत्तात्रेय विष्णु, महेश और ब्रह्मा का एक स्वरुप है। दत्ता मंदिर धर्म ग्रंथों में श्री दत्तात्रेय भगवान को विष्णु जी का छठा अवतार बताया गया है। भगवान दत्रात्रेय गुरु और भगवान दोनों का ही रूप है इसलिए इन्हे श्री गुरुदेवदत्त भी कहा जाता है। मंदिर का इतिहास दत्त मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो यह मंदिर 700 साल पुराना है। इंदौर शहर के अस्तित्व में आने से पहले से ही यह मंदिर स्थापित था। इस बात की पुष्टि होलकर रियासत के सूबेदार मल्हारराव होलकर ने मालवा आगमन से पूर्व की थी। माता अहिल्या बाई होल्कर भी इस मंदिर के दर्शन करने आती थी। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 1896 में किया गया था। Shree Datta Mandir:मंदिर का महत्व ऐसा माना जाता है यदि कोई भक्त तीनों ईश्वरीय शक्तियों से निहित भगवान दत्तात्रेय की आराधना करता है तो उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। भक्त को दत्ता मंदिर भगवान दत्तात्रेय की आराधना से हर तरह की कठिनाई से मुक्ति मिल जाती है। छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके पुत्र औरंगजेब को चकमा देकर कुछ समय के लिए इसी दत्त मंदिर में सन्यासी के रूप में रहे थे। दत्ता मंदिर हर गुरुवार और दत्त जयंती पर मंदिर में श्रद्धालुओं का भीड़ रहती है। लोग दत्तात्रेय भगवान के दर्शन करने और अपनी कामना लेकर मंदिर आते है। भगवान उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते है। मंदिर की वास्तुकला दत्त मंदिर लकड़ी से निर्मित बहुत ही सुन्दर मंदिर है। मंदिर में दत्रात्रेय भगवान की पाषाण की प्रतिमा विराजमान है। दत्ता मंदिर में तीन मुख और 6 हाथ वाले त्रिदेव की मूर्ति है। उनके पीछे एक गाय और आगे चार कुत्ते रहते है। साथ ही आपको मंदिर में गूलर के वृक्ष के भी दर्शन करने को मिलेंगे। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 10:00 AM – 12:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद दत्त मंदिर में गुड़,चना और केले का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूल भी चढ़ाये जाते है।

दत्ता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

गोपाल मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

गोपाल मंदिर में राधा-कृष्ण की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं। इस मंदिर को 190 साल पुराना बताया जाता है। गोपाल मंदिर:भारत के मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में बड़ा बाजार चौक के बीच मंदिर स्थित है। मंदिर में राधा-कृष्ण की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं। इस मंदिर को 190 साल पुराना बताया जाता है। गोपाल मंदिर परिसर में आश्रय स्थल पत्थरों, लकड़ी और लोहे से बने हैं। बीते सालों में मूल मंदिर को छोड़कर आसपास का पूरा हिस्सा काफी जर्जर हो गया था, जिसके बाद ऐतिहासिक मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किया गया है। Gopal Mandir:मंदिर का इतिहास गोपाल मंदिर का निर्माण 1832 में महाराजा यशवंतराव होलकर की पत्नी कृष्णाबाई होलकर ने कराया था। वे भगवान कृष्ण की परम भक्त थीं। गोपाल मंदिर में राधा-कृष्ण की मूर्तियों के अलावा भगवान वरुण, वाराह अवतार, पद्मावती लक्ष्मी देवी की मूर्तियां भी हैं। उस समय इस मंदिर का निर्माण 80 हजार रुपये में हुआ था। मंदिर परिसर करीब सवा एकड़ में है। खास बात यह कि पूरा मंदिर पत्थरों और लकड़ियों से बना है। यहां मंदिर के अलावा आश्रय स्थल पत्थरों, लकड़ी और लोहे से बने हैं। Gopal Mandir:मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि मंदिर में दर्शन पूजन से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं व भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है। गोपाल मंदिर में अत्यंत सौभाग्यशाली ही प्रवेश कर पाता है। मंदिर में प्रार्थना करने का सबसे अच्छा समय वसंत पंचमी के दिन होता है। मंदिर की छत और दीवारों के प्लास्टर और जुड़ाई के लिए ईट का चूरा, चूना, मैथी दाना, उड़द की दाल, गुड़ जैसे मटेरियल इस्तेमाल किया गया है। Gopal Mandir:मंदिर की वास्तुकला गोपाल मंदिर का मुख्य आकर्षण इसकी आकर्षक वास्तुकला है। मंदिर एक संगमरमर सर्पिल की संरचना है, जो प्राचीन मराठा शैली की वास्तुकला में बनवाया गया है। इसमें एक बड़ा केन्द्रीय हाल है, जिसमें अस्तर की छत वाले विशाल खम्बे बने हुए हैं। सभी स्तम्भ को डिजाइन किया गया है। विशाल कांच के झूमर जब जल उठते हैं तो मंदिर की वास्तुकला प्रणाली सभी की आंखों को चकाचौंध कर देती है। मंदिर में भगवान कृष्ण की प्रतिमा गर्भगृह में विराजित है, जो चांदी से निर्मित दरवाजों के साथ संगमरमर की आकर्षक वेदी पर विराजित की गई है। मंदिर का जीर्णोद्धार 2022 में हुआ। होल्कर काल में मंदिर के आश्रय स्थल, परिसर की दीवारों में सीमेंट उपयोग नहीं किया गया था। मंदिर के जीर्णोद्धार में हेरिटेज के सारे नॉर्म्स का पालन किया गया। छत और दीवारों के प्लास्टर और जुड़ाई के लिए सुर्खी (ईट का चूरा), चूना, मैथी दाना, उड़द की दाल, गुड़ आदि मटेरियल यूज किया गया। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 09:00 PM शृंगार आरती 07:00 AM – 08:00 AM राज भोग 11:00 AM – 12:00 PM शयन आरती का समय Invalid date – 12:09 PM मंगला आरती 05:00 AM – 06:00 AM बाल भोग 09:00 AM – 10:00 AM संध्या आरती का समय 07:30 PM – 08:30 PM मंदिर का प्रसाद गोपाल मंदिर में कान्हा जी को मिश्री,माखन और पंचमेवे के लड्‌डू का भोग चढ़ाया जाता है। इसके अलावा भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पेड़े, पंजीरी का भोग लगाते हैं।

