Dhanteras 2026 Date, Shubh Muhurat And Puja Vidhi : कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को सनातन धर्म में Dhanteras 2026 का महापर्व अत्यंत हर्षोल्लास, पवित्रता और उमंग के साथ मनाया जाता है। इसे धनत्रयोदशी या धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। पांच दिवसीय दीपोत्सव (दिवाली महापर्व) का शुभारंभ इसी पावन दिन से होता है । Dhanteras 2026 इस दिन आरोग्य के दाता भगवान धन्वंतरि, धन एवं समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी, देवताओं के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर, विघ्नहर्ता श्री गणेश और मृत्यु के देवता यमराज का विशेष पूजन किया जाता है।
वर्ष 2026 में Dhanteras 2026 की सही तारीख को लेकर यदि आपके मन में 6 नवंबर या 7 नवंबर का कोई भ्रम है, तो यह लेख आपके सभी संदेहों को दूर करेगा। Dhanteras 2026 हम वर्ष 2026 की प्रामाणिक तारीख, पूर्णिमांत व अमांत पंचांगीय गणना, लक्ष्मी-कुबेर व धन्वंतरि पूजा का शुभ मुहूर्त, सोना-चांदी व बर्तन खरीदारी के चौघड़िया मुहूर्त, यम दीपदान की सही विधि, पौराणिक कथाएं और क्या खरीदें तथा क्या न खरीदें की पूरी जानकारी देंगे।
धनतेरस 2026: सही तिथि और पंचांगीय शुभ मुहूर्त : Dhanteras 2026: Correct Date and Auspicious Timing (Muhurat) According to the Panchang
वैदिक पंचांग की सूक्ष्म गणना के अनुसार, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में यह कार्तिक मास में पड़ता है, Dhanteras 2026 जबकि महाराष्ट्र और गुजरात की अमांत गणना में यह आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आता है यद्यपि दोनों गणनाओं में दिन और तिथि बिल्कुल एक ही होती है ।
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वर्ष 2026 में धनतेरस की तिथि, पूजा और खरीदारी के शुभ मुहूर्त का प्रामाणिक विवरण नीचे दी गई तालिका में दिया गया है….
| पंचांगीय विवरण | शास्त्रीय तिथि एवं समय (IST – भारत) |
|---|---|
| मुख्य पर्व तिथि | 06 नवंबर 2026 (दिन: शुक्रवार) |
| अन्य प्रचलित नाम | धनत्रयोदशी, धन्वंतरि जयंती, राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस |
| त्रयोदशी तिथि प्रारंभ | 06 नवंबर 2026, प्रातः 10:30 AM / 10:31 AM बजे |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | 07 नवंबर 2026, प्रातः 10:47 AM / 10:48 AM बजे |
| संध्या लक्ष्मी-कुबेर पूजा मुहूर्त | शाम 06:02 PM से रात 07:57 PM / 07:58 PM तक (अवधि: 1 घंटा 55 मिनट) |
| प्रदोष काल (नई दिल्ली) | शाम 05:32 PM से रात 08:09 PM तक |
| वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) | शाम 06:02 PM से रात 07:58 PM तक |
| यम दीपदान का समय | शाम 05:32 PM से शाम 06:51 PM तक (प्रदोष काल) |
6 नवंबर या 7 नवंबर? तिथि के भ्रम का निवारण:November 6 or November 7? Resolving the confusion regarding the date:
कई पंचांगों में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर की सुबह 10:31 बजे शुरू होकर 7 नवंबर की सुबह 10:48 बजे तक रहेगी। चूंकि धनतेरस और यम दीपदान का निर्णय सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में विद्यमान रहने वाली त्रयोदशी तिथि से किया जाता है, इसलिए Dhanteras 2026 का मुख्य उत्सव 06 नवंबर 2026, दिन शुक्रवार को ही पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। 7 नवंबर की सुबह केवल 10:48 बजे तक ही त्रयोदशी रहेगी, जिसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी….
