Ahoi Ashtami 2026 Date, Shubh Muhurat And Puja Vidhi: जानिए अहोई अष्टमी की सही तारीख, तारों का समय, पूजा विधि और व्रत कथा….

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Ahoi Ashtami 2026 Date, Shubh Muhurat And Puja Vidhi: जानिए अहोई अष्टमी की सही तारीख, तारों का समय, पूजा विधि और व्रत कथा….
KARMASU 30 October 2026 10 मिनट पढ़ें
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Ahoi Ashtami 2026 Date, Shubh Muhurat And Puja Vidhi : कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को सनातन धर्म में माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी आयु, आरोग्य, उज्ज्वल भविष्य और सुख-समृद्धि के लिए Ahoi Ashtami 2026 का पवित्र पर्व बड़े ही भक्ति भाव और उल्लास के साथ मनाया जाता है। Ahoi Ashtami 2026 करवा चौथ के ठीक आठ दिन बाद और दीपावली से आठ दिन पूर्व आने वाला यह पावन व्रत माताओं के असीम वात्सल्य, त्याग और ममता का प्रतीक है। इस दिन माताएं दिनभर निर्जला या फलाहारी उपवास रखती हैं और संध्याकाल में अहोई माता (देवी पार्वती का रूप) तथा सेही (स्याऊ) माता की पूजा करके तारों को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलती हैं।

वर्ष 2026 में Ahoi Ashtami 2026 का यह व्रत किस दिन रखा जाएगा, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, Ahoi Ashtami 2026 तारों के दर्शन का समय क्या रहेगा, राधा कुंड स्नान का क्या महत्व है, Ahoi Ashtami 2026 और इसके पीछे की पौराणिक व्रत कथा क्या है यदि आप इन सभी प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण और विस्तृत मार्गदर्शिका है….

अहोई अष्टमी 2026 सही तिथि और पंचांगीय शुभ मुहूर्त : Ahoi Ashtami 2026: Correct Date and Auspicious Timing (Muhurat) According to the Panchang

वैदिक पंचांग की सूक्ष्म गणना के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी मनाई जाती है। द्रिक पंचांग और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन संध्याकाल (प्रदोष काल) के समय अष्टमी तिथि विद्यमान हो, क्योंकि इसी समय अहोई माता का पूजन और तारों को अर्घ्य अर्पण किया जाता है।

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वर्ष 2026 में Ahoi Ashtami 2026 की तिथि, पूजा और तारों के दर्शन के शुभ मुहूर्त का शास्त्रीय विवरण निम्नलिखित तालिका में दिया गया है

पंचांगीय विवरणशास्त्रीय तिथि एवं समय (IST – भारत)
मुख्य व्रत तिथि01 नवंबर 2026 (दिन: रविवार)
अष्टमी तिथि प्रारंभ01 नवंबर 2026, दोपहर 02:51 PM बजे
अष्टमी तिथि समाप्त02 नवंबर 2026, दोपहर 01:10 PM बजे
संध्या पूजा का शुभ मुहूर्तशाम 04:59 PM से शाम 06:15 PM तक (अथवा 05:36 PM से 06:54 PM)
तारों के दर्शन का समय (सांझ)शाम 05:22 PM से शाम 06:00 PM के बीच
चंद्रोदय का समय (देर रात्रि)रात 11:36 PM / 11:40 PM के आसपास
राधा कुंड स्नान (गोवर्धन)01 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि (12:00 AM)

1 नवंबर या 2 नवंबर ? तिथि के भ्रम का निवारण : November 1st or November 2nd ? Resolving the confusion regarding the date

कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि 01 नवंबर 2026 को दोपहर 02:51 बजे प्रारंभ होगी और 02 नवंबर को दोपहर 01:10 बजे समाप्त होगी। चूंकि अहोई अष्टमी की पूजा, व्रत कथा और तारों का अर्घ्य संध्याकाल में ही किया जाता है, और 1 नवंबर की शाम को ही अष्टमी तिथि पूर्ण रूप से व्याप्त रहेगी, इसलिए शास्त्रानुसार 01 नवंबर 2026, दिन रविवार को ही अहोई अष्टमी का उपवास रखा जाएगा।

