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Papankusha Ekadashi

Papankusha Ekadashi 2025 Date: पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें, जीवन में मिलेंगे सभी सुख

Papankusha Ekadashi: सनातन धर्म में, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की सभी तिथियों का विशेष महत्व होता है, जिसमें एकादशी तिथि भी शामिल है. वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को (Papankusha Ekadashi) पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी दुखों से छुटकारा मिलता है. इस व्रत को करने से सभी पापों से भी छुटकारा मिलता है. पापांकुशा एकादशी 03 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी व्रत करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी दुखों से छुटकारा मिलता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करना भी शुभ माना गया है। एकादशी के दिन महादेव की पूजा करने से जीवन खुशहाल रहता है और बिगड़े काम पूरे होते हैं। अगर आप भी शिव जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर विशेष चीजें अर्पित करें। इससे शुभ फल की प्राप्ति होगी। पापांकुशा एकादशी 2025 कब है? (Papankusha Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2025 में पापांकुशा एकादशी 03 अक्टूबर को मनाई जाएगी. तिथि की शुरुआत: आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 02 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 10 मिनट पर होगी. तिथि का समापन: एकादशी तिथि का समापन 03 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 32 मिनट पर होगा. व्रत का पारण: व्रत का पारण 04 अक्टूबर को किया जाएगा. एकादशी पर क्यों करें भगवान शिव की पूजा:Why worship Lord Shiva on Ekadashi? पापांकुशा एकादशी Papankusha Ekadashi पर मुख्य रूप से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है. लेकिन, इस दिन भगवान शिव की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना गया है. एकादशी के दिन महादेव की पूजा करने से जीवन खुशहाल रहता है, और साधक के बिगड़े काम पूरे होते हैं. अगर आप भी शिव जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर विशेष चीजें अर्पित करनी चाहिए. इससे शुभ फल की प्राप्ति होगी. शिवलिंग पर क्या-क्या चढ़ाएं और क्या लाभ मिलेगा:What should be offered to Shivling and what will be the benefit? यदि आप भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता चाहते हैं, तो Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के दिन निम्नलिखित चीजें शिवलिंग पर अर्पित करें: 1. आर्थिक तंगी होगी दूर: कच्चे चावल (Raw Rice) अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी (Financial Difficulties) का सामना कर रहे हैं, तो Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर कच्चे चावल अर्पित करें. इसके साथ ही, महादेव से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें. धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर कच्चे चावल अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और आपकी आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है. 2. मिलेगा मनचाहा वर: घी (Ghee) शिवलिंग पर घी अर्पित करना भी बहुत शुभ माना जाता है. एकादशी के दिन महादेव का घी से अभिषेक करने से साधक को मनचाहे वर (Desired Spouse) की प्राप्ति होती है और जीवन में सफलता (Success) मिलती है. 3. जीवन में मिलेंगे सभी सुख: गन्ने का रस (Sugarcane Juice) जीवन में सभी सुखों (All Worldly Comforts) की प्राप्ति के लिए Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के अवसर पर शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करें. ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से साधक को जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं और उसे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. भगवान शिव के मुख्य मंत्र:Main mantras of Lord Shiva शिवलिंग पर अभिषेक और पूजन करते समय आप इन पवित्र मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं: 1. शिव जी का मूल मंत्र: ॐ नमः शिवाय॥ 2. महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ 3. रूद्र मंत्र: ॐ नमो भगवते रूद्राय। 4. रूद्र गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

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Dussehra 2025

Dussehra 2025 Upay: विजयादशमी के दिन करें ये सिद्ध 10+ उपाय, मां जाते-जाते घर में लगा देंगी धन का अंबार !

Dussehra 2025 Upay: आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी या दशहरा कहा जाता है। यह केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। Dussehra 2025 दशहरा केवल एक त्योहार भर नहीं है, बल्कि यह आत्मबल और संकल्प का प्रतीक भी है। मान्यता है कि इस तिथि पर लोग अपने जीवन से नकारात्मकता को हटाने और सकारात्मक ऊर्जा को अपनाने का संकल्प लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी का दिन घर-परिवार के लिए शुभता और सौभाग्य लेकर आता है। यही कारण है कि लोग इस अवसर पर नए कार्यों की शुरुआत को शुभ मानते हैं। Dussehra 2025 Upay, विजयादशमी के उपाय, दशहरा पर धन प्राप्ति, शमी वृक्ष पूजा, नीलकंठ दर्शन, विजयदशमी इस शुभ दिन पर किए गए विशेष उपायों से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और नई राह खुलती है। यह दिन घर में सुख-समृद्धि लाने का अवसर भी देता है, और इन उपायों से मां दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त होती है। धन, समृद्धि और आर्थिक प्रगति के लिए 6 विशेष उपाय:6 special remedies for wealth, prosperity and economic progress यदि आप अपने जीवन में आर्थिक स्थिरता, धन में वृद्धि और मां लक्ष्मी का स्थायी वास चाहते हैं, तो दशहरा के दिन ये सिद्ध उपाय अवश्य करें: 1. माता लक्ष्मी का स्मरण और झाड़ू अर्पण: दशहरे की शाम माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए किसी मंदिर में झाड़ू अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। Dussehra 2025 मान्यता है कि इस उपाय से घर में लक्ष्मी का वास होता है और धन-संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। 2. शमी वृक्ष की पूजा और पत्ते घर लाना: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शमी के वृक्ष में लक्ष्मी का वास माना जाता है। दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा करना और उसके पत्ते घर में लाना धन वृद्धि करता है और आर्थिक संकटों को दूर करता है। 3. अपराजिता देवी की आराधना: अपराजिता देवी (अपराजिता) की पूजा दशहरे पर विशेष फल देती है। घर के उत्तर दिशा में देवी अपराजिता की पूजा करें और उन्हें सिंदूर और चावल अर्पित करें। माना जाता है कि इससे जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती। 4. स्वर्ण या धातु खरीदना: दशहरा एक शुभ मुहूर्त का पर्व माना जाता है। इस दिन स्वर्ण, चांदी, तांबे, या पीतल जैसी धातु खरीदने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक स्थिरता मिलती है। 5. कुत्ते को लड्डू खिलाना: Dussehra 2025 दशहरे से शुरुआत कर लगातार 43 दिनों तक कुत्ते को बेसन के लड्डू खिलाने से धन संबंधी रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। 6. मां दुर्गा का विसर्जन: दशहरे के दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा या कलश का विधिपूर्वक पूजन कर विसर्जन करना चाहिए। श्रद्धा से की गई यह पूजा परिवार में सौभाग्य और समृद्धि लाती है। करियर, सफलता और विजय के लिए उपाय:Tips for career, success and victory 1. करियर/व्यापार में सफलता के लिए फल दान: यदि करियर या व्यापार में बाधाएं आ रही हों, तो दशहरे के दिन देवी की पूजा कर उन पर 10 तरह के फल चढ़ाएं और फिर उन्हें जरूरतमंदों में बांट दें। इस पूजन के दौरान ‘ॐ विजयायै नमः’ मंत्र का जप अवश्य करें। 2. कारोबार की उन्नति के लिए नारियल का उपाय: यदि व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा है, तो Dussehra 2025 दशहरे के दिन एक नारियल को पीले कपड़े में लपेटें। साथ में एक जोड़ी जनेऊ और मिठाई रखें और इसे किसी राम मंदिर में अर्पित करें। माना जाता है कि इससे कारोबार तेजी से आगे बढ़ता है। 3. शुभ संकेत और नीलकंठ दर्शन: धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध करने से पहले नीलकंठ पक्षी का दर्शन किया था। दशहरे के दिन नीलकंठ को देखना अत्यंत शुभ माना जाता है और यह विजय का प्रतीक समझा जाता है। 4. भगवान श्रीराम की आराधना: दशहरा भगवान श्रीराम की विजय का दिन है। Dussehra 2025 इस दिन श्रीराम का स्मरण और रामचरितमानस का पाठ करना विशेष लाभदायी है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और लक्ष्मी-कुबेर की कृपा मिलती है। स्वास्थ्य और संकटों से मुक्ति के उपाय:Ways to get rid of health and problems 1. बीमारी और संकट से छुटकारा: यदि परिवार का कोई सदस्य बीमारी या संकट से जूझ रहा हो, तो दशहरे के दिन एक साबुत नारियल लेकर उसे अपने ऊपर से 21 बार वारें। इसके बाद उस नारियल को रावण दहन की अग्नि में डाल दें। यह उपाय घर के सभी सदस्यों के लिए करना लाभकारी होता है। 2. मानसिक शांति के लिए पाठ: Dussehra 2025 दशहरे पर सुंदरकांड का पाठ या कथा करवाना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। यह उपाय मानसिक तनाव, रोग और संकटों को दूर कर घर में सुख-शांति लाता है। 3. मुकदमे से छुटकारे के लिए: Dussehra 2025 कोर्ट-कचहरी से संबंधित मामलों को शांत करने और सौभाग्य में वृद्धि के लिए दशहरे पर शमी वृक्ष के नीचे दीपक जलाना अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

