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Narak Chaturdashi

Narak Chaturdashi 2025 Date:नरक चतुर्दशी 2025: कब है छोटी दिवाली? जानें तारीख, महत्व, यम दीया जलाने के नियम और भूलकर भी न करने वाले 4 काम

हर साल कार्तिक मास में आने वाला दीपों का त्योहार दिवाली बहुत खास होता है। दिवाली से ठीक एक दिन पहले मनाया जाने वाला पर्व नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi) जिसे छोटी दिवाली (Chhoti Diwali) भी कहा जाता है, शास्त्रों में विशेष महत्व रखता है। Narak Chaturdashi इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा करने का विधान है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह त्योहार कब मनाया जाता है, इसका महत्व क्या है और Narak Chaturdashi इस दिन यमराज की नाराजगी से बचने के लिए कौन से काम नहीं करने चाहिए? आइए, उज्जैन के आचार्यों से प्राप्त जानकारी के आधार पर जानते हैं सबकुछ… 1. कब मनाई जाएगी नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi 2025 Date) हिंदू धर्म में, नरक चतुर्दशी हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। तिथि और समय 2025: • चतुर्दशी तिथि की शुरुआत: 19 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 51 मिनट पर होगी। • चतुर्दशी तिथि का समापन: 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर होगा। • उत्सव की तारीख: इस साल 19 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली मनाई जाएगी। 2. नरक चतुर्दशी का महत्व और पौराणिक कथा (Religious Significance) सनातन धर्म में इस त्योहार का खास महत्व है। नरक चतुर्दशी मनाए जाने के पीछे दो प्रमुख कारण और धार्मिक मान्यताएं हैं: भगवान कृष्ण ने किया था नरकासुर का संहार धार्मिक मान्यता के अनुसार, छोटी दिवाली के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का संहार किया था। चिरकाल में नरकासुर का आतंक बहुत बढ़ गया था और उसने बलपूर्वक सोलह हजार स्त्रियों को बंदी बना लिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर से भीषण युद्ध किया था और कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि तक चले इस युद्ध में उन्हें विजयश्री मिली। उन्होंने नरकासुर का वध कर सोलह हजार स्त्रियों को मुक्त कराया था। इसलिए इस दिन लोग राक्षस पर भगवान कृष्ण की जीत का जश्न मनाते हैं, और इसी कारण इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। यमराज की पूजा और मोक्ष की प्राप्ति इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विशेष विधान है। Narak Chaturdashi शास्त्र भी इस दिन यम दीप जलाने की आज्ञा देते हैं। यम दीया का महत्व: 1. अकाल मृत्यु का भय खत्म: मान्यता के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन यम के नाम का दीपक जलाने से व्यक्ति का अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है। 2. नरक द्वार बंद: दीपक जलाकर यमराज से यह प्रार्थना की जाती है कि वे नरक के द्वार सदा हमारे लिए बंद रखें, ताकि हमें मोक्ष की प्राप्ति हो सके। 3. सकारात्मकता का स्वागत: इस दिन बुराई के अंधेरे को दूर करने और जीवन में सकारात्मकता का स्वागत करने के लिए भी दीपक जलाए जाते हैं। 3. नरक चतुर्दशी पर क्या करें और कैसे करें स्नान? यह पर्व भगवान कृष्ण को समर्पित होता है। इस दिन घरों की साफ-सफाई की जाती है और उन्हें फूलों या लाइटों से सजाया जाता है। स्नान और पूजा विधि: • साधक प्रातः काल में सूर्योदय से पहले उठकर घर की साफ-सफाई करते हैं। • नित्य कर्मों से निवृत्त होने के बाद स्नान-ध्यान करते हैं। • इस दिन गंगाजल युक्त पानी से स्नान करना शुभ माना जाता है। • सुविधा होने पर अपामार्ग युक्त पानी से स्नान करने की सलाह दी जाती है। कहते हैं कि इससे व्यक्ति को जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। • इसके बाद भक्ति भाव से भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं, जिससे हर मनोकामना पूरी होती है। 4. भूल से भी न करें ये 4 काम, यमराज होंगे नाराज! चूँकि इस दिन यमलोक के देवता यमराज की पूजा की जाती है, Narak Chaturdashi इसलिए कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है। यमराज की नाराजगी से बचने के लिए, नरक चतुर्दशी के दिन भूल से भी ये काम न करें: 1. जीव हत्या: इस दिन किसी भी जीव की हत्या न करें। 2. दक्षिण दिशा की सफाई: यम की दिशा दक्षिण मानी गई है, इसलिए इस दिन घर की दक्षिण दिशा को भूल से भी गंदा न रखें। 3. तेल का दान: शास्त्रों में तेल का दान विशेष महत्व रखता है, लेकिन इस दिन तेल का दान नहीं करना चाहिए। Narak Chaturdashi मान्यता है कि ऐसा करने से देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। 4. तामसिक भोजन: इस दिन तामसिक भोजन नहीं खाना चाहिए। Narak Chaturdashi नरक चतुर्दशी के दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है और जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।

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Dhanteras 2025 mein Kya Khariden :धरतेरस के दिन नहीं खरीद सकते सोना या चांदी, तो इन 5 उपाय से भी होगा धन लाभ !

Dhanteras 2025 :हिंदू धर्म में धनतेरस के त्योहार को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन सोना या चांदी खरीदने की परंपरा है. मगर कोई यह नहीं खरीद सकता, तो उसकी जगह क्या खरीदना चाहिए, आइए जानते हैं. Dhanteras 2025:हिंदू धर्म में Dhanteras धनतेरस का त्योहार का विशेष महत्व है. यह पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है, जो इस बार 18 अक्टूबर 2025 को है. इस दिन विशेष रूप से सोना या चांदी खरीदने से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य का आगमन होता है, मगर कोई व्यक्ति इस दिन सोना या चांदी नहीं खरीद पाता तो वे कई अन्य चीजें भी खरीद सकता है. जिसे शास्त्रों में शुभ माना गया है. Dhanteras 2025 mein Kya Khariden- धनतेरस Dhanteras पर पीतल के बर्तन खरीदने की परंपरा पुरानी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीतल को भगवान धन्वंतरि की धातु माना गया है. ऐसा करने से घर में स्वास्थ्य, सौभाग्य और धन में वृद्धि होती है. माना जाता है कि पीतल खरीदने से तेरह गुना लाभ प्राप्त होता है और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. इस शुभ दिन पर नया झाड़ू लाना भी बेहद मंगलकारी माना जाता है. झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे खरीदने से घर की नकारात्मकता दूर होती है. धनतेरस पर लाए गए झाड़ू की पहले पूजा की जाती है और फिर इसका प्रयोग घर में किया जाता है, ताकि मां लक्ष्मी का स्थायी वास बना रहे. धनतेरस Dhanteras पर धनिया खरीदने की परंपरा भी खास महत्व रखती है. धनिया के बीज को मां लक्ष्मी को अर्पित करने के बाद तिजोरी या धन रखने की जगह पर रखा जाता है. ऐसा करने से घर में समृद्धि आती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है. यह बीज केवल धन का प्रतीक ही नहीं, बल्कि शुभ ऊर्जा का वाहक भी माना जाता है. गोवत्स द्वादशी 2025 (बछ बारस): जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और व्रत के नियम गोमती चक्र को पवित्र और चमत्कारी वस्तु माना गया है. धनतेरस के दिन 11 गोमती चक्र खरीदकर उन्हें लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखना शुभ माना गया है. ऐसा करने से धन की कमी दूर होती है और घर की आर्थिक स्थिति भी अच्छी होती है. यह उपाय विशेष रूप से व्यापारियों के लिए लाभकारी माना गया है. पीली कौड़ी मां लक्ष्मी से जुड़ा माना जाता है. Dhanteras धनतेरस पर इसे हल्दी में रंग कर या पहले से रंगी हुई खरीदकर दीवाली की रात पूजा में शामिल किया जाता है. इसके बाद इसे तिजोरी में रखने से धन का प्रवाह बना रहता है. यह छोटा-सा उपाय परिवार में समृद्धि और खुशहाली लाने के लिए बेहद प्रभावी माना गया है.