अहोई अष्टमी का धार्मिक महत्व और राधा कुंड स्नान का संयोग : The religious significance of Ahoi Ashtami and the occasion of bathing at Radha Kund

सनातन परंपरा में अहोई अष्टमी का व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मां और संतान के अनमोल बंधन का उत्सव है। नारद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, इस दिन अहोई माता की पूजा करने से संतान पर आने वाले समस्त संकट टल जाते हैं और संतानहीन दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है।

संतान की सुरक्षा का ‘कवच’: ‘अहोई’ शब्द का एक अर्थ ‘अनहोनी को होनी में बदलना’ या ‘अशुभ को शुभ में बदलना’ भी माना जाता है। Ahoi Ashtami 2026 माताएं अपने बच्चों को हर प्रकार की बीमारी, अकाल मृत्यु और बुरी नजर से बचाने के लिए अहोई माता की शरण में जाती हैं।

राधा कुंड स्नान का अलौकिक महत्व: इस वर्ष Ahoi Ashtami 2026 का एक विशेष संयोग ब्रज क्षेत्र के गोवर्धन में स्थित ‘राधा कुंड’ स्नान से जुड़ रहा है। Ahoi Ashtami 2026 मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो, वे यदि अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि को राधा कुंड में आस्था की डुबकी लगाते हैं, तो उनका ‘पुत्र दोष’ या संतान बाधा दूर होती है और उन्हें योग्य संतान की प्राप्ति होती है।

रविवार का शुभ योग: 1 नवंबर 2026 को रविवार का दिन है, जो सूर्य देव (आरोग्य व ऊर्जा के कारक) का दिन माना जाता है। Ahoi Ashtami 2026 रविवार के दिन यह व्रत पड़ने से बच्चों के स्वास्थ्य और बुद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।

    तारों को अर्घ्य देने की परंपरा चंद्रमा की जगह तारों का पूजन क्यों : The tradition of offering arghya (libation) to the stars: Why worship the stars instead of the Moon ?

    सामान्यतः करवा चौथ या अन्य व्रतों में चंद्रोदय देखकर व्रत खोला जाता है। परंतु अहोई अष्टमी के दिन चंद्रमा का उदय बहुत देर से (रात लगभग 11:36 बजे से 11:40 बजे) होता है। इतनी देर तक माताओं के लिए निर्जला रहना शारीरिक रूप से अत्यंत कठिन हो सकता है।

    इसी कारण शास्त्रों में विधान है कि अहोई अष्टमी का व्रत सूर्यास्त के बाद आकाश में पहले तारों के दर्शन (सांझ के तारे) करके ही खोल लिया जाता है। Ahoi Ashtami 2026 तारे ब्रह्मांडीय माता की दिव्य संतान (तारागण) माने जाते हैं। Ahoi Ashtami 2026 शाम लगभग 05:22 PM से 06:00 PM के बीच जब आकाश में प्रथम तारा दिखाई दे, तब करवे या लोटे के जल से तारों को अर्घ्य देकर और संतान के हाथों से जल पीकर व्रत पूरा किया जाता है। (जो परिवार चंद्र दर्शन की परंपरा निभाते हैं, वे मध्यरात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं)।

    अहोई अष्टमी 2026 व्रत कथा साहूकार की बहू और स्याऊ माता की अमर कथा : Ahoi Ashtami 2026 Vrat Katha: The Timeless Tale of the Moneylender’s Daughter-in-law and Syau Mata

    पौराणिक कथा के अनुसार, किसी नगर में एक साहूकार रहता था। Ahoi Ashtami 2026 उसके सात बेटे, सात बहुएं और एक पुत्री थी। Ahoi Ashtami 2026 दीपावली से कुछ दिन पूर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को सातों बहुएं अपनी ननद के साथ खदान से घर लीपने के लिए मिट्टी खोदने जंगल गईं।