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Shani pradosh vrat 2025

Shani pradosh vrat 2025: अक्टूबर 2025 में दो ‘शनि प्रदोष व्रत’ का अद्भुत संयोग! जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Shani pradosh vrat 2025: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का नाम महत्वपूर्ण व्रतों में आता है, क्योंकि इस व्रत की महिमा का वर्णन स्वयं शिवपुराण में किया गया है। यह पवित्र व्रत देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित होता है। Shani pradosh vrat 2025 हर महीने में यह व्रत दो बार किया जाता है: एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में, त्रयोदशी तिथि पर। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखकर प्रदोष काल (सायंकाल) में पूजा करने से साधकों को धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। Shani Pradosh Vrat 2025: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का नाम महत्वपूर्ण व्रत में आता है। क्योंकि इस व्रत की महिमा वर्णन खुद शिवपुराण में किया गया है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। Shani pradosh vrat 2025 प्रदोष का व्रत हर महीने में दो बार किया जाता है, एक कृष्ण पक्ष में तो दूसरा शुक्ल पक्ष में, इस दिन महादेव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का विधान है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखकर प्रदोष काल में पूजा करने से धन- समृद्धि की प्राप्ति होती है। Shani pradosh vrat 2025 वहीं यहां हम बात करने जा रहे हैं आश्विन प्रदोष व्रत के बारे में, जो 4 अक्टूबर को रखा जाएगा। वहीं यह शनि प्रदोष होगा, क्योंकि इस दिन शनिवार है। Shani pradosh vrat 2025 आइए जानते हैं प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम… shani pradosh vrat 2025 ashwin month last pradosh vrat 2025 kab hai know date and time shubh muhurat अक्टूबर 2025 का अजब संयोग: दो शनि प्रदोष व्रत:Strange coincidence of October 2025: Do Shani Pradosh fast अक्टूबर 2025 में एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब दोनों प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ रहे हैं, जिसके कारण ये दोनों ही ‘शनि प्रदोष व्रत’ कहलाएंगे। ज्योतिष के अनुसार, शनि देव के आराध्य देव महादेव ही हैं, Shani pradosh vrat 2025 इसलिए भगवान शिव की पूजा करने वाले साधकों पर शनिदेव की असीम कृपा बरसती है। आइए जानते हैं अक्टूबर 2025 में पड़ने वाले दोनों शनि प्रदोष व्रतों की तिथि और शुभ मुहूर्त: पहला शनि प्रदोष व्रत (04 अक्टूबर 2025):First Shani Pradosh Vrat (04 October 2025) अक्टूबर 2025 का पहला प्रदोष व्रत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ेगा। विवरण तिथि/समय (Pradosh Vrat 2025 Date) व्रत का दिन 04 अक्टूबर 2025 (शनिवार) त्रयोदशी तिथि का आरंभ शाम 05 बजकर 08 मिनट/09 मिनट पर (04 अक्टूबर) त्रयोदशी तिथि का समापन दोपहर 03 बजकर 04 मिनट/03 मिनट पर (05 अक्टूबर) पूजा का शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल) शाम 05 बजकर 29 मिनट से लेकर रात 07 बजकर 55 मिनट तक विशेष योग इस दिन द्विपुष्कर योग बन रहा है (सुबह 06 बजकर 13 मिनट से 09 बजकर 09 मिनट तक), जिसमें पूजा करने से दोगुना फल प्राप्त होता है दूसरा शनि प्रदोष व्रत (18 अक्टूबर 2025):Second Shani Pradosh Vrat (18 October 2025) अक्टूबर 2025 का दूसरा प्रदोष व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आएगा। विवरण तिथि/समय (Pradosh Vrat 2025 Date) व्रत का दिन 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार) त्रयोदशी तिथि का आरंभ दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर (18 अक्टूबर) त्रयोदशी तिथि का समापन दोपहर 01 बजकर 51 मिनट पर (19 अक्टूबर) पूजा का शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल) शाम 05 बजकर 15 मिनट से लेकर 07 बजकर 45 मिनट के बीच शनि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व (Shani Pradosh Vrat Mahatva) शनि प्रदोष व्रत को अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। यह व्रत रखने से कई प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। 1. शनि देव की कृपा: शनि प्रदोष का व्रत करने से शनि देव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे साधक को शनि दोष से मुक्ति मिलती है। 2. संतान सुख और आरोग्य: यह व्रत संतान सुख की प्राप्ति के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। साथ ही, व्रत रखने से आरोग्य (स्वास्थ्य) की प्राप्ति भी होती है। 3. दोषों से मुक्ति: जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु और कालसर्प दोष हैं, उन्हें इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से इन दोषों के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है। 4. सुख-समृद्धि: महादेव की कृपा से घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। Diwali 2025 Mantra: दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप, धन की समस्या होगी दूर