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Dhanteras 2025 Date: धनतेरस पर भूलकर भी ना खरीदें ये चीजें, उड़ जाएगी घर की बरकत

Dhanteras 2025 Shopping: धनतेरस हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो दिवाली की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. यह दिन नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है. इस शुभ अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है, Dhanteras जिससे घर में धन-धान्य और सौभाग्य का वास बना रहे. मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि पर उनकी पूजा करने से व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है. Dhanteras 2025 Date ऐसे में आइए जानते हैं कि धनतेरस के दिन किन चीजों को नहीं खरदीना चाहिए.  Dhanteras 2025 Date:धनतेरस 2025 की तिथि और समय:Dhanteras 2025 Date:Date and time of Dhanteras 2025 Dhanteras 2025 Date: पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर दोपहर 12 ब जकर 18 मिनट से आरंभ होकर 19 अक्टूबर दोपहर 1 बजकर 51 मिनट तक रहेगी. प्रदोष काल के आधार पर धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर 2025, शनिवार को मनाया जाएगा. पूजा और खरीदारी का शुभ मुहूर्त:Auspicious time for worship and shopping धनतेरस पूजा मुहूर्त- शाम 7:16 से रात 8:20 बजे तकब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4:43 से 5:33 बजे तकअभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक नुकीली या धारदार वस्तुएं जैसे चाकू, कैंची और सुई न खरीदें। इनसे घर में कलह और नकारात्मकता बढ़ने की आशंका रहती है. चमड़े से बनी वस्तुएं या काले रंग के वाहन, कपड़े व अन्य वस्तुएं भी इस दिन नहीं खरीदनी चाहिए। Dhanteras ऐसा करने से दरिद्रता और दुर्भाग्य का प्रवेश माना जाता है.प्लास्टिक की वस्तुएं जैसे डिब्बे या सजावटी सामान भी घर में न लाएं। ऐसा करने से बरकत में कमी और धन-संचय में बाधा उत्पन्न हो सकती है. धनतेरस 2025 की तिथि और समय:Dhanteras 2025 date and time पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर दोपहर 12 ब जकर 18 मिनट से आरंभ होकर 19 अक्टूबर दोपहर 1 बजकर 51 मिनट तक रहेगी. प्रदोष काल के आधार पर धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर 2025, शनिवार को मनाया जाएगा. Govatsa Dwadashi 2025 Date And Time: गोवत्स द्वादशी 2025 (बछ बारस): जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और व्रत के नियम धनतेरस पर क्या खरीदना होगा शुभ:What to buy on Dhanteras? Dhanteras:इस दिन झाड़ू खरीदना बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक है. इसके अलावा, सोना-चांदी के आभूषण, चांदी के सिक्के, देवी-देवताओं की मूर्तियां, नए वाहन या गैजेट्स की खरीदारी भी मंगलकारी मानी जाती है. इन वस्तुओं को घर लाने से जीवन में समृद्धि, सौभाग्य और सकारात्मकता का संचार होता है. धनतेरस के दिन की पूजा विधि:Worship method on Dhanteras day Dhanteras 2025 Date:धनतेरस के दिन शाम के वक्त शुभ मुहूर्त में उत्तर की ओर कुबेर और धन्वंतरि की स्थापना करें।साथ ही मां लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीप जलाकर पूजा करें।तिलक करने के बाद पुष्प, फल आदि का भोग लगाएं।कुबेर देवता को सफेद मिठाई और धन्वंतरि देव को पीली मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान ‘ऊँ ह्रीं कुबेराय नमः’ इस मंत्र का जाप करते रहें।भगवान धन्वंतरि को प्रसन्न करने के लिए इस दिन धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।धनतेरस के दिन से दिवाली मनाई जाती है और देवी लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी की जाती है। लक्ष्मी के चरणों की निशानी के रूप में रंगोली से लेकर घर के अंदर तक छोटे-छोटे पैरों के निशान बनाए जाते हैं। शाम को 13 दीये जलाकर लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी पूजा से समृद्धि, सुख और सफलता मिलती है। धनतेरस के दिन का महत्व:Importance of Dhanteras day Dhanteras:मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से घर में धन की कमी नहीं होती है। Dhanteras 2025 Date इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। इसके ठीक दो दिन बाद दिवाली मनाई जाती है। ‘धन’ का अर्थ है समृद्धि और ‘तेरस’ का अर्थ है तेरहवां दिन।’ दक्षिण भारत में इस दिन गायों को सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। गायों को लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। जो प्राणी कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात यमराज के नाम से पूजा करता है और दक्षिण दिशा में दीपमाला के दर्शन करता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं होता है। यही कारण है कि लोग इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक रखते हैं।

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Govatsa Dwadashi

Govatsa Dwadashi 2025 Date And Time: गोवत्स द्वादशी 2025 (बछ बारस): जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और व्रत के नियम