गोपाल मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

रणजीत हनुमान मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

हनुमान जी को समर्पित यह मंदिर बहुत ही चमत्कारिक है। रणजीत हनुमान मंदिर:मध्य प्रदेश के स्वच्छ शहर इंदौर के फूटी कोठी रोड पर रणजीत हनुमान मंदिर स्थित है। हनुमान जी को समर्पित यह मंदिर बहुत ही चमत्कारिक है। प्रतिदिन इस मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है। परन्तु प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहाँ पर विशेष आरती होती है। जिस कारण बहुत भीड़ देखने को मिलती है। आपने हनुमान जी की कई तरह की प्रतिमाये देखीं होगी परन्तु रणजीत हनुमान जी की इस प्रतिमा को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि वे किसी युद्ध में जाने की तैयारी में हैं। RANJEET HANUMAN MANDIR:का इतिहास रणजीत हनुमान मंदिर के इतिहास से जुड़ी कोई सटीक जानकारी नहीं है। इस मंदिर के इतिहास से जुड़ी मान्यता है कि इंदौर शहर के पहलवान अल्हड़सिंह भारद्वाज, हनुमान जी के अनन्य भक्त थे। उन्होंने सन् 1907 में गुमाश्ता नगर में वीरान जंगलों में भगवान हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित किया और एक छोटा सा अखाडा बनाया। समय के साथ साथ इस स्थान पर कई चमत्कार होने लगे। तब से यह मंदिर “रणजीत हनुमान मंदिर” के नाम से जाना जाने लगा। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति अपने रण अर्थात अपने कार्य क्षेत्र में ख्याति पाना चाहते है वह रणजीत हनुमान के दर्शन करने आते है। रणजीत हनुमान मंदिर में सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इतना ही नहीं इस मंदिर में नेता, अभिनेता भी अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में कई राजा युद्ध लड़ने से पूर्व जीत का आशीर्वाद लेने हेतु आते थे। परन्तु कोई भी ऐसा भक्त आज तक नहीं आया जिसने बोला हो कि उसकी हार हुयी है। मंदिर की वास्तुकला रणजीत हनुमान मंदिर का 130 साल पुराना है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है। मंदिर में प्रवेश करने से आप भक्तिमय हो जायेंगे। हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन मुख्य द्वार से ही होने लगते है। मंदिर के अंदर हनुमान जी की भव्य प्रतिमा है। वह ढाल और तलवार के साथ विराजित है। हनुमान जी के चरणों में अहिरावण है। मंदिर में शिव जी, राम सीता और दुर्गा देवी की प्रतिमाएं भी विराजित है। इसके अलावा मंदिर के समीप ही कई देवी देवताओं के छोटे छोटे मंदिर भी बनाये गए हैं। भगवान शनि के साथ साथ नव गृह के दर्शन भी आपको इस मंदिर में करने को मिलेंगे। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 02:00 PM सायंकाल आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 10:00 PM शनिवार और रविवार आरती का समय 08:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद रणजीत हनुमान मंदिर में भगवान को चना चिरौंजी, मिठाई, पेड़ा, लड्डू आदि का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूलों की माला भी अर्पित की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा से नारियल भी चढ़ाते है।