धनतेरस 2026: सोना-चांदी, बर्तन और वाहन खरीदारी के चौघड़िया मुहूर्त : Dhanteras 2026: Choghadiya Muhurats for Purchasing Gold, Silver, Utensils, and Vehicles
Dhanteras 2026 धनतेरस पर नया सामान, धातु, बर्तन, सिक्के, झाड़ू और धनिया खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। 6 नवंबर 2026 को दिनभर खरीदारी के लिए निम्नलिखित चौघड़िया व अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे
अमृत चौघड़िया (प्रातः काल): सुबह 10:31 AM से सुबह 10:42 AM तक
अभिजीत मुहूर्त (दोपहर): सुबह 11:42 AM से दोपहर 12:26 PM तक
शुभ चौघड़िया (दोपहर): दोपहर 12:04 PM से दोपहर 01:26 PM तक
चर चौघड़िया (अपरान्ह): शाम 04:10 PM से शाम 05:32 PM तक
लाभ चौघड़िया (रात्रि): रात 08:48 PM से रात 10:26 PM तक
शुभ चौघड़िया (मध्य रात्रि): 07 नवंबर, रात 12:04 AM से रात 01:43 AM तक
विशेष नोट: राहुकाल सुबह 10:42 AM से दोपहर 12:04 PM तक रहेगा, इस समय के दौरान नए सौदों व खरीदारी से बचना चाहिए
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धनतेरस का पौराणिक इतिहास और तीन मुख्य कथाएं : The Mythological History of Dhanteras and Three Key Legends
धनतेरस Dhanteras 2026 का पर्व केवल भौतिक समृद्धि का दिन नहीं है, बल्कि इसके पीछे तीन महान पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं
1. समुद्र मंथन और भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवों और दैत्यों द्वारा अमृत प्राप्ति के लिए किए गए समुद्र मंथन के समय चौदह रत्नों के पश्चात कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे[9][28]। वे भगवान विष्णु के अवतार, देवों के चिकित्सक और आयुर्वेद के प्रणेता माने जाते हैं। उनके हाथ में पीतल का अमृत कलश होने के कारण ही इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा शुरू हुई। इसी कारण भारत सरकार धनतेरस को ‘राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस’ के रूप में मनाती है।
2. राजकुमार हिम और यम दीपदान की अमर गाथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हिम के 16 वर्षीय पुत्र की जन्म कुंडली में भविष्यवाणी थी कि विवाह के ठीक चौथे दिन सर्पदंश से उसकी मृत्यु हो जाएगी। Dhanteras 2026 उसकी नवविवाहिता चतुर पत्नी ने अपने पति के प्राण बचाने के लिए उस रात घर के मुख्य द्वार पर अपने सोने-चांदी के गहनों, सिक्कों और बर्तनों का ढेर लगा दिया और चारों ओर दीपकों की जगमगाती मालाएं जला दीं। वह रातभर अपने पति को जगाए रखने के लिए भक्ति गीत और कथाएं सुनाती रही।
जब मृत्यु के देवता यमराज Dhanteras 2026 सर्प का रूप धारण करके आए, तो गहनों की दिव्य चमक और दीपकों के कड़कते प्रकाश से उनकी आंखें चौंधिया गईं। Dhanteras 2026 वे गहनों के ढेर पर बैठकर रातभर मधुर भजन सुनते रहे और सुबह होते ही बिना प्राण लिए वापस लौट गए। तभी से परिवार की अकाल मृत्यु से रक्षा और आरोग्य के लिए त्रयोदशी की संध्या दक्षिण दिशा में ‘यम दीपक’ जलाने की परंपरा आरंभ हुई।
3. मां लक्ष्मी का प्राकट्य व कुबेर देव का प्रसंग:
Dhanteras 2026 समुद्र मंथन से ही देवी महालक्ष्मी का भी प्राकट्य हुआ था। भगवान कुबेर, जो देवताओं के धन का संरक्षण करते हैं, Dhanteras 2026 उन्हें मां लक्ष्मी का परम भक्त माना जाता है इसलिए Dhanteras 2026 की शाम मां लक्ष्मी और कुबेर देव का एक साथ पूजन कर स्थाई सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा जाता है।
धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या न खरीदें : What to buy and what not to buy on Dhanteras
धनतेरस पर खरीदी गई वस्तुओं में तेरह गुना वृद्धि होती है, ऐसी लोक-मान्यता है।