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आश्विन मास

Ashwin Maas 2025 Date: आश्विन मास का उत्सव 

आश्विन माह वर्ष का सातवां महीना माना जाता है। यह ग्रेगोरियन कैलेंडर के सितंबर-अक्टूबर में आता है। विक्रम संवत के अनुसार भाद्रपद माह की पूर्णिमा के बाद की प्रतिपदा आश्विन माह की पहली तिथि होती है। आश्विन मास का नाम ‘अश्विनी’ नक्षत्र के कारण ही पड़ा है। ‘अश्विनी’ हिंदू कैलेंडर में समय की गणना में उपयोग किए जाने वाले 27 नक्षत्रों में से पहला है। आश्विन मास का उत्सव:Ashwin month celebration हिंदू धर्म के लोगों के लिए आश्विन मास का विशेष महत्व है। इस माह में पितरों को मुक्ति दिलाने और उन्हें ऊर्जा देने के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म किया जाता है। पितृ पक्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में आता है। मान्यता है कि इस पक्ष में पूर्वज किसी भी रूप में घर पर आ सकते हैं। इसलिए इस एक पखवाड़े (पितृ पक्ष) में किसी भी जीव का अपमान नहीं करना चाहिए। बल्कि अपने द्वार पर आने वाले प्रत्येक प्राणी को भोजन देकर उसका सम्मान करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में पितृ दोष बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसलिए पितरों को मनाने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान कोई भी नया काम शुरू नहीं किया जाता है। यह पक्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से प्रारंभ होकर अमावस्या तक चलता है। आश्विन मास 2025:Ashwin month 2025 इस वर्ष आश्विन मास की गणना 8 सितंबर से 7 अक्टूबर 2025 तक है। आश्विन मास का महत्व:Importance of Ashwin month जिस तरह सावन को भगवान शिव का महीना माना जाता है, भाद्रपद को भगवान कृष्ण का महीना माना जाता है, उसी तरह आश्विन महीने को देवी दुर्गा का महीना कहा जाता है। भारत में हर साल चार नवरात्र मनाए जाते हैं, लेकिन आम तौर पर लोग चैत्र और शारदीय नवरात्र को साल में सबसे ज्यादा मानते हैं। शारदीय नवरात्रि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में शुरू होती है और विजयादशमी पर समाप्त होती है। नवरात्रि के दौरान भक्त 9 दिनों तक व्रत रखते हैं और विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा करते हैं। What to do in the month of Ashwin :आश्विन माह में क्या करें? आश्विन माह में पितरों का श्राद्ध और तर्पण जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से जातक को पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।इसके अलावा शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें। रोजाना दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।शारदीय नवरात्र व्रत करें।स्नान, दान-पुण्य का अधिक महत्व है।गरीब लोगों में अन्न, वस्त्र और धन का दान करें। आश्विन माह करें ये उपाय:Do these remedies in the month of Ashwin अगर आप पितृ दोष का सामना कर रहे हैं, तो पितृ पक्ष में पितरों की पूजा करें। साथ ही माता-पिता की सेवा और सम्मान करें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

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Bhai Dooj 2025

Bhai Dooj 2025 Date And Time: भाई दूज कब है? जानें शुभ मुहूर्त, तिलक विधि और महत्व

Bhai Dooj 2025: हिंदू धर्म में भाई दूज का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का अंतिम दिन होता है, जिसे भैया दूज, भाऊ बीज, भाई द्वितीया, भात्र द्वितीया, या भतरु द्वितीया भी कहा जाता है। इस पावन दिन पर बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करती हैं। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है, और यह दिवाली पूजा के दो दिन बाद आता है। भाई दूज 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त (Bhai Dooj 2025 Shubh Muhurat) द्रिक पंचांग और अन्य स्रोतों के अनुसार, साल 2025 में Bhai Dooj 2025 भाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। तिलक करने के लिए इस दिन एक विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा: विवरण (Detail) समय (Time) द्वितीया तिथि प्रारंभ 22 अक्टूबर 2025, रात 08 बजकर 16 मिनट पर द्वितीया तिथि समाप्त 23 अक्टूबर 2025, रात 10 बजकर 46 मिनट पर भाई दूज पर्व की तिथि 23 अक्टूबर 2025 तिलक का शुभ समय दोपहर 01 बजकर 13 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक तिलक की कुल अवधि 2 घंटे 15 मिनट बहनें इस शुभ समय में अपने भाइयों का तिलक कर सकती हैं। भाई दूज पूजा और तिलक विधि (Bhai Dooj 2025 Tilak Vidhi) भाई दूज पर तिलक की परंपरा विशेष महत्व रखती है। तिलक की सही विधि इस प्रकार है: 1. थाली तैयार करें: सबसे पहले पूजा की थाली तैयार करें। थाली में एक दीपक, रोली, अक्षत, हल्दी, मिठाई, सुपारी, सूखा नारियल, और मौली धागा आदि चीजें रखें। 2. दिशा: अपने भाई का मुख उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर करवाएं। यह दिशा शुभ मानी जाती है। 3. तिलक: बहनें अपने भाई के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक लगाएं। 4. आरती और मिष्ठान: तिलक लगाने के बाद, बहनें भाई की आरती उतारें और उन्हें मिठाई खिलाएं। 5. उपहार और वचन: इसके बाद, भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं और उनकी सदैव रक्षा करने का वचन देते हैं। भाई दूज का महत्व: यम द्वितीया की कथा (Bhai Dooj 2025 Significance and Katha) Bhai Dooj 2025 भाई दूज केवल भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार नहीं है, बल्कि यह पौराणिक मान्यताओं से भी जुड़ा है। इस पर्व का महत्व मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन देवी यमुना से जुड़ा है। पौराणिक कथा: कार्तिक माह की द्वितीया तिथि पर यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने के लिए गए थे। यमुना ने अत्यंत प्रेमपूर्वक उनका तिलक किया, आरती उतारी और उन्हें भोजन कराया। बहन के प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना को वरदान दिया। उन्होंने वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु (premature death) का भय नहीं होगा। इसी पौराणिक कथा और घटना की वजह से इस पर्व को ‘यम द्वितीया’ के नाम से भी जाना जाता है। कथा यह भी बताती है कि इस दिन यमराज एवं यमुना के मिलन की स्मृति में यमुना-स्नान का भी विशेष महत्व होता है क्योंकि यमुना ने यमराज का आदर-सत्कार किया था। भाई दूज का महत्व (Bhai Dooj 2025 Katha) भाई दूज Bhai Dooj 2025 का पर्व यमराज और उनकी बहन देवी यमुना से जुड़ा है। कथा के अनुसार, कार्तिक माह की द्वितीया तिथि पर यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने के लिए गए। यमुना ने उनका तिलक कर आरती उतारी और उन्हें भोजन कराया। यमुना के प्रेम से खुश होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा। इसी वजह से इस पर्व को ‘यम द्वितीया’ के नाम से भी जाना जाता है। Diwali 2025 Mantra: दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप, धन की समस्या होगी दूर