रणजीत हनुमान मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

मनुआभान टेकरी मंदिर:भोपाल, मध्य प्रदेश, भारत

यह भोपाल की सबसे ऊंची जगह लालघाटी में स्थित है। इसी टेकरी पर बना है खूबसूरत जैन श्वेतांबर मंदिर। मनुआभान टेकरी मंदिर:मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में सबसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक है मनुआभान की टेकरी, जिसका नाम अब महावीर गिरी हो चुका है। यह भोपाल की सबसे ऊंची जगह लालघाटी में स्थित है। इसी टेकरी पर बना है खूबसूरत जैन श्वेतांबर मंदिर। श्वेतांबर जैन समाज इसे अपना तीर्थस्थल मानता है। मनुआभान टेकरी समुद्र तल से 1300 फीट ऊंची है। यहां से भोपाल की शान कहे जाने वाले बड़ा तालाब व पूरे शहर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। टेकरी पर लगे रोपवे का रोमांच उठाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। मंदिर से सूर्योदय व सूर्यास्त देखना भी काफी आकर्षक लगता है। मनुआभान टेकरी पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। मनुआभान टेकरी मंदिर का इतिहास मनुआभान राजा भोज का दरबारी था। वह कई प्रकार के हाव-भाव व वेश बदलकर राजा का मनोरंजन करता था। कुछ समय बाद वह यह सब छोड़कर भगवत सिद्धि में लीन हो गया, जिसके बाद उसे मन्तुगाचार्य कहने लगे। उसी के नाम पर इस टेकरी का नाम पड़ा, जो अपभ्रंश होकर मनुआभान टेकरी के नाम से जानी जाने लगी। कहा जाता है कि यह टेकरी ओसवाल राजवंश की साधना स्थली भी है। श्वेतांबर जैन मंदिर का इतिहास करीब 150 साल पुराना है। कहा जाता है कि नवाब कुदसिया बेगम ने मनुआभान टेकरी पर उत्खनन का काम कराया था, जिसमें तीर्थंकर महावीर की प्रतिमा मिली। इस प्रतीमा को भोपाल शहर के चौक के श्वेताम्बर मंदिर में स्थापित कर दिया गया। जबकि टेकरी पर स्थित मंदिर में प्रतिमा के पदचिन्ह व 7 गुफाएं हैं, जिनमें संत रहते हैं। मनुआभान टेकरी मंदिर का महत्व इस मंदिर को लेकर मान्यताएं है की यहाँ कुछ भी खाकर नहीं जाया जाता। भक्तों को खाली पेट जाना होता है। इस मंदिर में भक्तों को काला वस्त्र, लुंगी, हाफ पैंट या गाउन पहनकर प्रवेश करने की मनाही होती है। मनुआभान टेकरी मंदिर में चमड़े का कोई भी सामान ले जाना वर्जित है। इस मंदिर के अंदर फोटो खींचना व कैमरा ले जाना भी मना है। मनुआभान टेकरी मंदिर की वास्तुकला जैन श्वेतांबर मंदिर को काफी खूबसूरत राजस्थानी शैली में बनाया गया है। मंदिर के खंभों पर शानदार नक्काशी देखने को मिलती है। मुख्य द्वारा को काफी सुंदर तरीके से सजाया गया है। द्वार के ऊपर स्वास्तिक का चिन्ह व एक प्रतिमा सुशोभित है। मंदिर में मुख्य रूप से संगमरमर से बनी महावीर स्वामी जी की प्रतिमा के दर्शन होते हैं। इसके अलावा मंदिर में भगवान गौतम स्वामी जी, पद्मावती देवी, भगवान आदिनाथ जी, भगवान शांतिनाथ जी व सिंदूर से सुशोभित श्रीमणिभद्रवीर जी की प्रतिमा स्थापित है। प्राचीन मंदिर में एक शिलाखंड भी है, जिसपर हिंदी व उर्दू में मंदिर का इतिहास लिखा हुआ है। मंदिर के सिंह द्वार पर पत्थरों पर नक्काशी की हुई एक पुरानी पांडुलिपि है। मनुआभान टेकरी मंदिर का समय सुबह मन्दिर खुलने का समय 07:00 AM – 12:30 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 07:30 PM मंदिर का प्रसाद जैन श्वेतांबर मंदिर में प्रसाद चढ़ाने व बांटने की कोई परंपरा नहीं है।