शुभ और कल्याणकारी खरीदारी (क्या खरीदें)
- सोना और चांदी: सोने-चांदी के सिक्के (लक्ष्मी-गणेश अंकित), आभूषण या बर्तन खरीदना अत्यंत शुभ है।
- पीतल और तांबे के बर्तन: भगवान धन्वंतरि की धातु पीतल मानी जाती है, इसलिए पीतल या तांबे का लोटा, थाली या कलश खरीदें। नए बर्तन को कभी खाली घर न लाएं; उसमें जल, चावल, शक्कर या मिठाई भरकर लाएं।
- लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति: दिवाली पूजा के लिए मिट्टी, पीतल या चांदी की नई लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति खरीदें।
- झाड़ू (Jhadu): झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है जो घर से दरिद्रता और नकारात्मकता को बाहर निकालती है।
- साबुत धनिया (Whole Coriander): धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदकर पूजा में चढ़ाएं और दिवाली के बाद इसे गमले में बोएं।
- गोमती चक्र, कौड़ी और सेंधा नमक: सुख-शांति और तिजोरी की समृद्धि के लिए ये छोटे घटक भी अत्यंत फलदायी हैं।
वर्जित वस्तुएं (क्या न खरीदें)
- लोहे व स्टील के धारदार सामान: चाकू, कैंची, सुई या लोहे के उपकरण खरीदने से बचें।
- कांच व प्लास्टिक का सामान: कांच राहु का प्रतीक माना जाता है और आसानी से टूटता है, इसलिए इसे न खरीदें।
- काले रंग की वस्तुएं: काले कपड़े या काली वस्तुएं नकारात्मकता का प्रतीक हैं।
- उधार लेकर खरीदारी: कर्ज लेकर सामान खरीदना शुभ नहीं माना जाता।
Dhanteras 2026 Step-by-Step Puja Vidhi (पूजा विधि)
संध्या समय प्रदोष काल (शाम 06:02 PM से 07:58 PM) के दौरान पूजा संपन्न करें…
वेदी की स्थापना: घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को साफ कर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर चौकी लगाएं।
मूर्तियों का विराजन: चौकी पर श्री गणेश, मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर (या तिजोरी) और भगवान धन्वंतरि का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। सामने खरीदी हुई वस्तुएं, सिक्के और बर्तन रखें।
पवित्रीकरण व संकल्प: हाथ में जल व अक्षत लेकर संकल्प लें और ‘ॐ गं गणपतये नमः’ से गणेश पूजन शुरू करें।
धन्वंतरि पूजन: भगवान धन्वंतरि को चंदन, अक्षत, पीले पुष्प, रोली और तुलसी पत्र अर्पित करें (गणेश जी को तुलसी न चढ़ाएं)।
लक्ष्मी व कुबेर पूजन: रोली-अक्षत से नए बर्तन, सिक्कों व तिजोरी का पूजन करें[51]। कमलगट्टा, साबुत धनिया, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
मंत्र जप व आरती: “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” और धन्वंतरि मंत्र का 108 बार जप करें[54][55]। अंत में कपूर से ‘ॐ जय लक्ष्मी माता’ आरती गाएं।
यम दीपदान की सही विधि और श्लोक (Yam Deepam Rules)
धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है
समय: 6 नवंबर 2026 की शाम प्रदोष काल (शाम 05:32 PM से 06:51 PM) में यह दीप जलाएं ।
दीपक की तैयारी: मिट्टी का बड़ा चौमुखा दीपक लें और उसमें सरसों या तिल का तेल भरें ।
स्थान व दिशा: घर के मुख्य द्वार के बाहर थोड़े से गेहूं या चावल की ढेरी पर दीपक रखें और उसकी लौ दक्षिण दिशा की ओर रखें।
यम मंत्र/श्लोक: दीपक जलाते समय हाथ जोड़कर इस श्लोक का पाठ करें
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥
धनतेरस के मुख्य शक्तिशाली मंत्र : Key Powerful Mantras for Dhanteras
गणेश मंत्र: *”ॐ गं गणपतये नमः”
धन्वंतरि मंत्र: *”ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः॥”
कुबेर मंत्र: *”ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥”
महालक्ष्मी मंत्र: “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”






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