Govatsa Dwadashi 2025 Mein Kab Hai: क्या आप जानते हैं कि भारतीय संस्कृति में गौमाता को सर्वोच्च तीर्थस्थान और देवताओं का निवास क्यों माना जाता है? गोवत्स द्वादशी एक ऐसा ही पावन पर्व है जो गाय और उनके बछड़ों के प्रति हमारी कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है, जिसे ‘नंदिनी व्रत’ या ‘बछ बारस’ के नाम से भी जाना जाता है गोवत्स द्वादशी और वसु बारस का अर्थ और महत्व:Meaning and significance of Govatsa Dwadashi and Vasu Baras Govatsa Dwadashi:गोवत्स द्वादशी हिंदू कैलेंडर के अनुसार अश्विन माह (अक्टूबर और नवंबर के बीच) के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि (12वें दिन) को मनाई जाती है। कई क्षेत्रों में, यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। नाम: इसे नंदिनी व्रत भी कहा जाता है। महाराष्ट्र में इसे ‘वसु बारस’ कहते हैं, जो दीवाली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। ‘वसु’ का अर्थ गाय और ‘बारस’ का अर्थ बारहवाँ दिन होता है। Govatsa Dwadashi गुजरात में इसे ‘वाघ बारस’ के नाम से जाना जाता है। Govatsa Dwadashi उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में इसे ‘वाघ’ भी कहते हैं, जिसका अर्थ है वित्तीय ऋण चुकाना, इसलिए इस दिन व्यापारी अपने खाते की किताबें साफ करते हैं। महत्व: यह पर्व गौमाता को समर्पित है, जिन्हें हिंदू धर्म में पवित्र माता माना जाता है क्योंकि वे मानव जाति को पोषण प्रदान करती हैं।  संतान सुख: माताएँ इस दिन अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और कल्याण के लिए उपवास रखती हैं।   संतान प्राप्ति: यह माना जाता है कि यदि कोई निसंतान दंपत्ति श्रद्धापूर्वक गोवत्स द्वादशी का व्रत और पूजा करता है, तो उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है।   पापों से मुक्ति: इस दिन गाय की सेवा और पूजा करने से व्यक्ति को जाने-अनजाने में हुए गौ-अनादर या पापों से मुक्ति मिलती है। गोवत्स द्वादशी 2025: शुभ तिथि और मुहूर्त:Govatsa Dwadashi 2025: Auspicious date and time गोवत्स द्वादशी का पर्व धनतेरस से ठीक एक दिन पहले आता है। विवरण तिथि और समय गोवत्स द्वादशी 2025 की तिथि 17 अक्टूबर 2025, शुक्रवार द्वादशी तिथि प्रारम्भ 17 अक्टूबर, 2025 को 11:12 ए एम बजे से द्वादशी तिथि समाप्त 18 अक्टूबर, 2025 को 12:18 पी एम बजे तक प्रदोषकाल गोवत्स द्वादशी मुहूर्त (श्री मंदिर) 05:29 पी एम से 07:59 पी एम तक (अवधि: 02 घण्टे 30 मिनट्स) प्रदोषकाल गोवत्स द्वादशी मुहूर्त (गणेशस्पीक्स) 06:05 PM to 08:30 PM (Duration: 02 Hours 25 Mins) गोवत्स द्वादशी पूजा विधि और व्रत के नियम:Govatsa Dwadashi puja method and fasting rules इस दिन गाय और बछड़े की पूजा के लिए शुद्धता और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है। पूजा की विधि (Puja Vidhi) 1. व्रत का संकल्प: व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और संतान की दीर्घायु या अन्य मनोकामनाओं के लिए व्रत का संकल्प लें। 2. गौ-स्नान और सज्जा: गाय और बछड़े को साफ पानी से स्नान कराएं और उन्हें नए वस्त्र या कपड़े से सजाएं। 3. तिलक: उनके माथे पर कुमकुम, हल्दी, अक्षत (चावल) और बाजरे या मूंग से तिलक लगाएं। 4. भोग: उन्हें श्रद्धा से हरा चारा, अंकुरित मूंग-मौठ, भीगे चने, गुड़ और मीठी रोटी खिलाएं। (यह भोग नंदिनी की पृथ्वी पर उपस्थिति का प्रतिनिधित्व करता है।) 5. आरती और प्रार्थना: दीपक जलाकर गाय की आरती उतारें। उनके चरण स्पर्श करें, सहलाएं और जाने-अनजाने में हुए पापों के लिए क्षमा याचना करते हुए परिक्रमा करें। 6. प्रतिकात्मक पूजा: यदि आपके पास गाय और बछड़े उपलब्ध न हों, तो शुद्ध गीली मिट्टी से उनकी प्रतीकात्मक प्रतिमा बनाकर भी पूजा की जा सकती है। 7. श्रीकृष्ण की पूजा: इस दिन भगवान श्रीकृष्ण (जिन्हें गायों के प्रति अपने गहरे प्रेम के लिए जाना जाता है) की भी पूजा की जाती है। गोवत्स द्वादशी व्रत के दौरान क्या न करें (वर्जित कार्य):What not to do during Govatsa Dwadashi fast (forbidden actions) गोवत्स द्वादशी Govatsa Dwadashi के दिन व्रत के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। वर्जित वस्तु/कार्य कारण और स्पष्टीकरण गाय के दूध से बने उत्पाद इस दिन गाय का दूध, दही, घी या पनीर जैसी वस्तुएं नहीं खानी चाहिए। चाकू से कटी वस्तुएँ व्रत रखने वाली महिलाएं चाकू से कटी हुई फल, कंद-मूल या सब्जियां नहीं खाती हैं। केवल बिना कटे फल और कंद-मूल का सेवन करें। गेहूं से बना भोजन इस दिन गेहूं से बने खाद्य पदार्थों को ग्रहण करना भी वर्जित माना जाता है। बाजरे से बना खाना ग्रहण किया जा सकता है. गौमाता को कष्ट किसी भी गाय या बछड़े को मारना, भगाना या कष्ट देना अत्यंत पाप माना गया है। शारीरिक श्रम व्रत करने वाले को अत्यधिक शारीरिक श्रम से बचना चाहिए और रात भर जागरूक रहना चाहिए। गोवत्स द्वादशी की पौराणिक कथा:Mythology of Govatsa Dwadashi गोवत्स द्वादशी के महत्व का उल्लेख ‘भविष्य पुराण’ में भी मिलता है, जिसमें दिव्य गाय नंदिनी और उनके बछड़ों की कहानी बताई गई है। एक समय सुवर्णपुरा नामक राज्य था, जिसके राजा देवदानी की दो रानियां (सीता और गीता) थीं। रानी सीता को भैंस प्रिय थी, जबकि रानी गीता गाय और उसके बछड़े को प्रेम करती थी। एक दिन ईर्ष्यावश भैंस के कहने पर रानी सीता ने क्रोध में आकर गाय के बछड़े को मार डाला और उसे गेहूं के ढेर में दबा दिया। जब राजा भोजन करने बैठे, तो उन्हें चारों ओर रक्त और मांस के टुकड़े दिखाई देने लगे; यहाँ तक कि उनके थाल का भोजन भी मलिन हो गया और पूरे राज्य में रक्त की वर्षा होने लगी। चिंतित राजा ने एक आकाशवाणी सुनी, जिसमें उन्हें रानी सीता के पाप के बारे में पता चला। आकाशवाणी ने राजा से कहा कि इस पाप का प्रायश्चित करने के लिए, उन्हें अगले दिन गोवत्स द्वादशी का व्रत करना होगा। Govatsa Dwadashi आकाशवाणी ने यह भी बताया कि यदि राजा चाकू से कटे फल और दूध का सेवन नहीं करेंगे, तो उन्हें पापों से मुक्ति मिल जाएगी और बछड़ा जीवित हो जाएगा। राजा ने वैसा ही किया। परिणामस्वरूप, बछड़ा जीवित हो उठा। तब राजा ने तुरंत पूरे राज्य में गोवत्स द्वादशी का व्रत और पूजन करने का आदेश दिया, और तभी से यह परंपरा

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Rama Ekadashi 2025

Rama Ekadashi 2025: बंद किस्मत के दरवाजे खोल देगा ये मंत्र, रमा एकादशी पर जरूर करें जाप

Rama Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी को बहुत शुभ और खास माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता और आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं।  Rama Ekadashi 2025: इस विशेष अवसर पर कुछ विशेष मंत्रों का जप करने से शुभ फल कई गुना बढ़ जाते हैं और Rama Ekadashi 2025 मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। Rama Ekadashi 2025 तो आइए जानते हैं कि रमा एकादशी के दिन कौन से मंत्रों का जाप करना चाहिए। Rama Ekadashi 2025:एकादशी मंत्र ऊँ श्री त्रिपुराय विद्महे तुलसी पत्राय धीमहि तन्नो: तुलसी प्रचोदयात।ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।। तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया ।। लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया ।। वृंदा,वृन्दावनी,विश्वपुजिता,विश्वपावनी |पुष्पसारा,नंदिनी च तुलसी,कृष्णजीवनी || एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम |य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत || महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी ।आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते । देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः !नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।। दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।। शांताकारम भुजङ्गशयनम पद्मनाभं सुरेशम।विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम। लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म।वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकेकनाथम। ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि। मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा ।बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात् ।करोमि यद्यत्सकलं परस्मै ।नारायणयेति समर्पयामि ॥ भगवान विष्ण के मंत्र अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।। कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् || ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् || श्री विष्णु स्तोत्र किं नु नाम सहस्त्राणि जपते च पुन: पुन: ।यानि नामानि दिव्यानि तानि चाचक्ष्व केशव: ।। मत्स्यं कूर्मं वराहं च वामनं च जनार्दनम् ।गोविन्दं पुण्डरीकाक्षं माधवं मधुसूदनम् ।। पदनाभं सहस्त्राक्षं वनमालिं हलायुधम् ।गोवर्धनं ऋषीकेशं वैकुण्ठं पुरुषोत्तमम् ।। विश्वरूपं वासुदेवं रामं नारायणं हरिम् ।दामोदरं श्रीधरं च वेदांग गरुड़ध्वजम् ।। अनन्तं कृष्णगोपालं जपतो नास्ति पातकम् ।गवां कोटिप्रदानस्य अश्वमेधशतस्य च ।। कन्यादानसहस्त्राणां फलं प्राप्नोति मानव:अमायां वा पौर्णमास्यामेकाद्श्यां तथैव च ।। संध्याकाले स्मरेन्नित्यं प्रात:काले तथैव च ।मध्याहने च जपन्नित्यं सर्वपापै: प्रमुच्यते ।।