मनुआभान टेकरी मंदिर:भोपाल, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

हरसिद्धि माता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

इसे शहर का सबसे पुरातन मंदिर माना जाता है। हरसिद्धि माता मंदिर, भारत के मध्य प्रदेश राज्य के इंदौर शहर में स्थित है। इसे शहर का सबसे पुरातन मंदिर माना जाता है। हरसिद्धि माता मंदिर के दाई और एक पुराना सा खंडहर भी बना है जिसे रुक्मणी देवी का मंदिर कहा जाता है जो पुरातत्व विभाग के देख-रेख में संचालित होता है। हरसिद्धि माता मंदिर में मुंडन संस्कार से लेकर शादी समारोह का आयोजन भी होता है। मंदिर के पुजारी के अनुसार वर्ष में दो बार चैत्र नवरात्रि की दशमी और अश्विन मास की दशमी को मां का विशेष श्रृंगार किया जाता है। भक्तगण इस दिन मां के दर्शन सिंहवाहिनी के रूप में करते हैं। Harsiddhi Mata Temple:हरसिद्धि माता मंदिर का इतिहास हरसिद्धि माता मंदिर का निर्माण देवी अहिल्याबाई होलकर ने 21 मार्च 1766 को कराया था। तब यहाँ उनके पुत्र श्रीमंत मालेरावजी का शासन था। मंदिर में स्थापित देवी की दिव्य मूर्ति पूर्वाभिमुखी महिषासुर मर्दिनी मुद्रा में है। मंदिर परिसर में बाद में निर्मित शंकरजी व हनुमान जी के मंदिर भी हैं। मंदिर के सामने कभी एक पक्की बाव़ड़ी हुआ करती थी। माँ की मूर्ति इसी बाव़ड़ी से मिली थी। मंदिर का महत्व लोगों की मान्यता है कि यहाँ पूजा करने से शरीर पर निकलने वाले दाने, जिन्हें स्थानीय बोलचाल में (माता) कहते हैं, नहीं निकलते। देवी हरसिद्धि के नेत्र अलग से लगाए हैं। प्रतिमा के जो नेत्र हैं वह थोड़े छोटे हैं। कई वर्षों से उन्हें मीनाकार (मछली के आकार की) नेत्र लगाए जा रहे हैं। यह नेत्र नाथद्वारा से आते हैं। चांदी पर मीना लगाकर इन नेत्रों को तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि इन नेत्रों को लगाने के लिए किसी भी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। नेत्रों को लगाने के लिए मधुमक्खी के छत्ते से निर्मित मेंढ लगाया जाता है। मंदिर की वास्तुकला हरसिद्धि माता मंदिर मराठा शैली में बना है। मंदिर में देवी हरसिद्धि, देवी महालक्ष्मी और देवी सिद्धिदात्री विराजमान है। देवियों की प्रतिमाएं भी काफी विशेष है। दिर का निर्माण वास्तु के अनुरूप किया गया है।सूर्योदय के समय सूर्य की किरणें मूर्ति पर पड़ती हैं। परिसर में अष्ट भैरव स्थापित है। मंदिर में हरसिद्धि देवी का महिषासुर मर्दिनी के रूप में है। चारभुजाधारी देवी के दाए हाथों में से एक में तलवार और दूसरे में त्रिशुल है जबकि बाए हाथों में से एक में घंटी और दूसरे में नरमुंड है। हरसिद्धि देवी की संगमरमर की यह प्रतिमा करीब चार फीट की है। इसी प्रकार मंदिर में विराजित महालक्ष्मी की प्रतिमा भी कुछ खास है। हरसिद्धि माता मंदिर में महालक्ष्मी की प्रतिमा काले पाषाण की है। यह प्रतिमा करीब ढ़ाई फीट की है। देवी के एक हाथ में अमृत तो दूसरे हाथ में पद्मपुष्प (कमल) है। जबकि तीसरी प्रतिमा सिद्धिदात्री की है, जो बिलकुल देवी हरसिद्धि के रुप से मिलती जुलती है। सिद्धिदात्रि की यह प्रतिमा संगमरमर की है। चारभुजाधारी इस प्रतिमा के दाए हाथों में से एक में खट्ग और त्रिशुल है, जबकि बाए हाथों में से एक में ढाल और दूसरे में मुंड है। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 05:30 AM – 09:00 PM श्रृंगार आरती 08:30 AM – 09:15 AM सुबह की आरती 05:30 AM – 06:00 AM सायंकाल आरती 07:30 PM – 08:15 PM मंदिर का प्रसाद हरसिद्धि माता मंदिर में मां को फल, लड्डू, ड्राई फ्रूट्स और पेड़े का भोग चढ़ाते है। कुछ श्रद्धालु माता को अपनी श्रद्धा के अनुसार पूड़ी-सब्जी का भोग भी लगाते हैं।

हरसिद्धि माता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

वैष्णो धाम मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

माता का यह मंदिर कटरा के वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर ही बना हुआ है। इंदौर मध्यप्रदेश में ऐसे भी मंदिर है जो धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्त्व रखते है। उनमे से एक है माँ वैष्णो धाम मंदिर। यह मंदिर गुरु नानक कॉलोनी लालबाग में है। जो लोग इंदौर घूमने आते है वह इस मंदिर के दर्शन करने जरूर जाते है। माता का यह मंदिर कटरा के वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर ही बना हुआ है। इस मंदिर के दर्शन करने से ऐसा लगता है मानों कटरा में स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर के साक्षात् दर्शन हो रहे हों। वैष्णो धाम मंदिर का इतिहास Vaishno Dham Temple:एक बार श्रीमती सुरिंदर कौर ग्रोवर के सपने में माँ वैष्णो माता प्रकट हुईं और उन्होंने इंदौर शहर में भव्य मंदिर निर्माण की इच्छा प्रकट की और उन्हें आशीर्वाद दिया। श्रीमती सुरिंदर कौर ग्रोवर ने माता की इच्छा अनुसार सन 2009 में मंदिर निर्माण करवाया। “वैष्णव धाम” को पूर्ण होने में चार साल का समय लगा। गुफाओं के निर्माण में सात महीनों का समय लगा। 2 अखंड ज्योति मंदिर के गर्भगृह में सदैव जलती रहती है। वैष्णो धाम मंदिर का महत्व पहाड़ियों पर गुफाओं से होते हुए मां वैष्णोदेवी के दर्शन करने से मन को असीम शांति मिलती है। गुफाओं में अंदर मां वैष्णो के दर्शन से पहले रिद्धि-सिद्धि के साथ भगवान श्री गणेश के दर्शन होते हैं। गुफाओं में जाते समय झरने, पक्षियों का कोलाहल मन को आनंदित कर देता है। गुफाओं से होते हुए शिवधाम पहुंचते हैं जहां भगवान शिव के साथ विराजमान संपूर्ण शिव परिवार के भव्य दर्शन होते हैं। माता की प्रतिमा के समीप ही परम भक्त हनुमान जी के दर्शन होते हैं। माता की तीनों पिण्डियों को कटरा से लाया गया है। साथ ही अखंड ज्योति भी कटरा से लायी गयी है। जो आज भी जल रही है। वैष्णो धाम मंदिर की वास्तुकला मंदिर की वास्तुकला हूबहू माता वैष्णो देवी के मंदिर से मिलती जुलती है। मंदिर में कई गुफाएं है। जिसमे में गुजरते हुए आप माता के दर्शन कर सकते हैं। यह गुफा भव्य और सुन्दर बनाई गई है। जिसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। गुफा के रास्ते में आकर्षक जलप्रपात भी बने हुए हैं। जो मंदिर की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। मंदिर में महाकाली, महालक्ष्मी और महा सरस्वती पिंड स्वरुप में विराजित है। मंदिर में माता के साथ साथ अन्य देवता गणेश जी, भगवान शिव, हनुमान जी, कालभैरव और साईं बाबा भी विराजित हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 12:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 10:00 PM मंदिर का प्रसाद वैष्णो धाम मंदिर लड्डू, पेड़ा, चना- चिरौंजी आदि का भोग लगाया जाता है। साथ ही माता को चुनरी भी चढ़ाई जाती है।