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Meerabai Jayanti

Meerabai Jayanti 2025 Date: मीरा बाई जयंती – 2025 में मीराबाई की जयंती

Meerabai Jayanti 2025:शरद पूर्णिमा के दिन को मीराबाई की जयंती के रूप में मनाया जाता है। मीरा बाई के जीवन से जुड़ी से कई बातें आज भी एक रहस्य मानी जाती है। उनकी मृत्यु भी भगवान की मूर्ति में हुई। मीरा बाई को भगवान कृष्ण का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है। मीरा बाई ने जीवन भर भगवान कृष्ण की भक्ति की थी। मीराबाई जोधपुर, राजस्थान के मेड़वा राजकुल की राजकुमारी थीं। Meerabai Jayanti मीराबाई मेड़ता महाराज के छोटे भाई रतन सिंह की एकमात्र संतान थीं। मीरा जब केवल दो वर्ष की थीं, उनकी माता की मृत्यु हो गई। इसलिए इनके दादा राव दूदा उन्हें मेड़ता ले आए और अपनी देख-रेख में उनका पालन-पोषण किया। मीराबाई का जन्म 1498 के लगभग हुआ था। मीरा बाई को भगवान कृष्ण का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है। Meerabai Jayanti मीरा बाई ने जीवन भर भगवान कृष्ण की भक्ति की और कहा जाता है कि उनकी मृत्यु भी भगवान की मूर्ति में हुई। मीरा बाई की जयंती पर कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं हैं, लेकिन हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन को मीराबाई की जयंती के रूप में मनाया जाता है। मीरा बाई के जीवन से जुड़ी कई बातें आज भी एक रहस्य मानी जाती हैं। गीताप्रेस गोरखपुर की भक्त-चरितंका नामक पुस्तक के अनुसार, मीरा बाई के जीवन और मृत्यु से जुड़ी कुछ बातें बताई गई हैं। मीरा बाई जयंती 2025 तिथि:Meerabai Jayanti 2025 हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, शरद पूर्णिमा दिवस को मीराबाई की जयंती के रूप में मनाया जाता है। साल 2025 में मीरा बाई जयंती मंगलवार, 7 अक्टूबर, 2025 को पड़ रही है। पूर्णिमा तिथि शुरू – 6 अक्टूबर 2025, दोपहर 12:23 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त – 7 अक्टूबर 2025, सुबह 9:16 बजे तुलसीदास के कहने पर प्रभु श्री राम की भक्ति:Devotion to Lord Shri Ram on the advice of Tulsidas इतिहास में किसी स्थान पर, यह पाया जाता है कि मीरा बाई ने भी तुलसीदास को गुरु बनाया और भक्ति की। कृष्ण भक्त मीरा ने राम भजन भी लिखा है, हालांकि इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन कुछ इतिहासकारों का मानना ​​है कि पत्रों के माध्यम से मीराबाई और तुलसीदास के बीच एक संवाद था। ऐसा माना जाता है कि मीराबाई ने तुलसीदास जी को एक पत्र लिखा था कि उनके परिवार के सदस्य उन्हें कृष्ण की भक्ति नहीं करने देते। श्रीकृष्ण को पाने के लिए, Meerabai Jayanti मीराबाई ने अपने गुरु तुलसीदास से एक उपाय पूछा। तुलसी दास के कहने पर, Meerabai Jayanti मीरा ने कृष्ण के साथ भक्ति के भजन लिखे। जिसमें सबसे प्रसिद्ध भजन है “पायो जी मैने राम रमन धन पायो” भगवान कृष्ण बचपन से ही भक्त थे:Lord Krishna was a devotee since childhood जोधपुर की राठौड़ रतन सिंह की इकलौती बेटी मीरा बाई बचपन से ही कृष्ण-भक्ति में डूबी थीं। कृष्ण की छवि मीराबाई के बालमन से तय हुई थी, इसलिए युवावस्था से लेकर मृत्यु तक उन्होंने कृष्ण को अपना सब कुछ माना। बचपन की एक घटना के कारण उनका कृष्ण प्रेम अपने चरम पर पहुंच गया। बचपन में एक दिन, उनके पड़ोस में एक अमीर व्यक्ति के पास एक बारात आई। सभी महिलाएं छत पर खड़ी होकर बारात देख रही थीं। बारात देखने मीराबाई भी छत पर आईं। बारात को देखकर, मीरा ने अपनी माँ से पूछा कि मेरी दुल्हन कौन है, जिस पर मीरा बाई की माँ ने उपहास में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति की ओर इशारा किया और कहा कि यह तुम्हारी दुल्हन है, यह बात मीराबाई के बालमन में एक गाँठ की तरह है। और कृष्ण को अपना पति मानने लगी। भोजराज के साथ विवाह:marriage with bhojraj मीराबाई का परिवार शादी के योग्य होने पर उससे शादी करना चाहता था, लेकिन Meerabai Jayanti मीराबाई श्रीकृष्ण को अपना पति मानते हुए किसी और से शादी नहीं करना चाहती थी। मीराबाई की इच्छा के विरुद्ध जाकर उसकी शादी मेवाड़ के राजकुमार भोजराज से हुई थी। मीरा की कृष्ण भक्ति:Meera’s devotion to Krishna अपने पति की मृत्यु के बाद, मीरा की भक्ति दिन-ब-दिन बढ़ती गई। मीरा मंदिरों में जाती थीं और श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने घंटों नृत्य करती थीं। मीराबाई की कृष्ण भक्ति उनके पति के परिवार के अनुकूल नहीं थी। उसके परिवार ने भी Meerabai Jayanti मीरा को कई बार जहर देकर मारने की कोशिश की। लेकिन श्री कृष्ण की कृपा से मीराबाई को कुछ नहीं हुआ। मीराबाई का अंत श्री कृष्ण में हो गया:Mirabai ended up in Shri Krishna ऐसा कहा जाता है कि जीवन भर Meerabai Jayanti मीराबाई की भक्ति के कारण श्री कृष्ण की भक्ति करते हुए उनकी मृत्यु हो गई। मान्यताओं के अनुसार, वर्ष 1547 में, द्वारका में, कृष्ण की पूजा करते हुए, उन्होंने श्री कृष्ण की मूर्ति का दर्शन किया। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मीरा वृंदावन की गोपी थीं:According to mythology, Meera was the Gopi of Vrindavan. ऐसा माना जाता है कि मीरा अपने पूर्व जन्म में वृंदावन की एक गोपी थीं और उन दिनों वह राधा की मित्र थीं। वह अपने दिल में भगवान कृष्ण से प्यार करती थी। गोपा से विवाह करने के बाद भी, Meerabai Jayanti श्री कृष्ण से उनका लगाव कम नहीं हुआ और उन्होंने कृष्ण से मिलने की तड़प में अपनी जान दे दी। बाद में उसी गोपी का जन्म मीरा के रूप में हुआ। Kumar Purnima 2025 Date: कुमार पूर्णिमा 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Diwali 2025 Mantra

Diwali 2025 Mantra: दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप, धन की समस्या होगी दूर