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दिवाली

Diwali Special: दिवाली तक जपें ये मंत्र, घर में आएगी खुशहाली और समृद्धि

Diwali Mantra: दिवाली मंत्र दिवाली, वह दिन जब भगवान राम अपनी जन्मभूमि और राज्य अयोध्या लौटे थे, सदियों से दीये, दीप जलाकर और आस-पड़ोस को रोशन करके मनाया जाता रहा है। दिवाली वह समय भी है जब चारों ओर की ऊर्जाएँ इतनी सकारात्मक, ऊर्जा से भरपूर होती हैं और लोगों को अंदर से बाहर तक आनंदित करती हैं। और यह वह समय भी है जब आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरम पर होती है और इसलिए लोग पूजा-अर्चना में अधिक से अधिक संलग्न होते हैं। इसलिए, यहाँ हम इस दिवाली और उसके बाद के दिनों में जपने के लिए 6 मंत्रों का उल्लेख कर रहे हैं, क्योंकि माना जाता है कि ये घर में सुख-समृद्धि लाते हैं। OM:ओम दिवाली किसी भी अवसर, दिन या त्योहार पर जपने के लिए सबसे आसान, लेकिन सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक है ‘ॐ’ का जाप। ब्रह्मांड की आदि ध्वनि, वह कंपन जिससे समस्त जीवन की उत्पत्ति हुई, ॐ ऊर्जा से भरपूर है। ऐसा माना जाता है कि नियमित रूप से ॐ का जाप करने से आंतरिक ऊर्जा और स्वर ब्रह्मांड की प्राकृतिक लय के साथ संरेखित होते हैं, और हमें तन और मन में शांति का अनुभव होता है। ऐसा भी कहा जाता है कि प्रतिदिन 108 बार ॐ का जाप, ध्यान के साथ, आपके मस्तिष्क को केंद्रित करने, आपको सहज महसूस कराने और आपके तन और मन को आपके भीतर मौजूद ‘प्रचुरता’ की मानसिकता के साथ तालमेल बिठाने में मदद करता है, जो सक्रिय होने का इंतज़ार कर रही है। इसमें घर में सकारात्मकता, शांति और खुशियों का संचार करने की शक्ति है। Ganesh Mantra: गणेश मंत्र मंत्र – वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभा, निर्विघ्नं कुरु मे देवा, सर्व कार्येषु सर्वदाएक सरल अर्थ वाला एक सरल मंत्र, इसका अर्थ है – हे भगवान गणेश, एक घुमावदार सूंड और एक शक्तिशाली शरीर वाले, एक लाख सूर्यों की तरह उज्ज्वल, मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप मेरे मार्ग से सभी बाधाओं को दूर करें और मुझे जो कुछ भी मैं करूं उसमें सफलता का आशीर्वाद दें। दिवाली के दौरान, माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा लोगों द्वारा गहरी श्रद्धा और सम्मान के साथ की जाती है। जबकि माँ लक्ष्मी धन, संपत्ति और प्रचुरता का दाता हैं, भगवान गणेश वह हैं जो अपने भक्तों के मार्ग से बाधाओं और बाधाओं को दूर करते हैं ताकि वे सुख और समृद्धि प्राप्त कर सकें। ऐसा कहा जाता है कि ध्यान करते समय या सुबह की पूजा के दौरान प्रतिदिन 20 बार भी इस मंत्र का जाप करने से लोगों को नकारात्मकता को दूर करने और अच्छी चीजों को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है। Maa Lakhmi Mantra:माँ लक्ष्मी मंत्र मंत्र – ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्नीयै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात। यह देवी लक्ष्मी के सबसे सरल मंत्रों में से एक है, जो अपने भक्तों को धन और समृद्धि प्रदान करती हैं। इस मंत्र का अर्थ है – माँ लक्ष्मी, हम आपका ध्यान करते हैं, आप भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, और आप हमें बुद्धि, धन और सुख प्रदान करें। शुद्ध, पवित्र हृदय और माँ लक्ष्मी के प्रति पूर्ण श्रद्धा के साथ इस मंत्र का जाप करने से भक्त उनका आशीर्वाद और सकारात्मकता प्राप्त कर सकते हैं। और जैसा कि ऐसा माना जाता है कि माँ लक्ष्मी दिवाली के दौरान अपने भक्तों के घर आती हैं, यदि लोग प्रतिदिन पूरे मन से इस मंत्र का जाप करें, तो वे निश्चित रूप से प्रसन्न होंगी। Karwa chauth 2025 Subh Muhurat: करवा चौथ की सरगी में खाएं ये 3 चीजें, दिन भर नहीं लगेगी भूख, मजे-मजे में हो जाएगा व्रत ‘ह्रीं श्रीं’ लक्ष्मी मंत्र माँ लक्ष्मी को समर्पित एक और शक्तिशाली मंत्र है ‘ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी भ्यो नमः’। इसका सीधा सा अर्थ है, ‘मैं माँ लक्ष्मी को नमन करता हूँ, जो समृद्धि और धन की अवतार हैं।’ यह ‘ह्रीं और श्रीं’ के बीज मंत्र वाला एक विशेष रूप से शक्तिशाली मंत्र है, ये दो अक्षर समृद्धि, सफलता और सुरक्षा को आकर्षित करने के लिए जाने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जब भक्त प्रतिदिन प्रातःकाल की प्रार्थना के बाद इस मंत्र का 108 बार जाप करते हैं, तो इससे माँ लक्ष्मी की ऊर्जा का आध्यात्मिक संबंध बनता है और यह उनके जीवन में समृद्धि और समृद्धि के रूप में आती है। Kuber Mantra:कुबेर मंत्र दिवाली के बाद के दिनों में धन और वैभव के देवता भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है। मंत्र है – ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।’ इसका मूल अर्थ है कि मैं भगवान कुबेर का आशीर्वाद प्राप्त करता हूँ, जो लोगों को धन और सुरक्षा प्रदान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि दिवाली या अन्य अवसरों पर इस मंत्र का जाप करने से लोगों को भगवान कुबेर की सकारात्मकता और ऊर्जा आकर्षित करने में मदद मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि यह मंत्र न केवल धन को आकर्षित करने में मदद करता है, बल्कि किसी भी वित्तीय बोझ और ऋण को दूर करने में भी मदद करता है, और कहीं अटके हुए धन का मार्ग प्रशस्त करता है।

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करवा चौथ

Karwa chauth 2025 Subh Muhurat: करवा चौथ की सरगी में खाएं ये 3 चीजें, दिन भर नहीं लगेगी भूख, मजे-मजे में हो जाएगा व्रत