वैष्णो धाम मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

नवग्रह शनि मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

नवग्रह शनि मंदिर में शनि देव सौम्य और प्रसन्ना मुद्रा में विराजमान है। नवग्रह शनि मंदिर शनि देव का नाम सुनते ही आम जन के मन में सबसे पहले डर बैठ जाता है। लेकिन शनि को एक न्याय प्रिय देवता माना गया है। शनि जातक को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। बुरे कुकर्म करने वालों को शनि दंडित करते हैं। अच्छे कर्म करने वालों पर शनि अपनी कृपा बरसाते हैं। नवग्रह शनि मंदिर में शनि देव सौम्य और प्रसन्ना मुद्रा में विराजमान है। सोने-चांदी के आभूषणों से शनि देव को सुसज्जित किया जाता है। जैसे राजाधिराज होते है वैसे ही उनका पूजन-अर्चन किया जाता है। शनि देव के इस स्वरूप को देख भक्तों को भय नहीं लगता है बल्कि भक्तों को प्रेम की अनुभूति होती है। शनि देव के दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है। माना जाता है कि मंदिर में पहुंचकर नवग्रह की आराधना करने से कुंडली दोष, शनि दोष, राहु की दशा, साढ़ेसाती, ढैय्या और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग नवग्रह शनि मंदिर में पहुंचकर शनिदेव और नवग्रह की की विशेष आराधना एक साथ करते हैं और अपने ग्रहों को शांत करते हैं। नवग्रह शनि मंदिर का इतिहास Navagraha Shani Temple:नवग्रह शनि मंदिर करीब 450 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहं भगवान की प्रतिमा स्वयंभू है। यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान शनिदेव का 16 श्रृंगार किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि शनि देव का नाम सुनकर लोगों के मन में भगवान की काले पाषण की प्रतिमा उत्पन्न होती है। वहीं भारत के मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित नवग्रह शनि मंदिर इसी भक्ति का उदाहरण हैं जिससे लोगों की भारी आस्था जुड़ी हुई है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग इस मंदिर में पहुंचकर नवग्रह की पूजा करते हैं। मंदिर का महत्व शनिदेव की प्रतिमा के साथ इस मंदिर में होने वाली पूजा विधि भी अनोखी है। यहां तेल से नहीं बल्कि दूध और जल से शनिदेव के प्रसन्न होने की मान्यता है। मंदिर में शनि देव को फूलों और शाही पोशाकों से सजाया जाता है। शनिदेव के शृंगार में करीब छह घंटों का समय लगता है। इस शनि मंदिर में आरती से ठीक पहले शहनाई बजाई जाती है, जो आरती पूरी होने तक लगातार बजती रहती है। नवग्रह शनि मंदिर में श्रद्धालु स्नान के बाद पनोती के रूप में अपने जूते चप्पल वही छोड़कर चले जाते है। मंदिर की वास्तुकला नवग्रह शनि मंदिर के निर्माण में मराठा और आधुनिक वास्तुकला की झलक देखने को मिलती है। मंदिर को मजबूत स्तंभों पर बनाया गया है। नवग्रह शनि मंदिर में विशाल परिसर बना है जहां भक्त आकर नवग्रहों की शांति के लिए पूजा अर्चना करते हैं। मंदिर के गर्भ गृह में शनि देव की प्रसन्न मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। मंदिर में एक प्रवेश द्वार है। नवग्रह शनि मंदिर में नवग्रहों की प्रतिमाओं के साथ शिव जी और हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:30 AM – 12:00 PM सायंकाल आरती का समय Invalid date – 08:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 10:00 PM मंदिर का प्रसाद नवग्रह शनि मंदिर में शनि देव को फल, फूल, तेल, तिल और गुड चढ़ाया जाता है। साथ ही शनि देव का दूध का भी भोग चढ़ाया जाता है।

नवग्रह शनि मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

काल भैरव मंदिर, इंदौर मध्य प्रदेश, भारत:Kaal Bhairav ​​Temple, Indore Madhya Pradesh, India