Diwali 2025 Mantra: ज्योतिषियों की मानें तो दीवाली (Diwali 2025) पर दुर्लभ शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही प्रीति योग का भी संयोग बन रहा है। इन योग में धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। Diwali 2025 Mantra इसके अलावा सुख और सौभाग्य में अपार वृद्धि होगी। साधक दीवाली के अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। Diwali 2025 Mantra: दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप मां लक्ष्मी मंत्र:Maa Lakshmi Mantra 1. ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥ 2. ॐ ऐं श्रीं महालक्ष्म्यै कमल धारिण्यै गरूड़ वाहिन्यै श्रीं ऐं नमः 3. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ । 4. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्री ॐ। 5. ॐ ह्री श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा । 6. ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ ।। 7. ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥ शुक्र देव मंत्र:Shukra Dev Mantra 1. ऊँ अन्नात्परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत क्षत्रं पय: सेमं प्रजापति: । 2. ऊँ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम ।। 3. ॐ भृगुराजाय विद्महे दिव्य देहाय धीमहि तन्नो शुक्र प्रचोदयात् ।। 4. ॐ नमो अर्हते भगवते श्रीमते पुष्‍पदंत तीर्थंकराय। अजितयक्ष महाकालियक्षी सहिताय ॐ आं क्रों ह्रीं ह्र:।। 5. ऊँ शुं शुक्राय नम: कुबेर मंत्र:kuber mantra 1. ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये। धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥ 2. ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥ धनदा लक्ष्मी स्तोत्र (Dhanadalakshmi Stotram) ॥ धनदा उवाच ॥ देवी देवमुपागम्य नीलकण्ठं मम प्रियम्। कृपया पार्वती प्राह शंकरं करुणाकरम्॥1॥ ॥ देव्युवाच ॥ ब्रूहि वल्लभ साधूनां दरिद्राणां कुटुम्बिनाम्। दरिद्र दलनोपायमंजसैव धनप्रदम्॥ ॥ शिव उवाच ॥ पूजयन् पार्वतीवाक्यमिदमाह महेश्वरः। उचितं जगदम्बासि तव भूतानुकम्पया॥ स सीतं सानुजं रामं सांजनेयं सहानुगम्। प्रणम्य परमानन्दं वक्ष्येऽहं स्तोत्रमुत्तमम्॥ धनदं श्रद्धानानां सद्यः सुलभकारकम्। योगक्षेमकरं सत्यं सत्यमेव वचो मम॥ पठंतः पाठयंतोऽपि ब्रह्मणैरास्तिकोत्तमैः। धनलाभो भवेदाशु नाशमेति दरिद्रता॥ भूभवांशभवां भूत्यै भक्तिकल्पलतां शुभाम्। प्रार्थयत्तां यथाकामं कामधेनुस्वरूपिणीम्॥ धनदे धनदे देवि दानशीले दयाकरे। त्वं प्रसीद महेशानि! यदर्थं प्रार्थयाम्यहम्॥ धराऽमरप्रिये पुण्ये धन्ये धनदपूजिते। सुधनं र्धामिके देहि यजमानाय सत्वरम्॥ रम्ये रुद्रप्रिये रूपे रामरूपे रतिप्रिये। शिखीसखमनोमूर्त्ते प्रसीद प्रणते मयि॥ आरक्त-चरणाम्भोजे सिद्धि-सर्वार्थदायिके। दिव्याम्बरधरे दिव्ये दिव्यमाल्यानुशोभिते॥ समस्तगुणसम्पन्ने सर्वलक्षणलक्षिते। शरच्चन्द्रमुखे नीले नील नीरज लोचने॥ चंचरीक चमू चारु श्रीहार कुटिलालके। मत्ते भगवती मातः कलकण्ठरवामृते॥ हासाऽवलोकनैर्दिव्यैर्भक्तचिन्तापहारिके। रूप लावण्य तारूण्य कारूण्य गुणभाजने॥ क्वणत्कंकणमंजीरे लसल्लीलाकराम्बुजे। रुद्रप्रकाशिते तत्त्वे धर्माधरे धरालये॥ प्रयच्छ यजमानाय धनं धर्मेकसाधनम्। मातस्त्वं मेऽविलम्बेन दिशस्व जगदम्बिके॥ कृपया करुरागारे प्रार्थितं कुरु मे शुभे। वसुधे वसुधारूपे वसु वासव वन्दिते॥ धनदे यजमानाय वरदे वरदा भव। ब्रह्मण्यैर्ब्राह्मणैः पूज्ये पार्वतीशिवशंकरे॥ स्तोत्रं दरिद्रताव्याधिशमनं सुधनप्रदम्। श्रीकरे शंकरे श्रीदे प्रसीद मयिकिंकरे॥ पार्वतीशप्रसादेन सुरेश किंकरेरितम्। श्रद्धया ये पठिष्यन्ति पाठयिष्यन्ति भक्तितः॥ सहस्रमयुतं लक्षं धनलाभो भवेद् ध्रुवम् धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च। भवन्तु त्वत्प्रसादान्मे धन-धान्यादिसम्पदः॥

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Karwa Chauth 2025

Karwa Chauth 2025 Date And Time : करवाचौथ कब है, 9 या 10 अक्टूबर? चांद निकलने का समय, क्या खाकर खोले व्रत

Karwa Chauth 2025 Kab Hai: शारदीय नवरात्रि चल रहे हैं और जल्द ही विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा। इसके बाद लोगों को साल के सबसे खास त्योहार, दीवाली, का इंतजार होता है। दीवाली से लगभग दो हफ्ते पहले करवा चौथ का पर्व आता है। करवा चौथ Karwa Chauth 2025 का व्रत शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं।Karwa Chauth 2025 इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और चांद के दिखने के बाद ही व्रत खोलती हैं। वहीं जिनकी शादी नहीं हुई हैं, वो लोग भी अच्छे या फिर मनचाहे वर के लिए इस व्रत को रखती हैं। हर बार की तरह इस बार भी (Karwa Chauth 2025) करवाचौथ की तारीख को लेकर लोगों के बीच कन्फ्यूजन बना हुआ है कि यह 9 अक्टूबर को है या 10 अक्टूबर को। नीचे जानें करवा चौथ की सही तारीख और पूजा के शुभ मुहूर्त। इस दिन है करवा चौथ 2025:This day is Karwa Chauth 2025 बता दें कि इस साल करवा चौथ 10 अक्टूबर को है। इस दिन शुक्रवार पड़ेगा और व्रत भी इसी तारीख को रखा जाएगा। Karwa Chauth 2025 व्रत रखने वाली महिलाएं शुभ मुहूर्त के समय ही विधि विधान के साथ पूजा कर सकती हैं। करवा चौथ 2025 के लिए शुभ मुहूर्त और समय इस प्रकार हैं:The auspicious muhurat and timings for Karva Chauth 2025 are as follows: विवरण समय व्रत का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से रात 8 बजकर 13 मिनट तक पूजा का समय (शुभ मुहूर्त) शाम 5 बजकर 57 मिनट से लेकर 7 बजकर 11 मिनट तक चंद्रमा के दिखने का समय (चंद्रोदय) 8 बजकर 13 मिनट व्रत रखने वाले लोग पूजा करते ही चांद देखकर अपना व्रत खोल सकते हैं। करवा चौथ पूजा सामग्री की लिस्ट:Karva Chauth puja material list करवा चौथ Karwa Chauth 2025 की पूजा के लिए कुछ आवश्यक चीजें होती हैं जिन्हें पहले से ही एकत्रित कर लेना चाहिए। Karwa Chauth 2025 पूजा के दौरान जिन चीजों की जरूरत पड़ती है, उनकी पूरी लिस्ट यहाँ दी गई है: 1. मिट्टी का करवा और ढक्कन। 2. दिया (दीपक)। 3. छलनी (छाननी)। 4. पानी का ग्लास या फिर लोटा। 5. रोली। 6. अक्षत (चावल)। 7. कुमकुम। 8. हल्दी। 9. धूपबत्ती। 10. फल। 11. चंदन। 12. सिंदूर। 13. फूल। 14. श्रृंगार की चीजें। 15. मीठा (मिठाई या पकवान)। करवा चौथ 2025 व्रत विधि | Karwa Chauth 2025 Vrat Vidhi पूजा सामग्री : पूजा के लिए जो सामान जरूरी होता है, उसमें शामिल हैं- करवा (मिट्टी या पीतल का), दीपक, धूपबत्ती, रोली, चंदन, चावल, फूल, मिठाई, फल, एक तांबे या पीतल का लोटा जिसमें जल हो, छलनी और करवा चौथ की कथा की पुस्तक. साफ-सफाई करें: पूजा से पहले अपने हाथ-पैर धो लें और साफ कपड़े पहनें.पूजा की थाली तैयार करें: थाली में दीपक, अगरबत्ती, चावल, हल्दी, सिंदूर, रुई, पूजा की मिट्टी (गंगाजल), मिठाई, फल और पानी रखें.भगवान और माता पार्वती की तस्वीर या मूर्ति रखें: घर में माँ पार्वती और भगवान शिव की तस्वीर या मूर्ति रखकर पूजा करें.माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना करें: ध्यान लगाकर माता पार्वती और शिवजी को फूल, जल, सिंदूर और चावल चढ़ाएं. कथा या पूजा का पाठ करें: करवा चौथ की कथा सुनें या पढ़ें. इससे व्रत का महत्व बढ़ता है.दीपक जलाएं और आरती करें: दीपक जलाकर आरती करें और मां से व्रत पूरा होने तक पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें.चंद्रमा देखने का इंतजार करें: रात को चंद्रमा निकलने का इंतजार करें. जैसे ही चंद्रमा दिखाई दे, पूजा की थाली लेकर उसे देखें.चंद्रमा को अर्ध्य दें: थाली में पानी लेकर चंद्रमा को अर्ध्य दें यानी पानी अर्पित करें.व्रत खोलें: पति के हाथ लेकर व्रत खोलें और खजूर, पानी या गन्ने का रस पिएं. ध्यान रखें: पूरे दिन भूखे और प्यासे रहें, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान जरूर रखें. पूजा की प्रक्रिया और गणेश पूजन कैसे करें:Process of worship and how to do Ganesh puja सभी महिलाएं एक साथ बैठकर पहले गणेश जी की पूजा करती हैं. Karwa Chauth 2025 फिर करवा माता की पूजा होती है. इसके बाद करवा चौथ की कथा पढ़ी या सुनी जाती है. यह कथा एक साहसी रानी और उसके विश्वास की कहानी होती है, जो Karwa Chauth 2025 व्रत के महत्व को दर्शाती है. करवा चौथ पर चांद देखने की परंपरा | Chand Kab Niklega 2025 में चंद्रोदय का समय : हिंदू पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 10 अक्टूबर को शाम 7:38 बजे तक रहेगी और चंद्रोदय शाम 7:42 बजे होगा. यही वह समय होगा जब महिलाएं चांद को देखकर व्रत खोलेंगी. क्या खाकर खोलें करवा चौथ का व्रत? | Karwa Chauth Ka Vrat Kaise Khole रात को जैसे ही चांद निकलता है, महिलाएं छलनी से पहले चांद को देखती हैं और फिर अपने पति का चेहरा निहारती हैं. इसके बाद चांद को अर्घ्य (जल चढ़ाना) दिया जाता है. इसके तुरंत बाद पति के हाथों से जल पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोला जाता है. करवा चौथ का व्रत खोलने के लिए क्या खाना चाहिए:What should be eaten to break the fast of Karva Chauth? जब करवा चौथ का व्रत खत्म होता है, तो सबसे पहले खजूर खाते हैं. खजूर बहुत खास होता है और व्रत खोलने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है.  what not to do on this day:इस दिन क्या न करें करवा चौथ Karwa Chauth 2025 के दिन मांसाहारी भोजन, शराब और नकारात्मक सोच से पूरी तरह दूर रहना चाहिए. दिनभर शांतिपूर्ण मन से व्रत रखें और किसी से वाद-विवाद न करें. How to start Karva Chauth:करवा चौथ की शुरुआत कैसे करें? करवा चौथ के दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. Karwa Chauth 2025 उसके बाद सरगी खाएं, जो आपकी सास की ओर से दी जाती है. सरगी में फल, सूखे मेवे, मिठाई और हल्का भोजन होता है. इसके बाद व्रत का संकल्प लें कि आप पूरे दिन बिना जल के यह व्रत रखेंगी. How to prepare for puja on the evening of Karva Chauth:कैसे करें करवा चौथ की शाम को पूजा की तैयारी? शाम के समय पूजा के लिए साफ कपड़े पहनें और सोलह श्रृंगार करें. पूजा के लिए एक साफ स्थान पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर करवा माता की तस्वीर रखें. साथ ही