Karwa chauth 2025 fasting tips in hindi: करवा चौथ व्रत शुरू करने से पहले चाय-कॉफी पीने के बजाय खाएं ये 3 चीजें, पूरे दिन नहीं लगेगी प्‍यास………. Karwa Chauth Vrat 2025: करवा चौथ का व्रत इस बार बुधवार यानि 1 नवंबर को मनाया जा रहा है. इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और उत्‍तम स्‍वास्‍थ्‍य की कामना लिए अन्‍न-जल त्‍याग कर व्रत करेंगी. हालांकि सुबह से भूखी-प्‍यासी रहकर व्रत करने वाली महिलाएं कई बार शाम होते होते बीमार भी हो जाती हैं. वे बेहोश हो जाती हैं, या उनका ब्‍लड प्रेशर लो हो जाता है या इनके शरीर में अचानक पानी की कमी हो जाती है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो इस बार यहां बताई जा रही डॉक्‍टर की सलाह मानकर व्रत शुरू कर सकती हैं. इससे आप बिना किसी अड़चन के व्रत रख पाएंगी और पूरे दिन पानी या खाने की कमी भी महसूस नहीं होगी. करवा चौथ का व्रत शुरू करने से पहले अधिकांश महिलाएं सुबह सरगी लेती हैं. इसमें घर में मौजूद सास अपनी बहुओं को सरगी में मिठाई और फल खाने के लिए देती हैं. कुछ जगहों पर एकदम सुबह महिलाएं पानी और फिर चाय पीती हैं. जबकि कुछ महिलाएं कॉफी भी पीती हैं. हालांकि ये सभी चीजें शरीर को नुकसान ही पहुंचाती हैं और दिनभर के व्रत में कठिनाई पैदा करती हैं. इस बार आप चाय-कॉफी छोड़कर ये 3 चीजें ट्राई कीजिए और फिर देखिए कैसे आप पूरे दिन तरोताजा बनी रहती हैं और आपको दिन भर प्‍यास नहीं लगेगी. करवा चौथ की सरगी में खाएं ये 3 चीजें करवा चौथ वाले दिन सुबह सरगी में 3 चीजें बहुतायत से लें.सरगी के दौरान सबसे पहला काम करें कि खूब पानी पीएं.दूसरा, कोई भी ताजा फल खाएं. इनमें खरबूज, तरबूज या पपीता ले सकते हैं, या कोई भी जूसी फल हो सकता है.इसके बाद तीसरी चीज, एक गिलास लस्‍सी या एक कटोरी दही, जो भी ले सकतें हैं जरूर लें. अगर लस्‍सी नहीं लेना चाह रहे तो मिल्‍कशेक या दूध ले सकते हैं. ये भी नहीं लेना तो फिर कम नमक और कम चीनी वाला नींबू पानी पी लें. इससे पूरे दिन प्‍यास नहीं लगेगी और शरीर डिहाइड्रेट नहीं होगा. भूलकर भी न खाएं ये चीजें सरगी में भूलकर भी फ्राइड फूड न खाएं. जैसे चिप्‍स, पापड़ आदि. या फिर चाय, कॉफी न पीएं. इसके अलावा बहुत ज्‍यादा मीठा भी न खाएं. सुबह सुबह नमकीन या मिर्च मसाले वाली चीजें खाने से प्‍यास जल्‍दी लगती है. व्रत पूरा होने पर भी बरतें सावधानी व्रत पूरा होने के बाद भी खाने पर एकदम से न टूटें और न ही बहुत ज्‍यादा तला भुना, मिर्च मसाले वाला बाहर का खाना खाएं. कोशिश करें कि व्रत पूरा होने पर पहले एक गिलास पानी पीएं. उसके कुछ देर बाद सादा खाना खाकर व्रत खोलें. इस वक्‍त फ्राइड फूड ज्‍यादा खाने से आपको एसिडिटी सहित अन्‍य परेशानियां भी हो सकती हैं. सरगी के दौरान खाएं ये चीजें, कमजोरी नहीं होगी महसूस:Eat these things during Sargi, you will not feel weakness 1.फल जरूर करें शामिल करवा चौथ की सरगी में आप फलों को जैसे सेब, अनार, केला, पपीता को जरूर शामिल करें. इनमें विटामिन और मिनरल्स होते हैं जो कि शरीर में कमजोरी नहीं आने देते हैं. 2.नारियल पानी करवा चौथ एक निर्जला व्रत होता है, ऐसे में दिन भर बिना पानी के रहना कठिन हो जाता है. शरीर में पानी की कमी से चक्कर तक आ सकते हैं. ऐसे में ये जरूरी है कि पूरे दिन आपका शरीर हाइड्रेटेड रहे. नारियल पानी पीकर पूरे दिन शरीर को हाइड्रेटेड रखा जा सकता है. इतना ही नहीं इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स भी होते हैं. जो कि उर्जा बनाए रखते हैं   3. सूखे मेवे सूखे मेवे जैसे कि खजूर, बादाम, अखरोट, किशमिश ऊर्जा के अच्छे स्रोत माने जाते हैं और इन्हें खाने से लंबे समय तक पेट भरा रहता है और भूख भी नहीं लगती है. आप चाहे तो अपनी सरगी में इन्हें भी शामिल कर सकते हैं. अब जान लें उन चीजों के बारे में जिन्हें सरगी में शामिल करने से शरीर को नुकसान पहुंच सकते हैं. सरगी में तली-भुनी न खाएं. इन्हें खाने से पेट में भारीपन हो जाता है और प्यास बढ़ा सकती हैं. इसी तरह से मसालेदार खाना भी न करें.  Karwa Chauth 2025 Vrat Upay: करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं क्या करें, क्या नहीं? जानिए..

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Bishnoi Sthapana Divash

Bishnoi Sthapana Divash 2025: बिश्नोई स्थापना दिवस

Bishnoi Sthapana Divash Kab Hai: बिश्नोई स्थापना दिवस सन् 1485 से कार्तिक कृष्णा अष्टमी को बिश्नोई संप्रदाय के द्वारा मनाया जाता है। इस संप्रदाय की स्थापना गुरु जम्भेश्वर जी ने की थी। Bishnoi Sthapana Divash बिश्नोई शब्द को विष्णु से लिया गया, जिसका अर्थ है विष्णु के अनुयायी। विभिन्न विचारों के अनुसार बिश्नोई संप्रदाय में 2 9 सिद्धांतों का पालन किया जाता है। Bishnoi Sthapana Divash बिश का अर्थ है 20(बीस) और नोई का मतलब 9 (नौ)। इस प्रकार, बिश्नोई बीस-नियम के रूप में भी अनुवादित किया जाता है। बिश्नोई समाजी लोग प्रकृति एवं जंगली जानवरों के अत्यधिक प्रेमी होते हैं। प्रारंभ में, Bishnoi Sthapana Divash बिश्नोई सम्प्रदाय को अपनाने वाले अधिकतर लोग जाट समुदाय से थे। अतः बिश्नोई सम्प्रदाय को कुछ जगह बिश्नोई जाट भी बोला जाता है। Bishnoi Sthapana Divash 2025: बिश्नोई स्थापना दिवस अनुष्ठान सप्तमी से ही मुक्तिधाम मुकाम में जाम्भाणी सत्संग का आयोजन किए जाते हैं।अष्टमी को मुक्तिधाम मुकाम से शोभा यात्रा निकली जाती है। शोभा यात्रा में भगवें झण्डे के सात 29 नियमों की पट्टिकाओं के साथ बिश्नोई जन सम्मिलित होते हैं।बिश्नोईयों के‌ आद्य स्थल समराथल‌ धोरा पर जाम्भाणी यज्ञ के साथ पवित्र पाहल बनाया‌ जाता है, बिश्नोई जन अपने संकल्पों को दोहराएंगे।महासभा द्वारा तैयार प्रसाद-भोज‌ का भोजशाला में आकर ग्रहण करते हैं। Bishnoi Sthapana Divash: बिश्नोई समाजी लोग प्रकृति एवं जंगली जानवरों के अत्यधिक प्रेमी होते हैं। प्रारंभ में, बिश्नोई सम्प्रदाय को अपनाने वाले अधिकतर लोग जाट समुदाय से थे। अतः बिश्नोई सम्प्रदाय को कुछ जगह बिश्नोई जाट भी बोला जाता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने चैंपियन ऑफ अर्थ अवार्ड 2018 का श्रेय विश्नोई समाज को दिया ।तथा बिश्नोईयो के पर्यावरण के लिए बलिदान की परंपरा को विश्व इतिहास की अनोखी घटना भी बताया। संबंधित अन्य नाम बिश्नोई समाज स्थापना दिवस शुरुआत तिथि कार्तिक कृष्णा अष्टमी कारण बिश्नोई संप्रदाय स्थापना दिवस उत्सव विधि व्रत, भजन-कीर्तन, मंदिर में प्रार्थना