    अनजाने में हुआ अपराध

    जिस स्थान पर ननद खदान से खुरपी से मिट्टी खोद रही थी, वहां मिट्टी के नीचे स्याऊ (साही/सेही) अपने सात बच्चों के साथ रहती थी। Ahoi Ashtami 2026 अनजाने में ननद की खुरपी से स्याऊ का एक बच्चा कटकर मर गया। इस पर क्रोधित होकर स्याऊ माता ने कहा—”तुमने मेरे बच्चे को मारा है, इसलिए मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी।”

    छोटी बहू का महान त्याग

    ननद ने रोते हुए अपनी सातों भाभियों से विनती की कि कोई उसके बदले अपनी कोख बंधवा ले। Ahoi Ashtami 2026 सासू मां के डर और ननद के प्रति स्नेह के कारण सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो गई। इसके बाद जब भी छोटी बहू को कोई संतान होती, वह सातवें दिन मर जाती थी।

    सुरही गाय और गरुड़ पंखनी की कृपा

    सात पुत्रों की मृत्यु के बाद निराश होकर छोटी बहू ने पंडित जी से उपाय पूछा। पंडित जी ने उसे ‘सुरही गाय’ की निष्काम सेवा करने की सलाह दी। Ahoi Ashtami 2026 छोटी बहू रोज तड़के उठकर सुरही गाय के नीचे सफाई करती। सेवा से प्रसन्न होकर सुरही गाय ने पूछा “तू क्या चाहती है?” छोटी बहू ने कहा “स्याऊ माता ने मेरी कोख बांध दी है, आप उनसे मेरी कोख खुलवा दीजिए।”

    सुरही गाय छोटी बहू को लेकर सात समुद्र पार स्याऊ माता के पास चली। Ahoi Ashtami 2026 रास्ते में कड़ी धूप में दोनों एक पेड़ के नीचे रुकीं। वहां छोटी बहू ने देखा कि एक जहरीला सांप गरुड़ पंखनी के बच्चों को डंसने जा रहा है। छोटी बहू ने तुरंत सांप को मार गिराया। जब गरुड़ पंखनी आई और उसने खून देखा, तो उसे लगा कि छोटी बहू ने उसके बच्चे को मारा है। Ahoi Ashtami 2026 उसने चोंच मारना शुरू किया, लेकिन जब बच्चे ने सच्चाई बताई तो गरुड़ पंखनी अत्यंत प्रसन्न हुई और दोनों को अपनी पीठ पर बैठाकर तुरंत स्याऊ माता के पास पहुंचा दिया।

    स्याऊ माता का आशीर्वाद व उद्यापन

    वहां पहुंचकर छोटी बहू ने अहोई/स्याऊ माता की निस्वार्थ भाव से सेवा की और उनके सिर से जुएं निकालीं। प्रसन्न होकर स्याऊ माता ने आशीर्वाद दिया “तेरे घर में सात बेटे और सात बहुएं हों।” जब छोटी बहू ने अपनी बांधी हुई कोख की बात बताई, तो स्याऊ माता ने मुस्कुराकर उसकी कोख खोल दी और कहा “घर जाकर सात अहोई बनाकर उद्यापन करना और सात कड़ाई देना।” घर लौटने पर छोटी बहू को उसके सातों पुत्र जीवित मिले। उसने नियमपूर्वक अहोई माता का पूजन और उद्यापन किया।

    अहोई अष्टमी पूजन सामग्री सूची : List of items for Ahoi Ashtami worship

    अहोई अष्टमी की पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्रियों को एक दिन पूर्व ही एकत्र कर लें

    अहोई माता का चित्र या कैलेंडर: दीवार पर गेरू से बनाया गया अहोई माता का चित्र (अष्ट कोष्ठक युक्त) या छपा हुआ पोस्टर। चित्र में सेही (स्याऊ) और उसके सात बच्चों की आकृति होनी चाहिए।