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Kumar Purnima 2025

Kumar Purnima 2025 Date: कुमार पूर्णिमा 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Kumar Purnima 2025: कुमार पूर्णिमा, अश्विन महीने के दौरान पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला त्योहार है। यह त्योहार ओडिशा के सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। अविवाहित महिलाएं मुख्यतः यह त्यौहार का पालन करते हैं, एक सुंदर पति की कामना करती हैं, इसलिए वे कुमार कार्तिकेय की आराधना करती हैं। लेकिन, विशेष रूप से पर्याप्त भगवान के लिए कोई अनुष्ठान नहीं है, इसके बजाय सूर्य और चंद्रमा की पूजा की जाती है। कैसे मनाया जाता है कुमार पूर्णिमा:How is Kumar Purnima 2025 celebrated? प्रात:काल स्नान के बाद कन्याएं नये वस्त्र पहनती हैं और सूर्य को अन्नबलि चढ़ाती हैं।अविवाहित महिलाएं दिन भर उपवास रखते हैं।शाम को जब चंद्रमा उगता है तो वे फिर से एक विशेष किस्म के भोजन का प्रसाद बनाते हैं और अनुष्ठान समाप्त होने के बाद इसे प्रसाद के तौर पर ग्रहण करते हैं। यह लड़कियों के लिए खुशी का त्योहार है, सभी गाते और नाचते हैं। गीत विशेष प्रकृति के होते हैं। वे एक तरह का खेल भी खेलते हैं जिसे ‘पुची’ के नाम से जाना जाता है। कुमार पूर्णिमा में लक्ष्मी पूजा उत्सव:Lakshmi Puja festival in Kumar Purnima इस दिन को धन की देवी लक्ष्मी के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। Kumar Purnima 2025 इसलिए, कई लोग अपने घरों में देवी की पूजा करते हैं। जो की ओड़िसा और वेस्ट बंगाल में मशहूर है । कुमार पूर्णिमा Kumar Purnima 2025 के साथ कार्तिक महीने का प्रारम्भ होता है जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार सबसे पवित्र महीनों में से एक है। हिंदू संस्कृति में इसका बहुत महत्व है। Kumar Purnima 2025 भगवान जगन्नाथ और कृष्ण की ‘कार्तिक’ के पूरे महीने में प्रार्थना की जाती है जो Kumar Purnima 2025 कुमार पूर्णिमा के बाद से शुरू होकर ‘रस’ पूर्णिमा तक होती है। शुभ मुहूर्त (अनुमानित):Auspicious time (approximate) पूजा या विशेष अनुष्ठान करने के लिए शुभ मुहूर्त जानना महत्वपूर्ण है। चूँकि “(Kumar Purnima 2025) कुमार पूर्णिमा” एक क्षेत्रीय व लोकपारंपरिक उत्सव है, इसलिए मुहूर्त की जानकारी अलग-अलग स्रोतों और पंचांगों में भिन्न हो सकती है। लेकिन कुछ सामान्य दिशानिर्देश इस प्रकार हो सकते हैं: पूजा विधि एवं अनुष्ठान:Worship method and rituals नीचे एक संक्षिप्त पूजा विधि है जिसे आप “कुमार पूर्णिमा” के अवसर पर कर सकती/सकते हैं:   • “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः”   • अन्य चंद्र संबंधी या देवी-देवता संबंधी मंत्र आपके अनुकूल हो सकते हैं।  • मनोकामना बताते हुए प्रार्थना करें — विशेष रूप से विवाह/उच्च साझेदारी आदि। Diwali 2025 Date And Time: 20 या 21 अक्टूबर, कब है दिवाली? जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और दीपावली कैलेंडर