यहां हादसों के पहरेदार हैं भैंरव बाबा काल भैरव मंदिर मध्य प्रदेश के इंदौर में भैरव घाट, खण्डवा रोड पर काल भैरव मंदिर स्थित है। यह मंदिर बहुत ही चमत्कारिक है। भैरव अष्टमी पर इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है। जिस दौरान विशाल भंडारा और महा आरती का आयोजन किया जाता है। जिसमें हजारों संख्या में लोग शामिल होते है। वहीं भैंरव बाबा को छप्पन भोग भी लगाए जाते हैं। काल भैरव मंदिर का इतिहास भैरव घाट के भैरव मंदिर के इतिहास की कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है। परन्तु मंदिर के पुजारियों द्वारा बताया जाता है कि काल भैरव के इस मंदिर का इतिहास करीब 500 वर्ष पुराना है। यह प्राचीन काल से ही अपनी चमत्कारिक शक्तियों के लिए जाना जाता है। इन्हें यहां के रक्षक के रूप में भी पूजते हैं। काल भैरव मंदिर का महत्व भैरव घाट एक ऐसा खतरनाक घाट है। जहाँ पर अधिकांशत: दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस घाट पर जाने से पहले भैरव मंदिर में रूककर दर्शन करते हैं, तो बाबा उन्हें दुर्घटनाओं से बचाते हैं। भैरव मंदिर में दर्शन करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। यह घाट बहुत ही सुन्दर है साथ ही आपको रोड के दोनों तरफ प्राकृतिक नज़ारे भी देखने को मिलेंगे। खासकर बारिश के मौसम में यहाँ का वातावरण बहुत शानदार होता है। ऐसा भी बताया जाता है कि इस घाट पर दुर्घटनाओं के कारण कई नकारात्मक शक्तियां भटकती रहती हैं। जो दुर्घटनाओं का कारण बनती है। इसलिए भैरव बाबा के दर्शन के बाद ही इस घाट की चढ़ाई करनी चाहिए। भैरव घाट पर स्थित भगवान भैरव को हादसों का पहरेदार भी कहते है। काल भैरव मंदिर की वास्तुकला इस मंदिर में भगवान भैरव की विशाल पत्थर पर प्रतिमा स्थापित है। जो देखने में बहुत ही आकर्षक है। काल भैरव एक छोटे से पुल नुमा रास्ते से होते हुए मंदिर के दर्शन के लिए भक्त यहां पहुंचते है। भैंरव बाबा की प्रतिमा का रंग सिंदूरी रहता है। प्रतिदिन इनका शृंगार भी किया जाता है। जिसमें बाबा के कई रूपों के दर्शन अलग अलग दिन करने को मिलते हैं। मंदिर में भैंरव बाबा की प्रतिमा के ठीक सामने उनके वाहन श्वान की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। काल भैरव मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 09:00 PM सायंकाल आरती का समय 06:00 PM – 07:00 PM मंदिर का प्रसाद भैंरव बाबा को दही-इमरती का भोग लगाया जाता है। साथ ही भक्त लोग पान, तंबाकू, सिगरेट, शराब जैसी सभी चीजें भैंरव बाबा को अर्पण करते है। साथ ही नारियल और अगरबत्ती भी बाबा को चढ़ाई जाती है।

काल भैरव मंदिर, इंदौर मध्य प्रदेश, भारत:Kaal Bhairav ​​Temple, Indore Madhya Pradesh, India Read More »

खजराना गणेश मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

देश के सबसे धनी गणेश मंदिरों में खजराना गणेश मंदिर का नाम सबसे पहले आता है। खजराना गणेश मंदिर भारत के मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्थित है। देश के सबसे धनी गणेश मंदिरों में खजराना गणेश मंदिर का नाम सबसे पहले आता है। यहां भक्तों की ओर से चढ़ाए हुए चढ़ावे के कारण मंदिर की कुल चल और अचल संपत्ति बेहिसाब है। श्रद्धालु खजराना गणेश मंदिर में ऑनलाइन दान भी करते हैं। हर साल मंदिर की दान पेटियों मे से विदेशी मुद्राएं भी निकलती हैं। मंदिर का इतिहास Khajrana Ganesh Mandir:खजराना गणेश मंदिर का निर्माण 1735 में होलकर वंश की महारानी अहिल्या बाई ने करवाया था, जिन्होंने भगवान गणेश की मूर्ति को एक कुएं से प्राप्त किया था। ऐसा कहा जाता है कि मंदिर में प्राचीन मूर्ति एक स्थानीय पुजारी पंडित मंगल भट्ट के सपने में देखी गई थी। मंदिर का प्रबंधन आज भी भट्ट परिवार द्वारा किया जाता है। मंदिर का महत्व खजराना गणेश मंदिर में पूजा करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस मंदिर का मुख्य त्योहार विनायक चतुर्थी है और इसे अगस्त और सितंबर के महीने में भव्य तरीके से आयोजित किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि खजराना गणेश मंदिर में प्रभु अपने दरबार में मनोकामना लेकर आने वाले हर भक्त की इच्छा पूरी करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जब भी भक्त पर कोई विपत्ति आती है तो यहां पुजारियों के द्वारा एक विशेष अनुष्ठान और पूजन किया जाता है, जिससे भगवान गणेश अपने भक्त का विघ्न हर लेते हैं। मंदिर की वास्तुकला खजराना गणेश मंदिर की वास्तुकला में नागर शैली की झलक देखने को मिलती है। मंदिर के गर्भ गृह के बाहरी गेट और दीवार का निर्माण चांदी से हुआ है। भगवान की प्रतिमा की आँख हीरे से बनी हुई है। खजराना गणेश मंदिर परिसर में 33 छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं। यहां भगवान राम, शिव, मां दुर्गा, साईं बाबा, हनुमान जी सहित अनेक देवी-देवताओं के मंदिर हैं। खजराना गणेश मंदिर के बारे में उलटे स्वास्तिक के आधार पर इच्छा पूर्ति की एक अलग महिमा है। इसके अनुसार जो भी भक्तगण गणेश जी की पीठ पर उल्टा स्वास्तिक बनाकर अपनी मन्नत बोलता है, कुछ ही समय में उसके मनोरथ पूर्ण होते हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 10:00 PM शयन आरती का समय 09:00 PM – 09:40 PM सायंकाल आरती का समय 08:00 PM – 08:40 PM सुबह की आरती 08:30 AM – 09:30 AM मंदिर का प्रसाद खजराना गणेश मंदिर में गणेश जी को लड्डू का भोग लगाया जाता है। जिन भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है,वे अपने वजन के बराबर लड्डू को दान देते हैं।