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Radha Kund Snan

Radha Kund Snan 2025 Date And Time: अहोई अष्टमी पर कब किया जाएगा राधा कुंड स्नान? जानें सही तिथि, मुहूर्त और संतान प्राप्ति का महत्व

Radha Kund Snan 2025 mein kab hai: अहोई अष्टमी का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर किया जाता है। इस दिन, मथुरा के गोवर्धन में स्थित राधा कुंड में स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताएं कहती हैं कि इस पवित्र कुंड में डुबकी लगाने से निसंतान दंपत्ति (Childless couples) को संतान की प्राप्ति हो सकती है। यह पर्व केवल संतान की कामना रखने वाले जोड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी साधकों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। Radha Kund Snan 2025 Date And Time:राधा कुंड स्नान 2025: सही तिथि और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की Radha Kund Snan अष्टमी तिथि पर अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। इसी दिन राधा कुंड में स्नान का विधान है। राधा कुंड स्नान की सही तिथि और शुभ मुहूर्त इस प्रकार है: विवरण तिथि और समय अष्टमी तिथि की शुरुआत 13 अक्टूबर, रात 12 बजकर 24 मिनट पर अष्टमी तिथि का समापन 14 अक्टूबर, सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर राधा कुंड स्नान की तिथि सोमवार, 13 अक्टूबर (उदया तिथि के अनुसार) स्नान का शुभ मुहूर्त (निशिता काल) रात 11 बजकर 41 मिनट से रात 12 बजकर 30 मिनट तक यह स्नान अर्ध रात्रि यानी निशिता काल में किया जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इस समय स्नान करने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी हो सकती है। Ahoi Ashtami 2025 Date: 13 या 14 अक्टूबर? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि राधा कुंड स्नान का महत्व: क्यों माना जाता है इसे वरदान:Importance of taking bath in Radha Kund: Why is it considered a boon: Radha Kund Snan: राधा कुंड गोवर्धन परिक्रमा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अहोई अष्टमी के दिन इस कुंड में डुबकी लगाने का विशेष महत्व है, खासकर उन विवाहित जोड़ों के लिए जो संतान सुख से वंचित हैं। 1. संतान प्राप्ति का वरदान: ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी के दिन अर्ध रात्रि (निशिता काल) में श्रद्धापूर्वक राधा कुंड में स्नान करने से निसंतान दंपत्ति की संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी हो जाती है। 2. मनोकामना पूर्ति: जो भी साधक इस दिन श्रद्धापूर्वक स्नान करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 3. ईश्वरीय कृपा: इस कुंड में स्नान करने से साधक को न केवल राधा रानी की, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा की भी प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होने के बाद, जोड़े दोबारा इस Radha Kund Snan कुंड में आकर स्नान करते हैं और राधा रानी जी का धन्यवाद प्रकट करते हैं। राधा कुंड में स्नान करने की विधि (Sacred Ritual) संतान प्राप्ति की मनोकामना के लिए राधा कुंड में स्नान करने की एक विशेष विधि है, जिसका पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है: 1. व्रत और संकल्प: संतान प्राप्ति की मनोकामना के लिए स्नान करने वाले जोड़े पूरे दिन व्रत रखते हैं। 2. मध्य रात्रि का स्नान: जोड़े मध्य रात्रि (निशिता काल) में कुंड में स्नान करते हैं। 3. विशेष सामग्री: स्नान के दौरान, कच्चा सफेद कद्दू, जिसे ‘पेठा’ भी कहा जाता है, उसे एक लाल कपड़े में बांधकर अपने हाथों में रखा जाता है। 4. ध्यान और कामना: स्नान करते समय साधक राधा रानी का ध्यान करते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं। 5. अर्पण: स्नान के बाद, यह ‘पेठा’ राधा रानी को अर्पित किया जाता है। राधा रानी की पूजा के समय मंत्रों का जप करना और श्रीजी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। Story of Radha Kund Bath:राधा कुंड स्नान की कहानी Radha Kund Snan राधा कुंड का निर्माण भगवान कृष्ण ने अरिस्तासुर को मारने के बाद किया था जोकि एक बैल रूपी राक्षस था। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, बैल धर्म का प्रतीक है क्योंकि यह गाय के परिवार से संबंधित है। इसलिए राधारानी और गोपीयों के अनुसार, भगवान कृष्ण ने बैल को मार कर धार्मिक अपराध किया था। Radha Kund Snan राधा जी ने कृष्ण से सभी पवित्र नदियों में पवित्र स्नान करके स्वयं को शुद्ध करने के लिए कहा। अतः राधारानी को खुश करने के लिए, भगवान कृष्ण ने सभी पवित्र स्थानों का पानी एक ही स्थान पर एकत्र किया। कृष्णा ने अपने कमल चरणों को जमीन पर मारा जिससे उस स्थान पर सभी अलौकिक और पवित्र नदियों का पानी एकत्रित हो गया, और उस समय से, यह स्थान श्याम कुंडा के रूप में जाना जाता है। यह देखकर, राधारानी ने अपनी चूड़ियों के साथ जमीन खोदकर श्याम कुंडा के पास एक और कुंड बनाया। सभी पवित्र जल निकायों ने राधा जी से अनुरोध किया कि वे बनाए गए कुंड में प्रवेश करें। Radha Kund Snan इसलिए, इस तरह राधा कुंड बनाया गया था। राधा कुंड के तट पर, राधा रानी के आठ प्रमुख सखियों के नाम पर कुल आठ कुंज भी स्थित हैं।