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Dhanteras 2025

Dhanteras 2025 Date And Time: 18 या 19 अक्टूबर, कब है धनतेरस? नोट करें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Dhanteras 2025 Kab Hai: धनतेरस 2025: दीपावली उत्सव का प्रथम और महत्वपूर्ण पर्व Dhanteras 2025: सनातन धर्म में धनतेरस (Dhanteras 2025) का पर्व विशेष महत्व रखता है। इसे दीपावली (दीवाली) उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और यह पांच दिवसीय उत्सव का पहला महत्वपूर्ण पर्व होता है। यह पर्व हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित व्रत रखा जाता है, जिनकी पूजा करने से धन संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं। 18 या 19 अक्टूबर, कब मनाया जाएगा धनतेरस 2025? (Dhanteras 2025 Date) Dhanteras 2025: धनतेरस 2025 की सही तिथि को लेकर भक्तों के मन में अक्सर असमंजस रहता है कि यह पर्व 18 अक्टूबर को है या 19 अक्टूबर को। आइए वैदिक पंचांग और द्रिक पंचांग के अनुसार सही तिथि और समय जानते हैं: त्रयोदशी तिथि का आरंभ: 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार) को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर। त्रयोदशी तिथि का समापन: 19 अक्टूबर 2025 (रविवार) को दोपहर 1 बजकर 51 मिनट पर। चूँकि हिंदू धर्म में उदयातिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, यानी वह तिथि जो सूर्योदय के समय मौजूद हो, इसलिए धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर 2025, शनिवार के दिन ही मनाया जाएगा। धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त 2025 (Dhanteras Puja Muhurat 2025) Dhanteras : धनतेरस के दिन पूजन के लिए प्रदोष काल यानी संध्याकाल को सबसे शुभ माना गया है। इस समय भगवान धन्वंतरि की पूजा और दीपदान करना श्रेष्ठ होता है। विवरण तिथि समय अवधि स्रोत धनतेरस 2025 तिथि 18 अक्टूबर 2025 शनिवार – पूजन का शुभ समय (प्रदोष काल) | 18 अक्टूबर 2025 शाम 7 बजकर 16 मिनट से 8 बजकर 20 मिनट तक 1 घंटा 4 मिनट धनतेरस का धार्मिक महत्व और पौराणिक मान्यताएं:Religious significance and mythological beliefs of Dhanteras धनतेरस Dhanteras 2025 को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व से जुड़ी मुख्य मान्यताएं और महत्व निम्नलिखित हैं: 1. भगवान धन्वंतरि का जन्म: पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का जनक (देवताओं का वैद्य) भी कहा जाता है। 2. स्वास्थ्य और समृद्धि: इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि उनकी पूजा से शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। 3. खरीददारी का महत्व: इस दिन सोना-चांदी से बने आभूषणों, बर्तनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि धनतेरस पर की गई खरीदारी से धन में 13 गुना वृद्धि होती है। 4. यम दीपदान: माना जाता है कि Dhanteras धनतेरस पर दीपदान करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-शांति आती है। शाम के समय घर के बाहर यम देवता के लिए एक बड़ा दीपक (यम दीप) जलाया जाता है, जिससे अकाल मृत्यु से बचाव होता है। धनतेरस की पूजा विधि (Dhanteras Puja Vidhi) धनतेरस Dhanteras 2025 पर मां लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और स्वास्थ्य के देवता धन्वंतरि की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान इन चरणों का पालन करें: 1. सफाई और स्थापना: पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें। पूजा के लिए एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। 2. देवताओं को स्थापित करें: चौकी पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 3. दीपक प्रज्ज्वलित करें: पूजा शुरू करने से पहले धन्वंतरि देव के लिए एक घी का दीपक जलाएं। यह दीपक स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 4. मंत्र जाप: पूजा करते समय ‘ॐ धन्वंतराय नमः’ और धन प्राप्ति के लिए ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः’ जैसे मंत्रों का जाप करें। 5. अर्पण: भगवान को फल, फूल, मिठाई, और धनिया के बीज (जिसे धन का प्रतीक माना जाता है) अर्पित करें। 6. कथा श्रवण: पूजा समाप्त होने के बाद धनतेरस की कथा अवश्य सुनें। 7. यम दीप: शाम को, घर के बाहर यम देवता के लिए एक बड़ा दीपक जलाना न भूलें। Diwali 2025 Date And Time: 20 या 21 अक्टूबर, कब है दिवाली? जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और दीपावली कैलेंडर

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Diwali 2025

Diwali 2025 Date And Time: 20 या 21 अक्टूबर, कब है दिवाली? जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और दीपावली कैलेंडर

Diwali 2025 Kab Hai: हिंदू धर्म में दिवाली (दीपावली) का पर्व प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। यह पावन पर्व अंधकार पर प्रकाश की जीत, अधर्म पर धर्म की विजय और अज्ञानता पर ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली का त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन प्रभु श्री राम 14 वर्ष का कठिन वनवास पूरा करके माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में नगरवासियों ने पूरे अयोध्या को घी के दीपकों से सजाया था, तभी से यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। दिवाली (Diwali) का पांच दिवसीय पर्व धनतेरस के साथ आरंभ होता है और भाई दूज के साथ समाप्त होता है। आइए जानते हैं Diwali 2025 दिवाली 2025 की सही तिथि और संपूर्ण कैलेंडर। कब है दिवाली 2025? (Diwali 2025 Date) वर्ष 2025 में, Diwali दिवाली के पर्व की तिथि को लेकर लोगों में अक्सर असमंजस रहता है। यहाँ द्रिक पंचांग के अनुसार सही तिथि और समय दिया गया है: 1. कार्तिक अमावस्या का आरंभ: 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 3 बजकर 45 मिनट पर। (अन्य स्रोत के अनुसार 03 बजकर 44 मिनट पर)। 2. कार्तिक अमावस्या का समापन: 21 अक्टूबर 2025 को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर। (अन्य स्रोत के अनुसार 21 अक्टूबर 2025 को सुबह 05 बजकर 54 मिनट पर)। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा निशिता काल (मध्यरात्रि) में करने का विशेष विधान होता है। इसी कारण, दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025, सोमवार के दिन मनाया जाएगा। दिवाली 2025 लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त (Lakshmi Puja Muhurat) दिवाली Diwali पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी की पूजा-अर्चना की जाती है। लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए सबसे शुभ समय प्रदोष काल और स्थिर लग्न का माना जाता है। पूजन का विवरण तिथि और समय अवधि लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 18 मिनट तक 1 घंटा 10 मिनट अन्य लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 20 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक 1 घंटा 8 मिनट प्रदोष काल शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 8 मिनट तक – वृषभ काल (सन्ध्या) शाम 6 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 53 मिनट तक 1 घण्टा 56 मिनट्स निशिता काल का मुहूर्त (मध्यरात्रि) रात 11:41 से 21 अक्टूबर को सुबह 12:31 तक – दिवाली 2025 का 5 दिवसीय कैलेंडर (Diwali 2025 Calendar) दिवाली का पर्व एक दिन का नहीं, बल्कि पांच दिनों का त्योहार होता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। त्योहार का नाम तिथि दिन धनतेरस 18 अक्टूबर 2025 शनिवार काली चौदस 19 अक्टूबर 2025 रविवार नरक चतुर्दशी 20 अक्टूबर 2025 सोमवार दिवाली 20 अक्टूबर 2025 सोमवार दिवाली स्नान 21 अक्टूबर 2025 मंगलवार गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025 बुधवार भाई दूज 23 अक्टूबर 2025 गुरुवार Dhanteras Kab Hai: धनतेरस कब है कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर आरंभ हो रही है, जिसके कारण धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 से 19 अक्टूबर को सुबह 06:08 तक है। Diwali Pujan Vidhi or Mahetwapurn Upay: दिवाली पूजन विधि और महत्वपूर्ण उपाय दिवाली Diwali के दिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए सही विधि से पूजा करना आवश्यक है: पूजन विधि: Puja Vidhi 1. स्थान की तैयारी: सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके पूर्व दिशा या ईशान कोण (North-East) में लकड़ी की चौकी रखें। 2. स्थापना: चौकी पर लाल या गुलाबी रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर विराजमान करें। 3. शुद्धिकरण: संकल्प लें, एकमुखी घी का दीपक जलाएं, और अपने चारों ओर जल छिड़ककर शुद्धिकरण करें। 4. पूजन क्रम: सबसे पहले भगवान गणेश को पुष्प और मिठाई अर्पित करें। उसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें। 5. समापन: दोनों देवताओं के मंत्रों का जप करने के बाद आरती करें और शंखनाद करें। 6. वस्त्र: पूजा के समय लाल, पीले या चमकीले वस्त्र धारण करें और काले व गहरे रंगों से परहेज करें। 7. दीप प्रज्ज्वलन: दिवाली की रात घर के प्रत्येक कोने, मुख्य द्वार, छत और आंगन में दीपक अवश्य जलाएं। धन-समृद्धि के लिए विशेष उपाय • धन प्राप्ति: धन-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए पूजा के समय मां लक्ष्मी को एकाक्षी नारियल (one-eyed coconut) अर्पित करें। • सुख-शांति: जीवन में सुख-शांति के लिए इस दिव्य मंत्र का जप करें: “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीं क्लीं क्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै मम गृहे धनं पूरय पूरय, चिंतां दूरय दूरय स्वाहा॥” मान्यता है कि सच्चे मन से यह उपाय करने पर मां लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