खजराना गणेश मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

बड़ा गणपति मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

इस मंदिर को “बड़ा गणपति मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। बड़ा गणपति मंदिर मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर के सुभाषचंद्र मार्ग पर स्थित है बड़ा गणपति मंदिर। यह मंदिर इंदौर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में स्थापित गणेश जी की प्रतिमा एशिया की सबसे बड़ी प्रतिमा है। इस कारण इसे “बड़ा गणपति मंदिर” कहा जाता है। Shree Bada Ganpati Mandir:मंदिर का इतिहास बड़ा गणपति मंदिर का इतिहास बहुत रोचक है। ऐसा बताया जाता है कि एक बार उज्जैन निवासी दाधीच परिवार के मुखिया को भगवान गणेश जी का स्वप्न आया। उन्होंने मंदिर निर्माण की इच्छा रखी। तभी इस मंदिर को बनाने का निर्णय लिया गया। मंदिर का निर्माण 1875 में हुआ। जिसे बनने में तीन साल का समय लगा था। मंदिर का महत्व इस प्रतिमा के विषय में खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए तीर्थ स्थानों जैसे उज्जैन, अयोध्या, मथुरा, वाराणसी (काशी) से मिट्टी और पानी लाया गया था। ऐसी मान्यता है की भगवान गणेश जी की यह मूर्ति विश्व में सबसे विशाल है। इस मूर्ति के निर्माण में सोना, चाँदी, नवरत्न और अष्टधातु का भी उपयोग किया गया है। बड़ा गणपति मंदिर में साल में चार बार भगवान गणेश जी का चोला बदला जाता है। प्रतिमा के बड़े होने के कारण फिर से चोले को चढ़ाने में 15 दिन का समय लगता है। 15 किलो घी और 25 किलो सिंदूर में यह चोला पूर्ण होता है। मंदिर की वास्तुकला जैसे ही आप मंदिर के प्रवेश द्वार से अंदर जाते हैं तो आपको भगवान गणेश जी की विशाल प्रतिमा दिखाई देगी। मंदिर में विराजमान गणपति जी की प्रतिमा की ऊंचाई 25 फ़ीट है। यह प्रतिमा 14 फ़ीट ऊँचे एक चबूतरे पर स्थापित है। राजस्थान के कारीगरों द्वारा इस भव्य प्रतिमा को बनवाया गया था। गणेश जी की इस विशाल मूर्ति का रंग सिंदूरी है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सुबह की आरती 08:00 AM – 08:30 AM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 10:00 PM सायंकाल आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद बड़ा गणपति मंदिर में लड्डू, मोदक, पेड़ा, मिठाई का भोग लगता है। पुष्प भी अर्पण किये जाते है।