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Ahoi Ashtami 2025

Ahoi Ashtami 2025 Date: 13 या 14 अक्टूबर? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Ahoi Ashtami 2025 Date: अहोई अष्टमी हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे खासतौर पर माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के लिए करती हैं। यह व्रत कार्तिक माह में मनाया जाता है और इस वर्ष यह 13 अक्टूबर को पड़ रहा है।  अहोई अष्टमी हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे खासतौर पर माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के लिए करती हैं। यह व्रत कार्तिक माह में मनाया जाता है और इस वर्ष यह 13 अक्टूबर को पड़ रहा है। Ahoi Ashtami 2025 पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी व्रत से न केवल संतान की दीर्घायु सुनिश्चित होती है, बल्कि संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले परिवारों में भी विशेष कृपा मिलती है। अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2025) हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के लिए बड़े उत्साह के साथ मनाती हैं। Ahoi Ashtami 2025 यह व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत संतान सुख की प्राप्ति और सुख-समृद्धि में वृद्धि के लिए भी विशेष फलदायी होता है। इस वर्ष Ahoi Ashtami 2025 अहोई अष्टमी की सही तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति है। आइए जानते हैं वैदिक पंचांग के अनुसार अहोई अष्टमी व्रत की सही तारीख और शुभ मुहूर्त। अहोई अष्टमी 2025 कब है? (Ahoi Ashtami 2025 Date) वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार अहोई अष्टमी का पर्व 13 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाएं निर्जला (बिना जल के) रखती हैं। संतान की दीर्घायु सुनिश्चित करने के अलावा, यह व्रत संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले परिवारों के लिए भी विशेष कृपा लेकर आता है। अष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत और समापन का विवरण इस प्रकार है: विवरण जागरण (Jagran) हिन्दुस्तान (Hindustan) अष्टमी तिथि की शुरुआत 13 अक्टूबर, रात 12 बजकर 24 मिनट पर 13 अक्टूबर, दोपहर 12 बजकर 24 मिनट पर अष्टमी तिथि का समापन 14 अक्टूबर, रात 11 बजकर 9 मिनट पर 14 अक्टूबर, सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 53 मिनट से शाम 7 बजकर 8 मिनट तक शाम 06 बजकर 17 मिनट से शाम 07 बजकर 31 मिनट तक तारों को देखने का समय शाम 6 बजकर 17 मिनट तक शाम 06 बजकर 39 मिनट पर तारों के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण (व्रत खोलना) किया जाता है। अहोई अष्टमी व्रत की पूजा-विधि (Puja Vidhi) Ahoi Ashtami 2025 अहोई अष्टमी के दिन माताएं भगवान शिव और माता पार्वती के संग अहोई माता की पूजा-अर्चना करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन महादेव की पूजा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी दुख-संकट दूर होते हैं। 1. व्रत का संकल्प: अहोई अष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद माताएं व्रत का संकल्प लें। 2. पूजा की तैयारी: पूजा की शुरुआत दीवार पर अहोई माता की तस्वीर बनाकर की जाती है। 3. पूजा: रोली, चावल, और जल से पूजा संपन्न करें। एक कलश में जल भरकर रखें। 4. व्रत कथा: पूजा के दौरान अहोई अष्टमी व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। माना जाता है कि कथा का पाठ करने से संतान के जीवन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और तरक्की के मार्ग खुलते हैं। 5. भोग: माता को पूरी और किसी मिठाई का भोग अर्पित किया जाता है। 6. कामना: अहोई माता से संतान के जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। 7. तारों को अर्घ्य: सायंकाल, तारों को देखकर माताएं उन्हें अर्घ्य देती हैं और संतान की लंबी उम्र, सुखद जीवन और स्वास्थ्य की कामना करती हैं। 8. पारण और सम्मान: तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। व्रत खोलने से पहले घर के बुजुर्गों को सम्मान स्वरूप वस्त्र या आवश्यक सामग्री भेंट करने की परंपरा है। अहोई अष्टमी पर क्या करें और क्या न करें? (Ahoi Ashtami 2025 Do’s and Don’ts) इस पावन दिन पर कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है: क्या करें (Do’s) • सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। • पूजा-अर्चना और व्रत कथा का पाठ करें। • अहोई माता से संतान के करियर में तरक्की और लंबी आयु की कामना करें। • इस दिन अन्न-धन समेत अन्य चीजों का दान करने का विशेष महत्व है। • व्रत का पारण करते समय केवल सात्विक भोजन का सेवन करें। क्या न करें (Don’ts) • भूलकर भी काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। • किसी के बारे में गलत न सोचें और किसी से वाद-विवाद या लड़ाई-झगड़ा न करें। • इस दिन जमीन की खुदाई करना वर्जित माना गया है। • फल और सब्जियों को काटने से बचें। • व्रत के दिन दूध का प्रयोग भी निषिद्ध होता है। अहोई अष्टमी व्रत का महत्व:Importance of Ahoi Ashtami fast Ahoi Ashtami 2025 अहोई अष्टमी व्रत का विशेष महत्व माताओं और परिवार के लिए है। यह न केवल संतान की रक्षा और स्वास्थ्य की कामना के लिए किया जाता है, बल्कि पूरे परिवार में समृद्धि, सुख और वैभव लाने का भी माध्यम है। Ahoi Ashtami 2025 यह व्रत करने से संतान को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, साथ ही बच्चे के करियर में तरक्की भी होती है। Karwa Chauth 2025 Vrat Upay: करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं क्या करें, क्या नहीं? जानिए..

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Valmiki Jayanti

Valmiki Jayanti 2025 Date And Time:वाल्मीकि जयंती तिथि, महत्व और आदि कवि महर्षि वाल्मीकि का अद्वितीय योगदान..

वाल्मीकि जयंती (Valmiki Jayanti) एक महत्वपूर्ण हिंदू धार्मिक उत्सव है जो महर्षि वाल्मीकि की जयंती मनाता है। महर्षि वाल्मीकि वह प्रसिद्ध हिंदू कवि हैं जो हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण महाकाव्यों में से एक, रामायण के लेखक के रूप में जाने जाते हैं। इस दिन को बाल्मीकि धार्मिक समुदाय द्वारा प्रगट दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन महर्षि वाल्मीकि के ज्ञान, नैतिकता, और साहित्य और आध्यात्मिकता में उनके योगदान का सम्मान करने का एक अवसर है। 1. वाल्मीकि जयंती 2025: तिथि और पंचांग महर्षि वाल्मीकि जयंती की तिथि हर साल बदलती रहती है क्योंकि यह भारतीय चंद्र कैलेंडर के अनुसार निर्धारित की जाती है। तिथि: वर्ष 2025 में, वाल्मीकि जयंती या प्रगट दिवस मंगलवार, 07 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। हिंदी कैलेंडर के अनुसार: यह त्यौहार आश्विन महीने की पूर्णिमा तिथि को पड़ता है, जिसे शरद पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर में सितंबर-अक्टूबर के आसपास आता है। पूर्णिमा तिथि: पूर्णिमा तिथि 06 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:23 बजे प्रारम्भ होगी और 07 अक्टूबर 2025 को सुबह 09:16 बजे समाप्त होगी। यह उत्सव भारत के कई राज्यों में मनाया जाता है, Valmiki Jayanti जिनमें चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, और कर्नाटक शामिल हैं। हालांकि, यह भारत में एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश नहीं है। Valmiki Jayanti 2025 Date And Time:वाल्मीकि जयंती तिथि, महत्व…. 2. कौन थे महर्षि वाल्मीकि? (प्रारंभिक जीवन) महर्षि वाल्मीकि Valmiki Jayanti को संस्कृत साहित्य का पहला कवि (आदि कवि) माना जाता है। उनकी कहानी आध्यात्मिक परिवर्तन और पश्चात्ताप का एक शक्तिशाली उदाहरण है। डाकू रत्नाकर से बने ऋषि वाल्मीकि प्रारंभिक नाम: पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि का प्रारंभिक नाम रत्नाकर था। जीवन: अपने प्रारंभिक जीवन में, वह एक राजमार्ग डाकू थे जो लोगों को लूटते थे। परिवर्तन: उनके जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब उनकी मुलाकात नारद मुनि से हुई, जिन्होंने उन्हें भगवान राम के भक्त बनने के लिए प्रेरित किया। तपस्या और नामकरण: रत्नाकर ने कई वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या को एक दिव्य आवाज ने सफल घोषित किया और उनका नाम वाल्मीकि रखा गया। यह नाम “वाल्मीक” (संस्कृत में चींटी-पहाड़ी) से आया है, जहां उन्होंने ध्यान में बहुत समय बिताया था। यह नाम इस विचार पर जोर देता है कि कोई भी व्यक्ति, अपने पिछले कार्यों की परवाह किए बिना, गंभीर पश्चाताप और समर्पण के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकता है। 3. रामायण और साहित्यिक योगदान महर्षि वाल्मीकि का हिंदू धर्म में बहुत धार्मिक महत्व है क्योंकि उन्होंने अद्वितीय साहित्यिक योगदान दिया है। रामायण: उन्होंने महान हिंदू महाकाव्य रामायण की रचना की, जो संस्कृत में लिखी गई थी। संरचना: रामायण में 24,000 छंद (श्लोक) हैं, जो सात ‘कांडों’ (कैंटोस) या सर्गों में विभाजित हैं। (एक स्रोत के अनुसार इसमें 24507 अध्याय हैं)। शिष्य: भगवान राम के पुत्र लव और कुश उनके पहले शिष्य थे, जिन्हें उन्होंने अपने आश्रम में रामायण की शिक्षा दी थी। अन्य रचनाएं: पौराणिक कथाओं के अनुसार, Valmiki Jayanti उन्होंने रामायण के अलावा महाभारत और कई पुराणों जैसी कुछ अद्भुत रचनाएँ भी लिखीं। 4. वाल्मीकि जयंती समारोह और अनुष्ठान हिंदू भक्त वाल्मीकि जयंती को अत्यंत उत्साह के साथ मनाते हैं। शोभा यात्रा: इस दिन बड़े जुलूस, जिन्हें शोभा यात्रा कहा जाता है, विभिन्न कस्बों और गांवों में आयोजित किए जाते हैं। इन जुलूसों में वाल्मीकि की छवि को ले जाया जाता है। मंदिरों की सजावट: महर्षि वाल्मीकि के मंदिरों को विभिन्न रंगों के फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। कई स्थानों पर कीर्तन और भजन कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। पूजा और पाठ: भक्तजन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करते हैं, रामायण के श्लोकों का पाठ करते हैं। Valmiki Jayanti आध्यात्मिक चर्चाएँ (सत्संग) आयोजित की जाती हैं, जो वाल्मीकि के साहित्यिक और आध्यात्मिक योगदान के महत्व पर जोर देती हैं। दान: इस शुभ दिन पर गरीबों और जरूरतमंदों को मुफ्त भोजन (लंगर) वितरित किया जाता है। दान-पुण्य करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। 5. महर्षि वाल्मीकि का सबसे प्रसिद्ध मंदिर सबसे प्रसिद्ध और सबसे पुराना मंदिर, जो 1,300 वर्ष से अधिक पुराना बताया जाता है, चेन्नई के थिरुवनमियूर (Thiruvanmiyur) में स्थित है। मान्यता है कि Valmiki Jayanti ऋषि वाल्मीकि ने रामायण लिखने के बाद इसी स्थान पर विश्राम किया था। Valmiki Jayanti इस मंदिर की देखरेख मारुंडेश्वर मंदिर (Marundeeswarar Temple) द्वारा की जाती है, जिसका निर्माण चोल शासनकाल के दौरान हुआ था। 6. शुभकामनाएं प्रगट दिवस के इस शुभ अवसर पर, आइए हम महर्षि वाल्मीकि का आशीर्वाद लें, उनकी शिक्षाओं का पालन करें और रामायण के मूल्यों (जैसे ज्ञान और नैतिकता) को अपनाकर एक सुंदर कल के लिए अच्छे कर्म करें।