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Maa Siddhidhatri

Navratri 2025 Day 9 Maa Siddhidhatri Puja Vidhi : नवरात्रि के 9वें दिन मां सिद्धिदात्री की होती है पूजा, नोट कर लें पूजन….

Maa Siddhidhatri Puja Vidhi : सिद्धिदात्री को आठ सिद्धियों की देवी माना जाता है। भक्त पूरे विधि-विधान और श्रद्धा से उनकी पूजा करके अष्ट सिद्धि प्राप्त कर सकते हैं। नवरात्रि के 9वें दिन माता सिद्धिदात्री की कृपा पाने के लिए व्रत रखा जाता है। आइए, विस्तार से जानते हैं नवरात्रि के 9वें दिन की पूजा विधि और भोग। 9वां दिन है, जिसे रामनवमी भी कहते हैं। इस दिन (Maa Siddhidhatri) मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री सिद्धियां और मोक्ष देती हैं इसलिए उनकी पूजा करने से सारे काम पूरे होते हैं और मोक्ष मिलता है। कुछ कहानियों के अनुसार, भगवान शिव ने भी Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री से ही सिद्धियां पाई थीं। आइए, जानते हैं मां सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें, उन्हें क्या भोग लगाएं और इस दिन का क्या महत्व है। Navratri 9th Day Maa Siddhidatri Puja :  नवरात्रि का अंतिम यानी 9वां दिन है। नवरात्रि के 9वें दिन मां दुर्गा के के नवमं स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। नव दुर्गाओं में मां सिद्धिदात्री अंतिम हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उन्हें यश, बल और धन भी प्रदान करती हैं। शास्त्रों में मां सिद्धिदात्री को सिद्धि और मोक्ष की देवी माना जाता है। मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली हैं। सभी देवी-देवताओं को मां से ही सिद्धियों की प्राप्ति हुई हैं। भगवान शिव ने भी मां की तपस्या कर सिद्धियों को प्राप्त किया। मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वह अर्धनारीश्वर कहलाए। नवरात्र में नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद नवरात्र का समापन माना जाता है। Siddhidatri Mata Koun Hai: सिद्धिदात्री माता कौन है नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। यह दिन बहुत खास है। Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री कमल के फूल पर बैठती हैं। उनकी पूजा में नौ तरह के फल और फूल चढ़ाए जाते हैं। उन्हें विद्या और कला की देवी सरस्वती का रूप भी मानते हैं। माता सिद्धिदात्री के पास हैं 8 सिद्धियां:Mata Siddhidatri has 8 Siddhiyas भक्त नवरात्रि के नौ दिनों तक उपवास और पूजा-अर्चना करके मां दुर्गा की कृपा पाते हैं और मनचाहा फल प्राप्त करते हैं। साथ ही, घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। देवी-देवता, गंधर्व, ऋषि और असुर भी माता सिद्धिदात्री की पूजा करके आठ सिद्धियां प्राप्त कर सकते हैं और अंत में मोक्ष प्राप्त करते हैं। नवरात्रि के 9वें पूजा विधि:9th puja method of Navratri Maa Siddhidhatri: नवरात्रि के 9वें दिन कन्या पूजन किया जाता है. इस दिन 9 कन्याओं और एक लांगूर (बालक) का पूजन करने का विधान है। हालांकि, अपनी क्षमता के अनुसार 5 कन्याओं का पूजन भी किया जा सकता है। कन्या पूजन में कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें दान-दक्षिणा दी जाती है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है. यह पूजन श्रद्धा और सम्मान के साथ किया जाता है। नवरात्रि के 9वें दिन का भोग:Offerings on the 9th day of Navratri मां सिद्धिदात्री Maa Siddhidhatri को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई तरह के भोग लगाते हैं। हलवा, पूरी, चना, फल, खीर और नारियल जैसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। मान्यता है कि जामुनी या बैंगनी रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से विशेष फल मिलता है। भोग लगाने के बाद मां सिद्धिदात्री माता की विशेष रूप से आरती की जाती है। पूजा-विधि:Method of worship सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं। मां को सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां को सफेद रंग पसंद है। मां को स्नान कराने के बाद सफेद पुष्प अर्पित करें। मां को रोली कुमकुम लगाएं। मां को मिष्ठान, पंच मेवा, फल अर्पित करें। माता सिद्धिदात्री को प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के ही फल अर्पित करने चाहिए। मां सिद्धिदात्री Maa Siddhidhatri को मौसमी फल, चना, पूड़ी, खीर, नारियल और हलवा अतिप्रिय है। कहते हैं कि मां को इन चीजों का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं। माता सिद्धिदात्री का अधिक से अधिक ध्यान करें। मां की आरती भी करें। नवमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन कन्या पूजन भी करें। मां सिद्धिदात्री बीज मंत्र- ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:। कन्या पूजन अति उत्तम-ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन करना अति उत्तम माना जाता है। कहते हैं कि नवरात्रि के आखिरी दिन कन्या पूजन करने से Maa Siddhidhatri मां सिद्धिदात्री प्रसन्न होती हैं। Aarti of Maa Siddhidhatri :मां सिद्धिदात्री की आरती जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता। तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता। तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि। कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम। तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है। रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो। तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे। तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया। सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली। जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली। हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा। महा नंदा मंदिर में है वास तेरा। मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता। भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता। Shardiya Navratri 2025 Day 8 Puja Vidhi: अष्टमी विशेष, जानिए मां महागौरी की कृपा पाने का सही तरीका

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