    कलश और करवा: जल से भरा हुआ कलश और मिटटी का करवा (करवा चौथ में प्रयुक्त करवा भी उपयोग किया जा सकता है)।

    स्याऊ/अहोई की चांदी की माला: चांदी की अहोई का लॉकेट और चांदी के मनके (हर संतान के लिए एक-एक मनका प्रतिवर्ष पिरोया जाता है)।

    रोली, अक्षत, धूप, दीप व देसी घी: पूजा व आरती के लिए।

    भोग सामग्री: मीठे पुए, हलवा, पूरी, चीनी की मिठाई, मूली, सिंघाड़ा और गन्ने का रस।

    सप्तधान्य: सात प्रकार का अनाज जो पूजा में हाथ में लिया जाता है।

    अहोई अष्टमी की चरणबद्ध पूजा विधि :Step-by-step worship procedure for Ahoi Ashtami

    प्रातः स्नान व संकल्प: Ahoi Ashtami 2026 की सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। हाथ में जल व अक्षत लेकर संतान की लंबी आयु व आरोग्य हेतु व्रत का संकल्प लें।

    पूजा स्थल की तैयारी: उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार को साफ करके गेरू या कुमकुम से अहोई माता और स्याऊ व उसके सात बच्चों का चित्र बनाएं या बाजार से लाया कैलेंडर लगाएं।

    कलश व करवा स्थापना: अहोई माता के सामने जल से भरा कलश और कलावा बंधा करवा स्थापित करें। करवा के ऊपर कटोरी रखकर उसमें गेहूं या चावल भरें।

    चांदी की स्याऊ का पूजन: परिवार की परंपरा अनुसार चांदी की अहोई (स्याऊ की माला) को कच्चे दूध और जल से धोकर अहोई माता के साथ स्थापित करें और रोली-अक्षत का तिलक लगाएं।

    भोग अर्पण: अहोई माता को मीठे पुए, हलवा, पूरी, सिंघाड़े और मूली का भोग लगाएं।

    कथा श्रवण व मंत्र जप: हाथ में गेहूं या चावल के दाने और फूल लेकर भक्ति भाव से अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। कथा के अंत में चावल के दानों को अपनी साड़ी के पल्लू में बांध लें।

    तारों को अर्घ्य व पारण: शाम को (लगभग 05:22 PM से 06:00 PM) जब आकाश में तारे निकल आएं, तो करवे या कलश के जल से तारों को अर्घ्य दें। इसके बाद अपनी संतान के हाथों से जल और मीठा ग्रहण करके अपना व्रत खोलें।

      अहोई अष्टमी व्रत के मुख्य नियम: क्या करें और क्या न करें : Key rules for the Ahoi Ashtami fast: What to do and what not to do ?

      क्या करें (Dos)

      अहोई माता की पूजा में बच्चों को साथ बैठाएं और उनके माथे पर तिलक लगाकर आशीर्वाद दें।

      व्रत के बाद सास या घर की वरिष्ठ महिलाओं को ‘बायना’ (पूरी, हलवा, वस्त्र व दक्षिणा) देकर उनके चरण स्पर्श करें।

      संतानहीन महिलाएं इस दिन राधा कुंड स्नान करें या घर पर गंगाजल से स्नान कर व्रत रखें।

      क्या न करें (Don’ts)

      नुकीली चीजों का प्रयोग न करें: इस दिन सिलाई, कढ़ाई या चाकू, कैंची, सुई जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग सख्त वर्जित माना गया है।

      पौधों या जीवों को नुकसान न पहुंचाएं: यह त्योहार सभी जीवों की रक्षा का संदेश देता है, इसलिए मिट्टी न खोदें और जानवरों को न मारें।

      तामसिक भोजन से बचें: व्रत वाले दिन घर में प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का……..

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