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करवा चौथ

Karwa Chauth 2025 Vrat Upay: करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं क्या करें, क्या नहीं? जानिए..

Karwa Chauth 2025: करवा चौथ पर पति-पत्नी के आपसी प्रेम और विश्वास को मजबूत करने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं। Karwa Chauth 2025 mein Kab Hai: सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का पर्व बहुत ही खास माना जाता है। इस पर्व पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए सुबह से निर्जला व्रत रखती है। यह पर्व पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम और विश्वास को मजबूत करता है। करवाचौथ पर सुहागिन महिलाएं सुबह से बिना कुछ खाए-पिए उपवास पर रहती हैं। फिर शाम के समय करवा माता की पूजा करती हैं और रात को चांद के निकलने का इंतजार करती हैं। जब चांद निकलता है तो उसके दर्शन करते हुए और अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। करवा चौथ पर पति-पत्नी के आपसी प्रेम और विश्वास को मजबूत करने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं। सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए करवाचौथ का दिन बेहद खास होता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. यह सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी है. करवा चौथ के दिन मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा आराधना की जाती है इसके साथ-साथ चंद्र देव को अर्घ प्रदान किया जाता है. इसके बाद ही सुहागिन महिलाएं व्रत खोल सकती हैं. यह व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है. करवा चौथ व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं को क्या नहीं करना चाहिए? ताकि व्रत की पवित्रता बनी रहे. Karwa Chauth 2025 Vrat Upay: करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं क्या करें, क्या नहीं…. Married women should take these measures on the day of Karva Chauth:करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं करें ये उपाय पहला उपाय- चौथ माता की पूजाजो सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं उनके लिए करवा माता की पूजा का विशेष महत्व होता है। करवा चौथ के दिन सुगाहिन महिलाओं को अपने करवा में जल भरकर चौथ माता को अर्पित करना चाहिए। पूजा के दौरान सुहागिन महिलाएं अपने सभी आभूषणों को पहनें। दूसरा उपाय- गौरी शंकर की पूजाकरवा चौथ पर जहां करवा माता की पूजा करने का विधान होता है,वहीं इसके साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन सुहागिन महिलाओं को गौरी शंकर की पूजा के साथ माता को सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और वस्त्र चढ़ाएं। इसस दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं। तीसरा उपाय- सुहाह की चीजों का करें दानकरवा चौथ पर सुख और सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और वस्त्र का दान करना सौभाग्यवती महिलाओं को शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे करने से मां पार्वती प्रसन्न होती है। जिससे अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। चौथा उपाय- 7 सुहागिन महिलाओं का आशीर्वाद धर्म शास्त्रों के अनुसार, करवा चौथ के दिन पूजा के बाद सात सुहागिन महिलाओं का आशीर्वाद लेने की परंपरा होती है। इस दिन जो महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं वे सात दूसरी सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री अर्पित करें। पांचवां उपाय- पति से लाल रंग के उपहार लेंकरवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं अपने पति से लाल या फिर पीले रंग की सुहाग की चीजें उपहार में लें। इससे प्रेम और सौभाग्य में वृद्धि होगी। साथी पति-पत्नी के बीच प्रेम और स्नेह बढ़ेगा।  Do not make this mistake even by mistake on the day of Karva Chauth:करवा चौथ के दिन भूलकर भी ना करें यह गलती अनाज का सेवन: करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से पहले खाई जाने वाली सरगी के बाद शुरू होता है और चांद निकलने के बाद ही खोला जाता है. इस दौरान जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती. अगर कोई महिला गलती से भी इस व्रत में जल या भोजन का सेवन कर लेती है, तो उसका व्रत खंडित हो जाता है. दिन में सोना: शास्त्र के अनुसार, व्रत रखने पर दिन के वक्त सोना अच्छा नहीं माना जाता है. इसलिए कोशिश करें अगर आपने व्रत रखा है तो दिन के समय में सोने से बचना बेहतर है. ना काले रंग के कपड़े पहने ना श्रृंगार करें: कई लोगों को काले रंग के या सफेद रंग के कपड़े पहनना काफी अच्छा लगता है. लेकिन करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं काले रंग के या सफेद रंग के कपड़े बिल्कुल भी ना पहने ऐसा करने से आपका व्रत निष्फल हो सकता है. चंद्रोदय के बाद ही खोले व्रत: करवा चौथ के दिन चंद्रोदय के बाद ही अर्घ प्रदान करें और उसके बाद ही अपने पति के हाथों व्रत का पारण करें, तभी शुभ फल की प्राप्ति होगी और हमेशा वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहेगी. करवा चौथ कथा karwa chauth vrat katha

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