बड़ा गणपति मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

चौबीस अवतार मंदिर इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

चौबीस अवतार मंदिर को देश का पांचवा धाम कहा जाता है। चौबीस अवतार मंदिर, भारत के मध्य प्रदेश राज्य के इंदौर शहर से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चौबीस अवतार मंदिर देपालपुर में बना हुआ है। चौबीस अवतार को देश का पांचवा धाम कहा जाता है। दूर-दूर से लोग इस मंदिर के दर्शन करने के लिए आते हैं। अवतार मंदिर की भव्यता और सुंदरता लोगों को आकर्षित करती है। इस मंदिर में भगवन विष्णु के अलग-अलग 24 अवतार की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु मंदिर में आकर भगवान विष्णु के अवतार के दर्शन करते हैं। 24 Avtar Mandir :मंदिर का इतिहास चौबीस अवतार मंदिर की नींव 1968-69 में रखी गई थी। 1968-69 में देपालपुर में गुरुदेव जयकरणदास भक्तमाली परमहंस ने विष्णु महायज्ञ करवाया था। उस समय इस मंदिर की नींव रखी गई थी। चौबीस अवतार मंदिर के लिए सवा छह फीट का कलश इसके लिए बनाया गया है। छोटे मंदिरों पर सवा तीन-तीन फीट के कलश बनाए गए है। भगवान विष्णु-लक्ष्मी का मुख्य मंदिर आठ लाख ईंटों से बना है। चौबीस अवतार का निर्माण कार्य अभी जारी है, अप्रैल तक इस मंदिर का कार्य पूरा कर दिया जाएगा। मंदिर का महत्व चौबीस अवतार मंदिर के पहले चरण के निर्माण कार्य करने के बाद मंदिर के दूसरे चरण में 11 रुद्र अवतार और मां के नौ अवतारों का मंदिर भी बनेगा। भगवान विष्णु-लक्ष्मी का मुख्य मंदिर आठ लाख ईंटों से बना है। खास बात ये है इस पूरे मंदिर में कहीं भी लोहे का उपयोग नहीं किया गया है। चौबीस अवतार मंदिर में भगवन विष्णु के अलग-अलग 24 अवतार की प्रतिमाएं स्थापित की जा रहीं हैं। हर अवतार के अलग अलग मंदिर बनाए जा रहे हैं। मंदिर की वास्तुकला चौबीस अवतार मंदिर को चालुक्य शैली की वास्तुकला में बनाया गया है। मंदिर का 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। 30 बीघा जमीन पर बनने वाले इन मंदिरों में मुख्य मंदिर विष्णु-लक्ष्मी का है जो सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर बन रहा है। इस मंदिर की ऊंचाई 121 फीट है। यहां पर सवा नौ फीट लंबी और सवा सात फीट ऊंची भगवान विष्णु-लक्ष्मी की मूर्ति प्रतिष्ठित की गई है। बाकि अन्य मंदिरों की ऊंचाई 52-52 फीट है। चौबीस अवतार मंदिर के शिखर पर सवा 6 फुट का कलश स्थापित किया जाएगा। साथ ही अन्य मंदिरों पर सवा 3-3 फुट के कलश स्थापित किए जा रहे हैं। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 10:00 PM सायंकाल आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद चौबीस अवतार मंदिर में भगवान विष्णु-लक्ष्मी को गुड़ एवं चने की दाल का भोग लगाया जाता है। भक्त मंदिर में फल, ड्राई फ्रूटस और लड्डू का भोग लगाया जाता है।

चौबीस अवतार मंदिर इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

राम जनार्दन मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत

भगवान श्रीराम वनवासी स्वरूप में हैं विराजमान राम जनार्दन मंदिर भारत के मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में बना हुआ है। अंकपात क्षेत्र में स्थित राम जनार्दन मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में हुआ था। इसमें श्री राम और जनार्दन (विष्णु) का मंदिर हैं। इसमें भगवान के वनवासी स्वरूप के दर्शन होते हैं। भगवान की दाड़ी-मूछ है और माता सीता के हाथ में पौधों को पानी देने वाली झारी और दूसरे हाथ में चवर दिखाई देती हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह स्थान एक प्राचीन मंदिर स्थल रहा है क्योंकि यहां स्थापित कई प्रतिमाएं दसवीं और बारहवीं शताब्दी की हैं। इससे इस स्थल को परमारों के काल का माना जाना चाहिए। मंदिर का इतिहास राम जनार्दन मंदिर का निर्माण सत्रहवीं शताब्दी में मिर्जा राजा जयसिंह ने करवाया था, मंदिर का रथाकार निर्माण आकर्षक है। अठारहवीं शताब्दी में मराठा राजाओं ने मंदिरों में कुछ संरचनाएं जोड़ीं। मंदिरों की दीवारों पर लगी भव्य तस्वीरें मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगा देती हैं। इन शानदार मंदिरों में कुछ अद्भुत मूर्तियां भी हैं जो 11वीं और 12वीं शताब्दी की हैं। गोवर्धनधारी कृष्ण, ब्रह्मा, विष्णु और महेश की छवि उनकी स्थापत्य भव्यता और मूर्तिकला उत्कृष्टता के लिए बहुत प्रभावशाली हैं। मंदिर का महत्व राम जनार्दन मंदिर में श्रीराम की सांवले रंग के पत्थर की प्रतिमा है। यह देश में दूसरा ऐसा मंदिर है जहां काले रंग में राम जी की मूर्ति है, एक प्रतिमा नासिक के राम मंदिर में है। – होल्कर राजवंश की महारानी अहिल्यादेवी ने राम जनार्दन मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। मंदिर की वास्तुकला मराठा शैली में राम और कृष्ण के जीवन के दृश्यों को दर्शाने वाली पेंटिंग हैं। यह मराठा कला का एक सुंदर उदाहरण है। मराठा शासन के दौरान ही उज्जैन पूना और कांगड़ा शैली के चित्रकारों का मिलन स्थल बन गया। चित्रकला की दो अलग-अलग शैलियों का प्रभाव विशिष्ट है। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 08:00 PM सुबह की आरती का समय 06:00 AM – 06:30 AM संध्या आरती का समय 07:00 PM – 07:30 PM मंदिर का प्रसाद राम जनार्दन मंदिर में भक्त श्रद्धा के अनुसार दूध की बनी बर्फी, बूंदी के लड्डू चढ़ाते हैं। श्रद्धालु प्रभु को फल के साथ पूड़ी-खीर का भी भोग लगाते हैं।

राम जनार्दन मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत Read More »